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Adultery एक अधूरी प्यास- 2

निर्मला के कमरे का माहौल पूरी तरह से गर्म आ चुका था एक तो वातावरण में गर्मी का असर ऊपर से कमरे में गरमा गरम द्रश्य के साथ सबसे अधिक गर्म औरत निर्मला अपने सारे कपड़े उतार कर अपने बिस्तर पर एकदम नंगी लेटी हुई थी और अपने बेटे से अपने नितंबों की मालिश करा रही थी शुभम भी कुछ कम नहीं था वह अपनी कामुक हरकतों से से अपनी मां को पूरी तरह से उत्तेजित किए जा रहा था इस समय उसकी बीच वाली उंगली उसके दोनों के बीच की गहरी दरार की गहराई में धंसती चली जा रही थी,,,,शुभम के भी सांसो की गति तेज हुए जा रही थी और उसके लंड का पारा बढ़ता चला जा रहा था,,,, निर्मला की गोरी गांड सरसों के तेल की चिकनाहट से पूरी तरह से ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में चमक रही थी ,,सुभम पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था ,,वह धीरे-धीरे अपने बीच वाली उंगली को अपनी मां की गांड के भूरे रंग के छेद में घुसाता चला जा रहा था,,, और जैसे-जैसे शुभम की बीच वाली उंगली निर्मला की गांड की गहराई नाप रही थी वैसे वैसे निर्मला का बदन उत्तेजना के मारे कसमसाता हुआ ऊपर नीचे हो रहा था,, निर्मला का दिल जोरों से धक धक हो रहा था,, शुभम ने अपनी कामुक हरकतों से एक बार फिर से निर्मला के बदन में वो एहसास भर दिया था जब वह पहली बार उसकी गांड के छेद में अपना मोटा लंड डालकर उसे छल्ले के आकार का कर दिया था,,

उत्तेजना के मारे शुभम के माथे से पसीना टपकने लगा,, उसका गला सूखता चला जा रहा था,

सससहहहहह,,, आहहहहहह,,, शुभम ये क्या कर रहा है,,,

तुम मुझे फिर मजबूर कर रहा है,,,

किस लिए मम्मी,,,,

उसी के लिए जो तू चाहता है,,,

क्या तुम नहीं चाहती,,,

मैं नहीं चाहती क्योंकि मुझे बहुत दर्द करता है,,,

पर मजा भी तो देता है,,

फिर भी मुझे सब अच्छा नहीं लगता,,,

क्या अच्छा नहीं लगता,,,(शुभम धीरे-धीरे करके अपनी बीच वाली उंगली को जितना घुस सकती थी उतना घुसा दिया था और उसे गोल गोल घुमा रहा था जिससे निर्मला के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज फुटने लगी थी,,,)

सससहहहहह,,,,,, गांड मराना,,,(निर्मला एकदम सिसकते हुए मादक स्वर में बोली,,,)

हाय मेरी रानी गांड मराना इतना खराब लगता है तो तुम्हारी गांड में जब मैं अपना मोटा लंड डालकर तुम्हारी गांड मार रहा था तो क्यों गांड उछाल उछाल कर मजे ले रही थी (शुभम एकदम उत्तेजित होकर अपनी बीच वाली उंगली को अपनी मां की गांड के अंदर बाहर करता हुआ बोला,,)

आहहहहहह,,, उस दिन की बात कुछ और थी लेकिन अब मुझे डर लगता है,,,

क्यों अप क्यों डर लगता है,,,,

देखता नहीं तेरा लंड कितना मोटा है ,,,(अपना हाथ पीछे की तरफ लाकर अपनी बेटे के खड़े लंड को हाथ पकड़ते हुए बोली,,)

पर घुस तो जाता है ना,,,,

लेकिन,,,,,

लेकिन लेकिन कुछ नहीं मम्मी,,, फिर से तुम्हारी गांड मारने का मन कर रहा है,,(शुभम अपनी उंगली गांड के छेद से बाहर निकालकर दोनों हाथों में अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पकड़कर उसे फैलाते हुए बोला और इसके साथ ही अपना मुंह गांड के भूरे रंग के छेद पर डाल दिया और उसे जीभ से चाटना शुरू कर दिया बस फिर क्या था निर्मला एकदम से मदहोश होने लगी,,, और मदहोशी के आलम में उसका पूरा बदन सिहरने लगा,,उसका मन भी अपने बेटे से गांड मराने को कर रहा था लेकिन वह अपने मुंह से बोल नहीं पा रही थी बस बहाना बना कर इधर-उधर की बातें कर रही थी,,,शुभम लगातार अपनी मां को मदहोश करते हुए उसकी गांड के छेद को अपनी जीभ से चाटता रहा,,,
 
गांड के छेद को जीभ से चाटने में शुभम को नशा सा महसूस होने लगा था,,, वह पागल हुए जा रहा था ,,,

अब वह पूरी तरह से तैयार था अपनी मां की गांड में अपना मोटा लंड डालकर उसकी गांड मारने के लिए और निर्मला भी पूरी तरह से तैयार थी अपने बेटे से एक बार फिर से गांड मरवाने के अहसास से भर जाने के लिए ,,,,

शुभम अपना मुंह अपनी मां की भारी-भरकम गांड से हटाकर अपनी टी-शर्ट को निकालकर एकदम नंगा हो गया,,, अब बिस्तर पर दोनों मां-बेटे संपूर्ण नग्न अवस्था में थे,,, निर्मला जिस स्थिति में पेट के बल लेटी हुई थी उसी स्थिति में थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा उसी पोजीशन में उसके पीछे से लेने वाला है,,,,शुभम भी पूरी तरह से तैयार था पीछे से एक बार फिर से अपनी मां की लेने के लिए उसका दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि गांड मारने के एहसास से वह पूरी तरह से भर चुका था,,, शुभम अपने लिए योग्य स्थिति बनाने हेतु अपने दोनों हाथ को अपनी मां की पेट के नीचे ले जाकर उसे हल्के से उठाने लगा ताकि निर्मला घुटनों के बल होकर अपनी मद मस्त बड़ी बड़ी गांड को हवा में लहरा दे,,, जैसा शुभम चाहता था ठीक वैसा ही निर्मला ने की,, वह घुटनों के बल होकरअपने सिर को नीचे तकिए के सहारे कर दी और अपनी बड़ी बड़ी गांड को हवा में लहराने लगी ऐसा लग रहा था कि मानो कोई अपने आप को सामने वाले पक्ष की ताकत के अधीन होकर समर्पण कर रहा और अपने समर्पण स्थिति को दर्शाने के लिए हवा में पताका लहरा रहा हो,,,

अपनी मां की लहराती हुई बड़ी बड़ी गांड को देखकर शुभम एकदम उत्तेजना से भर गया,,, एक उसके पीछे वह भी घुटनों के बल बैठा हुआ था उसका लंड पूरी तरह से टन टनाकर खड़ा हो गया था मानो लोहे की छड़ हो। वह पोजीशन लेते हुए अपनी उंगलियों पर थूक लगाकर उसे अपने लंड के सुपाड़े पर रगड़ने लगा ताकि उसका लंड गीला हो जाए और गीलेपन के कारण उसका लंड आराम से उसकी मां की गांड के छेद में चला जाए,, अपनी नजर को पीछे की तरफ करके निर्मला अपने बेटे की हरकत को देखकर कसमसा रही थी ,,, वह आने वाले पल के लिए बेहद उत्सुक थी,,देखते देखते शुभम ठीक है अपनी मां के पीछे आगे जैसे ही वह एकदम पीछे आया निर्मला बोल पड़ी,,

संभाल कर बेटा,,,

तुम चिंता मत करो मम्मी कुछ भी नहीं होगा,,, बस मजा ही मजा आएगा,,,,(इतना कहने के साथ ही शुभम एक हाथ में अपना लंड पकड़ कर उसे हिलाते हुए उसके गरम मोटे सुपाड़े को अपनी मां की गांड के भूरे रंग के छेद पर टिका दिया,,

ससशससहह,,, आहहहहहह,,,, सुभम,,,,, ऊफफफफ,,,

(निर्मला अपने बेटे के मोटे लंड की गर्माहट को अपनी गांड के छेद पर महसूस करके एकदम मचल उठी.. उसके मुंह से केवल उसकी गर्म आहें निकल रही थी,,,पहले से ही शुभम ने अपनी जीत से चाट चाट कर अपनी मां की गांड के छेद को पूरा गीला कर दिया था और लंड पर भी थूक लगाकर उसे एकदम चिकना कर दिया था जिसकी वजह से धीरे-धीरे शुभम के दबाव के कारण उसका मोटा लंड का सुपाड़ा निर्मला की गांड के छेद में सरकने लगा,,,

पहले भी शुभम का मोटा लंड उसकी गांड में घुसकर उसकी गहराई नाप चुका था लेकिन फिर भी इस समय निर्मला को दर्द महसूस हो रहा था और वह अपने होंठों को दांत से काटकर अपने दर्द को छिपाने की कोशिश कर रही थी और एक हाथ पीछे की तरफ ले जाकर ना चाहते हुए भी शुभम को रोकने के लिए इशारा कर रही थी लेकिन शुभम कहां मानने वाला था,,,, घोड़ा अस्तबल से निकल चुका था,,, अब घोड़ा अपना काम किए बगैर अस्तबल में वापस लौटने वाला नहीं था शुभम उसी तरह से अपनी कमर पर जोर देकर अपने मोटे लंड का सुपाड़ा को धीरे-धीरे करके अपनी मां की गांड की उस बेहतरीन खूबसूरत कसी हुई छेद में घुसा,, दीया,,,जैसे ही शुभम के लंड का सुपाड़ा निर्मला की गांड के छेद में प्रवेश किया वैसे ही निर्मला के मुंह से एक बार फिर से गर्म चीख निकल गई,,,

आहहहहहह,,, शुभम,,,

सुभम अपनी मां के साथ मस्ती करते हुए

बस बस मम्मी होने वाला है इसके बाद मजा ही मजा है,,,

(एक बार मुंह खुल जाए तो पूरा शरीर घुसने में ज्यादा तकलीफ नहीं होती ठीक उसी तरह से शुभम भी अपने लंड के सुपाड़े को जैसे ही अपनी मां की गांड के छेद में प्रवेश कराया अगले ही धक्के के साथ ही अपना आधा लंड अपनी मां की गांड में घुसा दिया,,,,, एक बार फिर से कमरे में दर्द भरी कराह गुंजने लगी,,, लेकिन जल्द ही उसकी दर्द भरी कराह आनंददायक सिसकारीयो में बदल गई,,,

क्योंकि शुभम अब अपनी मां की मदमस्त जवानी और उसकी भारी-भरकम नितंबों पर पूरी तरह से छा चुका था, दोनों हाथ से अपनी मां की भारी-भरकम गांड को पकड़कर अपने लंड को उसकी गांड में पेलना शुरू कर दिया,,,,

हर धक्के के साथ निर्मला सूखे हुए पत्ते की तरह हवा में लहरा उठती थी,, उसकी भारी भरकम खरबूजे जैसी चूचियां पेड़ पर पके हुए आम की तरह लटक कर झूल रही थी जोकि शुभम से देखा नहीं जा रहा था और वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियां को थाम कर जबरदस्त धक्के लगाना, शुरू कर दिया,,,,।

सससहहह,,, आहहहहहह,,,,, आहहहहहह,,,, ऊफफफफ,,,ऊमममममममंं,,,,

शुभम के हर धक्के के साथ ही निर्मला के मुंह से इस तरह की आवाजें आ रही थी,,,और शुभम अपनी मां की मादक सिसकारियो की आवाज का भरपूर आनंद लेते हुए धक्के पर धक्का पेल रहा था। निर्मला को भी अब गांड मराने में आनंद आने लगा था,, इस समय एकदम दोपहर का समय था ऐसे में सोसाइटी के सभी लोग अपने अपने घरों में ठंडी हवा का आनंद लेते हुए आराम करते रहते हैं और ऐसे में निर्मला अपने बेटे के साथ गांड मरवाने का भरपूर लुफ्त उठा रही थी,,, एक शिक्षक होने के नाते और समाज में मर्यादा से नारी की छाप रखने वाली निर्मला के बारे में कोई सपनों में भी सोच नहीं सकता था कि वह इतनी गंदी औरत होगी,,,गंदी औरत इसलिए कि समाज के नजर में जो कुछ भी वह अपने ही बेटे के साथ कर रही थी वह बिल्कुल गलत था,, भले ही अपनी जरूरतों को देखते हुए उन दोनों के नजरिए में यह बिल्कुल सही था लेकिन चारदीवारी के बाहर बिल्कुल असामान्य था, समाज में निर्मला का काफी रहता था खास करके उसकी मर्यादा सीन और संस्कारी होने के कारण वह कुछ ज्यादा ही इज्जत दार महिला थी,,

लेकिन जिस समाज में वह इज्जत की हकदार थी मर्यादा सील के रूप में जिसे पूजा जाता था,,, स्कूल में चीज का इतना रुतबा था इतनी इज्जत थी उन लोगों को क्या मालूम कि चारदीवारी के अंदर वह क्या गुल खिलाती है,,,

निर्मला अपने बेटे को मस्त करते हुए

उन समाज के लोगों को क्या मालूम जिसके चरित्र को लेकर आज तक कभी कोई उंगली नहीं उठी थी वह अपने ही घर में अपने कमरे में अपने बेटे के साथ गांड मरवाने का सुख भोग रही थी,,, लेकिन निर्मला जैसी थी आज भी समाज में उसकी उतनी इज्जत और उतना ही आहो भाव था क्योंकि दुनिया की नजर में अभी वह गलत साबित नहीं हुई थी ना तो उसे गलत करते हुए किसी ने देखा था,,, लेकिन यह सब छुपाए ज्यादा दिन तक छुपता नहीं है इसलिए ऐसा लग रहा था कि तुम दोनों के साथ आज कुछ और ही लिखा गया था क्योंकि जिस समय निर्मला एकदम नंगी होकर अपने बेटे की भरपूर जवानी के नंगे पन को मर्दानगी भरी धक्कों से अपनी गांड मरवा रही थी,,,, उसी समय पड़ोस में आई हुई शीतल दिन में समय ना कटने की वजह से उससे मिलने के लिए उसके घर आ रही थी,,, उसके घर के गेट के पास आकर शीतल खुद ही अपने हाथों से गेट खोल दी,,, और अंदर आने लगी सीकर के किस्मत तेज का हो या निर्मला की बदकिस्मती घर का दरवाजा भी खुला हुआ था मात्र ऊसे बंद किया गया था जो कि जल्दबाजी में ना तो निर्मला ने और ना ही शुभम ने दरवाजे को लोक नहीं किया था,,,

जब कुछ बुरा होने वाला रहता है तो बना बनाया काम भी बिगड़ जाता है कुछ ऐसा ही निर्मला के साथ हो रहा था और जब किस्मत अच्छी होती है तो सब कुछ अच्छा होता चला जाता है ना चाहते हुए भी अपने सामने आने वाले बंद दरवाजे भी खुद ब खुद खुल जाते हैं ऐसा ही कुछ शीतल के साथ हो रहा था,,, एक अच्छी खांसी सहेली होने के नाते उसका इतना तो हक बनता था कि दरवाजा खुला देखकर बिना दरवाजे पर दस्तक दिए कमरे में दाखिल हो सके और उसने वही की दरवाजे पर दस्तक दिए बिना ही कमरे में दाखिल हो गई और खुद ही दरवाजे को बंद करके उसे लॉक कर दी,,
 
दूसरी तरफ इस बात से अनजान किसी तरह घर में प्रवेश कर चुकी है दोनों मां-बेटे बिस्तर पर एकदम नंगे होकर एक दूसरे की जवानी को लूट रहे थे,,, निर्मला पर पूरी तरह मदहोशी छाई हुई थी,,, और शुभम पूरी तरह से पता वास हो चुका था उसे दोनों तरफ से मजा लेना था क्योंकि,,,जिस समय से सुभम का मोटा लंड निर्मला के गांड में दस्तक दे रहा था उसी समय निर्मला अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाकर जोर-जोर से अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों को मसल रही थी जिसे देखकर शुभम समझ गया कि इसकी बुर में भी खुजली हो रही है,, इसलिए वह अपना लैंड अपनी मां की गांड में से निकाल कर उसे थोड़ा सा नीचे ले जाकर उसके गुलाबी पुर में डाल दिया और उसे अंदर बाहर करके उसकी बुर चोदने लगा,,, इससे निर्मला का भी मजा दोगुना होता जा रहा था,,वह ,पागलों की तरह अपने मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज निकालते हुए अपने बेटे को उकसाने लगी,,

सुभम निर्मला की लेते हुए

यस,,,,, यस ,,,,,,बेटा ऐसे ही ऐसे ही जोर-जोर से,,,आहहरहह,,, बहुत मजा आ रहा है मेरे राजा ऐसे ही ऐसे करता रे, आहहहह,,,ऊमममम,,,,,

मुझे भी बहुत मजा आ रहा है मेरी रानी देख तुझे किसी रंडी की तरह चोदता हूं,, साली गांड भी बहुत मस्त मरवाती है तू,,,,आहहररह,,, एकदम रंडी है तु छिनार,,,,आहहह,,,

तू भी तो मादरचोद ही रे भोसड़ी वाले,,, अपनी ही मां को चोद रहा है,,,,

हां चौद रहा हूं तो,,,, इसमें हर्ज ही क्या है जब घर में इतनी मस्त माल हो तो लड़का तो घर में ही चोदेगा ना,,,

मस्त माल हो तो इसका मतलब अपनी मां पर ही चढ जाएगा,,,

जब पूरे घर में इतनी बड़ी बड़ी गांड को हिलाते चलोगी तो किसी भी बेटे का लंड हिचकोले खाएगा,,,,

तू पक्का मादरचोद है,,, ऐसे चल रहा है जैसे किसी रंडी को चोद रहा है,,,

तू किसी रंडी से कम है क्या अपने बेटे का लंड अपनी बुर और गांड दोनों में ले रही है,,,,

तो इसमें मेरी गलती नहीं तेरे बाप की गलती है जिसका खड़ा ही नहीं होता,,,वह तो मेरा एहसान मान कि तुझे जवानी के दिनों से ही अपनी बुर का स्वाद चखा कर तुझे बड़ा कर दिया,,, वरना बाथरूम में जाकर मुठ मारना पड़ता,,,

तू भी साली मेरा एहसान मान के मेरा मोटा लंड से चुदवाकर मस्त हो गई वरना इधर उधर मुंह मारती फिरती ना जाने किस किस का अपने अंदर लेकर रोज मजे लेती और फिर भी तुझे इतना मजा नहीं आता जितना कि मेरे लंड से आ रहा है,,,।

अच्छा तो तुझे बहुत घमंड है अपने लंड पर तो मैं देखती हुं कितना अच्छा चोद पाता है,,, साली माधर्चोद दिखा अपनी ताकत मैं भी देखती हूं कि तू कितना बड़ा चुदक्कड़ है,,,

अच्छा तो तू मेरी ताकत देखना चाहती है मेरे लंड की ताकत तो देख तेरी चूत का भोसड़ा ना बना दिया तो मेरा नाम शुभम नहीं,,,,(इतना कहने के साथ ही सुभम अपने धक्को की रफ्तार को तेज कर दिया,,,इसी के साथ निर्मला भी अपनी पूरी ताकत के साथ अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे की तरफ धकेलने लगी,, दोनों किस तरह की गंदी बातों में बेहद आनंद मिलता था और तब जब वह दोनों एक दूसरे में समाने के लिए पूरी तरह से तैयार होकर चुदाई का खेल खेल रहे हो,,, दोनों स्तर की गंदी बातें करके एक दम मस्त हो चुके थे साथ ही दोनों की उत्तेजना भी अत्यधिक बढ़ चुकी थी,, शुभम पागलों की तरह अपनी मां की बुर में अपना लंड पेल रहा था,,,वह बार-बार अपनी निगाहों को नीचे करके अपनी मां की गांड की भूरे रंग के छेद को देख ले रहा था जो कि एकदम छल्ले की तरह हो चुका,,था। उछलने को देख कम से रहा नहीं जा रहा था और वहां अपने लंड अपनी मां की दूर में से बाहर निकाल कर फिर से गांड के छेद में डाल दिया और उसे चोदना शुरू कर दिया लगातार सुभम की हरकत जारी थी कभी वह गांड में लंड डालता था तो कभी उसमें से निकाल कर फिर से उसकी बुर में पेल देता था,,, सुभम कि ईस तरह की हरकत की वजह से निर्मला एकदम मस्त हो गई थी दोनों आनंद विभोर हो चुके थे,, शुभम अपनी मां के दोनों छेद की एक साथ चुदाई कर रहा था,,, कभी बुर में डालता तो कभी गांड में,,,

यह शुभम के साथ-साथ निर्मला का भीतरिया इमरान हाशमी शुभम अपने लंड को अपने गांव में डालकर उसे चुदाई का आनंद ले रहा था तो कभी बुर में पेल कर उसकी खुजली मिटा रहा था,,,,दोनों चुदाई का भरपूर आनंद ले रहे थे इस बात से बेखबर कि उनके दरवाजे के बाहर ही तूफान आने के लिए बेकरार खड़ा है,,,, शीतल धीरे-धीरे निर्मला के कमरे की तरफ आगे बढ़ रही थी और चारों तरफ अपनी नजरें घुमा कर देख रही थी कि घर में इतना सन्नाटा क्यों है कोई घर में है कि नहीं और घर का दरवाजा भी खुला था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है वह धीरे-धीरे निर्मला के कमरे की तरफ आगे बढ़ रही थी,,,

जैसे-जैसे शीतल निर्मला के कमरे की तरफ आगे बढ़ रही थी वैसे वैसे ही निर्मला की मदहोशी और शुभम की बदहवासी बढ़ती जा रही थी,,, शुभम निर्मला की गांड के साथ-साथ उसकी बुर भी मार रहा था,,,निश्चिंत होकर निर्मला अपने बेटे की चुदाई से भरपूर आनंद लेते हुए गरमा-गरम सिसकारी की आवाज अपने मुंह से निकाल रही थी,,,

निर्मला सीढ़ियों पर चढना शुरू कर दी थी,,, सीढ़ियो पर पैर रखते ही निर्मला के कानो में हल्की हल्की आवाज आना शुरू हो गई,,, लेकिन शीतल समझ नहीं पा रही थी की आवाज कैसी है,,,,, जैसे-जैसे सीढ़ियों पर वह कदम बढ़ाते हुए आगे बढ़ रही थी वैसे वैसे उसके कानों में आवाज की ध्वनी तेज होती जा रही थी,,, अब शीतल का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि उसे समझते देर नहीं लगी कि यह किसी औरत की चुदाई से भरपूर आनंद की आवाज थी ,,गरम सिसकारी कि आवाज थी,,, अब वह पूरी सीढ़ियां चढ़ चुकी थी सीढ़ियों से महज 10 कदम की दूरी पर निर्मला का कमरा था जहां से सिसकारी की आवाज साफ सुनाई दे रही थी,,,,। अब शीतल को समझते देर नहीं लगी कि निर्मला कमरे के अंदर चुदवा रही है,, ऐसे हालात में शीतल को वहां से चले जाना चाहिए,, एक टीचर होने के नाते और एक औरत होने के नाते शीतल का फर्ज बनता था कि किसी को इस तरह के खास करके पति पत्नी की संभोग रत नहीं देखना चाहिएं यही एक अच्छी संस्कारी औरत की निशानी होती है,, और शीतल भी यही करना चाहती थी लेकिन उसके मन में जिज्ञासा पैदा होने लगी ,कौतुहल जगने लगी,,, इस तरह की गरम सिसकारी की आवाज सुनकर शीतल वहां से चले जाना चाहती थी लेकिन उसका मन नहीं माना वह देखना चाहती थी कि जब एक मर्यादाशील संस्कारी औरत अपनी बुर में लंड लेती है तो उसके चेहरे का हाव भाव किस तरह से बदलता है और यही देखने की लालच वह रोक नहीं पाई,, और निर्मला के कमरे की तरफ कदम आगे बढ़ा दी,,,

अंदर घमासान चुदाई चालू थी शुभम कभी अपनी मां की गांड में लंड डालता तो कभी उसकी बुर में डालता ,दोनों छेद एक साथ एक समान मजा दे रहा था जिससे निर्मला उत्तेजना के सागर में डूबने लगी उसके गाल उत्तेजना के मारे लाल हो गए,,, दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे,,,

दूसरी तरफ सीतल निर्मला के कमरे के ठीक बाहर खड़ी थी दरवाजे पर दस्तक देने की देरी थी कि सारा मजा किरकिरा हो जाता,,,लेकिन वह ऐसा नहीं करना चाहती थी वह कमरे में अंदर देखने के लिए खिड़की ढूंढ रही थी लेकिन खिड़की कहीं उसे नजर नहीं आई तो वह दरवाजे की की होल से देखने के लिए जैसे ही दरवाजे पर अपना हाथ रखी दरवाजा हल्का सा खुलने लगा जिसे देखकर शीतल को समझते देर नहीं लगी की दरवाजा लॉक नहीं है,,, वह मन बहुत प्रसन्न हुई क्योंकि अब निर्मला की तेज सिसकारियो की आवाज उसे साफ सुनाई दे रही थी,,, उसे अब तक नहीं लग रहा था कि निर्मला कमरे के अंदर अपने पति से चुदवा रही हैं,,,, लेकिन जब उसके कानों में निर्मला की गर्म सेस कार्यों की आवाज के साथ-साथ शुभम का नाम सुनाई दिया तो उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक ती हुई महसूस होने लगी उसे अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ उसे ऐसा लगा कि उसे वहम हुआ है लेकिन बार-बार ऊसके कानो में सुभम का नाम सुनाई दे रहा था,,,

ओहहहह ,,,शुभम मेरे बेटे,,,,, ऐसे ही चोद,,,,,आहहहहहह, तु फाड़ दे मेरी बुर को मेरे बेटे शुभम ,,,,,,मेरा राजा जल्दी जल्दी कमर हिला,,,आहहहहहह,,,,

(निर्मला के मुंह से शुभम का नाम सुनकर शीतल की हालत खराब होने लगी उसे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था अब उसे कमरे में देखने की जल्दबाजी और बढ़ गई थी,, इसलिए वह हल्के से दरवाजे को थोड़ा सा खोल कर अंदर की तरफ देखने लगी,,, अंदर का नजारा बिल्कुल साफ नजर आ रहा था कि लाइट की रोशनी पूरे कमरे में फैली हुई थी कि तभी शीतल की आंखों के सामने वह नजारा नजर आया जिसके बारे में कभी कल्पना भी नहीं कर सकती थी हालांकि इस तरह की कल्पना अपने साथ शुभम को लेकर कर चुकी थी लेकिन जो उसकी आंखें देख रही थी इस बारे में कभी वो सपने में भी सोच नहीं सकती थी,,,

बिस्तर पर का नजारा देख कर उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसकने लगी,, उसकी आंखें फटी की फटी रह गई नजारा भी बेहद रोमांचक और गरमा गरम था,, निर्मला घोड़ी बनकर एकदम नंगी कितनी गाना हवा में लहरा कर हाथ की कोनी के सहारे झुकी हुई थी और उसके ठीक पीछे उसका बेटा शुभम एकदम नंगा अपनी मां की बुर में लंड डालकर खड़ा था और अपनी कमर को जोर-जोर से हीला रहा था,,,

शीतल का वजूद पूरी तरह से हिल गया जब वह एक बेटे को अपनी मां को चोदते हुए देखा,, और एक मां की अपने बेटे को जोर जोर से चोदने के लिए बोल रही थी यह देख कर शीतल की हालत बुरी तरह से खराब हो गई,,,,

उसे अभी भी अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था उसे ऐसा लग रहा था कि वह कोई सपना देख रही है क्योंकि उसकी आंखों के सामने जो नजारा दीख रहा था उस पर विश्वास कर पाना एक औरत के लिए तो बेहद मुश्किल था,,, लेकिन जो नजारा उसकी आंखें देख रही थी वही सच्चाई थी,,, और बहुत ही जल्द अपने आप को संभाल कर शीतल इस सच्चाई से वाकिफ होते हुए कमरे के अंदर के नजारे का आनंद लेने लगी। उसे साफ दिखाई दे रहा था कि दोनों बेहद आनंदित होकर चुदाई का मजा ले रहे थे,,,

शुभम इतना मदहोश हो चुका था कि उसकी आंखें बंद हो चुकी थी लेकिन फिर भी वह अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को अपने दोनों हाथों से थामैं अपनी कमर जोर जोर से हिला रहा था,,,,, शीतल के लिए इतना काफी था उत्तेजना के मारे उसका भी गला सूखने लगा,, जिंदगी में पहली बार अपनी आंखों के सामने एक औरत और एक मर्द को चुदाई करते हुए देख रही थी,, शीतल बहुत ही संभाल कर दरवाजे को मात्र इतना ही खोली थी कि जहां से उसे कमरे का पूरा नजारा दिखाई दे रहा था,,,

निर्मला से पुरानी दोस्ती होने के बावजूद भी ईतना तो वह जानती थी कि निर्मला खूबसूरत है लेकिन आज उसे पहली बार एकदम नंगी देख कर उसे इस बात का एहसास हुआ कि निर्मला दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत है,,

शुभम द्वारा लगाए गए जबरदस्त धक्को को देखकर शीतल का वजूद डोलने लगा,,, उसका मन मचलने लगा क्योंकि जिस तरह से शुभम अपनी मां की चुदाई कर रहा था वह बेहद लुभावना द्रश्य था,, शुभम की ऊस हरकत को देखकर शीतल की टांगों के बीच की हलचल बढ़ जा रही थी जब वह अपना पूरा लंड निर्मला के बुर से बाहर निकाल कर केवल लंड़ के सुपाड़े का आगे वाला भाग हल्का सा उसमें रहने देता ओर फिर जोरदार धक्का मारकर ऊसे बुर के अंदर तक पहुंचा देता था,,,यह नजारा देखकर शीतल अंदर तक सिहर उठी उसका मन मचलने लगा शुभम के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए,,, शीतल को और ज्यादा झटका तब लगा जबशुभम अपने लंड को अपनी मां की बुर से पूरा बाहर निकाल कर उसकी गांड के छोटे से छेद में डाल दिया और जैसे ही लंड उसकी गांड के छेद को चीरता हुआ अंदर गया निर्मला के मुंह से आह निकल गई,, यह नजारा देखते ही शीतल की पेंटी पूरी गीली हो गई क्योंकि उसने अब तक मात्र सुनी भर थी की ओरते गांड मरवाती है लेकिन आज वह अपनी आंखों से देख रही थी ,,, और वह भी ऐसे औरत को जिसके बारे में वह कभी सपने में सोच भी नहीं सकती थी,,,,

गरम सिसकारियो की आवाज अभी भी पूरे कमरे में गूंज रही थी,,,

सशरहहह ,,,आहहहहहह,, मेरे राजा बहुत मजा आ रहा है तेरा लंड है की मुसल गांड के साथ-साथ मेरी बुर की भी हालत खराब कर दे रहा है,,,,,सहहहहह ,,,आहहहहहहह,,,

इसी को तो लंड कहते हैं मेरी रानी तेरे पति जैसा नहीं की बुर में जाए तो भी पता ना चले कि क्या गया है,,

(उन दोनों की बात सुनकर तो शीतल का माथा चकराने लगा वह दोनों पूरी तरह से एक मर्द और औरत की तरह बर्ताव कर रहे दोनों को देखकर बिल्कुल भी पता नहीं चल रहा था कि दोनों मां बेटे हैं,, और यह देखकर शीतल की हालत खराब हो जा रही थी उसका तो मन कर रहा था कि इसी समय कमरे में चली जाए और वह भी बीच में कूद जाए और इसी समय सुभम के लंड को अपनी बुर में लेकर अपनी प्यास बुझा ले लेकिन वह अपने आप को रोके रही,,,

उसे आए 15 मिनट हो चुके थे लेकिन इन 15 मिनट में एक भी बार ऐसा नहीं लगा कि सुभम का पानी निकलने वाला है वह उसी रफ्तार से अपनी मां की चुदाई कर रहा था उसकी इस मर्दाना ताकत को देखकर शीतल की बुर पानी पानी हो गई,,,,, दोनों में से अभी तक किसी की भी नजर दरवाजे पर नहीं पड़ी थी,,,, दोनों मां बेटे की चुदाई का दृश्य देखकर शीतल के दिमाग की बत्ती जलने लगी वह तुरंत अपने पर्स में से अपना मोबाइल निकाल कर दोनों का वीडियो शूट करने लगी क्योंकि अब उसे अपनी मंजिल बेहद करीब होती नजर आ रही थी क्योंकि वह अब इस वीडियो के सहारे शुभम से बिना रोक-टोक की चुदाई का सुख भोग सकती थी,, वह अपनी मोबाइल में वीडियो बनाने लगी कि तभी निर्मला उसे अपने ऊपर से दूर हटने का इशारा की क्योंकि अब वह पोजीशन लेना चाहती थी,,, देखते ही देखते शुभम पीठ के बल बिस्तर पर लेट गया और निर्मला पोजीशन लेकर उसके ऊपर आ गई और अपने हाथ से अपनी बेटे के लंड को पकड़कर अपनी बुर में डाल दी और खुद ऊपर नीचे होने लगी,,, यह देखकर शीतल के होठों पर कामुक मुस्कान तैरने लगी वह समझ गई कि निर्मला जैसी दिखती है वैसी बिल्कुल भी नहीं है,,, घर के बाहर ऐसी रहती है कि जैसे सती सावित्री हो और घर के अंदर रति बनकर संभोग सुख भोग रही है,, लेकिन कुछ भी हो शीतल को तो अपना काम बनता हुआ नजर आने लगा,,,

जैसे-जैसे निर्मला अपने बेटे के लंड पर कूद रही थी वैसे वैसे उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां हवा में झूल रही थी जिसे तुरंत शुभम अपना दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी हथेली में भरकर उसे जोर जोर से दबाने लगा,,, एक बार फिर से शीतल की गरम सिसकारियो की आवाज पूरे कमरे में गुंजने लगी,,, शीतल का भी दिल जोर-जोर से धड़क रहा था अपनी आंखों के सामने के गर्म नजारे को देख कर उसका मन डोलने लगा वह अपने हाथ से ही कभी अपनी चूची को दबा देती तो कभी साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर को मसल दे रही थी ,,, और लगातार मोबाइल से वीडियो बना रही थी,,,

थोड़ी ही देर बाद दोनों की सांसो की गति तेज होने लगी साथ ही निर्मला की गरम सिसकारीयों की आवाज भी तेज हो गई,,, दोनों झड़ने वाले थे कि तभी मदहोशी के आलम में इधर-उधर अपना बदन हिलाते हुए निर्मला की नजर दरवाजे में से झांक रही शीतल पर पड़ गई उसके तो होश उड़ गए ,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें क्योंकि यह पल कैसा पल था जिसमें दुनिया को भूल जाना पड़ता है बेहद सुख की अनुभूति पाने के लिए सब कुछ भूल जाना पड़ता है,,,,, निर्मला चरमसुख के बेहद करीब थी या युं कहलो की उसको चरम सुख प्राप्त होने ही वाला था,,, ऐसे में वह रुक जाए ऐसा संभव बिल्कुल भी नहीं था वह दरवाजे की तरफ देखती रही और अपने बेटे के लंड पर कूदती रही,,, शीतल भी जान गई थी कि निर्मला उसे देख चुकी है,,,बदहव्सी और मदहोशी के आलम में निर्मला का मुंह खुला का खुला रह गया था अपनी आंखों के सामने वह शीतल को दरवाजे पर खड़ी होकर ऊन दोनों मां बेटे की चुदाई देखती हुई देख रही थीं,,, नीचे से शुभम जोर जोर से अपनी कमर को ऊपर की तरफ फेंक रहा था वह भी झड़ने वाला था,,,, निर्मला अभी भी अपने बेटे के लंड पर कुदते हुए शीतल की तरफ देख रही थी,, लेकिन चरम सुख के उस परमसुख को वह खोना नहीं चाहती थी,,, शुभम की आंखें अभी भी बंद थी तो अपनी आंखों को बंद किए हुए ही जोर जोर से धक्के लगा रहा था ,,,शीतल का काम हो गया था अब और ज्यादा निर्मला को शर्मिंदा नहीं करना चाहती थी इसलिए वहां से धीरे से खिसक ली,,, लेकिन जाते-जाते भी उसे अपने कानों में निर्मला की गर्म सिसकारीर्यों की आवाज सुनाई दे रही थी,,,,
 
शीतल के जाने के बाद भी निर्मला अपने बेटे के लंड पर कुदना जारी रखी,,, और तब तक कुदती रही जब तक कि दोनों झड़ नहीं गए,,,

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वासना का तूफान थम चुका था सुभम ने एक बार फिर से अपनी मां की मदमस्त जवानी पर फतेह पाते हुए अपनी जीत का झंडा गाड़ दिया था,,, शुभम गहरी गहरी सांसे लेते हुए अपनी आंखों को मूंदकर उस जबरदस्त अतुल्य पल में खो चुका था,,, एक तरफ शुभम के चेहरे पर संतुष्टि भरा एहसास था तो दूसरी तरफ निर्मला के चेहरे पर चरम सुख पाने की तृप्ति के साथ साथ चिंता भरी लकीरें भी साफ नजर आ रही थी,,,,। उसके सामने अब हजार सवाल खड़े हो गए थे जिनमें से निकलने का कोई रास्ता उसे नजर नहीं आ रहा था,,,, उसे अपनी गलती पर पछतावा भी हो रहा था लेकिन अब पछताने से कुछ होने वाला नहीं था तीर कमान से निकल चुका था और ठीक शीतल के द्वारा निशानी पर ही लगा था,,,,

निर्मला भी गहरी गहरी सांसे ले रही थी चिंताओं के बादल तो उमड़ रहे थे लेकिन सावन की बूंदे अभी भी बरस रही थी,,, शुभम का मोटा तगड़ा लंड अभी भी उसकी मां की बुर के अंदर हरकत कर रहा था रह रहे थे उसमें से गरम पानी की बूंदे निकल रही थी जो कि इस समय निर्मला की बुर को पूरी तरह से भर दी थी। पानी निकलने के बावजूद भी शुभम का मोटा तगड़ा जबरजस्त लंड अभी भी पूरी तरह से खड़ा था ,,,बस उसमें हल्का-हल्का ढीलापन आ रहा था,,, लेकिन फिर भी इस अवस्था में अभी सुबह किसी भी औरत की जबरदस्त चुदाई करने में सक्षम था,,, निर्मला एकदम शांत अपने बेटे के लैंड पर बैठी हुई थी कोई और समय होता तो शायद इस अनमोल पल का भरपूर फायदा उठाती लेकिन एक बार बार चरम सुख को प्राप्त कर चुकी थी लेकिन यह चरम सुख के साथ-साथ उसे चिंताओं का दुख भी मिल चुका था अब आगे क्या होगा यह तो भगवान ही जानता था। अपनी गलती पर उसे बार-बार बहुत गुस्सा आ रहा था और अपने बेटे शुभम पर भी जो कि इस समय उसे जबरदस्त चुदाई का सुख देकर मस्ती में नींद की आगोश में जा रहा था,,,, वह मन ही मन सोच रही थी कि अगर वह घर का दरवाजा बंद करना भूल भी गई थी तो शुभम को तो कमरे का दरवाजा बंद करना था लेकिन ऐसे तो बस चुदाई चुदाई चुदाई नहीं दिखाई देती है एक बार इसे इतना समझा चुकी थी फिर भी वह नहीं माना और अपनी एक गलती के कारण जिंदगी बर्बाद कर दीया,,, अगर यह कमरे का दरवाजा भी बंद कर लेता तो आज यह सब ना होता जो कुछ हो चुका है,,, निर्मला यह सब बातें अपने मन में सोच रही थी अपने आप से ही बातें कर रही थी आज उसे अपने बेटे पर बहुत गुस्सा आ रहा था,,, लेकिन वह अपने बेटे को इस बात का एहसास भी नहीं होने देना चाहती थी कि शीतल ने हम दोनों को चुदाई करते हुए देख ली है,, इसलिए वह भी मन से अपने बेटे के खड़े लैंड पर से धीरे-धीरे अपनी गांड उठा कर उसे अपने बुर से बाहर निकालते हुए बिस्तर से नीचे खड़ी हो गई,,,, वह उसी तरह से एकदम नंगी ही अपने कमरे से बाहर निकल गई और बाथरूम में चली गई जहां पर जाकर वहां ठंडे पानी से अपने बुर को अच्छे से साफ करी,,,

एक तरफ आंखों से आंसू बह रहे तो तो दूसरी तरफ खुशियों के जाम छलक रहे थे,,, शीतल अपनी फ्रिज खोल कर उसमें से कोल्ड्रिंक्स निकाल कर पी रही थी और मन ही मन खुश हो रही थी,,,, क्योंकि आज ऐसा लग रहा था कि जैसे भगवान ने उसका दामन खुशियों से भर दिया हो मुंह मांगी मुराद पूरी हो गई हो,, शीतल बहुत खुश थी वह कोल्ड ड्रिंक पीकर उसे वापस फ्रीज में रख कर ड्राइंग रूम में आकर कुर्सी पर बैठ गई और सारी घटनाओं के बारे में सोचने लगी,,,, वजह सोच रही थी कि अच्छा ही हुआ कि आज दिन में शीतल के घर चली गई वरना शीतल का इतना बड़ा राज वह कभी अपनी आंखों से देख नहीं पाती जिसे आज तक वह कभी सपने में सोच भी नहीं सकती थी,,,

उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि जो कुछ भी उसकी आंखों ने देखा है वह सच है क्योंकि शीतल के बारे में इस तरह का सोचना भी पाप था क्योंकि शीतल बेहद मर्यादा सेल और संस्कारों से भरी हुई औरत थी क्योंकि यह बात पूरा समाज पूरी स्कूल जानता था और एक सहेली होने के नाते शीतल बहुत ही अच्छी तरह से निर्मला से अवगत थी लेकिन आज की दिन वाली घटना ने शीतल के ख्यालों को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि निर्मला इस तरह से चुदवाती है और तो और एक मां होकर अपने ही बेटे का लंड अपनी बुर में लेकर कितनी मस्ती के साथ चुदवा रही थी यह नजारा अपनी आंखों से देख पाना ही सीतल के लिए बेहद रोमांचकारी था,,, शीतल कुर्सी पर बैठे बैठे अपने आप से ही सवाल करते हुए बोली क्या सच में एक मां अपने बेटे से इस तरह से चुदवा सकती है क्या उसे जरा भी शर्म नहीं आई अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड़ को अपनी नंगी बुर के अंदर लेने में और तो और पूरी तरह से एकदम नंगी होकर अपने बेटे के ऊपर चढ़कर इस तरह से चुदवाने में क्या निर्मला को बिल्कुल भी झिझक नहीं हुई,,,, अगर यह शीतल का मात्र ख्याल पर होता तो इसका जवाब शायद उसके पास नहीं था लेकिन यह हकीकत थी जिसे वह अपनी आंखों से प्रत्यक्ष रूप से देख चुकी थी और उसे अपने मोबाइल में कैद भी कर चुकी थी इस बात का ख्याल आते ही वह अपने पर्स से मोबाइल निकाल कर उस बेहतरीन जबरदस्त नजारे को एक बार फिर से अपने मोबाइल की स्क्रीन पर देखने लगी जिसमें निर्मला खुद अपने बेटे शुभम के मोटे तगड़े लंड पर अपनी बड़ी बड़ी गांड रखकर उसके लंड पर उछाल रही थी और जोर-जोर से गर्म सिसकारी भर ले रही थी,,,। शीतल मोबाइल पर निर्मला की रंगीन काली करतूत को देखकर मन ही मन खुश हो रही थी क्योंकि वह जानती थी कि इसी के सहारे वह अपनी मंजिल को पा सकती हैं । शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी भी बुर में लेकर वह तृप्त हो सकती है,,,, मोबाइल की स्क्रीन पर शीतल निर्मला के छिपे हुए चेहरे को देख कर यकीन नहीं कर पा रही थी कि यह वही निर्मला है जो कि बार-बार संस्कारों और मर्यादा में रहने की डींगए हांका करती थी,,, उसे वह दिन याद आ गया जब इसी तरह से एक दिन वह क्लास में शुभम के मोटे लंड को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी और उसी समय निर्मला आ गई थी तो वह शीतल को कितना भला बुरा खरी-खोटी सुनाई थी शीतल निर्मला के इस व्यवहार से इतना शर्मिंदा हुई थी कि वह अपने आपकी नजरों में गिरती हुई महसूस कर रही थी आईने में अपने चेहरे से नजर नहीं मिला पा रही थी,,, लेकिन आज उसी मर्यादा सीन संस्कारों से भरी हुई औरत का नया रूप देखकर शीतल मन ही मन प्रसन्न हो रही थी उसे महसूस हो रहा था कि अब वह शुभम से आराम से चुदवा सकती है और संभोग का भरपूर आनंद ले सकती है,,,, अब निर्मला और शुभम दोनों उसे अपनी मुट्ठी में आते हुए महसूस होने लगे थे उसे पक्का यकीन था कि इस वीडियो के जरिए और जो कुछ भी उसने अपनी आंखों से गरमा गरम नजारा देखा है उससे वह शुभम को पूरी तरह से अपना बना सकती हैं आप निर्मला को इसमें जरा भी दिक्कत नहीं होगी और ना तो उसे कोई परेशानी होगी,,,, क्योंकि वह अपनी इज्जत बचाने के लिए कुछ भी कर सकती हो और उसे ज्यादा कुछ तो करना नहीं था बस जो कुछ भी अपने बेटे के साथ कर रही थी वही क्रिया शुभम के द्वारा उसे अपने साथ करना था यह ख्याल मन में आते ही शीतल के चेहरे पर कामुक मुस्कान तैरने लगी,,,
 
लेकिन एक पक्की सहेली होने के नाते उसे इस बात का भी एहसास था कि वह ऐसा कुछ भी नहीं करेगी जिससे निर्मला की इज्जत पर कोई आंच आए जो कुछ भी होगा वह बड़े आराम से संभाल लेगी,,,, इस बात का हुआ दृढ़ निश्चय करके मोबाइल में एक बार फिर से दोनों मां-बेटे की जबरदस्त चुदाई के दिल से देखकर पूरी तरह से कामुकता के ज्वर में जलने लगी और खुद ही अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर अपनी दो उंगली एक साथ अपनी गीली बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करने लगी,,, शीतल का ड्राइंग रूम उसकी गर्म सिसकारी से गुजरने लगा,,,, और देखते ही देखते अपनी दो उंगली के द्वारा ही वह चरम सुख को प्राप्त कर ली,,,

धीरे-धीरे शाम ढलने लगी थी और निर्मला का मन काम में बिल्कुल भी नहीं लग रहा था वह अभी भी कुर्सी पर बैठकर दिन वाली बात के बारे में सोच रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसे इस बात का डर था कि सीतल कहीं किसी को भी इन दोनों मां-बेटे के रिश्ते के बारे में बता दी तो उन दोनों का क्या होगा वह तो जीते जी मर जाएगी समाज में जितना रुतबा इज्जत उसने कमाई है सब मिट्टी में मिल जाएगी स्कूल में हो सकता है नौकरी से भी हाथ धोना पड़े समाज में कितनी बड़ी बदनामी होगी यही बात सोच सोच कर उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था उसे कमजोरी महसूस हो रही थी वह उसी तरह से कुर्सी पर बैठी हुई थी,,

और दूसरी तरफ शीतल के मन में लड्डू फूट रहा था वह अपनी छत पर खड़ी होकर शुभम का घर से जाने का इंतजार कर रही थी क्योंकि वह ऐसा कुछ भी नहीं चाहती थी किसी से इस बारे में कोई भी बात हो जो कि निर्मला की इज्जत पर बन आए,,, वह जल्द से जल्द निर्मला से मिलना चाहती थी वह देखना चाहती थी कि अपने बेटे से चुदवाते समय किसी गैर की नजरों में पकड़े जाने पर उसके सामने आने पर चेहरे का भाव किस तरह से बदलता है,,,, शीतल अपनी छत पर चहलकदमी करते हुए नीचे निर्मला के घर की तरफ देख रही थी कि तभी उसे शुभम घर से बाहर निकलता हुआ नजर आया उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव उमड़ पड़े,,, वह अपने मन में सोचने लगी कि सुभम को देख कर उसके मासूम चेहरे को देख कर कोई भी यह नहीं सोच सकता की लड़का अपनी मां की चुदाई करता होगा,,,, थोड़ी ही देर में शुभम अपने घर से बाहर निकल कर सड़क पर जाने लगा,,, शीतल खुश होते हुए जल्दी-जल्दी अपनी सीढ़ी से नीचे उतर कर अपने घर से बाहर आ गई निर्मला के घर की तरफ चल दी,,,,

दरवाजे के बाहर खड़ी होकर वह डोर बेल बजाने लगी,,,

घंटी की आवाज सुनते ही निर्मला एकदम से डर गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि इस वक्त दरवाजे पर कौन होगा क्योंकि अभी अभी तो शुभम घर से बाहर गया था तो इतनी जल्दी वापस लौट कर आने वाला देखा नहीं उसे यकीन हो गया कि हो ना हो दरवाजे पर शीतल ही खड़ी है उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अगर शीतल होगी तो वह कैसे उसे नजरे मिला पाएगी,,, उससे क्या कहेगी कि क्या सफाई देगी,,,, यह सोच सोच कर ही उसका बुरा हाल हुए जा रहा था बार-बार शीतल डोरबेल बजाई जा रही थी आखिरकार उसे शीतल का सामना तो करना ही था इसलिए वह अपना मन करत करके कुर्सी पर से खड़ी हुई और दरवाजे पर जाकर कुछ सोचने के बाद दरवाजा खोल दी उसके सोचने के अनुसार दरवाजे पर शीतल ही खड़ी थी लेकिन वह शीतल से नजरें नहीं बना पा रही थी सर मैं सी गाड़ी जा रही थी आखिरकार एक औरत उस औरत के सामने कैसे नजरे मिला सकती है जो कि उस औरत ने उसे अपने ही बेटे से एकदम नंगी होकर चुदवाते हुए देखा हो,,,

क्या हुआ इतनी देर क्यों लगी दरवाजा खोलने में मैं कब से घंटी बजाए जा रही हूं,,,

ककककक,,, कुछ नहीं बस थोड़ा सा आंख लग गई थी,,,,

आंख लग गई थी लेकिन तुम तो पसीने से भीगी हुई हो क्या हुआ,,,

नहीं कुछ नहीं यूं ही थोड़ी तबीयत खराब लग रही थी थोड़ा चक्कर जैसा आ रहा था( निर्मला शीतल से नजरे मिलाए बिना ही इधर-उधर देखते हुए बोली।)

अब ऐसे काम करोगी तो चक्कर तो आएगा ही,,,

( शीतल के कहने के मतलब को निर्मला अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए कुछ बोली नहीं बस रोने लगी उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे,,,, निर्मला को इस तरह से रोता हुआ देखकर शीतल से रहा नहीं क्या हुआ जिंदगी में पहली बार निर्मला को रोते हुए देख रही थी इसलिए वह तुरंत अपनी साड़ी का आंचल थाम कर उसके आंसू को पोंछते हुए बोली,,,)

अरे अरे रो क्यों रही हो मैं कुछ कह थोड़ी रही हूं,,,,,

( लेकिन निर्मला के पास अब बोलने के लिए शब्द नहीं थे वह बहुत रोती जा रही थी वह शीतल के गले लग कर रोने लगी उसे शीतल बार-बार चुप कराने की कोशिश कर रही थी लेकिन वह रोए जा रही थी,, निर्मला के आंखों से आंसू का इस तरह से निकलना शीतल के सामने पूरी तरह से समर्पण की भावना दर्शा रही थी जोकि उसकी आंखों से बहते हुए आंसू को देखकर शीतल समझ गई कि अब उठ पूरी तरह से पहाड़ के नीचे आ गया है,,, निर्मला रो रही थी लेकिन शीतल मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,, आखिर वह प्रसन्न क्यों ना होती उसका सपना जो पूरा होने वाला था मर्दाना ताकत से भरा हुआ लंड उसे अब अपनी बुर में महसूस होने लगा था क्योंकि वह जानती थी कि निर्मला को अब बनाना कोई बड़ी बात नहीं है और नहीं मानी तो उसके पास उन दोनों का वीडियो तो है ही वह उंगली सीधी नहीं तो उंगली टेढ़ी करके भी अपना काम बना लेगी,,, शीतल शुभम से शारीरिक संबंध बनाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती थी यह उसके मन में आए इस ख्याल से प्रतीत हो रहा था,,, शीतल बार-बार निर्मला को चुप कराने की कोशिश कर रही थी लेकिन रंजना ठीक ही चुप होने का नाम ही नहीं ले रही थी,,, और निर्मला भी यही चाह रही थी कि किसी भी तरह से शीतल मान जाए और यह बात कमरे के बाहर ना जा पाए इसलिए वह चुप होने का नाम नहीं ले रही थी मुंह से तो शब्द निकल नहीं रहे थे इसलिए आंसू के जरिए ही अपना बयान शीतल को दे रही थी।)

......................

निर्मला शीतल के गले लग कर रोए जा रही थी और शीतल उसे शांत कराने की कोशिश कर रही थी लेकिन निर्मला के आंसू थे कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे,,,,

अब बस भी करो निर्मला रोती ही रहोगी या चुप भी होगी,,,,

मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई शीतल,,,, मैं भावनाओं में बहक गई,,,( निर्मला शीतल के गले लगे हुए ही रोते-रोते बोली,,,)

मैं समझ सकती हूं निर्मला पहले अपने आप को शांत करो,,,( ऐसा कहते हुए वह निर्मला को अपने गले से दूर करते हुए उसे वापस कुर्सी पर बैठाने लगी और निर्मला लड़खड़ाते हुए कुर्सी पर ऐसे बैठी जैसे कि उसे चक्कर आ रहा हो,,) रुको मैं तुम्हारे लिए पानी लाती हूं,,,,( इतना कहकर शीतल रसोई घर की तरफ जाने लगी निर्मला को तो समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या कहें यह सब कैसे हो गया वह क्या बहाना बनाए वह इसी उधेड़बुन में लगी हुई थी कि तब तक शीतल ठंडे पानी का गिलास लेकर उसके पास आ गई,,,)

यह लो निर्मला पहले तुम ठंडा पानी पियो अपने मन को शांत करो फिर हम बात करते हैं,,,,

( इतना कहकर शीतल ठंडे पानी के ग्लास को निर्मला के हाथ में थमाने लगी और निर्मला भी नजरें नीचे झुकाए हुए ही हाथ आगे बढ़ाकर पानी के गिलास को थाम ली और पीने लगी निर्मला दो-तीन घूंट पानी पीकर वापस उसे टेबल पर रख दी,,, अब वह शांत नजर आ रही थी। लेकिन शीतल से नजरें मिलाने में उसे शर्म महसूस हो रही थी कुछ देर तक यूं ही दोनों के बीच खामोशी छाई रही तो शीतल ही बात को आगे बढ़ाते हुए बोली।)

यह सब क्या था निर्मला तुम पर मैं इतना भरोसा करती थी कोई भी औरत बहक सकती थी यह तो मैं समझ सकती हूं लेकिन तुम्हारी जैसी औरत जो इतनी मर्यादा में रहने वाली संस्कारों से भरपूर इतनी अच्छी औरत होने के साथ-साथ तुम एक मां भी हो जो कि एक अच्छी मां लेकिन फिर भी तुम इस कदर ,,,,वो भी अपने ही बेटे के साथ,,,,,, छी छी मुझे तो सोचकर ही शर्म आती है लेकिन क्या करूं मेरी तो नसीब फुटी थी कि मैंने अपनी आंखों से एक मां बेटे के पवित्र रिश्ते को कलंकित होता हुआ देख ली,,,,( इतना कहकर शीतल खामोश हो गई,,, वह जानबूझकर निर्मला के सामने बुरा सा मुंह बना रही थी वह ऐसा दर्शना चाह रही थी कि उन दोनों की चुदाई देख कर उसे बहुत बुरा लगा है और निर्मला शीतल की इस तरह की बातें सुनकर फिर से फूट-फूट कर रोने लगी एकदम से घबरा गई क्योंकि शीतल की बातों से उसे लगने लगा कि वास्तव में वह बहुत ही गंभीर गुनाह कर दी थी जिसके पछतावे के रूप में वह शीतल के सामने दोनों हाथ जोड़ ली और हाथ जोड़ते हुए बोली। )

मुझे माफ कर दो शीतल मुझे माफ कर दो मुझसे अब यह गलती दोबारा नहीं होगी ,,,( इतना कहते ही निर्मला कुर्सी पर से उठ खड़ी हुई और सीधा जाकर शीतल के पैर पकड़कर,,,) मुझे माफ कर दो शीतल मैं जानती हूं मैं बहुत बड़ी गलती कर चुकी हूं मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूं जो कुछ भी तुमने अपनी आंखों से देखी हो वह किसी को मत बताना वरना मैं मर जाऊंगी मैं कसम से आत्महत्या कर लूंगी तुम यह बात किसी से मत बताना,,,,( निर्मला फूट-फूटकर रोए जा रही थी और यह बात शीतल से बोले जा रही थी निर्मला को इस तरह से अपने पैरों में गिरा देखकर शीतल को अच्छा तो नहीं लग रहा था लेकिन उसे अपने आप पर गर्व महसूस हो रहा था कि अपनी बेइज्जती का बदला व निर्मला से इस तरह से ले रही है लेकिन इस बात का एहसास वह निर्मला को नहीं होने देना चाहती थी कि वह बहुत खुश है इसलिए वह तुरंत शीतल की दोनों बाह पकड़ कर उसे उठाते हुए वह बोली।)

निर्मला,,,,, यह क्या कर रही हो तुम,,,, पागल हो गई हो मेरे पैर पकड़ रही हो,,, तुम मेरी सबसे अच्छी सहेली हो जिसके साथ में अब तक अपनी जिंदगी के बहुत सारे किस्से शेयर करते आई हूं तुम मेरे लिए आदर्श हो एक टीचर होने के नाते और एक अच्छी औरत के साथ-साथ एक मां होने के नाते मैं जानती हूं कि तुम से गलती तो हुई है और वह भी बहुत बड़ी गलती हुई है किसी और के साथ अगर तुम शारीरिक संबंध बनाती तो शायद एक बार में इस बात को नजरअंदाज कर जाती लेकिन तुम खुद अपने ही बेटे के साथ शारीरिक संबंध और वह भी इस तरह से एकदम गंदे तरीके से मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मैं कैसे कहूं,,,,

शीतल तुम मुझे बस माफ कर दो,,,,,,( एक बार फिर से निर्मला झुक कर उसके पैर पकड़ ली और शीतल तुरंत उसका हाथ पकड़कर उसे ऊपर उठाने लगी और बोली,,,)

तुम फिर पागल जैसी हरकत कर रही हो मुझे यह सब अच्छा नहीं लग रहा है कि तुम मेरे पैर पकड़ रही हो,,,, तुम्हारी हरकत की वजह से मुझे शर्मिंदगी महसूस हो रही है,,,

मैं जानती हूं मेरी गलती ही ऐसी है कि किसी को भी शर्मिंदगी महसूस होने लगेगी,,,, लेकिन मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूं शीतल इस बारे में तुम किसी को कुछ नहीं कहोगी अगर किसी को इस बात की भनक भी लगी तो तुम मेरा मरा मुंह देखोगी,,, मैं मर जाऊंगी आत्महत्या कर लूंगी लेकिन बदनामी का दाग अपने दामन पर लेकर जी नहीं पाऊंगी,,,

निर्मला तुम यह बात अगर पहले सोची होती तो आज यह दिन ना देखना पड़ता इतनी अच्छी खासी औरत होने के साथ-साथ एक टीचर होने के बावजूद भी तुम अपनी मर्यादा से बाहर निकल कर अपनी तन की वासना मिटाने के लिए अपने ही बेटे के साथ शारीरिक संबंध बना ली,,

क्या करूं शीतल में बहक गई थी,,,,,( इतना कहते हुए वह दूसरी तरफ मुंह कर ली,,,)

लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि तुम इतना ज्यादा बहक गई कि कोई और नहीं मिला अपने ही बेटे के साथ,,,,,

क्या करूं शीतल मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,,।

क्यों समझ में नहीं आ रहा था तुम्हारी आंखों पर किस तरह की पट्टी पड़ गई थी कि तुम्हें दूसरे मर्द और अपने बेटे में कोई फर्क नहीं लगा अपने ही बेटे को जवान मर्द समझ कर उसके साथ शारीरिक संबंध बना ली अरे इतना तो लिहाज की होती कि वह तुम्हारा बेटा है तुम्हारा सगा बेटा कोई सोतेला भी नहीं सोतेला होता तो कहने को तो की छोडो जवान लड़का देखकर एक सौतेली मा बहक गई और उसके साथ चुदवा ली,,,,,

( शीतल जानबूझ के निर्मला से इस तरह की बातें कर रही थी कि निर्मला को इस बात का एहसास हो कि वह बहुत बड़ी गलती कर चुकी है और उसकी एक मात्र एक गवाह शीतल ही है जो कि सारी बाजी अब उसके हाथ में थी इसलिए तो शीतल की बात सुनकर निर्मला के चेहरे पर शिकन की लकीरें नजर आने लगी वाह घबराने लगी,,,।)

मैं क्या करूं शीतल उस समय मुझे कुछ समझ में नहीं आया,,,,

क्या हुआ तुम्हारे साथ जबरदस्ती कर रहा था जो तुम्हें समझ में नहीं आया,,, जहां तक मैं जानती हूं कि शुभम इस तरह का लड़का बिल्कुल भी नहीं है कि अपनी मां के साथ जबरदस्ती करेगा अरे अपनी मां तो क्या वह किसी लड़की के साथ जबरजस्ती कर ही नहीं सकता,,, तुम सब कुछ रोक सकती थी लेकिन निर्मला कहीं ना कहीं मुझे इन सब में तुम्हारी गलती सबसे ज्यादा लगती है,,,।

( शीतल कि ईस तरह की कड़वी बातें सुनकर निर्मला खामोश रही बोलने के लिए उसके पास शब्द ही नहीं थे वह जानती थी कि शीतल जो कुछ भी कह रही थी सच था,,, वह चाहती तो सब कुछ रुक सकता था बल्कि पवित्र रिश्ते को तार-तार करने में उसका ही पूरा हाथ था उसका बेटा तो मात्र उसकी इच्छा के मुताबिक सहयोग दे रहा था,, निर्मला को इस तरह से खामोश देखकर शीतल अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए और एक तरह से धमकाते हुए बोली,,,।)

तुम जानती हो निर्मला अगर कमरे के अंदर की बात घर के बाहर चली गई तो क्या होगा,,( इतना सुनकर निर्मला के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी उसके चेहरे का रंग बदलने लगा वह घबराने लगी और फिर से सुबक -सुबक कर रोना शुरू कर दी,,,, शीतल निर्मला को इस तरह से रोता हुआ देखकर उसे ढांढस बंधाते हुए बोली,,,।)

लेकिन तुम इत्मीनान रखो निर्मला यह राज,,,, राज ही रहेगा,,, मैं कभी नहीं चाहूंगी कि तुम्हारी किसी भी तरह से बदनामी हो,,,, ( शीतल की बात सुनकर निर्मला के चेहरे पर राहत का एहसास साफ झलकने लगा,,,,) लेकिन मैं इतना जरूर जानना चाहूंगी कि ऐसा क्या हो गया कि इतनी अच्छी औरत होने के बावजूद अपने ही बेटे के साथ तुम्हें शारीरिक संबंध बनाना पड़ा,,,,( इतना कहते हुए शीतल कुर्सी पर बैठ गई क्योंकि अब उसकी दिलचस्पी निर्मला की बातों में बढ़ती जा रही थी वह जानती थी कि वह सब कुछ बताएगी और वह यही जानना चाहती थी यह सब कैसे हो गया,,, शीतल अंदर ही अंदर बहुत खुश थी शीतल की बात मानने के सिवा निर्मला के पास और कोई रास्ता नहीं था इसलिए वह भी फिर से कुर्सी पर बैठकर अपनी बात शुरू करते हुए बोली,,,।)

यह सब कैसे शुरू हो गया शीतल यह तो मैं नहीं जानती लेकिन आज मैं तुम्हें अपना एक राज बताना चाहती हूं जोकि आज तक इस राज को सिर्फ मेरा बेटा ही जानता है और अब तुम जानो गी,,,,

कैसा राज,,,,

यही कि मैं अपने पति से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हूं या यह कह लो कि मेरा पति मुझे संतुष्ट नहीं कर पाते मुझे वह खुशी नहीं दे पाते जो एक मर्द औरत को देता है,,,

लेकिन निर्मला तुम्हें देखने के बाद तो कभी ऐसा लगता ही नहीं कि तुम अपने पति से नाखुश हो तुम तो हमेशा खुश रहती थी बल्कि मैं तो तुमसे सब कुछ पूछती भी थी लेकिन कभी तुम ने इस बात का जिक्र तक नहीं की,,,,

यही तो बात है शीतल हंसते हुए चेहरे के पीछे का दर्द यह दुनिया नहीं देख पाती यह तो मैं ही जानती थी कि मैं कैसे अपनी जिंदगी जी रही थी या यूं कह लो मेरी आत्मा कब से मर चुकी थी मेरा शरीर जिंदा लाश की तरह था जिंदगी का सुख क्या होता है यह मैं सब कुछ भूल चुकी थी स्कूल से घर घर से स्कूल बस यही मेरी जिंदगी रह गई थी,,,,( शीतल को निर्मला की बातें सुनने में मजा आ रहा था वह भले ही अपने चेहरे पर निर्मला की बातें सुनकर उसका दर्द के भाव उपसा रही थी लेकिन अंदर ही अंदर खुश हो रही थी,,,)

हां मैं अच्छी औरत थी संस्कारों से भरी हुई है मर्यादा संपन्न मेरे मां बाप ने मुझे इसी तरह के संस्कार दिए थे,,, और मैं उस पर कायम भी थी लेकिन ना जाने फिर कैसा तूफान मेरी जिंदगी में आया कि सब कुछ बदल कर रख दिया,,,

कैसा तूफान,,,?

बहुत ही भयंकर तूफान शीतल,,, मैं पहले अपने बेटे में अपना बेटा ही देखती थी लेकिन तुम्हारी बातें सुनकर मेरा नजरिया बदलने लगा,,,

मेरी बातें मैं कुछ समझी नहीं ,,,, (शीतल आश्चर्य से बोली)

तुम्हारी चटपटी मजाकिया बातें,,,( निर्मला अपने चेहरे पर भाव हीन एहसास लाते हुए बोली।)

मेरी मजाकिया बातें मैं कुछ समझी नहीं,,,

शीतल तुम शायद भूल चुकी हो लेकिन मुझे याद है कि तुम मजाक मजाक में मेरे बेटे को लेकर मजाक किया करती थी कि तुम्हारे पास जवान बेटा है सोचो उसका लंड कैसा होगा मैं अगर उसकी मां होती तो अब तक उस से चुदवा ली होती,,, ( निर्मला की यह बात सुनकर शीतल को याद आ गया कि वह इस तरह की बातें निर्मला से किया करती थी लेकिन वो बोली कुछ नहीं बस सुनती रही) तुम्हारी इस तरह की बातें मुझे खराब लगती थी लेकिन यह तुम्हारी बातों का ही असर था कि ना जाने क्यों अपने बेटे को देखकर मुझे अब उसमें एक मर्द नजर आने लगा था,,, और मेरा बेटा कब जवान मर्द बन गया मुझे इस बात का अहसास तक नहीं हुआ,,,, मैं उसे बच्चा समझती थी लेकिन तुम्हारी बातों ने मुझे उस बच्चे में एक जवान मर्द दिखाने लगा जोकि अनजाने में ही मैंने एक बार उसके लंड को अपनी आंखों से देख ली तब से उसे देखने का नजरिया मेरा पूरी तरह से बदल गया,,,, इस बात को तो तुम भी अच्छी तरह से जानती हो कि मेरे बेटे का लंड कैसा है,,,( निर्मला की यह बात सुनते ही शीतल के चेहरे के भाव बदल गए वह असमंजस में पड़ गई।)

मेरा मन बहकने लगा मेरा तन बदन पूरी तरह से मचलने लगा,,, मैं अपने पति से पूरी तरह से प्यासी थी अपने पति से कभी भी शारीरिक सुख नहीं महसूस कर पाई थी इसलिए बार-बार मेरी इच्छा होती थी कि मैं अपनी बेटे के लंड को देखूं,,,,

फिर क्या हुआ,,,?
 
फिर क्या रोज-रोज मेरे बेटे को लेकर तुम्हारा मजाक करना आग में घी का काम कर रहा था,,, फिर क्या था तुम्हारी शादी की सालगिरह आ गई और हम लोग तुम्हारी सालगिरह मनाने के लिए कार लेकर निकल पड़े लेकिन क्या जानते थे कि भगवान को कुछ और मंजूर था तूफानी बारिश में हम लोग तुम्हारे घर पहुंच नहीं पाए और घने पेड़ के नीचे आसरा ले लिए,,, तूफानी बारिश और ऐसे में मैं और शुभम दोनों अकेले थे मेरा नजरिया पहले से ही शुभम को देखने का बदल चुका था सुभम में मुझे अपना बेटा नहीं बल्कि एक जवान मर्द नजर आने लगा था मैं उसे पूरी तरह से रिझाने की कोशिश करने लगी थी,,, लेकिन मेरे बेटे ने कभी भी पहले आगे बढ़कर इस तरह की हरकत नहीं किया कि वह मेरी तरफ से पूरी तरह से आकर्षित है मुझे ही कदम आगे बढ़ाना पड़ा मैं अच्छी तरह से जानती थी कि जिस तरह से मैं उसके मर्दाना अंगों को देखकर पूरी तरह से बहक चुकी हूं वह भी अगर मेरे खूबसूरत अंग को देखेगा तो वो भी पूरी तरह से बहक जाएगा उस में जिस तरह से मुझे एक बेटा नहीं बल्कि मर्द नजर आने लगा था उसे भी मुझ में मां नहीं बल्कि एक औरत नजर आने लगेगी और यही सोचकर में उसके सामने जोर से पेशाब आने का बहाना की,,,

( निर्मला कि ईस तरह की बातें सुनकर शीतल की दिलचस्पी उसकी बातों को सुनने में बढ़ने लगी उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी क्योंकि निर्मला बात ही कुछ इस तरह की कर रही थी कि उसकी भी हालत खराब होती जा रही थी वह मादक स्वर में बोली।)

फिर क्या हुआ निर्मला,,,,

फिर क्या वही हुआ जो नहीं होना चाहिए था मैं उसकी आंखों के सामने ही अपनी साड़ी उठाकर कार की खिड़की से पेशाब करने लगी और जानबूझ कर उसे अपनी बुर दिखाने लगी,,, जैसा मैं सोच रही थी वैसा ही हुआ मेरा बेटा मेरी बुर देखकर पूरी तरह से उत्तेजित हो गया उसका मन मचलने लगा उसे छूने के लिए उसे पकड़ने के लिए,,,

( निर्मला अपनी कामोत्तेजना से भरपूर बातों से कमरे का माहौल पूरी तरह से गर्म कर दी,,) मेरे ईसारे भर की देरी थी और शुभम पूरी तरह से तैयार हो जाता मुझे चोदने के लिए लेकिन मैं अभी अच्छी तरह से जानती थी कि यह काम उसने पहले कभी नहीं किया था इसलिए धीरे-धीरे बढ़ना ही उचित था मैं जानती हूं कि इसमें सारी गलती मेरी ही थी लेकिन एक औरत होने के नाते मेरी भी कुछ जरूरते थी,, जिसके आगे में घुटने टेक चुकी थी,,, सुभम मुझे एक टक पागलों की तरह देख रहा था मेरी उठी हुई साड़ी के अंदर ऐसा लग रहा था कि जैसे उसने दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज देख ली हो,,, उसकी सांसे बहुत ही गहरी चल रही थी वह मेरी बुर को तब तक देखता रहा जब तक मैं उसे नजर भर कर दिखाती रही वह पागल हो जा रहा था क्योंकि मैं उसकी आंखों के सामने उसे अपनी नंगी बुर दिखाते हुए मुत रही थी यह नजारा शायद उसके लिए बेहद काम उत्तेजना से भरपूर था वह इस नजारे का भरपूर फायदा अपनी नजरों से उठा रहा था,,,, जैसे ही मैं अपनी साड़ी नीचे गिराई ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके अरमानों पर पर्दा गिर गया है उसके चेहरे पर उदासी के बादल नजर आने लगे,,,,

मैं जिंदगी में पहली बार इस तरह की हरकत और वह भी अपने ही बेटे के सामने कर रही थी जिससे मैं पूरी तरह से चुदवासी हो गई थी,,, मैं देखना चाहती थी कि मुझे उस हालत में देखकर क्या उसका बेटा भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका है इसलिए मैं भी उसे पेशाब करने के लिए उकसाने लगी,,, बरसात का तूफानी माहौल पूरी तरह से वातावरण को बदल दे रहा था मेरी मादकता भरी जवानी देख कर मेरा बेटा भी पिघलने लगा था,,,, आखिरकार वह भी शर्माते शर्माते पेशाब करने के लिए तैयार हो गया वह भी कार की खिड़की से अपने लंड को बाहर निकालकर पेशाब करना शुरू कर दिया,,, मैं अपने बेटे के खड़े मोटे तगड़े लंड को देखकर अपनी लालच को रोक नहीं पाई और हाथ आगे बढ़ा कर अपने बेटे का लंड को पकड़ कर उसे पेशाब कराने में मदद करने लगी,,,, मेरी नाजुक नाजुक उंगलियों का स्पर्श अपने लंड पर महसूस करके मेरा बेटा पूरी तरह से पागल हो गया उसके चेहरे का भाव बदलता हुआ महसूस हो रहा था वह शर्म के मारे एकदम गनगनाने लगा,,,, मुझसे भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था मैं भी प्यासी औरत थी अपने हाथ में इतने मोटे तगड़े लंड को देखकर मैं अपनी लालच को रोक नहीं पाई और उसके लंड को हिलाने लगी वह पेशाब करता जा रहा था और मेरी नाजुक नाजुक उंगलियों का मजा भी लेता जा रहा था,,,,

मैं पूरी तरह से मचल रही थी मैं अपने भावनाओं पर काबू कर पाने में असमर्थ थी लेकिन,,, लेकिन उस दिन मुझे क्या हुआ कि मैं अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पा रही थी सब कुछ बेअसर होता जा रहा था,,, मेरे बेटे का लंड इतना मोटा तगड़ा और लंबा था कि मेरे पति का लंड उससे आधा भी नहीं था,,,,

मेरी शारीरिक जरूरतें और मेरे बदन का प्यासा पन और साथ ही तूफानी बारिश पूरी तरह से मुझे घुटने टेकने पर मजबूर कर रही थी मैं चाहती तो सबकुछ रोक सकती थी लेकिन मैं अपने भावनाओं पर काबू नहीं कर पा रही थी शीतल तुम एक औरत हो और एक औरत होने के नाते तुम अच्छी तरह से जानती हो कि बरसात के तूफानी माहौल में एक औरत हमेशा पुरुष का संग चाहती है और वही मेरे साथ हो रहा था,,, मुझे अपने बेटे में एक जवान मर्द नजर आ रहा था जिसका मोटा तगड़ा लंड मेरे हाथ में था,,, और ऐसा लंड जीससे में बरसों से अपनी अतृप्त भावनाओं को तृप्त कर सकती थी,,,( निर्मला की गरमा गरम बातें सुनकर शीतल पूरी तरह से गीली होती जा रही थी।)

मुझसे रहा नहीं गया और मैं अपने बेटे के सामने कार की सीट पर अपनी दोनों टांगे फैलाकर अपनी रसीली बुर को उसकी आंखों के सामने उसके लिए परोस दी,,,, मुझे इस तरह से टांग फैलाए हुए देखकर मेरा बेटा हक्का-बक्का रह गया ऐसे समझ में नहीं आ रहा कि मैं क्या करें वह तो मेरी बुर को टकटकी बांधे देखे जा रहा था,,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी आंखों के सामने दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज रख दी गई हो,,,, मैं यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि इससे पहले मेरे बेटे ने कभी भी किसी भी लड़की या औरत के साथ चुदाई का खेल नहीं खेला था तो इसलिए उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि औरत की चुदाई कैसे की जाती है,,,,

मैं स्कूल में टीचर थी और वहां बच्चों को किताब के मुताबिक हर चीज सिखाती थी लेकिन यहां पर मैं आज अपने बेटे को एक नई और जिंदगी की बेहद जरूरी शिक्षा देने जा रही थी इसलिए खुद ही उसके लंड को पकड़ कर अपनी बुर से सटा दी और उससे वही करने को बोली जो एक मर्द औरत के साथ करता है जैसा जैसा मैं बोलती गई वैसा वैसा मेरा बेटा करता गया,, देखते ही देखते मेरे बेटे का लंबा मोटा तगड़ा मुसल जैसा लंड मेरी बुर की गहराई में खो गया,,,, मेरा बेटा पागल हुए जा रहा था आज वह जिंदगी में पहली बार औरत का अनुभव ले रहा था वह हैरान था इस चुदाई के खेल को खेल कर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि पूरा लंड बुर में डालने के बाद क्या किया जाता है मैं ही उसे बताया कि अपनी कमर को आगे पीछे कर के अपने नंबर को उसकी बुर में जोर-जोर से अंदर बाहर करे,,, और उसने ठीक वैसा ही किया मुझे लग रहा था कि पहली बार मैं मेरा बेटा बहुत ही जल्दी निपट जाएगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ मैं उसे धीरे धीरे से अपनी कमला रानी को बोलती थी तो वह जोश में आकर बड़ी रफ्तार से अपनी कमर को आगे पीछे करके अपने लंड को मेरी बुर में पेल रहा था,,, शीतल मैं सच बता रही हूं मेरा बेटा पहली बार मुस्कुरा कर किसी औरत की चुदाई कर सकता है यह मुझे यकीन नहीं हो रहा था,,, करीब 45 मिनट तक धक्के पर धक्का लगाता रहा मैं तो पागल हुए जा रही थी वह एक भी बार नहीं झढ़ा था लेकिन मैं दो बार निपट चुकी थी,,, सच कहूं तो शीतल जिंदगी में पहली बार मुझे औरत होने पर गर्व हो रहा था जिंदगी में पहली बार में चुदाई का असली मजा लूट रही थी और उस तूफानी रात में सुबह तक हम दोनों ना जाने कितनी बार चुदाई का खेल खेलते रहे,,, उस दिन से जो सिलसिला शुरू हुआ तो आज तक रुकने का नाम नहीं लिया बस यही मेरी कहानी है,,,,

बाप रे बाप ,,,(शीतल लंबी सांस लेते हुए बोली) जिस तरह से तुम बता रहे हो निर्मला अगर तुम्हारी जगह दुनिया की कोई भी मां होती तो शायद वही करती जो तुमने की थी,,, तुम्हारी बातें सुनकर तो मैं पूरी तरह से गीली हो गई,,

( शीतल की बातें सुनकर निर्मला खामोश रही कुछ बोल नहीं रही थी बस नजरे झुकाए नीचे फर्श को देखे जा रही थी,,,)

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निर्मला के मुंह से अपनी मदमस्त बर्बादी की मगर बेहद रंगीन कहानी सुनकर शीतल पूरी तरह से उत्तेजना से भर गई थी,,, जिस तरह से निर्मला ने खुद अपनी आपबीती अपने मुंह से सुनी थी उसे सुनकर शीतल को ऐसा लग रहा था कि जैसे वो कोई मूवी देख रही हो,,, और बार-बार उस मूवी में गरमा-गरम दृश्य आ रहे हो,,, शीतल इस कदर उत्तेजना से भर गई थी कि उसका बच्चन का तो इसी समय निर्मला की आंखों के सामने ही उसके बेटे से उसे अपना मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में डालने को बोलती और उससे चुदाई का भरपूर आनंद लूटती,,,

निर्मला अपनी आपबीती शीतल को सुनाकर नजरें झुकाए कुर्सी पर बैठी हुई थी ,,, शीतल उसके ठीक सामने कुर्सी पर बैठी हुई निर्मला के चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रही थी,,, शीतल बेहद उत्सुक कि अपने मन की बात निर्मला को बताने के लिए वह क्या चाहती है वह सब कुछ निर्मला से कह देना चाहती थी अब तो उसके पास मौका भी था लेकिन ना जाने क्यों उसके मन में झीझक हो रही थी कि वह कैसे उससे यह कह दे कि वह उसके बेटे के साथ में वही करना चाह रही है जैसा कि वह खुद अपने बेटे के साथ करती आ रही है,,,। अपने मन की बात शीतल से कहने के लिए वह उतावली थी,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि आज की घटना के बाद से उसे लगने लगा था कि उसकी मंशा बहुत ही जल्द पूरी होने वाली है,, ,,, पूरे कमरे में खामोशी छाई हुई थी दीवार में टंगी घड़ी में 7:00 बजने का अलार्म बजने लगा था,,,। शुभम के वापस आने का समय हो गया था वह नहीं चाहती थी कि शीतल की मौजूदगी में शुभम घर पर आएं इसलिए वह कुर्सी पर से ऊठते हुए बोली,,

शीतल शुभम के आने का समय हो गया है अब मुझे खाना बनाना होगा लेकिन मैं तुम से गुजारिश करती हूं एक बार फिर से हाथ जोड़कर कि आज की बात तुम कभी भी किसी को नहीं कहोगी,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो आज जो कुछ भी मै अपनी आंखों से देखी हूं वह मेरे सीने में एक राज की तरह दफन रहेगा,,( इतना कहते हुए वह भी कुर्सी से उठ खड़ी हुई शीतल की बात सुनकर निर्मला के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई,, उसे विश्वास हो गया कि शीतल यह बात किसी से नहीं कहेगी। वह किचन की तरफ जाने ही वाली थी कि उसे रोकते हुए शीतल बोली,,।)

रुको तो सही निर्मला मेरी पूरी बात तो सुनो,,,( शीतल की बात सुनते हीनिर्मला के पेड़ वही चमके और वह उसी जगह से घूम कर शीतल की तरफ देखते हुए बोली,,,,)

क्या हुआ,,,?

निर्मला मैं तुम्हारा इतना बड़ा राज जानती हूं जो कि अगर यह राज इस घर की चारदीवारी से बाहर निकल गया तो तुम अच्छी तरह से जानती हो कि क्या होगा,,,,, सब कुछ बर्बाद हो जाएगा लेकिन मैं ऐसा नहीं चाहती,,, (शीतल अपनी बड़ी बड़ी आंखों को गोल गोल नचाते हुए बोली,,,)

मुझे तुमसे यही उम्मीद थी शीतल,,,, एक पक्की सहेली होने के नाते मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तुम मेरी बर्बादी कभी नहीं होने दोगी,,,(निर्मला मुस्कुराते हुए शीतल से बोली)

हां यह तो है निर्मला,,,(अपनी दोनों हथेलियों को आपस मेरा रगडते हुए शीतल आगे बढ़ने लगी और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) मैं कभी नहीं चाहूंगी कि तुम बदनाम हो तुम्हारी बर्बादी हो या तुम्हारे संस्कारों पर तुम्हारी चरित्र पर किसी भी प्रकार की उंगली उठे जिससे तुम्हें तुम्हारे परिवार को पूरे समाज में बदनामी का दाग लेकर जीना पड़े,,, लेकिन निर्मला,,,(इतना कहते हुए शीतल अपनी दोनों हथेली को वापस में रखते हुए निर्मला के चक्कर काटने लगी उसे ऊपर से नीचे तक देखी जा रही थी और निर्मला समझ नहीं पा रही थी कि आखिरकार शीतल कहना क्या चाहती है उसका इरादा क्या है वह आश्चर्य में थी क्योंकि जिस तरह से वह चहलकदमी कर रही थी,, वह बड़ा ही अजीब था,,,, निर्मला को शीतल की मुस्कुराहट के पीछे कुछ गलत करने की आशंका नजर आ रही थी निर्मला का मन अंदर से कह रहा था कि शीतल जरूर कुछ गड़बड़ करेगी इसलिए वह फिर से अंदर ही अंदर घबराने लगी,,, और शीतल अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

तुम्हारा इतना बड़ा राज मेरे सीने में दफन रहेगा लेकिन उसके बदले में तुम्हें कुछ कीमत चुकानी पड़ेगी,,,

( शीतल के मुंह से यह बात सुनकर निर्मला आश्चर्य से शीतल की तरफ देखने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि शीतल क्या कह रही है,,,)

कीमत कैसी कीमत शीतल तुम्हारे मन में लालच आ गया है तुम राज को राज रखने के लिए मुझसे पैसे मांग रही हो,,,

नहीं नहीं निर्मला तुम बहुत भोली हो पैसा लेकर मैं क्या करूंगी मैं तो कुछ और ही चाह रही हूं,,,(इस बार शीतल अपनी मादकता भरा रूप दिखाते हुए अपनी जीभ को अपने लाल-लाल होठों पर फिराते हुए बोली,,)

पैसा नहीं चाहती हो तो क्या चाहती हो,,,,(निर्मला आश्चर्य से बोली)

देखो निर्मला एक औरत होने के नाते मैं तुमसे यह बात कह रही हूं,,,जिस तरह से तुम अपने पति से संतुष्ट नहीं हो उसी तरह से मैं भी अपने पति से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हूं या यूं कह लो कि तुम्हारे ही शब्दों में मेरा पति मुझे शारीरिक सुख नहीं दे पाता,,, (शीतल की यह बात सुनते ही निर्मला को उसकी बात सुनकर झटका तो लगा लेकिन वह मन में सोचने लगी कि उसकी भी हालत ठीक उसी की तरह ही है,,, वह भी ऊसी कश्ती मैं सहार थी जिसमें वह पहले से ही मुसाफिर बन कर बैठी हुई थी,,,)

तुम्हारी हालत भी बिल्कुल मेरी तरह ही है तुम्हें भी हंसता खिलखिलाता ,,,,मजाक करता हुआ देखकर कोई यह नहीं कह पाएगा कि तुम अपने पति से संतुष्ट नहीं हो या शारीरिक सुख से अभी तक वंचित हो,,,, मुझे तुम्हारी यह बात सुनकर बहुत दुख हो रहा है शीतल,,

लेकिन तुम मेरे दुख को दुर भी कर सकती हो निर्मला,,,,

मैं कुछ समझी नहीं तुम क्या कहना चाह रही हो।

बहुत ही आसान है निर्मला जिस तरह से तुमने अपना दुख दूर की हो उसी तरह से तुम चाहो तो मेरा भी दुख दूर कर सकती हो,,,,

( शीतल की बात सुनते ही निर्मला को इस बात का एहसास होने लगा कि वह क्या कहना चाह रही है पल भर में उसके चेहरे पर गुस्से के भाव पैदा होने लगे लेकिन शीतल बिल्कुल शांत थी वह मुस्कुराते हुए निर्मला को देखे जा रही थी,,।)

मैं,,,,, मैं तुम्हारा दुख कैसे दूर कर सकती हूं,,?

तुम दूर कर सकती हो निर्मला,,, क्योंकि तुम्हारे पास शुभम है और मैं यही चाहती हूं कि जिस तरह से तुम अपने बेटे का उपयोग करके अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरी करती आ रही हो ठीक उसी तरह से तुम्हें राज को राज रखने के एवज में अपने बेटे को मेरे पास भेजना होगा,,,

(शीतल की यह बात सुनते ही निर्मला गुस्से से तिलमिला उठी और जोर से चिल्लाते हुए बोली,,)

शीतल,,, तुम्हें यह कहते हुए शर्म भी नहीं आ रही है,,, तुम सोच भी कैसे सकती हो कि जो तुम कह रही हो मैं वह करूंगी,,,,

तुम वही करोगी जो मैं कहूंगी यह मुझे पूरा विश्वास है,,,

तुम भूल कर रही हो शीतल ऐसा कुछ भी नहीं करूंगी क्योंकि तुम्हारी नियत गंदी है तुम्हारे मन में लालच आ गया है और लालच भी ऐसा जो कि एक औरत को शर्म आनी चाहिए,,,,

(निर्मला की यह बात सुनते ही सीतल जोर-जोर से हंसने लगी ठहाके लगा लगा कर हंसने लगी,,, और हंसते हुए बोली।)

अरे वाह सौ चूहे खा कर बिल्ली हज को चली यह कहावत तुमने सच कर दी हो निर्मला,,,,, मुझसे शर्म और लिहाज की बात कर रही हो और तुम क्या की हो बहुत जल्दी भूल गई,, अपने ही बेटे से चुदवाती आ रही हो,, तुम करो तो मान मर्यादा वाली बात और हम करें तो बेशर्मी,,,

(शीतल की यह बात सुनकर निर्मला एकदम खामोश हो गई ऐसा लग रहा था कि जैसे उसने उसे आईना दिखा दिया हो,,)

लेकिन शीतल जो कुछ भी तुम कह रही हो मैं कभी होने नहीं दुंगी,,,

तो मैं यह राज इस चारदीवारी के बाहर तक ले जाऊंगी,,,

नहीं नहीं तुम ऐसा नहीं कर सकती शीतल,,,

मैं कर सकती हूं,,, और शुभम के साथ वह सब करूंगी जो तुम उसके साथ करती आ रही हो,,,

लेकिन तुम जो कह रही हो क्या दुनिया वाले तुम्हारी बात पर विश्वास कर पाएंगे,,,,नहीं करेंगे वह तुम्हें ही झूठा साबित कर देंगे तुम बदनाम हो जाओगी,,

उसकी चिंता तुम बिल्कुल मत करो निर्मल मेरे पास तुम मां बेटे दोनों की संभोग लीला की पूरी वीडियो है और वीडियो पर तो सब लोग विश्वास करेंगे ही,,,

(शीतल की यह बात सुनकर निर्मला को ऐसा लगने लगा कि जैसे उसके सर पर पूरा आसमान गिर गया हो और पूरी तरह से सदमे में आ गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या कहें फिर भी अपना बचाव करते हुए वह बोली।)

नहीं शीतल तुम ऐसा बिल्कुल भी नहीं करोगी तुम्हें याद है मैं क्लास में तुम्हें अपने बेटे के साथ गंदी अवस्था में पकड़ ली थी फिर भी मैं यह बात किसी को नहीं बताई,,,

तुम बता सकती थी तुम्हारे पास मौका था ,,,

नहीं मैं ऐसा नहीं करना चाहती थी क्योंकि मुझे भी तुम्हारी इज्जत प्यारी थी मैं नहीं चाहती थी कि तुम बदनाम हो जाओ,,,

मैं भी तो यही चाहती हूं निर्मला कि तुम बदनाम ना हो इसलिए जो कहते हु वही करो,,,

(शीतल की बात सुनकर निर्मला का दिमाग काम नहीं कर रहा था उसकी इज्जत शीतल के हाथों में थी,,, अगर उसके पास वीडियो ना होता तो निर्मला इस मुसीबत से निकल सकती थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका इज्जत और रुतबा समाज में बहुत था वह किसी भी तरह से शीतल की बात को झुठला सकती थी,,, वह उसी तरह से खड़ी रही,,,

अब उसके पास कहने के लिए कुछ भी नहीं था वह उसी तरह से खामोश खड़ी थी शीतल को अब एहसास होने लगा कि उसका काम बन गया है अब समय भी हो रहा था उसका बेटा शुभम किसी भी वक्त घर पर आ सकता था इसलिए वह निर्मला से जाते-जाते बोली।

देखो निर्मला मैं तो बिल्कुल भी नहीं चाहती कि तुम्हारी किसी भी प्रकार से बदनामी हो अगर तुम चाहती हो कि तुम्हारी बदनामी हो तो जैसा मैं कह रही हूं वैसा मत करो लेकिन अगर अपनी इज्जत बचाना चाहती हो तो जैसा मैं कह रही हूं ठीक वैसा ही करो,, कल रात 9:00 बजे तुम अपने बेटे को मेरे घर भेज देना कोई भी बहाना करके कैसे भेजना है यह तुम अच्छी तरह से जानती हो मैं इंतजार करूंगी और अगर कल 9:00 बजे तुम अपने बेटे को मेरे घर नहीं भेजी तो इसकी जिम्मेदार तुम खुद होगी,,,

(इतना कहकर शीतल निर्मला के घर से बाहर चली गई और निर्मला उसे घर से बाहर जाते हुए देखती रही.)

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शीतल निर्मला के घर से जा चुकी थी लेकिन जाते-जाते अपने पीछे तूफान छोड़ गई थी,,, और उस तूफान से कैसे निकलना है इस बारे में खुद निर्मला को फैसला लेना था,,, शीतल की बात माल लेने में ही निर्मला के लिए भलाई थी,,, यह बात निर्मला भी अच्छी तरह से जानती थी। निर्मला को एक बार फिर से अपनी गलती पर गुस्सा आने लगा और शीतल पर भी जिसकी नजर पहले से ही उसके लड़के पर बिगड़ी हुई थी भले ही वह सब कुछ निर्मला से मजाक में कह जाती थी लेकिन उसके मजाक के पीछे का जो राज था वह खुलकर आज उसके सामने आ गया था,,, वह कुर्सी पर धम्म से बैठ गई,, और अपनी गलती का क्या क्या परिणाम हो सकता है उस बारे में सोचने लगी,,, हजार बार सोचने के बाद उसे अच्छी तरह से समझ में आ गया था कि शीतल की बात ना मानने की वजह से उसकी जिंदगी में भूचाल आ जाएगा जिसका परिणाम बेहद डरावना और भयानक होगा,, वह शुभम को किसी और औरत से बांटना भी नहीं चाहती थी,,, लेकिन अब वह पूरी तरह से मजबूर हो चुकी थी,,,अगर वह शीतल के कहे अनुसार कल रात 9:00 बजे उसके घर नहीं भेजेगी तो वह कुछ भी कर सकती है क्योंकि यह बात निर्मला अच्छी तरह से जानती थी कि एक कामांध नारी पुरुष संसर्ग के लिए किसी भी हद तक जा सकती है,,,,, और शीतल की बातों से यही लग रहा था कि अगर वह शुभम को उसके घर नहीं भेजेगी तो वह उसे पूरे समाज में बदनाम कर देगी,,, निर्मला उसकी बातों को झुठला भी सकती थी लेकिन निर्मला की काम लेना की वीडियो जो उसके पास थी जिसे वह झुठला नहीं सकती थी सारा समाज झुठला नहीं सकता था,,, लाख सोचने विचारने के बाद ही निर्मला ईसी निष्कर्ष पर आई कि अगर पूरे परिवार की उसकी खुद की इज्जत को बचाना है तो शुभम को ना चाहते हुए भी शीतल के पास भेजना ही होगा,,,

यह बात सोच कर ही निर्मला के माथे पर पसीना आ गया क्योंकि अच्छी तरह से जानती थी कि शुभम को शीतल के पास भेजने का मतलब है कि शीतल उससे चुदवाएगी,, और एक खूबसूरत नारी के संसर्ग में आकर दुनिया का कोई भी मर्द उस नारी को भोगने की इच्छा को मार नहीं सकता भले ही उस पर कितनी भी जिम्मेदारी और भरोसे का दबाव हो,,

और शीतल तो इस काम में पूरी तरह से माहिर थी अपनी खूबसूरत बदन अपने अंगों का जलवा दिखा कर वो किसी भी मर्द को आकर्षित करने में सक्षम थी और शुभम तो अभी नादान था,,, वह अब तक अपनी मां के ही खूबसूरत अंगो और बदन को देखता आया है और उसे ही भोगता आया है,,, अगर वह किसी दूसरी औरत का खूबसूरत नंगा बदन देखेगा तो अपने आप को रोक नहीं पाएगा और वह उसके साथ भी वही करेगा जो अपनी मां के साथ करता आया है,,,, यह सब ख्याल निर्मला के मन में आ रहा था और वह परेशान हो जा रही थी क्योंकि मैं कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि वह सुभम को किसी और औरत से बांटेगी,,, वह सुभम पर अपना ही हक समझती थी,,, लेकिन अब पल भर में ही हालात बदल चुके थे,,, शीतल की बात मानने के सिवा उसके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था,,,,। निर्मला का मनभारी होता जा रहा था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि अब क्या होने वाला है ना चाहते हुए भी वह शुभम को उसके पास भेजेगी और शीतल उसके साथ मनमानी करेंगी,,, सुभम तो एक और खूबसूरत ओरत को देखकर पागल हो जाएगा और वह वहीं करेगा जो वह कहेगी,, मतलब साफ था जिस तरह से शुभम उसकी बुर में लंड डालता था उसी तरह से वह अब शीतल की बुर में लंड डालेगा,,, उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भर कर चुसेगा,,, उसकी बड़ी बड़ी चूचियों को जोर-जोर से दबाएगा उसके निप्पल को मुंह में लेकर वैसे ही पिएगा जैसे कि वह उसकी चूची को पीता आ रहा था,,,, उसकी बुर को अपनी जीभ से चाट कर उसे भी मस्ती के सागर में हिलोरे मारने के लिए ले जाएगा,,, उसकी गांड के भूरे रंग के छेद को चाटेगा जिस पर पहली बार वह अपनी जीभ का स्पर्श कराके उसे उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंचा दिया था,,, अब वह शीतल को भी इसी प्रकार का सुख देगा जिसे पाकर शीतल पूरी तरह से उसकी दीवानी हो जाएगी जैसा कि वह खुद अपने बेटे की दीवानी हो गई है।

शीतल यही सब सोच सोच कर पागल हुए जा रही थी कि उसका बेटा शीतल के साथ वह सब कुछ करेगा जो कि अब तक वह उसके साथ करता आया है।,,, अपने मोटे तगड़े मर्दाना ताकत से भरे हुए लंड से ऊसकी चुदाई करके उसे पूरी तरह से अपनी गुलाम बना देगा,,, वो पागल हो जाएगी और बार-बार सुभम से चुदवाने के लिए अातुर रहेगी,,,, निर्मला को सब कुछ अपने हाथ से फिसलता हुआ महसूस हो रहा था उसकी आंखों में आंसू आ गए थे क्योंकि वो सपने में भी कभी नहीं सोची थी कि शुभम किसी गैर औरत के साथ जिस्मानी ताल्लुकात रखेगा लेकिन वक्त ऐसा बदला था कि उसे खुद अपने बेटे को उस औरत के पास भेजना था और वह भी शारीरिक संपर्क बनाने के लिए। उसे सोच कर ही घृणा और खुद पर शर्मिंदगी महसूस हो रही थी कि जिस औरत के साथ उसे गंदी अवस्था में पकड़ कर उस औरत को इतना बड़ा बुरा कही थी और उसे कभी भी अपने बेटे के आसपास ना आने की हिदायत भी दी थी लेकिन वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि सब कुछ बदल गया जिस औरत से अपनी बेटे को दूर रहने के लिए बोली थी अब उसी औरत के पास उसे खुद अपने बेटे को भेजना था,,,

थक हार का निर्मला यह मान चुकी थी कि शीतल के पास उसे अपने बेटे को भेजना ही है लेकिन अब सवाल यह था कि ,,,, वह अपने बेटे को क्या कहकर शीतल के पास भेजेगी जिससे दूर रहने की खुद ही वह उसे हिदायत दे रखी थी और वह भी रात के समय,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या कह कर शुभम को शीतल के पास भेजें बाकी वहां पर पहुंचने के बाद शीतल को क्या करना है यह शीतल अच्छी तरह से जानती थी आगे के प्रकरण को वह खुद संभाल लेगी क्योंकि मर्दों को कैसे रिझाना है शीतल अच्छी तरह से जानती थी,,, शीतल के एक इशारे पर उसका बेटा उसकी टांगों के बीच में होगा यह बात भी निर्मला अच्छी तरह से जानती थी,,, वह अपने बेटे की सबसे बड़ी कमजोरी को अच्छी तरह से समझती थी,,, शीतल की बड़ी-बड़ी मटकती हुई गांड खुद ही शीतल के अंतर्मन को बयां कर देगी शीतल को अपने होठों को खोलने की जरूरत भी नहीं होगी कि वह क्या चाहती है,,, शुभम शीतल के खूबसूरत अंगों की मादकता भरी हरकतों से ही समझ जाएगा कि शीतल क्या चाहती है और उसे क्या करना है,,,

निर्मला कुर्सी पर बैठे-बैठे यही सोच रही थी कि तभी दीवार पर कहीं घड़ी में 8:00 बजे का अलार्म बजने लगा और अलार्म बजने की आवाज के साथ ही निर्मला की तंद्रा भंग हुई तो उसे इस बात का अहसास हुआ कि उसे काफी देर हो चुकी है वह जल्दी से कुर्सी पर से उठे और रसोई घर में चली गई अब तक सुबह घर पर वापस नहीं आया था वह जल्दी-जल्दी खाना बनाने लगी और इसी उधेड़बुन में थी कि वह सुभम से क्या कहें और कैसे कहे,,,,

गैस के दोनों चुल्हो पर दाल और चावल रखकर रोटी बनाने की तैयारी कर ही रही थी कि एक बार फिर से डोरबेल बज गई,,, वह समझ गई कि शुभम आ गया है,,, वह अपनी साड़ी से हाथ को साफ करते हुए दरवाजा खोल दी और दरवाजे पर शुभम ही खड़ा था जो कि काफी खुश नजर आ रहा था उसे खुश होता हुआ देखकर निर्मला के चेहरे पर भी मुस्कुराहट तैरने लगी और वह मुस्कुराते हुए सुभम से बोली,,,

क्या बात है आज बहुत खुश नजर आ रहा है ,,,,

हां मम्मी आज मैं बहुत खुश हूं क्योंकि आज बात ही कुछ ऐसी है ,,,,

क्या बात है मुझे भी तो बता,,,

अरे पहले मुझे अंदर तो आने के लिए सब दरवाजे पर खड़े खड़े बात करनी है,,,

बोल तो ऐसे रहा है जैसे मेहमान बनकर इस घर में आया है,,,

मेहमान तो नहीं मम्मी लेकिन तुम्हारा लवर बनके घर में आया हुं,,,,,(ऐसा कहते हुए शुभम घर में प्रवेश किया और निर्मला दरवाजा बंद करके लॉक कर दी...)

लवर प्रेमी आशिक सब कुछ तो है तू मेरा,,,,(इतना कहकर निर्मला दरवाजा लॉक करके जैसे ही पलटी तो उसकी नजर शुभम पर पड़ी छोटी अपने दोनों हाथ के पीछे की तरफ ले जाकर कुछ छुपा रहा था उसे इस तरह से हरकत करता हुआ देखकर निर्मला बोली,,,)

तु मुझसे क्या छुपा रहा है दिखा तो,,,,

मैं तुमसे भला क्या छुपाऊंगा तुम्हारे लिए ही तो लाया हूं,,,

क्या लाया है मुझे भी तो दिखा ,,,,(निर्मला उत्सुकता के साथ बोली,,)

यह लो मम्मी,,,,,( इतना कहकर शुभम अपना दोनों हाथ आगे की तरफ ले आकर अपनी मां को गुलाबों से भरा हुआ गुलदस्ता देते हुए बोला,,,गुलाबों का गुलदस्ता देखकर बेहद खुशी उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई वह हंसते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाई और गुलाब के गुलदस्ते को थाम ते हुए बोली,,,)

सच में तु मेरा लवर बन कर आया है,,, लेकिन यह फूलों का गुलदस्ता क्यों,,,?

तुम भूल गई हो मम्मी लेकिन मुझे पूरा याद है आज ही के दिन हम दोनों के नए रिश्ते की शुरुआत हुई थी,,,

नए रिश्ते कि मैं कुछ समझी नहीं,,,!

याद है मम्मी आज के दिन शीतल मैडम की सालगिरह थी,, और तुम अच्छी तरह से जानती हो कि आज की रात को क्या हुआ था,,,,

( इतना सुनते ही निर्मला हंसने लगी,,, उसे खुशी इस बात की थी कि उसका बेटा उसके लिए गुलाब लाया था और वह भी आज ही के दिन शुरू हुए नए रिश्ते के लिए जो कि मां बेटे के बीच का रिश्ता खत्म होकर एक औरत और मर्द के बीच का रिश्ता रह गया था,,, लेकिन फिर भी वह अपने बेटे को याद दिलाते हुए बोली,,,)

मेरा राजा बेटा आज के दिन नहीं बल्कि वह कल के दिन से हम दोनों के बीच का नया रिश्ता शुरू हुआ था तुम थोड़ा सा धोखा खा गए,,,,

( अपनी गलती का एहसास होते ही शुभम बुरा सा मुंह बना लिया लेकिन फिर भी वह अपनी मां की तरफ आगे बढ़ता हुआ बोला,,)

कोई बात नहीं मेरे रानी मुड़ तो मेरा बन चुका है,,, इसलिए हम दोनों के बीच के रिश्ते की शुरुआत आज हुई थी या कल इस बात का कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन इस बात को याद करके मैं इस पल को और भी बेहतरीन और रंगीन बनाना चाहता हूं,,,( शुभम ऐसा कहता हुआ निर्मला की तरफ आगे बढ़ रहा था और निर्मला इस तरह से अपने बेटे को अपनी तरफ आगे बढ़ता हुआ देखकर सब कुछ समझ गई कि सुभम क्या चाहता है,,, इसलिए वह उसे दर्शाते हुए पीछे की तरफ अपने कदम लेने लगी वह जितना पीछे जा रही थी शुभम इतना उत्सुकता और आतुरता के साथ आगे बढ़ रहा था,,,)

आज तो मैं तुम्हें नहीं छोडूंगा मम्मी,,, मेरी हालत खराब नहीं है तुम्हारी मदमस्त जवानी देखकर मेरा लंड खड़ा हो रहा है,,,

लेकिन मेरा अभी बिल्कुल भी मूड नहीं है मैं खाना बना रही हूं,,, (ऐसा कहते हुए निर्मला पीछे जा रही थी और शुभम आगे आ रहा था)

लेकिन मुझे अभी भूख लगी है,,,

तू खाना बन जान दे फिर खा लेना,,,

मुझे वह खाना नहीं खाना जो तुम किचन में बना रही हो मुझे वह खाना है जिसका मैं जन्मों से भूखा हूं,,,

तो क्या खाना है तुझे,,,,? (निर्मला अपनी बेटे को तरसाते हुए पीछे की तरफ कदम लेते हुए मादक स्वर में बोली,,,)

मुझे वह खाना है जो तुम अपनी टांगों के बीच में छुपा कर रखी हो जोकि थाली में नहीं चड्डी में सजा कर रखी हो,,,, मैं तुम्हारी टांगों के बीच की उस रसमलाई का स्वाद लेना चाहता हूं और वह भी अपने मुंह से नहीं बल्कि अपने लंड से ,,,,(पजामे के ऊपर से अपने खड़े लंड को पकड़ता हुआ बोला,,,)

देख अभी नहीं सुभम,,,,

नहीं मेरी जान में इसीलिए तो तुम्हारे लिए गुलाब का गुलदस्ता लाया था कि इसे पाकर खुशी खुशी अपनी टांगें फैला दोगी लेकिन तुम तो नखरा कर रही हो,,,

तेरे लिए मैं अपनी टांगे फैला देती लेकिन क्या करूं अभी व्यस्त हूं काम में,,,

तो कब तुम काम में व्यस्त नहीं रहती हो,,, (ऐसा कहते हुए शुभम आगे बढ़ रहा था और निर्मला पीछे,,, तभी निर्मला सोफे से टकराकर खुद ही सोफे पर गिर कर बैठ गई,,,अपनी मां की हालत को देखकर शुभम हंसने लगा और बोला अब कहां जाओगे मेरी रानी,,,,)

देख शुभम मुझे परेशान मत कर रात में आना मेरे कमरे में तुझे खुश कर दूंगी,,,

लेकिन मुझे अभी खुश होना है,,, रात की बात रात को देखेंगे,,,,(इतना कहते हुए शुभम पूरी तरह से अपनी मां के ऊपर छा गया और उसकी लाल लाल होठों को जबरदस्ती अपने मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया वह जानता था कि उसकी मां कब कैसे और किस तरह से चुदवाने के लिए तैयार हो जाएगी,,,और वह तुरंत ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की बड़ी चूची को जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,शुभम इतनी जोर से अपनी मां की चूची को दबा रहा था कि मानो वह किसी गैर औरत के साथ यह सब कर रहा है,,, निर्मला को दर्द हो रहा था लेकिन सुभम की हरकत की वजह से उसे मजा भी आने लगा था,,, शुभम काफी उतावला हो चुका था इसलिए देखते ही देखते अपनी मां के ब्लाउज के बटन खोल कर उसकी नंगी चूचियों को बाहर निकाल कर उसे जोर जोर से दबाते हुए अपनी मां के लाल लाल होठों को चूसने का आनंद ले रहा था । थोड़ी ही देर में निर्मला के मुंह से गर्म सिसकारीयो की आवाज आने लगी,,, अपनी मां की मादकता भरी गरम सिसकारी की आवाज सुनकर शुभम का जोश बढ़ने लगा ,,,वह पागल हुए जा रहा था देखते ही देखते अपने दोनों हाथों से अपनी मां की साड़ी को उठाकर कमर तक कर दिया,, उसकी आंखों के सामने उसकी मां सोफे पर लाल पेंटिं मैं बैठी हुई थी,,, और उसके चेहरे पर उत्तेजना का असर साफ नजर आने लगा था। गहरी गहरी सांसें लेते हुए अपने बेटे की हर हरकत को देख रही थी ,,,

लाल पेंटिं में तो कयामत लगती हो मेरी जान,,, अब इसे उतार दो तो आगे का कार्यक्रम शुरू हो,,,

इतना कुछ कर लिया है तो पेंटी भी अपने हाथ से उतार ले,,,

जो आज्ञा महारानी,,,,सच कहूं तो मम्मी तुम्हारी पेंटी को अपने हाथ से उतारने का मजा ही कुछ और है इतना कहने के साथ ही सुभम अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाया और अपनी मम्मी की लाल रंग की पैंटी को दोनों हाथों से पकड़कर खींचने लगा ,,
 
लेकिन सोफे पर निर्मला की भारी-भरकम गांड का दबाव होने की वजह से पेंटी निकल नहीं रही थी इसलिए अपने बेटे का साथ देते हुए निर्मला अपनी बड़ी बड़ी गांड को हल्के से ऊपर की तरफ उठाई और मौके का लाभ लेते हुए शुभम तुरंत अपनी मां की पेंटिंग को खींचकर उसके चिकनी चिकनी टांगों से बाहर निकाल दिया और पेंटी को नीचे फर्श पर फेंक दिया,,, कमर से नीचे निर्मला पूरी तरह से नंगी हो गई,, शुभम की आंखों के सामने उसकी मां की कचोरी जैसी फूली हुई बुर ऐसा लग रहा था जैसे उसे अपने पास बुला रही थी शुभम पागल हुआ जा रहा था अपनी मां की मोटी मोटी नंगी गोरी जांघ देखकर और जांघों के बीच की उस खूबसूरत रसीली बुर को देखकर,, शुभम भी तुरंत उत्तेजना बस अपना पैजामा उतार कर कमर के नीचे वह भी एकदम नंगा हो गया ,,, निर्मला अपने बेटे का खड़ा मोटा तगड़ा लंड देख कर ललचाने लगी,,, ऊसके मुंह के साथ साथ ऊसकी बुर में भी पानी आ गया,,,

लेकिन वह अपनी मनोस्तिथि को अपनी बेटे से बयां नहीं कर रही थी वह चुपचाप सोफे पर लेटी हुई थी,,, शुभम से रहा नहीं जा रहा था और वह अपना मोटा तगड़ा लंड हिलाते हुए आगे बढ़ा अपने दोनों हाथों से अपनी मां की टांगों को फैला कर अपने लिए जगह बनाने लगा,,,और देखते ही देखते अपने मोटे लंड को अपनी मां की बुर में धीरे-धीरे करके पूरा का पूरा उतार दिया,,,, और दोनों हाथों से अपनी मां की कमर थामकर चोदना शुरु कर दिया,,, हर धक्के के साथ निर्मला एकदम मस्त हुए जा रही थी दूसरा से उसे इस तरह से अपने बेटे से चुदवाने में परम आनंद की अनुभूति हो रही थी,, वह भी यही चाह रही थी लेकिन झूठ मूठ का नाटक कर रही थी,, अपने बेटे की जबरदस्त चुदाई में पूरी तरह से मस्त होकर वह यह बात भी भूल गई थी की कुछ देर पहले ही शीतल आकर उसे धमका गई थी कि कल रात 9:00 बजे मां अपने बेटे को उसके घर पर भेज दे वरना उसका अंजाम बुरा होगा,,,

अपने नए रिश्ते की शुरुआत की बात से उसे एक नया आईडिया आया और उसके चेहरे पर उत्तेजना के असर के साथ-साथ खुशी भी झलकने लगी,,, रात को सोते समय अपने बेटे से अपने मन में आए आइडिया को कहना चाहती थी इसलिए वह इस समय अपने बेटे से चुदवाने का भरपूर आनंद लूटने लगी,,,,

तकरीबन 30 मिनट की घमासान चुदाई के बाद दोनों मां बेटे एक साथ झड़ गए,,,इसके बाद निर्मला अपने कपड़े व्यवस्थित करके किचन में चली गई और खाना बनाने लगी,,,

रात को 9:00 बजे अशोक घर पर आ गया जिसको देखते ही दोनों मां बेटे का मूड खराब हो गया,,, क्योंकि निर्मला आज की रात अपने बेटे से भरपूर चुदाई का मजा लेना चाहती थी क्योंकि कल तो उसे शीतल के पास भेजना था।

शुभम इस बात से खुश था कि अच्छा हुआ थोड़ा जबरदस्ती करते हुए अपनी मां से चुदाई का मजा ले लिया,,, खाना खाते समय अशोक ने निर्मला से कहां की कल ऊसे पार्टी में चलना है जहां पर सभी लोग अपनी पत्नी के साथ मौजूद होंगे,,, निर्मला कल के प्लान के बारे में ही सोच रही थी,,

खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में जाने से पहले अपनी बेटे के कमरे में चली गई जिसका दरवाजा खुला हुआ था,,

वह अपने बेटे के कमरे में जाकर देखी तो वह कुछ मोबाइल में पढ़ रहा था,,,वह उसके पास जाकर बैठ गई लेकिन सुभम मैं उसकी तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहा था तो निर्मला ही बोली,,

तेरे पापा आ गए ,,,आज तो मेरा पूरा मूड खराब हो गया वरना आज की रात तुझे बहुत मजा देती,,

मुझे मालूम था मम्मी तभी तो मैं पहले ही तुम्हारी चुदाई कर दिया,,,(वह मोबाइल में ही पढ़ते हुए बोला)

कल शीतल की शादी की सालगिरह किसी को बुलाई तो नहीं है लेकिन तुझे उसके घर जाना होगा क्योंकि वह पार्टी नहीं रखी थी उसका पति शहर से बाहर है और वह अपने घर पर नहीं बल्कि किराए पर रह रही है इसलिए पार्टी नहीं रखी है,,,और कल तो मुझे तेरे पापा के साथ किसी दूसरी पार्टी में जाना है इसलिए तुझे अकेले हीं शीतल के घर जाना होगा,,,(शुभम अपनी मां की सारी बातें सुन रहा था लेकिन उसका सारा ध्यान मोबाइल पर ही था जिसमें वह कोई कहानी पढ़ रहा था,,,)

तू मेरी बात सुन भी रहा है कि नहीं ,,,,

सुन रहा हूं मम्मी लेकिन मैं एक कहानी पढ़ने में मस्त हूं क्योंकि आज की रात तो तुम्हारी मिलेगी नहीं इसलिए कहानी पढ़कर ही अपना काम चला लु,,

अच्छा ऐसी कौन सी कहानी है जिसे पढ़ने में ईतना मस्त हो गया है,,,

बहुत अच्छी कहानी है मम्मी कहानी का नाम है,,,,, होता है जो वह हो जाने दो,,,,,

यह कैसी कहानी है,,,

मम्मी बहुत मस्त कहानी है जैसे हम दोनों मां बेटे अपनी अपनी जरूरतों के मुताबिक मां बेटे का रिश्ताहोने के बावजूद कि हम दोनों के बीच मर्द और औरत वाला रिश्ता है उसी तरह से इस कहानी में भी राहुल नाम का लड़का है और उसकी मां का नाम अलका है जो कि एक विधवा औरत है और काफी बरसों से वह चुदवाई नहीं है,,,जोकि धीरे-धीरे अपने बेटे की तरफ आकर्षित होकर एक दिन अपनी सारी मर्यादा भूल जाती है जैसा कि हम दोनों भूल गए थे और वह औरत अपने बेटे से शारीरिक सुख भोग ती है,,, इसमें नायक राहुल का एक दोस्त भी है विनीत जो कि पैसे की मदद करके अपने दोस्त की मां का फायदा उठाते हुए उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता है,,, और इसमें एक नायिका भी है नीलू जो कि पहले विनीत के साथ प्यार करती थी लेकिन धीरे-धीरे राहुल के साथ प्यार करने लगी,,,

क्या सच में यह इस तरह की कहानी है,,,

हां मम्मी बहुत अच्छी कहानियां कम पढ़ोगी तो तुम्हें भी बहुत मजा आएगा,,,

ठीक है तू कहता है तो मैं जरूर पढुगी लेकिन अभी मैं जा रही हूं तेरे पापा मेरा इंतजार कर रहे,, है,,

ठीक है मम्मी तुम जाओ मैं कहानी पढ़ता हूं,,,

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निर्मला का काम बन चुका था,, ना चाहते हुए भी उसे मजबूरी बस अपने बेटे को शीतल के पास भेजना पड़ रहा था क्योंकि इस समय उसे अब शीतल अपनी सौतन लग रही थी,,, कर भी क्या सकती थी बुरी तरह से फंस चुकी थी अपनी एक गलती की वजह से वह इतने दिन से जिस गलती पर पर्दा डाले हुए थे वह परदा शीतल के सामने खुल चुका था,, शीतल निर्मला के राज को जान चुकी थी,,, निर्मला को अपनी इज्जत बचाने की अपने परिवार को बदनाम होने से बचाना था बरसों से कमाई हुई इज्जत शोहरत सबकुछ बचाना था जोकी दांव पर लगा हुआ था,,

और यह सब तभी मुमकिन था जब वहां शुभम को शीतल के पास भेजेगी,,, और ईसी का जुगाड़ करके वह अभी-अभी शुभम के कमरे से बाहर आई थी,, बस अब यह बात उसे शीतल को बताना था और उसके बाद शीतल अपना इंतजाम खुद ही कर लेगी यह विश्वास था उसे,,,

निर्मला अपने बेटे को शीतल के पास भेजने का पूरा इंतजाम कर रही थी लेकिन इस बात का भी ध्यान रख रही थी कि इस बात की भनक तक शुभम को ना लगे कि शीतल ने उन दोनों की भरपूर चुदाई के द्श्य को अपनी आंखों से देख ली है और निर्मला को ब्लैकमेल करते हुए शुभम को अपने पास बुला रही है।

निर्मला बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी,,,और अशोक लैपटॉप पर ऑफिस का कुछ जरूरी काम कर रहा था,,निर्मला कल के कार्यक्रम के बारे में योजना बना रही थी कि कैसे क्या करना है,,,, यह सोचते हुए उसकी नाइटी हल्की सी टांग घुटनों के बल मोड़ने की वजह से नीचे सरक कर कमर तक आ गई जिससे उसकी मोटी मोटी दुधिया जांघे एकदम उजागर हो गई,,, या देखते ही अशोक के तन बदन में काम की ज्वाला भड़कने लगी,,,, उसके मन में अपनी पत्नी को भोगने की लालच जाग गई,,, वह लैपटॉप उठाकर बेड के एक किनारे रख दिया और जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया,,, अपनी बीवी की नंगी मोटी मोटी जांघों को देखते ही उसका लंड खड़ा होने लगा था,, जोकि उसके लंड का तनाव उतना बिल्कुल भी नहीं होता था जितना कि एक औरत की जबरदस्त चुदाई करने के लिए होनी चाहिए,,, लेकिन फिर भी अशोक में काम भावना कुछ ज्यादा ही प्रज्वलित थी। वह निर्मला की तरफ देखा तो वह किसी विचार में डूबी हुई थी,,, जो कि वह कल के प्रोग्राम के बारे में ही सोच रही थी,,, अपने मन में ही सोच रही थी कि कल कैसे भी करके शीतल जो करना चाहती है कर ले लेकिन इस बात की भनक उसके बेटे को बिल्कुल भी ना लगे कि शीतल के साथ संभोग करने के लिए खुद उसकी मां ने ही उसे भेजा है,,, वरना उसका बेटा क्या सोचेगा कि कल तक जिसके आसपास भटकने की भी इजाजत नहीं थी आज ऐसा क्या हो गया कि खुद उसकी मा ही शीतल के पास भेजने के लिए तैयार हो गई,,,,,वो यही सब सोच रही थी कि इस दौरान अशोक कब उसकी टांगों के बीच आकर अपने लिए जगह बना लिया उसे पता ही नहीं चला उसे इस बात का एहसास तब हुआ जब अशोक अपना सुखा लंड निर्मला की खूबसूरत बुर में लंड डाल दिया और लंड के साथ-साथ बुर भी सुखी होने की वजह से उसे दर्द का एहसास हुआ और उसके मुंह से आह निकल गई,,,,,, वह जब तक अशोक को कुछ बोल पाती अशोक का वह छोटा सा बेजान सा लंड हरकत करता हुआ उसकी बुर में घुस गया,,, हल्की आह के साथ निर्मला को इतना तो पता चला कि अशोक का लंड उसकी बुर में घुस रहा है लेकिन कब घुस गया इस बात का अहसास तक नहीं हुआ,,, और अशोक अपनी कमर हिलाता हुआ निर्मला को चोदना शुरू कर दिया,,, बस यही फर्क था अशोक और उसके बेटे सुभम मे,,,, अशोक अपनी बीवी निर्मला को चोदने से पहले किसी भी प्रकार का प्यार या रोमांटिकबातें बिल्कुल भी नहीं किया करता था ना तो उसके खूबसूरत अंगों को सहलाता था और ना ही उससे खेलता था,,, बस एक ही काम से आता था टांग फैला कर डाल देना,, वही जब सुभम अपनी मां की चुदाई करता था,, तोअपनी मां को पूरी तरह से नष्ट कर देता था उसे खूबसूरत अंगूठी पर कितना चलता था कि एकदम बिस्तर पर कसमसा जाती थी तड़प उठती थी अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए और खुद ही अपनी दोनों टांगें फैलाकर ऊसका स्वागत करते हुए अपनी बुर की गुलाबी पतियों कोअपने हाथों से फैला देती थी,, और अपने बेटे से जबरदस्त चुदाई का भरपूर आनंद लेते हुए गदगद हो जाती थी,,, तभी कुछ दो-चार मिनट ही गुजरे थे कि अशोक अपनी बेबी निर्मला की गोल-गोल चूची पर सर रखकर हांफने लगा उसका काम हो चुका था उसे बिल्कुल भी परवाह नहीं थी कि उसकी बीबी खुशी हुई कि नहीं हुई,,, बस अपना काम निपटा कर उसके बगल में लेट गया ,,, निर्मला को इतना गुस्सा आ रहा था कि मन तो कर रहा था कि दो तमाचा उसके गा पर लगा दे,,, लेकिन वह बस मन मसोसकर रह गई,,,

दूसरे दिन सुबह होते ही निर्मला फोन करके शीतल को सारी बात बता दी,,, शीतल भी उसी से बस यही बात बोली कि किसी भी तरह से वह अपने बेटे को मेरे घर भेज दे वैसे तो वह तुरंत तैयार हो जाएगा लेकिन उसे यह पता नहीं लगना चाहिए कि यह सब क्यों हो रहा है बस उसका घर पहुंचने की देरी है उसके बाद वह सब कुछ संभाल लेगी,,,

घड़ी में रात के 8:00 रहे थे और निर्मला एकदम तैयार हो गई थी पीली ट्रांसपेरेंट साड़ी में उसका गोरा बदन बेहद जच रहा था,,शुभम तो अपनी मां को इस तरह से तैयार होता हुआ देखकर एकदम से कामोत्तेजना से भर गया उसकी बड़ी-बड़ी हिलती हुई गांड देखकर उसका लंड खड़ा होना लगा,,लेकिन अपने बाप की हाजिरी में वह अपनी मां के साथ कुछ भी कर नहीं सकता था इसलिए पैंट के ऊपर से अपने लंड को मसल कर रह गया,, निर्मला अपने बेटे की हालत को अच्छी तरह से भांप गई थी,,, अपने बेटे की यह तड़प निर्मला को अंदर तक उत्साहित कर दे रही थी। लेकिन इस बात से वादे हद बेचैन भी हो जा रही थी कि उसका बेटा अब शीतल के घर जाएगा और जो सुख वह अब तक उसे देता आ रहा है अब वही सुख शीतल को देगा,,, लेकिन मजबूरी थी जो उसे अपने से ही शीतल के घर भेजना पड़ रहा था,,, निर्मला तैयार होकर घर से बाहर निकलते निकलते शुभम से बोली,,,।

सुबह 9:00 बजे शीतल के घर पहुंच जाना,,,

पहुंच जाऊंगा मम्मी तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,

कैसे चिंता ना करु एक जवान लड़के को एक प्यासी औरत के पास जो भेज रही हु चिंता तो होगी ही ,,,,(निर्मला अपने मन में बडबडाते हुए घर से बाहर निकल गई,,,शुभम अपनी मां को जाता हुआ देखता रहा अब उसे 9:00 बजने का इंतजार था वह बड़ा बेसब्र नजर आ रहा था,,, बाथरूम में जाकर नहाने लगा क्योंकि वह पूरी तरह से शीतल को इंप्रेस करना चाहता था,,,

दूसरी तरफ शीतल की जो हालत थी,, वह शब्दों में बयां कर पाना बड़ा मुश्किल था,,, उसके पांव तो जमीन पर टिक ही नहीं रहे थे,,, वह बेहद खुश थी उसके सपनों का राजकुमार जो आज रात को उसके घर आने वाला था उसे इस वक्त उस तरह का ही एहसास हो रहा था जो एक नई नवेली दुल्हन को अपनी सुहागरात की रात को अपने बिस्तर पर अपने पति का इंतजार करते हुए होता, है,,। वह अपने आप तो पूरी तरह से दुल्हन की तरह तैयार करना चाहती थी इसलिए वह बाथरूम में जाकर सबसे पहले तो,,, बाथरूम के ड्राोवर में से वीट क्रीम निकाल कर अपनी रेशमी बालों के गुच्छे को क्रीम लगाकर साफ करके अपनी बुर को एकदम चिकनी कर दी,,,

........................
 
शीतल अपनी खूबसूरती में और भी ज्यादा इजाफा करते हुए अपनी टांगों के बीच के उस रेशमी बालों के झुरमुट को अत्यधिक महीने और खुशबू से भरी हुई वीट क्रीम लगाकर उसे साफ कर के एकदम चिकनी कर दी थी,,, अब शीतल की रसीली मादकता से भरी हुई कचोरी की तरह फुली हुई बुर किसी औरत की नहीं बल्कि जवान लड़की की लग रही थी जिसे देखकर शीतल भी शरमा गई,,,,, एक बार वह खुद अपनी हथेली से अपनी कचोरी जैसी फूली हुई बुर को दबाने की लालच को रोक नहीं पाई और अपनी हथेली उस पर रखकर हल्के से रगड़ना शुरु कर दी अपनी बुर की गर्माहट शीतल को अपनी हथेली पर बराबर महसूस हो रही थी। अपनी बुर की गर्माहट से शीतल को इस बात का एहसास हो गया कि आज वह कुछ ज्यादा ही गर्म हो रही है और होती भी क्यों ना आज उसके सपनों का सौदागर जो उसके घर आने वाला था उसके महीनों की दबी हुई प्यास को बुझाने वाला था जिस मर्दाना ताकत से भरे हुए लंड को अपनी बुर में लेकर उसे महसूस करने का सपना अपने मन में संजोए बैठी थी आज उसे पूरा करने का पल जो आने वाला था वह पूरी तरह से प्रसन्नता के साथ साथ उत्तेजना से भी भर्ती चली जा रही थी,,, शुभम से मिलने के अहसास से ही वह पूरी तरह मस्त हुए जा रही थी,,,, एक तरह से आज शीतल की सुहागरात ही थी जिसमें वह अपने पति के उम्र के व्यक्ति से नहीं बल्कि अपने बेटे के उम्र के लड़के के साथ पलंग तोड़ सुहागरात मनाने वाली थी,,,,। अपने आप को तैयार करने में वह कोई भी कसर बाकी रखना नहीं चाहती थी।

शीतल संपूर्ण नग्न अवस्था में आदम कद आईने के सामने खड़ी थी और आगे पीछे गोल गोल घूम कर अपने बदन के हर एक अंग को बड़ी बारीकी से निरीक्षण करते हुए देख रही थी,,, उसे अपने बदन की खूबसूरती और अपने बदन के हर एक अंग की बनावट पर संपूर्ण विश्वास था कि इसे देखते ही शुभम पूरी तरह से पागल हो जाएगा और उसकी आगोश में आकर पिघलने लगेगा जिस तरह से वह अपनी मां की बाहों में पिघलता है,,, वैसे भी भगवान ने शीतल के खूबसूरत बदन पर खूबसूरती दोनों हाथों से लुटाए थे बस निर्मला खूबसूरती के मामले में एक कदम ही आगे थी बाकी सब कुछ वैसा ही था जैसा निर्मला के पास था,,,

शीतल अपने नंगे बदन को आईने में देखकर मन ही मन प्रसन्न हो रही थी और धीरे-धीरे एक-एक करके अपने बदन के हर एक अंग को अपने हाथों से उंगलियों से स्पर्श करके उस का जायजा ले रही थी,,, वीट क्रीम से साफ करने के बाद उसकी रसीली बुर कुछ ज्यादा ही जवान लगने लगी थी,,, टांगे एकदम सुडोल चिकनी गोरी मोटी मोटी जांगो की खूबसूरती लिए कहां जा रही थी रसीली बुर की पतली दरार बेहद पतली लकीर की तरह थी,,, एकदम कम सीन जवान मात्र हल्की सी गुलाबी पत्तियां बुर की पत्नी दरार के मुहाने से बाहर झांकती हुई नजर आ रही थी जो कि उसकी खूबसूरती में बढ़ोतरी ही कर रही थी,,

गुलाब की पत्तियों और खूबसूरत साबुन के झाग से बाथरूम का टब भरा हुआ था शीतल को हमेशा बाथ टब में घंटों नग्न अवस्था में नहाना अच्छा लगता था,,,, शीतल उसी तरह से चलते हुए बाथरूम में अपने दोनों टांग डालकर उसमें पसर गई,,,, बाथटब का ठंडा पानी उसके बदन की गर्माहट को शीतलता प्रदान कर रहा था,,, लेकिन यह तो बदन की ऊपर की गर्मी थी तन के अंदर धड़कते हुए शोलों को यह ठंडा पानी शांत नहीं कर सकता था उसके लिए तो शुभम के मोटे तगड़े लंड से निकला हुआ झरना ही इस ज्वाला को शांत करने की ताकत रखता था,,, बाथटब में जी भर के नहाने के बाद शीतल बात तब से बाहर आकर सावर चालू कर दी और बरसात के पानी की तरह पानी का फव्वारा उसके ऊपर गिरने लगा जिसमें वह अच्छे से अपने पूरे बदन को रगड़ रगड़ कर साफ करने लगी साबुन का झाग उसके पूरे बदन पर लगा हुआ था जिसे वह और भी ज्यादा रगड़ रगड़ कर साफ़ कर रही थी किसी भी तरह की कसर बाकी नहीं रखना चाहती थी इसलिए खास करके अपनी दोनों मद मस्त चूचियों और रसीली बुर पर कुछ ज्यादा ही ध्यान देते हुए साबुन से रगड़ रगड़ कर उसे साफ कर रही थी,,,। जिस तरह से मेहमान आने से पहले घर की सफाई की जाती है उसी तरह से शीतल अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों पर हल्की हल्की उंगली डालकर उसे साफ कर रही थी वह पूरी तरह से मेहमान को खुश करना चाहती थी ताकि मेहमान को किसी भी तरह की दिक्कत ना हो। क्योंकि उसी मेहमान को ही तो बुर का दरवाजा जो खोलना था,,,

शीतल नहा चुकी थी और नरम नरम टावल से अपने बदन पर से पानी को पोछ रही थी,,, बाथरूम से बाहर निकलने से पहले शीतल बाथरूम में ही टावर हैंगर में टांग दी और उसी तरह से एकदम नंगी ही अपने कमरे में घुस गई धीरे-धीरे वह तैयार होने लगी अपनी सबसे पसंदीदा लाल रंग की साड़ी पहनकर वह एकदम दुल्हन की तरह लग रही थी,,, हाथों में कांच की चूड़ियां पहन ले और इतनी ज्यादा पहनने की हाथ थोड़ा भी हिलता था तो खनखन की आवाज आने लगती थी। शीतल चाहती तो पारदर्शी नाइटी पहन सकती थी क्योंकि पारदर्शी नाइटी पहनने के बाद उसके बदन के हर एक अंग का कोना कोना नाइटी में से झलकता रहता। और उस पारदर्शी नाइटी में शीतल को देखकर दुनिया का कोई भी मर्द उसकी तरफ आकर्षित हुए बिना नहीं रह सकता था लेकिन शीतल के मन में कुछ और चल रहा था आज वह शुभम के साथ एक तरह से सुहागरात मनाने के मूड में थी इसलिए सुहागरात मनाने के लिए उसे दुल्हन बनना जरूरी था इसीलिए भाई एकदम दुल्हन की तरह सजना चाहती थी और थोड़ी देर में ही वह एकदम दुल्हन की तरह सज-धज कर तैयार हो गई,,,,

शीतल पूरी तरह से दुल्हन की तरह तैयार हो चुकी थी और किचन में जाकर खाने का बंदोबस्त कर रही थी,,, उसने केक का ऑर्डर दे रखी थी जो कि थोड़ी ही देर में उसके घर पर आने वाला था।

एक तरफ शीतल की तरफ से इस तरह की बेहतरीन तैयारी चल रही थी और दूसरी तरफ शुभम शीतल को पूरी तरह से इंप्रेस करने के लिए अपने तरीके से वह भी तैयार हो रहा था उसने भी आज वीट क्रीम लगाकर अपने झांठ के बाल एकदम साफ करके अपने लंड को एकदम चिकना कर लिया था,,, और अपने लंड के बाल को साफ करते समय उसके जेहन में सिर्फ शीतल ही घूम रही थी जिसकी वजह से धीरे-धीरे करके उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था। शुभम को यह पक्के तौर पर तो बिल्कुल भी नहीं मालूम था कि आज की रात शीतल के साथ उसकी संभोग वाली रात होगी लेकिन फिर भी उसके मन में यह विश्वास था कि आज उसकी किस्मत अच्छी ही होगी इसलिए वह पूरी तैयारी करके जाना चाहता था,,, पहली बार में ही हो शीतल की जबरदस्त चुदाई करना चाहता था जिससे वह पानी पानी हो जाए इसलिए जल्दी उसका लंड ना झड़ जाए इसलिए शीतल को याद करते हुए अपने लंड के बाल को साफ करते समय वह अपने लंड को हिला हिला कर पानी निकाल दिया था ताकि दोबारा संभोग करने पर ज्यादा देर तक वह टिका रहे,,,, जिस तरह से एक कुशल सैनिक युद्ध पर जाने से पहले अपने हथियार को बराबर चेक कर लेता है और उसे व्यवस्थित करके ही युद्ध के मैदान में उतरता है उसी तरह से शुभम भी पूरी तैयारी के साथ शीतल के साथ पलंग रूपी मैदान में उतरना चाहता था इसलिए वह सरसों के तेल से अपने लंड की बराबर 15 मिनट तक मालिश किया ताकि वह शीतल की बुर में जाकर गदर मचा सकें।

घर में इस समय उसके सिवा कोई नहीं था इसलिए वह भी पूरे घर में नहाने के बाद नंगा ही घूम रहा था और सच मानो तो उसे इस अवस्था में पूरे घर में घूमना बहुत अच्छा लग रहा था वह मिलने की सोच रहा था कि काश ऐसा हो जाता कि वह घर में कभी कपड़े पहनता ही नहीं इसी तरह से नंगा ही घूमता रहता तो कितना मजा आता ऐसा सोचते हुए अपने कमरे में जाकर अलमारी में से अपने लिए नए कपड़े निकालने लगा। थोड़ी ही देर में एक जींस एक अच्छी सी टी शर्ट पहन कर तैयार हो गया शुभम भी काफी हैंडसम लग रहा था,,, घड़ी की तरफ नजर उठाकर देखा तो 9:15 का समय हो रहा था समय हो गया था शीतल के घर जाने के लिए इसलिए वह सब कुछ ठीक करके घर से बाहर दरवाजे पर लॉक करके शीतल के घर की तरफ निकल गया जहां पर शीतल डाइनिंग टेबल पर खाने का हर एक सामान जो कि उसने खासतौर पर शुभम के लिए ही बनाई थी एकदम से सजा कर रखी हुई थी थोड़ी ही देर पहले जो उसने होटल से केक मंगाई थी वह भी आ चुकी थी,,,,

तभी दरवाजे की घंटी बजी और घंटी के साथ ही सीतल का दिल जोरो से धड़कने लगा,,, उसे एहसास हो गया कि दरवाजे पर शुभम खड़े होकर घंटी बजा रहा है वह लगभग दौड़ते हुए गई और तुरंत दरवाजा खोल दी सामने शुभम ही था उसे देखते ही शीतल के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव के साथ-साथ मुस्कान तैरने लगी। शुभम की नजर शीतल पर पड़ी तो वह उसे देखता ही रह गया शीतल एकदम दुल्हन की तरह लग रही थी और वह भी नई नवेली हाथों में रंग बिरंगी चूड़ियां अलग ही कहानी कह रही थी माथे की बिंदी कानों का झुमका होठों पर लाल रंग की लिपस्टिक गली में मंगलसूत्र यह सब देख कर शुभम को एक अलग ही एहसास हो रहा था जिसका वह वर्णन नहीं कर सकता था।

शुभम को ना जाने क्यों ऐसा लग रहा था कि शीतल आज एक दुल्हन है और वह उसका दूल्हा,,,,, शुभम एक टक शीतल को देखे जा रहा था,,, इस तरह से शुभम को अपनी तरफ देखता हुआ पाकर शीतल शर्म से गड़ी जा रही थी,,,

वह शर्माते हुए कुछ बोलती से पहले ही शुभम बोला ,,,

आज तो आप एकदम दुल्हन की तरह लग रही हो मैडम,,,

मैडम नहीं शीतल कहो,,,,, दरवाजे पर खड़े रहोगे या अंदर भी आओगे,,,,

क्या करु मैडम सॉरी शीतल तुम्हारा यह रूप देख कर मैं तो एकदम दंग हो गया हूं,,,

क्यों मैं अच्छी नहीं लग रही हूं क्या,,,,

तुम तो एकदम दुल्हन लग रही हो सच में अगर मेरा बस चलता तो आज मैं तुमसे शादी कर लेता,,,

तो कर लो रोका किसने है,,,,। ( इतना कहकर वह हंसने लगी और शुभम भी मुस्कुराता हुआ कमरे में दाखिल हो गया और शीतल दरवाजा बंद करके लॉक कर दी वह ऐसी कोई भी गलती नहीं करना चाहती थी जो गलती निर्मला ने की थी अगर वह भी होश में रहकर दरवाजे को लोक कर दी होती तो इतना सुनहरा मौका शीतल को कभी नहीं मिलता,,।)

मैं तो सुना था शादी की सालगिरह की पार्टी है लेकिन यहां तो कोई भी नहीं है,,,

तुमने ठीक ही सुना है आज मेरी शादी की सालगिरह है लेकिन मेरे पतिदेव शहर से बाहर बिजनेस के सिलसिले से गए हुए हैं और मैं इस जगह पर नई-नई हूं इसलिए मैं यहां किसी को जानती नहीं हूं इसलिए मैं अपनी शादी की पार्टी मनाने के लिए सिर्फ और सिर्फ तुम ही को बुलाई हूं,,,,

मुझे बहुत खुशी हुई कि इतने बड़े घर में और वह भी रात के समय सिर्फ मैं और तुम है,,,

सच कहूं तो शुभम यह पार्टी में ने सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे लिए ही रखी हुं,,,

लेकिन ऐसा क्यों,,,,?

यह मुझे बताने की जरूरत नहीं है यह बात तुम भी अच्छी तरह से जानते हो,,,( इतना कहकर वह टेबल पर रखे हुए केक पर से पर्दा हटाने लगी और परदे के हटते ही केक सामने नजर आने लगा और उस पर जो लिखा था उसे देखकर शुभम एकदम खुश हो गया,,, खुश होने वाली बात ही थी क्योंकि केक पर शीतल ने शीतल लव शुभम लिखवाई थी,,,,)

यह क्या लिख लिखवाई हो शीतल,,,( शुभम हंसते हुए बोला)

क्यों तुम्हें अच्छा नहीं लगा क्या,,,,?

मैं बहुत खुश हूं मैं कभी सोचा भी नहीं था कि तुम मुझे इस तरह से सरप्राइस दोगी,,,,

यह केक हमारे प्यार के निशानी है,,,,, अब हम दोनों साथ मिलकर इसे काटे,,,( इतना कहकर शीतल केक काटने वाला चाकू लेकर तैयार हो गई और वह थोड़ा सा झुक गई और शुभम मौके का फायदा उठाते हुए ठीक उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया और शीतल के बदन से एकदम से सज गया जिसकी वजह से शीतल के भारी-भरकम गोलाकार नितंबों से शुभम के पेंट का आगे वाला भाग एकदम सट गया जोकि शीतल को दुल्हन के रूप में देखकर खड़ा होने लगा था जिस तरह से शुभम शीतल के पीछे खड़ा था शीतल को इस बात का एहसास अपने नितंबों पर बराबर हो रहा था कि शुभम का लंड खड़ा होने लगा है और इस एहसास के वह गदगद होने लगी,,,, शुभम अगले ही पल अपना हाथ आगे बढ़ा कर शीतल का हाथ पकड़ लिया जिसमें वह चाकू पकड़े हुए थी शुभम की इस हरकत से शीतल एकदम से प्रसन्न हो गई और एक बार नजर घुमाकर शुभम की तरफ देखने और मुस्कुरा कर के काटने लगी शुभम भी उसका पूरा सहयोग करते हुए जिस तरह पूरा अपना हाथ ले जा करके काट रही थी वैसे वैसे वह भी अपना हाथ की तरफ घुमा रहा था और साथ ही उसके नितंबों पर अपने कड़क लंड का एहसास बराबर करा रहा था। शीतल एकदम पागल हुए जा रही थी शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी गांड पर रगड़ता हुआ महसूस करके वह पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी उसका बस चलता तो इसी समय अपनी साड़ी ऊपर उठाकर उसके लंड को अपनी बुर में ले ली होती लेकिन इतनी जल्दी वह यह सब शुरू होने देना नहीं चाहती थी,,, इसलिए जल्दी से केक के टुकड़े को अपने हाथ में लेकर शुभम को खिलाने के लिए उसकी तरफ घूम गई अपनी तरफ शीतल का हाथ आता हुआ देखकर वजह से मुंह खोल दिया और शीतल भी बिना देर किए केक के टुकड़े को शुभम के मुंह में डाल दी और तुरंत आधे बचे केक को अपना मुंह आगे बढ़ाकर उसे अपने मुंह में ले ली,,, दोनों इस तरह से केक खाने का आनंद ले रहे थे देखते ही देखते कब दोनों के होंठ एक हो गए दोनों को पता ही नहीं चला शीतल पागलों की तरह शुभम के होंठ को अपने मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दी,,, शुभम भी मदहोशी के आलम में शीतल के लाल लाल होठों को चूसने का आनंद लेते हुए अपने हाथ को उसके बदन पर हर जगह घूम रहा था वह एकदम उत्तेजित हो चुका था वह कभी शीतल की चूची को दबा देता तो कभी उसकी बड़ी बड़ी गांड को वह शीतल के खूबसूरत बदन के हर अंग से खेल रहा था शीतल को शुभम की हरकत बेहद लुभावनी लग रही थी,,, वह भी शुभम का बराबर साथ दे रही थी वह शुभम को अपनी बाहों में कस के दबाए हुए थी,,, पूरे कमरे में दोनों की सांसो की तेज आवाज ही गूंज रही थी,,,,

मादकता भरी जवानी से भरपूर शीतल को अपनी बाहों में पाकर शुभम पूरी तरह से बहकने लगा था वह उतावला हो गया था शीतल की बुर में अपना लंड पेलने के लिए,, इसलिए बात तुरंत अपने दोनों हाथों से शीतल की साड़ी को ऊपर उठाने लगा शीतल को इस बात का एहसास हो गया कि सुबह मुश्किल साड़ी उठाकर अपने लंड को उसकी बुर में डालना चाहता है लेकिन शीतल नहीं चाहती थी कि यह सब इतनी जल्दी हो वह सब्र रखकर धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहती थी क्योंकि अभी पूरी रात बाकी थी इसलिए वह तुरंत अपने दोनों हाथ नीचे की तरफ करके शुभम के हाथ पर रख कर उसे रोक दी और तुरंत उसके हाथ से छिटक कर दूर खड़ी हो गई,,,और बोली,,,

इतनी जल्दी भी क्या है मेरे राजा अभी रात को अच्छी तरह से जवान तो होने दो,,,( इतना कहते हुए शीतल पीछे कदम बढ़ा कर अपनी भारी-भरकम नितंबों को डाइनिंग टेबल के सहारे टीका कर बड़े ही मादक स्वर में बोली,,,)

तुम्हारे लिए इतनी मेहनत करके जो मैं खाना बनाई हूं पहले उसका स्वाद तो चक लो फिर इसका (अपनी गोल-गोल चूचियों पर दोनों हाथों से इशारा करते हुए) मजा लेना।

लेकिन मुझे तो तुम्हारी खूबसूरत बदन की भूख है जी करता है कि तुम्हारा अंग अंग खा जाऊं खास करके तुम्हारी यह गोल गोल दोनों चूचियां जिसका गरम गरम दूध पीने के लिए मैं कब से बेकरार हूं।

( शुभम कि यह गरमा गरम बातें सुनकर शीतल पूरी तरह से पिघलने लगी थी उसकी पेंटिंग गीली होना शुरू हो गई थी उसकी सांसों की गति तेज होती जा रही थी क्योंकि वह नहीं जानती थी कि शुभम इस तरह की गंदी बातें भी कर सकता है क्योंकि अभी तक तो वह लोग स्कूल में मौका मिलती है थोड़ा बहुत छेड़छाड़ अंगों से खिलवाड़ कर लेते थे लेकिन इस तरह के शब्दों का प्रयोग पहली बार वह शुभम के मुंह से सुन रही थी इसलिए वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी,,, मदहोशी उसके पूरे बदन पर छाने लगी थी शुभम को उसकी बातों का जवाब देते हुए बोली।)

सब कुछ मिलेगा लेकिन उसके पहले भोजन ,,,,(इतना कहकर बार डायनिंग टेबल की तरफ खाना लगाने के लिए घूम गई,,, वह दो प्लेट निकाल कर खाना परोसने लगी,, जिसकी वजह से उसका खूबसूरत बदन थीरकन खा रहा था खास करके उसकी बड़ी-बड़ी मादक गांड जो की कसी हुई साड़ी में बेहद कातिल लग रही थी। शुभम से रहा नहीं जा रहा था वह शीतल से जुड़े हर एक पल को अपनी नजरों में कैद कर लेना चाहता था जब से वह शीतल के घर में प्रवेश किया था तब से शीतल के इतने समकक्ष होने की वजह से वह पूरी तरह से उत्तेजना से भरता चला जा रहा था। शीतल के बदन से उठती हुई मादक खुशबू उसके तन बदन को पागल बना रही थी। वह गहरी गहरी सांस लेते हुए बिना पलक झपकाए शीतल को ही घूर रहा था,,,

कुछ ही पल में शीतल ने दोनों प्लेट में खाना परोस कर तैयार कर दी और वह किचन की तरफ जाने लगी और बोली,,,

तुम खाना शुरू करो मैं जल्दी से आती हूं,,,( इतना कहकर किचन की तरफ जा ही रही थी कि शुभम पीछे से आवाज देते हुए बोला,,,)

जल्दी से आ जाओ साथ ही बैठकर खाएंगे ,,,,(शीतल उसके मुंह से यह बात सुनकर कुछ पल के लिए रुकी और शुभम की तरफ देख कर मुस्कुरा दी और फिर वापस किचन में चली गई। किचन में जाते हैं और फिर खोलकर उसमें से पानी की 2 बोतल निकालने लगी कि तभी उसका मोबाइल बज उठा मोबाइल की स्क्रीन पर निर्मला का नाम देखकर शीतल के चेहरे पर मुस्कुराहट तैरने लगी वह कॉल को रिसीव कर के काम से लगाई थी कि सामने से आवाज आई,,,।

क्या हुआ शीतल शुभम आया कि नहीं ,,,,

हां आ गया है और खाना खाने की तैयारी हो रही है,,,

( शीतल की बातें सुनकर कुछ देर के लिए निर्मला एकदम खामोश हो गई और कुछ सोचने के बाद बोली।)

देखना शीतल संभालना वह अभी बच्चा ही है,,,( निर्मला की बातों में शुभम के लिए फिकर साफ झलक रही थी,,, निर्मला की यह बात सुनकर शीतल जोर जोर से हंसने लगी और हंसते हुए बोली।)

हां मैंने देखी हूं शुभम अभी बच्चा ही है जोकि कैसे अपनी मां के साथ पूरा पलंग हिला रहा था।

( शीतल की यह बात सुनकर निर्मला कुछ बोल नहीं पाए क्योंकि वह समझ गई थी कि शीतल क्या बोलना चाह रही है वह खामोश रही,,)

अच्छा निर्मला हम दोनों खाना खाने जा रहे हैं रखती हूं,,( इतना कह कर शीतल फोन काट दी और मोबाइल को फिर से किचन के टेबल पर रख कर कुछ सोचते हुए मुस्कुराने लगी।)

..................
 
शीतल मन ही मन मुस्कुरा रही थी वह बहुत खुश थी क्योंकि आज जो उसे खुशी और तन का सुख मिलने वाला था उसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी,,,, दूसरी तरफ निर्मला पार्टी में थी लेकिन उसका मन वहां पर बिल्कुल भी नहीं लग रहा था वहां पर शहर के माने जाने लोग अपनी अपनी बीवी के साथ पार्टी में शामिल हुए थे लेकिन सभी की नजर घूम फिर कर निर्मला पर ही टिक जाती थी वैसे भी पार्टी में आए सभी लोगों की बीवी से सबसे ज्यादा खूबसूरत निर्मला ही थी और यह बात पार्टी में आई दूसरी औरतों को खटक भी रही थी क्योंकि किसी न किसी बहाने उन लोगों के पति अशोक से जाकर मिल रहे थे और उसकी पत्नी से हाय हेलो कर रहे थे,,,

शीतल किचन से बाहर निकलने से पहले एक बार साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर पर हाथ लगाकर यह देख लेना चाहती थी कि वाकई में उसकी पेंटी गीली हुई है कि नहीं और साड़ी के ऊपर से ही अपनी पेंटी पर हाथ लगाते हैं उसे इस बात का एहसास हो गया कि उसकी पेंटी बुरी तरह से गीली हो चुकी थी। अपने गीलेपन के एहसास से शीतल मन ही मन प्रसन्न होने लगी,,, और पानी की दोनों बोतल लेकर वह किचन से बाहर आ गई अभी तक शुभम ने खाना शुरू नहीं किया था।

शुभम तुमने तो अभी तक सच में खाना शुरू नहीं किया (दोनों बोतल को डाइनिंग टेबल पर रखते हुए अपनी बड़ी-बड़ी बड़ी गांड को कुर्सी पर रखकर बैठ गई)

तुम्हारी शादी की सालगिरह है भला तुम्हारे पहले खाए बिना मैं कैसे खा सकता हूं,,,

औहह शुभम तुम कितने अच्छे हैं सच में तुम्हारी जिस से भी शादी होगी वह दुनिया की सबसे खुशनसीब लड़की होगी,,

तुम बनना चाहोगी दुनिया की सबसे खूबसूरत और खुशनसीब लड़की,,,,

लड़की,,,,,,, तुम पागल तो नहीं हो गए हो मैं औरत हूं और तुम मुझे लड़की कह रही हो,,

सच कहूं तो तुम मुझे लड़की से कम नहीं लगती है अगर तुम्हारे सामने एक लड़की को खड़ा कर दिया जाए तो वह तुम्हारे सामने पानी भर्ती हुई नजर आएगी,,,( इतना कहने के साथ ही शुभम पहला निवाला अपने हाथों से शीतल को खिलाते हुए बोला शीतल भी शुभम के द्वारा चलाए गए पहले निवाले को प्रसन्नता के साथ मुंह में भर ली और खाने लगी,,, शुभम की बातें सुनकर उसे बेहद खुशी हो रही थी दुनिया में ऐसी कोई भी औरत नहीं है जो अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर खुश ना हो,,,। वह कुछ बोल नहीं रही थी बस निवाले को अपने दांतो से चबाते हुए मुस्कुरा रही थी,,,

लेकिन शीतल मुझे एक बात समझ में नहीं आ रही है,,,( निवाला अपने मुंह में डालते हुए) कि जिस दिन से मम्मी तुमको और मुझे क्लास रूम में उस स्थिति में देखी थी तब से वह मुझे कभी तुम्हारे पास भी भटकने नहीं देती थी तो आज ऐसा क्या हो गया जो मुझे खुद तुम्हारे घर पर भेज दी और यह जानते हुए कि तुम घर पर अकेली हो और वह भी रात के समय,,,,

मैं अच्छी तरह से जानती थी कि यह सवाल तुम्हारे मन में जरूर उठ रहा होगा,,,,( शीतल मुस्कुराते हुए बोली)

मैं कुछ समझा नहीं,,,

यह समझ लो कि एक न एक दिन सब का दिन आता है और आज मेरा दिन है,,,,( इतना कहते हुए वह दूसरा निवाला लेकर खाना शुरु कर दी,,, शुभम को अभी भी कुछ भी समझ में नहीं आया था उसके लिए बहुत बड़ा प्रश्न था कि उसकी मां ने आखिर अकेले ही शीतल के घर पर क्यों उसे भेज दी,,, यह बात उसके लिए राज था,,, लेकिन वह कुछ बोला नहीं बस खाने का लुफ्त उठाने लगा। शीतल के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी आज उसे अपने मन की सारी मुराद को पूरी करना था,,, हर नीवाले के साथ उसे ऐसा एहसास हो रहा था कि वह शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपने गले के नीचे गटक रही है,,, पेंटी का चिपचिपा पन ऊसे बराबर महसूस हो रहा था,, पर वह अपने वजूद को अपनी पेंटी में पिघलता हुआ महसूस कर रही थी,,, कामुक और प्यासी औरतों का वजूद उनकी पैंटी तक ही सीमित रहता है जिस तरह से शीतल का था,,, शुभम जो कि उसके बेटे के ही उम्र का था अपनी कामुकता की वजह से उसे शुभम पर पूरी तरह से आकर्षण हो गया था और वह अपने बेटे की उम्र के लड़के की वजह से पूरी तरह से उत्तेजना से भर गई थी और वह अपनी पेंटी को भी दो होती हुई महसूस कर रही थी,,, शीतल पूरी तरह से चुदवाती हो गई थी और वह चलते-चलते शुभम को लेकर अपने कमरे में घुस जाना चाहती थी इसलिए वह जल्दी से खाने का कार्यक्रम से मिलाकर कुर्सी पर से खड़ी हुई,,, और शिवम को वहीं रुकने के लिए बोलकर बाथरूम की तरफ जाने लगी उसे बहुत जोरों की पेशाब लगी हुई थी और वह शुभम के लंड को अपनी बुर में लेने से पहले पूरी तरह से नमकीन पानी निकाल देना जाती थी इसलिए वह जल्दी से बाथरूम में घुस गई,,, शुभम उसे जाता हुआ देख रहा था और जब उसे इस बात का अहसास हुआ कि शीतल बाथरूम में गई है तो वह भी उसके पीछे पीछे चल दिया बाथरूम के दरवाजे के करीब पहुंचते ही उसे बहुत जोरों की सीटी की आवाज सुनाई दी और उस सिटी की आवाज सेवा अच्छी तरह से वाकिफ था क्योंकि इस तरह की सीटी की आवाज वह महीनों से सुनता आ रहा था उसे समझते देर नहीं लगी कि शीतल मुत रही है,,, यह ख्याल और एहसास उसके मन में आते वह पूरी तरह उत्तेजना से भर गया। शीतल को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि शुभम बाथरूम तक उसके पीछे-पीछे आ जाएगा इसलिए वह बाथरूम का दरवाजा खुला छोड़ रखी थी,,, लेकिन दरवाजा खुला पाकर शुभम का मन मचलने लगा उसने अब तक ना जाने कितनी औरतों को पेशाब करते हुए देखा था आज उसके मन में शीतल को पेशाब करते हुए देखने की लालच पनपने लगी और वह अपनी इस लालच को रोक नहीं पाया और सीधा बाथरूम के दरवाजे खड़े हो गया जहां से सीधा उसकी नजर शीतल पर पड़ी जो दरवाजे के ठीक सामने बैठकर पेशाब कर रही थी।,,,, शुभम के तो होश उड़ गए एक साथ चार बोतलों का नशा उसकी आंखों में उतर आया वो कभी सोचा नहीं था कि एक औरत पेशाब करते हुए इतनी ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी लगती होगी ऐसा लग रहा था कि आसमान से कोई अप्सरा नीचे जमीन पर उतर कर आई है सिर्फ और सिर्फ पेशाब करने के लिए,,,

शुभम की तो आंखें फटी की फटी रह गई उसकी पलक झपकना भूल गई वो पागलों की तरह शीतल को मूतते हुए देख रहा था,,, कदमों की आवाज की आहट सुनकर शीतल को एहसास हो गया कि शुभम भी उसके पीछे-पीछे बाथरूम में आ गया है,,, लेकिन शीतल के लिए यह पल ऐसा था कि शुभम पर सब कुछ अपना तन मन सब कुछ न्योछावर करने के लिए तैयार हो चुकी शीतल शुभम की इस हरकत से पूरी तरह से शर्मसार होने लगी क्योंकि आज तक उसने किसी मर्द के सामने पैसा आप नहीं की थी और ना ही किसी मर्द ने उसे पेशाब करते हुए देखा था,,,।

शीतल शर्मा से गाड़ी जा रही थी कि उसे मालूम था कि इस समय शुभम ठीक उसके पीछे खड़ा होकर उसकी बड़ी-बड़ी गांव को देख रहा होगा और उसके रसूलपुर से भूत आते समय निकल रही सीटी की आवाज जरूरत के कानों तक जा रही होगी इस आभासी से वह पूरी तरह से शर्म से घड़ी जा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह इस पल का सामना कैसे करें जबकि वह शुभम से चुदवाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी और एक जब औरत एक मर्द से संपूर्ण रूप से चुदवाने के लिए तैयार हो जाती है तो उसके लिए शर्म कोई मायने नहीं रखती लेकिन यहां पर शीतल के लिए यह पल बेहद शर्मनाक था लेकिन फिर भी शर्मसार होने के बावजूद भी उसके तन बदन में उत्तेजना की चिंगारियां फूट रही थी उसे उत्तेजना का भी एहसास हो रहा था कि वह आज एक गैर मर्द के सामने गैर मर्द क्या अपने ही बेटे के उम्र के लड़के के सामने वह अपनी गांड खोल कर मुत रही थी,,,, शीतल को इतनी जोरों से पेशाब लगी हुई थी कि वह अभी तक अपनी बुर में से पेशाब की धार मार रही थी जो कि सामने की दीवार की चिकनी टाइल्स पर पडते ही मोतियों के दाने की तरह फैल जा रही थी,,,,, यह पल शुभम के लिए और खास करके शीतल के लिए बेहद अद्भुत उन्माद से भरा हुआ था। इस तरह का नजारा मर्द अपनी जिंदगी में बहुत ही कम ही बार देख पाता है खास करके दूसरी औरतों को इस अवस्था में देख पाना तो शायद ही किसी मर्द के लिए नसीब हो,,, लेकिन शुभम इन सब में अपवाद था वह कई बार औरतों को इस तरह से पेशाब करते हुए देख चुका था एक तरह से पेशाब करते हुए औरतों को देखना शुभम के लिए बेहद उत्तेजना वाला पल साबित होता था और इसी के लिए वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था और दरवाजे पर खड़े-खड़े ही अपने पेंट की चैन खोलकर अपने लंड को बाहर निकाल कर उसे हिलाना शुरू कर दिया था जो कि अभी तक शर्म के मारे शीतल अपनी नजर घुमाकर पीछे खड़े शुभम को देखी नहीं थी वह बस शर्म का एहसास लिए पेशाब किए जा रही थी,,,,,,, तभी वह शुभम की बात सुनकर और ज्यादा शर्मसार होने लगी।

आहहहहह,,,,, मेरी जिंदगी का सबसे हसीन नजारा मैं अपनी आंखों से देख रहा हूं मैं कभी सोचा नहीं था कि एक औरत पेशाब करते हुए इतनी खूबसूरत लगती है मैंने तो अभी तक किसी औरत को पेशाब करते हुए नहीं देखा हूं लेकिन तुमको देख कर मुझे यह एहसास हो रहा है कि यह पल मेरी जिंदगी का सबसे बेहतरीन पल है।,,,

( शुभम किस तरह की बातें सुनकर शीतल को उत्तेजना का एहसास तो हो ही रहा था साथ ही उसे शर्मिंदगी का भी एहसास हो रहा था उसके चेहरे का रंग लाल सुर्ख हो गया था वह पूरी तरह से उत्तेजना से भर्ती चली जा रही थी शुभम की यह बात सुनकर वह शुभम की तरफ देखे बिना ही बोली।)

क्या कर रहे हो शुभम मुझे क्यों इस तरह से शर्मिंदा कर रहे हो,,,,,

इसमें शर्मिंदा करने वाली कौन सी बात है मेरा नसीब अच्छा था कि मैं तुम्हारे पीछे पीछे ईधर आ गया वरना इस तरह का खूबसूरत नजारा मैं अपनी आंखों से कभी नहीं देख पाता (शुभम अपने खड़े लंड को हाथ से हिलाते हुए बोला जो कि शीतल को इस बात का अहसास तक नहीं था कि शुभम ठीक उसके पीछे दरवाजे पर खड़ा होकर अपना लंड हिला रहा है।)

चले जाओ सुभम मुझे शर्म आ रही है मुझे इस तरह से मेरे पति ने भी कभी नहीं देखा है,,,,

इसका मतलब मैं दुनिया का पहला इंसान हूं जो तुम्हें इस तरह से पेशाब करते हुए देख रहा हूं,,,,,

अच्छा शीतल क्या सभी औरतें इतनी ज्यादा सेक्सी और खूबसूरत लगती है पेशाब करते हुए या सिर्फ तुम्ही लग रही हो,,,,

मुझे क्या मालूम मैं क्या सब को देखने जाती हूं क्या,,,,

देखने तो नहीं जाती लेकिन फिर भी जिस तरह से हम लड़के एक साथ पेशाब करते हैं और एक दूसरे का लंड कैसा है इस बारे में जान लेते है उसी तरह से तुम औरतें लोग भी तो एक साथ कहीं पेशाब करती होगी तो एक दूसरे का तो देख ही लेती होगी कि किसकी गांड कैसी है किसकी बुर कैसी है,,,,

धत्,,,,, तो बहुत शरारती लड़का है मुझे आज पता चल रहा है,,,। मैं कभी सोची नहीं थी कि तुम इस तरह की गंदी बातें भी करता होगा,,

हम लड़के लोग तो ऐसे ही होते हैं लेकिन तुम औरतें कैसी होती हो यह तो तुम्ही बता सकती हो,,,( शुभम का लंड अपनी औकात में आ चुका था वह धीरे-धीरे अपने लंड को आगे पीछे करते हुए हिला रहा था जिस पर अभी तक शीतल की नजर नहीं पड़ी थी,,, अब उसकी बुर से सीटी की आवाज आना बंद हो गई थी इसका मतलब साफ था कि वह पेशाब कर चुकी थी अब किसी भी वक्त वह खड़ी हो सकती थी इसलिए सुभम एक पल की भी देरी किए बिना धीरे-धीरे उसकी तरफ आगे बढ़ने लगा,,,, वह खड़ी होती है इससे पहले ही वह ठीक उसके बगल में जाकर खड़ा हो गया उसी समय शीतल खड़ी हो रही थी और अपनी साड़ी को नीचे गिराते हुए सही कर पाती इससे पहले ही उसकी नजर शुभम के खड़े लंड पर पड़ गई और वह उसी तरह से जड़वंत तक खड़ी की खड़ी रह गई,,,, शीतल के होश उड़ गए जैसा पहले देखी थी उससे भी कई ज्यादा ताकतवर उसे आज शुभम का लंड लग रहा था उसकी मोटाई देखकर एक पल के लिए तो शीतल घबरा गई कि इतनी मोटे लंड को अपनी बुर की छोटे से छेद में ले पाएगी कि नहीं,,,, पेशाब करते हुए शुभम के द्वारा देख लिए जाने पर अभी तक शीतल के चेहरे पर शर्म का एहसास साफ झलक रहा था और इस तरह से शुभम का लंड देख लेने पर उसकी हालत खराब होने लगी। शीतल पूरी तरह से असमंजस में थी और शुभम उसकी असमंजस ता दूर करते हुए बोला,,,

तुम्हें मुतता हुआ देखकर मुझे भी पेशाब लग गई,,,,

( शुभम की यह बातें सुनकर एक बार फिर से शीतल के चेहरे पर शर्म की लालिमा छाने लगी क्योंकि इस तरह से तो आज तक उसके पति ने भी उसे से यह बात नहीं कही थी और शुभम उसके बेटे की उम्र का होने के बावजूद भी इतनी खुले शब्दों में उससे बात कर रहा था यह एहसास ही उसे एक दम शर्मिंदगी के साथ-साथ उत्तेजना से भर दे रहा था,,। शीतल से कुछ बोला नहीं जा रहा था वह बस एक एक शुभम के मोटे तगड़े लंड को देखे जा रही थी मानो उसने अपनी आंखों से कोई अद्भुत चीज देख ली हो,,, शुभम भी पूरी तरह से उत्तेजना से भर गया था क्योंकि अभी तक शीतल अपनी साड़ी को कमर तक उठाए हुए खड़ी थी अभी तक अपनी साड़ी को नीचे गिरा ही नहीं थी जिससे उसकी लाल रंग की पैंटी अभी भी उसकी घुटनों के ऊपर उसकी मांसल जांघों में फंसी हुई नजर आ रही थी और साथ ही उसकी चिकनी रसीली बुर एकदम मदहोश किए जा रही थी,,, बुर की पतली दरार देखकर शुभम के खुद होश उड़ने लगे,,,, क्योंकि शीतल की उम्र देखकर कोई भी नहीं कह सकता था कि शीतल की बुर इस तरह से दिखती होगी जैसे किसी जवान लड़की की दिखती है,,, शीतल अभी भी शुभम के लंड को देखे जा रही थी वह पूरी तरह से अपने होशो हवास खो बैठी थी,,, शुभम को भी अब जोरों की पेशाब लग चुकी थी उसे कंट्रोल नहीं हो रहा था इसलिए वह शीतल से बोला,,,,

शीतल अपनी नरम नरम हाथों में अगर मेरा लंड पकड़ कर थाम लो तो मैं अच्छे से पेशाब कर लूंगा,,,,

( शीतल तो यही चाहती थी जो उसके मन में था वह बात शुभम अपने मुंह से बोल दिया था वह कब बेकरार थी शुभम के लंड को अपने हाथों से पकड़ने के लिए लेकिन पेशाब करते हुए जिस तरह की शर्मिंदगी का अहसास उसे हो रहा था उस एहसास तले वह दबे जा रही थी और बोल कुछ नहीं पा रही थी इसलिए शुभम की यह बात सुनते ही वह तुरंत एक हाथ आगे बढ़ाकर शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपने हाथ में ले ली,,,, जैसे ही शीतल ने अपने हाथ में शुभम के मोटे तगड़े लंड को पकड़ी वैसे ही लंड की गर्माहट से उसका पूरा वजूद पिघलने लगा उसकी बुर से उसका नमकीन रस अमृत की बूंद बन कर नीचे टपक गया,,,, पूर्वा उत्तेजना के मारे कसके अपनी मुट्ठी में शुभम के लंड को दबोच ली,,,

ससससहहहह,,,, सुभम,,,,( उसके मुंह से इस तरह की कर्म सिसकारी फूट पड़ी और वह इससे आगे कुछ बोल नहीं पाए शुभम तुरंत अपने होंठ को उसके होठों पर रखकर चूसना शुरू कर दिया और साथ ही मुतना भी शुरू कर दिया,,,, एक अद्भुत बेहद काम उत्तेजना से भरा हुआ नजारा बाथरूम में दर्शाया जा रहा था शीतल पूरी तरह से कामविभोर होकर शुभम के लंड को अपने हाथ में लेकर उसे मुतने में सहायता कर रही थी और शुभम अपनी उत्तेजना में पागल होकर शीतल के लाल लाल होठों को चूसता हुआ इस पल का पूरी तरह से आनंद ले रहा था,,, अभी भी है एक हाथ से शीतल अपनी साड़ी को उठाए हुए थे शुभम से रहा नहीं जा रहा था और वह वह अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर अपनी गरम-गरम हथेली को शीतल की तपती हुई बुर पर रखकर उसे मसलना शुरू कर दिया,,,

ससससहहहह,,,,आहहहहहहह,,,,उउउउममममममम,,,

( शीतल की बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी इसलिए शुभम उसके अंदर अपनी बीच वाली उंगली को डालने की लालच को रोक नहीं पाया और जैसे ही अपने बीच वाली उंगली को शीतल की बुर में प्रवेश कराया वैसे ही कामोत्तेजना से पागल होकर शीतल के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज फूटने लगी,,,,, शीतल पर चारों तरफ से शुभम हमला कर रहा था शीतल पूरी तरह से ध्वस्त हुए जा रही थी,,, शीतल का बदन उसके कामों में बिल्कुल भी नहीं था उसका एक हाथ शुभम के लंड पर था और शुभम के साथ किए जा रहा था साथ ही वहां अपना एक हाथ शीतल की बुर पर रखकर उसने उंगली पर रहा था जिसकी वजह से शीतल कसमस आते हुए अपनी गांड को शुभम की उंगली पर गोल गोल नचा रही थी,,, शीतल ने अपनी जिंदगी में इस तरह की उत्तेजना का कभी भी एहसास नहीं की थी जिस तरह का एहसास हुआ अपने बाथरूम में शुभम के साथ कर रही थी,,, वह पूरी तरह से मदमस्त हुए जा रही थी वह बिल्कुल भी अपने होशो हवास में नहीं थी वह पूरी तरह से शुभम के आकर्षण में अपने वजूद को निकलता हुआ महसूस कर रही थी शुभम उसके साथ मनमानी कर रहा था जो कि यही शीतल भी चाहती थी देखते ही देखते शुभम भी पेशाब कर लिया लेकिन अभी भी शीतल उसके लंड को जोर से अपनी मुट्ठी में कस के ऊपर नीचे करके हिला रही थी। शीतल का मंदिर कुल भी नहीं हो रहा था शुभम के लंड को अपने हाथ से जुदा करने के लिए शुभम अभी भी अपनी उंगली को उसकी बुर में पेले जा रहा था और शीतल भी अपनी गांड को गोल-गोल उसकी उंगली पर नचा रही थी,,,, शीतल के सब्र का बांध टूटता हुआ नजर आ रहा था वह अपने आप पर काबू कर पाने में बिल्कुल भी असमर्थ साबित हो रही थी अपने मुंह से तो कुछ बोल नहीं पा रही थी लेकिन इशारों ही इशारों में शुभम से बहुत कुछ बोल दे रही थी अब उसकी बुर में उंगली नहीं बल्कि उसका नंबर चाहिए था जो कि वह अपना यह सारा दर्शाते हुए शुभम के लंड को पकड़ कर अपनी तरफ खींच रही थी जो कि शुभम भी उसके सारे को समझ रहा था लेकिन वह इतनी जल्दी उसकी बुर में लंड पेलना नहीं चाहता था इसलिए वह तुरंत अपनी मर्दाना ताकत दिखाते हुए शीतल को उसी स्थिति में अपनी गोद में उठा लिया शीतल को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि शुभम इस तरह से उसे अपनी गोद में उठा लेगा और उसे विश्वास भी नहीं हो रहा था क्योंकि शुभम के मुकाबले शीतल का वजन बहुत ज्यादा था

लेकिन शुभम गठीला बदन का मर्दाना ताकत से भरपूर नव जवान लड़का था और वह अपनी ताकत दिखाते हुए शीतल को इस समय अपनी गोद में उठा लिया और उसे जरा भी दिक्कत नहीं हो रही थी उसे गोद में उठाने में,,,,

लेकिन शुभम की इस हरकत पर शीतल एक बार फिर से शर्मसार होने लगी,,, शर्म के मारे उसके गाल एक बार फिर से टमाटर की तरह लाल हो गए,,,,

क्रमशः

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