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Adultery एक अधूरी प्यास- 2

तैयारी हो चुकी थी नए सफर के लिए,,, शुभम काफी उत्साहित था इस नए अनुभव के लिए और निर्मला के दिल की धड़कन सोच कर ही जोरों से धड़क रही थी कि जब एक साथ तीनों मिलेंगे तो क्या होगा,,,, और शीतल तो व्याकुल थी जल्द से जल्द शिमला पहुंचने के लिए वहां की ठंडी वादियों में तीनों की गरम जिस्म एक नया अध्याय लिखेंगे,,, तकरीबन 16 से 18 घंटे का रास्ता तय करना था शिमला पहुंचने के लिए इसलिए तीनों बड़े सवेरे ही घर से निकल गए,,,

निर्मला ने पीली रंग की साड़ी पहनी हुई थी जिसमें उसका गोरा बदन बेहद मनमोहक लग रहा था,,, निर्मला का कसा हुआ गदराया बदन पीली साड़ी में निखर कर सामने आ रहा था,, तैयार होते समय ही सुभम की नजर अपनी मां पर पड़ी थी और उसे देखते ही शुभम काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था अगर थोड़ा और समय मिलता तो शायद शुभम तैयार होते होते ही अपनी मां की चुदाई कर दिया होता,,

शीतल साड़ी की जगह लाल रंग का सूट पहनी हुई थी,,, जिसमें उसका भरावदार बदन काफी हद तक उसके लाल रंग की कसे हुए सूट में और ज्यादा कस गया था,,, कसी हुई ड्रेस होने के कारण शीतल के नितंबों का उभार कुछ ज्यादा ही बड़ा और गोल गोल तरबूज की तरह लग रहा था जिस पर नजर पड़ते हैं शुभम के लंड ने हल्की सी अंगड़ाई ली थी,,,

स्टेरिंग पर निर्मला बैठी हुई थी गाड़ी उसे ही चलानी थी और पीछे शीतल शुभम को कहां बैठना है,,, इसका फैसला हुआ खुद नहीं ले पा रहा था,,, वह कार के बाहर खड़ा था तो शीतल ही उसे अपने पास बैठने के लिए पीछे बुला ली,,, शीतल कि ईस बात पर निर्मला को थोड़ा गुस्सा जरूर आया था लेकिन ना जाने क्यों अब उसे ज्यादा दिक्कत नहीं हो रही थी,,

गाड़ी सड़क पर दौड़ रही थी,,, शिमला में रहने का इंतजाम बहुत ही चौकस था,,, शीतल के बचपन की सहेली का बंगला वहा था जो कि आज कल न्यूयॉर्क में थी और शीतल जब भी मौका मिलता था तो वह शिमला घूमने निकल जाती थी,,, इसलिए वहां पर घूमने का अनुभव वहां के स्थानों का ज्ञान शीतल को अच्छी तरह से था इसलिए किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं थी,,,

मुख्य सड़क पर निर्मला बड़े आराम से गाड़ी चला रही थी,,, वह बातों का दौर शुरू करते हुए बोली।

मेरा शुरू से ही सपना था शिमला घूमने का,,,

क्या कह रही हो निर्मला,,, क्या सच में तुम अभी तक शिमला नहीं गई हो,,,,?

हां मैं सच कह रही हूं मैं कभी शिमला नहीं कही लेकिन वहां जाने का बहुत मन करता है खास करके जब मेरी शादी हुई थी,,,

मतलब कि हनीमून मनाने के लिए,,,(बीच में तपाक से शुभम बोल पड़ा,, अब ऊसमें जरा भी शर्म बाकी नहीं रह गई थी,और इसमें ऐसा लग रहा था कि निर्मला को भी सुभम की बात सुनकर किसी भी प्रकार की दिक्कत महसूस नहीं हुई,,,,)

लगता है शुभम तुम्हारी मां बर्फ की पहाड़ियों पर नंगी होकर तुम्हारे पापा से चुदवाना चाहती थी,,,

क्या बकवास कर रही हो सीता थोड़ा तो शर्म करो,,,

निर्मला क्या तुम्हें ऐसा लगता है कि अब हम तीनों को आपस में किसी भी प्रकार की शर्म करनी चाहिए,,, शुभम अब हम दोनों के लिए हमारा प्रेमी हमारा पति सब कुछ है।

(शीतल की बातें निर्मला को अंदर ही अंदर अच्छी भी लग रही थी,, लेकिन एक मां होने के नाते वह जानबूझकर ऊपर से शीतल की इस तरह की बातों से नाराज होने का दिखावा कर रही थी।) और सच कहूं तो निर्मला जो सपना तुमने अपने शादी के बाद जवानी के दिनों में देखी थी उसे पूरा करने का समय अब आ गया है,,,, मैं तुमसे पहले भी कह चुकी हूं कि हम तीनों अब अपनी हनीमून पर ही जा रहे हैं,,,

शीतल तुम्हारी यह सब बातें,,,, अब मैं क्या कहूं तुम सच में एकदम बेशर्म हो गई हो,,,

बेशर्म बनने में जो मजा है मेरी जान वह सीधी-सादी बनकर रहने में बिल्कुल भी नहीं है,,, तुम ही सोचो अगर तुम सीधी-सादी होती तो अब तक अपनी नीरस जिंदगी को घसीट घसीट कर आगे बढ़ा रही होती,,, बेशर्म बनने के बाद ही तुम्हें अपने बेटे का लंड प्राप्त हुआ है,,,,,

(अपनी मां और शीतल कि इस तरह की गंदी बातें सुनकर शुभम के तन बदन में आग लग रही थी एक तो कार के अंदर दुनिया की सबसे खूबसूरत दोनों औरतें उनका मादक बदन और ऊपर से उन दोनों के बदन में से आ रही लेडीज परफ्यूम की मादक खुशबू यह सब मिलाकर शुभम की हालत खराब किए हुए थे,,, जींस में शुभम का लंड पूरी तरह से खड़ा हुआ था,,, जिसे वह बार-बार अपने हाथ से बैठाने की नाकाम कोशिश कर रहा था।)

देखो शीतल,, जब इंसान का पेट नहीं भरता तो ही वह बाहर पेट भरने के लिए निकलता है,,, साला मेरा पति अगर लायक होता तो मुझे इस तरह के दिन देखने ही नहीं पड़ते,,,।

मेरी भी तो यही तकलीफ है निर्मला,,, तुम्हारा तो चलो फिर भी घर में जुगाड़ हो गया मेरा क्या मेरे पति का तो खड़ा भी नहीं होता तुम तो शादी के कुछ साल तक अपने पति से चुदाई का मजा भी लेकर गईं लेकिन मेरे नसीब में तो यह भी नहीं था,,

(अपन दोनों औरतों की बातें सुन रहा था और मस्त हुआ जा रहा था उसे सब समझ में आ रहा था कि यह दोनों औरतें वास्तव में बहुत ही प्यासी है जिसमें से वह एक की तो प्यास बुझाता आ रहा था,,, अब दूसरे की भी प्यास बुझाने की जिम्मेदारी उसी पर थी,,, बार-बार सीकर निर्मला से बातें करते हुए अपनी गांड उठाकर सीट पर से खड़ी होकर अगली सीट पर अपने दोनों हाथ की कोहनी देखकर निर्मला से बात करने लगती थी जिससे शुभम को शीतल की भारी-भरकम गांड एकदम साफ नजर आ रही थी,,,,, सीतल ने सलवार इतनी टाइट पहन रखी थी कि उसकी मद मस्त गोल-गोल गांड का पूरा भूगोल कपड़े पहने होने के बावजूद भी नजर आ रहा था,,, तुम दोनों की गरम बातें और उसमें शीतल का भरे हुए जिस्म की भड़कती हुई जवानी उसे बेचैन कर रही थी,,, वह अगली सीट पर टेका लेकर अपनी गांड को गोल-गोल इधर-उधर हिला रही थी,,, जो कि वह जानबूझकर शुभम को अपनी गांड का जलवा दिखा कर बेचैन कर रही थी,,, और शुभम से भी रहा नहीं जा रहा था वह आगे के मिरर कांच मैं पूरी तरह से तसल्ली कर लेने के बाद अपना हाथ उठाकर सीधे सीतल की गांड पर रख दिया,,,,,

शीतल की बड़ी बड़ी गांड पर अपनी हथेली रखते ही शुभम के तन बदन में एक अद्भुत एहसास डोल गया,,, शुभम को ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे वह ढेर सारी नरम नरम रुई पर अपना हाथ रख दिया हो,,, ना चाहते हुए भी सीकर की मदमस्त नितंबों पर हाथ रखते हैं आश्चर्यजनक अद्भुत अहसास से भर जाने की वजह से शुभम का मुंह खुला का खुला रह गया,, उसकी मां की उपस्थिति में वह गरम सिसकारी भी नहीं ले सका,, बड़ी मुश्किल से वह अपनी सिसकारी को अपने अंदर ही दबाए हुए था,,, यही हाल शीतल का भी था बार-बार इस तरह से अपनी सीट पर से गांड उठाकर उठ जाना,,, और अपनी बड़ी बड़ी गांड को हवा में लहराते हुए शुभम की आंखों के सामने हीलाना,,, यह सब वह सुभम को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए ही कर रही थी,,,, और शुभम की तरफ आकर्षित हो भी चुका था आखिरकार औरतों की बड़ी बड़ी गांड ही तो उसकी सबसे बड़ी कमजोरी थी।

मुख्य हाईवे पर कार अपनी गति में भागती चली जा रही थी जैसे-जैसे दिन बीतता जा रहा था वैसे वैसे हाईवे पर वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही थी,,, शुभम अपनी मां से नजरें बचाकर जोर-जोर से जितना हो सकता था इतना शीतल की गांड का हिस्सा अपनी हथेली में भर-भर कर जोर जोर से दबाने का आनंद लूट रहा था,,, शीतल को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी वह जानबूझकर निर्मला को अपनी बातों में उलझाए हुए थी,,, और अपनी गांड उठाकर अगली सीट पर टेका देकर खडी थी,,, सुभम की हरकत की वजह से शीतल की पेंटी गीली होने लगी, थी,,,,,,, उत्तेजना के मारे शीतल के गाल लाल हो चुके थे,,।

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कार के अंदर का माहौल गर्म होने लगा था शुभम अपनी मां की नजरों से बचकर अपनी हथेलियों से शीतल की गोलाकार नितंबों के संपूर्ण भूगोल को अपने हाथों से खंगाल रहा था,, सलवार के कपड़े की पतली परत भर थी जो की नितंबों और हथेलियों के बीच में पर्दे का काम कर रही थी बाकी सब कुछ हथेलियों से टटोलने से ही नितंबों की संपूर्ण गाथा स्पर्श करने मात्र से ही पढ़ी जा रही थी। शुभम पहले से ही शीतल के संपूर्ण नंगे बदन का जायजा अपनी नजरों के साथ-साथ अपने हथेलियों से स्पर्श करके और अपने लंड से उसके बदन की गहराई में उतर कर शीतल के खूबसूरत बदन की स्थिति से वाकिफ हो चुका था।,,

कार अपनी रफ्तार से हाईवे पर भागी चली जा रही थी और शीतल हंस हंस के निर्मला से बातों का दौर जारी रखी थी, निर्मला को रत्ती भर भी एहसास नहीं हो रहा था कि उसकी पीठ पीछे सीट पर उसका बेटा शीतल के भराव दार गोलाकार भारी भरकम गांड से खेल रहा है,,,। शीतल की हालत खराब होने लगी थी उसे अब जाकर एहसास हुआ कि सलवार पहन कर नहीं आना चाहिए था अगर आज वह साड़ी पहनी होती तो शिमला पहुंचने से पहले ही जुगाड़ लगाकर उसकी मां की उपस्थिति में ही किसी भी तरह से साड़ी उठाकर शुभम के लंड को अपनी बुर में ले लेती,,,। उसे अपनी गलती पर पछतावा हो रहा था।

निर्मला तुम इतने अच्छे से गाड़ी चला लेती हो ये आज मुझे पता चल रहा है,,,।

गाड़ी तो तुम भी चला लेती हो ना शीतल,,,

हां हां चला तो लेती हूं लेकिन इस तरह से हाईवे पर चलाने का मुझे बिल्कुल भी अनुभव नहीं,,, है,,।

इसमें अनुभव की क्या जरूरत है जिस तरह से गाड़ी चलाई जाती है उसी तरह से चलाना होता है बस निगाह अपनी सड़क पर रहनी चाहिए,,,,।

हां सो तो है,,,,।

(शीतल नीर्मला से बातों का दौर जारी रखे हुए थी और उसकी पीठ के पीछे ही अपनी बड़ी बड़ी गांड को गोल गोल घुमाते हुए उसके ही बेटे से अपने नितंब मर्दन का आनंद ले रही थी,,,शुभम काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था उसके बदन में शीतल के गर्म जवानी का खून ऊबल रहा था,,,शीतल की बड़ी बड़ी गांड से खेलने से वह इतना ज्यादा कामोतेजना का अनुभव कर रहा था कि उसकी इच्छा तो हो रही थी कि कार के अंदर ही अपनी मां की आंखों के सामने ही शीतल की फूली हुई कचोरी जैसी बुर में अपना लंड डालकर उसकी चुदाई कर दे।,,,शीतल निर्मला से बातें कर रही थी और शुभम एक हाथ से शीतल की गांड को जोर-जोर से दबाते हुए अपने बीच वाली उंगली को सलवार के ऊपर से ही उसकी गांड की दरार के बीचों बीच उसकी बुर में डालने की कोशिश करने लगा,,, उंगली डालने के प्रयास में शुभम को इतना तो पता चल ही गया कि शीतल की बुर गीली हो चुकी है,,, और क्या एहसास ही शुभम को और ज्यादा उत्तेजित करने लगा। वह अपने मन में सोचने लगा कि अगर मां की उपस्थिति ना होती तो अब तक वह सीतल को अपने नीचे ले लिया होता,,,, लेकिन मजबूर था वह अपनी मां के सामने शीतल को ज्यादा अहमियत नहीं देना चाहता था,,,

दोनों तरफ आग बराबर लगी हुई थी दोनों एक दूसरे के अंगों से खेलने के लिए आतुर थे। शुभम तो फिर भी अपनी मां से नजरें बचाकर शीतल की गोल-गोल जवानी से खेल रहा था लेकिन शीतल के मन में आग लगी हुई थी वो जानती थी कि ईस समय सुभम का लंड पुरी औकात में आ चुका होगा,,, इसलिए वह शुभम के लंड को अपनी आंखों से देखने के लिए उसे छूने के लिए उसे अपने हाथों में भरकर हीलाने के लिए आतुर हुए जा रही थी। तकरीबन 1 घंटे तक शीतल उसी तरह से अपनी गांड उठाकर सामने की सीट पर कोहनी टीका कर निर्मला से बातें करती रही और शुभम के द्वारा नितंब मर्दन का आनंद लेती रही,,,,,

सीट पर बैठ जाओ शीतल थक जाओगी कब से इसी तरह से बातें कर रही हो,,,,

क्या करूं निर्मला शिमला पहुंचने की इतनी जल्दी पड़ी है कि मुझसे रहा नहीं जा रहा,, है,,,(शीतल हड़बड़ाते हुए बोली,,,)

इस तरह से गांड उठाकर खड़ी रहोगी तो पहुंच तो नहीं जाएगी ना,,,,,।

तुम समझ नहीं रही हो निर्मला मेरे अंदर शिमला पहुंचने की इतनी जल्दी मची हुई है कि पूछो मत।

तुम्हें शिमला पहुंचने की जल्दी नहीं बल्कि मेरे बेटे के लंड को अपनी बुर मे लेने की जल्दी पड़ी है ,,,,

जैसा तुम समझो नर्मदा,,, और तुम जैसा कह रही हो वैसा ही है,,एक बार तुम्हारे बेटे का लंड को अपनी बुर में लेने के बाद मेरी बुर में इस तरह की खुजली मची हुई है कि जब तक तुम्हारे बेटे का लंड मेरी बुर में दुबारा नहीं जाएगा तब तक यह खुजली मिटने वाली नहीं है,,,,,(शीतल एकदम से गर्म आह भरते हुए बोली,,, दोनों की बातें सुनकर शुभम का बुरा हाल था वह लगातार शीतल की गांड से खेल रहा था और जिस तरह से उसकी मां ने एकदम रंडियों की तरह शीतल को उसका लंड अपनी बुर में लेने के लिए बोली यह बात उसके कानों में पड़ते ही वह पूरी तरह से मदहोश होने लगा उससे रहा नहीं गया और वह आपने पेंट की चैन को अपनी मां की नजर बचाकर खोलकर अपने मोटे तगड़े लंड को बाहर निकाल कर हीलाना शुरू कर दिया,,, शुभम थोड़ा सा अपनी सीट से आगे की तरफ सरक कर आ गया था ताकि उसकी मां को मिरर मैं उसकी परछाईं ना दिखाई दे,,,,शीतल की नजर जैसे ही शुभम के मोटे तगड़े लंड पर पड़ी उसकी बुर ऊतेजना के मारे कुल बुलाने लगी,,,, उससे रहा नहीं गया और वह अपनी सीट पर बैठ गई,,,, गाड़ी अपनी रफ्तार से हाईवे पर आगे बढ़ती चली जा रही थी हाईवे पर वाहनों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही थी हाईवे के किनारे छोटे-छोटे बाजार नजर आ रहे थे और उन में लोगों की भीड़ उमड़ रही थी यह सब को लगातार पीछे छोड़ते हुए निर्मला की कार आगे बढ़ती चली जा रही थी,,।

चिकन बड़े आराम से अपनी कार को चला रही थी अबे पर आती जाती गाड़ियों की आवाज और होर्न शोर-शराबे से पूरा माहौल गूंज रहा था,,, और ऐसे में शुभम और शीतल किसी और ही दुनिया में मस्त थे,,, सीतल अपनी सीट पर बैठी हुई थी,, निर्मला अपनी पीठ के पीछे सीट पर क्या हो रहा है इस बात से अनजान गाड़ी चलाने में मस्त थी सीकर के करीब बैठा सुभम अपने पेंट की चैन खोलकर अपने टनटनाते हुए लंड को बाहर निकालकर उसे एक हाथ से मुठिया रहा था,,,पर यह देखकर शीतल के तन बदन में जो आग लग रही थी उस को शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है। उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी वह निर्मला से नजरें बचाकर धीरे-धीरे अपने हाथ को सीटसे रगडते हुए शुभम की टांगों के बीच बढ़ रही थी जैसे-जैसे उसका हाथ आगे बढ़ रहा था वैसे वैसे उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी,,,, शीतल की आंखों में सुभम के लंड को देखकर मदहोशी छाई हुई थी,,, माहौल पूरी तरह से गरमा चुका था,,, शुभम अच्छी तरह से जानता हूं आगे पर वाहनों की कतार लगी हुई थी जिस रफ्तार से गाड़ियां आ जा रही थी उसे देखते हुए उसकी मां का ध्यान पीछे जाने वाला नहीं है,,, लेकिन फिर भी वह पूरी तरह से एहतियात बरत रहा था वह कभी अपनी मां को तो कभी अपने लंड को और कभी शीतल की तरफ देख ले रहा था,,, उत्तेजना के मारे शीतल का गला सूख रहा था,,,, और अगले ही पल सीकर अपनी हथेली में शुभम के मोटे तगड़े लंड को भर ही ली,,,जैसे ही शीतल के हाथ में शुभम का मोटा तगड़ा लंड आया वैसे ही मानो सीतल की सांसे अटक गई,,, वह एकदम सनन रह गई,,,शीतल की हालत खराब हुए जा रही थी उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि सुभम के लंड में एक अद्भुत एहसास और आकर्षण बसा हुआ है जब भी वह शुभम के लंड को अपने हाथ में लेती है तो एक अलग ही एहसास होता है निरंतर उसके आकार में बढ़ोतरी का एहसास होने लगता है जो कि इस समय शीतल को सुभम के लंड का आकार और मोटाई कुछ ज्यादा ही लग रही थी,,,। वह जोर-जोर से शुभम के लंड को हिलाना शुरू कर दी,,,,

आहहहहह,,, बहुत ही धीमी स्वर में शुभम कि सीसकारी की आवाज निकल गई,,,

कार की पिछली सीट पर मदहोशी का आलम अपनी चरम सीमा पर था,,, किसी दूसरे से यह नजारा देखे जा पाना असंभव था क्योंकि निर्मला के कार का शीशा ब्लैक था जिसमें से अंदर से तो बाहर का सब कुछ देखा जा सकता था लेकिन बाहर से अंदर का कुछ भी नहीं देखा जा सकता था,, इसलिए शीतल और शुभम को सिर्फ निर्मला की तरफ से चिंता थी बाकी बेफिक्र थे दोनों,,,।

शीतल की नरम नरम कलाई में शुभम कै लंड की गर्माहट सीतल के पूरे वजूद को पिघला रही थी,,, शीतल का मन ललच रहा था शुभम के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने के लिए। सीतल के मुंह में पानी आ रहा था साथ ही उसकी बुर में भी पानी का सैलाब उठ रहा था। शीतल के नरम नरम हथेलियोंयों का स्पर्श पाकर शुभम कै लंड में और ज्यादा जोश आ गया था,,।

शीतल अपने आप को रोक नहीं पाई और पहले जानबूझकर अपना रुमाल सीट के नीचे गिरा दी और उसे ढूंढने की वजह बना कर तुरंत शुभम की टांगों के बीच झुकी और उसकी मोटे तगड़े लंड को एक झटके में अपने पूरे मुंह में लेकर उसे चूसने लगी।,,,,,ससससहहहहह,,, अद्भुत अहसास से दोनों एकदम से भर गए। शुभम अपनी उत्तेजना को दबा नहीं पाया और उत्तेजना के मारे अपनी कमर को हल्के से ऊपर की तरफ उठा दिया,,,तकरीबन 5 या 7 सेकंड है शीतल शुभम के लंड को अपने मुंह में ले सकती और वापस से निकाल कर अपनी सीट पर बैठ गई,,, शुभम को शीतल से इस तरह की उम्मीद और हरकत की अंदाजा बिल्कुल भी नहीं था इसलिए शीतल की इस हरकत पर वह पूरी तरह से मदहोश हो गया रक्त का प्रवाह उसके लंड की नसों में तीव्र गति से होने लगा,, एक तो शीतल की यह गर्मजोशी और मदहोशी से भरी हुईयह कामुक हरकत और ऊपर से उसका जोर जोर से लंड को हिलाना शुभम से बर्दाश्त नहीं हो रहा था,,,। निर्मला को इस बात का अहसास तक नहीं था कि पिछली सीट पर दोनों मिलकर इस तरह की हरकत कर रहे होंगे और इसी का फायदा उठाते हुए शीतल एक बार और नीचे झुकी और शुभम के लंड को मुंह में लेकर पूरा गले तक उतार कर सात आठ सेकंड तक फिर से चूसने लगी,,,,, शुभम शीतल के जीभ की गर्माहट को सह नहीं पाया और जैसे ही सीतल शुभम के लंड को मुंह में से बाहर निकालि वैसे ही तुरंत शुभम कै लंड से गर्म लावा बाहर निकलने लगा,, जिसे शीतल ने अपनी रुमाल से ढक कर उसके लंड से निकला हर एक बूंद को रुमाल में ले ली,, और शुभम कैलेंडर को अच्छी तरह से रुमाल से साफ करके धीरे से कार का कांच नीचे करके उसे बाहर हाईवे पर फेंक दे,,,

शुभम काफी खुश था इस सफर का पहला चरण ऐसा लग रहा था मानो उन दोनों ने पार कर लिया था। दोनों के चेहरे पर संतुष्टि भरा एहसास साफ झलक रहा था।

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तीनों का यह शिमला का सफर बेहद रोमांचक और कामोत्तेजना से भरा हुआ था जिसकी शुरुआत से शीतल ने शुभम के लंड का पानी निकाल कर कर चुकी थी,,,।

गाड़ी अपनी रफ्तार से हाईवे पर भागी चली जा रही थी घंटो बीत चुके थे निर्मला को गाड़ी चलाते,,, इसलिए एक ही सीट पर बैठे बैठे उसकी गांड में दर्द होने लगा था,,,। दोपहर के 2:00 बज रहे थे अब तीनों को भुख भी कसके लगी हुई थी,,,।

निर्मला एक अच्छी सी होटल देखकर वहीं रुको खाना खा लेते हैं,,,,। ( शुभम की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए शीतल बोली,,,। और शीतल के यह मुस्कुराहट निर्मला ने शीशे में देख ली शुभम भी उसको देख कर मुस्कुरा रहा था जो देखकर निर्मला पूरी तरह से जल भुन गई,,, उसे लगने लगा कि अगर वह कुछ ऐसा वैसा नहीं करेगी तो शुभम शीतल की तरफ पूरी तरह से आकर्षित हो जाएगा वैसे भी दोनों के बीच में सब कुछ हो चुका था,,,,, एक तरह से निर्मला को शीतल से जलन होने लगी थी और उसे अपनी बेटे पर गुस्सा भी आ रहा था,,,, उसे क्या करना चाहिए कि उसका बेटा एक बार फिर से पूरी तरह से उसका हो जाए इसी बारे में सोच रही थी कि तभी उसे सामने एक अच्छी सी होटल दिखाई दी और वह तुरंत उस होटल के सामने कार को खड़ी कर दी,,,।

शुभम के साथ साथ निर्मला और शीतल कार से उतर गए और देखने वाले की नजरें शीतल और निर्मला पर चिपकी की चिपकी रह गई,,, दोनों बला की खूबसूरत थी गदराया जिस्म और बड़ी-बड़ी चूचियां और बाहर को निकले हुए सुडोल नितंब कुल मिलाकर पूरी तरह से दोनों काम देवी लग रही थी जिसके आकर्षण में वहां के जितने भी मर्द थे उनकी नजरें उन पर जमी हुई थी,,,, होटल में प्रवेश करते ही होटल का पूरा स्टाफ शीतल और निर्मला के इर्द-गिर्द घूमने लगा,,,। तीनों एक टेबल पर बैठकर टेबल पर पड़े जग में से ठंडा पानी निकाल कर पीने लगे तभी एक वेटर उनके टेबल के करीब आया और खाने का आर्डर लेने लगा निर्मला ने खाने का आर्डर दे दी तो शीतल उस वेटर से चेंजिंग रूम के बारे में पूछने लगी,,, वेटर ने शीतल को चेंजिंग रूम के बारे में दिशानिर्देश कर दिया और चला गया तो निर्मला उससे बोली,,,।

तुम ड्रेसिंग रूम का क्या करोगी,,,,?

यार निर्मला बहुत दिनों बाद में यह ड्रेस पहनी हूं क्योंकि बहुत कसी हुई है मुझको बिल्कुल भी कंफर्टेबल नहीं लग रहा है इसलिए मैं सोचती हूं कि जाकर साड़ी पहन लुं,।

हां मुझे भी यही लग रहा है मैं भी यही देखकर सोच रही हूं कि इतनी कसे हुए ड्रेस में तुम कैसे कंफर्टेबल महसूस कर रही हो,,,।

अच्छा तुम दोनों बैठो मैं गाड़ी में से अपनी साड़ी लेकर आती हूं,,,,।( और इतना कहकर शीतल होटल के बाहर गाड़ी की तरफ चली गई,,, शीतल के जाते ही निर्मला गुस्से में शीतल से बोली,,,।)

क्यों रे तुझे शीतल अब बहुत ज्यादा अच्छी लगने लगी है तुझे नई बुर चोदने को क्या मिल गई तू तो मुझे भूल ही गया,,,

क्या कह रही हो मम्मी कैसी बातें कर रही हो,,,।

कैसी बातें कर रही हो नहीं तू मुझे सच सच बता,,, तुझे मैं अच्छी लगती हूं या शीतल,,,,

तुम अच्छी लगती हो मम्मी तुम्हारे सामने उसकी खूबसूरती कोई मायने नहीं रखती,,,।

तो तू उससे हंस हंस के क्यों बातें कर रहा था,,,।

क्या मम्मी तुम भी बच्चों जैसी बातें कर रही हो वह जैसा कह रही है वैसा हमें करना पड़ेगा जब तक कि हम शिमला पहुंचकर उसका भी वीडियो ना बना ले जैसा कि वह हम दोनों का बनाई है तब जाकर हमें उससे छुटकारा मिलेगा,,,।

( शुभम की बात सुनकर निर्मला सोच में पड़ गई क्योंकि जो कुछ भी शुभम कह रहा था उसमें सच्चाई थी लेकिन क्या करती है एक औरत होने के नाते वह नहीं चाहती थी कि उसके बेटे का दिल किसी और औरत पर आए जो कि ऐसा हो भी चुका था निर्मला अपने मन में सोच रही थी कि उसे कुछ ऐसा करना पड़ेगा कि जैसे शुभम एक बार फिर से उसका पूरी तरह से दीवाना हो जाए क्योंकि मर्दों का भरोसा उसे बिल्कुल भी नहीं था जहां चिकनी बुर देखते हैं वही फिसल जाते हैं इस समय उसका बेटा शीतल की दोनों टांगों के बीच फिसल रहा था,,, इसलिए निर्मला इस सफर के दौरान कुछ ऐसा करने की मन में सोच रही थी कि शुभम एक बार फिर से उसकी मदमस्त जवानी का पूरी तरह से कायल हो जाए,,,। शुभम की बात सुनकर वह बोली,,,।)

तू जो कह रहा है मैं जानती हूं वह सच है लेकिन एक औरत होने के नाते मैं नहीं चाहती कि तो किसी दूसरी औरत के पास जाए और उसका दीवाना हो जाए,,,।

क्या बात कर रही है मम्मी मैं खुद उसके पास गया था कि वह आपने मुझे उसके पास भेजी थी,,,, जैसे तैसे करके इस परिस्थिति से हम दोनों को निकलना होगा मैं तो कह रहा हूं कि अभी जैसा चल रहा है वैसा चलने दो उसकी बात मानने में ही भलाई है और मम्मी क्यों ना सब कुछ भूल कर कुछ दिनों के लिए इन सब का मजा लो वैसे भी शीतल मैडम ठीक ही कहती है कि जिंदगी में पूरा मजा लेना चाहिए फिर पता नहीं वह मौका मिले या ना मिले वैसे भी मैं जिंदगी भर आपका ही रहने वाला हूं उस शीतल का नहीं,,,।

( अपने बेटे की बातें सुनकर निर्मला को भी लगने लगा था कि जिस परिस्थिति सेवर कुछ और रही है उसी पर स्थिति में अपने आप को ढाल लेना चाहिए वरना दुख और चिंता के सिवा उसे कुछ नहीं मिलेगा,,,, ।)

चल ठीक है जैसा तू कहता है मैं भी वैसा ही करूंगी मैं भी तो इस नए अनुभव का मजा लेकर देखूं,,,।

पहले भी तो तुमने इस तरह से मजा ले चुकी हो,,,।

हां वह तो है पर वो तो जवान हो रही लड़की थी और यहां तो एक मेरी ही उम्र की औरत है देखते हैं कौन किस पर भारी पड़ता है,,,।

निर्मला यह सब कह ही रही थी कि तभी बैटर खाना लेकर आ गया,,,, और टेबल पर खाना रखकर कुछ और के बारे में पूछ कर वहां से चला गया,,,, तब तक शीतल गाड़ी में से अपनी साड़ी निकाल कर होटल में चेंजिंग रूम में जा चुकी थी,,,। होटल का एक कर्मचारी शीतल की हरकतों पर बारीकी से नजर रखा हुआ था वह अच्छी तरह से जानता था कि सीकर चेंजिंग रूम में अपने कपड़े बदलने जा रही है और वह सलवार सूट पहनी हुई है और चेंजिंग रूम में जाकर वह अपने सारे कपड़े उतार कर साड़ी पहने की जिसका मतलब साफ था कि वह चेंजींग रूम में पूरी तरह से नंगी हो जाएगी,,,, यह ख्याल उसके मन में आते ही हो पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था और वह शीतल पर ही नजर रखे हुए था जैसे ही वह चेंजिंग रूम में कपड़े बदलने के लिए गई वैसे ही वह तुरंत दरवाजे पर आकर की होल से अंदर का नजारा देखने लगा,,,,। होटल के उस कर्मचारी का यह रोज का काम था जब भी कोई खूबसूरत औरत है होटल के अंदर अपने कपड़े बदलने के लिए जाती थी तो वह चोरी छुपे उस दरवाजे के पास आकर की होल में से झांककर अंदर का नजारा देखकर मस्त हो जाता था,,,। कर्मचारी की हॉल में से अंदर का नजारा देखकर मस्त हुवे जा रहा था,,,।

जिंदगी में पहली बार वह होटल का कर्मचारी इतनी गोरी खूबसूरत गदर आई बदन वाली औरत को नंगी होते हुए देख रहा था चेंजिंग रूम में शीतल को इस बात का आभास तक नहीं था कि उसे की होल से कोई झांक रहा है,,, वह तो अपनी मस्ती में अपनी सरकार अपने कुर्ती को पल भर में उतार कर अपने बदन से अलग कर दी,,, कसी हुई सलवार सूट के साथ-साथ वह अपनी दोनों बड़ी बड़ी चूचियों को बराबर नाप में रखने के लिए चुचियों से कम साइज की ब्रा पहनी हुई थी जो की पूरी तरह से फंसी हुई थी इसलिए वह अपनी ब्रा को भी उतार दी,,,, होटल का कर्मचारी शीतल की बड़ी बड़ी चूचियों को देखते ही एकदम पागल हो गया और नजरें बचाकर वह अपने पेंट की चैन खोलकर अपना लंड बाहर निकाल दिया और उसे हिलाना शुरू कर दिया। उसका दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि अब उसे उम्मीद थी कि वह अपनी पेंटी उतार कर पूरी नंगी हो जाएगी तो उसे खूबसूरत नजारा देखने को मिल जाएगा और उसकी सोच सही साबित हुई देखते ही देखते इसी तरह अपनी पेंटिंग को भी उतार फेंकी वह होटल का कर्मचारी तो एकदम पागल हो गया वैसे भी इस सफर को शुरू करने से पहले शीतल ने अपनी दूर के हल्के हल्के बालों पर वीट क्रीम लगाकर पूरी तरह से चिकनी कर ली थी जिंदगी में पहली बार वह उधर का कर्मचारी किसी औरत की खूबसूरत एकदम चिकनी बुर को देख रहा था गुलाबी गुलाबी पत्तियों को देखकर उससे रहा नहीं गया और जोर-जोर से अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया,,,। कार में शुभम के साथ जो हरकत उसने की थी उसके असर रूपी मधुर रस अभी भी उसकी बुर्के गुलाबी पत्तियों पर मोतियों के बूंद बन कर चिपके हुए थे जिसे वह अपनी पेंटी से ही साफ करने लगी और यह हरकत उस कर्मचारी के लिए बेहद मादकता से भरा हुआ था,,,,। बहुत खुश नजर आ रहा था शायद जिंदगी में पहली बार उसने इस होटल में इस तरह का नजारा देखा था आज उसका दिन बन गया था वह मदहोश होकर अपनी आंखों को उस की होल से सटाया हुआ था,,,।

कार में से लाई हुई ब्रा और पेंटी को शीतल पहनने लगी,,,

दूसरी तरफ निर्मला और शुभम शीतल का इंतजार कर रहे थे और शुभम को जोरो की पिशाब लगी हुई थी इसलिए वह अपनी मां से बोला,,,।

मम्मी तुम 2 मिनट इंतजार करो मैं बाथरूम में जाकर आता हूं,,,,

( इतना कहकर वह वहां से निकल गया बाथरूम का रास्ता सी चेंजिंग रूम से होकर जाता था और वहां पर कोई आता जाता नहीं था,,, सुबह शाम वहां पर चहल पहल रहती थी और दोपहर में तो भूले भटके ही कोई वहां आ जाता था,,,। जैसे ही वह चेंजिंग रूप के थोड़ा सा करीब पहुंचा तो उसे वह होटल का कर्मचारी उसी दरवाजे के पास बैठा हुआ मिला जोकि चेंजिंग रूम की की होल से अंदर का नजारा देख रहा था शुभम को समझते देर नहीं लगी कि उस रूम में शीतल अपने कपड़े बदल रही है और वह उसी को देख रहा है,,,। शुभम को एकदम से गुस्सा आ गया और वह सीधा जाकर उस होटल के कर्मचारी को उसके गिरेबान पकड़कर खड़ा किया,,,। वह एकदम से घबरा गया,,,।

यह क्या कर रहा था तू तो इस तरह से औरतों को कपड़े बदलता हुआ देखता है,,,।

( शुभम की कही बात रूम के अंदर कपड़े बदल रही शीतल सुन ली वो एकदम से घबरा गई,,, शीतल अंदर अपने कपड़े बदल चुकी थी वह जब तक बाहर आती तब तक शुभम गुस्से में उस कर्मचारी को दो-तीन थप्पड़ लगा चुका था,,,

आवाज सुनकर तुरंत होटल का मैनेजर दौड़ता हुआ वहां आ गया तब तक कपड़े बदलकर शीतल रूम से बाहर आ चुकी थी,,,,,,, बाहर आते ही उसकी नजर शुभम पर पड़ी जो कि कर्मचारी को उसके गिरेबान से पकड़े हुए था और उसकी आंखों के सामने दो चार थप्पड़ और लगा दिया,,,।

मैनेजर को शुभम ने सारी बातें बताई शीतल तो हैरान थी कि उसे संपूर्ण रूप से नंगी होते हुए उस होटल के कर्मचारी ने देख लिया था व शर्मिंदा हो गई थी होटल का मैनेजर भी अपनी कर्मचारी की हरकत से पूरी तरह से शर्मिंदा हो चुका था वह उसे डांट कर वहां से भगा दिया,,,। भगा क्या दिया तत्काल उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया और शुभम और शीतल दोनों से माफी मांगते हुए बोला,,,।

देखो मैं काफी शर्मिंदा हूं मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मैं आप लोगों से कैसे माफी मांगो हमारी होटल के रेपुटेशन का सवाल है यह बात आप किस होटल से बाहर जाकर किसी को मत बताइएगा,,,, जो कुछ भी आपके साथ हुआ उसकी भरपाई तो शायद मैं नहीं कर सकता लेकिन इस होटल से थोड़ा बहुत संतुष्ट होकर जाओ इसकी मैं पूरी कोशिश करूंगा इसलिए इस होटल का जितना भी बिल आपका बनता है हम आपसे कुछ भी नहीं लेंगे,,,,, देखिए मैं फिर से आप दोनों से हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं प्लीज यह बात किसी को मत बताइएगा,,,।

आप इतना कह रहे हैं तो हम आपकी बात मान लेते हैं लेकिन जो कुछ भी उसने हरकत किया है वह बहुत ही शर्मिंदा करने वाली हरकत है,,,।

मैं जानता हूं मैडम इसीलिए तो हाथ जोड़कर माफी मांग रहा हूं प्लीज,,,

चलिए कोई बात नहीं हम आपको माफ कर देते हैं लेकिन आइंदा से इसका ख्याल रखिएगा कि ऐसी गलती दोबारा ना होने पाए क्योंकि हम तो माफ कर दे रहे हैं शायद दूसरा कोई माफ ना कर पाए,,,

इतना कहकर शीतल और शुभम दोनों वापस टेबल पर आ गए और उस बात की जिक्र बिल्कुल भी नहीं मिला से नहीं किए,,,, तीनों बैठकर एकदम भरपेट खाना खाकर एकदम संतुष्ट हो गए,,,, निर्मला को इस बात की भनक बिल्कुल भी ना लगे इसलिए वह पैसे चुकाने के बहाने काउंटर तक कई ताकि निर्मला को यह न लगे कि वह मुफ्त में खाना खिला रहा था,,,, इन सब के दौरान निर्मला यही बात सोच रही थी कि ऐसा क्या किया जाए कि जिससे शुभम एक बार फिर से उसके ऊपर पूरी तरह से लड्डू हो जाए और देखकर शीतल एकदम जल भुन जाए क्योंकि यह बात तो अच्छी तरह से निर्मला के साथ-साथ शीतल भी जानती थी कि खूबसूरती और बदन की बनावट में निर्मला के आगे वह बिल्कुल भी फीकी पड़ती थी लेकिन शीतल अपने खुले पर और दिखावे क्या करसन में पूरी तरह से उसके बेटे शुभम को फसाए हुए थी,,,,

होटल से निकलते निकलते 4:00 बज चुका था धीरे-धीरे शाम ढलने लगी थी,,,। पीली रंग की साड़ी में वाकई में शीतल हुस्न की परी लग रही थी गदराया बदन और भी ज्यादा खिला हुआ था,,,, शीतल को देखकर उसकी मदमस्त जवानी ना जाने क्यों निर्मला की आंखों में खटक ने लगी अच्छी तरह से समझ रही थी कि जब पीली साड़ी में शीतल उसे अच्छी लग रही थी तो उसके बेटे को भला क्यों ना अच्छी लगती,,,,। यही सोचकर निर्मला अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने की कोशिश कर रही थी और इस कोशिश को जारी रखते हुए वह बार-बार शुभम की आंखों के सामने अपने हाथ से अपनी बुर को साड़ी के ऊपर से खुजला रही थी,,,, उसके बार-बार ऐसा करने पर शुभम का ध्यान उसी के ऊपर जा रहा था और जिस तरह से वह अपनी बुर को साड़ी के ऊपर से खुशी आ रही थी यह देख कर कर शुभम की जवानी का पारा चढ़ने लगा था,,,।

यार ये खुजली बिना बहुत परेशान कर रही है,,,,।( निर्मला जानबूझकर अपने मन में बुदबुदाते हुए बोली,,,)

क्या हुआ मम्मी कोई परेशानी है क्या,,,,।

हारे ना जाने क्यों मेरी बुर में खुजली हो रही है,,,,।

( निर्मला जानबूझकर दोनों की उपस्थिति में एकदम खुले शब्दों में बोली और यह सुनकर शीतल के भी कान खड़े हो गए,,,। वह मुस्कुराते हुए बोली।)

मेरी जान बुर की खुजली केवल लंड से ही बुझती है हाथ से खुजाने से नहीं,,,

( शीतल की बात को अनसुना करते हुए निर्मला एकदम बेशर्म की तरह कार के अंदर ही अपनी साड़ी को धीरे धीरे ऊपर उठाते हुए एकदम कमर तक लादी,,,। उत्तेजना के मारे शुभम का गला सूखने लगा क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि शीतल की उपस्थिति में उसकी मां इस तरह की हरकत इतनी जल्दी नहीं कर सकती उसे माहौल में पूरी तरह से खुलने में थोड़ा वक्त लगता है लेकिन यहां तो उसकी उपस्थिति में वह अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी थी,,, शुभम कुछ और समझ पाता इससे पहले ही वह थोड़ा सा अपनी गांड को पर उठाकर अपनी लाल रंग की पेंटिंग को निकालना शुरू कर दी और देखते ही देखते वह उसे अपने पैरों से बाहर निकाल कर बगल की सीट पर रख दी,,, शुभम एकदम पागल हुआ जा रहा था ना जाने क्यों उसे कार के अंदर अपनी मां का एक नया रूप देखने को मिल रहा था निर्मला की हरकत को शीतल कांच में बराबर देख रही थी और वह भी हैरान थी क्योंकि उसे भी इस बात का अंदाजा बिल्कुल भी नहीं था कि उसकी उपस्थिति में इतनी जल्दी निर्मला अपने आप को सहज बना लेगी वह भी शीशे में निर्मला की हरकत को बराबर देखी थी कि वह कैसे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रही थी और अपने गांव उठाकर अपनी पेंटिंग को बाहर निकाल दी थी,,,। अपनी पेंटिंग को बगैर किसी एक पर रखते हुए वह अपनी दोनों टांगे को हल्की से फैला दी,,, और अपनी बीच वाली उंगली को अपनी बुर की गुलाबी पत्ती पर रगड़ ते हुए बोली

शुभम जरा देख तो कहीं चींटी तो नहीं काट रही है बहुत खुजली हो रही है,,,।

लाओ मम्मी देखूं तो,,,,( शुभम अपनी मम्मी की कामुक हरकत को देखकर पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था,,, और इस माता-पिता भरे दृश्य को देखकर उसके लंड के खड़े होने में बिल्कुल भी समय नहीं लगा,,, शुभम पागल हुआ जा रहा था उसकी आंखों के सामने उसकी मां की गुलाबी बुर नजर आ रही थी,,, वह अपने चेहरे को अपनी मां की दोनों टांगों के बीच लेकर गया और वह भी अपनी आंखों से अपनी मां की गुलाबी बुर को देख ही रहा था कि,,,, निर्मला अपना एक हाथ उसके सर पर रख कर उसे अपनी दोनों टांगों के बीच दबाते हुए बोली,,,।)

देखता ही रहेगा कि इसका इलाज भी करेगा,,,

( अपनी मां की इस तरह की बातें सुनकर शुभम समझ गया कि उसे क्या करना है इसलिए वह तुरंत अपने होठों को अपनी मां की गुलाबी बुर पर सटा कर अपनी जीभ बाहर निकाल कर उसे चाटना शुरू कर दिया,,,आहहहहहहह,,,, जैसे ही शुभम अपनी जीभ को उसकी बुर से सटाया वैसे ही निर्मला के मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,, गरम सिसकारी की आवाज को शीशे में नजर आ रहे बेहद काम उत्तेजना से भरे हुए नजारे को देख कर शीतल के तन बदन में आग लग गई उसे साफ नजर आ रहा था कि शुभम उसकी दोनों टांगों के बीच झुका हुआ है जिसका मतलब साफ था कि वह उसकी बुर को चाट रहा था,,,, देखते ही देखते शुभम अपनी जीभ को जहां तक हो सकता था वहां तक अपनी मां की बुर में डाल कर चाटना शुरू कर दिया और पूरे कार में निर्मला की गरम सिसकारियां की आवाज गूंजने लगी,,,,।

आहहहहह,,,,, ऐसे ही मेरे राजा ऐसे ही बस उसी जगह पर अपनी जीभ डाल कर चाट वही खुजली हो रही है,,,,

मम्मी मुझे नहीं लगता कि जीभ से तुम्हारी बुर की खुजली जाने वाली है मुझे तो लगता है कि तुम्हारी बुर में लंड डालना पड़ेगा तभी जाकर तुम्हारी बुर की खुजली मिटेगी,,,,

तो देर किस बात की है मेरे राजा खड़ा कर और डाल दे अपना लंड,,,,

मेरी रानी तेरी पर देखकर ही मेरा लैंड खड़ा हो गया था इसे खड़ी करने की जरूरत नहीं है बस अब तो अपनी गुलाबी बुर इस पर सटाकर चढ जा मेरे ऊपर और समा जा मेरे अंदर,,,,

( शीतल तो हैरान थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसके कान जो सुन रहे हैं वह सच है या सपना है उसकी आंखें जो देख रही थी वह तो उसे एकदम साफ दिखाई दे रहा था लेकिन कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि एक मां बेटे इस तरह से खुलकर इतनी गंदी बातें करते होंगे उनकी इस तरह की गंदी बातें सुनकर उसकी पेंटी उसे गिली होती हुई महसूस हो रही थी,,, दोनों की बातें सुनकर वह इतनी ज्यादा गरम हो चुकी थी कि अगर वह कार ना चला रही होती तो वह खुद उसके लंड पर चढ़ जाती है,,,,। निर्मला पूरी तरह से चुदवासी हो चुकी थी,,, अच्छी तरह से जानती थी कि इस समय उसे अपनी बेटी के मोटे तगड़े लंड की बेहद जरूरत है,,,। इसलिए तुरंत वह अपने बेटे के मुंह को अपनी बुर के ऊपर से हठाई,

शुभम समझ गया था कि अब उसे क्या करना है वह तुरंत एकदम सीधे बैठ कर अपने पेंट का बटन खोल कर उसे तुरंत अपने घुटनों से नीचे कर दिया उसका लंड पूरी तरह से खाना था जो कि शीतल को आईने में साफ नजर आ रहा था,,,, निर्मला शीतल की आंखों के सामने एकदम बेशर्मी दिखाते हुए सीधे अपनी दोनों टांगे फैलाकर अपने बेटे के गोद में बैठते हुए अपनी बड़ी बड़ी गांड के गुलाबी छेद को उसके लंड पर रखने लगी और देखते ही देखते हैं शुभम का लंड पूरी तरह से उसकी बुर की गहराई में खो गया,,, शीतल को शीशे में निर्मला की बड़ी-बड़ी गांड साफ नजर आ रही थी,,,, कार हाईवे पर अपनी रफ्तार में भागी चली जा रही थी शाम ढल रही थी हाईवे पर ट्राफिक बढ़ती जा रही थी लेकिन काले रंग के शीशे होने की वजह से निर्मला को बिल्कुल भी परवाह नहीं थी उसमें कामोत्तेजना पूरी तरह से अपना असर दिखा रही थी,,, देखते ही देखते शीतल की आंखों के सामने निर्मला अपनी बड़ी बड़ी गांड को उछाल उछाल कर अपने बेटे के लंड पर पटकना शुरू कर दी,,, शुभम भी पागलों की तरह अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर जोर जोर से चपत लगाते हुए नीचे से अपनी कमर उछाल रहा था,,, कार में चुदाई करने का यह दोनों का दूसरा मौका था जिसमें दोनों को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी उत्तेजना के मारे से इधर से कार चला ही नहीं जा रही थी लेकिन बड़ी मुश्किल से वह अपना ध्यान स्टेरिंग पर लगाए हुए थी,,,।

गीली बुर के अंदर शुभम का मोटा लंड जा रहा था जिससे उसमें से चप्प-चप्प की आवाज शीतल को एकदम साफ सुनाई दे रही थी,,,, दोनों पागलों की तरह चुदाई का आनंद ले रहे थे पहली बार इतने करीब से शीतल निर्मला की बड़ी-बड़ी एकदम गोरी गांड देखकर एकदम मचल उठी थी,,,।

दोनों एक दूसरे पर अपना अपना जोड़ दिखा रहे थे ना तो सुबह में कम था और ना ही निर्मला दोनों एक दूसरे को पछाड़ ने में लगे हुए थे,,,।

शीतल हैरान थी तकरीबन 20 किलोमीटर की दूरी काटने के बाद दोनों अपनी मंजिल पर हाफते हुए पहुंचे थे,,,।

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कार के पीछे की सीट पर एक मां बेटे की धमाचौकड़ी मचा रही गरमा-गरम दृश्य देखकर शीतल पूरी तरह से चुद वासी हो चुकी थी,,,,। निर्मला के घर में खिड़की से देखा गया दृश्य के बीच की दूरी कुछ ज्यादा ही थी लेकिन यहां तो वह अपनी बेहद करीब जिंदगी में पहली बार एक मां बेटे की चुदाई का गरमा गरम दृश्य देख रही थी ,,,, शीतल को अब जाकर पता चला था कि निर्मला की जवानी में कितनी आग है वरना वह तो उसे सीधी-सादी ही समझती थी लेकिन आज अपनी आंखों से दूसरी बार जब अपने ही बेटे के लैंड पर जोर जोर से अपनी गांड को पटक ते हुए देखी तो उसके होश उड़ गए,,,, उसके पूरे बदन में जवानी की आग सुलगने लगी,,, उसे अपनी पेंटी गीली होती हुई महसूस हो रही थी और साथ ही अपनी बुर के अंदर से चीटियां रहते हुए महसूस हो रहा था,,, अगर वह इस समय गाड़ी ना चला रही होती तो कब से कूदकर निर्मला को धक्का देकर खुद अपनी बड़ी बड़ी गांड के गुलाबी छेद को शुभम को लंड पर रखकर उसे अपने अंदर ले ली होती,,,।

जहां एक तरफ हाईवे पर ट्राफिक के बीच में चलते हुए निर्मला मौके का फायदा उठाते हुए बेशर्मी की सारी हदें पार करते हुए अपनी ही सहेली शीतल की आंखों के सामने अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड पर अपनी गुलाबी बुरका गुलाबी छेद रखकर जिस तरह से कूदकर अपनी जवानी की आग बुझाई थी,,, वहीं दूसरी तरफ शीतल पूरी तरह से अतृप्ती का एहसास लिए जवानी की आग में सुलग रही थी,,, अब तो उसे जल्द से जल्द शिमला पहुंचना था,,, जहां पर पहुंचकर वह अपने अपने सारे अरमान पूरे करने का ख्वाब देख रही थी,,,। आखिरकार वहां पर भी आ गया जब तीनों रात के करीब 1:30 बजे शिमला पहुंच गए,,,।

कार के अंदर से ही रास्ते में ही दोनों मां-बेटे शिमला का नजारा देखकर मंत्रमुग्ध हो गए शीतल के लिए नई बात नहीं थी वह आए दिन शिमला घूमने आया करती थी लेकिन शुभम और निर्मला के लिए यह पहली बाहर ही था जब वह लोग सिर्फ घूमने आए थे,,,। मौसम काफी ठंडा हो चुका था इसलिए अपने घर तक पहुंचने से पहले निर्मला बैग में से एक गर्म साल निकाल कर खुद और शुभम को ओढ़ा ली,, और बैग में से एक गर्म कोर्ट निकालकर निर्मला ने शीतल को थमा दी जो कि शीतल कुछ देर के लिए साइड में कार खड़ी करके उसे पहन ली ताकि ठंडी ना लगे लेकिन फिर भी बर्फ गिरी हुई थी इसलिए ठंडी होने महसूस हो रही थी,,,। शुभम काफी खुश नजर आ रहा था क्योंकि उसे इस बात का एहसास हो गया था कि ऐसे ठंडे मौसम में दो दो गर्म जवानी से भरपूर औरत के साथ खेलने में उसे बहुत मजा आने वाला था,,। शीतल ने एक बंगले के आगे अपनी कार खड़ी कर दी,,,। यह एक बेहद पॉश एरिया था जहां पर थोड़ी थोड़ी दूरी पर बंगले बने हुए थे और हर बंगले के आगे महंगी कार चमचमा रही थी,,,। यह देखकर निर्मला अंदाजा लगा ली थी कि शीतल की सहेली काफी अमीर है,,।

उत्सुकता की वजह से निर्मला और शुभम दोनों का दिल जोरों से धड़क रहा था रात के तकरीबन 1:30 बज रहे थे इसलिए पूरी तरह से सन्नाटा छाया हुआ था और हल्की हल्की बर्फ गिर रही थी जो कि यह नजारा देखकर निर्मला और शुभम पूरी तरह से मोहित हो चुके थे,,,।

शीतल कार से निकलकर अपने बैग में से बंगले की चाबी निकालकर गेट खोलने लगी,,, शीतल और उसकी सहेली में काफी गहन दोस्ती थी जिसकी वजह से उसकी सहेली बंगले की चाबी सीतल को शोपी हुई थी,,, ताकि शीतल का जब भी मन करे वह यहां पर आकर घूम सके और इस बंगले में रह सके,,,,। शीतल कार को बंद करके वह कार का दरवाजा खोलकर बाहर निकल गई कार के बाहर आते ही उसे इस बात का एहसास हुआ कि बाहर कुछ ज्यादा ही ठंड थी,,,, और वहां बंगले का गेट खोलते हुए शुभम से कार में से बैग निकालने के लिए बोल चुकी थी,,,।

शुभम और निर्मला दोनों भी कार मे से बाहर आ चुके थे,,

बंगले का गेट खुल चुका था और शुभम पीछे की डिक्की खोल कर उसमें से एक बाहर निकाल रहा था,,,। निर्मला को ठंडी का अहसास हो रहा था वह साल को बराबर से अपने बदन पर लपेट ते हुए इधर उधर अपनी नजरें दौड़ा कर पुरे एरिया का मुआयना कर रही थी,,। इस सोसाइटी के बंगले को देखकर वह मंत्रमुग्ध हो गई थी बहुत ही बेहद मनमोहक नजारा था हल्की हल्की बर्फ गिर रही थी जोकि अब तक उसने फिल्मों में ही देखी थी,,,।

निर्मला गेट के बाहर ही खड़ी होकर इधर उधर का नजारा देख रही थी चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था लेकिन स्ट्रीट लाइटें जगमग आ रही थी और साथ ही दूर-दूर के बंगलों में से पीली रंग की रोशनी नजर आ रही थी जो कि यह दृश्य बेहद सुहावना लग रहा था,,,। शुभम दोनों हाथ में देख लिए शीतल के करीब खड़ा था जो कि बंगले का दरवाजा खोल रही थी वही खड़े-खड़े शुभम गेट के बाहर कार के पास खड़ी अपनी मां की तरफ देखा तो गरम साल में अपने खूबसूरत बदन को समेटे हुए वह बेहद खूबसूरत और कामुक लग रही थी खास करके जिस तरह से वह अपने बदन को उसे साल के अंदर समेटे हुए थे उसकी भारी-भरकम नितंब कसी हुई साड़ी में बेहद लुभावनी लग रही थी जिसे देखते ही शुभम के लंड में हरकत होना शुरू हो गया था,,,। बंगले का मुख्य दरवाजा खुलते ही शीतल शुभम से अपनी मां को बुलाने के लिए बोली,,,। शुभम वहीं पर बैग रखकर तुरंत अपनी मां के पास गया,,, और बोला,,,।

चलो अंदर चलो मम्मी यहां क्या कर रही हो ठंड लग जाएगी,,,।

हममममम,,,,,( इतना कहकर वो भी शुभम के साथ बंगले में प्रवेश कर गई,,,, अंदर प्रवेश करते ही शीतल स्विच दबाकर पूरे बंगले को लाइट से जगमगा दी,,, बंगले के अंदर का नजारा देखकर शुभम और निर्मला दोनों हैरान रह गए बंगले में रखी गई एक एक चीज बेहद कीमती और साफ-सुथरी लग रही थी बंद बंगले में इतनी साफ-सुथरी वस्तुओं को देखकर निर्मला बोली,,,।)

शीतल यह बंगला बंद रहता है लेकिन अंदर रखी गई एक एक वस्तु कितनी साफ है,,,।

हां निर्मला यहां पर घर का नौकर सुबह शाम घर की सफाई कर के चला जाता है तभी इतनी साफ-सुथरी हर एक वस्तु लग रही है,,,।

चलो शिमला घूमने का मेरा सपना तो इसी बहाने पूरा हुआ,,

( निर्मला चैन की सांस लेते हुए कुर्सी पर बैठते हुए बोली,,।)

शिमला घूमने का भी और हमारा यहां पर आने का मकसद भी,,,।

शीतल भी गहरी सांस लेते हुए बोली,,,

तीनों सफर से एकदम थक चुके थे इसलिए एक ही बेड पर तीनों सो गए,,।

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दसुबह नींद खुली तो शुभम अपने आप को शीतल के बदन से चिपका हुआ पाया दोनों सामने की तरफ मुंह करके सोए हुए थे और शुभम उसे पीछे से अपनी बाहों में जकड़ा हुआ था साथ ही शीतल के नितंबों का संपूर्ण घेराव शुभम के अग्रभाग से संपूर्ण रुप से सटा हुआ था ऐसा लग रहा था कि जैसे दोनों संभोगनिय मुद्रा में सो रहे हो,,,।

शुभम की नींद खुल चुकी थी लेकिन अभी भी शीतल और उसकी मां गहरी नींद में सोए हुए थे शायद देर तक कार चलाने की वजह से दोनों पूरी तरह से थक चुके थे शुभम का भी उठने का मन नहीं कर रहा था क्योंकि शिमला के ठंडे मौसम में शीतल की मदमस्त जवानी की गर्मी का केंद्र बिंदु जो उसके अग्रभाग से सटा हुआ था,,,, उसका मन कर रहा था कि जिंदगी भर इसी तरह से उसकी मदमस्त गांड से अपना लंड सटाए सोए रहे,,,,। वह उसी तरह से अपना नजर घुमाकर अपनी मां की तरफ देखा तो वह दूसरी तरफ मुंह करके निश्चिंत होकर सोई हुई थी लेकिन इस तरह से सोने में उसकी साड़ी घुटनों से ऊपर तक चढ़ी हुई थी जिससे उसकी नंगी गोरी गोरी पिंडलिया नजर आ रही थी,,। सुबह का इतना मदमस्त नजारा देखकर धीरे-धीरे उसके लंड में तनाव आना शुरू हो गया था।,,,

शुभम उत्तेजित हुआ जा रहा था अनजाने में ही वह शीतल के खूबसूरत बदन से चिपक गया था और अपने लंड को शीतल की मदमस्त गांड से सटा हुआ आते ही उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया,,,, इस अवसर का वह पूरी तरह से लाभ लेना चाहता था इसलिए वह धीरे-धीरे अपनी कमर को हल्के हल्के आगे पीछे करते हुए हिलाने लगा,,,। एक तरह से वह शीतल को चोद रहा था,,, भले ही उसका लंड उसके पैंट के अंदर था और शीतल के नितंबों पर साड़ी का पर्दा लगा हुआ था लेकिन फिर भी ऐसा करने में शुभम को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी लेकिन वह ऐसा करते हुए बार-बार पीछे की तरफ नजर करके अपनी मां को देख ले रहा था कि कहीं उसकी मां ना जाग जाए लेकिन वह जिस तरह से गहरी सांसें ले रही थी उसे पक्का यकीन हो गया था कि वह गहरी नींद में सो रही है,,,।

शुभम का लंड पूरी तरह से लोहे के रोड की तरह खड़ा हो चुका था और पेंट के अंदर तंबू बनाए हुए सीधे अपनी ठोकर को शीतल की गांड पर दे रहा था,, शिमला की मस्ती भरी ठंडी सुबह मैं शुभम अपने आपको बेहद गरम महसूस करने लगा था जिसका कारण केवल शीतल का खूबसूरत बदन और उसका उन्नत उभार लिए हुए मदमस्त नितंब,,,

अपनी नरम नरम गांड पर कोई कठोर चीज की चुभन महसूस होते ही सीतल की नींद खुल गई,,,, वह आधी नींद में ही थी इसलिए वह आश्चर्य से उस कठोर चीज के बारे में जानने के लिए अपने हाथ को उसी तरह से लेटे हुए हैं पीछे की तरफ लाकर जब उसे अपने हाथ में पकड़ी तो वह दंग रह गई उसे तुरंत एहसास हो गया कि वह कठोर चीज कोई और नहीं शुभम का लंड है और यह अहसास होते ही,, उसका तन बदन उत्तेजना से कांप गया,,,, शुभम को भी अब शीतल के जागने का पता चल गया था वह जान गया था कि उसकी हरकत की वजह से उसकी नींद खुल गई है और वह इसलिए अपने हाथ को आगे की तरफ लाकर ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी बड़ी बड़ी चूची को दबाना शुरू कर दिया वैसे भी सुबह के समय औरत और मर्द दोनों काफी उत्तेजित रहते हैं और ऐसे में जरा सा कामुक हरकत दोनों को चुदाई के लिए मजबूर कर देता है और यही हाल इस समय शीतल और शुभम का हो रहा था,,, जिस तरह से शीतल शुभम के मोटे तगड़े लंड की चुभन को अपनी नरम नरम गांड पर महसूस कर रही थी वह पूरी तरह से चुदवासी हो गई थी,,,

नितंबों पर कठोर चुभन और स्तन मर्दन की वजह से वह मदहोश होने लगी उसका मन शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में लेने के लिए मचलने लगा,,,। शुभम भी पागल हुआ जा रहा था वह पूरी तरह से शीतल की चुचियों को दबाते हुए एक करके उसके बटन को खोलना शुरू कर दिया और देखते ही देखते उसकी दोनों चूचियां उसके ब्लाउज की कैद से आजाद हो गई,,,,, शुभम की कामुक हरकतों की वजह से शीतल के तन बदन में आग लगी हुई थी उसके मुख से गर्म शिसकारियों की आवाज फूटने को तड़प रही थी वह बड़ी मुश्किल से अपनी सिसकारियो को मुंह के अंदर ही दबाए हुए थी,,,, दोनों के ऊपर मदहोशी पूरी तरह से सवार हो चुकी थी,,,,

गजब का नजारा बना हुआ था शिमला के गुलाबी मौसम में सुबह के समय बंगले के एक कमरे में एक ही बेड पर मां बेटे और शीतल अपनी थकान मिटाने के लिए लेते हुए थे लेकिन,,, शुभम और शीतल दोनों की नींद उड़ चुकी थी निर्मला अभी भी गहरी नींद में सो रही थी इस बात से अनजान कि जिस बिस्तर पर वह सोई हुई है उसे बिस्तर पर उसका बेटा उसकी सहेली के खूबसूरत बदन से खेल रहा है,,

शुभम पागलों की तरह अपनी कमर हिलाते हुए शीतल की चूचियां जोर जोर से दबा रहा था और शीतल अपनी गरम सिसकारियों को बार बार मुंह से ना निकल जाए इसलिए अपने मुंह को अपने हाथ से दबा दे रही थी,,,, लेकिन अब हालात बिगड़ने लगे थे शीतल के सब्र का इम्तिहान खत्म होता नजर आ रहा था,,, क्योंकि शुभम की कामुक हरकतें बढ़ती जा रही थी,,, फौजी साहब इसे शीतल की चूचियों को दबा रहा था वही हाथ नीचे की तरफ ले जाकर जहां पर साड़ियों को इकट्ठा करके उन्हें फोल्ड करके पेट के नीचे उसकी गांठ को दबाया जाता है उसी स्थान से अपने हाथ को उसकी साड़ी के अंदर सरकाने लगा और शीतल भी शुभम की इस हरकत को अच्छी तरह से समझ गई थी वह जानती थी कि आप सुबह क्या करना चाहता है इसलिए अपने पेट को हल्का सा सांस अंदर की तरफ खींच कर अपने पेट को दबा दी जिससे उसकी हथेली बड़े आराम से उसकी साड़ी के अंदर चली जाए और ऐसा ही हुआ शुभम बड़े आराम से अपनी हथेली को उसकी पेटीकोट से होता हुआ उसकी साड़ी के अंदर अपनी हथेली को पहुंचा दिया और अपनी अंगुलियों से डरते हो अपनी उंगलियों को पेंटी के अंदर डालकर तुरंत उसके फूली हुई कचोरी को अपनी हथेली में दबा लिया इस बार शीतल से रहा नहीं गया और उसके मुख से गर्म सिसकारी की आवाज निकल गई,,,,।

ससससहहहह,,,आहहहहहहह,,,, शुभम,,,,,,

सससससस,,,, बिल्कुल भी आवाज मत करो वरना मम्मी जाग जाएगी,,,,,

लेकिन तेरी हरकतें मुझे मदहोश कर रही है ना चाहते हुए भी मेरे मुंह से आवाज निकल जा रही है,,,,

अपनी गरमा गरम आवाज को संभालो और मजा लो,,,,( ऐसा कहते हुए शुभम अपनी बीच वाली उंगली को तुरंत उसके नरम नरम रसीली बुर के अंदर डालकर उसे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया,,,, और लगातार अपनी कमर को हिलाते हुए उसके नितंबों पर अपने लंड की ठोकर लगाने लगा,, उत्तेजना के मारे शीतल का पूरा शरीर कांपने लगा था शिमला में उसे इतना अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव होगा वह ऐसा कभी सोची नहीं थी लेकिन अपने तन बदन में इस तरह की उत्तेजना का अनुभव करके उसे समझ में आ गया था क्या शिमला का यह ट्रिप वह जिंदगी भर याद रखने वाली है,,,,, शीतल अपने आप हमें बिल्कुल नहीं थी वह मदहोशी के सागर में डूबती चली जा रही थी अब उसे अपनी बुर के अंदर शुभम का मोटा तगड़ा लंड महसूस करना था कि वह उसके लंड को अपनी बुर में लेकर चुदवाना चाहती थी क्योंकि जिस तरह के सफर मैं शुभम उसको लेकर जा रहा था उसकी मंजिल यहीं थी,,,।

जिस तरह से शुभम अपनी कमर हिलाता हुआ अपने मोटे तगड़े नंद की चुभन उसके नितंबों पर चुभा रहा था,,, उस चुभन को वह अपनी पुर के अंदर महसूस करने के लिए तड़प रही थी इसलिए अपने हाथों की कोहनी का सहारा लेकर वह अपनी गर्दन ऊपर उठाकर निर्मला की तरफ देखी जो कि वह दूसरी तरफ मुंह करके बेसुध होकर सो रही थी शीतल ने तुरंत कंबल को पूरी तरह से अपने ऊपर और शुभम के ऊपर डाल दी ताकि निर्मला की नींद खुलने पर उसे इस बात का पता तक ना चले कि उसके बगल में चुदाई चल रही है,, जिस तरह से निर्मला से नजरें बचाकर शीतल शुभम और उसके ऊपर कंबल डालकर अपने आप को छुपाने की कोशिश कर रही थी,,,, शुभम समझ गया कि शीतल अब चुदवाने के लिए पूरी तरह से तैयार है,,,, शुभम आप इतना सोच ही रहा था कि शीतल अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा कर तुरंत कमर तक चढ़ा ली और अपनी पेंटी को उतारने लगी यह देख कर उसकी सहायता करते हुए शुभम भी अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसकी पेंटी निकलवाने में उसकी मदद करने लगा और देखते ही देखते कमर के नीचे शीतल पूरी तरह से नंगी हो गए शुभम भी अपनी पेंट को खोलकर उसे घुटनों तक सरका दिया,,,

अब शुभम के लिए एकदम आसानी हो गई थी शीतल शुभम के पारा को चेक करने के लिए अपने हाथ पीछे की तरफ लाकर उसके थर्मामीटर को पकड़ ली जो कि बेहद गर्म था उसकी गर्मी को अपनी हथेली में मैसेज करते हुए उसके तन बदन में आग लग गई शुभम अब देर करना बिल्कुल भी जरूरी नहीं समझ रहा था वह अपने लंड को उसकी बुर में डालने से पहले एक बार जोर से उसकी बड़ी बड़ी गांड को पकड़ कर अपनी हथेली से दबाने लगा और अपने खड़े लंड को उसके गांड की दरार में इधर-उधर घुमाना शुरू कर दिया,,,, शीतल समझ गए कि वह लंड को इधर-उधर दरार में घुमा कर क्या ढूंढ रहा है वह उसके गुलाबी छेद को ढूंढ रहा था और इसलिए शीतल अपनी टांग को घुटनों के बल मोड़ कर थोड़ा सा अपनी टांग को आगे कर ली जिससे उसका गुलाबी छेद एकदम बाहर को नजर आने लगा है लेकिन शुभम अपने हाथों की उंगलियों से उसकी गुलाबी बुर के छेद को टटोलकर अपने मोटे तगड़े लंड के सुपाड़े को उस पर टिका दिया,,, और देखते ही देखते अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलते हुए अपने लंड को शीतल की बुर के अंदर घुसाना शुरू कर दिया देखते ही देखते शुभम का पूरा समूचा लंड शीतल की रसीली बुर के अंदर समा गया,,,।

सफर खत्म हो चुका था राही को उसकी मंजिल मिल चुकी थी और मंजिल मिलने की खुशी क्या होती है इस वक्त बिस्तर पर बिछी हुई चादर पर पड़ रही सिलवटें बयां रही थी,,,,, शुभम की कमर आगे पीछे अपनी लय में हुई जा रही थी,,, शुभम बड़े आराम से शीतल को चोद रहा था उत्तेजना और मदहोशी का नशा दोनों के सर के ऊपर इस कदर सवार हो चुका था कि उसे इस बात का भी आभास नहीं था कि उसे बिस्तर पर निर्मला लेटी हुई है,,,, लेकिन इस तरह से चोरी छुपे एक ही बिस्तर पर अपनी मां की उपस्थिति में शीतल की चुदाई करने में उसे कुछ ज्यादा ही मजा और उत्तेजना का अनुभव हो रहा था,,,

शुभम पागलों की तरह उसके पूरे बदन पर अपना हाथ फेर रहा था,,,। कभी उसकी चूचियों को दबाता तो कभी उसके चिकनी पेट को अपनी हथेली में दबोच लेता तो कभी केले के तने के समान मोटी मोटी जांघों को दबा देता,,,, शीतल को अपनी बुर के अंदर ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई गरम लोहे का रोड डाल दिया हो,,,, लेकिन बेहद रोमांचक उत्तेजना का अनुभव रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था इस तरह से शुभम से चुदवाने में,,,

तकरीबन 15 मिनट की होले होले की चुदाई के बाद दोनों झड़ गए,,,, और कुछ देर तक है यु ही लेटे रहे,,,

जब उन दोनों को यह एहसास हुआ कि निर्मला उठने वाली है तो वह लोग तुरंत अपने कपड़ों को व्यवस्थित करके एक दूसरे से थोड़ी दूरी बना कर आंख बंद करके जानबूझकर लेट गए ताकि निर्मला को यह न लगे कि यह दोनों पहले से ही जाग रहे हैं,,,

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थोड़ी ही देर बाद वाहनों की आवाजाही उनकी होरन की आवाज सुनकर निर्मला की आंख खुल गई,,,, शिमला की मखमली ठंडी में यह उसकी पहली सुबह थी,,,। आंख खुलते ही उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह शिमला में है,,। वह अंगड़ाई लेते हुए बिस्तर पर से उठी और नीचे पैर लटका कर बिस्तर पर ही बैठी रही,,,। बिस्तर के ठीक सामने खिड़की पर शीशे चढ़े हुए थे जिसमें से हल्की हल्की बर्फ गिरती हुई नजर आ रही थी बहुत ही बेहद खूबसूरत नजारा था निर्मला खिड़की के करीब जाने से पहले एक नजर बिस्तर पर डाली तो देखी की शुभम और शीतल दोनों के शुद्ध होकर सो रहे थे दोनों के बीच अच्छी खासी दूरी बनी हुई थी जिसे देखा कर निर्मला को राहत महसूस हुई वह बिस्तर पर से उठी और सीधे खिड़की के करीब जाकर खड़ी हो गई बाहर हल्की हल्की बर्फ गिर रही थी जिससे पेड़ पर बर्फ की परत जमा हो गई थी अब तक शिमला को उसने फिल्मों में और चित्रकारी के सीनरी में देखते आई थी लेकिन आज पहली बार वहां अपनी आंखों से शिमला को देख रही थी जो कि उसकी सोचने की अपेक्षा और भी ज्यादा खूबसूरत था,,। निर्मला की नजर दूर दूर तक जा रही थी दूसरे बंगलों के गेट धीरे-धीरे खुलना शुरू हो गए थे,,, यहां पर उसे कोई नहीं पहचानता था कोई नहीं जानता था ना तो किसी को उस से मतलब था वह खिड़की पर खड़ी खड़ी है सोचने लगी कि वह यहां क्या करने आई है एक तरह का अपने ही बेटे के साथ हनीमून मनाने आई है जिसकी से भागी उसकी सबसे अच्छी सहेली शीतल थी,,,। वह दोनों मिलकर एक साथ शुभम से चुदवाने के लिए शहर से इतनी दूर शिमला आए थे,,, यहां पर शुभम और निर्मला को कोई नहीं जानता था हो सकता था कि सीतल को यहां के लोग जानते हो क्योंकि वह यहां पहले भी आ चुकी है लेकिन निर्मला के लिए यह अद्भुत अनुभव था अपने आपको वह पूरी तरह से तैयार कर रही थी कि जब वह एक ही कमरे में एक ही बिस्तर पर अपने बेटे के साथ अपनी सबसे अच्छी सहेली की आंखों के सामने खुद के और अपनी सहेली की बुर में अपने ही बेटे के लंड को अंदर बाहर होता हुआ देखेगी,,,। वह मन में यही सोच रही थी कि कितना मजा आएगा जब एक ही बिस्तर पर तीनों संपूर्ण रूप से एकदम नंगे होकर जवानी का मजा लूटेंगे,,,,। निर्मला को अपने बेटे की मर्दानगी पर पूरा विश्वास था वह अच्छी तरह से जानती थी कि शुभम अकेला उन दोनों का मदन रस निचोड़ कर रख देगा,,,। निर्मला आने वाले पल के लिए अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर रही थी वह अपने अंदर से शर्मो हया और झिझक को पूरी तरह से निकाल देना चाहती थी,,,, अपने मन में सोचने लगी थी कि अब शर्म करके कोई फायदा नहीं है जब ओखली में सर दे ही दिया है तो मुसल से कूटने का डर कैसा,,, वाले वाले पल का पूरी तरह से मजा लेना चाहती थी वह भी काफी समय बाद एक साथ तीन तीन लोगों के साथ मजा लेना चाहती थी वह अपनी आंखों से देखना चाहती थी कि उसका बेटा शीतल की जवानी को कैसे अपनी मोटे तगड़े लंड से पानी पानी करता है,,,। यह सब सोचकर ही निर्मला की पेंट गीली होने लगी थी उसकी बुर अपने बेटे के लंड को लेने के लिए बिल बिलाने लगी थी,,,,

खिड़की से बाहर का तरोताजा कर देने वाला नजारा उसके तन बदन में एक नई ऊर्जा का संचार कर रहा था उसकी सोच को बदल रहा था या यूं कह लो कि शिमला में आकर वह अपने आप को पूरी तरह से बदल देना चाहती थी क्योंकि यहां पर किसी के द्वारा देखे जाने का डर उसे बिल्कुल भी नहीं था यह शहर अनजान था यहां के लोग अनजान थे वह खुद इस शहर के लिए अनजान थी ऐसे में अपने अनजाने पंखा वह पूरा फायदा उठाना चाहती थी,,,। दीवार पर टंगी घड़ी में 7:00 का अलार्म बजने लगा उसका बदन थका हुआ था वह नहाना चाहती थी,,,,। लेकिन बाथरूम में जाने से पहले वह शुभम और शीतल को भी उठा देना चाहती थी,,। इसलिए वह आगे बढ़कर शुभम और शीतल दोनों को उठाने लगी और वह दोनों नींद में होने का बहाना करते हुए आलस मरोड़ कर उठ कर बैठ गए,,,।

गुड मॉर्निंग मम्मी,,,

गुड मॉर्निंग निर्मला ,,,(शीतल भी एकदम जैसे नींद में हो इस तरह से बोली,,, जवाब में निर्मला मुस्कुरा दी,,,,)

तुम दोनों बैठे हो मैं नहा कर फ्रेश होने जा रही हूं,,,।( इतना कहकर निर्मला बाथरूम की तरफ जाने को हुई थी तभी शीतल उसे आवाज देकर रोकते हुए बोली,,।)

अरे अरे अकेले,,,,

तो,,,, अकेले ही नहाऊंगी ना,,,,( निर्मला आश्चर्य से बोली,,।)

तुम एकदम पागल हो निर्मला हम यहां क्या करने आए हैं,,,, मस्ती,,,,, वो सब करने जो हम वहां अपने घर पर रहकर नहीं कर सकते,,,

ठीक ठीक बोलो शीतल मैं तुम्हारी बात समझ नहीं पा रही हूं,,,।

पर इसमें समझने का क्या है मैं यह चाहती हूं कि तुम अकेले बाथरूम में नहीं बल्कि हम तीनों बाथरूम में चलकर नहाएंगे एक साथ और वह भी बिना कपड़े एकदम नंगे होकर सोचो कितना मजा आएगा,,,( इतना कहकर शीतल चुप हो गई उसके चेहरे पर उत्सुकता की चमक साफ नजर आ रही थी वह शुभम और निर्मला की तरफ देखने लगी निर्मला सीता की बात सुनकर एकदम से चौक गई लेकिन उसकी यह बात उसे अच्छी लगी थी इसलिए वह जवाब में केवल मुस्कुरा दी,,,, और निर्मला के होंठों पर आई मुस्कुराहट देखकर शीतल खुश होते हुए बोली,,,।)

लेट्स एंजॉय,,,,,

( इतना कहने के साथ वह भी बिस्तर से नीचे उतर गई शीतल का सुझाव सुनकर शुभम काफी उत्साहित और उत्तेजित नजर आ रहा था,,, और देखते ही देखते एक एक करके तीनों बाथरूम में घुस के बाथरूम का दरवाजा बंद करने की कोई आवश्यकता उन्हें जान नहीं पड़ रही थी लेकिन फिर भी निर्मला ने दरवाजा बंद कर दी,,, बड़ा ही बेहतरीन और आलीशान बाथरूम था काफी बड़ा था इसमें व तीनों बड़े आराम से नहाने के लिए आ गए थे,,,, )

मम्मी शिमला में ठंडे पानी से नहाएंगे तो तबीयत नहीं खराब हो जाएगी,,,।

अरे मेरे राजा ठंडे पानी से नहीं नहाना है इस सावर में से गर्म पानी भी आता है,,,,। और वैसे भी हम दोनों की गर्म जवानी तुम्हें ठंडा होने नहीं देगी बल्कि तुम्हें पिघला देगी,,,( इतना कहने के साथ ही शीतल अपनी बड़ी बड़ी छातियों पर से साड़ी का पल्लू हटाकर अपनी कमर से साड़ी खोलने लगी,,,, शीतल की भारी-भरकम जातियों को देखकर शुभम के मुंह में पानी आने लगा और शीतल को इस तरह से अपने और अपने बेटे की आंखों के सामने अपने कपड़े उतारते हुए देखकर निर्मला शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी लेकिन उसे अच्छा लग रहा था देखते ही देखते शीतल उन दोनों की आंखों के सामने अपनी साड़ी उतार कर बाथरूम में नीचे फर्श पर फेंक दी और निर्मला को बोली,,,।

Nirmala apne bete ko mast karti huyi

शर्मा क्यों रही हो मेरी छम्मक छल्लो मजा करने आई हो मजा करो और जल्दी से अपने कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो जाओ,,,,( यह कहते हुए शीतल अपनी ब्लाउज के बटन खोलने लगी,,, बाथरूम के अंदर का नजारा देखकर शुभम के तन बदन में आग लग रही थी और यही हाल निर्मला का भी हो रहा था शीतल की बेशर्मी को देखकर वह भी बेशर्म करना चाहती थी इसलिए वह ब्लाउज के बटन खोल पाती इससे पहले वह भी अपनी साड़ी का पल्लू अपनी मदमस्त चूचियों पर से हटा कर उसे अपनी कमर से खोलना शुरू कर दी,,,, शुभम की आंखों के सामने दो-दो गदराई जवानी अपने-अपने वस्त्र उतारकर नंगी होने जा रही थी। एक जवान लड़के को और क्या चाहिए था,,,, उसकी तो दसों उंगलियां घी में थी,,, किस्मत से उसे उम्मीद से दुगना मिल रहा था,,, शुभम के तन बदन में जवानी की लहर हो रही थी बाथरूम के अंदर एक साथ दो दो औरतें अपने कपड़े उतार कर नंगी हो रही थी निर्मला अपनी साड़ी उतार कर फर्श पर फेंक चुकी थी और शीतल अपनी ब्लाउज के बटन खोल कर अपने ब्लाउज को अपनी गोरी चिकनी बाहों में से निकालकर उन्हें ब्लाउज की कैद से आजाद कर चुकी थी,,,। लेकिन अभी भी शीतल के गोरे बदन पर उसकी चुचियों के के संपूर्ण वजूद को उसके काले रंग की ब्रा में समेटे हुए थे उसी से शीतल अपने दोनों हाथ पीछे की तरफ ले जाकर उन चूचियों के आजाद नामा पर अपनी स्वीकृति का मोहर लगा रही थी देखते ही देखते अपनी नाजुक होली हो का सहारा देकर वह अपनी ब्रा की हुक को भी खोल दी और जैसे ही उसकी ब्रा का हुक खुला,,, वैसे ही तुरंत उसके शौख चंचल लिए हुए चूचियां चहकते हुए पानी भरे गुब्बारों की तरह लहराने लगी,,,। और उन्हें लहराते हुए चूचियों को देखकर शुभम के मुंह में पानी के साथ-साथ उसके मजबूत लंड ने अपना सर उठाकर उसकी जवानी को सलामी भर दिया,,, शायद यह शीतल के लिए पहला वक्त था जब वह एक औरत और उसके बेटे की आंखों के सामने अपने कपड़े उतार कर नंगी हो रही थी,,,, लेकिन निर्मला के लिए यह दूसरी बार वह पहली बार भी इसी तरह से अपने भाई की ही जवान लड़की की आंखों के सामने अपने बेटे की मौजूदगी में अपने कपड़े उतार कर एकदम नंगी होकर अपने बेटे से चुदाई का आनंद ली थी,,, और अपनी आंखों से अपने बेटे के द्वारा अपने भाई की बेटी को चुदते हुए देखी थी,,,,।

बाथरूम में तीनों बेहद उत्सुकता से भरे हुए थे उत्तेजना पल पल उन तीनों के बदन में अपना असर भर रही थी,,। शिमला की गुलाबी ठंडी बाथरूम में निर्मला और शीतल की गर्म जवानी के आगे पिघलना शुरू कर दी थी,,,।

निर्मला भी शीतल की गोल गोल सूचियों को देखकर एकदम गरम हो गई वह नहीं चाहती थी कि उसकी मद मस्त जवानी शीतल की जवानी के आगे फीकी पड़ जाए,,, इसलिए वह भी धीरे-धीरे अपने ब्लाउज के बटन खोल कर शीतल की आंखों के सामने अपने ब्लाउज को उतार फेंकी,,। शुभम यह बात अच्छी तरह से जानता था कि शीतल की गोल-गोल सुंदर चुचियों की अपेक्षा उसकी मां की चूचियां बेहद खूबसूरत और गोलाई लिए हुए हैं,,, कुछ नहीं धड़कते दिल से अपनी मां की चूचियों को वस्त्र विहीन होता हुआ देख रहा था,,, शीतल के भी हाथ पेटिकोट की डोरी को खोलते खोलते वही थम गए थे वह भी निर्मला की चूचियों को देखना चाहती थी,,,। और निर्मला भी अपनी कामुक अदा के साथ अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर अपनी ब्रा के हुक को खोल दी,,,, शुभम अपनी आंखों से देख रहा था कि उसकी मां की ब्रा में लबालब उसकी दोनों जवानी भरी हुई थी और ब्रा के हुक के खुलते ही दोनों जवानी छलक कर बाहर आ गई,,,,।

पानी भरे गुब्बारों की तरह जैसे ही छलक कर निर्मला की चूचियां बाहर को आई शुभम से रहा नहीं गया और वह आगे बढ़कर अपनी मां की मदमस्त जवानी को इज्जत बख्श ते हुए उसके दोनों गुब्बारों को अपने हाथों में थाम लिया और उन्हें दबाना शुरू कर दिया,,,,।

आहहहहहहह,,,, शुभम धीरे से,,,,,( उत्तेजना में आकर शुभम ने इतनी जोर से अपनी मां की चुचियों को दबाया था कि उसके मुंह से कराहने की आवाज फूट पड़ी थी,,,, लेकिन शीतल की उपस्थिति में उसे अपने बेटे के द्वारा इस तरह से चूची दबाना बेहद आनंद मय लग रहा था,,, शुभम एकदम मदहोश हो गया था वह दोनों हाथों से अपनी मां की चूची को दबा रहा था,,,। यह देखकर शीतल के तन बदन में आग लगने लगी और वह तुरंत अपनी पेटीकोट की डोरी को खोल कर आगे बढ़ गई और पीछे से शुभम को अपनी बाहों में कस ली हालांकि अभी भी वह पूरी तरह से निर्वस्त्र नहीं हुई थी उसके तन बदन पर अभी भी काले रंग की चड्डी थी।

ओहहहहहह,,,,,, शुभम मेरे राजा,,,( शीतल पागलों की तरह शुभम के गर्दन को चूमते हुए गरम सिसकारी ले रही थी और शुभम अपनी मां की दोनों चुचियों में व्यस्त था निर्मला मदहोशी के आलम में खोती चली जा रही थी,,,। शुभम उसकी चुचियों को मुंह में भर कर पीना शुरू कर दिया था और निर्मला उत्तेजित होते हुए अपने दोनों हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने पेटीकोट की डोरी को खोल रही थी और शीतल उसके गर्दन को चूमते हुए नीचे से उसकी टीशर्ट को पकड़ कर ऊपर उठाकर उसके टी-शर्ट को निकाल रही थी,,,। देखते ही देखते व शुभम के बदन पर से उसकी टीशर्ट निकाल कर नीचे फर्श पर फेंक दी,,, और अगले ही पल वाला शुभम की चिकनी पीठ पर अपने लाल-लाल होठों को ऊपर से नीचे तक घिसने लगी,,, सीतल के तन बदन में आग लगी हुई थी,,, वह अपनी उन्मादकता शुभम की नंगी चिकनी पीठ पर उतार रही थी,,, और शुभम अपनी मां की मदमस्त पानी भरे गुब्बारों जैसे चूचियों को दबा दबा कर उन्हें मुंह में लेकर उन्हें चूस चूस कर एकदम टमाटर की तरह लाल कर दिया था,,, लगातार निर्मला के मुख से सिसकारी की आवाज पूरे बाथरूम में गुंज रही थी,,, देखते ही देखते पेटिकोट की डोरी खुलते ही निर्मला की पेटी कोट सरररर से उसके पैरों में गिर गई,,,, बाथरूम में तीनों इस समय अर्धनग्न अवस्था में थे शीतल निर्मला की तो मत मस्त चूचियां अपनी चमक से पूरे बाथरूम को चमका रही थी लेकिन अभी भी तीनों के बदन पर उनके वस्त्र उनके नंगे पन को ढके हुए थे जिसकी शुरुआत शीतल अपने हाथों से अपनी काली रंग की पैंटी को उतार कर नंगी होने का सबूत पेश करने लगी देखते ही देखते शीतल अपने हाथों से अपनी काली रंग की पैंटी उतार कर एकदम नंगी हो गई,,,, लेकिन अपनी मां की लाल रंग की पेंटिं को उतारकर यह सौभाग्य शुभम खुद प्राप्त करना चाहता था इसलिए वह खुद अपने हाथों से अपनी मां की लाल रंग की चड्डी को उतारकर उसे नंगी कर दिया,,,।,,,,

अब शीतल निर्मला दोनों संपूर्ण रूप से एकदम नंगी हो गई थी लेकिन अभी भी शुभम के बदन पर वस्त्र था,,, शीतल और निर्मला दोनों की मदमस्त जवानी छलक रही थी,,,। तीनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी लेकिन तीनों आंखों के इशारों से ही काम चला रहे थे,,। लेकिन तभी वार्तालाप की शुरुआत करते हुए शीतल बोली,,।

हम दोनों तो नंगी हो गई लेकिन तुम अभी भी कपड़े पहने हो,,,( इतना कहने के साथ ही शीतल शुभम की तरफ आगे बढ़ी है और उसके होठों पर अपने लाल लाल होठ रखकर उसके फोटो को चूसना शुरु कर दी,,, यह देखकर निर्मला भी अपने बेटे के पीछे आ गई और अपने नंगे बदन को उसके बदन से सटाकर उसके गर्दन को चूमना शुरु कर दी दो-दो नंगी औरतों के बीच अपने आपको पाकर शुभम इस समय दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान बना हुआ था,,,

शुभम का मोटा तगड़ा लंड तंबू की शक्ल में आकर इस समय शीतल की टांगों के बीच उसकी बोर्ड पर ठोकर मार रहा था,,, और उसके तंबू के ठोकर को अपनी बुर के मुख्य द्वार पर महसूस करके शीतल पानी पानी हुए जा रही थी,,।

जल्द से जल्द शीतल अपनी आंखों से शुभम के खड़े लंड को देखना चाहती थी उसके दीदार करना चाहती थी इसलिए वह तुरंत अपने घुटनों के बल बैठ गई,, अभी भी निर्मला शुभम को अपनी बाहों में लेकर उसके गर्दन को चूम रही थी,, और अपनी बड़ी परी चूचियों को उसकी नंगी पीठ पर रगड़ रही थी जिससे शुभम को बहुत मजा आ रहा था,,, घुटनों के बल बैठी सीतल बड़े गौर से शुभम के पेंट में बने तंबू को देख रही थी,,,,, और शुभम भी उत्सुकता भरी निगाहों से शीतल की तरफ देख रहा था,,, शीतल से रहा नहीं गया और वह अपनी प्यासी नजरों से पेंट में बने तंबू को देखते हुए अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर पेंट की बटन को खोलना शुरू कर दी,,,, निर्मला भी अपने बेटे के बदन से खेलते हुए शीतल की हरकत को मादकता भरी निगाहों से देख रही थी अब उसे बिल्कुल भी झिझक नहीं हो रही थी और ना ही किसी भी तरह का शीतल से इतराज हो रहा था वह भी हर पल का मजा लेना चाहती थी,,

देखते ही देखते अपनी नाजुक उंगलियों का सहारा देकर शीतल शुभम के पेंट की बटन को खोल दी और उसकी चेन की जीप को खोलते हुए तुरंत उसके पेंट को नीचे घुटनों तक खींच दी,,,। लेकिन अभी भी निर्मला के साथ-साथ शीतल की उत्सुकता बनी हुई थी क्योंकि अभी भी शुभम का मोटा तगड़ा लंड अंडरवियर के अंदर अपने वजूद को छिपाए हुए था,,, जिसे इस बार निर्मला पीछे से अपने दोनों हाथों से उसके अंदर बीयर पकड़कर नीचे की तरफ सरकाने लगी,,,,

आहहहहह,,,,, अपनी मां की इस हरकत की वजह से उन्मादकता मैं शुभम के मुंह से आह निकल गई,,,, और देखते ही देखते पीछे से उसकी मां उसके अंडर वियर को नीचे घुटनों तक ला दी,,,, अंडरवियर के कैद से आजाद होते ही शुभम का मोटा तगड़ा लंड हवा में लहराने लगा शीतल फटी आंखों से शुभम के मोटे तगड़े लंड का दीदार कर रही थी,,, उत्तेजना के मारे उसका गला सूखता चला जा रहा था निर्मला को इस बात का अहसास अच्छी तरह से था कि उसके बेटे के मोटे तगड़े लंड को देखकर शीतल के मन में क्या चल रहा है,,,, निर्मला पूरी तरह से खुल चुकी थी शिमला में आकर व एक-एक पल को पूरी तरह से जी लेना चाहती थी इसलिए अपने एक हाथ से अपने बेटे के लंड को पकड़ कर शीतल के मुख के बेहद करीब उसे ऊपर नीचे करके लहराते हुए शीतल से बोली,,,।

क्यों शीतल रानी मेरे बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूसोगी नहीं,,,,

( अपनी मां की बात सुनकर शुभम के साथ-साथ शीतल भी पूरी तरह से चौक गई क्योंकि उन दोनों को उम्मीद नहीं थी कि निर्मला खुद अपने मुंह से अपने बेटे के लंड को उसे मुंह में लेकर चूसने के लिए कहेगी,,।)

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बाथरूम में गर्मी का पारा लगातार नीचे गिरता चला जा रहा था उम्मीद से कई गुना ज्यादा गरम नजारा बाथरूम के अंदर तीनों के द्वारा दर्शाया जा रहा था बेहद उत्तेजक और अलौकिक नजारा इस समय बाथरूम में बना हुआ था शीतल घुटनों के बल बैठी हुई थी और निर्मला अपने बेटे के ठीक पीछे खड़े होकर अपने एक हाथ में उसका लंड लेकर उसे ऊपर नीचे हिलाते हुए शीतल को ललचा रही थी,,,। ना तो शुभम को और ना ही शीतल को इस बात की उम्मीद थी कि निर्मला खुद अपने हाथ में अपने बेटे के लंड को पकड़ कर उसे चूसने के लिए बोलेगी,,, निर्मला के मुंह से इतना सुनते ही वह अपने आप को रोक नहीं पाए और अपने लाल-लाल होठों को आगे बढ़ा कर सीधा शुभम के लंड को अपने मुंह में भर लिया और उसे लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दी,,,, एक मां के लिए यह बेहद उत्तेजना आत्मक दृश्य था जब उसकी आंखों के सामने उसकी हमउम्र खूबसूरत सहेली एकदम नग्न अवस्था में घुटनों के बल बैठ कर उसकी आंखों के सामने उसके बेटे के लंड को मुंह में लेकर लॉलीपॉप की तरह और वह भी बिना किसी शर्म के चूस रही थी,,, शीतल मजे लेकर शुभम के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने ही थी शुभम तो साथ में आसमान में उड़ रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जो भी उसके साथ हो रहा है वह सच है या कल्पना,,,, वह तो बस आनंद की सीमा को पार कर चुका था आनंद की परिभाषा को अपने अंदर जी रहा था,,, निर्मला भी एकदम मदहोश हो चुकी थी क्योंकि जिस तरह से शीतल उसके बेटे के लंड को बाहर बार अपने गले तक उतारकर उसे चूसने का आनंद लूट रही थी निर्मला से भी रहा नहीं जा रहा था वह उत्तेजित होते हुए बार-बार अपने बेटे की पीठ पर अपनी दोनों चुचियों को रखते हुए अपनी एक हथेली से अपने बेटे के नितंब को नोच ले रही थी और उसे ऐसा करने में बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,।

शुभम अपनी आंखों को बंद करके इस असीम पल का आनंद ले रहा था शिमला में आना उसके लिए मानो स्वर्ग में आने के बराबर हो गया था जिसमें वह एक राजा की तरह दो-दो अप्सराओं और वह भी एक दम नंगी उनका आनंद लूट रहा था,,, शुभम भी मदहोश होता हुआ अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लाकर जहां तक हो सकता था वहां तक अपनी मां के नंगे खूबसूरत बदन पर अपनी हथेली फिराता हुआ जगह-जगह पर उसके बदन को दबोच ले रहा था,,,,, जिससे निर्मला के मुंह से कराहने की आवाज फूट पड़ रही थी। और निर्मला उत्तेजना बस बार-बार शीतल के मुंह में से अपनी बेटी के लंड को बाहर खींचकर उसे उसके चेहरे पर पटकने लगती थी जिससे शीतल को तो चोट लगती थी लेकिन उस चोट में भी उसका अलग मजा उसे मिल रहा था

निर्मला पागल हुए जा रही थी वह बार-बार इसी तरह की हरकत करते हुए अपने बेटे के लंड के मोटे सुपाड़े को उसके गोरे गोरे गाल पर रगड़ रही थी,,,,, जिससे मारे उत्तेजना के शीतल सीहर उठ रही थी,,,, तीनों को अपने अपने तरीके से बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,। शिमला के बर्फीले मौसम में बाथरूम में इस समय तीनों एकदम नंगे होकर एक दूसरे की छलकती जवानी को दोनों हाथों से लूट रहे थे उन्हें ठंडे पन का जरा भी एहसास नहीं हो रहा था क्योंकि बाथरूम के बाहर का पारा जितना ठंडा था उससे ज्यादा गर्म बाथरूम के अंदर का पारा होता जा रहा था क्योंकि दो दो औरतों की गर्म जवानी के आगे मौसम के ठंडापन एकदम फीका पड़ता नजर आ रहा था,,,। जी भर के शीतल शुभम के लंड को चूस रही थी,,,। अब इस खेल में निर्मला को पूरी तरह से आनंद आने लगा था वह अच्छी तरह से समझ गई थी कि जितना वह अपने शर्म को त्यागे की उतना अधिक आनंद उसकी ओर खींचता चला आएगा,,, और ऐसा ही हो रहा था तभी तो इस समय बाथरूम में तीनों निर्वस्त्र होकर एक दूसरे की जवानी को अपने अपने हिसाब से लूट रहे थे शुभम का लंड पूरी तरह से लोहे के रोड की तरह खड़ा था और शीतल के नरम नरम गुलाबी होठों के बीच अपनी जगह बनाते हुए शीतल के गले तक पहुंच रहा था,,,।

निर्मला इस खेल को और भी ज्यादा उत्तेजक बनाना चाहती थी इसलिए अपना हाथ ऊपर की तरफ बढ़ाकर साबर का नोट घुमा दी और सावर में से गर्म पानी की बौछार नीचे गिरने लगी,,,, लेकिन इससे तीनों को किसी भी प्रकार की दिक्कत पेश नहीं आई बल्कि उन तीनों को और ज्यादा मजा आने लगा,,,।

ले चूस शीतल रानी मेरे बेटे के लंड को पूरा मुंह में लेकर चूसने जिंदगी में तूने ऐसा मोटा तगड़ा लंड नहीं देखी होगी,,, क्या मस्त लंड चूसती है तू शीतल तूने तो मुझे एकदम मस्त कर दी,,,।आहहहहहहह,,,,,( ऐसा कहते हुए निर्मला अपने बेटे के लैंड को सीधा के मुंह में से एक बार फिर से बाहर निकाल कर उसके चेहरे पर उसके मोटे तगड़े लंड को पटकने लगी,,,,,।) बहुत मजा आएगा जब मेरी आंखों के सामने मेरे बेटे का लंड तेरी गुलाबी बुर के अंदर घुसेगा देखना मेरे बेटे का लंड तेरी बुर का भोसड़ा बना देगा कितना मजा आएगा शीतल रानी,,,,,,आहहहहरहहह,,,,

( इतना कहते हुए दिल मेरा एक बार फिर से अपने हाथ से ही अपने बेटे का लंड पकड़ कर शीतल के मुंह में डालते हुए बोली,,,) ले चूस मेरी जान अच्छे से चूस,,, ताकि यह तेरी बुर में जाकर तुझे एकदम मस्त कर सके,,,,,

( और एक बार फिर से शीतल शुभम के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दी शुभम तो अपनी मां की गंदी बातों को सुनकर एकदम उत्तेजित हो गया था वह हल्के हल्के अपनी कमर को आगे पीछे कर के सीतल के मुंह को चोदना शुरु कर दिया था,,,, इतना ज्यादा उत्तेजित हो चुका था कि अपने दोनों हाथों में अपनी मां का चेहरा पकड़ कर उसे अपने करीब लाता हुआ उसके लाल लाल होंठों को अपने होंठों में दबा कर चूसना शुरू कर दिया,,,, तीनों एकदम आनंद से भरे जा रहे थे सावर में इसे झड़ रहे गर्म पानी का फावारा उन तीनों के गर्म बदन को और ज्यादा गर्मी प्रदान कर रहा था,,,। तीनों पानी में पूरी तरह से गीले हो चुके थे,,,। थोड़ी देर बाद शुभम अपने होठों को अपनी मां के लाल लाल होठों से अलग करते हुए बोला,,,,।

तू भी मेरा लंड चूस मम्मी बहुत मजा आएगा जब एक साथ तुम दोनों मेरे लंड को बारी-बारी से अपने मुंह में लेकर चूसोगी,,,,

( इतना सुनते ही निर्मला भी तुरंत घुटनों के बल बैठ गई और शीतल के मुंह में से अपने बेटे के लंड को निकालकर अपनी मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दी अब इस खेल में और ज्यादा मजा आने लगा था,,, निर्मला पागलों की तरह अपने बेटे के लंड को चूस रही थी और उसे शुभम के लंड को चूसते हुए शीतल बड़े गौर से देख रही थी निर्मला के खूबसूरत नंगे बदन को देखकर शीतल के बदन में कुछ-कुछ हो रहा था उससे रहा नहीं गया और वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर निर्मला के दोनों दशहरी आम को अपने हाथों में थाम ली,,,,। और से जोर-जोर से लगाना शुरु कर दी शीतल की इस हरकत से निर्मला के तन बदन में आग लग गई उसे मज़ा आने लगा एक अद्भुत अहसास उसके तन बदन को झकझोरने लगा,,,, पहली बार किसी औरत के हाथ में वह अपनी दोनों चुचियों को महसूस कर रही थी और उसे मजा भी आ रहा था क्योंकि शीतल उसे जोर जोर से दबा रही थी शीतल के लिए भी यह पहला मौका था जब वह किसी औरत के अंग को अपने हाथ में लेकर उससे खेल रही थी उसे रहा नहीं गया और वह इससे भी ज्यादा आनंद पाने की अपेक्षा के चलते अपना मुंह आगे बढ़ाकर निर्मला की चूची को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,,।

आहहहहहहह,,,,( मुंह में शुभम का मोटा तगड़ा लंड ठुंसा होने की वजह से निर्मला के मुंह से घुटी घुटी से सिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,,, उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि शीतल ने इस तरह की हरकत करेगी हालांकि इस तरह का आनंद व पहले भी अपने भाई की बेटी के साथ ले चुकी थी लेकिन आज पहली बार था कि वह अपनी हमउम्र शीतल के साथ इस तरह का मजा ले रही थी शीतल को निर्मला की चुचियों को दबाने और उसे मुंह में लेकर चूसने में बहुत मजा आ रहा था सावर में भीगते हुए तीनों एकदम मस्त हुए जा रहे थे,,, शुभम पागलों की तरह अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए अपनी मां के मुंह को ही चोद रहा था,,,।

शीतल को बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रहा था कि वह इस पल का आनंद किस तरह से उठाएं वह कभी निर्मला की चुचियों से खेलने लगती तो कभी उसके निप्पल को मुंह में लेकर पीना शुरु कर देती तो कभी शुभम के लंड को निर्मला के मुंह से निकालकर अपने मुंह में लेकर चूसना शुरु कर देती,,,,, तीनों को बहुत मजा आ रहा था शीतल और निर्मला दोनों मस्त हुए जा रहे थे,,,। निर्मला के लिए शुभम का इतनी देर तक ठहरे रहना कोई ताज्जुब की बात नहीं थी लेकिन शीतल के लिए यह हैरान कर देने वाली बात थी कि दो दो औरतों का मजा लेने के बावजूद भी शुभम का लंड अभी तक पानी नहीं फेंका था,,, पर यही देख कर शीतल की बुर में मीठा मीठा दर्द होने लगा,,,, उससे अपनी बुर का दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था इसलिए वह खड़ी हो गई और शुभम से बोलि,,,

शुभम अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है मुझ पर अपनी कृपा कर दे अपना लंड मेरी बुर में डाल दें,,,।( और इतना कहते हुए शीतल बाथरूम में दीवार पकड़ कर अपनी मदमस्त बड़ी बड़ी गांड को शुभम के आगे परोस दी और अपनी नजर घुमा कर शुभम की हरकत को देखने लगी कि अब वो क्या करता है,,,। शीतल की बातों से लेकर शुभम अपनी मां की तरफ देखने लगा इशारों ही इशारों में अपनी मां से इजाजत लेना चाहता था और उसकी मां खुश होते हुए बोली,,,।

आगे बढ़ो बेटा और शीतल की मदमस्त जवानी रूपी बुर में अपने लंड का झंडा गाड़ दो,,,,,

अपनी मां की तरफ से इजाजत पाते ही शुभम शीतल की तरफ आगे बढ़ा जो की दीवार था में हसरत भरी निगाहों से उसे ही देख रही थी और उसके झूलते हुए लंड को शुभम शीतल के करीब जाकर उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर दो-चार चपत लगा दिया,,,,,

आहहहह,,, शुभम,,,,

चिंता मत करो मेरी रानी मैं तुम्हारी ऐसी चुदाई करूंगा कि जिंदगी भर याद रखोगी,,,,( और इतना कहते हुए शुभम अपने हिसाब से शीतल की बड़ी बड़ी गांड को एडजस्ट करने लगा और दोनों हाथों से उसकी गांड की फांकों को फैला कर उसके गुलाबी छेद को अच्छी तरह से देखने लगा,,, शुभम को शीतल की गुलाबी पूरा एकदम साफ नजर आ रही थी और वह बिना एक पल गांव आए अपने मोटे तगड़े लंड के सुपाड़े को उसके गुलाबी छेद पर टीका कर हल्के से धक्का लगाया,,,, बुर पहले से ही पूरी तरह से गीली हो चुकी थी इसलिए आराम से गप्प ककके अंदर घुस गया,,, देखते ही देखते शुभम शीतल की चुदाई करना शुरू कर दिया अपनी आंखों के सामने जिंदगी में दूसरी बार निर्मला अपने बेटे को किसी और को चोदते हुए देख रही थी लेकिन उसे बहुत मजा आ रहा था उसकी आंखों से एक-एक पल बड़ी बारीकी से नजर आ रहा था,,।

निर्मला को यह नजारा देखने में बहुत ज्यादा आनंद आ रहा था कि उसके बेटे का लंड शीतल की बुर के अंदर बाहर हो रहा था,,,, शीतल अपनी दोनों टांगों को फैला कर शुभम से चुदवा रही थी,,,। निर्मला भी मदहोश हुए जा रही थी शीतल के द्वारा अपनी चूची को हाथ में लेने से जिस तरह की झनझनाहट उसे अपने तन बदन में महसूस हुई थी उसी के चलते निर्मला अपने घुटनों के बल बैठ कर शीतल की दोनों टांगों के बीच में आ गई और अपने बेटे के लंड को उसकी बुर से अंदर बाहर होता हुआ देखते हुए एकदम उत्तेजित अवस्था में अपनी जीभ बाहर निकाल कर शीतल की बुर को चाटना शुरू कर दी,,, शीतल को निर्मला की तरफ से इस तरह की हरकत की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी इसलिए वह निर्मला की इस हरकत पर पूरी तरह से काम विभोर हो गई,,,, शुभम भी एकदम मस्त हो गया और वह जोर-जोर से अपने लंड को शीतल की बुर में पेलने लगा क्योंकि वह जब जब शीतल की बुर को अपनी जीभ से चाट रही थी तब तक शुभम का लंड भी स्पर्श हो जा रहा था,,।

अत्यधिक उत्तेजना को शीतल बर्दाश्त नहीं कर पाए और जल्द ही झड़ गई लेकिन शुभम अभी भी बरकरार था उसका लंड पूरी तरह से लोहे का रोड बन चुका था जो कि पानी निकलने के बाद ही ढीला होने वाला था,,,, इसलिए वह झट से शीतल की बुर से अपना लंड बाहर खींच लिया और अपनी मां की बाहों को पकड़कर उसे खड़ा करते हुए उसके गुलाबी होठों को चूसने लगा और उसके होठों को चूसते चूसते वह उसे दीवार से टिका कर उसे धीरे-धीरे अपनी गोद में उठाना शुरू कर दिया,,, और देखते ही देखते शीतल की आंखों के सामने ही वह अपनी मर्दाना जो से भरा हुआ था कर दिखाते हुए अपनी मां की भारी-भरकम शरीर को अपने गोद में उठाकर उसे दीवार से टीका दिया और अपने मोटे तगड़े लंड के सुपाड़ा को अपनी मां की गुलाबी छेद में डालकर उसे चोदना शुरु कर दिया,,, जबरदस्त गरमा गरम माहौल बन चुका था शीतल को छोड़कर उसका पानी निकाल चुका था लेकिन अभी भी उसका मर्दाना जोश पानी से लबालब भरा हुआ था इसलिए वह अपनी गर्मी शांत करने के लिए अपनी मां को गोद में उठाकर उसकी चुदाई कर रहा था,,,, शीतल हैरान थी उसके जोश और ताकत को देखकर और निर्मला मदहोश हुए जा रही थी शीतल की आंखों के सामने एकदम नंगी होकर चुदवाने में,,, उसे और ज्यादा मजा आ रहा था शुभम की कमर लगातार आगे पीछे हो रही थी उस में जरा भी थकान महसूस नहीं हो रही थी,,, सावर से निकलता गर्म पानी तीनों के बदन को भिगो रहा था,,, तकरीबन 15 मिनट तक शुभम अपनी मां को गोद में उठाए हुए उसकी चुदाई करता रहा उसकी गुलाबी बुर में अपने लंड को पेलता रहा,,,, तब जाकर पहले निर्मला और फिर शुभम का पानी निकला,,,।

तीनों एकदम तृप्त हो चुके थे शिमला में आकर यह उनका पहला कदम था एक साथ संभोग की पराकाष्ठा को प्राप्त करने का,,,, इसके बाद वह तीनों नहा कर बाथरूम से बाहर आ गए और अपने कपड़े पहन कर तैयार हो गए तब तक घर की नौकरानी आ चुकी थी और घर के बाहर खड़े होकर डोरबेल बजा रही थी,,,।

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तीनों निपट कर बाथरुम से बाहर आकर जैसे ही तैयार हो गए वैसे ही डोर बेल बजने लगी थी। शीतल समझ गई कि नौकरानी आई है इसलिए वह खुद दरवाजा खोलने के लिए आगे बढ़ी,,, दरवाजा खोलो तो सामने नौकरानी खड़ी थी जो कि शीतल को पहचानती थी और शीतल को देखते ही उसे नमस्ते की,,, जवाब में शीतल भी मुस्कुराते हुए उसे नमस्ते की यह शीतल की सादगी थी,,,। नौकरानी घर में आ गई और सामने नजर पड़ते ही निर्मला और शुभम दोनों को नमस्ते की जवाब में वह लोग भी मुस्कुराते हुए नमस्ते कर दिए,,,। नौकरानी मन ही मन बहुत खुश हुई क्योंकि जिस तरह से शीतल निर्मला और शुभम ने उसका अभिवादन किए थे उस तरह से कोई भी नौकरानी को इतनी इज्जत नहीं बख्शता था,,।

मेम साहब आप लोगों से मिलकर मुझे बहुत खुशी हुई क्योंकि आप लोग बेहद पढ़े लिखे और संस्कारी मालूम पड़ते हैं तभी तो मुझे सी नौकरानी को मुस्कुराते हुए नमस्कार किया वरना हम लोगों को तो कोन मुंह लगाता है,,।

अरे ऐसी कोई बात नहीं है आखिरकार तुम भी तो एक औरत हो और एक औरत की इज्जत करना तो हम सब का फर्ज है क्योंकि मैं भी एक औरत हूं अगर मैं किसी की इज्जत नहीं करूंगी तो भला मेरी इज्जत कौन करेगा,,,।

( निर्मला की बात सुनते ही नौकरानी बहुत खुश हुई,,,।)

वैसे तुम्हारा नाम क्या है,,,।( निर्मला नौकरानी से बोली।)

शांति मेरा नाम शांति है,,,।

दिखने में तो तुम बहुत खूबसूरत हो,,,,

लेकिन पढ़ी-लिखी नहीं हूं ना मेम साहब इसके लिए यह सब काम करना पड़ता है,,,।

सही है अगर पढ़े लिख ली होती तो जिंदगी में तुम्हें बहुत काम आता,,,।

मां बाप की हैसियत नहीं थी पढ़ाने की दो वक्त का खाना खिला देते थे वही बहुत था,,,,,।

चलो कोई बात नहीं जिंदगी में यह सब तो होता ही रहता है,,,। लेकिन तुम सच में बहुत खूबसूरत हो,,,।

( निर्मला के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर वह बहुत खुश हूई,, और वह खुश होते हुए बोली,,।)

अच्छा मैम सब खाना में बोलिए क्या बनाना है,,,?

तुम सिर्फ गरमा गरम कॉफी बना दो खाना हम बाहर खा लेंगे,,,,( शीतल कुर्सी पर बैठते हुए बोली।)

ठीक है मैम साहब में कॉफी बना देती हू और घर की सफाई कर देती हूं,,,,।

( इतना कहकर वह किचन में चली गई,,। और निर्मला शीतल के साथ-साथ शुभम भी उसे किचन में जाते हुए देखता रह गया,,, क्योंकि उस नौकरानी को देखकर शुभम भी हैरान रह गया था क्योंकि वह बहुत खूबसूरत है बस थोड़ा सा रंग दबा हुआ था बाकी बदन का हर एक अंग जवानी से भरा हुआ उबाल मार रहा था,,, तकरीबन 30 32 साल की होगी और भरा हुआ बदन गदराया जिस्म अपनी अलग कहानी कह रहा था जब से मैं पुरानी घर में दाखिल हुई थी तब से शुभम की नजर उसके ऊपर ही थी,,, अनुभवी आंखों से शुभम शांति की खूबसूरत बदन के हर एक हिस्से का नाप ले चुका था,,,। अच्छी तरह से समझ रहा था कि शांति के बदन का हर एक अंग किस तरह का दिखता होगा वह मन में कल्पना करके शांति के वस्त्रों के अंदर तक अपनी कल्पना ओ की नजर दौड़ा चुका था,,,, उसकी चुचियों से लेकर उसके चिकने पेट के बीचो बीच की गहरी नाभि के साथ-साथ वह केले के सामान चिकने जांघों के बीच स्थित उसकी बुर की पतली दरार के बारे में पूरी तरह से अवलोकन कर चुका था,,,,। मर्दों की फितरत क्या होती है इस समय शुभम के मन में जो कुछ भी चल रहा है उसी से पता चल जाता है कि दोनों खूबसूरत औरत पास में होने के बावजूद भी वह नौकरानी को भोगने की इच्छा मन में पाल रहा था,,,।

निर्मला और शीतल दोनों आपस में बातें करने लगे और शुभम का मन रसोई घर में कॉफी बना रही शांति के ऊपर फिसलने लगा था इसलिए वह पानी पीने का बहाना करके रसोई घर में चला गया,,,। जहां पर शांति अपने गर्म कपड़े को निकाल कर उसे टेबल पर रख कर अपनी साड़ी को थोड़ा सा ऊपर की तरफ उठा कर अपनी कमर में खोंसे हुए थी,,, जिससे उसकी गोरी गोरी मांसल चिकनी पिंडलिया साफ नजर आ रही थी,,,,। शुभम को किचन में आता हुआ देखकर शांति बोली,,।

क्या चाहिए छोटे बाबू,,।

छोटे बाबू नहीं शुभम नाम है मेरा,,,,

लेकिन छोटे बाबू जी आप बड़े लोग हैं आपका नाम नहीं ले सकती,,,,,।

लेकिन तुम मुझे छोटे बाबू कहकर बुलाओगी तो मैं बुरा मान जाऊंगा,,,,

और मैं तुम्हें नाम से बुलाऊंगी तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा,,,

इसका मतलब साफ है कि तुम मुझे छोटे बाबू कहकर ही बुलाओगी,,,,।

जी हां,,,,( इतना कहकर वो हंसने लगी,,,, और साथ में शुभम भी हंसने लगा,,,।,,, और हंसते हुए ठीक उसके पीछे से गुजरते वह वह तिरछी नजरों से नौकरानी के संपूर्ण बदन पर अपनी प्यासी नजरों की छाप छोड़ते हुए गया,,,, फ्रिज खोल कर पानी की बोतल निकाला और गटागट पीना शुरू कर दिया लेकिन इस दौरान भी वह अपनी नजरों से नौकरानी के बदन को निहारता रहा,,, जो कि नौकरानी कॉफी बनाने में व्यस्त थी लेकिन एक अनजान लड़के के सामने अपने आप को असहज महसूस कर रही थी इसलिए पीछे नजर घुमाकर शुभम की तरफ देख ले रहे थे और शुभम भी उसी को देख रहा था इसलिए दोनों की नजरें आपस में टकरा जा रही थी और नौकरानी एकदम से शर्मिंदा होकर शर्म के मारे अपनी नजरों को फेर ले रही थी उसके लिए यह समय बेहद असहज और अजीब सा था जिसका वह सामना करने में असमर्थ महसूस कर रही थी क्योंकि पहली बार इस तरह से कोई अनजान लड़का उसको घूर रहा था,,,। शुभम की नजर बार-बार नौकरानी के भारी भरकम पिछवाड़े पर चली जा रही थी जो कि हमेशा से शुभम की सबसे बड़ी कमजोरी रही है,,,। और अपनी उम्र के 30 32 साल गुजार चुकी नौकरानी की आंखें अनुभवी थी वह इतना तो समझ ही जा रही थी कि शुभम उसके बदन के कौन से हिस्से को घूर कर देख रहा है यह अहसास होते ही की वह अनजान लड़का उसकी भारी-भरकम गांड को देख रहा है तो यह एहसास उसको अंदर तक उत्तेजित कर जा रहा था,,,। अनजान जवान नजरों को अपने कपड़ों के अंदर तक धंसता हुआ महसूस कर के वह पूरी तरह से उत्तेजना के मारे गनगना जा रही थी,,, शुभम जानबूझकर पानी का बोतल मुंह में लगाए उसी तरह से खड़े होकर नौकरानी के बदन के संपूर्ण भूगोल को अपनी नजरों से निहार रहा था,,,,। काफी देर से किचन के अंदर खामोशी छाई हुई थी और असहज होते हुए नौकरानी ही इस खामोशी को तोड़ते हुए बोली,,,।

वैसे छोटे बाबू यहां पर घूमने के लिए आए हो या कुछ काम है,,,।

घूमने के लिए ही आए हैं सुना है कि शिमला धरती का स्वर्ग है इसलिए यहां घूमने का मन बहुत कर रहा था,,,।

तुमने ठीक ही सुना है छोटे बाबू शिमला सबसे खूबसूरत शहर है,,,।

तुम तो यही की रहने वाली हो तो तुम्हें अच्छी तरह से मालूम होगा कि कौन सी जगह घूमने लायक है,,,।

वैसे तो छोटे बाबू इस मौसम में यहां पर सब जगह घूमने लायक है क्योंकि अभी बर्फ बारी जोरों की नहीं है इसलिए इस मौसम में पूरा शिमला बहुत खूबसूरत लगता है,,,।

( शुभम को नौकरानी का संपूर्ण वजूद बेहद आकर्षक लग रहा था वह अपने आप को उसके करीब जाने से रोक नहीं पाया और कदम बढ़ाता हुआ पानी पीते हुए उसके बेहद करीब पहुंच गया ठीक उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया,,,। और धीरे से बोला,,,।)

तुम साथ चलोगी हम लोगों को शिमला घुमाने,,,

( एक अनजान लड़के को अपने बेहद करीब पाकर वो एकदम से घबरा गई और उसके हाथ से चम्मच छूट कर नीचे गिर गई जिसे वह हड़बड़ाहट में उठाने के लिए नीचे झुक गई,,,, और जैसे ही नीचे वह झुकी ठीक उसके पीछे शुभम खड़ा था जो कि नौकरानी के भारी-भरकम पिछवाड़े को देखकर काफी उत्तेजित हो गया था और उसके पेंट में उत्तेजना के कारण तंबू सा बन गया था,,, चम्मच उठाने के लिए नौकरानी के झुकते ही उसके नितंबों का संपूर्ण घेराव सीधे जाकर शुभम के पेंट के अग्रभाग से स्पर्श हो गया,,,, नौकरानी से यह अनजाने में ही हुआ था उसकी बड़ी-बड़ी गांड ठीक चिकन के पेंट में बने तंबू से टकरा गई और यह मौका शुभम अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था इसलिए जैसे ही उसके झुकने के कारण उसका भारी-भरकम गांड उसके लंड से टकराया उसके दोनों हाथ खुद-ब-खुद नौकरानी कि मानसर चिकनी कमर पर आ गए और शुभम इस अफरातफरी में इस मौके का लाभ उठाते हुए उसकी कमर को दोनों हाथों से थाम लिया और जानबूझकर अपने पेंट में बने तंबू को आगे की तरफ खेलते हुए उसके नितंबों से एकदम से सटा दिया ऐसा करने से शुभम के पेंट में बने तंबू सीधे-सीधे नौकरानी की गांड के बीचो बीच उसकी मखमली बुर के द्वार पर टकरा गया,,,,, और चम्मच उठाते हुए नौकरानी को जैसे ही ले एहसास हुआ कि उसकी गांड के बीचो बीच कोई नुकीली सी चीज टकराई है वह एकदम से सकते में आ गई,,,, उसे समझते देर नहीं लगी कि वह नुकीली चीज क्या है क्योंकि जिस तरह से शुभम ने उसकी दोनों हाथों से कमर को थाम रखा था वह समझ गई कि उसकी गांड के बीचो-बीच टकराने वाली चीज कुछ और नहीं बल्कि उसका लंड है उसका पूरा वजूद गनगना गया,,,, उसका दिल धक से कर गया,,,, क्योंकि शुभम के लंड की ठोकर उसे अपनी बुर के मुख्य द्वार पर बेहद अच्छे से महसूस हुई थी,,,, ना जाने किस एहसास से नौकरानी भर चुकी थी कि दो 4 सेकंड तक वह चम्मच को नीचे जमीन पर ही पकड़ी रह गई,,,, और जब उसे शर्मिंदगी का अहसास हुआ तब तक देर हो चुकी थी वह चम्मच को उठाकर खड़ी होने लगी और शुभम भी तब तक अपना काम कर चुका था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि औरतों की कमजोरी क्या होती है और उसने उस नोकरानी की भी कमजोरी को पलभर में ही भाप लिया था,,,। शुभम को इतना एहसास तो हो गया था कि उसके लंड की ठोकर नौकरानी के कौन से अंग पर बराबर जाकर बैठा है,,,,। इसलिए वह भी नौकरानी को उठने में मदद करता हुआ बोला,,,।

सॉरी मैं माफी चाहता हूं अनजाने में ही हो गया,,,,( नौकरानी कुछ और बोल पाती इससे पहले ही शुभम एकदम से बात बदलते हुए बोला,,,।) तो क्या सोची हो तुमने चलोगी हम लोगों को शिमला घुमाने,,,,,

नहीं नहीं छोटे बाबू मैं नहीं जा पाऊंगी मुझे दिन भर बहुत काम रहता है और वैसे भी शीतल मैडम है वह अच्छी तरह से शिमला घूमी हुई है वह घुमा देंगी,,,,।

( नौकरानी शर्म के मारे शुभम से नज़रें नहीं मिला पा रही थी क्योंकि जो कुछ भी हुआ था वह बेहद शर्मनाक था लेकिन नौकरानी के संपूर्ण वजूद को हिला गया था,,, क्योंकि उसे इस बात का एहसास हो गया था कि जब पेंट में होने के बावजूद भी शुभम का लंड उसकी बुर के बीचो-बीच ठोकर मार रहा था तो अगर वह पेंट के बाहर आ जाएगा तो एकदम से गदर मचा देगा और इस अहसास से वह पूरी तरह से भर चुकी थी,,,,। शर्मसार भी में जा रही थी और काफी अपने अंदर उत्तेजना का संचार भी होता हुआ महसूस कर रही थी पलभर में ही उसे अपनी पेंटी गीली होती हुई महसूस होने लगी थी,,,, किचन में आए शुभम को काफी देर हो चुकी थी इसलिए वह ज्यादा देर तक खड़ा रहना मुनासिब नहीं समझा इसलिए पानी की बोतल को वापस फ्रीज में रखता हुआ बोला,,,।

वैसे कुछ भी हो तुम बहुत अच्छी हो,,,,, और बेहद खूबसूरत भी ,,,,,(इतना कहने के साथ अभी वह किचन से बाहर निकल गया नौकरानी शुभम को जाते हुए देखती रह गई क्योंकि किसे अच्छा नहीं लगता है 1 जवान लड़के के मुंह से इस उम्र के दौर पर अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनना,,, नौकरानी बेहद प्रसन्न होते हुए तीन कप में कॉफ़ी उड़ेलने लगी,,,, और कॉफी को ट्रेन में लेकर किचन से बाहर आ गए जहां पर तीनों अपनी-अपनी जगह पर बैठकर गप्पे लड़ा रहे थे,,,, शुभम उस नौकरानी को बड़े गौर से देख रहा था,,,। नौकरानी सितारों निर्मला दोनों को कॉफी थमा कर कॉफी का ट्रे लेकर शुभम की तरफ बढ़ी,,,, वह मुस्कुराते हुए शुभम को कॉफी का कब पकड़ा नहीं लगे तो शुभम हाथ आगे बढ़ाकर कॉफी के कप को अपने हाथों में थाम लिया लेकिन जानबूझकर अपनी उंगलियों का स्पर्श उसकी नाजुक नाजुक उंगली ऊपर कराने लगा,, एक बार फिर से नौकरानी के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई,,, लेकिन तभी कॉफी पकड़ा ते हुए शर्म के मारे जब उसकी नजर से उनके चेहरे पर पड़ी तो उसकी नजरों के सिधान को देखकर वह पूरी तरह से छह गई और अपनी नजर नीची करके जब अपनी चूचियों की तरफ देखी तो ब्लाउज का एक बटन खुला हुआ था जिसकी वजह से और झुकने की वजह से,,, उसकी आधी से ज्यादा चूचियां ब्लाउज में से नजर आ रही थी यह पल उस नौकरानी के लिए बेहद शर्मनाक था लेकिन शुभम के लिए तो यही एक मौका था वह नजर भर कर नौकरानी की गोरी गोरी बड़ी बड़ी चूचियों को घूर रहा था,,, और शुभम की प्यासी नजरों का सामना करते हुए मैं पुरानी पूरी तरह से अपने तन बदन में उत्तेजना का अनुभव कर रही थी और वह जल्दी से इस नजारे पर पर्दा डालते हुए खड़ी हो गई,,,। और जल्दी से शर्मा कर वापस किचन में चली गई,,, और शुभम गरमा गरम कॉफी की चुस्की लेते हुए अपनी मां और शीतल की बातों को सुनने लगा,,,, शीतल घूमने जाने का प्लान बना रही थी और बाहर ही खाना खाने का प्लान भी बन चुका था,,,,।

थोड़ी ही देर में नौकरानी ने झूठे कब को ले जा कर के उसे अच्छे से साफ करके और किचन के साथ-साथ पूरे घर में झाड़ू मारकर जाने के लिए तैयार हो गई,,,,।

शाम को आना है मैम साहब,,,,।

हां शांति शाम को थोड़ा जल्दी आ जाना और हम लोगों के लिए खाना भी बना देना हम लोग बाहर से कब लौटेंगे यह कोई तय नहीं है,,,।

ठीक है मैम साहब मैं आ जाऊंगी अब मैं जाती हूं,,,। ( इतना क्या करवा शुभम की तरफ देखने लगी जो कि खिड़की के करीब खड़ा होकर बाहर का नजारा देख रहा था और नौकरानी घर से बाहर चली गई लेकिन गेट तक पहुंचते-पहुंचते हुआ है दो-तीन बार पीछे मुड़कर शुभम की तरफ देख ले रही थी और शुभम भी जवाब मैं उसे देख कर मुस्कुरा रहा था,,,, अभी तक नौकरानी बस उसे देख रही थी लेकिन गेट के बाहर निकल कर वहां एक बार फिर से शुभम की तरफ देखी और मुस्कुरा दी,,, और वह वहां से चली गई उसकी मुस्कुराहट का मतलब शुभम अच्छी तरह से समझ गया था उसके लिए उसकी मुस्कुराहट ग्रीन सिगनल थी उसकी तरफ आगे बढ़ने के लिए,,,,। जिंदगी में पहली बार शुभम का झुकाव किसी नौकरानी की तरफ हुआ था इतनी उच्च स्तर की जबरदस्त बदन की मालकिन निर्मला और शीतल की खूबसूरती मैं पूरी तरह से अपने आप को लुभाने के बाद वह शिमला में आकर नौकरानी के गरमा गरम पिछवाड़े का दीवाना हो गया था,,,, शिमला के ठंडे मौसम में वह नौकरानी का दूध पीकर गर्म होना चाहता था,,,। जो कि अब ऐसा लग रहा था कि उसके लिए असंभव नहीं था इन सबसे बेखबर निर्मला और शीतल अपने ही मस्ती में बातों में लगे हुए थे उन्हें तो इस बात का आभास तक नहीं था कि किचन के अंदर नौकरानी और उसके बेटे के बीच क्या गुल खिल चुका था,,,,

लेकिन शुभम तो भंवरा था जिनका काम ही है खूबसूरत फूलों पर बैठकर उनका रस निचोड़ना,,,, इसलिए तो नौकरानी हुई तो क्या हुआ उसके पास भी वही सब अंग है जो कि निर्मला और शीतल के पास है नौकरानी की टांगों के बीच में भी उसे उतनी ही गर्मी महसूस होगी जितना कि शुभम को अपनी मां की टांगों के बीच महसूस होती है नौकरानी की चूचियां भी उसे उतना ही लाजवाब और उच्च स्तर का आनंद देंगे जितना के शीतल की बड़ी-बड़ी चूचियां और निर्मला के दशहरी आम देते हैं,,,, मौका आने पर नौकरानी भी अपनी दोनों टांगे फैलाकर अपनी कसी हुई रसीली बुर को शुभम के सामने परोस दे कि जैसा कि निर्मला और शीतल दोनों अपनी टांगे खोल कर उसे अपने अंदर समा जाने के लिए आमंत्रित करते हैं,,,,। हर धक्के के साथ नौकरानी के मुंह से भी गरम सिसकारी की आवाज फुट पड़ेगी जैसा कि उसकी मां के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकल जाती है,,,, आखिरकार नौकरानी भी तो एक औरत ही थी,,,। शुभम को उसके साथ मजे करने में किसी भी प्रकार की दिक्कत नजर नहीं आ रही थी और मौका मिलने पर वह उसके साथ जरूर संभोग रत हो जाएगा ऐसा हुआ मन में ठान लिया था,,,,।

तीनों तैयार हो चुके थे एक नए सफर के लिए शिमला की ठंडी सड़कों पर घूमने के लिए शीतल अच्छी तरह से शिमला की सड़कों से वाकिफ थे इसलिए पूरा कमान शीतल को ही सौंप दिया गया था शीतल भी स्टेरिंग संभालते हुए निर्मला और शुभम दोनों का कार के अंदर स्वागत की और दोनों निकल पड़े शिमला की सड़कों पर घूमने के लिए,,,।

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शीतल स्टेरिंग संभाल चुकी थी,,,। शिमला की सड़कों से वह अच्छी तरह से वाकिफ थी इसलिए कहां जाना है उसे अच्छी तरह से पता था,,, निर्मला और उसका बेटा शुभम पीछे सीट पर बैठ गए,,, हल्की आसमानी रंग की साड़ी में निर्मला आसमान से उतरी हुई कोई परी लग रही थी जिसका गोरापन आसमानी साड़ी में और भी ज्यादा खील रहा था,,, और ऊपर से अपनी चुचियों के साइज के विरुद्ध वह ब्रा के साथ-साथ ब्लाउज की पहनी हुई थी जोकि उसकी मदमस्त गोलाकार चुचियों पर एकदम से कसी हुई थी दोनों फड़ फडाते हुए कबूतर ब्लाउज के कैद से आजाद होने के लिए पूरी कोशिश कर रहे थे,,, बार-बार शुभम का ध्यान अपनी मां की मदमस्त चूचियों पर चली जा रही थी जो कि,, ब्लाउज का ऊपरी बटन कुछ ज्यादा ही नीचे था और इसकी वजह से निर्मला की छुट्टियों के बीच की गहरी खाई बेहद लंबी और कुछ ज्यादा ही गहरी नजर आ रही थी जिस पर किसी की भी नजर पड़े तो वह अपने होश खो दे और यही शुभम के साथ हो रहा था,,, आगे जालीदार काली साड़ी में शीतल गाड़ी चला रहे थे जो कि एकदम गोरे बदन होने की वजह से काली साड़ी उसके खूबसूरत बदन पर और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी शीतल भी एकदम क़यामत लग रही थी छोटी बाही का ब्लाउज पहनकर एकदम हुस्न की मल्लिका लग रही थी,,,।

दोनों के बदन से उठ रही मादक खुशबू पूरे कार में फैली हुई थी जिसकी वजह से शुभम के तन बदन में आग लगी हुई थी बहुत जल्द से जल्द दोनों के हुस्न के समुंदर में अपने आप को डुबोना चाहता था,,,,

शीतल सामने सड़क पर नजर रखे हुए थी और निर्मला कार के शीशे से बाहर का नजारा देख रही थी,,, और शुभम अपनी मां की मदद से जवानी में खोया हुआ था वह एक हाथ धीरे से अपनी मां की जान पर रखकर हल्के हल्के उसे साड़ी के ऊपर से ही सहला रहा था जिससे बाहर के नजारे का लुफ्त उठाते हुए अपने बेटे की हथेली की गर्मी को महसूस करके निर्मला को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,।

शीतल मैं बहुत खुश हूं कि तुम्हारी वजह से आज मुझे शिमला घूमने को मिल रहा है मैं जिस तरह से शिमला के बारे में कल्पना करती आ रही थी उससे भी कहीं ज्यादा खूबसूरत सिमला है,,,। यहां की सड़कें यहां के लोग यहां के घर यहां की होटल सब A1 है।

मुझे मालूम था कि शिमला तुम्हें भी अच्छा लगेगा इसीलिए तो मैं तुम्हें यहां लेकर आई हूं और शुभम तुम्हें कैसा लग रहा है शिमला,,,।

पूछो मत मुझे तो ऐसा लग रहा है कि मैं स्वर्ग में घूम रहा हूं सच शिमला कितना खूबसूरत होगा मैं भी कभी सपने में नहीं सोचा था,,,।

( तीनों बातें करने में मशगूल थे और शुभम बातों के साथ-साथ अपनी मां की जांघों से भी खेल रहा था जो कि धीरे-धीरे करके वह अपनी मां की साड़ी को जांघो तक उठा दिया था और उसकी नंगी चिकनी गोरी जांघों से खेल कर एकदम मस्त हुआ जा रहा था,,,,। अपनी मां की जांघों से खेलता हुआ शुभम खिड़की से बाहर भी झांक रहा था और बाहर विदेशी सैलानियों को देखकर अपने अंदर और ज्यादा उत्तेजना का अनुभव कर रहा था क्योंकि वे लोग इतने छोटे छोटे कपड़े पहन कर इतनी ठंडी में भी बड़े आराम से घूम रहे थे,, उनके बदन पर छोटे-छोटे स्कर्ट उनकी मदमस्त गांड को ठीक से ढक भी नहीं पा रहे थे,,,। विदेशी सैलानियों को देखकर उनके बदन की गर्मी और ज्यादा बढ़ती जा रही थी। वह मन ही मन सोच रहा था कि काश उसकी मां भी इस तरह के कपड़े पहनती तो कितना मजा आता,,,। छोटे छोटे स्कर्ट में उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड और भी ज्यादा खूबसूरत लगती,,,। यही सब कल्पना करके सुभम एकदम मस्त हुआ जा रहा था,,,। साथ ही धीरे-धीरे उसका हाथ जांघों के और ऊपर तक पहुंच रहा था और जैसे-जैसे शुभम का हाथ ऊपर की तरफ जा रहा था वैसे वैसे निर्मला के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी,,, साथ में वह शीतल से बातें भी यह जा रही थी ताकि शीतल को बिल्कुल भी शक ना हो की उसके पीठ पीछे क्या हो रहा है,,,। निर्मला अपने बेटे की उंगलियों का जादू अच्छी तरह से जानती थी,, उसे इस बात का अनुभव अच्छी तरह से था कि उसका बेटा औरतों को किस तरह से कब कैसे और कहां संतुष्ट करना है या उसे अच्छी तरह से मालूम था तभी तो इस समय वह उसकी उंगलियों से उसकी जांघों के बीच खेलना शुरू कर दिया था,,, निर्मला बड़ी मुश्किल से अपनी सांसो को नियंत्रण में किए हुए थी,,,, शुभम की भी हालत खराब हुए जा रही थी क्योंकि पैंट के अंदर उसका लंड पूरी तरह से नियंत्रण के बाहर हुआ जा रहा था,,,। निर्मला की भी यही हालत थी क्योंकि वह धीरे से अपनी उंगली को उसकी पेंटी के अंदर सरका कर उसकी बुर की मखमली त्वचा से खेलना शुरू कर दिया था,,,, निर्मला के सब्र का बांध टूटता चला जा रहा था वह मन में यही सोचने लगी कि कल शीतल की आंखों के सामने एकदम बिंदास होकर जब कार में अपने बेटे के लंड पर चढ़कर चुदवाई तो उसे शर्म नहीं आ रही थी तो इस समय वह क्यों शर्म कर रही है,,,,। यही सोचकर वह शुभम की तरफ देखकर उसे आंख मारी,,, तब तक उत्तेजना बस शुभम अपनी बीच वाली मोदी को अपनी मां की बुर के द्वार के अंदर प्रवेश कर आ चुका था,,,,।

आहहहहहहह,,,,( हल्के से निर्मला के मुख्य में से सिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,,।)

शीतल यह ठंडा मौसम हसीन वादियां देखकर मेरा मन बिल्कुल भी काबू में नहीं है मेरा मन कर रहा है कि मैं आज खुल कर,,,,,,

खुलकर क्या,,,,,,?( शीतल आश्चर्य के साथ बोली)

मेरा मन कर रहा है कि इस ठंडे मौसम में आज मैं खुलकर एकदम से,,,,,( इतना कहकर वह खामोश होकर मुस्कुराने लगी तो शीतल फिर से उससे बोली,,,।)

अब बोलेगी भी क्या करना चाहती है या पहेलियां बुझाती रहेगी,,,,।

यार मेरा दिल कर रहा है कि आज एकदम बेशर्म हो जाऊ,,।

यार इसमें बोलने की क्या जरूरत है अपनी बेटे का लंड अपनी बुर में लेती है तो बेशर्म ही तो है,,,।

हां हूं,,,, अब इसमें मुझे कोई शर्म महसूस नहीं होती क्योंकि अपने बेटे का लंड लेकिन किसी और को तो नहीं लेती,,, तू साली रंडी बेशर्म हे जो मेरे बेटे का लंड अपनी बुर में लेती है,,,।

मुझे भी शर्म नहीं आती निर्मला रानी तभी तो तुम दोनों को लेकर नहीं जहां शिमला में आई है ताकि एकदम बेशर्म होकर तेरे बेटे से तेरी आंखों के सामने उसके लंड को अपनी बुर में लेकर अपनी प्यास बुझा सकुं।,,,,,आहहहहह,,, कितना मजा आता है जब तेरा बेटा अपना मोटा और लंबा लंड बुर में डालकर जोर जोर से धक्के लगाता है,,,,।

( अपनी मां और शीतल की गंदी गंदी बातें सुनकर शुभम पर तन बदन में आग लगे जा रही थी वह पूरी तरह से चुद वासा हो गया था वह अपनी उंगली को जोर-जोर से अपनी मां की बुर में पेल रहा था,,,,, निर्मला और शीतल दोनों को भी इस तरह की गंदी बातें और वह भी शुभम के सामने करने में बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी शीतल बड़े आराम से गाड़ी चला रही थी और इस तरह की बातों का लुफ्त ले रही थी,,। निर्मला के मन में क्या चल रहा है यह तो सुबह नहीं जानता था लेकिन दोनों की गरम बातें सुनकर वह पूरी तरह से गरमा चुका था,,,। वह अपनी मां की बुर में उंगली पेलते हुए यही सोच रहा था कि जब यह दोनों इतनी बेशर्म हो सकती है तो मुझे तो लाए ही इन दोनों ने यहां पर चुदवाने के लिए है तो भला मैं उस काम से पीछे क्यों हटु इसलिए वह हिम्मत दिखाते हुए बोला,,,।)

तुम दोनों की गरमा गरम बातें सुनकर मेरी हालत खराब हो गई मुझसे रहा नहीं जा रहा है तुम दोनों ने मेरा लंड खड़ा कर दिए हो,,,( इतना कहकर वह अपनी सीट पर से थोड़ा सा उठकर अपने पेंट की बटन खोल कर उसे नीचे सरकाने लगा,,, शीतल गाड़ी चलाते हुए रह-रहकर पीछे की तरफ नजर करके देख ले रही थी और जब से नहीं है देखी की शुभम अपनी पैंट उतार रहा है तो यह देखकर वह बोली,,।)

अरे तू करने क्या वाला है,,,?

मैं मम्मी को चोदने जा रहा हूं मेरा लंड मुझे पागल किए हुए हैं,,, (इतना कहते हुए वह अपनी पेंट को घुटनों तक उतार दिया और अपनी खड़े लंड को हाथ में लेकर हिलाते हुए)

और जब तक यह मम्मी की बुर में नहीं जाएगा तब तक शांत होने वाला नहीं है,,,। बस मम्मी अब थोड़ा सा अपना टांग फैला लो बाकी मैं सब संभाल लूंगा,,,,( निर्मला को समझ पाती इससे पहले ही शुभम पूरी तरह से अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठाकर नीचे की तरफ हाथ ले गया और उसकी बड़ी बड़ी गांड अपनी हथेलियों में पकड़ कर उसे खींचकर थोड़ा सा कार की सीट के किनारे तक ले आया,,,, शीतल बार-बार पीछे की तरफ नजर करके यह सब देख ले रही थी,,। शुभम की हरकत देखकर पूरी तरह से मदहोश होने लगी क्योंकि सुबह की तरफ से इस तरह की हरकत की बिल्कुल भी उम्मीद शीतल को नहीं थी वह आश्चर्य से दांतो तले उंगली दबा ली थी,,,, वह आश्चर्य से अभी यह सब देख रही थी कि कब तक शुभम अपने दोनों हाथों का सहारा लेकर अपनी मां की लाल रंग की पैंटी को उसकी मदमस्त चिकनी मोटी मोटी जांघों से नीचे की तरफ खींच कर उसे कमर के नीचे एकदम से नंगी कर दिया,,,।

यह गरमा गरम नजारा देखकर शीतल की बुर फुदकने लगी,,,,, एक पल की भी देरी किए बिना ही शुभम अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आकर अपना मोटा लंड अपनी मां की गीली बुर के अंदर उतार दिया और उसे चोदना शुरू कर दिया,,,,,

आहहहहहहह,, बेहद अद्भुत और काम उत्तेजना से भरपूर अतुल्य नजारा था ऐसा नजारा दुर्लभ था देख पाना शीतल के तन बदन में आग लग जा रही थी वह कार की स्पीड उंगली करके बड़े आराम से कार को चला रही थी क्योंकि जिस तरह का दृश्य उसकी पीठ के पीछे चल रहा था वह दृश्य उसे कामोत्तेजना से भर दिया था उसने कार चलाने में उसका ध्यान नहीं लग पा रहा था,,,। शुभम की हिलती हुई कमर पर एक हाथ पीछे की तरफ ले जाकर उसके नितंबों को सहलाते हुए शीतल बोली,,।

पक्का मादरचोद है रे तू,,,, तू तो एकदम बेशर्म हो गया है,,,

शीतल रानी अगर बेशर्म नहीं होता तो इस तरह से अपनी मां को नहीं चोदता,,,( शुभम जोर-जोर से अपनी कमर हिलाता हुआ हांफते हुए बोला,,,,)

और जोर-जोर से पेल अपनी मां को बहुत गर्मी है इसकी बुर में,,,।

थोड़ी ही देर में शिमला की सड़कों पर दौड़ती हुई कार में गर्म सिसकारीर्यों की आवाज गूंजने लगी,,,, लेकिन यह आवाज कार के बाहर तक नहीं जा रही थी,,,। थोड़ी देर बाद सब कुछ शांत हो गया शुभम और निर्मला दोनों अपने कपड़े दुरुस्त करके आराम से बैठ गए,,,,

थोड़ी ही देर में शीतल उन्हें स्केटिंग स्पोर्ट पर ले कर गई,,, वहां लोगों को बहुत मजा आया हालांकि उन तीनों में से किसी में स्केटिंग नहीं किया,,, शुभम की नजर इधर भी विदेशी सैलानियों पर थी उनके छोटे छोटे कपड़े में उनका कसा हुआ बदन उसे बहुत खूबसूरत लग रहा था,,, शीतल शुभम को उन विदेशी सैलानियों को देखते हुए देख ली तो वह शुभम से बोली,,।

क्या देख रहे हो शुभम,,,।

मैं यही देख रहा हूं कि यह विदेशी पर्यटक छोटे छोटे कपड़ों में कितनी खूबसूरत लगती हैं मैं यही चाहता हूं कि यहां पर तुम दोनों भी इसी तरह के छोटे-छोटे कपड़े पहनो कसम से बहुत मजा आएगा,,,।

( शुभम की यह बात सुनते ही निर्मला शर्म के मारे बोली,,।)

नहीं नहीं मुझसे यह बिल्कुल भी नहीं होगा मुझे इन छोटे कपड़ों में बहुत शर्म आएगी,,,।

साली एकदम नंगी होकर के अपने बेटे का लंड अपनी बुर में लेती है तब शर्म नहीं आती छोटे छोटे कपड़े पहनने में शर्म आएगी,,( शीतल निर्मला को टोन मारते हुए बोली,,।)

नहीं शीतल तू कुछ भी कह लेकिन छोटे कपड़ों में अच्छा नहीं लगेगा,,,।

तू घबरा क्यों रही है निर्मला और क्यों अच्छा नहीं लगेगा तू इतनी खूबसूरत है इतनी खूबसूरत बदन की मालकिन है,,। बहुत अच्छा लगेगा देखना हम दोनों जब छोटे छोटे स्कर्ट पहनकर शुभम के सामने आएंगे ना तो उसके मुंह से लार टपकने लगेगी,,,,।

शीतल,,,,,( इतना कहकर निर्मला शीतल की तरफ देखने लगी,,,।)

मान जाना यार यहां शिमला में हम लोगों को कौन पहचानने वाला है,,,, जब इतना कुछ ट्राई कर रहे हैं तो छोटे कपड़े ट्राई करने में क्या जाता है,,,।

चल तू कहती है तो यह भी ट्राई कर लेते हैं,,,।

( निर्मला के मुंह से इतना सुनकर शीतल और शुभम दोनों मुस्कुराने लगे निर्मला भी छोटे कपड़े में अपने आपको देखना चाहती थी कि वह कैसी लगती है,,,। दिन ढल रहा था शाम होने वाली थी शीतल उन दोनों को एक अच्छे से रेस्टोरा में लेकर गई,, वहां पर नाश्ता करने के बाद तीनों एक अच्छे से मॉल में गए जहां पर शीतल और निर्मला के लिए छोटे-छोटे ड्रेस और स्कर्ट लेना था,,,। निर्मला को तो शर्म आ रही थी शीतल हीं अपने लिए और निर्मला के लिए अच्छे-अच्छे छोटे-छोटे ड्रेस पसंद करके पैक करवा ली,,, शुभम तो उंड्रेस को देखकर कल्पना कर रहा था कि उन छोटे-छोटे ड्रेस में उसकी मां और शीतल कैसी लगेंगी यह सोचकर ही ऊसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,, शाम ढल चुकी थी तीनों घर आ चुके थे और नौकरानी उन लोगों के लिए खाना बना चुकी थी,,,।)

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शुभम शीतल और निर्मला तीनों घर के अंदर कुर्सी पर बैठकर बातें कर रहे थे अंधेरा छाने लगा था,,, वातावरण में ठंडी का प्रमाण बढ़ता जा रहा था,,,, निर्मला और शीतल आपस में बातें कर रहे थे और शुभम की नजरें नौकरानी को ढूंढ रही थी जो कि अभी भी किचन में थी,,,। शुभम अभी नौकरानी के बारे में सोच ही रहा था कि नौकरानी किचन से बाहर आकर बोली,,।

मेम साहब मैंने खाना बना कर तैयार करती हूं अब मैं घर जा रही हूं,,,।

ठीक है जाओ,,,( निर्मला से बातें करते हुए नौकरानी की तरफ देख कर शीतल बोली,,, और शीतल से इजाजत लेकर वह घर से बाहर जाते समय निकले और शुभम के ऊपर डाली तो शुभम भी उसे देख रहा था दोनों की नजरें आपस में टकराई और नौकरानी के होठों पर मुस्कुराहट आ गई यह देखकर शुभम भी मुस्कुरा दिया,, नौकरानी दरवाजा खोल कर घर से बाहर जाने लगी और शुभम से रहा नहीं जा रहा था वह भी कुर्सी पर से उठ गया और दरवाजे की तरफ जाने लगा तो निर्मला बोली,,,)

तुम कहां जा रहे हो शुभम,,,।

कहीं नहीं मम्मी बस ऐसे ही बाहर का नजारा देखने जा रहा हूं,,,

बाहर ठंड ज्यादा है,,,।

तो क्या हुआ गरम कपड़ा तो पहना हूं ना बस 10 15 मिनट में आ जाऊंगा,,,,

ठीक है लेकिन ज्यादा दूर तक मत जाना,,,( निर्मला बोलती इससे पहले ही शीतल उसे चाहने की छूट दे दी,,, यह शीतल के तरफ से यह जताने की कोशिश थी कि शुभम पर भी उसका हक है,,, शीतल की बात सुनकर निर्मला कुछ नहीं बोली और शुभम घर से बाहर चला गया,,,। घर से बाहर निकलते ही वह गेट खोल कर सड़क की तरफ देखा तो नौकरानी कुछ दूरी पर नजर आई जो कि अपने घर की तरफ जा रही थी शुभम लगभग दौड़ता हुआ उसके करीब गया तो वह शुभम को अपने पास आता हुआ देखकर मुस्कुरा दी और मुस्कुराते हुए बोली,,,।)

मेरे पीछे पीछे क्या करने आए हो छोटे बाबू,,,।

कुछ नहीं बस तुमसे बातें करने का मन कर रहा था तो आ गया,,,,

मैं जितनो से भी मिली हूं तुम सबसे अलग हो,,,

ऐसा क्यों,,,,?( शुभम उसके कदमों के साथ कदम मिलाता हुआ सड़क पर चलते हुए बोला,,,।)

मैं ठहरी अनपढ़ गवार नौकरानी दूसरों के घर का काम करने वाली पर यहां पर सब देख रहे हो एक से बढ़कर एक अमीर लोग हैं जो कि मुझे इतना तो मुंह नहीं लगाते और ना ही मेरे पीछे-पीछे इस तरह से भागे चले आते हैं तुम्हारी बात कुछ और है तुम बहुत अच्छे लड़के हो,,,,

( शुभम तो नौकरानी के खूबसूरत चेहरे को देखता ही जा रहा था उसके खूबसूरत चेहरे को देखकर कोई नहीं कह सकता था कि यह नौकरानी है,,,।)

तुम भी बहुत अच्छी हो तुमसे बातें करना मुझे अच्छा लगता है इसलिए मैं तुम्हारे पीछे पीछे भागा चला आया,,,।

लेकिन अब घर लौट जाओ कोई तुम्हें मेरे साथ देखेगा तो क्या सोचेगा,,,

कोई कुछ भी सोचे मुझे उससे कोई फर्क नहीं पड़ता मैं तो वही करता हूं जो मेरे दिल में आता है,,,।

( धीरे-धीरे सड़क पर चलते हुए शुभम और वह नौकरानी ऐसी जगह पहुंच गए जहां पर सड़कों के दोनों किनारे पर घने घने पेड़ लगे हुए थे जिसके छांव में पूरी तरह से अंधेरा छाया हुआ था,,, और सारी सड़कें सुनसान थे बस दूर दूर स्ट्रीट लैंप जल रहा था और घने पेड़ होने की वजह से उसका उजाला नीचे सड़क पर नहीं पहुंच पा रहा था शुभम को यही मौका और यही जगह उचित लग रही थी,,,, शुभम की बात सुनकर नौकरानी बोली,,,,)

और तुम्हारे दिल में क्या आता है,,,।

( नौकरानी का भी दिल जोरों से धड़क रहा था दिन में जो हरकत शुभम ने उसके साथ किया था उसकी कसक अभी तक उसके बदन में कामुकता और उत्तेजना की सुईया चुभा रही रही थी एक नौजवान लड़के को इस तरह के एकांत में अपने साथ चलते हुए पाकर उसको भी कुछ-कुछ हो रहा था और नौकरानी के इस सवाल पर शुभम को जैसे एक मौका सा मिल गया और वह,,, नौकरानी का हाथ पकड़ कर तुरंत सड़क के किनारे घने पेड़ के पीछे ले गया,,,।)

अरे अरे छोटे बाबू यह क्या कर रहे हो कहां ले जा रहे हो मुझे,,,,( वह इतना कहती तब तक शुभम उसे एक बहुत ही घने मोटे पेड़ के पीछे ले गया जहां पर पूरी तरह से अंधेरा था,,, नौकरानी का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि जिस तरह से हुआ उसका हाथ पकड़कर पेड़ के पीछे की तरफ लाया था उसे देखते हुए नौकरानी के मन में अजीब सी हलचल होने लगी थी उसे ऐसा लग रहा था कि जो काम उसने,,, कभी नहीं कि शायद आज वह अपने आप को रोक नहीं पाएंगी,,, शुभम नौकरानी को पेड़ के पीछे ले जाकर उसके खूबसूरत चेहरे को अपने दोनों हथेलियों में भरते हुए कुछ सेकेंड तक उसके चेहरे की तरफ देखते हूए बोला,,।)

तुम जाना चाहती हो कि मेरे दिल में क्या आ रहा है,,,,

( शुभम के होंठ नौकरानी के होठों के इतने करीब थे कि नौकरानी शर्म के मारे कुछ बोल नहीं पा रही थी उसका दिल जोरों से धड़क रहा था उत्तेजना के मारे उसके पांव में कंपन हो रहा था और शुभम भी शायद उसकी तरफ से कुछ भी सुनना नहीं चाहता था और देखते ही देखते अपने हॉट को उसके दहकते होठ पर रखकर उसके होठों को चूमना शुरू कर दिया,,,,, पल भर में ही नौकरानी भी उसका साथ देने लगी और शुभम अच्छी तरह से जानता था कि औरत की जिसमें से कैसे खेलना है वह उसके होठों को चूमता हुआ तुरंत अपनी हथेली को उसकी बड़ी बड़ी चूची ऊपर रखकर ब्लाउज के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया,,,, हालांकि वह गर्म कपड़े पहने हुए थी लेकिन उसके बटन नहीं लगाई थी जिससे उसके ब्लाउज तक पहुंचने में शुभम को कोई भी दिक्कत नहीं हुई,,,।

आहहहहह,,, छोटे बाबू यह क्या कर रहे हो कोई देख लेगा,,,( शुभम के द्वारा अपनी गोल-गोल बड़ी चूचियों को दबाए जाने की वजह से नौकरानी के मुंह से दर्द भरी कराह की आवाज निकल गई थी,,,।)

यहां कोई नहीं आएगा इतनी देर से तो देख रहा हूं पूरी सड़क सुनसान है,,,,( इतना कहते हुए शुभम एक हाथ से उसकी चूची को दबाते हुए दूसरे हाथ से अपने पेंट की चैन खोलने लगा और देखते ही देखते अपने खड़े लंड को बाहर निकालकर हिलाना शुरू कर दिया अंधेरा होने की वजह से नौकरानी की नजर अब तक उसके लंड पर नहीं गई थी,,, इसलिए शुभम उसका हाथ पकड़ कर सीधे अपने लंड पर रख दिया जैसे ही नौकरानी की हथेली में,,, शुभम का मोटा तगड़ा लंड आया उसकी मोटाई और गर्माहट को अपनी हथेली में महसूस करके नौकरानी पूरी तरह से मदहोश हो गई और उसकी मोटाई को अपनी हथेली में महसूस करते ही पूरी तरह से चौक गई और वह तुरंत अपना हाथ पीछे खींच ली,,,,। यह देखकर शुभम धीरे से उसके कान में बोला,,,।)

क्या हुआ शांति हाथ क्यों हटा ली अच्छा नहीं लगा क्या,,?

छोटे बाबू तुम्हारा बहुत मोटा है,,,।

तभी तो मजा आएगा शांति और तभी तुम्हारी उफान मारती जवानी का पानी तुम्हें तृप्त कर देगा,,,।

( नौकरानी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी क्योंकि वास्तव में उसने जिंदगी में पहली बार इतने मोटे तगड़े लंड को अपने हाथ में ली थी और उस लंड को अपने हाथ में लेते ही समझ गई थी कि उसकी बुर के छेद की अपेक्षा शुभम का लंड की चुदाई मोटा था जिसे लेने में उसे दिक्कत आ सकती थी,,, लेकिन फिर भी वह अपने आप को शुभम के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए तैयार कर चुकी थी क्योंकि शुभम की कामुक हरकतों ने उसके तन बदन में आग लगा दी थी,,,। शुभम पागलों की तरह उसकी होठों को चूसते हुए उसकी चूची से खेल रहा था और इस बार नौकरानी खुद ही अपना हाथ आगे बढ़ाकर शुभंकर लंड को अपनी हथेली में दबा ली,,,। जैसे ही नौकरानी ने शुभम के लंड को अपनी हथेली में ली उसके मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,,।)

ससहहहह ,,,, छोटे बाबू,,,,

( शुभम पूरी तरह से चुदवासा हो चुका था,,, उससे बिल्कुल भी सब्र नहीं हो रहा था और वैसे भी काफी समय हो गया था उसे घर से बाहर निकले इसलिए वह आनन-फानन में शांति के दोनों कंधों को पकड़कर उसे पेड़ की तरफ घुमा दिया,,,, अब शांति की गांड शुभम की तरफ थी शांति भी अब अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी शुभम से चुदवाने के लिए,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था लेकिन उसे डर भी लग रहा था कि कहीं कोई देख ना ले क्योंकि यह सब कुछ आनन-फानन में हो रहा था,,, शुभम भी गहरी गहरी सांसे ले रहा था,,,। जिंदगी में पहली बार शुभम भी इस तरह से एकाएक किसी गैर औरत की चुदाई करने जा रहा था जो कि सब कुछ जल्दबाजी नहीं होता चला जा रहा था इसलिए शुभम भी काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था वह धीरे-धीरे शांति की साड़ी को ऊपर की तरफ करने लगा,,,,

शांति बिल्कुल भी ऐतराज नहीं चला रही थी पहली बार में ही वह किसी गैर जवान लड़के को अपना सब कुछ समर्पित करने जा रही थी और वह भी अपनी मर्जी से लेकिन इस मर्जी में शुभम की कामुक हरकतें शामिल थे जिसकी वजह से वह भी बस हो चुकी थी अपना तन उसे सौंपने के लिए उसका दिल जोरों से धड़क रहा था सांसो की गति तेज होती जा रही थी पूरे बदन में कसमसाहट भरी हुई थी और देखते ही देखते शुभम ने शांति की साड़ी को पूरी तरह से कमर तक उठा दिया,,,, शुभम की आंखों के सामने आसमानी रंग की चड्डी में लिपटी हुई नौकरानी की मदमस्त गोरी गोरी गांड नजर आने लगी यह देख कर शुभम की आंखों में कामुकता भर गई वह पूरी तरह से मदहोश हो गया और एक झटके में नौकरानी की चड्डी पकड़कर नीचे घुटनों तक कर दिया,,,, शुभम ने जैसे ही नौकरानी की चड्डी को घुटनों तक खींच कर कर दिया यह एहसास नौकरानी को पूरी तरह से मदहोशी के समंदर में डुबोने लगा उसकी बुरा अपने आप पानी फेंकने लगी,,,, क्योंकि नौकरानी के सामने शुभम की उम्र काफी कम थी और उसकी कामुक हरकतें संपूर्ण रुप से एक रंगीन किस्म के आदमी की तरह थी जिसकी वजह से नौकरानी शुभम की हरकतों से पूरी तरह से अपने आप को शुभम के सामने ध्वस्त होता हुआ महसूस कर रही थी,,, नौकरानी अपनी तरफ से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं कर रही थी जो कुछ भी कर रहा था शुभम कर रहा था,,,। नौकरानी की बड़ी-बड़ी तरबूज ऐसी गांड देखकर शुभम के मुंह में पानी आ गया और वह दो-चार चपत उसकी गांड पर लगा दिया,,,।

आहहहहहहह,,, क्या कर रहे हो छोटे बाबू,,,,?

कुछ नहीं मेरी रानी मेरी यह सबसे बड़ी कमजोरी है बड़ी बड़ी गांड पहली बार जब तुम्हें देखा तो तुमसे पहले मेरी नजर तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड पर पड़ी थी जिसे देखते ही मेरे मुंह में पानी आ गया था,,, तुम बहुत खूबसूरत हो मेरी जान (इतना कहते हुए शुभम दोनों हाथों में उसकी बड़ी बड़ी गांड को पकड़कर जोर जोर से दबाने लगा,,, किसी ने पहली बार नौकरानी के लिए रानी शब्द का प्रयोग किया था इस संबोधन से नौकरानी पूरी तरह से गदगद हो गई शुभम की हरकतों और उसकी बात करने के अंदाज से वह पूरी तरह से उसकी कायल हो गई,,,। शुभम अब नौकरानी को चोदने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गया था इसलिए ढेर सारा थूक अपनी हथेली पर लेकर वह उस थुक को नौकरानी की बुर पर लगाना शुरू कर दिया ताकि चिकनाहट पाकर उसका मोटा लंड उसकी बुर में आराम से चला जाए,,, नौकरानी का पूरा बदन कसमसा रहा था क्योंकि उसे मालूम था कि अब शुभम क्या करने वाला है देखते ही देखते शुभम एक हाथ से उसकी बड़ी बड़ी गांड के फांक को फैलाते हुए अपने लंड के सुपारी को जैसे ही नौकरानी ने अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों पर महसूस की,,, उसका पूरा बदन एकदम से गनगना गया,,,,,, और उसके मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,।

आहहहहहहह,,,,, छोटे बाबू,,,।

( शुभम भी नई बुर पाकर एक दम मस्त हो चुका था जल्द से जल्द वह अपने लंड को उसकी बुर में उतारकर चोदना चाहता था,,,, लेकिन नहीं पुर को इतनी आसानी से चोद पाना शायद उसके नसीब में नहीं था क्योंकि तभी सामने से सड़क से कार की हेडलाइट चमकने लगी जिसकी रोशनी सीधे पेड़ के ऊपर पड रही थी,,, और एकाएक गाड़ी की लाइट पड़ने से नौकरानी पूरी तरह से घबरा गई क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि कोई उसे इस हाल में देख ले वह तुरंत अपनी साड़ी पकड़ कर नीचे की तरफ करते हुए,,,, पेड़ की दूसरी तरफ से लगभग भागने लगी,,, घुटनों में फंसी हुई पेंटी भी ऊपर सरकाने का उसके पास समय नहीं था वह दूसरी तरफ से सड़क पर उतर जाना चाहती थी गाड़ी चली गई थी और शुभम उसे पीछे से आवाज देते हुए बोला,,,।

अरे गाड़ी चली गई है आ जाओ,,,।

( लेकिन शुभम की बात को अनसुना करके नौकरानी थोड़ी दूर जाकर वापस अपनी पेंटी को पहन ली और सड़क की दूसरी तरफ उतर कर अपने घर की तरफ चल दी शुभम अपना हाथ मलता रह गया अभी भी उसका लंड पेंट के बाहर झूल रहा था मानो अफसोस जता रहा हो,,,, शुभम को उस कार वाले पर बहुत गुस्सा आया वह मन ही मन उसे गाली देता हुआ वापस अपने लंड को पेंट में डालकर अपने घर की तरफ चल दिया,,,। घर पर पहुंचा तो,,, निर्मला उसे देख कर बोली,,,।)

कितनी देर लगा दिया कहां चला गया था तू,,,।

कुछ नहीं मम्मी बस ठंडक का मजा ले रहा था इतनी ठंडी में यहां सड़कों पर घूमना भी बहुत अच्छा लगता है,,,,।

( शुभम की बात सुनकर शीतल बोली)

तुम दोनों बातें करो तब तक में ऐसी चीज लेकर आती हूं जो तुम्हारे बदन में गर्मी भर देगा,,,

अरे ऐसी कौन सी चीज है,,,,( निर्मला आश्चर्य से बोली,,)

थोड़ा इंतजार तो करो,,,,( इतना कहकर शीतल किचन में चली गई,,, और थोड़ी देर बाद जब लौटी तो एक ट्रे में तीन गिलास और थैले में तीन बीयर की बोतल थी जिसे देखते ही शुभम के साथ-साथ निर्मला भी पूरी तरह से चौक गई,,,)

यह क्या है शीतल,,?( निर्मला आश्चर्य से बोली)

शिमला के ठंडे माहौल में गर्माहट देने का रामबाण इलाज,,,

यह शराब,,,,( शुभम भी-बीच में आश्चर्य से बोल पड़ा,,।)

शराब नहीं है मेरे राजा यह बीयर है यह एक तरह से हम तीनों के लिए दवा का काम करेगा क्योंकि जो काम हम तीनों करने वाले हैं उसके लिए हमें पूरी तरह से नशे में खो जाना है और वैसे इससे नशा नहीं होता बस शरीर में गर्माहट आ जाती है,,,,( शीतल टेबल पर बीयर की बोतल और ट्रे रख दी पर खुद कुर्सी पर बैठ गई,,,।)

फिर भी शीतल यह शराब है इसे मैं और मेरा बेटा नहीं पी सकते,,,

निर्मला रानी तो क्या मैं शराबी दिखती हूं लेकिन यहां शिमला के ठंड में यह पीना बेहद जरूरी है यहां सब लोग पीते हैं,,, से शरीर में गर्मी आ जाती है ठंड से बचने का यही एक उपाय है,,,

लेकिन तुम दोनों हो ना मेरे लिए ठंडी का जुगाड़,,,( शुभम चुटकी लेता हुआ बोला,,,। शुभम की यह बात सुनकर शीतल मुस्कुराते हुए बोली,,,।)

हम दोनों तो है ही राजा तेरे लिए लेकिन थोड़ा नशा होना भी जरूरी है,,,, क्या यार सीतल शिमला में आकर नाटक कर रही है कहां हमें हमेशा पीना है जब तक सिमला में तब तक इसका भी मजा ले लेते हैं,,,,। क्या बोलते हो शुभम,,,?

हां तुम सच कह रही हो शिमला में आकर मुझे तो यह पीने में कोई हर्ज नहीं है लेकिन मम्मी से पूछे बिना उनकी इजाजत के बिना मैं इसे हाथ नहीं लगा सकता,,,।

वाह रे मार्त भक्ति,,,, एक तरफ अपनी मां के कपड़े उतार कर उसके चोदने में बिल्कुल भी देर नहीं करते और बीयर पीने में अपनी मां की इजाजत मांग रहे हो,,,,, क्या यार निर्मला एक बार ट्राई तो करो मजा ना आए तो कल से मत पीना,,,,।

चल तू कहती है तो मैं भी आज इसे ट्राई कर लेती हूं लेकिन अगर नशा हो गया तो तुम दोनों संभाल लेना,,,

तू बिल्कुल भी चिंता मत कर मेरी छम्मक छल्लो कुछ नहीं होगा,,,, शुभम तो किचन में जाकर थोड़ी काजू के टुकड़े लेते आना तब और ज्यादा मजा आएगा,,,,।

( शीतल की बात सुनते ही शुभम किचन की तरफ चला गया शुभम को किचन में जाते ही निर्मला बोली,,,।)

क्या यार शीतल यह सब करना जरूरी था,,,।

जरूरी था मेरी जान तू सोच अगर तेरा बेटा तेरे सामने मुझे चोदने में शर्म आने लगा या तू शर्माने लगी तो सारा मजा किरकिरा हो जाएगा,,, लेकिन बियर का सुरूर जब बदन पर चढ़ेगा तो सारी शर्मा है आप शरीर के बाहर जाती रहेगी तब देखना जुदाई ठुकाई में कितना मजा आता है,,,,

( शीतल निर्मला से यह कह रही थी कि शुभम किचन से काजू के टुकड़े लेकर बाहर आ गया,,,। तीनों टेबल के इर्द-गिर्द बैठ गई और शीतल खुद अपने हाथ से दोनों को एक एक बियर की बोतल खोल कर दे दी,,,, शुभम और निर्मला के लिए उन दोनों का पहला मौका था जब वह लोग जिंदगी में पहली बार शराब को हाथ लगा रहे थे,,,। शीतल भी कभी बियर को हाथ नहीं लगा दी थी लेकिन शिमला में आकर उसकी भी आदत पड़ गई थी क्योंकि कहीं जुगाड़ था उसके लिए ठंडी से रक्षण के लिए,,,, बीयर की बोतल निर्मला ने जैसे मुंह से लगाए एक घूंट मुंह में जाते हैी उसे बहुत कड़वा लगने लगा,,,,, वो तुरंत बीयर की बोतल अपने मुंह से हटा दी और बोली,,,।)

नहीं शीतल यह मुझसे बिल्कुल भी नहीं होगा,,,,।

अरे मेरी जान ऐसे नहीं थोड़ा काजू खा ले और धीरे-धीरे उसे भी बहुत मजा आएगा,,,,( इतना कहकर शीतल ट्रे में से काजू का टुकड़ा उठाकर निर्मला को थमाने लगी,,, शीतल के बताए अनुसार निर्मला थोड़ा काजू खा कर एक एक घूंट बीयर पीने लगी धीरे-धीरे उसे मजा आने लगा और यही हाल है शुभम का भी हुआ उसे भी पहले तो इसका स्वाद बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा लेकिन धीरे-धीरे उसे भी मज़ा आने लगा देखते ही देखते तीनों ने अपनी बीयर की बोतल खत्म कर दी,,, निर्मला और शुभम दोनों को हल्का हल्का नशा सा होने लगा था क्योंकि रह रहे कर उन्हें सबकुछ घूमता हुआ महसूस हो रहा था लेकिन फिर भी सब कुछ कंट्रोल में था,,,,। शुभम अगर बियर ना भी पीता तो उसके बदन में वैसे भी शांति कीमत मस्त जवानी की गर्माहट अभी भी बरकरार थी वह नौकरानी की जवानी की गर्मी से ही शीतल और अपनी मां की बदन की गर्मी को पिघला देता,,, लेकिन शिमला आए थे तो शायद बियर भी जरूरी थी,,,, तीनों को मजा आ रहा था हल्का हल्का नशा तीनों को छाया हुआ था,,, शीतल पहले से नौकरानी को फोन करके बता दी थी कि डिनर में क्या बनाना है,,,, नौकरानी डिनर में फ्राई फिश बनाई थी,,,,

तीनों ने बड़े मजे से मछली का स्वाद लिया,,, शरीर में पूरी तरह से गर्माहट छा गई थी,,,,। डिनर टेबल पर ही शुभम अपनी मां और शीतल से बोला,,,।

मैं चाहता हूं कि जो कपड़े तुम दोनों ने मॉल में से खरीदे हो इस समय पहनकर मुझे दिखाओ मैं भी तो देखूं छोटे छोटे कपड़ों में तुम दोनों कितनी कयामत लगती हो,,,,

( शुभम की बात सुनते ही निर्मला मुस्कुराते हुए बोली,,,।)

तेरी बात मान कर ही तो छोटे-छोटे कपड़े खरीदे हैं तुझे पहनकर जरूर दिखाएंगे,, मेरे राजा,,,,( निर्मला जिस तरह से मुस्कुराते हुए यह बात बोली थी शीतल समझ गई थी कि बीयर अपना काम कर रही है,,,। )

चल शीतल हम दोनों एक साथ अपने कपड़े बदल कर आते हैं,,,,( इतना कह कर शीतल और निर्मला दोनों एक कमरे में चले गए,,, शुभम ही बैठा रहा कुर्सी पर बैठकर अपने दोनों टांगों को एकदम सीधा फैलाते हुए उत्तेजना बस अपनी मां और शीतल के साथ-साथ उस नौकरानी के बारे में सोचता हुआ जो कि कुछ देर पहले ही उससे चुदते चुदते रह गई थी,,, दिनों के बारे में सोचता हुआ शुभम अपने पेंट के ऊपर से अपने लंड को मुट्ठी में भरकर सहलाने लगा,,,, वह कुर्सी पर से उठा और खिड़की के पास चला गया खिड़की का पर्दा हटा कर बाहर की तरफ देखा तो बाहर हल्की हल्की बर्फ गिर रही थी बेहद खूबसूरत नजारा था,,, यह नजारा देखकर उसका मन एकदम प्रसन्न हो गया,,,, उसे आने वाले पल का बेसब्री से इंतजार था वह अपनी मां और शीतल को दोनों को छोटे छोटे कपड़ों में देखना चाहता था,,, और नौकरानी की अधूरी चुदाई की सारी कसर अपनी मां और शीतल पर उतारना चाहता था,,,,,।

कमरे में जाकर शीतल और निर्मला एक दूसरे से हंस-हंसकर बातें करते हुए अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई और जो कपड़े मॉल में से खरीद के लाए थे दोनों ने अपने बदन पर डाल ली,,, कमरे से बाहर आने से पहले वह दोनों आदम कद आईने में अपनी अपनी छवि देख कर मुस्कुराने लगे क्योंकि वाकई में वह दोनों कयामत लग रही थी,,,। शिमला की ठंडी का अब उन पर बिल्कुल भी असर नहीं हो रहा था जवानी की गर्मी और बीयर का हल्का नशा उन दोनों के बदन में गर्मी का संचार भर रहा था,,, वह दोनों मुस्कुराते हुए कमरे से बाहर आए और जैसे ही शुभम की नजर उन दोनों पर पड़ी उसके तो होश उड़ गए जवानी के जोश से वह पूरी तरह से भर गया अपनी मां और शीतल दोनों की गदराई जवानी को छोटे कपड़ों में देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई,,,।

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शीतल के उफान मारती जवानी और अपनी मां की मदमस्त दूधिया बदन को छोटे से ड्रेस में देख कर शुभम पूरी तरह से मदहोश होने लगा,,, उसने तो सिर्फ कल्पना किया था कि छोटे कपड़े में उसकी मां और शीतल किस तरह के लगेंगे लेकिन आंखों के सामने जो दृश्य था वह कल्पना से भी परे था,,, कल्पना से भी कहीं ज्यादा खूबसूरत और उन्मादक,,,

अपनी मां और शीतल की मदमस्त जवानी देखकर शुभम कि आंखें चोंधिया गई थी,,,, छोटे-छोटे ड्रेस में अपनी मां की गोरी चिकनी मोटी मोटी जांघों को देखकर पलभर में ही शुभम के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,, शीतल कि उनमादकता,, छोटे कपड़ों में और ज्यादा बढ़ती जा रही थी बियर का सुरूर शीतल और निर्मला के साथ-साथ शुभम के तन बदन में भी बढ़ती जा रही थी,,,

शुभम की आंखों में दोनों की जवानी को पी जाने वाली खुमारी छाने लगी थी,,, दोनों दरवाजे पर खड़ी थी और शुभम खिड़की के करीब खड़ा था बाहर हल्की हल्की बर्फ गिर रही थी ऐसे में वातावरण में ठंड का बढ़ जाना लाजमी था लेकिन बियर का असर कहो या शीतल और निर्मला कि गदराई जवानी की गर्मी ,,,,, घर के अंदर का तापमान गर्म होता जा रहा था तभी तो शिमला की ठंडी में भी दोनों छोटे कपड़ों में बिल्कुल सहज नजर आ रहे थे,,,,

शीतल निर्मला एक दूसरे को देखते हुए मुस्कुराए और शुभम की तरफ देखते हुए दोनों एक साथ बोली,.

हम दोनों कैसी लग रही है छोटे कपड़ों में,,,

कसम से तुम दोनों एकदम माल लग रहे हो मैं तो कभी सोचा भी नहीं था कि छोटे कपड़ों में तुम दोनों इतनी खूबसूरत और सेक्सी लगोगी,,,,

क्या तुम सच कह रहा है या हम दोनों का मन रखने के लिए बोल रहा है,,,( निर्मला शुभम से बोली।)

मेरी बात का अगर तुम दोनों को विश्वास नहीं है तो एक बार सड़क पर निकल जाओ इतनी बर्फ बारी में भी पूरा मोहल्ला तुम दोनों के पीछे पीछे आएगा,,,

( सुबह की बात सुनकर शीतल और निर्मला दोनों हंसने लगे,,,)

तो आज की रात हम दोनों की जवानी तेरे नाम,,,

मैं बेकरार हूं तुम दोनों की जवानी को अपने लंड से पीने के लिए,,,,( इतना कहते हुए शुभम उन दोनों के करीब आ गया और दोनों को अपने एक-एक हाथों में पकड़ कर कभी निर्मला के गालों को तो कभी शीतल के गालों को अपने होठों की गर्मी देने लगा,,,,, शुभम के चुंबन से दोनों का उन्माद बढ़ने लगा था देखते ही देखते हल्की-हल्की चुंबन जबरदस्त किस में बदलने लगी,,, शुभम अपनी मां के लाल लाल होठों को अपने होंठों में भर कर उसे चूसना शुरू कर दिया,,,, शीतल की गर्म सांसे पलभर में ही कमरे को और ज्यादा गर्मी देने लगी,,, वह भी शुभम की गर्दन पर अपनी लाल-लाल होठों का निशान छोड़ते हुए उसे चूमने लगी और साथ ही अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर पेंट के ऊपर से ही उसकी खड़े लंड को जोर जोर से दबाने लगी,,,,,।

शुभम के बाएं हाथ में शीतल तो दाएं हाथ में निर्मला थी,,, शुभम को अपनी किस्मत पर गर्व हो रहा था शायद ही ऐसी किसी की किस्मत होगी जिसके दोनों हाथों में हाई क्लास की जबरदस्त खूबसूरत औरतें हो और किस्मत तो शुभम की कुछ ज्यादा ही जोर मार रही थी क्योंकि दोनों पेशे से टीचर थी पर उनमें से एक उसकी खुद की बात है जिसकी मदहोश कर देने वाली जवानी देख कर ना जाने कितनों का पानी निकल जाता था,,,, ऐसी खूबसूरत औरत से वह खुद उसे अपनी बाहों में लेकर खेल रहा था,,,, शुभम अपनी मां के होठों को चूमता हुआ दाएं हाथ से उसकी बड़ी बड़ी चूची को दबा रहा था और बाएं हाथ से शीतल की चूची से खेल रहा था एक साथ उसके दोनों हाथों में अलग-अलग किस्म के पके हुए आम थे जिनका रस बेहद अतुल्य और स्वादिष्ट था,,, और ऐसा मधुर रस पीना किस्मत वालों के नसीब में ही होता है,,,,, शुभम अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां के लाल लाल होठों में एक अजीब किस्म का नशा मिलता था,,, जिसे पीकर उसे ताकत मिलती थी,,, वह ताकत शुभम पूरी तरह से अपनी मां की चुदाई में खर्च कर देता था,,,, कुछ देर तक अपनी मां के लाल लाल होठों का रसपान करने के बाद शुभम दूसरी तरफ तड़प रही शीतल के देखते होठों पर अपने होंठ रख कर उसे पीना शुरू कर दिया,,,, तीनों बीयर और जवानी के नशे में पूरी तरह से लिप्त हो चुके थे जिन्हें शिमला की ठंडी बेअसर लग रही थी,,, वैसे सच्चाई यही थी कि शिमला की ठंड बेहद जालिम थी खास करके बाहर से आने वाले लोगों के लिए,,,, लेकिन यह भी सच था कि बियर और मदहोश जवानी का चादर ओढ़े शीतल और निर्मला के तन बदन में से गर्मी फूट रही थी जो कि पूरे कमरे के वातावरण को अपनी गर्माहट बख्श रहा था,,,, तभी तो तीनों एकदम मस्त होकर एक दूसरे की जवानी में पूरी तरह से अपने आप को डुबोने लगे थे,,,

ओहहहह,,,, शुभम मेरे राजा तेरे बिना यह जिंदगी और जवानी दोनों अधूरी है,,,( निर्मला अपनी गोरे-गोरे गाल को अपने बेटे के गाल पर रगड़ ते हुए बोली,,,,। और शीतल अपने मद भरे होठों का स्वाद शुभम को चखा रही थी,,,, निर्मला के तन बदन में मदहोशी कुछ ज्यादा ही छाई हुई थी,,, वह अपने बेटे के गाल पर अपने गोरे गोरे गाल को रगड़ ते हुए एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने बेटे के पेंट की बटन को खोल रही थी,,,,, उसमें बना तंबू निर्मला के होश उड़ा रहा था वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा दोनों की बुर की हालत खराब कर देगा,,,, देखते ही देखते निर्मला खुद अपने हाथों से अपने बेटे की पेंट की बटन को खोल कर उसकी चैन खोलने लगी और एक हाथ से उसके लंड को पेंट से बाहर निकालने की कोशिश करने लगी लेकिन शुभम का लंड को ज्यादा ही मोटा और लंबा था जिसकी वजह से वह इतनी आसानी से पेंट से बाहर आने से इंकार कर दे रहा था,,,, तो निर्मला से रहा नहीं गया और वह नीचे अपने घुटनों के बल बैठ कर अपने बेटे की पेंट को और नीचे की तरफ खींचने लगी देखते ही देखते शुभम की पेंट उसके पैरों में गिर गई निर्मला अपने घुटनों के बल बैठी हुई थी और शीतल शुभम के होठों को चूसते हुए अपनी नजरों को नीचे करके निर्मला की हरकत को देख रही थी,,,, शुभम अपने पीछे रखे हुए टेबल का सहारा लेकर आराम से खड़ा था,,,,, निर्मला और शुभम के लंड के बीच अभी भी उसका अंडरवियर बाधा बना हुआ था लेकिन निर्मला के तन बदन में इस कदर खुमारी छाई हुई थी कि अपने बेटे के अंडरवियर को उतारने का भी समय उसके पास नहीं था इसलिए वह अंडरवियर के आगे वाले खुले भाग में से अपने बेटे के लंड को बाहर निकालकर उसके पूरे वजूद को अपनी प्यासी आंखों से देखने लगी,,,,

शीतल के तन बदन में यह देखकर आग लग रही थी कि एक बार किस तरह से अपने ही बेटे के लंड से प्यासी औरत की तरह खेल रही है,,, इस तरह के नजारे के बारे में शीतल कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि इस तरह के दृश्य को वह अपनी आंखों से देख पाएगी लेकिन उसकी आंखों के सामने सब कुछ हकीकत होता जा रहा था मां बेटे के बीच के संबंध को लेकर वह केवल कल्पना ही करती थी लेकिन शुभम और निर्मला ने उसकी कल्पना को संपूर्ण रूप से साकार कर दिया था वरना वह जिंदगी में इतने पवित्र रिश्तो के बीच में इस तरह की कामुकता और उन्मादकता नहीं देख पाती,,,, एक तरह से शीतल उन दोनों मां बेटी की शुक्रगुजार थे जो कि उन दोनों से ही उसे अपनी जिंदगी में रंगीनता नजर आ रही थी जिंदगी जीने की चाह नजर आ रही थी वरना वह भी कल्पना की दुनिया में अपने आप को पूरी तरह से डूबो ले गई थी,,,।

अगर उसे शुभम ना मिला होता तो शायद उसकी जिंदगी में इस पल जो हो रहा है वह कभी नहीं हो पाता वह सिर्फ सपने और कल्पना में ही इस तरह के दृश्य को जी पाती,,, तभी तो वह भगवान को पूरी तरह से शुक्रगुजार मानती है कि अच्छा ही हुआ था कि उस दिन खड़ी दुपहरी में उसे निर्मला के घर भेज दिए थे और वह अपनी आंखों से मां बेटे के बीच के पवित्र रिश्ते को अपनी आंखों से तार तार होता है वह देख ली थी और वही नजारे की वजह से ही आज उसे यह खूबसूरत मदहोश कर देने वाली जिंदगी जीने का मौका मिल रहा था,,,,

आहहहहहहह,,,,, क्या बात है तेरा लंड तो आज कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा लग रहा है,,,,( निर्मला अपने बेटे के लंड को जड़ से पकड़ कर उसे ऊपर नीचे करके हिलाते हुए बोली,,,।)

तुझे छोटे कपड़ों में और तेरी मदमस्त जवानी देख कर मेरा लंड भी बहुत खुश हो गया है मम्मी,, इसलिए खुशी के मारे कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा हो गया है और देखना जब यह तेरी बुर में जाएगा ना तुझे जन्नत के मजे लेगा,,,,,

( दोनों मां बेटों की कामुकता भरी बातें सुनकर शीतल मदहोश हो रही थी वह भी अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर शुभम के लंड को पकड़ते हुए बोली,,,।)

अपनी मां की बुर में ही अपना रस पूरा मत निकाल देना मैं भी तुम्हारे लंड की प्यासी हूं,,,,।

मेरी जान तुम दोनों का ही ख्याल रखने के लिए तो मैं यहां तुम दोनों के साथ आया हूं,,,( शुभम शीतल के होठों को चूमता हुआ बोला,,,। तीनों अपने-अपने तरीके से आनंद ले रहे थे शुभम टेबल से अपने नितंबों को सटाकर खड़ा था,,,। शीतल बार-बार कभी उसके गाल को तो कभी उसको होठों को चूम रही थी और एक हाथ से उसके लंड को पकड़ कर हिला रही थी और शुभम की मां नीचे घुटनों के बल बैठी हुई थी वह अपनी बेटे के लंड को जड़ से पकड़ कर ऊपर नीचे करके उसके संपूर्ण भूगोल को अपनी आंखों से देख रही थी शुभम के मन में यह चल रहा था कि उसकी मां उसके लंड को मुंह में लेकर उसे लॉलीपॉप की तरह यूज कर उसे मस्त कर दें और शायद यही ख्याल निर्मला के मन में भी था लेकिन वह कुछ देर तक अपने बेटे के लैंड से खेलना चाहती थी वैसे भी कोई जल्दबाजी नहीं थी शिमला में यही करने के लिए तो तीनों आए थे इसलिए किसी भी प्रकार की जल्दबाजी निर्मला नहीं कर रही थी,,,। निर्मला भी कभी सपने में नहीं सोची थी कि वह किसी गैर औरत के साथ मिलकर अपने बेटे के साथ चुदाई का खेल खेलेगी वह कभी नहीं सोची थी कि वह जिंदगी में इतनी बेशर्म हो जाएगी कि किसी दूसरी औरत की आंखों के सामने अपने बेटे के लंड को पकड़ कर हिलाएगी उसे चूसेगी अपनी बुर में लेगी,,,, लेकिन उसका यह ना सोचना आज पूरी तरह से हकीकत होकर उसकी आंखों के सामने था,,,।

शिमला में निर्मला को किसी भी प्रकार का डर नहीं था किसी के द्वारा पकड़े जाने का भय बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि शिमला में उसे और उसके बेटे के साथ साथ शीतल को भी शायद कोई नहीं जानता था,,, वह इस बात से पूरी तरह से निश्चिंत थी कि अगर इस तरह का कार्य करते हुए अगर किसी ने उन तीनों को देख भी लिया तो उनका कुछ बीगडने वाला नहीं था,,,,,।

तभी तो तीनों निश्चिंत होकर जवानी का मजा लूट रहे थे शीतल को अपनी हथेली में सुगंध का लंड कुछ ज्यादा मोटा लग रहा था और इस बात का एहसास उसे उसकी बुर को फुदकने के लिए मजबूर कर दिया था,,,,, शुभम के लंड को पकड़ते ही सीतल को इस बात का एहसास हो गया था कि आज की रात शुभम उसकी जवानी को पूरी तरह से निचोड़ डालेगा,,,, निर्मला अपने घुटनों के बल बैठकर अपने बेटे के लंड से खेलते हुए उसे चूसने की प्यास को बढ़ा दी जा रही थी और उसे रहा नहीं गया और वह अपने प्यार से होठों को आगे की तरफ लाकर अपने बेटे के लंड के सुपाड़े को अपने होठों पर रगड़ने लगी,,,,,।

आहहहहहहह,,, कितनी गर्मी है रे तेरे लंड में,,,,

मेरे लंड से ज्यादा गर्मी तो तेरी बुर में होगी मेरी रानी,,,,,( इतना कहते हुए शुभम अपना एक हाथ अपनी मां के सर पर रख कर उसे हल्का सा दबाव देते हुए अपने लंड की तरफ खींचने लगा जो कि यह इशारा था उसकी मां को कि शुभम भी चाहता है कि वह उसके लंड को मुंह में लेकर चूसे,,, शुभम की हरकत और अधीरता को देखकर निर्मला भी अपना धैर्य खो बैठी और तुरंत अपने बेटे के मोटे सुपाड़े को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,,

मदहोशी के आलम में शुभम की आंखें बंद होने लगी शीतल अपनी आंखों से एक मां को उसके ही बेटे के लंड को चूसते हुए देख रही थी जो कि यह दृश्य देखकर वह पूरी तरह से कामोतेजीत हो गई,,, उसका भी दिल करने लगा कि वह भी शुभम के लंड को मुंह में लेकर चूसे,,, इसलिए वह भी नीचे अपने घुटनों के बल बैठने जा ही रही थी कि तभी,,, बाहर से सड़क पर गुजर रही गाड़ी का होरन की आवाज सुनकर शीतल की नजर दरवाजे की तरफ गई तो देखी की खिड़की के सारे पर्दे खुले हुए हैं,,,। वह तुरंत खड़ी होते हुए बोली,,,।

क्या यार पर्दे तो लगा लिए होते फिर वही गलती कर रहे हो,,,

( शीतल की बातें सुनकर निर्मला भी चौक गई और तुरंत अपने मुंह से अपने बेटे के लंड को बाहर निकालकर खिड़की की तरफ देखने लगी तो वाकई में खिड़की पूरी तरह से खुली हुई थी बाहर का नजारा एकदम साफ नजर आ रहा था,,, वह भी खड़ी हो गई,,,। वह भी खिड़की की तरफ जाने लगी तब तक शीतल खिड़की गलत पहुंच चुकी थी और वह पर्दे लगाते हुए बोली,,,।)

अगर कोई देख लेगा तो वह भी भागीदारी मांगने के लिए अंदर आ जाएगा,,,।

तो क्या हुआ शीतल रानी हम दोनों उसे भी अपनी दोनों टांगों के बीच में ले लेंगे,,,

( निर्मला की बात सुनकर शीतल हंसते हुए बोली,,,।)

हां वह तो मालूम ही है तेरी गर्म जवानी किसी को भी पिघलाने के लिए काफी है,,,,। अब चल यहां,, नहीं बेडरूम में चलते हैं वही जाकर मजा करेंगे,,,,।

( शीतल इतना कहकर सीढ़ियां चढ़ने लगी,,,, और निर्मला अपने बेटे की तरफ देखी तो अभी भी शुभम का लंड पूरी तरह से खड़ा था और वह अपनी पेंट को अपनी टांगों में से निकाल कर नीचे से एकदम नंगा हो गया था,,, यह देखकर निर्मला मुस्कुराते हुए अपने बेटे के खड़े लंड को पकड़ लिया और उसका सहारा लेते हुए आगे-आगे सीढ़ियां चढ़ने लगी और शुभम अपनी मां के हाथ में लंड थमाए हुए उसके पीछे पीछे चलने लगा,,,,।

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