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Adultery Nakhara chadhti jawani da (नखरा चढती जवानी दा )

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सुखजीत अपनी आँखें बंद कर लेती है, और बिटू का हाथ बाहर निकालने की कोशिश करती है। सुबह की लगी आग को बिटू फिर से जला देता है, वो भी सुखजीत के पति के सामने जो बेहोश उसके साथ ही लेटा है।

बिटू दूसरा हाथ सुखजीत के चूतड़ों को फेरता हुए, उसके गाल पर किस कर लेता है। सुखजीत की अब पूरी गरम हो जाती है, और फिर वो गरम-गरम सिसकारियां भरते हुए बोलती है- “आहह... आss भाईजी प्लीज़्ज़... यहाँ ना करो, मेरा सरदार मेरे साथ ही बैठा है..”

बिटू ये सुनकर सुखजीत की कमर में हाथ डालता है, और उसे उठाकर अपनी गोद में बिठा लेता है और फिर बिटू बोलता है- “और भाभी अब बता अपने पति के सामने किसी दूसरे मर्द की गोद में अपनी गाण्ड रखकर तुझे कैसा लग रहा है?"

सुखजीत- हाए नहीं प्लीज़्ज़... मुझे नीचे उतरो, सरदार साहिब कभी भी जाग सकते है।

बिटू के मजबूत हाथों की मजबूत पकड़ सुखजीत को उसकी पकड़ से बाहर नहीं जाने देती। फिर बिटू अपने दोनों हाथ से उसकी चूचियों को पकड़ लेता है, और फिर उसकी चूचियां जोर-जोर से मसलने लगता है। साथ ही साथ बिटू सुखजीत की गर्दन पर किस भी करने लगता है। सुखजीत बिटू की आग अपने अंदर समा नहीं पाती, इसलिए वो अपना एक हाथ बिटू के मुँह पर रखकर उसे धक्का देखकर बोलती है।

सुखजीत- “आहह... ओहह... हाए भाईजी प्लीज़्ज़... ना करो..."

सुखजीत से अब और कंट्रोल नहीं होता, और वो अब खुद अपने होंठ बिटू के होंठों में डालकर उसका सिर अपने दोनों हाथों से पकड़कर जोर-जोर से उसको किस करने लगती है। साथ ही बिटू भी अपने दोनों हाथों से उसकी चूचियों को जोर-जोर से मसलने लगता है।

मीता कार चलता हआ पीछे देखने वाले मिरर में सब कुछ देख रहा होता है। फिर बिटू अपना एक हाथ नीचे ले जाता है, और सुखजीत के पल्ले के अंदर अपना एक हाथ डालकर उसकी सलवार का नाड़ा खोलने लगता है। कुछ ही देर में बिटू सुखजीत का नाड़ा ढीला कर देता है। और फिर उसके बाद वो अपना हाथ सुखजीत की सलवार में डाल लेता है।

बिटू अपना हाथ सुखजीत की पैंटी में डाल लेता है, और फिर उसका हाथ पानी से भीगी हुई चूत पर आ जाता है। बिटू अपनी उंगलियां उसकी भीगी हुई चूत पर फेरने लगता है। जैसे ही बिटू का हाथ सुखजीत की चूत पर लगता है, तभी सुखजीत बिटू के होंठों को छोड़कर मस्त सिसकारियां भारती है। और फिर से वो उसके होंठों को चूसने लगती है। अब सुखजीत कसकर बिटू को अपनी बाहों में भर लेती है, पर उसका चेहरा हरपाल की तरफ होता है। ताकी अगर हरपाल उठ जाए, तो झट से अपनी सीट पर बिटू की गोद से उठकर आ जाए।

बिटू सुखजीत के खूबसूरत जिश्म को मसल-मसलकर नीचे से उसकी चूत में से उसकी जवानी का रस निकाल रहा था। अचानक ही हरपाल में थोड़ी सी हलचल होती है, और सुखजीत एकदम बिटू की गोद में से उठकर अपनी सीट पर आकर बैठ जाती है।

* * * * * * * * * *
 
कड़ी_45

अगले दिन रात को रिसेप्शन होता है, और दिन में सब आराम कर रहे होते हैं। सुखजीत भी पिछले दो दिनों की थकान से टूटी आराम कर रही थी। सुखजीत बेड पर आराम से लंबी लेटी हुई होती है।

तभी रीत उसके पास आती है और उससे बोलती है- "मम्मी वो पिंकी ने शहर से एक डेस लेकर आनी है, क्या मैं उसके साथ जाऊँ?"

सुखजीत- हाँ बेटा जा।

रीत खुश होकर बोली- “ठीक है मम्मी फिर थोड़े पैसे भी दे दो। मुझे कुछ पसंद आया तो मैं भी ले लूँगी..”

सुखजीत- हाँ बेटे ले ले पैसे भी।

फिर रीत सुखजीत से पैसे लेकर बाहर निकल जाती है, और बाहर पिंकी खड़ी होती है। रीत उसे आँख मारकर कहती है- “ले पिंकी बन गया प्लान अब..."

पिंकी- तू सच में बहुत खराब है, एक मिनट में अपने घर वालों का फुदद् बना दिया तूने।

इतने में दोनों घर से बाहर निकल जाती हैं, पिंकी ने फिले कलर का सलवार सूट डाला हुआ था। उसकी बाहर निकलती चूचियां और चूतर उसके शरीर को चार चाँद लगा रहे थे। इसलिए पिंकी बहुत ही अच्छी और सुंदर लग रही थी, उसपर उसका ये सूट भी उसके जिश्म की वजह से काफी अच्छा लग रहा था।

रीत ने जीन्स और टाप डाला हुआ था, उसकी जीन्स और टाप में आज भी उसकी खड़ी चूचियां और बाहर निकलते चूतर अपनी पूरी शेप में दिख रहे थे। फिर वो दोनों गाँव की गलियों से बाहर निकालकर गाँव के मोड़ पर आ जाती हैं। इतने में रणबीर अपनी कार उन दोनों के सामने रोकता है, और वो दोनों कार में बैठ जाती हैं। कार के अंदर रणबीर और मलिक पहले से होते हैं, वो दोनों अंदर बैठकर दोनों को हेलो कहती है। फिर रीत मलिक के कंधे पर अपना सिर रखकर बैठ जाती है।

मलिक- देखा फिर आ गई ना, वैसे तू डर रही थी की मम्मी तुझे आने नहीं देगी।

रीत- मलिक आपको नहीं पता हम दोनों क्या-क्या बहाना मारकर घर से बाहर आई हाँ।

पिंकी- “हाँ इसने कहा है, की हम दोनों शहर में जा रहे हैं। नई ड्रेस लेने के लिए, हाहाहाहा...” पिंकी की ये बात सुनकर सब हँसने लगते है,

रणबीर बोला- "ओह्ह मलिक यार टाइम देख मूवी का...”

मलिक मोबाइल में टाइम देखता है और बोला- “यार टाइम तो 12:00 बजे है, पर अभी तो सुबह के 8:00 ही बजे हैं...”

पिंकी- हाए यार इतनी देर मैं कहां रहूंगी?

मलिक- मेरे दोस्त का फ्लैट है, वहीं पर चलते हैं। वो इस टाइम कालेज में गया होगा, हम चारों वहीं पर इतना टाइम पास कर लेगें।

सब फ्लैट में जाने के लिए तैयार हो जाते हैं, और मलिक अपने दोस्त से फ्लैट की चाबी माँग कर ले आता है। फिर वो सब फ्लैट की ओर निकल जाते हैं। सब अंदर चले जाते हैं और रणबीर कार से बियर की बोतल अंदर ले आता है। उसने अंदर आते ही बोतल खोल दी और पीने लगता है।

पिंकी उसे ऐसा करते देखकर बोली- “रणबीर आप ना कहीं पर भी पीनी शुरू कर देते हो..."

रणबीर- अच्छा तू भी दो बूंट मार फिर तुझे पता चलेगा।

पिंकी- नहीं जी मैंने नहीं पीनी।

रणबीर- हाँ हाँ मुझे पता था, की तू पहले ही डर जाएगी।

पिंकी- अच्छा... मैं डरती तो अपने बाप से नहीं।

रणबीर- अच्छा तो ये ले पी फिर

इतना सुनते ही पिंकी ने उसके हाथ से बोतल पकड़ी और पीने लगती है। रीत पिंकी को अपनी दोनों आँखें फाड़ फाड़कर देख रही थी। पीने के 5 मिनट बाद ही पिंकी को चढ़ जाती है, और फिर वो सेक्सी स्माइल करके रणबीर को देखने लगती है। रणबीर उसे देखकर अपने लण्ड की तरफ इशारा करता है।
 
पिंकी रणबीर का इशारा समझ जाती है और फिर बोली- “मैं अब तक गई हूँ, मैं आराम करने के लिए दूसरे रूम में जा रही हूँ..” कहते हुये वो रणबीर की तरफ अपनी गाण्ड को कुछ ज्यादा ही मटकाकर दूसरे रूम में चली जाती है।

रणबीर उसकी मोटी गाण्ड को देखकर समझ जाता है, और फिर वो भी उसके पीछे-पीछे हो जाता है।

ये सब देखकर मलिक और रीत शरमाने लगते है। मलिक भी मोका देखकर रीत के पास चला जाता है, और उसकी कमर में हाथ डालकर अपने होंठों को उसके होंठों के पास लेजाकर बोला- “जान आज मैंने तुझे अपना बनाना है, और तेरे जिश्म पर अपने प्यार की मोहर लगानी है."

रीत का प्यार मलिक के लिए एकदम सच्चा होता है और रीत बोली- “मलिक मैं सिर्फ आपकी ही हूँ, आप मेरे साथ जो मर्जी कर सकते हो..."

मलिक ये सुनकर खुश हो जाता है, और रीत के पीछे आकर अपनी पैंट की जिप खोलकर अपना लण्ड बाहर निकलकर जीन्स के ऊपर से ही अपना लण्ड उसकी चूतरों के अंदर डालने की कोशिश करता है।

अपने चूतरों पर लण्ड महसूस होते ही रीत की आँखें बंद हो जाती हैं। रीत अपने हाथ से मलिक के हाथ को पकड़कर दबा देती है, फिर मलिक उसको गले से चूमने लगता है। आज मलिक की लाटरी लगती है, क्योंकी सील बंद सबसे खूबसूरत कुँवारी पंजाबन आज उसके हाथों में थी। जो चुदने के लिए तड़प रही थी।

मलिक से अब और ज्यादा नहीं रुका जाता। और झट से रीत को अपनी तरफ घुमाता है, और उसके होंठों में अपने होंठ फँसाकर जोर-जोर से उसके होंठों को चूसने लगता है। फिर उसके होंठों को चूसते-चूसते वो उसके टाप को उतार देता है।

रीत ने नीचे रेड कलर की ब्रा डाली हुई थी, जिसमें उसकी गोरी-गोरी चूचियां बहुत ज्यादा मस्त लग रही थीं। रीत एकदम शर्मा जाती है, और वो अपनी चूचियों को मलिक के सीने से लगाकर दबा लेती है। मलिक का हाथ अब रीत की जीन्स के बटन पर होता है। वो रीत को बेड पर लेटाकर उसकी दोनों टाँगें ऊपर उठा देता है। और फिर उसकी जीन्स को खींचकर उतार देता है। अब रीत उसके सामने रेड कलर की ब्रा पैंटी में होती है। रीत शर्मा जाती है, और वो अपने ऊपर चादर ले लेती है।

मलिक के सामने गोरी चिट्टी कुँवारी जट्टी नंगी लेटी हुई थी। मलिक ने जल्दी से अपने सारे कपड़े निकले और वो चादर में आ गया। फिर उसने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया। मलिक ने अपने हाथ रीत की कमर में डाले और उसकी ब्रा को उसके जिश्म से अलग कर दिया।

फिर वो उसकी गोरी-गोरी नंगी चूचियों को चूसने लगा। उसकी चूचियां चूस-चूसकर वो लाल करने लगा। रीत पागल होने लगी, उसके मुंह से आह्ह... आह्ह... से भरी सिसकारियां निकल रही थी। उसके बाद मलिक ने नीचे अपने हाथ डालकर उसकी पैंटी भी उसके जिश्म से अलग कर दी।

अब पूरी रीत पूरी नंगी मलिक से लिपटी हुई थी। मलिक ने अपना हाथ उसकी चूत पर फेरना शुरू कर दिया, जिससे रीत पूरी तरह से पागल होने लगी। फिर मलिक अपने अंडरवेर से अपना 8" इंच लंबा लण्ड बाहर निकल देता है। रीत मलिक का लण्ड देखकर डर जाती है।

रीत- “हाए मलिक इतना बड़ा प्लीज़्ज़... मुझे छोड़ दो जाने दो...”

मलिक- जान जितना तुम आराम से ले सकती हो, उतना आराम से ले लेना।

रीत- “नहीं नहीं प्लीज़्ज़..."

मलिक- जान तू मुझसे प्यार नहीं करती?

रीत- जान से ज्यादा करती हूँ।

मलिक- तो क्या मेरे लिए मेरा लण्ड नहीं ले सकती।

मलिक की ये बात सुनकर रीत एकदम चुप हो जाती है। रीत मलिक को पकड़कर अपने गले से लगा लेती है। रीत को डर लग रहा था, क्योंकी आज ये सब उसके साथ पहली बार हो रहा था।

* * * * * * * * * *
 
कड़ी_46

मलिक अब समझ जाता है की रीत तैयार है। तभी मलिक अपने लण्ड को पकड़कर रीत की चूत पर रगड़ देता है, जिससे रीत एकदम मचल उठती है और मलिक को कसकर पकड़ लेती है। अब मलिक अपने लण्ड को उसकी चूत के ऊपर रखकर धीरे से धक्का मारता है। और रीत अपनी दोनों टाँगें मलिक की कमर पर लपेटकर बोलती है।

रीत- “आहह... आहह... मलिक प्लीज़्ज़... धीरे..."

मलिक का लण्ड के आगे वाला हिस्सा रीत की चूत के अंदर होता है, दर्द के मारे अपनी टाँगें मलिक के चारों और लपेट लेती है। फिर मलिक थोड़ा सा और जोर लगाकर अंदर डालता है। तभी रीत उसके नीचे इकट्ठी हो जाती है, मलिक अब एक बार लण्ड बाहर निकालकर फिर से धक्का मारता है।

रीत- “आहह... मलिक मैं मर गई प्लीज़्ज़... धीरे से करो..."

मलिक का लण्ड रीत की नशीली चूत के नशे में कुछ और सुनने को तैयार नहीं था, अब वो एक और धक्का मारता है। रीत दर्द के मारे अपनी दो उंगलियां अपनी चूत के पास रखकर बोली- “मलिक आहह... आहह... आज मुझे मारने का इरादा है क्या? प्लीज़्ज़... अपना लण्ड बाहर निकालो प्लीज़्ज़...” और रीत आँखों से आँसू आने शुरू हो जाते हैं।

मलिक अभी भी नहीं सुनता, और वो अपने दोनों हाथ रीत के कंधों पर रखता है, और एक जोरदार धक्का मारता है। रीत जोर से चिल्ला पड़ती है। साथ वाले रूम में रणबीर और पिंकी को भी उसकी आवाज सुनाई पड़ती है, और फिर रणबीर बोला।

रणबीर- “ले आज तेरी बहन की भी सील टूट गई..”

पिंकी सेक्स के नशे में बोली- "टूटने दे और कब तक संभाल कर रखेगी वो? और वैसे भी ये बनी ही है तोड़न के लिए। तू अभी मुझे चोद ना जान..."

दूसरी तरफ जब रीत नीचे देखती है, तो वो पूरी हैरान हो जाती है। क्योंकी मलिक का 8" इंच का पूरा लण्ड उसकी चूत को चीरता हुआ पूरा अंदर जा चुका था। रीत दर्द से तड़पने लगती है, और अपने हाथ बेड पर मारने लगती है, और वो रोते हुए बोली- “आहह... आह्ह... प्लीज़्ज़... मलिक निकालो इसे प्लीज़्ज़... मुझे कुछ नहीं पता प्लीज़्ज़... निकालो इसे आहह...”

मलिक रीत की ऐसी हालत देखकर एकदम घबरा जाता है, और तभी अपना लण्ड बाहर निकल देता है। जैसे ही वो अपना लण्ड बाहर निकलता है, चूत में से खून निकलना शुरू हो जाता है। लण्ड बाहर आते ही रीत लंबी-लंबी सांसें लेने लगती है, और वो अपनी दोनों टाँगें खोलकर नंगी लेट जाती है। उसकी आँखों से आँसू निकल रहे होते है, और रीत दर्द के मारे बेहोश हो जाती है। मलिक इस काम का पक्का खिलाड़ी होता है, उसने आज से पहले बहुत सारी लड़कियों की सील तोड़ी थी।

मलिक ने अपने रुमाल से रीत की चूत का सारा खून साफ कर दिया। फिर वो रीत के पास बैठकर उससे प्यारी प्यारी बातें करने लगा। ताकी उसका मूड थोड़ा ठीक हो जाए। फिर वो दोनों अपने-अपने कपड़े डाल लेते हैं। इतने में रणबीर और पिंकी भी चुदाई करके आ जाते हैं।

पिंकी रीत के पास आकर बैठ जाती है और बोलती है- "रीत घबरा मत... पहली बार ये सब सबके साथ होता है..."

रणबीर पिंकी की किस करते हुए बोला- "हाँ जब मैंने पिंकी के साथ किया था, तब पिंकी तो अपनी सलवार उठाकर भाग गई थी...”

रणबीर की ये बात सुनते ही सब हँसने लगते हैं।

पिंकी- मेरा बाबू आ गया था, इसलिए मैं भागी थी समझा।

फिर से सब हँसने लगते हैं।

दूसरी तरफ गाँव में सारे रात की पार्टी के लिए तैयारियां कर रहे होते हैं। चरणजीत के पास एक मिनट भी फ्री नहीं होता। सुखजीत अपने रूम में आराम से लंबी लेटी हुई थी। इतने में सुखजीत के मोबाइल पर एक फोन आता है। जब वो फोन देखती है तो उसके चेहरे पर एक स्माइल आ जाती है, क्योंकी वो फोन बिटू का होता

सुखजीत- हेलो।

बिटू- “क्या बात भाभी आज तूने दर्शन नहीं दिए?"

सुखजीत ठरकी आवाज में बोली- “हाए इतनी तो मेरी मार ली है आपने, और अभी भी दर्शन की जरूरत है?"

बिटू- “एक बार और दे दो भाभी अच्छी तरह। कल तूने अपने घर शहर चली जाना है। अच्छा मैं बाहर खड़ा हूँ तेरे दर्शन के लिए..."

सुखजीत अपने रूम की खिड़की में से हल्का सा बाहर देखती है, की बिटू खड़ा होता है। उसके कान पर फोन लगा होता है। सुखजीत मिरर में देखकर अपनी चूचियां सेट करके खिड़की के सामने इस तरह खड़ी हो जाती है। ताकी कोई आसानी से उसे देख ना सके। बिटू बातें करते-करते अपने लण्ड को अपने हाथ में मसलने लगता है। ये देखकर सुखजीत बोली।

सुखजीत- “हाए भाईजी कभी तो इसे छोड़ दिया करो...”

बिटू- भाभी क्या करूँ तुझ देखकर तेरे अंदर जाने को मचलने लगता है ये।

सुखजीत बिटू के पीछे हरपाल को आते हुए देखती है और फिर बोलती है- “अच्छा मैं अब रखती हूँ, हरपाल आ रहा है आपके पीछे..."

रीत और पिंकी अब गाँव आ जाती है, तो रीत की चूत बुरी तरह से दुख रही होती है। इस चक्कर में उससे अच्छे से चला भी नहीं जा रहा था। रीत बहुत मुश्किल से चल रही थी। वो गाँव के मोड़ से पैदल आ रही होती है। उसे इस तरह देखकर पिंकी बोली।

पिंकी- रीत ठीक से चल, वर्ना सबको पता चल जाएगा।

रीत- कैसे चलूं यार? सच में मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है।

पिंकी- जरूरी था अंदर लेना, मना कर देती। अगर इतना ही दर्द हो रहा था तुझे तो।
 
रीत- “ज्यादा बकवास ना कर तू.. खुद तो अपने यार के साथ दूसरे में रूम में चली गई थी। मुझे वहां अकेली छोड़कर। अब मलिक ने अकेली होने का फायदा तो उठना ही था ना..."

पिंकी- “चल जो गया सो हो गया। अब प्लीज़्ज़... ठीक से चल। ये गाँव की औरतें बहुत ज्यादा ही खराब हैं। ये लड़की की चाल देखकर ही बता देती है, की सील बंद है या खुली?"

रीत ये सुनकर डरते हुए बोली- “हाई पिंकी अगर किसी को पता चल गया तो?”

पिंकी- तभी तो कह रही हूँ, की सीधी होकर चल यार।

रीत ने जीन्स डाली हुई थी, इसलिए वो अपने दोनों हाथ आगे वाली पाकेट में डालकर चलने लगती है। इससे रीत को दर्द कम हो रहा था, और देखने में ऐसा लग रहा था, की वो अपनी जीभ में हाथ डालकर चल रही है। ऐसे ही वो दोनों घर आ जाती हैं।

रीत सीधी अपने रूम में जाकर बेड पर लेट जाती है। इतने में पिंकी उसके पास एक क्रीम लेकर आती है, जिसे वो रीत की चूत पर लगाकर उसे सुला देती है। रीत को भी नींद आ जाती है।

शाम हो जाती है, और सुखजीत रूम में आती है और रीत को बेड पर लंबी लेटी देखकर बोली- “रीत बेटा चल अब उठ जा, तैयार भी तो होना है पार्टी के लिए..."

रीत को अभी तक आराम नहीं आया था और वो बोली- “मम्मी मेरा सिर बहुत ज्यादा दर्द कर रहा है, प्लीज़्ज़... थोड़ी देर और सोने दो, मैं बाद में तैयार हो जाऊँगी...” कहकर रीत फिर से सो जाती है।

सुखजीत ने आज तंग पाजामी वाला काले रंगा का सूट डाला हुआ था। ऊपर से उसने अपने बाल आज खुले छोड़े होते हैं, होंठ एकदम लाल किए होते हैं। कमीज के नीचे सुखजीत ने टाइट ब्लैक कलर की ब्रा डाली हुई थी। इससे उसके मोटी-मोटी चूचियां एकदम खड़ी हुए थीं। नीचे उसका पल्ला काफी लंबा था, पर कमर से एकदम सूट टाइट था। साथ ही उसकी पाजामी भी पूरी फँसी हुई थी। इसलिए उसकी गाण्ड एकदम बाहर निकली हुई थी, ।

और कमीज का पल्ला पूरा ऊपर उठा हुआ था।

सुखजीत मिरर के आगे खड़ी होकर अपने आपको सवार रही होती है, तभी दरवाजा खुलता है और अंदर चरणजीत आती है। चरणजीत भी पूरी सजी-धजी हुई होती है। चरणजीत ने सिर पर जूड़ा करा हुआ था। उसकी कमीज का गला काफी बड़ा किया हुआ था। इसलिए उसके मोटी-मोटी चूचियां बाहर आने को हो रही थीं। उसकी ब्रा के स्ट्रैप्स उसके गोरे चिकने कंधों पर चमक रहे थे। नीचे की सलवार में से साफ-साफ मोटे-मोटे चूतर भी चमक रहे थे, जो लोगों के लण्ड खड़े कर रहे थे।

चरणजीत- बहनजी आप हो गये तैयार?

सुखजीत मिरर में देखकर अपनी चूचियां ऊपर उठाकर बोली- “हाँ बहनजी हो गई मैं तैयार..."

चरणजीत शर्मा जाती है और कहती है- "चलो फिर नीचे पार्टी में चलते हैं। वैसे ये रीत क्यों सो रही है?"

सुखजीत- उसका सिर दर्द हो रहा है।

चरणजीत- ठीक है आ जाओ फिर रीत को उठाकर।

सुखजीत रीत को जगाती हुई बोली- “रीत मेरे बच्चे अब उठ जा देख रात हो गई है, और नीचे पार्टी भी शुरू हो गई है। चल उठ और तैयार हो जा..."

रीत की हिम्मत नहीं हो रही थी खड़े होने की। इसलिए उसने अपनी मम्मी से साफ-साफ बोल दिया- “मम्मी मुझसे नहीं उठा जा रहा है, मेरा सिर बहुत दर्द कर रहा है..”

इतने में पिंकी आ जाती है तैयार होकर। पिंकी ने आज ग्रीन कलर का कमीज और येल्लो कलर की सलवार डाली हुई थी। पटियाला शाही सलवार में उसके चूतर पूरे अपनी असली शेप में पीछे से नजर आ रहे थे। और उसकी चूचियां पहले से ही सुखजीत जैसी मोटी-मोटी और हरदम खड़ी रहने वाली थीं। जिसको लड़के और बंदे हर टाइम मसलने के लिए तड़पते रहते थे।

पिंकी- “चाची आज रीत को भी दिन में चक्कर आ रहे थे। तो उसके लिए अच्छा ये ही होगा की वो आज रात ना जाए..."

सुखजीत- चल ठीक है रीत जैसे तुझे ठीक लगे, पर तेरे साथ घर में कोई रहेगा।

रीत- मम्मी मैं कोई बच्ची हूँ, रूम लाक करके मैंने सो जाना है अभी।

सुखजीत- “चल ठीक है मेरे बच्चे...” कहकर सुखजीत बाहर चली जाती है।

फिर पिंकी बोली- “क्या हाल है अब?"

रीत- कोई हाल नहीं है बहन, बहुत दर्द कर रही है।

पिंकी- दर्द भी क्यों ना होये, आज अपने यार का लण्ड जो लिया है अंदर इसने।

रीत- चुप कर, यहाँ मेरी जान निकल रही है, और तुझे मजाक सूझ रहा है।

पिंकी- “जरा मैं भी तो देखू कितनी दर्द कर रही है?" कहकर पिंकी अपने हाथ चादर में डालकर सीधा रीत के पाजामे में हाथ डाल लेती है। फिर पिंकी अपना हाथ रीत की चूत पर रख देती है। पिंकी हाथ जैसे ही उसकी चूत पर लगता है। तभी उसकी आँखें बंद हो जाती है और वो बोलती है।

रीत- “कमीनी बाहर निकल इसे अभी..."

पिंकी अपना हाथ बाहर निकालकर बोली- “रीत तेरी तो सूजी पड़ी है, ऐसा कर क्रीम लगाकर सो जा सुबह तक ठीक हो जाएगी तू..”

रीत- ठीक है।

पिंकी- चल मैं अब पार्टी में एक चक्कर लगाकर वापिस आती हूँ। अगर तुझे किसी चीज की जरूरत हो तो मुझे फोन कर लियो ओके...”

रीत- ठीक है।

* * * * * * * * * *
 
कड़ी_47

पार्टी बलविंदर की जमीन पर हो रही होती है, जो की उसके घर के थोड़ी ही दूरी पर होता है। पार्टी में हर जगह रौनक ही रौनक लगी हुई होती है, और सबके चेहरे पर पार्टी का जश्न देखा जा सकता था।

पिंकी भी अपनी दोस्तों के साथ बैठी हुई होती है। वो बहुत ही सुंदर लग रही होती है। गली के सारे लड़के उसकी तरफ देखकर अपनी आँखों को सेंक रहे होते हैं।

चरणजीत अपनी मस्त रज्जी के साथ बैठी हुई मीठी-मीठी बातें कर रही होती है। रज्जी एक 50 साल की मस्त पताखे वाली औरत होती है पर उसका फिगर चरणजीत और सुखजीत से कम मस्त होता है, क्योंकी इन दोनों का फिगर रज्जी से ज्यादा अच्छा होता है। सुखजीत भी साथ में ही बैठी होती है, और तो और वो भी बातों का मजा ले रही होती है।

सुखजीत सलवार सूट पहनकर बैठी होती है और तो और फिर ऐसे ही उसने एक टांग को अपनी दूसरी टांग के ऊपर चढ़ाकर रखा होता है। जिसकी वजह से वहां पर बैठे लड़के उसके चूतड़ों को देख रहे होते हैं और उनके लण्ड अंदर से खड़े हो रहे होते हैं।

इतने में तभी सुखजीत की नजर गगन से टकरा जाती है और वो उसे देख रहा होता है। सुखजीत भी उसे देखती है पर वो उसको कोई भाव नहीं देती है। उधर गगन का लण्ड खड़ा हो जाता है और फिर सुखजीत भी उसको गुस्से में देखकर निगाहें घुमा लेती है। असल में सुखजीत को भी गगन का ये चोरी-चोरी देखना बहुत अच्छा लगता है। पर वो फिर भी ध्यान नहीं देती है और फिर रज्जी आंटी के साथ बातों में लग जाती है।

उधर फिर जब वो देखती है की गगन तो उसके पास आ रहा होता है तो वो सोचती है की ये यहां पर क्या करने आ रहा है? तभी गगन आकर रज्जी आंटी को सत श्री अकाल बोलता है और फिर चरणजीत को बोलता है और फिर नशीली नजरों से सुखजीत की ओर देखते हुए उससे भी सत श्री अकाल बोलता है।

रज्जी आंटी भी उसको जवाब देती है और फिर चरणजीत भी उसको सत श्री अकाल कहती है। फिर उसके बाद ऐसे ही सुखजीत भी उसको देखती हुई उसको सत श्री अकाल बोलती है।

गगन- "रज्जी आंटी आपने नये मेहमानों से खुद मिलवाया नहीं तो सोचा मैं खुद ही आकर मिल लेता हूँ..”

रज्जी- “ले, इसमें भी कोई न्योता देने वाली बात है क्या? तुम खुद आकर मिल लो..."

सुखजीत भी गगन को देखती हुई बोली है- "इनको मिलना होता है तो आदमियों से मिलें, यहां औरतों में क्या रखा है?"

गगन- “रज्जी आंटी, शायद सुखजीत को नहीं पता है की रिश्तेदारी क्या होती है? ये नहीं की आदमियों से मिलकर ही रिश्तेदारी निभाई जाती है। बल्कि औरतों से मिलकर तो और भी अच्छा लगता है..."

रज्जी गगन की बात को सुनकर हँस पड़ती है और फिर उसके कंधे पर हाथ फेरती है। उसके बाद गगन भी सुखजीत की तरफ नशीली आँखों से देखते हुए जा रहा होता है तो उधर सुखजीत भी उसको नशीली आँखों से देखती है। फिर उसके बाद तभी सुखजीत का फोन रिंग करता है और फिर वो रज्जी आंटी और चरणजीत को बाद में मिलने के कहकर उठ खड़ी होती है क्योंकी उसको रीत के पापा का फोन आया होता है और वो वहां जाना चाहती है,और फिर सुखजीत उठकर चली जाती है।

पिंकी अपनी सहेलियों के पास खड़ी होती है और बातें कर रही होती है। सबके सब मस्त होते हैं और सब बातों में लगे हुए होते हैं। तभी पिंकी अपनी सहेली को कहती है।

पिंकी- “यार मुझे बहुत जोर से पेशाब आ रहा है.."

सहेली- यार तू भी ना, जरा कम पी लेती कोल्ड ड्रिंक, तू तो बस पीते ही जा रही थी।

पिंकी- यार तू चुप कर और ये बता क्या करूं मैं अब?

सहेली- तू ऐसा कर घर चली जा, यहां इतना मैं संभाल लूँगी।

पिंकी- “वो तो मुझे पता है तू सभाल लेगी। पर मुझसे घर तक नहीं जाया जाएगा क्योंकी मुझे बहुत जोर से आया है...”

सहेली- ठीक है तू ऐसा कर की तू फिर खेतों में चली जा।

पिंकी- ठीक है चली जाती हूँ, पर तू भी साथ चल ले।

सहेली- मैं वहां क्या तेरा सूसू सीटी से करवाने आऊँगी क्या?

पिंकी- “छी.... गंदी तू चुप कर..."

फिर पिंकी वहां से निकलकर खेतों की तरफ आ जाती है, और वहां पर सलवार को नीचे करके बैठ जाती है और पेशाब करने लगती है। उसे सच में काफी तेज पेशाब आया होता है क्योंकी वो देर तक बैठी पेशाब कर रही होती है। वो पेशाब करके उठती है और फिर उसके बाद सलवार को ठीक करती है और सलवार का नाड़ा बांधती है। अब वो वहां से निकलती है की तभी उसको कुछ आवाजें आ रही होती है। वो फिर उस तरफ जाने का सोचती है और फिर उसके बाद उसे एक आवाज आती है।
 
“वीर जी जरा आराम से करो, आपके ऐसे करने से पूरे शरीर में खुजली सी मच उठती है.."

पिंकी ये सुनकर थोड़ा और आगे को जाती है। फिर चोरी से देखती है तो उसे पता चलता है की ये सुखजीत चाची हैं, जो की बिटू के साथ चिपकी होती हैं। ये सब देखकर वो हैरान रह जाती है क्योंकी उसे विश्वास नहीं होता है। और तभी वो देखती है की बिटू उसके चूचियों पर हाथ फेरता है और सुखजीत चाची की कमर पिंकी की तरफ होती है।

बिटू- वाह रे... तेरे इस जिश्म का मैं कब से दीवाना हूँ।

पिंकी ये सब देख रही होती है और उधर सुखजीत के होंठ बिटू के होंठों के बीच में होते हैं, और वो दोनों पागल हो रहे होते हैं।

पिंकी मन में- “सुखजीत चाची बड़ी ही चालू चीज निकली। अपने पति को छोड़कर बाहरी बबदों से मजे लेती हैं.."

उधर अब दोनों पागल हो रहे होते हैं, दोनों एक दूसरे के जिश्म को मसल रहे होते हैं। ये सब पिंकी देख रही होती है। और तो और अब दोनों ही पागलों की तरह लगे हुए होते हैं। उसके बाद ऐसे ही पिंकी उसको देख रही होती है। ये सब देखकर वो भी पागल हो रही होती है।

बिटू अब सुखजीत की पाजामी को नीचे करता है जिससे की वो पागल हो जाती है, और कहती है की ऐसे मत करो। पर तभी सुखजीत चाची उससे कहती है की मुझे पागल मत करो और बिटू अब उसकी पाजामी को नीचे करके उसकी चूत पर हाथ रख देता है। चूत पर हाथ रखते ही वो मचल उठती है और फिर वो बिटू का लण्ड पकड़कर ऊपर-नीचे करती है।

पिंकी भी ये सब देखकर अपनी चूत पर हाथ राख देती है। क्योंकी वो बहुत ही पागल हो रही होती है। उधर बिटू का पूरा लण्ड उसके हाथों में होता है और फिर उसके बाद ऐसे ही सुखजीत उससे कहती है की डाल दो। तब वो उंगली को डालता है और वो मचल उठती है। फिर वो उसे कहता है की अभी जब ये अंदर जाएगा तब मजा आएगा।

सुखजीत- “दे दो फिर ना प्लीज़्ज़...” कहकर सुखजीत अपने दोनों हाथों से अपने चूतरों को पकड़कर खोल देती है।

फिर बिटू अपना लण्ड उसकी चूत पर सेट करके एक धक्के से अपना लण्ड उसकी चूत में डाल देता है। और ठप-ठप की आवाज से वो सुखजीत को चोदने लगता है।

उधर पिंकी सुखजीत को इस तरह से चुदते हुए देखकर पूरी गरम और पागल हो जाती है। वो अपनी चूत पर अपना हाथ रखकर जोर-जोर से अपनी चूत को मसलने लगती है। वो अपनी चूत मसलने में इतनी मगन हो जाती है, की उसे ये पता नहीं होता की वो इस टाइम है कहां।

इतने में उसके पैर के नीच एक सुखी टहनी आ जाती है। जो उसके पैर के नीचे आने की वजह से टूट जाती है। और उसकी आवाज दूर तक जाती है, ये आवाज बिटू तक जाती है। जब बिटू ये आवाज सुनकर रुक जाता है, तो पिंकी गाण्ड फट जाती है। पिंकी झट से अपनी सलवार को बाँधकर वहां से भाग जाती है।

सुखजीत तभी एकदम से टूि का लण्ड अपनी चूत से निकालकर बोली- “हाए भाईजी, लगता है किसी ने हम दोनों को देख लिया है। अब पंगा जरूर पड़ेगा..."

बिटू- भाभी कुछ नहीं होता, वो एक कुत्ता था। तू लण्ड अंदर ले जल्दी।

सुखजीत- “यहाँ पंगा होने वाला है, और तुझे अंदर डालने की पड़ी है..” कहकर सुखजीत वहां से भाग जाती है, और जाकर चरणजीत के पास बैठ जाती है।

चरणजीत सुखजीत को देखकर स्माइल करती है और बोलती है- “क्या बात है बहनजी... आपकी लिपस्टिक का रंग फीका पड़ गया है, किससे चुसवा कर आए हो?"

सुखजीत- “उसी से जिसके साथ मोटर में पूरी रात बिगाई थी...” कहकर सुखजीत फिर से अपने पर्स से लिपस्टिक निकालकर लगा लेती है।

पिंकी अब अपनी दोस्तों के पास आ जाती है।

दोस्त- क्या बात है पिंकी, तू पेशाब करने गई थी, या कुछ और करने गई थी?

पिंकी- ओहह नहीं यार पेशाब तो मैंने कभी का कर लिया था। बस मम्मी ने एक काम बता दिया था। जिस वजह से थोड़ी लेट हो गई थी।

दोस्तों- चल कोई बात नहीं चल अब डान्स करते हैं।

पिंकी- “ठीक है...” फिर वो अपनी दोस्तों के साथ डान्स करने लगती है। डान्स करते-करते भी पिंकी ये ही सोच रही थी, की उसकी सुखजीत चाची कितनी बड़ी हरामी है। अपने पति के होते हुए भी किसी दूसरे मर्द से अपनी चूत मरवा रही थी। उसके दिमाग में अब ये बात घर कर गई थी।

पर साथ ही पिंकी की चूत में अब आग लगी थी। क्योंकी उसने अब एक लाइव चुदाई देख ली थी, पर उसकी चूत में कुछ गया नहीं था। अब वो लण्ड के लिए तरस रही थी।

फिर डान्स करते-करते गगन और उसके दोस्त भी आ गये। फिर सुखजीत चरणजीत सब मिलकर डान्स कर रहे थे। गगन सुखजीत का दीवाना हो गया था, इसलिए वो बार-बार सुखजीत को छूने की कोशिश कर रहा था। फिर एक डान्स स्टेप करते-करते उसने एक बार सुखजीत के चूतरों पर हाथ फेर ही दिया।

थोड़ी देर बाद पार्टी खतम हो गई, और सब अपने-अपने घर चले गये।

* * * * * * * * * *
 
कड़ी_48

पार्टी के बाद सारे अपने-अपने घर चले जाते हैं। सुखजीत की चूत में अभी भी आग लगी होती है, क्योंकी बिट्ट ने अपना लण्ड उसकी चूत में डालकर निकल दिया था, और डान्स करते टाइम गगन ने उसके चूतरों पर हाथ भी फेर दिया था, इससे वो और गरम हो गई। पर उसकी चूत शांत नहीं हुई थी।

रात को एक बजे चुके थे और घर में सब सो चुके थे। रूम में सिर्फ रीत और सुखजीत ही होती हैं, क्योंकी हरपाल दारू पीकर नशे में बाहर ही सो रहा था। सुखजीत बेड पर लंबी लेटी हुई थी, और वो इधर-उधर करवट ले रही थी। पर उसको नींद नहीं आ रही थी, उसका एक हाथ बार-बार उसकी चूत पर जा रहा था।

सुखजीत अपनी दोनों टाँगें खोलकर अपने हाथ से अपनी चूत को मसल रही थी। पर इससे उसे कहां चैन मिलने वाला था। क्योंकी उसकी चूत तो एक लंबा और मोटा लण्ड माँग रही थी। आखीरकार सुखजीत बेचैन होकर रूम से बाहर आ जाती है, बाहर काफी अंधेरा हो रहा था। सुखजीत नीचे जाती है। दर्शल वो अपने पति हरपाल को उठाने जा रही थी।

जब रंडी को बाहर वाला लण्ड नहीं मिला, तो आज उसे अपने घर वाला याद आ रहा था। सुखजीत बाहर निकलने लगती है। तभी उसे चरणजीत के रूम में से कुछ आवाजें आती है। सुखजीत को थोड़ा सा शक होता है,

और वो आवाज की तरफ चल पड़ती है। थोड़ी आगे जाने के बाद आवाजें साफ-साफ सुनाई देने लगती हैं। तभी वो नीचे जमीन पर दो परछाई देखती है। सुखजीत थोड़ी सी आगे जाती है, और देखती है की मीता चरणजीत को दीवार से लगाकर चूस रहा होता है। ये देखकर उसकी चूत में से पानी निकल जाता है, और फिर सुखजीत आगे जाकर बोलती है।

सुखजीत- “हाए बहनजी अकेले-अकेले स्वाद ले रही हो आप तो?” सुखजीत की आवाज सुनते ही वो दोनों एकदम डर जाते हैं।

चरणजीत सुखजीत को देखकर बोली- “बहनजी आप भी ले लो स्वाद, आपको कौन सा मन नहीं करता..."

सुखजीत- “मन मेरा आपको चूसने का कर रहा है..” और सुखजीत चरणजीत को दीवार से लगाकर चूसने लगती है और अपने हाथ उसकी चूचियों पर फेरने लगती है।

मीता सुखजीत जैसे खूबसूरत रंडी को देखकर चरणजीत को भूल जाता है। मीता सुखजीत के चूतरों पर हाथ फेरने लगता है।

जैसे ही सुखजीत को अपने चूतरों पर हाथ महसूस होते हैं। तभी वो अपने चूतर पीछे करके और ज्यादा बाहर निकल लेती है। मीता समझ जाता है, की सुखजीत के अंदर पूरी आग लगी हुई है। मीता पीछे से सुखजीत को अपनी बाहों में भर लेता है। और सुखजीत की दोनों चूचियां अपने हाथों के पकड़कर जोर-जोर से मसलने लगता है। मीता का लण्ड सुखजीत के चूतरों पर लग रहा था।

लण्ड महसूस होते ही उसे शांति मिलती है, फिर वो अपना एक हाथ पीछे करके अपना पल्ला ऊपर उठा लेती है। सुखजीत आगे चरणजीत के होंठों को चूसने में लगी हई थी, और साथ ही वो उसकी चूचियों को भी मसल रही थी। पीछे से आज मीते की लाटरी लग चुकी थी। क्योंकी सुखजीत जैसी कमाल की औरत उसे खुद अपना पल्ला उठाकर अपनी चूत और गाण्ड दे रही थी।

तभी सुखजीत चरणजीत के होंठों को छोड़कर बोली- “बहनजी आपके रूम में कौन है?"

चरणजीत- “कोई भी नहीं है बहनजी...”

सुखजीत- चलो फिर आपके रूम में ही चलते हैं, आगे का काम वहीं पर करेगें।

चरणजीत- नहीं बहनजी वहां नहीं, क्या पता कब सरदार आ जाए।

सुखजीत- कुछ नहीं होता बहनजी। सरदार आपका बाहर मंजी पर शराब से राजा हुआ बेहोश लेटा हुआ है। उसे तो खुद नहीं पता की वो कहाँ लेटा हुआ है।

मीता- "कुछ नहीं होता भाभी चले अंदर... आज ये जाट दो-दो मस्त खूबसूरत जट्टियों को खुश करेगा। आज मैं ही तुम दोनों का असली सरदार हूँ.."

सुखजीत ये सुनते ही गर्मी से भरी एक लंबी सांस लेती है, और अपने चूतरों को जोर से मीते के लण्ड पर मारती हुई कहती है- “आहह... जट्टा आज तो मजा ही आ जाएगा..."

मीता सलवार के ऊपर से चूतर और चूचियां मसलकर बोला- "स्वाद तो आज मैं दूंगा तुम दोनों को मेरी जान..."

सुखजीत- चलो ना बहनजी, वर्ना इस मीते ने यहीं पर हम दोनों को ठोंक देना है।

चरणजीत- “कोई बात नहीं आज यहीं पर चलने दो। जो होगा देखा जाएगा...” कहते हुये चरणजीत ने सुखजीत का कुर्ता नीचे से पकड़ा और ऊपर की ओर खींचकर निकालकर नीचे फेंक दिया।
 
सुखजीत अब ब्लैक कलर की ब्रा में होती है। मीता सुखजीत ने नंगे गोरे चिकने जिश्म पर हाथ फेरकर निहाल हो जाता है, फिर वो एक झटके से ब्रा के हुक खोल देता है। चरणजीत ब्रा भी निकालकर फेंक देती है। अब सुखजीत पूरी नंगी हो जाती है और साथ ही वो मदहोश हो जाती है। सुखजीत के गोरी नंगी और चिकनी चूचियों को पकड़कर मीते को बहुत मजा आता है।

सुखजीत से अब और बर्दाश्त नहीं होता- “आह्ह... आज तो जट्टी अपने घर के अगन में ही चुदेगी..." और ये कहते ही सुखजीत अपनी सलवार का नाड़ा खोल देती है। सलवार का नाड़ा खुलते ही सलवार अपने आप उसके नंगे चिकने जिश्म से फिसलते हुए नीचे आ जाती है। फिर वो अपनी पैंटी को नीचे अपने घुटनों तक करके अपने हाथ चरणजीत के चूतरों पर रखकर वो घोड़ी बन जाती है।

इतनी आग मीते ने पहली बार देखी थी। उसने झट से अपनी धोती में से अपना लण्ड बाहर निकाला और पीछे से अपना लण्ड उसकी चूत में सेट करके, एक जोरदार धक्के से अपना पूरा लण्ड उसकी चूत में डाल देता है। लण्ड अंदर जाते ही सुखजीत गनगना होती है। सुखजीत अपने दोनों हाथों से चरणजीत के चूतरों को कसकर पकड़ लेती है

# लण्ड जोर-जोर से और निकाल दे इसकी सारी आग

फिर चरणजीत मस्त होकर बोली- “ओये मीते डाल इसकी आग...”

मीता ये सुनकर जोश में आ जाता है, और वो अब जोर-जोर से धक्के मारकर सुखजीत की चूत को चोदने लगता है। सुखजीत पूरी गरम हो जाती है, और वो अपने होंठ को अपने दांतों में दबाकर जोर-जोर से चरणजीत के चूतरों को मसल रही थी।

मीता- “भाभी पार्टी में अभी तू बिटू को देकर आई थी, और अब फिर तू मेरे आगे घोड़ी बन गई?"

सुखजीत- “मैंने कहां दी उसे? मैं उसे देने के लिए खेत में गई थी। पर उसी टाइम कोई बहेनचोद वहां आ गया। तभी मैं सलवार बांधकर वापिस पार्टी में आ गई थी.."

सुखजीत के मुँह से गालियां सुनकर मीता का जोश और ज्यादा बढ़ गया। अब वो उसके चूतरों को कसकर पकड़कर धक्के मारने लगा।

मीता- कोई बात नहीं तू फिकर ना कर भाभी, तेरी पार्टी वाली चुदास मैं निकल देता हूँ।

सुखजीत भी पूरे जोश में अपने चूतर पीछे मार-मारकर मीता का लण्ड अपनी चूत में ले रही थी। सुखजीत लण्ड के एक-एक धक्के का पूरा मजा ले रही थी। तभी बाहर से चौकीदार की आवाज आती है।

चरणजीत- “चलो अब रूम में चलते हैं, कहीं कोई आ ना जाए..."

फिर चरणजीत सुखजीत के सारे कपड़े उठाकर कमर में चली जाती है। सुखजीत भी अपनी सलवार उठाकर ऐसे ही रूम में चली जाती है। सुखजीत अंदर जाते ही सलवार और पैंटी उतारकर बेड पर अपनी टाँगें उठाकर लेट जाती है। उठी हुई टाँगें देखकर मीता जल्दी से रूम का दरवाजा बंद कर देता है।

मीता भागकर बेड पर आता है, और सुखजीत की दोनों टाँगें उठी देखकर वो झट से उसकी दोनों टाँगें अपने कंधे पर रखता है, और अपना लण्ड उसकी चूत पर रखकर एक जोरदार धक्के से अपना लण्ड उसकी चूत में डाल देता है। चरणजीत भी अब पूरी गरम हो चुकी थी, वो सुखजीत के होंठों को चूसने लगती है।

सुखजीत- “हाए बहनजी, वहां आपका लड़का अपनी नई बहू को चोद रहा है। और यहाँ उसकी मम्मी और चाची मीते के नीचे लेटी हुई हैं.”

चरणजीत- “हाए बहनजी, ऐसा ना करो मेरा लड़का लायक है। ऐसे नहीं है जैसे हमारे घर वाले है, की घर का दूध तो उबल रहा है, और साले खुद बाहर चाय पी रहे हैं...”

सुखजीत- “सही कह रही हैं बहनजी..."

सुखजीत फिर चरणजीत को एकदम खींचकर चूसने लग जाती है। दूसरी तरफ मीते का लण्ड अब जवाब देने लगता है, उसके लण्ड का सारा पानी सुखजीत की चूत में निकल जाता है। सुखजीत मीते के लण्ड के पानी की गरमी की वजह से गरम हो जाती है, और वो चरणजीत को कसकर अपनी बाहों में भर लेती है। सुखजीत की चूत की गरमी लण्ड के पानी से शांत हो जाती है।

फिर मीता उठकर पानी पीने के लिए चला जाता है, और सुखजीत अपने कपड़े डालकर अपने रूम में सोने के लिए चली जाती है। फिर मीता पानी पीकर वापिस रूम में आता है और चरणजीत को पूरा नंगी करके वो उसे 4 बार जमकर चोदता है। फिर उसकी चूत चुदाई के बाद वो वहां से चला जाता है, और चरणजीत भी आराम की नींद में सो जाती है।

* * * * * * * * * *
 
कड़ी_49

सुबह हो जाती है, और आज के दिन सुखजीत का अपने घर वापिस पटियाला जाने का होता है। रीत और सुखजीत दोनों ही अंदर ही अंदर उदास होती हैं। क्योंकी उन दोनों गाँव में जितने मजे और स्वाद लिए थे, उतने मजे उन्होंने अभी तक अपने शहर में भी नहीं लिए थे। लेकिन अब उन्हें जाना तो पड़ेगा ही। तभी रीत के यार मलिक का मेसेज आता है।

मलिक- “गुड मार्निंग मेरी जान, अब तबीयत कैसी है?

रीत- तबीयत तो ठीक है यार मेरी, पर आज हम वापिस घर जा रहे हैं।

मलिक को ये सुनकर टेन्शन हो जाती है, क्योंकी उसने अभी तक अपना लण्ड अच्छे से नहीं डाला था उसकी चूत में- :यार प्लीज़्ज़... एक या दो दिन के लिए रुक जाओ प्लीज़्ज़.."

रीत- नहीं यार मम्मी पापा नहीं मानेगें।

मलिक- जान एक बार, एक बार प्लीज़्ज़... जाते-जाते कमाद में मिलने के लिए आ जा।

रीत- नहीं यार मुश्किल है बाहर निकलना।

मलिक- "तू पिंकी को लेकर आ जा यार, कोई बहाना मारकर प्लीज़्ज़..."

रीत- चलो ठीक है, मैं आती हूँ तैयार होकर।

रीत फिर नहा धोकर तैयार हो जाती है। रीत ने काले रंग का सूट डाला हुआ था। टाइट कमीज और नीचे धोती वाली सलवार रीत ने डाली हुई थी। सिर पर उसने बालों की पोनीटेल बनाई थी। रीत पूरी कमाल की टीन पंजाबन लग रही थी। फिर वो पूरी तरह से तैयार होकर रीत के पास जाती है। वो रीत को सारी बात बता देती है। फिर वो दोनों घर से बाहर निकल गई।

दूसरी तरफ सुखजीत भी तैयार हो जाती है, उसने ब्लू कलर का सूट डाला हुआ था। कमीज एकदम उसके पेट से चिपकी हुई थी, जिसमें उसकी चूचियां एकदम साफ-साफ नजर आ रही थीं। सुखजीत के फूले हुए चूतरों ने उसके सूट के पल्ले को उठा रखा था। सुखजीत अभी-अभी तैयार हुई थी, तभी उसके यार बिटू का फोन उसके पास आ जाता है।

सुखजीत- हेलो।

बिटू- मैंने सुना है, आज तू घर वापिस जा रही है।

सुखजीत- हाँ एकदम ठीक सुना है।

बिटू- “हरपाल को एक बार कह तो सही, की ये जट्टी जाट के मुँह में मुँह डालकर रहना चाहती है। तू चली जा अपनी बेटी को साथ लेकर..."

सुखजीत- “हाए मैं मर जाऊँ, ये जट्टी तो खुद चाहती है की अपने असली जाट के मुँह में मुँह डालकर रहूं। पर क्या करूँ उस सरदार ने भी तो मेरी लेनी है..."

बिटू- “तभी तो तेरा सरदार तेरी चूत मारता नहीं। तेरी जैसी कमाल की औरत को तो मेरे जैसा लंबा मोटा लण्ड चाहिये। ताकी तुझे कभी उंगलियों से टाइम ना पास करना पड़े। अच्छा चल अब आखिरी बार मिल ले यार..."

सुखजीत- “नहीं नहीं बिटू, अब नहीं आया जाएगा..."

बिटू- आ जा भाभी जहाँ पर भैंसें बँधी हुई हैं। वहां पर परली पड़ी हुई है, उसके पीछे आ जा जल्दी से।

सुखजीत- अब क्या करना है मिलकर?

बिटू- जाते-जाते एक बार मिल तो जा, फिर पता नहीं तूने कब आना है गाँव में।

सुखजीत- ठीक है, मैं आती हूँ।

सुखजीत रूम से बाहर निकलती है और देखती है की हरपाल कार में सामान रख रहा होता है। और सुखजीत मोका देखकर वहां से खिसक जाती है। वो वहीं पर जाती है यहाँ उसके यार बिटू ने उसे बुलाया था। सुखजीत को डर लग रहा था, की कहीं कोई बिहारी उसे ना देख ले। क्योंकी सारे काम करने वाले बिहारी ही वहां पर रहते थे। फिर उसे वो जगह दिख जाती है, जहाँ उसे बिटू ने आने को कहा था।

वो वहां जाती है, और देखती है की वहां बिटू पहले से खड़ा उसका इंतेजार कर रहा था। बिटू सुखजीत को देखते ही उसको कसकर अपनी बाहों में भर लेता है, और अपने हाथों से उसके चूतरों को कसकर मसल देता है। सुखजीत की आँखें एकदम से बंद हो जाती हैं, सुखजीत अपने दिल का डर दूर करने के लिए बोली।

सुखजीत- “यहाँ पर कोई बिहारी तो नहीं है ना, कहीं एक और स्यापा ना पड़ जाए.."

बिटू- नहीं यार, वो बहनचोद सारे गये हुए हैं।

सुखजीत- ठीक है, अब मुझे जाने दो भाईजी।

बिटू सुखजीत को उठाकर परली पर फेंक देता है, और खुद उसके ऊपर आकर वो बोला- “बहनचोद अकेले में भी भाई-भाई कहती है तू मुझे, अकेले में तो मैं अब तेरा यार हूँ। मैं तो कहता हूँ, तू यहीं पर रह मैं तेरी दिन रात गाण्ड भी मारूँगा."

सुखजीत- “भाईजी मुझे तो आज अपने परिवार के साथ जाना ही होगा, और वैसे भी मैं कौन सा आपको छोड़कर जा रही हूँ। जब भी आपका दिल करे आ जाना पटियाला। और अब तो मुझे जाने दो, आज मेरा सरदार पूरे होश में है...”

बिटू तभी सुखजीत के कमीज के बड़े से गले में हाथ डालकर उसकी चूचियां बाहर निकाल लेता है, और उसकी चूचियों के निपल पर जीभ रगड़कर बोला- "तेरा सरदार होश में है, पर तेरा यार तो अभी भी तेरे नशे में है.."

बिटू की बातें सुखजीत को गरम होने पर मजबूर कर रही थी। पर सुखजीत चाहते हुये भी कुछ नहीं कर सकती थी। हरपाल कभी भी उसे बुलाने के लिए उसके रूम में आ सकता था। इसलिए वो अपने ऊपर बहुत मुश्किल से कंट्रोल करती है, और फिर उसका मुँह अपनी चूचियों से अलग करके अपनी चूचियां वापिस से अंदर डालकर बोली।

सुखजीत- “बस भाईजी अब मुझे जाने दो प्लीज़्ज...”

बिटू भी समझ जाता है, की जट्टी ने आज कुछ नहीं करना। इसलिए वो जाते-जाते सुखजीत के होंठों को अच्छे से चूसकर, उसकी गाण्ड में दो उंगलियां डालकर सुखजीत को विदा करता है। सुखजीत भी अपने सूट को साफ करके और अपनी चूचियों को अच्छे से सेट करके वहां से निकल पड़ती है।
 
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