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Romance अनमोल अहसास

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राज के कमरे में आते ही डॉली ने दरवाजा बंद कर दिया और उसके सीने पर अपने दोनो हाथ मारते हुए बोली, " समझते क्या हैं खुद को आप? हद होती है किसी चीज की...? हर चीज अपनी मर्जी के हिसाब से कैसे कर सकते हैं? मैं कठपुतली नजर आती हूँ..??"

राज पीछे हटता जा रहा था और डॉली सवाल पर सवाल करते हुए उसे धक्का देते जा रही थी! वह बिस्तर पर बैठ गया तो भी डॉली उस पर झुकते हुए चीखने लगी, " विनाश तो बच्चा है, लेकिन आप! आपने भी सबके सामने मुझे शर्मिंदा करके रख दिया! मैं नही रह सकती आपके बिना...?? मैं...??"

राज उसे खुद पर झुकते देखकर पीछे की तरफ सरका तो डॉली भी बेड पर चढ़कर घुटनो के बल खड़ी होकर उस पर भड़कते हुए बोली, " मैं तो समझ नही पा रही हूं कि आपको हुआ क्या है..? क्यों मुझे घर नही जाने देते...? या फिर समझ रही हूँ, मुझ पर अपनी सोच लादने की हिम्मत भी कैसे हुई? खुद दूर नही रह सकते हो, खुद का दिल मचलता है तो इल्जाम मेरे सिर क्यों? बेशर्म हो तो बनो बेशर्म सबके सामने, मुझे बेशर्म साबित मत करो!! शादी की नही की बेचैनी छा गयी है!"

राज ने अब गुस्से से उसकी बाँह पकड़ते हुए बिस्तर पर पटक दिया और खुद ऊपर होते हुए बोला, "बस!! नही बोलने का मतलब ये नही की आप लिमिट क्रॉस करेंगी!"

" लिमिट तो अभी मैने क्रॉस की ही नही राज शर्मा !! लिमिट तो आप क्रॉस कर रहे हैं.....!! औऱ ये तो सोचना मत की शादी कर ली है तो मनमानी कर लोगे!!" डॉली ने उसकी निग़ाहों में देखते हुए गुस्से से कहा!

राज भी कुछ पल उसकी निग़ाहों में देखता रहा तो डॉली ने नाराजगी से नजर हटा ली, राज उसके चेहरे पर भरपूर नजर डालते हुए बोला, "ऐसा है क्या?"

" हां ऐसा ही है!" डॉली ने दोबारा उसकी आँखों मे देखते हुए जवाब दिया।

राज उसे छोड़कर हटते हुए बोला, " तो बस इतना की मनमानी ही करनी होती तो शादी नही करता!! बहुत साधन है मेरे पास किसी को भी पा लेने के लिए!"

डॉली भी उठ गई औऱ बोली, " होंगे! मैं किसी साधन के लालच में आने वालों में से नही हूँ! विनाश न होता तो आज मैं आपके कमरे में न होती!"

राज ने उसकी बाँह पकड़कर झटके से खुद की तरफ घुमाते हुए गम्भीरता से कहा," विनाश है तो भी आप यहाँ हो, विनाश नही होता तो भी आप यहीं होती!"

डॉली ने भी उसकी गिरेबान पकड़ते हुए कहा, " मुझ पर जोर आजमाने की कोशिश मत करना! वॉश सिर पर दे मारूँगी, समझे!! तुम्हारे लिए ये सब सजावट का सामान है लेकिन मेरे लिए हथियार!!"

राज ने अपना गिरेबान छुड़ाने के लिए उसका हाथ जरा जोर से दबाते हुए कहा, " अब जरा इज्जत से पेश आइए, क्या कहा था कुछ देर पहले आपने, पति हूँ मैं आपका।"

डॉली ने भी हाथ दबते ही दर्द होने पर उसे वापस बेड पर धक्का दे दिया और सम्भलने से पहले ही पैर में काट लिया तो राज उठकर बैठ गया फिर उसे खुद के करीब खींचते हुए बोला, " गिन गिन कर बदले लेने पर आ गया तो सह नही पाएंगी! लड़की जानकर छोड़ देता हूँ वरना काटने की आदत तो मेरी भी पुरानी है!" कहते हुए राज ने अचानक मुँह फेरती डॉली के गाल को चूम कर छोड़ दिया तो डॉली का रोम रोम फूट पड़ा और चेहरा लाल हो गया!

वह राज को मारने के लिए ताबड़ तोड़ हाथ चलाने लगी तो राज हाथ पकड़ने की कोशिश करते हुए बोला, " मार क्यों रही हैं आप..? बदला ले लीजिए, मैं बुरा नही मानूँगा!!"

डॉली हाथ छुड़ाते हुए दूसरी तरफ मुड़कर बोली, "अभी के अभी कमरे से बाहर जाईये!"

" क्यों..? शरमा रही हो क्या..?" राज ने उसका चेहरा देखने के लिए गर्दन टेढ़ी करते हुए कहा।

" इरिटेट मत कीजिये मुझे! कह रही हूं न जाइये!" वह झल्लाकर चिढ़ते हुए बोली!

राज मुस्कुराते हुए कमरे से बाहर निकल गया तो डॉली ने

दरवाजा अंदर से बन्द कर लिया! शरम तो आ ही रही थी लेकिन जाने क्यों गुस्सा और रोना भी आ रहा था! उसने राज के कपडे जान बूझकर गड्ड मड्ड कर दिए! और समान भी निकालकर इधर उधर फेंक दिया, वह अपने एक कपड़े को रखते हुए बोली, " समझ क्यों नही आता मिस्टर शर्मा को..? मैं नही आने देना चाहती उन्हें अपने दिल मे! एक बार फिर मुझे चोट नही खानी!! जितना दूर जाना चाह रही हूं उतना ही पास क्यों आ रहे हैं फिर? क्यों मेरी जान लेने पर तुले हैं! बेफिक्र, बेपरवाह हूँ तो क्यों मुझे कैद करना चाहते हैं खुद के प्यार में...? क्यों बांधना चाहते हैं खुद के एहसासों से? मैं नही चाहती कुछ भी , कोई अहसास महसूस नही करना मुझे, नही पाना है आपको....! मत कीजिये ये सब!!"

राज उसका शरमाया हुआ लाल चेहरा याद करके मन ही मन मुस्कुराए जा रहा था, " तुम्हारा हाथ थामना भी नस नस में जादू भरता है, फिर तुम्हे किस करना तो समझो बस धड़कनों पर अत्याचार ही है! चेहरे पर यही सिंदूरी आभा तो देखना चाहता था जो आज नजर आयी! क्यों छिपाती हो दिल की हलचल को गुस्से के पीछे, भींगती क्यों नही मेरे एहसासों की लहरों मे? कहाँ सोचा था कि कभी किसी को इस कदर चाहने लगूँगा? पर जाने तुम में क्या है कि तुम्हारे सामने आने पर मैं मैं नही रह पाता, सारी सख्ती भूल जाता हूँ और एक आशिक बन जाता हूँ! जब से तुम आयी तब से

अहसास बदलने लगे थे शायद यही वजह थी कि मुझे तुम पर हर वक़्त गुस्सा आता था, सब कुछ अहसासों से बचने की एक कोशिश ही तो थी! जैसे अब तुम कर रही हो, अहसासों से भागने की कोशिश, सब कुछ दरकिनार करके कह क्यों नही देती की अहसास बस तुमसे!!"

डॉली मुँह धोकर बाहर आई लेकिन फिर भी जस्सी पहचान गयी कि वो रोई है! वह धीरे से कान में बोली, " ओए होए!! इतना प्यार!! मतलब एक दिन भी नही रुकेगी वहाँ , रात तक आ ही जाएगी फिर भी रो ली! राज शर्मा से कुछ घण्टो की दूरी भी नही सही जा रही!!"

"जस्सी! मैं वहाँ रुक नही पाऊंगी इसलिए रो रही हूँ!"

" रहने दे हां रहने दे, ये गुलाबी गुलाबी गाल और राज शर्मा से नजरें चुराना तो कुछ और ही बयाँ कर रहा है!"

" जस्सी! थप्पड़ मारूँगी अब , बता रही हूँ!"

" अच्छा ठीक है अब नही छेड़ूँगी!" जस्सी ने गले मे बाँह फँसाते हुए कहा तभी समीर पीछे से गुजरते हुए बोला, " ये दिन मेरी जिंदगी में कब आएगा?"

जस्सी उस ओर देखती रह गयी लेकिन समीर ने पलटकर नही देखा!

राज की नजर भी डॉली पर थी और उसका चेहरा देखकर राज के माथे पर बल पड़ गए थे!

डॉली विनाश के साथ उसके बगल से निकलने लगी तो राज पीछे से बोला, " आज मुझे कुछ जरूरी काम है, तो कल लेने आऊँगा आप दोनो को!"

डॉली ने कुछ नही कहा, चुपचाप गाड़ी में जाकर बैठ गयी!

राज ने विनाश को प्यार से चूमा तो विनाश ने भी उसे किस करते हुए कहा, " बाय पापा!"

" बाय!!"

" मम्मा को भी!!" विनाश कुछ कहने को हुआ तो राज उसके मुंह पर अंगुली रखते हुए धीरे से बोला, " शशश! बाय बोल दिया है मैंने उन्हें!"

विनाश मुस्कुरा उठा और गाड़ी में जा बैठा!!
 
सुभद्रा देवी को भी जस्सी की तरह यही लगा की वो राज से दूर जाने की वजह से उदास है, तो वो मन ही मन बोली, " दोनो के चेहरे तो देखो! कितना प्यार है, लगता है जल्दी ही विनाश को छोटा भाई या बहन मिल सकते हैं! बस जोड़ी सलामत रहे!"

गाड़ी स्टार्ट हो गयी तो राज कमरे के अंदर चला आया! इधर उधर बिखरे समान पर एक नजर डाली और समान उठाते हुए मन ही मन सोचने लगा, " मेरी वजह से रोई है क्या वो? ऐसा भी कुछ नही किया मैंने फिर क्यों...?"

उधर डॉली मन ही मन सोच रही थी, " क्या उसे भी मेरे चेहरे से समझ आ गया होगा की मैं रोई हूँ? मैं क्या करूँ कुछ समझ नही पा रही...? उसकी कोशिश सफल होने लगी है, मेरे न चाहते हुए भी ये अलग से अहसास मुझ पर हावी हो रहे हैं!! बस नही चल पा रहा खुद पर ही तो रोना तो आएगा ही....!! मैं बेबस नही होना चाहती और ये अहसास मुझे बेबस कर रहे हैं!!"

राज ने समीर को फोन कर दिया, " हैलो!! हमारे आदमी हर वक़्त उस घर के चारो ओर रहने चाहिए! एक पल के लिए भी कोई नही हटेगा!! मुझे मिस कपूर पर जरा भी भरोसा नही, कौन जाने कब क्या प्लान करे? कोई रिस्क नही

ले सकता डॉली और विनाश को लेकर!!"

समीर उधर से बोला, " मैंने पहले ही कह दिया है राज !! जब तुमने डॉली को शाम को ले आने की बात कही तभी मैं कारण समझ गया था!"

" हम्म! ठीक है!"

राज फोन रखकर बिस्तर पर बैठा तो डॉली का बिस्तर पर धक्का देकर घुटनो के बल खड़े होना याद आ गया!

वह आंखे ढकते हुए मन ही मन बोला, " एक ही दिन में कितनी यादे बना दी इसने! हर तरफ बस वही है!! मेरी वजह से रो रही थी या खुद के अहसासों से हारने की वजह से.....!! पागल लड़की.......!!"

डॉली घर पहुंच कर रिलेक्स हो गयी और लेटते हुए बोली, " कितना अच्छा लग रहा है यहाँ आकर? कुछ ही दिन में बहुत मिस किया मैंने इस घर को!!"

जस्सी भी सामने वाले बेड पर पसरते हुए बोली, "कोई है जो लोगो को बातों में उलझाने की कोशिश कर रहा है, वहाँ जाते ही सुर बदल जाएंगे, तब होगा कि मैंने बहुत मिस किया एक ही दिन में आपको!"

डॉली ने तकिया उसके ऊपर दे मारा तो जस्सी तकिया हटाते हुए बोली, " आखिर तुम दोनो की शादी हो गयी! क्या लगते हो साथ मे, कसम से!!"

" तू भी कोई कम तो नही है, समीर दीवाना बन चुका है!"

"ओए!"

" क्या ओए? छेड़ना बस तुझे आता है!"

" मेरा तो हक बनता है छेड़ने का!"

" मेरा भी बनता है! देवरानी जी!"

" डॉली , मां पापा है यार साथ वाले कमरे में!"

" वो विनाश की बातों में उलझे हैं, हमारी बातों में कान नही लगा रखे!"

" सच्ची सच्ची बता! प्यार हो गया है न तुझे भी राज शर्मा से!"

" नही!!"

" चल झूठी!!"

" मै नही करती उससे प्यार!"

" अहसास नही तुझको, पर तू उसे चाहने लगी है!"

" चुप रह!! ऐसा कुछ नही है! अभी तो मैं बस उसे समझने की कोशिश कर रही हूँ!"

" अच्छा जी! चलो कोशिश तो कर रही हो कम से कम!"

डॉली ने फिर से उसे तकिया दे मारा! जस्सी हँसने लगी तो डॉली बोली, "समीर तो बावला हुआ जा रहा है!"

"होने दे! अभी तो कुछ दिन तेरी शादी की खुमारी में जीना है फिर अपना देखूंगी!"

" ओह्हो! कर ले न शादी फिर!"

" मैं नही करूँगी, जब तुझे राज शर्मा से प्यार हो जाएगा न तब करूँगी शादी! अपनी शादी में तुम दोनो की लड़ाई वाली नही, प्यार वाली केमेस्ट्री देखनी है मुझे।"

" फिर तो इंतजार कर!"

शाम को सब मिलकर खाने के लिये बाहर गए! समीर भी

अभी तक बाहर ही था! वह उनके निकलते ही अपनी गाड़ी को उनके पीछे चलाने लगा! रेस्टोरेंट में भी उनसे कुछ दूर चेहरा छिपाए बैठा रहा! डॉली को खुद पर नजरो का एहसास हो रहा था लेकिन समझ नही पा रही थी कि कोई क्यों उस पर नजर रखेगा?"

लौटते वक्त भी खुद की गाड़ी के पीछे गाड़ी चलती नजर आयी और घर के बाहर भी उसे लगा कि उन्हें देखकर कुछ लोग छिप गए हैं!

सुबह होते ही राज तैयार होकर उन्हें लिवाने चला गया! उसे रात भर टेंशन की वजह से नींद नही आई थी! लेकिन सब शांत रहा!

घर आते ही विनाश दादी से जा चिपका तो वहीं राज औऱ डॉली कुछ देर बाद कमरे में थे!

डॉली उसे फाइल में बिजी देखने के बावजूद भी बोली, " आपने मेरे घर के चारो ओर अपने आदमी खड़े किए थे!"

" हम्म!"

" क्यों? मैं कहीं भाग नही रही थी! हर जगह आपके ड्राइवर और आदमी क्यों रहेंगे मेरे साथ? नजर रखना क्यों जरूरी है

आपका!!"

" मेरे आदमी घर के इर्द गिर्द थे क्योंकि अब आप राज शर्मा की बीवी हैं, कोई मामूली राह चलती लड़की नही!! आप पर भी खतरा है औऱ सुरक्षा तो मैं सुनिश्चित करूँगा ही , फिर आप चाहे या न चाहे!! अगर ड्राइवर से परेशानी है तो आप ड्राइविंग सीख लीजिये, मुझे कोई परेशानी नही आपके गाड़ी चलाने से!"

" मैं सीखूँगी!"

" गुड! आपके लिए कल नई गाड़ी आ जायेगी!"

" लेकिन फिर भी परेशानी तो है न, हम कैसे भी जी लेते थे कहीं भी चले जाते थे और अब!! अब बड़े लोगो की संगत का नतीजा देखो, यहाँ वहां खतरा ही खतरा!! नॉर्मल जिंदगी जी ही नही सकते!"

"लोग दिन गिनते हैं ऐसी लग्जरी लाइफ जीने के लिए, और आप शिकायत कर रही है! स्ट्रेंज!!"

डॉली चुप हो गयी और कमरे से बाहर निकल गयी तो राज ने नजर उठायी, वह आज सिर्फ पॉइंट टू पॉइंट जवाब

दे रहा था, खुद की तरफ से बात करने की कोई कोशिश नही कर रहा था! वो नही चाहता था कि गलती से भी कुछ ऐसा करे जिससे डॉली को उसे गलत कहने का मौका मिले या फिर उसकी आँखों मे आँसू आये!

वह ऑफिस चला गया और आने के बाद रात में भी वो चुपचाप करवट लेकर सो गया। डॉली भी लेट गयी!

थोड़ी देर बाद बोली, " मेरे करीब आने की कोशिश मत करना!"

" डोंट वरी!"

" आज हुआ क्या है आपको..?"

" कुछ नही!"

" आपका व्यवहार कुछ बदला सा नही है!"

" ऐसा है क्या?"

" हां, बिल्कुल ऐसा ही है!"

"तो बस इतना की बहुत हो गयी बहस, बहुत हुए झगड़े , मैं

ये सब और नही चाहता! अब ये बताओ कि तुम और मैं हम कब होने वाले हैं? ये फासले कम कब होने वाले हैं?"

" कभी नही...!! फासले हमेशा रहेंगे! मैं फासला कम नही करना चाहती और आपको करने नही दूँगी!"

" ऐसा है तो रोड पर पुलिस वाले जो कील बिछाते हैं न, ले आकर हम दोनों के बीच बिछा दीजिये! रात में आप मेरे करीब आयी थी मैं नही!! मेरे सेल्फ कंट्रोल की परीक्षा ले रही हैं, तो उसे लूज करने पर मजबूर मत कीजिये!! खुद के हाथ पैर भी कंट्रोल में रखिये।"

" नींद में थी मैं, हो गया होगा!"

" नींद में मैं भी था, मुझसे तो ऐसा कुछ नही हुआ! और अच्छे से जानता हूँ मैं की अगर हाथ भी रख दिया होता न आप पर तो आप रात में ही तलवार लेकर चढ़ जाती!"
 
डॉली ने मुंह फेरते हुए कहा, " ठीक है! अगर विनाश जगह बदलने पर जाग न जाता तो मैं बीच मे सोती ही नही!"

" सब पता है विनाश के बहाने मुझे छूने का मकसद रहता है!"

" ज्यादा ख्वाब मत देखो, मैं क्यों छूना चाहूँगी तुम्हे?"

" ये तो आप जानती होंगी! मैं क्या बताऊँ?"

" खुद को कुछ ज्यादा ही भाव देते हो आप! लेकिन मैं आपको छूने में दिलचस्पी नही रखती!"

"ऐसा है क्या?"

" हां!"

" तो ठीक है, अब यही सही!! मुझे छोड़ने की ख्वाहिश रखने वालों को मैं भी अपनी ओर खींचने की कोशिश करने में यकीन नही रखता!"

दोनो ही मुंह फेरकर सो गए!

अगले कुछ दिनों तक डॉली की ड्राइविंग सीखने की धुन जागी रही,, वो सीखने की कोशिश कर रही थी लेकिन हाथ साफ नही हो पा रहा था!

राज अलग ही दुनिया मे था, उसकी बातें विनाश के साथ

तो होती लेकिन डॉली से सिर्फ पॉइंट टू पॉइंट!!

डॉली को राज का ये व्यवहार खल तो रहा था लेकिन फिर वो अपने मन को समझा लेती की जो हो रहा है ठीक ही हो रहा है! चाहे जिस वजह से मुझसे दूरी बनाकर रख रहा हो, अच्छा ही है!

एक रोज डॉली ने बैंगन का भरता बनाया, विनाश को खिलाकर सुला दिया था , जब राज ऑफिस से आया तो वह चुपचाप खाकर उठ गया, दादी देखती रह गयी लेकिन कुछ बोली नही!! वह रूम में गया तो बेचैनी से टहलने लगा और कुछ देर बाद ही उसे उल्टियां होने लगी! डॉली तभी रूम में आई औऱ उसे आवाज आई तो वह वॉशरूम के दरवाजे तक गयी!

राज दरवाजा खोलकर बाहर आया तो वो बोली, " आप ठीक है?"

" हम्म!!" राज धीरे से बोला औऱ बिस्तर की तरफ बढ़ गया। डॉली उसे देखती रही, उसका चेहरा बीमार सा नजर आ रहा था, और बाँह पर रेड दाने उभर आये थे!

वह आंखे बंद किये सिरहाने से टिककर बैठ गया तो डॉली

उसे देखने लगी, " अचानक क्या हो गया इसे?"

इतने में राज को फिर वॉशरूम जाना पड़ा! डॉली अब परेशान होने लगी! वह बाहर आकर बिस्तर पर लेट गया! डॉली उसके पास खड़े होते हुए बोली, " कुछ बताएंगे , क्या हुआ है..?"

वह चुप रहा और आंखे बंद किये लेटा रहा! तभी दरवाजे पर दस्तज हुई तो डॉली ने जाकर दरवाजा खोल दिया! डॉक्टर सिंह और सुभद्रा देवी खड़े थे!

डॉली ने अंदर राज की तरफ देखा फिर डॉक्टर की तरफ औऱ एक तरफ को हटते हुए बोली, " क्या हुआ दादी? आप डॉक्टर? कैसे पता चला आपको की इनके साथ कुछ गड़बड़ है!"

सुभद्रा देवी सहजता से बोली, " उसे बैंगन से बहुत ज्यादा एलर्जी है , गलती से भी खा लेता है तो उसकी तबियत बहुत बिगड़ जाती है! पता नही कैसे आज बैंगन देखते हुए भी चुपचाप खा लिया तो मैंने भी नही टोका की आखिर तुमने प्यार से बनाया है औऱ वो खा ही रहा है तो मैं क्या बोलूं? लेकिन जानती थी कि उसकी हालत खराब हो जाएगी!"

" मुझे बता देती दादी! ऐसा भी क्या हो जाता? मैं कुछ और बना देती न इनके लिये!" डॉली परेशान होते हुए अधीरता से बोली।

डॉक्टर सिंह राज की जाँच कर रहे थे और वो लगभग लगभग बेहोश सा था, हाथ पैर ठंडे पड़ गए थे! डॉक्टर सिंह ने टी शर्ट और ट्राउजर हटाकर देखा फिर बोले, " पूरे शरीर पर रेड दाने निकल आये हैं! हालत खराब है इनकी!"

डॉली को कुछ समझ नही आ रहा था , वह कभी राज को देखती तो कभी डॉक्टर सिंह को! राज ने धीरे से आंख खोलते हुए कहा, " डॉक्टर सिंह मैं ठीक हूँ! आप मेरी पत्नी को डरा रहे हैं! दादी आप इन्हें बाहर ले जाये!

" मैं कहीं नही जा रही हूँ!! जब आपको पता है कि एलर्जी हो जाती है तो नही खाना चाहिए था न!" डॉली बेचैनी से बोली।

राज ने आँख खोलते हुए कहा, " दादी विनाश जाग जाएगा, आप इन्हें बाहर ले जाइए, पैनिक होने से कुछ नही होगा, ठीक हो जाऊँगा एक दो दिन में!"

उनके जाते ही डॉक्टर सिंह ने राज को इंजेक्शन लगाते हुए

कहा, " सेहत से मजाक ठीक नही! प्यार अपनी जगह है और स्वास्थ्य अपनी जगह!!"

" छोड़िये न! बस दवा दे दीजिए कि सो सकूँ, औऱ बेचैनी से छुटकारा मिले, अर्ज किया है--

बैंगन का भरता खाकर फिर रहा हूँ बेचैन!

मिलता नही कहीं भी अब चैन!!"

डॉक्टर सिंह हँस दिए और बोले, " अभी तुरंत दवा ले लो और इंजेक्शन से ये दाने जल्दी हट जाएंगे! लोशन भी दे रहा हूँ, लगाने से खुजली नही होगी!"

राज ने दवा ले ली और डॉक्टर ने लोशन लगा दिया तो वह लेट गया! सुभद्रा देवी उसे देखकर डॉक्टर सिंह के साथ चली गयी तो डॉली ने दरवाजा बन्द किया और राज के पास आकर बैठते हुए बोली, " क्या मेरा इतना भी अधिकार नही बनता की आप मुझे अपनी पसंद नापसंद बता सके...??"

" मुझे लेकर परेशान होने की जरूरत नही, मैं ठीक हूँ! एलर्जी हो जाती है, फिर ठीक भी हो जाती है!"

" वो तो मुझे भी पता है लेकिन खुद को यूँ परेशान करके क्या मिल गया?"

" आप प्लीज मुझे सोने देंगी, वैसे ही बहुत बेचैनी हो रही है!"

डॉली चुप हो गयी और उसे देखती रही लेकिन वो सो गया! डॉली लेट तो गयी लेकिन रात भर उठ उठकर राज को देखती रही कि वो ठीक है या नही!

सुबह भी वह उठ गई औऱ नाश्ता तैयार करने बाहर चली गयी! राज ने उठकर नहाया और लोशन लगाने शीशे के सामने खड़ा हुआ तभी डॉली कमरे में चली आयी!

राज उसकी आहट पाकर लोशन रखते हुए शर्ट पहनने को हुआ तो डॉली ने आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ लिया, " रहने दीजिए! मैं और लड़कियों जैसी नही की आपको इस तरह शर्टलैस देखकर मुँह मोड़ लूँगी और शरमाने लगूँगी!"

फिर राज के हाथ से शर्ट लेकर रखते हुए बोली, " लाइये दीजिये , मैं लगा देती हूँ!"

" आप जिस काम से आई थी वो कीजिये, ये मै संतोष से करा लूँगा!"

" मैं कर देती हूं न, पत्नी हूँ आपकी, आपका ख्याल रख सकती हूँ!"

राज के न चाहते हुए भी डॉली ने लोशन उसके हाथ से ले लिया और पीठ पर लगाने लगी तो उसकी अँगुली राज की खुली पीठ से छूते ही डॉली के जी मे एक लहर सी उठी! तो वहीं राज के मन में सैलाब सा उमड़ा! जज्बातों को समेटने की कोशिश में उसकी मुठ्ठियाँ कस गयी और वह उठ खड़ा हुआ! जिस छुअन को महसूस करना चाहता था, आज उसी छुअन से बचना चाहता था! वह वापस शर्ट उठाते हुए बोला, " जरूरत नही!"
 
डॉली ने भी उसकी कलाई पकड़ ली और बोली, " मिस्टर शर्मा एक छुअन से कमजोर पड़ रहे हैं! "

झुके हुए राज ने निगाह उठायी और बोला, " मैं कमजोर नही पड़ रहा, लेकिन आपके बहकने की संभावना है और मैं आपको बहकाने का कसूरवार नही कहलाना चाहता!"

डॉली ने लोशन का हाथ बढ़ाया तो राज ने भी उसकी कलाई पकड़ ली और बोला, " कहा न रहने दीजिए!"

डॉली उसकी निग़ाहों में देखते हुये बोली, " किसी गफलत

में मत रहिए मिस्टर शर्मा ! मैं इतनी जल्दी बहकने वालो में से नही!! जो कर रही हूँ उसे जारी रहने दीजिए, आपको सुकून मिलेगा!!"

" और मेरा क्या? चाहती हो कि घुट घुट कर मर जाऊँ! एक जख्म पर मरहम लगा रही हो और दूसरा जख्म दिए जा रही हो! बस में होता तो बाँहों में कस लेता लेकिन उस रोज जरा सा गाल क्या चूम लिया तुम तो रो पड़ी!! मुझे सुकून देने आयी हो या मेरी रही सही साँस को रोकने?? कतरा कतरा सुलगा कर भी कहोगी की मैंने तो आग लगाई ही नही!!" राज ने उसे देखते हुए मन ही मन सोचा।

" यूँ घूरने से अच्छा है जो मन मे है वो कह दीजिये!" डॉली नजर उठाये बिना ही बोली।

राज ने नजर हटाते हुए कहा, " जब जी चाहा गैर बना दिया और जब जी चाहा, पत्नी होने का हक जता लिया...!! खुद से जुड़ने नही देती और जब जुदा होना चाहो तो भी रोक लेती हो!! हाऊ कनविनिएंट!!"

डॉली मुँह देखती रह गयी और वो शर्ट पहनकर कमरे से बाहर निकल गया।

डॉली बैठते हुए बोली, "तुम नाराज होने का हक रखते हो तो मैं भी मनाने का हक रखती हूँ लेकिन क्या करूँ, दिल मानता ही नही!! मुझ पर दिल ओ जान हारने को किसने कहा था? क्या मिल रहा है तुम्हे दर्द के सिवा...? जानती हूं हर सांस में तड़प रहे हो लेकिन सुकून नही मिल रहा! पर मुझे तुम पर यकीन तो करने दो! इतने अमीर हो तुम, आज मैं खास लगी हूँ , कल कोई और भी लग सकती है न! तुम तो किसी औऱ के नशे में डूब जाओगे लेकिन मैं एक बार फिर दिल हारकर जी नही पाऊंगी, बदहवास होकर मर जाऊँगी!राज नाश्ता करने बैठा तो डॉली ने सूप परोस दिया! सुभद्रा देवी ने पूछा, " ठीक हो न बेटा!"

" हां! रात भर जागकर आपकी बहु ने ध्यान रखा है मेरा! कैसे ठीक नही रहूँगा!!"

डॉली ने विनाश को खिलाते हुए कहा, " तबियत खराब होने की वजह मैं हूँ,,, तो ख्याल रखूँगी ही!"

विनाश भी तुरंत बोला, " मम्मा पापा को लेकर बहुत परेशान है आज! जब मैं बीमार होता हूँ न ,तो मां मेरा भी बहुत खयाल रखती हैं क्योंकि वो मुझे बहुत प्यार करती हैं! जैसे अभी पापा का ख्याल रख रही हैं!!"

डॉली ने विनाश को आँख दिखाई और सुभद्रा देवी मुस्कुराने लगी! राज चुपचाप सूप पीकर उठने लगा तो डॉली बोली, " आज घर पर ही रहेंगे आप! ऑफिस नही जाएंगे!"

राज कुछ नही बोला, कमरे में चला गया तो डॉली ने विनाश को स्कूल जाने के लिए गाड़ी में बिठा दिया और कमरे में आने को हुई तो निकलते हुए राज का हाथ पकड़ लिया औऱ बोली, " कहा न कि आज आप घर पर आराम करेंगे!"

" मुझे काम है, मैं आराम नही कर सकता!" राज ने अपने हाथ पर से उसका हाथ हटाते हुए कहा, डॉली उसके कदम उठाते ही बोली, " आप नाराज हैं किसी बात पर मुझसे...??"

राज ने जेब में हाथ रखते हुए कहा, " नही! और वैसे भी नाराज रहूं या नही आपको फर्क क्या पड़ता है? नाराज उनसे हुआ जाता है जिन्हें समझ आये की कोई उनसे नाराज है! उनसे नही जो कुछ समझते ही न हो।"

वह चला गया तो डॉली खुद पर ही झल्ला गयी, " क्या पड़ी थी पूछने की, क्यों अहसास करवा रही है उसे कि तू समझती

है कि वो नाराज है! जब चाहती है कि दूर रहे तो रहने दे न! उसकी उदासी को क्यों मन पर हावी होने दे रही है? मत लिपटने दे उसके अहसासों को खुद से!"

डॉली दादी के पास जा बैठी और बोली, " दादी सुनते ही नही मिस्टर शर्मा ! हर बात काटनी जरूरी होती है! मना करने के बावजूद ऑफिस चले गए।"

" काम होगा!"

" फिर भी तबियत खराब है न!"

" इतनी फिक्र करती हो तो फिर परेशानी कहाँ है?"

" मतलब..?"

" मतलब कुछ परेशानी है क्या..? जब से पगफेरे से आई हो देख रही हूँ कुछ तो परेशानी है दोनो के बीच!"

" नही! बस यूं ही! सब ठीक है!"

"नही है तो ठीक करो!"

" कुछ भी नही है दादी, थोड़ा बहुत तो हो ही जाता है, और हम दोनों का तो है ही हमेशा का!"

सुभद्रा देवी अब लेट गयी तो डॉली वहाँ से हट गई औऱ कमरे में आकर बुदबुदाई, " उसकी उपेक्षा से इतना फर्क क्यो पड़ रहा है? मन क्यों नही लग पा रहा किसी काम मे? शायद ये सब करके वो यही चाहता है कि मैं हारकर उसके गले से जा लगूँ! पर ऐसा नही होगा, मैं नही टूटने वाली! आपकी कोशिश कामयाब नही होगी! मैं नही लिपटने वाली आपसे!!"

उधर राज ऑफिस में फोन पर था, " जरा सी भी चूक नही होनी चाहिए, तैयारी पूरी है न!"

" जी सर!! बस आप जिस रोज भी इशारा करेंगे उनकी सारी सॉफ्ट कॉपीज हैक कर दी जाएंगी!"

"ठीक है!! ध्यान एक पल को भी नही हटना चाहिए!"

राज ने फोन रख दिया और लैपटॉप पर काम करने लगा, डॉली ने दो बार कॉल किया लेकिन राज ने फोन नही उठाया , न ही कॉल बैक किया तो शाम होते होते डॉली अचानक केबिन में नजर आयी, " क्या परेशानी है आपकी,

फोन क्यों नही उठा रहे? तबियत पूछने को ही फोन कर रही थी न!"

राज ने बिना कुछ कहे नजर वापस लैपटॉप की तरफ कर ली तो दोबारा आवाज आई, " घर चलें!"

" परेशान मत करो डॉली , किसने कहा था यहाँ आने को?"

" डॉली ...!!" समीर की हैरानी से भरी आवाज आई तो राज ने निगाह उठायी औऱ इधर उधर देखा फिर बोला, " तुम!"

" हां, मैं! भाभी को इमेजिन कर रहे हो!"

" नही! बस मुँह से निकल गया!"

" घर चलिए वरना जो सोच रहें हैं , हो सकता है कि सच हो जाये!"

राज ने मन ही मन कहा, " गुस्से में कुछ भी कर सकती है, कहीं सच मे घर से बाहर न निकल जाए!!"
 
उसने लैपटॉप बन्द किया और कोट उठाते हुए उठ खड़ा हुआ, " चलो!!"

राज ने डॉक्टर सिंह को फोन कर दिया, " घर आ जाइये, मैं खुद ही आता पर लेट हो गया हूँ और घर पर इंतज़ार हो रहा होगा!"

" पहुंच जाऊँगा कुछ देर में!" डॉक्टर सिंह ने कहा।

राज ने फोन रख दिया और कुछ देर बाद ही राज की गाड़ी घर मे आकर लगी तो डॉली कमरे से बाहर निकल गयी, राज कमरे की तरफ बढ़ा और कोट उतारकर रख दिया। वह शर्ट उतारने लगा तो डॉली कमरे में आई औऱ उसकी तरफ निगाह उठायी, खूबसूरत तराशे हुए पूरे जिस्म पर लाल दाने उभरे हुए थे!

वह बोली, " फोन उठा लेते तो क्या हो जाता?"

" काम मे था!" कहते हुए राज थक कर बिस्तर पर बैठ गया तो डॉली बोली, " ऐसा भी क्या काम की 2 सेकंड के लिए फोन अटेंड न कर सके! तबियत ही तो पूछती न, कौन सा टाइम पास करने के लिए फोन कर रही थी!"

राज अब उसकी तरफ निगाह उठाते हुए बोल पड़ा, " ठीक है, पत्नी बन रही हैं तो पत्नी होने का कर्तव्य निभाइये!"

डॉली हैरानी से बोली, " क्या मतलब...? मैं बस आपकी तबियत की वजह से परेशान हूँ, इसका कोई और मतलब मत निकालिए, मैं कोई भी ऐसा वैसा काम नही करने वाली!"

राज ने गहरी निग़ाहों से उसे देखते हुए कहा, " मैं तो बस पानी मांगना चाह रहा था, ऑफिस से आया हूँ तो मुझे पानी देना आपका कर्तव्य ही तो है!"

डॉली अब पलके झपकते हुए दूसरी ओर देखने लगी तो राज खड़ा होते हुए उसकी तरफ बढ़ा और बोला, " आपके ख्याल किस दिशा में गए थे? हर वक़्त दिमाग मे यही सब चलता है क्या....? वैसे आपकी यही चाहत है तो चाहत पूरी करने में मुझे कोई गुरेज नही!!"

डॉली उसके करीब आते ही मुड़ी और बोली, " मेरी ऐसी कोई चाहत नही है, आपकी भी हो तो उसे रोक लीजिये! बात को इतना मत बढ़ जाने दीजिये की सांस तक न ले पाए!!"

राज उसे पकड़ते हुए सर्द लहजे में बोला, " आपको मेरी

साँस की फिक्र करने की जरूरत नही!! मैं खुद को संभालना जानता हूँ! फिक्र तो अब आप अपनी कीजिये क्योंकि मै अब आपमे एक कसक बन कर उठूँगा! खुद को इस कदर समेट कर रखूंगा की आप चाह कर भी मुझमें बिखर नही पाएंगी!"

" मैं बिखरना ही नही चाहती!!" वह उसकी निग़ाहों में देखकर बोली।

राज ने उसे छोड़ दिया और बिस्तर पर बैठ गया, " संतोष!! सन्तोष!!" उसने आवाज दी तो संतोष तुरंत दरवाजे पर आया लेकिन डॉली ने दरवाजे पर आते हुए कहा, " आप जाओ!"

" अंदर आओ!" राज बोला।

डॉली फिर बोली, " मैं कह रही हूँ न कि जाओ!"

" दरवाजे से हटिये , उसे अंदर आने का रास्ता दीजिये!"

" जाओ संतोष!" कहते हुए डॉली ने दरवाजा बंद कर दिया।

राज उसे कुछ सेकंड तक देखता रहा फिर नजर हटाते हुए

लोशन उठाया तो डॉली ने लोशन छीनते हुए कहा, " बैठिए!!"

" मुझे नही लगवाना आपसे!"

" क्यों?"

" जवाब देने को बाध्य नही हूँ मै!"

" तो लगाने दीजिये मुझे, फिर उभर आये है दाने!"

" नही!!"

" मतलब राज शर्मा आज बहकने के डर से एक औरत की छुअन से कतराने लगे हैं!"

" ऐसा है क्या...?"

" हां ऐसा ही है!"

" तो बस इतना कि तरकीब अच्छी है मुझे खुद की बातों में उलझाने की! फिर भी जब इतना ही गुमान है तो चलें आज देख ही लेते हैं कि आपकी छुअन में असर ज्यादा है या मुझ

पर मेरा नियंत्रण ज्यादा है!!"

डॉली का हाथ उसके बदन से छुआ तो राज ने थूक निगल लिया लेकिन चुप बैठा रहा! खुद पर उसके हाथ महसूस करते हुए राज के कान लाल हो गए लेकिन वह शांत बैठा रहा! डॉली उसके धैर्य की परीक्षा ले रही थी और राज भी हारने को राजी नही था! मन तो विचलित हो रहा था पर राज ने अपने निचले होंठ दांतो में दबाकर आंखे बंद कर ली!

उसकी बन्द आंखे देखकर डॉली उसके चेहरे की तरफ देखने लगी , वो ऐसी सूरत का मालिक था कि उसे देखकर मन नही भर सकता था! और अब ये चेहरा ही नही बल्कि वो पूरा उसका था, इस ख्याल से ही डॉली के मन मे गुदगुदी सी हुई और अपने इस ख्याल से शरमाकर गाल गुलाबी हो उठे तो डॉली ने उसकी मस्कुलर बॉडी पर से घबराकर हाथ हटा लिया!! वो एक कदम ही बढ़ा पायी थी लेकिन उसी समय उसकी कलाई पकड़ ली गयी तो डॉली ने मुट्ठी बांधते हुए बिना मुड़े कहा, " आप शर्ट पहन सकते हैं अब!"

राज ने उसे खुद की तरफ खींच लिया और उसके चेहरे पर निगाह दौड़ाते हुए बोला, " क्या हुआ? मेरे धैर्य की परीक्षा लेते लेते खुद का धैर्य छूट गया...!! नीयत खराब हो

गयी...??"

डॉली का चेहरा और लाल हो उठा , राज के खींचने की वजह से उसका हाथ राज के कंधे पर आ गया था, उसने अपना हाथ हटाते हुए कहा, " ऐसा कुछ नही है!"

राज उसकी कलाई छोड़ते हुए बोला, " आपका चेहरा पढ़ना इतना मुश्किल नही है मिसेज शर्मा ...!! अच्छा है खुद ही सम्भल गयी आप, आखिर राज शर्मा की बीवी हो, पिघलती कैसे...? पर डोंट वरी, नही संभलती तो भी मैं आपको लड़खड़ाने पर संभाल लेता!"

डॉली कमरे से बाहर निकलने को आगे बढ़ गयी औऱ राज ने शर्ट चढ़ा ली!

डॉली दरवाजा खोलकर जैसे ही बाहर निकली , डॉक्टर सिंह आते दिखे! वह अंदर चले गए तो डॉली किचन में जाकर एक गिलास पानी पीते हुए बोली, " क्या हो गया था मुझे उस वक़्त? कैसे खो गयी थी उसमें?"

राज भी उधर पानी पीते हुए मुस्कुरा दिया और बोला, " छुपाना तो बहुत चाहती हो लेकिन आज तुम्हारे अंदर के अहसास को समंदर को देख लिया है मैंने!! पर नाराजगी तो

अब भी है तुमसे!!"

डॉक्टर सिंह ने राज का चेकअप किया और राज के कहने पर एक इंजेक्शन और लगा दिया ताकि वो जल्दी ठीक हो सके!

सुभद्रा देवी और विनाश भी अब अंदर चले आये! वो अब तक ऊपर बैठकर लूडो खेल रहे थे!

डॉली सन्तोष के साथ मिलकर खाना बनाने लगी! वह कुछ देर राज की नजरों से दूर रहकर खुद को संभालना चाहती थी।
 
अगले कुछ दिन भी इसी तरह बीत गए, राज अब ठीक हो गया था लेकिन वो इस रात के बाद से डॉली को पहले से भी ज्यादा इग्नोर कर रहा था! डॉली ये बर्दाश्त नही कर पा रही थी, कई बार मन ही मन रुआँसी हो उठती, एक शाम ऐसे ही बैठी मन ही मन बोली, " कर ली शादी, सजा दिया उठाकर अपने घर मे मुझे, अब बस भर गया मन! इतनी उपेक्षा कौन करता है..? कारण भी नही बताता की नाराज किस बात पर है?"

सन्डे का दिन था, राज सुबह ही सुबह खाना खाकर अपनी

फाइल में घुस गया तो डॉली से रहा नही गया, वो एकाएक फाइल बन्द करते हुए बोली, " मेरी उपेक्षा करने वाले होते कौन हो आप...?"

" जो हूँ , वो हूँ! पहले ही कहा था कि ख्वाहिश न पालना!"

" तो आपको भी ऐसे काम करने ही नही चाहिए, जिससे सामने वाले के ह्रदय में ख्वाहिश जन्म ले ले।"

"ऐसा है क्या?"

" हां!"

"तो बस इतना कि मैं अपनी मर्जी से चलता हूँ, जो मुझे सही लगा मैंने किया, किसी को अपनी ख्वाहिश सम्भाल में नही आ रही तो मैं क्या करूँ?"

" मैं खुद को संभालना अच्छे से जानती हूँ!"

" तो भड़क किस बात पर रही हैं आप, जाइये संभालिये खुद को!" राज ने कहा और फाइल लेकर बाहर निकल गया, वह गाड़ी में जा बैठा तो ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट कर दी!

डॉली भी आज बहुत गुस्से में थी, इतने दिनों से राज का इग्नोर करना बर्दाश्त कर रही थी और अब उससे सहा नही जा रहा था! इतनी जिद्दी थी कि रोना आने पर भी रोती तक नही थी! वह यहाँ वहाँ घूमने लगी तो विनाश बोला, " कुछ ढूंढ रही हो आप मम्मा!"

" नही! आप घर मे ही रहना , मैं आज ड्राईविंग पर जाना चाहती हूँ अकेले!"

" ओके मम्मा! " कहकर विनाश चला गया, डॉली को अभी तक भी अच्छे से चलाना नही आया था लेकिन गुस्सा आज कम ही नही हो रहा था तो कुछ देर बाद डॉली जी कड़ा करके बाहर निकली औऱ गाड़ी स्टार्ट कर दी!

वह कुछ देर बाद ही सड़क पर थी और आड़ी तिरछी गाड़ी चलाती जा रही थी! दोपहर का वक़्त था इसलिए ज्यादा गाड़ियां सड़क पर नही थी!

पीछे से विनाश की आवाज आई, " मम्मा कैसी गाड़ी चला रहे हो आप..?"

डॉली की तो जान ही सूख गई! विनाश गाड़ी में कब आया?"

वह बीच मे ब्रेक लगा नही सकती थी और गाड़ी चलाने आती नही थी तो वह परेशान सी बोली, " आपको घर रहने को कहा था न बेबी! क्या किया आपने ये...? गाड़ी में क्यों बैठे...? अब मैं क्या करूँ....?"

विनाश ने पीछे से झाँककर जल्दी से उसका फोन उठा लिया औऱ राज को कॉल कर दी! डॉली ने किनारे गाड़ी लगाने के लिए गियर काटा लेकिन तभी खुद की गाड़ी के पीछे आती कुछ गाड़ियों को देखकर उसने वापस स्पीड बढ़ा ली! आंखों में आंसू आ गए और मन ही मन सोचा, " विनाश !! क्या जरूरत थी गाड़ी में बैठने की...? मैं क्या करूँ....? कैसे बचाऊँ तुम्हे...?"

इधर राज ने कॉल उठाया तो डॉली की जगह विनाश की घबरायी सी आवाज सुनकर सकते में आ गया, " हैलो! पापा!! मम्मा गाड़ी ड्राइव कर रही हैं, उन्हें ड्राइव करने नही आ रहा है!"

राज अभी ऑफिस में घुस ही रहा था , वह वापस झट से गाड़ी की तरफ दौड़ गया और बैठते हुए बोला, " लोकेशन ऑन करो बेटा!! घबराना बिल्कुल भी नही! और कॉल कट मत करना!!"

विनाश ने राज के समझाने के हिसाब से लोकेशन ऑन कर दी और जब बाहर देखा तो बोला, " पापा, हमारी गाड़ी के पीछे तो मूवीज की तरह कुछ गाडियाँ आ रही है! मम्मा तेज चला रही है, कहीं कहीं टकरायी भी!!"

ये सब सुनकर राज की तो जान अटक गई, अपने आदमियों को फोन भी कैसे करता! विनाश को होल्ड पर करने का रिस्क नही ले सकता था इसलिए खुद ही लोकेशन की तरफ फ़ास्ट ड्राइव करते हुए बढ़ चला!

" फोन मम्मा के कान से लगाओ बेटा!" राज ने कहा तो विनाश ने फोन डॉली के कान से लगा दिया!

" हैलो!"

डॉली कुछ नही बोली, तो राज बोला, " बात कीजिये!!"

डॉली फिर भी चुप रही लेकिन राज की आवाज सुनकर उसे रोना आ गया।

विनाश उसे रोते देख कर फौरन बोला, " मम्मा, रोते नही, दिखाई नही देगा तो हमारा एक्सीडेंट हो जाएगा!!"

राज तक ये आवाज पहुंच गई और वो बोला, " डॉली !! बोलो कुछ!!"

डॉली फिर भी चुप रही तो राज टेंशन की वजह से गुस्से में आ गया औऱ चीखकर बोला, " क्यों दिमाग खराब कर रहीं हैं आप..? बात करने को कह रहा हूँ न, बोलती क्यों नही? कुछ बोलो डैम इट...!!"

डॉली भी रुलाई रोकते हुए इधर से चीख पड़ी, " क्यों बोलूं? हाँ क्यों बोलूँ...? इतने दिन से बात करने की कोशिश कर रही थी तो मुझे नजरअंदाज कर रहे थे न...!! कीजिये अभी भी नजरअंदाज...!! अब लीजिये सुकून का मजा!! मैं थक गई कोशिश कर करके! लेकिन नही, आपको तो अपनी ही दुनिया मे रहना है! आपको क्या लगा कि मैं रोऊंगी आपके लिए आपके सामने, मैं नही रोने वाली...!! समझे आप!!" कहते कहते डॉली रो पड़ी और बोली, " मैं नही रोऊँगी आपके लिए...! नही फर्क पड़ता आपके नजरअंदाज करने से!"

राज समझ गया कि वो जबरदस्ती रुलाई रोक रही है , उसका रोना कलेजा चीर रहा था! पर वह शांत होकर बोला, " जानता हूँ कि आप बहुत मजबूत है, कोई फर्क नही पड़ता आपको किसी बात से..! बस इसी मजबूती की तो जरूरत है

इस वक़्त, सारा गुस्सा निकल गया न तो अब शांत दिमाग से गाड़ी को आपसे कुछ दूर पर मौजूद खाली फील्ड की तरफ ले जाइए!! मैं वहीं आ रहा हूँ!!

अब तक जो भी सीखा है उसे ध्यान में रखकर ड्राइव करें!! डरने की जरूरत नही आपको, मै ज्यादा दूर नही हूँ, आपके पास पहुंच जाऊँगा कुछ वक्त में, तब तक संभाल लीजिये!!"

डॉली ने गाड़ी राज के बताये रूट के हिसाब से चलाना स्टार्ट किया और साथ ही बात करता रहा, " पीछे गाडियाँ अब भी हैं..??"

" हां, एक है कुछ दूर पर, बाकी कहीं पीछे छूट गयी हैं शायद!" डॉली ने कहा।

"हम्म!!"

जल्दी ही वो फील्ड तक पहुंचने वाली थी, तो राज भी वहाँ पहुंचकर अपनी गाड़ी से उतरा! तभी डॉली की गाड़ी नजर आयी, राज को कार देखकर राहत महसूस हुई औऱ वो कदम बढ़ाने को हुआ लेकिन अचानक डॉली की गाड़ी को दाई तरफ से आती ट्रक ने टक्कर मार दी! तो राज की धड़कन ही थम गई , " डॉली ...!! विनाश ..!!" राज चीख पड़ा! उनकी गाड़ी घिसट कर कुछ दूर पर रुक गई तो

वो उस तरफ दौड़ पड़ा।

ट्रक वाला वहाँ से भाग गया लेकिन जाते जाते भी राज ने ड्राइवर की तरफ अपनी गहरी निगाह से देखा। राज के पहुँचने तक गाड़ी का पिछला दरवाजा खुला और विनाश बाहर निकला, पेट्रोल टपकती गाड़ी का अगला दरवाजा खोलने की कोशिश करने लगा! अंदर से डॉली ने भी हाथ बढ़ाया था लेकिन राज ने विनाश को हटाकर जल्दी से अगला दरवाजा खोला , डॉली के खून से सने हाथ देखकर उसका मन पसीज उठा, उसने डॉली को खींचकर गाड़ी से बाहर निकाला! गाड़ी का शीशा टूट गया था औऱ उसके पैर में किरचे चुभी हुई थी, टक्कर ड्राइविंग सीट की तरफ से ही लगी थी तो डॉली के पैर मे बेशुमार दर्द हो रहा था! गाड़ी की रफ्तार तेज थी तो टक्कर जोरदार हुई थी, उसकी घुटनों से नीचे की त्वचा फट गई थी और मांस बाहर आ गया था! खून बह रहा था।"

राज ने सोचा तो था कि मिलते ही उसे कसकर एक थप्पड़ लगाएगा लेकिन उसकी हालत देखकर वह खुद को संभाल नही पाया औऱ बिना एक शब्द कहे उसे कसकर अपने गले से लगा लिया! विनाश को भी खुद से लगाते हुए बोला, " चलो आप मेरी गाड़ी में जाकर बैठो, मैं इनको लेकर आता हूँ!"
 
दिसम्बर का आखिरी हफ्ता था, राज ने अपना मफलर लिया और बैठकर उसके घुटने के निचले हिस्से पर कसकर बांध दिया! फिर खड़ा हुआ औऱ उसे गोद मे उठाकर अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ गया, तभी एक एक करके गाड़ियां बाहर आने लगी और राज की गाड़ी लगभग बीच मे घिर गई!

राज ने फौरन दरवाजा खोलकर डॉली को अंदर बिठाया और उन गाड़ियों से लोगो के बाहर निकलते निकलते गाड़ी की चाभी घुमा दी! गाड़ी को घेरने के लिए कुछ लोग गाड़ी के आगे आ गए तो कुछ पीछे! राज ने उन्हें देखकर त्यौरियाँ चढ़ा ली औऱ गुस्से में गाड़ी स्टार्ट करके स्पीड से आगे बढ़ाई तो आगे से वो खुद ही इधर उधर गिरते पड़ते हट गए , राज ने अब गाड़ी तेजी से बैक की तो पीछे से भी लोग हट गए और भागकर अपनी गाड़ियों की तरफ बढ़े, लेकिन राज ने जरा भी घबराए बिना अपनी गाड़ी को 360° पर पूरी स्पीड में घुमाना शुरू कर दिया! जो बचे खुचे लोग उसे घेरने की कोशिश में थे वो तीतर बितर हो गए और रास्ता बनते ही राज सबके सामने से देखते ही देखते गाड़ी निकाल ले गया!

विनाश ने खुश होकर पीछे से राज के गले मे बाँह डाल ली और उसका गाल चूमते हुए बोला, " यु आर वन्डरफुल डैडी! आई लव यू सो मच!!"

राज ने हाथ बढ़ाकर उसका गाल थपथपा दिया औऱ बोला, " लव यू टू!"

विनाश अब आँखे बंद किए डॉली की तरफ देखकर बोला, " आप ठीक तो हो न मम्मा!"

डॉली का मुंह दर्द की वजह से सूख रहा था, वह धीरे से बोली, " आप ठीक हो तो मैं ठीक हूँ!"

राज ने गाड़ी चलाते हुए ही कहा, " आज के बाद आप गाड़ी को हाथ नही लगाएंगी!! अगर गाड़ी ड्राइव करने का नाम भी लिया तो मुझसे बुरा कोई नही होगा!"

राज ने अब फोन निकालकर लगाया औऱ बोला, " समीर, लाइव लोकेशन भेजा हुआ है, पहुंच!!"

राज ने गाड़ी हाइवे की तरफ जाने वाले रास्ते पर एक ओर लगाया और समीर के वहाँ आते ही उसने उन्हें डॉक्टर के पास ले जाने को कहा फिर खुद ग्लव्स पहनता हुआ बाहर उतर गया तो डॉली ने समीर से गाड़ी की चाभी छीन ली, " मैं कहीं नही जा रही!"

राज खुद के पीछे आती मिस कपूर की गाड़ी को देख चुका

था! वह अपनी गाड़ी को आगे बढ़ा ले गया तो मिस कपूर की गाड़ी फिर उसके पीछे हो गयी! समीर भी डॉली के कहे अनुसार उनके पीछे लग गया!

राज जब ज्यादा आगे निकल गया तो एक किनारे गाड़ी को लगाकर दूसरी तरफ से आती, उसी ट्रक को रोककर ड्राइवर की गर्दन पर वार करके ट्रक में दूसरी तरफ से खुद बैठ गया! जैसे ही मिस कपूर की गाड़ी आगे बढ़ने को हुई राज ने ट्रक को स्पीड से उस तरफ बढ़ा दिया, ड्राइविंग सीट की तरफ से ही टक्कर देते हुए राज ने ट्रक की स्पीड बढ़ा दी! रेलिंग टूटकर मिस कपूर की गाड़ी नीचे जा गिरी और ट्रक का अगला हिस्सा भी लटक गया तो डॉली की नब्ज थम गई! साथ ही साथ चीख निकल गयी, " राज !!"

वह बाहर निकल आयी औऱ पैर में दर्द के बावजूद भी आगे बढ़ने को हुई तो समीर ने उसका हाथ पकड़ लिया, डॉली कसमसाती रह गयी! विनाश भी रोते हुए समीर से चिपक गया, "चाचू, पापा!!"

राज तभी ट्रक के पीछे से आता दिखा तो समीर ने विनाश को उस तरफ इशारा किया, विनाश आँसू पोंछते हुए उस ओर देखने लगा तो राज को देखते ही डॉली का हाथ खींचते हुए बोला, " पापा!!"

डॉली ने करीब बढ़ते राज को देखा तो समीर से हाथ छुड़ाकर आगे बढ़ना चाहा लेकिन राज तेज चाल से खुद ही उसके सामने आ खड़ा हुआ!

डॉली ने अपनी आँसू से गीली पलकें और गुस्से भरी नजर उसकी तरफ उठाते हुए उसके सीने पर अपने हाथ मारते हुए कहा, " कौन हैं आप...? हां कौन हैं...? इतनी मनमानी कैसे कर लेते है...? साँसे रोकने का इतना शौक ही है तो गला दबा दीजिये मेरा! बात ही खत्म हो जाएगी!! वो ट्रक...! वो ट्रक....! मैं..!"

" समीर!!" राज ने कुछ कहना चाहा लेकिन डॉली ने उसके गाल पकड़कर खुद की तरफ करते हुए कहा, " मुझसे बात कीजिये, क्या समीर, समीर...?"

समीर राज की बात समझकर विनाश को लेकर गाड़ी में बैठ गया तो डॉली ने सीने के सामने से राज की शर्ट को पकड़ते हुए कहा, " मुझे अकेला छोड़कर जाने की हिम्मत भी कैसे की...? मुझे समीर के साथ भेजकर स्टंट दिखाना था!! सोच भी कैसे लिया कि मैं चली जाऊँगी? कहती नही तो क्या समझते नही आप...? मेरे अहसास महसूस नही कर सकते आप....!! मैं नही रह सकती हूँ आपके बिना...! मुझसे आपकी बेरुखी तो बर्दाश्त नही हो पाती, दूर जाना

कैसे बर्दाश्त कर सकती हूं..? मुझसे दूर जाने की कोशिश कभी मत कीजियेगा कभी! आप मेरे हैं और मेरे रहेंगे!! प्यार करती हूँ आपसे...! है मुझमे भी अहसास, और वो सारे अहसास बस तुमसे है...!!"

"तो आज आ ही गयी अहसासों के समंदर में रवानी..!!" राज ने उसे अपनी प्यार भरी नजरों से देखते हुए कहा औऱ उसके आँसू पोंछने को हाथ बढ़ाये तो डॉली ने उसका हाथ अपने हाथ से हटा दिया और सीने से लग गयी तो राज की नस नस उसके इस प्यार भरे आलिंगन से सिहर उठी, राज के हाथ उठे और उसने डॉली की काँपती देह को कसकर अपनी बाँहों में समेट लिया!

डॉली कुछ पल बाद शांत हुई तो झट से अलग होने को हुई लेकिन आँखे बंद होने लगी तो राज ने उसे अपनी बाजुओं में उठा लिया और गाड़ी की तरफ बढ़ गया!! डॉली खून बहने और दर्द से बेहाल बेहोश हो गयी!

गाड़ी में बैठते ही समीर बोला, " घर ले चलो, डॉक्टर सिंह पहुँच चुके हैं!"

" हम्म!"

"मैं अपनी गाड़ी से पहुँचता हूँ!"

" नही!! ड्राइव करो तुम!! ड्राइवर भेज कर गाड़ी बाद में मंगवा लूँगा!"

"ठीक है!"

राज डॉली के साथ बैक सीट पर बैठ गया, बेहोश डॉली का सिर अपने कंधे पर सम्भालने के लिए उसे पकड़े रखा, औऱ दूसरी तरफ से विनाश उससे लिपट गया, " पापा अब मम्मा और मुझे छोड़कर कभी मत जाना, हम बहुत ज्यादा प्यार करते हैं आपसे!"

" मैं भी!!"

राज ने अब फोन लगाया और बोला, " एसपी साहब! राज शर्मा बोल रहा हूँ, आज कुछ लोगों ने मेरी पत्नी का पीछा करने की कोशिश की तो वो बचने के लिए हाइवे से कुछ दूर फील्ड की तरफ गयी लेकिन मेरे पहुँचते पहुंचते एक ट्रक ड्राइवर ने उनकी गाड़ी को टक्कर मार दी!

मैंने ट्रक का पीछा किया ताकि उसे पकड़ सकूँ लेकिन तब तक मेरे देखते ही देखते हाइवे पर उसने किसी और की गाड़ी को उड़ा दिया और खुद की भी ट्रक का बैलेंस खो दिया! मेरी गाड़ी अब भी घटनास्थल पर ही है, आप घटनास्थल पर जाँच

कर सकते हैं! जो सहयोग चाहिए करूँगा, लोकेशन मेसेज कर दिया है, लेकिन मैं निकल चुका हूँ, मेरी पत्नी की हालत सही नही है!"

राज ने कॉल कट किया और एक बार फिर डॉली की तरफ देखा तो विनाश बोला, " मम्मा को बहुत चोट लगी है न!"

" ठीक हो जाएंगी! पर आप बताओ मम्मा को गाड़ी चलाने नही आती तो भी आप उनके साथ क्यों बैठ गए, पहले ही इन्फॉर्म कर देते न मुझे!"

" नही! नही!! आपके जाने के बाद मम्मा परेशान सी इधर उधर घूम रही थी तो मैंने पूछ लिया, उन्होंने अकेले ड्राइव पर जाने को कहा तो मैं चुपके से आकर गाड़ी में इसीलिए बैठ गया क्योंकि मुझे पता था कि वो परेशान हैं! और उन्हें परेशान होने पर रोना आता है, लेकिन मुझे देखकर खुश हो जाती हैं, तो उन्हें खुश करता न!"

राज ने उसके बाल बिगाड़ दिए और बोला, " खुश नही! आज आपने डरा दिया उन्हें!"

" क्यों..?"

" उन्हें ड्राइविंग अच्छे से नही आती न तो वो गाड़ी में आपको पाकर घबरा गई थी! इसीलिए रो रही थी।"

"हट!! आप थोड़े न थे गाड़ी में, मैं था!! वो मुझे पाकर रो नही रही थी, बस थोड़ा सा डाँटा था लेकिन फिर आपके बात करने पर वो रोने लगी थी!"

" अच्छा! तो मेरी वजह से रो रही थी?"

" हां, आपने जरूर उन्हें परेशान किया होगा!"

राज हँस दिया औऱ बोला, " मैं नही करता परेशान! वो खुद ही परेशान होती है।"

" हां, ऐसे ही जस्सी मासी भी कहती है मम्मा को औऱ चाचू को भी, है न चाचू!!"

समीर मुस्कुरा दिया, तभी डॉली को होश आया तो वह झटपट राज के कन्धे से सिर हटाने लगी! राज ने अपनी बाँह उस पर से हटाते हुए कहा, " ज्यादा दर्द है!!"

" हम्म!!" डॉली ने खिड़की की तरफ चेहरा करते हुए कहा!

राज उसके चेहरा फेरने का कारण समझ रहा था, गुस्से में सब कुछ कह तो दिया था लेकिन अब वो सब याद करके निगाह मिलाने में कतरा रही थी!
 
राज घर पहुंचा तो डॉक्टर सिंह के साथ मौजूद उनकी पत्नी डॉक्टर मानवी ने डॉली का चेकअप किया और फिर घाव साफ करके टाँके लगाने से पहले दर्द महसूस न करने करने का इंजेक्शन लगाने को हुई तभी राज ने आवाज दी, " मैं अंदर आ सकता हूँ डॉक्टर?"

मानवी- " हां!"

" नही!!" डॉली ने जल्दी से कहा और अपना पैर खींचना चाहा तो मानवी ने पकड़ते हुए कहा, " अरे! घाव गहरा है, मांस बाहर आ गया है, आप लापरवाही कर रही हैं!"

राज अंदर चला आया लेकिन उसके अंदर आते आते डॉली ने अपने पैर पर अपना शॉल डाल कर ढक दिया क्योंकि डॉक्टर ने उसकी फटी सलवार को घुटनो तक काटकर अलग कर दिया था ताकि वो घाव से टच न हो!

राज उसकी ये हरकत देख चुका था औऱ डॉली उसकी तरफ देख ही नही रही थी!

" ये लापरवाह ही है डॉक्टर! आप ध्यान से इलाज कीजिये इनका।" राज ने कहा और पास ही बैठने को हुआ तो अब डॉली झट से उसे देखते हुए बोली, " नही!! यहाँ क्यों बैठ रहे हैं आप...? आप जाइये न!!"

" क्यों..?"

" क्यों मतलब!! मुझे नही अच्छा लगेगा कि आप यहाँ रहें!"

" ऐसा है क्या...?"

" हां , ऐसा ही है!"

" तो बस इतना कि मैं आपके घाव का इलाज अपनी देख रेख में चाहता हूँ! मैं यहाँ से कहीं नही जा रहा।"

" सत्यानाश हो उन गुंडों का, सब उनकी वजह से हुआ है, कैसी सिचुएशन में फंस गई, बताओ पूरे पैर इसके सामने ऐसे निरावरण...!!" वह मन ही मन बोली और फिर नजर उठाकर राज की तरफ देखा।

राज डॉक्टर को देख रहा था, उन्होंने डॉली को इंजेक्शन लगाया और फिर टाँके लगाने के लिए, जैसे ही शॉल हटाने को हुई डॉली ने उनका हाथ पकड़ लिया और बोली, " इन्हें बाहर भेज दीजिये न डॉक्टर!"

मानवी हंसते हुए बोली, " मिसेज शर्मा , आप इनके बेटे की माँ हैं! फिर भी आप तो ऐसे झिझक रहीं है जैसे पहली बार इनके सामने आई हैं!"

राज ने ये सुनकर बहुत मुश्किल से अपनी मुस्कुराहट रोकी, तो वहीं डॉली के गाल औऱ कनपटी लाल हो गयी! वह दर्द के कारण सूखे होठ पर जीभ फेरते हुए इधर उधर देखने लगी।

डॉक्टर ने उसकी शॉल को ऊपर की ओर सरकाया तो डॉली की मुट्ठी कस गयी और उसने अपनी आंख बंद कर ली! उसकी साँसे तेज चलने लगी औऱ उसने अपने होठ भींच लिए!! राज ने एक नजर उसके गोरे खूबसूरत पैर पर डाली फिर जख्म देखकर उसके माथे पर बल पड़ गए!

डॉली को जैसे ही टांका लगा, ""आहहह...!!" डॉली के मुंह से निकला और उसने अपना हाथ बिस्तर पर रखा तो आंखे बंद होने की वजह से उसका हाथ गलती से राज के

हाथ पर पड़ा!

राज ने फौरन खड़े होकर डॉली के कन्धे थामते हुए गम्भीरता से कहा, "इन्हें दर्द समझ मे आ रहा है डॉक्टर! कैसा इंजेक्शन दिया है कि दर्द बेअसर नही हुआ!"

" थोड़ा बहुत तो समझ आता ही है सर! इसीलिए तो आपको यहाँ रुकने को कहा मैंने, आप रहेंगे तो इन्हें थोड़ा मोरल सपोर्ट मिलेगा, घबराएँगी नही!!" मानवी ने कहा।

डॉली मन ही मन झल्लाई, " आपके मोरल सपोर्ट की ऐसी की तैसी!! घबराउंगी नही लेकिन शर्म को घोलकर पी जाऊँ क्या.......? बताओ अधनंगा पैर इसके सामने औऱ मैं गुस्से में इजहार भी कर गयी! कितनी अजीब सिचुएशन है, कोई समझ क्यों नही रहा....? मन कर रही है मिट्टी खोदकर उस मे घुस जाऊँ!!"

राज ने उसके कंधे थामे हुए ही कहा, " घबराओ मत, मैं हूँ यहीं!"

डॉली फिर मन ही मन बोली, " टांकों से कौन घबरा रहा है....? दर्द हुआ तो मुँह से आह निकल गयी लेकिन वो मैं बर्दाश्त कर लेती पर तुम यहाँ हो, यही तो घबराने की सबसे

बड़ी वजह है!"

डॉक्टर टाँके लगाने लगी तो डॉली की मुट्ठी राज की बाजुओं पर कस गयी, उसने दर्द बर्दाश्त करने के लिये अपनी आंखे मींच ली थी, और निचले होठ भी दांतो में दबा लिये! राज ने उसकी घबराहट देखते हुए अचानक उसे सीने से लगा लिया तो डॉली की पलकें एकदम से खुल गयी और सीने में दिल जोर जोर से धड़क उठा! साँसे तेज चलने लगी!! राज से उठती मर्दाना परफ्यूम की महक उसके दिमाग पर छाने लगी तो वह उससे अलग होकर गहरी सांस भरते हुए बोली, " पानी!!"

राज उठकर पानी लेने गया तो डॉली ने राहत की सांस ली और खुद को संयत करते हुए मन ही मन बोली, " शांत रह डॉली ! ऐसे तो घबराहट में तू सब गड़बड़ कर देगी, उसे मौका मिल जाएगा!! इतना फर्क क्यों पड़ रहा है, ये अलग सा अहसास क्यों हो रहा है? कौन सा पहली बार उसके गले लगी है.....?"

राज ने उसे पानी दिया तो घबराहट में डॉली ने गिलास के साथ उस का हाथ भी पकड़ लिया, हाथ पर हाथ पड़ते ही वह अपना हाथ खींचने को हुई तो गिलास गिरते गिरते बचा!

" रहने दीजिए! मैं पिला देता हूँ अपने हाथों से!" राज ने

कहा और गिलास उसके होठो से लगा दिया।

जस्सी तभी धड़धड़ाते हुए अंदर आयी, "क्या हुआ डॉली...? ठीक है न तू....? च्च च्च च्च च्च!! कमबख्त कितनी चोट आई है...? समीर ने बताया तो मैं दौड़ी चली आयी।" वह टाँके देखते हुए बोली, फिर राज पर ध्यान गया तो बोली, " मुझे नही पता था कि आप अंदर ही हैं, मैं बाद में आती हूँ फिर!"

राज खड़े होते हुए बोला, " नही, ठीक है! आप रुकिए, मैं जाता हूँ!"

डॉली ने अपने गले लगी जस्सी को थामते हुए मन ही मन कहा, " थैंक यू जस्सी बचा लिया तूने! मैं कितना ऑकवर्ड फील कर रही थी आज उसके सामने....! लड़ाई ही आसान है, ये प्यार बड़ी मुश्किल चीज है! सामना नहीं कर पा रही उसका....!!"

तभी जस्सी अलग होकर उसके सिर पर हल्के से मारते हुए बोली, " मन तो कर रहा है कसकर मुक्का बजाऊं तेरे , मतलब ढंग से गाड़ी चलाने नही आती तो रेसर बनने क्यों निकली थी? माइकल शूमाकर समझा है खुद को...?? मेरी तो जान ही निकल गयी थी जब समीर ने बताया तो!!"

" ठीक हूँ!"

" ठीक है क्योंकि चोट लगी है, वरना तो तेरे मैं बजाती सो बजाती, राज शर्मा भी नही छोड़ता तुझे....!!"

" रहने दे , उसने तो फौरन सीने से लगा लिया था!"

" ओह्हो...!! तो बात यहाँ पहुँची है..?"

" चुप! शांति से बात कर , डॉक्टर हाथ धोकर आ ही रही होगी!"

जस्सी उसके गाल चूमते हुए बोली, "हाय!! मैं सदके जावां...!! तभी मेरी गोलू मोलू डॉली सेब बनी हुई है शरमाकर!!"

" बहुत ही अजीब लग रहा है यार! मैं तेरे साथ घर भाग चलती कुछ दिनों के लिये!! लेकिन वो जाने नही देगा और मैं उसके सामने आने में बहुत बेचैनी महसूस कर रही हूँ! पता नही क्या हो गया है...?"

"प्यार हो गया है जानेमन...!" जस्सी ने उसके गाल खींचकर

कहा तो डॉली उसे झिड़कते हुए बोली, " जानेमन मत बोल मुझे!"

" क्यों ? वो बोलता है क्या...?" जस्सी ने फुसफुसाकर पूछा तो डॉली के चेहरे पर शोख चटख रंग उभर आया।
 
उधर राज बाहर निकलकर मन ही मन बोला, " उल्कापिंड शरमा रही है, सीरियसली...!! वो शरमा रही है मुझसे!! गाल कैसे कश्मीरी सेब हो गए है! सीने पर साँसे कितनी तेज महसूस हो रही थी....? जैसे उसके दिल में धड़कनों ने हाहाकार मचाया हुआ हो! वो विचलित हो रही थी, इसलिए प्यास महसूस हो रही थी, उफ्फ!! कितना अलग अहसास है ये...? कितना खूबसूरत......? प्यार बहुत खूबसूरत चीज है!!"

दादी नीचे शोर और हलचल सुनकर कमरे से बाहर आ गयी, डॉक्टर अब निकल रहे थे! वह नीचे आते हुए बोली, " राज ! ठीक हो न, डॉक्टर क्यों आये थे?"

"डॉली को चोट आई है।" राज ने उनकी तरफ देखते हुए कहा!

सुभद्रा देवी ने नीचे उतरते हुए बोली, " कैसे...? कब..?"

राज जेब मे हाथ डालते हुए बोला, " देख ही रहीं हैं आजकल ड्राइविंग सीखने का नशा छाया हुआ है, मेरे जाते ही निकल गयी मैडम अकेले गाड़ी लेकर, विनाश भी कम

नही है, ये भी गाड़ी में बैठ गया था! अभी सब ठीक है!"

सुभद्रा देवी फौरन डॉली के कमरे में आते हुए बोली, " ये मैं क्या सुन रही हूँ! ऐसी लापरवाही कौन करता है...? लौंग ड्राइव पर जाने का मन ही था तो समीर और जस्सी को साथ ले लिया होता! जान खतरे में डाल ली! हे भगवान कितनी चोट आई है! मैं सिर्फ प्यार ही नही करती, मार भी लगाना जानती हूँ!"

" मेरे रहते आप मेरी बीवी को कैसे मार सकती हैं...?" राज ने अब अंदर आते हुए कहा।

राज की आहट पाते ही जस्सी ने डॉली के पैर को झट से चादर से ढक दिया।

राज दादी के पास आकर खड़ा होते हुए बोला, " ये काम तो मैं खुद करूँगा दादी, अगर आज के बाद ये ऐसे एडवेंचर पर जाती है तो!!"

डॉली ने उसकी तरफ निगाह उठायी तो राज फौरन बोला, " ऐसे क्या घूर रही हैं आप...? बहुत बिगड़ हैं आप मेरे प्यार से पेश आने के कारण!! पर याद दिला दूँ की मैं अब भी वही गुस्सैल राज शर्मा हूँ!!"

डॉली ने प्यार शब्द सुनकर नजर हटा ली और मन ही मन बोली, " इस प्यार शब्द ने तो मेरी लुटिया ही डूबा दी है!"

"होठो में क्या बड़बड़ा रही हैं? तेज बोलिये न!!" राज ने टोक दिया तो दादी बोली, " अच्छा जाने दे! कितनी चोट लगी है उसे, ठीक हो जाएगी तब डांटेंगे दोनो मिलकर!"

" तीनो!! मैं भी हूँ!" जस्सी ने सुभद्रा देवी के पास आते हुए कहा।

समीर विनाश के साथ अंदर आते हुए बोला, "क्या हो रहा है भई? गए डॉक्टर साहब..?"

" हम्म!"

" जाओ विनाश , अब जा सकते हो मम्मा के पास!"

समीर राज के इशारा करने पर विनाश को लिवा ले गया था, वो छोटा था, अपनी मां की गहरी चोट और टाँके लगते देखकर घबरा सकता था।

विनाश जाकर डॉली से लिपट गया, डॉली ने भी उसे

आगोश में भरते हुए उसके बालो को चूमकर जैसे ही निगाह उठायी तो खुद की तरफ देखते राज से निगाह जा मिली! वह हल्का मुस्कुरा रहा था!!"

डॉली ने हड़बड़ा कर नजर हटा ली और मन ही मन बोली, " ये ऐसे अजीब सी नजरो से क्यों देख रहा है? ये गुस्सा बहुत बुरी चीज है, मार ली मैंने खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी!!"

कुछ ही देर बाद पुलिस वाले पूछताछ को आ गए तो राज उनसे बात करने लगा! पता चला कि मिस कपूर की लाश बरामद हो गयी और मिस्टर कपूर ने शिनाख्त भी कर ली है!! उन्होंने डॉली से भी पूछताछ की फिर चले गए।

उधर राज ने कपूर कम्पनी के सारे अकाउंट हैक करवा लिए थे, सॉफ्ट कॉपीज भी करप्ट हो गयी थी! ये सब देखकर मिस्टर कपूर को हार्ट अटैक आ गया!!

राज तक खबर पहुंची तो उसने आगे बढ़कर उनके अंतिम संस्कार के लिए पैसे दिए और मन ही मन बोला, " मुझे बर्बाद करने की कोशिश करने वालो पर मैं कोई दया नही दिखाता!! दुःख हुआ मिस्टर कपूर!!"

शाम ढलने लगी थी, डॉली की तो धड़कने बढ़ने लगी थी। पैर में चोट की वजह से चलना भी मुश्किल था, ऐसे में राज

के रिएक्शन के बारे बारे में सोच सोचकर वो पागल हुई जा रही थी। वो तो वैसे भी बहाने ढूंढ कर बातों में उलझा लेता था, अब क्या करेगा...?"

सब खाना खाने बैठे तो विनाश एकदम से बोला, " दादी !मैं आपके साथ सोऊंगा कुछ दिन!"

" क्यों..?" डॉली फौरन बोली।

राज की भी निगाह उसकी तरफ उठ गई तो विनाश बोला, " ओफ्फो! मां तो बिल्कुल ही बुद्धू है! मैं सोते टाइम आपको बहुत पैर मारता हूँ न तो आपकी चोट पर मेरा पैर लग जाएगा न, इसीलिए मैं आपके ठीक होने तक अलग रह लूँगा, ताकि आप जल्दी जल्दी ठीक हो सके!"

डॉली जल्दी से बोली, " नही!!"

" क्या नही..!!" सुभद्रा देवी ने फौरन झिड़का, " तुमसे समझदार तो बेटा है! कितना ख्याल है तुम्हारा!! मैं तो सोच रही थी कि खाने के बाद उसे समझाऊँगी लेकिन इसने तो खुद ही कह दिया।"

डॉली के रंग उड़े चेहरे को देखकर राज मुस्कुराहट दबाते

हुए खाना खाने लगा तो डॉली उसे मुस्कुराते देखकर और हड़बड़ा गयी, वह पानी पीते हुए मन ही मन बोली, " हाय रे! आज तो मुझ पर ही सारे धूमकेतू गिर रहे है, ग्रहों की दशा खराब है डॉली !! कुछ सोच! विनाश भी न, पता नही क्यों दिमाग लगाता रहता है..?"

डॉली अब जस्सी का हाथ पकड़ते हुए बोली, " हां! जस्सी रूक जाएगी यहाँ! मेरी मदद के लिए!"

सुभद्रा देवी फौरन बोली, " नही! समीर उसे छोड़ आएगा! राज है न, वो करेगा तुम्हारी देख रेख! पति पत्नी सुख दुख के साथी होते है।"

"ओ सत्यानाश, गयी भैंस पानी मे!" डॉली ने मन ही मन कहा और जस्सी की तरफ देखा तो जस्सी ने उसकी तरफ देखकर कन्धे उचका दिए और आँख मारी!! नजर हटाई तो समीर से नजर आ मिली और समीर ने उसे देखकर आँख मारी तो उसके हाथ से पानी का गिलास गिरते गिरते बचा, उसने झट से नजर हटा ली , ये देखकर समीर मुस्कुराने लगा!

डॉली खाना भी नही निगल पा रही थी, तभी उसे धीरे खाते देखकर राज बोला, " मैं खिला दूँ आपको..!"

" हंअं..!! नही..! नही..!! मैं खा रही हूं न, मेरा पेट भर गया है अब!" वह लड़खड़ाती जबान में बोली।

राज उठते हुए बोला, " ठीक है, आइये मैं आपको रूम में छोड़ आऊँ!"

" जस्सी है न! मैं चली जाऊँगी, आप खाइए आराम से, प्लीज!!"

राज ने उसके करीब आते हुए कहा, " पैर पर जोर नही डाल सकती आप!"

डॉली उसके आगे अपना हाथ अड़ाते हुए बोली, " तो ठीक है न , मैं लंगड़ी बहुत खेलती थी पहले, वैसे ही चली जाऊंगी अब भी, कंगारू की तरह उछलती कूदती!"

राज का जी किया की उसके गाल खींच ले लेकिन उसने ऐसा नही किया, अपनी बाँहों में उठाकर कमरे की तरफ बढ़ गया। डॉली ने आज उसके गले मे अपनी बाँह नही फँसाई! राज ने उसे बेड पर रखते हुए कहा, " सो जाईये! मैं आता हूँ!!"

राज बाहर चला आया तो समीर ने उठते हुए जस्सी से कहा, " आइये , आपको छोड़ आऊँ!"

जस्सी खड़े होते हुए बोली, " आती हूँ, आप गाड़ी में बैठो!"

वह झटपट भाग कर डॉली के पास आई और बोली, " ओए! ठीक है न तू..?"

" मैं नही हूँ ठीक, विनाश भी चला गया, तू भी जा रही है! शेर के साथ अकेले छोड़ दिया मुझे!! मैं उसका सामना नही कर पा रही यार, गुस्से में आज मैंने रोड पर सब कह दिया!"

" क्या सब..?"

" वही, जो सब कहते है!"

" आई लव यू कहा तूने उसे?"

" हां, मुँह से निकल गया!"

जस्सी उसे गले से लगाते हुए बोली, " हाय मेरी डॉली! क्या ग़जब कर दिया? अब ठीक है! तू भी उससे प्यार करने लगी, सच्ची, मजा आ गया सुनकर! चल बाए हाँ, मैं भी जा रही हूं

अब! तुम दोनो टाइम बिताओ, मैं बीच मे नही आऊंगी!"

जस्सी चली गयी तो डॉली ने चादर ओढ़ ली और लेट गयी, वह राज के आने से पहले सो जाना चाहती थी।

उधर जस्सी गाड़ी में बैठते ही बोली, " आज डॉली ने राज से इजहार कर दिया! हाय रब्बा! मैं तो बेहद खुश हूँ!!"

" खुशी में कुछ करने का जी नही कर रहा..?" समीर ने पूछा।

" कर रहा है न, मन कर रहा है उसे बाँहों में भरकर चूम लूँ!"

" वो नही तो न सही, अभी तो मैं ही पास हूँ तो......!" समीर ने वाक्य अधूरा छोड़ दिया।

जस्सी ने उसकी बाँह पर कसकर चिकोटी काट दी, औऱ बोली, "बहुत सपने नही देख रहे आजकल आप, बात करते हैं कि पास है...!!"

समीर मुस्कुराते हुए बोला, " अगर साफ शब्दों में इजहार करूँ तो ..?"

" देखिए आप ऐसे बात करेंगे, तो मैं गाड़ी से उतर जाऊँगी!"

" और मैं उतरने दूँगा.. हम्म??"

जस्सी उसे घूरते हुए बोली, " मुझे पाने का प्रोसेस है मिस्टर समीर!! उससे पहले ये कुड़ी हाथ नही आने वाली, समझे!"

" ये मुंडा इतना बिगड़ा भी नही है, मजाक कर लेता है लेकिन प्रोसेस का पालन करके ही आपको अपना बनाएगा!"

जस्सी खिड़की की तरफ मुँह करके मुस्कुराने लगीं तो समीर बोला, " अब प्रोसेस का इतना भी क्या बंधन की मुस्कुराहट देखने का भी हक़ नही मुझे!"

जस्सी ने बिना चेहरा घुमाए हाथ बढ़ाकर अपना हाथ समीर के उस हाथ पर रख दिया जो गियर पर था, अब समीर भी मुस्कुरा दिया।
 
इधर डॉली को पहली बार कमरे में इस तरह राज के साथ अकेले रहना था!! उसका पूरा बदन थरथरा रहा था, धड़कने हथौड़े सी चल रही थी और हाथ पैर ठंडे पड़ गए थे

लेकिन फिर धीरे धीरे अहसासों पर दवा की हैवी डोज भारी पड़ने लगी और वो न चाहते हुए भी नींद की आगोश में चली गयी।

राज डॉली की सादगी भरी बातें याद कर बाहर खड़ा मुस्कुरा रहा था, दिल की गहराईयो से उससे हर पल ज्यादा और ज्यादा मोहब्बत हुई जा रही थी! वह सच मे किसी मासूम लड़की जैसी थी, प्यार के मामले में बिल्कुल अनुभवहीन और आज उसका घबराना शरमाना तो जैसे राज को मजबूर कर रहा था कि अपने बीच की सारी हदें तोड़ दे और अपने होठो से उसके होठो पर एक चाहत भरी छुअन का अहसास छोड़ दे!! मन पिघल रहा था, प्यासे दिल को आज जो पानी की बूंद मिली थी उसके बाद तपते मन को राहत तो मिली थी लेकिन साथ ही उसको महसूस करने की चाहत भी बढ़ गयी थी, वो शरमाये और सिमटे तो बाँहो में लेने की चाहत, थोड़ा थोड़ा प्यार जताने की चाहत!

डॉली का पहली बार का नजर मिलाना औऱ नजर चुराना ही तो था जिसने राज को उसका दीवाना बना दिया था, औऱ अब वो फिर यही तो कर रही थी ऐसे में राज का खुद को रोकना मुश्किल हो रहा था! दिल मे तूफान उठा रहा था, उसका यूँ आंखे मिलाना औऱ नजरे चुराना! उसका इजहार जैसे दबी चिंगारी को भड़का गया था, राज ने गहरी साँस भरकर खुद को शांत किया और कमरे के अंदर बढ़ गया।

निश्चिंत सोई हुई डॉली को देखा तो उसे ढंग से ढक दिया और गाल पर उड़ती लट को देखने लगा! फिर धीरे से हाथ बढ़ाया और उसकी लट को हटाते हुए उसे निहारने लगा! न जाने वह दर्द की वजह से ही या फिर उसकी करीबी को नींद में महसूस करके नींद में कुनमुनाई तो राज सीधा लेट गया और आंखे बंद कर ली।

रात में डॉली की नींद उचट गयी और करवट लेटे होने की वजह से आँख खुलते ही बन्द दरवाजे पर नजर गयी तो फिर से सारे अहसासों ने आ घेरा, वह झट से पलटी और दूसरी ओर देखा तो साथ मे लेटा हुआ राज नजर आया। डॉली फौरन वापस सीधी हो गयी और धड़कने तेज तेज चलने लगी।

उसने टाइम देखने के लिए मोबाइल उठाना चाहा लेकिन हड़बड़ाहट के कारण मोबाइल गिर गया तो डॉली ने ये सोचकर अपनी आंखें मींच ली की कहीं ये जग न जाये??

पर हुआ वही, राज ने करवट लेकर उसकी ओर चेहरा कर लिया, डॉली जाग रही थी लेकिन चुपचाप लेटी रही, वह चाहती थी कि राज उसे सोया हुआ जान ले! लेकिन राज के साथ बन्द कमरे में अकेले होने के कारण उसके करवट लेने को हिलते ही डॉली की मुट्ठी कस गयी और

धड़कने थमती हुई सी लगी, वो जल्दी जल्दी साँस लेने लगी!

राज कुछ देर शांत रहा पर ये मुमकिन कहाँ था, वो उसकी तरफ देखते हुए बोला, " कोई परेशानी है..?"

"नही!!" डॉली ने बिना करवट लिए ही कहा।

" तो साँसे इतनी तेज क्यों चल रही है?"

डॉली के गाल पर फिर से लाली दौड़ गयी और वो सीधी होते हुए बोली, " कुछ नही!! बस मुँह सूख रहा है, पानी पी लेती हूं।"

उसने उठना चाहा लेकिन राज ने उसके हाथ को पकड़ लिया और बोला, " हाथ कितने ठंडे हो रहे हैं...? इतनी ठंड , दिसम्बर का आखिरी हफ्ता है, और फिर भी आपका मुँह सूख रहा है!! स्ट्रेंज!!"

डॉली ने उसके हाथ से अपना हाथ खींचना चाहा और बोली, " कुछ नही है, शॉल लपेट लेती हूं, तुरंत ठीक हो जाएंगे।"

राज ने उसका हाथ छोड़े बिना ही उसके चेहरे पर निगाह

दौड़ाते हुए कहा, " ऐसा है क्या..?"

" हां , ऐसा ही है!" डॉली ने फिर अपना हाथ खींचते हुए कहा।

" हम्म, तो बस इतना की अपने अहसास, अपनी चाहतों को भी इसी तरह गुस्से के शॉल में लपेट लिया करती हो न!! वो सब अहसास जज्बातों की गर्माहट लिए अंदर कहीं सुलगते नही रहते??"

" नही...!! आपकी बाते मेरी समझ मे नही आ रही!"

" क्यों? दिमाग कहाँ है..?"

" यही है, मैं कुछ सोच ही नही रही!!"

" मैंने कब कहा कि कुछ सोच रही हैं आप..?"

" देखिए! मुझे......"

" देख ही रहा हूँ, बहुत खूबसूरत लग रही हो आज शरमाते हुए!" वह उसकी बात काटते हुए बोला।

डॉली इधर उधर देखते हुए बोली, " मैं पैर की वजह से परेशान हूँ.., वरना..!"

" वरना क्या...?" राज ने उसके चेहरे पर निगाह जमाते हुए कहा, " जो कुछ आपने किया है उसके बाद आपको क्यों लगता है की आपको आपकी हरकत के लिए सजा नही मिलेगी..? और आपको कोई एडवांटेज लेने दिया जाएगा!!"

" हां तो ठीक है, दीजिये सजा! मार लीजिये दो चार थप्पड़..! लेकिन बता दूँ की गलती आपकी ही थी, सब आपकी वजह से हुआ है! न आप मुझे नजरअंदाज करते, न मैं परेशान होती और न ही मेरा एक्सीडेंट होता!!"

" ऐसा है क्या?"

" जी हाँ!"

" तो बस इतना कि आप खुलकर कह देती की आपको नजरअंदाज न करूं! प्यार से नजरो में रखूं! कहा होता कि बेरुखी बर्दाश्त नही होती, प्यार किया कीजिये।"

" आप!! आप न..! मुझे उलझाने की कोशिश मत कीजिये!"

" आप खुद उलझती हैं , मैं तो बस बात करता हूँ।" राज ने उसे गहरी निग़ाहों से देखते हुए कहा।

" मुझे ऐसे मत देखिए!!" कहते हुए डॉली ने करवट लेना चाहा लेकिन राज ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, " कैसे न देखूँ!!"

" ऐसे ही!!"

" नजरअंदाज करो तो दिक्कत, नजर रखूं तो भी परेशानी! और किसने कहा कि मैं भी आपकी तरह थप्पड़ मुक्के बजाकर सजा दूँगा...? मैं अपने तरीके से सजा दूँगा!!"

उसकी बात सुनकर डॉली की धड़कने बढ़ गयी, उसको खुद की तरफ सरकते देखकर वह बोली, " पास क्यों आ रहे हैं आप, पीछे हटिये।"

राज ने उससे निगाह मिलाते हुए कहा, " आप मेरी अपनी है, और अपनो के करीब रहा जाता है, न की दूर!!"

" यार इसके पास हर बात का ऐसा सटीक जवाब क्यों होता है...?" डॉली नजर हटाते हुए मन ही मन बोली और उससे

दूर खिसकते हुए बोली, " मेरा मुँह सूख रहा है, मैं पानी...!"

राज ने उसके उठने से पहले ही उठकर उस पर झुकते हुए उसकी बाँहों को पकड़ लिया और बोला, " पानी ही जरूरी तो नही! जो कुछ सोचकर आपका मुँह सूख रहा है , इतनी हैवी दवा के बावजूद नींद तक उचट गयी, और साँसे तेज हो गयी है अगर वो पूरा नही किया तो राज शर्मा कैसा....? "

उसके बोलने का अंदाज देखकर डॉली का दिल धक धक कर उठा लेकिन राज के उसके होठ पर अपने होठ रखने से पहले ही उसने आँख मींचते हुए झट से चेहरा फेर लिया तो उसका गाल राज के सामने आ गया, राज रुक गया!!

वह इतना करीब था की उसकी गर्म साँसे डॉली के गालों से टकरा रही थी, डॉली के चेहरे पर खून की लहर दौड़ गयी, जब राज पीछे नही हुआ तो उसने शरम और घबराहट से उठने की कोशिश की लेकिन राज ने उसके कंधे नही छोड़े और झुककर उसके गाल को चूमते हुए कानो से होठ सटाते हुए बोला, " आज आपके होंठ से ज्यादा खूबसूरत आपके गुलाबी गाल ही लग रहे है! कहा था न आपके गाल गुलाबी न कर दिए तो मेरा नाम राज शर्मा नही!!"

डॉली के दिल मे हलचल सी हो उठी और उसने राज के छोड़ते ही करवट फेरते हुए कहा, " प्लीज!! मैं..."

" श्शश्श...!!" कहते हुए राज ने करीब आकर उसके होठ पर अपनी अंगुली रख दी तो डॉली की जैसे साँस ही रुक गयी!

" गुड नाइट!!" कहते हुए डॉली ने झट से राज का हाथ हटा दिया और चादर खींचकर अपने मुंह को ढक लिया।

" गुड नाइट! सुबह के पांच बज रहे हैं!" राज ने अपनी तकिया पर लेटते हुए कहा।
 

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