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Guest
" विनाश ..!!" कहते हुए जस्सी उसके पीछे भागी तो विनाश भागकर राज के पीछे छिप गया।
राज ने उसकी प्यारी सी हँसी देखी तो उसे गोद मे उठाते हुए बोला, " मजा आया आपको!"
" हां बहुत! पर आप बताइये की आपको जो काम दिया था वो हुआ कि नही!!"
" कैसा काम..?"
" ओफ्फोह आप बिजनेस कैसे चलाते हो, इतनी कमजोर याददाश्त है!"
" अच्छा! तो आप याद दिलाइये की क्या भूल गया?"
" मैंने आपको मम्मा के साथ दोस्ती करने का काम दिया था न!"
" ओहहो! ये काम, वैसे आपकी मम्मा से दोस्ती करना इतना आसान नही!"
" तो आप कौन से बच्चे हो जो आपको कोई आसान काम दूँगा? आपको तो मुश्किल काम करने ही पड़ेंगे बड़े जो हो!"
" हम्म! ये बात है तो फिर ठीक है, मैं कोशिश करता रहूंगा!"
" कोशिश नही मुझे रिजल्ट चाहिए, मेरी हेल्प चाहिए तो बताना!"
राज हँस दिया और बोला, " ये डायलॉग कहाँ से सीखा?"
" आप से ही, आपके घर आया था तो आप उस दिन फोन पर किसी से यही कह रहे थे!"
" हम्म, बहुत ऑब्जर्व करते हो बातें..!"
" हां, मेरी नजर हर तरफ रहती है।"
" फिर तो आप बड़े होकर अच्छे बिजनेसमैन बनेंगे!"
"हां मैं बनूँगा! आपसे भी हैंडसम दिखूंगा!"
" आप तो अभी भी मुझसे हैंडसम हैं!" राज ने कहा औऱ उसे पानी मे उतारते हुए कहा, " आज खूब मस्ती कर लीजिए, कल सुबह ही हमे वापस जाना है!"
" ओह नो! फिर तो आप मिशन पर लग जाइये, मम्मा से दोस्ती कीजिये और मैं चाचू और मासी को परेशान करता हूँ!"
राज मुस्कुराते हुए बाल सेट करने लगा फिर डॉली की तरफ देखा तो वो टी शर्ट औऱ कैपरी पहने पानी के किनारे घर बनाने में व्यस्त थी।
"वहम नही, निगाहें कबूल करती हैं तो जबान क्यों नहीं?"
" क्या..?"
" वही..!"
" क्या वही? मैं बस..!"
" हम्म , तुम बस.. मेरे लिये बनी हो!"
" हुँह!! दो बातें तो होती नही ढंग से हमारे बीच......और...!"
" बस लफ़्ज़ों की तकरार है वरना अहसासों से बंधे हैं हम!"
" नही.....!!"
" हां!! तुम्हे मुसीबत में देखकर अगर मैं अपना वजूद भूल जाता हूँ तो मुझे घायल देखकर आलम तुम्हे भी तो याद नही रहता!"
" सिर्फ इंसानियत के नाते!"
" झूठ...!! सिर मेरा भी बहुत ऊंचा है, कभी किसी के सामने झुका नही लेकिन दिल झुक गया है तुम्हारे सामने , तुम बिन अनमना रहता हूँ मैं, तो क्या मुझ बिन तुम अतृप्त नही रहती?"
"नही....!!"
" नही..??"
"नही..!!"
"क्यों..?"
"क्योंकि सारी आदते खराब है आपकी।"
"हम्म! ऐसा है क्या!"
"हाँ! ऐसा ही है।"
"तो बस इतना ही की मेरी आदत में आप भी शामिल हैं।"
" आप न बहुत अजीब हो।" कहते हुए वह उठकर चल दी तो राज ने आगे बढ़कर उसकी कमर में अपनी बाँह फँसाते हुए उसे गोल गोल घुमा दिया! डॉली की सांस अटक गई...! राज की गर्म छाती उसकी पीठ से लगी हुई थी!!
विनाश खुश होकर ताली बजाने लगा औऱ बोला, " वाओ, कितने स्ट्रांग हैं मिस्टर हैंडसम! मम्मा को घुमा दिया!"
डॉली उसकी हथेलियों पर नाखून चुभाते हुए बोली, " छोड़ो मुझे! दिमाग खराब हो गया है क्या..?"
राज गम्भीरता से बोला, " मैंने तो कल ही कहा था कि अब से आपके आगे शराफत छोड़ दूंगा मैं! क्यों अच्छा नही लग रहा मेरा ये रुप...? मुझसे ऐसी उम्मीद नही थी क्या...?"
"ऐसी या वैसी कैसी भी उम्मीद मैं आपसे नही रखती...! आप मेरे है कौन?"
"ये मैं बताऊँगा तो आप क्या बताएंगी...?"
" बहुत ही नीच आदमी हो...!! हक कैसे जता लेते हो?"
राज ने अब उसके करीब स्टेप लेते हुए कहा, " अब नीच कहा है तो वैसी हरकत करना तो बनता है..!"
"क्या कर रहे हैं आप? दूर हटिये मुझसे..!"
" यही तो मैं नही कर सकता!" कहते हुए उसने जैसे ही डॉली की तरफ हाथ बढ़ाना चाहा डॉली पीछे हटते हुए बोली, "अच्छा सॉरी..!! सॉरी...! गलती से नीच शब्द कह दिया था!"
डॉली उसकी करीबी से उसकी खुशबू महसूस कर पा रही थी, वह और आगे बढ़ने से रुक गया और बोला,
" अब ठीक लगा...!" राज व्यंग्य से हल्का सा मुस्कुरा दिया तो डॉली ने अपने दांत पीस लिए औऱ मुड़कर वापस चली गयी।
राज बालो में हाथ फेरते हुए बोला, "बहुत मुश्किल भी नही है तुमसे डील करना!"
" कमीना! कुत्ता!! बेशर्म , सनकी! नीच आदमी!!" वह बड़बड़ाती हुई चली जा रही थी तो वहीं राज मन ही मन बोला, "तुम्हारी ये हरकते मुझे तुम्हारी तरफ और ज्यादा खींचती है, मन बहकाती हो तुम...!! कितनी ही लड़कियाँ मेरे सामने खुद को पेश करने को हाजिर रहती हैं औऱ एक तुम हो जो हां कहने को तैयार नही हो! मुझे उनमें कोई दिलचस्पी नही और तुम्हे मुझमें कोई दिलचस्पी नही!! पर ऐसा भी क्या है, ध्यान आकर्षित करना कोई बड़ा काम नही है, जहां तक मुझे लगता है तुम आकर्षित तो हो चुकी हो! मन मे अहसास भी जाग रहे है..! बस मनवाना बाकी है! मुझे तुम्हे अपना बनाना है, और बनाऊंगा भी.....!!"
वे लोग खा पीकर वहाँ से निकल गए और शाम तक होटल पहुँचे तो डॉली का हाथ पकड़े ही विनाश चल रहा था, राज आगे बढ़ गया था औऱ दादी को उनके रूम में छोड़कर बाहर निकल गया था, जैस्मिन और समीर भी आगे निकल गए थे!
विनाश से बातें करती डॉली की नजर अचानक सामने गयी तो बलजीत को देखकर वो टेंशन में आ गयी और विनाश का हाथ छोड़ दिया! ये पहली बार था जब विनाश बलजीत की नजरों के सामने आया था।
वो डॉली का चेहरा देखने लगा तो डॉली ने उसे निग़ाहों से ही जाने का इशारा किया, तभी आगे बढ़ते विनाश का हाथ समीर ने थाम लिया तो विनाश उससे बात करते हुए आगे बढ़ गया!
में ले लिया और अपनी हथेली से उसका चेहरा ढक लिया फिर धीरे से बोला, " अब भी वो कोने में खड़ा देख रहा है!"
उसकी बांहों का वो घेरा डॉली को मोहपाश सा लगा, शायद ये आहट थी प्रेम के आगमन की! क्योंकि उसका ये स्पर्श पल भर के लिए सारी परेशानियों से कहीं दूर खींच ले गया था। ये स्पर्श देह को भाया था, प्रेम किसी के रोकने से नही रुकता, उसकी तो आदत ही है घुसपैठ करके चुपके से जहन में छिप कर बैठ जाने की। शायद आज ये घुसपैठ डॉली के दिल मे भी हो गयी थी। मन जैसे स्पर्श को छटपटाता था , वो स्पर्श आज अनजाने में मिला था उसे।
( क्रमशः )
राज ने उसकी प्यारी सी हँसी देखी तो उसे गोद मे उठाते हुए बोला, " मजा आया आपको!"
" हां बहुत! पर आप बताइये की आपको जो काम दिया था वो हुआ कि नही!!"
" कैसा काम..?"
" ओफ्फोह आप बिजनेस कैसे चलाते हो, इतनी कमजोर याददाश्त है!"
" अच्छा! तो आप याद दिलाइये की क्या भूल गया?"
" मैंने आपको मम्मा के साथ दोस्ती करने का काम दिया था न!"
" ओहहो! ये काम, वैसे आपकी मम्मा से दोस्ती करना इतना आसान नही!"
" तो आप कौन से बच्चे हो जो आपको कोई आसान काम दूँगा? आपको तो मुश्किल काम करने ही पड़ेंगे बड़े जो हो!"
" हम्म! ये बात है तो फिर ठीक है, मैं कोशिश करता रहूंगा!"
" कोशिश नही मुझे रिजल्ट चाहिए, मेरी हेल्प चाहिए तो बताना!"
राज हँस दिया और बोला, " ये डायलॉग कहाँ से सीखा?"
" आप से ही, आपके घर आया था तो आप उस दिन फोन पर किसी से यही कह रहे थे!"
" हम्म, बहुत ऑब्जर्व करते हो बातें..!"
" हां, मेरी नजर हर तरफ रहती है।"
" फिर तो आप बड़े होकर अच्छे बिजनेसमैन बनेंगे!"
"हां मैं बनूँगा! आपसे भी हैंडसम दिखूंगा!"
" आप तो अभी भी मुझसे हैंडसम हैं!" राज ने कहा औऱ उसे पानी मे उतारते हुए कहा, " आज खूब मस्ती कर लीजिए, कल सुबह ही हमे वापस जाना है!"
" ओह नो! फिर तो आप मिशन पर लग जाइये, मम्मा से दोस्ती कीजिये और मैं चाचू और मासी को परेशान करता हूँ!"
राज मुस्कुराते हुए बाल सेट करने लगा फिर डॉली की तरफ देखा तो वो टी शर्ट औऱ कैपरी पहने पानी के किनारे घर बनाने में व्यस्त थी।
"वहम नही, निगाहें कबूल करती हैं तो जबान क्यों नहीं?"
" क्या..?"
" वही..!"
" क्या वही? मैं बस..!"
" हम्म , तुम बस.. मेरे लिये बनी हो!"
" हुँह!! दो बातें तो होती नही ढंग से हमारे बीच......और...!"
" बस लफ़्ज़ों की तकरार है वरना अहसासों से बंधे हैं हम!"
" नही.....!!"
" हां!! तुम्हे मुसीबत में देखकर अगर मैं अपना वजूद भूल जाता हूँ तो मुझे घायल देखकर आलम तुम्हे भी तो याद नही रहता!"
" सिर्फ इंसानियत के नाते!"
" झूठ...!! सिर मेरा भी बहुत ऊंचा है, कभी किसी के सामने झुका नही लेकिन दिल झुक गया है तुम्हारे सामने , तुम बिन अनमना रहता हूँ मैं, तो क्या मुझ बिन तुम अतृप्त नही रहती?"
"नही....!!"
" नही..??"
"नही..!!"
"क्यों..?"
"क्योंकि सारी आदते खराब है आपकी।"
"हम्म! ऐसा है क्या!"
"हाँ! ऐसा ही है।"
"तो बस इतना ही की मेरी आदत में आप भी शामिल हैं।"
" आप न बहुत अजीब हो।" कहते हुए वह उठकर चल दी तो राज ने आगे बढ़कर उसकी कमर में अपनी बाँह फँसाते हुए उसे गोल गोल घुमा दिया! डॉली की सांस अटक गई...! राज की गर्म छाती उसकी पीठ से लगी हुई थी!!
विनाश खुश होकर ताली बजाने लगा औऱ बोला, " वाओ, कितने स्ट्रांग हैं मिस्टर हैंडसम! मम्मा को घुमा दिया!"
डॉली उसकी हथेलियों पर नाखून चुभाते हुए बोली, " छोड़ो मुझे! दिमाग खराब हो गया है क्या..?"
राज गम्भीरता से बोला, " मैंने तो कल ही कहा था कि अब से आपके आगे शराफत छोड़ दूंगा मैं! क्यों अच्छा नही लग रहा मेरा ये रुप...? मुझसे ऐसी उम्मीद नही थी क्या...?"
"ऐसी या वैसी कैसी भी उम्मीद मैं आपसे नही रखती...! आप मेरे है कौन?"
"ये मैं बताऊँगा तो आप क्या बताएंगी...?"
" बहुत ही नीच आदमी हो...!! हक कैसे जता लेते हो?"
राज ने अब उसके करीब स्टेप लेते हुए कहा, " अब नीच कहा है तो वैसी हरकत करना तो बनता है..!"
"क्या कर रहे हैं आप? दूर हटिये मुझसे..!"
" यही तो मैं नही कर सकता!" कहते हुए उसने जैसे ही डॉली की तरफ हाथ बढ़ाना चाहा डॉली पीछे हटते हुए बोली, "अच्छा सॉरी..!! सॉरी...! गलती से नीच शब्द कह दिया था!"
डॉली उसकी करीबी से उसकी खुशबू महसूस कर पा रही थी, वह और आगे बढ़ने से रुक गया और बोला,
" अब ठीक लगा...!" राज व्यंग्य से हल्का सा मुस्कुरा दिया तो डॉली ने अपने दांत पीस लिए औऱ मुड़कर वापस चली गयी।
राज बालो में हाथ फेरते हुए बोला, "बहुत मुश्किल भी नही है तुमसे डील करना!"
" कमीना! कुत्ता!! बेशर्म , सनकी! नीच आदमी!!" वह बड़बड़ाती हुई चली जा रही थी तो वहीं राज मन ही मन बोला, "तुम्हारी ये हरकते मुझे तुम्हारी तरफ और ज्यादा खींचती है, मन बहकाती हो तुम...!! कितनी ही लड़कियाँ मेरे सामने खुद को पेश करने को हाजिर रहती हैं औऱ एक तुम हो जो हां कहने को तैयार नही हो! मुझे उनमें कोई दिलचस्पी नही और तुम्हे मुझमें कोई दिलचस्पी नही!! पर ऐसा भी क्या है, ध्यान आकर्षित करना कोई बड़ा काम नही है, जहां तक मुझे लगता है तुम आकर्षित तो हो चुकी हो! मन मे अहसास भी जाग रहे है..! बस मनवाना बाकी है! मुझे तुम्हे अपना बनाना है, और बनाऊंगा भी.....!!"
वे लोग खा पीकर वहाँ से निकल गए और शाम तक होटल पहुँचे तो डॉली का हाथ पकड़े ही विनाश चल रहा था, राज आगे बढ़ गया था औऱ दादी को उनके रूम में छोड़कर बाहर निकल गया था, जैस्मिन और समीर भी आगे निकल गए थे!
विनाश से बातें करती डॉली की नजर अचानक सामने गयी तो बलजीत को देखकर वो टेंशन में आ गयी और विनाश का हाथ छोड़ दिया! ये पहली बार था जब विनाश बलजीत की नजरों के सामने आया था।
वो डॉली का चेहरा देखने लगा तो डॉली ने उसे निग़ाहों से ही जाने का इशारा किया, तभी आगे बढ़ते विनाश का हाथ समीर ने थाम लिया तो विनाश उससे बात करते हुए आगे बढ़ गया!
में ले लिया और अपनी हथेली से उसका चेहरा ढक लिया फिर धीरे से बोला, " अब भी वो कोने में खड़ा देख रहा है!"
उसकी बांहों का वो घेरा डॉली को मोहपाश सा लगा, शायद ये आहट थी प्रेम के आगमन की! क्योंकि उसका ये स्पर्श पल भर के लिए सारी परेशानियों से कहीं दूर खींच ले गया था। ये स्पर्श देह को भाया था, प्रेम किसी के रोकने से नही रुकता, उसकी तो आदत ही है घुसपैठ करके चुपके से जहन में छिप कर बैठ जाने की। शायद आज ये घुसपैठ डॉली के दिल मे भी हो गयी थी। मन जैसे स्पर्श को छटपटाता था , वो स्पर्श आज अनजाने में मिला था उसे।
( क्रमशः )