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Guest
राज अपने किए पर शर्मिंदा सा होकर अपनी नज़रे झुके रूम से निकल जाता है ....
अदिति को लगता है ये सब उसकी ग़लती से हुआ है ...
उसे इस तरह टवल पहनकर बाल नही सँवारने चाहिए थे ....
राज फ्रेश होकर मम्मी से पहुचता है ...
राज ...मम्मी दीदी कही दिखाई नही दे रही..
सुषमा...राज तेरी दीदी को बहुत तेज़ बुखार
हो गया था..इसलिए तेरे पापा उसे डॉक्टर के यहाँ लेकर गये है ...
राज एक दम शॉक्ड होते हुए ...
राज ... क्या कब कैसे मुझे पहले क्यूँ नही बताया ...
दीदी के फीवर का सुनते ही राज का दिल परेशान होने लगता है..राज का मन ऐसा कर रहा था एक पल में दीदी के पास चला जाय
तभी राज को बाहर पापा के बाइक की आवाज़ आती है..
और राज दौड़ता हुआ दरवाज़ा खोलता है ...
डॉली दीदी बाइक से उतर रही थी राज आगे बढ़कर दीदी को सहारा देते हुए अंदर ले आता है ...
राज ... दीदी आपको इतना फीवर हो गया और मुझे बताया भी नही ...
डॉली.. अर्रे भाई इतनी टेंशन क्यूँ ले रहे हो
मुझे कुछ नही हुआ है ...
थोड़ा सा फीवर ही तो हुआ है. ठीक हो जायगा...
तभी अदिति भी फ्रेश होकर डॉली के पास आती है ...
अदिति को राज से नज़रे मिलने की
हिम्मत नही हो रही थी..
अदिति बस डॉली की तरफ देखती हुई ..
अदिति... अब केसी तबीयत है डॉली
डॉली... हा अदिति अब थोड़ा आराम सा लग रहा है..
पंकज... सुषमा पहले डॉली को सीरप दे दो..फिर इसके लिए खिचड़ी बना देना ...
और ये कहकर पापा अपने रूम में चले जाते है ...
सुषमा भी डॉली को सीरप देकर किचिन में खाना बनाने चली जाती है ..
राज बिल्कुल अपनी दीदी के पास बैठा था....
और अदिति भी डॉली के पास ही बैठी थी
राज और अदिति एक दूसरे से नज़रे मिलाते हुए भी झिझक रहे थे.इसी वजह से अदिति वहाँ से उठकर किचिन में बुआ का हाथ बंटाने चली जाती है ...
अदिति...लाओ बुआ रोटी में बनाती हूँ
सुषमा... अर्रे बेटा तू क्यूँ परेशान होती है में कर लूँगी ...
अदिति.. बुआ इसमें परेशानी की क्या बात
मुझे रोटी बनाने में मज़ा आता है ..
सुषमा...अच्छा ठीक है आता दारूम में रखा है ...
और अदिति अपनी बुआ के साथ किचिन में हेल्प करते हुए रोटी बनाने लगती है ...
अदिति को लगता है ये सब उसकी ग़लती से हुआ है ...
उसे इस तरह टवल पहनकर बाल नही सँवारने चाहिए थे ....
राज फ्रेश होकर मम्मी से पहुचता है ...
राज ...मम्मी दीदी कही दिखाई नही दे रही..
सुषमा...राज तेरी दीदी को बहुत तेज़ बुखार
हो गया था..इसलिए तेरे पापा उसे डॉक्टर के यहाँ लेकर गये है ...
राज एक दम शॉक्ड होते हुए ...
राज ... क्या कब कैसे मुझे पहले क्यूँ नही बताया ...
दीदी के फीवर का सुनते ही राज का दिल परेशान होने लगता है..राज का मन ऐसा कर रहा था एक पल में दीदी के पास चला जाय
तभी राज को बाहर पापा के बाइक की आवाज़ आती है..
और राज दौड़ता हुआ दरवाज़ा खोलता है ...
डॉली दीदी बाइक से उतर रही थी राज आगे बढ़कर दीदी को सहारा देते हुए अंदर ले आता है ...
राज ... दीदी आपको इतना फीवर हो गया और मुझे बताया भी नही ...
डॉली.. अर्रे भाई इतनी टेंशन क्यूँ ले रहे हो
मुझे कुछ नही हुआ है ...
थोड़ा सा फीवर ही तो हुआ है. ठीक हो जायगा...
तभी अदिति भी फ्रेश होकर डॉली के पास आती है ...
अदिति को राज से नज़रे मिलने की
हिम्मत नही हो रही थी..
अदिति बस डॉली की तरफ देखती हुई ..
अदिति... अब केसी तबीयत है डॉली
डॉली... हा अदिति अब थोड़ा आराम सा लग रहा है..
पंकज... सुषमा पहले डॉली को सीरप दे दो..फिर इसके लिए खिचड़ी बना देना ...
और ये कहकर पापा अपने रूम में चले जाते है ...
सुषमा भी डॉली को सीरप देकर किचिन में खाना बनाने चली जाती है ..
राज बिल्कुल अपनी दीदी के पास बैठा था....
और अदिति भी डॉली के पास ही बैठी थी
राज और अदिति एक दूसरे से नज़रे मिलाते हुए भी झिझक रहे थे.इसी वजह से अदिति वहाँ से उठकर किचिन में बुआ का हाथ बंटाने चली जाती है ...
अदिति...लाओ बुआ रोटी में बनाती हूँ
सुषमा... अर्रे बेटा तू क्यूँ परेशान होती है में कर लूँगी ...
अदिति.. बुआ इसमें परेशानी की क्या बात
मुझे रोटी बनाने में मज़ा आता है ..
सुषमा...अच्छा ठीक है आता दारूम में रखा है ...
और अदिति अपनी बुआ के साथ किचिन में हेल्प करते हुए रोटी बनाने लगती है ...