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Adultery Nakhara chadhti jawani da (नखरा चढती जवानी दा )

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प्यारेलाल- “भाभी आप जरा प्यार से चला करो..."

सुखजीत- क्यों, आप ऐसा क्यों कह रहे हो?

प्यारेलाल- भाभी आप अपनी गाण्ड को इतनी तेज मटका-मटकाकर चलती हो की पीछे अगर लड़के देखें तो उनका दिमाग खराब हो जाए।

सुखजीत प्यारेलाल की बात सुनकर कहती है- "इसी की वजह से तो वाक करने आती हूँ ताकी ये कम हो जाए..."

प्यारेलाल- इसका ये इलाज नहीं है।

सुखजीत- तो क्या इलाज है?

प्यारेलाल अब उसकी सलवार पर हाथ रखते हुए उसकी सलवार में से ही उंगली अंदर को डाल देता है। उसके ऐसे करने से वो पागल हो जाती है। और उसके मुँह से आह्ह... निकल जाती है।

अब प्यारेलाल उससे कहता है- “ये तो कसरत करने से होगा..."

सुखजीत- अच्छा तो वो कसरत कर लो। पर वहीं जहां पहले की थी।

सुखजीत और प्यारेलाल वहीं पीछे की ओर चले जाते हैं। वहां पर हर जगह खेत ही खेत होते हैं, और बड़े-बड़े पेड़ होते हैं। प्यारेलाल सुखजीत को पेड़ पर सटाकर उसके होंठों में अपने होंठ डाल देता है। उधर दूसरी तरफ अपना एक हाथ लाकर उसकी चूचियों पर रखकर उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर देता है।

उधर सुखजीत भी पेड़ से चिपकी हुई उसकी चूचियों के दबाने का मजा लेती है और उसके साथ होंठों को चुसवाती है। होंठों को चूसते हुए साथ में प्यारेलाल उसकी सलवार का नाड़ा खोल देता है जिससे की वो अब पागल हो जाती है और तभी होंठों को निकालते हुए कहती है।

सुखजीत- “प्यारेलाल, मुझे यहां डर सा लग रहा है...” दो दिन की प्यासी सुखजीत भी लण्ड लेने को बेताब थी और वो पेड़ से चिपकी हुई थी।

तभी प्यारेलाल कहता है- “भाभी तू यहां डर मत, क्योंकी यहां कोई नहीं आता है..."

इतने में अब सलवार का नाड़ा ढीला हो जाता है और फिर सलवार नीचे को गिर जाती है। प्यारेलाल उसके होंठों को चूसता रहता है और ऐसे ही फिर बाद में वो सुखजीत की पैंटी में हाथ दे देता है और उसकी चूत में उंगली डाल देता है। सुखजीत उसके ऐसे करने पर पागल हो जाती है और पागलों की तरह चुदवाने लगती है।

प्यारेलाल उसकी चूत में उंगली पेककर जोर-जोर से ऊपर नीचे करता है और थोड़ी देर करने के बाद अब उंगली को निकाल देता है। अब वो लण्ड को बाहर निकालता है और त के हाथों में देकर कहता है- “ले भाभी इसे चूस..."
 
सुखजीत भी लण्ड को देखकर नीचे बैठ जाती है और उसके लंबे और मोटे लण्ड को देखकर पागल हो जाती है। सुखजीत अब प्यारेलाल की तरफ देखती हुई कहती है- “की गाल है, इस बार तो ये बहुत बड़ा और टाइट है...”

प्यारेलाल- इसमें क्या होना ये सब आपके फिगर का कमाल है।

सुखजीत- “अच्छा.." और सुखजीत उसको हाथों में लेकर ऊपर-नीचे करती है और लण्ड पर एक किस भी कर देती है।

प्यारेलाल- “भाभी अब इसे मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दे...”

सुखजीत ने पहले उसको अपने चेहरे पर घुमाया और फिर उसके बाद ऐसे ही मुँह में ले लिया और बड़े ही मजे से चूसने लगी। प्यारेलाल को भी बहुत मजा आ रहा था और वो मजे से लण्ड को चुसवा रहा था। सुखजीत बड़े ही मजे से लोलीपोप की तरह लण्ड को चूस रही थी और उसपर अपनी थूक लगाकर उसे पूरा गीला कर रही थी।

और फिर ऐसे ही बीच-बीच में गले में लेकर वो लण्ड को और पागल कर रही थी।

प्यारेलाल को भी इतनी सुंदर भाभी के मुँह में लण्ड को चुसवाने का खूब मजा आ रहा था। फिर ऐसे ही अब प्यारेलाल उसको मुँह से लण्ड निकालने को कहता है और सुखजीत को पेड़ के साथ लगाकर झुकने को कहता है

और वो धीरे-धीरे झुक जाती है।

अब वो उसको घोड़ी बनाकर उसकी सलवार और पैंटी नीचे कर देता है और अपनी लोवर भी नीचे करके अपना लण्ड उसकी चूत पर रख देता है। अब सुखजीत थोड़ा पीछे होकर लण्ड को चूत में लेने के लिए कहती है।

""

प्यारेलाल- "तो अब कसरत के लिए तैयार है भाभी तू?"

सुखजीत- हाँ हाँ मैं तैयार हूँ।

प्यारेलाल अब लण्ड को चूत में डालता है तो आधा जाने से वो चीख पड़ती है और फिर ऐसे ही प्यारेलाल उसकी चूत में आधे से ज्यादा लण्ड डालकर चोदने लगता है।

अब सुखजीत भी चुदाई का खूब मजा ले रही होती है। वो तो जैसे पागल हो रही होती है। प्यारेलाल उसकी चूत को अब जोर-जोर चोदने लगता है। सुखजीत भी अहह... करती हुई पूरे मजे लेती है और पेड़ को पकड़कर खूब चुदवाती है।

उन दोनों की वहां जो सिचुयेशन होती है उसमें उनका फँसने का भी डर होता है। पर उसी डर में चुदाई का अपना ही मजा होता है। अब प्यारेलाल उसकी कमीज में हाथ देकर उसकी चूचियों को दबाते हुए चोदने लगता है। उनको ऐसे करते हुए अब तक 30 मिनट हो जाते है, और उधर सुखजीत का एक बार हो जाता है।

अब जब ऐसे ही काफी देर तक करने के बाद प्यारेलाल को लगता है की अब उसका होने वाला है तो वो भी मजे से चोदने लगता है, उसका मन होता है की वो अंदर ही निकाल दे पर वो ऐसा नहीं कर सकता। फिर वो लण्ड को जोर-जोर से चोदकर बाहर निकालता है और फिर सुखजीत की गाण्ड पर निकाल देता है। सुखजीत भी बिना माल को साफ किए पैंटी डालकर सलवार ऊपर करके नाड़ा बाँधती है और फिर उसके बाद वहां से जाने लगती है। तभी प्यारेलाल उसकी बाजू पकड़कर अपनी ओर खींचा है तो वो उसकी छाती से लग जाती है।

प्यारेलाल कहता है- “एक बार हो जाए दुबारा..."

सुखजीत पीछे होती हुई कहती है- “नहीं जी, अब अगली बार का प्रोग्राम बनाना ओके... अब मैं जा रही हूँ..” और ये कहकर वो घर आ जाती है।

घर पर शीला खाना बनाकर रखी होती है और फिर हरपाल के आने पर सब खाना खाते हैं और फिर सब सो जाते हैं।

***** *****
 
कड़ी_59

अगले दिन चढ़ जाता है, और आज सोच में पड़ी रीत को आज रिंकू के साथ डेट पर जाना पड़ रहा था। पर अपने यार मलिक को धोखा नहीं दे रही थी, सिर्फ अपने प्यार को बचा रही थी। रीत सुबह उठकर स्कूल जाने के लिए तैयार होती है। स्कूल की ड्रेस में रीत की चूचियों को सांस नहीं आ रही थी। रीत ने अपने बालों का पोनी स्टाइल किया हुआ था, जिसमें वो बहुत ही सुंदर लग रही थी। उसकी सलवार में उसके बाहर निकले मोटे-मोटे चूतर बहुत ही कमाल के लग रहे थे। उसकी कमीज का पल्ला उसके चूतरों से उठा हुआ था। ये पल्ला अब बता रहा था, की रीत अब जवान हो गई है। तभी रीत का फोन रिंग करने लगता है।

रीत देखती है, की ये नंबर रिंकू का था। वो फोन उठाकर बोली- “हेलो..."

रिंकू- गुड मार्निंग जी, तैयार हो फिर आज के लिए?

रीत- "रिंकू मेरी हिम्मत नहीं हो रही है, प्लीज़्ज़... ऐसा ना कर प्लीज़्ज़.."

रिंकू- देख रीत, तेरा भाई सोनू मेरा बहुत अच्छा और खास दोस्त है। उसे मेरी बात पर यकीन करते एक मिनट भी नहीं लगना। देख ले फिर मैं तेरे भाई को सब कुछ बता देता हूँ।

रीत डर जाती है और बोली- “ठीक है ठीक है, बोल कहां मिलना है?"

रिंकू- माल की पार्किंग में अपनी अक्टिवा पार्क कर ले, फिर मैं तुझे वहीं से पिकप कर लूँगा।

रीत- "ठीक है..” कहकर रीत फोन कट कर देती है, और फिर वो ज्योति को फोन मिलाती है।

ज्योति- हेलो।

रीत- “हेलो ज्योति, यार मैं आज स्कूल नहीं आऊँगी। ऐसा करियो तू खुद ही निकल जइओ ओके.."

ज्योति- “क्यों क्या हुआ, क्यों स्कूल नहीं आ रही है तू? लगता है आज फिर अपने यार के साथ जा रही है तू.."

रीत- नहीं यार, मेरी तबीयत ठीक नहीं है।

ज्योति- “रहने दे रीत, तू किसे बेवकूफ बना रही है। मुझे सब पता है, आज से पहले तो तूने कभी तबीयत खराब होने पर भी छुट्टी नहीं मारी। और आज तू छुट्टी मार रही है...”

रीत- सच में बीमार हूँ यार।

ज्योति- “पता है मुझे कितनी बीमार है तू, आज अपने यार के आगे जब तू सलवार खोलेगी। तब तेरी सारी की सारी बीमारी दूर हो जाएगी..."

रीत हँसते हए बोली- “ओह्ह... यार शटप यार, अब तूने जो समझना है वो समझ। पर मैं आज स्कूल नहीं आ रही हूँ ओके बाइ...”

रीत घर से अक्टिवा लेकर सीधी माल की तरफ निकल जाती है। वो पार्किंग में अपनी अक्टिवा लगा देती है। वो देखती है की रिंकू अपनी कार में बैठा उसे देखकर स्माइल कर रहा था, और उसे अंदर बैठने का इशारा करता है। रीत उसके पास जाती है और उसकी कार में जाकर बैठ जाती है। आज रिंकू की खुशी का ठिकाना नहीं होता। रीत जैसी एकदम खूबसूरत लड़की जो एक नंबर की पटोला है। वो आज उसके साथ कार की फ्रंट सीट पर बैठी हुई थी। रीत के पर्दूम की खुश्बू के पूरी कार महक जाती है।
 
रिंकू- “देख रीत यार, मैं सच में तुझे बहुत ही पसंद करता हूँ। मैं तेरा दोस्त बनना चाहता हूँ। अगर तुझे ऐसा लगता है, की मैं तेरा एक अच्छा दोस्त भी बनने के काबिल नहीं हैं। तो तू अभी के अभी कार से निकल सकती

रीत थोड़ी देर सोचती है, की वैसे रिंकू इतना खराब बंदा भी नहीं है। इसे मैं अपना दोस्त तो बना ही सकती हूँ।

और अब उसे रिंकू से दोस्ती कर ही लेनी चाहिये क्योंकी अब उसका स्कूल का बंक तो लग ही गया है।

रीत ये सब सोचकर बोली- “ठीक है रिंकू, तू आज से मेरा दोस्त है.."

रिंकू ये सुनकर खिल उठता है और खुशी के मारे थोड़ा से जोर से बोला- “हाए ओई रब्बा... मैं मर जावां... इतनी सुंदर लड़की मेरी सहेली है। खुशी के मारे कहीं मुझे कुछ हो ना जाए..."

रीत रिंकू की ये पागलपंथी देखकर हँसने लगती है। रिंकू रीत का दिल जीतने में कामयाब हो जाता है, और वो फिर वहां से कार निकल लेता है। रास्ते में रिंकू बहुत मजाक वाली बातें करके रीत को खूब हँसाता है। उसका असर ये हो रहा था, की अब रीत रिंकू ले साथ काफी अच्छा महसूस कर रही थी, और अब वो भी उससे बातें कर रही थी।

रिंकू रीत को फिर मूवी दिखाने के लिए ले जाता है। वहां एक हारर मूवी लगी हुई थी।

बाहर उस मूवी का पोस्टर देखकर ही रीत डर जाती है, और वो बोली- “रिंकू ये मूवी प्लीज़्ज... ना देखो मुझे हारर मूवी से बहुत डर लगता है."

रिंकू- फिकर ना कर रीत, में हूँ ना तेरे साथ। अगर ऐसा वैसा कुछ हुआ तो, तू मुझे कसकर पकड़ लियो।

रीत रिंकू के कंधे पर थप्पड़ मारकर बोली- “ओ चुप कर रिंकू। सीरियस्ली मुझे बहुत डर लगता है.."

रिंकू- कुछ नहीं होता रीत। चल ना देखते हैं ये हारर मूवी।

रिंकू के लाख बार कहने पर रीत उसके साथ जाने को मान जाती है। फिर वो दोनों मूवी देखने के लिए मूवी हाल में चले जाते हैं। मूवी देखने के लिए काफी सारे लोग आए हुए थे। कुछ ही देर में मूवी शुरू हो जाती है। फिल्म के बीच में ही एक बहुत डरवाना सीन आता है, जिसे देखकर रीत काफी डर जाती है, और वो कसकर रिंकू का हाथ पकड़ लेती है।

जब रीत को पता चलता है, की उसने डर के मारे रिंकू का हाथ पकड़ लिया है, तो वो शर्माकर उसका हाथ छोड़ दी। रिंकू भी ये देखकर खुश हो जाता है, क्योंकी रिंकू ने रीत को जानबूझ कर ये हारर मूवी दिखाई थी। थोड़ी ही देर में एक हाट सीन भी आ जाता है। जिसमें हीरो लड़की को पूरा नंगी करके बेड पर लेटा देता है, और एक चादर लेकर उसके ऊपर आ जाता है। फिर वो उसे जमकर चूसता है, और नीचे उसकी दोनों टाँगें खोलकर उसे ठोंक देता है।

रीत की चूत ये सीन देखते ही पानी निकालने लगती है। मोका देखकर रिंकू रीत के चूतड़ों पर हाथ फेरने लगता है। अपने चूतड़ों पर हाथ महसूस होते ही रीत ने रिंकू का हाथ साइड में कर दिया।

पर रिंकू कहां मानने वाला था, उसने फिर से एक बार अपना हाथ रीत के चूतड़ों पर रखा दिया। और उसके चूतड़ों को सलने लगा। रीत पहले ही ऐसा गरम सीन देखकर गरम हो रही थी। ऊपर से रिंकू के हाथ उसके जिश्म में आग लगाने लगते हैं।

रीत से अब अपनी आग पर कंट्रोल नहीं हो रहा था। इसलिए अब वो रिंकू को भी कुछ नहीं कह रही थी। अब रिंकू ने अपना अगला कदम उठाया। उसने अचानक से रीत का मुंह पकड़ा और उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर जोर-जोर से चूसने लगा। साथ ही उसने अपना एक हाथ रीत की चूत पर रख दिया और धीरे-धीरे उसकी चूत को मसलने लगा।

रीत पर ये इस अचानक हमले को वो समझ नहीं पाई, ऊपर से वो इतनी गरम हो चुकी थी। इसलिए अब उसे रिंकू के होंठों का भी मजा आने लगा था, वो जोर-जोर से उसके होंठों को चूसने लगी थी। तभी अचानक मूवी में एक गोली चलती है, जिसकी आवाज से रीत फिर से होश में आ जाती है, और वो रिंकू को एकदम से धक्का देकर अपने से अलग करती है, और वो उससे दूर होकर सोचने लगती है की।

रीत- “हाए रब्बा... ये क्या हो गया मेरे से..." और रीत को अपनी इस हरकत पर अब बहुत ज्यादा पछतावा हो रहा था, की उसने गर्मी गर्मी में ये क्या कर दिया था।

फिर मूवी खतम हो जाती है, और उसके स्कूल की छुट्टी का भी टाइम हो गया था। पर रीत रिंकू से कोई बात नहीं कर रही थी। फिर रिंकू उसे कार में बिठाकर रीत को माल की पार्किंग में छोड़ देता है। रीत वहां से अपनी अक्टिवा उठाकर सीधी अपने घर की ओर निकल जाती है।

अगला दिन हो जाता है और रोजाना की तरह रीत ज्योति को स्कूल लेकर आ जाती है। वो अब रिंकू के बारे सोच रही होती है। क्योंकी अब तक रिंकू से उसकी बात नहीं हुई होती है।

***** *****
 
कड़ी_60

सुखजीत आज पूरी अपनी तौर निकलकर तैयार होती है। आज सुखजीत ने सफेद कलर का सूट डाला होता है जिसमें उसकी चूचियां बहुत ही कमाल की लग रही होती है और तो उसपर काई लड़के भी फिदा हुए होते हैं।

सुखजीत के क्लब का आज उदघाटन होता है। उन्होंने स्पेशल गेस्ट एम.एल.ए. रंधावा को बुलाया होता है। आज जो फंक्सन होता है वो जगरूप के घर के सामने हो रहा होता है। सुखजीत बहुत ही अच्छे से तैयार होकर फंक्सन पर पहुँच जाती है। वहां पर पहले पाठ होता है जिसका टाइम 10:00 बजे होता है। और फिर 11:00 बजे फंक्सन, भाषण और लंच होता है।

सुखजीत अब काम करवाने लगती है। और तो और धीरे-धीरे संगत भी आनी शुरू हो जाती है, और सब पाठ अटेंड करने लगती है। फिर ऐसे ही पाठ के समय पर गगन भी पूरी तौर निकालकर वहां पर पहुँचता है। जैसे ही वो सुखजीत को सफेद सूट में देखता है तो वो उसे देखकर खुश हो जाता है। और फिर उसके बाद उसको देखते हुए बहुत ही अच्छी वाली स्माइल देता है।

सुखजीत भी उसको देखकर अच्छी वाली स्माइल पास करती है।

गगन- सत श्री अकाल जी।

सुखजीत भी स्माइल करके बोली- सत श्री अकाल जी।

गगन- आज तो कयामत हो रखी है, और प्रोग्राम भी काफी अच्छा कर रखा है।

सुखजीत- हाँ अब क्या करें। बस सब आपकी मेहरबानी है।

गगन- तो चलो फिर आज भाभी कोई प्रोग्राम बना लो।

सुखजीत- क्या बात कर रहे हो? यहां इतने सारे लोगों में कुछ नहीं हो सकता।

गगन अब उसके पास आता है और कहता है- “कुछ नहीं हो सकता, ऐसे थोड़ी होता है। कुछ तो होना ही चाहिए। और वैसे भी तेरे इस क्लब के लिए मैंने कितनी बार तेरी हेल्प करी है, और इसलिये अब तू मना नहीं कर सकती..."

सुखजीत गगन की ये सब बातें सुन रही होती है, और फिर बोली- “प्लीज़्ज़... इतने लोगों में ऐसी बात ना करो..."

गगन सुखजीत के पास आकर धीरे से बोला- "इतने लोगों में नहीं तो छुप कर हो जाए। मैंने तेरे लिए इतना कुछ किया है। अब इतना हक तो मेरा बनता है, मुझे तू 5 मिनट में जगरूप के घर पर मिल...” आज उसके घर पर कोई भी नहीं होता है, क्योंकी सब प्रोग्राम की तैयारियों में बिजी होते हैं।

सुखजीत भी आज मूड में होती है। गगन जैसे जवान लड़के को देखकर वो खुद अपनी सलवार उसके आगे उतारना चाहती है। साथ ही सुखजीत ने भी गगन से इतने सारे काम करवा लिए थे। और अब वो सारे के सारे एहसान सिर्फ 5 मिनट में उतार सकती थी। वो इधर-उधर देखकर जगरूप के घर में घुस जाती है। रास्ते में उसे जगरूप मिल जाती है, और वो सुखजीत को देखकर बोली।

जगरूप- “बहनजी आप कहां जा रहे हो, उधर एम.एल.ए. साहब आने वाले हैं..”

सुखजीत बहाना मारकर बोली- “बहन मेरा सिर दर्द कर रहा है, मैं अभी दवाई लेकर आ रही हूँ 5 मिनट में..."

जगरूप- “ठीक है बहन प्लीज़्ज़... जल्दी आना...” कहकर जगरूप वहां से चली जाती है।

सुखजीत अपने यार गगन के पास चली जाती है। गगन जैसे ही सुखजीत को देखता है, वो उसे पकड़कर दीवार से लगाकर उसके होंठों को जोर-जोर से चूसने लगा। गगन के हाथ झट से सुखजीत की चूचियों के ऊपर आ गये,

और वो जोर-जोर से उसकी चूचियों को मसलने लगा।

गगन उसकी चुन्नी को उतारकर साइड में फेंक देता है- “हाए मेरी जान आज मैं तेरे सारे लोन माफ कर दूंगा..."

सुखजीत- “हाए गगन प्लीज़्ज़... आराम से करो दर्द हो रहा है..."

गगन जोर से सुखजीत की चूचियां मसलकर बोला- “जान आज तो मैं तेरी कस-कसकर लूँगा...” फिर गगन काफी देर तक सुखजीत के जिश्म के मजे लेता है। उसके होंठ और चूचियों को काफी अच्छे से चूसता है। बीच में सुखजीत का फोन आ जाता है, पर वो 5 मिनट कहकर फिर से गगन के साथ लग जाती है।

सुखजीत के पास अब ज्यादा टाइम नहीं, ये बात गगन भी समझ जाता है इसलिए वो जल्दी-जल्दी करने लगता है। और वो सुखजीत की कमीज और ब्रा दोनों उतारकर उसे ऊपर से नंगी कर देता है। सुखजीत के नंगी चूचियां देखकर उनपर टूट पड़ता है। वो सुखजीत की चूचियां अपने मुँह में डालकर जोर-जोर से चूसने लगता है।

सुखजीत गगन के सिर को अपने हाथ से अपनी चूचियों में दबाकर पूरा स्वाद ले रही थी। गगन सुखजीत की चूचियों को चूसते हुए, उसकी सलवार और पैंटी दोनों उतार देता है, और उसकी टांगों से पैंटी और सलवार उतारकर साइड में फेंक देता है।
 
सुखजीत के मुंह से आss निकलती है, और वो गगन को अपनी टांगों के बीच में ले लेती है। गगन का लण्ड पूरा खड़ा हो गया था। गगन सुखजीत की टाँगें पकड़कर अपने कंधे पर रखा लेता है। गगन एक हाथ से सुखजीत के एक चूतड़ को पकड़ता है, और दूसरे हाथ से वो अपनी पैंट को खोलकर अपना 8" इंच लंबा मोटा लण्ड बाहर निकाल लेता है। फिर गगन सुखजीत की चूत पर अपना लण्ड रगड़ने लगता है, और वो एक धीरे से धक्का मारता है।

सुखजीत एकदम से काँप जाती है और बोलती है- “आहह... स्स्सीईई... हाए अब डाल भी दे ना। अंदर आग लगी पड़ी है मेरे... डाल अब.."

सुखजीत की बात सुनकर गगन एकदम से अपना पूरा लण्ड सुखजीत की चूत में डाल देता है। लण्ड सुखजीत की चूत को चीरता हुआ पूरा अंदर जाता है, और गगन का लण्ड सीधा सुखजीत की चूत में बच्चेदानी पर जाकर लगता है। सुखजीत एकदम लण्ड अंदर लगते ही मदहोश जाती है, और अपनी दोनों आँखें बंद करके बोली।

सुखजीत- “आहह... सीयी मजा ही आ गया..."

सुखजीत जैसी कमाल की सुंदर औरत को अपने नीचे नंगी लेटाकर वो पूरे जोश में आ गया था। गगन अपनी पूरी ताकत से सुखजीत की चूत को जोर-जोर से चोदने लगा था। सुखजीत भी नीचे लेटी अपनी दोनों आँखें बंद करके गगन के हर एक धक्के का पूरा मजा ले रही थी।

सुखजीत अब नीचे से अपनी गाण्ड उठाकर गगन का चुदाई में पूरा साथ दे रही थी। पर सुखजीत की चूत की गरमी के आगे गगन का लण्ड कुछ भी नहीं था, उसका लण्ड 10 मिनट भी सुखजीत की चूत को चोद नहीं पाया, और उसके लण्ड ने अपना सारा पानी सुखजीत की चूत में ही निकाल दिया।

जैसे ही सुखजीत को पता चला की, गगन का हो गया है। उसने जल्दी से गगन को अपने ऊपर हटाया और अपने कपड़े डालकर जल्दी से बाहर निकल गई, और सीधा प्रोग्राम में चली गई।

वहां का एम.एल.ए. रंधावा भी आया हुवा था। पाठ पूरा हो चुका था, और अब स्पीच की बारी आ गई थी। एम.एल.ए. के साथ जगरूप का पति और क्लब की हेड सुखजीत स्टेज पर बैठी होती है। जैसे ही सुखजीत स्टेज पर आती है, तो एम.एल.ए. की नजर सुखजीत के मस्त जिश्म पर पड़ती है। ऊपर से सुखजीत हँसते हुए सेक्सी सी स्माइल के साथ एम.एल.ए. से बोली।

सुखजीत- “सत श्री अकाल रंधावा जी। बहुत-बहुत धनवाद आपका जो आप हमारे क्लब के इस पहले फंक्सन में आए हो। किसी ने कोई कमी तो नहीं आने दी आपकी खतेदारी में..."

एम.एल.ए. हँसकर सत श्री अकाल बोलता है और सुखजीत के सेक्सी जिश्म को देखकर स्माइल करते हुए बोला “बहुत अच्छा लग रहा है, मुझे यहाँ आकर। और साथ ही आपके सोशल वर्क के लिए क्लब खोलना बहुत ही अच्छा विचार है..."

फिर सुखजीत स्टेज से नीचे जाती है, और एम.एल.ए. रंधावा की नजर सीधे सुखजीत के मोटे-मोटे गोल-गोल हिलते चूतरों पर जाती है। फिर जगरूप स्टेज के ऊपर आकर अपने क्लब के बारे में सबको बताती है। और सुखजीत नीचे से कुछ इनाम लेकर ऊपर आती है, जो उसने गरीब बच्चों को देने होते हैं।

प्रोग्राम में आए हुए सब लोग बहुत खुश होते हैं। क्योंकी क्लब गरीब लोगों के भले के लिए इतना काम कर रहा था। एम.एल.ए. भी खुश होता है, वो सुखजीत को देख-देखकर इनाम बच्चों को दे रहा होता है। सुखजीत भी एम.एल.ए. को देख-देखकर बार-बार स्माइल पास कर रही होती है।

प्रोग्राम बहुत ही अच्छी तरह से खतम हो जाता है। सुखजीत और क्लब को काफी सारी डोनेशन भी इकट्ठी हो जाती है। जिससे वो बैंक का लोन काफी आसानी से चुका सकती थे। एम.एल.ए. को भी सुखजीत काफी पसंद आ जाती है, और वो जाते-जाते एक बार फिर से अच्छे से सुखजीत की जवानी को अपनी आँखों से स्कैन कर लेता

सुखजीत ने भी काफी बार रंधावा को पकड़ा था, जब वो अपनी नजरों से उसके जिश्म को देख रहा था। फिर रंधावा सुखजीत के पास आता है और अपनी हवस से भरी आँखों से सुखजीत के जिश्म को देखते हुए अपनी मूछों को ताव देते हुए वो सुखजीत को अपना नंबर देता है।

रंधावा- “बहनजी कभी हमारे लिए कोई सेवा हो तो इस नंबर पर फोन कर लेना कभी भी.."

सुखजीत ने कई लण्ड का पानी पिया हआ था, वो रंधावा की बात का मतलब एक सेकेंड में समझ जाती है। की वो कौन सी सेवा की बात कर रहा है। फिर सुखजीत उसके हाथ से नंबर लेकर स्माइल करते हुए बोली- “हाँ जी भाईजी जरूर, आपकी सेवा तो चाहिए ही है बस हमें..."

फिर रंधावा वहां से चला जाता है, और प्रोग्राम पूरा खतम करने के बाद सब अपने-अपने घर चले जाते हैं।

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कड़ी_61

रीत और रिंकू के साथ हुए उस हादसे के बाद रिंकू आज रीत को मेसेज करता है, और उस दिन के लिए माफी माँगता है। रीत भी अब उसे अपना दोस्त मानने लगती है, इसलिए वो उसे माफ कर देती है। दूसरी तरफ रीत की अब मलिक के साथ बात भी काफी कम होती है। रीत मलिक को मेसेज करती है, पर मलिक उसे रिप्लाइ भी नहीं करता।

शाम का टाइम होता है, रीत का मन आज माल में शापिंग करने का हो रहा था। वो ज्योति को फोन करती है पर उसका नंबर बिजी आ रहा होता है। पर एक दो बार फिर से फोन करने पर ज्योति उसका फोन उठा लेती है।

ज्योति- हाँ डारलिंग बोल कैसे याद किया?

रीत- हर टाइम चस्का ही पड़ा रहता है तुझे।

ज्योति- हेहेहेहे... अच्छा बता कैसे याद किया?

रीत- यार माल में सेल लगी हुई है, चल चलते हैं कुछ लेने के लिए।

ज्योति- अच्छा सच में सेल लगी हुई है। रुक फिर मैं तैयार होती हूँ, तू भी आ जा।

रीत- "ठीक है मैं आती हूँ बस 5 मिनट में..” कहकर रीत फोन रखती है और शीशे के आगे खड़ी होकर अपनी कमीज उतार देती है। फिर अपनी चूचियों को देखकर अपने आपसे बातें करती है- “हाए रीत, देख तूने अपनी चूचियां इतने बड़ी-बड़ी कर लिए हैं..."

रीत शर्मा जाती है, और फिर वो अलमारी में से काला सूट निकलकर डाल लेती है। रीत अपने बालों की पोनी बना लेती है, और फिर सलवार डालकर रीत अपनी बाहर निकली गाण्ड को और बाहर निकाल लेती है। फिर वो अपनी चूचियां थोड़ी ऊपर करके उठाकर खड़ी कर लेती है और चुन्नी लेकर नीचे जाती है।

सुखजीत- बेटी कहां की तैयारी है?

रीत- ओहह... मम्मी मैं माल में जा रही हूँ, ज्योति के साथ।

सुखजीत- ठीक है ध्यान से जाना, और टाइम से घर वापिस आ जइओ बेटा।

रीत- ठीक है मम्मी।

रीत अपनी अक्टिवा निकालकर घर से सीधी ज्योति के घर चली जाती है, और उसके घर के बाहर आकर वो हार्न बजाती है। अंदर से ज्योति एकदम टाइट जीन्स और टाप डालकर बाहर आती है। जिसमें उसकी चूचियां और बड़ी-बड़ी गाण्ड एकदम मस्त लग रही होती है।

ज्योति लात उठाकर अपनी मोटी गाण्ड अक्टिवा की सीट पर रखा लेती है, और फिर वो दोनों माल की तरफ चल पड़ते हैं। रीत थोड़ी देर चुप चुप सी होती है। उसे देखकर ज्योति उससे पूछती हुई बोलती है।

ज्योति- “क्या हुआ, आज मेडम को? क्या बात आज साइलेंट मोड पर लगी हुई है क्या?"

रीत- कुछ नहीं यार मैं कुछ सोच रही हूँ।

ज्योति- क्या सोच रही है?

रीत- यार मलिक के बारे में सोच रही हूँ। काफी दिनों से उससे मेरी कोई बात नहीं हो रही है। अगर मैं मेसेज भी करूँ तो वो मुझे कहता है की मैं बिजी हूँ।

ज्योति- कोई बात नहीं, क्या पता वो कहां बिजी होगा। अच्छा तू ये बता की तूने माल में से क्या लेना है?

रीत- यार मैंने एक जीन्स लेनी है।

ज्योति- ओहह... अब मेडम ने लोगों को अपनी गाण्ड दिखानी है?

रीत- शटप यार, तू जीन्स डालती ही सिर्फ इसलिए है ना?

ज्योति- हाँ मैं तो डालती ही हूँ, सिर्फ अपनी गाण्ड लोगों को दिखाने के लिए।

रीत- तू एक नंबर की बेशर्म है।
 
ज्योति- हाँ हाँ बोल तो ऐसे रही है, जैसे तू बह्त शरीफ है। जो तूने उस दिन फ्लैट में किया था। वो कुछ कम नहीं किया मलिक के साथ।

रीत ये सुनकर शर्मा जाती है और झट से हँसकर बोलती है- “तू चुप कर प्लीज़्ज़..."

फिर वो दोनों हँसने लगती है। कुछ ही देर में माल आज जाता है। आज माल में सेल के कारण काफी भीड़ होती है। रीत स्पयकेर के शोरूम में देखती है तो वहां 50% आफ होता है। वो दोनों अंदर चली जाती है, वो सेल्समैन इतनी खूबसूरत दो लड़कियों को देखकर दीवाना सा हो जाता है, और वो उनके पास जाकर बोला।

सेल्समै- एस मेम बोलिए।

रीत- जीन्स दिखाओ।

सेल्समै- मेम आपकी वेस्ट कितनी है?

रीत- "28 इंच."

फिर वो कुछ जीन्स दिखाता है। रीत को एक ब्लू कलर की जीन्स पसंद आती है। जो बहुत टाइट होती है। वो ज्योति को दिखाकर बोलती है- “ये कैसी है ज्योति?"

ज्योति- ट्राई करके देख एक बार।

फिर रीत जीन्स ट्राई करने के लिए ट्रायल रूम में चली जाती है। इतने में ज्योति अपने मोबाइल में चैटिंग करने लगती है। करीब 5 मिनट बाद रीत जीन्स डालकर बाहर आती है। जीन्स पूरी कसी होती है, जिसने उसके चूतरों को उठाया होता है। रीत और रीत दोनों के चूतर बहुत कमाल के लग रहे थे।

सेल्समैन की नजर रीत के चूतरों पर होती है, और मोका देखकर बोलता है- "मेम अगर आप इसके साथ एक सफेद टाप ले लोगे, तो ये पूरी ड्रेस बन जाएगी और आपको पूरी ड्रेस पर अच्छा डिसकाउंट मिल जाएगा.."

ज्योति- रीत यार टाप भी ले ले डिसकाउंट तो मिल ही रहा है।

रीत- ठीक है मैं टाप भी ट्राई कर लेती हूँ।

सेल्समैन ये सुनकर खुश हो जाता है, और सोचता है, की आज इस शोणी मुटियार का खूबसूरत हुश्न देखने को मिलेगा। करीब 5 मिनट बाद रीत बाहर आती है, उसने टाप और जीन्स डाला हुआ होता है। टाप में रीत की चूचियां टाइट ब्रा होने के कारण एकदम खड़ी हो जाती हैं। अब रीत के चूतर जीन्स में से साफ-साफ नजर आ रहे थे।

रीत के मोटे-मोटे चूतर देखकर सेल्समैन से रहा नहीं जाता और वो अपना लण्ड पकड़कर पैंट के बाहर से ही मसलने लगता है। रीत अपने आपको शीशे में देखती है, और घूमकर अपने चूतरों को भी देखती है। ज्योति रीत को देखकर चूतरों की और इशारा करती है और उसके पास आकर बोली- “बहुत मस्त हैं सच में..."

रीत शर्माते हुए बोली- “चुप कर.” फिर वो ट्राई रूम में वापिस जाकर सूट डाल लेती है, और बाहर आकर ज्योति को बोलती है- “ज्योति तू भी देख ले कुछ लेना है तो?"

ज्योति उधर टंगा हुआ एक पाजामा देखती है और कहती है- “रीत तू मेरा मोबाइल पकड़ मैं इसे अभी ट्राई करके आती हूँ...”

रीत ज्योति का मोबाइल पकड़ लेती है, और ज्योति ट्राई रूम में चली जाती है। इतने में ज्योति का मोबाइल रिंग करने लगता है, वो नंबर एक अंजान नंबर होता है। रीत फोन पिक कर लेती है। रीत एकदम से उसकी आवाज पहचान जाती है, पर वो कुछ नहीं बोलती।

इतने में आगे से आवाज आती है- “क्या हुआ जान, तू कुछ बोल क्यों नहीं रही है, कहीं वो रीत तेरे साथ तो नहीं है?"

रीत अभी भी कुछ नहीं बोलती पर उसकी आँखों में आँसू आ जाते हैं।

मलिक इतने में फिर बोला- "चल यार मैं मेसेज में बात करता हूँ, अगर रीत तेरे साथ में है तो..." और फोन कट जाता है।

रीत अपने होश में नहीं होती। रीत एकदम बर्फ की तरह जम जाती है। इतने में ज्योति के फोन पर एक मेसेज आता है, और रीत उस मेसेज को खोलती है। मेसेज में लिखा होता है की- “जान मैंने तुझे कितनी बार कहा की तू रीत के साथ ज्यादा ना रहा कर। हम दोनों को बात करनी मुश्किल हो जाती है..” रीत इस मेसेज के साथ साथ बाकी सारे पुराने मेसेज भी पढ़ लेती है।

रीत के दिल में तीर लग चुका था, उसका दर्द किसी को समझ में नहीं आ सकता था। वो रोने वाली हो जाती है, वो अपने होंठों को अपने होंठों में दबाकर खड़ी होती है। तभी ट्राई रूम का दरवाजा खुलने की आवाज आती है। तभी रीत लास्ट काल डेलीट कर देती है, और जल्दी से अपने आँसू साफ करके अपने आपको नार्मल कर लेती है। फिर ज्योति के आते ही वो बोलती है।

रीत- “यार तेरा वाइब्रेट कर रहा था देख ले...”

ज्योति जल्दी से मोबाइल देखती है और मलिक का मेसेज पढ़कर वो रीत को देखती है। रीत उसके सामने ऐसे रिएक्ट करती है, जैसे उसने कुछ नहीं पढ़ा था। ज्योति कहती है- “यार तू उसको छोड़, मुझे ये बता की ये पाजामा कैसा लग रहा है?"

रीत झूठ बोलती है- “बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है.."

फिर वो दोनों वहां से निकल जाती हैं। पूरे रास्ते रीत ज्योति से कुछ नहीं बोलती, और ज्योति पीछे बैठी फोन पर लगी होती है। ज्योति को उसके घर उतारकर रीत सीधी अपने घर आ जाती है, और अपने रूम में जाकर वो अपने रूम का दरवाजा बंद करके बेड पर उल्टी लेट जाती है। फिर वो जोर-जोर से रोने लगती है, क्योंकी आज उसका दिल टूट चुका था। जिसे वो सच्चा प्यार करती थी। वो बंदा और उसकी सबसे अच्छी दोस्त मिलकर दोनों उसे धोखा दे रहे थे। रीत काफी देर तक ऐसे ही रोती है, फिर वो रोते-रोते सो जाती है।

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कड़ी_62

रात हो जाती है, और रीत अपने रूम में रोते-रोते सोई हुई थी। तभी सुखजीत की आवाज से वो उठ जाती है। रीत उठकर अपने आपको शीशे में देखती है, उसकी दोनों आँखें सूजी हुई थी। वो एक बार फिर उस पल को याद करके रोने लगती है। जिस लड़के की उसने फोन पर आवाज सुनी थी, वो और कोई नहीं मलिक ही होता है।

रीत को वो सारे मेसेज पढ़कर ये पता चल जाता है, की उसका प्यार मलिक और उसकी सबसे अच्छी दोस्त ज्योति, दोनों मिलकर उसे धोखा दे रहे हैं। जिस दिन मलिक रीत और ज्योति को फ्लैट में ले गया था। उसी दिन ज्योति मलिक के पैसे देखकर उसपर फिदा हो गई थी, और उसने रीत के साथ यार-मारी कर दी थी। रीत को अब अपने आपसे बहुत नफरत हो रही थी। वो अपने ही खयालों में खोई हुई थी। तभी सुखजीत की आवाज फिर आती है। और फिर रीत अपना मुँह हाथ धोकर नीचे डिनर करने के लिए आ जाती है।

डिनर करने के बाद रीत अपने रूम में जाकर लम्बी लेट जाती है, और सोचने लगती है की मलिक ऐसा ही था, उसने सिर्फ उसका इश्तेमाल किया था। मलिक ने रीत को एक बार ठोंका और वो साइड हो गया था। पर रीत को सबसे ज्यादा ज्योति अपनी आँखों में खटक रही थी। क्योंकी उसने मलिक जैसे धोखेबाज लड़के के लिए अपनी बरसों पुरानी दोस्ती को छोड़ दिया था। इसलिए अब रीत ज्योति से इसका बदला लेने का फैसला कर चुकी थी।

सुबह हो जाती है, और रीत रोज की तरह नहा धोकर तैयार हो जाती है। पटियाला सलवार और एकदम टाइट कमीज डालकर रीत अपनी चूचियों को एकदम गोल कर लेती है। और फिर वो अक्टिवा उठाकर स्कूल की तरफ चली जाती है। रीत का अंदर ही अंदर मन नहीं होता ज्योति की शकल देखने का। पर उसको उसके पास जाना पड़ता है, ताकी उसको जरा सा भी शक ना हो।

रीत ज्योति को उठाकर सीधे स्कूल की तरफ चल पड़ती है। रास्ते में ज्योति मोबाइल पर लगी होती है। रीत समझ जाती है, की वो मलिक के साथ लगी हुई है। इतने में ज्योति का यार हरी, बुलेट लेकर रीत की अक्टिवा के साथ-साथ चलने लगता है। ज्योति अब फोन को छोड़ देती है, और हरी को स्माइल करने लगती है।

हरी स्कर्ट में ज्योति की नंगी टाँगें देखकर बोला- "कैसी हो?"

ज्योति- ठीक हूँ।

हरी रीत की तरफ देखता है और रीत भी एक प्यारी सी स्माइल कर देती है। आज से पहले रीत ने कभी भी हरी को स्माइल नहीं करी थी। और तो और उसने कभी उसकी तरफ आज से पहले देखा तक नहीं था। पर आज रीत जैसी कमाल सेक्सी जट्टी की सेक्सी स्माइल देखकर धन्य हो जाता है, और बोला।

हरी- कैसी हो रीत?

रीत- ठीक हूँ।

फिर हरी ज्योति से बातें करने लगता है। और वो दोनों बातें करते-करते कुछ ही देर में स्कूल में पहुँच जाते हैं। रीत हरी और ज्योति के आगे चल रही होती है। जिससे हरी की नजरें रीत के मोटे-मोटे गोल चूतरों से हटने के नाम तक नहीं ले रही होती हैं। हरी का लण्ड ज्योति से बातें करते-करते खड़ा हो जाता है। रीत को भी पता होता है, की हरी की आँखें कहां पर जमी हुई हैं।

फिर सब क्लास में चले जाते हैं, और स्टडी शुरू हो जाती है। लंच टाइम होता है, और बेल बजते ही ज्योति धीरे से अपने बैग में से अपना फोन निकालकर सीधा अपनी स्कर्ट की पाकेट में डाल लेटी है। और फिर वहां क्लास रूम से बाहर जाने लगती है, वो जाते-जाते रीत से बोली।

ज्योति- “रीत मैं अभी आती हूँ बाथरूम करके...”
 
रीत भी उसे मीठी सी स्माइल करके बोली- “ठीक है जा तू."

पर रीत को पता होता है, की वो कौन सा बाथरूम करने गई है। इतने में रीत पीछे बैठे हरी को देखकर कातिल स्माइल पास कर देती है। जिसको देखकर हरी से अब और नहीं रहा जाता, और वो अब उठकर रीत के साथ आकर उसकी बेंच पर बैठ जाता है। हरी की तरफ रीत की कमीज का पल्ला थोड़ा उठा होता है। जिसके कारण हरी के सामने रीत के मोटे-मोटे चूतड़ थे, हरी बार-बार वहीं पर देख रहा था। रीत हरी की नजरों को पढ़ चुकी थी। अब वो मोका देखकर हरी से बोली।

रीत- “क्या बात है हरी, आजकल तू स्कूल नहीं आता?"

हरी- “ओहह... यार ऐसी कोई बात नहीं है। क्योंकी मैंने सारी ट्यूशन रखी हई है, मैं वहां पर सारी स्टडी कर लेता हूँ। अगर कोई दिक्कत आती है तो मैं ज्योति से बात कर लेता हूँ..."

रीत प्यारी सी स्माइल करके हरी से बोली- “अच्छा अगर कोई दोस्त तुझे याद करती हो, तो क्या तू उसके लिए भी स्कूल नहीं आएगा क्या?"

हरी को यकीन ही नहीं हो रहा था। क्योंकी रीत ने कभी हरी को भाव तक नहीं दिया था, और आज उसने हरी को अपना दोस्त बता दिया था।

हरी- “अच्छा कौन करती है याद मुझे? जरा मैं भी तो जानूं?"

रीत- अच्छा अच्छा तू सिर्फ ज्योति का ही दोस्त है, हमारा कुछ भी नहीं है क्या तू?

हरी- तूने कभी अपना माना ही नहीं।

रीत- तू भी तो सिर्फ ज्योति का ही है, हमारा कहां तू कुछ है?

हरी- तू एक बार मोका तो दे, मैं तेरा हो जाऊँगा।

रीत बीच की दीवार वाली साइड बैठी हुई थी, और हरी बेंच के दूसरे कोने में बैठा हुआ था। रीत बिना कुछ बोले खड़ी हो जाती है, और वो हरी के लण्ड के ऊपर अपने चूतर रगड़कर आगे निकल जाती है। और पीछे मुड़कर स्माइल करते हुए वो हरी से बोली।

रीत- “हरी मोका मिलता नहीं, लेना पड़ता है..” कहकर रीत हँसकर वहां से चली जाती है।

हरी रीत का ये अंदाज देखकर एकदम जाम गया था। और उसका लण्ड अब रीत से बातें करने लगा था। ऊपर से उसके लण्ड पर रीत अपने सेक्सी चूतर रगड़कर चली गई थी। इससे हरी और उसके लण्ड का बुरा हाल हो गया था। इससे हरी का लण्ड से थोड़ा सा पानी भी निकल गया था। रीत ने जाते-जाते हरी के अंदर ऐसी आग भर दी थी, जो आग कभी भी उसे ज्योति के अंदर देखने को मिली नहीं थी। हरी का लण्ड उस आग में जलकर अपना पानी छोड़ने लगा था। रीत उसे स्माइल करके वहां से बाहर निकल चुकी थी। इससे हरी रीत का अब आशिक बन चुका था।

क्लास फिर से शुरू हो जाती है। ज्योति वापिस आ जाती है और रीत एकदम नार्मल होकर उसके पास बैठी हुई थी, और हरी भी ज्योति के साथ बातें कर रहा होता है। पर उसका सारा ध्यान रीत और उसके सेक्स से भरे जिश्म पर होता है। रीत भी ज्योति से बचकर बार-बार हरी को स्माइल कर रही थी। जिसे देखकर हरी पागल हो रहा होता है।

ऐसे ही पूरा दिन निकल जाता है, और फिर स्कूल की छुट्टी हो जाती है।

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