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राज और डॉली ने एक-दूसरे की ओर देखा।
''कम ऑन!
"-जय उन्हें उकसाते हुए बोला-
''तुम्हारे लिए तो इसमें और भी बड़ा बोनस है यार। तुम्हें एक ऐसी जगह पर जाने को मिलेगा
, जो हॉन्टेड है। क्या पता वहां सचमुच किसी भूत से ही सामना हो जाए
? तुम्हारा पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर का कैरियर चमक जाएगा।
"
राज ने कुछ नहीं कहा। वो अब इस चीज का आदि हो गया था। लोग भूत-प्रेतों से जुड़ी चर्चा को सीरियसली लेते ही नहीं थे। और न ही उसे जय से ऐसी कोई उम्मीद थी कि वो उनकी टांग नहीं खींचेगा।
''तो क्या कहते हो
?"-जय उत्साहित स्वर में बोला।
''इसमें उन लोगों का क्या फायदा है
?"-डॉली बोली-
''एक लाख डॉलर बहुत बड़ी रकम होती है। तीन लाख डॉलर इस तरह लुटाने पर उन्हें भी तो कोई फायदा होगा
? आखिर इस तरह कुछ लोग एक भुतहा मकान में रहें तो इससे उन्हें किस तरह का फायदा हो सकता है
?"
''उन्हें फायदा ही फायदा है।
"
''कैसे
?"
''असल में वो कंपनी हॉरर थीम पर फनहाउस संचालित करने वाली एक बहुत बड़ी कंपनी है। विदेशों में उनके कई ऐसे फनहाउस हैं। तुम लोगों ने डिजनी वर्ल्ड का नाम तो सुना ही होगा
? उसी तरह के लेकिन हॉरर थीम पर आधारित एंटरटेनमेंट पार्क वगैरह चलाते हैं वो लोग। इतना ही नहीं
, उनका प्रोडक्शन हाउस हॉरर फिल्में भी बनाता है। उनकी कई हॉरर फिल्में तो सुपरहिट भी रहीं हैं। अब ये मत कहना तुम लोगों ने
'घोस्ट आई
' नहीं देखी
? लॉकडाउन लगने से पहले लोग पागल हुए जा रहे थे ये फिल्म देखकर। बीते साल की सबसे बड़ी हॉरर फिल्मों में से एक है। इतनी सुपरहिट कि अगर बीच में ये कोरोना वाला पंगा नहीं होता तो अब भी मल्टीप्लेक्सों में करोड़ों डॉलर कमा रही होती। और फिल्म सुपरहिट होने का मतलब जानते हो न
? मतलब उन पर पैसों की बरसात हो रही है। और वो अपने पैसों को बिजनेस में इन्वेस्ट कर उसे दुगुने से तिगुना
, तिगुने से चौगुना करने में जुटे हुए हैं। एक लाख डॉलर की रकम तो उनके लिए सौ के नोट के बराबर होगी।
"
राज की भंवें उठीं।
''अच्छा
,"-जय ने स्वीकार किया कि वो कुछ ज्यादा ही बढ़ा-चढ़ाकर बोल गया था-
''दो हजार के नोट के बराबर होगी। दो-दो हजार के दो नोटों के बराबर होगी। लेकिन एक लखपति आदमी को दो-चार
, पांच-दस हजार रूपए की रकम उड़ा देने से क्या फर्क पड़ता है। और वो भी तब जब उसमें उसका भी फायदा हो रहा हो...।
"
''वही तो मैंने पूछा
"-डॉली बोली-इसमेें उनका क्या फायदा है
?"
''उस हॉन्टेड जगह का प्रचार होगा। लोग उसके बारे में जानेंगेंं। आर्टिकल वगैरह छपवाएंगें। हम लोगों ने वहां तीन दिन
, तीन रात बिताए तो वहां हमें कैसा लगा
, हमारे अनुभवों वगैरह को वो उस जगह के प्रचार-प्रसार में इस्तेमाल करेंगें
, और क्या
?"
''उस जगह का प्रचार प्रसार करने से उन्हें क्या फायदा होगा
?"
''वो लोग वहां हॉरर थीम पर आधारित कोई फनहाउस या होटल वगैरह बनाना चाहते हैं। अभी बीच में लॉकडाउन लग जाने के कारण उनका प्रोजेक्ट टल गया। लेकिन अब वो इस खाली समय का उपयोग इस तरह के इवेंट का आयोजन करके करना चाहते हैं। जिससे इस बीच उस जगह के प्रचार-प्रसार का सिलसिला शुरू हो सके।
"
डॉली ने राज की ओर देखा।
''प्लीज!
"-जय अनुनयपूर्ण स्वर में राज से बोला-
''मेरे लिए मान जाओ
, यार। सच कह रहा हूं
, बहुत मजा आयेगा। एक हॉन्टेड जगह में तीन दिन
, तीन रात। इतना मजा तो भानगढ़ में भी नहीं आया था क्योंकि वहां से हमें जल्दी लौटना पड़ा था। और जहां तक मैंने सुना है
, ये जगह भी बहुत डरावनी है।
"
''बहुत ज्यादा डरावनी
"-प्रीति बोली।
''और क्या
?"-अनुराग बोला-
''किसी हॉन्टेड प्लेस पर जाओ और रात में वहां न ठहरो तो साला जाने का मतलब ही क्या हुआ
? दिन में तो बेचारे भूत-प्रेत लोग आराम करते हैं। दिन में तो वैसे भी वहां कुछ दिखने वाला नहीं होता।
"
''वैसे भी
"-प्रीति बड़े स्टाइल से सिर को झटककर बोली-
''भूत-प्रेत जैसा कुछ नहीं होता।
"
''अरे...अरे...।
"-अनुराग ने प्रतिरोध जताया-
''ऐसा मत कहो। बेचारे
राज
और डॉली की जॉब पर ही सवाल खड़ा कर दिया तुमने।
"
राज के चेहरे पर अब भी अनिश्चय के भाव दिखाई दे रहे थेे।
''कम ऑन यार!
"-जय आकर उसके बगल में बैठ गया और उसके हाथ पकड़कर बोला-
''तुम लोग तो वैसे ही ऐसी जगहों पर रिसर्च करने जाते रहते हो। क्या हमारे साथ तीन दिन नहीं रूक सकते
? प्लीज! पुराने दिनों की खातिर!
"
''ओके!
"-राज बोला-
''हम लोग तैयार हैं।
"
''हुर्रे।
"-प्रीति ने खुशी से नारा सा लगाया-
''हम दुनिया की दस सबसे डरावनी जगहों में से एक पर घूमने जा रहे हैं। ये हमारी जिन्दगी के सबसे यादगार तीन दिन होंगें।
"
''लेकिन वहां हमें और क्या-क्या करना पड़ेगा
? मुझे इस इवेंट के बारे में पूरी जानकारी चाहिए।
"
''ये हुई न बात!
"-जय जोश के साथ बोला-
''जानकारी की चिंता तुम मत करो। वो सब मैं तुम्हें दे दूंगा। तुम और डॉली बस तैयार रहना। तीन दिनों बाद हम सब यहां से साथ-साथ ही चलेंगें...।
"
''यहां से तो साथ-साथ नहीं जा पाएंगें।
"-राज बोला-
''हमें दिल्ली में कुछ जरूरी काम है। आज शाम ही वापस लौटना पड़ेगा।
"
''फिर
?"
''तुम हमें उस जगह का एड्रेस भेज देना। हम कार से वहां आ जाएंगें।
"
''ठीक है। मैं तुम्हें इवेंट से जुड़ी सारी जानकारी मेल कर दूंगा।इसकी टर्म्स एंड कंडीशंस वगैरह तुम सब उस फार्म पर देख सकोगे। मेरा यकीन करो। इसमें कोई जाल
, धोखाधड़ी जैसी बात नहीं है। मैंने उस कंपनी के बारे में अच्छी तरह तस्दीक करने के बाद ही इस इवेंट में पर्टिसिपेट करने के लिए एप्लाई किया था। ये बहुत पुरानी और काफी प्रसिद्ध कंपनी है। मेरा एक दोस्त भी इस कंपनी में काम करता है। उसी के माध्यम से मुझे इस इवेंट के बारे में पता चला था।
"
''ठीक है। ठीक है।
"
''वैसे हम सबके अलावा वहां उस मकान का केयरटेकर और कंपनी की ओर से भेजा गया एक होस्ट भी होगा। यानि हम अकेले भी नहीं होंगें।
"
''अकेले
?"-अनुराग बोला-
''वो तो वैसे भी नहीं होंगें।
66 लोग अकेले थोड़े ही होते हैं।
"
''बेचारे वहां रहने वाले भूत भी पूरी बारात आते देखकर परेशान हो जाएंगें।
"-प्रीति हंसते हुए बोली।
फिर उस कंपनी और उस इवेंट के बारे में वो लोग देर तक बातें करते रहे। वही उनके बीच बातचीत का मुख्य मुद्दा रहा। इस दौरान उनकी अनुराग और मोहिनी से भी अच्छी जान-पहचान हो गई। राज ने नोट किया कि अनुराग और मोहिनी जय और प्रीति के काफी क्लोज थे।
उतने ही जितना एक समय वो हुआ करता था।
राज को भी वे दोनों पसंद ही आये। जय के ट्रेवलिंग वीडियोज में राज ने पहले भी उन दोनों को जय और प्रीति के साथ देखा था लेकिन उस समय ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
करीब एक घंटे बाद जब वे दोनों वापस लौटने लगे तो जय और प्रीति बाहर गेट तक उन्हें छोडऩे आये।
डॉली और प्रीति आपस में बातें करते हुए आगे चल रहे थे जबकि जय और राज उनसे थोड़ा पीछे थे।
''इस इवेंट में जो एक लाख डॉलर मिलेंगें
"-जय राज से बोला-
''उससे फाइनांशियल रूप से हमारी काफी हैल्प होगी।
"
''फाइनांशियल
?"-राज की भंवें उठीं।
''मैंने तुम्हें बताया नहीं।
"-जय थोड़े नर्वस भाव से बोला-
''हमारी आर्थिक स्थिति थोड़ी ठीक नहीं चल रही है। अण्टार्कटिका की ट्रिप को तो छोड़ो
, यहां तो क्रेडिट काड्र््स के बिल भरना तक मुश्किल हो रहा है। ये ऑफर तो जैसे भगवान ने सीधे लॉटरी की तरह मेरी झोली में भेज दिया। वरना बहुत मुश्किल हो जाती।
"
''तुम तो ऐसे कह रहे हो
, जैसे पैसे मिल गए हैं।
"
''मिल ही जाएंगें। ये तो अच्छा हुआ कि हम लोगों को पहले मौका मिल गया। वरना मेरे ख्याल से तो ऐसे ऑफर पर लोग टूट पडऩे थे।
"
''तो क्यों नहीं टूट पड़े लोग
?"
'' 'पैरानॉर्मल होल्ड
' ने इसका ज्यादा प्रचार-प्रसार ही नहीं किया। उनकी भारत की ब्रांच का एक आदमी इत्तफाक से मेरा दोस्त है। उसी के माध्यम से मुझे इसके बारे में पता चला।
"
''कंपनी ने इसका प्रचार-प्रसार क्यों नहीं किया
?"
''क्योंकि उन्हें पता था कि बिना प्रचार किए ही ऐसे ऑफर के लिए लाइन लग जानी थी। प्रचार करते तब तो उनके लिए सलेक्ट करना मुश्किल हो जाता।
"
''इसकी सारी जानकारी मुझे मेल करना। मैं एक बार इस बारे में अच्छी तरह पढ़ लेना चाहता हूं।
"
''बिल्कुल। बिल्कुल। मैं शाम तक तुम्हें मेल करता हूं।
"
''और तुम्हारी फाइनांशियल कंडीशन के बारे में कुछ कहना चाहूंगा। वैसे तो कॉलेज में ही मैंने तुम्हें कम से कम नहीं तो हजार बार समझाया था लेकिन एक बार फिर कह रहा हूं। हाथ रोक कर खर्च करना सीखो। जितनी धुआंधार स्पीड से तुम पैसे उड़ाते हो
, उससे तो कुबेर का खजाना खाली होने में भी देर न लगे।
"
''यार
, तुम फिर शुरू हो गए।
"
''अभी तुम्हीं ने बताया न कि प्रॉब्लम में चल रहे हो।
"
''अरे मेरे बाप
, सांस लेने में दिक्कत होती है तो आदमी इलाज करवाता है या सांस लेना ही बंद कर देता है
?"
''फिजूल की बात है। लेकिन तुम्हें समझाना भी बेकार है। मैंने तो कॉलेज टाइम में ही हार मान ली थी। अपने नहीं तो कम से कम प्रीति के बारे में तो सोचो।
"
''प्रीति!
"-जय ने गहरी निगाहों से उसे देखा-
''तो ये बात है! अभी तक प्रीति की फिक्र करते हो
? तो बीच-बीच में कॉल वगैरह क्यों नहीं करते
? मुझे बुरा लग जायेगा
, इसलिए
?"
राज ने कुछ नहीं कहा। वो एक ऐसी बात थी
, जो उन तीनों के बीच आज तक अनकही थी। और इतने सालों बाद की मुलाकात में जय का अचानक इस तरह बोल देने पर राज को समझ ही नहीं आया कि उससे क्या कहे।
तभी जय का मोबाइल पर किसी की कॉल आ गई। वो राज से इजाजत लेकर मोबाइल पर बात करते हुए दूसरी ओर चला गया।
''कम ऑन!
"-जय उन्हें उकसाते हुए बोला-
''तुम्हारे लिए तो इसमें और भी बड़ा बोनस है यार। तुम्हें एक ऐसी जगह पर जाने को मिलेगा
, जो हॉन्टेड है। क्या पता वहां सचमुच किसी भूत से ही सामना हो जाए
? तुम्हारा पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर का कैरियर चमक जाएगा।
"
राज ने कुछ नहीं कहा। वो अब इस चीज का आदि हो गया था। लोग भूत-प्रेतों से जुड़ी चर्चा को सीरियसली लेते ही नहीं थे। और न ही उसे जय से ऐसी कोई उम्मीद थी कि वो उनकी टांग नहीं खींचेगा।
''तो क्या कहते हो
?"-जय उत्साहित स्वर में बोला।
''इसमें उन लोगों का क्या फायदा है
?"-डॉली बोली-
''एक लाख डॉलर बहुत बड़ी रकम होती है। तीन लाख डॉलर इस तरह लुटाने पर उन्हें भी तो कोई फायदा होगा
? आखिर इस तरह कुछ लोग एक भुतहा मकान में रहें तो इससे उन्हें किस तरह का फायदा हो सकता है
?"
''उन्हें फायदा ही फायदा है।
"
''कैसे
?"
''असल में वो कंपनी हॉरर थीम पर फनहाउस संचालित करने वाली एक बहुत बड़ी कंपनी है। विदेशों में उनके कई ऐसे फनहाउस हैं। तुम लोगों ने डिजनी वर्ल्ड का नाम तो सुना ही होगा
? उसी तरह के लेकिन हॉरर थीम पर आधारित एंटरटेनमेंट पार्क वगैरह चलाते हैं वो लोग। इतना ही नहीं
, उनका प्रोडक्शन हाउस हॉरर फिल्में भी बनाता है। उनकी कई हॉरर फिल्में तो सुपरहिट भी रहीं हैं। अब ये मत कहना तुम लोगों ने
'घोस्ट आई
' नहीं देखी
? लॉकडाउन लगने से पहले लोग पागल हुए जा रहे थे ये फिल्म देखकर। बीते साल की सबसे बड़ी हॉरर फिल्मों में से एक है। इतनी सुपरहिट कि अगर बीच में ये कोरोना वाला पंगा नहीं होता तो अब भी मल्टीप्लेक्सों में करोड़ों डॉलर कमा रही होती। और फिल्म सुपरहिट होने का मतलब जानते हो न
? मतलब उन पर पैसों की बरसात हो रही है। और वो अपने पैसों को बिजनेस में इन्वेस्ट कर उसे दुगुने से तिगुना
, तिगुने से चौगुना करने में जुटे हुए हैं। एक लाख डॉलर की रकम तो उनके लिए सौ के नोट के बराबर होगी।
"
राज की भंवें उठीं।
''अच्छा
,"-जय ने स्वीकार किया कि वो कुछ ज्यादा ही बढ़ा-चढ़ाकर बोल गया था-
''दो हजार के नोट के बराबर होगी। दो-दो हजार के दो नोटों के बराबर होगी। लेकिन एक लखपति आदमी को दो-चार
, पांच-दस हजार रूपए की रकम उड़ा देने से क्या फर्क पड़ता है। और वो भी तब जब उसमें उसका भी फायदा हो रहा हो...।
"
''वही तो मैंने पूछा
"-डॉली बोली-इसमेें उनका क्या फायदा है
?"
''उस हॉन्टेड जगह का प्रचार होगा। लोग उसके बारे में जानेंगेंं। आर्टिकल वगैरह छपवाएंगें। हम लोगों ने वहां तीन दिन
, तीन रात बिताए तो वहां हमें कैसा लगा
, हमारे अनुभवों वगैरह को वो उस जगह के प्रचार-प्रसार में इस्तेमाल करेंगें
, और क्या
?"
''उस जगह का प्रचार प्रसार करने से उन्हें क्या फायदा होगा
?"
''वो लोग वहां हॉरर थीम पर आधारित कोई फनहाउस या होटल वगैरह बनाना चाहते हैं। अभी बीच में लॉकडाउन लग जाने के कारण उनका प्रोजेक्ट टल गया। लेकिन अब वो इस खाली समय का उपयोग इस तरह के इवेंट का आयोजन करके करना चाहते हैं। जिससे इस बीच उस जगह के प्रचार-प्रसार का सिलसिला शुरू हो सके।
"
डॉली ने राज की ओर देखा।
''प्लीज!
"-जय अनुनयपूर्ण स्वर में राज से बोला-
''मेरे लिए मान जाओ
, यार। सच कह रहा हूं
, बहुत मजा आयेगा। एक हॉन्टेड जगह में तीन दिन
, तीन रात। इतना मजा तो भानगढ़ में भी नहीं आया था क्योंकि वहां से हमें जल्दी लौटना पड़ा था। और जहां तक मैंने सुना है
, ये जगह भी बहुत डरावनी है।
"
''बहुत ज्यादा डरावनी
"-प्रीति बोली।
''और क्या
?"-अनुराग बोला-
''किसी हॉन्टेड प्लेस पर जाओ और रात में वहां न ठहरो तो साला जाने का मतलब ही क्या हुआ
? दिन में तो बेचारे भूत-प्रेत लोग आराम करते हैं। दिन में तो वैसे भी वहां कुछ दिखने वाला नहीं होता।
"
''वैसे भी
"-प्रीति बड़े स्टाइल से सिर को झटककर बोली-
''भूत-प्रेत जैसा कुछ नहीं होता।
"
''अरे...अरे...।
"-अनुराग ने प्रतिरोध जताया-
''ऐसा मत कहो। बेचारे
राज
और डॉली की जॉब पर ही सवाल खड़ा कर दिया तुमने।
"
राज के चेहरे पर अब भी अनिश्चय के भाव दिखाई दे रहे थेे।
''कम ऑन यार!
"-जय आकर उसके बगल में बैठ गया और उसके हाथ पकड़कर बोला-
''तुम लोग तो वैसे ही ऐसी जगहों पर रिसर्च करने जाते रहते हो। क्या हमारे साथ तीन दिन नहीं रूक सकते
? प्लीज! पुराने दिनों की खातिर!
"
''ओके!
"-राज बोला-
''हम लोग तैयार हैं।
"
''हुर्रे।
"-प्रीति ने खुशी से नारा सा लगाया-
''हम दुनिया की दस सबसे डरावनी जगहों में से एक पर घूमने जा रहे हैं। ये हमारी जिन्दगी के सबसे यादगार तीन दिन होंगें।
"
''लेकिन वहां हमें और क्या-क्या करना पड़ेगा
? मुझे इस इवेंट के बारे में पूरी जानकारी चाहिए।
"
''ये हुई न बात!
"-जय जोश के साथ बोला-
''जानकारी की चिंता तुम मत करो। वो सब मैं तुम्हें दे दूंगा। तुम और डॉली बस तैयार रहना। तीन दिनों बाद हम सब यहां से साथ-साथ ही चलेंगें...।
"
''यहां से तो साथ-साथ नहीं जा पाएंगें।
"-राज बोला-
''हमें दिल्ली में कुछ जरूरी काम है। आज शाम ही वापस लौटना पड़ेगा।
"
''फिर
?"
''तुम हमें उस जगह का एड्रेस भेज देना। हम कार से वहां आ जाएंगें।
"
''ठीक है। मैं तुम्हें इवेंट से जुड़ी सारी जानकारी मेल कर दूंगा।इसकी टर्म्स एंड कंडीशंस वगैरह तुम सब उस फार्म पर देख सकोगे। मेरा यकीन करो। इसमें कोई जाल
, धोखाधड़ी जैसी बात नहीं है। मैंने उस कंपनी के बारे में अच्छी तरह तस्दीक करने के बाद ही इस इवेंट में पर्टिसिपेट करने के लिए एप्लाई किया था। ये बहुत पुरानी और काफी प्रसिद्ध कंपनी है। मेरा एक दोस्त भी इस कंपनी में काम करता है। उसी के माध्यम से मुझे इस इवेंट के बारे में पता चला था।
"
''ठीक है। ठीक है।
"
''वैसे हम सबके अलावा वहां उस मकान का केयरटेकर और कंपनी की ओर से भेजा गया एक होस्ट भी होगा। यानि हम अकेले भी नहीं होंगें।
"
''अकेले
?"-अनुराग बोला-
''वो तो वैसे भी नहीं होंगें।
66 लोग अकेले थोड़े ही होते हैं।
"
''बेचारे वहां रहने वाले भूत भी पूरी बारात आते देखकर परेशान हो जाएंगें।
"-प्रीति हंसते हुए बोली।
फिर उस कंपनी और उस इवेंट के बारे में वो लोग देर तक बातें करते रहे। वही उनके बीच बातचीत का मुख्य मुद्दा रहा। इस दौरान उनकी अनुराग और मोहिनी से भी अच्छी जान-पहचान हो गई। राज ने नोट किया कि अनुराग और मोहिनी जय और प्रीति के काफी क्लोज थे।
उतने ही जितना एक समय वो हुआ करता था।
राज को भी वे दोनों पसंद ही आये। जय के ट्रेवलिंग वीडियोज में राज ने पहले भी उन दोनों को जय और प्रीति के साथ देखा था लेकिन उस समय ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
करीब एक घंटे बाद जब वे दोनों वापस लौटने लगे तो जय और प्रीति बाहर गेट तक उन्हें छोडऩे आये।
डॉली और प्रीति आपस में बातें करते हुए आगे चल रहे थे जबकि जय और राज उनसे थोड़ा पीछे थे।
''इस इवेंट में जो एक लाख डॉलर मिलेंगें
"-जय राज से बोला-
''उससे फाइनांशियल रूप से हमारी काफी हैल्प होगी।
"
''फाइनांशियल
?"-राज की भंवें उठीं।
''मैंने तुम्हें बताया नहीं।
"-जय थोड़े नर्वस भाव से बोला-
''हमारी आर्थिक स्थिति थोड़ी ठीक नहीं चल रही है। अण्टार्कटिका की ट्रिप को तो छोड़ो
, यहां तो क्रेडिट काड्र््स के बिल भरना तक मुश्किल हो रहा है। ये ऑफर तो जैसे भगवान ने सीधे लॉटरी की तरह मेरी झोली में भेज दिया। वरना बहुत मुश्किल हो जाती।
"
''तुम तो ऐसे कह रहे हो
, जैसे पैसे मिल गए हैं।
"
''मिल ही जाएंगें। ये तो अच्छा हुआ कि हम लोगों को पहले मौका मिल गया। वरना मेरे ख्याल से तो ऐसे ऑफर पर लोग टूट पडऩे थे।
"
''तो क्यों नहीं टूट पड़े लोग
?"
'' 'पैरानॉर्मल होल्ड
' ने इसका ज्यादा प्रचार-प्रसार ही नहीं किया। उनकी भारत की ब्रांच का एक आदमी इत्तफाक से मेरा दोस्त है। उसी के माध्यम से मुझे इसके बारे में पता चला।
"
''कंपनी ने इसका प्रचार-प्रसार क्यों नहीं किया
?"
''क्योंकि उन्हें पता था कि बिना प्रचार किए ही ऐसे ऑफर के लिए लाइन लग जानी थी। प्रचार करते तब तो उनके लिए सलेक्ट करना मुश्किल हो जाता।
"
''इसकी सारी जानकारी मुझे मेल करना। मैं एक बार इस बारे में अच्छी तरह पढ़ लेना चाहता हूं।
"
''बिल्कुल। बिल्कुल। मैं शाम तक तुम्हें मेल करता हूं।
"
''और तुम्हारी फाइनांशियल कंडीशन के बारे में कुछ कहना चाहूंगा। वैसे तो कॉलेज में ही मैंने तुम्हें कम से कम नहीं तो हजार बार समझाया था लेकिन एक बार फिर कह रहा हूं। हाथ रोक कर खर्च करना सीखो। जितनी धुआंधार स्पीड से तुम पैसे उड़ाते हो
, उससे तो कुबेर का खजाना खाली होने में भी देर न लगे।
"
''यार
, तुम फिर शुरू हो गए।
"
''अभी तुम्हीं ने बताया न कि प्रॉब्लम में चल रहे हो।
"
''अरे मेरे बाप
, सांस लेने में दिक्कत होती है तो आदमी इलाज करवाता है या सांस लेना ही बंद कर देता है
?"
''फिजूल की बात है। लेकिन तुम्हें समझाना भी बेकार है। मैंने तो कॉलेज टाइम में ही हार मान ली थी। अपने नहीं तो कम से कम प्रीति के बारे में तो सोचो।
"
''प्रीति!
"-जय ने गहरी निगाहों से उसे देखा-
''तो ये बात है! अभी तक प्रीति की फिक्र करते हो
? तो बीच-बीच में कॉल वगैरह क्यों नहीं करते
? मुझे बुरा लग जायेगा
, इसलिए
?"
राज ने कुछ नहीं कहा। वो एक ऐसी बात थी
, जो उन तीनों के बीच आज तक अनकही थी। और इतने सालों बाद की मुलाकात में जय का अचानक इस तरह बोल देने पर राज को समझ ही नहीं आया कि उससे क्या कहे।
तभी जय का मोबाइल पर किसी की कॉल आ गई। वो राज से इजाजत लेकर मोबाइल पर बात करते हुए दूसरी ओर चला गया।