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Desi Sex Kahani - THE DARKNESS RISING


[color=rgb(184,](UPDATE-41)

रास्ते से हमने एंटर किया था बल्कि उन्होंने हमारे साथ में अपना एक गार्ड भी भेजा था हमारी सेफ्टी के लिए. पर अचानक क्या हुआ...पता नहीं वो अजीब से जानवर कहा से आ गये और फिर..उन्होंने.देखते ही देखते.मेरे सारे दोस्तों को मेरी ही आँखों के सामने जान से मर दिया." इतना कहते हुए श्रुति की आँखें भर आई थी.
"ओह तो यह बात थी, इसलिए वो वहां से वापस जा रहे थे.और में समझा की.." रोहन सोचने लगा.

फिर रोहन वहां से उठा और कुछ लकड़िया जमा करने लगा . जब ढेर सारी लकड़िया जमा हो गयी तो उसने उन सारी लकड़ियों एक जगह जमा किया और अपने जेब में लाइटर निकालने के लिए हाथ डाला पर उसका लाइटर उसे नहीं मिल रहा था. उसे याद आया की उसने लाइटर अपनी जॅकेट के पॉकेट में रहकी हुई है. और उसका जॅकेट इस वक्त श्रुति पहनी हुई थी .वो श्रुति से कहने लगा.
"वो ज़रा जॅकेट के अंदर वाली पॉकेट में मेरा लाइटर होगा, ज़रा देना मुझे." श्रुति थोड़ा सा जॅकेट की ज़िप खोलकर और अपने आपको थोड़ा कवर करके अपना हाथ अंदर डाला जॅकेट के अंदर वाले पॉकेट से रोहन का लाइटर निकाला और फिर अपने आपको कवर करके ज़िप को बंद कर दिया और फिर उस लाइटर को रोहन के हवाले कर दिया. रोहन उसके हाथ से लाइटर लेकर जमा की हुई पत्तियाँ और लकड़ियों में अपने लाइटर से आग जलाने की कोशिश करने लगा. पर ठंड होने की वजह से लकड़ियों में बहुत ज्यादा नामी आ गयी थी जिसकी वजह से वह आसानी से नहीं जल रही थी . लेकिन रोहन को इस तरह की नाम लकड़ियों में किस तरह आग लगते है उसे इस बात का ज्ञान था. थोड़ी और कोशिश के बाद अच्छी खासी आग जल गयी थी. फिर वो श्रुति की तरफ देख कर कहा
"यहां आ जा. तुझे ठंड लग रही है ना? इस आग की गर्मी से तुझे थोड़ी राहत मिलेगी." कहते हुए रोहन, श्रुति का बायन कंधा पकड़ कर उसे उठाने की कोशिश करने लगा. जब रोहन उसके करीब पहुंचा तो उसने आग की रोशनी में देखा की श्रुति का चेहरा खून से पूरा लाहुलाहन था और वो सुख भी चुका था..
"एक काम कर वो गड्ढे में पानी दिख रहा है ना? उससे अपना चेहरा धो ले . पूरा खून से भरा हुआ है." श्रुति ने उस गड्ढे की तरफ देखा . फिर सोचने लगी की पता नहीं कितने गंदा पानी होगा उस गड्ढे का.
"क्या सोच रही है? चल अपना चेहरा धो ले. " रोहन ने उसे फिर टोका. रोहन के दोबारा कहने पर श्रुति, रोहन के साथ उस गड्ढे की और चलने लगी और फिर उस गड्ढे में पड़े हुए मातएलए पानी को देखा और कहने लगी.
"नहीं मुझे नहीं धोना इस गंदे पानी से अपना चेहरा."
"अरे क्या हुआ? अब तुझे यहां पर बिसलेरी का पानी तो मिलेगा नहीं . जो है उसी से ढोले बहुत आराम मिलेगा. " रोहन उसे समझाते हुए कहा. रोहन के बार बार आग्रह करने पर श्रुति उस मातएलए पानी से अपना चेहरा ढोने लगी. पर जब उसके चेहरे पर पानी पड़ा तो वास्तव में उसे बड़ी राहत मिली, उसे बड़ा सुकून मिला. उसने कभी सोचा भी नहीं होगा की उसे अपने जीवन में इस तरह के पानी से भी अपना चेहरा भी धोना पड़ेगा. श्रुति ने जब पानी से अपना चेहरा धोया तो रोहन उसे सहारा देते हुए आग के पास भीता दिया और उसके पास में आकर भात गया. उस आग की रोशनी में अचानक रोहन की नज़र श्रुति के चेहरे की और गयी. पहली बार श्रुति के चेहरे की और इतने गौर से देखा. उसने देखा के सूखे हुए खून को ढोने के बाद इस लड़की का चेहरा कितना हसीना लग रहा है. उसने अंदाज़ा लगाया की इस लड़की की उम्र यही कोई मुश्किल से 20 या 21 साल होगी. कितना मासूम सा चेहरा था उसका . पर इतने मासूम चेहरे पर कितना दर्द था. बेचारी को उसी की वजह से कितना दर्द सहना पड़ रहा था. उसे अपने आप पर बहुत गुस्सा आने लगा. वो कुछ देर तक यूँही श्रुति को देखने लगा. जब श्रुति ने अचानक उसकी तरफ देखा तो उसने फौरन अपनी नज़र नीचे कर ली.
"तू थोड़े देर यही भात में अभी आता हूँ." रोहन , श्रुति से कहते हुए उठने लगा.
"कहा जा रहे हो तुम?" श्रुति ने रोहन को उत्त् ते हुए देखा तो कहा.
"बस अभी आ रहा हूँ." रोहन ने बस इतना ही कहा.
"पर में यहां अकेली कैसे रहूंगी?" श्रुति ने जल्दी से कहा.
"अरे में ज्यादा दूर नहीं जा रहा हूँ बस अभी आता हूँ, क्योंकि तुझे भूख लगी है ना तो उसका कुछ इंतजाम तो करना पड़ेगा ना?" रोहन, श्रुति को समझाते हुए कहा.
"नहीं नहीं मुझे भूख नहीं है, रहने दो में भूखी रही सकती हूँ पर प्लीज़ तुम मुझे अकेला चोद कर मत जाओ." श्रुति ने रोहन का हाथ पकड़ के ज़बरदस्ती उसे भरता दिया.
"अरे अजीब बात है, पहले मुझे भगा रही थी अब जाने नहीं दे रही है." रोहन , श्रुति की तरफ देखते हुए बोला.
"पहले की बात और थी..[/color]
 

(UPDATE-42)


तब मुझे तुम पर बहुत गुस्सा आ रहा था." श्रुति ने कहा.
"क्यों? अब गुस्सा नहीं आ रहा है? " रोहन थोड़ा मुस्कुराकर कहा. श्रुति, रोहन के इस सवाल पर थोड़ा चौंक गयी . थोड़े देर तक तो उसे कुछ कहते नहीं बना . फिर उसने कहा.
"नहीं ऐसे बात नहीं है, गुस्सा उस वक्त भी था और अब भी है. क्योंकि तुम मेरी मदद कर रहे हो तो इसलिए अभी मेरा गुस्सा थोड़ा कम है. वो तो बस मुझे उन हैवानो से डर लग रहा था इसलिए में तुम्हें कही नहीं जाने दे रही थी. वरना जो तुमने मेरे और मेरे दोस्त के साथ किया है उसके लिए में तुम्हें कभी जिंदगी भर माफ ना करूं." श्रुति ने कहा.
"दोस्त!! हाहम्म!!! जिसे तू अपना दोस्त कह रही है क्या वो तेरे दोस्ती के लायक थे? में तो समझता हूँ जो वो लोग के साथ हुआ है ठीक ही हुआ है." रोहन व्यंग करते हुए कहा
"मतलब? में कुछ समझी नहीं." श्रुति ने थोड़ा हैरत से कहा.
"मतलब यह की तेरे वो सारे दोस्त तुझे धोखा देने का इरादा कर रहे थे" रोहन, श्रुति की तरफ देख कर कहा.
"मेरा साथ धोखा करने का इरादा कर रहे थे...? तुम क्या कह रहे हो मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा है. और वैसे भी वो लोग क्यों मेरे साथ धोखा करेंगे?" श्रुति ने कहा
"अब यह सब मुझे नहीं पता, पर इतना पता है की वो लोग तेरे साथ कुछ गलत करने वाले थे नैनीताल में.
"नैनीताल में? पर तुम्हें यह सब कैसे पता. प्लीज़ मुझे जल्दी से बताओ .." श्रुति थोड़ा व्याकुल होते हुए पूछने लगी
"जिस ढाबे में तुम सब खाने कहा रहे थे में उसी ढाबे के वॉशरूम में तेरे उन दोस्तों की बातें सुन रहा था. वो लोग तेरे कीहिलाफ कुछ गलत प्लान कर रहे थे." इतना कह कर रोहन खामोश हो गया.
"वॉट?? मेरे खिलाफ प्लान कर रहे थे? क्या प्लान कर रहे थे, प्लीज़ जल्दी बताओ" श्रुति एक दम शॉक्ड हो गयी थी की उसके दोस्तों ने उसके खिलाफ कुछ गलत प्लान कर रहे थे. वो जाने को एक दम उत्सुक्त थी की आख़िर क्या वो लोग प्लान कर रहे थे.
"उन लोगों का इरादा था की वो लोग तेरे को नैनीताल लेजाकर और फिर तुझे कोई नशीली दवा खिला कर तेरे साथ...." कहते हुए रोहन थोड़ा रुका.
"मेरे साथ क्या? श्रुति ने जल्दी से कहा.
"आअंह...तेरे साथ..तेरे साथ वो लोग सेक्स करते और फिर तेरी वीडियो बनाकर उसे इंटरनेट पर डालते." कहते हुए रोहन खामोश हो गया और श्रुति की तरफ देखने लगा. यह सुन कर श्रुति का मुंह खुला का खुला रही गया.
"वॉट...?? श्रुति ने एकदम धीमी आवाज़ में कहा. उसे यकीन ही नहीं हो रहा था उसके साथ कुछ ऐसा होने वाला था.
"अरे यू शुरू? वो लोग मेरे बारे में ऐसा ही कह रहे थे?" श्रुति ने फिर रोहन से कहा.
"हां हां..बिलकुल यही प्लान कर रहते थे.जब में तुम लोगों को चोद रहा था तो उससे पहले मैंने जिस लड़के को बुलाया था, तो उसे यही बताने किए बुलाया था की..वो लोग जो तेरे बारे में प्लान कर रहे थे उसके बारे में मुझे पता है. मेरा बस यही इरादा था की में वो लोग को ब्लैकमेल करूं. अगर वो मेरे खिलाफ कुछ करते है तो में तुझे बता देता की वो सब क्या करने वाले है तेरे साथ." इतना कह कर रोहन चुप बैठ गया. श्रुति को अब भी यकीन नहीं हो रहा था की उसके साथ कुछ इस तरह होने वाला था.
"सिर्फ़ वही तीन थे..या कोई और भी था उन लड़कियों में से?" उसे पूरा यकीन था की इसमें छाया जरूर शामिल होगी.
"मुझे इतना तो पता नहीं पर जहाँ तक मेरा ख्याल है इसमें सभी शामिल थे खासकर के वो लड़की. क्या नाम था उसका..." रोहन थोड़ा सोचा फिर बोला "हां याद आया!! निशा!! निशा ही नाम था उसका. क्योंकि वो लड़का था ना? जो गाड़ी ड्राइव कर रहा था और जिसे में अकेले में बुलाया था यह उसी की गर्लफ्रेंड थी और उसी के कहने पर उसने तुम्हें साथ चलने को कहा था. शायद उसे तेरे से कोई पुराना हिसाब किताब करना था. उसी का बदला लेने के लिए वो यह सब नाटक खेल रहे थे " इतना कहने के बाद रोहन, श्रुति की तरफ देखा. पर श्रुति को निशा का नाम सुनकर ही झटका लगा.

"व्हाात???? एक बड़ा सा 'वॉट' उसके मुंह से निकला . उसे यकीन ही नहीं हो रहा था की इन सब चीज़ों के पीछे निशा का हाथ है. थोड़े देर तक वो ऐसे ही शॉक में रही. फिर उसे कुछ होश आया तो उसे याद आया की कैसे निशा उसे फ़ायरवेल्ल पार्टी पर चलने के लिए ज़ोर दे रही थी. पहले तो उसने जाने से इनकार कर दिया था जब उसे यह पता चला था की यह पार्टी निखिल ने नैनीताल पर अपने फार्म हाउस पर ऑर्गनाइज़ की है. पर निशा ने उसे कितना फोर्स किया चलने पर. उसे अब समझ में आ रहा था की क्यों निशा उसे अपने साथ ले जाना चाहती थी. क्योंकि निखिल को श्रुति से बदला लेना था जो उसने भरे कॉलेज..
 

[color=rgb(184,](UPDATE-43)[/color]
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में निखिल को थप्पड़ मारा था. और इसी के लिए उसने निशा से कहा होगा की वो श्रुति को अपने साथ नैनीताल चलने के लिए फोर्स करे. उसे विश्वास नहीं हो रहा था की निशा जिसे वो अपना सबसे बेस्ट फ़्रेंड समझती थी वो उसके साथ इतना बड़ा धोखा कर सकती है. निखिल के झूते प्यार में उसने अपनी सबसे फ़्रेंड धोखा कैसे दे सकती है. यही सब सोचते सोचते श्रुति एक दम रूहाँसी हो गयी.

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[color=rgb(184,]फिर अचानक उसे कुछ याद आया तो रोहन से कहने लगी.
"जब तुम्हें सब पता था फिर भी तुमने उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की? और अब आए हो मेरी जान बचाने के लिए? अगर तुम उन्हें वही रोक लेते तो आज मेरी यह हालत ही नहीं होती." श्रुति व्यंग करते हुए रोहन से कहा. रोहन को पहले कुछ सूझा नहीं की वो क्या बोले. फिर कुछ सोच कर उसने बोला.
"मुझे लगा था की यह तो आम बात है. तुम जैसी सोसाइटी में रहती हो वहां तो ऐसा अक्सर होता है और दूसरे मुझे इस नेशनल पार्क के अंदर आना था क्योंकि में और मेरा वो दोस्त जिसे तूने मेरे साथ देखा था हम पर यहां के फोरेस्ट ऑफिसर्स ने बड़ी निगरानी रखी हुई है. अगर हम ऐसे अंदर आने की कोशिश करते तो आसानी से पढ़कर जा सकते थे. इसलिए हमने सोचा की अगर हम तुम लोगों के साथ अंदर आएँगे तो वो लोग यही समझेंगे की कॉलेज का ग्रुप है मौज़ मस्ती करने आए होंगे यह सोच कर वो हम पर ज्यादा इस पर ध्यान नहीं देते." इतना कहकर रोहन चुप बैठ गया.
"अपने फायदे के लिए तुमने मेरा इस्तेमाल किया..तुम्हें शर्म आनी चाहिए." श्रुति अब भी रोते हुए कह रही थी.फिर अचानक श्रुति को रोहन ने अभी जो कुछ कहा वो बातें याद आई तो उसने कहा.
"तुमने अभी क्या कहा था में जिस सोसाइटी में रहती हूँ वहां पर अक्सर ऐसा होता रहता है? तुम ऐसा सोच भी कैसे सकते हो. दुनिया की हर लड़की को एक जैसा समझ रखा है तुमने." वो रोहन पर अब भी बरसे जा रही थी.
रोहन कुछ नहीं बोला क्योंकि उसे कोई शब्द ही नहीं मिल रहे थे अपनी सफाई में कुछ कहने का. उसे भी लग रहा था की यह लड़की जो बोल रही है बिलकुल सच है. उसने सिर्फ़ अपने फायदे के लिए उसे इस मुसीबत में डाल दिया. फिर भी थोड़ी देर की खामोशी के बाद उसने कहा.
"देखो में मानता हूँ मैंने जो भी कुछ तेरे साथ में किया है गलत किया है. पहली बात तो यह की में तुझे या तेरे दोस्तों को किसी मुसीबत में नहीं डालना चाहता था. में और मेरा दोस्त बस यही चाह रहे थे की कैसे भी करके इस नेशनल पार्क में एंट्री करले बस. मेरा इरादा था की जब हम इस पार्क में एंट्री कर लेंगे तो में तुम सब को वही से जाने दे देता. इसी वजह से मैंने तुम सबको ज्यादा अंदर नहीं लेकर गया बल्कि वही से चोद दिया जहाँ पर किसी किस्म का कोई भी जुनगल्ली जानवर का खतरा नहीं था. लेकिन मुझे नहीं मालूम था की यहां पर इस तरह के खूनी दरिंदे घूम रहे है और हूँ तुझे और तेरे दोस्तों पर हमला कर देंगे. अगर मुझे पता होता तो में ऐसा हरगिज़ नहीं करता." फिर रोहन थोड़ा रुक कर फिर से अपनी बात जारी रखते हुए कहा. देख में हालात पहले जैसे तो नहीं कर सकता मगर, में इतना तो कर ही सकता हूँ तुम्हें यहां से सुरखित निकाल दम...चाहे इसके लिए मुझे अपनी जान ही क्यों नहीं गवानी पढ़े." बोलते हुए रोहन चुप भात गया और एक तरफ देखने लगा.फिर उनके बीच थोड़ी देर तक कोई भी बात नहीं हुई. फिर थोड़े देर के बाद श्रुति ने जो अब थोड़ा नॉर्मल हो चुकी थी खामोशी को तोड़ते हुए कहा.
"पर तुम दोनों को इस जंगल में आने के लिए हमारे सहारे की क्या जरूरत थी?. वो तो तुम ऐसे भी आ सकते थे. जैसे नॉर्मल लोग आते है." रोहन उसकी बात सुनकर थोड़ा हँसने लगा..फिर कुछ देर के बाद बोला.
"में और मेरा दोस्त इस जंगल में गैर क़ानूनी काम करते है. और हमारी जगह जगह तलाशी हो रही थी. इस नेशनल पार्क के हर दरवाजा पर हमारी तस्वीर पहुंच चुकी थी. अगर हम ऐसे ही जाते तो पकड़ में आ जाते, इसलिए हम लोगों ने तुम लोगों का सहारा लिया.रोहन, श्रुति को समझाते हुए कहा.
"गैर क़ानूनी काम? कैसा गैर क़ानूनी काम? " श्रुति ने थोड़ी उत्सुकता से पूच्ची
"क्यों तुझे क्यों जानना जरूरी है? रोहन ने कहा.
"नहीं में तो बस ऐसे ही पूंछ रही थी, अगर तुम्हें नहीं बताना तो कोई बात नहीं." बोलकर श्रुति खामोश हो गयी. रोहन भी कुछ देर खामोश भरता रहा फिर उसने कहा " में और मेरा दोस्त परवेज़, जानवरो को मर कर उनके बॉडी पार्ट्स को जंगल से स्मगलिंग करके बाहरी पार्टी को बेच देते है जिससे हमें अच्छे पैसे मिलते है. " रोहन ने कहा.
"क्या? इसका मतलब तुम जानवरो की पोचिंग करते हो? " श्रुति ने हैरत से कहा.
"हां तो क्या हुआ? " इंसान अपना पेट..
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[color=rgb(184,](UPDATE-44)[/color]
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भरने के लिए कुछ ना कुछ तो करता ही है ना? रोहन ने भी कहा.
"पर किसी को मारकर अपना पेट भरना अच्छी बात है क्या?" श्रुति ने कहा.
"तेरे बाप की तरह मेरे पास पैसों की फॅक्टरी नहीं है जिससे में पैसे बनाओ. मुझे अपना और अपना परिवार का पेट पालना था और इसके लिए मुझे अगर कुछ भी करना पढ़ता तो में वो करता. " रोहन ने कुछ देर रुक कर कहा." और तू क्या जानवरों को मारने की बात करती है. अगर हम इन जानवरो को ना मारे तो तुझ जैसे अमीरों के शौक कैसे पूरे होंगे. यह जो तुम लोग महेंगे महेंगे लेदर के समान खरीद ते हो और ना जाने क्या क्या. वो सब कहा से आता है? तुझे पता भी है इस बारे में. बात करती है...?" इतना लंबा चौड़ा लेक्चर देने के बाद रोहन चुप भात गया. श्रुति के पास अब कहने के लिए कुछ भी नहीं था.
"वॉटेवर..तुम्हें जो करना है करो मुझे क्या. मुझे तो बस इस जंगल से निकालो और यह तुम्हारी मोरल ड्यूटी बनती है." श्रुति ने कहा.
"कौनसी ड्यूटी बनती है?' रोहन ना समझते हुए कहा.
"मोरल ड्यूटी. यानि के ..अम्म्म मुझे इतनी शूध हिन्दी नहीं आती है बस इतना समझ लो की मुझे यहां से सही सलामंत निकालने की जिम्मेदारी अब तुम्हारी है." श्रुति, रोहन को समझते हुए कहा.
"अरे हां ना मुझे पता है . तभी तो तेरे साथ में हूँ वरना में कबका यहां से निकल चुका होता." रोहन ने कहा.
"अच्छा? वो कैसे? " श्रुति वजह जाननी चाही.
"इतने सालों से जंगलों में घूम घूम कर झक नहीं मारा रहा हूँ. मुझे आइडिया है ऐसे हालत में किस तरह निकला जाता है." रोहन ने कहा.
"अच्छा अगर तुम्हें जंगल्स के बारे में इतनी नालेज है तो तुम्हें तो कुछ पता होगा की वो क्या चीज़ थी . जो हम पे तीन बार अटॅक कर चुकी है. क्योंकि मैंने आज तक कभी भी इतने डेंजरस अनिमल नहीं देखा ना ही इनके बारे में कही पढ़ा है और नाहीं सुना है."श्रुति ने रोहन से उस दरिंदो के बारे में पूछते हुए कहा.
"में खुद हैरान हूँ वो क्या चीज़ है. में भी अपनी पूरी जिंदगी में इस तरह का जानवर नहीं देखा . मैंने शेयर, चीटा, हाथियों और ना जाने कितने खूनकर जानवरों का शिकार किया है पर इतना डर कभी नहीं लगा जब आज उस जानवर को देखते वक्त लगा था. उसकी वो आँखें जैसे उनमें अंगारें भरे हो, उनके नाखून और दाँत..उफ़फ्फ़ कितने भयानक थे वो सब." रोहन ने कहा
"ये! यू अरे राइट . में भी कुछ ऐसे ही डर गयी थी उसे देख कर ." श्रुति , जो अब रोहन से काफी घुल मिल कर बातें कर रही थी. उसे अब रोहन पर उस तरह का गुस्सा नहीं आ रहा था जो उसे पहले उस पर आ रहा था.
"अच्छा एक बात और बताओ हूँ जो गुंडे थे वो लोग कौन थे? क्योंकि तुम्हारी और उन लोगों की बातचीत से ऐसा लग रहा था की जैसे तुम लोग एक दूसरे को जानते थे?" श्रुति ने फिर से रोहन से सवाल पूछा.
"वो राका और उसके गान्ड के लोग थे. वो लोग भी वही काम करते थे जो में करता हूँ...यानि की जानवरो के बॉडी पार्ट्स की स्मगलिंग करना. लेकिन मेरे और राका के बीच दुश्मनी थी और इसकी वजह यह थी में उससे अच्छा कमा रहा था. और वो इसी बात पर जलता था. उसे लगता था में उसके शिकार हथिया लेता हूँ. इसी वजह से वो मेरे से दुश्मनी पर उतार आया था." इतना कह कर रोहन खामोश हो गया.
"भूख लगी है? " रोहन ने कुछ देर बाद खोमोशी को तोड़ते हुए कहा.
"नहीं. ई मीन लगी है पर अगर तुम्हें इसके लिए कही जाना पड़ेगा तो में इस भूख को बर्दाश्त कर लूँगी." श्रुति ने कहा.
"हहहहा..इतना डरी हुई हो. अगर वो लोग अभी आ गये तो में भी क्या कर सकता हूँ? मैंने एक बार उनमें से एक को मर गिराया था तो सिर्फ़ महज़ इत्तफाक था क्योंकि उस वक्त उसका ध्यान मेरे ऊपर नहीं था और मुझे मौका मिल गया था डायरेक्ट उस के दिमाग के ऊपर हमला करने का. इसलिए वो उस वक्त मारा गया था पर अब ऐसा नहीं है. वो लोग अपने शिकार पर इतने तेजी से हमला करते है की शिकार होने वाले को वक्त ही नहीं मिलता संभालने का. " रोहन, श्रुति को समझाते हुए कहा.[/color]

[color=rgb(184,]"ई नो डेठ . पर फिर भी तुम साथ रहते हो तो डर नहीं लगता है. " श्रुति ने कहा. फिर उनके बीच बातों का सिलसिला रुक गया . थोड़ी देर के बाद रोहन ने देखा की श्रुति को नींद आ रही थी और भायते भायते सो रही थी . वो थोड़ा झूमती फिर संभाल जाती . वो थोड़ी देर ऐसे ही करती रही और जब उसे जागे रहना मुश्किल हो गया तो उसका सर अपने आप ही रोहन के कंधे पे आ गया. रोहन ने देखा की श्रुति बहुत गहरी नींद में जा चुकी थी. वो उसे ऐसे ही सोने देना चाहता था ताकि उसे कुछ आराम मिल जाए. इसके लिए उसने..[/color]
 

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सोचा की श्रुति उसके कंधे पे सर रख सोने की बजाए अगर उसके जांघो में सर रख सोएंगे तो ज्यादा बेहतर रहेगा. उसने धीरे धीरे श्रुति को अपने से थोड़ा दूर किया और उसके सर को अपने जांघो पर रख कर सुला दिया. श्रुति को ज़रा भी होश नहीं था की रोहन उसे अपनी जांघो पर सुलाया हुआ है क्योंकि वो इस वक्त नींद की गहराइयों में चली गयी थी. उस आग की रोशनी में रोहन ने श्रुति को फिर से देखने लगा. वो सोचने लगा "सोई हुई यह लड़की कितनी प्यारी लग रही है, बिलकुल परी जैसी.". फिर रोहन जब तक उसी पोज़िशन पे बैठा रहा जब तक की उसे पोज़िशन पर देर तक भायते रहने की वजह से उसे तक़लीफ़ होने लगी. पर हिलना नहीं चाहता था क्योंकि वो अगर ज़रा सा भी हिलेगा तो उसे डर था की कही श्रुति जग ना जाए. वो उसे ऐसे ही सोने देना चाहता था चाहे इसके लिए उसे कितनी ही तक़लीफें बर्दाश्त करनी पड़े. उसने तय कर लिया की अगर उसे सारी रात इसी तरह बैठना पड़े तो ऐसे ही पूरी रात बैठा रहेगा.

परवेज़ बड़ी देर से रेस्ट हाउस के बाहर बने चबूतरे पर बेचैनी से टहल रहा था. उसे रही रही कर रोहन के ऊपर गुस्सा आ रहा था. क्योंकि उसे गये हुए 3 घंटे से ज्यादा हो चुके थे और अभी तक उसका कुछ पता नहीं था. वो अपने ही मान में सोचे जा रहा था.
"साले को कितनी बार कहा की अकेला हीरो गिरी मत किया कर लेकिन साला मेरी बात मानता ही नहीं है. पता नहीं वो हराम खोर कहा मर गया है. अब तक तो साले को आ जाना चाहिए था. मुझे तो डर लग रहा है की कहीं वो उन लोगों से उसकी ज्यादा ही हाथापाई ना हो गयी हो. या फिर कहीं वही लोग उसे अपने क़ब्ज़े में ना कर लिए हो और उसे पकड़ कर फोरेस्ट रेंजर के हवाले कर दिए हो. अगर ऐसा हुआ तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी." यही सब सोचता सोचता हुआ परवेज़ बड़ा बेचैन हो रहा था. उसने अपनी घड़ी में देखा तो रात का 9 बज रहा था. "ओफफ़ो!!! इतनी रात हो चुकी है और साला पता नहीं कहा मर रहा है. मोबाइल भी अपना यही भूल के गया है की उसे फोन कर सकूँ .एक काम करता हूँ भीमा को साथ लेकर उसकी तलाश में जाता हूँ देखु तो कुत्ता किधर है.

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[color=rgb(184,]वो वहां से तुरंत भीमा को जगाने के लिए उसके रूम में गया. "भीमा !!!भीमा!!! ओह भीमा!! "
"जी ..जी ..सरकार."भीमा झट से उठ कर भात ते हुए कहा.
"मेरे साथ चलो हमें रोहन को ढूंढ़ने जाना है." परवेज़ ने भीमा को उठते हुए देखा तो बोला.
"ओह इसका मतलब रोहन बाबू अभी तक नहीं आए है." भीमा ने अपनी अपनी आँखों से नींद भागते हुए कहा.
"हां वो अभी तक नहीं आया है. तभी तो तुम्हें जगाया है. अब जल्दी से तैयार हो जाओ और एक गाड़ी का इंतजाम करो." परवेज़ ने कहा.
"पर सरकार अगर इस वक्त हम गाड़ी से निकलेंगे तो हमें फोरेस्ट रेंजर वाले रोकेंगे." भीमा ने कहा.
"अरे यार यहां मेरा दोस्त पता नहीं कहा है और तुम फोरेस्ट रेंजर्स की बात कर रहे हो. अरे उन्हें कुछ भी कह देंगे." परवेज़ थोड़ा च्चिदता हुआ बोला.
"एक मिनट रुको!! में सुशांत को फोन करता हूँ. वो कह रहा था की वो रात के 9 बजे तक आज्एगा." परवेज़ अपने जेब से मोबाइल निकालते हुए कहा.
"हेलो!! हां सुशांत? कहा हो तुम?" परवेज़ मोबाइल पर सुशांत से बात करता हुआ कहा.
"में रेस्ट हाउस के बाहर ही हूँ. तुम कहा हो?" सुशांत ने दूसरी तरफ फोन पर कहा.
"ओह तुम आ गये. ठीक है तुम बाहर ही रुको . में बाहर ही आ रहा हूँ." कहते हुए परवेज़ बाहर की और निकल गया. रेस्ट हाउस के बाहर निकालने के बाद परवेज़ ने देखा की सुशांत एक सादे ड्रेस में उन लोगों का बाहर वेट कर रहा था.
"और परवेज़ भाई क्या हाल चाल है???" सुशांत , परवेज़ से हाथ मिलते हुए कहा.
"बहुत खराब हाल चाल है सुशांत. बहुत बड़ी गड़बड़ हो गयी है" परवेज़ भी सुशांत से हाथ मिलते हुए कहा.
"क्यों क्या हुआ? फोन पर तो तुम कह रहे थे की सब कुछ ठीक है तो फिर अचानक क्या प्राब्लम हो गयी? " फिर सुशांत यहां वहां देखा फिर परवेज़ से कहा "और यह रोहन किधर है दिख नहीं रहा है?"
"यही तो गड़बड़ है." फिर परवेज़ ने सुशांत को पूरी बात बता दी के कैसे वो लोग इस नेशनल पार्क में कुछ लड़कों को बंदी बनाकर लाए थे और फिर क्यों रोहन उनके पीछे
भागा और अभी तक वापस नहीं लौटा.
"हम..वास्तव में यह तो बहुत बुरी खबर है." सुशांत भी चिंतित हो गया परवेज़ की पूरी बात सुनकर.
"इसलिए मुझे लगता है की हमें उसकी तलाश में जाना चाहिए. कही साले के साथ कुछ बुरा तो नहीं हुआ हो." परवेज़ ने कहा.
"तुम ठीक कह रहे हो. हमें जाने चाहिए रोहन को ढूँदने के लिए." सुशांत ने कहा. तब तक का भीमा भी वहां पर आ चुका था. वो तीनों ने मिलकर तय किया की वो कुछ..[/color]

 
[color=rgb(0,](UPDATE-46)[/color]
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हथियारो के साथ में सुशांत की गाड़ी में बैठ कर रोहन की तलाश में जाएँगे. फिर कुछ देर बाद वो लोग निकल पड़े रोहन की तलाश पर उसी रास्ते पर चल दिए जहाँ पर रोहन उस गाड़ी का पीछा कर रहा था

रोहन की तलाश में वो बहुत दूर निकल आए थे पर अभी भी उन्हें कुछ ऐसा नहीं मिला जिससे उन्हें रोहन की उपस्थिति का कुछ पता चल पाता. पर जैसे ही उनकी गाड़ी अभी कुछ ही दूर गयी होगी के उन्हें दूर से एक पेड़ के पास कोई गाड़ी खड़ी हुई मिली.
"सुशांत वो देखो उस पेड़ के पास, कोई गाड़ी खड़ी है ? परवेज़ ने उस गाड़ी को देखते हुए कहा.
"हां सरकार में भी देख रहा हूँ. चलो देखते है की वहां क्या है." भीमा गाड़ी की पिछली सीट पर बैठे हुए बोला. फिर उनकी गाड़ी उस पेड़ वाली गाड़ी के पास पहुंच गयी. फिर जब परवेज़ ने गाड़ी को करीब से देखा तो उसे बड़ी हैरत हुई की यह तो वही गाड़ी है जिसके पीछे रोहन भागा था. वो अपनी गाड़ी को वही खड़ी करते है और उतार कर उस गाड़ी के पास जाने लगते है.
" अरे यह क्या है? YYYYYएह्ह्ह...तो कंकाल है .. ." परवेज़ ने चौंकते हुए कहा.
"हां सरकार इतनी सारी हड्डियों का ढाँचा ? किसका हो सकता है और इनकी यह ऐसे हालत किसने किए होगा ? कुछ समझ में नहीं आ रहा है.
तब तक सुशांत भी अपनी गाड़ी से उतार कर उन लोगों के साथ में शामिल हो गया.
"अरे यार यह तो उन्हीं लड़की लड़कों की गाड़ी है जिनका हम अगवा करके इस जंगल में आए थे और जिसका पीछा करने के लिए रोहन इनके पीछे भागा था . और फिर शायद यह सारे कंकाल उन्हीं के होंगे." परवेज़ अपना सर पकड़ते हुए कहा.
"सरकार मेरी भी कुछ समझ में नहीं आ रहा है. इतनी सारी हड्डियाँ वो भी एक साथ जैसे की यह हद्ढियाँ ना हो बल्कि कोई लाश हो और उन लाशों पर से उनका किसी ने माँस उतार लिया हो ." भीमा ने कहा.
"लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है की इन लोगों की इस तरह हत्या किसने की होगी. मुझे तो यह किसी जानवर का काम नहीं लगता है. क्योंकि कोई भी जानवर अपने शिकार को इस तरह और इतनी जल्दी उनका माँस नहीं खाता है. मुझे तो यह कोई और ही चक्कर लग रहा है" सुशांत ने उन सारे कंकालो का मुयएना करते हुए बोला.
"कोई और चक्कर लगता है? मतलब क्या है तुम्हारा?" परवेज़, सुशांत की बात पर चौंकते हुए कहा.
"मतलब यह की यह उन्हीं खूनी बंदारो का काम लग रहा है मुझे. जिनके बारे में मुझे अभी कुछ देर पहले पता चला था की कुछ बंदारो से दिखने वाले भयानक किस्म के जानवरों ने कालगरह के इलाके में कुछ लोगों पर हमला कर दिए है. और वो कोई आम सा होने वाला हमला नहीं था बल्कि उसके बारे में मैंने कुछ ऐसा ही सुना था जैसा में यहां पर देख रहा हूँ..."थोड़े देर तक सुशांत उन दोनों के चेहरे की तरफ देखा, फिर अपनी बात जारी रखते हुए कहा.
"जैसा उत्पात उन जानवरों ने वहां पर मचाया हुआ था वैसा ही उन्होंने ने इन लोगों के साथ किया हुआ है."
"ओह मेरे खुदा!!!! परवेज़ एकदम हैरत में पढ़ते हुए बोला.
"तभी में बोलू क्यों आज कल इस पार्क में फोरेस्ट ऑफिसर्स वाले इतनी चौकसी क्यों बढ़ा दिए है?"" भीमा ने कहा.
"लेकिन मेरी समझ में नहीं आ रहा है की यह किस तरह के जानवर है जो इतनी भयानक तरीके से इन सब को मौत के घाट उतार दिए." परवेज़ ने कहा.
"यह तो तभी पता चलेगा जब हमारा भी उन सब से सामना होगा." सुशांत ने कहा. लेकिन उससे पहले हमें रोहन को तलाश करना होगा..मुझे तो डर लग रहा है की कही वो भी इन्हीं कंकालो में से एक..." अभी सुशांत अपनी पूरी बात खत्म भी कर पाया था की परवेज़ उसे टोकते हुए कहा.
"नहीं सुशांत!! इनमें से कोई भी कंकाल रोहन की नहीं हो सकती. वो इतनी आसानी से अपनी जान देने वालो में से नहीं है. बहुत बहादुर है. वो जरूर अपनी जान बचाकर यहां से भाग गया होगा या फिर अभी भी वो कही किसी मुसीबत में होगा. हमें जितनी जल्दी हो सके उसकी हेल्प करनी चाहिए. और उसे जल्द से जल्द ढूंढ़ना चाहिए."
"आप ठीक कह रहे हो सरकार, हमें जल्दी से रोहन बाबू को ढूंढ़ना चाहिए." कहते हुए भीमा उस खाई के नीचे से झाँके की कोशिश करने लगा. हालाँकि रात के अंधेरे में उसे कुछ ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था फिर भी भीमा ने देखा की ढलान से थोड़े ही नीचे कोई चीज़ पड़ी है. उसने फौरन परवेज़ और सुशांत को बुलाया.
"सरकार यहां आइये." भीमा की आवाज़ सुनकर सुशांत और परवेज़ भाग कर वहां गये जहाँ से भीमा ने उसे आवाज़ दी थी.
"हां भीमा कहो क्या बात है?" परवेज़ भीमा के पास आते हुए बोला.
"सरकार आपको वहां कोई चीज़ दिख रही है. उस झाड़ी से लटकी हुई चीज़ है." भीमा उसे अपनी उंगली से ढलान की तरफ इशारे करते हुए कहा. परवेज़ ने भी उसी..

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[color=rgb(184,]WRITER NOTE:-[/color]
[color=rgb(184,]hmmmm, so guys yaar aap log bilkul bhi support nhi kar rahe ho na review aa rahe na aur kuch ab to story ki starting bhi nhi ki jo lage starting me hota hai.
Story ke 46 update aa chuke aur review bas 2 ya 3 readers ke hi aate hai aage se review do aur update lo. Kyuki mene kayi threads pe dekha hai and i am not comparing myself with others 200 pages me 30 ya 40 update hai bas aur yaha 25 page me 46.
Kyuki mera bhi mann nhi karta jab thread khol ke dekhta hu kuch response hi nhi hai.

TO BE CONTINUED ??[/color]
 

[color=rgb(41,](UPDATE-47)[/color]
[color=rgb(41,]

दिशा में देखा और उसे भी कुछ दिखाई दिया.
"हां हां. कुछ तो लटका हुआ है वहां पर क्या है कुछ ठीक से दिखाई नहीं दे रहा है..रुको" अचानक परवेज़ ने कहा. "वो तो कोई बाइक जैसे चीज़ लग रही है बल्कि वो बाइक ही है और मेरे ख्याल से यह वही बाइक है जो रोहन अपने साथ ले गया था."
"हां सरकार आप ठीक कह रहे है यह वही मोटरसाइकल है.अगर यह वही मोटर स्टाइल है तो वहां कैसे गिरी पड़ी है और रोहन बाबू कहा है?" भीमा ने कहा.
"यहां जरूर कुछ ना कुछ बहुत बुरा हुआ है भीमा." परवेज़ ने घूम कर उन हड्डियाओं के ढाँचो को देखते हुआ कहा.
"मुझे लगता है भीमा की जब यहां पर कुछ हो रहा होगा तो तभी रोहन यहां आया होगा और जिसने भी यह तूफान मचाया हुआ होगा वो रोहन को बाइक समेट उस ढलान के नीचे फेंक दिया होगा" परवेज़ ने कहा.
"पर मुझे नहीं लगता की इस खाई में गिरकर रोहन सही सलामत होगा." सुशांत ने कहा.
"वो तो ठीक है सुशांत पर हमें उम्मीद नहीं छोड़ना चाहिए.." परवेज़ ने कहा.
"आप ठीक कहते हो सरकार, हमें रोहन बाबू को तलाश करना चाहिए." भीमा ने कहा.
"भीमा तुम एक काम करो अपने सारे आदमियों को इकहत्ता करो और फिर हम सब उस ढलान के नीचे जाकर देखेंगे की रोहन कहा है." परवे ने कहा. पर भीमा कुछ अजीब सी स्थिति में था इस वक्त . उसे असमंजस की स्थिति में देखकर परवेज़ ने जल्दी से कहा.
"भीमा जो पैसे तुम्हें जानवरो के शिकार के लिए मिला रहा था उतना ही पैसा में तुम्हें रोहन की तलाश करने में दूँगा . तुम बस जल्दी से जाकर अपने आदमियों को इकहट्टा करो."
"अरे सरकार कैसे बात करते है आप? क्या रोहन के लिए में इतना भी नहीं कर सकता. सरकार बात पैसे की नहीं है बल्कि में यह सोच रहा हूँ इतनी रात को और इतनी जल्दी में इतने सारे आदमियों को कहा से लाओं. अब जो भी मुझे मिलेंगे वो सुबह ही मिलेंगे." भीमा ने परवेज़ को समझाते हुए कहा.
"सुबह तक हम रुकेंगे तो पता नहीं रोहन के साथ और क्या क्या बुरा हो जाए. नहीं भीमा तुम्हें कैसे भी करके अभी और इसी वक्त अपने आदमियों को जमा करो." परवेज़ ने कहा.
"सरकार समझा करो, हमें इस वक्त इतने सारे आदमी नहीं मिल सकते. जैसे ही सुबह होगी में फौरन सबको जमा करूँगा और रोहन बाबू की तलाश में हम सब निकल जाएँगे." भीमा , परवेज़ को समझाते हुए कहा.
"भीमा ठीक कह रहा है परवेज़, इतनी रात को कोई भी आदमी नहीं मिलेगा इस वक्त. में क्या कहता हूँ क्यों ना हम ही इस खाई के नीचे जाकर देखे की इस वक्त रोहन कहा पर होगा?" सुशांत ने परवेज़ को समझते हुए कहा.
"हम...शायद तुम ठीक कह रहे हो. लेकिन हम जाएँगे कैसे नीचे?"
"उसकी चिंता तुम मत करो. मुझे दूसरा रास्ता पता है, हम वही से चलेंगे." सुशांत ने कहा.
"पर सरकार एक दुविधा अभी भी है." भीमा ने कहा.
"क्या? सुशांत, भीमा की तरफ देख कर सिर्फ़ इतना कहा.
"सरकार अगर रोहन बाबू को ढूंढ़ने नीचे जाते है तो मान लो की हमारा भी सामना उन जानवरो से हो गया जिन्होंने इन लोगों का यह हश्र किया है तो वो हमारा क्या हाल करेंगे. मेरा कहने का मतलब यह है की अगर हम अपने साथ कुछ और हथियार वगैरह ले जाए तो बेहतर होगा." भीमा ने कहा.
"देखो भीमा हमारे पास इतना टाइम नहीं है की हम कुछ और हथियारो के इंतजाम के लिए रोहन की जान को और खतरे में डाले. हमारे पास जो कुछ है हमें उन्हीं से काम चलना पड़ेगा. फिर परवेज़ थोड़ा रुक कर फिर से बोला " और दूसरी बात भीमा अगर तुम्हें डर लग रहा है तो तुम वापस जा सकते हो मुझे कोई ऐतराज़ नहीं होगा ."
"नहीं सरकार आप तो नाराज़ हो गये. ऐसी कोई बात नहीं है की में डर गया. में तो बस इतना कहना चाह रहा था की हमें हमारी हिफ़ाज़त का कुछ अच्छा इंतजाम कर लेना चाहिए. बाकी आप लोगों की मर्जी."
"नहीं भीमा! तुम फिक्र मत करो. हमारे पास जो भी कुछ है काफी है. फिर भी तुम्हें अगर हमारे साथ नहीं आना है तो तुम जा सकते हो." सुशांत ने कहा.
"नहीं में वापस नहीं जाऊंगा. में रोहन बाबू को ढूँदने में आप लोगों की मदद जरूर करूँगा. रोहन बाबू का हम पर बहुत बड़ा उपकार है. अगर उन्हें बचाने में मेरी जान भी चली जाए तो कोई घाम नहीं." भीमा ने कहा.
"ऐसी बात है तो चलो फिर" परवेज़ ने कहा. फिर हूँ तीनों निकल पढ़े रोहन की तलाश में.

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[color=rgb(41,]श्रुति की नींद सुबह सुबह पख़्शियों के चाहचाने से खुली. थोड़ी देर तक तो उसे समझ में नहीं आया की वो कहा है. फिर जब उसने देखा की उसका सर रोहन के झांग पर है तो हड़बड़ा के उठ गयी. रोहन भी देखा की श्रुति अचानक हड़बड़ा के उठ भाती थी.
"अरे क्या हुआ? नींद हुई तेरी पूरी." रोहन ने श्रुति की तरफ देखा.
"में कब सोई गयी थी मुझे तो पता ही नहीं चला. और सुबह भी हो गयी . में कितनी देर..[/color]

 

[color=rgb(226,](UPDATE-48)[/color]
[color=rgb(226,]

तक सोई हुई थी.?" श्रुति ने रोहन का सवाल का जवाब ना देते हुए सब कुछ एक ही झटके में कह डाला.
"यही कोई साथ घंटा." रोहन ने जवाब दिया.
"साथ घंटा? में साथ घंटे तक सोई थी और मुझे पता भी नहीं चला? और...तुम साथ घंटे तक ऐसे ही भायते रहे थे.?" श्रुति ने हैरत में पढ़ते हुए कहा. रोहन ने जवाब में कुछ नहीं कहा बस धाम से वही ज़मीन पर लेट गया. उसकी कमर और पीठ सात घंटे तक एक ही पोज़िशन में बैठे रहने से दुखने लगी थी. श्रुति फिर रोहन से पूछने लगी
"तुम रियली ऐसे ही साथ घंटे तक सोए थे ?"
"तुम्हें क्या लगता है?" रोहन ने कहा.
"ई डोंट बिलीव इट" तुम सात घंटे तक ऐसे ही बैठे थे? मुझे उठा देते यूँ एक ही पोज़िशन में इतना लंबा बैठने की क्या जरूरत थी" श्रुति ने कहा.
"कोई बात नहीं. मैंने कोई बड़ा काम नहीं किया है. मुझे आदत है इतनी तक़लीफ़ उठाने की और वैसे भी तुम ताकि हुई थी और जख्मी भी थी इसलिए मैंने सोचा की अगर तुम थोड़ा सो जाओगी तो तुम्हारे लिए अच्छा रहेगा." रोहन, श्रुति से कहने लगा. श्रुति को विश्वास नहीं हो रहा था जिस आदमी की वजह से उसकी यह हालत हुई थी वही आज उसके लिए इतनी तक़लीफ़ उठा रहा था. उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो कैसे शुक्रिया अदा करे. फिर भी उसने कहा.
"एनीवे थॅंक्स!! "मुस्कुराते हुए श्रुति, रोहन का शुक्रिया अदा करने लगी. रोहन और श्रुति जब तक साथ में थे यह पहला मौका जब श्रुति ने उसकी तरफ मुस्करा कर देखा था.
"अब यह थेन्क यू वंकयौ रहने दे और यह बता तेरा पैर कैसा है? "
"अब थोड़ा ठीक है" श्रुति अपने पैर की एडी दिखाते हुए कहा जो वास्तव में उसके पैर की सूजन कम हो गयी थी.
"तो तू चल सकती है अभी?" रोहन ने कहा.
"हम."श्रुति ने बस इतना ही कहा.
"तो ठीक है चलते है फिर." रोहन अपनी जगह से खड़े होते हुए बोला.
"क्या हमें उसी ढलान पर चलना होगा?" श्रुति ने थोड़ा चिंतित स्वर में कहा.
"हां उसी ढलान पर चलना होगा पर, तू घबरा मत में तेरी मदद करूँगा चढ़ने में." रोहन ने कहा.
"ओके ठीक है चलो." श्रुति भी अपनी जगह से खड़े होते हुए बोली. उसके पैर का दर्द तो तदोआ कम हो गया था पर इतना भी कम नहीं हुआ था. उसे अब भी चलने में कठिनाइया हो रही थी. पर इस बार वो कोशिश कर रही थी वो बिना रोहन के सहारे चले. हालाँकि पहले की तरह उसका गुस्सा रोहन पर से थोड़ा कम हो गया था पर भी वो रोहन से थोड़ा दूरी बनाना चाहती थी.
"तुम्हारे अंदाज़े से कितना देर लगेगा हमें वहां तक पहुंचने में?" श्रुति ने रोहन से कहा.
"यही कोई डेढ़ दो घंटा." रोहन बस इतना कहते हुए आगे बढ़ने लगा. उन्हें चलते हुए कुछ एक घंटा हुआ होगा तभी वो एक नदी के पास पहुंचे तो श्रुति ने रोहन से कहा.
"सुनो!! थोड़े देर यही पर रुक जाते है, मुझे थोड़ी थकान भी लग रही है." श्रुति ने कहा.
"ठीक है " कहते हुए रोहन वहां पर एक बारे से पत्थर के ऊपर बैठ गया. वो दोनों अभी एक नदी के किनारे बैठे हुए थे और अपनी थकान मिटा रहे थे. पर वो इस बात से अंजान थे की उनके पीछे नदी के अंदर से एक मौत उनकी तरफ धीरे धीरे तरफ रही है. पहले तो रोहन का ध्यान उस और नहीं गया था पर, जब उसने देखा की नदी के अंदर से कोई चीज़ उनकी तरफ तरफ रही है. उसे उस वक्त समझ में नहीं आ रहा था फिर वो चीज़ ज़रा और करीब आई और श्रुति के करीब पहुँची तो उसे समझ में आ गया था की वो क्या चीज़ है. उसने देखा की एक मगरमच्छ (क्रॉकडाइल) अपना जबड़ा फाड़े श्रुति की तरफ तरफ रहा था. रोहन फौरन जूते में फँसे हुआ खंजर निकाला और श्रुति की तरफ बढ़ा और उसका हाथ पकड़ उसे उठाया और एक तरफ कर दिया फिर उस मगरमच्छ पर झपट पढ़ा.
श्रुति की तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था की अचानक यह आदमी हाथ में खंजर लिए उसे धकेल कर क्या करने जा रहा था. लेकिन जब उसने देखा की रोहन एक मगरमच्छ पर अपने खंजर से हमला कर रहा है तो यह देख कर उसकी चीख निकल गयी. उसने देखा की रोहन उस मगरमच्छ पर अनगिनत वार किए जा रहा था. वो एक दम घबरा गयी थी और दहशत के मारे थर थर काँप रही थी. एक के बाद एक मुसीबत से वो एक दम निढल हो गयी थी. फिर थोड़ी देर के बाद रोहन उस मगरमच्छ को मौत के घाट उतार कर श्रुति की तरफ पलटा. उसने देखा की श्रुति थर थर काँपे जा रही थी. फिर वो श्रुति के करीब गया और उससे कहने लगा.
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[color=rgb(226,]"घबरा मत वो अब मर चुका है." पर रोहन के समझने पर भी श्रुति रोए जा रही थी. क्योंकि इससे पहले उसने अपनी जिंदगी में मौत को अपने इतने करीब कभी नहीं देखा था. मगर कल से उसे ना जाने कितनी.[/color]
 

[color=rgb(226,](UPDATE-49)[/color]
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बार मौत का सामना करना पढ़ रहा था. फिर भी रोहन ने कैसे कैसे कर के श्रुति को समझाया और उससे कहना लगा.
"देख अभी ज्यादा रोने ढोने से कोई फायदा नहीं होगा. यह जंगल है और इस तरह की चीज़ें यहां पर होती रहती है. और हम उन भयानक जानवरो से भी घिरे हुए है. समझ लो की पल पल हम मौत के साए में जी रहे है. इस तरह रोने से बात नहीं बनेगी बल्कि हमें इस जंगल से जल्द से जल्द निकालने के बारे में सोचना होगा. और इसके लिए तुझे हिम्मत से काम लेना होगा. समझी?" श्रुति को रोहन समझते हुए कहा. श्रुति ने अपने जबान से कुछ नहीं कहा बस अपने सर से हामी भारी.
वो दोनों फिर आगे बढ़ने लगे और इस जंगल से निकालने का रास्ता तलाश करने लगे. पर वो अभी जिस रास्ते से चल रहे वो रास्ते में थोड़ा ढलान था और उसमें थोड़ा कीचड़ भी था जिसकी वजह से दोनों को चलने में दुश्वारी हो रही थी. रोहन पलट के देखना चाहता था की श्रुति कैसे चल रही है इस रास्ते से. वो श्रुति की तरफ अपना हाथ बढ़ने लगा ताकि उसे सहारा दे सके पर, जैसे ही उसने उसकी तरफ हाथ बढ़ाया था की अचानक उसका दाया पैर कीचड़ की वजह से फिसल गया और रोहन अपना संतुलन खोते हुए वहां पड़े एक पत्थर पे जा गिरा और बेहोश हो गया क्योंकि उसका माता उस पट्तर से टकरा गया था जिसके वजह से वो अपना होश खो बैठा था. रोहन को गिरता देख श्रुति उसके पास गयी और उसे हिलाने लगी.
"तुम ठीक हो?? ओह हेलो..जब रोहन कुछ नहीं बोला तो श्रुति ने उसे फिर से हिलाने लगी.
"आए उठो...क्या नाम है इसका? श्रुति सोचने लगी की इतनी देर तक दोनों साथ में है और वो दोनों एक दूसरे का नाम भी नहीं जानते है.
"क्या हुआ तुम्हें..तुम ठीक हो..?" जब इतना हिलाने पर भी रोहन कुछ जवाब नहीं दे रहा तो था श्रुति समझ गयी यह बेहोश हो गया है.
"ऑफ हो अब यह एक नयी मुसीबत. अब में क्या करूं? कैसे इसे उठाओ? श्रुति सोचने लगी. अभी वो ऐसे ही सोच ही रही थी की अचानक बदल गरजने लगे.
"ओह नो!! यह तो बारिश होने वाली है. शीत!!!! अब यही बाकी था. श्रुति आसमान की तरफ देख कर कहने लगी. उसके कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे की तभी एक दम से ज़ोर ज़ोर से बरसात होने लगी. श्रुति भाग कर एक पेड़ के नीचे जाकर अपने आपको बारिश में भीगने से अपने आपको बचाने लगी. फिर उसने देखा की वो तो इस पेड़ के नीचे आकर अपने को जैसे तैसे कर के बच्चा लिया है पर वहां पड़ा हुआ वो बेहोश आदमी भीग रहा है.उसे महसूस हुआ की एक तो ऐसे ही इतनी ठंड है और ऊपर से यह बारिश, अगर यह आदमी ऐसे ही भीगता रहा तो उसे कुछ हो ना जाए या बीमार ना पढ़ जाए. वो कुछ देर तक ऐसे ही सोचते रही फिर जब उसने देखा की रोहन वहां पड़े पड़े भीग रहा है तो वो आगे बढ़ी और उसे खींचने लगी. पहले तो उसने उसका पैर पकड़ कर खींचना चाहा पर ऐसा करने से रोहन के सर पर घसीटने से कही चोट ना लग जाए उसने उसे हाथ से पकड़ कर खींचे लगी. मगर ऐसा करने में उसे काफी खातिनआइओ का सामना करना पढ़ रहा था. एक तो रोहन का लंबा चौड़ा बदन जो 80 से 85 किलो तक होगा उसे खींचना और ऊपर से वो घायल भी थी. फिर भी हिम्मत करके वो उसे उस पेड़ के नीचे ले आई और ऐसा करने में वो भी पूरी तरह भीग चुकी थी. अब बरसात पहले से भी ज्यादा तेज हो गयी थी इसलिए वो पेड़ भी उन्हें बारिश के पानी से बच्चा नहीं पा रहा था. मगर श्रुति के पास वही काढ़े रहने के अलावा कोई चारा नहीं था. मगर उसके लिए प्राब्लम यह थी के अगर वो इसी तरह यहां खड़ी रही तो भीग कर वो और यह जो बेहोश पढ़ा हुआ है कही बीमार ना पढ़ जाए. उसने सोचा की उसे जल्द से जल्द कोई सूखी जगह तलाश करनी होगी . पर उसके लिए प्राब्लम यही थी के ऐसे जंगल में उसे सूखी जगह कहा से मिलेगी. फिर भी कुछ देर ऐसे ही भीगते रहने के बाद उसने यहां वहां नज़र अपनी दौड़ाने लगी, फिर थोड़ा आगे जाकर भी उसने देखा पर उसे ऐसा कुछ नज़र नहीं आ रहा था की तभी अचानक उसे थोड़े ही दूर पर एक कुतिया जैसा कोई घर नज़र आने लगा. वो खुश हो गयी और सोचने लगी की चलो कुछ तो यहां मिला इस जंगल में. वो फौरन रोहन के पास गयी और उसका खंडा पकड़ के उसे घसीटते हुए वो उसे उस घर के पास ले जाने लगी.

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[color=rgb(226,]परवेज़! इधर देखो." सुशांत, परवेज़ को कोई चीज़ दिखाते हुआ बोला.
"क्या बात है सुशांत? क्या हुआ? " परवेज़ भी उसी दिशा में देखता हुआ सुशांत से कहा. सुशाण टॉर्च की रोशनी में परवेज़ को कुछ दिखाते हुए..[/color]

 
(UPDATE-50)

बोला
"यह देखो खून है किसी का!! और यह खाई का वही हिस्सा है जहाँ से रोहन की बाइक गिरी थी. इसका मतलब अगर रोहन खाई से गिरा होगा तो यही पर होना चाहिए. लेकिन ऐसा नहीं है. सिर्फ़ उसका खून है जिसका मतलब या तो रोहन यहां से जा चुका है या फिर कही वही जानवर उसे नुकसान ना पहुंचाए हो." सुशांत ने कहा.
"मुझे नहीं लगता की रोहन बाबू को वो जानवर ने जान से मारा होगा, क्योंकि अगर ऐसा होता तो यहां रोहन बाबू की लाश नहीं बल्कि उनका कंकाल मिलता. जैसा हमें वहां इस खाई के ऊपर मिला था." भीमा ने कहा.
"हम...मुझे भी यही लगता है सुहंत. जिस तरह हूँ जानवर अपने शिकार का शिकार करते है उस हिसाब से हमें हड्डियों का ढाँचा मिलना चाहिए था, लेकिन यहां ऐसा नहीं है इसका मतलब रोहन अभी भी ज़िंदा है. और अगर वो ज़िंदा तो इसका मतलब इतनी उँचाई से गिरकर वो जख्मी हालत में होगा. हमें जल्द से जल्द उसे ढूंढ़ना होगा. लेकिन समझ में नहीं आता की उसे ढूंडे कहा." कहता हुआ परवेज़ खामोश हो गया.
"एक रास्ता है." कहते हुए सुशांत उस खून वाली जगह पर टॉर्च की रोशनी डालने लगा. "यहां देखो! इन खून की बूँदो को. ऐसा लगता है जब रोहन घायल हुआ होगा तो यही से आगे बढ़ा होगा. तभी तो यह खूनी की बूंदें आगे की और जा रही है. हमें इसी के सहारे आगे चलना चाहिए."
"तुम ठीक कह रहे हो. चलो देखते है यह खून की भूंडे कहा तक ले जाती है." परवेज़ ने कहा. फिर वो उसी दिशा में जाने लगे जिधर वो खून की बूँदें उन्हें ले जा रही थी, की तभी भीमा ने उन्हें रोकते हुए कहा.
"सरकार वो देखिए उधर कुछ है." कहते हुए भीमा उधर ही जाने लगा. भीमा ने देखा की वो किसी जानवर की लाश थी. पहले तो वो थोड़ा घबराया ऐसे भयानक जीभ को देखकर. फिर वो ज़रा संभाला तो उसने देखा की उस जीभ के बारे बारे दाँत, लंबे नाखून, पूरे शरीर पर बाल. शकल से वो एक बंदर लग रहा था. सुशांत और परवेज़ भी उसी जीभ को देख रहे थे. उन्हें भी बड़ी हैरत हो रही थी ऐसे जानवर को देखकर जिसे उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में नहीं देखा था.
"यह क्या चीज़ है? कितना भयानक चेहरा है इसका. ऐसा लग रहा है जैसे की यह कोई शैतान हो." परवेज़ ने कहा.
"यह समझ लो की यह शैतान ही है. जैसा मैंने सुना था और वहां उस खाई के ऊपर जो देखा की इसने कैसे अपने शिकार का शिकार किया है. ऐसा तो कोई शैतान ही कर सकता है."
"लेकिन इस शैतान को आख़िर किसने मारा होगा. कौन इतनी हिम्मत कर सकता है इसे मारने की?" भीमा ने कहा.
"और कौन करेगा भीमा? मेरा यार रोहन ही कर सकता है. उसी की ही बस की बात है इस भयानक जीभ से पंगा लेने की." परवेज़ ने कहा.
"अगर इसे रोहन ने मर गिराया है तो इसका मतलब रोहन सौ फीसद अभी ज़िंदा है."
"में न तो पहले से ही कह रहा था, रोहन इतनी आसानी से अपनी जान देने वालो में से नहीं है. वो जानता है मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों से कैसे निकला जा सकता है. आज मुझे गर्व हो रहा अपने इस दोस्त पर की रोहन मेरा दोस्त है." रोहन की बहादुरी के कारनामा देख कर मानो परवेज़ का सीना चौड़ा हो गया था.
"हूँ तो ठीक है परवेज़ , लेकिन रोहन होगा किधर इस वक्त. ऐसा तो है नहीं की उसे रेस्ट हाउस का रास्ता पता ना हो. जितना तुम, में और भीमा जानते है इस जंगल के बारे में रोहन भी तो उतना ही जानता है. तो सवाल यह पैदा होता है की अगर उसने इस जानवर को मर गिराने के बाद वापस रेस्ट हाउस पर जाने की बजाए कहा गया. क्योंकि जैसा तुम कह रहे थे की उसे निकले तकरीबन तीन घंटे से ऊपर हो चुका था तो इसका मतलब उसे तब तक वहां रेस्ट हाउस पर पहुंच जाना चाहिए था. लेकिन वो वहां पर नहीं पहुंचा था जब हम वहां पर थे. तो फिर से मतलब यही निकलता है की रोहन अभी भी खतरे से बाहर नहीं गया है. वो अभी भी मुसीबत में है." सुशांत ने कहा.
"हां सरकार, सुशांत साहिब सही कह रहे है. रोहन बाबू को तो तब तक पहुंच जाना चाहिए थे. कहा होंगे वो इस वक्त." भीमा ने कहा.
"मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है की उसे कहा तलाश करे. तुम्हीं कुछ बताओ सुशांत कहा ढूंढ़ना चाहिए हमें रोहन को." परवेज़ ने कहा.
"अब यही तो समस्या की कैसे उसे ढूंढ़ा जाए. एक तो इतना अंधेरा है और ऊपर से खून की बूँदें काफी मद्धम पड़ चुकी है इसलिए हमें आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा है." सुशांत खून की बूँदों पर आस पास टॉर्च की रोशनी से रास्ता तलाश करनी कोशिश कर रहा था.
"लेकिन मेरी समझ में नहीं आ रहा है की रोहन जा कहा सकता है. जब हूँ इस भयानक जानवर को मर गिरा सकता है तो वो इतना सहतमंद तो जरूर होगा की..
 
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