S
StoryPublisher
Guest
सुखजीत अपनी आँखें बंद कर लेती है, और बिटू का हाथ बाहर निकालने की कोशिश करती है। सुबह की लगी आग को बिटू फिर से जला देता है, वो भी सुखजीत के पति के सामने जो बेहोश उसके साथ ही लेटा है।
बिटू दूसरा हाथ सुखजीत के चूतड़ों को फेरता हुए, उसके गाल पर किस कर लेता है। सुखजीत की अब पूरी गरम हो जाती है, और फिर वो गरम-गरम सिसकारियां भरते हुए बोलती है- “आहह... आss भाईजी प्लीज़्ज़... यहाँ ना करो, मेरा सरदार मेरे साथ ही बैठा है..”
बिटू ये सुनकर सुखजीत की कमर में हाथ डालता है, और उसे उठाकर अपनी गोद में बिठा लेता है और फिर बिटू बोलता है- “और भाभी अब बता अपने पति के सामने किसी दूसरे मर्द की गोद में अपनी गाण्ड रखकर तुझे कैसा लग रहा है?"
सुखजीत- हाए नहीं प्लीज़्ज़... मुझे नीचे उतरो, सरदार साहिब कभी भी जाग सकते है।
बिटू के मजबूत हाथों की मजबूत पकड़ सुखजीत को उसकी पकड़ से बाहर नहीं जाने देती। फिर बिटू अपने दोनों हाथ से उसकी चूचियों को पकड़ लेता है, और फिर उसकी चूचियां जोर-जोर से मसलने लगता है। साथ ही साथ बिटू सुखजीत की गर्दन पर किस भी करने लगता है। सुखजीत बिटू की आग अपने अंदर समा नहीं पाती, इसलिए वो अपना एक हाथ बिटू के मुँह पर रखकर उसे धक्का देखकर बोलती है।
सुखजीत- “आहह... ओहह... हाए भाईजी प्लीज़्ज़... ना करो..."
सुखजीत से अब और कंट्रोल नहीं होता, और वो अब खुद अपने होंठ बिटू के होंठों में डालकर उसका सिर अपने दोनों हाथों से पकड़कर जोर-जोर से उसको किस करने लगती है। साथ ही बिटू भी अपने दोनों हाथों से उसकी चूचियों को जोर-जोर से मसलने लगता है।
मीता कार चलता हआ पीछे देखने वाले मिरर में सब कुछ देख रहा होता है। फिर बिटू अपना एक हाथ नीचे ले जाता है, और सुखजीत के पल्ले के अंदर अपना एक हाथ डालकर उसकी सलवार का नाड़ा खोलने लगता है। कुछ ही देर में बिटू सुखजीत का नाड़ा ढीला कर देता है। और फिर उसके बाद वो अपना हाथ सुखजीत की सलवार में डाल लेता है।
बिटू अपना हाथ सुखजीत की पैंटी में डाल लेता है, और फिर उसका हाथ पानी से भीगी हुई चूत पर आ जाता है। बिटू अपनी उंगलियां उसकी भीगी हुई चूत पर फेरने लगता है। जैसे ही बिटू का हाथ सुखजीत की चूत पर लगता है, तभी सुखजीत बिटू के होंठों को छोड़कर मस्त सिसकारियां भारती है। और फिर से वो उसके होंठों को चूसने लगती है। अब सुखजीत कसकर बिटू को अपनी बाहों में भर लेती है, पर उसका चेहरा हरपाल की तरफ होता है। ताकी अगर हरपाल उठ जाए, तो झट से अपनी सीट पर बिटू की गोद से उठकर आ जाए।
बिटू सुखजीत के खूबसूरत जिश्म को मसल-मसलकर नीचे से उसकी चूत में से उसकी जवानी का रस निकाल रहा था। अचानक ही हरपाल में थोड़ी सी हलचल होती है, और सुखजीत एकदम बिटू की गोद में से उठकर अपनी सीट पर आकर बैठ जाती है।
* * * * * * * * * *
बिटू दूसरा हाथ सुखजीत के चूतड़ों को फेरता हुए, उसके गाल पर किस कर लेता है। सुखजीत की अब पूरी गरम हो जाती है, और फिर वो गरम-गरम सिसकारियां भरते हुए बोलती है- “आहह... आss भाईजी प्लीज़्ज़... यहाँ ना करो, मेरा सरदार मेरे साथ ही बैठा है..”
बिटू ये सुनकर सुखजीत की कमर में हाथ डालता है, और उसे उठाकर अपनी गोद में बिठा लेता है और फिर बिटू बोलता है- “और भाभी अब बता अपने पति के सामने किसी दूसरे मर्द की गोद में अपनी गाण्ड रखकर तुझे कैसा लग रहा है?"
सुखजीत- हाए नहीं प्लीज़्ज़... मुझे नीचे उतरो, सरदार साहिब कभी भी जाग सकते है।
बिटू के मजबूत हाथों की मजबूत पकड़ सुखजीत को उसकी पकड़ से बाहर नहीं जाने देती। फिर बिटू अपने दोनों हाथ से उसकी चूचियों को पकड़ लेता है, और फिर उसकी चूचियां जोर-जोर से मसलने लगता है। साथ ही साथ बिटू सुखजीत की गर्दन पर किस भी करने लगता है। सुखजीत बिटू की आग अपने अंदर समा नहीं पाती, इसलिए वो अपना एक हाथ बिटू के मुँह पर रखकर उसे धक्का देखकर बोलती है।
सुखजीत- “आहह... ओहह... हाए भाईजी प्लीज़्ज़... ना करो..."
सुखजीत से अब और कंट्रोल नहीं होता, और वो अब खुद अपने होंठ बिटू के होंठों में डालकर उसका सिर अपने दोनों हाथों से पकड़कर जोर-जोर से उसको किस करने लगती है। साथ ही बिटू भी अपने दोनों हाथों से उसकी चूचियों को जोर-जोर से मसलने लगता है।
मीता कार चलता हआ पीछे देखने वाले मिरर में सब कुछ देख रहा होता है। फिर बिटू अपना एक हाथ नीचे ले जाता है, और सुखजीत के पल्ले के अंदर अपना एक हाथ डालकर उसकी सलवार का नाड़ा खोलने लगता है। कुछ ही देर में बिटू सुखजीत का नाड़ा ढीला कर देता है। और फिर उसके बाद वो अपना हाथ सुखजीत की सलवार में डाल लेता है।
बिटू अपना हाथ सुखजीत की पैंटी में डाल लेता है, और फिर उसका हाथ पानी से भीगी हुई चूत पर आ जाता है। बिटू अपनी उंगलियां उसकी भीगी हुई चूत पर फेरने लगता है। जैसे ही बिटू का हाथ सुखजीत की चूत पर लगता है, तभी सुखजीत बिटू के होंठों को छोड़कर मस्त सिसकारियां भारती है। और फिर से वो उसके होंठों को चूसने लगती है। अब सुखजीत कसकर बिटू को अपनी बाहों में भर लेती है, पर उसका चेहरा हरपाल की तरफ होता है। ताकी अगर हरपाल उठ जाए, तो झट से अपनी सीट पर बिटू की गोद से उठकर आ जाए।
बिटू सुखजीत के खूबसूरत जिश्म को मसल-मसलकर नीचे से उसकी चूत में से उसकी जवानी का रस निकाल रहा था। अचानक ही हरपाल में थोड़ी सी हलचल होती है, और सुखजीत एकदम बिटू की गोद में से उठकर अपनी सीट पर आकर बैठ जाती है।
* * * * * * * * * *