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Guest
अब्दुल की दुकान पे सब पार्टी में जानने की बातें कर रहे थे...तभी किसी ने ना बोला...अब आगे....!!
जेठालाल ने सबको पार्टी में जाने के लिए बोला....तभी किसी ने वहाँ ना कहा..
पोपटलाल :- क्यूँ...हाथी भाई...
तारक :- हाथी भाई आप पार्टी में जाने के लिए मना कर रहे हो....मेरे कान तो ठीक हैं ना..
डॉक्टर हाथी :- हाँ मेहता साहब ...आप ने बिल्कुल ठीक सुना...
भिड़े :- लेकिन क्यूँ??
डॉक्टर हाथी :- भिड़े मास्टर....वो मुझे और कोमल दोनो को कल .... हॉस्पिटल मेरे भाई के पास जाना है...गाओं में...उनके बेटे की तबीयत थोड़ी खराब है .....
जेठालाल :- ओहू....हाथी भाई...हम आपको बहुत मिस करेंगे...
हाँ ये बात तो है...सभी बोल पड़ते हैं..
जेठालाल :- मेहता साहब एक और मुसीबत है....
तारक :- क्या..
जेठालाल :- बापूजी.....
सब बापूजी का सुन के टेन्षन में आ जाते हैं....
जेठालाल :- हम अपनी बीवियों को तो बेवकूफ़ बना देंगे..लेकिन में बापूजी के सामने झूठ नही बोल पाता...
तारक :- ये बात तो ठीक है तुम्हारी...एक काम करते हैं...सब आज रात सोचते हैं कि क्या बहाना मारना है....फिर देखते हैं...क्या करना है...ठीक है दोस्तों..
भिड़े :- हाँ मेहता साहब .. आप ठीक बोल रहे हैं...कुछ तो सोचना पड़ेगा....चलो फिर चलते हैं...और सोचते हैं..
फिर सब अब्दुल को गुड निट बोल के निकल जाते हैं...
जेठालाल घर पहुँचते हुए.....अपने लिविंग रूम में एंटर करता है....और यूयेसेस दया दिखाई देती है...जो कि डाइनिंग टेबल पे कुछ कर रही थी..इसलिए वो जेठालाल को नही देख सकती...
जेठालाल दया को पीछे से उसकी गान्ड को देख के गरम हो जाता है...और दौड़ता हुआ...पीछे से जाके उससे चिपक जाता है...और दबोच लेता है...
दया डर जाती है..
दया :- उईइ माआ....टप्पू के पापा ये आप क्या कर रहे हैं..
जेठालाल :- अपनी बीवी से प्यार...
और उससे ....अपनी तरफ सीधा कर लेता है...
दया :- टप्पू के पापा आप भी ना...खाना खा लीजिए...पहले...फिर कमरे में आराम लेंगे...कोई आ जाएगा..
जेठालाल :- अर्रे बापूजी और टप्पू के अलावा कौन आएगा...और वैसे भी आज लेट हो गया तो वो दोनो सो ही गये होंगे...
जेठालाल ने सबको पार्टी में जाने के लिए बोला....तभी किसी ने वहाँ ना कहा..
पोपटलाल :- क्यूँ...हाथी भाई...
तारक :- हाथी भाई आप पार्टी में जाने के लिए मना कर रहे हो....मेरे कान तो ठीक हैं ना..
डॉक्टर हाथी :- हाँ मेहता साहब ...आप ने बिल्कुल ठीक सुना...
भिड़े :- लेकिन क्यूँ??
डॉक्टर हाथी :- भिड़े मास्टर....वो मुझे और कोमल दोनो को कल .... हॉस्पिटल मेरे भाई के पास जाना है...गाओं में...उनके बेटे की तबीयत थोड़ी खराब है .....
जेठालाल :- ओहू....हाथी भाई...हम आपको बहुत मिस करेंगे...
हाँ ये बात तो है...सभी बोल पड़ते हैं..
जेठालाल :- मेहता साहब एक और मुसीबत है....
तारक :- क्या..
जेठालाल :- बापूजी.....
सब बापूजी का सुन के टेन्षन में आ जाते हैं....
जेठालाल :- हम अपनी बीवियों को तो बेवकूफ़ बना देंगे..लेकिन में बापूजी के सामने झूठ नही बोल पाता...
तारक :- ये बात तो ठीक है तुम्हारी...एक काम करते हैं...सब आज रात सोचते हैं कि क्या बहाना मारना है....फिर देखते हैं...क्या करना है...ठीक है दोस्तों..
भिड़े :- हाँ मेहता साहब .. आप ठीक बोल रहे हैं...कुछ तो सोचना पड़ेगा....चलो फिर चलते हैं...और सोचते हैं..
फिर सब अब्दुल को गुड निट बोल के निकल जाते हैं...
जेठालाल घर पहुँचते हुए.....अपने लिविंग रूम में एंटर करता है....और यूयेसेस दया दिखाई देती है...जो कि डाइनिंग टेबल पे कुछ कर रही थी..इसलिए वो जेठालाल को नही देख सकती...
जेठालाल दया को पीछे से उसकी गान्ड को देख के गरम हो जाता है...और दौड़ता हुआ...पीछे से जाके उससे चिपक जाता है...और दबोच लेता है...
दया डर जाती है..
दया :- उईइ माआ....टप्पू के पापा ये आप क्या कर रहे हैं..
जेठालाल :- अपनी बीवी से प्यार...
और उससे ....अपनी तरफ सीधा कर लेता है...
दया :- टप्पू के पापा आप भी ना...खाना खा लीजिए...पहले...फिर कमरे में आराम लेंगे...कोई आ जाएगा..
जेठालाल :- अर्रे बापूजी और टप्पू के अलावा कौन आएगा...और वैसे भी आज लेट हो गया तो वो दोनो सो ही गये होंगे...