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Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा

गुड मॉर्निंग गोकुलधाम.....

सुबह सुबह मेहता साहब अपने घर के सोफे पे बैठ के कुछ लिख रहे थे...और गा रहे थे....

लिखते लिखते गाने का शौक उनका पुराना था...वो आज सेक्स पे आर्टिकल लिख रहे थे तो जाहिर है...कि गाना भी कुछ ऐसा ही होगा....

जब उनकी गाने की आवाज़ अंजलि घर के बाहर से आते टाइम सुनी तो बोल पड़ी...

अंजलि :- हाई तारक आज सुबह सुबह आप कैसे गाने गा रहे हैं...

तारक :- अंजलि अब आज का टॉपिक ही सेक्स लाइफ पे है तो क्या करूँ....कुछ आइडिया ही नही सूझ रहा है..

अंजलि :- आपको सेक्स लाइफ पे लिखने में कुछ नही सूझ रहा है....मज़ाक कर रहे हैं आप...

तारक :- अंजलि करने में और लिखने में बहुत फ़र्क है.....

सेक्स करते टाइम तो हम बॅस कर देते हैं...लेकिन लिखने में वो वर्ड्स..और जब तक वो फीलिंग्स नही आ जाती तब तक आर्टिकल नही लिखा जाता..

अंजलि :- आप और आपकी फिलोसफी.......मेरे तो सर के उपर से निकल जाती है..

तभी अंजलि के हाथ से कुछ समान नीचे गिर जाता है....और वो नीचे झुकती है तो उसका सूट जो डीप गले का होता है जिसकी वजह से उसकी चुचि की कुछ झलक दिख जाती है..

तारक मन में सोचता है....यार ये अंजलि सुबह सुबह ऐसा कुछ कर देती है..और मेरा लंड खड़ा हो जाता है...अब तो इसको चोदे बिना तो रहा नही जाएगा...

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उधर जेठालाल के घर पे....

जेठालाल डाइनिंग टेबल पे बैठ के चाइ पी रहा था.....और टप्पू सोफे पे बैठ के फोन पे गेम खेल रहा था..

जेठालाल :- टप्पू बेटा फोन ला जल्दी..

टप्पू :- पापा बस एक मिनट...

जेठालाल :- रोज़ तू एक मिनट एक मिनट करके...फोन की सारी बटेरी ख़त्म कर देता है....अरे दया..जल्दी रुमाल ला भाई देर हो रही है...

दया :- लाई.....

जेठालाल :- टप्पू अब फोन दे दे...मुझे लेट हो रहा है बेटा...

और तभी फोन की घंटी बज उठती है...

जेठालाल फोन उठा के..

जेठालाल :- हेल्लूओ ...

दूसरी तरफ से....में नट्टू काका बोल रहा हूँ गाड़ा एलेक्ट्रॉनिक्स से..

जेठालाल :- हाँ नट्टू काका बोलो..

नट्टू काका :- सेठ जी में कब्से आपको फोन लगा रहा हूँ...आप बार बार मेरा फोन क्यूँ काट रहे हैं..

जेठालाल :- अरे वो टप्पू मोबाइल में गेम खेल रहा है तो वो ही काट रहा होगा...अच्छा ये बताइए क्या काम था..

नट्टू काका :- सेठ जी में तो बस इसलिए फोन कर रहा था...कि आप आज दुकान आएँगे कि नही...

जेठालाल अपना मुँह बनाते हुए..

जेठालाल :- नट्टू काका...मेरी क्या आप अटेंडेँसे ले रहे हैं...हाजरी लगानी है आपको दुकान पे...जो ऐसे वाहियात चीज़े पूछनी है....में क्या रोज़ छुट्टी करता हूँ..

नट्टू काका :- सेठ जी..आप सेठ लोग है..आपका क्या भरोसा..

जेठालाल :- आईएईईए.....आप फोन रखिए में दुकान आ रहा हूँ...

और फोन कट कर देता है....

तभी जेठालाल टप्पू से फोन खिचने चला जाता है...टप्पू बचने के लिए सोफे से चिपक जाता है....

जेठालाल उसके हाथ से फोन खिचने की कॉसिश करता है..लेकिन उसके हाथ में नही आ पाता.....और फिर...टप्पू के हाथ से फोन सोफे के अंदर गिर जाता है.....

अब आगे देखते हैं ये फोन क्या गुल खिलाता है.....

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जेठालाल टप्पू से फोन छीनने की कॉसिश करता है....और उसकी वजह से फोन टप्पू के हाथ से गिर जाता है और सोफे के अंदर चला जाता है अब आगे....

जेठालाल को जब पता चलता है कि उसका फोन सोफे के अंदर चला गया और ज़ोर से चिल्लाता है....

जेठालाल :- टप्पूउूुुुुउउ.....ये देख नालयक क्या किया तूने...फोन अंदर गिरा दिया...

जेठालाल की ऐसी चीखने के आवाज़ सुन कर दया बाहर आती है..

दया :- क्या हुआ टप्पू के पापा...आप क्यूँ चिल्ला रहे हो...

जेठालाल :- ये देख तेरे बेटे ने क्या किया है...मेरा फोन सोफे के अंदर डाल दिया है...

टप्पू दोनो की बातों को ना सुनते हुए..सोफे के अंदर हाथ डाल के फोन ढूढ़ने की कॉसिश कर रहा था..

दया :- गिराया नही होगा...गिर गया होगा ग़लती से ... अभी डाँटती हूँ..

टप्पूअयू बेटा....

जेठालाल :- बसस्स टप्पू बेटा...ख्तम..इतना ही डांटना था....अकल है तुझमे...डोबी...

दया :- आप शांत रहिए...मिल जाएगा फोन...

जेठालाल :- क्या शांत रहिए...कितना ज़रूरी फोन आना है उसमे..पता है तुझे..

दया :- नहियीई.....मेरा मतलब है..रूकिए में कॉसिश करती हूँ...

टप्पू तू हट में कॉसिश करती हूँ..

टप्पू अपना हाथ हटा लेता है...और दया अपना हाथ सोफे के अंदर डाल के फोन ढूढ़ने लगती है...

जेठालाल :- मिला फोन दया...

दया :- एक मिनट ज़रा रूकिए..ढूँढ रही हूँ..

जेठालाल :- जल्दी ढूँढ भाई...

कुछ मिनट तक दया ढूँढती है लेकिन उसे नही मिलता ...तो वो अपना हाथ बाहर निकाल लेती है..

जेठालाल :- मिल गया?

दया :- नही मिला...

जेठालाल गुस्से में..

जेठालाल :- मुझे पता था....तुम माँ बेटे किसी काम के नही हो...दोनो को बस मेरा काम बिगाड़ना आता है...तू हाथ हटा वहाँ से...नॉनसेन्स...

और दया वहाँ से हट जाती है...

लेकिन वहाँ पे फिर बापूजी आ जाते हैं..

जेठालाल टप्पू को डाँट रहा होता है...

जेठालाल :- ये देख टप्पू...क्या किया तूने...

बापूजी :- ए जेठिया सुबह सुबह क्यूँ टप्पू को डाँट रहा है...

जेठालाल :- देखिए ना बापूजी...इस टप्पू ने मेरा फोन सोफे के अंदर डाल दिया है....अब मिल नही रहा है...

बापूजी :- तो इसमे गुस्सा करने वाली क्या बात है....रुक मेरा हाथ पतला और लंबा है... में कॉसिश करता हूँ...

दया :- हाँ बापूजी आप कॉसिश करिए...

जेठालाल दया को नोचते हुए....तू चुप रह ना भाई....

दया चुप हो जाती है...

और बापूजी अपना हाथ सोफे के अंदर डाल देते हैं...

 
दूसरी तरफ से टप्पू बार बार बोल रहा था...मिला दादाजी....मिला फोन..

बापूजी फोन निकालने में लगे हुए थे....थोड़ी देर बाद वो चिल्लाते हैं....

बापूजी :- आईईई जेठियाआआआआ.....

जेठालाल :- अरे वाहह फोन मिल गया...कमाल हो गया ...

दया :- वाहह बापूजी....

और सब तालियाँ बजाने लगते हैं...

बापूजी :- आईए बपुचक.....फोन नही ...मेरा हाथ फस गया है...निकल नही रहा...

सब के मुँह से एक साथ निकलता है..

क्य्ाआआ......

जेठालाल :- बापूजी....आपका हाथ कैसे फँस गया...कॉसिश करिए निकालने की...

बापूजी :- बाबूझक वही तो कर रहा हूँ...मगर नही निकल रहा है...

दया :- हे माँ माताजी....अब क्या होगा..

जेठालाल :- ये देख टप्पू तेरी वजह से...क्या हो गया आज..

टप्पू :- सॉरी दादाजी...सॉरी पापा...

बापूजी :- जेठिया टप्पू को डांटना बंद कर....और मेरा हाथ निकालने की कॉसिश कर्र....

जेठालाल बापूजी का कंधा पकड़ के हाथ खिचने की कॉसिश कर रहा होता है...जिसकी वजह से बापूजी जेठालाल के वजन की वजह से नीचे की ओर दब जाते हैं..

बापूजी :- आई जेठिया हट हट मेरे उपर से...

जेठालाल हट जाता है और बोलता है...क्या हुआ बापूजी..

बापूजी :- आई बापूजी वाडी...तू मेरा हाथ निकाल रहा है...या मुझे अपने नीचे दबा रहा है....तू रहने दे...में अपने आप कॉसिश करता हूँ...

टप्पू :- क्मोन दादाजी...आप निकाल सकते हैं...

बापूजी काफ़ी देर कॉसिश करते हैं..लेकिन वो निकाल नही पाते...और थक के वैसे ही बैठ जाते हैं...

 
 
जेठालाल दया और टप्पू तीनो ही चिंता में थे..तभी जेठालाल को आइडिया आया....

जेठालाल :- दया जल्दी चाकू ला .... काट देते हैं..

दया :- हीय्यी माँ माताजी....टप्पू के पापा आप क्या कह रहे हैं....इतनी छोटी सी बात पे आप बापूजी का हाथ काट देंगे...

बापूजी :- हैंन्णणन्....

जेठालाल :- नही बापूजी.....ये नॉनसेन्स दया.....में हाथ काटने की नही ... सोफा काटने की बात कर रहा हूँ...

दया :- अच्छा....अभी लाती हूँ...

बापूजी :- नही...सोफा काटने की ज़रूरत नही है...में फिर से कॉसिश करता हूँ...

दया :- हाँ बापूजी थोड़ा उधर ..हाँ थोड़ा इधर..

जेठालाल :- तुझे क्या सोफे के अंदर के रास्तों का पता है....रोज़ क्या वहाँ टहल कर आती है...जो बोल रही है..इधर उधर...

दया :- क्या...क्या...कुछ समझ नही आया..

जेठालाल :- तू चुप रह ना नॉनसेन्स...

इधर जेठालाल का फोन पे फोन बजे जा रहा था...

फिर से ये फॅमिली शुरू हो जाती हैं बापूजी का हाथ बाहर निकालने के लिए....काफ़ी बापूजी को उल्टा करते हैं...कभी उनका हाथ बाहर खिचने की कॉसिश करते हैं....

फिर दया बोलती है...

दया :- एक काम करते हैं..सोफे को उल्टा करते हैं...शायद उससे हाथ बाहर आ जाए..

जेठालाल :- हाँ एक बार ये भी ट्राइ करते हैं..

और फिर तीनो आराम आराम से सोफे को उल्टा करते हैं...तभी नीचे से आवाज़ आती है..

बापूजी :- आईई जेठियाआआआआ....

जेठालाल :- दया डोबी...जल्दी से सोफा उपर कर लगता है बापूजी को सांस नही आ रहा है...

जैसे भी सोफे को उपर करते हैं...बापूजी अजीब सी पोज़िशन में ज़मीन पर लेटे होते हैं...और उनका हाथ भी सोफे के अंदर से निकला हुआ होता है....

जेठालाल बापूजी को उठा के सोफे पे वापिस रखता है...

जेठालाल :- बापूजी आप ठीक हैं...

बापूजी :- जागते हुए...हाँ हाँ..में ठीक हूँ...मगर तेरा फोन अभी भी वहीं है...

तभी जेठालाल का फोन बजने लगता है....

 
दया :- फोन उठाइए....उठाते क्यूँ नही..

जेठालाल :- तेरे में अकल है....नॉनसेन्स....फोन सोफे के अंदर है कैसे उठाऊ...

दया :- पता नही कौन है फालतू जो सुबह सुबह फोन कर रहा है..

जेठालाल :- फालतू...अरे ज़रूरी काम होगा तभी फोन कर रहा है ना...

दया :- सॉरी..

बापूजी :- जेठा क्यूँ बहू पे गुस्सा कर रहा है...

जेठालाल :- बापूजी इसे देखिए ना..कैसे वाहियात....

बापूजी :- छुउऊुउउ...शांत रह बस...बहुत हो गया...

तभी वहाँ से सोढी घर के अंदर आ जाता है...और सब को नमस्ते करता है...

और जेठालाल का फोन फिर से बज उठता है...

जेठालाल :- ये लो...पता नही कौन फोन कर रहा होगा...

सोढी :- जेठा प्रा आपका फोन बज रहा है ...आप उठा क्यूँ नही रहे हो...

जेठालाल :- सोढी कैसे उठाऊ..ये टप्पू ने फोन सोफे के अंदर डाल दिया है...

सोढी :- ये लो बस इतनी से बात अभी निकाल देता हूँ....चंपक चाच्चा आप ज़रा खड़ा होना...

और सोढी सोफे को उपर उठाता है...और नीचे से सोफे के कवर को फाड़ देता है...और फोन को निकाल देता है...

सोढी :- ये लो जेठाप्रा फोन...और हाँ इसका खर्चा 500 रुपये हैं...

जेठालाल :- थॅंक यू सोढी...थॅंक यू..

और सोढी जाने लगता है..

जेठालाल :- अरे सोढी...कहाँ जा रहा है...कोई काम से आया होगा ना...

सोढी :- अरे हाँ वो तो में भूल ही गया था...में ये कॅलंडर देने आया हूँ...अच्छा जी चलता हूँ...

और सोढी चला जाता है...

जेठालाल अपने फोन में देखता है...12 मिस्ड कॉल होती हैं...वो फटाफट फोन लगाता है.....

जी हमरेश भाई.... ... वो क्या था ना फोन मेरे बेटे से सोफे के अंदर चला गया था..इसलिए फोन नही उठा पाया... हाँ बोलो.....

अच्छा....अच्छा....हाँ हाँ बिकलूल....हाँ हम रेडी ही हैं...ओहकक...फिर...

और जेठालाल अपना हँसता हुआ चेहरा बना कर....मज़ा आएगा....

क्या बात हुई जेठालाल की फोन पे....नेक्स्ट अपडेट में....!!!!

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फोन मिलने और उस पर बात करने के बाद जेठालाल काफ़ी खुश लग रहा था...और वो कुछ बताने मेहता साहब के घर निकल पड़ा था....

सीडियाँ से उतरते हुए...वो नीचे कॉंपाउंड पे पहुँच चुका था...सामने भिड़े बोर्ड पर सुविचार लिख रहा था...

जेठालाल :- आई भिड़े....भिड़ी...

भिड़े :- हाँ जेठालाल...

जेठालाल :- ज़रा इधर तो आना...

भिड़े :- हाँ आता हूँ..

और भिड़े जेठालाल की तरफ चल देता है..

भिड़े :- हाँ बोलो जेठालाल .... आज सुबह सुबह मुझे कैसे याद किया तुमने...

जेठालाल :- आई चपली....ज़रा शांत रख ना....मुझे सिर्फ़ ये बताना है...

और वो भिड़े को फोन पे की हुई बातें बता देता है...

भिड़े सुन के खुश हो जाता है...

भिड़े :- अरे वाहह जेठालाल....तुमने सुबह सुबह मस्त न्यूज़ दे दी...अच्छा तो में सोढी और अईयर को बता दूँगा..

जेठालाल :- हाँ ठीक है...और में पोपटलाल और मेहता साहब को बता दूँगा....

और फिर जेठालाल मेहता के गेट के पास पहुँच के बेल बजाने ही वाला होता है कि अंदर से.....

अंदर से अहह...ओह....तराक्क...

अहहाहहा.....औरर्र तेज़्ज़्ज़.....ह्म...

आवाज़ें आ रही थी...

जेठालाल मन में....ये आज कल मेहता साहब को क्या हो गया है...सुबह सुबह के चालू हो जाते हैं...और गेट भी बंद नही करते....अंदर झाँक के देखूं क्या..नही नही...मेहता साहब को बुरा लग जाएगा....

नही बुरा लगेगा ...बोल दूँगा..गेट खुला था ... हाँ..यही ठीक रहेगा..

और फिर जेठालाल हल्का सा गेट खोल के अंदर झाँकता है...अंदर का नज़ारा देख के जेठालाल का लंड अंडरवेर के अंदर जाग कर खड़ा हो जाता है...और पैंट के उपर से सॉफ दिखाई देने लगता है.....

अंदर का नज़ारा इस तरह था...

अंजलि गेट के सामने वाले सोफे पर थी...उसकी टाँगे सोफे के दोनो साइड पर थी..उसकी पाजामी नीचे थी पंजो तक..और तारक की पैंट नीचे थी...और वो अंजलि के उपर चढ़ा हुआ था..

तारक अंजलि की चूत में बहुत तेज़ी से धका धक धक्के लगा रहा था...अंदर बाहर अंदर बाहर...

तारक :- अंजलि..आह....उफफफ्फ़....मज़ा आ रहा है...

अंजलि :- अहह तारक.....मज़ाअ.....अरे....स्वर्ग्ग जैसीए आनंद मिल रहा हाइईइ.....और तेज़्ज़.....ओह...ह्म....और तेज़्ज़्ज़..अहह......उफफफफफफफ्फ़...

तारक की स्पीड बढ़ जाती है....और वो अब बहुत तेज़ी से लंड को अंदर बाहर करने लगता है....लंड पूरा अंदर और पूरा बाहर आने लगता है...

तारक :- अंजलि...में आ रहा हुन्न...अह्ह्ह्ह

अंजलि :- तारक में भी...गेयीयी....

और दोनो चीखते हुए अपना रस पान कर देते हैं....और हान्फते हुए एक दूसरे के उपर गिर जाते हैं...

 
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