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Romance अनमोल अहसास

" विनाश ..!!" कहते हुए जस्सी उसके पीछे भागी तो विनाश भागकर राज के पीछे छिप गया।

राज ने उसकी प्यारी सी हँसी देखी तो उसे गोद मे उठाते हुए बोला, " मजा आया आपको!"

" हां बहुत! पर आप बताइये की आपको जो काम दिया था वो हुआ कि नही!!"

" कैसा काम..?"

" ओफ्फोह आप बिजनेस कैसे चलाते हो, इतनी कमजोर याददाश्त है!"

" अच्छा! तो आप याद दिलाइये की क्या भूल गया?"

" मैंने आपको मम्मा के साथ दोस्ती करने का काम दिया था न!"

" ओहहो! ये काम, वैसे आपकी मम्मा से दोस्ती करना इतना आसान नही!"

" तो आप कौन से बच्चे हो जो आपको कोई आसान काम दूँगा? आपको तो मुश्किल काम करने ही पड़ेंगे बड़े जो हो!"

" हम्म! ये बात है तो फिर ठीक है, मैं कोशिश करता रहूंगा!"

" कोशिश नही मुझे रिजल्ट चाहिए, मेरी हेल्प चाहिए तो बताना!"

राज हँस दिया और बोला, " ये डायलॉग कहाँ से सीखा?"

" आप से ही, आपके घर आया था तो आप उस दिन फोन पर किसी से यही कह रहे थे!"

" हम्म, बहुत ऑब्जर्व करते हो बातें..!"

" हां, मेरी नजर हर तरफ रहती है।"

" फिर तो आप बड़े होकर अच्छे बिजनेसमैन बनेंगे!"

"हां मैं बनूँगा! आपसे भी हैंडसम दिखूंगा!"

" आप तो अभी भी मुझसे हैंडसम हैं!" राज ने कहा औऱ उसे पानी मे उतारते हुए कहा, " आज खूब मस्ती कर लीजिए, कल सुबह ही हमे वापस जाना है!"

" ओह नो! फिर तो आप मिशन पर लग जाइये, मम्मा से दोस्ती कीजिये और मैं चाचू और मासी को परेशान करता हूँ!"

राज मुस्कुराते हुए बाल सेट करने लगा फिर डॉली की तरफ देखा तो वो टी शर्ट औऱ कैपरी पहने पानी के किनारे घर बनाने में व्यस्त थी।

"वहम नही, निगाहें कबूल करती हैं तो जबान क्यों नहीं?"

" क्या..?"

" वही..!"

" क्या वही? मैं बस..!"

" हम्म , तुम बस.. मेरे लिये बनी हो!"

" हुँह!! दो बातें तो होती नही ढंग से हमारे बीच......और...!"

" बस लफ़्ज़ों की तकरार है वरना अहसासों से बंधे हैं हम!"

" नही.....!!"

" हां!! तुम्हे मुसीबत में देखकर अगर मैं अपना वजूद भूल जाता हूँ तो मुझे घायल देखकर आलम तुम्हे भी तो याद नही रहता!"

" सिर्फ इंसानियत के नाते!"

" झूठ...!! सिर मेरा भी बहुत ऊंचा है, कभी किसी के सामने झुका नही लेकिन दिल झुक गया है तुम्हारे सामने , तुम बिन अनमना रहता हूँ मैं, तो क्या मुझ बिन तुम अतृप्त नही रहती?"

"नही....!!"

" नही..??"

"नही..!!"

"क्यों..?"

"क्योंकि सारी आदते खराब है आपकी।"

"हम्म! ऐसा है क्या!"

"हाँ! ऐसा ही है।"

"तो बस इतना ही की मेरी आदत में आप भी शामिल हैं।"

" आप न बहुत अजीब हो।" कहते हुए वह उठकर चल दी तो राज ने आगे बढ़कर उसकी कमर में अपनी बाँह फँसाते हुए उसे गोल गोल घुमा दिया! डॉली की सांस अटक गई...! राज की गर्म छाती उसकी पीठ से लगी हुई थी!!

विनाश खुश होकर ताली बजाने लगा औऱ बोला, " वाओ, कितने स्ट्रांग हैं मिस्टर हैंडसम! मम्मा को घुमा दिया!"

डॉली उसकी हथेलियों पर नाखून चुभाते हुए बोली, " छोड़ो मुझे! दिमाग खराब हो गया है क्या..?"

राज गम्भीरता से बोला, " मैंने तो कल ही कहा था कि अब से आपके आगे शराफत छोड़ दूंगा मैं! क्यों अच्छा नही लग रहा मेरा ये रुप...? मुझसे ऐसी उम्मीद नही थी क्या...?"

"ऐसी या वैसी कैसी भी उम्मीद मैं आपसे नही रखती...! आप मेरे है कौन?"

"ये मैं बताऊँगा तो आप क्या बताएंगी...?"

" बहुत ही नीच आदमी हो...!! हक कैसे जता लेते हो?"

राज ने अब उसके करीब स्टेप लेते हुए कहा, " अब नीच कहा है तो वैसी हरकत करना तो बनता है..!"

"क्या कर रहे हैं आप? दूर हटिये मुझसे..!"

" यही तो मैं नही कर सकता!" कहते हुए उसने जैसे ही डॉली की तरफ हाथ बढ़ाना चाहा डॉली पीछे हटते हुए बोली, "अच्छा सॉरी..!! सॉरी...! गलती से नीच शब्द कह दिया था!"

डॉली उसकी करीबी से उसकी खुशबू महसूस कर पा रही थी, वह और आगे बढ़ने से रुक गया और बोला,

" अब ठीक लगा...!" राज व्यंग्य से हल्का सा मुस्कुरा दिया तो डॉली ने अपने दांत पीस लिए औऱ मुड़कर वापस चली गयी।

राज बालो में हाथ फेरते हुए बोला, "बहुत मुश्किल भी नही है तुमसे डील करना!"

" कमीना! कुत्ता!! बेशर्म , सनकी! नीच आदमी!!" वह बड़बड़ाती हुई चली जा रही थी तो वहीं राज मन ही मन बोला, "तुम्हारी ये हरकते मुझे तुम्हारी तरफ और ज्यादा खींचती है, मन बहकाती हो तुम...!! कितनी ही लड़कियाँ मेरे सामने खुद को पेश करने को हाजिर रहती हैं औऱ एक तुम हो जो हां कहने को तैयार नही हो! मुझे उनमें कोई दिलचस्पी नही और तुम्हे मुझमें कोई दिलचस्पी नही!! पर ऐसा भी क्या है, ध्यान आकर्षित करना कोई बड़ा काम नही है, जहां तक मुझे लगता है तुम आकर्षित तो हो चुकी हो! मन मे अहसास भी जाग रहे है..! बस मनवाना बाकी है! मुझे तुम्हे अपना बनाना है, और बनाऊंगा भी.....!!"

वे लोग खा पीकर वहाँ से निकल गए और शाम तक होटल पहुँचे तो डॉली का हाथ पकड़े ही विनाश चल रहा था, राज आगे बढ़ गया था औऱ दादी को उनके रूम में छोड़कर बाहर निकल गया था, जैस्मिन और समीर भी आगे निकल गए थे!

विनाश से बातें करती डॉली की नजर अचानक सामने गयी तो बलजीत को देखकर वो टेंशन में आ गयी और विनाश का हाथ छोड़ दिया! ये पहली बार था जब विनाश बलजीत की नजरों के सामने आया था।

वो डॉली का चेहरा देखने लगा तो डॉली ने उसे निग़ाहों से ही जाने का इशारा किया, तभी आगे बढ़ते विनाश का हाथ समीर ने थाम लिया तो विनाश उससे बात करते हुए आगे बढ़ गया!

में ले लिया और अपनी हथेली से उसका चेहरा ढक लिया फिर धीरे से बोला, " अब भी वो कोने में खड़ा देख रहा है!"

उसकी बांहों का वो घेरा डॉली को मोहपाश सा लगा, शायद ये आहट थी प्रेम के आगमन की! क्योंकि उसका ये स्पर्श पल भर के लिए सारी परेशानियों से कहीं दूर खींच ले गया था। ये स्पर्श देह को भाया था, प्रेम किसी के रोकने से नही रुकता, उसकी तो आदत ही है घुसपैठ करके चुपके से जहन में छिप कर बैठ जाने की। शायद आज ये घुसपैठ डॉली के दिल मे भी हो गयी थी। मन जैसे स्पर्श को छटपटाता था , वो स्पर्श आज अनजाने में मिला था उसे।

( क्रमशः )
 
डॉली राज के रूम के सामने ही थी और राज तभी दरवाजे पर निकला तो आगे कदम बढ़ाते बलजीत को देखते हुए डॉली ने भी आगे कदम बढ़ाया और बाहर निकलते राज के गले यकबयक लग गई तो राज हैरान रह गया।

अगले ही पल बलजीत पर नजर गयी तो सब माजरा समझ गया और डॉली पर अपनी बाँहों का घेरा बनाते हुए प्यार से बोला, "लोग आँचल में चेहरा छिपाते हैं और आप मेरे सीने में, इरादा क्या है..?"

" आपको वो ताबीज बनाना जो मुझे बलजीत जैसे लोगो की बुरी नजर से बचाये..!!"

" ऐसा है क्या..??" राज ने प्यार से उसकी निग़ाहों में देखते हुए पूछा

" हां , अब बस यही है।" डॉली ने भी मीठी आवाज में बोलने का भरसक प्रयास किया।

राज ने अपना चेहरा झुकाकर उसके कान के पास धीरे से कहा, " हम्म, तो बस इतना की मुझे मंजूर है आपका मेरे सीने में चेहरा छिपाना!"

उसकी सांसों की लय को अपने कान के पास महसूस करती डॉली ने अब आंखे मींच ली और कुछ देर बाद ये सोचकर मुड़ना चाहा की अब तो बलजीत चला गया होगा, तभी जाती हुई डॉली को अचानक ही राज के लम्बे ताकतवर हाथों ने अपनी तरफ खींचते हुए बाहों के घेरेराज डॉली के साथ कमरे के अंदर चला गया तो डॉली ने उसे धक्का देना चाहा लेकिन राज नही हिला तो उसने ऊपर देखा!

राज तुरंत बोला, " ऐसे क्यों देख रही हो आप? कहा था न मैंने की एक आखिरी मौका दूँगा और अगर आप मेरे गले से लिपटी तो जाने नही दूँगा!"

" छोड़ो मुझे!! कहा था तो मैं क्या करूँ...?"

" मतलब क्या है कि मैं क्या करूँ? मुझे खरीदा हुआ है क्या की जब मन तब अपनी एक्टिंग के लिए सुविधानुसार इस्तेमाल करो और चलती बनो!"

" आपको चाहिए तो मैं पैसे दे दूँगी..!"

राज ने अब उसे अपनी बाँहों में और जकड़ते हुए कहा, " पैसे, हम्म!! जैसे उस रात दिए थे...?? समझ क्या रखा है मुझे? तुम मुझे

दी, विनाश मुस्कुरा दिया और हाथ छुड़ाते हुए बोला, " मैं आगे जा रहा हूँ मासी को भी बोल दूँ डिनर के लिए, आप लोग आओ तब तक!"

राज ने जब उसे रूम के अंदर जाते देखा तब मुड़ा और बोला, " व्यवहार को काबू में रखना या बेकाबू करना परिस्थिति पर डिपेंड करता है, कुछ चीजें आपको सीखने की जरूरत है, मैं चाहता तो यही उसे बहुत बुरी तरह से मार सकता था, लेकिन उससे क्या होता, वो खुद को दयनीय दिखाता और मुझे विलन प्रूव कर देता की साख का इस्तेमाल करके उसके साथ गलत कर रहा हूँ। हर चीज का तरीका है, सब कुछ तरीके से हैंडल होगा! चलिए डिनर के लिए, विनाश के मन मे भी सवाल पैदा होगा आपके व्यवहार से!"

" ये सब कहकर आप जताना क्या चाह रहे हैं...?" डॉली गुस्से से बोली।

"जताना कुछ नही चाह रहा बस समझा रहा हूँ क्योंकि जानता हूँ कि दिल की धड़कने बढ़ी हुई है, और मन बेहद उद्विग्न है!"

"आजकल मुँह से कोई दरख्वास्त करो तो कोई नही सुनता, ऐसे में दिल की धड़कनों को सुनने का दावा! अजी छोड़ ही दो।"

राज ने अब नाराजगी से उसकी तरफ बढ़ते हुए उसकी बाँह पकड़कर भौं सिकोड़ते हुए कहा, " मेरे संयम का नाजायज फायदा मत उठाओ, अगर तुम खुश नही हो तो भी दूसरों पर गुस्सा मत उतारो, तुमसे कहीं ज्यादा गुस्सा मुझे आ रहा है इस वक़्त! कोई तुम्हारे ऊपर नजर डाले ये मुझे बर्दाश्त नही, आस पास मंडराना और

हक जताना तो फिर बहुत ज्यादा हो गया।"

डॉली ने उसका हाथ झटक दिया तो वह बोला, " ऐसे पेश आओगी तो कौन रुकेगा तुम्हारे पास..? प्यार करने वालो को खुद के पास सहेज कर रखा जाता है, झटककर खुद से दूर नही किया जाता! क्यों बन रही हो ऐसी जैसी होना नही चाहती??"

" मैं ऐसी ही हूँ! समझे आप, मुझसे गलत अपेक्षाए लगा ली तो गलती आपकी है, मेरी नही!!"

" तुम..!!" राज उग्रता से कुछ बोलने को हुआ पर फिर चुप रह गया।

" बोलिये चुप क्यों रह गए..? डांटना था न..!!"

राज अब आगे बढ़ा और चुपचाप अपनी हथेली बढ़ाकर उसके गाल को आहिस्ते से थपथपाते हुए बोला, " बेवकूफ हो तुम!! तुम्हारा गुस्सा भी कीमती है , दूसरो पर जाया मत करो!"

वह मुड़कर आगे बढ़ते हुए मन ही मन बोला, " उसकी वजह से जितना खुद को टॉर्चर करोगी, उतने ही गम्भीर नतीजे उसे भुगतने होंगे!"

डॉली ने अपने गाल पर हथेली रखी और आगे कदम बढ़ा दिया , राज की एक साधारण सी छुअन में जाने क्या था की डॉली का मन शांत हो गया! वो मद्धम सी खुशबू, जैसे सांसों में घुलती मिठास;

वो मनमोहक स्पर्श, डॉली के न चाहते हुए भी आज डॉली के दिल मे आहिस्ते से कदम रख ही दिया उसने!

( क्रमशः )
 
खाना खाने के वक़्त डॉली ने एक दो बार राज की तरफ देखा लेकिन राज ने उसकी तरफ एक बार भी नजर नही उठायी वो चुपचाप विनाश से बात करता रहा और खाने के बाद उठकर चला गया। कुछ देर बाद ही बाहर निकाले गए बलजीत को चारों तरफ से गाड़ियों ने घेर लिया और उसे उठाकर एक तरफ नारियल के पेड़ों के बीच ले गए! बलजीत अभी कुछ समझ भी नही पा रहा था कि कुछ घण्टो बाद एक काली चमचमाती गाड़ी आकर रुकी औऱ दरवाजा खुला, राज उसमें से बाहर निकला, तेज हवा की वजह से उसका खुला हुआ ब्लेजर चलते वक़्त हवा में लहरा था! कसे हुए चेहरे और ...

खाना खाने के वक़्त डॉली ने एक दो बार राज की तरफ देखा लेकिन राज ने उसकी तरफ एक बार भी नजर नही उठायी वो चुपचाप विनाश से बात करता रहा और खाने के बाद उठकर चला गया।

कुछ देर बाद ही बाहर निकाले गए बलजीत को चारों तरफ से गाड़ियों ने घेर लिया और उसे उठाकर एक तरफ नारियल के पेड़ों के बीच ले गए!

बलजीत अभी कुछ समझ भी नही पा रहा था कि कुछ घण्टो बाद एक काली चमचमाती गाड़ी आकर रुकी औऱ दरवाजा खुला, राज उसमें से बाहर निकला, तेज हवा की वजह से उसका खुला हुआ ब्लेजर चलते वक़्त हवा में लहरा था! कसे हुए चेहरे और चढ़ी हुई भौंहों के साथ वह गुस्से में नजर आ रहा था।

राज को देखकर बलजीत हिलने लगा तो राज ने अपने आदमियों

डॉली ने कुछ नही कहा वह विनाश को खाना खिलाने लगी, विनाश खाते हुए बोला, " आप भी खाओ न मम्मा!"

"हां खाऊँगी! पहले आप खा लो!"

विनाश ने उठकर डॉली को गले लगा लिया और बोला, " अब आप ठीक हो??"

" हां! मैं अब बिल्कुल ठीक हूँ!" डॉली ने मुस्कुराते हुए कहा।

जस्सी ने डॉली के मुंह मे निवाला दिया तो डॉली ने जैस्मिन की तरफ बढ़ा दिया लेकिन विनाश ने बीच मे ही उसे अपने मुंह मे झपटते हुए अपने हाथों से तोड़कर जस्सी की तरफ बढ़ाते हुए कहा, " आप मेरे हाथ से खाओ! मम्मा के हाथ से तो मैं ही खाऊंगा आज!"

जस्सी ने उसके हाथों से खाते हुए कहा, " ठीक है, मुझे तो यही चाहिए ही था! आखिर विनाश मुझसे सबसे ज्यादा प्यार करता है!"

"नही..!"

"नही..??"

"मतलब हां! करता तो हूँ लेकिन माँ से सबसे ज्यादा करता हूँ न।"

" अच्छा, तो मां से ज्यादा!!"

विनाश अब मुस्कुराते हुए बोला, " आपसे भी बहुत ज्यादा ही करता

हूँ, सच्ची!"

"झूठा..!!" कहते हुए जस्सी ने उसके सिर पर चपत लगा दी तो वो बोला, " मम्मा देखो मासी को जलन हो रही है मेरे तेज दिमाग से, मेरे सिर पर मारकर मेरी बुद्धि कम करना चाहती है!"

" नही जस्सी, सिर पर न मारा करो!"

" मैं तो मारूँगी!"

" तो फिर मैं भी मारूंगा!"

दोनो डॉली के गोल गोल चक्कर काटने लगे तो डॉली ने दोनो के हाथ पकड़कर उन्हें अपने गले से लगा लिया!

उधर राज आने के बाद डॉक्टर सिंह के पास बैठा था, उन दोनो के बीच कुछ जरूरी बातें चल रही थी!!

समीर दादी के पास बैठा उन्हें फोटोज दिखा रहा था, " देखो दादी!!"

" कितना खूबसूरत लग रहा है राज डॉली के साथ!" सुभद्रा देवी ने कहा।

" हां, वैसे मेरी और जस्सी की भी अच्छी आयी हैं!"

सुभद्रा देवी उसके कान पकड़ते हुए बोली, " हां हां शैतान! तू भी

मुझे कुछ होने लगा, मुझे कुछ होने लगा

मेरा दिल खोने लगा, मुझे कुछ होने लगा।

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समीर तो जैस्मिन को देखता ही रह गया तो वहीं राज की भी नजर डॉली से कुछ पल को नही हट पायी, विशाल बोल रहा था और अपनी फैमिली से मिलवा रहा था लेकिन राज की नजर बार बार स्टेज की तरफ ही जा रही थी! डॉली ने उसे देखकर भी अनदेखा कर दिया और डाँस करना जारी रखा , जैस्मिन समीर को देखकर ठिठकी लेकिन डॉली ने उसका हाथ पकड़कर अपने साथ घुमा लिया तो वह फिर डाँस करने लगी।

( क्रमशः )
 
डाँस के बाद सगाई होने लगी तो सब उसे एन्जॉय करने लगे उसके बाद विशाल और श्रेया का संगीत प्रोग्राम भी था! तभी डॉली और जैस्मिन धीरे से गायब हो गयी औऱ साड़ी पहनकर कुछ देर बाद वहाँ हाजिर हुई! डॉली ने ग्रे शेड की सफेद साड़ी पहनी हुई थी औऱ जैस्मिन ने पिच कलर की साड़ी पहनी हुई थी, गजरा लगाए दोनो बहुत खूबसूरत लग रही थी! श्रेया ने आसमानी लहंगा पहन लिया था, वो भी बहुत खूबसूरत लग रही थी! एक तरफ विशाल और श्रेया का डाँस होने लगा तो सब उनकी परफॉर्मेंस देखने लगे वहीं दूसरी तरफ राज के लाख रोकने के ...

डाँस के बाद सगाई होने लगी तो सब उसे एन्जॉय करने लगे उसके बाद विशाल और श्रेया का संगीत प्रोग्राम भी था! तभी डॉली और जैस्मिन धीरे से गायब हो गयी औऱ साड़ी पहनकर कुछ देर बाद वहाँ हाजिर हुई! डॉली ने ग्रे शेड की सफेद साड़ी पहनी हुई थी औऱ जैस्मिन ने पिच कलर की साड़ी पहनी हुई थी, गजरा लगाए दोनो बहुत खूबसूरत लग रही थी!

श्रेया ने आसमानी लहंगा पहन लिया था, वो भी बहुत खूबसूरत लग रही थी! एक तरफ विशाल और श्रेया का डाँस होने लगा तो सब उनकी परफॉर्मेंस देखने लगे वहीं दूसरी तरफ राज के लाख रोकने के बावजूद भी उसकी नजरे मान नही रही थी! बार बार डॉली की तरफ उठना चाह रही थी और वो खुद को संभालने के लिए मोबाइल में लगा हुआ

था। तभी किसी ने अचानक उसका हाथ पकड़ लिया तो देखा विनाश था, राज ने फोन जेब मे रख लिया और उसके गाल छूते हुए बोला, "ओह लिटल हैंडसम आप! आप तो बहुत अच्छे लग रहे है!"

" नही! आज तो आप अच्छे लग रहे हैं, आप इतने हैंडसम क्यों लगते हैं हर तरह के कपड़ो में?"

राज हँस दिया और बोला, " अब ये कैसा सवाल है?"

"चलिए न , डाँस करते हैं!" विनाश उसका हाथ पकड़कर खींचने लगा तो विशाल हँसने लगा और बोला, " प्लीज सर, आज तो एक डाँस हो जाये आपका!"

राज मुस्कुरा दिया और बोला, " देखते हैं , क्या हो सकता है?"

वह विनाश का हाथ पकड़े सीट की तरफ बढ़ गया तभी डॉली औऱ जैस्मिन स्टेज पर चढ़ी, दोनो ने सॉन्ग ऑन करवाया और डाँस करने लगी!

" पिया से मिलके आए नैन

पिया से मिलके आए नैन

हाए मैं क्या करू

आए ना मुझको अब तो चैन-2

हाए मैं क्या करू

तेज थी धड़कन सीने की, मौसम भी मस्ताना था

मैं भी खोई खोई थी, दिल भी कुछ दीवाना था

कैसे कहु, किस से कहु , आया बड़ा ही मज़ा

हाए मैं क्या करू- 4

पिया से मिलके आए नैन

पिया से मिलके आए नैन

हाए मैं क्या करू

आए ना मुझको अब तो चैन

आए ना मुझको अब तो चैन

हाए मैं क्या करू

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राज उसे देखने लगा तो भी डॉली उसे इग्नोर करती रही लेकिन जब वह एकटक देखने लगा तो डॉली को असहज महसूस होने लगा और वो बार बार पलके झपकने लगी लेकिन राज का अब भी नजर हटाने का इरादा लग नही रहा था। डॉली जब ज्यादा ही असहज होने लगी तो राज उससे नजर बचाकर अचानक हट गया, डॉली का सॉन्ग

खत्म होने ही वाला था कि तभी राज और समीर स्टेज पर आ गए और गाना चेंज हो गया, वो भी कुछ लाइन्स बाद..!!

राज और समीर ने डॉली और जैस्मिन का हाथ पकड़कर उन्हें रोक लिया और अपनी तरफ खींचते हुए डाँस करने लगे!!

" अँखियाँ मिलाये कभी अँखियाँ चुराए

क्या मैंने किया जादू

कभी घबराए कभी गले लग जाए

तेरा खुद पे नहीं काबू

बिना पायल के ही बजे घुँघरू

बिना पायल के ही बजे घुँघरू

राज उसे गोल गोल घुमाते हुए खुद की बाँहों में झुलाते हुए बोला, " क्या कहती हो आप? आप पर परफेक्टली फिट होने वाला सॉन्ग लगवाया है न!"

ऐसे तो दीवाने मुझे प्यार न कर

आती है शर्म दीदार न कर

डॉली उसकी नजरो में देखते हुए उसके गले मे बाँह फँसाते हुए उसके पीछे जाते हुए धीरे से कान में बोली, " ऐसे तो

सपने ही देखना की मैं ऐसी बाते कभी कहूँगी!"

चैन चुरा के तकरार ना कर

तुझको कसम इनकार ना कर

"हम्म! ऐसा है क्या..??" राज ने अपने गले पर मौजूद उसके हाथ पर अपना हाथ रखते हुए उसकी गर्दन के पास अपना चेहरा ले जाते हुए धीरे से पूछा।

तेरे अरमानों में संवर गयी मैं

तूने मुझे देखा तो निखर गयी मैं

"बिल्कुल ऐसा ही है!" डॉली उससे दूर हटते हुए बोली लेकिन राज ने उसकी कमर में हाथ फंसा कर उसे अपनी तरफ वापस खींच लिया तो उसकी पीठ राज के सीने से लग गयी और राज धीरे से बोला, " तो बस इतना कि आप की सारी बहस को बहाने के लिए मेरे प्यार की एक लहर ही काफी है!"

देखा जब तुझको ठहर गया मैं

ऐसे ही अदाओं पे तो मर गया मैं

"हुँह...! प्यार की लहर मुझे छूकर भी नही गुजरने वाली!!"

डॉली ने दाँत जमाते हुए धीरे से कहा।

डॉली ने अब राज को कोहनी मारनी चाही लेकिन राज ने उसकी हथेली पकड़कर उसे गोल घुमाना शुरू कर दिया औऱ मुस्कुराते हुए बोला, " आपकी हर चाल का जवाब नही दिया तो राज शर्मा किस काम का?"

अँखियाँ मिलाऊँ कभी अँखियाँ चुराऊँ

क्या तूने किया जादू

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डाँस चलता रहा और साथ ही दोनो की बहस जारी रही---

" मुझ जैसी साधारण सी लड़की के प्यार में पड़ गए और फिर भी अपने राज शर्मा होने का गुमान बाकी है!" डॉली ने हल्का सा मुस्कुराते हुए कहा।

राज ने अब एकदम से उसे अपने करीब खींचते हुए कहा, " राज शर्मा को अपनी पसंद पर गुमान है और उसकी पसन्द को साधारण कहने का हक आपको दिया किसने??"

" च्च! च्च!! इस तरह आग लगेगी, सोचा नही था मैंने!"

डॉली व्यंग्य से बोली।

राज उतने ही ठंडेपन से बोला, " इस जलन के तूफान में मंजर बहुत खतरनाक हो सकता है जानेमन!"

" अब ये भी देखने का ही इरादा है!" डॉली ने कहा तो राज मुस्कुरा दिया और बोला, " ख्वाहिश जल्द पूरी होगी!"

वह हट गया और चेयर पर आकर बैठ गया! डॉली भी हट गई लेकिन जैस्मिन और समीर एक दूसरे में गुम डाँस करते रहे तो विनाश बोला, " मासी सॉन्ग खत्म हो गया है!"

जैस्मिन झेंप गयी औऱ झट से समीर के हाथ से अपना हाथ खींचकर चेयर पर बैठ गयी तो समीर भी दादी के पास वाली चेयर पर आ बैठा।

दादी मंद मंद मुस्कुराती रही , राज औऱ डॉली एक साथ खूब जंचते थे, मन ही मन वह उनकी बलाये ले रही थी।

डॉली ने एक नजर राज पर डालते हुए कहा, " कोई नई चाल सोच रहे हो न?"

" मैं क्या सोच रहा हूँ ये आप क्यों सोच रही है? हर वक़्त मेरे मोहपाश में बंधे रहना अच्छे लक्षण नही हैं!"

" अभिमानी आदमी..!!"

" मेरी पसन्द मेरे ख्यालो में खोई है तो अभिमान करना बनता है!"

" भाड़ में जाओ!! कमीने..!" वह मन ही मन बोली

राज ने एक नजर उसकी तरफ देखा फिर मन ही मन बोला, "पक्का गाली दे रही है इस वक़्त मन में!"

उसने अपनी आस्तीन को चढ़ाया तो डॉली ने आंखे घुमाते हुए कहा, "अटेंशन सीकर! मतलब हैंडसम तो है ही न , उस पर आस्तीन चढ़ाने की क्या जरूरत है, अब कुछ देर में शर्ट के ऊपर के बटन खुलेंगे! ताकि लड़कियों का ध्यान खींच सकें!"

राज के हाथ तभी अपनी गर्दन की तरफ गए तो डॉली तुरंत बोली, " ये घर नही है मिस्टर शर्मा , मैं जानती थी कि अब आप शर्ट के बटन खोलेंगे!"

" ऐसा है क्या..?"

" जी! ऐसा ही है!"

"हम्म! तो बस इतना कि बीवियों की तरह मुझसे जुड़ी हर बात क्यों नोटिस करती हैं आप..? मेरी बीवी बनने का इरादा है??"

"हंअं..!" डॉली हैरानी से बोली, " मतलब हर बात का रुख आप अपने हिसाब से कैसे मोड़ सकते हैं..?"

" काबिलियत है मेरी, आप कर सकती हैं तो आप भी कीजिये!"

" मुझे आप जैसा बनने में कोई इंटरेस्ट नही है!"

"वो इश्क़ ही क्या, जो वजूद की धज्जियां न उड़ा दे। लेकिन फिर भी मैं चाहता हूं कि आप ऐसी ही रहें, मुझ सी न बने!"

" इश्क़ न तो हुआ है और न होगा!"

"शायद गौर नही किया तुमने, मेरी करीबी पर आंखों में खौफ नजर आता है, मुझसे दूर भागने लगती हो, क्यों डरती हो न

कि कहीं इतना करीब न हो जाऊं की दिल तक पहुंच जाऊँ?"

" मैं नही डरती! आपके इश्क की तपिश में झुलसने वाली लड़कियों में से नही हूँ मैं!!"

" ऐसा है क्या..??"

"ऐसा ही है!!"

" तो बस इतना की किसी भी रास्ते पर निकलो, उलझन खत्म होने पर पहुँचोगी मुझ तक ही!!"

" हुँह..!! बात ही करना बेकार है!" कहते हुए डॉली उठकर चल दी और कुछ दूर जाकर बैठ गयी तो राज मुस्कुरा दिया औऱ बोला, " तुम जिद करो और मैं इंतज़ार करता हूँ, सारी बंदिशें तोड़कर एक दिन झुकोगी जरूर, दिल जमाने की बेड़ियों में बंधी रहने वाली चीज नही!!"

राज फंक्शन के बाद बाहर निकलने लगा तो समीर थोड़ा पीछे हो गया और बगल से निकलती जैस्मिन का हाथ पकड़कर एक तरफ को हो गया!

" क्या कर रहे हैं आप...?"

" कुछ नही, बस आपको बताना चाहता हूं कि आपसे प्यार करने लगा हूँ मैं!"

जैस्मिन को कुछ समझ भी नही आया कि तब तक समीर ने उसकी हथेली छोड़ दी और चला गया!

जब वो बात समझी तो बाहर की तरफ भागी मगर समीर

राज की गाड़ी में बैठ चुका था, और गाड़ी स्टार्ट हो गयी! डॉली ने उसका कंधा थपथपाया तो वह चिंहुक गयी।

" क्या हुआ? ऐसे क्यों देख रही है?" डॉली ने पूछा तो जैस्मिन ने उसे कसकर गले से लगा लिया और बोली , " आई लव यू!"

" कोई बात हुई है क्या..?"

" नही तो!!" जैस्मिन अलग होते हुए बोली।

डॉली ने उसकी थोड़ी के नीचे हथेली लगाते हुए कहा, " ऐसा लग रहा है कि कुछ हुआ है! चेहरा दमक रहा है!"

" नही तो, बस ऐसे ही!"

" ऐसे ही !! ऐसे ही!!" कहते हुए डॉली उसे गुदगुदी करने लगी तो वह खिलखिलाकर हँस पड़ी और बोली, " उसने मुझसे कहा!"

" क्या कहा..?"

" वही..!"

" क्या वही?"

" वही न!"

" क्या वही न!"

" मार दूँगी हां, डॉली छेड़ मत!!" कहते हुए वह चल दी तो डॉली में जल्दी से सोए हुए विनाश को गोद मे उठाते हुए बोली, " अच्छा ठीक है रुक न, चल रही हूँ मैं भी!"

दोनो सहेलियां घर निकल गयी, डॉली ने पहुंचकर विनाश को सुला दिया और चेंज करने के बाद लेटते हुए जैस्मिन से बोली, " तू कब कहेगी उससे..?'

" हट!! मैं नही कह रही, मुझे शर्म आती है!"

" अभी तो मेरे गले से लिपट कर कहा था, मेरी जगह समीर को इमेजिन कर लिया था!"

" एक पड़ेगा न, समीर को इमेजिन नही किया था, मैं तुझे ही कह रही थी!"

" मेरे चेहरे मे समीर का चेहरा लहराता नजर आ रहा था न!"

" डॉली!" जैस्मिन ने अब डॉली को तकिया दे मारा! तो डॉली उठकर उसके बिस्तर पर आ गयी और बोली, " बात आगे बढ़ गयी है हम्म! बोल तो आंटी से बात करूं तेरी भी सगाई करवा देते है!"

"नही!! तुझसे पहले नही!"

" जस्सी प्लीज हां!"

" अच्छा ठीक है!" कहते हुए जैस्मिन ने उसके गले मे बाँहे फंसा ली, " सो जा आज मेरे साथ!"

" क्यो..?ताकि तू मेरी जगह समीर को इमेजिन कर सके!"

" डॉली अब तो नही छोडूँगी तुझे!" कहते हुए जैस्मिन उठ कर बैठ गयी और डॉली को तकिए से ताबड़तोड़ मारने लगी।

डॉली हंसती रही और बोलती रही, " स्टॉप इट! स्टॉप इट!"

दोनो सहेलियां हंसते मुस्कुराते सो गई।
 
कुछ दिन बीत गए, बलजीत वापस आ चुका था और डॉली को राज से दूर करके दोबारा पाना चाहता था , उसकी राज से टकराने की हैसियत तो नही थी लेकिन डॉली को बच्चे के सहारे ब्लैकमेल करके उसे राज से दूर करके बदला लेने के ख्वाब बुनने लगा! क्योंकि राज की नजरों में डॉली के लिए चाहत वो देख चुका था।

उधर आज राज मिस्टर कपूर की कम्पनी के फंक्शन में आया हुआ था, उनकी बेटी मिस कपूर ने उसे डाँस के लिए ऑफर किया लेकिन राज ने इंकार कर दिया और इग्नोर करके बाकी बिजनेसमैन के साथ बातों में लगा रहा!

मिस कपूर को राज का ये रूखा व्यवहार जरा भी नही सुहाता था, वो भी बिजनेस के क्षेत्र में सफल थी लेकिन राज उसे कभी भी भाव नही देता था , यहाँ तक कि हाथ भी मिलाना अवॉयड करता था! बहुत कम मौके थे जब उसने सामने से हाथ बढ़ाया हो!

राज के साथ समीर भी था, दोनो मीटिंग अटेंड करने में व्यस्त थे इसलिए फोन साइलेंट कर दिया था! डॉली राज

के घर पर थी और फोन किचन में छोड़कर दादी के पास बैठी बातें बना रही थी। कुछ घण्टो बाद नीचे आयी तब देखा जैस्मिन के फोन आये हुए थे और एक अननोन नम्बर से भी कुछ कॉल्स आयी हुई थी!

डॉली ने जैस्मिन को कॉल किया लेकिन वो कॉल नही उठा रही थी तो उसने समीर को फोन किया! समीर तभी राज के साथ बाहर निकलकर गाड़ी में बैठा था और हाथ मे मोबाईल लेकर रिंग मोड पर करने जा रहा था कि तभी फोन बज उठा!

" डॉली ..! मुझे क्यों फोन कर रही है?"

" स्पीकर पर लगा!" राज ने कहा और सामने देखने लगा! ड्राइवर गाड़ी स्टार्ट कर चुका था!

समीर ने कॉल ली और स्पीकर ऑन कर दिया। डॉली की घबरायी हुई आवाज आई, " जस्सी ने कॉल किया था क्या आपको..?"

" नही! हम तो एक बिजनेस पार्टी में थे! कुछ हुआ है क्या?"

"उसकी बहुत सी कॉल्स आयी हुई मेरे पास और अब वो

फोन नही उठा रही, मेरा मन बहुत घबरा रहा है!"

राज ने समीर को इशारा किया तो समीर बोला, " आप घर चली जाइये, मैं राज को इन्फॉर्म कर दूंगा!"

" मैं कहने ही वाली थी, थैंक यू!"

" कोई भी परेशानी हो तो प्लीज इन्फॉर्म कीजियेगा मुझे! मैं भी अब निकल ही रहा हूँ!"

" जी!! अभी तो किसी अननोन नम्बर से कॉल आईं हुई हैं, उस पर बात करने जा रही हूँ, क्या पता जैस्मिन से जुड़ी कोई खबर देने के लिए किसी ने कॉल की हो!!"

"मैं भी वहीं पहुंच रहा हूँ, तब तक आप बात करके बताइये!"

" ठीक है, मैं रखती हूं!"

राज ने तब तक किसी को फोन लगाया और बोला, " गोआ जाने से पहले जिस आदमी के बारे में पता लगाने को कहा था तुमसे, उस वक़्त की तरह ही एग्जेक्ट पोजिशन पता करो उसकी की वो कहाँ है इस वक़्त?"

"ओके सर! बताता हूँ!"

" हम्म!"

" गाड़ी फ़ास्ट चलाओ!' राज ने ड्राइवर से कहा तो ड्राइवर ने गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी!

समीर लगातार जैस्मिन को कॉल किये जा रहा था लेकिन वो फोन नही उठा रही थी तो समीर अब बुरी तरह परेशान हो उठा था, दिल मे अजीब सी हलचल महसूस हो रही थी! राज ने उसकी ये हालत देखी तो कन्धे पर हाथ रखते हुए बोला, " परेशान मत हो, पहुंच ही रहे हैं अब!"

समीर ने कुछ नही कहा, वो बस जैस्मिन तक पहुंच जाना चाहता था! राज और समीर से पहले ही डॉली पहुंची औऱ घर के अंदर आते ही घायल जैस्मिन को देखकर वह भागकर उसके पास आई, " जस्सी!!"

" जस्सी! आँख खोल जस्सी!!"

डॉली ने पानी छिड़का तो जस्सी को हल्का सा होश आया और वो बोली, " डॉली!!"

" जस्सी!!' डॉली ने उसे गले लगा लिया औऱ अपने आँसूं पलको में रोकते हुए बोली, " डॉक्टर के पास चल रहे है जस्सी! सिर से खून आ रहा है! विनाश कहाँ है..?"

" विनाश को वो ले गया! मैंने बहुत रोका उसे, हाथापाई हुई लेकिन उससे कमजोर पड़ गयी, वो मुझे छोड़कर विनाश को बेहोश करके ले गया!"

"विनाश !!" अभी तक मजबूत बन रही डॉली अब गश खाकर गिरने लगी तभी राज औऱ समीर वहाँ पहुंचे! राज ने आगे बढ़कर डॉली को संभाला और समीर ने जैस्मिन को अपनी तरफ खींचकर कसकर सीने से भींच लिया और बोला, " जान ले लो तुम मेरी! कितने फोन किये..! साँस रुक रही थी मेरी!!"

" मैं..!"

"शशश! बाद में बात करेंगे, डॉक्टर के पास चल रहे है अभी!"

राज ने डॉली के बजते फोन को देखा तो उठा लिया लेकिन उसके हैलो बोलने से पहले ही उस तरफ से आवाज आई, " फोन नही उठा रहा था कि इंतज़ार में था कि पहले

घर पहुंच जाओ!"

राज के जबड़े कस गए और माथे की नसें तन गयी! और उसने समीर को गाड़ी में बैठने का इशारा किया, वो जैस्मिन को लेकर गाड़ी में बैठ गया तो राज ने डॉली को गाड़ी में डाला और खुद भी बैठ गया!

" बोल नही पा रही हो , समझ सकता हूँ कि गले से आवाज बाहर क्यों नही आ रही? तुम्हारी जान को मैं जो ले आया हूँ! चिंता मत करो, बस इम्पीरियल हॉस्पिटल आ जाओ! वहीं मिलूंगा हमारे बेटे के साथ! उसका डीएनए टेस्ट करा रहा हूँ और अपना भी! जानता हूँ कि मैच करेंगे!! मुझसे छिपाया था न कि हमारा बेटा भी है! नही करना चाहिए था ऐसा!"

राज की मुठ्ठियाँ कस गयी और वो फोन काटने को हुआ तब तक डॉली " विनाश !!" कहते हुए होश में आई तो राज ने फोन कट कर दिया क्योंकि वो नही चाहता था कि डॉली विनाश के लिए बलजीत के आगे गिड़गिड़ाए!

"आप!!' डॉली ने कहा फिर जैस्मिन की तरफ मुड़ गयी औऱ बेहोश जस्सी को देखते हुए बोली, " जस्सी उठ न जस्सी! मुझे बहुत घबराहट हो रही है! मैं क्या करूँ...? मेरा विनाश !"

डॉली के हाथ पैर बिल्कुल ठंडे पड़ गए औऱ आंखे डबडबा आयी लेकिन वो खुद के आँसू रोक रही थी!

उसने राज के हाथ से अपना फोन छीन लिया और नम्बर निकालने लगी तो काँपते हाथो की वजह से मोबाइल नीचे गिर पड़ा! उसने झुककर फोन उठाया और कॉल करने की कोशिश की तो बलजीत ने दूसरी बार मे फोन उठाया, वह तुरंत बोली, " कुत्ते की दुम!! हरामजादे, कमीने, बदबूदार छुछुन्दर!! सब करना था , जस्सी की चोट नही पहुंचानी थी, अगर तेरा सिर न फोड़ा तो मेरा नाम डॉली नही..!! औऱ विनाश को तो खरोंच भी आ गयी तो जान ले लूँगी तेरी, फिर चाहे फांसी क्यों न हो? मुझे अंजाम की परवाह नही!!"

"जरा तमीज से...!"

"तमीज गयी भाड़ में...! तमीज से इंसानों से बात की जाती है, तुझ जैसे जानवर से इसी लैंग्वेज में बात की जाती है! इन्फेक्ट तुझ जैसे नाली के कीड़ों से बात की ही नही जाती!"

"भूल रही हो कि विनाश मेरे साथ है, थोड़ा थम जाओ! कुछ ही पल में सब सामने होगा, उसके बाद तुम्हे तमीज सिखाऊंगा रहने की भी, और बात करने की भी!"

" क्या मतलब..?"

" अभी तो बताया था न कि डीएनए टेस्ट करवाने आया हूँ!"

ये सुनते ही डॉली के हाथ से फोन छूट कर गिर गया तभी राज ने फोन कैच करते हुए कॉल कट कर दी और बोला, " हम वहीं जा रहे हैं!"

राज ने अब अपने फोन को कान से लगाते हुए कहा, " डॉक्टर सिंह आप पहुंच गए है?"

" हां बस पांच मिनट में अंदर रहूँगा! वैसे मेरी बात हो चुकी है डॉक्टर अमर से! आप चिंता न करें!"

" हम्म! हम भी पहुंच जाएंगे पन्द्रह मिनट में!"

डॉली का शरीर जैसे बेजान हो गया था, वह चुपचाप बैक सीट से लगी पत्थर सी हो गयी थी!

राज का जी कर रहा था कि उसे अपने सीने से लगा ले लेकिन उसने ऐसा नही किया और खिड़की से बाहर देखने लगा, तभी डॉली का सिर उसके कंधे पर लुढ़क गया तो उसने गर्दन घुमाई औऱ दाँत जमाते हुए उसके चेहरे को हाथ

से थाम कर अपने कंधे से टिकाए रखा औऱ मन ही मन बोला, " बस अब और नही!! ये सब खत्म करना जरूरी है! तुम्हे अटैक देने वाले को डबल अटैक न दिया तो मेरा तुम्हारी जिंदगी में होना बेकार है!"
 
राज और समीर हॉस्पिटल पहुँचे तो समीर ने जैस्मिन को एडमिट कराया औऱ डॉली पागलों की तरह यहाँ वहाँ देखने लगी कि कहीं बलजीत नजर आ जाये! राज पीछे ही रुक गया और डॉक्टर सिंह को फोन करने लगा! वो मिले तो राज उनके साथ डॉक्टर अमर के केबिन में आ गया!

डॉली लैब के पास पहुँची तभी बलजीत ने उसकी बाँह पकड़कर एक तरफ को खींचते हुए कहा, " आ गयी तुम?"

डॉली ने खुद को अब तक शांत कर लिया था, वो मुस्कुराते हुए बोली, " आना तो था ही! विनाश कहाँ है..?"

" लैब के अंदर है! खून ले ले, उसके बाद छोड़ दिया जाएगा!"

" अच्छा वो लैब में है!"

" हाँ , मैंने तो ब्लड दे दिया है लेकिन वो नखरे कर रहा था! इसलिए वक़्त लग रहा है! बहुत अकड़ता है साला, तमीज ही नही है बात करने की!"

डॉली का मन अंदर से बेचैन हो उठा और बलजीत पर बेहद गुस्सा आने लगा लेकिन बाहर से वो शांत बनी रही, तभी बलजीत बोला, " उधर बैठकर बात कर ले!"

" क्यों कोने में क्यों? यहाँ खड़े होकर बात करने में कोई परेशानी है क्या...?"

" नही अगर तुम यहां कम्फर्टेबल हो तो मुझे कोई परेशानी नही!"

" बात करने में कम्फर्ट औऱ अंकम्फर्ट कैसा..?" डॉली ने उसकी निगाह में देखकर पूछा।

" बातें तो करनी है पर साथ मे जरा...!!" कहते हुए बलजीत

ने उसके कंधे पर हाथ रखा तो डॉली ने हाथ झटक दिया और पलक झपकते ही कोने में रखे खाली कांच के जार को उठाकर जमीन पर दे मारा और बलजीत के ऊपर वार कर दिया , पीछे हटते हटते भी बलजीत के कपड़े को चीरते हुए उसके सीने पर कट लग ही गया, डॉली इतने पर भी रुकी नही बल्कि फिर हाथ चलाया तो बलजीत ने भी थप्पड़ चलाया जो डॉली के गाल पर पड़ा लेकिन डॉली फिर भी अपना हाथ लगातार चलाती रही और उसकी बाँहों पर जख्म कर दिया, फिर धक्का देकर उसे नीचे गिरा दिया और पास ही पड़े ऑक्सीजन सिलेंडर को उठाकर उसके सिर पर दे मारा!

बलजीत चीख पड़ा, तभी डॉली को ढूंढता हुआ समीर वहाँ पहुँच गया! डॉली गिरे हुए बलजीत को लगातार सैंडल मारते हुए बोले जा रही थी, " जैस्मीन को चोट पहुँचाने की हिम्मत भी कैसे हुई, उसका सिर फोड़ दिया था न , अब भुगत!! मेरे बेटे को ले जाने की हिम्मत की! कमीने, सुअर!! उसे लैब के अंदर अकेला छोड़ दिया!"

बाहर शोर सुनकर नर्स निकल आई तो विनाश भी बाहर निकल आया और डॉली को देखते ही खुशी से चीखा, "मम्मा!!"

विनाश को देखते ही डॉली बलजीत को छोड़कर उसकी तरफ भागी और उसे गोद मे उठाकर खुद से चिपका लिया!

फिर उसका चेहरा खुद से अलग करते हुए उसके पूरे चेहरे पर चुम्बनों की झड़ी लगाते हुए बोली, " मेरा बच्चा! ठीक तो हो न! क्या हाल कर दिया, बाल कैसे बिखर गए है?"

इधर डॉली के हटते ही समीर ने बलजीत को दबोच लिया और उसे सम्भलने का मौका दिए बिना ताबड़तोड़ मारने लगा! चोट देने का बहुत शौक है न, अब चोट का मजा महसूस कर!!

नर्स ने आवाज दी तो स्टाफ ने आकर समीर औऱ बलजीत को अलग किया! डॉक्टर बाहर आकर समीर और डॉली को डाँटने लगे तभी लंबे डग भरते हुए राज वहाँ चला आया और डॉक्टर की कॉलर पकड़ते हुए बोला, " तमीज से बात करो!! दोबारा इस लहजे में बात नही करना!"

एक तरफ हांफते बलजीत पर नजर डालते हुए राज बोला, " एक आदमी आपको एक बच्चा लाकर सौंप देता है, और इसके कहने पर आप डीएनए टेस्ट को राजी हो जाते हैं! बच्चा इस आदमी को पहचानता तक नही, वो टेस्ट कराने को तैयार नही! कैसा लैब है और कैसा हॉस्पिटल? क्या कहेंगे आप अपनी सफाई में..? चंद पैसों के लिए ही ये सब करते हैं न..! अब मैं कहता हूं की शाम तक रिपोर्ट निकाल कर दीजिए वरना कल सुबह हॉस्पिटल पर ताला लटका

मिलेगा!"

डॉक्टर्स एक तरफ को चले गए तो राज ने डॉली की तरफ देखा और उसके गाल पर अँगुलियों का निशान देखते हुए उसकी आंख सिकुड़ कर छोटी हो गयी!

उसने गर्दन घुमाकर जलती निग़ाहों से बलजीत की तरफ देखा फिर फोन निकाला और कान में लगाते हुए एक तरफ को चला गया, जाते जाते समीर को इशारा किया तो समीर डॉली और विनाश के साथ वहाँ से हट गया!

शाम का वक़्त था, हॉस्पिटल में हंगामा होने पर वहीं मौजूद एक रिपोर्टर जो कि अपना इलाज कराने आया हुआ था, उसने राज को इन्वॉल्व होते देखकर अपनी टीम को धीरे से खबर कर दिया!

जैस्मिन को पट्टी कर दी गयी थी, वो भी डॉली और विनाश के साथ बैठी रिपोर्ट के इंतज़ार में थी! बलजीत पट्टी करवाकर एक तरफ को बैठा था क्योंकि समीर वहाँ से हिल ही नही रहा था औऱ लगातार उसे घूर रहा था।

शाम हुई तो डॉक्टर रिपोर्ट लेकर आया और बलजीत के हाथ मे पकड़ा दिया तो बलजीत हंसते हुए डॉली से बोला, " अब देखो, मुझसे दूर कैसे रखती हो इसे?"

डॉली के हाथ ठंडे पड़ गए थे, फिर भी उसने विनाश को कसकर पकड़ते हुए आत्मविश्वास से कहा, " मुझसे दूर तो इसे कोई नही करेगा! कोई नही!!"

जैस्मिन ने भी दूसरी तरफ से विनाश का हाथ पकड़ लिया और दूसरे हाथ से बेंच खुरचने लगी तो समीर ने उसकी हथेली पर अपनी हथेली रख दी तो जैस्मिन ने उसकी तरफ देखा! समीर ने धीरे से अपनी पलक झपकाकर शांत रहने का इशारा किया! जस्सी ने नजर हटा ली, दिल मे एक खूबसूरत सी हलचल हुई और जस्सी के चेहरे पर गर्मी सी दौड़ गयी।

बलजीत ने रिपोर्ट खोली तो रिपोर्ट नेगेटिव थी , पल भर में उसकी हँसी सिमट गई और त्यौरियाँ चढ़ गई!

वह झपटकर डॉली की तरफ बढ़ा औऱ उसे पकड़कर झकझोरते हुए बोला, " मेरा बेटा नही तो, किसका पाप है ये?"

डॉली नेगेटिव शब्द सुनकर राहत महसूस कर रही थी, खुशी तो हुई लेकिन हैरानी भी इसलिए वो कुछ रिएक्ट नही कर पाई लेकिन तब तक

"अबे छोड़ मेरी मम्मा को...!! डेमन....!!" कहते हुए विनाश उसे धकेलने की कोशिश करने लगा!

जस्सी और समीर भी आगे बढ़े लेकिन तब तक बलजीत ने बेदर्दी से विनाश को धक्का दे दिया और बोला, " दूर हट, गलीच कहीं का! छू मत मुझे...!!"

डॉली ने अब एक जोरदार थप्पड़ बलजीत के मुंह पर जड़ दिया, " जबान काट दूँगी...! आइंदा ऐसे लफ्ज अगर मेरे बेटे के लिए इस्तेमाल किये तो...!"

समीर ने विनाश को गिरने से बचा लिया लेकिन वो आज के सारे घटनाक्रम की वजह से घबरा गया और रुआँसा होकर चीखने लगा, " घटिया आदमी!! बहुत गन्दा है ये, इसे दूर करो मेरी मम्मा से! फोन करो पुलिस को चाचू!"

बलजीत ने उसे घृणा से देखते हुए कहा, " ये बच्चा मेरा नही, मतलब शादी से पहले ही तू किसी और के..."

" जरा सम्भलकर...!!" एक तीखी तेज आवाज माहौल में गूंज गयी, उस तरफ सबकी नजरें गयी तो राज आगे बढ़ता हुआ नजर आया साथ ही साथ बलजीत को सुलगती आंखों

से देखते हुए बोला, " आर यू श्योर की जो लफ्ज तुम्हारे मुँह में है उन्हें तुम बाहर लाना चाहते हो??"

राज ने आगे बढ़कर बलजीत को झटक कर डॉली से दूर धक्का दे दिया और कसकर एक थप्पड़ लगा दिया!बलजीत का दिमाग पल भर को चकरा गया!

राज ने अब डॉली के कँधे पर अपने हाथ का दबाव बनाते हुए वहीं कसकर पकड़ा जहां बलजीत ने उसे छुआ था! डॉली उसके पकड़ने के अंदाज को देखकर उसके चेहरे की तरफ देखने लगी, लेकिन वो सामने बलजीत को घूरता रहा!!

ये हमेशा की तरह का स्पर्श नही था, उसके पकड़ने के अंदाज से ही जाहिर था कि बलजीत का डॉली को छूना उसे नागवार गुजरा है!!
 
बलजीत की छुअन की छाप मिटाकर मानो वह वहां अपना अधिपत्य जमाना चाहता हो!!

बलजीत तब तक सम्भलते हुए बोला, " गलत लड़की के चक्कर मे फंसे हो..! ये उनमें से है जो आज रात इसके पास.......!!"

राज ने अब अपना आपा खो दिया और औऱ बलजीत को धकेलते हुए कसकर दीवार से लगा दिया फिर चेहरे पर मुक्के

बरसाने लगा! डॉली राज को रोकने की कोशिश कर रही थी और उसके ब्लेजर को बार बार खींच रही थी तो राज ने ब्लेजर ही उतार कर फेंक दिया और

उसे घूरते हुए दाँत जमाकर हौले से बोला, "अब मैं ये सुनिश्चित करूँगा की तू पूरी तरह बर्बाद हो जाये! खुद आकर चलती बंदूक के सामने खड़ा हुआ है तो तेरी नष्ट होने की ख्वाहिश को मैं पूरा करूँगा!!"

उसे छोड़ जैसे ही वह डॉली की तरफ मुड़ा तब तक मीडिया भी आ चुकी थी, अचानक फ़ोटो क्लिक होने लगे तो मीडिया आने से घबराकर डॉली ने स्कार्फ से अपना चेहरा ढकते हुए राज की तरफ घूमकर एक हाथ उसके कंधे पर रख दिया और दूसरे से उसकी शर्ट को कसकर पकड़ लिया!

" कौन है ये..?" पत्रकार लगातार सवाल करने लगे तो राज ने डॉली के कन्धे को पकड़कर उसे सबके सामने कर दिया औऱ अपनी गम्भीर बुलंद आवाज में बोला, " मिसेज डॉली राज शर्मा नाम है इनका...!!"

डॉली के होंठ हैरानी से खुल गए और उसने राज के चेहरे की तरफ विस्मय से देखा, उसने कुछ बोलना चाहा लेकिन तभी राज ने यकबयक उसके होठो को चूम लिया जिससे डॉली के मुंह मे आये शब्द उसके हलक में ही अटक कर

रह गए!

" हौ...!!" कहते हुए विनाश ने मुस्कुराते हुए अपने होठों पर हाथ रख लिया!

जैस्मिन ने समीर की तरफ देखा तो समीर ने भी जैस्मिन की तरफ निगाह घुमा दी , जैस्मिन ने झट से धड़कते दिल के साथ नजर हटा ली और उसके चेहरे पर अलग सी रंगत छा गयी जिसे देखकर समीर ने उसके गाल को खींचा औऱ हाथ हटाते हुए मुस्कुरा दिया!

अभी मीडिया वाले और सवाल पूछते की तभी पुलिस ने एंट्री की तो सबकी नजरें उस तरफ चली गयी!!

राज सबका ध्यान भटकते ही उसे गले लगाने के बहाने धीरे से बोला, "अपने चेहरे से ऐसा जाहिर मत करो कि तुम्हे आज ही पता चला है कि तुम्हारी मेरे साथ शादी हुई है!!"

डॉली ने गले लगने का नाटक करने के लिए खुद के कान पर झुके हुए राज की हिलती गर्दन को काट लिया तो राज की पकड़ उसकी बाँह पर कस गयी और मुंह से "उफ्फ!!" निकल गया।

डॉली ने अब दाँत जमाते हुए गुस्से से कहा, " मुझे आज ही पता चला है!!"

राज उससे दूर हटते हुए कॉलर खड़ी करने लगा तब तक पुलिस वालों ने आगे बढ़कर बलजीत को पकड़ लिया तो वह बोला, " लेकिन मैंने किया क्या है..?"

" हमारे पास पक्की खबर है कि आप ड्रग्स की स्मगलिंग करते हैं! उसी सिलसिले में गोआ भी गए थे कुछ रोज पहले!!" एसपी ने कहा तो बलजीत हैरान रह गया और बोला, " नही!! मैं ऐसा कोई काम नही करता, मैं तो एक कम्पनी में काम करता हूँ!"

" कौन कबूल करता है? तुम भी कोई नई बात नही कह रहे!" हवलदार ने कहा और उसे ले जाने लगे तो वह बोला, "मुझे कोई फँसा रहा है?"

राज हँसते हुए बोला, " हाँ! मैं ही हूँ वो! है न??"

"हाँ! कोई और नही, ये राज शर्मा ही...!!" बलजीत जैसे ही बोलने को हुआ, एसपी ने एक थप्पड़ लगाते हुए कहा, " राज शर्मा से खुद का नाम जोड़कर फेमस होने का ख्वाब देखना अच्छा है! अब चल!!"

उसके एक गाल पर राज के हाथ का छाप उभरा हुआ था ,

दूसरे पर एसपी का हाथ छप गया! बलजीत जाते जाते गिड़गिड़ाने लगा और बोला, " एक बार मुझे मेरी बीवी बच्चो से मिल लेने दो!"

" अब ये कौन सा बहाना है?"

" कोई बहाना नही! प्लीज बस एक बार मिलने दीजिये!"

एसपी मान गया और गाड़ी उसके घर की तरफ रवाना हो गयी तो राज सवाल पूछते मीडिया कर्मियों से बोला, " शांत हो जाइये! आपके सवालों के जवाब में कहना चाहूंगा कि मेरे इतने बड़े बिजनेसमैन बनने से पहले से ही इन पर मेरी नजर थी! लेकिन तब मैं इतना काबिल नही था जितना आज हूँ! मैं खुद को काबिल बनाने में लग गया और इतना व्यस्त कर लिया खुद को की पीछे से इनकी शादी हो गयी और मुझे खबर नही लग सकी!

लेकिन जब प्यार सच्चा हो तो मिलने से कौन रोक सकता है? शादी की रात ही इन्हें पता चला कि जिससे इनकी शादी हुई है वो पहले से ही शादीशुदा और दो बच्चो का बाप भी है! तो इन्होंने अगली सुबह घर छोड़ दिया!

शादी तो थी ही अमान्य इसलिए इनके आने के फौरन बाद मैंने इन्हें शादी के लिए पूछा, हालात असामान्य थे इसलिए ये बड़ा आयोजन नही चाहती थी औऱ मेरा नाम होने लगा था तो

इनके फैसले का मान रखते हुए मैंने कोर्ट मैरिज का फैसला किया! इन्हें लाइमलाइट में आना पसन्द नही इसलिए हमने शादी के बारे में किसी को भी नही बताया!! पर अब मुझे लगा की सही वक्त आ गया है कि इन्हें दुनिया के सामने लाया जाए!

मिसेज शर्मा से तो आप सब मिल लिए, अब मिलिए विनाश शर्मा से!! मिस्टर एंड मिसेज राज शर्मा के बेटे से!!" कहते हुए राज ने आगे बढ़कर विनाश को गोद मे उठा लिया तो खुसर फुसर मच गई!

जस्सी ने धीरे से कहा, " गए तुम्हारे बॉस तो अब काम से...!"

समीर ने उसकी तरफ देखा और बोला, " क्यों? इतना अच्छा काम तो कर रहे हैं!"

" बेशक! अच्छा है लेकिन डॉली को किसी का एहसान लेना नही पसन्द! अब तो उल्कापिंड के शांत रहने की दुआ कीजिये!"

"राज सब हैंडल कर लेगा!"

" हैंडल ही उखाड़ फेंकेगी डॉली तो, हैंडल क्या खाक करेंगे?"

इतने में राज बोला, "आप सबको पर्याप्त मसाला मिल चुका है, अब मुझे और भी काम है!"

राज बाहर निकल गया तो पीछे पीछे डॉली - विनाश और जस्सी- समीर भी निकल आए। सबके गाड़ी में बैठते ही ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट कर दी!!

राज कुछ देर बाद बोला, " मेरे घर जाएगी गाड़ी क्योंकि मीडिया कर्मियों का कोई भरोसा नही, हो सकता है की वो अब भी पीछे हों और मैं चीजें बिगड़ने नही दे सकता!!"

डॉली बिल्कुल खामोश बैठी रही, जबकि विनाश आज बहुत खुश था अपने पापा को पाकर!

उधर बलजीत घर पहुंचा तो घर पर कोई नही था , न तो शिवी और न ही बच्चे!! वो इधर उधर ढूंढने लगा पर वो होते तो मिलते न!!

बलजीत अब बार बार लगातार शिवी को फोन करने लगा तो शिवी ने काफी देर बाद उठाकर कड़वे लहजे में कहा, " मुझे दोबारा कॉल मत करना!! एक नम्बर के लड़कीबाज और लम्पट हो आप! मैं नही चाहती कि मेरे बच्चे आपके जैसे बने

इसलिए जब तक आप सुधर नही जाते मैं वापस वहाँ कदम नहीं रखूंगी! समझे आप!!"
 
बलजीत को कुछ समझ नही आया, शिवी के इस लहजे में बात करने से वह हैरान रह गया और देखते ही देखते फोन कट गया तो वह पुलिस की जीप में आ बैठा, और मन ही मन बोला, " ऐसा कैसे हो गया कि शिवी चली गयी...? वो तो मुझसे अलग रह ही नही सकती, दूसरी शादी करने पर तो छोड़कर गयी नही थी, आज अचानक उसे ये क्या हुआ..?"

पुलिस जीप स्टार्ट होते ही राज के फोन पर मैसेज चमका तो राज मैसेज पढ़कर मुस्कुरा दिया और थंब का इमोजी बनाकर भेज दिया!!

राज मन ही मन बोला, "अब सुकून मिला, वो चितकबरा अब लम्बा अंदर गया, डॉली को परेशान करने के लिए लौटेगा नही, औऱ जब लौटेगा तब तक होश ठिकाने लग चुके होंगे!!"

मुस्कुराते हुए वो बाहर देखने लगा और सोचने लगा, डॉली के गाल पर थप्पड़ की छाप देखकर उसका खून खौल गया था और उसने उसी वक़्त अपने आदमी को फोन कर बलजीत के घर चुपके से ड्रग्स के पैकेट रखवा दिए थे!

शिवी को फोन पर ही एक आदमी के थ्रू धमकी दिलवा दी कि बलजीत को जिंदा देखना चाहती है तो मुँह बन्द रखे और उस घर जाकर रहे जो उसके लिए लिया जा चुका है! समय समय पर जरूरत के पैसे मिलते रहेंगे!! कोई कमी नही होगी लेकिन अगर मुँह खोला की धमकी मिली है तो बलजीत जान से जाएगा, फैसला उसका है!

शिवी बलजीत की लाख बुराइयों के बावजूद भी उससे अटैच्ड थी इसलिए उसने दूर जाने का प्रोपोजल मान लिया और उस नए घर चली गयी, जहाँ का पता उसे फोन पर बताया गया था!

अचानक ही डॉली ने गाड़ी रुकवाई तो राज अपने ख्यालों से बाहर आया और उस तरफ देखा!

डॉली ने विनाश की तरफ देखते हुए कहा, " विनाश बेबी आप बहुत खुश हो न तो आप मासी और चाचू के साथ कुछ खाकर सेलिब्रेट करो और थोड़ा घूमकर आओ! तब तक मैं और मिस्टर हैंडसम घर चलते हैं!!"

"ओके मम्मा!!" विनाश ने मुस्कुराते हुए उसके गाल चूमकर कहा, फिर जस्सी औऱ समीर के साथ उतर गया!

राज ने समीर की तरफ देखते हुए कहा, " ध्यान रखना विनाश का!!"

" ये भी कोई कहने की बात है!" समीर बोला और आंख मारी तो राज ने नजर हटा ली!

डॉली घर पहुंचने तक भी कुछ नही बोली तो राज मन ही मन सोचने लगा, " ज्वालामुखी शांत कैसे है, अब तक कुछ नही उगला..?? तूफान से पहले का सन्नाटा है शायद! तैयार रह राज , मालूम नही इसके दिमाग मे क्या चल रहा है..?"

उधर दादी ने टीवी चलाई तो न्यूज देखकर उनके भी होठ गोल हो गए और फिर वो मुस्कुरा उठी! "आखिरकार किसी को तो चुना, किसी का हो गया!"

दादी टीवी में व्यस्त होने की वजह से जान ही नही पायी कब डॉली और राज घर आये!

राज अपने कमरे की तरफ बढ़ गया और अंदर गया तभी उसके पीछे दरवाजा बंद हो गया तो उसने पलटकर देखा औऱ कुछ बोलता उससे पहले ही डॉली ने उसे जोरदार धक्का दे दिया जिससे वो बिस्तर पर गिर गया तो राज दोनो हाथ पीछे बिस्तर पर टिकाते हुए बोला, " माना कि मैंने कहा कि हमारी शादी हो गयी है, इस हिसाब से मुझ पर

आपका हक भी बनता है पर इतना उतावलापन तो ठीक नही न!! दरवाजा बंद कर दिया और अब इस तरह बिस्तर पर धकेलना......."

" शट अप...!!" कहते हुए डॉली ने आगे बढ़ते हुए उसकी कॉलर को पकड़ना चाहा तो राज ने हाथ पकड़ लिया , वह हाथ छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोली, " बकवास बन्द कीजिये अपनी, ज्यादा ओवरस्मार्ट बन रहे हैं, उतावलापन माय फुट!! हिम्मत कैसे हुई मीडिया के सामने ऐसी बाते कहने की? आपका सिर फोड़ दूँगी मैं, मुँह भी तोड़ दूँगी! मुझे किस करने की हिम्मत भी कैसे की...? वो भी सबके सामने इस तरह.....!!"

" मतलब अकेले में ऐसा करूँ...? हम्म ?" राज ने भौंहे उठायी!

" छिछोरे , बद्तमीज कहीं के! आज तो खैर नही!!" कहते हुए डॉली ने अपना हाथ छुड़ा लिया औऱ उसे मारने की कोशिश करने लगी, वो बचता रहा तो डॉली ने झल्लाकर उठते हुए टेबल से उसकी सारी फाइल्स को नीचे फेंक दिया और सारा सामान भी पटक दिया!

" यही तो तुम्हे चाहिए था..!" डॉली गुस्से से बोली तो

राज अब उसकी तरफ देखते हुए बोला, " ऐसा है क्या...?"

" हाँ! ऐसा ही है....! ऐसा ही है..!!" वह गुस्से से चीखी।

राज ने अब उसे खुद की तरफ खींचते हुए कहा, " जब ऐसा ही है तो मैं अब यही करूँगा!!"

डॉली गुस्से से फुफकारते हुए बोली, " ऐसी कोशिश मत भी मत करना वरना ऐसा मुक्का मारूँगी न, होंठ से खून निकल आएगा!"

राज उसकी निग़ाहों में बारी बारी देखते हुए बोला, " इतना गुस्सा क्यों आ रहा है आपको...? कौन सा पहली बार हमारे होंठ एक दूसरे से टच हुए हैं.....?"

" वाहियात आदमी!!" कहते हुए डॉली ने मुंह दूसरी तरफ घुमा लिया तो राज मुस्कुराते हुए बोला, " वाहियात और मैं....!! मैंने तो फिर भी बस होठ से होंठ टच ही किया, आपकी तरह काट नही लिया!! अब कौन वाहियात है, ये मुझे बताने की जरूरत नही!!"

डॉली उसकी तरफ देखने लगी तो वो बोला, " क्या ? ऐसे

क्या देख रही हो..? मान लो वो पुरानी बात थी, बचपन मे हो गयी तो आज का क्या...? मेरे गले पर काटते वक़्त ख्याल नही रहा कि मीडिया सामने है..??"

डॉली का मन हुआ कि उसका चेहरा नोंच ले, वह अब उसे धक्का देकर उससे दूर हटते हुए बोली, " बात का रुख दूसरी तरफ मत ले जाइए बार बार!! आपको मजा आ रहा होगा, मुझे नही....!! सब नियम कायदे तो ताक पर रख दिये न, कर भी कैसे सकते हैं ये सब....? मतलब सब कुछ खुद से डिसाइड कर लेना!! एक बार सामने वाले से मशविरा तक न करना...!! खुद को समझते क्या है....?"

" जो हूँ वही समझता हूं! मशविरा मैंने किया था , याद भी दिला सकता हूँ, और आप जो ये ज्वारभाटे की तरह उमड़ रही है न! सबसे ज्यादा बेनिफिट आपका ही है....."

" मैंने कहा था आपको मेरा बेनिफिट सोचने के लिए...? और क्यों कर रहे हैं आप मुझ पर ये अहसान पर अहसान...? मुझे नफरत होती है सहानुभूति से...! दया दिखा रहे हो मुझ पर...??"

" तुम्हे दया लग रही है तो दया ही समझ लो!! मैं किसी को सफाई नही दिया करता!!"

" देनी पड़ेगी...!!" डॉली भड़क कर बोली तो राज मुड़ते हुए बोला, "उफ्फ! मेरी प्यारी पत्नी!!"

"मैं आपकी पत्नी नही हूँ..!!" डॉली ने शब्दो पर जोर देकर कहा तो राज व्यंग्य से मुस्कुराते हुए बोला, "तो फिर इस तरह हक जताकर आप बीवी जैसी हरकते क्यों रही है?"

" मैं हमेशा से ऐसी ही हूँ!! आप मेरी तरफ आकर्षित हुए तो ये मेरी गलती नही है, आप मुझे बीवी बनाना चाहते हैं लेकिन मैं ऐसा नही चाहती!"

राज अब ठंडे लहजे में बोला, "आपके चाहने , या न चाहने से चीजे बदल नही जाएंगी! कोर्ट मैरिज के ओरिजनल पेपर कब के तैयार हो चुके हैं, वो भी बैक डेट में...!! जो है वो सामने है, अब कुछ नही बदलेगा! आप मेरी बीवी हैं और विनाश मेरा बेटा है! वो अब बड़ा हो रहा है तो अच्छा यही होगा कि उसके दिमाग मे पापा की एक छवि रहने दे, वरना उसके मन पर बुरा असर होगा! आपके और मेरे बीच जो भी मसले हैं वो अकेले में जाहिर करेंगी आप, उसके सामने नही!! आज से उसके दिमाग मे यही रहना चाहिए कि वो मेरा बेटा है, बस!!"

डॉली ने जाने के लिए कदम बढ़ाते राज का हाथ पकड़कर वापस सामने लाते हुए कहा, " क्यों कर रहे हैं आप ये सब..? मेरी नजरो में महान बन जाओगे??"

राज ने उसकी निगाह में झांकते हुए कहा, " आप मुझे महान समझे या बदमाश!! मुझे कोई परेशानी नही!! मैं जो हूँ वही रहूँगा!!"

डॉली भी बिफरते हुए बोली, " और मैं बदल जाऊंगी क्या? मैं भी वही रहूँगी जो हूँ! आपके एहसानों के नीचे दबकर आपके इशारों पर नही नाचूँगी मैं!"

"बोलती रहिए!!" राज ने उसकी तरफ नजर उठाते हुए कहा।

"हां तो बोलूंगी ही...! आपको तो एक से एक लड़की मिल जाएगी न!"

राज ने उसकी कमर में हाथ फँसाकर खुद के करीब खींचते हुए कहा, " मैं कभी बलजीत का नाम नही लूँगा और आप किसी और लड़की का जिक्र नही करेंगी!! मेरी ईर्ष्या का एक ट्रेलर तो आज आप मीडिया के सामने देख ही चुकी हैं तो आइंदा मुझे मत उकसाना!"

डॉली कसमसाते हुए बोली, " जलन क्यों है आपको? आपकी नही हूँ तो किसी और की भी नही हूँ।"

" जलन होगी ही आखिर मेरी पत्नी हो!"

" अजीब सनकी आदमी हो, क्या पत्नी पत्नी लगा रखा है?"

" ऐतराज क्यों है आज आपको? आपने कहा था न कि मैं शादी आज करूँ या कल, आपको कोई ऐतराज नही होगा! इतनी जल्दी भूल कैसे गयी...?"

" बातों के जाल में फँसाने के मामले में आप बहुत अनुभवी मालूम पड़ते है!!" डॉली ने व्यंग्य से उसकी निग़ाहों में देखते हुए कहा तो राज ने ये सुनकर अपनी पकड़ ढीली कर दी औऱ बोला, " रात के समय आप एक आदमी के कमरे में आकर दरवाजा लॉक करती हैं, उसे बिस्तर पर धकेल देती हैं, इसे क्या कहेंगे...?"

डॉली ने गुस्से से दाँत भींचते हुए आगे बढ़कर उसकी छाती पर कसकर एक मुक्का जमा दिया और बोली, " कमीने...!!"

वह तेजी से बढ़ी और दरवाजा खोलकर बाहर निकलते हुए धड़ाम की आवाज के साथ दरवाजा बंद कर दिया।
 
उसके हटते ही राज मन ही मन बोला, " मैं नियंत्रण खोने वालों में से नही!! लेकिन आज मुझे बलजीत का इसे छूना जाने क्यों जरा भी नही भाया! जलन की इच्छा सामान्य है, आखिर प्यार करता हूँ मैं इसे! फिर भी मुझे खुद नही पता चला कि मैं इस तरह सबके सामने इस तरह रिएक्ट कैसे कर गया?"

रात हो गयी थी, डॉली के बाहर निकलते ही दादी नीचे आती दिखाई दी, उन्होंने डॉली को देखकर मुस्कुराते हुए कहा, " मिल ही गयी मुझे मेरी पोता बहु! मैं बहुत खुश हूँ तुम लोगो के फैसले से, तुम खुश तो हो न!"

" ये बहुत खुश हैं दादी! खुशी के मारे अभिभूत है, इतना हैंडसम हसबैंड पाकर!!" राज कमरे से बाहर निकलते हुये बोला।

डॉली ने उसकी तरफ नजर तक नही घुमाई, राज साथ मे आकर खड़े होते हुए बोला, " आपकी ख्वाहिश पूरी कर दी मैंने!"

" वाकई! मैं बहुत खुश हूँ तुम्हारे इस फैसले से, लेकिन इस

तरह नही! मेरे सामने विधिवत शादी होगी तुम दोनो की!" सुभद्रा देवी बोली।

डॉली ने कुछ बोलना चाहा लेकिन साथ मे खड़े राज को देखकर हॉस्पिटल की घटना याद आते ही उसके खुले होठ वापस बन्द हो गए और चेहरा गुस्से और शर्म के मिश्रित भाव से लाल हो गया! उसने दादी के चेहरे से निगाह हटा ली और इधर उधर देखने लगी!

तभी जस्सी - समीर और विनाश ने एंट्री की तो डॉली झट से उस तरफ बढ़ गयी!

राज ने भी गर्दन घुमाई तो दादी की नजर राज की गर्दन पर चली गयी और वो मन ही मन बोली, " दोनो में से कोई कम नही है!!"

उन्होंने हाथ बढ़ाकर राज की कॉलर खड़ी करते हुए अपना गला साफ किया तो राज का चेहरा लाल हो गया, वो बुरी तरह झेंप गया और नजर इधर उधर करते हुए बोला, "मुझे कुछ काम याद आ गया दादी!" फिर मुड़कर कमरे की तरफ बढ़ गया और मन ही मन बोला, " ये लड़की भी न, बेइज्जत

करने का कोई मौका नही छोड़ती!! दादी क्या सोचेंगी की कल तक तो शादी को राजी नही था और आज शादी का ऐलान करते ही ये सब...! उफ्फ...!!"

डॉली ने दादी को ऐसा करते देख लिया था इसलिए उसने न देखने की एक्टिंग करते हुए विनाश से बात करना जारी रखा! तब तक समीर ने आगे बढ़कर हॉल में मौजूद टीवी को ऑन कर दिया!!

टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज में यही आ रहा था, " बिजनेस टायकून राज शर्मा ने अचानक किया अपनी शादी हो जाने का ऐलान! इतना ही नही, उनका एक बेटा भी है, जिसे अब तक दुनिया से छिपा रखा था उन्होंने!! मीडिया के सामने ही अपनी पत्नी को किस करके जताया अपना प्यार!!"

डॉली का चेहरा पूरी तरह गुलाबी हो गया क्योंकि दादी सामने खड़ी थी और टीवी पर वीडियो दिखाई जा रही थी,,,,, " वो मैंने किचन में शायद कुछ रखा है!" कहते हुए वो नजर चुराते हुए और पलके झपकते हुए झट से किचन मे भाग गई!

पीछे से दादी , समीर, जस्सी और विनाश मुस्कुरा दिये!

उधर मिस कपूर ने ये न्यूज देखी तो रिमोट फेंककर बोली, " इम्पॉसिबल है ये!! इम्पोसिबल है!! अचानक शादी का ऐलान!! अगर शादीशुदा था तो अब तक छिपाया ही क्यों इस बात को...?"

मिस्टर कपूर समान गिरने की आवाज सुनकर अंदर आते हुए बोले, " न्यूज को पूरा देखती तो इस सवाल का जवाब भी मिल जाता! उसने सब कुछ एक्सप्लेन किया है!"

" मैं उससे प्यार करती हूँ डैड! आज से नही बीते कई सालों से उसे चाहती हूं मैं..!! गलती उसकी है कि उसने अपनी शादी की बात छिपाई! मेरी नही!!"

" क्या मतलब शादी की बात छिपाई, उसने तो कभी किसी लड़की में इंटरेस्ट दिखाया ही नही!! मुझे पूरी उम्मीद है कि उसने कभी तुमसे प्यार का इजहार नही किया होगा!"

" नही किया!! लेकिन मैं तो पड़ गयी न उसके प्यार में!"

" तो ये उसकी गलती नही, तुम पड़ी हो उसके प्यार में तो भूलना भी तुम्हे ही होगा!"

"डैड!! मैं उसे नही भूल सकती और न ही भूलना चाहती

हूँ!!"

" समझदार बनो! ऐसे करके खुद को ही तकलीफ दोगी! हमारे उनसे अच्छे संबंध हैं! किसी भी गलत कदम का बहुत असर पड़ेगा हमारे बिजनेस पर, औऱ हमारी मार्किट वैल्यू पर!!"

" मुझे कुछ नही पता, मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है! वो उस लड़की से प्यार क्यो करता है...?"

" क्यों का कोई जवाब नही है मेरे पास! अपने गुस्से को खुद तक सीमित रखो!"

मिस्टर कपूर कमरे से बाहर चले गए तो मिस कपूर ने राज और डॉली को करीब देखकर मुँह फेरते हुए कहा, " वो जगह मेरी है, मेरा है राज शर्मा !! मेरा होगा वो!! उसके दिल मे और बाँहों में समाने का हक सिर्फ मेरा है!"

उधर राज ने भी टीवी ऑन किया तो खुद को डॉली पर झुकते देख टीवी बन्द कर दिया और बोला, " पागल हो गया था मैं जलन के मारे!! बिना कुछ सोचे समझे इस तरह रिएक्ट कर दिया! दादी ने टीवी पर देखा होगा! डॉली का गुस्सा जायज ही है, उसे आदत नही इस तरह खबरों में आने

की! गलत कर दिया मैंने, जलन के अहसास को खुद पर कुछ ज्यादा ही हावी कर लिया! बहुत बदलता जा रहा हूँ मैं!!"

डॉली के पास ही जस्सी भी आ गयी और बोली, " सब ठीक है!"

" अभी तक तो ठीक ही है, लेकिन कब तक सलामत रहता है ये सोचने वाली बात है!" डॉली गुस्से से कटोरी को पटककर स्लैब पर रखते हुए बोली!

" मतलब हमे बाहर रोकने का कोई फायदा नही हुआ तुझे??"

" जस्सी!! घर मे दादी भी है , कैसे करती कुछ?"

"हम्म!! ये बात तो है! वैसे उसकी गर्दन पर क्या हुआ..? शरमाता हुआ भागा था!"

" काटा था मैंने हॉस्पिटल में!!"

" ओ माई गॉड! ये कब हुआ..?"

" मुझे वक़्त नही लगता हमला करने में!"

जस्सी उसे गले लगाते हुए बोली, " यार! दादी के सामने उसका फेस देखने लायक था! तूने तो उसे मुँह दिखाने लायक नही छोड़ा!"

" क्या बकवास कर रही है..? उसने मुझे मुँह दिखाने लायक नही छोड़ा! औऱ उसे मैं छोडूँगी नही इसके लिए! मार मारकर गूमड़ निकाल दूँगी!!"

जस्सी हँसने लगी और बोली, " मुझे तो इमेजिन कर करके हँसी आ रही है!"

" ठीक है! जा गेस्ट रूम में जाकर आराम कर , चोट लगी हुई है तुझे!"

" पक्का मैं जाऊँ? दादी को तू खाना खिलाएगी!"

" समीर है न!! वो कर देगा!"

उधर समीर राज के कमरे में आते हुए बोला, " अभी तो इस कमरे में मुझे आने की इजाजत है न!!"

" ड्रामे मत करो! आओ!!"

" नही! मतलब अब आपकी शादी हो गयी न!"

" हम्म, तो!"

" तो आप कमरे की हालत देख लो!"

" वो मुझसे ही गिर गया था ये सब!"

" अच्छा! मुझे तो लगा शादी की निशानी है ये सब!"

" समीर!"

" अच्छा थैंक यू तो कहा ही होगा उसने..?"

" हुँह!! वो और थैंक यू! धरती न पलट जाए!"

समीर हँस पड़ा और राज के गले मे बाँह फ़साई तो कॉलर खिसकते ही बोला, " ये निशान कैसा राज ?"

राज उसका हाथ हटाते हुए बोला, " कुछ नही! चोट लग गयी!"

" किसने दी..?" समीर ने मुस्कुराते हुए पूछा तो राज ने मुड़कर उसे मुक्का जमा दिया और बोला, " दिमाग खराब मत कर!"

" क्या भाई? रोमांटिक होना कहते हैं इसे, आपका दिमाग खराब हो रहा है!"

" हम्म! मुझे मत सीखा!"

" अच्छा ठीक है, जब प्यार हो गया तो रोमांटिक होना भी आ ही जायेगा!"

राज ने टेबल से पेन उठाकर उसकी तरफ फेंकते हुए कहा, " आ बताऊँ तुझे!"
 
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