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कड़ी_63
स्कूल की छुट्टी हो जाती है और रीत अपनी अक्टिवा लेने के लिए पार्किंग में जाती है। और ज्योति बाहर खड़ी होती है, हरी मोका देखकर अपनी बुलेट लेने के बहाने रीत के पास जाता है और रीत से बोला।
हरी- “किसी ने सही कहा है, मोका मिलता नहीं लेना पड़ता है। देखो आज मैंने बात करने का मोका ले लिया..."
रीत हँसकर बोली- अच्छा जी, वो जो आपकी सहेली बाहर खड़ी है, उसका क्या होगा फिर?
हरी- अब उसका भी कुछ करना होगा।
रीत- अच्छा फिर ऐसा करो पहले उसका कुछ करके, फिर आप मेरे साथ बात करना।
हरी- ठीक है।
फिर हरी अपनी बुलेट स्टार्ट करता है, और वहां से चला जाता है। रीत भी ज्योति को लेकर स्कूल से निकल लेती है। उसे उसके घर छोड़कर आगे अपने घर की ओर निकलती है। जैसे ही रीत ज्योति को उसके घर छोड़ती है, तभी हरी अपनी बुलेट उसके साथ लगाकर चलने लगता है।
रीत उसको देखकर फिर से स्माइल करती है, और अपने मन में सोचती है- "ये मुर्गा फँस गया मेरे जाल में.."
हरी- मिल गया जी मोका अब तो।
रीत- अब मोका मिल गया है, तो मोका का फायदा भी उठाओ ना।
हरी का लण्ड रीत की डबल मीनिंग बातें सुनकर खड़ा हो जाता है और फिर बोला- “कैसे उठाऊँ रीत?"
रीत- क्या?
हरी- मोका का फायदा?
रीत भी हरी की बातों का मतलब समझ जाती है और बोलती है- “बातें करके और कैसे?"
हरी- वैसे बातें तो फोन पर काफी अच्छी होती है।
रीत देखती है, की आगे उसकी कालोनी आने वाली है। इसलिए वो रुक कर हरी को अपना फोन नंबर दे देती है,
और हरी को वहां से भेज देती है। घर जाकर रीत अपने कपड़े चेंज करके अपने रूम में आराम करती है।
दूसरी तरफ सोशल क्लब की हेड सुखजीत पूरी जोर-शोर के साथ तैयार हो रही होती है। उसके बाहर निकले चूतर और उसकी चूचियां एकदम खड़ी थीं। उसकी चूचियां और चूतर ब्लू कलर के टाइट सूट में काफी अच्छी लग रही थीं। उसको इस रूप में देखकर अच्छे-अच्छों का लण्ड बड़े आराम से खड़ा हो सकता था।
सुखजीत बाहर जाने ही वाली होती है, इतने में हरपाल घर आ जाता है। हरपाल बहुत ही परेशान लग रहा होता है। और वो ऊँची आवाज में फोन पर गुस्से में किसी से बात कर रहा होता है। ये देखकर सुखजीत घबरा जाती है, क्योंकी उसने हरपाल को कभी भी इतना परेशानी में नहीं देखा था।
हरपाल ऊँची आवाज में बोल रहा था- “सर, मैंने सच में कुछ नहीं किया, मैं निर्दोष हूँ। मुझ जैसे शरीफ आदमी को फँसाने की कोशिश करी जा रही है...” ।
सुखजीत ये सुनकर अब और भी घबरा जाती है।
रीत भी अब अपने रूम से बाहर आ जाती है और बोली- “मम्मी पापा को क्या हो गया है?"
हरपाल रीत को देखकर बोला- “कुछ नहीं हुआ, तू अपने रूम में जा...” कहकर हरपाल भी अपने रूम में चला जाता है।
सुखजीत भी उसके पीछे-पीछे जाकर बोली- “क्या हुआ जी?"
हरपाल परेशानी में बोला- “कार्पोरेसन में मेरे ऊपर एक रिश्वत लेने का इल्ज़ाम लगाकर मुझे दफ्तर से निकल दिया है। पर मैंने कुछ नहीं किया है, मैं एकदम बेकसूर हूँ। मुझे फंसाया जा रहा है.."
सुखजीत अपने पति हरपाल को दिलाशा देती हुई बोली- “देखो जी कुछ नहीं होता, कोई ना कोई हल तो जरूर निकल जाएगा..."
इतने में हरपाल फिर से फोन मिलाने लगता है, अपने दोस्तों को।
इतने सोनू और रिंकू घर आ जाते हैं, उन दोनों को कुछ भी नहीं पता होता। वो दोनों आकर सोनू के रूम में जाते हैं। पर रिंकू सोनू के रूम में जाने से पहले रीत के रूम में जाता है। रीत के रूम का दरवाजा थोड़ा सा खुला होता है, वो उसमें से अंदर देखता है, तो उसका लण्ड एकदम से खड़ा हो जाता है, क्योंकी उसके सामने रीत की उभरी गाण्ड थी, जो साफ-साफ दिखाई देती है।
रीत अपने बेड पर उल्टी लेटी हुई थी। उसने एक टाइट पाजामा डाला हुआ था। जिसमें उसकी पैंटी भी साफ-साफ चमक रही थी। रिंकू के आगे रीत के एकदम गोल-गोल चूतर साफ-साफ नजर आ रहे थे। रीत के चूतर देखकर रिंकू का बुरा हाल हो गया था। वो अपनी पैंट में हाथ डालकर अपना लण्ड मसलने लगा था। वो सोच रहा था, की अब ऐसे बात नहीं बनेगी। अब उसे ही कुछ करना होगा, तभी उसके दिमाग एक आइडिया आता है।
स्कूल की छुट्टी हो जाती है और रीत अपनी अक्टिवा लेने के लिए पार्किंग में जाती है। और ज्योति बाहर खड़ी होती है, हरी मोका देखकर अपनी बुलेट लेने के बहाने रीत के पास जाता है और रीत से बोला।
हरी- “किसी ने सही कहा है, मोका मिलता नहीं लेना पड़ता है। देखो आज मैंने बात करने का मोका ले लिया..."
रीत हँसकर बोली- अच्छा जी, वो जो आपकी सहेली बाहर खड़ी है, उसका क्या होगा फिर?
हरी- अब उसका भी कुछ करना होगा।
रीत- अच्छा फिर ऐसा करो पहले उसका कुछ करके, फिर आप मेरे साथ बात करना।
हरी- ठीक है।
फिर हरी अपनी बुलेट स्टार्ट करता है, और वहां से चला जाता है। रीत भी ज्योति को लेकर स्कूल से निकल लेती है। उसे उसके घर छोड़कर आगे अपने घर की ओर निकलती है। जैसे ही रीत ज्योति को उसके घर छोड़ती है, तभी हरी अपनी बुलेट उसके साथ लगाकर चलने लगता है।
रीत उसको देखकर फिर से स्माइल करती है, और अपने मन में सोचती है- "ये मुर्गा फँस गया मेरे जाल में.."
हरी- मिल गया जी मोका अब तो।
रीत- अब मोका मिल गया है, तो मोका का फायदा भी उठाओ ना।
हरी का लण्ड रीत की डबल मीनिंग बातें सुनकर खड़ा हो जाता है और फिर बोला- “कैसे उठाऊँ रीत?"
रीत- क्या?
हरी- मोका का फायदा?
रीत भी हरी की बातों का मतलब समझ जाती है और बोलती है- “बातें करके और कैसे?"
हरी- वैसे बातें तो फोन पर काफी अच्छी होती है।
रीत देखती है, की आगे उसकी कालोनी आने वाली है। इसलिए वो रुक कर हरी को अपना फोन नंबर दे देती है,
और हरी को वहां से भेज देती है। घर जाकर रीत अपने कपड़े चेंज करके अपने रूम में आराम करती है।
दूसरी तरफ सोशल क्लब की हेड सुखजीत पूरी जोर-शोर के साथ तैयार हो रही होती है। उसके बाहर निकले चूतर और उसकी चूचियां एकदम खड़ी थीं। उसकी चूचियां और चूतर ब्लू कलर के टाइट सूट में काफी अच्छी लग रही थीं। उसको इस रूप में देखकर अच्छे-अच्छों का लण्ड बड़े आराम से खड़ा हो सकता था।
सुखजीत बाहर जाने ही वाली होती है, इतने में हरपाल घर आ जाता है। हरपाल बहुत ही परेशान लग रहा होता है। और वो ऊँची आवाज में फोन पर गुस्से में किसी से बात कर रहा होता है। ये देखकर सुखजीत घबरा जाती है, क्योंकी उसने हरपाल को कभी भी इतना परेशानी में नहीं देखा था।
हरपाल ऊँची आवाज में बोल रहा था- “सर, मैंने सच में कुछ नहीं किया, मैं निर्दोष हूँ। मुझ जैसे शरीफ आदमी को फँसाने की कोशिश करी जा रही है...” ।
सुखजीत ये सुनकर अब और भी घबरा जाती है।
रीत भी अब अपने रूम से बाहर आ जाती है और बोली- “मम्मी पापा को क्या हो गया है?"
हरपाल रीत को देखकर बोला- “कुछ नहीं हुआ, तू अपने रूम में जा...” कहकर हरपाल भी अपने रूम में चला जाता है।
सुखजीत भी उसके पीछे-पीछे जाकर बोली- “क्या हुआ जी?"
हरपाल परेशानी में बोला- “कार्पोरेसन में मेरे ऊपर एक रिश्वत लेने का इल्ज़ाम लगाकर मुझे दफ्तर से निकल दिया है। पर मैंने कुछ नहीं किया है, मैं एकदम बेकसूर हूँ। मुझे फंसाया जा रहा है.."
सुखजीत अपने पति हरपाल को दिलाशा देती हुई बोली- “देखो जी कुछ नहीं होता, कोई ना कोई हल तो जरूर निकल जाएगा..."
इतने में हरपाल फिर से फोन मिलाने लगता है, अपने दोस्तों को।
इतने सोनू और रिंकू घर आ जाते हैं, उन दोनों को कुछ भी नहीं पता होता। वो दोनों आकर सोनू के रूम में जाते हैं। पर रिंकू सोनू के रूम में जाने से पहले रीत के रूम में जाता है। रीत के रूम का दरवाजा थोड़ा सा खुला होता है, वो उसमें से अंदर देखता है, तो उसका लण्ड एकदम से खड़ा हो जाता है, क्योंकी उसके सामने रीत की उभरी गाण्ड थी, जो साफ-साफ दिखाई देती है।
रीत अपने बेड पर उल्टी लेटी हुई थी। उसने एक टाइट पाजामा डाला हुआ था। जिसमें उसकी पैंटी भी साफ-साफ चमक रही थी। रिंकू के आगे रीत के एकदम गोल-गोल चूतर साफ-साफ नजर आ रहे थे। रीत के चूतर देखकर रिंकू का बुरा हाल हो गया था। वो अपनी पैंट में हाथ डालकर अपना लण्ड मसलने लगा था। वो सोच रहा था, की अब ऐसे बात नहीं बनेगी। अब उसे ही कुछ करना होगा, तभी उसके दिमाग एक आइडिया आता है।