हाए राम!.... आह , उई ई मम्मी... दिनेश..... यह क्या कर रहे हो.... आह प्लीज छोड़ दो.... आह ... कोई देख लेगा.... मेरी रूपाली दीदी बिलबिला उठी... गुहार लगा रही थी मेरी दीदी दिनेश से...
पर दिनेश ने मेरी दीदी की गुहार पर ध्यान नहीं दिया बल्कि उसने तो एक कदम आगे बढ़ते हुए मेरी दीदी की चूची को अपने मुंह में भर लिया और सरप सरप दूध पीने लगा.. जितना बड़ा हो सकता था उतना बड़ा मुंह खोलकर उसमें मेरी दीदी की चूची को भर कर दिनेश पी रहा था... मेरी दीदी की आंखें बंद हो गई और वह सिसक रही थी...…. आह... कोई देख लेगा... हाय राम..... रवि भी देख रहा है...उई ई ओह्ह मां..... दांत क्यों काट रहे हो.... बोलते हुए मेरी दीदी चीख उठी थी.... दिनेश ने दीदी के गुलाबी निपल्स पर दांत काट लिया था...
हरामजादा रवि ना सिर्फ देख रहा था बल्कि छत कूद के हमारी छत पर आ गया था और मेरी दीदी और दिनेश से कुछ ही कदम की दूरी पर खड़ा था.... उसने अपना मोटा लंबा काला 10 इंच का लण्ड पैंट से बाहर निकाल रखा था और मेरी दीदी की तरफ खड़ा करके अपने हाथ में पकड़े हुए था...
दिनेश....आह... तुम्हें मेरी कसम.आहआह.... रुक जाओ ना...आहआह... मेरी दीदी ने बिलखते सीसकते हुए कहा.
दिनेश ने मेरे रूपाली दीदी की बात मान ली... और उनकी चूची को अपने मुंह से आजाद कर दिया.... उसके चेहरे और मुंह पर मेरी दीदी का दूध लगा हुआ था ठीक वैसे ही जैसे हिरनी का शिकार करने के बाद शेर के मुंह पर खून लगा होता है....
साली रंडी अपनी चोली खोल .. मुझे तो तेरा दूध पीना है अच्छी तरह से... दिनेश ने कामुक तरीके से मुस्कुरा कर कहा..
प्लीज मेरी बात मान जाओ... आज के लिए.. घर में सब लोग हैं और छत पर कोई भी आ सकता है... मैं बर्बाद हो जाऊंगी मेरी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी.. मेरी दीदी लगभग रोने ही लगी थी...
साली रांड... ज्यादा नखरे मत दिखा... आज अच्छे से पी लेने दे मुझे तेरा दूध... बोलते हुए दिनेश ने मेरे रूपाली दीदी की गोद में से मुन्नी को खींच लिया और सामने पड़ी हुई खटिया पर मुन्नी को लिटा दिया...
मेरी दीदी खड़े-खड़े रोने लगी... जालिम दिनेश ने मेरी दीदी के रोने की परवाह किए बिना बड़ी तेजी से उनकी चोली खोल दी.. दिनेश को अच्छी तरह पता था कि मेरी दीदी के चोली के हुक कैसे खोलते हैं...
सुनील ने मेरी रूपाली दीदी की चोली खोल के नीचे जमीन पर फेंक दी... दीदी ने ब्रा तो पहनी नहीं थी सो उनकी बड़ी-बड़ी चूचियां दूध की तरह सफेद और दूध से भरी हुई दिनेश के सामने अकड़ के खड़ी थी.. गुलाबी निप्पल खड़े खड़े .... दिनेश ने बिना देर किए अपने मजबूत हाथों में मेरी दीदी के दोनों बड़े उभारों को दबोच लिया और दबाने लगा... नीचे झुककर मेरी दीदी की दोनों चुचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर चूसने लगा दिनेश...
" उं उं ,छोड़ न हट... दिनेश....... पागल हो क्या.... कोई आ जाएगा...…. आह , उई ई मां... रवि तुम ही समझाओ ना दिनेश को...…. आह , ... यह तुम क्या कर रहे हो... मेरी दीदी की निगाह जैसे ही रवि पड़ी वह चीख उठी...
रवि तो मैं रूपाली दीदी के बिल्कुल पास खड़ा था... और देख रहा था दिनेश की हरकतें मेरी दीदी के साथ.... उसने अपनी पैंट की जिप खोल रखी थी और उसके हाथ में उसका मोटा खड़ा ,कड़ा खूब भूखा ,तन्नाया ,... मुसल था..जैसे संपेरा कोई पिटारा खोले और खुलते ही मोटा कड़ियल जहरीला नाग फन काढ़ कर खड़ा हो जाए। काफी बड़ा और खूब मोटा लण्ड है रवि का.. मैंने बिल्कुल पास से देखा....... असलम और जुनैद से भी बढ़कर... मैंने मन ही मन तुलना की....ये देख के मेरी आँखे फटी रह गयी...