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Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा

गोकुलधाम सोसायटी में दहीहांड़ी का कार्यक्रम



शाम को सब मीटिंग के लिए इकट्ठा होते हैं..लेकिन हमेशा की तरह जेठालाल वक़्त पे नही आया था...उधर भिड़े और पोपटलाल कोँमिटी मेंबर के तौर पे सामने खड़े थे .... तभी भिड़े ने मेहता साहब से कहा..

भिड़े :- देखा मेहता साहब अपने आज जेठालाल फिर से लेट हो गया..कभी नही सुधरेगा ये..

तभी उधर से आवाज़ आती है..ओ पंचायती..ज़रा कम बोला कर...जी हाँ जेठालाल क्लब हाउस के गेट पे खड़े थे...

तारक :- छोड़ो ना भिड़े आ गया ना जेठालाल क्यूँ बेकार में पंगे लेते हो तुम...

उधर जेठालाल अंदर आते है..

जेठालाल :- भाई भिड़े...में दुकान से आता हूँ..टाइम लगता है भाई..ग्राहकी छोड़ के थोड़ी आउन्गा...और मुझे तो बड़ा बोल रहा है अभी तक आइयर भाई भी नही आए हैं..

भिड़े :- इधर उधर देखते हुए..और फिर जेठालाल को सॉरी बोलता है.और फिर आइयर को फोन लगाने लगता है लेकिन..

तभी बबिता खड़ी होती है और बोलती है..

बबिता :- भिड़े भाई आइयर को कुछ काम से 2 दिनो के लिए बाहर जाना पड़ा..इसलिए वो नही आएँगे..

ये सुनते ही जेठालाल के ख़ुसी का ठिकाना नही होता .... वो सोचता है इससे बढ़िया मौका नही मिलेगा बबिता जी के साथ कुछ करने का..लेकिन कैसे करूँ..कुछ तो सोचना पड़ेगा..

तभी भिड़े कल के प्रोग्राम के बारे में बताता है...कि कल सुबह ठीक 9 बजे सबको कॉंपाउंड में मिलना है...दही हाँडी के प्रोग्राम के लिए..और प्लीज़ सब टाइम पे आ जाना...और हाँ सबसे इंपॉर्टेंट बात...कल की दही हाँडी में कोई भी सोसाइटी का मेम्बर हिस्सा नही लेगा क्यूँ कि पिछली बार दया भाभी को बहुत चोट आई थी...

सभी भिड़े की बात पे सहमति देते हैं...बस एक इंसान नही देता वो है जेठालाल..क्यूँ कि वो कल के लिए सोच रहा था..कि कैसे बबिता जी के साथ कुछ किया जाए......उसने अब ठान ली थी कि वो बबिता जी के साथ कुछ कर के ही रहेगा...

उधर बबिता काफ़ी दिन से परेशान तो वैसे ही थी क्यूंकी उसने काफ़ी दिन से सेक्स नही किया है और अब 2 दिन और नही कर सकती ....

ये दोनो अपने ही ख़यालों में खोए हुए थे .... और मीटिंग का एंड भी हो गया और इन्हे पता भी नही चला..जब मेहता साहब ने जेठालाल को हिलाया तब वो अपनी गहरी सोच से बाहर निकला..उधर बबिता जो दया के बगल में बैठी थी वो बबिता को हिलाती है और बबिया भी गहरी सोच से बाहर आती है...सब कॉंपाउंड में आ जाते हैं..

और अपने अपने घर की तरफ निकल जाते हैं...घर जाते ही जेठालाल खाना खाने के बाद अपने कमरे में में सोने चला जाता है .. और बैठ के कल के लिए कुछ आइडिया सोचने ने लगता है...तभी दया आती है और जेठालाल को इतनी गहरी सोच में देख के पूछती है..

दया :- टप्पू के पापा क्या हुआ..कुछ टॅन्षन है??

जेठालाल :- सोच में से बाहर आते हुए...बोलता है...ये आइयर भाई को कोई परवाह ही नही है...ऐसे अकेला छोड़ के निकल जाते हैं..

दया :- हाँ ये तो है..वैसे भी बबिता जी परेशान है कुछ दिनो से..

जेठालाल :- ये सुन के चौंक जाता है...दया तूने मुझे पहले क्यूँ नही बताया कि बबिता जी परेशान है..में अभी उन्हे फोन करता हूँ..

दया :- जेठालाल को रोकते हुए...नही टप्पू के पापा वो आपको नही बता पाएँगी अपनी परेशानी..

जेठालाल :- तो तू बता दे..उसमे क्या है..

दया :- नही बता सकती कुछ प्राइवेट बात है..

जेठालाल :- वो सोचता है..अगर दया से बात निकलवानी है तो दया को एमोशनल ब्लॅकमेल करना पड़ेगा...और बोलता है...ठीक है दया तू मुझे नही बताना चाहती तो ठीक है..आज से में तुझे कोई भी बात नही बताउन्गा...और अपनी रूठने जैसी शकल बनाता है..

दया :- हे माँ माताजी..ये कैसा धरम संकट है..और कुछ सोचने के बाद बोलती है...वो ऐसा है कि आइयर भाई बबिता जी के साथ सॅक्स नही करते..वो इतनी तेज़ बोलती है कि जेठालाल को कुछ समझ नही आता..

जेठालाल :- क्या क्या...अरी डोबी आराम से बोल कुछ स्मझ नही आया..

दया :- इस बार आराम से...वो क्या है कि आइयर भाई बबिता जी के साथ सॅक्स नही करते...और वो इस बात से काफ़ी परेशान है..

जेठालाल :- ये सुनते ही..मन में खुशी से झूम उठता है..मगर बाहर से अपना रोंदों सा सेहरा बनाते हुए दया को बोलता है...दया आइयर भाई को काम रहता है ना इसलिए वो नही कर पा रहे होंगे..तू चिंता मत कर सब ठीक हो जाएगा और बोलता है जल्दी सो जाओ कल सुबह जल्दी उठना है...

इतना सुनते ही दया अपनी मुन्डी हाँ में हिलाती है और सो जाती है..इधर जेठालाल लेट के मन ही मन खुशी में डूब जाता है क्यूँ कि उसका कल का प्लान अब बन चुका था...और ग़लती से बोल पड़ता है...मज़ा आएगा कल...ये सुन के दया जाग जाती है और पूछती है..कि क्या मज़ा आएगा कल...जेठालाल थोड़ा घबरा जाता है लेकिन वो बात को सम्भहाल कर कहता है.....अरे डोबी कल दही हंडी का प्रोग्राम है ना इसलिए बोल रहा हूँ...और दया बोलती है ...अरे हाँ ...और दोनो सो जाते हैं...

 
और अगले दिन का सूरज उग जाता है...सब अपने कमरों में तैयार होने लगते हैं...उधर सोढी अपनी बीवी को तैयार होता देख के अपने लंड पे हाथ फेरता रहता है...रोशन उसे ये करता हुआ देख लेती है..और बोलती है..

रोशन :- ये क्या बाबा सुबह सुबह तू चालू हो गया..और हमे नीचे भी जाना है.....

लेकिन सोढी रोशन के करीब आते हुए...

सोढी :- क्या रोशन तू भी आज तू इतनी हॉट लग रही है कि में बता नही स्कता....और अगर थोड़ी देर हो जाएगी नीचे जाने में तो उससे कोई फरक नही पड़ेगा....

और उसे कसकर अपनी बाहों में जकड लेता है....रोशन हटने के लिए कॉसिश करती है मगर सोढी ने इतनी कसकर पकड़ा हुआ होता है कि वो उससे छुड़ा नही पाती...

सोढी :- देख रोशन अब में बहुत गरम हो चुका हूँ अब जब तक में तेरे साथ कर ना लूँ में और तू नीचे नही जा सकते..

रोशन :- सोचती हुई..ये कमीना बिना करे नही जाने देगा..तो इससे तो अच्छा है कि आराम से और मज़े लेके करूँ..

इतना सोच ही रही होती है कि..सोढी अपने होठ रोशन के होंठो से मिला देता है और रोशन के होंठो को चूमने लगता है...उधर रोशन तैयार नही होती इसलिए कुछ नही कर पाती...सोढी बहुत बुरी तरह होंठो को चूस रहा था...रोशन हान्फते हुए...क्या कर रहे है सोढी आराम से कर ना मना थोड़ी कर रही हूँ..बाबा तू तो बिल्कुल गलीज है गलीज...लेकिन सोढी तो बहुत ही ज़्यादा उतावला होता है....और सोढी रोशन को गोदी में उठा के फिर से उसके होंठो को चूमने लगता है..इस बार रोशन भी उसका साथ देनी लगती है....

सोढी बुरी तरह से उसके होंठो को चूमने लगता है..और अपनी जीभ रोशन के मूह के अंदर डाल देता है और रोशन भी अपनी जीभ निकाल के सोढी की जीभ को काटने लगता है..और दोनो एक जबरदस्त फ्रेंच किस में लगे रहते हैं....

किस करते करते सोढी रोशन को टेबल पे बिठा देता है...और नीचे से उसका पाजाम निकाल के फेंक देता है...और अपना पाजामा अभी उतार देता है..लेकिन दोनो फिर भी किस में लगे हुए होते हैं...दोनो के चारों तरफ एक दूसरे का थूक लग जाता है लेकिन उन दोनो को तो बस एक दूसरों के मूह का रस चाहिए उनको किसी की कोई परवाह नही है....और रोशन सोढी को धक्का दे देती है और बुरी तरह से हाँफने लगती है...और बोलती है..

रोशन :- तू तो एक दम पागल है हान्फते हुए...जंगली कहीं का..जान निकाल दी थी तूने तो...

मगर सोढी बातों के मूड में नही था...और अपना कुर्ता उतार चुका होता है..और रोशन के पास आके झट से उसका कुर्ता भी निकाल देता है...सोढी तो अपने सार कपड़े उतार के नंगा हो जाता है..उसका लंड एक दम तना हुआ होता है...जोकि 9 इंच का हो जाता है....इधर सोढी का लंड देख के रोशन की गीली चूत और ज़्यादा भड़क जाती है....

इधर सोढी रोशन के पास आके उसकी ब्रा को पकड़ के फाड़ देता है...और रोशन बोलती है ए पागल रोशन(सोढी) क्या कर रहा है मेरी ब्रा क्यूँ फाड़ दी...लेकिन सोढी ने कुछ सुना नही...और उसके चुचों पे टूट पड़ता है....और अब रोशन सब कुछ भूल के मज़े लेने लगती है..इधर सोढी एक चुचि मूह में लेके बुरी तरह से चूसे जा रहा था और दूसरी चुचि को दबा रहा था...

रोशन:- अहह ओह सोढी....औचह थोड़ा धीरे....मगर चूस्ते रहो........बहुत मज़ा आ रहा है बाबा......और चूसो इसे...अहह

इधर सोढी अब दूसरी चुचि को मूह में लेके पहले वाली को दबाने लगता है...और बीच बीच में निपल को ज़ोर ज़ोर से चूस देता है जिससे रोशन और पागल हो जाती है...और चीख पड़ती है....आयइईई सोढी आहह.....ऐसे ही करते रहो....

कुछ 2 मिनट ऐसा करने के बाद वो उसकी चुचि को छोड़ देता है...रोशन की चुचि पूरी लाल हो जाती है...लेकिन सोढी अभी भी पागल ही रहता है.....आज वो रोशन की जम कर ठोकने के इरादे में होता है....और एक दम से वो रोशन की चूत को कस के दबा देता है..जिससे रोशन फिर से चीख उठी है...ओह आज्ज्झहह औछ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सोढी आराम से अहह मार दिया तूने तो....और सोढी एक ही झटके में पेंटी भी फाड़ देता है....रोशन की गीली चूत को देखकर सोढी की लार टपकने लगती है....और वो किसी पागल कुत्ते की तरह उसपे टूट पड़ता है...और उसे ज़ोर ज़ोर से चूसना शुरू कर देता है.....इधर रोशन का बुरा हाल हो जाता है सोढी के चूत चाटने पर...वो ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेती रहती है....अहहुईईईईई सोढी आहह ओह्ह्ह्ह मज़ा आ रहा है....

फिर सोढी चूत की दोनो फाँक को खोल कर अपनी जीभ अंदर डाल देता है और अपनी जीभ से चूत की चुदाई चालू कर देता है....जिससे रोशन से रहा नही जाता और उसको बर्दाश्त नही होता और वो अपना काम रस सोढी के मूह में ही झाड़ देती है और झटके खाने लगती है...और धीरे धीरे सारा पानी ख़तम हो जाता है...सोढी खड़ा होता है और एक एक बूँद पी जाता है....और बोलता है..

सोढी :- रोशन मेरी जान तेरा पानी तो तेरी ही तरह मीठा है...लेकिन मेरी जान तू इतनी जल्दी क्यूँ झड गई अभी तो बहुत कुछ बाकी है मेरी जान...

रोशन :- अरे बावा तूने तो मेरी जान निकाल दी...अब बस में और नही करूँगी..

सोढी :- मेरी रोशन तुझे पता है में तुझे जाने नही दूँगा...और अपने हाथ से रोशन का हाथ पकड़ के अपने लंड पे रख के बोलता है...अरे अब ज़रा मेरा लंड पकड़ के चूस मेरी जान....

और रोशन बिना कुछ कहे सोढी का लंड मूह में लेके चूसने लगती है..अब मज़ा लेनी की बारी सोढी की थी...वो सिसकियाँ भरते हुए..आह रोशन डार्लिंग कमाल कर दिया तुस्सी बहुत मज़ा आ रहा है....और चूस्ति जा..फिर रोशन लंड के सुपाडे को चाटती है और लंड को मूह में लेके ज़ोर ज़ोर से चूसने लगती है...और अपने हाथ से सोढी के टट्टों को ज़ोर से दबा देती है..जिससे सोढी पागल हो जाता है और ज़ोर से अहह ओह रोशन कमाल कर दिया तूने.....और सोढी रोशन को रोक देता है....क्यूँ कि अब वो पूरी तरह तैयार हो जाता है आज रोशन की चूत को फाड़ने के लिए...

सोढी रोशन को फिर से टेबल पे बिठा के उसकी टॅंगो को अपने दोनो हाथों में उठा लेता है और लंड चूत पे सैट करके बोलता है ..तैयार हो जा रोशन आज तेरी चूत का कचूमर बना दूँगा..इससे पहले रोशन कुछ बोल पाती ....सोढी एक ज़ोर दार धक्का मारता है...और पूरा का पूरा 9 इंच का लंड रोशन की चूत में उतार देता है.....

रोशन :- चिल्लाती हुई......अहह...ओह माआआआआआआआआआआअ मर् गयइ.....ये क्या किया सोढी तूने पूरा एक बार में डाल दिया...घेलोझ कहीं का....

सोढी ने अंदर घुसाते ही ...धक्के मारने शुरू कर दिए....धक्के इतने तेज़ थे कि रोशन बुरी तरह टेबल पे हिल रही थी...अगर सोढी ने उसे पकड़ा ना होता तो वो गिर जाती...सोढी जबरदस्त चूत के अंदर लंड अंदर बाहर करने लगता है....

और इधर रोशन ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेती है...अह्ह्ह्ह सोढी मज़ा आविग्यो...और मार ज़ोर ज़ोर से मार मेरी इस चूत का भोसड़ा बना दे.....और मररर आआहह ओह....माँ...उईईई......अह्होहओजू....और ज़ोर ज़ोर से चीखे जा रही थी...इधर सिसकियो की आवाज़ के साथ लंड अंदर बाहर होने की आवाज़ भी आ रही थी क्यूँ की चूत इतनी गीली थी कि उसने लंड को इतना चिकना बना दिया था कि पच पुच की आवाज़ें आ रही थी....सोढी पूरी ताक़त के साथ लंड को पूरा अंदर तक पहुचा रहा था....वो तो झड़ने का नाम ही नही ली रहा था...

इधर रोशन का बुरा हाल था वो दुबारा झड़ने के करीब थी...वो बहुत तेज़ सांस ले रही थी..और बोल रही थी...सोढी जल्दी करो में तुम्हारे साथ ही झड़ना चाहती हूँ बावा....

और सोढी और तेज़ धक्के लगाने लगता है....अब सोढी का भी उबल कर आने को होता है... और तेज़ धक्के लगाना शुरू कर देता है...टेबल भी बुरी तरह हिलने लगती है...आज तो रोशन की चूत का सच मुच कचूमर बन गया है...

रोशन :- सोढी आज तो तूने मार ही दिया है..थोड़ा आराम से आहह ओह....में बस झड़ने वाली हूँ मुझसे अब कंट्रोल नही हो रहा...

सोढी :- मेरी जान में बसस्स गया....अहह ओह.....ले मेरा पानी अपनी चूत में....और सोढी अपना गरम गरम पानी रोशन की चूत के अंदर उडेल देता है...

सोढी का पानी रोशन के अंदर जाते ही वो भी कंट्रोल नही कर पाती और चीखती हुई......अहह.....में भी गई..और अपना पानी छोड़ देती है....दोनो एक दूसरे के गले लग कर हाँफने लगते हैं...फिर सोढी अपना लंड बाहर निकालता है..और जब रोशन अपनी चूत की तरफ देखती है तो वो हैरान हो जाती है...क्यूँ कि रोशन की चूत किसी होल की तरह खुली होती है...और मन में सोचती है..कि आज तो सच में इस घेलोच ने मेरी चूत फाड़ दी....और अपने हाथों से धीरे धीरे उसे सहलाती है...तब तक सोढी कपड़े पहन चुका होता है....

अचानक नीचे से आवाज़ आती है सोढी.....सोढी....सोढी बाहर जाके देखता है तो सब उसे बुला रहे होते हैं...वो सबको बोलता है कि 2 मिनट में आ रहे हैं..और वापिस अंदर आ जाता है....और रोशन को बोलता है..

सोढी :- जल्दी कर रोशन सब बुला रहे हैं ...

रोशन :- रुक 2 मिनट ...तूने मेरी ब्रा पेंटी फाड़ दी है ना...अभी दूसरी लेके आती हूँ..

सोढी :- अरे उसका टाइम नही है तू ऐसे ही कपड़े पहन ले..

रोशन :- पागल है क्या...इतना ही बोल पाती है..

क्यूँ कि सोढी उसे फटाफट करने को कहता है..इसलिए रोशन बिना ब्रा और पेंटी के ही कपड़े पहन लेती है....और फिर दोनो नीचे चले जाते हैं....
 
दोस्तो गोकुलधाम सोसायटी में दहीहांड़ी के कार्यक्रम की पूरे ज़ोर शोर से तैयारी चल रही है अब इस प्रोग्राम में क्या क्या हंगामे होने वाले हैं उसके लिए देखते रहिए पढ़ते रहिए तारक मेहता का नंगा चश्मा
 
दही हंडी का प्रोग्राम बहुत जोरो शॉरो से सोसाइटी कॉंपाउंड में चल रहा था...एक तरफ ढोल नगाड़े बज रहे थे...दूसरी तरफ सब जोश के साथ नाच रहे थे..इधर बारिश ने एक बहुत ही लाज़वाब समा बाँध रखा है....अलग अलग टोली आनी थी आज सोसाइटी में मटकी तोड़ने....

इधर रीता रिपोर्टर अपने केमरामेन के साथ सोसाइटी पहुँच गई थी लाइव दही हंडी का प्रोग्राम टीवी पे दिखाने..

रीता :- दोस्तों स्वागत है आपका कल तक चॅनेल पे मैं रीता रिपोर्टर आज गोकुलधाम सोसाइटी में हूँ जहाँ आज दही हंडी का प्रोग्राम होने जा रहा है...और बस कुछ ही देर में यहाँ अलग अलग टोली आएँगी और इस मटकी को फोड़ने का प्रयास करेंगी...तो चलिए पूछते हैं कुछ सवाल इस सोसाइटी के बुजुर्ग श्री चंपकलाल गाड़ा से...

बापूजी बताइए कैसा लग रहा है आपको ??

बापूजी :- अरी रीता बहुत अच्छा लग रहा है...में तो चाहता हूँ..सब जी जान से इस मटकी को तोड़ने का प्रयास करें..ताकि हम सब को भी मज़ा आए..

फिर थोड़ी ही देर बाद पहली टोली आ जाती है और रीता उन्हे कवर करने चली जाती है....

इधर बारिश की वजह से सब भीग गये होते हैं...सभी लॅडीस भीगने के बाद एक दम अप्सरा लग रही थी...

अंजलि , दया , बबिता , माधवी , रीता , और सबसे ज़्यादा हॉट तो आज रोशन लग रही थी...क्यूंकी उसने ब्रा नही पहनी थी...और ये बात सबसे पहले हमारे सोसाइटी के सेक्रेटरी ने नोटीस करी..

भिड़े :- मन में...क्या बात है आज रोशन भाभी ने ब्रा नही पहनी...कमाल की लग रही है ...हाए चुचे तो देखो सॉफ नज़र आ रहे हैं...और अपने लंड पे हाथ रख कर मसल्ने लगता है जो पहले से ही तन के खड़ा हुआ होता है...

उधर जेठालाल की नज़र तो सिर्फ़ बबिता पर ही थी...उसको तो आज बस बबिता को किसी तरह प्यार करना था..और इस बात का भी ध्यान रखना था कि बबिता जी को बुरा ना लगे..

तारक तो अपनी बीवी को ही ताक रहा था..उसे और किसी से फिलहाल तो अभी मतलब नही था..

पोपटलाल तो माधवी को बहन की तरह मानता है पर नज़र तो उसकी उन्ही पर थी...इधर अब्दुल भी माधवी पर नज़र गढ़ाए हुए था...पता नही दोनो किस सोच में डूबे हुए थे...

तभी पहली टोली आई..और सब अपने विचारों से बाहर आए...और टोली का स्वागत करने लगे...इधर टोली आ चुकी थी और अब मटकी फोड़ने का ट्राइ कर रही थी...

वैसे एक बात और बता दूं..जेठालाल ने अपनी तरफ से आज ठंडई का आयोजन किया था...हाँ ये भी बता देता हूँ..कि उसके प्लान का एक हिस्सा है...

सब लोग ठंडाइ पीके टोली का उत्साह बढ़ा रहे थे....उधर जेठालाल बबिता जी से बात करना चाहता था लेकिन मौका नही मिल रहा था...फिर तारक ने उसे नचाने के लिए बुला लिया..और बिना मन से तारक के साथ नाचने लगा...

इधर अब्दुल और पोपटलाल के दिमाग़ में तो सिर्फ़ आज माधवी घूम रही थी..वो दोनो अभी भी माधवी को ही देख रहे थे...फिर अचानक दोनो ने एक दूसरे की चोरी पकड़ ली..

पोपटलाल :- भाई अब्दुल क्या देख रहा है?

अब्दुल :- कुछ नही पोपट भाई ..सब नाच रहे हैं तो उन्हे हे देख रहा हूँ (उसने घबराते हुए कहा)

पोपटलाल :- सबको देख रहा है या फिर सिर्फ़ माधवी भाभी को देख रहा है..

अब्दुल :- हड़बड़ाते हुए...क्या बोल रहे हो पोपट भाई..

पोपटलाल :- रहने दे रहने दे सब समझता हूँ में....

अब्दुल :- अब समझ जाता है कि पोपटलाल को सब पता चल गया है ... तो अब्दुल अपना डर खोलते हुए...मेरी बात छोड़ो आप भी तो माधवी भाभी को देख रहे हो..

पोपटलाल :- घबराते हुए...क्या बोल रहा है अब्दुल..

अब्दुल :- ज़्यादा नाटक मत कीजिए ... मुझे सब पता है...

पोपटलाल :- सर हिलाते हुए सोचता है..अब्दुल को सब पता चल गया है .. छुपाने का कोई फ़ायदा नही है...फिर बोलता है..ज़रा साइड में चलिए अब्दुल..

और दोनो एक कोने में चले जाते हैं जहाँ शोर थोड़ा कम होता है..

पोपटलाल :- भाई अब्दुल क्या करूँ मुझसे रहा ही नही गया आज माधवी भाभी को देख के मेरा लंड खड़ा हुए जा रहा है...तू किसी को बोलेगा तो नही ना भाई..

अब्दुल :- अरे पोपट भाई कैसी बात कर रहे हो..मेरा भी तो यही हाल है ..मेरा भी लंड खड़ा हो रहा है उन्हे देख के...

ये बात सुन के पोपटलाल खुश हो जाता है और 2 मिनट सोचने के बाद बोलता है.

पोपटलाल :- अब्दुल क्यूँ ना आज हम माधवी भाभी के साथ..तू समझ रहा है ना में क्या कहना चाहता हूँ...

अब्दुल :- पोपट भाई आपने तो मेरी मूह की बात छीन ली...लेकिन कैसे करेंगे...

तभी उधर से इन दोनो को आवाज़ लगाई है...और पोपटलाल बोलता है चल उधर चल के कुछ सोचते हैं और दोनो उधर चले जाते हैं...

जैसे ही पोपटलाल और अब्दुल सब लोगों के पास जाते हैं..और तभी पोपटलाल की नज़र ज़मीन पर गिरी एक पॅकेट पे पड़ती है ..और उसमे जो लिखा होता है...वो पढ़ कर पहले तो पोपटलाल हैरान हो जाता है कि सोसाइटी में ऐसा पॅकेट कहाँ से आया..लेकिन कुछ देर बाद वो खुश हो जाता है..क्यूँ कि उसका प्लान इससे सक्सेसफुल हो सकता है...वो अब्दुल को फ़ौरन आवाज़ लगाता है...

पोपटलाल :- अब्दुल अब्दुल अब्दुल...हमारा प्लान अब सक्सेसफुल हो जाएगा..

अब्दुल :- वो कैसे पोपट भाई ??

पोपटलाल :- ये देख .. और वो पॅकेट अब्दुल को दिखाता है..

अब्दुल :- ये क्या है ??

पोपटलाल :- अरे बेवकूफ़ ये है नशे की दवाई..और ये ऐसी वैसी दवाई नही है..इसे लेने के बाद आदमी को ये भी नही पता होता कि उसके साथ कौन है और उसके साथ क्या किया है...

अब्दुल :- सुन के बहुत खुश होता है....और बोलता है वाहह पोपट भाई आपने तो कमाल कर दिया..पहली बार आपने कोई अच्छा कम किया है..

पोपटलाल :- कॅन्सल कॅन्सल....

अब्दुल :- अब क्यूँ कॅन्सल??

पोपट लाल :- तेरा ये बोलना कॅन्सल कर..और जल्दी से काम पे लग जा..और फिर पोपट लाल सारा प्लान अब्दुल को बता देता है...

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भाइयो कमेंट ज़रूर दें

मित्रो पोपट लाल और अब्दुल तो माधवी भाभी को चोदने की साजिश कर रहे है तो अब इनका प्लान कामयाब होगा या नहीं

ये सब जानने के लिए पढ़ते रहिए तारक मेहता का नंगा चश्मा
 
उधर भिड़े तो सिर्फ़ रोशन को देख देख के पागल हुए जा रहा था उसे तो किसी भी तरह आज रोशन के साथ करना था...लेकिन वो यही सोच रहा था कि कैसे करूँ....

इधर पोपटलाल के प्लान के हिसाब से...

अब्दुल उधर ठंडाइ हाथ मे लेके ...आधा पॅकेट जिसमे नशे की दवाई होती है वो उस ग्लास में डाल देता है और चल पड़ता है माधवी की ओर....

इधर पोपटलाल की थोड़ी फॅट भी रही थी कि अगर उसका प्लान किसी को पता चल गया तो सब सोसाइटी वाले उसे मार मार के बाहर निकाल देंगे...

अब अब्दुल माधवी के बिल्कुल करीब पहुँच गया था..अब्दुल की तो पोपट लाल से भी ज़्यादा फॅट रही थी...लेकिन आज सेक्स का इतना बुखार चढ़ा हुआ था कि कुछ और सूझ ही नही रहा था....और फाइनली वो माधवी के पास पहुँच ही गया....और माधवी भाभी से बोला...

अब्दुल :- माधवी भाभी देखिए में आपके लिए ठंडाइ लेके आया हूँ..लीजिए..

माधवी :- थॅंक यू अब्दुल भाई..

अब्दुल :- मन में सोचता है....आज ये भाई बेह्न्चोद बनने वाला है..

इधर माधवी पूरा का पूरा ग्लास गटक जाती है...और अब्दुल पोपटलाल को इशारा कर देता है...और पोपटलाल भिड़े के विंग के पास जाके खड़ा हो जाता है...पोपटलाल ने जान बुझ के भिड़े का ही घर सेलेक्ट किया था .. क्यूँ कि अगर माधवी को नशे में छोड़ने के बाद माधवी तो कहीं जा पाएगी नही ..और इससे गड़बड़ हो जाएगी...

अब्दुल वहीं माधवी के बगल में खड़ा था...इधर माधवी डॅन्स करते करते उसको कुछ अजीब सा लग रहा था...उसको ऐसा लग रहा था कि उसको चक्कर आ रहे हैं...तो वो थोड़ा साइड में चली गयी दीवार का सहारा लेने...किसी का ध्यान भी नही गया क्यूँ कि सब अपने में मस्त थे....तभी अब्दुल अपने प्लान के हिसाब से माधवी भाभी के पास गया और बोला...

अब्दुल :- क्या हुआ माधवी भाभी आपको..

माधवी :- पता नही अब्दुल भाई थोड़ा चक्कर सा आ रहा है..

अब्दुल :- हाँ चाकर तो आएगा ही साली .... मन में सोचते हुए....और फिर बोलता है...माधवी भाभी आप घर जाकर थोड़ा आराम कर लो .. फिर अच्छा लगेगा आपको..

माधवी :- नही अब्दुल भाई में ठीक हूँ...पर जैसे ही वो दीवार का सहारा छोड़ती है उसे फिर चक्कर आ जाते हैं..

अब्दुल :- देखिए माधवी भाभी आप थोड़ा आराम कर लो...में ठीक बोल रहा हूँ...आप उपर जाइए में नीचे बोल दूँगा कि आप कुछ देर के लिए घर गयी हैं...

माधवी :- अब्दुल की बात को सुनकर कुछ सोचती है..और बोलती है आप सही बोल रहे हैं में थोड़ा आराम कर लेती हूँ..

उधर माधवी भाभी अपने विंग की तरफ चल देती हैं....और धीरे धीरे अपने विंग में दाखिल हो जाती है...पोपटलाल अब्दुल को इशारा करता है...और फिर वो खुद इधर उधर देखेके अपनी बत्तीसी फाड़ के अंदर चला जाता है....

और थोड़ी देर बाद अब्दुल इधर उधर देखा ..ये जानने के लिए कि कोई देख तो नही रहा और फिर भिड़े वाली विंग के अंदर चला जाता है....

माधवी अपने घर का गेट खोल के अंदर पहुँच जाती है...लेकिन गेट लॉक नही करती...उसकी पीछे पीछे पहले पोपटलाल और फिर अब्दुल आ जाते हैं...

अब्दुल अंदर आते ही गाते को अंदर से लॉक कर देता है...दोनो एक दूसरे की तरफ देख के मुस्कुराने लगते है..उधर माधवी अपने कमरे के पलंग पे जाके लेट जाती है...उसे बिल्कुल होश नही होता है...

पोपटलाल :- चल अब्दुल..हमे अपना काम शुरू कर देना चाहिए...मुझसे अब रहा नही जा रहा..देख मेरे लंड को कैसे उछल उछल के बाहर आने की कोशिश कर रहा है...

अब्दुल :- पोपट भाई ..मेरा भी यही हाल है..देखो आपसे ज़्यादा मेरा लंड उछल रहा है...आज तो मज़ा ही आ जाएगा...लेकिन फिर वो डरते हुए पूछता है..पोपट भाई हम पकड़े तो नही जाएँगे ना..

पोपटलाल :- सोचते हुए....तू चिंता मत कर अब्दुल...वो दवाई ऐसी है कि माधवी भाभी को पता ही नही चलेगा कि कौन उनके साथ कर रहा है...बस इतना पता चलेगा कि उनके साथ कुछ हो रहा है...और कुछ देर बाद वो ये भी भूल जाएँगी कि उनके साथ कुछ हुआ है....और तूने भी तो आधा पॅकेट डाल दिया ..जबकि मेने कहा था कि थोड़ी से डालियो..

अब्दुल :- अच्छा है ना...ज़्यादा देर तक करते रहेंगे...और उन्हे कुछ पता भी नही चलेगा....

ये सुनते ही दोनो हँसने लगते हैं...

पोपटलाल :- चलो यार चलते हैं...नही तो देर हो जाएगी...

और दोनो माधवी के कमरे की तरफ चले जाते हैं...और अंदर का नज़ारा देखते ही दोनो पागल हो जाते हैं....क्यूँ कि जिस तरह माधवी लेटी हुई थी...वो किसी की भी नियत खराब कर सकती थी....वो एक दम अप्सरा जैसी लग रही थी..

 
लेटने की वजह से उसका टॉप आधा उपर उठा हुआ था..जिससे उसके गोरे पेट के दर्शन हो रहे थे...गीली होने की वजह से उसके चुचे टॉप से चिपके हुए थे..और उसके निपल्स सॉफ दिखाई दे रहे थे...उसका लोवर उसकी जाँघ से चिपका हुआ था....दोनो ये देख कर एक दम मस्त हो गये थे...

पोपटलाल ने ज़्यादा देर ना लगाते हुए अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए...और कुछ ही सेकेंड्स में वो नंगा हो गया..अपना लंड हाथ मे पकड़ के..

अब्दुल पोपटलाल को देख कर..खुद भी फटाफट अपने कपड़े उतार के बिल्कुल नंगा हो जाता है...और बोलता है..

अब्दुल :- अरे पोपट भाई अपना छाता तो रख दो..

पोपटलाल :- अब्दुल तू चुप कर ये छाता तेरा क्या बिगाड़ रहा है ...तू टाइम मत वेस्ट कर...

और फिर दोनो माधवी की ओर देखते हुए चल देते हैं...पोपटलाल तो अपनी लार टपकाने लगता है क्यूँ कि उसका सपना सच होने वाला है..अब्दुल भी अपनी लार टपकाता हुआ माधवी के बगल में बैठ जाता है और घबराते हुए अपना एक हाथ माधवी के हाथ पे रख देता है...और धीरे धीरे फेरने लगता है...

पोपटलाल :- अब्दुल कैसा लग रहा है?

अब्दुल :- बहुत अच्छा लग रहा है पोपट भाई...

पोपटलाल :- अच्छा ...तो फिर में भी करता हूँ...और पोपटलाल अपना हाथ लेके माधवी के दूसरे हाथ पे फेरने लगता है...

उधर माधवी को महसूस तो होता है कि कोई उसके हाथो को छू रहा है..लेकिन वो कुछ नही कर पाती..

पोपटलाल :- अब्दुल हाथ छोड़...और ये चुचियाँ देख..आह..मन कर रहा है खा जाउ...

अब्दुल :- तो खा जाओ पोपट भाई इस वक़्त तो अपने ही हैं ये...

और दोनो हंस पड़ते हैं..

पोपटलाल :- अब्दुल मुझ से अब सबर नही हो रहा है....और इतना बोलते ही...वो अपने दोनो हाथ माधवी के चुचो पे रख कर मसल्ने लगता है धीरे धीरे....और बोलता है....अह्ह्ह्ह अब्दुल मज़ा आ गया...क्या नरम नरम पॉव की तरह ये चुचियाँ हैं...ओह्ह्ह मज़ा आ रहा है दबाने में....

ये देख के अब्दुल और पागल हो जाता है...और वो सीधे माधवी की चूत पे टूट पड़ता है...और उसको पाजामा के उपर से सहलाने लगता है..धीरे धीरे अपनी 2 उंगलियों से चूत को सहलाए जा रहा था...

उधर माधवी के मूह से आहह निकल जाती है...जब दोनो तरफ से ऐसा प्रहार होगा तो किसी की भी आह निकल जाएगी....उसे पता तो चल रहा था कि कोई उसके साथ कुछ कर रहा है...लेकिन नशे की वजह से वो ना तो कुछ कर पा रही थी...और ना ही आँख खोल कर ये देख पा रही थी कि कौन उसके साथ कर रहा है.....इधर अब्दुल बोलता है..

अब्दुल :- पोपट भाई माधवी भाभी को देखो...इधर उनका बलात्कार होने जा रहा है...और इनकी चूत गीली हो रही है...लगता है इन्हे भी मज़ा आ रहा है..

पोपटलाल :- अब्दुल आज पहली बार हम लोग सेक्स और बलात्कार दोनो एक साथ करेंगे...

अब्दुल :- सर खुजाते हुए ..ये क्या बोल रहे हो पोपट भाई..

पोपटलाल :- अब्दुल तुझे सब कुछ समझाना पड़ता है....सेक्स इसलिए कि माधवी भाभी भी हमरा साथ देंगी...और बलात्कार इसलिए कि उन्हे ये नही पता कि कौन कर रहा है उनके साथ..अब समझ गया..

अब्दुल :- मन में..क्या खाक समझ गया..ये पोपट भाई तो सच में पोपट ही हैं..रहने देता हूँ...पूछना बेकार है...और मज़े करता हूँ..और बोलता है...पोपट भाई...क्या हम अब इनके कपड़े नही उतार सकते..मुझे इनका नगा जिस्म देखना है...

पोपटलाल :- खुश होते हुए..बड़ा उतावला हो रहा है अब्दुल..चल उतार देते हैं...एक काम कर तू पैर को थोड़ा उपर उठा में इनका पाजामा नीचे खीच देता हूँ...

और फिर अब्दुल पैर को उपर उठाता है...और पोपट माधवी के आगे आकर पाजामा खीच देता है....और माधवी की गोरी चिकनी जाँघ और पेंटी दोनो के सामने आ जाती है...दोनो के होश उड़ जाते हैं..माधवी को ऐसे देखते हुए...

फिर पोपटलाल बोलता है...चल आगे से उतारते हैं..उपर का टॉप भी उतार देते हैं...अब्दुल माधवी को आगे खीच लेता है...और पोपटलाल उसकी टॉप को फटाफट खीच कर उतार देता है..अब माधवी सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में ही रह जाती है....और फिर जैसे दोनो पागल हो जाते हैं....पोपटलाल माधवी के उपर के हिस्से में...और अब्दुल माधवी के नीचे के हिस्से में टूट पड़ते हैं...

 
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