पक्का रोड मिल गया जहाँ से वो गाड़ी गुज़री थी.
"साले बहुत दूर निकल गये होंगे? मुझे बहुत तेजी से बाइक चलानी होगी." सोचता हुआ रोहन बाइक और तेजी से भागने लगा. वो बस जल्द से जल्द उन तक पहुचना चाहता था.
गाड़ी में बिलकुल खामोशी थी. उन लोगों के साथ जो गार्ड था वो एक दम चौकस भरता हुआ था और रही रही कर चारों तरफ अपनी निगाएँ यहां वहां फिरा रहा था की कही कुछ गड़बड़ तो नहीं हो रही है. निखिल गाड़ी चलाने में व्यस्त था और बाके के अपने अपने ख़यालो में थे. उन्हें बस यहां से जल्द से जल्द निकलना था. जो उनके साथ आज घटित हुआ उसको भूल कर नैनीताल में खूब मजे करने थे. पर श्रुति कुछ भी नहीं सोच रही थी, वो तो बस उस वक्त को कोस रही थी जब वो इन सब के साथ चलने को तैयार हुई थी. वो इस सब से जल्द से जल्द च्छुतकारा पाना चाहती थी खास कर के निखिल और छाया से. वो सोच रही थी की यहां से निकालने के बाद वो डायरेक्ट दिल्ली के लिए कोई प्राइवेट टैक्सी लेगी और इन सब से च्छुतकारा पा लेगी . पर उसे और बाकी लोगों को क्या पता था की वो जो सोच रहे है क्या वैसा ही होगा? उन्हें क्या पता था की आगे उनकी मौत उनका वेट कर रही है.
निखिल जो गाड़ी ड्राइव कर रहा था अपने ख़यालो में खोया हुआ था की अचानक एक चीज़ गाड़ी के बोनट पर गिरी जिससे धम्म्म्म करके आवाज़ आई . सब चौंक गये अचानक पालक झपकते हुए यह क्या हो गया. पर जो चीज़ गाड़ी के बोनट पर गिरी थी वो दरअसल गिरी नहीं बल्कि कूदी थी और वो कोई और नहीं वही वहशी दरिंदो में से एक था जिनका खौफ पूरे जंगल में फैला हुआ था.
निखिल की समझ में नहीं आया की अचानक से यह क्या सामना आ गया? और जिसकी वजह से वो अपनी गाड़ी का संतुलन खो भरता जिसकी वजह से गाड़ी अनियंत्रण हो गयी और एक पैएड से जा टकराई. और वो वहशी दरिन्दा अब बोनट पर खड़े होकर गाड़ी की आगे की काँची तोड़ने लगा.वो गार्ड जो एक गुण से लेंस था घबरा गया क्योंकि उसने अपनी आज तक के 5 साल के कैरियर में इतना भयानक जानवर नहीं देखा था.बल्कि उसके ख्याल में वो जानवर नहीं बल्कि एक शैतान था.हां शैतान ही तो था वो . उस वहशी दरिंहे का हमला और गाड़ी का पेड़ टकराना इतना अचानक हुआ था की उस गार्ड को होश ही नहीं था की उसकी गुण कब उसके हाथ से चुत चुकी. और जब उसे अपनी गुण का एहसास हुआ तो वो गुण उठाने के लिए अपनी सीट के नीचे झुंका. पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी क्योंकि वो दरिन्दा गाड़ी के शीशे तोड़ कर पहले उस गार्ड की गर्दन एक ही झटके में अलग कर दिया. यह देखकर गाड़ी में भायते बाके के लोग चीख पुकार करने लगे. उन्हें भी नहीं समझ में आया की यह एकदम से अचानक क्या हो गया. उस गार्ड की गर्दन अलग करने के बाद वो दरिन्दा निखिल की तरफ बढ़ा.
निखिल इससे पहले की दरवाजा खोल के बाहर भागता उस दरिंदे ने उसकी गर्दन भी एक झटके में अलग कर दी. यह सब देख कर गाड़ी में और लोग भायते हुए अपना अपना दरवाजा खोल के बाहर की तरफ भागने लगे. जिसकी जहाँ समझ में आ रहा था वो भाग रहे थे. पर उन्हें क्या पता था जिस दरिंदे से डर कर वो दूर भाग रहे थे वो अकेला थोड़े ही आया था उन्हें मौत के घाट उतारने. उन सबके यहाँ वहाँ भागने पर उन्हें एक नयी मुसीबतों का सामना करना पड़ा क्योंकि उस दरिंदे के अलावा बाहर पहले से तीन दरिंदें और थे और वो उन की तरफ झपट रहे थे.
आहना , छाया, ऋषि, प्रतीक, निशा और श्रुति सब के सब उन दरिंदो का चंगुल में फँस चुके थे. उन सबको कुछ सोचना समझने का मौका मिल पाता उससे पहले ही वो सब हैवान उन पर झपट पड़े. श्रुति ने देखा की आहना और ऋषि को तो उस दरिंदे ने एक झटके में उनका सर उनके धड़ से अलग कर दिया. वो यह सब देखकर उसके मुंह से एक चीख निकल पड़ी जिसकी वजह से वो दरिन्दा श्रुति की और लपकने लगा. अपनी और उस दरिंदे को आता देख श्रुति वहां से भागने लगी, पर उसके भागने की रफ्तार और दरिंदे की भागने की रफ्तार में फर्क था. पालक झपकते ही वो श्रुति के करीब आ गया और श्रुति को लपकने के लिए अपना हाथ बढ़ाया. श्रुति जो इतनी बदहवासी में भाग रही थी उसे अपने आगे पीछे क्या पड़ा है किसी भी चीज़ का एहसास नहीं हो रहा था. और इसलिए भागते वक्त वो एक पत्तहार से टकरा गयी और नीचे खाई की तरफ गिरने लगी. जब श्रुति अपना सालटुलन खोने के बाद नीचे की और गिर रही थी तो उस दरिंदे ने झट से उसकी और लपका और इस तरह उसके हाथ में श्रुति का जॅकेट आ..[/color]
गया. श्रुति आधी हवा में और आधी ज़मीन पर थी. उसने देखा की उसके आगे एक खाई है और पीछे यह वाहसी दरिन्दा, अगर वो उस खाई के नीचे गिरती है तो शायद वो बच सकती है या फिर मर भी सकती है पर अगर वो इस दरिंदे के हाथ में आ गयी तो वो भी उसकी वही हालत करेगा जो आहना और ऋषि के साथ किया था. उसने बिना कोई शान गवायें अपना जॅकेट जिसका कॉलर उस दरिंदे के हाथ में था उसकी ज़िप खोली और उसे अपने खड़े से आज़ाद कर दिया. उसके बाद वो नीचे की और गिरने लगी,
रोहन जल्द से जल्द उन्हें पकड़ना चाहता था. पूछना चाहता था की सालों आख़िर उस रास्ते को चोद कर वो इस रास्ते क्यों जा रहे है.. उसे पूरा पक्का यकीन था की हो ना हो वो लोग परवेज़ और रोहन की शिकायत करके उन्हें पकड़वाना चाहते है. यही सब सोचते सोचते रोहन गाड़ी भगाए जा रहा था की अचानक उसे वो गाड़ी दिख गयी जिसमें वो भात कर इस पार्क में आया था. वो अपनी बाइक की रफ्तार को और तेज कर दिया और जल्द से जल्द उन तक पहुचना चाह रहा था की तभी, अचानक..वो देखता है की एक अजीब सा दिखने वाला जानवर उनके गाड़ी पे कूड़ा और थोड़े ही देर में वो गाड़ी अपना नियंत्रण खोते खोते एक पेड़ से जा टकराई. रोहन की कुछ समझ में नहीं आ रहा था की यह अचानक से क्या हो गया. वो किस तरह का जानवर था जो गाड़ी की बोनट पे कूड़ा था. फिर रोहन भी उस गाड़ी के थोड़ा ही दूर रहा होगा की उसने देखा की गाड़ी के अंदर भायते हुए सभी लोग दरवाजा खोल कर और चीख पुकार करते हुए बाहर की और भाग रहे थे और उन सब के पीछे तीन और दरिंदे पहुंच गये.
उसने कुछ देर सोचा की वो क्या करे. फिर वो अपनी गुण निकाला और उन दरिंदो पर हमले करने लगा. उन दरिंदो में एक को गोली लगी और वो एकदम दर्द से कराह कर एक भयांक आवाज़ नाकली जैसे किसी शेयर की भी नहीं होती है..पर वो गोली उसका ज्यादा कुछ नहीं बिगाड़ पाई बल्कि वो और हिंसक हो गया और वो रोहन की और दौड़ कर आने लगा. रोहन भी बाइक चलते हुए उसके करीब आ रहा था और उस पर निशाना साधते हुए गोली चला रहा था. पर दरिन्दा वो हर गोली से बचता हुआ एक दम गुस्से में आया और एक हाथ से रोहन पर प्रहार किया. उसके इस प्राहार से रोहन संभाल नहीं सका और वो बाइक समेट उस खाई में गिरने लगा.
आह..आह...आह. श्रुति उस खाई में गिरने के बाद ऐसे ही कुछ देर गिरने के बाद कराहते हुए उठ कर बैठने की कोशिश करने लगी. पर उसे ऐसा करने में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पढ़ रहा था..क्योंकि वो खाई में गिरने के बाद जैसे तैसे अपने आपको बचाते हुए ज़मीन पर गिरी थी और इसमें वो बुरी तरह जख्मी हो गयी थी. उसके मुंह के अंदर से काफी खून बह रहा था , शायद अंदर से होंठ या जबड़े पर चोट लगी होगी और माथे पर भी काफी मर लगी हुई थी., जिसकी वजह से खून माथे से गिरकर पूरे चेहरे को लहुलहान कर रहा था. उसके हाथों पर भी काफी छोटे आई थी. उसके हाथों पर कितनी ही जगहों से चाँदी च्चिल गयी थी और वहां से भी लहू रिस रहा था. उसके पेट पर भी कई जगहों से चाँदी च्चिल गयी थी. और उसके पैर की तो और भी बुरी हालत थी वो एक पैर तो उठा भी नहीं पा रही थी.
वो घायल इस कदर हो चुकी थी की उसे उठने का मन नहीं कर रहा था, पर उसे उतना ही था क्योंकि आख़िर वो कब तक यूँही यहां पड़ी रहेगी. आख़िर उसे यहां से जल्द से जल्द निकलना भी तो था. खैर जैसे जैसे कर के वो खड़ी हुई और लंगड़ते हुए पेड़ों के सहारे आगे बढ़ने की हिम्मत करने लगी.अब उसे ठंड भी बहुत लग रही थी..क्योंकि उसने जो टी-शर्ट पहना हुआ था वो भी कई जगहों से फॅट चुका था जिसकी वजह से उसके जिस्म का कई हिस्सा भी दिख रहा था और ऊपर से जनवरी के मौसम में उत्तर भारत में और वो भी रातों को ठंड का जो आलम होता है उसे सहना हर किसी के बस की बात नहीं होती है..और श्रुति जैसे नाज़ुक, कमज़ोर और कम उमर की लड़की की तो बिलकुल नहीं
वो जैसे तैसे कर के आगे बाद रही थी तभी उसे एहसास हुआ की उसकी बाईं और काफी झाड़िया थी. वहां से दो लाल आँखें उसे घूर रही है.वो झट से उसे देखने की कोशिश करने लगी. वहां पर थोड़ा अंधेरे की वजह से पहले उसे कुछ ठीक से दिखा नहीं पर जब वो लाल आँखों वाला जब उस झाड़ियों से बाहर निकला तो उसने देखा की यह वैसा ही एक दरिन्दा है जो उस पर और उसके दोस्तों पर हमला किया था..फिर वो अचानक उसके तरफ लपकने लगा. श्रुति उस दरिंदे को.[/color]
देखकर और चीख मारते हुए घायल अवस्था में लंगड़ते हुए उससे दूर भागने लगी. पर वो दरिन्दा तो उससे कहीं ज्यादा तेज था...वो झट से श्रुति की और लपका और उसे जैसे ही अपने तेज नाखूनओ की धार से उसकी गर्दन उसके धड़ से अलग करने वाला था की अचानक..उसकी खोपड़ी पर एक गोली से हमला हुआ..वो दरिन्दा इस अचानक हमला से एक दम बौरा गया और ज़ोर ज़ोर से दहाड़ें निकालने लगा. उसकी दहाड़ ऐसी थी मज़बूत कलेजे वाला इंसान भी दहल जाए.
श्रुति जो लंगड़ते हुए भागने किस कोशिश कर रही थी, अचानक उस दरिंदे के इस तरह दहाड़ मारने पर पलटी की आख़िर इसे क्या हुआ.श्रुति ने देखा की एक व्यक्ति उस दरिंदे पर अँधा ढूंढ. अपनी गुण से गोलियां बरसा रहा था ..वो सोचने लगी की अचानक इस घने जंगल में कौन उसका मसीहा आ गया है उसकी जान बचाने को और इस भयानक दरिंदे पर यूँ बहादुरी से हमला कर रहा है. कुछ देर बाद उसने देखा की उसका मसीहा जो उस दरिंदे पर गोलियाँ बरसा रहा था अचानक रुक गया और उस दरिंदे की तरफ से कोई हलचल नहीं हो रही थी. श्रुति ने सोचा की अब सब शायद ठीक है और वो उस मसीहे की तरफ जाने लगी ताकि उसका शुक्रिया अदा कर सके जिसने इस भयंकर जानवर से उसे बचाया है और फिर सोचने लगी की वो उसे कहेगी वो उसे यहां से निकालने में भी मदद कर दे. पर श्रुति जैसे ही अपने उस मसीहे के करीब पहुँची और वो मसीहा श्रुति की तरफ पलटा उसे 1000 वॉल्ट का झटका लगा . क्योंकि उसका मसीहा कोई और नहीं बल्कि वही व्यक्ति है जो उसे और उसके दोस्तों को अगवा कर के इस जंगल में लाने पर मजबूर किया था और इसी की वजह से उसके दोस्तों को अपनी जान गँवाना पड़ा है और इसी की वजह से उसकी यह हालत हुई है. इसी की वजह से उसे इस तरह के शैतान जैसे दिखने वाले जानवर से अपनी जान बचाने के लिए उस खाई से कूदना पड़ा था और इस कदर चोटिल होना पड़ा था. इसी की वजह से उसे इस खौफनाक जंगल में फाँसी हुई है. जब उसने देखा की वही व्यक्ति उसके सामने खड़ा है तो उसके तंबान में आग लग गयी. वो भूल गयी की अभी कुछ देर पहले इसे ने उसकी इस भयानक जानवर से उसकी जान बचाई थी. उसे एक पल में ऐसा लगा की वो वही गुण उसके हाथ से लेले और उसके सीने पर इतनी गोलियां बरसा दे की गोई उसके ज़ख़्मो को गिनना भी चाहे तो ना गिन पाए. भले ही वो उसका मसीहा था, भले ही वो उसे वहशी दरिंदे से उसकी जान बचाया था, पर इस सब के पीछे यही तो जिम्मेदार था.
"तुम????....तुम फिर आ गये ?" कहते हुए श्रुति ने अपने दायें पैर से जो बिलकुल त्ीीक था उससे रोहन के अंडकोष पे एक जोरदार लात मार्डी. रोहन को अचानक हुए हमले का अंदेशा नहीं था. उसे नहीं पता था की यह लड़की जिस पर उसने अपनी गुण तानी हुई थी जब उसने उसका और इसके दोस्तों को अगवा किया था तो कैसे थर थर काँप रही थी इतनी भी क्रोदिढ हो जाएगी, उसके बाद तो और नहीं जब उसने इस वहशी दरिंदे से इसकी जान बचाई थी . वो अपना अंकोष पकड़ के भात गया. पर श्रुति ने इस पर भी बस नहीं किया, वो उसके बाद भी उसपर लाटो की बरसात जारी रही हुई थी.
"यू ब्लडी रास्कल!!!!यू ईडियट!!!! यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है...तुम्हारी वजह से हमें यहां आना पड़ा और तुम्हारी वजह से मेरे दोस्तों ने अपनी जान गँवाई.." श्रुति , रोहन पर लात और मुक्को की बारिश जारी रखे हुए कहे जा रही थी.
"आए लड़की मेरी बात तो सुन. मेरा इरादा... तुम लोगों को ..चोट पहुंचने का नहीं था." रोहन कह तो रहा था पर श्रुति उसकी एक भी बात नहीं सुन रही. जब रोहन ने देखा की यह लड़की उसकी कोई बात नहीं सुन रही है तो उसका पारा चढ़ने लगा वो सोचने लगा साले अपनी जान पर खेल कर वो उस वहशी जानवर से उसकी जान बचाया और यह कुतिया उसे ही मारने पर उतारू है. अब उसने आओ देखा ना तो वो झट से उठा और श्रुति के गाल पर एक कस का तमाचा मारा वो भी एक नहीं कई बार.
"मादरोचोड़!! भेंचोड़दड़ समझती क्या है अपने आपको? कब से समझाने की कोशिश कर रहा हूँ तो मुझे ही मर रही है मादरोचोड़." रोहन अपने गुस्से में गालया बकता श्रुति को मारे जा रहा था. श्रुति जो पहले से ही घायल थी फिर रोहन के इस तरह हमले से ज़मीन पर गिर गयी. रोहन को इसपर भी शांति नहीं मिली जब श्रुति पेट के बाल ज़मीन पर गिरी तो रोहन एक जोरदार लात श्रुति के फीचवाड़े मारा और वहां से जाते हुए यह कहना लगा.
"मर बहन की लोदी इस जंगल में . जब वो बहनचोद लोग आएँगे तो पता चलेगा, फिर करना उन सब का मुकाबला. " और फिर रोहन वहां से चला गया.
श्रुति बेचारी जो पहले से ही घायल थी, रोहन की मर खाने के बाद और भी अधमरी हो गयी थी. वो वही ज़मीन पर पड़ी रही और रोती गयी. जब काफी देर से उसका रोना हो गया तो, उसने सोचा की अब वो क्या करेगी, कैसे इस भयानक जंगल से निकलेगी. वो वापस उस खाई के ऊपर चढ़कर तो नहीं जा सकती क्योंकि उसे डर था की कही वो जानवर फिर से ना आ जाए और दूसरा वो इतनी घायल भी हो चुकी थी उसे एक एक कदम बढ़ाना मुश्किल हो रहा था तो ऊपर चदाय कैसे करती. उसे तो दूसरा कोई रास्ते के बारे में भी कुछ पता भी नहीं है और ऊपर से वो इतनी घायल हो चुकी है की उसे एक एक कदम चलना मुश्किल हो रहा था. पर उसने सोचा की अगर वो यहां ऐसे ही भाते रहेग्गी तो वो भयानक दरिन्दा फिर ना आ जाए. इससे पहले वो दो बार उस दरिंदे के हमले से बच चुकी थी पर अब शायद ऐसा ना हो. यही सब सोचते सोचते वो उठने की हिम्मत करने लगी. पर उसे उठने में बहुत कठिनाई हो रही थी. वो अपने बायें पैर को बड़ी मुश्किल से हिला पा रही थी वो उससे चलती कैसे. एक 20 साल की लड़की, जिसने अभी पूरी दुनिया देखना बाकी था, ना जाने उसने अपने लिए क्या क्या सपने संजोए थे, ना जाने कैसे कैसे ख्वाब देखे थे उसने अपने भावष्या के बारे में, मगर आज अपने आपको इस स्थिति में देखकर उसे ऐसा लगने लगा था की वो अब शायद ही यहां से ज़िंदा बचकर जा पाएगी, वो भी तब जब उसने अपनी आख़नों के सामने अपने दोस्तों की उन दरिंदो के हाथों इतनी भयानक मौत देखी थी. फिर उसे अपने मामा और पापा की याद आने लगी खासकर के अपने पापा की. आज उसे एहसास हो रहा था उसके पापा उसके लिए इतने चिंतित क्यों रहते थे, क्यों उसे इतना समझाया करते थे. उसे इस बात का एहसास हो रहा था वो अपने पापा की बातों को अनसुना कर के कितनी बड़ी गलती वो किया करती थी. उसे तो बस अपने मामा की ही बातें समझ में आती थी. उसने कभी यह नहीं सोचा की उसके लिए क्या गलत है और क्या सही. वो तो बस दौलत की चकाचौंध में खो गयी थी. फिर वो सोचने लगी और अपने उस भगवान से प्राठना करने लगी जिससे पहले आज तक उसने कभी भी उसे नहीं मना था. वो यही दुआ अपने परवर्दीगार से दुआ करने लगी के भगवान मुझे इस आफत से बच्चा ले, अगर में बच गयी तो आज के बाद कभी भी पापा की बातों का बुरा नहीं मानूँगी और मामा के दिखायें हुए रास्तो पर कभी भी नहीं चलूंगी
यही सब बातों को सोचते सोचते उसे आख़िर में हिम्मत मिली. उसके अंदर मानो एक नयी ऊर्जा सी आ गयी और वो फिर हिम्मत करके उठने की कोशिश करने लगी, बल्कि यह कहे की ज़िंदा रहने की कोशिश करने लगी. उसने देखा की कुछ दूरी पर लकड़ी का ताना पड़ा हुआ था. उसने थोड़ा रेंग रेंग वहां पर गयी और उस ताने को अपने हाथ में लिया और उसके सहारे खड़े होने लगी. अब वो उसी ताने के सहारे चलने की कोशिश करने लगी. उसके मान में यही था की वो जल्द जल्द इस जंगल से निकले. और इसके लिए पहले एक रास्ता तलाश करना होगा. वो जानती थी की रोड उस खाई के ऊपर है पर उसके अंदर इतनी हिम्मत नहीं थी वो उसपर चढ़ कर रोड की तरफ जाए. आख़िर में उसने यही तय किया की वो उस रोड की सीध में जाएगी और जहाँ ढलान थोड़ी कम होगी वहां से ऊपर चढ़ कर वो रोड पर चली जाएगी. वहां से कोई ना कोई गाड़ी जरूर गुज़रेगी तो वो उनसे मदद माँग लेगी.
रोहन को चलते चलते एक घंटा बीत चुका था और उसका दिमाग बहुत खराब था. वो यही सोच रहा था की साला कितनी मुश्किल से उस हैवान से लड़कर मैंने उस रंडी लड़की की जान बचाई थी और मादरचोड़ मेरी ही अंडवे पे लात मर दी. साला अभी तक दुख रहा है. रोहन यही सोच रहा था की वो क्या सोच कर उनके पीछे आया था और क्या वो लोग के साथ हो गया. फिर अचानक उसका ध्यान भीमा की कही हुई बातों पर गया जिसे भीमा ने विचित्र प्राणी कह रहा था कही वो यही दरिंदे तो नहीं थे. वो सोचने लगा की आख़िर यह किस तरह का..[/color]
जानवर था. वो सोचने लगा की अपने पीछले 8 सालों में उसने जंगलों में शिकार करते करते गुज़ारे थे, जिनमें से तेंदुआ, हाथी ,गेंडा, हिरण और यहां तक की शेयर के भी उसने शिकार किया था पर कभी भी उसने इस तरह का का भयानक जानवर नहीं देखा था. उसने सोचा की खैर वो जो भी हो वो कैसे इस जानवर से निपतेगा.क्योंकि वो देखा था की कैसे वो जानवर उस लड़कियों और लड़कों का शिकार किया था, कैसे वो एक झटके में सबका सर उनके धड़ से अलग किया था .वो यही सोचने लगा की उन सबकी मौत का जिम्मेदार वही है अगर वो उन्हें यहां ज़बरदस्ती नहीं लाता तो आज वो सब के सब ज़िंदा होते और नैनीताल में पार्टी कर रहे होते. पर उसको अपना मकसद पूरा करने के लिए उन सबको उसने चेहरे की तरह इस्तेमाल किया. उसका ज़मीर दिकखारने लगा की वही उन सबकी मौत का जिम्मेदार है..अचानक उसे वही लड़की का ध्यान आया जिसने उसके अंडकोष पर लात मारी थी और जिसकी वजह से वो दर्द से बिलबिला उठा था.सही तो किया था उसने. आख़िर वो इसी के लायक था. उसका गुस्सा भी जायज था भले ही उसने उसके जान बचाई थी तो क्या हुआ, आख़िर वही जिम्मेदार था उसे उस हालत में लाने का. और उसने क्या किया? उसे वही अकेला उस घने जंगल में भी सहारा चोद आया था. उस लड़की की हालत का भी तो वही जिम्मेदार था. वो सोचने लगा की वो उन लड़के लड़कियों की जान तो ना बच्चा सका पर जो ज़िंदा है उसकी जान बचले.बल्कि उसे तो वो वही अकेला चोद आया है..."शीत!!शीत!!!शीत!!! वो अपने आपको कोसने लगा की उसे उस लड़की को वहां पर अकेला चोद कर नहीं आना चाहिए था. "अरे क्या हुआ अगर उसने मेरे अंडकोष पर लात मारी तो.में इसी के लायक था.मैंने काम ही ऐसा किया है.में उनसबकी जानो का मुजरिम हूँ.वो मुझे मारेगी नहीं तो क्या मुझे प्यार करेगी? यही सब सोचते हुए उसने आख़िर में फैसला किया की चाहे कुछ भी हो जाए वो उस लड़की को सही सलामत इस जंगल से बाहर ले जाएगा. बस फिर क्या था उसके बाद वो वही पर दोबारा गया जहां वो उसे पीछे चोदा था. हालाँकि उसकी रफ्तार थोड़ी धीमी थी क्योंकि श्रुति की तरह उसे भी चोटें आई थी क्योंकि वो भी उसी खाई से गिरा था जहाँ से श्रुति गिरी थी . पर वो उतना ज्यादा घायल नहीं हुआ था क्योंकि उसे अपने आपको संभालना आता था और इस तरह के ज़कंहो का वो आदि था. खैर जब वो पहुंचा जहां वो श्रुति को रोता हुआ छोड़कर गया था तो देखा की वहां श्रुति का कोई आता पता नहीं था. वो सोचने लगा की आख़िर कहा गयी होगी यह लड़की. कही वो दरिंदे फिर आ गये हो और उसे मर डाले हो. पर अगर ऐसा नहीं हुआ होगा तो वो यहां से ज्यादा दूर नहीं गयी होगी क्योंकि एक तो वो घायल भी है.खैर उसे ढूंढ़ना तो पड़ेगा ही. फिर यही सोचता हुआ वो उसकी तलाश में निकल पड़ा.
तकरीबन 2 घंटे चलने के बाद श्रुति का पैर जवाब दे दिया था, एक तो उसके बायें पैर एक दम जख्मी था ऊपर से ठंड, भूख और प्यास भी लग रही थी. उसका पूरे चेहरे पर जो लहू बह रहा था अब वो ठंड की वजह से पूरा जम चुका था. श्रुति ने सोचा की थोड़ा वो आराम कर लेगी ताकि उसके पैरों को थोड़ी राहत मिले फिर जब थकावट दूर हो जाएगी तो फिर वो अपना सफ़र जारी रखेगी. पर उसे यहां पर इस तरह भइतने पर भी डर लग रहा था की क्या पता यहां पर वो वहशी दरिन्दा या फिर कोई और जंगली जानवर फिर ना आ जाए. पर इसके अलावा उसके पास कोई चारा भी तो नहीं था इसलिए वो वही एक पेड़ से तक लगाकर के भात गयी. फिर उसने अपना सर पेड़ से टीका दिया और फिर उसे नींद भी आने लगी...अभी वो नींद की आगोश में जा ही रही थी उसे किसी की बातें करने की आवाजें आने लगी.वो सोचने लगी की इस जंगल में उसके अलावा और यहां कौन हो सकता है ? खैर जो भी हो उसने टेयै किया की वो वहां जाएगी शायद कोई मदद करने वाला मिल जाएगा. और वो फिर हिम्मत करके अपनी जगह से उठी और उस आवाज़ की दिशा में चलने लगी. वो थोड़ा ही दूर गयी थी उसे कुछ रोशनी दिखी जैसे कोई आग लगाया है. जब वो उस आवाज़ और आग के पास पहुँची तो उसने देखा की 5 या 6 आदमियों का एक ग्रुप था, जो आग जलाए भायते थे और उस पर अपना हाथ भी ताप रहे थे और इसके अलावा वो उस आग पर कुछ सेकेंड भी रहे थे शायद कोई परिंदा था. जब श्रुति वहां पहुँची तो उन्होंने देखा की एक लड़की जो तकरीबन 20 से 21 की होगी एक दम फटे हाल में थी, उसके जिस्म पर जो कपड़ा था वो कई जगह से फटा हुआ था, और उस लड़की की छाती..[/color]
भी थोड़ी दिख रही थी, और वो पूरी लाहुलहान भी थी. यह देख कर उसमें से एक आदमी ने कहा. "राका जी? इधर देखो !
राखा जो शायद उन सब का बॉस था अपने इस आदमी की आवाज़ पर पलट कर देखा "अरे वाह वाह क्या बात है" और श्रुति के पास जाकर बोला.
"क्या रे छोकरी कौन है तू? और इधर क्या कर रही है? और तेरी यह हालत किसने की?" श्रुति ने देखा की वो कोई 45 से 50 साल का आदमी होगा, चेहरे पर बड़ी हुई शेव और वो जब श्रुति के पास आकर बातें कर रहा था तो उसके मुंह से एक बदबूदार हवा भी निकल रही थी जिसे श्रुति ने बड़ी मुश्किल से सहा. " जी में रास्ता भटक गयी हूँ, मुझे इस जंगल से बाहर जाना है. प्लीज़ मेरी मदद करो." श्रुति ने उससे राका से रिकवेस्ट करी.
"पर तेरी यह हालत किसने की कुछ बनाएगी.?" राका ने कहा.
"जी ..वो एक.बड़ा ही भयानक जानवर था उसने मेरे सारे दोस्तों को भी मर डाला, में बड़ी मुश्किल से अपनी जान बच्चा कर वहां से भाग आई." श्रुति ने कहा.
"भयानक जानवर? हहेहहे.." वो अपने साथियों की तरफ मूंड़ कर हँसने लगा.
"अरे उस भयानक जानवर का कुछ नाम तो होगा?" राका ने श्रुति से पूछा.
"मुझे उसका..नाम नहीं मालूम. वो दिखने में एक दम अजीब सा था.एक .एक .शैतान जैसा." श्रुति ने कहा.
"शैतान जैसा? यह कौन जानवर पैदा हो गया भी हमारे इस जंगल में? हहेहेहेहहे ..वो फिर से हँसने लगा.
"ठीक है छ्होरी हम तेरी मदद जरूर करेंगे...पर तुझे भी हम सब का एक काम करना पड़ेगा." राका ने श्रुति से कहा.
"जी कैसा काम?" श्रुति ने बारे मासूमियत से कहा.
"बता देंगे, पहले ज़रा यहां आकर भात जाओ, और हमारे साथ खाना खाओ." राका ने कहा.
" नो नो थॅंक्स! आप मुझे जंगल से निकालने का रास्ता बता दे में खुद ही चली जाओंगी" श्रुति ने कहा.
"अरे इतनी भी जल्दी काहे की है. अभी अभी आई हो और अभी जाने की बात ना करो." राका ने अपने पीले दाँत दिखा कर कहा. फिर उसे ज़बरदस्ती अपने साथ भाइतने लगा.
"प्लीज़ छोधिए , प्लीज़ ऐसा मत करिए प्लीज़ ई आम बेगिंग यू" श्रुति रोते हुए कही जा रही थी
"आए छ्हॉकरिया ! ज्यादा पाटर पाटर अँग्रेज़ी में बातें मत कर. अरे तू जानती है कितने दीनों से हम सबने जिस्म की प्यास नहीं भुजाई है? हम एक दम प्यासे है. हमारी प्यास भुजा दे तो हम तेरी मदद जरूर करेंगे, तू जहाँ बोलेगी हम तुझे वही पर चोद देंगे. क्यों दोस्तों? राका ने अपने दोस्तों से कहा.
"बिलकुल...बिलकुल " सब ने एक साथ कहा.
"नहीं प्लीज़..मुझे जाने दो. मुझे यह सब नहीं करना...एम्म.में अपना रास्ता खुद ढूंढ. लूँगी ..प्लीज़ लेट में गो..प्लीज़." श्रुति ने रोते हुए और अपना हाथ राका से चुधते हुए कहा.
"आए लड़की बस बहुत हुआ. इतनी देर से तुझे प्यार से समझा रहे तो तुझे समझ में नहीं आ रहा है. तू चाहे या ना चाहे हम तो तेरी जवानी का रस तो जरूर पिएँगे. अगर तू नाटक करेगी तो यह खंजर देख रही है?" राके ने उसे पास में पड़ा खंजर दिखाते हुए कहा फिर उसे आग में उस खंजर को गर्म करने लगा.
"अगर इज्जत से अपनी जवानी का दीदार नहीं कराएगी तो यह गर्म खंजर तेरे पेट में डाल दूँगा...उसके बाद तेरी जो अंतड़ियां है वो भी अंदर से जल कर खाक हो जाएगी. इसलिए तेरी भलाई इसी में है जैसा में कह रहा हूँ वैसा कर. राका ने उसे धमकाते हुए कहा.
"नो..प्लीज़ नूऊओ..में ऐसा कुछ नहीं करूँगी..प्लीज़ मुझे जाने दो." श्रुति ने गिड़गिड़ाते हुए कहा. पर राका ने उसकी एक नहीं सुनी और उसके जिस्म पर जो उसका टी-शर्ट जो उसका पूरी छाती को तो नहीं पर काफी कुछ छुपा रहा था राका ने उसके फटे हुए टी-शर्ट के टुकड़ो को पकड़ा और उसे एक झटका में फाड़ दिया. श्रुति ने अंदर ब्रा पहनने के बावजूद भी अब श्रुति का आधे से ज्यादा उसकी चुचियाँ दिख रही थी . राका ने उसे बड़ी ललचाई हुई निगाहों से देखने लगा. श्रुति हर प्रयास कर रही थी अपना आध नंगा जिस्म छुपाने की पर राका उसे ऐसा करने नहीं दिया और उसे अपने मुंह से चूमने लगा और फिर दांतें भी काटने लगे. श्रुति दर्द से एकदम बिलबिला उठी. आज से पहले किसी मर्द ने उसे इस हालत में नहीं देखा था. राका अब श्रुति पर पूरा झुक गया और उसे दीवाना वार चूमने लगा...की तभी अचानक उसे किसे के सूखे पत्तो पर चलने की आवाज़ आने लगी. उसने देखा तो उसे हैरत हुई की यह यहां कैसे?
"ओह हूओ आस. देखिए तो कौन आया है? मेहमान साहब आए है." राके ने अपने दोस्तों से कहा. जब वो यह सब बातें कर रहा तो वो श्रुति के जिस्म से थोड़ा उठ गया था जिससे शरइत को भी थोड़ा मौका मिला यह देखने का की आने वाला कौन था. उसे भी बड़ा शॉक लगा आने वाला कोई और नहीं बल्कि वही व्यक्ति था जो उसे वहां उसे उस दरिंदे से बचनाए के बाद उसी की ही पिटाई की थी और ढेर सारी गालिया भी बाकी थी[/color]
वो सोचने लगी के वो अब यहां क्या करने आया है और क्या वो यह लोग को जानता है.
"अरे रोहन साहब आपके शुभ कदम यहां कैसे पढ़ गये?" राके ने रोहन को अपनी और आते देखते हुए बोला.
"बोलिए रोहन साहब क्या हाल है आपके, आज कोई शिकार नहीं मिला क्या जो हमारी तरफ आ गये." राका ने कहा.
"नहीं राका ऐसी कोई बात नहीं है." रोहन ने बड़ी शांति से जवाब दिया.
"तो फिर यहां आने का कारण?" राका ने रोहन से वजह जानना चाहा.
"देखो में यहां उस लड़की के लिए आया हूँ, वो बेचारी मेरी वजह से उसकी यह हालत हुई है. इसलिए में उसे जल्द से जल्द यहां से निकाल के उसे उसके घर पहुचाना चाहता हूँ. " रोहन, श्रुति की तरफ इशारा करते हुए बोला.
"हिहिहिहिहीई..जब तुम यहां आए तभी में समझ गया था की तुम्हारा जरूर इस लड़की के साथ कुछ लाफद है..हहेहहे." राका हंसते हुए कहे जा रहा था. और श्रुति यही सोच रही थी रोहन को देख कर की यह आदमी भी अजीब है, पहले उसे इस खौफनाक जंगल में फँसा दिया उसके बाद उस वहशी दरिंदे से उसकी जान बचाई फिर उसे उस वीराने में अकेला चोद कर चला गया. अब फिर आया है उसे इन इंसानी हैवानो से बचाने के लिए. श्रुति को बहुत अजीब लग रहा था रोहन का नेचर. वो सोचने लगी के अगर यह इन कुत्तों से उसे बच्चा लेगा तो वो उसके बाद इसे कुछ भी नहीं कहेगेई बल्कि इसी के जरिए इस जंगल से निकालने की कोशिश करेगी. फिर जब एक बार निकल जाएगी तब उसके बाद वो इस आदमी की खैर लेगी जिसकी वजह से उसे यह सब झेलना पड़ रहा है.
"देख भी ओये मजनू की औलाद..मुझे नहीं पता की तेरा इस लड़की के साथ क्या लाफद है? तुझे इसे यहां से ला जाना है ना? ठीक है ले जाना पर..उससे पहले में और मेरे तमाम साथी इसकी जवानी का मजा लेना चाहेंगे." राका, श्रुति के छातियाँ को घूरते हुए कहा."साली बहुत मस्त माल है, एक दम नर्म और नाज़ुक. ऐसे माल रोज़ रोज़ नहीं मिलती. समझा.? चल तू वहां कोने में जाकर खड़े हो जा. जब हमारा काम हो जाएगा तो हम तुझे बुला लेंगे. फिर ले जाना इसे." राका वहां से श्रुति की तरफ जाते हुए बोला.
"देखो राका? तुम्हारी दुश्मनी मुझसे है. तुम्हें मुझसे जो करना है कर लो पर इस लड़की को जाने दो." रोहन ने राका से आग्रह करते हुए कहा.
"आबे क्यों मेरा दिमाग खराब कर रहा है. अभी में अच्छे मूंड़ में हूँ. वरना तुझे देखते ही मुझे फौरन तेरी खोपड़ी में गोली मारने का दिल करता है. पर में आज ऐसा नहीं करूँगा क्योंकि में इस नाज़ुक सी काली से खेलना चाहता हूँ. अगर तू और फिर कुछ छू छू किया ना...तो साले यही तेरी क़ब्र बना दूँगा. चल भाग यहां से.." राका ने रोहन को धक्का मारते हुए कहा.
"भागाओ रे साले को. फिर भी कुछ उछल कूद किया तो साले का गला ही काट देना." कहते हुए राका श्रुति की तरफ बढ़ने लगता है. जिसे देखकर श्रुति फिर से रोने लगती है. रोहन देखता है की श्रुति घबराई हुई है और रो भी रही है तो ना जाने उसमें कहा से एकाएक एक नयी ऊर्जा आ जाती है और वो झट से राका के पास जाता है और उसके हाथ में तामहा हुआ खंजर झपट के अपने हाथों में ले लेता है बड़ी फुर्ती दिखाते हुए उस खंजर को राका की गर्दन पर रख देता है.
"रुको भी भेंचोड़ो." रोहन ने राका के साथियों को अपने करीब आते हुए देखा तो कहा. "अगर किसी ने भी अपनी मां चुदाई तो इस मां के लंड की गर्दन यही इस के धड़ से अलग कर दूँगा." राका के साथी जहाँ थे वही रुक गये. बाज़ी अपनी और देखते हुए रोहन जल्दी से श्रुति से कहता है की.
"आए लड़की जल्दी से यहां से जितनी दूर हो सके भाग जा." रोहन का बस इतना कहना था की श्रुति फौरन खड़ी हो गयी और थोड़ा लड़खड़ाते हुए वहां से जल्दी से निकल गयी पर...वो जितनी जल्दी वहां से गयी थी उतनी ही तेजी से वापस भागते हुए आई.
"अरे क्या हुआ? वापस क्यों आ गयी? " रोहन, श्रुति को वापस आते हुए देखा तो बोला. इससे पहले की श्रुति कुछ कह पति रोहन ने बल्कि सभी ने देख लिया था की श्रुति क्यों भाग के वापस आ गयी थी. रोहन ने देखा की वैसे ही दो दरिंदे जिन्होंने इतना उत्पात मचाया हुआ था भागते हुए उन्हीं के पास आ रहे है. राका ने भी पलट कर देखा तो उस के तो होश हवास ही उड़ गये. उसे तो समझ ही नहीं आ रहा था की यह किस प्रकार का जानवर है. उसने आज तक अपनी पूरी जिंदगी में इस तरह की चीज़ नहीं देखी थी. यही हाल उसके साथियों का भी था. वो जहां खड़े थे वही खड़े रहे क्योंकि उनके कदम उनका साथ ही नहीं दे रहे थे. पर रोहन का ऐसा हाल नहीं था क्योंकि उसकी इससे पहले भी इस दरिंदे से मुठभेड़ (फाइटिंग) हो चुकी थी...[/color]
उसने फौरन राका को अपने से दूर फेंका और झट से श्रुति का हाथ पकड़ा और वहां से उल्टी दिशा में भागने लगा. श्रुति भी उसके साथ भागने लगी बावजूद इसके के उसका बाया पैर में बिलकुल ताक़त नहीं थी. पर उस वहशी दरिंदे को देखकर तो मुर्दा भी जगह जाए उसका पैर क्या चीज़ है. वो दोनों भागते रहे जितनी दूर हो सके. उन्होंने पलट कर देखने की भी कोशिश नहीं की राका और उसके साथियों का क्या हाल हो रहा होगा वहां पर. बल्कि उन्हें देखने की जरूरत भी नहीं थी क्योंकि उनकी चीखें ही उन्हें वहां का सारा हाल बता रही थी.
आधे घंटे तक भागते भागते अचानक श्रुति के बायें पैर में एकदम से दर्द उठा. और श्रुति कराहते हुए वही ज़मीन पर गिर पड़ी.
"क्या हुआ?" रोहन उसे ज़मीन पर गिरते हुए देखा तो बोला.
"मेरा पैर!!!! अब मुझमें और ताक़त नहीं है दौड़ने की बल्कि में तो अब चल भी नहीं सकती." दर्द से कराहते हुए श्रुति ने कहा. रोहन ने देखा की श्रुति वास्तव में अपना पैर पकड़ के एक दम रोने सी सूरत बनाई हुई थी. इतनी देर से दोनों के भागने के कारण वो दोनों साँसें भी तेज तेज ले रहे थे जिसकी वजह से श्रुति की दोनों चुचियाँ भी ऊपर नीचे हो रही थी. मगर रोहन का ज़हन इतना ठरकी क़िस्म का नहीं था की वो औरतों के जिस्म को निहारे. पर श्रुति की बड़ी बड़ी च्चातियाँ थी ही ऐसी और उसपर उसका जो टी-शर्ट था वो आगे से पूरा फटा हुआ था. सिर्फ़ नीचे से उसकी नाआभी तक कुछ बच्चा हुआ था. जिसकी वजह से उसकी छ्चातियाँ सिर्फ़ उसके ब्रा में ही दिख रही थी. अब अगर ऐसा नज़ारा होगा तो रोहन क्या अच्छे अच्छे ईमान वालो का ईमान डगमगा जाए. पीछे मौत भी सर पर सवार थी फिर भी इसके बावजूद रोहन अपने आपको श्रुति की दोनों कोमल छातियाँ को देखे बगैर ना रही सका. वो दो या तीन बार देखता फिर नज़र फेयर लेता. थोड़े देर बाद श्रुति को भी एहसास हुआ की पीछे आती मौत की वजह से और पाई के दर्द की वजह से वो यह भूल गयी थी के उसकी दोनों छाती आधी से ज्यादा नंगी है . क्योंकि उसके ब्रा के कप का साइज इतना भी बड़ा नहीं था की वो उसकी कोमल चुचियों को छुपा सके. श्रुति ने फौरन अपने दोनों हाथों से अपने सीने को ढकने की कोशिश की.
यह देखकर रोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ की वो क्या कर रहा था. बेचारी यह लड़की उसी की ही वजह से उसकी यह हालत हुई है और वो उसी ही बदन को निहार रहा था. उसे फौरन अपनी गलती का एहसास हुआ और जल्दी से अपनी जॅकेट उतारते हुए श्रुति की तरफ बढ़ा दिया.
"लो यह जॅकेट पहन लो." रोहन, श्रुति को जॅकेट देते हुए कहा.
"नहीं चाहिए मुझे यह तुम्हारी गंदी सी जॅकेट." श्रुति का गुस्सा अभी भी कम नहीं हुआ था. क्योंकि जब भी उसे अपनी तक़लीफ़ का एहसास होता तो इसका जिम्मेदार रोहन को ही मानती थी.
"देखो मुझे पता है के यह जॅकेट तुम अमीरों के लायक नहीं है पर इस वक्त यह तुम्हारा जिस्म ढकने के लिए काफी है." रोहन, श्रुति को समझाते हुए कहा. फिर श्रुति थोड़ा जीझक कर वो जॅकेट पकड़ ली और उसे पहनने लगी. जब उसने वो जॅकेट पहन लिया तो उसे कुछ राहत मिली. एक तो उसका जिस्म भी नुमाया था दूसरे उसे अब ठंड का एहसास थोड़ा कम लगने लगा.
"अपना पैर दिखा." रोहन, श्रुति के पास भात ते हुए कहा.
"इसकी कोई जरूरत नहीं है. पहले चोट दो फिर बाद में मरहम भी खुदी लगाने आओ." श्रुति ने रोहन पर व्यंग करते हुए कहा.
"देखो उसके बारे में बाद में बात करेंगे पहले यहां से हमें निकलना होगा वरना यहां कब और किस मोड़ पे वही दरिन्दा दोबारा आ जाए कुछ कह नहीं सकते." रोहन, श्रुति को समझाते हुए कहा. श्रुति पहले तो कुछ नहीं बोली . फिर उसे एहसास हुआ की रोहन सही कह रहा है उन्हें अभी इसी वक्त यहां से निकालने के बारे में शोचना होगा वरना वो दरिंदे पता नहीं फिर कहा से आ जाए.
"पर कैसे? मुझे तो मेरा पैर उठाया ही नहीं जा रहा है. में चलूंगी कैसे?" श्रुति ने कहा.
"हां हां में जानता हूँ, इसलिए तो कह रहा हूँ अपना पैर दिखाओ मुझे." रोहन ने कहा. श्रुति बॉटम से अपनी जीन्स को थोड़ा उठाते हुए दिखाया . रोहन ने देखा की उसकी एडी एक दम सूजी हुई थी. एडी की जो हड्डी होती है वो तो दिख ही नहीं रही थी.
"अरे बाप रे!!! यह तो एकदम सूजा हुआ है." रोहन, श्रुति की तरफ हैरत से देखते हुए कहा.
"हां मुझे पता है, तभी तो मुझे दर्द हो रहा है. " श्रुति ने च्चिदते हुए कहा.
"देखो हमें फिलहाल यहां से किसी भी सूरत में निकलना होगा और उसके लिए हमें किसी सुरक्षित जगह पर जाना होगा. अगर तू बुरा ना मानो तो क्या में तुझे सहारा दे सकता हूँ चलने में." रोहन ने श्रुति से आग्रह करते हुए कहा. श्रुति ने कुछ देर सोचा..[/color]
की क्या करे क्योंकि उसे प्राब्लम थी की रोहन उसे छ्छूए. पर इसके अलावा कोई चारा भी तो नहीं था क्योंकि उसे भी पता था की यहां से निकलना है.
"ठीक है." श्रुति ने बस इतना कहा. और फिर रोहन, श्रुति के बायें आकर उसे खड़े से सहारा देने की कोशिश करने लगा. जब श्रुति, रोहन के सहारे पूरी तरह खड़ी हो गयी तो रोहन ने कहा की वो उसके खड़े पर अपना हाथ रख ले ताकि बैलेन्स बना रहे. पहले तो श्रुति ऐसा करने में हिचकिचाई पर फिर और कोई चारा ना देख कर वो रोहन के खड़े पर अपना हाथ रख दिया. रोहन भी उसे पूरी तरह सहारे देने के लिए उसके दायें खड़े को पकड़ लिया. पहली बार उसे कोई मर्द उसके इतनी करीब आया था. रोहन के बदन से उठी हुई महक भी श्रुति को आ रही थी. श्रुति इस सब सिचुयेशन में अपने आपको कंफर्टबल महसूस नहीं कर पा रही थी. भले ही वो एक मल्टी-बिलियनेर की बेटी थी पर वो अपनी जिंदगी में कभी भी मर्दों को इतने करीब नहीं आने दी थी. उसे तो बस वेट था उस व्यक्ति का जो उसके ख्वाबो में आया करता था, वो चाहती थी की उसे वही व्यक्ति पहले छ्छूए जो उसके दिल के करीब हो. इसलिए आज तक वो वर्जिन थी. उसके ग्रुप में ऐसी कोई या शायद पूरे कॉलेज में ऐसी कोई लड़की नहीं होगी जो वर्जिन ना हो. श्रुति के अब तक वर्जिन होने पर उसके दोस्त उसका मज़ाक भी उड़ाया करते थे. उसके सपनों के राजकुमार के नाम से उसे च्चिदाते थे. और यही वजह थी की श्रुति, रोहन को अपने इतने करीब पकड़ असहज महसूस कर रही थी. उसने कभी सपने में भ नहीं सोचा होगा की जिस व्यक्ति से वो इतनी नफरत करती है वही व्यक्ति उसके इतने करीब आना वाला पहला मर्द होगा.
तकरीबन एक घंटे चलने के बाद वो दोनों काफी दूर तक आ गये थे. फिर श्रुति को थकान भी लगने लगी. उसने रोहन से कहा की ."रुको! अब मुझसे और नहीं चला जा रहा है और मुझे लगता है की शायद वो जानवर अब हमारे पीछे नहीं आएँगे तो क्या में थोड़ी देर आराम कर सकती हूँ." श्रुति ने रोहन से कहा.
"हां हां ठीक है." रोहन ने कहा. वो भी थोड़ा तक गया था तो उसने सोचा इस बहाने वो भी अपनी थकान मिटा लेगा. फिर उसने श्रुति को एक पत्थर पर भीताया और अपना भी थोड़ी दूर दूसरे पत्थर पर भात गया. तकरीबन 10 मिनट तक उन दोनों के बीह में कोई बात नहीं हुई. फिर रोहन को श्रुति के पैर के बारे में याद आया वो उठा और यहां वहां झाड़ियों में कुछ तलाश करने लगा और तलाश करते करते हुए वो थोड़ा झाड़ियों के अंदर की और चला गया. श्रुति भी देख रही थी की इसे अचानक क्या हुआ है और यह किस चीज़ को इतने जिज्ञासा से ढूंढ. रहा है. जब रोहन झाड़ियों के अंदर चला गया था तो वो थोड़ी चिंतित होने लगी की आख़िर यह कहा जा रहा है उसे अकेला चोद के. वो सोचने लगी के कही यह वापस से तो नहीं उसे अकेला चोद कर जा रहा है. वो घबरा के अपनी जगह से उठने की कोशिश कर ही रही थी तभी उसे रोहन झाड़ियों से निकलता हुआ दिखाई दिया और उसके हाथ में इस वक्त में पट्टियों जैसा कुछ था. फिर वो उन पट्टियों को लेकर एक छोटे से घड़दे में पानी पड़ा हुआ था , उस पानी से उसने उस पट्टियों को अच्छी तरह से भिगोया और फिर श्रुति ने देखा की रोहन उसी की और वो पत्तियाँ लेकर आ रहा था. वो समझ नहीं पा रही थी की अचानक उसे इस पट्टी की क्या जरूरत पढ़ गयी.
"अपनी जीन्स अपनी घुटनों तक मोड़ लो." रोहन, श्रुति के सामने घुटनों के बाल भात ते हुए कहा.
"क्या? पर क्यों?" श्रुति ने कहा.
"देख यहां कोई डॉक्टर तो आएगा नहीं तेरे इस सूजे हुए पैर का इलाज करने के लिए, इसलिए अगर अभी कुछ नहीं किया गया तो यह और सूज जाएगा. तो इसलिए जो हो सकता है में वो करने की कोशिश कर रहा हूँ इस सूजन को दूर करने के लिए." रोहन, श्रुति को समझाते हुए कहा.
"तो क्या इस पट्टियों से मेरे पैर की सूजन कम हो जाएगी?" श्रुति ने पूछा.
"पूरी तरह तो नहीं होगी लेकिन कुछ राहत तो जरूर मिलेगी." रोहन ने कहा.
"ठीक है." कहते हुए श्रुति ने अपना जीन्स को बॉटम से उठा कर थोड़ा ऊपर कर दिया.
"देख जब में इस पट्टियों को तेरे पैर में लगाओंगा तो थोड़ा जलेगा पर तू हिलना डुलना बिलकुल नहीं वरना यह निकल जाएँगी. जितना यह जलेगा उतना ही तेरे पैर की सूजन के लिए अच्छा रहेगा" रोहन उसे समझाते हुए कहा जिसके जवाब में श्रुति ने सिर्फ़ सर हिला कर यह कहना चाहा की वो उसकी बात समझ गयी है.
" जीन्स थोड़ी सी और ऊपर कर." रोहन ने फिर से श्रुति से कहा. श्रुति थोड़ा झिझकने लगी.
"देख मुझे पत्तियाँ बाँधने के लिए थोड़ी जगा चाहिए और तेरी जीन्स की वजह से मुझे..[/color]
प्राब्लम हो रही है." रोहन उसकी झिझक दूर करते हुए कहा. फिर श्रुति ने अपनी जीन्स थोड़ी और ऊपर कर ली . उसके जीन्स ऊपर करते ही रोहन को श्रुति की रात के अनहदरे में भी गोरी गोरी पिंदीलिया दिख रही थी . वो थोड़े देर उसकी पिंदीलियों के देखा फिर अपना ध्यान वहां से हटा कर पत्तियाँ बाँधने लगा. जब वो पत्तियाँ बाँध रहा था तो थोड़े ही देर के बाद श्रुति की हल्की हल्की सी दर्द से कराहने की आवाज़ आने लगी. एक तो उसके पैर के सूजन की वजह से उसे दर्द हो रहा था और जैसे के रोहन ने बताया था पत्तियाँ लगाने के बाद थोड़ा जलेगा. पर वो थोड़ा उसके लिए थोड़ा नहीं था. उसको इस कदर पट्टियों से जलन हो रही थी के उसे अपना पैर एक जगह रखना मुश्की हो रहा था पर उसने ऐसा कुछ नहीं क्योंकि वो जानती थी की अगर अपना पैर हिलाएगी तो रोहन को पत्तियाँ लगाने में दिक्कत बढ़ेगी. वो बस अपना चेहरा आसमान की तरफ करके हल्के हल्के कराहने लगी. जब रोहन पत्तियाँ लगा चुका तो उसे चिपके रहने के लिए उसे कुछ ऐसे चीज़ की जरूरत पढ़ने लगी जिससे वो पत्तियाँ वही श्रुति की टाँग में चिपकी रहें. उसकी समझ में नहीं आ रहा था की क्या करे . अचानक उसने जेब से खंजर निकाला और अपनी शर्ट की आस्तीन को फाड़ दिया और फिर उस फटे हुए आस्तीन से उसने श्रुति के पैर से चिपके हुए पट्टियों को इस तरह से बाँध दिया की आसानी से ना निकले. श्रुति को बड़ा अजीब लगा जब रोहन उसकी पत्तियाँ उसके पैर में चिपका रहा था और बाद में अपने शर्ट का आस्तीन फाड़ के उस पट्टियों को बांड दिया.
"थॅंक्स." श्रुति ने बस इतना कहा. पर जवाब में रोहन ने कुछ नहीं कहा बस उससे दूर जाकर भात गया. फिर उन दोनों के दरमियान कुछ देर तक कोई बात नहीं हुई. फिर खामोशी का सिलसिला श्रुति ने ही थोड़ा और उससे कहा.
"तुम्हें कैसे मालूम की इसी पट्टियों से मेरे पैर की सूजन कम हो जाएगी." रोहन उसकी तरफ देखा फिर गर्दन घुमा कर ज़मीन की और देखने लगा.
"क्योंकि यह पत्तियाँ में अपने ऊपर इस्तेमाल कर चुका हूँ और इससे मुझे काफी राहत मिली थी. तू फिक्र मत कर तुझे भी थोड़ी देर में राहत मिल जाएगी. रोहन उसे बताने लगा. फिर उनके बीच फिर से खामोशी हो गयी. फिर से थोड़े देर के बाद श्रुति ने ही बातों का सिलसिला शुरू करते हुए कहा
"हम इस जंगल से कैसे निकल पाएँगे? क्या तुम्हें कोई रास्ता पता है?"
"उस हैवान से बचके भागने के बाद हम कहा आ गये है यह मेरी भी कुछ समझ में नहीं आ रहा है पर ..तू फिक्र मत कर में तुझे यहां से सही सलामत निकाल दूँगा." रोहन ने कहा.
"ठीक है पर हम रास्ता कैसे तलाश करेंगे." श्रुति ने कहा.
"रास्ता तलाश करने के लिए पहले हमें यह समझना होगा की हम इस वक्त जंगल के किस जगह पर है. और वो समझने के लिए हमें वो छोटी तुम्हें दिख रही है.." रोहन ने अपनी उंगली के इशारे से श्रुति के बाईं और इशारा किया.
"हमें उस छोटी पर चढ़कर जाना होगा फिर हमें आइडिया मिलेगा की हम कहा है." रोहन अपनी बात खत्म करते हुए कहा.
"वो छोटी पर? पर हम वहां कैसे जाएँगे.मेरा मतलब है में कैसे चढ़ पाओँगी क्योंकि मेरे पैर की हालत ऐसे नहीं है की में उतनी ऊंची छोटी चढ़ सुकून." श्रुति ने हैरत से कहा.
"फिक्र मत कर कुछ नहीं होगा में हूँ ना. में तेरी मदद करूँगा. " रोहन ने कहा.
काफी देर दोनों के खामोश रहने के बाद रोहन ने कहा. "अगर तेरी थकान और तेरा पैर का दर्द कुछ कम हुआ हो तो हम चले फिर?"
"नहीं में अभी भी बिलकुल नहीं चल सकती..क्योंकि मैंने कल से कुछ भी नहीं खाई हूँ इसी वजह से मुझे बहुत ज़ोर से भूख लगी है और दूसरा ठंड भी बहुत लग रहे है." श्रुति ने बड़ी मासूमियत से कहा.
"अब तेरे लिए में खाना से कहा से लाओ..पर मैंने तो तुझे देखा था की तू दोपहर को ढाबे पर खाना कहा रही थी?" रोहन कुछ सोचते हुए कहा.
"मैंने कुछ नहीं खाया था, में बस अपने दोस्तों के साथ वहां पर भाती हुई थी." श्रुति ने जल्दी से सफाई दी. रोहन थोड़ी देर तो कुछ नहीं कहा. फिर थोड़ी देर वो रुक कर कुछ बोला.
"अच्छा एक बात बताओ मैंने तुम लोगों से उस रास्ते ना जाने के लिए कहा था, तो तुम लोग उसी रास्ते पर से दोबारा क्यों जा रहे थे . हमारी कंप्लेंट करने के लिए?" रोहन ने श्रुति से शिकायती भरे स्वर में कहा.
"नहीं. हमारा इरादा ऐसा कुछ भी नहीं था. हम सब उसी रास्ते से वापस जा रहे थे जहाँ से तुमने हम सब से कहा था. पर जब हम वहां पर पहुंचे तो वहां पर फोरेस्ट गार्ड्स की सेक्यूरिटी कुछ ज्यादा थी . शायद उस रास्ते पर कुछ हुआ था. जिसकी वजह से उन्होंने हमें वहां जाने से मना कर दिया था, और हमें उस रास्ते से जाने के लिए कहा जिस..[/color]