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Incest परिवार मे प्यार बेशुमार

राज अपने किए पर शर्मिंदा सा होकर अपनी नज़रे झुके रूम से निकल जाता है ....

अदिति को लगता है ये सब उसकी ग़लती से हुआ है ...

उसे इस तरह टवल पहनकर बाल नही सँवारने चाहिए थे ....

राज फ्रेश होकर मम्मी से पहुचता है ...

राज ...मम्मी दीदी कही दिखाई नही दे रही..

सुषमा...राज तेरी दीदी को बहुत तेज़ बुखार

हो गया था..इसलिए तेरे पापा उसे डॉक्टर के यहाँ लेकर गये है ...

राज एक दम शॉक्ड होते हुए ...

राज ... क्या कब कैसे मुझे पहले क्यूँ नही बताया ...

दीदी के फीवर का सुनते ही राज का दिल परेशान होने लगता है..राज का मन ऐसा कर रहा था एक पल में दीदी के पास चला जाय

तभी राज को बाहर पापा के बाइक की आवाज़ आती है..

और राज दौड़ता हुआ दरवाज़ा खोलता है ...

डॉली दीदी बाइक से उतर रही थी राज आगे बढ़कर दीदी को सहारा देते हुए अंदर ले आता है ...

राज ... दीदी आपको इतना फीवर हो गया और मुझे बताया भी नही ...

डॉली.. अर्रे भाई इतनी टेंशन क्यूँ ले रहे हो

मुझे कुछ नही हुआ है ...

थोड़ा सा फीवर ही तो हुआ है. ठीक हो जायगा...

तभी अदिति भी फ्रेश होकर डॉली के पास आती है ...

अदिति को राज से नज़रे मिलने की

हिम्मत नही हो रही थी..

अदिति बस डॉली की तरफ देखती हुई ..

अदिति... अब केसी तबीयत है डॉली

डॉली... हा अदिति अब थोड़ा आराम सा लग रहा है..

पंकज... सुषमा पहले डॉली को सीरप दे दो..फिर इसके लिए खिचड़ी बना देना ...

और ये कहकर पापा अपने रूम में चले जाते है ...

सुषमा भी डॉली को सीरप देकर किचिन में खाना बनाने चली जाती है ..

राज बिल्कुल अपनी दीदी के पास बैठा था....

और अदिति भी डॉली के पास ही बैठी थी

राज और अदिति एक दूसरे से नज़रे मिलाते हुए भी झिझक रहे थे.इसी वजह से अदिति वहाँ से उठकर किचिन में बुआ का हाथ बंटाने चली जाती है ...

अदिति...लाओ बुआ रोटी में बनाती हूँ

सुषमा... अर्रे बेटा तू क्यूँ परेशान होती है में कर लूँगी ...

अदिति.. बुआ इसमें परेशानी की क्या बात

मुझे रोटी बनाने में मज़ा आता है ..

सुषमा...अच्छा ठीक है आता दारूम में रखा है ...

और अदिति अपनी बुआ के साथ किचिन में हेल्प करते हुए रोटी बनाने लगती है ...
 
अदिति.. बुआ इसमें परेशानी की क्या बात

मुझे रोटी बनाने में मज़ा आता है ..

सुषमा...अच्छा ठीक है आता दारूम में रखा है ...

और अदिति अपनी बुआ के साथ किचिन में हेल्प करते हुए रोटी बनाने लगती है ...

उधर रूम में राज अपनी दीदी के पास बैठा हुआ डॉली के बालो में हाथ फेर रहा था .

जिससे डॉली को थोड़ा आराम मिल जाय...

डॉली को भी राज के बालो में हाथ फेरने से बड़ा सकूँ मिल रहा था ...

राज डॉली से पूछता है

राज ... दीदी आपको फीवर कैसे हो गया ..

डॉली अपनी आँखे खोलते हुए राज को बताती है ...

डॉली... भाई पता नही अपने आप ही हो गया ..मेंने तो बस घर की थोड़ी सफाई ही की थी .....

अब राज का ध्यान भी घर की सेट्टिंग पर जाता है जो पहले के मुक़ाबले बिल्कुल चेंज लग रही थी ....

राज ... दीदी ये सब सेट्टिंग तुमने अकेले चेंज करी है ...

डॉली... हा भाई

राज ... ऊहह गुड दीदी ये सारी सेट्टिंग तुमने अकेले चेंज कर ली ...

आपको किसने बोला था ये सब करने को..

कम से कम एक बार मुझे तो फोन कर लिया होता ....

राज डॉली से छोटा होकर भी .. अपनी दीदी को ऐसे डाँट रहा था..

जेसे राज उसका छोटा भाई ना होकर.. उसका पति हो .....

डॉली भी राज की प्यार ऐसे सुन रही थी

जेसे डॉली राज की दीदी ना होकर बीवी हो ...

शायद इसी को प्यार कहते है ..

और अब ये प्यार डॉली और राज में दोनो तरफ

बराबर हो गया था ....

डॉली राज को अपनी सफाई देते हुए कहती है ...

डॉली.... भाई आज तुम्हारा कंपनी में पहला दिन था.. इसलिए मेंने तुम्हे फोन नही किया .....

राज ...एक बार करके तो देखती दीदी .... आप से ज़्यादा मेरे लिए कुछ मायने नही रखता..आपकी एक आवाज़ पर सब कुछ छोड़कर आ जाता .....

डॉली... ऊहह राज इतना प्यार करते हो अपनी दीदी से .....

डॉली राज का ऐसा प्यार देखकर बॅड से उठते हुए राज को अपने गले से लगा लेती है..

राज भी डॉली को अपनी बाँहो में भरते हुए डॉली के चेहरे को चूमने लगता है .....

डॉली...ओह्ह्ह राज में भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ ....

राज ... आई लव यू दीदी

डॉली.... आई लव यू राज ....

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उधर दूसरी तरफ नेहा और ज्योति घूमकर घर आ चुकी थी ....

और जेसे ही ज्योति नेहा के रूम में पहुचती है ...

ज्योति ... नेहा देख में तेरे कहने से घूम कर भी आ गई और तेरे घर रुक भी गई ..

अब मेरा और इम्तहान ना ले जल्दी से तुझे कौन मिल गया...

नेहा मुस्कुराते हुए ......

नेहा ... मेरी जान मुझे जो मिला है उससे तू मेरी ननद बन चुकी है ...

ज्योति ... तू फिर गोल गोल घुमाने लगी खुलकर क्यूँ नही बताती ...

नेहा अपनी शर्त के बॅटन्स खोलती हुई

शर्त उतार फेंकती है ...

और नेहा अपनी दोनो चुचियों को ज्योति के सामने दोनो हाथो से मसलने लगती है ...

नेहा ... मेरी जान इतना खुलकर बताओ...

ज्योति ... उफफफ्फ़ नेहा तुझसे भी हद है

में क्या खुलकर पूछ रही हूँ और तू क्या खोलकर दिखा रही है ...

नेहा आगे बढ़कर ज्योति पर चढ़ते हुए

नेहा ... ज्योति में तेरी भाभी बनने वाली हूँ और तू मेरी ननद अब समझी बुद्धू...

ज्योति शॉक्ड होते हुए ...

ज्योति...क्या बकवास कर रही है ..तुझे पता है क्या बोल रही है तू ...

नेहा ... ज्योति में कोई मज़ाक नही कर रही

में राज से शादी करने वाली हूँ ...

ज्योति ...ये नही हो सकता नेहा ..

भैया को जब पता चलेगा तू किसी और से सेक्स भी कर चुकी है तब क्या होगा ...

नेहा ... तुझे पता है मेरे साथ सेक्स किसने किया है ...

ज्योति ... नही

नेहा ... मेरे साथ सेक्स करने वाला और कोई नही तेरा भाई ही है ..

और मेंने भी राज के साथ इसीलिए सेक्स किया है..

क्यूँकी राज को मेंने एक नज़र में अपना जीवन साथी मान लिया था ....

ज्योति पर जेसे आसमान टूट पड़ा था

ज्योति को नेहा अब अपनी सौतन दिखने लगी थी......
 
एक तरफ ज्योति को नेहा से जलश हो रही थी..

दूसरी तरफ नेहा ज्योति को ननद समझकर कर खुश हो रही थी ...

और इसी खुशी में नेहा अपने सारे कपड़े उतार कर ज्योति पर चढ़ चुकी थी ....

ज्योति ना नुकर करती रही मगर नेहा ने

ज्योति का टॉप उतार फेंका जिससे ज्योति के दोनो

रसीले आम बाहर निकल आते है ...

और नेहा ज्योति के रसीले आमों से अपना

मूह लगाकर उनका मीठा मीठा जूस पीना शुरू कर देती है ...

इस खेल का जेसा मज़ा दोनो ने पहले लिया था वेसा मज़ा ज्योति को अब इस खेल में बिल्कुल नही आ रहा था...

नेहा की बातो को सुनकर ज्योति का सारा मज़ा किरकिरा हो चुका था....

मगर नेहा तो इस खेल का पूरा लुफ्त उठाते हुए अपने होंटो से ज्योति के रसीले आम चूस रही थी ....

और अगले पल अपना एक हाथ नीचे लेजाकर

ज्योति की सलवार का नाडा भी खोल देती है ...

ज्योति जब तक नेहा को रोकती तब तक तो उसके

जिस्म से सलवार निकल कर नीचे पहुच चुकी थी ...

ज्योति का जिस्म बिल्कुल नंगा होकर नेहा के नीचे दबा हुआ था ....

और नेहा ज्योति के जिस्म से ऐसे खेल रही थी... जेसे नेहा लड़की ना होकर एक लड़का हो ...

और आज ज्योति भी नेहा से ऐसे ना नुकर कर रही थी जेसे उसका नेहा रेप कर रही हो ....

मगर ज्योति भी ना नुकर कब तक करती

जेसे ही नेहा ने ज्योति की चूत पर अपना मूह रखते हुए अपनी जीब को चूत की गहराई में उतरना चाहा ...

ज्योति के मूह से मस्ती भारी सिसकारी निकल जाती है और ज्योति फॉरन नेहा के सिर को अपनी चूत पर दबाते हुए..

मीठी मीठी आहे भरने लगती है ...

ज्योति.... आआहह सस्सीईई ईईईईईईईईईईई सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सीईई उूुुुउउइई उूउउम्म्म्ममममम ऊऊहह

नेहा ज्योति की चूत में अपनी जीब ऐसे घुसा रही थी जेसे उसकी जीब..जीब ना होकर कोई लंड हो ....

नेहा की जीब ज्योति की चूत का सारा रस चाटने में लगी थी .....

जिससे ज्योति के अंदर भी वासना की चिंगारी भड़कना शुरू हो गई थी.....

और जेसे ही चिंगारी भड़ककर शोला बनती है ...
 
ज्योति के मन में जो नेहा के लिए सौतन वाली भावना ने जन्म लिया था...

वासना की चिंगारी ने एक पल फ़ना कर दिया था..

और ज्योति भी अब इस खेल में नेहा का पूरा साथ देते हुए नेहा की दोनो चुचियों को

अपने हाथो से बड़ी ज़ोर से मसलने लगती है...

ज्योति के इस तरह मसलने से चुचियों में दर्द सा होता है..जिससे नेहा की दर्द भरी सिसकारियाँ निकलने लगती है ....

नेहा चूत से जीब बाहर निकाल ...

.

नेहा ...उउईईईईई ज्योति आअहह क्याआआआ कारटीईईई हाईईइ थोड़ा आहिस्ता भी तो मसल सकती है .......

मगर ज्योति पर अब सेक्स की आग इस कदर भड़क चुकी थी..की ज्योति आगे बढ़कर

69 पोज़िशन बना लेती है.. ज्योति नेहा की चूत में अपनी उंगली डालकर अंदर बाहर करने लगती है ....

और नेहा ज्योति की चूत में अपनी जीब डालकर उससे किसी लंड की तरह चोदने लगती है ....

अब नेहा और ज्योति इस खेल को ऐसे खेलने लगी थी...

जेसे कोई कॉंपिटेशन चल रहा हो ...

और खेल का हार जीत में फेसला होना था ...
 
नेहा ज्योति को अपने झड़ने से पहले उसे झड़ाना चाहती थी..

इसलिए अपनी जीब की रफ़्तार चूत पर काफ़ी तेज़ कर देती है ...

मगर ज्योति भी हारने के मूड में

बिल्कुल नही थी ....

इसीलिए ज्योति अपनी उंगली नेहा की चूत में इतनी अंदर तक घुसाने लगी थी की नेहा की आ तक निकलने लगी थी ....

और ज्योति नेहा की चूत में उंगली ऐसे अंदर बाहर करने लगती है ...

जेसे राज ने उसकी चूत में अपना लंड अंदर बाहर किया था ...

और इसी वजह से कुछ देर में ही ज्योति इस खेल में विजय हासिल कर लेती है ...

नेहा ज्योति की उंगली के आगे अपने घुटने टेक देती है ...जिससे नेहा की चूत झटके मारती हुई झड़ने लगती है ....

नेहा ..... आआआहह पुउुज्जाआअ

मेणिईिइ तूऊऊऊ गैिईईईईईईईईईईईईईईईईई

ज्योति का हाथ नेहा के चूत के रस से पूरा भीग चुका था .......

नेहा पूरी तरह तृप्त हो चुकी थी

मगर फिर भी नेहा ज्योति को अधूरा छोड़ना नही चाहती थी ..इसीलिए नेहा

कंटिन्यू ज्योति की चूत को चाटे जा रही थी

और कुछ पल में ही ज्योति ने भी अपना चूत

रस नेहा को पीला दिया था ...

और नेहा भी ज्योति का सारा चूत रस पीकर

जीब अपने होंटो पर ईस्तरहा फेरने लगती है ..जेसे दूध पीकर उसकी मलाई को चाटने के लिए फेरते है ....

नेहा ....ज्योति आज तो मज़ा आ गया..तुझे अपनी ननद बनाकर में तो धन्य हो गई ......

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रात के 10.30 बज चुके थे ...

दूसरी तरफ....

कहना खाकर मम्मी पापा अपने रूम में सो चुके थे ...

अदिति डॉली को सहारा देते हुए रूम में ले जाती है...राज भी डॉली के साथ साथ उसके रूम में जाता है ..जेसे ही डॉली बॅड पर लेटती है ...

राज अदिति से कहता है ...

राज ...अदिति अगर कुछ भी ज़रूरत पड़े तो मुझे आवाज़ दे देना ..

अदिति... ठीक है राज ...

और ये कहकर राज अपने रूम में चला जाता है ...

राज के रूम में जाते ही डॉली अदिति से कहती है ...

डॉली... अदिति राज को रात में दूध पीने की आदत है .. तुम एक ग्लास दूध गरम करके राज को दे आओ ...

अदिति ... ठीक है अभी देकर आती हूँ ...

अदिति को इस वक़्त राज के रूम में जाते हुए

बड़ी झिझक महसूस हो रही थी ...

मगर अदिति डॉली को मना भी नही कर सकती थी ....

और अदिति रूम से निकल किचिन में पहूँचकर एक ग्लास दूध गरम करके राज के रूम में पहुचती है ...

राज अब तक अपने कपड़े उतार कर सिर्फ़ लोवर पहने हुए था ...

अदिति... राज में तुम्हारे लिए दूध लेकर आई हूँ ...

राज ... ओह्ह्ह आओ अदिति

राज अदिति के हाथ से दूध का ग्लास लेकर ..

राज .... सॉरी अदिति ..मुझे ऐसे तुम्हारा हाथ नही पकड़ना चाहिए था ...

अदिति... नही राज इसमें ग़लती मेरी है .. मुझे दरवाज़ा लॉक करना चाहिए था ....

अदिति की बात सुनकर राज की सारी झिझक

उतर जाती है ...और राज रिलॅक्स होते हुए थोड़े

फन्नी मूड में आ जाता है ...

राज ... वैसे अदिति एक बात तो है ..तुम बहुत खूबसूरत हो ...

राज के मूह से अपनी तारीफ़ सुनकर अदिति के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है ...

अदिति...थॅंक्स राज

और अदिति जेसे ही पलट कर राज के रूम से जाने लगती है ....

राज अदिति को ये कहकर एक झटका दे देता है ...

राज .... वैसे अदिति तुम बिना कपड़ो के तो बिल्कुल अप्सरा लगती हो .....

राज के इतना कहते ही अदिति मारे शरम के पानी पानी हो जाती है ...
 
राज के इतना कहते ही अदिति मारे शरम के पानी पानी हो जाती है ...

और अदिति फॉरन राज के रूम से बाहर निकल जाती है ... .

अदिति डॉली के पास पहुचती है मगर तब तक डॉली आँखे बंद किए सो जाती है

और अदिति भी डॉली के बराबर में लेट जाती है ...

अदिति को लेटते ही राज की बाते अपने कानो में फिर से सुनाई देने लगती है...

अदिति तुम बिना कपड़ो के तो बिल्कुल अप्सरा लगती हो ...

अबकी बार अदिति के चेहरे पर शरम की वजाय मुस्कान आ जाती है ...

और मूह से हल्की सी एक आवाज़ निकलती है ...

बेशरम ....

और जाने कब अदिति भी गहरी नींद में सो जाती है ....

सुबह कोई 6 बजे राज की आँखे खुलती है ..

राज बॅड से उठकर अपना बनियान पहनता है और दीदी की तबीयत देखने के लिए उनके रूम की तरफ चल पड़ता है ....

राज डॉली के रूम में पहुचता है...

डॉली और अदिति दोनो एक दूसरे से चिपकी गहरी नींद में सो रही थी ...

राज बिल्कुल अपनी दीदी के शिरहाने बैठते हुए अपना हाथ डॉली के माथे पर रख कर देखता है ...

डॉली का बुखार उतर चुका था..

डॉली दीदी का बुखार नॉर्मल लगते हुए राज को बड़ी राहत महसूस होती है....

राज एक टक अपनी दीदी के चेहरे को निहारता जा रहा था..

डॉली सोते हुए बहुत प्यारी मासूम सी कली लग रही थी राज को अपनी दीदी पर बड़ा ही प्यार आने लगता है ..

राज का ऐसा दिल कर रहा था दीदी को अपनी बाँहो में भरकर बहुत बहुत प्यार करे..

मगर पास में अदिति के होने से राज मन मसोस कर रह जाता है ...

मगर दिल था के मानता ही नही ... राज अदिति के होते हुए भी आहिस्ता से अपनी दीदी के गालो को प्यार से चूमने लगता है ...

सुबह हो चुकी थी किसी भी वक़्त अदिति या डॉली जाग भी सकती थी..

इसकी परवाह किए बगैर राज दीदी के गालो को चूमते हुए..

अपने होंठ जेसे ही डॉली के होंटो पर रखता है डॉली की आँख खुल जाती है .....

डॉली हड़बडाते हुए... राज तूमम्म्मम

यहाँ क्या कर रहे हो ...

राज ... दीदी आपकी तबीयत देखने आया था ...

डॉली... तुम ऐसे मेरी तबीयत देख रहे थे ...

राज ...दीदी आप सोते हुए इतनी प्यारी लग रही थी मुझसे कंट्रोल ही नही हुआ...

डॉली...तुम बिल्कुल पागल हो राज.. अगर ये सब अदिति ने देख लिया तो गजब हो जायगा...

राज ... क्या करूँ दीदी जबसे आपको फीवर हुआ है मेरा बिल्कुल मन नही लग रहा..

पता है मेरी पूरी रात आपकी याद में ही गुजर गई .....

राज की बात सुन डॉली का दिल भी तड़प सा गया और डॉली राज को अपनी बाँहो में लेने के लिए मचलने लगती है ...

डॉली... राज तुम अपने रूम में चलो में आती हूँ ...

राज फॉरन उठता हुआ अपने रूम को तरफ चल पड़ता है ...

डॉली भी आहिस्ता से बॅड से उठती है ..

और सीधी राज के रूम में पहुच जाती है ...

रूम में आते ही डॉली राज की बाँहो में समा जाती है ...

डॉली... ओह्ह्ह राज अब मुझसे तुम्हारी दूरी बर्दास्त नही होती..मुझे बस तुम्हारा प्यार चाहिए राज ...प्लीज़ राज मुझे यहाँ से कही दूर लेकर चलो .....

राज भी अपनी दीदी को बाँहो में भरते हुए..

राज ...दीदी में भी तुमको प्यार करने के लिए तड़प रहा हूँ मेरा हाल भी बिल्कुल तुम्हारे जेसा है ...

मेरा ऐसा दिल कर रहा है..अभी आपके जिस्म में समा जाऊ ...

डॉली... समा जाओ भाई ....

राज ...दीदी आपका बर्तडे भी तो आने वाला है क्यूँ ना आपके बर्तडे पर आपको यही गिफ्ट दे दूँ ...

डॉली....तुम सच कह रहे हो भाई

राज ... हा दीदी देखना अबकी बार आपको बर्तडे पर ऐसा स्पेशल गिफ्ट दूँगा की

सारी ज़िंदगी याद करोगी ...

डॉली खुशी में राज के होंटो को चूमते हुए ....

डॉली ... आई लव यू राज मुझे तुम्हारे गिफ्ट का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा ....

राज .... आई लव यू दीदी .....

राज डॉली से वादा करता है..अबकी बार उसके बर्तडे पर उसे सारी हदे तोड़कर प्यार करेगा....
 
राज डॉली से वादा करता है..अबकी बार उसके बर्तडे पर उसे सारी हदे तोड़कर प्यार करेगा....

ज्योति और नेहा कॉलेज पहुच चुकी थी..

कॉलेज में पता चलता है ..

पिक्निक के लिए आगरा टूर जा रहा है ..

सभी लड़कियाँ पिक्निक जाने के लिए बड़ी उत्साहित नज़र आ रही थी ..

नेहा और ज्योति भी अपना नाम पिक्निक वाली लिस्ट में लिखवा लेती है ......

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आज सनडे का दिन था ....

घर में सिर्फ़ डॉली अदिति और राज ही थे ...

ज्योति कॉलेज के टूर पर गई हुई थी

और पापा सुषमा को लेकर अपने किसी दोस्त की पार्टी में चले गये थे .....

घर का काम निपटा कर डॉली और अदिति टीवी देखने बैठ गई थी ...

तभी राज भी उनके पास आकर बैठ जाता है..डॉली बार बार टीवी का चेनल बदल रही थी मगर टीवी पर डॉली की पसंद का कोई प्रोग्राम नही आ रहा था......

थोड़ी देर बाद ...

डॉली... भाई लूडो गेम खेलोगे .....

राज ... क्यूँ नही दीदी खेलते है ..

राज और डॉली लूडो टेबल पर रख खेलना शुरू कर देते है ..

अदिति डॉली के बराबर में सोफे पर बैठी थी और राज दोनो के सामने चेयर पर बैठा था ...

पहली चाल डॉली चलती है ..और उसका पासा सिक्स आ जाता है ...

अदिति... वूओव डॉली पहली चान्स में ही गोटी खुल गई ...

डॉली के चेहरे पर भी मुस्कान आ जाती है ...

लूडो खेलते हुए अदिति एक एक चाल पर डॉली की हेल्प कर रही थी ...

जिससे बार बार राज की गोटी पिट रही थी ...

और जब भी राज की कोई गेट पिटी डॉली के साथ साथ अदिति भी खिलखिलाकर मुस्कुरा पड़ती ...

बार बार गोटी पिटने से राज के चेहरे पर

झुझु लाहट सॉफ नज़र आ रही थी ...

और आख़िर में राज इस गेम को हार जाता है ...

डॉली हुर्री करती हुई ... में जीत गई में जीत गई ...

राज ... बोलो दीदी क्या करना है मुझे ...

अदिति को मालूम नही था राज और डॉली लूडो गेम हार जीत की शर्त से खेलते है ...

डॉली... राज ऐसा करो तीनो के लिए

लस्सी बना कर लाओ...

राज दीदी का हुकुम मानते हुए चुपचाप उठकर किचिन में चला जाता है ...

अदिति हैरानी से डॉली की तरफ देखते हुए ...

अदिति... ये सब क्या है डॉली ..हमारे होते हुए तुमने राज को लस्सी बनाने क्यूँ भेजा ....

डॉली... ये तो हमारे लूडो गेम का रूल्स है ..जो गेम हारता है वो बिना कुछ कहे चुपचाप जीतने वाले की ख्वाहिश पूरी करता है ...

अदिति.... ववूऊओव डॉली वेरी नाइस रूल्स

इससे तो लूडो गेम खेलने में अलग ही मज़ा आता होगा ...

थोड़ी देर बाद राज ट्रे में तीन ग्लास लस्सी के ले आता है ..डॉली और अदिति अपना अपना ग्लास उठा लेती है ...

डॉली एक सीप लेते हुए ...

डॉली.. राज वेरी वेरी टेस्टी लस्सी बनाई है ...

तीनो अपना अपना ग्लास खाली करते है ...

डॉली खाली ग्लास ट्राइ में रखते हुए ...

डॉली... राज तुम एक गेम अदिति के साथ खेलो में ये ग्लास धोकर आती हूँ ...

डॉली किचिन में चली जाती है...

राज फिर से गेम स्टार्ट करते हुए अदिति से बोलता है ...

राज .. अदिति तुम्हे हमारे गेम के रूल्स तो पता चल गये होंगे ...

अदिति... हा राज मालूम है ..

राज .. देख लो अगर हार गई तो में तुमसे

कुछ भी माँग सकता हूँ ...

अदिति बड़े कॉन्फिडेंट से ...मगर राज उसके लिए तुम्हे गेम जीतना पड़ेगा और ऐसा होगा नही ...

राज ... ये तो खेलने के बाद ही पता चलेगा कौन हारेगा ...

और राज जेसे ही पासा फेंकता है उसकी गोटी खुल जाती है ...

राज के चेहरे पर शरारती मुस्कान आ जाती है ...

राज ...मेने जीतने की तरफ पहला कदम बढ़ा दिया है..और तुम्हे अपनी शर्त भी बता ही देता हूँ ...

अगर में जीत गया तो तुमको ..

फिर एक बार अप्सरा जेसे रूप

मुझे दिखाना पड़ेगा...

यानी राज अदिति को बिना कपड़ो के देखने को बोल देता है ...

अदिति राज की शर्त सुनकर जेसे ही कुछ बोलने को होती है.

डॉली किचिन से वापस आकर उसके पास बैठ जाती है ...

और जेसे ही डॉली की नज़र गेम पर जाती है ...

अर्रे अदिति तुम्हारी तो अभी एक भी गोटी नही खुली लगता है इस बार राज ज़रूर जीत जायगा ...

डॉली के मूह से ये सुनकर अदिति को लगता है जेसे वो राज के सामने न्यूड खड़ी हो .. ...

अदिति अपने चेहरे को झटक ते हुए अपना सारा ध्यान गेम में लगा देती है ..अब अदिति

लूडो गेम अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए खेलने लगती है ..

और ऊपर वाला भी अदिति का साथ देता है ..

और आख़िर में अदिति ही इस गेम को जीत जाती है ...

ये गेम जीतकर अदिति ऊपर वाले का लाख लाख शूकर अदा करती है ...

डॉली...क्या बात है आज तो तुम फिर से हार गये ...

राज अपना सा मूह लेकर ...बोलो क्या करना है अब मुझे ..

डॉली...ये गेम अदिति ने जीता है तो अदिति ही तुमको बताएगी क्या करना है ...

बोलो अदिति राज से क्या कराना चाहती हो ...

अदिति...राज ऐसा करो सलमान ख़ान का

प्यार किया तो डरना क्या ...

का शर्टलेस गाना ..आ आ जाने जाना ढूँढे तुझे दीवाना उसी स्टाइल में गाकर दिखाओ...

राज को लगता है अदिति उससे बदला लेने के लिए ऐसा कर रही है ..

मगर राज तो सलमान का पूरा फेन था

फॉरन उसी स्टाइल में अदिति के सामने अपनी शर्ट उतार फेंकता है ...

राज की सिक्स पेक बॉडी अदिति और डॉली के सामने आ जाती है ...

दोनो की नज़रे राज की बॉडी देखकर वहाँ से हटने को तैयार नही होती ....

और राज गाना स्टार्ट कर देता ...

आ ओ जाने जाना ढूँढे तुझे दीवाना

सपनो में रोज आये ..आ ज़िंदगी में आना सनम .......
 
ओ ओ जाने जाना, ढूँढे तुझे दीवाना

सपनो मे रोज आए, आ जिंदगी मे आना सनम ....

राज का गाना अदिति के दिल को छुने लगा था

अदिति को ऐसा लगने लगा था जेसे राज ये गाने उसी के लिए गा रहा था ...

मेरा ख्वाब मेरे ख़यालो की रानी

किसी दिन बनेगी हमारी कहानी

आये मेरी बेखुदी यह कसम मैने ली

प्यार मे एक दिन मेरी जान तुझे है पाना ....

राज के गाने की एक एक लाइन अदिति को अपने लिए ही लग रही थी ...

सपनो मे रोज आए आ जिंदगी मे आना

ओ ओ जाने जाना, ढूँढे तुझे दीवाना

सपनो मे रोज आए, आ जिंदगी मे आना सनम

किसी खूबसूरत परी जैसी होगी

मुझे क्या पता दिलरुबा कैसी होगी

सोचता हूँ तुझे चाहता हूँ तुझे

दिल मेरा कह रहा सारे फ़ासले मिटाना

ओ ऊ जाने जाना, ढूँढे तुझे दीवाना

सपनो मे रोज आए, आ जिंदगी मे आना...

आ जिंदगी मे आना सनम...

और जेसे ही राज गाना ख़तम करता है ..

अदिति एक दम सोफे से खड़ी होकर ताली बजाने लगती है...

राज के गाने ने अदिति के दिल में भी राज के लिए जगह बना दी थी..

अदिति....वूओव राज अमेज़िंग माइंड ब्लोयिंग

कितनी भी तारीफ करूँ तुम्हारी वो भी कम है ...

कितना प्यारा ग्रेट हो तुम राज ...

मुझे तो अपने कानो पर यक़ीन नही हो रहा ...

ऐसा दिल कर रहा है बस तुम्हारा गाना सुनती रहूं ...

राज प्लीज़ एक गाना और सूनाओ ना ...

राज .. उसके लिए तो तुमको मुझे फिर हराना होगा ....

अदिति पर राज की आवाज़ का ऐसा जादू चल गया था ..

की बिना कुछ सोचे समझे अदिति राज के साथ फिर से लूडो गेम खेलना शुरू कर देती है .....

डॉली को लगता है दोनो का गेम काफ़ी लंबा चलने वाला है..

इसलिए डॉली सोफे से उठती हुई ... ..

डॉली... भाई तुम अदिति के साथ लूडो खेलो तब तक में लंच तैयार कर लेती हूँ ...

राज ... ठीक है दीदी

और डॉली किचिन में लंच बनाने चली जाती है...

राज और अदिति फिर से गेम स्टार्ट कर देते है ...

लूडो खेलते हुए अदिति राज से कहती है .....

अदिति... राज तुम्हारी आवाज़ बहुत प्यारी और सुरीली है... तुम फ़िल्मो में क्यूँ नही ट्राइ करते ......

राज शरारत के मूड में था.. और अदिति को छेड़ते हुए ...

राज ... यार पहले यहाँ तो ट्राइ कर लू ..

क्या पता अबकी बार किस्मत साथ दे और इस अप्सरा का दीदार नसीब हो जाए...

अदिति राज की तरफ मुस्कुराते हुए...

अदिति... उसके लिए तो तुमको लूडो गेम जीतना पड़ेगा और ऐसा कभी हो नही सकता

की में तुमसे हार जाऊ ...

अब अदिति धीरे धीरे राज से खुलने लगी थी ....

राज ...बड़ा कॉन्फिडेंट है अपनी जीत पर ...

अदिति... हा वो तो है लूडो मेरा फॅवुरेट गेम जो है ....

और इसी के साथ अदिति अपनी चाल चलते हुए पासा फैंकती है..

अदिति का लकी नंबर आ जाता है और अदिति की गोटी खुल जाती है ....

अदिति...देखा राज में कितनी लकी हूँ ...

राज ... हा वो तो दिख रहा है..देखते है अभी तो खेल शुरू हुआ है ...
 
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