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जब रूपा ने माँ से रेखा और राज की बात की तो रेखा को वापस "हम आपके हैं कौन "वाले दिन याद आ गये और आज के ज़माने की लैला ने अपने सपनों को नई दिशा में मोड़ लिया . पर बेचारी अपनी सपनों की ज़मीन पे राज के प्यार की फसल बो पाती उसके पहले ही 3 दिन से वैराग्य धारण किये रोहित का उबलता खनकता हुआ मेसेज आ गया .
माँ किसी काम से बुला रही है,बोलकर किसी तरह रेखा ने जान बचाई और इसी सोच में डूब गई कि आगे रोहित को क्या और कैसे बोलना है,ऐसा नही था कि उसे रोहित पसंद ,
नही था,या उसे राज अधिक पसंद था,,असल मे उसे इन दोनो से कही ज्यादा पसंद था शादी का उत्सव उत्साह!!
उसे भी बाकी लडकियों की तरह 3महीने का bridal course करना था,हर मौके के लिये अलग अलग थीम में सजे लहन्गे लेने थे,खूब सारे जेवर लेने थे,कपड़े लेने थे,इतनी महत्वपूर्ण विमर्श वाली चीज़ों के मध्य कोई इनसे कमतर (दूल्हा) के बारे में सोच के क्यों मगजमारी करे।।
इसिलिए अपने मन को समझा कर रेखा अब रोहित को समझाने की तैय्यारी करने लगी।।
राज भैय्या के जिम में उन्होनें पहले महिलाओं और पुरूषों के लिये अलग अलग समय रखा था,परन्तु उनके चेले चपाडों का उन्हे वक्त बेक़क्त घेरे रहना उस मे दिक्कत डालने लगा था इसिलिए सारा कॉमन समय कर दिया,फिर भी अधिकतर घरेलू महिलायें,कॉलेज जाने वाली लड़कियाँ 9बजे के बाद जब घर के पुरूष ऑफिस और बच्चे स्कूल निकल जाते तभी आती,।।
भैय्या जी ने सारी समय सारिणी प्रिया को बता दी,,अभी कुछ दिनों के लिये कॉलेज की छुट्टियां होने से प्रिया ने भी 9बजे का टाईम स्लॉट चुन लिया।।
भैय्या जी ने जिम में पहनने योग्य कपडों के बारे में उसे उतनी ही जानकारी दी जितनी ना भी देते तो काम चल जाता ।।
पहले दिन एक हाथ में पानी की बड़ी सी बोतल थामे प्रिया ठीक 9 बजे जिम पहुंच गई ।।
उस समय तक एक भी लड़की नही आई थी,पर हाँ मोहल्ले के जाने किस किस कोने से निकल के अर्नोल्ड श्वाज़नेगर के बाप वहाँ आये हुए थे।।कोई पूरी तल्लीनता से
डम्बल कर रहा था,कोई पुश अप्स, कोई बाइसेप्स पे भिड़ा था तो कोई चेस्ट पे काम कर रहा था,,ऐसा लग रहा था अगले मिस्टर इंडिया की तैय्यारी यही लोग कर रहे ,और इन्ही मे से कोई एक मिस्टर इंडिया बनने वाला है।।
"अरे आ गई तुम,बड़ी समय की पाबंद हो,अच्छा है,ये अच्छा की अपना पानी का बोतल भी लाई हो।" भैय्या जी ने आगे बढ़ कर प्रिया का स्वागत किया
"पानी नई ग्लूकोस का बोतल है,हमे लगा पहली बार मेहनत का काम करेंगे ,कहीं चक्कर वक्कर आ गया तो।"
"ठीक बोल रही हो,कमजोर भी तो हो।"लल्लन ऐसे बोल के हंसने लगा,,भैय्या जी ने घूर के उसे देखा और प्रिया को एक ट्रेड मिल पे ले गये,तभी दरवाजा खुला और एक आंटी जी ने अन्दर झाँका
"पुडुषो का भी एही टाईम है क्या??"
"क्या बोल रही हो आंटी??"प्रिन्स ने पूछा
"मैं ए जानना चाहती हूं कि लेडीश लोगों का अलग टाईम है या पुडुषों के साथ ही उनको भी जिम कडणा (करना) है।""
"का बोल रही है यार ये आंटी?"प्रिन्स ने लल्लन से कहा -"अबे चुप रहो तुम ,कलकत्ता की हैं आंटी जी समझे।।"लल्लन ने कहा
,
तब तक भैय्या जी चले आये,-"आईये आईये मैडम ,आज आपका पहला दिन है ,आपको एक फॉर्म भरना पड़ेगा, आपका हाईट और वेट चेक कर के आपका बी एम आई निकाले देते हैं,जिससे पता चले कि आपको कितना वजन कम करना है।"
"अडे बाबा हमको बजन कम नही कडणा ,हम तो इहाँ देखने आया था कि हमाडा हश्बैंड भी घड(घर) से जिम बोलके निकलता है,यहाँ आया है कि धेलू के यहाँ बैठ के रोशोगुल्ला खा रहा है।"
"अरे बाप रे आंटी तो करमचंद निकली यार!!"
राज भैय्या ने उन्हें जाकर प्यार से जाने क्या समझाया अगले दिन से खुद ही जिम आने की कसम खा कर घोष आंटी वहाँ से चलती बनी।।
अब हो चुके थे सवा नौ और धीरे धीरे कर के जिम की रौनक बढ़ने लगी,एक एक कर शहर की दुबली पतली लम्बी गोरी छरहरी वामायें धीरे धीरे दरवाजा खोल खोल कर अन्दर आने लगी,ये वही लड़कियाँ थी जिनके इन्तजार में लड़के पुश अप्स कर कर के अपना सीना फुलाए जा रहे थे . इन लडकियों के अन्दर आते ही जिम का माहौल बदलने लगा था,हर लड़का कुछ अधिक ही जोश में वर्क आउट कर रहा था,और मज़े की बात ये थी कि इंस्ट्रक्टर राज भैय्या के अलावा हर लड़का इंस्ट्रक्टर बना बैठा था,,और ये सब एक दूसरे को नही सिर्फ लडकियों को ही ज्ञान दे रहे थे .
,
आज प्रिया का पहला दिन था,ऐसी पतली छरहरी लडकियों को देख उस बेचारी को समझ ही नही आ रहा था कि ये यहाँ करने क्या आयी हैं,उन में से कुछ का ये हाल था कि अगर ट्रेड मील पे 5मिनट भी दौड़ ले तो उन्हें फिर सीधे स्ट्रेचर पे डाल कर सीधा एम्स रिफर करना पड़ता वो भी एयर लिफ्ट,,कुछ एक जितना तो वर्क आउट नही कर रही थी ,उतना अपने आप को हर एंगल से पलट पलट के आईने में देख रही थी . एक ने तो गज़ब ही कर दिया ,ट्रेड मील में चढ़ने के पहले जाकर अपनी लिपस्टिक डार्क, की,फिर क्रॉस ट्रेनर पे चढ़ने के पहले भी ,फिर साईकल के भी,इस तरह से हर वर्क आउट सेशन के पहले उसका एक टच'प हो जाता .
प्रिया बेचारी को पहला दिन था इसिलिए 5km/hrs की स्पीड पे 20 मिनट चलने का आदेश हुआ था,वो अपनी मशीन पे चलती इधर उधर देखती जा रही थी . कुछ देर बाद एक बड़ा लॉट आंटियों का अन्दर आया,उन्हें देख प्रिया को कुछ तसल्ली हुई क्योंकि भले ही वो अलग अलग साइज़ ऐंड शेप की थी,पर थी सब की सब मोटी।।
माँ किसी काम से बुला रही है,बोलकर किसी तरह रेखा ने जान बचाई और इसी सोच में डूब गई कि आगे रोहित को क्या और कैसे बोलना है,ऐसा नही था कि उसे रोहित पसंद ,
नही था,या उसे राज अधिक पसंद था,,असल मे उसे इन दोनो से कही ज्यादा पसंद था शादी का उत्सव उत्साह!!
उसे भी बाकी लडकियों की तरह 3महीने का bridal course करना था,हर मौके के लिये अलग अलग थीम में सजे लहन्गे लेने थे,खूब सारे जेवर लेने थे,कपड़े लेने थे,इतनी महत्वपूर्ण विमर्श वाली चीज़ों के मध्य कोई इनसे कमतर (दूल्हा) के बारे में सोच के क्यों मगजमारी करे।।
इसिलिए अपने मन को समझा कर रेखा अब रोहित को समझाने की तैय्यारी करने लगी।।
राज भैय्या के जिम में उन्होनें पहले महिलाओं और पुरूषों के लिये अलग अलग समय रखा था,परन्तु उनके चेले चपाडों का उन्हे वक्त बेक़क्त घेरे रहना उस मे दिक्कत डालने लगा था इसिलिए सारा कॉमन समय कर दिया,फिर भी अधिकतर घरेलू महिलायें,कॉलेज जाने वाली लड़कियाँ 9बजे के बाद जब घर के पुरूष ऑफिस और बच्चे स्कूल निकल जाते तभी आती,।।
भैय्या जी ने सारी समय सारिणी प्रिया को बता दी,,अभी कुछ दिनों के लिये कॉलेज की छुट्टियां होने से प्रिया ने भी 9बजे का टाईम स्लॉट चुन लिया।।
भैय्या जी ने जिम में पहनने योग्य कपडों के बारे में उसे उतनी ही जानकारी दी जितनी ना भी देते तो काम चल जाता ।।
पहले दिन एक हाथ में पानी की बड़ी सी बोतल थामे प्रिया ठीक 9 बजे जिम पहुंच गई ।।
उस समय तक एक भी लड़की नही आई थी,पर हाँ मोहल्ले के जाने किस किस कोने से निकल के अर्नोल्ड श्वाज़नेगर के बाप वहाँ आये हुए थे।।कोई पूरी तल्लीनता से
डम्बल कर रहा था,कोई पुश अप्स, कोई बाइसेप्स पे भिड़ा था तो कोई चेस्ट पे काम कर रहा था,,ऐसा लग रहा था अगले मिस्टर इंडिया की तैय्यारी यही लोग कर रहे ,और इन्ही मे से कोई एक मिस्टर इंडिया बनने वाला है।।
"अरे आ गई तुम,बड़ी समय की पाबंद हो,अच्छा है,ये अच्छा की अपना पानी का बोतल भी लाई हो।" भैय्या जी ने आगे बढ़ कर प्रिया का स्वागत किया
"पानी नई ग्लूकोस का बोतल है,हमे लगा पहली बार मेहनत का काम करेंगे ,कहीं चक्कर वक्कर आ गया तो।"
"ठीक बोल रही हो,कमजोर भी तो हो।"लल्लन ऐसे बोल के हंसने लगा,,भैय्या जी ने घूर के उसे देखा और प्रिया को एक ट्रेड मिल पे ले गये,तभी दरवाजा खुला और एक आंटी जी ने अन्दर झाँका
"पुडुषो का भी एही टाईम है क्या??"
"क्या बोल रही हो आंटी??"प्रिन्स ने पूछा
"मैं ए जानना चाहती हूं कि लेडीश लोगों का अलग टाईम है या पुडुषों के साथ ही उनको भी जिम कडणा (करना) है।""
"का बोल रही है यार ये आंटी?"प्रिन्स ने लल्लन से कहा -"अबे चुप रहो तुम ,कलकत्ता की हैं आंटी जी समझे।।"लल्लन ने कहा
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तब तक भैय्या जी चले आये,-"आईये आईये मैडम ,आज आपका पहला दिन है ,आपको एक फॉर्म भरना पड़ेगा, आपका हाईट और वेट चेक कर के आपका बी एम आई निकाले देते हैं,जिससे पता चले कि आपको कितना वजन कम करना है।"
"अडे बाबा हमको बजन कम नही कडणा ,हम तो इहाँ देखने आया था कि हमाडा हश्बैंड भी घड(घर) से जिम बोलके निकलता है,यहाँ आया है कि धेलू के यहाँ बैठ के रोशोगुल्ला खा रहा है।"
"अरे बाप रे आंटी तो करमचंद निकली यार!!"
राज भैय्या ने उन्हें जाकर प्यार से जाने क्या समझाया अगले दिन से खुद ही जिम आने की कसम खा कर घोष आंटी वहाँ से चलती बनी।।
अब हो चुके थे सवा नौ और धीरे धीरे कर के जिम की रौनक बढ़ने लगी,एक एक कर शहर की दुबली पतली लम्बी गोरी छरहरी वामायें धीरे धीरे दरवाजा खोल खोल कर अन्दर आने लगी,ये वही लड़कियाँ थी जिनके इन्तजार में लड़के पुश अप्स कर कर के अपना सीना फुलाए जा रहे थे . इन लडकियों के अन्दर आते ही जिम का माहौल बदलने लगा था,हर लड़का कुछ अधिक ही जोश में वर्क आउट कर रहा था,और मज़े की बात ये थी कि इंस्ट्रक्टर राज भैय्या के अलावा हर लड़का इंस्ट्रक्टर बना बैठा था,,और ये सब एक दूसरे को नही सिर्फ लडकियों को ही ज्ञान दे रहे थे .
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आज प्रिया का पहला दिन था,ऐसी पतली छरहरी लडकियों को देख उस बेचारी को समझ ही नही आ रहा था कि ये यहाँ करने क्या आयी हैं,उन में से कुछ का ये हाल था कि अगर ट्रेड मील पे 5मिनट भी दौड़ ले तो उन्हें फिर सीधे स्ट्रेचर पे डाल कर सीधा एम्स रिफर करना पड़ता वो भी एयर लिफ्ट,,कुछ एक जितना तो वर्क आउट नही कर रही थी ,उतना अपने आप को हर एंगल से पलट पलट के आईने में देख रही थी . एक ने तो गज़ब ही कर दिया ,ट्रेड मील में चढ़ने के पहले जाकर अपनी लिपस्टिक डार्क, की,फिर क्रॉस ट्रेनर पे चढ़ने के पहले भी ,फिर साईकल के भी,इस तरह से हर वर्क आउट सेशन के पहले उसका एक टच'प हो जाता .
प्रिया बेचारी को पहला दिन था इसिलिए 5km/hrs की स्पीड पे 20 मिनट चलने का आदेश हुआ था,वो अपनी मशीन पे चलती इधर उधर देखती जा रही थी . कुछ देर बाद एक बड़ा लॉट आंटियों का अन्दर आया,उन्हें देख प्रिया को कुछ तसल्ली हुई क्योंकि भले ही वो अलग अलग साइज़ ऐंड शेप की थी,पर थी सब की सब मोटी।।