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Adultery बुरी फसी नौकरानी लक्ष्मी

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36

सन्नी

हम दोनों ने नहा कर कपड़े पहन लिए तो लक्ष्मी आंटी भी नहाने चली गई। विक्की ने लक्ष्मी आंटी से कहा कि हम दोनों कुछ देर नीचे हो आते हैं। हम दोनों कॉलेज के पास बने बुक स्टोर पहुंचे और वहां से हमारी सारी किताबें खरीद ली।

विक्की ने पवन पापा को फोन करके कॉलेज के बारे में बताया और खरीददारी कैसे करते हैं उसके बारे में पूछा। अकेले रहने का हमें कोई तजुर्बा नहीं था। पवन पापा ने लक्ष्मी आंटी की मदद लेने की सलाह दी तो मैं ने कहा तीन लोग शहर में पैदल ज्यादा नहीं घूम सकते। बस तो काफी थीं पर कुछ समझ नहीं आ रहा था। पापा ने हंसते हुए कहा कि बड़ा होने का मतलब है हालात के साथ बदलना। वैसे मम्मियों ने कुछ करने का प्लान बनाया है पर इसके बारे में वह कुछ बता नहीं सकते।

किताबें ले कर हम घर पहुंचे तो वहां लक्ष्मी आंटी ने साफ सफाई कर ली थी और हमारा बेड ठीक कर रही थी। लक्ष्मी आंटी ने हमें देख कर कहा,

"बाबू इतनी जल्दी किताबें खरीद ली? अगर पता होता तो मैं घर के सामान की पर्ची देती। दुबारा जाना नहीं पड़ता "

विक्की ने कहा, "लक्ष्मी आंटी, हमने किताबों की दुकान कल कॉलेज से आते हुए देख ली थी पर बाकी खरीददारी के लिए मदद की जरूरत पड़ेगी। हम बाकी खरीददारी के लिए मॉल जा रहे हैं। आओगी हमारे साथ?"

लक्ष्मी आंटी की आंखे चमक उठी। उसने कहा,

"मॉल में मैं कभी गई नहीं। सुना है वहां सब महंगा होता है और कई चीजें एक साथ मिलती हैं। क्या मुझे आने देंगे? मैं कोई मेमसहाब नहीं।"

मैंने हंसकर कहा कि हम दोनों के होते हुए उसे कोई नहीं रोक सकता। लक्ष्मी आंटी ने दौड़ते हुए अपने बाल बनाए और अपने अच्छे कपडे पहन कर बाहर आ गई। हम ने बाहर से रिक्शा कर ली और मॉल पहुंचे। मॉल कि चमक देख लक्ष्मी आंटी का चेहरा खिल उठा। मॉल के अंदर जाने पर वहां के स्टॉल और दुकानों में मेकअप से बनठन कर खूबसूरत लड़कियां समान बेचती लक्ष्मी आंटी को दिखी।

लक्ष्मी आंटी की खूबसूरती किसी पाउडर या लिपस्टिक की मोहताज नहीं थी पर उसके कपड़े काफी पुराने और सस्ते थे। बस्ती में लोगों की नजरों से छुपने के लिए बने कपड़े यहां उसे बुरा महसूस करा रहे थे। हम सब एक बड़े स्टोर में गए जहां काफी समान किफायती दाम पर रखा था। लक्ष्मी आंटी बाकी सब को देखते हुए हमारे पीछे पीछे चल रही थी। मैं जानबूझकर लक्ष्मी आंटी को स्टोर के हर कोने में घूमाने लगा। लक्ष्मी आंटी ने अब यहां से भागने का मन बना लिया था और उसन जल्दी से हमारा पर्ची में रखा सामान भर लिया। अपने कपड़ों से संकोच में लक्ष्मी आंटी को विक्की का खयाल नहीं रहा और उसने मेरे साथ सामान भर लिया। जब हम पैसे देने की कतार में खड़े हो गए तो लक्ष्मी आंटी सामान के ढेर को देख कर चौंक गई।

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "हे भगवान, मैंने इतना सामान भर लिया? बाबू इस में से कम कर देंगे तो चलेगा।"

मैंने लक्ष्मी आंटी को कतार से बाहर निकाल कर कहा कि विक्की बिल चुका देगा तब तक हम कुछ और करते हैं। विक्की ने आंख मारी और हां कहा।

लक्ष्मी आंटी ने बाहर आ कर भी सामान कम करने की बात की तो मैंने कहा कि अब हम अपना घर बना रहे हैं तो पहली खरीददारी बड़ी होनी है। अगली बार कम सामान लगेगा। लक्ष्मी आंटी ने माना कि यह बात सही थी और उसने अपनी नजर घुमाई। वहां तकरीबन खाली पड़े दुकान को लक्ष्मी आंटी किसी खजाने की तरह देख रही थी। मैं लक्ष्मी आंटी को अंदर ले गया तो उसने शर्माकर बाहर भागने की कोशिश की।

पूरे दुकान में किताबों के ढेर लगे थे। कहीं बच्चों की किताबें थीं, तो कहीं आत्मकथा और कहीं और स्कूल की किताबें। कॉपियां और पेन के अलग अलग ढेर और गुच्छे थे। लक्ष्मी आंटी ने किसी जेवर की तरह उन पर अपनी उंगली घुमाई। मैंने पीछे से लक्ष्मी आंटी के कान में कहा,

"लक्ष्मी आंटी, अब तुम्हारी की तनख़ा बढ़ गई है और तुम जो चाहो खरीद सकती हो। मैं जानता हूं कि तुम अपनी पढ़ाई अपने दम पर करना चाहती हो। तुम जो खरीद लोगी उसके पैसे तुम्हारी तनख़ा से काट लेंगे।

लक्ष्मी आंटी ने खुश होकर दौड़ना शुरू किया। उसने अलग अलग तरह की कॉपियां और पेन लिए। लक्ष्मी आंटी ने कुछ 10 वी कक्षा की किताबें खरीद ली और साथ में इंग्लिश सीखने की किताब भी ली। मैंने लक्ष्मी आंटी के हाथ में भारी वजन को देखा पर लक्ष्मी आंटी को उस का कोई ग़म नहीं था।

विक्की दुकान के बाहर से ही लक्ष्मी आंटी को देख रहा था और हमारे बाहर आते ही लक्ष्मी आंटी को चिढ़ाने लगा।

लक्ष्मी आंटी अपने कपड़ों के बारे में पूरा भूल गई। उस वक़्त अगर कोई हमें देखता तो उसे बस कॉलेज के 3 दोस्त दिखते। हम दोनों लक्ष्मी आंटी को होटल में ले गए और लक्ष्मी आंटी को मुंबई कि पाव भाजी खिलाई। लक्ष्मी आंटी तो सातवे आसमान में उड़ रही थी कि उसका दिन ऐसे बिता। पेट भरने के बाद जब हम ने बिल चुकाया तो कीमत देख लक्ष्मी आंटी चौंक गई।

लक्ष्मी आंटी बोल पड़ी, "बाबू, इतने में तो मैं आप दोनों को 3दिन ये सब्जी बना कर खिलाऊं!!"

विक्की ने लक्ष्मी आंटी को हंसकर कंधे से धक्का देते हुए कहा, "लेकिन थकने के बाद अच्छा खाना तुरन्त मिलने की भी कीमत होती है ना?"

लक्ष्मी आंटी ने सोच कर हां कहा और हम सब ने रिक्शा कर घर लौट आए। लक्ष्मी आंटी ने हमारी भरी हुई थैलियां घर में जा कर खोली। पहले उसने बड़े प्यार से अपनी किताबें हमारे पढ़ाई के समान के साथ में रख दी। बाकी सामान ले कर लक्ष्मी आंटी किचन में गई। हम दोनों हॉल में बैठ कर घड़ी देखने लगे।

लक्ष्मी आंटी ने किचन में से कहा, "बाबू, अब जब सारा सामान आ गया है तो मै आप दोनों को परेशान नहीं करूंगी। ताजी सब्जियां मै यहीं से खरीद लूंगी पर कोई सब्ज़ी पसंद ना हो तो मुझे अभी… आ!!!"

लक्ष्मी आंटी ने थैला बाहर लाते हुए कहा, "बाबू उन्होंने आप के थैले में किसी और का सामान भर दिया है। हमें इसे लौटकर पैसे वापस लेने होंगे!"

"तो तुम्हें ये कपड़े पसंद नहीं आए? कुछ ज्यादा ही बड़े हैं पर सोचा शहरी लड़कियों के छोटे कपडे तुम्हे पसंद नहीं आयेंगे।"

लक्ष्मी आंटी वहीं जमीन पर थैला ले कर बैठ गई। उसने एक एक कपड़ा बाहर निकलते हुए उसे छुआ।

लाल और सफेद टॉप के साथ पहनने के लिए हरी लेगिंग्स थी। अनेक रंगों के डिजाइन से बनी नीली सलवार कमीज़ कि जोड़ी थी। इन कपड़ों के नीचे एक गुलाबी शर्ट और सफेद लेडीज पतलून थी। पतलून के साथ satin में बना पट्टा निकल आया। यह गुलाबी satin में बना camisole और boy-shorts थे।

लक्ष्मी आंटी ने हमारी ओर देखा तो मैंने कहा, "घर में पहनने के लिए दूसरी जोड़ी भी होनी चाहिए। नीचे देखो, कुछ और भी होगा।"

लक्ष्मी आंटी के हाथ एक पैकेट लगा जिस में कॉम्पैक्ट पाउडर, कुछ लिपस्टिक और सिंदूर कि एक डिब्बी थी। लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को गले लगाया और कहा कि वह हमारा शुक्रिया कैसे अदा करे।

"लक्ष्मी आंटी क्यों न तुम ये कपड़े पहन कर देखो? इन कपड़ों के नाप बड़ी मुश्किल से लिए थे।"

लक्ष्मी आंटी थैला बेडरूम में ले गई और एक एक ड्रेस कि नुमाईश हमारे लिए करने लगी। गुलाबी शर्ट और सफेद लेडीज पैंट पहन कर लक्ष्मी आंटी किसी बड़ी कंपनी की अफसर लग रही थी पर उसे इन कपड़ों की आदत नहीं थी और उसने सुडौल पैरों को हाथों से छिपा रही थी।

शिकायत के स्वर में लक्ष्मी आंटी बोली, "बाबू ये किस काम आयेगा?"

विक्की ने गूढ़ अर्थ से कहा, "हर चीज का वक़्त होता है।"

लक्ष्मी आंटी समझ गई कि उसे जवाब आसानी से नहीं मिलेगा और आखरी जोड़ी पहनने के लिए अंदर चली गई।

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विक्की

लक्ष्मी आंटी को बाहर आने में कुछ ज्यादा समय लगा पर इंतजार करना बिल्कुल ठीक था। लक्ष्मी आंटी ने दरवाजा खोल कर अपना पैर हॉल में रखा और मेरी नजर उसकी खुली टांग पर से उठती हुई satin में रंगी हुई उसकी जांघ पर अटकी। दो पैरों के बीच में शॉर्ट्स जहां जुड़कर जवानी का खजाना छुपाते हैं वहां camisole का किनारा हमें ललचा रहा था। Camisole का कपड़ा लक्ष्मी आंटी के पेट की झलक हर सांस के साथ दिखाते हुए लक्ष्मी आंटी के भरे स्तन को उजागर कर रहा था। Camisole का गला और पीठ गहरी थी और लक्ष्मी आंटी के गोलों की उपरी गोलाई पतली पट्टी से छुप नहीं रही थी।

अपने शरीर से हमारी हालत बिगड़ती देख लक्ष्मी आंटी ने कहा, "बाबू मेरा एक छोटा सा काम करोगे?"

ना तो हम बोल नहीं सकते थे तो हमने सर हिलाकर हां कर दी। लक्ष्मी आंटी ने हमारे सामने घुटनों पर बैठ कर कहा,

"बाबू प्रतीक जी के नाम से मेरी मांग भर दीजिए।"

मेरे लौड़े में मानो कोई बम फट गया। मेरी पैंट तन कर मुझे दर्द होने लगा। मैंने बड़ी मुश्किल से लक्ष्मी आंटी की मांग में प्रतीक का नाम लेते हुए सिंदूर भरा। लक्ष्मी आंटी ने अपना मोर्चा सन्नी कि ओर मोड़ते हुए उस से पूछा,

"सन्नी बाबू, इन कपड़ों में मेरा मंगलसूत्र ठीक लग रहा है ना?"

Camisole की पट्टियां लक्ष्मी आंटी के कंधों पर थीं और लक्ष्मी आंटी के गले में बंधे मंगलसूत्र को किसी फ्रेम कि तरह उजागर कर रही थी। लक्ष्मी आंटी का मंगलसूत्र उसके दूधिया गोलों के बीच झूलता हुआ उन्हें छेड कर हमें तड़पा रहा था। मुझसे और रहा नहीं गया। मैंने लक्ष्मी आंटी को अपने कंधे पर रखा और उसे उठाकर बेडरूम में ले गया।

"विक्की बाबू!!", लक्ष्मी आंटी हंसते हुए उत्तेजना से चीख पड़ी।

लक्ष्मी आंटी को बेड पर मैंने फेंका तो लक्ष्मी आंटी ने भागने की कोशिश की। सन्नी लक्ष्मी आंटी पर झपटा और लक्ष्मी आंटी के कंधों पर से camisole के पट्टे नीचे उतारे। लक्ष्मी आंटी की लाल बेरियां खुल गईं और सन्नी उन्हें दबाकर चूसने लगा। मैंने लक्ष्मी आंटी के boy-shorts उतारे तो देखा कि लक्ष्मी आंटी के कामरस से उसकी पैंटी भीग गई है।

"ये तो ना इंसाफी हुई लक्ष्मी आंटी। उपर से सीधा रस्ता था और नीचे दरवाजा अब भी बाकी है।"

लक्ष्मी आंटी ने मुझे पैर मार कर हटाने की झूठी कोशिश करते हुए कहा, "अगर उपर ब्रा पहनती तो उसके पट्टे नजर आते इसलिए नहीं पहनी थी।"

मैं लक्ष्मी आंटी के पैरों को फैला कर उठते हुए अपना मुंह लक्ष्मी आंटी के खजाने तक ले गया। लक्ष्मी आंटी मेरा इरादा भांप कर चीखने लगी तो सन्नी ने उसका मुंह दबा दिया। मैंने लक्ष्मी आंटी की पैंटी को दातों में पकड़ा और उसे उठाकर उतारने लगा। पैंटी के घुटनों में पहुंचने पर मेरा मकसद पूरा हो गया। मैंने लक्ष्मी आंटी की पैंटी के अन्दर सर डालकर उसकी काम अग्नि की ज्वाला को अपनी जीभ से भड़काया। लक्ष्मी आंटी ने अपना सर हिलाकर अपनी उत्तेजना पर से काबू छोड़ दिया। लक्ष्मी आंटी के पैरों में मेरा सर पकड़ कर लक्ष्मी आंटी ने अपने घुटने मोड़ दिए। मेरा शरीर बेड पर दब गया और लक्ष्मी आंटी ने मेरी पीठ पर जोर देते हुए अपनी बहती योनी को मेरे मुंह पर लगा दिया। लक्ष्मी आंटी ने अपना बदन कांपते हुए मेरी जीभ पर रसों की बाढ बहा दी और बेड पर लेट गई।

मैं इतना तप चुका था कि सन्नी को इंतजार करना पड़ा। मैंने लक्ष्मी आंटी की पैंटी उतार फैंकी और लक्ष्मी आंटी पर लेट गया। लक्ष्मी आंटी को सन्नी चूम रहा था तो मैंने लक्ष्मी आंटी के गरदन को जोर से चूमते हुए उसकी भट्टी में अपना लोहा डाल दिया।

मुझ में मानो कोई जानवर जग गया था जिसके इशारों पर मैं लक्ष्मी आंटी को नहीं बल्कि अपनी मादा को चोद रहा था। मैंने लक्ष्मी आंटी के कंधे पकड़ लिए और अपने लौड़े को खुली छूट दी। मेरे तेज धक्के लक्ष्मी आंटी को पूरा हिला रहे थे। मैं जल्द ही लक्ष्मी आंटी की चूत में अपना पानी छोड़ कर गिर गया।

"Sorry लक्ष्मी आंटी। मैं ज्यादा देर टिक नहीं पाया।"

लक्ष्मी आंटी ने मेरे बालों में हाथ फेरा और कहा, "मुझे बहुत मजा आया और मुझे नहीं लगता कि इतने पर आप मुझे सोने दोगे।"

मैं लक्ष्मी आंटी के होंठ चूमकर बगल में लेट गया और सन्नी ने मेरी जगह ले ली। सन्नी तयार था पर मेरी गलती से सीख कर उसने लक्ष्मी आंटी को धीरे धीरे चोदना शुरू किया। लक्ष्मी आंटी जल्द ही जल बिन मछली की तरह तड़पते हुए सन्नी को अपने गले लगाकर रोते हुए झड़ने लगी।

लक्ष्मी आंटी ने सन्नी को अपनी बाहों और टांगों से अपने अंदर खींचते हुए कहा, "सन्नी बाबू! अपनी लक्ष्मी आंटी पर रहम करो! फट रही हूं मैं! अपना पानी छोड़ो! भर दो मुझे अपने प्यार से। मेरी कोख भर दो सन्नी बाबू!!"

इतने प्यार से कि गई मिन्नत को सन्नी मना कैसे करता? सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के गले के दूसरी तरफ जोर से चूमते हुए अपने रस की धारा लक्ष्मी आंटी की नदी में बहा दी। सन्नी लक्ष्मी आंटी पर लेटा रहा और लक्ष्मी आंटी छत को देखती गहरी सांसे लेती रही।

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "पता नहीं कि पिछले जनम में मैंने ऐसा क्या किया था कि मैं आप दोनों की प्रेमिका बनी। पाप तो नहीं होगा पर उफ्फ…"

हम सब एक दूसरे की बाहों में लेटे रहे और फिर लक्ष्मी आंटी उठ गई। हमारी कुश्ती में उड़ी हुई लक्ष्मी आंटी की पैंटी उसे नहीं मिल रही थी। मैंने लक्ष्मी आंटी से कहा कि वह satin के नीचे पैंटी ना पहने और वह पैंटी वैसे भी गीली हो गई थी तो सुबह उसे ढूंढ लेना। लक्ष्मी आंटी को दूसरा रास्ता नहीं मिला और वह मान गई।

रात को हम ने दुबारा जिद करके पिज़्ज़ा मंगवाया। यह नहीं चीज लक्ष्मी आंटी ने बड़े चाव से खाते हुए हम दोनों से पढ़ाई के लिए मदद मांगी। हम दोनों मान गए और लक्ष्मी आंटी को 10वी कक्षा का अभ्यास कराते हुए काफी बातें की। रात के 9 बजे लक्ष्मी आंटी ने हमें बेडरूम में भेजा क्योंकि कल कॉलेज में सुबह 8 बजे हाजिर होना था।

लक्ष्मी आंटी ने किचन में अपना बिस्तर लगाया और बेडरूम में आ गई। पेट की भूख मिट चुकी थी और वासना की आग पहले भड़क कर अब अंगारों की तरह हलके से हमें सेंक रही थी। लक्ष्मी आंटी को हम दोनों ने अपनी बाहों में भर लिया और उसके दोनों छेद हमारे लौड़ों से भर दिए। धीरे धीरे चोदना औरत को कैसे पागल कर देता है यह बात हम दोनों ने सीखी। लक्ष्मी आंटी के पागल पन के मज़े ले लेकर हम दोनों झड़ कर सो गए।

सुबह 6 बजे लक्ष्मी आंटी उठ गई तो हम दोनों भी कॉलेज के लिए तयार होने उठ गए। हमें जल्दी होगी जान कर लक्ष्मी आंटी ने हमें नहाने और तयार होने हो कहा। जब तक हम दोनों तयार हो गए लक्ष्मी आंटी ने हमारे लिए नाश्ता बनाया और दोपहर के खाने में क्या चाहिए पूछा। हम ने लक्ष्मी आंटी को छेड़ने की कोशिश की तो उसने नाश्ता पहले खत्म करने को कहा। नाश्ता 4 मिनट में हम ने खा लिया और अब लक्ष्मी आंटी पर लपके।

हॉल में लक्ष्मी आंटी को मेज पर लिटाकर सन्नी ने उसकी boy-shorts को उतारा। लक्ष्मी आंटी ने कुछ कहने के लिए मुंह खोला तो मैंने उसे अपना लौड़ा खिला दिया। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के पैर उठाकर लक्ष्मी आंटी की गांड़ में अपना भाला पूरा भर दिया। सन्नी के हर धक्के से लक्ष्मी आंटी मेरा लौड़ा निगल लेती और सांस लेने जब नीचे सरकती तब अपनी गांड़ को सन्नी के लौड़े पर दबाती। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के पैरों को अपने कंधे पर रखा और आगे बढ़कर लक्ष्मी आंटी की कमर पकड़ कर पेलने लगा। लक्ष्मी आंटी को चूधाई का नशा चढ़ गया और उसने मेरे लौड़े को जोर से चूसते हुए अपने मम्में दबाने लगी। सन्नी ने अच्छे से पेल कर लक्ष्मी आंटी की गांड़ में अपना रस छोड़ दिया। मैंने लक्ष्मी आंटी को पलटा और उसकी कमर उठाई। लक्ष्मी आंटी की थूक से गीला लौड़ा लक्ष्मी आंटी की गांड़ को फैलाते हुए उसके अंदर सन्नी का वीर्य फेंटने लगा। मैंने लक्ष्मी आंटी की चूचियां दबाते हुए उसे तेज धक्के से चोद दिया। सन्नी के साथ हुई चुसाई के कारण मैं लक्ष्मी आंटी को ज्यादा चोदे बिना झड गया और उसके बदन पर लेट गया।

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "अगर रोज सुबह ऐसे ही जाना तय कर लिया है तो रोज जल्दी सोना पड़ेगा।"

हम दोनों ने हंसकर अपने कपड़े ठीक किए और लक्ष्मी आंटी को आखरी बार चूम कर कॉलेज के लिए निकले। रास्ते में मैंने सन्नी से कहा कि हमें लक्ष्मी आंटी को प्यार से चोदना चाहिए। हम दोनों ने कल जो किया उस से आज सुबह लक्ष्मी आंटी के गले पर लाल नीले निशान बन गए थे। सन्नी ने सोचते हुए कहा कि शायद हमें दाग के बारे में लक्ष्मी आंटी को बताना चाहिए पर देर हो रही थी और हम ने शाम को लक्ष्मी आंटी को बताने का तय किया।

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लक्ष्मी आंटी ने अपनी boy-shorts पहनकर लड़खड़ाते कदमों से हॉल को फिर से साफ करते हुए खुद से कहा, "कल सुबह उठते ही मैं दोनों से अपनी गांड़ मरवा लूंगी। कम से कम दो बार सफाई नहीं करनी पड़ेगी।"

अचानक अपनी बातों का मतलब समझ कर लक्ष्मी आंटी हंसने लगी कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। कचरा बाहर रखा था पर शायद कोई बाबू को शैतानी सूझी हो। ये सोच कर लक्ष्मी आंटी ने हंसते हुए एक हाथ से अपने बाल पीछे करते हुए दरवाजा खोला।

"Surprise!!!"

लक्ष्मी आंटी का चेहरा डर से बर्फ हो गया और उसने दरवाजे को पकड़ कर अपने आप को संभाला। दोनों मम्मियां लक्ष्मी आंटी को आंखें फ़ाड़ कर देख रही थी। लक्ष्मी आंटी ने हिम्मत जुटाकर दरवाजा खोला और उन्हें हाथ से अंदर बुलाया। श्वेता और समीरा सिर्फ सहेलियां नहीं बिजनेस पार्टनर्स भी थीं और बिना बोले सब समझने और समझाने की ताकत रखती थी।

श्वेता ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा, "लगता है कि हमें आने में देर हो गई है।"

समीरा की आंखों में कुछ ऐसे भाव थे मानो किसी शेरनी ने दूसरी शेरनी के मुंह में अपना बच्चा देख लिया हो। सर्द स्वर में समीरा बोली, "हां बहुत ज्यादा देर हो गई है। बच्चे कॉलेज गए हैं?"

समीरा ने जहरीला सवाल पूछते हुए अपनी गरदन पर हाथ फेरा। लक्ष्मी आंटी ने झट से कहा,

"हां, दोनों बाबुओं को परसों ही कॉलेज बुला लिया गया था और आज 8 बजे क्लास शुरू होना था। दोनों बाबू आप के आने से 10 मिनट पहले ही चले गए। आप बैठिए, मैं आप के लिए कुछ लाती हूं।"

लक्ष्मी किचन में जाने के लिए मुड़ी और श्वेता ने चौंक कर समीरा की ओर देखा। समीरा लक्ष्मी आंटी के पीछे से इशारा कर हाथ पैर धोने गई। श्वेता भी हाथ पैर धोकर घर देखने लगी। लक्ष्मी आंटी डर कर किचन में नाश्ता बनाने के बहाने से छुप गई। समीरा ने किचन में चक्कर लगाते हुए सब देख लिया और हॉल के श्वेता के बगल में बैठ गई।श्वेता ने अपना सर सोफे पर रख कर छत को अनदेखी आंखों से ताक रही थी।

समीरा गुस्से से लाल हो कर फुसफुसाई, "4 दिन हो गए उसे यहां आए अब तक किचन ठीक से लगा नहीं है। नाश्ता इतना ही बनाया था कि ख़तम हो गया और धोने के लिए 2 प्लेट्स ही है। चाय भी अब बना रही है। बच्चों के साथ अगर ऐसा होता है तो हमें कुछ करना पड़ेगा!"

श्वेता ने सर को ठंडा रखते हुए कहा, "समीरा जरा अपनी बात सुन। ऐसे लगता है कि कोई सास अपनी बहू का घर देख रही है। यहां आने से पहले अश्वेत ने कहा था कि चाहे जो हो जाए मैं हर बात समझने की कोशिश करूं। उसे कुछ तो खबर थी।"

समीरा ने शांत होते हुए कहा, "कम से कम लक्ष्मी का बिस्तर किचन में है। शायद अब भी देर नहीं हुई। जब समीर ने मुझे ठंडा दिमाग रखने को कहा मैं नहीं जानती थी कि ऐसा कुछ होगा। लक्ष्मी हमारे बच्चों को ऐसे कपड़े पहन कर ललचा रही है। उसे जल्दी नहीं रोका तो हमारे बच्चे…"

श्वेता ने समीरा की बात काटते हुए कहा, "बच्चे नहीं रहे!! बेडरूम में ड्रेसर के नीचे मुझे इस्तमाल कि हुई पैंटी मिली। इस घर में पैंटी सिर्फ 1 व्यक्ति इस्तमाल करती है। जरा गहरी सांस लेकर देख। हम अगर आधे घंटे पहले आते तो कुछ और देख रहे होते।"

समीरा ने अपना सर हाथ में रख कर कहा, "नहीं! ऐसा नहीं हो सकता! वो बच्चें है! नहीं! मैं ऐसा होने नहीं दूंगी। हम लक्ष्मी को निकाल देंगे! नहीं तो उसे वापस अपने यहां बुला लेंगे। उसे ज्यादा तनख़ा देकर किसी और के घर भेज देंगे।"

श्वेता ने सिर्फ समीरा की ओर देखा और चुप रही। समीरा ने अपनी सहेली की आंखों में देखा और समझ गई। समीर और अश्वेत इस बात के बारे में जानते थे और उन्होंने ऐसा इंतजाम किया था कि बच्चों को महफूज रखते हुए उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का एहसास हो।

लक्ष्मी आंटी नाश्ता ले कर आ गई तो दोनों मम्मियों की आंखों में आंसू भर आए थे। श्वेता ने चुपके से पूछा, "क्यों?"

लक्ष्मी आंटी किसी मां को यह नहीं बता सकती थी कि उसके बेटे ने लक्ष्मी की इज्जत लूटी थी पर राज़ खुल गया है इस बात में कोई शक नहीं था। लक्ष्मी आंटी ने हिचकिचाते हुए अपने बचपन और शादी की कहानी बताई। चोरी पकड़ी जाने पर उसने फार्महाउस में काम कर के पैसे लौटाने का ठान लिया। फार्महाउस में बात से बात बढ़ी और सब अपना आपा खो बैठे। वापस लौटने पर प्रतीक को नौकरी लग गई और उसने अपनी सच्चाई बताते हुए विक्की और सन्नी को लक्ष्मी का ख्याल रखने को कहा।

समीरा समझ गई कि न केवल पूरी सच्चाई उसे समीर से निकालनी होगी बल्कि लक्ष्मी दोनों बच्चों को बचाते हुए उसे बता रही थी कि वह पप्पू के लौटने तक ही बच्चों के साथ रहेगी। समीरा और श्वेता ने नाश्ता किया और लक्ष्मी से कहा कि वह दोपहर के खाने के वक़्त बच्चों से मिलने आयेंगी। दोनों मम्मियां घर से निकल कर अपने होटल गई जहां से उन्होंने समीर और अश्वेत को फोन किया। सच्चाई जान लेने के बाद दोनों ने बैठ कर काफी देर तक बातें की और बच्चों से मिलने गई।

सन्नी और विक्की खुशी में मदहोश दोपहर को घर खाना खाने गए। दोनों ने तय किया था कि लक्ष्मी आंटी की अगाडी और पिछाडी कौन बजाएगा। बिल्डिंग के नीचे सन्नी कुछ देख कर रुक गया। विक्की ने सन्नी को देखा और उसकी नजर का पीछा किया। वहां सन्नी कि गाड़ी खड़ी थी।

दोनों ने धीरे से दरवाजे पर दस्तक दी तो समीरा ने अंदर बुलाया। मम्मियों के इस सरप्राईज से खुश पर राज खुलने के डर से सेहमे लड़कों ने मम्मियों के गले लगते हुए नजरों से लक्ष्मी आंटी को ढूंढा। लक्ष्मी आंटी ने नया नीला सलवार सूट पहना था और काफी खुश लग रही थी। लक्ष्मी आंटी बाद में खाना खाने वाली थी पर श्वेता मम्मी ने जिद की और सब ने मिलकर खाना खाया। कॉलेज की बातें हुई तो पता चला कि आज कई लोग अपने घरवालों के साथ आए थे।

खाने का समय ख़तम हो रहा था तो मम्मियों ने दोनों के साथ कॉलेज देखने की जिद की। घर से बाहर जाने के बाद मम्मियों ने अपने बेटों को पकड़ा और धीमी आवाज में खूब खरी खोटी सुनाई। अच्छी तरह डांटने और धमकाने के बाद उन्होंने दोनों को लक्ष्मी आंटी का खयाल रखने की सलाह दी और दो बिजनेस कार्ड दिए।

दोनों लड़कों की क्लास शुरू हो गई और मम्मियां अपने पतियों को सच छुपाने की सजा देने के लिए चली गई।

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सन्नी

शाम को 6 बजे हम दोनों घर लौटे तो मैंने देखा लक्ष्मी आंटी उदास बैठी थी। हमारी ओर देखते ही उस ने कहा,

"बाबू, मैंने उन्हें नहीं बताया पर मै दोनों मेमसाहब से झूठ नहीं बोल पाई। आप मुझे वापस भेज देंगे?"

"लक्ष्मी आंटी, गलती हमारी है। तुम्हारे गले पर चूमते हुए हमने निशान बना दिए और अब मम्मियों को पता चल गया है। दोनों पापा पहले से ही सब समझ चुके थे और इसीलिए उन्होंने तुम्हारे यहां आने का इंतजाम किया। लक्ष्मी आंटी, डरो मत। अब हमें अपने घरवालों से छुपने छुपाने की जरूरत नहीं है। तुम हमारी हो और हम दोनों तुम्हारे।"

लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को देख कर मुस्कुराते हुए हमें गले लगाया और फ्रेश होने को कहा। हमारे बाहर आते ही लक्ष्मी आंटी ने चाय बिस्किट लाए थे। उन्हें खाने के बाद लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को कम से कम दो घंटे पढ़ाई करने का हुकुम सुनाया।

विक्की ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में खींच कर कहा,

"अब भी थोड़ी भूख बाकी है। सुबह से भूकों को रात तक यूं ही छोड़ोगी!"

लक्ष्मी आंटी ने कहा,

"छोड़ो विक्की बाबू! आप दोनों की भुक तो कभी नहीं मिटती। अभी खाना परोसा तो भी सुबह तक खाते रहोगे।"

"बात तो सच है लक्ष्मी आंटी। पर जरा सोचो अगर खाना इतना लजीज हो तो पेट कैसे भरे।"

हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को एक साथ खड़े खड़े बाहों में पकड़ कर उसे चूमने लगे। लक्ष्मी आंटी ने विरोध करते हुए हमें काफी डांटा और हमारे कपड़े उतार फेंके। फर्श पर मेरे शर्ट और विक्की कि पैंट के बीच लक्ष्मी आंटी का satin gown पड़ा था। लक्ष्मी आंटी ने घुटनों पर बैठते हुए हम दोनों के कड़े लौड़ों को चूसकर गीला कर दिया।

लक्ष्मी आंटी ने अपनी दहिने हाथ की दो उंगलियां दिखाते हुए हमें चुनने को कहा। मैंने बीच वाली उंगली पकड़ी तो विक्की ने पहली उंगली पकड़ी।

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "सन्नी बाबू, पकड़ो मुझे।"

लक्ष्मी आंटी ने मेरे गले में अपनी बाहों से पकड़ लिया और मैंने उसे अपने बाहों में लिया। लक्ष्मी आंटी ने कुदकर अपने पैरों से मेरी कमर पकड़ ली। मेरा लौड़ा लक्ष्मी आंटी की गीली गरमी को रगड़ रहा था। लक्ष्मी आंटी ने अपनी कमर उठकर कुछ बार अपनी चूत को मेरे लौड़े की लंबाई पर घुमाया। मुझसे और रहा नहीं गया और मैंने लक्ष्मी आंटी के अगले उठने पर अपने भाले को सीधा कर दिया।

"आह… मां… उन्मम…", के साथ लक्ष्मी आंटी ने अपनी गरमी में मुझे अपनाया।

मैंने लक्ष्मी आंटी को उठकर चोदते हुए विक्की को देखा। विक्की बेडरूम में से lubricant jel को अपने लौड़े पर लगाते हुए लक्ष्मी आंटी के पीछे आ गया। लक्ष्मी आंटी की अगली उठा पटख पर विक्की पीछे से तैयार था।

"आह… हा… हा… अनहह… विक्की बाबू… मैं आप… आह… का इंतजार … उन्म… कर रही… ऊंह… थी। हा… चोदो मुझे!", लक्ष्मी आंटी ने चुदाते हुए कहा।

हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को जम कर अपने लौड़ों पर उठाकर पटखा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी होटों को मेरे होटों पर दबाते हुए मुझे अपनी सारी चीखें खिला दी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी और मेरे बीच हाथ डालकर लक्ष्मी आंटी के मम्मे दबा कर पकड़े।

हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को चोदने की दौड़ लगाई। हमेशा कि लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ ने अपने लौड़े को ऐसा निचोड़ा की विक्की ने कांपते हुए लक्ष्मी आंटी की गांड़ को अपने लौड़े पर खींच कर दबाया। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की गांड़ में अपना रस छोड़ा और लक्ष्मी आंटी भी झड़ने लगी। उन दोनों के कामसुख का मजा लेते हुए मैंने भी अपनी तोप चला दी।

हम सब ऐसे ही थोड़ी देर सोफे पर बैठ गए और अपनी फुली सांसों को काबू किया। मैंने लक्ष्मी आंटी को टेबल पर रखा पानी पिलाया और उसने अपनी प्यास बुझाने के बाद हमें बॉटल दी। हम दोनों ने पानी पिया तब तक लक्ष्मी आंटी ने उठ कर गाउन पहना और कहा,

"आप दोनों तो किसी औरत को सुख से मार दोगे। चलो अभी दो घंटे पढ़ाई करने के बाद ही कोई भी भूख मिटेगी।"

लक्ष्मी आंटी ने किचन में जाते हुए satin gown को उपर उठते हुए अपनी रसीली टपकती गांड़ दिखाते हुए कहा और चली गई।

"आज रात इसे सोने देंगे। कल Mr. शास्त्री सुबह 8 बजे सर पर बैठेंगे। शुक्रवार रात को देखते हैं।"

विक्की ने सर हिलाकर हां कहा और हम पढ़ाई करने लगे। थोड़ी देर बाद लक्ष्मी आंटी भी बाहर आकर हॉल में बैठ गई और अपनी किताब से पढ़ने लगी।

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40

विक्की

दो घंटे तक हम सब ने मन लगाकर पढ़ाई की और फिर लक्ष्मी आंटी किचन में खाना गरम करने चली गई। थोड़ी देर बाद लक्ष्मी आंटी ने किचन से बाहर झांकते हुए पूछा कि खाना कब परोसना है?

हम दोनों ने हाथ मुंह फिर से धोए और लक्ष्मी आंटी को खाना परोसने को कहा। लक्ष्मी आंटी ने सब के लिए खाना परोसा और हम ने खाना खाते हुए लक्ष्मी आंटी को उसकी पढ़ाई के बारे में पूछा।

लक्ष्मी आंटी ने शर्माकर कहा कि कुछ साल बीच में जाने के कारण थोड़ी देर लग रही है। लक्ष्मी आंटी को डर था कि उसे आज वापस भेज दिया जाएगा और इसलिए उसने दोपहर को ही हमारे लिए खाना बनाया था। कल से वह दोपहर को पढ़ाई करेगी और शाम को हमारे आने के बाद खाना बनाएगी। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को पढ़ाई में मदद करने का वादा किया।

खाने के बाद हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी के मना करने पर भी उसे साफ सफाई में हाथ बटाया और काम ख़तम होने पर नहाने चले गए। हम दोनों नहाकर बाहर आए तो लक्ष्मी आंटी ने हमें बेडरूम में इंतजार करने को कहा और नहाने चली गई। हम दोनों ने बेडरूम में जा कर बत्तियां बुझा दी और बेसब्री से लक्ष्मी आंटी का इंतजार करने लगे।

बाथरूम में से पानी की आवाज बन्द हो गई और अंधेरे में से एक एक कदम हॉल में आया। हॉल में बत्ती जली और लक्ष्मी आंटी की मोहनी मूर्ति बेडरूम के दरवाजे में नजर आई। लक्ष्मी आंटी के पीछे उजाला था और आगे अंधेरा था। इसलिए हम दोनों को गीले बालों से satin में अर्ध पारदर्शी gown में रती की मोहक छवि नजर आई। लक्ष्मी आंटी ये जानती थी कि हम दोनों पर क्या असर होगा क्योकि वह वहीं खड़ी हो गई।

अब लक्ष्मी आंटी ने अपनी बाहों को फैलकर दरवाजे के दोनों तरफ छुआ और अपने आप को दरवाजे के बीच लाया। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से अपनी गिली जुल्फें चेहरे से पीछे लेते हुए अपने कामुक बदन की झलक दिखाई। लक्ष्मी आंटी ने फिर अपने हाथों से अपने गले पर बने पाशवी प्रणय के निशानों को सहलाते हुए हमें तड़पाया। लक्ष्मी आंटी के हाथ धीरे धीरे नीचे सरकते हुए उसके मम्मे दबाने लगे। कोई औरत अपने बदन को सहलाते हुए इतना तड़पा सकती है यह बात हमें अब समझ आई। लक्ष्मी आंटी ने अपने हाथ और नीचे लाते हुए अपने पेट पर satin gown को लगाते हुए अपनी उंगलियों को गाउन के डोर में फंसाया।

लक्ष्मी आंटी ने अपनी बाहें खोली और गाउन का डोर खुल गया। लक्ष्मी आंटी ने अपने कंधे गोल घुमाए तो लक्ष्मी आंटी के संगमरमरी बदन से satin के परदे का फिसलना तय था। लक्ष्मी आंटी ने एक ओर मुड़कर घुटनों को सीधे रखते हुए नीचे गिर gown उठाया।

अगर 3 घंटे पहले लक्ष्मी आंटी ने राहत नहीं दी होती तो हमारे गोटे फटकर बेड पर हमारा रस फैला चुके होते। हम दोनों मंत्रमुग्ध हो कर रती के यौवन का छलकता प्याला देख रहे थे।

लक्ष्मी आंटी ने अपने satin gown को हॉल के सोफे पर उड़ाया और एक ओर मुड़कर खड़ी हो गई। लक्ष्मी आंटी का एक हाथ उसकी पीठ पर उपर होते हुए satin ब्रा की निचली गांठ को लगा। दो उंगलियों से गांठ को खींच कर छुड़ाने के बाद वह हाथ नीचे गया। दूसरे हाथ ने बालों को कंधों पर लेते हुए गले के पीछे की गांठ खींचकर खोली। उंगलियों से छूटते ही लक्ष्मी आंटी की satin ब्रा नीचे गिर गई।

लक्ष्मी आंटी ने दुबारा झुककर जब अपनी ब्रा उठाई तो उसके जुलते गोलों पर जड़ी बेरीयां साफ नजर आई। लक्ष्मी आंटी ने हमारी ओर पीठ करके ब्रा को गाउन के साथ रख दिया। लक्ष्मी आंटी ने वैसे ही खड़े होकर कमर में थोड़ी झुक गई। लक्ष्मी आंटी के हाथ उसके घुटनों के से उपर उसकी जांघों को सहलाते हुए satin पैंटी कि कमर में लगी गांठों को लगे। दोनों हाथों की दो दो उंगलियों से दोनों ओर के डोर खींच लिए। लक्ष्मी आंटी नहीं जानती थी कि हम दोनों ने बिना बोले एक दूसरे से बात कर ली थी।

दोनों ओर की गांठें खुल गई और satin की वह गीली पैंटी लक्ष्मी आंटी की उंगलियों में झूलने लगी।

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "बाबू आप दोनों तो… आह!!! मां!!!…"

मैंने झुकी हुई लक्ष्मी आंटी की रस भरी योनि में अपना लिंग भर दिया और बिना वक्त गंवाए उसकी तेज चुदाई करने लगा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से दरवाजे के दोनों छोर पकड़ कर अपनी चुदाई के लुफ्त उठाने लगी।

मैंने आगे बढ़कर लक्ष्मी आंटी के बाल पकड़ लिए और उन्हें खींच कर लक्ष्मी आंटी को थोड़ा उठाया। लक्ष्मी आंटी के उठने से लक्ष्मी आंटी की चूत में रगड़ते मेरे सुपाड़े की दिशा बदली और लक्ष्मी आंटी के G-spot में झनझनाहट हुई। लक्ष्मी आंटी ने अपनी चूत में मुझे कस कर पकड़ लिया और रस की फुहार उड़ाते हुए झड़ने लगी। लक्ष्मी आंटी के डांस से उत्तेजित मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी की कोख में ठूंस कर झड़ने लगा।

लक्ष्मी आंटी ने दरवाजे पर अपनी पकड़ ढीली कर दी और नीचे घुटनों पर बैठ गई। मैंने लक्ष्मी आंटी को उठाया और बेड की ओर ले गया। लक्ष्मी आंटी थक कर चूर बेड पर पेट ओर जमीन पर पैर रखकर लेट गई। लक्ष्मी आंटी के फैले हुए पैरों के बीच में मेरा रस टपक कर जमीन पर दाग बना रहा था। लक्ष्मी आंटी ने अपनी आंखे खोली और मेरी ओर देख मुस्कुराई। मैंने लक्ष्मी आंटी के बालों को पीछे कर के अपने होंठों को उसके होठों पर लगाया।

लक्ष्मी आंटी ने मुझे चूमने से पीछे ध्यान नहीं दिया। सन्नी ने अपने लौड़े को वेसलीन से पूरा पोत लिया था और उसकी नजर लक्ष्मी आंटी की तंग गली पर थी। लक्ष्मी आंटी ने अपना चुंबन तोड़कर मुझे पूछा,

"सन्नी बाबू? वोह… आह… सन्नी… बाबू!!! अन्ह… हा……"

सन्नी ने अपने भाले की जड़ को लक्ष्मी आंटी की गांड़ में दबाते हुए उसे अपने प्यार का पूरा नाप दिया। वेसलीन और लक्ष्मी आंटी को इस चुदाई की आदत हो जाने के कारण सन्नी अपना काम पूरा कर पाया था। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के कंधे पकड़ लिए और अपने लौड़े को आगे पीछे करते हुए तेज धक्के लगाने लगा। लक्ष्मी आंटी ने बड़ी ही आसानी से अब सन्नी के हर धक्के का साथ देना शुरू किया।

सन्नी लक्ष्मी आंटी की गांड़ मारते हुए उसे बता रहा था कि वह उसे कैसे रात भर तड़पाएगा। लक्ष्मी आंटी भी उसे साथ देते हुए उकसा रही थी कि वह और ज्यादा जोर से और तेज धक्कों से उसे चोदे। लक्ष्मी आंटी के उकसाने के बाद सन्नी के साथ मै भी गरमाने लगा। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को बेड पर दबाते हुए उसकी गांड़ कि गहराई में अपना पानी छोड़ दिया और खुद बाहर निकल आया।

लक्ष्मी आंटी अपनी चूत और गांड से गरम वीर्य टपकाते हुए बेड के किनारे पड़ी थी कि सन्नी बेड के सिरहाने बैठ गया। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को खींच कर बेड पर ऐसे लिटाया कि पेट के बल लेटी लक्ष्मी आंटी के मुंह में सन्नी का लंबा चिकना लौड़ा था। मुंह भरा हुआ हो तो बातें नहीं करते इस बात को स्वीकार कर लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ में डुबकी लगाकर आए हुए लौड़े को अच्छे से चूस कर साफ़ करने लगी। खींच कर बेड पर लाते हुए लक्ष्मी आंटी के पैर अब जुड़ जाए थे। उसकी गदराई गांड़ और चिकने बदन ने मुझे बुलाया और मैं खींचा चला गया। लक्ष्मी आंटी के घुटनों के बगल में अपने घुटनों को रख कर मै लक्ष्मी आंटी की पीठ पर लेट गया।

मेरे मूसल का सुपाड़ा लक्ष्मी आंटी की गांड़ के सुराख पर दब गया तो लक्ष्मी आंटी ने अपना सर उठा कर,

"विक्की बाबू!!" की गुहार लगाई।

क्या लक्ष्मी आंटी चाहती थी कि मैं उसकी गांड़ मारूं या गांड़ नहीं मारूं?

समझदार लोग हमेशा दूसरों के भलाई की बात सोचते हैं। इसलिए मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ में अपना लौड़ा पेल दिया। सन्नी के लौड़े पर अपना मुंह दबाकर चीखते हुए लक्ष्मी आंटी ने अपने पैर फैलाने की कोशिश की। मेरे घुटनों ने लक्ष्मी आंटी के पैरों को दबोच लिया था और उसकी वीर्य से लबालब भरी गांड़ को दबाकर पतली बना दिया था। वेसलीन, वीर्य और लक्ष्मी आंटी की अंदरूनी चिकनाहट से लक्ष्मी आंटी की गांड़ मारते हुए मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। लक्ष्मी आंटी का सर सन्नी ने अपने लौड़े पर दबा दिया और मुझे देख कर सन्नी ने आंख मारी।

अभी अभी तो मै झड़ा था और लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ को काफी देर चोदना बाकी था। मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ उसी अंदाज में मारते हुए उसे बता रहा था कि उसकी गांड़ मुझे कितना सुख दे रही है। लक्ष्मी आंटी भी कराहकर सन्नी का लंबा लौड़ा चूसते हुए अपनी गांड़ को दबाकर मुझे साथ दे रही थी। मैंने लक्ष्मी आंटी की पीठ को सहला कर चूमते हुए उसकी गांड़ मारना जारी रखा।

लक्ष्मी आंटी को चोदते हुए सन्नी का लौड़ा देखना मुझे रास नहीं आ रहा था और शायद यही तकलीफ सन्नी को भी थी।

सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के मुंह से अपना लौड़ा बाहर निकाला और बगल में लेट कर लक्ष्मी आंटी को चूमने लगा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से सन्नी का हथियार सहलाते हुए तयार रखा जब मैंने अपने लौड़े के धक्के का जोर बढ़ा दिया। लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ में अपना रस छोड़ कर मैं लक्ष्मी आंटी के उपर से सरक गया।

इस से पहले कि सन्नी लक्ष्मी आंटी को पकड़ लेता लक्ष्मी आंटी बोली,

"बाबू आप दोनों को सुबह जल्दी उठना चाहिए इस लिए अब आप दोनों सो जाओ। बाकी का खेल कल सुबह खेलेंगे।"

सन्नी ने शिकायद की तो लक्ष्मी आंटी ने उसे पीठ पर लिटाकर उस पर चढ गई। लक्ष्मी आंटी ने अपनी थुंक से सन्नी का लौड़ा गीला कर दिया और खुद उसके लौड़े को अपनी योनी मुख पर रगड़ने लगी। कुछ ही पल में सन्नी के लौड़े पर थुंक, वीर्य और स्त्री उत्तेजना का काम रस मल दिया गया। लक्ष्मी आंटी ने अब सन्नी के लौड़े पर अपना वजन रखा और सन्नी के लौड़े ने लक्ष्मी आंटी की गरमी का नाप लिया। सन्नी आराम से लेट कर लक्ष्मी आंटी के मज़े ले रहा था और लक्ष्मी आंटी भी अपनी मर्जी से अपनी ताल पर चुदाने में व्यस्त हो गई थी। लक्ष्मी आंटी झडते हुए चुदा रही थी और चुदाते हुए झड रही थी।

रात के अंधेरे में यौन सुख की किलकारियों के बीच हम सब की कामक्रीड़ा कब खत्म हुई और कब सोए किसी को पता नहीं चला।

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सन्नी

कराहने की आवाज़ से मेरी नींद खुली। मैंने देखा कि लक्ष्मी आंटी ने विक्की के लौड़े को अपनी चूत में भर लिया था और वह विक्की कि घुड़सवारी करने में लगी हुई थी। विक्की कि आंखें ऐसी खुली थी कि वह समझ नहीं पा रहा था कि लक्ष्मी आंटी के साथ मिलने वाले मज़े सच है या सपना। मैं लक्ष्मी आंटी को चूधता देख पूरा तन गया और मैंने बेड़पर खड़े होकर अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी के मुंह में भर दिया। लक्ष्मी आंटी ने विक्की से चुदाते हुए मुझे चुसा। हर बार लक्ष्मी आंटी अपनी कमर को उठाती तो वह मेरा लौड़ा गले तक निगल लेती। विक्की को अपने अंदर रखते हुए नीचे बैठ जाती तो लक्ष्मी आंटी के मुंह में मेरा सुपाड़ा बाकी रहता।

विक्की कि नींद उड़ गई और उसने लक्ष्मी आंटी के गोले दबाते हुए उसकी उत्तजना बढ़ाने लगा। मैंने लक्ष्मी आंटी के गले को चोदते हुए अपने लौड़े को अच्छे से गीला कर दिया और पीछे हट गया। मेरा लौड़ा हटते ही लक्ष्मी आंटी झुककर विक्की को चूमने लगी।

मैंने लक्ष्मी आंटी के पीछे जाते हुए अपने आप को सही दिशा में बना लिया और ताल पकड़ कर आगे बढ़ा।

"मां… आह… हां… हां… हां…", की चीखों के साथ लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ में मेरा स्वागत किया। लक्ष्मी आंटी ने विक्की से लिपट कर कमर हिलाकर चुधना चालू रखा। लक्ष्मी आंटी खुद ही अपनी चूत और गांड़ चूधवा रही थी और हम दोनों सुबह के morning wood का सही मज़ा उठा रहे थे।

"हनः… अन्ह… आनः… ऊंह… अम्हह… आह… हन… अन्ह…", करते हुए लक्ष्मी आंटी पूरे जोश में अपनी गांड़ मरवा रही थी। विक्की लक्ष्मी आंटी की चूचियों को दबाने, चूमते और चूसते हुए अपनी बढ़ती बेताबी बता रहा था तो मैंने लक्ष्मी आंटी के ताल से अपनी ताल बनते हुए उसे और जोर से चोदने लगा।

लक्ष्मी आंटी के इस सरप्राईज से खुश हो कर हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी के दोनों छेद हमारे प्रेम रस से लबालब भर दिए। लक्ष्मी आंटी हम दोनों के बीच लेटी हुई अपनी कोख और आतों में जमा हमारी गीली गरमी को महसूस करते हुए सुस्ताने लगी। लक्ष्मी आंटी की पीठ को सहलाकर चूमते हुए मेरा लौड़ा फिर से फूलने लगा और विक्की के लौड़े की बढ़ती सख्ती भी मुझे और लक्ष्मी आंटी को महसूस हुई।

लक्ष्मी आंटी ने एक ओर मुड़कर हम दोनों को गिरा दिया और कहा,

"उफ्फ… आप दोनों बाबू तो किसीको अपने प्यार से मारोगे। हटो…!!"

लक्ष्मी आंटी बेड से उठ कर बाहर भागी तो हम दोनों उसके पीछे पीछे हॉल में गए। लक्ष्मी आंटी ने हमें फ्रेश होने को कहा और बोली,

"मैं जानती हूं कि आप दोनों को मेरे दोनों छेद पसंद है पर अगली बारी दोपहर को खाना खाने के बाद। अब चलो तयार हो जाओ तब तक मैं नाश्ता लगा देती हूं।"

लक्ष्मी आंटी ने सिर्फ satin gown को पहना और किचन में चली गई। हम दोनों तयार हो गए और लक्ष्मी आंटी ने परोसा हुआ नाश्ता करके कॉलेज के लिए निकले। लक्ष्मी आंटी ने किसी माशूका की तरह दरवाजे में हमें चूमकर दोपहर के खेल का वादा करते हुए हमें गले लगाया। मेरी उंगलियों ने लक्ष्मी आंटी के पैरों के बीच में उसकी जांघों को सहलाने पर वहां हमारे रस की धारा को छुआ। लक्ष्मी आंटी को देखते हुए मैंने उसे चाटा तो लक्ष्मी आंटी शर्माकर अंदर भाग गई।

मैं और विक्की हंसते हुए कॉलेज के लिए निकले।

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विक्की

"सन्नी, रीटा से बच के रहना। जब वो तुझसे चिपक रही थी तब अमित ने मुझे बताया कि उसके क्लासेस के एक लडके की वह गर्ल फ्रेंड हुआ करती थी। उसे इस्तमाल करके फेंक दिया और यहां वह किसी और को ढूंढ रही है।"

सन्नी ने दरवाजा खोलते हुए कहा, "हां, मैं उसे पहले ही दिन पहचान गया था। वह आदमखोर बाघिन है। पहले बुलाकर खेलेगी और फिर खा कर हड्डियां छोड़ जायेगी।"

अंदर देखा तो लक्ष्मी आंटी की किताबें खुली पड़ी थी और लक्ष्मी आंटी किचन में खाना बनाने में व्यस्त थी। लक्ष्मी आंटी ने न केवल हमारा खयाल रखा था पर हमें रीटा जैसी आदमखोर से भी बचाया था। मन में लगा कि शायद हम सब अब भी उसके सपनों को नजर अंदाज कर रहे हैं। मेरी नजरें देख सन्नी भी मेरा इशारा समझ गया।

लक्ष्मी आंटी ने किचन से बाहर झांक कर देखा और कहा,

"अरे बाबू आप दोनों आ गए! चलो खाना खा लो, अभी गरमा गरम परोस देती हूं।"

हम दोनों ने अपने हाथ मुंह धोकर मेज पर बैठे और लक्ष्मी आंटी को भी अपने साथ खाना खाने के लिए कहा। लक्ष्मी आंटी से बातें करते हुए हमारा मन हलका हो गया। लक्ष्मी आंटी ने सन्नी और मुझे रीटा से दूरी बनाने के लिए कहा। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को कहा कि हम दोनों ने वादा किया था और हम दोनों अपना वादा पूरा करेंगे। खाना खाते हुए मैंने लक्ष्मी आंटी से उसकी पढ़ाई के बारे में पूछा तो उसने कहा कि जैसा वक्त मिले वह अपनी पढ़ाई कर रही है। मैंने और सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को इस बारे में ज्यादा नहीं बोला। लक्ष्मी आंटी के कारण हमारा खाना 15 मिनट में हो गया। हम दोनों ने हाथ धोते हुए कुछ बातें तय की और हॉल में आ गए। लक्ष्मी आंटी शरमाते हुए हॉल में हमारे हमले के इंतजार में थी।

दिल पर पत्थर रख कर हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी से कहा कि हमें कॉलेज के लिए तुरंत जाना होगा। लक्ष्मी आंटी ने सर झुकाकर हां कहा और हम दोनों अपनी बैग उठाकर चल पड़े। बिल्डिंग के नीचे से सन्नी ने मम्मियों ने दिए हुए कार्ड पर छपे नंबर पर फोन किया और उसे मिलने गए।

शाम को कॉलेज से आते हुए हम दोनों को थोड़ी देर लग गई तो लक्ष्मी आंटी बेचैन हो गई। हमारे आते लक्ष्मी आंटी ने देरी की वजह पूछी। जवाब में सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को एक थैली दी। थैली में लक्ष्मी आंटी को दो हलके नीले रंग के टॉप और 2 भुरी पैंट मिली।

"बाबू एक ही रंग के दो जोड़ी क्यों लाए? वैसे भी आप के साथ मैंने काफी अच्छे कपडे लाए हैं। इसकी कोई जरूरत नहीं थी।", लक्ष्मी आंटी ने उन बेजान रंगो को देखते हुए कहा।

"इनकी जरूरत पड़ेगी और उसकी वजह अब भी थैली में है।"

लक्ष्मी आंटी ने थैली को ठीक से देखा तो अंदर से प्लास्टिक का एक कार्ड निकला। लक्ष्मी आंटी कार्ड पर छपे अक्षर पढ़ते हुए जमीन पर बैठ गई। जब लक्ष्मी आंटी ने सर उठाकर हमारी ओर देखा तो उसकी आंखों में आंसू भर आए थे। लक्ष्मी आंटी ने उस कार्ड को अपने सीने से लगा कर हमें खुशी के आसुओं से देखा।

सन्नी बोल पड़ा, "नहीं, हमें कुछ मत कहना। प्रतीक ने तुम्हारे कागजात मम्मियों के पास दिए थे और यहां से जाते हुए सारे इंतजाम मम्मियां कर के गई थी। हम ने बस फॉर्म भरने और कपड़े लाने का काम किया है।"

लक्ष्मी आंटी के गले से अचरज की आवाज निकली, "मैं कॉलेज जाऊंगी। मैं भी पढ़ाई करूंगी। अब ऐसे खड़े मत रहो!!"

लक्ष्मी आंटी ने दौड़ते हुए हमें गले लगाया और हम दोनों को चूमने लगी।

मैंने लक्ष्मी आंटी को दूर करते हुए कहा, "लक्ष्मी आंटी, जल्दी से मुंह धो लो। प्रतीक थोड़ी ही देर में कंप्यूटर पर कॉल करेगा। उसे नहीं बताओगी?"

लक्ष्मी आंटी ने जल्दी से अपना चेहरा धोया, हमें चाय बिस्किट देते हुए पढ़ाई करने को कहा और थैली ले कर बेडरूम में भागी। लक्ष्मी आंटी ने कॉलेज के नीले टॉप और भुरी पैंट के uniform में प्रतीक से काफी देर तक बातें की और फिर बड़ी खुशी से रात का खाना बनाने में जुट गई।

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विक्की

शाम को लक्ष्मी आंटी बहुत खुश थी और उसने हमें खाना परोसा तो हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी से बात करने के लिए उसे हमारे साथ बिठाया।

सन्नी, "लक्ष्मी आंटी, हम सब ने, मतलब हम दोनों, मम्मियां और प्रतीक ने तुम्हारे कॉलेज के दाखिले का काम किया है पर आगे सब तुम्हें करना होगा। 6 महीने में 12 वी कक्षा की परीक्षा होगी। उसकी पढ़ाई के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। क्या तुम तैयार हो?"

लक्ष्मी आंटी ने निश्चय से कहा, "हां बाबू। मैं अच्छे नंबर ला कर सब को दिखाऊंगी की मैं आप सब के विश्वास के काबिल हूं।"

"लक्ष्मी आंटी, ये आसान नहीं होगा। तुम्हारा कॉलेज हमारे साथ शुरू होता है और हम दोपहर को खाना खाने आएंगे तब तक चलेगा। साथ ही पूरे साल की पढ़ाई 6 महीने में करनी पड़ेगी। घर के काम करके इतना सब कुछ नहीं हो पाएगा।"

अपना सपना हाथों से फिसलता देख लक्ष्मी आंटी उदास हो गई। उसने कहा,

"बाबू आप चिंता मत करो। मैं सब संभाल लूंगी। मुझे जल्दी उठने की आदत है। मैं सब तयारी करके जाऊंगी। दोपहर के खाने के लिए कोई तकलीफ़ नहीं होगी और शाम का खाना पकाते हुए अपनी पढ़ाई कर लूंगी। मैं कर सकती हूं बाबू। मुझे एक मौका दो।"

लक्ष्मी आंटी ने गिड़गिड़ाते हुए कहा तो मैंने उसे अपनी बाहों में लिया और उसके बाल चूमते हुए कहा,

"अरे बुद्दु, हमारा मतलब ये नहीं है। हम दोनों ने तय किया है कि अब से घर में तुम्हारा काम कम किया जाएगा। सुबह और शाम खाना बनाने की जगह सिर्फ एक बार खाना पकाने का काम किया जाएगा, कपड़े दो दिन में एक बार धोए जाएंगे और बरतन मांजे और बाकी कामों में हम दोनों तुम्हारा हाथ बटाएंगे। कॉलेज की टीचर इसी building में रहती हैं और उनके पास रोज दोपहर को जाकर 2 घंटे पढ़ाई करने से सीखना आसान होगा। प्रतीक ने तुम्हारी पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी ली है। हम दोनों बस मदद कर रहे हैं।"

लक्ष्मी आंटी ने अपनी समझदारी दिखाते हुए हमारी मदद कुबूल की और हमें अपने गले लगाकर शुक्रिया कहा। हम सब बिना कुछ कहे बेडरूम में गए और एक दूसरे को नंगा करते हुए हमने अपने प्यार का इजहार किया। हम दोनों के प्यार से खुश होकर लक्ष्मी आंटी हम दोनों के बीच में खुशी खुशी सो गई।

सुबह 5 बजे लक्ष्मी आंटी ने उठकर पूरे दिन की तैयारी शुरू कर दी। सुबह 6 बजे तक लक्ष्मी आंटी ने रोटी, सब्जी और नाश्ता बना दिया था और वह अपनी कॉलेज के पहले दिन की तैयारी में जुट गई। हम दोनों फ्रेश होकर हॉल में आए तो लक्ष्मी आंटी ने हमें नाश्ता परोसा। हमारे कहने पर लक्ष्मी आंटी ने भी नाश्ता किया। मैंने लक्ष्मी आंटी से कहा कि उसने हमें अभी तक अपना कॉलेज uniform पहनकर नहीं दिखाया तो लक्ष्मी आंटी किसी चुलबुली लड़की की तरह नया यूनिफॉर्म पहनने के लिए भागी।

लक्ष्मी आंटी हलका नीला टॉप और भुरी पैंट पहन कर बाहर आई तो मेरा गला सूख गया। यह यूनिफॉर्म 16-17 साल की नवयुवतियों के लिए बना था, पकी हुई कहर ढाती औरतों के लिए नहीं। लक्ष्मी आंटी को इन कपड़ों में अपने रूप के असर का कोई अंदाज नहीं था। एक हाथ में किताबों की बैग और दूसरा कमर पर रख कर लक्ष्मी आंटी ने पूछा,

"कैसी लग रही हूं? बिल्कुल किसी कॉलेज गर्ल जैसी?"

सन्नी ने बड़ी मुश्किल से पूछा, "कॉलेज गर्ल ऐसे दिखती है ये पता कैसे चला?"

लक्ष्मी आंटी ने भोले मन से कहा, "हमारे गांव में एक आदमी जीप में थिएटर लाता था। वह फिल्म देखने गांव के सारे मर्द जाते थे। उसके पोस्टर पर ऐसी ही लड़की थी जिसे कॉलेज गर्ल कहते थे।"

"लक्ष्मी आंटी, मुझे लगता है कि कॉलेज के कुछ नियम हमें समझाने पड़ेंगे।यहां आओ और हमारे सामने खड़ी हो जाओ।"

लक्ष्मी आंटी ने अपनी बैग मेज पर रखी और हमारे सामने खड़ी हो गई।

सन्नी ने कहा, "लक्ष्मी आंटी, फिल्मों में जो होता है वह असलियत में नहीं होता ना? फिल्म के पोस्टर कि तरह तुमने कपड़े पहने हैं पर फिल्म में क्या है यह पता है?"

लक्ष्मी आंटी ने सर हिलाकर ना कहा, "हमारे गांव में औरतें फिल्म नहीं देखती थी। फिल्म में क्या है?"

"शुरुवात कुछ ऐसी है कि लड़की बिल्कुल ऐसे ही कॉलेज जाती है। टॉप के ऊपर से 2 बटन खुले और बाकी टॉप को पैंट में इन कर के। कॉलेज के गेट पर ही लडके उसपर मरने लगते हैं तो लड़कियां जलने लगती हैं। क्लास में मास्टर ने लड़की को एक नजर देख कर ही head master को मिलने भेज देता है। फिर हेड मास्टर (लक्ष्मी आंटी के सोफे पर बैठा कर खुद खड़े होते हुए) लड़की को सोफे पर बैठा कर समझता है कि लड़कियां यूनिफॉर्म ऐसे पहनेंगी तो कॉलेज के नियम का उललघंन होगा।"

सन्नी ने कहा, "क्लास मास्टर भी आ गया और उसने कहा कि यूनिफॉर्म को ठीक से कैसे पहनना चाहिए यह अब हमें बताना होगा। क्लास मास्टर ने…”

सन्नी ने पीछे से लक्ष्मी आंटी का मुंह दबाया और हाथ पकड़े। मैंने लक्ष्मी आंटी की टॉप के सारे बटन खोल कर उसकी ब्रा में कैद चूचियों को दबाने लगा। लक्ष्मी आंटी ने पैर पठखते हुए अपने आप को छुड़ाने की कोशिश की पर दो मर्दों की हवस उस पर भारी पड़ी। मैंने लक्ष्मी आंटी कि पैंट की बटन खोल कर उसकी पैंटी के साथ ही सब कुछ खींच कर उतारा। सन्नी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने सर हिलाकर हां कहा। सन्नी लक्ष्मी आंटी के नंगे बदन पर लेट गया और मैंने उसकी भी पैंट और अंडरवियर उतार दी।

लक्ष्मी आंटी ने सर हिलाकर अपने हाथों को छुड़ाने की कोशिश की पर सन्नी ने तब तक निशाना साधते हुए अपने लौड़े को कॉलेज गर्ल लक्ष्मी की चूत में पेल दिया। लक्ष्मी की चीख को सन्नी के हथेली ने रोक दिया। लक्ष्मी के पैर सन्नी के दोनों ओर बेबस झटक कर उसे दूर करने की विफल कोशिश कर रहे थे।

मैंने उपर होते हुए लक्ष्मी के हाथ पकड़ लिए तो सन्नी ने लक्ष्मी को चूमते हुए अपने हाथ को नीचे किया। सन्नी ने लक्ष्मी की चीखों को निगलते हुए उसकी ब्रा खोली और लक्ष्मी के मंम्मों को कस कर पकड़ते हुए उसकी चूत में अपना लौड़ा पेलने लगा। लक्ष्मी ने अपने हाथ छुड़ाने की कई कोशिशें की पर मैंने लक्ष्मी को नहीं छोड़ा।

"बस, बस लक्ष्मी। अब तुम सीख गई ना ऐसे यूनिफॉर्म पहनने से क्या होता है? हम दोनों तो तुम्हारी भलाई के लिए ये सब कर रहे हैं।", कहते हुए मैंने लक्ष्मी आंटी के मुंह पर हाथ रख दिया। सन्नी ने लक्ष्मी के कंधे दबाते हुए उठकर उसे चोदने लगा। लक्ष्मी की छटपटाहट अब भी जारी थी जब सन्नी के लौड़े ने तेज धक्के देने शुरू किए। आगे क्या होगा यह पहचानकर लक्ष्मी ने पूरे जोर से बचने की कोशिश की और सन्नी ने लक्ष्मी की कोख में अपना रस उड़ेल दिया।

सन्नी लक्ष्मी पर से उठ गया तो लक्ष्मी का बदन कांप रहा था। लक्ष्मी ने अपने पैरों को साथ लाते हुए अपनी चूचियों को हाथों से ढक दिया। मैंने लक्ष्मी के सर पर चूमते हुए उसके कान में कहा,

"टॉप के बटन बंद रखने से पैंट के बटन की हिफाजत होती है।"

लक्ष्मी ने सर झकाकर हां कहा और अपने कपड़े ढूंढने लगी। लक्ष्मी नीचे पड़ी पैंट को उठाने के लिए झुकी और उसकी गदराई मस्त गांड़ पर मेरी नजर जड़ गई। मैंने झट से अपने लौड़े को अपने हाथों में लिया और लक्ष्मी आंटी की चिकनी चूत में पेल दिया।

"आह… नहीं… रुक जाओ… बस करो…", लक्ष्मी हर ठाप के साथ कह रही थी पर उसे पता चलने से पहले मेरा चिकनाहट में लिपटा लौड़ा उसकी चूत में से बाहर निकल कर अपने सही निशाने पर जा लगा।

"मां!!! आह… अन्ह… हा… नहीं… रुको ना… आह… आः…", लक्ष्मी की आहो ने पूरा कमरा भर दिया। सन्नी ने लक्ष्मी के साथ बैठते हुए उसके होंठों को चूम कर उसकी आहें दबा दी और एक हाथ उसकी चूत पर रख कर उसे छेड़ने लगा। लक्ष्मी जल्द ही गरम हो कर झडने लगी। मैंने लक्ष्मी की गांड़ मारते हुए उसे कंधे पकड़ कर सीधा कर दिया और सन्नी को लक्ष्मी की चूत में उंगलियां दौड़ाने की सलाह दी। सन्नी ने अपनी उंगलियों को मोड़ कर अंदर डाल दिया और हिलाने लगा। लक्ष्मी की योनी में छुपा G-spot हरकत में आते ही लक्ष्मी तड़पने लगी। लक्ष्मी के रसों की बौछार में सन्नी का हाथ भीग गया और लक्ष्मी के नाखून सन्नी के कंधों में धस गए। लक्ष्मी इस तरह झडने लगी कि मेरा लौड़ा निचोड़ लिया गया। मेरे गरम वीर्य से लक्ष्मी की आतें रंग दी गई और मैं लक्ष्मी को अपने लौड़े पर बिठाकर हांफने लगा।

हालांकि सन्नी रुक गया था पर लक्ष्मी का झडना अब भी रुक रुक कर चल रहा था। आखिर में लक्ष्मी रुक गई और उसने अपने आप को मेरे लौड़े से उठाया।

सन्नी ने पूछा, "लक्ष्मी आंटी, जब मैंने अपना लौड़ा अन्दर डाला तो दर्द हुआ था?"

लक्ष्मी आंटी ने सन्नी के होंठों को चूमते हुए कहा, "नहीं तो।"

"फिर इतना चीखी क्यों?"

लक्ष्मी आंटी ने आंख मारी और कहा, "एक कुंवारी कॉलेज गर्ल को दो मर्द लूटेंगे तो वो चीखेगी ना?"

सन्नी ने हंसकर कहा, "बिल्कुल सही।"

लक्ष्मी आंटी ने अपने कपड़े उठाए और टॉयलेट की ओर निकली। मैंने लक्ष्मी आंटी को पकड़ लिया और कहा कि वह ऐसे ही कपड़े पहन कर कॉलेज जाए।

लक्ष्मी आंटी ने विरोध में कहा, "पर मेरी पैंटी में आप दोनों का रस उतर आयेगा और पूरा दिन मुझे ऐसे ही रहना होगा।"

जब लक्ष्मी आंटी ने समझ की मैं भी यही चाहता था तो उसने,

"धत् बाबू!" कहकर मेरी बात मान ली और अपने कपड़े ठीक से पहन कर तैयार हो गई।

हम सब सुबह 8 बजे से थोड़ी देर पहले घर से निकले तो सन्नी ने लक्ष्मी आंटी से पूछा,

"लक्ष्मी आंटी, आज सुबह के सरप्राईज की तरकीब कब सोची?"

लक्ष्मी आंटी ने शरमाते हुए कहा, "ये तरकीब प्रतीक जी ने कल शाम को मेरा यूनिफॉर्म देख कर बताई थी।"

हम सब हंस पड़े और मैंने देखा की लक्ष्मी आंटी की खूबसूरती यूनिफॉर्म में छुप नहीं रही थी पर अब लक्ष्मी आंटी सच में कॉलेज गर्ल लग रहा थी न कि कोई पॉर्नस्टार।

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सन्नी

शाम को हम दोनों घर लौटे तो लक्ष्मी आंटी को चिंता में बैठा पाया। खोद कर पूछा तो पता चला कि टीचर को उसके हमारे साथ रहने से शक है। हमने लक्ष्मी आंटी को विश्वास दिलाया कि जब तक हम खुद किसी को कुछ बताते नहीं तब तक शक करने से ज्यादा लोग कुछ नहीं कर सकते। वैसे भी मुंबई एक खुले विचारों का शहर है और हमें कोई परेशान नहीं करेगा।

लक्ष्मी आंटी ने हमारे बात पर सोचा और मान गई। रोज की तरह हम दोनों ने फ्रेश होकर नाश्ता किया। लक्ष्मी आंटी भी हमारे साथ पढ़ने लगी और 2 घंटे मन लगाकर पढ़ने के बाद हम सब ने खाना खाया, बरतन मांजे और सोने चले गए।

हमारी एक तय दिनचर्या बनने लगी थी और आम शादीशुदा लोगों की तरह हम भी रहने लगे। अगर आम में दो पति अपनी एक पत्नी को रोज जोड़ी में तीन बार चोदते हो। हमारे दिन बीतते गए और जल्द ही लक्ष्मी आंटी की 12वी की परीक्षा आ गई। लक्ष्मी आंटी काफी चिड़चिड़ी हो गई पर हम दोनों ने उसे संभाला।

दोनों पापा और मम्मी अक्सर मिलने आते और लक्ष्मी आंटी को कोई गलत बरताव या बोल नहीं लगाते। लक्ष्मी आंटी ने 12वी कक्षा की परीक्षा के बाद रुकना ठीक नहीं समझा और सीधे आगे की पढ़ाई में जुट गई। हम दोनों भी engineering exams में गले तक डूबे हुए थे। अक्सर तो हम सब सेक्स को दवाई या नशे की तरह अपने मन को हलका करने के लिए इसतेमाल करने लगे।

Engineering exams पूरे होने के दिन हमें पवन अंकल का कॉल आया। उन्होंने सलाह दी कि गाड़ी एक ही रास्ते पर ज्यादा देर दौड़े तो टूट सकती है इस लिए कभी कभी रास्ता बदलना जरूरी हो जाता है। मैं समझ गया और विक्की से बात कर शाम को लक्ष्मी आंटी को तयार रहने को कहा।

"हम घूमने जा रहे हैं!!"

लक्ष्मी आंटी का चेहरा खिल उठा और वह खुशी खुशी गुनगुनाते हुए घर में गई। हम दोनों भी कॉलेज में अपना इम्तिहान पूरा करने गए तो हमें अभी से खुश लग रहा था।

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विक्की

परीक्षा में जाने से पहले ही हमारा मन छुट्टी के बारे में सोच हलका हो गया था और परीक्षा अचानक से बहुत आसान लगी। दोपहर तक सब ख़तम कर के हम लक्ष्मी आंटी से मिलने भागे।

घर पहुंच कर देखा तो लक्ष्मी आंटी ने खाने के साथ और भी कई चीजें बनाई थी। जब हमने लक्ष्मी आंटी से कहा की जहां जाएंगे वहां खाने को मिलेगा तो लक्ष्मी आंटी थोड़ी उदास हो गई। उसने हमारे लिए की हुई तयारी देख मैं समझ गया कि लक्ष्मी आंटी को लगा था कि हम उसे छोड़ कर जा रहे हैं। मैंने लक्ष्मी आंटी को पीछे से अपनी बाहों में लेते हुए कहा,

"तुम्हें इतनी आसानी से नहीं छोड़ेंगे लक्ष्मी आंटी। तुम भी तयार हो जाओ। हम सब 1 घंटे में निकल रहे हैं।"

लक्ष्मी आंटी ने खुश होकर पूछा, "इतनी वक़्त की पाबंदी क्यों? अगर छुट्टी पर जाना है तो ऐसे भागा दौड़ी क्यों?"

सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की चाल पकड़ ली और कहा,

"ये सब तो वहां जाने पर ही समझ जाओगी। बस इतना बताऊंगा कि ज्यादा कपड़े लेने की कोशिश भी मत करना।"

लक्ष्मी आंटी की जिज्ञासा को शांत किए बगैर हम सब गाड़ी में बैठ गए। लक्ष्मी आंटी पीछे की सीट से आगे झांक कर देख रही थी कि हम किस ओर जा रहे हैं।

"सन्नी, याद कर की पिछली बार जब हम सब घूमने निकले थे तो लक्ष्मी आंटी कैसे चुपके से पीछे बैठकर आहें भर रही थी। एक दिन वो था और एक दिन आज है।"

लक्ष्मी आंटी, "आह हा हा!! आप दोनों ने मेरे अंदर जो झुनझुना डाल रखा था उसके बारे में भूल गए? आज भी उस बारे में सोचा तो पसीने छूट जाते हैं।"

"और चूत गीली हो जाती है, ये भी बता दो।"

हंसी मजाक में रास्ता कटने लगा और सन्नी ने लक्ष्मी आंटी से असली सवाल पूछा,

"लक्ष्मी आंटी, तुम्हें अपने गांव की याद नहीं आती?"

लक्ष्मी आंटी ने चुपके से कहा, "बाबू, वहां कोई अपना बचा हो तो उस बारे में सोच कर मतलब है। किसी दिन अगर बहुत उदास हो गई तो पहाड़ों के बीच से ढलते सूरज को याद कर अपना मन बहला लेती हूं। बाबू शहर में सब मिलता होगा पर सूरज आते और जाते हुए नहीं दिखता।"

हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को चिढ़ाते हुए उसका ध्यान भटकाया और गाड़ी पुराने मुंबई पुणे हाईवे पर लग गई। शहर को गुजरता देख लक्ष्मी आंटी खुली जमीन और हरियाली को निहारने लगी। बीच बीच में लक्ष्मी आंटी हम दोनों से हमारी मंजिल के बारे में पूछती पर अब वह भी समझ गई थी कि हम Lonavala जा रहे थे।

लक्ष्मी आंटी, "बाबू पहले बोल दिया होता कि हम Lonavala जा रहे हैं तो कुछ गरम कपड़े लाती। सुना है वहां साल भर सरदी रहती है।"

सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को एक अय्याश मुस्कान देते हुए कहा, "लक्ष्मी आंटी हम दोनों तुम्हें अंदर- बाहर आगे - पीछे से हमारी गरमी से भर देंगे।"

लक्ष्मी आंटी ने सन्नी के कंधे पर हलकी चुटकी लेते हुए कहा, "हट बदमाश!"

तभी मैंने सिग्नल दिया और गाड़ी रास्ते छोड़ कर पुराने घाट को चढ़ने लगी। बुधवार की शाम होने से यहां कोई और नहीं था।

लक्ष्मी आंटी, "बाबू, यहां हम क्यों आए हैं? यहां पर तो दूर दूर तक कोई नहीं है।"

गाड़ी से उतरते हुए मैंने कहा," लक्ष्मी आंटी, यहां पर वेताल का मंदिर है। अगर यहां किसी औरत की बली चढ़ा दी तो हम दोनों को सिद्धि मिलेगी।"

लक्ष्मी आंटी हंस पड़ी, "बाबू ये पट्टी कॉलेज की किसी लड़की को पढ़ना। बली कुंवारियों की दी जाती होगी, तीन पतियों के बीवी की नहीं।"

चलते चलते हम सब उस घाट की चोटी पर पहुंच गए थे। ढलते सूरज ने अपना रंग बदला और सह्याद्रि की पहाड़ श्रृंखला को छूने चला। दूर नीचे गाडियां इस मंत्रमुग्ध करने वाले नजारे से अंजान छोटे छोटे खिलौनों की तरह दौड़ रही थीं।

मैंने एक चादर फैलाई और सन्नी ने लक्ष्मी आंटी ने बनाई खाने की चीजें लाई। हम सब चुप रह कर ढलता सूरज देख रहे थे। इस अनुभव में शब्द बेकार ही नहीं बल्कि बोझ थे। सूरज जमीन के पीछे छिपने लगा तो लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को अपनी बाहों में लेते हुए बहती आंखों से सूरज की आखरी किरणों को देखा। हम दोनों जानते थे की लक्ष्मी आंटी के इस आलिंगन में दोस्ती और ममता के अलावा और कुछ नहीं था। हमने भी अच्छे दोस्त की तरह लक्ष्मी आंटी का साथ दिया।

सूरज ढलते ही अंधेरा छा गया और हम सब गाड़ी में बैठ गए।

लक्ष्मी आंटी ने चुपके से कहा, "बाबू, मैं नहीं बता सकती की इतने सालों बाद ये देख कर कैसा लग रहा है पर यह किसी भी तोहफे से कीमती तोहफा दिया है आप दोनों ने।"

सन्नी, "अरे लक्ष्मी आंटी, अब जब हम दोनों को तुमने इतना पूजनीय बना दिया है तो शायद हमें अपनी हवस का शिकार किसी और को बनाना पड़ेगा।"

गाड़ी में माहौल अचानक हलका हो गया जब लक्ष्मी आंटी ने आगे बढ़कर सन्नी के कान को खींचकर उसके गाल को चूम लिया। हाईवे पर लगने से पहले एक छोटा पर अच्छा होटल दिखा और हमने यहां रात गुजारना ठीक समझा।

बुधवार शाम को यहां कोई रहता नहीं और सारे कमरे खाली होते हैं। होटल मैनेजर ने कमरे का भाड़ा 1500 कहा तो मैंने लोक लाज के खातिर 2 कमरे मांगे। मैनेजर ने कहा कि होटल के नियमों के अनुसार दो मर्द एक कमरे में नहीं रह सकते। 3 कमरे लेने के बारे में सोच रहा था कि लक्ष्मी आंटी बीच में आ गई।

लक्ष्मी आंटी (मैनेजर से), "अजीब बात है! क्या एक मर्द और एक औरत एक साथ रह सकते हैं? शादीशुदा ना हो तो भी? (मैनेजर ने सर हिलाकर हां कहा) क्या एक मर्द और एक औरत के साथ उस कमरे में एक और इंसान रह सकता है? (फिर से हां) क्या दो मर्द एक दूसरे से कुछ करेंगे या एक दूसरे की इज्जत लूटेंगे? चलो हम सब एक ही कमरे में रहेंगे।"

मैंने लक्ष्मी आंटी को समझने की कोशिश करते हुए कहा, "लक्ष्मी आंटी, अगर यहां…"

लक्ष्मी आंटी, "पुलिस आ गई तो क्या होगा? आप दोनों ने पिछले एक साल में मेरे साथ जबरदस्ती नहीं की तो क्या अब करोगे?"

सच में, पिछले साल में हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी से कोई जबरदस्ती नहीं की थी। जरूरत ही नहीं थी!

लक्ष्मी आंटी ने आगे कहा, "और क्या? साहब मेमसाब को बताएंगे? उन्होंने ही तो मुझे आप का खयाल रखने की जिम्मेदारी दी है। (मैनेजर से) हम सब एक ही कमरे में रहेंगे। एक चाबी दो और सुबह की चाय और नाश्ता वक़्त पर नहीं मिला तो समझ लेना।"

लक्ष्मी आंटी फिर मुड़ी और गाड़ी की ओर गई। 3 जोड़ी मरदाना आंखों ने उसके ठुमकते पिछवाड़े का दरवाजे तक पीछा किया और एक दूसरे से टकराई।

मैनेजर ने हमारी बेचैन जवानी के अधूरे सपनों पर अपनी नजरों से अफसोस दिखाते एक चाबी सौंपी। मैनेजर,

"रेस्टोरेंट में रात को veg non veg खाना मिलता है और सुबह 6 बजे से नाश्ता मिलेगा।"

हम सब अपना सामान गाड़ी से ले कर कमरे में पहुंचे। कमरे का दरवाज़ा बंद होते ही लक्ष्मी आंटी ने नटखट मुस्कान देते हुए कहा,

"कैसी रही?"

समझ नहीं आ रहा था कि लक्ष्मी आंटी के पैर पकडूं या उस बेड पर पटख दूं। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को कंधे पर उठाकर बेड पर पटक दिया और …

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