फ्लैट में दो बेडरूम होते हैं, एक रूम में ही वो चारों पहँच जाते हैं, और एक रूम खाली होता है। मलिक रीत को इशारा करके दूसरे रूम में जाने के लिए कहता है। रीत भी बिना किसी से बोले दूसरे रूम में चली जाती है। विरेंदर भी सिगरेट पीने के लिए फ्लैट से बाहर चला जाता है। रूम में आते ही मलिक रीत को अपनी बाहों में भर लेता है, और उसकी चूचियों को पकड़कर उसे निचोड़ देता है।
मलिक की इतनी बेसबरी देखकर रीत बोली- “अफफ्फ... मलिक प्लीज़्ज़... यार आराम से कर लो, मैं कौन सा कहीं भाग रही हूँ...”
मलिक रीत के होंठों को चूसकर बोला- "मेरी जान आग धीरे-धीरे नहीं एकदम से चढ़ती है...” कहते हये मलिक ने अपने हाथ पीछे करकर रीत के चतरों को कसकर मसल दिया।
रीत तभी नीचे से अपनी एंड़ियां उठाकर अपनी दोनों आँखें बंद कर लेती है। रीत अपना मुँह ऊपर उठाने लगती है, मलिक रीत की गर्मी को देखकर पागल हो गया। वो फिर से रीत के होंठों को अपने होंठों में कसकर पकड़कर जोर-जोर से चूसने लगता है। रीत भी अब गर्मी से मोदहोश हो जाती है, इसलिए वो अपने यार मलिक का पूरा खुलकर किसिंग में साथ देती है। फिर मलिक रीत की कमीज के पल्ले को पकड़कर उसका सूट उतारता है। रीत ने भी बिना किसी हिचकिचाहट के अपने हाथ ऊपर कर लिए, और मलिक रीत की कमीज उतारकर साइड में फेंक देता है। अब मलिक के सामने रीत की गोरी-गोरी चूचियां सफेद कलर की ब्रा में खड़ी थीं।
मलिक रीत की चूचियों को मसलता हुआ उसकी गर्दन पर किस करने लगता है। रीत भी गरम होकर मलिक का सिर अपनी गर्दन पर दबा रही थी। मलिक भी पूरा गरम हो रहा था, वो रीत की कमर पर हाथ डालकर उसकी ब्रा के हुक खोल देता है, और रीत को बेड पर लंबी लेटा देता है।
रीत की एकदम गोरी और नंगी नुकीली चूचियां देखकर मलिक एकदम उसकी चूचियां अपने मुँह में भर लेता है,
और उसकी चूचियों को जोर-जोर से चूसना शुरू कर देता है। रीत अपनी आँखें बंद करके उसका सिर अपनी चूचियों पर दबाकर अपनी चूचियां उसे चुसवाती है। ऐसे ही रीत की चूचियां चूसते-चूसते मलिक रीत की सलवार का नाड़ा खोल देता है, तो उसकी ढीली सलवार उसके चूतड़ों तक आ जाती है।
रीत- “हाए मलिक प्लीज़्ज़... ऊपर से ही कर लो ना प्लीज़्ज़..."
मलिक रीत की चूचियों को अपने दाँत से काटकर बोला- "ऊपर क्या रखा है, असली जुगाड़ तो नीचे है..."
रीत- आह्ह... आह्ह... ऐसे मत किया करो प्लीज़्ज़... दर्द होता है यार।
मलिक रीत की पैंटी के साथ ही सलवार उतारकर बोला- “अब दाँत नहीं मैं तो कुछ और ही मारूँगा..."
मलिक रीत की दोनों टाँगें खोलकर अपनी पैंट नीचे करके अपना लण्ड बाहर निकाल लेता है। रीत ने मलिक का लण्ड पूरा खड़ा किया हुआ था। मलिक रीत की दोनों टांगों के बीच में बैठता और रीत के होंठों को चूसते हुए अपने लण्ड का आगे वाला हिस्सा उसकी चूत पर रगड़ने लगता है।
रीत की पानी छोड़ती चूत पर जब मलिक का लण्ड रगड़ खाता है, तो रीत पागल हो जाती है। वो मलिक को अपनी बाहों में भर लेटी है, और मलिक को जोर-जोर से किस करने लगती है। लण्ड की रगड़ रीत को लण्ड का दीवाना बना रही थी। वो नीचे से अपनी गाण्ड हिलाकर अपनी चूत पर लण्ड को अच्छे से रगड़ रही थी।
मलिक समझ जाता है, की आज रीत चुदने के लिए पूरी तैयार है। इसलिए वो अब अपना लण्ड उसकी चूत के मुँह पर रखकर थोड़ा सा जोर लगाता है। मलिक का लण्ड धीरे-धीरे रीत की टाइट चूत को चीरता हुआ अंदर जा रहा था। जैसे-जैसे लण्ड अंदर जा रहा था, रीत ने चादर को अपने हाथ में कसकर पकड़ लिया था। रीत की चूत की सील तो पहले ही टूट चुकी थी, पर उस दिन उसकी चुदाई अच्छे से नहीं हुई थी। इसलिए अब मलिक धीरे धीरे अपना पूरा लण्ड रीत की चूत में डाल देता है।
रीत अपनी आँखें बंद करके मलिक को कसकर अपनी बाहों में भर लेती है। आज रीत को दर्द के साथ-साथ मजा भी मिल रहा था। इसलिए आज वो कुछ नहीं बोल रही थी। अब धीरे-धीरे मलिक रीत को ठोंकना शुरू कर देता है। तभी अचानक रीत की नजर दरवाजे पर जाती है, तो दरवाजा थोड़ा सा खुला होता है, जिसमें से एक आँख उसको देखती है। रीत को शक होता है और वो मलिक से बोली।
रीत- “मलिक मुझे लगता है, की कोई हमें देख रहा है..."
मलिक- नहीं रीत तुझे वहम हो रहा है, हमें कोई नहीं देख रहा है।
ये कहकर मलिक अपनी चुदाई को जारी रखता है, और अब वो खुलकर जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर देता है। रीत भी उसके हर धक्के का स्वागत अपनी गाण्ड को उठाकर कर रही थी। रीत अभी भी पूरी मस्त होकर उस आँख को देख रही थी। पर हवस और जवानी के इस नशे में पूरी डूबी रीत कुछ नहीं बोलती।
रीत की कुंवारी गरम चूत के आगे मलिक का लण्ड अब और ज्यादा देर नहीं टिक पाता। इसलिए वो अपना लण्ड बाहर निकालकर रीत की चूचियों के ऊपर अपने लण्ड का सारा पानी निकाल देता है। रीत भी अपना पानी निकाल चुकी थी, इसलिए अब वो आराम से लेट जाते हैं।
रीत देखती है, की अब वो आँख दरवाजे पर नहीं थी। फिर रीत उठकर वाशरूम में जाती है, और मलिक उठकर बाहर जाता है।
ज्योति मलिक को देखकर बोलती है- "बस हो गया हीर रांझे का प्यार?"
मलिक भी अपनी मूछों को ताव देकर बोला- "हाँ हीर रांझे का तो हो गया, बस अब जीजा साली का रह गया.."
ज्योति ये सुनकर शर्माकर बोली- “ये साली नहीं हाथ आती किसी के.."
मलिक ये सुनते ही ज्योति को पकड़कर खींचकरके अपने सीने से लगा लेता है।
ज्योति इस हरकत से थोड़ी से हिल जाती है और अपने आपको बचाते हुए बोली- “छोड़ो मुझे छोड़ो ये क्या कर रहे हो आप?"
मलिक- “इतना हक तो बनता है, जीजा साली का...”
जैसे ही मलिक ज्योति के होंठों को चूसने वाला होता है, तभी वाशरूम से रीत के आने की आवाज आ जाती है। तभी मलिक ज्योति को छोड़ देता है। रीत के आते ही ज्योति मलिक की ओर देखकर बोली।
ज्योति- “कहा था मैंने इतनी आसानी से हाथ नहीं आती मैं.."
फिर वो तीनों बाहर आ जाते हैं, बाहर विरेंदर खड़ा होता है है। विरेंदर मलिक को देखकर शैतानी सी स्माइल करता है और मलिक उसे देखकर हँसने लगता है। रीत और ज्योति कार में बैठ जाती हैं, रीत जाते-जाते एक बार विरेंदर को बड़े ध्यान से देखती है, और रीत नोट करती है, की वो आँख विरेंदर की ही थी। इस बारे में सोचते-सोचते थोड़ी देर में मलिक रीत और ज्योति को माल में छोड़ देता है। वहां से रीत और ज्योति अपनी अक्टिवा उठाकर सीधा घर की ओर निकल जाती है।
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