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Horror भूत बंगला

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करण अपनी आँखे मलने लगा, उसे विशवास ही नहीं हो रहा था जो वो देख रहा था. वो आदमी और लड़की ऐसे बात कर रहे थे जैसे उन्हें पता ही न हो की करण बाहर से उन्हें देख रहा है.

“अरे आपने इतनी तकलीफ क्यों की शगुन लाने में, आप नौकरों से भिजवा देते, और वैसे भी अभी हमारे माता पिता घर में नहीं है, नहीं तो यह शगुन लेके पूजा में रख देते.” उस लड़की ने मासूमियत से कहा.

“कोई बात नहीं जी, अब आपके पिताश्री और माताश्री नहीं है तो मेरा काम और भी आसान हो गया है.”

“जी, मैं आपका मतलब नहीं समझी ?” उस लड़की ने कहा.

“मतलब यह देवीजी की मुझे अपने साले से जलन हो रही है की उसका विवाह तुम जैसी सुंदरी से हो रही है.”

वो आदमी झट से उस लड़की के तरफ बढ़ा और उसको धक्का दे सामने बिस्तर पर गिरा दिया.

“यह आप क्या कर रहे है जीजाजी…..?” उस लड़की ने कहा.

“तुमने मुझे बहुत तड़पाया है जानेमन, आज तो हम आपका भोग करेंगे.” हँसते हुए वो आदमी उस लड़की पे छलांग लगा दिया.

“छी आप ये कैसी बातें कर रहे है. आप यहाँ से चले जाईये नहीं तो हम शोर मचा देंगे.” उस लड़की ने उस आदमी को अपने ऊपर से हटाने की नाकाम कोशिश करने लगी.

“चुप साली…मचा जितना शोर मचाना है, देखता हु कौन बचा सकता है तुझे.” उस आदमी ने उस लड़की के गालो पे एक कश के थप्पड़ मार दिया.

उस लड़की की आँखों से आंसू निकाल आये, वो अपने आपको उस आदमी के चंगुल से छुड़ाने की कोशिश करने लगी. उसने बहुत कोशिश करी पर उस आदमी के बलिष्ट शरीर के सामने हार गयी.

वो आदमी जबरदस्ती उस लड़की के होठो को चूमने लगा, और वो लड़की बेबस होके बस बिलख के रोती रही.

करण यह सब बाहर से देख रहा था. उसके सामने एक आदमी एक युवती का बलात्कार कर रहा था. करण लडकियों की इज्ज़त करता था इसीलिए उसे उस आदमी पे बहुत गुस्सा आया. उसने जोर लगा के दरवाज़ा खोलना चाहा पर खोल न पाया.

“हरामजादे, छोड़ दे लड़की को ……” करण बेबस होके बस देखता रहा.

आदमी ने दो चार कश के और थप्पड़ लगा दिए उस लड़की को. अपने गिरफ्त में एक खूबसूरत युवती को पा कर वो शैतानो वाली हसी हसने लगा. अपनी लुट टी हुई इज्ज़त को बचाने के लिए वो लड़की इधर उधर हाथ पावँ मारने लगी, एडिया रगड़ने लगी पर उस वेह्शी आदमी को उस पे ज़रा भी दया नहीं आई.

 
रोते हुए वो लड़की उस आदमी से विनती करने लगी, “आपको भगवान का वास्ता जीजाजी, हम आपके साले की होनी वाली पत्नी है, भगवान के लिए हमे छोड़ दीजिये, नहीं तो हमारा विवाह टूट जायेगा.” अपने फटे हुए लहंगे जिस से उसके स्तन दिख रहे थे उसको ढकने की कोशिश करने लगी.

करण जो यह सब बाहर से देख रहा था, उस लड़की को बचने के लिए कुछ नहीं कर सकता था. अपने बेबसी और उसके सामने उस लड़की की लुटती हुई इज्ज़त को वो देख न सका और उसके आँखों में आंसू आ गए.

उस आदमी ने उस लड़की के सारे कपडे फाड़ दिए और उसे बहुत मारा पीटा. वो लड़की भी शायद समझ गयी की आज उसे कोई नहीं बचा सकता था. उसने अब विरोध करना बंद कर दिया था बस रोते हुए अपनी इज्ज़त लुटते हुए देख रह थी.

कपडे उतार कर वो आदमी लड़की से चिपक गया, “आह्ह्ह्ह …..मेरी रानी तुझे तो मैं नंगी कर के तेरे लाजवाब शरीर को भोगूँगा. कोठे की सबसे महंगी रंडी बनेगी तू. तुझे अंग्रेजो को बेच दूंगा कुतिया, वो मुझे मुह माँगा इनाम देंगे तेरी चूत के बदले.”

“भगवान के लिए छोड़ दीजिये मुझे, मैंने आपका क्या बिगाड़ा है.” उस लड़की का रोना बंद ही नहीं हो रहा था. उसके नंगी शरीर पर उस आदमी ने जगह जगह नोच लिया था जहा से खून निकाल रहा था.

“क्या मस्त चूचियां है तेरी कितनी बड़ी बड़ी है ये, आज तो मजा आ गया. तेरी जवानी को आज खूब मज़ा लेके लूटूंगा.” कहते हुए उस आदमी ने उस लड़की के स्तन जोर जोर से मसलने लगा.

स्तन जोर जोर से मसले जाने पर उस लड़की की चीख निकाल गयी, “भगवान् तुझे कभी माफ़ नहीं करेगा शैतान, मेरे होने वाले पति को जब पता चलेगा की तुने मेरा बलात्कार किया है तो वो तुझे जान से मार देंगे.”

 
“रंडी तेरा विश्वास कौन करेगा, तेरा होने वाले पति को मैं कह दूंगा की उसकी शादी जिस लड़की से होने वाली है वो एक बहुत बड़ी छिनाल है, जो पैसो के लिए कोठे पे अपने जिस्म का धंधा करती है, और अंग्रेजो का बिस्तर गरम करती है, और मैं उसका जीजा हूँ वो मेरी बात मानेगा न की तेरी.” उस आदमी की बातें सुन कर वो लड़की डर गयी और जोर जोर से बिलख के रोने लगी.

“देख साली की चूत को, साली रंडी झांटे काट कर रखती है. किसे दिखाती है रे अपनी चूत ? साली कुतिया.” उस आदमी ने जबरदस्ती उस लड़की को ज़मीन पे गिरा के उसके योनी में अपनी ऊँगली डालने लगा.

ऊँगली डालने से वो लड़की तड़प उठी और उसकी चीख पूरे बंगले में गूँज उठी. करण यह सब बेबस होके देख रहा था, वो चाह कर भी कुछ नहीं कर सकता था.

उसे उस लड़की के लिए बहुत बुरा लग रहा था, इसीलिए वो भी खुद को रोने से नहीं रोक पाया. उसने इधर उधर देखा की कमरे में घुसने का कोई और रास्ता है की नहीं पर उसे कुछ नहीं मिला.

“साली बहुत आवाज़ करती है, रुक अभी तेरा मुह बंद करता हु.” और उस आदमी ने अपना लिंग उस लड़की के मुंह में डाल दिया.

“साली अगर दांत से काटा ना तो मैं तेरा गला दबा दूंगा. अब चुप चाप अच्छी रंडी बन के मेरा लंड चूस.” फिर वो आदमी उसके मुंह में लंड तेज़ी से अन्दर बाहर करने लगा.

“इतनी बेईज्ज़ती से तो मेरा मर जाना अच्छा है भगवान.” उस लड़की ने लंड मुंह से बाहर निकलते हुए कहा. वो अब भी रो रही थी.

“तू मर के भी कहा जायेगी छिनाल, जब से मेरी नज़र तुझ पर पड़ी है तब से तुझे अपनी रखैल बनाने की हसरत है मेरी, तू मर भी गयी ना तब भी तेरी आत्मा का बलात्कार करता रहूँगा मैं.” और उस आदमी ने लड़की के बालो को खीचते हुए उसे बिस्तर पे पटक दिया.

"चल कुतिया, अपनी मस्त चूत दिखा, कितने दिनों से पागल बनाया हुआ है तेरी बुर ने.” कहते हुए उसने उस लड़की की टाँगे जबरदस्ती खोल के उसकी अन्छूई कुंवारी योनी को मुट्ठी में भर लिया और मसलने लगा.

वो लड़की अब विरोध कर कर के थक गयी थी, उसको उस आदमी ने इतना मारा था की उसके शरीर में जगह जगह दर्द हो रहा था, और जहाँ उसे उसने नोचा था वहाँ से खून निकाल रहा था जिसपे जलन हो रही थी. अपनी ऐसी हालत देख कर उसने अपने आपको भाग्य पर छोड़ दिया.

तभी उस लड़की को चूतमें बहुत तेज़ दर्द हुआ. उसने नीचे देखा तो पाया की उस आदमी ने अपना मोटा लिंग उसके कुंवारी चूत के अन्दर डाल दिया था.

“ऊऊउईईईई …….म्माआअ ……..नाह्ह्ह्हीईइ …..कमीने जाने दे मुझे.” एक ज़ोरदार चीख निकली जिस से पूरा बंगला हिल गया.

वहशीपन और दरिंदगी के इस मंज़र को करण देख नहीं पाया और वही ज़मीन पे सर पे हाथ रख कर बैठ गया. उस लड़की का दर्द उस से देखा नहीं जा रहा था. पर वो कर भी कुछ नहीं सकता था बस रोये जा रहा था क्यूंकि दरवाज़ा खुल ही नहीं रहा था, ना ही उस कमरे में जाने का कोई और रास्ता था.

इसके बाद दर्द से वो लड़की अपना होश खो बैठी. जब उसे होश आया तो देखा की वो अपने पीठ के बल लेटी हुई थी, वो आदमी उसके ऊपर चढ़ा हुआ था और उसकी चूत मैं लंड अन्दर बाहर कर रहा था.

वो फिर से रोने लगी, “मेरी इज्ज़त लूट ली इस दरिन्दे ने, मेरा कौमार्य भंग कर दिया इसने जो मेरे पति के लिए था, अब मैं कहाँ जाउंगी, मेरा मर जाना ही अच्छा है. हे भगवान तुने मेरे साथ ही ऐसा क्यों किया.” और वो फिर से बिलख बिलख के रोने लगी.

“मुझे माफ़ कर दीजियेगा मेरे पतिदेव, मैंने आपसे सच्चा प्यार किया था, पर मैं ये ज़िल्लत भरी ज़िन्दगी और नहीं जी सकती.” उस लड़की ने अपने आंसू पूंछे.

“अह्ह्ह्ह ……येही है जीवन का आनंद, तेरी चूत बहुत कसी हुई है कुतिया ……मैं झड़ने वाला हूँ …तुझे पेट से नहीं किया तो मैं भी तेरे होने वाले पति का जीजा नहीं ….” कहते हुए वह आदमी झड़ने लगा और लड़की की चूत को वीर्य से लबा लब भर दिया.
 
“छीईईई …मुझे अपने ही शरीर से घिन्न आ रही है. तुझ जैसे वहशी ने मेरा बलात्कार तो कर दिया पर मैं भी राजपूत हूँ, इज्ज़त के लिए अपनी जान भी दे सकती हूँ.” उस लड़की ने अपनी पूरी हिम्मत और ताक़त जुटा के उस आदमी को जोर से धका दिया जिस से वो बिस्तर से नीचे जा गिरा.

इसकी उम्मीद उस आदमी को नहीं थी इसलिए अचानक दिए गए धक्के को संभल नहीं पाया और नीचे जा गिरा. अपने आंसू पूंछते हुए वो लड़की उठी और पास में दिवार पर टंगी एक तलवार को खीच निकाला, और उस आदमी की और बढ़ने लगी.

“ऐ ..ऐ …तलवार नीचे रख दे रंडी, मैं किसी को कुछ नहीं बताऊंगा की मैंने तेरा बलात्कार किया है.” वो आदमी पीछे घिसटने लगा.

“तू नहीं बताएगा, पर मेरी अंतरात्मा तो मुझसे चीख चीख के कहेगी की एक पराये मर्द ने मेरे शरीर का भोग किया है. मैं ऐसी ज़िल्लत नहीं बर्दास्त कर सकती.”

उस लड़की के हाथ में तलवार देख कर वो आदमी घबरा गया, “भले ही तू मुझे मार दे, पर मैं तब भी तेरा बलात्कार करता रहूँगा मरने के बाद भी, मेरी आत्मा करेगी तेरा बलात्कार.” पर वो नहीं रुकी और उस आदमी के सीने में ना जाने कितने वार कर दिए.

चीख मार के उस आदमी ने दम तोड़ दिया. करण ने देखा की फर्श पर खून की नदी बह रही है.

“मुझे माफ़ कर दीजियेगा मेरे पतिदेव, जीते जी मैं आपकी ना हो सकी, पर मरने के बाद मेरी आत्मा सिर्फ आपकी होगी, मैं अब एक पवित्र स्त्री नहीं रही, इस कमीने ने मेरा सब कुछ छीन लिया. अब मैं एक पल भी जिंदा नहीं रह सकती, यह नश्वर शरीर ही है जिसे देख कर हर मर्द अपनी मान मर्यादा भूल जाता है तो मैं इस शरीर को ही ख़त्म कर देती हूँ.” कहते हुए उस लड़की ने उस आदमी की लाश के सीने से तलवार खीच के खुद अपनी पेट पर तान दिया.
 
करण समझ गया की अब वो लड़की खुदखुशी कर लेगी. उसे अब पहली बार उस लड़की के चेहरे की झलक मिली, जिसे देख कर उसके पैरो तले ज़मीन खिसक गयी.

“ओह माय गोड...निहारिकाआअ ……….??? ”“

वो लड़की कोई और नहीं, बल्कि निहारिका थी. उसका चेहरा कितना मासूम था, उसका नग्न शरीर कितना पवित्र था, जिसे अभी अभी एक भेडिये ने नोच खाया था. वो किसी देवी जैसे लग रही थी, एक ऐसी देवी जिसका बलात्कार एक राक्षस ने किया था.

“हे रुको, ऐसा मत करो ……तुम खुदखुशी नहीं कर सकती…. मेरी बात मनो ……” करण खड़ा हुआ और अपने आंसू पूछते हुए दरवाज़ा खोलने की जी तोड़ कोशिश करने लगा.

उस लड़की को तो मानो करण ना दिखाई दे रहा था ना सुनाई दे रहा था. वो तो बस एक मोम के पुतले की तरह शून्य में देख रही थी.

“बलात्कार मौत से भी बदत्तर है …….” यह उस लड़की के आखरी शब्द थे जब उसने वोही तलवार अपने पेट में घोप ली. उसकी आखरी चीख से सारा बंगला दहल गया.

“नहह्हीईई ……………..” करण के मुह सा हल्की चीख निकल गयी. करण वापस ज़मीन पर गिर गया और रोने लगा, “मुझे माफ़ करदो मैं कुछ ना कर सका …….”

बहुत देर हो गयी ऐसे ही करण ज़मीन पे पड़ा रहा. उसने हिम्मत करके दरवाज़ा खोला और अशर्याजनक रूप से दरवाज़ा खुल गया जो अभी तक अन्दर से बंद लग रहा था.

“नहीं , ये नहीं हो सकता, वो दोनों कहा गए?” करण अपने आंसू पूंछते हुए अन्दर गया तो देखा की कमरा पहले की तरह खाली था. वो लड़की और वो आदमी दोनों गायब थे. करण ने बहुत खोजा पर दोनों का कही नामो निशान नहीं मिला. पूरा कमरा ऐसा लग रहा था, जैसा वहां कुछ हुआ ही ना हो. यहाँ तक की वो तलवार जिस से उस लड़की ने खुद ख़ुशी की वो भी कही नज़र नहीं आ रहा था. पूरे कमरे में रहस्यमयी ढंग से सन्नाटा फैला हुआ था.

“वो निहारिका नहीं हो सकती ………हे भगवान यह कैसा खेल, खेल रहा है तू मेरे साथ.” करण अभी अभी का नज़ारा देख कर हद से ज्यादा डर गया था. अब तो कोई शक ही नहीं था की इस बंगले में भूत प्रेतों का वास है.

एक तरफ तो उसे डर लग रहा था, पर दूसरी तरफ वो अभी भी उस लड़की के साथ हुए बलात्कार को भुला नहीं पाया था, जिसने उसका दिल झंझोड़ के रख दिया था. उसे लगा की अब वो अगर एक पल भी इस बंगले में रहेगा तो पागल हो जायेगा.

आधी रात होने के बावजूद वो बंगले से भाग गया. बदहवास सा वो किधर भाग रहा था उसे खुद ही नहीं पता था. उसे, क्या किसी इंसान को यह सब पे यकीन करना मुश्किल था.

उसे अब पूरा यकीन था की इस दुनिया में बहुत कुछ है जो अभी तक इंसान नहीं जानता है, पर इसका यह मतलब नहीं है की वो सब होता ही नहीं है. और जब इंसान का सामना ऐसी परलौकिक शक्ति से होता है तो वो किसी बुरे सपने से कम नहीं होता. इसे वोही महसूस कर सकता है, जिसके साथ यह सब घटनाएं होती है, बाकी लोग तो इसे अंधविश्वास समझ कर अपने दिमाग से निकल देते है.

करण को अब पता चल रहा था की बीस साल पहले वो मजदूर और उस चौकीदार ने यहाँ वोही महसूस किया होगा जो कुछ दिनों से करण महसूस कर रहा है.
 
चैप्टर 9: बंगले में लगातार डर

खौफ्फ़ और डर से करण ने बाकी की रात बाहर, दूर बंगले से बितायी. अगले सुबह उसकी नींद खुली तो उसने अपने आपको झाड़ियो में पाया. ठण्ड लगने से उसका शरीर बहुत जोरो से कांप रहा था. वो रात में कहाँ आ गया था, उसे इसका कुछ आभास नहीं था, उसे तो बस उस बंगले से दूर भाग जाना था.

करण को लगा की वो अपने पापा को सब कुछ सच सच बता दे, पर फिर उसे बाद में लगा की उसके पापा उसके बातो पर विश्वास नहीं करेंगे, और वो ऐसे ही बंगले को छोड़ कर लन्दन भी नहीं जा सकता था, नहीं तो उसके पापा फिर उस से सवाल पूछते जिसका वो जवाब नहीं दे पता.

“क्या मैंने जो कल रात देखा वो सच था, बेचारी उस लड़की का बलात्कार हो गया, उस आदमी का खून हो गया, और उस लड़की ने खुदखुशी कर ली, पर जब मैं कमरे में गया तो वहा कोई ना था, कहाँ गायब हो गए वो दोनों ? क्या वो दोनों भूत थे जिसे मैंने देखा था ?”

“और सबसे बड़ी बात की उस लड़की की शक्ल निहारिका से हूँ-ब-हूँ मिल रही थी, कही वो सचमुच निहारिका तो नहीं थी, कही उसके साथ ही तो ऐसी अनहोनी नहीं हो गयी, पर अगर मैं मान लू की वो निहारिका ही थी तो वो आधी रात मेरे बंगले में क्या कर रही थी, और फिर कहा गायब हो गयी ?”

“पर अगर वो दोनों भूत थे, तो मुझे एक लड़की का बलात्कार का दृश्य क्यों दिखाया, कुछ समझ में नहीं आ रहा.” करण उठा तो देखा की उसके मोबाइल पे मनोहर का मिस कॉल था. उसने मनोहर को कॉल लगाया जिस से पता चला की वो थोड़ी देर में अपनी पत्नी के साथ वापस बंगले पे आ रहा है.

“अब तो मुझे उस बंगले में जाने से डर लग रहा है, पर जाना तो पड़ेगा ही, बहुत से काम बाकी है बंगले में.” कहते हुए वो पैदल ही बंगले के तरफ चल दिया.

बंगले की गेट पे पहुचते ही करण को कल रात वाली घटना याद आ गयी, उसके पैर मानो बंगले के अन्दर जाना ही नहीं चाहते थे, फिर भी वो अन्दर चला गया. अन्दर मनोहर पहले ही आ गया था.

“इतनी सुबह सुबह कहाँ गए थे सर जी ?” मनोहर ने करण को सुबह बंगले से बाहर देख कर हैरानी हुई.

“कुछ नहीं मनोहर, सुबह ज़रा सा मोर्निंग वाल्क और जोग्गिंग करने गया था.” करण ने झूट बोला.

“कोई बात नहीं सर जी, आइये मैं आपको म्हारी लुगाई से मिलवाता हूँ.”

करण ने देखा तो मनोहर के पीछे एक 30 35 साल की औरत खड़ी थी. देखने में साधारण थी, जैसी बाकी गाँव की औरतें होती है.

“सर जी यह है म्हारी पत्नी रेखा, बेचारी गूंगी है...” मनोहर ने अपनी पत्नी को करण से मिलवाया.

“कैसे हुआ तुम्हारी तुम्हारी बीवी के साथ यह सब ?” करण ने मनोहर से पुछा.

“क्या करू सर जी, यह तो बचपन से ही गूंगी है, पर मुझे पसंद आ गयी इसीलिए मैंने इस से शादी कर ली.” मनोहर ने जवाब दिया.

पर करण तो अपने ही ख्यालो में खोया हुआ था. ऐसी भयंकर उथल पुथल उसके सीधे साधे ज़िन्दगी में कभी नहीं हुई थी. उसे लगा शायद उसे निहारिका की खबर लेनी चाहिए.

करण ने तुरंत अपना मोबाइल निकाला और निहारिका का नंबर डायल किया.

“हेल्लो करण, आखिर हम याद आ ही गए ...” उधर से निहारिका की वोही मीठी आवाज़ आई.
 
निहारिका की आवाज़ सुन कर करण के जान में जान आई. यानी बंगले में सही में भूत था.

“कैसी हो निहा …. ?”

“मैं तो ठीक हूँ, तुम कैसे हो ?.” निहारिका ने फ़ोन पे जवाब दिया.

“मेरी छोडो, निहा मुझे तुम से कुछ बात करनी है, मैं तुमसे मिलना चाहता हूँ.” करण ने गंभीरता से बोला.

“क्या तुम मुझे डेट पे ले जाना चाहते हो ….” निहारिका हँसते हुए बोली.

“मैं मजाक के मूड में नहीं हूँ निहा, मुझे तुमसे कुछ ज़रूरी बात करनी है.” करण गंभीर था.

“ओके ..ओके ..ठीक है कल सन्डे है, कल ही मिलते है.”

“नहीं मुझे तुमसे आज ही मिलना है.”

“अरे यार आज कोर्ट में मेरा एक केस है, मैं तुमसे कल ही मिल पाऊँगी.”

“प्लीज निहा बात को समझा करो.”

“ओह नो क्या बात है, आखिर मुझसे मिलने को इतने उतावले क्यों हो रहे हो, मिल के क्या मुझे आई लव यू कहना है ….” निहारिका फिर मजाक करने लगी.

“निहारिका प्लीज ….आई ऍम नोट जोकिंग, ठीक है कल ही मिलते है, मैं तुम्हारे घर आ जाऊंगा, तुम्हे कोई प्रॉब्लम तो नहीं है ना.”

“अरे इसमें प्रॉब्लम की क्या बात है, मैं भी चाहती हूँ की तुम मेरे घर आओ, और हम बैठ के मीठी मीठी बातें करें, जिस से हमारा रिश्ता दोस्ती से आगे बढ़ सके.”

“उफ्फ्फ …निहारिका ….. मैं तुम्हे जो बताना चाहता हूँ, अगर तुम वो बात सुनोगी तो ऐसी फालतू बातें नहीं करोगी.”

“अच्छा तो मैं फालतू बातें कर रही हूँ ….ओके मिस्टर करण मल्होत्रा कल जब मिलना तो बताना की क्या बात करना है मुझसे …हुह …बाय !” गुस्से में निहारिका ने फ़ोन काट दिया .

करण को खोया खोया देख कर मनोहर ने उस से पुछा पर हर बार करण टाल देता था. वो नहीं चाहता था की लोग भी समझे की उसे भी इस बंगले में भूत प्रेत का आभास हुआ है, और वो इस बात से डर गया है, नहीं तो बंगले को बेचने की आखरी उम्मीद भी ख़त्म हो जाएगी.
 
करण को खोया खोया देख कर मनोहर ने उस से पुछा पर हर बार करण टाल देता था. वो नहीं चाहता था की लोग भी समझे की उसे भी इस बंगले में भूत प्रेत का आभास हुआ है, और वो इस बात से डर गया है, नहीं तो बंगले को बेचने की आखरी उम्मीद भी ख़त्म हो जाएगी.

जैसे जैसे दिन चढ़ता गया वैसे वैसे बंगले में हलचल बढ़ गयी. बहुत से आदमी आये और बंगले की साफ़ सफाई में लग गए. दिन भर के काम में सब व्यस्त थे, पर करण के दिल में एक अनजाना डर था रात का. उसे ना जाने क्यों लग रहा था की कुछ अनहोनी होने वाली है आज रात को.

रात ढल चुकी थी. सरे आदमी अपने घर जा चुके थे. मनोहर की पत्नी रेखा को घर के काम काज सौप दिया गया था. अब वोही घर का खाना बना रही थी.

खाना खाते खाते देर रात हो चुकी थी. मनोहर और उसकी पत्नी को बंगले के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता था, पर करण आने वाले खतरे को जान गया था.

खैर काफी रात हो जाने की वजह से करण अपने रूम में चला गया, और मनोहर और उसकी पत्नी अपने कमरे में चले गए.

करण बिस्तर पर करवाते बदलता रहा पर उसे नींद नहीं आई. आखिर आती भी कैसे जब आपको पता हो की आपके आस पास परलौकिक शक्तियों का वास है.

काफी देर हो गयी करण को पर उसे नींद नहीं आई. उसने सोचा बाहर हॉल में जाके कुछ टीवी देख ले.

वो बाहर आके टीवी चलने ही वाला था की उसे मनोहर के कमरे से हल्की लाइट आते हुई दिखी. उसने दबे पाओ कांपते हुए कदमो से मनोहर के कमरे की तरफ पहुच गया और चोर नजरो से खिड़की से अन्दर झाँकने लगा.

“हेल !……यह दोनों तो सेक्स कर रहे है.”

करण ने अपनी नज़र हटा ली और वापस जाने लगा, पर फिर उसने सोचा की ऐसे भी नींद नहीं आ रही है तो क्यों न लाइव ब्लू फिल्म देख ली जाए. इसीलिए वो वापस खिड़की तक पहुच गया और जगह बना के अन्दर का नज़ारा देखने लगा.

उसने देखा की मनोहर पूरा नंगा बिस्तर के सामने खड़ा है, वहीँ रेखा पेटीकोट और ब्लाउज में बिस्तर पे बैठ कर उसका खड़ा लंड सहला रही है.

“ठीक से हिलाओ मेरी जान …..” मनोहर आहे भरता हुआ रेखा को अपना लंड जोर जोर से हिलाने को कहने लगा.

करण ने देखा की मनोहर का लंड ज्यादा बड़ा तो नहीं पर ठीक ठाक साइज़ का था. उसका लंड भी उसके चेहरे की तरह ही काला था. रेखा अब लंड जोर जोर से हिल्ला रही थी.

“थोडा मुंह में भी ले लो मेरी जान ….” बिना कुछ बोले रेखा ने लंड हिलाना बंद कर दिया और लंड को जीभ निकाल के चाटने लगी.

मनोहर ने आगे हाथ बढ़ा कर रेखा की ब्लाउज का हूक खोल दिया और उसके चुचियो को आजाद कर दिया. करण खिड़की से बाहर यह सब देख रहा था. रेखा गाँव की हट्टी कट्टी महिला थी इसीलिए उसके बोबे भी अच्छे आकार के गोल गोल थे, जिनपे काले काले बड़े निप्पल्स खड़े दिखाई दे रहे थे.
 
मनोहर जोर जोर से उसके बोबे मसलने लगा और रेखा कराह उठी. वो अभी भी मनोहर का लंड अपने गले की गहरायी तक ले रही थी.

“पूरा माल चूस के ही निकालेगी क्या, चल बिस्तर पे लेट जा, आज तेरी चूत पेलने का बड़ा मन हो रहा है.” रेखा गूंगी थी इसीलिए वो चुप चाप बिस्तर पे लेट गयी.

मनोहर उसके ऊपर चढ़ और अहिस्ता अहिस्ता उसके पेटीकोट को ऊपर उठाने लगा. जैसे की गाँव की औरतें अन्दर ब्रा पेंटी नहीं पहनती है इसीलिए पेटीकोट उठाये जाने से रेखा की झांटो वाली बुर साफ़ दिखने लगी. काली काली बुर पे झांटो का जंगल था, उसकी चूत की फांके काफी बड़ी और मोटी थी.

न तो मनोहर न ही रेखा, किसी को भी नहीं पता था की करण उन दोनों को बाहर खिड़की से देख रहा है. करण उन दोनों की चुदाई देख कर कुछ पलों के लिए यह भूल ही गया की वो एक भूत बंगले के अन्दर है.

मनोहर ने अपनी बीच की ऊँगली सीढ़ी रेखा की गीली, पानी आई फुद्दी में डाल दी. गूंगी होने के वजह से रेखा कुछ बोल तो नहीं पाई लेकिन उसके मुह से एक हल्की सिसकारी निकल गयी, जिस से पता चल रहा था की उसे बड़ा मज़ा आ रहा है. मनोहर की उंगली अब तेज़ी से अपना काम कर रही थी.

कुछ देर ऐसे ही उंगली चोदन के बाद मनोहर ने रेखा की टाँगे फैलाते हुए अपने लंड का सुपाडा उसकी चूत के मुंह पे रख दिया.

“हम थारे को बहुत प्यार करते है रेखा जी.” कहते हुए मनोहर रेखा के अन्दर समां गया. थोड़ी देर बाद उसके धक्के तेज़ हो गए और रेखा की मुंह से निकलती सिसकिय भी तेज़ हो गयी.

“अह्ह्ह …..अब म्हारे को थकान हो रही है, रेखा तू म्हारे ऊपर आजा.” रेखा मनोहर के ऊपर आ गयी और वो बिस्तर पे लेट गया. फिर रेखा ने मनोहर के लंड को पकड़ कर अपने हाथो से अपनी पनियायी बुर पे रख कर नीचे बैठ गयी.

गपाक से लौड़े ने अपना रास्ता चूत की गहरायी तक खोज लिया और वहाँ जा पंहुचा.

करण यह सब बाहर से देख रहा था, उसकी हालत भी ख़राब हो रही थी. उसे भी रह रह कर निहारिका का तराशा हुआ जिस्म याद आ रहा था. करण जहाँ से उन दोनों को देख रह था वहां से उसको रेखा की पीठ और गान्ड दिखाई दे रही थी पर मनोहर को कुछ नहीं क्यूँ की उसके और करण के बीच रेखा का नंगा जिस्म था. इसीलिए करण अब बेफिक्र हो कर उन दोनों को देख रहा था.
 

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