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राज के कमरे में आते ही डॉली ने दरवाजा बंद कर दिया और उसके सीने पर अपने दोनो हाथ मारते हुए बोली, " समझते क्या हैं खुद को आप? हद होती है किसी चीज की...? हर चीज अपनी मर्जी के हिसाब से कैसे कर सकते हैं? मैं कठपुतली नजर आती हूँ..??"
राज पीछे हटता जा रहा था और डॉली सवाल पर सवाल करते हुए उसे धक्का देते जा रही थी! वह बिस्तर पर बैठ गया तो भी डॉली उस पर झुकते हुए चीखने लगी, " विनाश तो बच्चा है, लेकिन आप! आपने भी सबके सामने मुझे शर्मिंदा करके रख दिया! मैं नही रह सकती आपके बिना...?? मैं...??"
राज उसे खुद पर झुकते देखकर पीछे की तरफ सरका तो डॉली भी बेड पर चढ़कर घुटनो के बल खड़ी होकर उस पर भड़कते हुए बोली, " मैं तो समझ नही पा रही हूं कि आपको हुआ क्या है..? क्यों मुझे घर नही जाने देते...? या फिर समझ रही हूँ, मुझ पर अपनी सोच लादने की हिम्मत भी कैसे हुई? खुद दूर नही रह सकते हो, खुद का दिल मचलता है तो इल्जाम मेरे सिर क्यों? बेशर्म हो तो बनो बेशर्म सबके सामने, मुझे बेशर्म साबित मत करो!! शादी की नही की बेचैनी छा गयी है!"
राज ने अब गुस्से से उसकी बाँह पकड़ते हुए बिस्तर पर पटक दिया और खुद ऊपर होते हुए बोला, "बस!! नही बोलने का मतलब ये नही की आप लिमिट क्रॉस करेंगी!"
" लिमिट तो अभी मैने क्रॉस की ही नही राज शर्मा !! लिमिट तो आप क्रॉस कर रहे हैं.....!! औऱ ये तो सोचना मत की शादी कर ली है तो मनमानी कर लोगे!!" डॉली ने उसकी निग़ाहों में देखते हुए गुस्से से कहा!
राज भी कुछ पल उसकी निग़ाहों में देखता रहा तो डॉली ने नाराजगी से नजर हटा ली, राज उसके चेहरे पर भरपूर नजर डालते हुए बोला, "ऐसा है क्या?"
" हां ऐसा ही है!" डॉली ने दोबारा उसकी आँखों मे देखते हुए जवाब दिया।
राज उसे छोड़कर हटते हुए बोला, " तो बस इतना की मनमानी ही करनी होती तो शादी नही करता!! बहुत साधन है मेरे पास किसी को भी पा लेने के लिए!"
डॉली भी उठ गई औऱ बोली, " होंगे! मैं किसी साधन के लालच में आने वालों में से नही हूँ! विनाश न होता तो आज मैं आपके कमरे में न होती!"
राज ने उसकी बाँह पकड़कर झटके से खुद की तरफ घुमाते हुए गम्भीरता से कहा," विनाश है तो भी आप यहाँ हो, विनाश नही होता तो भी आप यहीं होती!"
डॉली ने भी उसकी गिरेबान पकड़ते हुए कहा, " मुझ पर जोर आजमाने की कोशिश मत करना! वॉश सिर पर दे मारूँगी, समझे!! तुम्हारे लिए ये सब सजावट का सामान है लेकिन मेरे लिए हथियार!!"
राज ने अपना गिरेबान छुड़ाने के लिए उसका हाथ जरा जोर से दबाते हुए कहा, " अब जरा इज्जत से पेश आइए, क्या कहा था कुछ देर पहले आपने, पति हूँ मैं आपका।"
डॉली ने भी हाथ दबते ही दर्द होने पर उसे वापस बेड पर धक्का दे दिया और सम्भलने से पहले ही पैर में काट लिया तो राज उठकर बैठ गया फिर उसे खुद के करीब खींचते हुए बोला, " गिन गिन कर बदले लेने पर आ गया तो सह नही पाएंगी! लड़की जानकर छोड़ देता हूँ वरना काटने की आदत तो मेरी भी पुरानी है!" कहते हुए राज ने अचानक मुँह फेरती डॉली के गाल को चूम कर छोड़ दिया तो डॉली का रोम रोम फूट पड़ा और चेहरा लाल हो गया!
वह राज को मारने के लिए ताबड़ तोड़ हाथ चलाने लगी तो राज हाथ पकड़ने की कोशिश करते हुए बोला, " मार क्यों रही हैं आप..? बदला ले लीजिए, मैं बुरा नही मानूँगा!!"
डॉली हाथ छुड़ाते हुए दूसरी तरफ मुड़कर बोली, "अभी के अभी कमरे से बाहर जाईये!"
" क्यों..? शरमा रही हो क्या..?" राज ने उसका चेहरा देखने के लिए गर्दन टेढ़ी करते हुए कहा।
" इरिटेट मत कीजिये मुझे! कह रही हूं न जाइये!" वह झल्लाकर चिढ़ते हुए बोली!
राज मुस्कुराते हुए कमरे से बाहर निकल गया तो डॉली ने
दरवाजा अंदर से बन्द कर लिया! शरम तो आ ही रही थी लेकिन जाने क्यों गुस्सा और रोना भी आ रहा था! उसने राज के कपडे जान बूझकर गड्ड मड्ड कर दिए! और समान भी निकालकर इधर उधर फेंक दिया, वह अपने एक कपड़े को रखते हुए बोली, " समझ क्यों नही आता मिस्टर शर्मा को..? मैं नही आने देना चाहती उन्हें अपने दिल मे! एक बार फिर मुझे चोट नही खानी!! जितना दूर जाना चाह रही हूं उतना ही पास क्यों आ रहे हैं फिर? क्यों मेरी जान लेने पर तुले हैं! बेफिक्र, बेपरवाह हूँ तो क्यों मुझे कैद करना चाहते हैं खुद के प्यार में...? क्यों बांधना चाहते हैं खुद के एहसासों से? मैं नही चाहती कुछ भी , कोई अहसास महसूस नही करना मुझे, नही पाना है आपको....! मत कीजिये ये सब!!"
राज उसका शरमाया हुआ लाल चेहरा याद करके मन ही मन मुस्कुराए जा रहा था, " तुम्हारा हाथ थामना भी नस नस में जादू भरता है, फिर तुम्हे किस करना तो समझो बस धड़कनों पर अत्याचार ही है! चेहरे पर यही सिंदूरी आभा तो देखना चाहता था जो आज नजर आयी! क्यों छिपाती हो दिल की हलचल को गुस्से के पीछे, भींगती क्यों नही मेरे एहसासों की लहरों मे? कहाँ सोचा था कि कभी किसी को इस कदर चाहने लगूँगा? पर जाने तुम में क्या है कि तुम्हारे सामने आने पर मैं मैं नही रह पाता, सारी सख्ती भूल जाता हूँ और एक आशिक बन जाता हूँ! जब से तुम आयी तब से
अहसास बदलने लगे थे शायद यही वजह थी कि मुझे तुम पर हर वक़्त गुस्सा आता था, सब कुछ अहसासों से बचने की एक कोशिश ही तो थी! जैसे अब तुम कर रही हो, अहसासों से भागने की कोशिश, सब कुछ दरकिनार करके कह क्यों नही देती की अहसास बस तुमसे!!"
डॉली मुँह धोकर बाहर आई लेकिन फिर भी जस्सी पहचान गयी कि वो रोई है! वह धीरे से कान में बोली, " ओए होए!! इतना प्यार!! मतलब एक दिन भी नही रुकेगी वहाँ , रात तक आ ही जाएगी फिर भी रो ली! राज शर्मा से कुछ घण्टो की दूरी भी नही सही जा रही!!"
"जस्सी! मैं वहाँ रुक नही पाऊंगी इसलिए रो रही हूँ!"
" रहने दे हां रहने दे, ये गुलाबी गुलाबी गाल और राज शर्मा से नजरें चुराना तो कुछ और ही बयाँ कर रहा है!"
" जस्सी! थप्पड़ मारूँगी अब , बता रही हूँ!"
" अच्छा ठीक है अब नही छेड़ूँगी!" जस्सी ने गले मे बाँह फँसाते हुए कहा तभी समीर पीछे से गुजरते हुए बोला, " ये दिन मेरी जिंदगी में कब आएगा?"
जस्सी उस ओर देखती रह गयी लेकिन समीर ने पलटकर नही देखा!
राज की नजर भी डॉली पर थी और उसका चेहरा देखकर राज के माथे पर बल पड़ गए थे!
डॉली विनाश के साथ उसके बगल से निकलने लगी तो राज पीछे से बोला, " आज मुझे कुछ जरूरी काम है, तो कल लेने आऊँगा आप दोनो को!"
डॉली ने कुछ नही कहा, चुपचाप गाड़ी में जाकर बैठ गयी!
राज ने विनाश को प्यार से चूमा तो विनाश ने भी उसे किस करते हुए कहा, " बाय पापा!"
" बाय!!"
" मम्मा को भी!!" विनाश कुछ कहने को हुआ तो राज उसके मुंह पर अंगुली रखते हुए धीरे से बोला, " शशश! बाय बोल दिया है मैंने उन्हें!"
विनाश मुस्कुरा उठा और गाड़ी में जा बैठा!!
राज पीछे हटता जा रहा था और डॉली सवाल पर सवाल करते हुए उसे धक्का देते जा रही थी! वह बिस्तर पर बैठ गया तो भी डॉली उस पर झुकते हुए चीखने लगी, " विनाश तो बच्चा है, लेकिन आप! आपने भी सबके सामने मुझे शर्मिंदा करके रख दिया! मैं नही रह सकती आपके बिना...?? मैं...??"
राज उसे खुद पर झुकते देखकर पीछे की तरफ सरका तो डॉली भी बेड पर चढ़कर घुटनो के बल खड़ी होकर उस पर भड़कते हुए बोली, " मैं तो समझ नही पा रही हूं कि आपको हुआ क्या है..? क्यों मुझे घर नही जाने देते...? या फिर समझ रही हूँ, मुझ पर अपनी सोच लादने की हिम्मत भी कैसे हुई? खुद दूर नही रह सकते हो, खुद का दिल मचलता है तो इल्जाम मेरे सिर क्यों? बेशर्म हो तो बनो बेशर्म सबके सामने, मुझे बेशर्म साबित मत करो!! शादी की नही की बेचैनी छा गयी है!"
राज ने अब गुस्से से उसकी बाँह पकड़ते हुए बिस्तर पर पटक दिया और खुद ऊपर होते हुए बोला, "बस!! नही बोलने का मतलब ये नही की आप लिमिट क्रॉस करेंगी!"
" लिमिट तो अभी मैने क्रॉस की ही नही राज शर्मा !! लिमिट तो आप क्रॉस कर रहे हैं.....!! औऱ ये तो सोचना मत की शादी कर ली है तो मनमानी कर लोगे!!" डॉली ने उसकी निग़ाहों में देखते हुए गुस्से से कहा!
राज भी कुछ पल उसकी निग़ाहों में देखता रहा तो डॉली ने नाराजगी से नजर हटा ली, राज उसके चेहरे पर भरपूर नजर डालते हुए बोला, "ऐसा है क्या?"
" हां ऐसा ही है!" डॉली ने दोबारा उसकी आँखों मे देखते हुए जवाब दिया।
राज उसे छोड़कर हटते हुए बोला, " तो बस इतना की मनमानी ही करनी होती तो शादी नही करता!! बहुत साधन है मेरे पास किसी को भी पा लेने के लिए!"
डॉली भी उठ गई औऱ बोली, " होंगे! मैं किसी साधन के लालच में आने वालों में से नही हूँ! विनाश न होता तो आज मैं आपके कमरे में न होती!"
राज ने उसकी बाँह पकड़कर झटके से खुद की तरफ घुमाते हुए गम्भीरता से कहा," विनाश है तो भी आप यहाँ हो, विनाश नही होता तो भी आप यहीं होती!"
डॉली ने भी उसकी गिरेबान पकड़ते हुए कहा, " मुझ पर जोर आजमाने की कोशिश मत करना! वॉश सिर पर दे मारूँगी, समझे!! तुम्हारे लिए ये सब सजावट का सामान है लेकिन मेरे लिए हथियार!!"
राज ने अपना गिरेबान छुड़ाने के लिए उसका हाथ जरा जोर से दबाते हुए कहा, " अब जरा इज्जत से पेश आइए, क्या कहा था कुछ देर पहले आपने, पति हूँ मैं आपका।"
डॉली ने भी हाथ दबते ही दर्द होने पर उसे वापस बेड पर धक्का दे दिया और सम्भलने से पहले ही पैर में काट लिया तो राज उठकर बैठ गया फिर उसे खुद के करीब खींचते हुए बोला, " गिन गिन कर बदले लेने पर आ गया तो सह नही पाएंगी! लड़की जानकर छोड़ देता हूँ वरना काटने की आदत तो मेरी भी पुरानी है!" कहते हुए राज ने अचानक मुँह फेरती डॉली के गाल को चूम कर छोड़ दिया तो डॉली का रोम रोम फूट पड़ा और चेहरा लाल हो गया!
वह राज को मारने के लिए ताबड़ तोड़ हाथ चलाने लगी तो राज हाथ पकड़ने की कोशिश करते हुए बोला, " मार क्यों रही हैं आप..? बदला ले लीजिए, मैं बुरा नही मानूँगा!!"
डॉली हाथ छुड़ाते हुए दूसरी तरफ मुड़कर बोली, "अभी के अभी कमरे से बाहर जाईये!"
" क्यों..? शरमा रही हो क्या..?" राज ने उसका चेहरा देखने के लिए गर्दन टेढ़ी करते हुए कहा।
" इरिटेट मत कीजिये मुझे! कह रही हूं न जाइये!" वह झल्लाकर चिढ़ते हुए बोली!
राज मुस्कुराते हुए कमरे से बाहर निकल गया तो डॉली ने
दरवाजा अंदर से बन्द कर लिया! शरम तो आ ही रही थी लेकिन जाने क्यों गुस्सा और रोना भी आ रहा था! उसने राज के कपडे जान बूझकर गड्ड मड्ड कर दिए! और समान भी निकालकर इधर उधर फेंक दिया, वह अपने एक कपड़े को रखते हुए बोली, " समझ क्यों नही आता मिस्टर शर्मा को..? मैं नही आने देना चाहती उन्हें अपने दिल मे! एक बार फिर मुझे चोट नही खानी!! जितना दूर जाना चाह रही हूं उतना ही पास क्यों आ रहे हैं फिर? क्यों मेरी जान लेने पर तुले हैं! बेफिक्र, बेपरवाह हूँ तो क्यों मुझे कैद करना चाहते हैं खुद के प्यार में...? क्यों बांधना चाहते हैं खुद के एहसासों से? मैं नही चाहती कुछ भी , कोई अहसास महसूस नही करना मुझे, नही पाना है आपको....! मत कीजिये ये सब!!"
राज उसका शरमाया हुआ लाल चेहरा याद करके मन ही मन मुस्कुराए जा रहा था, " तुम्हारा हाथ थामना भी नस नस में जादू भरता है, फिर तुम्हे किस करना तो समझो बस धड़कनों पर अत्याचार ही है! चेहरे पर यही सिंदूरी आभा तो देखना चाहता था जो आज नजर आयी! क्यों छिपाती हो दिल की हलचल को गुस्से के पीछे, भींगती क्यों नही मेरे एहसासों की लहरों मे? कहाँ सोचा था कि कभी किसी को इस कदर चाहने लगूँगा? पर जाने तुम में क्या है कि तुम्हारे सामने आने पर मैं मैं नही रह पाता, सारी सख्ती भूल जाता हूँ और एक आशिक बन जाता हूँ! जब से तुम आयी तब से
अहसास बदलने लगे थे शायद यही वजह थी कि मुझे तुम पर हर वक़्त गुस्सा आता था, सब कुछ अहसासों से बचने की एक कोशिश ही तो थी! जैसे अब तुम कर रही हो, अहसासों से भागने की कोशिश, सब कुछ दरकिनार करके कह क्यों नही देती की अहसास बस तुमसे!!"
डॉली मुँह धोकर बाहर आई लेकिन फिर भी जस्सी पहचान गयी कि वो रोई है! वह धीरे से कान में बोली, " ओए होए!! इतना प्यार!! मतलब एक दिन भी नही रुकेगी वहाँ , रात तक आ ही जाएगी फिर भी रो ली! राज शर्मा से कुछ घण्टो की दूरी भी नही सही जा रही!!"
"जस्सी! मैं वहाँ रुक नही पाऊंगी इसलिए रो रही हूँ!"
" रहने दे हां रहने दे, ये गुलाबी गुलाबी गाल और राज शर्मा से नजरें चुराना तो कुछ और ही बयाँ कर रहा है!"
" जस्सी! थप्पड़ मारूँगी अब , बता रही हूँ!"
" अच्छा ठीक है अब नही छेड़ूँगी!" जस्सी ने गले मे बाँह फँसाते हुए कहा तभी समीर पीछे से गुजरते हुए बोला, " ये दिन मेरी जिंदगी में कब आएगा?"
जस्सी उस ओर देखती रह गयी लेकिन समीर ने पलटकर नही देखा!
राज की नजर भी डॉली पर थी और उसका चेहरा देखकर राज के माथे पर बल पड़ गए थे!
डॉली विनाश के साथ उसके बगल से निकलने लगी तो राज पीछे से बोला, " आज मुझे कुछ जरूरी काम है, तो कल लेने आऊँगा आप दोनो को!"
डॉली ने कुछ नही कहा, चुपचाप गाड़ी में जाकर बैठ गयी!
राज ने विनाश को प्यार से चूमा तो विनाश ने भी उसे किस करते हुए कहा, " बाय पापा!"
" बाय!!"
" मम्मा को भी!!" विनाश कुछ कहने को हुआ तो राज उसके मुंह पर अंगुली रखते हुए धीरे से बोला, " शशश! बाय बोल दिया है मैंने उन्हें!"
विनाश मुस्कुरा उठा और गाड़ी में जा बैठा!!