S
StoryPublisher
Guest
पूनम की दिल खोल कर चूत चुदाई
नैना हैरान होकर हंसने हुए बोली- छोटे मालिक, यह लड़की आपकी चोट की है, देख लेना यह तुमको हरा देगी.
अगले दिन पूनम और मैं जब कॉलेज पहुँचे तो मेरे एक सहपाठी मित्र मिल गए और बोले- सतीश यार, तुमने नोटिस बोर्ड देखा क्या?मैं बोला- नहीं यार, मैं तो अभी कॉलेज आया हूँ. क्या ख़ास बात लिखी है वहाँ?वो बोला- तुम देख लो तो पता चल जाएगा. यह कौन है तुम्हारे साथ?मैं बोला- यह पूनम है, मेरी कजिन मेरी ही क्लास में आई है अभी अभी!दोनों ने एक दूसरे को नमस्कार किया और फिर हम तीनों नोटिस बोर्ड पढ़ने चले गए.
वहाँ एक ट्रिप के बारे में नोटिस लगा था जो उसी महीने होना था.यह ट्रिप दिल्ली और आगरा भर्मण के बारे में था, दो रात और 3 दिन का ट्रिप था और खास तौर से इतिहास के छात्रों के लिए था, एक सौ रूपए प्रति छात्र का खर्च था, वो छात्र जो इस ट्रिप में भाग लेना चाहते थे 3 दिन में जमा करवाना था.
मैं और पूनम अपनी क्लास में पहुँचे तो वहाँ इस ट्रिप की ख़ास चर्चा हो रही थी.मैंने पूनम से कहा- तुम चलोगी क्या इस ट्रिप में?पूनम बोली- जाने की इच्छा तो है लेकिन मम्मी पापा से पूछना पड़ेगा और इतनी जल्दी पैसों का भी इंतज़ाम होना मुश्किल है तो तुम हो आओ!मैंने कहा- मैं मम्मी पापा से पूछता हूँ और तुम भी आज घर में जाकर पूछ लेना. पैसों की फ़िक्र ना करो!
बाद में पता चला कि ट्रिप की इंचार्ज निर्मला मैडम होंगी और उनका साथ एक और लेडी प्रोफ़ेसर देंगी.
शाम को घर पहुँच कर मैंने मम्मी को फ़ोन से पूछ लिया और उन्होंने कहा- चले जाओ, लेकिन हर रोज़ फ़ोन ज़रूर करते रहना.पूनम ने जब घर में पूछा तो उन्होंने कहा- क्या सतीश भी जा रहा है और पूनम ने कहा हाँ तो उन्होंने कहा ‘चली जाओ’ लेकिन अपना प्रोग्राम बताती रहना हर रोज़.
रात आई और खाना खाकर हम तीनों बैठक में बैठे दिल्ली आगरा ट्रिप की ही बात कर रहे थे.हम तीनों ने यह जगह अभी तक नहीं देखी थी तो नई जगह देखने की उत्सुकता थी लेकिन फिर मन में संशय भी था कि आपसी चुदाई कैसे हो पायेगी.
नैना ने मेरी तरफ भेदभरी नज़र से देखा और शायद वो नैनीताल ट्रिप के बारे में सोच रही थी.मैंने नैना से पूछा- वो नैनीताल ट्रिप के बारे में पूनम को बता दें क्या?वो बोली- देख लो छोटे मालिक, क्या पूनम हमारा यह राज़ रख पाएगी?
पूनम बोली- कौन सा राज़ सतीश?मैं बोला- बड़ा ही भयानक राज़ है, अगर किसी को पता चल गया तो मैं कहीं का नहीं रहूँगा, मेरी इज़्ज़त की धज्जियाँ उड़ जाएंगी.पूनम अब बहुत उत्सुक हो गई और ज़ोर देकर पूछने लगी तो मैंने कहा- कसम खाओ यह राज़ तुम किसी को नहीं बताओगी?पूनम बोली- कसम से, तुम्हारी इत्ती सी की कसम खाती हूँ.मैं और नैना दोनों हंस पड़े.
तब मैंने उसको नैनीताल ट्रिप का राज़ बताया कि कैसे चार लड़कियों ने मिल कर मेरा देह शोषण किया और एक बार नहीं, कई बार किया. और हर बार लड़कियों को कम और मुझको ज़्यादा मज़ा आया और यह था जबरदस्ती का मज़ा.पूनम बोली- वो लड़कियाँ अभी कॉलेज में हैं क्या?मैं बोला- हाँ हैं, और रोज़ मुझको पूछती हैं जोर आजमाइश करें क्या?पूनम बोली- आप क्या कहते हो उनको?मैं बोला- मैं कहता हूँ अकेली हो या फिर 3-4 हैं और भी? वो हमेशा यही कहती है वही अकेली है. और मेरा जवाब होता है मैं अकेली लड़की से देह शोषण नहीं करवाता, तीन चार मिल कर आओ तो करवा भी लूंगा.
नैना पूनम के पीछे बैठी थी और वो मुंह में साड़ी का पल्लू डाल कर ज़ोर से हंस रही थी.अब पूनम समझ गई कि मैं उसकी टांग खींच रहा हूँ, वो रूठने का नाटक करते हुए बोली- हमको नहीं सुननी तुम्हारी देह शोषण की कहानी.
मैं बोला- तुम सुनाओ, तुम्हारे साथ क्या हुआ था यार?पूनम बोली- मेरे साथ क्या होना था सतीश ठाकुर? और क्यों होना था रंगीले ठाकुर?मैं बोला- कुछ तो हुआ होगा ना जो तुम्हारी सील टूटी थी?पूनम शर्माती हुई बोली- वो तो आम की वजह से हुआ!
मैं और नैना हैरान हो कर बोले- आम? कौन सा आम? कैसा आम? और उससे सील टूटने का क्या सम्बन्ध हो सकता है?पूनम संजीदा होते हुए बोली- वो ऐसा है, जब मैं छोटी थी तो गाँव में अपने ही आमों के बाग़ में कुछ सहलियों के साथ आम तोड़ने के लिए पेड़ पर चढ़ी थी लेकिन आम तोड़ने के बाद मैं जब नीचे उतर रही तो मेरा पैर फिसल गया और वहाँ में गिर गई और मेरी जो ‘वो’ है न, उससे बड़ा खून गिरा. फिर डॉक्टर ने मम्मी को बताया कि इस हादसे में सील टूट गई है.
मैंने और नैना ने बड़ा अफ़सोस जताया और मैंने उसको तसल्ली दी और कहा- कोई बात नहीं, नई लगवा लेना लखनऊ में!पूनम बोली- अब नई नहीं लगती प्यारे मोहन!मैं बोला- ऐसा क्यों? मेरा भी ‘इत्ता’ सा साला चूहा खा गया था एक रात को लेकिन नैना मेरे साथ गई थी और नया मोटा और बड़ा लगवा लिया था एक ख़ास दुकान थी हज़रात गंज में. क्यों नैना?
नैना हैरान होकर हंसने हुए बोली- छोटे मालिक, यह लड़की आपकी चोट की है, देख लेना यह तुमको हरा देगी.
अगले दिन पूनम और मैं जब कॉलेज पहुँचे तो मेरे एक सहपाठी मित्र मिल गए और बोले- सतीश यार, तुमने नोटिस बोर्ड देखा क्या?मैं बोला- नहीं यार, मैं तो अभी कॉलेज आया हूँ. क्या ख़ास बात लिखी है वहाँ?वो बोला- तुम देख लो तो पता चल जाएगा. यह कौन है तुम्हारे साथ?मैं बोला- यह पूनम है, मेरी कजिन मेरी ही क्लास में आई है अभी अभी!दोनों ने एक दूसरे को नमस्कार किया और फिर हम तीनों नोटिस बोर्ड पढ़ने चले गए.
वहाँ एक ट्रिप के बारे में नोटिस लगा था जो उसी महीने होना था.यह ट्रिप दिल्ली और आगरा भर्मण के बारे में था, दो रात और 3 दिन का ट्रिप था और खास तौर से इतिहास के छात्रों के लिए था, एक सौ रूपए प्रति छात्र का खर्च था, वो छात्र जो इस ट्रिप में भाग लेना चाहते थे 3 दिन में जमा करवाना था.
मैं और पूनम अपनी क्लास में पहुँचे तो वहाँ इस ट्रिप की ख़ास चर्चा हो रही थी.मैंने पूनम से कहा- तुम चलोगी क्या इस ट्रिप में?पूनम बोली- जाने की इच्छा तो है लेकिन मम्मी पापा से पूछना पड़ेगा और इतनी जल्दी पैसों का भी इंतज़ाम होना मुश्किल है तो तुम हो आओ!मैंने कहा- मैं मम्मी पापा से पूछता हूँ और तुम भी आज घर में जाकर पूछ लेना. पैसों की फ़िक्र ना करो!
बाद में पता चला कि ट्रिप की इंचार्ज निर्मला मैडम होंगी और उनका साथ एक और लेडी प्रोफ़ेसर देंगी.
शाम को घर पहुँच कर मैंने मम्मी को फ़ोन से पूछ लिया और उन्होंने कहा- चले जाओ, लेकिन हर रोज़ फ़ोन ज़रूर करते रहना.पूनम ने जब घर में पूछा तो उन्होंने कहा- क्या सतीश भी जा रहा है और पूनम ने कहा हाँ तो उन्होंने कहा ‘चली जाओ’ लेकिन अपना प्रोग्राम बताती रहना हर रोज़.
रात आई और खाना खाकर हम तीनों बैठक में बैठे दिल्ली आगरा ट्रिप की ही बात कर रहे थे.हम तीनों ने यह जगह अभी तक नहीं देखी थी तो नई जगह देखने की उत्सुकता थी लेकिन फिर मन में संशय भी था कि आपसी चुदाई कैसे हो पायेगी.
नैना ने मेरी तरफ भेदभरी नज़र से देखा और शायद वो नैनीताल ट्रिप के बारे में सोच रही थी.मैंने नैना से पूछा- वो नैनीताल ट्रिप के बारे में पूनम को बता दें क्या?वो बोली- देख लो छोटे मालिक, क्या पूनम हमारा यह राज़ रख पाएगी?
पूनम बोली- कौन सा राज़ सतीश?मैं बोला- बड़ा ही भयानक राज़ है, अगर किसी को पता चल गया तो मैं कहीं का नहीं रहूँगा, मेरी इज़्ज़त की धज्जियाँ उड़ जाएंगी.पूनम अब बहुत उत्सुक हो गई और ज़ोर देकर पूछने लगी तो मैंने कहा- कसम खाओ यह राज़ तुम किसी को नहीं बताओगी?पूनम बोली- कसम से, तुम्हारी इत्ती सी की कसम खाती हूँ.मैं और नैना दोनों हंस पड़े.
तब मैंने उसको नैनीताल ट्रिप का राज़ बताया कि कैसे चार लड़कियों ने मिल कर मेरा देह शोषण किया और एक बार नहीं, कई बार किया. और हर बार लड़कियों को कम और मुझको ज़्यादा मज़ा आया और यह था जबरदस्ती का मज़ा.पूनम बोली- वो लड़कियाँ अभी कॉलेज में हैं क्या?मैं बोला- हाँ हैं, और रोज़ मुझको पूछती हैं जोर आजमाइश करें क्या?पूनम बोली- आप क्या कहते हो उनको?मैं बोला- मैं कहता हूँ अकेली हो या फिर 3-4 हैं और भी? वो हमेशा यही कहती है वही अकेली है. और मेरा जवाब होता है मैं अकेली लड़की से देह शोषण नहीं करवाता, तीन चार मिल कर आओ तो करवा भी लूंगा.
नैना पूनम के पीछे बैठी थी और वो मुंह में साड़ी का पल्लू डाल कर ज़ोर से हंस रही थी.अब पूनम समझ गई कि मैं उसकी टांग खींच रहा हूँ, वो रूठने का नाटक करते हुए बोली- हमको नहीं सुननी तुम्हारी देह शोषण की कहानी.
मैं बोला- तुम सुनाओ, तुम्हारे साथ क्या हुआ था यार?पूनम बोली- मेरे साथ क्या होना था सतीश ठाकुर? और क्यों होना था रंगीले ठाकुर?मैं बोला- कुछ तो हुआ होगा ना जो तुम्हारी सील टूटी थी?पूनम शर्माती हुई बोली- वो तो आम की वजह से हुआ!
मैं और नैना हैरान हो कर बोले- आम? कौन सा आम? कैसा आम? और उससे सील टूटने का क्या सम्बन्ध हो सकता है?पूनम संजीदा होते हुए बोली- वो ऐसा है, जब मैं छोटी थी तो गाँव में अपने ही आमों के बाग़ में कुछ सहलियों के साथ आम तोड़ने के लिए पेड़ पर चढ़ी थी लेकिन आम तोड़ने के बाद मैं जब नीचे उतर रही तो मेरा पैर फिसल गया और वहाँ में गिर गई और मेरी जो ‘वो’ है न, उससे बड़ा खून गिरा. फिर डॉक्टर ने मम्मी को बताया कि इस हादसे में सील टूट गई है.
मैंने और नैना ने बड़ा अफ़सोस जताया और मैंने उसको तसल्ली दी और कहा- कोई बात नहीं, नई लगवा लेना लखनऊ में!पूनम बोली- अब नई नहीं लगती प्यारे मोहन!मैं बोला- ऐसा क्यों? मेरा भी ‘इत्ता’ सा साला चूहा खा गया था एक रात को लेकिन नैना मेरे साथ गई थी और नया मोटा और बड़ा लगवा लिया था एक ख़ास दुकान थी हज़रात गंज में. क्यों नैना?