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Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा

रोशन उसे चुप रहने को बोल रही थी...और ये भी बोल रही थी...प्लस्स अब तो छोड़ दो...मुझे जाने दो....इतने कहते ही उसके मुँह सी अहह निकल गई...

क्यूँ कि उस आदमी ने अपने लंड का सुपाडा चूत के अंदर डाल दिया था...

फिर वो आदमी बोला.... चल आज तुझे में जन्नत की सैर कराता हूँ...और एक ही झटके में पूरा का पूरा लंड चूत में घुसा देता है...

रोशन ज़ोर से चिल्लाटी है आहह ओह बस इतना कहते ही वो आदमी उसके मुँह पे हाथ रख देता है...और रोशन की आवाज़ मुँह में ही घुट जाती है...

फिर वो आदमी बोलता है..साली कम चिल्ला कोई सुन लेगा...और अपना हाथ हटा लेता है....

रोशन बोलती है...तुम पागल हो क्या एक ही बार में आहह...और फिर उसके आँखों से आँसू आ जाते हैं....

अब वो आदमी धक्के लगाना शुरू कर देता है....लंड चूत की जड़ तक अंदर जाता है...और फिर वो बाहर तक उसे बाहर निकाल के फिर से एक ही झटके में अंदर डाल देता है....

रोशन का शरीर फिर से गरम होने लगता है....वो ये नही चाहती थी..पर उसका शरीर मानने को तैयार नही होता है....

अब धक्के काफ़ी तेज़ हो रहे थे...आदमी की सांस फूलने लगी थी...रोशन ना चाहते हुए भी उसके मुँह से....अहह...ओह...गॉड.....बावा....छोड़ड़ दूऊ...बसस्सस्स...मत्त्त कार्रूऊ......बोले जा रही थी...

और वो आदमी ये सुन के हँसे जा रहा था....अब उसके धक्के बहुत जदा तेज़ हो गये थे.....रोशन जानती थी कि वो अब झड़ने के करीब है....और वो बोल पड़ी..प्लस्ससस्स अंदर नही प्लस्सस्स...कम से कम इतना तो सुन लो मेरी बावा...

लेकिन वो आदमी हंसते हुए बोला...अरी मेरी रानी ऐसा नही हो सकता...और धक्के मारने लगता है...लंड और चूत के मिलन से...बहुत ज़्यादा पच पुकचह की आवाज़ें आ रही थी....

और 2 मिनट बाद ही वो आदमी अह्ह्ह्ह ओह्ह... करते हुए चूत के अंदर ही झड गया....इधर रोशन भी उस आदमी के गरम रस..को सहन नही कर पाई...और अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह....करते हुए झड गई.....इधर रोशन झड़ी उधर कॉंपाउंड में मटकी भी फोड़ दी गयी..वहाँ सब लोग बहुत खुशी से नाच गा रहे थे....

वो आदमी 1 मिनट तक रोशन के उपर ही लेटा रहा और फिर ...हटा और अपना लंड चूत से बाहर निकाला फिर कपड़े पहने...

और रोशन को भी कपड़े पहना दिए...

फिर रोशन ने जो देखा उससे उसकी आँखें फटी की फटी रह गयी....और वो आदमी फिर वहाँ से निकल गया....उसने रोशन को खोला ही नही...

रोशन अभी भी पेड़ से बँधी हुई थी...

उधर सोढी नाच रहा था..तभी उसे अपनी रोशन का ख़याल आया तो उसने देखा कि रोशन तो यहाँ है ही नही...वो इधर उधर देखने लगा फिर भी उसे रोशन नही मिली...तो उसने सोचा कि वो अपन विंग में जाके चेक करे...जब वहाँ पहुँचा तो देखा कि विंग पे तो ताला लगा हुआ है...

वो फिर नीचे आया...और उसने सोचा चलो गार्डन में जाकर देखता हूँ...वो गार्डन पहुँच गया....

गार्डन में ढूढ़ने लगा...फिर कुछ मिनट बाद उसने देखा कि एक पेड़ बहुत ज़ोर से हिल रहा था...वो उस पेड़ की तरफ भागा...और जैसे ही उसकी नज़र उस पे पर पड़ी...वो चौंक गया...

रोशन पेड़ से छूटने की कोशिश कर रही थी...

सोढी :- अरी मेरी जान रोशन तू यहाँ पेड़ से बँधी हुई..तेरी ये हालत कैसे हुई..

रोशन :- रोते हुए...बावा पहले मुझे यहाँ से खोल तो दे...फिर बताती हूँ...

और सोढी फिर रोशन को खोल देता है..

रोशन रोते रोते सोढी के गले से लिपट जाती है..

 
सोढी :- रोशन मेरी जान हुआ क्या है..तू क्यूँ रो रही है..

और फिर रोशन सोढी को अपने बलात्कार के बारे में सब कुछ बता देती है.....और बस इतना सुनते ही सोढी पागलों की तरह चिल्लाता हुआ गार्डन से निकलता है...मगर रोशन उसका हाथ पकड़ के बोलती है..

रोशन :- देख रोशन आराम से..यहाँ सबको पता चल जाएगा...घर चल के बात करते हैं...

सोढी :- रोशन तू ये क्या बोल रही है..में उस हरामजादे को छोड़ूँगा नही...

रोशन :- उसे समझते हुए...देख रोशन मेरी बात समझ हम बात करेंगे लेकिन सबको घर पे बुला के..

फिर सोढी रोशन की बात को समझ जाता है....

वो दोनो सोसाइटी कॉंपाउंड में पहुँचते हैं...वहाँ अब ज़्यादा शोर शराबा नही हो रहा था...रोशन जाके सभी लॅडीस को इकट्ठा करती है...और उन्हे अपने घर आने को बोलती है..सभी लॅडीस हैरान होती हैं पर फिर भी चल देती है...

उधर सोढी सभी जेंट्स को अपने घर आने को बोलता है....जेंट्स का भी वही रियेक्शन होता है लेकिन फिर वो सब भी उसके घर चल देते हैं...सिवाई इस सोसाइटी के सेक्रेटरी शाब श्री आतमाराम तुकारम भिड़े....

सभी लोग सोढी के घर इकट्ठा हो जाते हैं.....

दोस्तो आगे देखेंगे कि सोढी के घर में क्या बवाल मचता है......

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सभी लोग सोढी के घर इकट्ठा होते हैं...अब आगे...

सभी लोग आपस में बात चीत कर रहे थे कि क्यूँ अचनाक सोढी ने हम सबको यहाँ बुलाया है...

जेठालाल :- मेहता साहब ये क्या अचानक सोढी ने यहाँ बुलाया है आपको कुछ पता है...

तारक :- भाई जेठालाल में भी तुम्हारे साथ था ना ... मुझे क्या पता क्यूँ बुलाया है...तुम भी ना...

जेठालाल :- समझ गया...और फिर बबीता जी से पूछता है...बबीता जी आपको क्या लगता है कि सोढी ने हम सबको यहाँ क्यूँ बुलाया है...

तभी बबीता जी की जगह अईयर बोल पड़ता है..

अईयर :- जेठालाल हमे क्या पता कि क्यूँ बुलाया है..

फिर से जेठालाल पूछता है..

जेठालाल :- अच्छा बबीता जी .. आपको पता है कि सोढी और रोशन भाभी दोनो इतनी देर से कमरे में क्या कर रहे हैं..

फिर से अईयर भाई बोल पड़ते हैं...

अईयर :- हम को क्या मालूम जेठालाल..

इस बार जेठालाल बोलता है...

जेठालाल :- अईयर भाई आप बबीता जी है....

सब जेठालाल की बातें सुन के हँसने लगते हैं...

जेठालाल :- क्या अईयर भाई ... में जब भी बबीता जी से कुछ पूछता हूँ..अब टपक पड़ते हैं बीच में...ज़रा शांति रखो भाई...

बस इतना कहता है कि तभी सामने से सोढी और रोशन आते हैं गंभीर चेहरे होते हैं दोनो के...तभी तारक बोलता है...

तारक :- भाई सोढी क्या बात है...तुम कुछ परेशान लग रहे हो...

सोढी :- हाँ मेहता साहब बात ही बहुत बड़ी है...में बस ये सोच रहा हूँ कि कैसे शुरू करूँ...

चाचाजी(बापूजी) :- अरे सोढी तू बे झिझक बोल क्या बात है..हम भी तो तेरे परिवार का हिस्सा हैं...तू बोल आराम से क्या हुआ है...

इधर टप्पू सेना भी सोढी के घर पहुँच जाती है...

तभी सोढी बोलता है...

सोढी :- देखो बच्चो आप सब कुछ देर के लिए बाहर जाओ.यहाँ हम बड़ों को ज़रूरी बात करनी है....

ये सुन के सब लोग हाँ बोल के जाने लगते हैं...बट टप्पू को कुछ गड़बड़ लगती है..इसलिए वो गेट पे छुप कर खड़े रहने का तय करता है....

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इधर पोपटलाल और अब्दुल की गान्ड फटी जा रही थी...

पोपटलाल :- अब्दुल से धीरे से बोलता है...भाई अब्दुल कहीं हमारी हरकतों के बारे में तो नही पता चल गया..

अब्दुल :- पोपटल भाई क्यूँ डरा रहे हो...ऐसा नही हो सकता...कोई और बात है .... अब शांति से खड़े रहो...

पोपटलाल हाँ में गर्दन हिला देता है....

फिर जेठालाल बोलता है भाई सोढी बताइए ना क्या बात है.....

सोढी देर ना करते हुए बोलता है...

सोढी :- दोस्तों में जो बताने जेया रहा हूँ...वो सुन के आपको थोड़ा शॉक लगेगा ... इसलिए में यहॉ चाहता हूँ सबर से काम ले....क्यूँ कि मेने भी सिर्फ़ अपनी रोशन की वजह से अपने आप को सम्भाला हुआ है.....

और फिर वो एक एक बात जो रोशन ने उसे बताई थी...वो सब को बता देता है....

सोढी की ये बात सुनके...सब के सब एक स्टॅच्यू की तरह हो जाते हैं...सब को ऐसा लगता है जैसे किसी ने 440 वॉल्ट की करेंट वाली तार उनके हाथ में दे दी हो...

रोशन भी रोना शुरू कर देती है...जब लॅडीस रोशन को रोता हुए देखती है तो सब उनके पास चली जाती है....

उधर टप्पू भी ये सुन के शॉक हो जाता है....आज कल के बच्चो को सब पता है कि ये सब क्या होता है...वो भाग के अपने दोस्तों के पास पहुच जाता है......!!!!!!!!!

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टप्पू भाग के अपने दोस्तों के पास पहुँच जाता है...और अब आगे...

अंदर सोढी के घर में एक अजीब सी खामोशी छा गई होती है....तभी अईयर उस खामोशी को तोड़ते हुए...

अईयर :- ये क्या कह रहे हो सोढी तुम..हमारी सोसाइटी में रेप...ऐसा तो हो ही नही सकता...

इतना सुनके जेठालाल बोल पड़ता है...

जेठालाल :- अईयर भाई आप मे कुछ अकल है...कुछ समझ है कि आप क्या बोल रहे हैं....आप आए ही क्यूँ वापिस...

अईयर :- क्या मतलब तुम्हारा जेठालाल मुझे नही आना चाहिए था...

जेठालाल :- ओफो मेरा मतलब ये था..कि आप इतनी जल्दी कैसे आ गये..आप तो कल आने वाले थे.. ना..

अईयर :- तुम को इससे क्या मतलब जेठालाल...

तभी तारक बीच में दोनो को रोकता हुआ...

तारक :- तुम दोनो शांत होगे थोड़ी देर...यहाँ मसला कुछ और है..और तुम बेकार की बात पर लड़ रहे हो...

इतना बोलते ही फिर से वहाँ खामोशी छा जाती है....

तभी चाचाजी सोढी से पूछते हैं...

चाचाजी :- सोढी बेटा तू मुझे ये बता की रोशन ने देखा कि कौन था वो...

सोढी से बोलने के पहले ..रोशन और ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है...तभी हाथी बोलता है..कोमल तुम लोग एक काम करो रोशन भाभी को अंदर दूसरे कमरे में ले जाओ...

लेकिन तभी अंजलि बोलती है...

अंजलि :- नही हाथी भाई हम भी तो सुनें कि किसने रोशन भाभी के साथ ये घिनोनी हरकत की है...

सभी अंजलि की बात पर हामी भरते हैं...और रोशन को समझाते हैं..कि प्लस्स आप चुप हो जाइए...अब रोने की बारी तो उस घटिया आदमी की है जिसने आप के साथ ये सब किया है...

फिर दुबारा से चाचाजी सोढी से पूछते हैं...इस बार सोढी बोलता है...

सोढी :- अब जो नाम में आपको बताने जा रहा हूँ...उसे सुन के आप सबके होश उड़ जाएँगे...

जेठालाल :- भाई गोल गोल मत बोल...सीधे बता कौन है...

सोढी :- आत्माराम तुकाराम भिड़े....

बस फिर क्या होना था ये सुन की सब ऐसे हो गये...जैसे कि वहाँ इंसान की जगह पत्थर खड़े हों...

जेठालाल , तारक , अईयर , हाथी , पोपटलाल , अब्दुल सब के मुँह से एक साथ निकलता है...क्य्ाआआआआआआआ.....

उधर सारी लॅडीस अपने मुँह पे हाथ रख कर हववववव...करती है सिवाई दया को छोड़ के...क्यूँ कि उसका थोड़ा अलग स्टाइल है....हे माआअ माताजीी...

तभी चाचाजी बोलते है...

चाचाजी :- सोढी ये तू क्या बोल रहा है ...ऐसा नही हो स्कता....

सभी चाचाजी की बात पे हामी भरते हैं...

तभी अंजलि की नज़र इधर उधर घूमती है...वो माधवी को ढूँढ रही थी..इतनी बड़ी बात हो गई और माधवी भाभी नज़र नही आ रही...ऐसा अंजलि अपने मन में सोचती है..इससे पहले कि वो कुछ कह पाती..रोशन ने चुप्पी तोड़ी....

रोशन :- अपने आप को संभालते हुए..चाचाजी..ये बिल्कुल सही बोल रहे हैं...जो मेरे साथ हुआ उसके ज़िम्मेदार भिड़े है...

चाचाजी :- क्या तुम्हे पूरा यकीन है..

रोशन :- हाँ..उसने अपना सेहरा ढका हुआ था...इसलिए पहले तो में समझ नही पाई..लेकिन आख़िर में जब वो जाने लगा तो उसने बिल्कुल वैसे ही किया जैसे भिड़े करता है...बोलते वक़्त में आत्माराम तुकारम भिड़े इस सोसाइटी का एक मात्र सेक्रेटरी...

चाचाजी :- मुझे तो विश्वास नही हो रहा कि भिंडी मास्टर ऐसा भी कर सकता है...

जेठालाल :- एक शिक्षक होके ऐसा करेगा..मेने सपने में भी नही सोचा था...

अईयर :- यह इम्पॉसीबल है...

बबीता :- अईयर क्या इंपॉसिबल ... रोशन भाभी झूठ थोड़ी बोलेगी...

तभी सोढी गुस्से से बोलता है..

सोढी :- दोस्तों आ जाने दो भिड़े को में उसे जिंदा नही छोड़ूँगा...

 
सभी उसे समझाते हैं सोढी भाई शांत हो जा..हम सब भिड़े से बात करेंगे..लेकिन भिड़े है कहाँ.....

उधर माधवी को होश आ जाता है...और वो अपने बिस्तर से उठती है और बोलती है..

माधवी :- ये क्या में यहाँ सो रही थी...पर मेरा बदन इतना दर्द क्यूँ कर रहा था.....

उधर भिड़े हाथ में कुछ लेके मुस्कुराता हुआ..सोसयटी के गेट से अंदर आ रहा था...

अब जब ये तीनो एक साथ मिलेंगे तो क्या हंगामा होगा.....देखेंगे...आगे..

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भिड़े सोसाइटी के कॉंपाउंड में पहुँच जाता है और वहाँ देख के बोलता है...

भिड़े :- अरी यहाँ इतनी शांति...हाँडी फूट भी गई...और सब लोग कहाँ चले गये...इतनी जल्दी शांति कैसे हो गई यहाँ पर..चलो घर पे चल के देखता हूँ..

और भिड़े फिर अपनी विंग की तरफ निकल जाता है...और अपने घर का गेट खोल के अंदर आ जाता है....

भिड़े :- माधवी , माधवी....कहाँ हो तुम...इतनी जल्दी उपर कैसे आ गये तुम लोग...

तभी उधर से माधवी निकल के बाहर आती है...

माधवी :- क्या जला...क्यूँ चिल्ला रहे हो???

भिड़े :- अरे माधवी इतनी जल्दी तुम लोग उपर कैसे आ गये....

माधवी :- जल्दी कहाँ में तो बहुत देर से उपर हूँ..सो रही थी...

इससे आगे भिड़े कुछ बोलता कि उसको कुछ किसी की आवाज़ आ रही थी..ज़ोर ज़ोर से...वो ध्यान से सुनने की कोशिश कर रहा था....

आवाज़ सोढी के घर की तरफ से आ रही थी...

तभी भिड़े बोलता है...

भिड़े :- अच्छा तो सारी मंडली सोढी के घर पे है..चलो माधवी वहाँ चलते हैं....

माधवी :- आप चलो में आई...

और फिर भिड़े निकल जाता है सोढी के घर की तरफ..

उसे नही पता था कि वो खुद ही मुसीबत की ओर जा रहा है...

उधर सोढी चिल्ला चिल्ला के बात कर रहा था...और सब उसको समझाने की कोशिश कर रहे थे...

तभी सबके कानो में एक आवाज़ पड़ी...

अच्छा तो मंडली मटकी फोड़ के यहाँ आ गई....

सभी गेट की तरफ देखते हैं...वहाँ भिड़े खड़ा मुस्कुरा रहा था...

उसको ऐसा देख के सोढी आग बाबूला हो गया...और वो सीधा भागता हुआ भिड़े के पास पहुचा..कोई भी उसे रोक नही पाया...और सीधे भिड़े की गर्दन पकड़ ली...सब उसकी तरफ भागते हैं...

भिड़े :- अरे क्या कर रहा है सोढी...सांस नही आ रही है...मारेगा क्या...मज़ाक की भी हद होती है..

और पीछे से माधवी भी आ जाती है...

माधवी :- अगोबाई सोढी भाई ये क्या कर रहे हो आप...छोड़िए गला इनका...

फिर सभी बहुत कॉसिश करते हैं सोढी को छुड़ाने की..तभी चाचा जी चिल्लाते हैं...

चाचाजी :- सोढी छोड़ दे अभी के अभी..

इतना सुन के सोढी कुछ सोचता है और उसे छोड़ देता है..

भिड़े :- हांफता हुआ....आईई सोढी पागल है क्या...इतनी ज़ोर से कोई गला दबाता है क्या..मर जाता तो...

सोढी :- अच्छा है ना मर जाता तो...मुझे शांति मिल जाती...

भिड़े ये सुन के चौंक जाता है....

भिड़े :- ये क्या कह रहा है सोढी...पागल हो गया है क्या तू..

जेठालाल :- सही बोल रहा है सोढी..भिड़े मुझे तुझसे ये उम्मीद नही थी...

पोपटलाल :- भिड़े तू एक शिक्षक होके ऐसे हरकत करेगा...छी च्ीईिइ....

अंजलि :- भिड़े भाई आपने ऐसा क्यूँ किया?

दया :- हाँ बोलिए भिड़े भाई आपने ऐसा क्यूँ किया....आपको ज़रा भी शरम नही आईईई...

चाचाजी :- अपनी छड़ी उठाते हुए...बोल बोल बोलता क्यूँ नही है..क्यूँ किया तूने ऐसा....

तभी माधवी बोल पड़ती है....

माधवी :- क्या किया है इन्होने ऐसा?

भिड़े :- हाँ क्या किया है मेने...मुझे पता तो चले....

तभी तारक बोलता है..

तारक :- भिड़े आज जो तुमने किया है...उसके लिए तुम्हे माफ़ नही किया जा सकता...तुम ऐसा करोगे मेने तो सपने में भी नही सोचा था....तुमने ऐसा क्यूँ किया....वो भी इतना पड़े लिखे आदमी होकर...

भिड़े :- मेहता साहब..मुझे पता तो चले मेने किया क्या है...

तभी सोढी गुस्से में आगे फिर से मारने के लिए बढ़ता है ...लेकिन अईयर और अब्दुल ने उसे पकड़ रखा होता है...और बोलता है..में बताता हूँ तुझे...कि तूने क्या किया है...तेरी तो..

फिर तारक बोलता है...

तारक :- सोढी शांति रख..इसे सज़ा तो मिलेगी ....लेकिन तू शांत रह में बात तो कर रहा हूँ ना....

जेठालाल बीच में बोलते हुए..

जेठालाल :- अईयर भाई आपको कोई काम आता है...ढंग से पकडो सोढी को ... हाथ से निकल गया तो..कोई काम ढंग से नही होता आपसे...और बबीता जी की तरफ देखते हुए उनको सॉरी बोलता है...

तारक :- जेठालाल ......

और फिर जेठालाल शांत हो जाता है...

भिड़े :- मेहता शाब मुझे कुछ समझ नही आ रहा कि आप लोग किसकी बात कर रहे हैं...मुझे आप सॉफ सॉफ बताइए...

तारक :- ठीक है...गहरी साँस लेते हुए...तुमने रोशन भाभी के साथ बलात्कार क्यूँ किया??

भिड़े :- बलात्कार अच्छा.....फिर चौंकते हुए........क्य्ाआआआआआआआआआआ...

ये क्याआअ कह रहे हैं मेहता साहब ...आपका दिमाग़ तो खराब नही हो गया....

इतना सुनते ही माधवी के होश उड़ जाते हैं ..और फिर वो बोलती है...

माधवी :- हे भगवांन....ये क्या बोल रहे हैं आप...और रोने लगती है....

तभी कोमल उसका हाथ पकड़ के अपने पास बिठा लेती है..

कोमल :- माधवी भाभी आप चुप हो जाइए..रोइए मत...प्लस्सस्स

भिड़े :- माधवी तुम क्यूँ रो रही हो...ये सब ग़लत है..मेने कुछ नही किया है...मुझे समझ नही आ रहा कि ये लोग क्या बोल रहे हैं....

तभी सोढी बोलता है ...

सोढी :- अच्छा...तुझे कुछ समझ नही आ रहा....तुझे तो में अभी मार डालूँगा...

भिड़े थोड़ा घबरा जाता है...

 
भिड़े :- मेरी बात का विश्वास करो..मेने कुछ नही किया है तुम लोग एक शिक्षक पे शक कर रहे हो...

पोपटलाल :- कॅन्सल कॅन्सल.....तुम अपने आप को शिक्षक कहना कॅन्सल कर दो...इतनी घिनोनी हरकत करने के बाद भी तुम ये सब बोल रहे हो...

भिड़े :- पोपटलाल तुम चुप रहो...चाचाजी में सच कह रहा हूँ मेने कुछ नही किया है...

सोढी :- अचाहा तो रोशन हम सबसे झूठ क्यूँ बोलेगी...उसकी तुझसे क्या दुश्मनी है....

भिड़े :- रोशन भाभी आप ये क्या कह रही है...मेने आप के साथ बलात्कार..छी च्िी...देव....मेने आपके साथ कब किया ऐसा....

कुछ देर के लिए सभी लोग शांत हो जाते हैं...फिर रोशन चुप्पी को तोड़ते हुए....

रोशन :- भिड़े.....आपने मेरे साथ ऐसा क्यूँ किया...

भिड़े कुछ बोलता उससे पहले रोशन उंगली दिखा के उसे चुप रहने का इशारा करती है...

रोशन :- बोलना शुरू करती है...मास्क पहन के आओगे तो मुझे कुछ पता नही चलेगा कि कौन है...

मास्क वाली बात सुन के भिड़े की फट जाती है...लेकिन वो कुछ बोलता नही है..और रोशन बोलने लगती है..

रोशन :- मास्क लगा के आपने अपना चेहरा छुपा लिया..लेकिन आपका नेचर वो तो नही बदल सकता...आपने जब मेरा पूरा बलात्कार कर लिया ...उसके बाद जाते वक़्त आपने अपनी शर्ट को उपर खिचा .... जैसे आप हर टाइम करते हैं....

भिड़े ये सुन के चौंक जाता है....

भिड़े :- लेकिन रोशन भाभी में तो सोसाइटी में था ही नही....

सब ये सुन के चौंक जाते हैं....

तभी जेठालाल बोलता है..

जेठालाल :- अच्छा तो तुम सोसाइटी में नही थे....

और उसे हाथ से थैला खीच लेता है...और बोलता है ...इसमे क्या है...

भिड़े थोड़ा घबरा जाता है....और बोलता है...

भिड़े :- कककुकच्छ नही है इसमे जेठालाल..

जेठालाल भिड़े की सुनता नही है..और उसमे से एक चीज़ निकालता है....

जिसे देख कर सभी आँख फटी की फटी रह जाती है....

क्यूँ कि उस थैले में से एक काला मास्क निकलता है....

जेठालाल :- रोशन भाभी आप देखिए क्या ये वही मास्क है...

रोशन ध्यान से देखते हुए...

रोशन :- हाँ जेठा भाई ...यही है...और रोने लगती है....

सोढी का सब्र का बंद टूट जाता है....वो अईयर और अब्दुल को धका दे के भिड़े की तरफ बढ़ता है और्र उसका गला दबाने लगता है....

सभी लोग सोढी को हटाने की मशक्कत कर रहे होते हैं...बड़ी मुश्किल से वो भिड़े को सोढी से छुड़वाते हैं....

भिड़े हांफता हुआ...

भिड़े :- सोढी चाहे तो तू मुझे मार दे...लेकिन उससे पहले मेरी बात तो सुन ली....

तभी तारक बोलता है.....

तारक :- सोढी शांत...एक बार भिड़े की तो सुन लो..कि वो क्या कहना चाहता है...

सोढी :- इतना सब कुछ कर दिया इसने...और आप कह रहे हैं कि इसकी सुन लूँ....इसे तो जान से मार देना चाहिए...

तारक :- अच्छा बाबा मार देना..लेकिन पहले उसकी बात तो सुन लो...और वो भिड़े से बोलता है...बोलो भिड़े क्या कहना चाहते हो...

भिड़े :- मेहता साहब ये मेरा मास्क नही है....मुझे ये मास्क सोसाइटी कॉंपाउंड के बाहर मिला तो में इसे ले आया...

भिड़े कहानी बनाते हुए...क्यूँ कि मास्क तो उसी का होता है...वही खरीद के लाता है...उसके प्लान के मुताबिक यही था कि मास्क पहन के रोशन के साथ सेक्स करने का..लेकिन....

भिड़े सोचना बंद कर देता है...क्यूँ कि तारक बोलता है...

तारक :- आगे बोलो भिड़े..

भिड़े :- मेहता साहब मुझे मेरे एक स्टूडेंट का फोन आया था...वो मुझे सोसाइटी के बाहर नाके पे मिलने के लिए बुला रहा था...उसको कुछ कम था और जल्दी में था इसलिए वो यहाँ नही आया...

ये बात भिड़े की सच थी...इस बार वो कोई कहानी नही बना रहा था...

 
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