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Horror मौत की चाल

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जिन्दगी के सबसे यादगार तीन दिन

सुबह हो चुकी थी।

राज और डॉली एक-दूसरे से लिपटे हुए किसी अचल मूर्ति की तरह जमीन पर पड़े हुए थे।

''राज।"-डॉली फुसफुसाते से स्वर में बोली- ''सुबह हो गई है।"

राज के शरीर में हरकत हुई। उसने डॉली को अपनी बांहों के घेरे से आजाद किया और अपनी जगह पर उठ खड़ा हुआ।

सामने अब भी वो मकान सिर उठाये खड़ा था।

''हमारे अलावा कोई नहीं बचा क्या ?"-राज ऐसे बोला जैसे अपने आप से कह रहा हो।

''नहीं।"-डॉली बोली-''मैंने ऊपर डोंगरा की लाश देखी थी। रिंकी ने उसे चाकू से...।

"-कहते-कहते डॉली बीच में ही चुप हो गई। डोंगरा की क्षत-विक्षत लाश को याद कर वो मन ही मन दहल उठी थी।

तभी कुछ अजीब से शोर जैसी आवाज सुनाई देने लगी।

राज सावधान हो गया।

क्या अब फिर कुछ होने वाला था?

रात भर चला खूनी घटनाओं का सिलसिला शायद अब भी खत्म नहीं हुआ था। विचित्रताओं और भयानक घटनाओं से भरी वो रात अतुल के जीवन की सबसे अजीब रात थी।

सामने वो भुतहा मकान किसी विशाल राक्षस की तरह खड़ा लग रहा था।

वो शोर की आवाज मकान के सामने के हिस्से की ओर से आ रही थी।

''चलो, डॉली।"-राज ने सहारा देकर डॉली को उठाने की कोशिश की।

''नहीं।"-डॉली भय से कांप उठी- ''मत जाओ।

"

''मुझे देखने जाना होगा...।"

''नहीं। मैं नहीं जाऊंगीं। मैं अब ये सब और बर्दाश्त नहीं कर सकती।

"

''अच्छा ठीक है। तुम यहीं रूको। मैं देखकर आता हूं।"

''नहीं।"-उसने मजबूती से राज का हाथ पकड़ लिया-''तुम भी मत जाओ।"

''मुझे जाना होगा।"-राज ने उसका हाथ थपथपाया-''हम हमेशा यहां इस तरह बैठे नहीं रह सकते। तुम यहीं रहना। मैं बस गया और आया।"

डॉली को समझाकर राज आगे बढ़ा और पेड़ों के झुरमुट से निकलकर मकान के पिछले हिस्से में पहुंचा।

मकान के पिछले हिस्से में पहुंचते ही सबसे पहले उसकी नजर स्टोर रूम के दरवाजे पर पड़ी।

दरवाजा बंद था।

जहां रात में अनुराग की लाश पड़ी थी, वो जगह भी खाली थी।

आवाज तेज हो गई थी और मकान के सामने के हिस्से की ओर से आ रही थी।

राज मकान के सामने के हिस्से में पहुंचा। वहां का दृश्य देखकर वो सुखद आश्चर्य से भर उठा।

घर के आंगन में एक हैलीकॉप्टर खड़ा था।

वो शोर की आवाज उसी की थी।

हैलीकॉप्टर! यहां। क्या ये कोई सपना था? या उसकी नजर धोखा खा रही थी?

वो अपनी जगह पर स्थिर खड़ा मंत्रमुग्ध सा हेलीकॉप्टर को देखता रहा गया।

तभी हैलीकॉप्टर का दरवाजा खुला और एक ऊंचे कद का सूट-बूटधारी विदेशी शख्स उसमें से बाहर निकला। उसने हाथ में एक ब्रीफकेस थामा हुआ था। हैलीकॉप्टर का पंखा अब भी घूम रहा था, जिसकी हवा से उस शख्स के बाल उड़ रहे थे।

उसने राज की ओर देख कर हाथ हिलाया।

राज उसके पास पहुंचा। अंदर बैठे पायलट ने हैलीकॉप्टर का इंजन बंद कर दिया,जिससे हैलीकॉप्टर का पंखा धीमा होते हुए रूक गया।

''हैलो, मिस्टर राज!"-उस सूट-बूटधारी व्यक्ति ने राज की ओर हाथ बढ़ाया-''आई एम अरनॉल्ड सिल्वा। फ्रॉम 'पैरानोर्मल होल्ड', न्यूयॉर्क।"

''आप मेरा नाम कैसे जानते हैं?"-राज उसकी ओर हाथ बढ़ाते हुए बोला।

''आप यहां होने वाले 'आइसोलेशन इवेंट' के तीन दिन के प्रोग्राम में शामिल होने वाले थे। जो कुछ कारणों से कम्पनी द्वारा कैंसल कर दिया गया।"

''कैंसल कर दिया गया?"-राज हैरानी से बोला।

''हां। आपने मेल चैक नहीं की?"

राज का दिमाग सांय-सांय कर उठा।

''और मेरे आने की वजह भी यही है।

"-सिल्वा कह रहा था- ''हमें पता चला कि कैंसल करने के बावजूद आप लोग यहां आकर रह रहे थे। हमारा केयरटेकर भी आप लोगों के साथ था। इट्स ब्रीच ऑफ कॉन्ट्रैक्ट। मिस्टर डोंगरा की नौकरी तो गई समझो।"

''मेरे ख्याल से अब इससे मिस्टर डोंगरा को कोई फर्क नहीं पड़ता।"-राज धीमे से बोला।

उसने एक चुभती निगाह राज पर डाली, फिर बोला-''आपके बाकी साथी कहां हैं?"

''हम दो ही बचे हैं। मैं और डॉली। डॉली वहां पीछे जंगल में है।"''बचे हैं?"-सिल्वा का स्वर अजीब-सा हो गया।

''हां।"

''क्या मतलब 'बचे हैं ?"

राज ने उसकी ओर देखा। वो तय नहीं कर पाया कि अगर वो पिछले तीन दिनों में वहां उनके साथ जो कुछ भी हुआ था, उसके बारे में उस शख्स को बताएगा तो वो उसका जरा भी विश्वास कर पाएगा।

वो ही क्यों, दुनिया में शायद कोई भी उनकी आपबीती पर विश्वास नहीं कर पाएगा।

''वो सब मैं आपको बाद में बताऊंगा।"-राज ने उसके सवाल को टाल दिया-''पहले मैं अपनी साथी को ले आऊं।"

''चलिए, मैं भी आपके साथ चलता हूं।"-कहकर सिल्वा भी उसके साथ हो लिया।

वे दोनों घर के पिछले हिस्से में पहुंचे, जहां से पेड़ों मे होते हुए जंगल में उस जगह पहुंचे, जहां संदूक से लिपटी हुई डॉली बेसुध सी पड़ी थी।

डॉली को उस हालत में देखकर सिल्वा के चेहरे पर गम्भीरता छा गई। उसने अपनी आंखों पर पहना हुआ चश्मा उतार दिया।

फिर उसने एक नई नजर से राज की ओर देखा। राज की हालत भी डॉली की तरह ही खराब लग रही थी।

''ओ माई गॉड!"-फिर वो धीमे स्वर में बुदबुदाया-''ओ माई गॉड।"

''डॉली।"-राज खोखले-से स्वर में बोला-''एक बहुत बुरी खबर है। डोंगरा साहब की नौकरी चली गई है।"

डॉली ने न समझ में आने वाले अंदाज में पहले राज, फिर सिल्वा की ओर देखा।

''ये 'पैरानॉर्मल होल्ड' के डेलीगेट मिस्टर अरनॉल्ड सिल्वा हैं। इन्होंने ही मुझे ये मनहूस खबर दी है।"-राज बोला।

''आप लोग"-सिल्वा बोला-''तीन दिनों से यहां रह रहे थे? वो भी तब, जब इवेंट कैंसल कर दिया गया था?"

''हमें इवेंट कैंसल होने की कोई जानकारी नहीं थी।"-राज डॉली को सहारा देकर उठाते हुए बोला, उठते हुए डॉली ने वो सारे लॉकेट वगैरह समेट लिए कि गलती से भी उनमें से कोई वहां रह न जाए।

''लेकिन हमने तो आपको ई मेल किया था...।"

''भाड़ में गया ई मेल।"-राज अपने स्वर को सौम्य बनाए रखने की भरसक कोशिश करते हुए बोला-''क्या आप हम पर इतना अहसान कर सकते हैं कि उस हैलीकॉप्टर से हमें इस जगह से दूर ले जा सकें?"

''क्या? ओह। हां। ऑफकोर्स। लेकिन उससे पहले मेरा आपसे अनुरोध है कि आप मुझे बताएं कि आपके बाकी साथी कहां हैं? क्या सचमुच आप लोग तीन दिनों से यहां थे? मिस्टर डोंगरा कहां हैं ?"

''मिस्टर डोंगरा ऊपर वाली मंजिल पर मरे पड़े हैं।"-डॉली कराहती-सी बोली।

''आपके डोंगरा साहब और उनकी गर्लफ्रेंड को मिलाकर हम आठ लोग तीन दिन पहले यहां आए थे। और अब हम दो ही बचे हैं। और बचे रहने के लिए जरूरी है कि हम जल्दी से जल्दी इस जगह से दूर चले जाएं।"

सिल्वा गम्भीर निगाहों से उनको देखता रहा, फिर बोला-''आपको मेरे हैलीकॉप्टर में लिफ्ट जरूर मिलेगी, मिस्टर राज लेकिन उसके लिए आपको मेरे कुछ सवालों के जवाब देने पड़ेंगें।"
 
राज को अपने अंदर गुस्से की तीव्र लहर उठती महसूस हुई, जिस पर उसने बड़ी मुश्किल से काबू किया, फिर बोला-''पूछिये, क्या पूछना है?"

''यहां नहीं। आइये मेरे साथ।"-कहकर वो घूमकर उसी घर की ओर बढ़ गया।

राज और डॉली ने एक-दूसरे की ओर देखा, डॉली ने हाथ में पकड़े उन लॉकेट वगैरह को और भी कसकर अपने सीने से लगा लिया, फिर दोनों उसके पीछे चल दिए।

वे तीनों मीटिंग रूम में बैठे थे।

डॉली अब भी भयभीत नजरों से उस कमरे को देख रही थी।

कुछ ही दिन पहले वो अपने साथियों के साथ उस कमरे में बैठे हंस-बोल रहे थे।

फिर उसी कमरे में कल रात उन्होंने साक्षात नर्क का नजारा भी किया था।

सिल्वा उनके सामने बैठा था।''यहां क्या हुआ था?"-सिल्वा गम्भीर स्वर में बोला।

''बताने का क्या फायदा?"-राज बोला-''आप विश्वास नहीं करेंगें।"

''मेरे विश्वास-अविश्वास की चिंता छोड़ दीजिए, मिस्टर राज। आप बस मुझे यहां जो-जो हुआ था, उसके बारे में बताइये। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मैं'पैरानॉर्मल होल्ड' में हॉरर फिल्मों के सैट पर फुंदने टांगने का काम नहीं करता हूं बल्कि आपकी तरह ही पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर हूं।"

राज की इच्छा तो नहीं थी लेकिन हैलीकॉप्टर में लिफ्ट के बदले उस शख्स की मांग पूरी करने के सिवा कोई चारा भी नहीं दिख रहा था। वो उसे वहां हुई सारी घटनाओं के बारे में बताता चला गया।

'कॉफिन मैन' का नाम सुनकर सिल्वा चौंका।

'' 'कॉफिन मैन'?"-सिल्वा ने कहा-''आप लोगों ने 'कॉफिन मैन" को देखा?"

''हां। यहां वही हमसे होस्ट बनकर मिला था।"

सिल्वा अपनी जगह से उठा, फिर उसने थोड़ी दूर पर मेज पर रखे अपने ब्रीफकेस को खोलकर उसमें से एक मोटी सी फाइल निकाली, उसमें से कुछ कागज बरामद किए और वापस उन दोनों के पास पहुंचा।

''वो होस्ट नहीं था, मिस्टर राज।"-वो उन कागजों को राज की ओर बढ़ाते हुए बोला-''वो घोस्ट था।"

राज ने उसके हाथ से कागज ले लिए। वे छपे हुए कागज थे। उन पर'कॉफिन मैन' के नाम के साथ जो जानकारी दर्ज थी, उसके मुताबिक 'कॉफिन मैन' उस इलाके में देखा जाने वाली एक रहस्यमयी शख्सियत थी, जिससे जुड़ी भूत-प्रेत की कहानियां एक सदी से भी प्रचलित थीं। हक्का-बक्का सा राज उन कागजों को पढ़ता चला गया। उनमें नीचे छोटे अक्षरों में अंकित 'चित्रकार की कल्पना' के टैग के साथ एक बेहद लम्बे कफन जैसा दिखने वाला लबादा ओढ़े रहस्यमयी और डरावने दिखने वाले शख्स की कई तस्वीरें भी थीं।

उनमें से कुछ तस्वीरें हाथ से बनाई गईं, कुछ कम्प्यूटर ग्राफिक्सजनित तो कुछ असली खींची गई तस्वीरें भी थीं। असली तस्वीरें जाहिर था कि मॉडल वगैरह को 'कॉफिन मैन' का रूप देकर खींची गईं थीं।

लेकिन किसी भी तस्वीर में उसका चेहरा नहीं दिख रहा था।

हर तस्वीर में उसका चेहरा उसके कफन जैसे लबादे का हिस्सा लगने वाले नकाब से ही ढंंका हुआ था, जिसमें आंखों की जगह दो काले छेद दिख रहे थे। बाकी पूरा नकाब सपाट था।

'' 'कॉफिन मैन' "-कमरे में सिल्वा की आवाज गूंज उठी, राज ने चौंक कर सिर उठाकर उसकी ओर देखा-''कोई इंसान नहीं है। न ही हमने उसे यहां अपना होस्ट नियुक्त किया था।

'कॉफिन मैन' इस इलाके में प्रचलित एक रहस्यमयी शख्सियत है, जिसके बारे में ज्यादा जानकारी किसी के पास नहीं है लेकिन लोग उसे कोई शैतान या पिशाच वगैरह ही मानते हैं। यहां प्रचलित कहानियों के अनुसार करीब सौ-डेढ़ सौ साल पहले यहां एक गांव हुआ करता था। लेकिन उस गांव में कुछ ऐसा हुआ, जिससे 'कॉफिन मैन' की दंतकथा की शुरूआत हुई। लोग कहतेे हैं कि उस समय सफेद कफन जैसा लबादा पहने एक शख्स रात के समय वहां रहने वाले लोगों के घर का दरवाजा खटखटाता था। और वो जिस घर का भी दरवाजा खटखटाता था, सात दिनों में उस शख्स की मौत हो जाती थी। कफन जैसे लबादे के कारण ही लोगों ने उसे'कॉफिन मैन' कहना शुरू कर दिया। जब ऐसी कई घटनाएं हुईं तो डर के कारण लोगों ने गांव छोडऩा शुरू कर दिया। फिर पूरी बस्ती ही खाली हो गई। रह गया केवल ये मकान...।"

''इस मकान से'कॉफिन मैन' का क्या कनेक्शन है?"-राज बोला।

''ये हमें पता नहीं चल पाया, मिस्टर राज। बल्कि सच पूछिए तो आपके मुंह से 'कॉफिन मैन' का नाम सुनकर मुझे बेहद हैरानी हुई। क्योंकि कई दशकों से ये नाम गुमनामी के अंधेरे में चला गया है। दशकों से इस इलाके में 'कॉफिन मैन' से जुड़ी कोई घटना सामने नहीं आई है। यहां आसपास के लोग भी अब उस बारे में बात नहीं करते। लोग तरक्की कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी को अपना रहे हैं। अब भूत-प्रेतों के किस्से उनका मनोरंजन नहीं करते। हम लोग भी 'कॉफिन मैन' के बारे में इतना सिर्फ इसीलिए जानते हैं क्योंकि हम लोग खुद पैरानॉर्मल घटनाओं और भूत-प्रेतों से जुड़े किस्से-कहानियों का आर्काइव तैयार कर रहे हैं।"

''लेकिन"-डॉली गम्भीर स्वर में बोली, धीरे-धीरे वो सदमे से उबर रही थी-''हमें तो ये 'कॉफिन मैन' यहीं मिला था। इसी कमरे में। वो एक ताबूत से बाहर निकला था...।"

''जरूर निकला होगा।"-सिल्वा भी उतने ही गम्भीर स्वर में बोला-''इस बात से मेरा कोई विरोध नहीं है।"

डॉली ने राज की ओर देखा

, फिर राज बोला-''हम तो उसे यहां अपना होस्ट ही समझ रहे थे।"

''हम जिस आदमी को इस इवेंट के लिए यहां होस्ट नियुक्त करने वाले थे, मिस्टर राज"-सिल्वा फाइल से एक और कागज निकालकर उसकी ओर बढ़ाते हुए बोला-''उसकी एक दिन पहले ही एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।"

राज ने उसके हाथ से वो कागज लिया तो उसमें उसे 2526 वर्ष के एक मुस्कुराते हुए सुदर्शन नौजवान की तस्वीर अपनी ओर झांकती दिखाई दी।

राज उसे पहचानता था।

इसी मकान में दूसरी ही रात को उसने उस नौजवान को सपने में देखा था।
 
राज को ऐसा लगा, जैसे उसका पूरा शरीर ठण्डा पड़ गया हो। वो चाहकर भी उस तस्वीर पर से नजरें नहीं हटा सका।

उस तस्वीर के ऊपर उस युवक का नाम अजय मेहरा लिखा था और उसके 'पैरानॉर्मल होल्ड' की इंडिया ब्रांच के सुपरवाइजर होने से सम्बन्धित जानकारी अंकित थी।

सिल्वा ने एक और कागज राज की ओर बढ़ाया।

राज ने उसे भी लेकर देखा, उस कागज में एक कार एक्सीडेंट की खबर थी, जिसमें कार लोहे की सलाखें लादकर ले जा रहे एक ट्रक के पिछले हिस्से से जा टकराई थी। दुर्घटनाग्रस्त कार की तस्वीर भी उस पर छपी हुई थी। ट्रक के पीछे लदी सलाखें कार की विण्डस्क्रीन तोड़कर अंदर जा घुसी थीं और कार की ड्राइविंग सीट पर बैठे युवक-जो कि अजय मेहरा ही था, जिसकी तस्वीर अभी-अभी सिल्वा ने राज को दी थी-के चेहरे को छेदते हुए उस पार निकल गईं थीं।

राज जड़वत सा उस तस्वीर को देखता रह गया।दृश्य बेहद वीभत्स था।

ट्रक की कई सलाखें कार के सामने के हिस्से से अंदर घुसी हुईं थीं लेकिन उनमें से दो-केवल दो ही-उस युवक के चेहरे में घुसकर आर-पार निकली हुईं थीं।

जैसे उस रात सपने में दिखे उस युवक के चेहरे पर छेद थे, जिनके आर-पार दिखाई दे रहा था।

राज के चेहरे के भाव देखकर आशंका से भर उठी डॉली ने उसके हाथों से दोनों कागज ले लिए और उन्हें देखने लगी लेकिन वो कुछ समझ नहीं पाई।

''जैसा कि आप देख ही सकते हैं"-सिल्वा कह रहा था-''यहां इस इवेंट का ऑर्गेनाइजर, जिसे आपके होस्ट की भी जिम्मेदारी निभानी थी, यही थे। इसलिए अचानक दुर्घटना में इनकी मौत होने पर हमें मजबूरन पूरा इवेंट ही कैंसल करना पड़ा। हमारी जानकारी के अनुसार ये एक्सीडेंट तब हुआ, जब वे इवेंट के लिए इस मकान में लाइटिंग, राशन वगैरह की व्यवस्था करके लौट रहे थे। इस घटना की और इवेंट कैंसलेशन की सूचना हमने मेल से आप लोगों को भेजी भी थी। लेकिन जैसा कि स्पष्ट है, वो मेल आप लोगों ने नहीं देखी या"-वो एक क्षण रूक कर बोला-''आप तक पहुंची ही नहीं।"

''भाड़ में गई मेल।"-राज बोला-''आपने जो कुछ पूछा हमने बता दिया।

अब आप ये बताइये, आप हमें जल्दी से जल्दी इस नर्क से कितनी दूर ले जा सकते हैं?"

''एक घंटे से भी कम समय में आप लोग दिल्ली में कॉफी पी हो रहे होंगें।"-सिल्वा कुर्सी पर से उठते हुए बोला।

वे तीनों हैलीकॉप्टर में बैठ चुके थे।

राज और डॉली ने आखिरी बार पलटकर उस मकान की ओर देखा, जिससे बुरी जगह उन्होंने अपनी सारी जिंदगी में नहीं देखी थी।

तीन दिन!

काश-राज सोचे बिना नहीं रह सका-काश, वो लोग किसी तरह समय का पहिया घुमा पाते और तीन दिन पीछे जा सकते। और वहां आने के जय के ऑफर से इनकार कर पाते। और उसे व बाकी सबको भी वहां आने से रोक लेते।

जय, प्रीति, अनुराग, मोहिनी।

उनके हंसते-खिलखिलाते चेहरे यादकर राज का दिल लरज उठा।

हैलीकॉप्टर अब मकान के ऊपर से होते हुए जंगल के पीछे की ओर बढ़ रहा था।

अचानक डॉली नीचे कुछ देखकर चौंकी।

"क्या हुआ?"-राज बोला।

"कुछ नहीं।"-डॉली नीचे देखते हुए धीमे से बुदबुदाई।"तुमने कुछ देखा क्या?"

"हां।"-डॉली अनिश्चित भाव से बोली-"ऐसा लगा जैसे...जैसे नीचे पेड़ों में कोई खड़ा हो।"

राज ने भी नीचे झांका। अब नीचे कब्रिस्तान दिखाई दे रहा था। वे आठ कब्रें अब भी वहां थीं।

फिर हैलीकॉप्टर घने जंगल के ऊपर से होते हुए तेजी से आगे बढ़ता गया।

पीछे कब्रिस्तान में सन्नाटा पसरा हुआ था।

रिंकी की आंखें खुलीं।

उसे अपना पूरा शरीर दुखता महसूस हो रहा था। उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसके पूरे शरीर को चक्की में डालकर पीसा गया हो। दर्द के कारण उसकी हिलने की भी इच्छा नहीं हो रही थी।

लेकिन उसे हिलना पड़ा।

उसे अपने पूरे शरीर पर कुछ भुरभुरी चीज का अनुभव हुआ।

वो मिट्टी थी।

रिंकी ने अपने चारों ओर का जायजा लिया। वो एक काफी संकरी जगह में लेटी हुई थी। उसके चारों ओर मिट्टी की दीवारें जैसी दिख रहीं थीं। और ऊपर...।

ऊपर आसमान दिख रहा था।

वो कब्र में लेटी हुई थी।

तभी उसे अहसास हुआ कि ऊपर से कफन में लिपटी हुई एक आकृति नीचे कब्र में झांक रही थी। आसमान की दृधिया सफेद रोशनी और कफन जैसे लबादे में लिपटे होने के कारण रिंकी एकदम से समझ नहीं पाई लेकिन जब वो पीछे हटकर दिखना बंद हो गया, तब रिंकी को अहसास हुआ कि कोई ऊपर से झांक रहा था। रिंकी को वो उसी 'कॉफिन मैन' जैसा लगा, जिसे उसने पहली बार उस मकान में ताबूत में से निकलते हुए देखा था।

दर्द के बावजूद रिंकी उठ बैठी। उसके उठने से उसके शरीर पर पड़ी मिट्टी झड़कर इधर-उधर गिरी। ऐसा लग रहा था, जैसे किसी ने उसे कब्र में डालने के बाद उस पर आठ-दस फावड़े मिट्टी डालकर छोड़ दिया हो।

सबसे ज्यादा मिट्टी उसके पैरों पर थी। उसके पैर पूरी तरह मिट्टी में दबे हुए लग रहे थे।

उसे आधी कब्र में दफन किया गया था।

रिंकी ने हाथों से ही अपने पैरों के ऊपर दबी मिट्टी को हटाया फिर उठ खड़ी हुई। कब्र इतनी गहरी थी कि खड़े होने के बाद भी

5 फीट6 इंच की रिंकी का सिर कब्र के ऊपर तक नहीं पहुंच पा रहा था।

लेकिन उसके हाथ कब्र के ऊपर तक पहुंच रहे थे।

उसने अपने हाथ कब्र के किनारे पर रखे और अपने शरीर को ऊपर की ओर खींचा। थोड़ी बहुत कोशिश के बाद वो कब्र से बाहर निकल आई।
 

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