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Guest
दूसरे दिन जैसे ही रामू काम करने आया तो मैं बेडरूम में चली गई और वो कब काम खतम करके अंदर आए उसकी राह देखने लगी।
तभी मेरे मोबाइल की रिंग बजी। मैंने उसकी स्क्रीन पे नजर डाली। मीना दीदी का काल था। मैं सोच में पड़ गई की दीदी ने क्यों मुझे काल किया होगा? फिर से तो कोई झगड़ा नहीं करेगी ना? और मैंने काल काट दिया।
चंद सेकंड में फिर से दीदी का काल आ गया। दीदी के साथ झगड़े के बाद मम्मी का भी फोन नहीं आया था। मैं जीजू के साथ मम्मी के कहने पर तो सोई थी, उसका शायद उन्हें अफसोस होगा। शायद मम्मी ने मेरी और दीदी की सुलह के लिए भी दीदी के पास फोन किया हो?
[
डरते हुये मैंने मोबाइल उठाया तो सामने दीदी थी- “निशा...”
मैं- “हाँ बोलो...” मैं ज्यादा बोल ना पाई।
दीदी- “निशा, अपने जीजू को काल कर...” दीदी के स्वर में घबराहट थी।
मैं- “क्यों? कभी आप मुझसे जीजू से बात करने को ना बोलें, और कभी बोलने को कहें, ये क्या है?” मैंने रूखेपन से कहा।
दीदी- “प्लीज़्ज़... निशा अभी ज्यादा बात करने का समय नहीं है, तेरे जीजू आत्महत्या करने गये हैं..” बोलते हुये दीदी रोने लगी।
मैं- “क्या?” मैं चौंक पड़ी।
दीदी- “हाँ निशा...” दीदी ने कहा।
मैं- “पर क्यों दीदी?” मैंने आज की बातों में पहली बार दीदी को दीदी कहकर पुकारा।
दीदी- “तेरे जीजू को शेयर मार्केट में बहुत ज्यादा घाटा हो गया है। सब बेच के भी नुकसान की भरपाई होना नामुमकिन है। और पैसे लेने वालों ने भी उन्हें जान से मारने की धमकी दी हुई है। वो घर पे आज चिट्ठी लिखकर चले गये हैं की मैं मरने जा रहा हूँ..” दीदी ने उनकी बात फटाफट कह दी।
मैं- “पर उसमें मैं क्या कर सकती हूँ?” मैंने कहा।
दीदी- “मैं कब से उनका मोबाइल लगा रही हूँ, रिंग बज रही है, पर वो उठा नहीं रहे। शायद तुम्हारा काल उठा लें...” दीदी ने कहा।
मैं- “आप रखो दीदी, मैं जीजू को काल लगाती हूँ..” कहकर मैंने दीदी की काल काट दी।
दीदी का काल काटते ही रामू रूम के अंदर आया, बेड पर बैठ गया, और मेरे पैरों को सहलाने लगा। मेरा बदन भी वासना की आग में सुलग रहा था। मैं भी तो कब से उसका इंतेजार कर रही थी, पर दीदी से बात करने बाद मुझे पहले जीजू से बात करनी थी।
मैंने रामू को कहा- “अभी तुम जाओ रामू, मैं कुछ प्राब्लम में हूँ...” मैं सोचती थी की शायद रामू मेरी बात जल्दी मानेगा नहीं, उसे मुझे समझाना पड़ेगा।
रामू मेरी सोच से विपरीत खड़ा हुवा और बाहर निकलने लगा। बाहर निकलते हुये ठहरा और मुझसे पूछा- “मेरे । लायक कोई काम हो तो बताना मेमसाब...”
तभी मेरे मोबाइल की रिंग बजी। मैंने उसकी स्क्रीन पे नजर डाली। मीना दीदी का काल था। मैं सोच में पड़ गई की दीदी ने क्यों मुझे काल किया होगा? फिर से तो कोई झगड़ा नहीं करेगी ना? और मैंने काल काट दिया।
चंद सेकंड में फिर से दीदी का काल आ गया। दीदी के साथ झगड़े के बाद मम्मी का भी फोन नहीं आया था। मैं जीजू के साथ मम्मी के कहने पर तो सोई थी, उसका शायद उन्हें अफसोस होगा। शायद मम्मी ने मेरी और दीदी की सुलह के लिए भी दीदी के पास फोन किया हो?
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डरते हुये मैंने मोबाइल उठाया तो सामने दीदी थी- “निशा...”
मैं- “हाँ बोलो...” मैं ज्यादा बोल ना पाई।
दीदी- “निशा, अपने जीजू को काल कर...” दीदी के स्वर में घबराहट थी।
मैं- “क्यों? कभी आप मुझसे जीजू से बात करने को ना बोलें, और कभी बोलने को कहें, ये क्या है?” मैंने रूखेपन से कहा।
दीदी- “प्लीज़्ज़... निशा अभी ज्यादा बात करने का समय नहीं है, तेरे जीजू आत्महत्या करने गये हैं..” बोलते हुये दीदी रोने लगी।
मैं- “क्या?” मैं चौंक पड़ी।
दीदी- “हाँ निशा...” दीदी ने कहा।
मैं- “पर क्यों दीदी?” मैंने आज की बातों में पहली बार दीदी को दीदी कहकर पुकारा।
दीदी- “तेरे जीजू को शेयर मार्केट में बहुत ज्यादा घाटा हो गया है। सब बेच के भी नुकसान की भरपाई होना नामुमकिन है। और पैसे लेने वालों ने भी उन्हें जान से मारने की धमकी दी हुई है। वो घर पे आज चिट्ठी लिखकर चले गये हैं की मैं मरने जा रहा हूँ..” दीदी ने उनकी बात फटाफट कह दी।
मैं- “पर उसमें मैं क्या कर सकती हूँ?” मैंने कहा।
दीदी- “मैं कब से उनका मोबाइल लगा रही हूँ, रिंग बज रही है, पर वो उठा नहीं रहे। शायद तुम्हारा काल उठा लें...” दीदी ने कहा।
मैं- “आप रखो दीदी, मैं जीजू को काल लगाती हूँ..” कहकर मैंने दीदी की काल काट दी।
दीदी का काल काटते ही रामू रूम के अंदर आया, बेड पर बैठ गया, और मेरे पैरों को सहलाने लगा। मेरा बदन भी वासना की आग में सुलग रहा था। मैं भी तो कब से उसका इंतेजार कर रही थी, पर दीदी से बात करने बाद मुझे पहले जीजू से बात करनी थी।
मैंने रामू को कहा- “अभी तुम जाओ रामू, मैं कुछ प्राब्लम में हूँ...” मैं सोचती थी की शायद रामू मेरी बात जल्दी मानेगा नहीं, उसे मुझे समझाना पड़ेगा।
रामू मेरी सोच से विपरीत खड़ा हुवा और बाहर निकलने लगा। बाहर निकलते हुये ठहरा और मुझसे पूछा- “मेरे । लायक कोई काम हो तो बताना मेमसाब...”