भाग 11
अब तक आपने पढ़ा
" राज!! ऐसे क्यों देख रहे ,जैसे पहली बार देखा हो।।"
प्रिया की बात पर राज मुस्कुराने लगा।।।
" सुनो !! हम तुम्हें छूना चाहते हैं,तुम्हें छू कर तसल्ली करनी है कि हम सपना नही देख रहे,राज बाबू सच में हमारे घर के सामने खड़े हैं ।
" अच्छा!! सच में ??" और मुस्कुराते हुए राज ने प्रिया को
अपनी तरफ खींच कर गले से लगा लिया।।
अब आगे
दोनों एक दूसरे के गले से लगे एक दूसरे में डूबे खड़े थे कि
__
" प्रिया !!इत्ती रात गये यहां का कर रही हो।"
दोनो इस आवाज़ को सुन झटके से अलग हो गये
" पापा आप!! ये . वो राज हैं,हमारे जिम इंस्ट्रक्टर,जिन्हें हम पढाते भी थे।" राज ने लपक के प्रिया के पिता के पैर छूने चाहे,पर उन्होनें हाथ बढ़ा कर उसे रोक दिया__" हाँ ठीक है ठीक है,तुम अभी घर चलो ।"
" हां पापा चल रहे!! " प्रिया ने आंखों ही में राज से बिदा ली और अपने पापा के पीछे सर झुकाये घर चली गयी।।
राज अपने बालों पे हाथ फेरता रह गया,अपनी बुलेट वापस उसने घर की तरफ मोड़ ली __
पूरे रास्ते मुस्कुराते हुए राज घर पहुँचा ,हालांकि प्रिया के पिता ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया था,पर इस बात से डरने की जगह उसे एक सुखद एहसास था कि बताना तो आखिर सभी को है,चाहे किसी ढंग से पता चला पर खुशी की बात है कि प्रिया के घर पे भी पता तो चल ही गया।।
प्रिया के पिता पढ़े लिखे सरकारी मुलाजिम थे, इसीसे उन्हें कितनी भी गम्भीर विषय से जुड़ी बात हो उसपे अनावश्यक हाय तौबा मचाना पसंद नही था,साधारण तबीयत के साधारण पुरूष थे।।
प्रिया से ना उन्होनें कुछ पूछा ना प्रिया ने ही आगे बढ़ कर कोई कैफियत दी,पर अपने धीर गम्भीर पिता की आवाज़ से ही उसने भांप लिया कि उसका यह कार्य पिता को कहीं अन्दर तक कष्ट दे गया है।।
अगले दिन सुबह और दिनों की तरह प्रिया जिम नही गयी,उसे घर पे ही इधर उधर निरर्थक डोलते देख उसकी अम्मा से रहा नही गया__
" का हुआ?? आज जिम नही जाओगी का प्रिया ?"
शर्मिला के सवाल का जवाब प्रिया की जगह उसके पिता ने दिया__
" नही! आज के बाद ये कभी जिम नही जायेगी, वर्मा से बात हुई है,कल लड़के वालों को घर बुला लिया है . सोच रहा हूँ अब इसी साल इसके भी हाथ पीले कर दूँ ।"
प्रिया ने अपनी माँ को देखा और उन्होनें प्रिया को,आंखों ही आंखों में दोनो ने एक दूसरे की पीड़ा पढ़ ली।।
" हुआ क्या?? कुछ बताएंगे भी . ऐसे कैसे तुरंत हाथ पीले कर देंगे।"
" देखो शर्मिला,मेरा यही मानना है कि हर काम अपने समय पर हो जाना चाहिये,चाहे विद्या ग्रहण हो या
पाणिग्रहण!! बहुत पढ लिख ली प्रिया,अब इसका भी ब्याह कर दूँ तो मुझे भी चैन मिले।"
" मर गयी रे,ये जोड़ गठान का दर्द मुआ मेरे परान लेकर ही जायेगा . " अपने घुटने हाथों से सहलाती बुआ जी ने घर में प्रवेश किया_" ठीके तो कह रहा है मेरा भाई,अब इत्ता सारा तो पढ़ लिख ली है,कौन सा हमें छोकरी को कलेक्टर कमिस्नर बनाना है,अब निबटो इससे भी,उमर हुई जा रही इसकी भी।"
" परनाम करते हैं जिज्जी!! छोटा मुहँ बड़ी बात हो जायेगी,पर अभी बाईस की तो हुई है और अगले हफ्ते इसका बैंक का पेपर भी है,एक बार चुन ली जाये फिर अपने पैर पे खड़ी हो जायेगी फिर निबटाते रहेंगे ब्याह।।"
" हम तुमसे पूछ नही रहे,तुम्हे बता रहे कल शाम को खाने पे बुला लिया है उन लोगों को,तुम अपना सब तैयारी ठीक-ठाक रखना।"
" जी अच्छी बात है!!" शर्मिला ने एक बार प्रिया को देखा और रसोई में वापस चली गयी,प्रिया भी सर झुकाये ऊपर अपने कमरे में चली गयी।।
" सांसों में बड़ी बेकरारी आंखों में कई रतजगे
कभी कही लग जाये दिल तो,कहीं फिर दिल ना लगे
अपना दिल मैं ज़रा थाम लूँ,जादू का मैं इसे नाम दूँ
जादू कर रहा है,असर चुपके चुपके . "
जिम में चलता गाना असल में राज भैया के मन में चल रहा था,रह रह के नज़र दरवाजे पे जा कर अटक रही थी8 Full stopसब आ रहे थे जा रहे थे पर ना उसे आना था ना वो आई।।
आखिर इन्तजार की घडियां पहाड़ बनने लगी और राज ने प्रिया को फ़ोन लगा दिया, पूरी रिंग बजती रही पर फ़ोन नही उठा,अब कल रात की एक एक बात किसी फिल्म की रील की तरह आंखों के सामने से गुजरने लगी।।।
और समझ में आ गया कि प्रिया क्यों नही आयी , उसने फोन क्यों नही उठाया।।राज की मोटी अकल को आखिर समझ आ ही गया की प्रिया के पापा को उन दोनों का यूँ मिलना रास नही आया, अजीब बेचैनी से राज व्याकुल हो उठा,उसने एक बार फिर प्रिया को फोन लगाया,इस बार थोड़ी देर में ही फ़ोन उठा लिया गया।।
" फोन क्यों नही उठा रही थी प्रिया??"
" पापा थोड़ा गुस्से में लग रहे राज,अब हमे जिम आने नही मिलेगा,अगले हफ्ते हमारा पेपर है,पता नही दे पाएँगे या नही?"
दोनो अभी अपनी बातों में लगे थे कि राज की अम्मा किसी से बात करती राज के कमरे तक आ गयी__
" ए राज!! देखो कौन आया है??आओ बेटा बन्टी, तुम राज के कमरे में आराम करो हम तुम्हरा सामान ऊपरे भिजाये दे रहे।"
" जी मौसी जी।"
राज की मौसी का बेटा बन्टी राज का ही हमउम्र था और पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली में रह कर नौकरी कर रहा था,वही अचानक बिना किसी पूर्वसूचना के अपना बैग टाँगे राज के घर टपक पड़ा था।
" तुमसे बाद में बात करते हैं प्रिया अभी मेहमान आ गये हैं,रख रहे फोन।"
राज ने आगे बढ़ कर भाई को गले से लगा लिया__
" का हो गुरू!! एकदम दाढ़ी वाढी बढ़ाए बैठे हो, क्या हो गया ??"
" क्या बताऊँ राज!! ब्रेक अप हो गया यार,दिमाग एकदम खराब हो गया,दिल्ली में मन नही लग रहा था साला,और मम्मी पापा के पास जाता तो शादी शादी रट लगा देते इसिलिए छुट्टी लेके यहाँ आ गया।"
" ब्रेक अप हो गया ,पर काहे,हमारा मतलब कैसे?"
" वो तो मैं बाद में बताऊंगा,पहले तुम बताओ,किससे इतना घुस घुस के बात कर रहे थे,जो मुझे और मासी को देखते ही फोन रख दिया।"
" अरे वो ?? वो कोई नही ,,बस ऐसे ही ,,तुम अपनी कहानी बताओ पहले।"
" अच्छा !! तो हमारी कहानी सुनने के बाद साहब अपनी सुनायेंगे।अबे कुछ नही रखा यार मेरी कहानी में,बस एक लड़की थी ,पसंद आ गयी थी .
" फिर?"
" फिर क्या??फिर भाई ने प्रपोस कर दिया,और किस्मत खराब थी साला ,उसने भी एक बार में हाँ कह दी।।"
" इसमें किस्मत का क्या दोष बन्टी,ये तो अच्छा ही हुआ।"
" खाक अच्छा हुआ . राज कानपुर से बाहर निकल के देखो,लोग कितना फॉरवर्ड हो गये हैं,अच्छा एक बात बताओ क्या पढ़ाई करी है मैनें?"
" तुमने वो क्या कहते हैं .
" हाँ हाँ बताओ बताओ,निसंकोच बोलो बे।"
" बन्टी वो इंजीनियरिंग वाली पढ़ाई . "
" हाँ वही बी टेक किया है मैनें ,एम बी ए करने वाला हूँ,अच्छी खासी नौकरी कर रहा हूँ,है की नही?"
" हाँ भाई सौ टका!!"
" अब इसके बाद सुनो ,,इतना सब करने के बाद भी मैं मैडम को गंवार लगता हूँ,कहती है तुम्हारी प्रनन्सियेशन सही नही है।।"
" क्या ??क्या सही नही है??"
" अबे उच्चारण यार . कहती है बेबी तुम ना सही से बोल नही पाते हो,मैनें कहा यार सेक्रेड हार्ट इंग्लिश मीडियम स्कूल से पढ़ा हूँ,कहती है_ होगा पर तुम्हारा एक्सेन्ट सही नही है,तुम ना ब्रिटिश इंग्लिश नही बोल पाते . हिन्दुस्तानी हूँ यार अपनी इंग्लिश बोलूंगा ना भाई।।अब मैं तुझे शुरु से अपनी कहानी सुनाता हूँ ।"
" तो अभी तक क्या सुना रहे थे गुरू!!"
" दिमाग ना खराब कर भाई का यार,वर्ना नही सुनाऊंगा।"
" मजाक कर रहे थे भाई ,तुम सुनाओ यार अपनी राम
कहानी।"
"जानते हो ,पहली बार कहाँ मिला उससे,,अरे वहीं यार . आजकल का प्रेम तीर्थ !! आज कल वही एक जगह है जहां रोज़ हजारों प्रेम कहानियाँ सुबह शुरु होती हैं और शाम होते होते खतम!! मेरी तो फिर भी तीन महीना चल गयी .
" अबे ऐसी कौन जगह है दिल्ली में??"
"अबे दिल्ली नही ,,,,फेसबुक पे!! बन्दी ने ऐसी ऐसी खूबसूरत फोटो डाल रखी थी कि बस पूछ मत भाई . भाई बहक गया,,मैनें फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी उसने मान ली ,,गप्पे शप्पे शुरु हो गयी . अब तो बन्दी रोज़ नया प्रोफाइल पिक लगाये ,कभी लेफ्ट से कभी राईट से ,कभी सामने से,ऊपर से ,नीचे से . मतलब ये की फोटो देख देख के ही मैनें तो यार बच्चों के नाम तक सोच लिये,फिर एक दिन धीरे से प्रपोज़ भी कर दिया,उसने झट मान भी लिया,फिर मैनें मिलने को बुलाया,तब नखरे चालू हुए।।फिर भी आखिर मान गयी . अच्छा उसके ऊपर भी पहली डेट कैसी होनी चाहिये पर भी घुमा फिरा के खूब क्लास ले ली मेरी,कहती है __ 'मेरी हर फ्रेंड को उसके बी एफ ने पहली मुलाकात में कोई ना कोई गिफ्ट दिया है,जैसे टॉमी हाईफ्लायर की वॉच या रिंग..लायक दैट यू नो!!' अब मैं इतना भी नासमझ नही हूँ यार एक सोने की अँगूठी खरीद के ले गया।"
" फिर क्या हुआ??"
" फिर क्या ,जब मैं वहाँ पहुँचा और उसकी शकल देखी . कसम से भाई ,दिल का दौरा आते आते बचा,,भगवान बेड़ा गर्क करे इन चीनियों का ऐसे ऐसे फोन बनाये है ना,ओपो-विवो कि साला इस मोबाईल से अपनी ही फोटो खींच के बंदा ना पहचान पाये,जन्मजात कोयला भी इनमें फिरंगी लगे।। खैर मैनें अपना दिल सम्भाला और जाकर बैठ गया,अब उसके आत्मविश्वास की इन्तेहा देखो,पूछती है__ कैसी लग रही हूँ मैं? मैनें कहा_ तुम हूर हो परी हो, इस दिल्ली की नही लगती,शिमला मसूरी हो। मेरे इस भद्दे जोक पे भी हंसने लगी ,कहती है _ शुक्रिया !! खैर अँगूठी ले आया था तो मैनें निकाल लिया देने के लिये, कहती है __ omg ridiculous! तुम गोल्ड रिंग लाये हो ,मैं तो सिर्फ diamonds पहनती हूँ,,फिर सोच क्या हुआ।।"
" ब्रेकअप??"
" नही यार!! इतना झल्ला भी नही है तेरा भाई ,, बहुत सबर है भाई में . दिल में तो आवाज़ उठी कि जाहिल औरत किसी भी एंगल से तू डायमन्ड के लायक नही लगती पर ऊपर से मैनें कहा__ चलो बेबी शॉपिंग चलतें हैं,ले लेना अपनी पसंद का कुछ!!
अब भाई मैं तो उसे ' शाह जी' ,' अनोपचंद तिलोकचंद' टिकाने वाला था,कम्बख्त ' गीतांजली' ले गयी यार . पूरे बहत्तर हज़ार खरचे तब जाके मैडम के चेहरे पे स्माइल आयी।।
फिर पूरा दिन घुमाती रही ,कभी यहाँ कभी वहाँ, शाम को
जब उसे घर छोड़ने गया,तो मैने बाय बाय के साथ सोचा एक छोटी सी किस ले लूं,कहती है __ नो बेबी !! ये सब शादी के बाद!! मैनें कहा हमारे यहाँ भी गहने शादी में ही चढाये जाते हैं ।।पर मेरा ये खून्खार जोक भी उस नामुराद के पल्ले ना पड़ा ।।
फिर तो बस सिलसिला ही चल निकला,हर वीकएंड पे शॉपिंग मूवी डिनर!! अब यार इतना भी नही कमा रहा था तेरा भाई .
" तो इस बात पे ब्रेकअप हुआ।"
" अबे नही यार!! इतना सब कर के देने के बाद मैडम को ये समझ आया की मैं केयरलेस हूँ मैं उससे रीलेटेड महत्वपूर्ण तारीखें भूल जाता हूँ,जैसे उसके कुत्ते का जन्मदिन, उसकी फुफी की शादी की सालगिरह,हम पहली बार कब एफ बी पे दोस्त बने, इसी तरह के कई बिल्कुल ही भुला देने योग्य तारीखों को कैसे कोई याद रखे।।कहने लगी_ " तुम मुझसे सच्चा प्यार नही करते,तुम बस मेरी खूबसूरती से प्यार करते हो।।" माँ कसम भाई कलेजा मुहँ को आ गया,जी मे आया चिल्ला चिल्ला के कहूं __ कम्बख्त किसी अच्छे आंखों के डॉक्टर से इलाज करा अपना।।पर मैं फिर ज़ब्त कर गया।।फिर उसकी लाईफ मे आ गया एक एन आर आई बंदा!! बिल्कुल फिल्मी स्टाइल में!! उसके पापा के दोस्त का लड़का !! और भाई विदेशियों ने सदियों हम हिन्दुसतानीयों पे राज किया ही है,वही हुआ ।।मैडम भी उड़ गयी सात समंदर पार,और तेरा भाई पी पिला के गम गलत करने लगा।।"
" अरे दारु की लत लगा ली तुमने गुरू।"
" अबे दारु की लत लगाये मेरे दुश्मन।।दारु तो बेटा ऐसा है कि भाई के खून में घुली है,इन्जीनियरिंग फर्स्ट ईयर में रैगिंग में कमीने सीनियर्स ने जब पहली बार पिलायी,हमने फुल एक्टींग करी जैसे हमे बिल्कुल नही जन्ची ।।उन्होनें और पिलायी,हमने भी खूब ढकोल के पिया,,तो दारु तो अब ऐसा है कि चढ़नी ही बन्द हो गयी बे।।हम तो चाय पीने पिलाने की लत की बात कर रहे थे।।
तो बेटा इस तरह हमारी प्रेम कथा शुरु हुई और अपने अंजाम तक पहुंच भी गयी अब तुम बताओ,ये तुम्हारा क्या चक्कर चल रहा है।"
" क्या बताएँ बन्टी,हमारा ऐसा कुछ चलने लायक चल ही नही रहा!! एक लड़की है प्रिया!! पहले हमारी दोस्त बनी, धीरे धीरे अच्छी लगने लगी . अब तो यार आदत सी पड़ गयी है उसकी,पर हमने पहले ही उसे कह दिया कि अम्मा से पूछ कर ही आगे कदम बढ़ाना है।"
" तो मान गयी मासी जी।"
" अबे कहाँ यार!! अम्मा तो अलगे राग छेड़े बैठी हैं सरजूपारी है तो ब्याह नही हो सकता।।"
" अरे तो सरजूपारी भी तो ब्राम्हण ही है,यहाँ तो हमारे पिता श्री ने हमारा नाम ही अजीब रख दिया __ ' रविवर्मा'
इसिलिए बन्टी नाम चलाते हैं ।।कोई बहुत फेमस पेंटर बाबू थे रवि वर्मा साहब!! तुम्हारे कला पारखी मौसा जी यानी मेरे पिताजी को और कोई नाम नही मिला . पहले पहले तो मुझे कॉलेज में सब वर्मा समझते थे फिर जब पूरा नाम बताया तो खासा मजाक भी बन गया__ रविवर्मा उपाध्याय .
हां तो बेटा आगे क्या हुआ?"
" क्या होना था? कुच्छो नही हुआ,ना हो पायेगा,,हम सोच रहे अम्मा के एकदम पैर पकड़ लेते हैं,क्या बोलते हो तुम?"
" क्यों लड़की वाले तैयार बैठे हैं क्या?"
" अबे कहाँ यार!! पहले अम्मा तो तैयार हो जायें ।"
" और अम्मा के तैयार होने के बाद कहीं लड़की वाले मुकर गये तब,क्या करोगे।"
" ये तो सोचे ही नही भाई"
" हमारी मानो तो एक बार लड़की के घर वालों से मिल आओ!! अपने मन की बात बता दो उन्हें,,फिर वो लोग मां गये तो अम्मा तो यार मान ही जायेंगी, आत्महत्या की धमकी चमकी दे डालना और क्या।"
" हम्म!! तो मतलब हम पहले प्रिया के घर वालों से मिल लें और बात कर लें ।"
" बिल्कुल!! और किसी तरह जुगत लगा के दोनो घर की औरतों की मीटिंग करा दो,किसी मन्दिर में!! घर की औरतें तैयार हो जायें ना तो आदमियों को मानना ही पड़ता है बंधु ।"
" बात तो पते की बोले हो बन्टी भाई ,तो फिर निकलते हैं हम प्रिया के घर के लिये,तुम अपनी तलब मिटाओ चाय पीकर!!"
" अबे रुको यार!! बड़ी हडबडी में हो क्या बात है?? चाय पीकर मैं भी चले चलता हूँ,,देखूँ तो ज़रा कौन सी प्रिया बजा रहे हो तुम।"
मेरी हर मन मानी बस तुम, तक बातें बचकानी बस तुम तक
मेरी नज़र दीवानी बस तुम तक
तुम तक तुम तक।।
दोनो भाई चाय खतम कर प्रिया के घर की ओर निकल चले।।
" क्या बात है राज . तुम तो बेटा सच में प्यार में पड़ गये हो जभी रान्झणा के गाने सुन रहे हो।"
" क्यों ज़रूरी है प्यार में पड़ने पर रान्झणा के गाने ही सुने जाये।।"
" नही बिल्कुल नही!! मैं तो ब्रेकअप के बाद ' लम्बी जुदाई' सुनने लगा तो एक दोस्त ने कहा ,कौन से जमाने में जी रहे हो यार,मैने कही क्यों__ तो कहता है आजकल लड़कियाँ ब्रेकअप के बाद दिल पे पत्थर रख के मुहँ पे मेक'प कर लेती हैं,और तुम्हारा बावरा मन जाने क्या चाह रहा,सम्भालो यार खुद को।मैनें संभाल लिया और तबसे जस्टिन बीबर सुनने लगा।।"
" वो क्या गाता है गुरू??"
" पता नही भाई!! मैं तो फैशन के मारे सुनता हूं, लोगो को भले गाने का एक शब्द ना समझ आये पर बनेंगे ऐसे जैसे बहुत बड़े अन्ग्रेजी संगीत के ज्ञाता हो, आस पास इम्प्रेशन मारने एक आध गाना पता होना चाहिये ना।"
कुछ देर पहले अपने दिल से दुखी राज के मन का कुहासा बन्टी की बातों से छन्ट गया,अपनी पूरी ऊर्जा के साथ वो गाड़ी भगाता अगले ही पल प्रिया के दरवाजे खड़ा था।।
दरवाजे को शर्मिला ने खोला,और पूरे आदर के साथ दोनो लड़कों को अन्दर बिठाया।।।
अपने पापा के ऑफिस निकलते ही माँ बेटी में सारी बातें
हो चुकी थी,प्रिया ने पापा की नाराजगी का कारण माँ को बता ही दिया था,शर्मिला को वैसे भी पहले से ही राज पसंद था पर पति की खिलाफत करने की उस भारतीय नारी ने आज तक।कल्पना भी नही की थी,इसीसे अपनी सोच में गुम शर्मिला ने प्रिया को आवाज़ लगाई।।
इस वक्त पे माँ और बेटी दोनो यही चाहती थी की कोई भी बाहरी व्यक्ति ना आये और वो लोग राज के साथ बैठ कर आगे क्या करना है कैसे करना है कि रूपरेखा पर चर्चा कर सकें . पर भगवान को भी कभी कभी अपने प्रियजनों से हँसी मजाक करने का मन करता है इसिलिए वो बुआ जी जैसे लोगों की सृष्टि करतें हैं ।।
प्रिया अपने कमरे से उतर कर आयी ही थी कि दरवाजे को भड़भड़ाती बुआ जी का आगमन हुआ।।
" अरे कौन मेहमान बैठे हैं परमिला?"
बुआ जी का अक्समात आगमन सभी को चकित कर गया।।
"राधेश्याम जी गैस वाले हैं ना,, उन्ही के लड़कें हैं जिज्जी राजकुमार!! "
" हाँ हाँ!! मिले रहे उस दिन !! याद आ गया । औ बेटा कहो कैसन आना हुआ,सब कुसल मंगल घर में,कभी ऐसने अपन अम्मा को भी ले के आओ, शर्मान का भी चरन धूलि पड़े घर मा, ये कौन लड़का है जो साथ मे बैठा है।।"
" प्रणाम बुआ जी,ये हमारे भाई हैं मौसी के लड़के _ रविवर्मा नाम है।"
" हैं,तुम्हरी मौसी का सादी(शादी) वर्मा में हुआ रहा का,कायस्थों को ब्याह दिये लड़की।"
" नही नही बुआ जी इनका नाम ही रविवर्मा है सरनेम उपाध्याय लिखते हैं ।"
" तो बेटा तुम ऐसा उजबक नाम काहे रक्खे।"
" बुआ जी अब क्या बताएँ,ऐसे ही उटपटांग शौक हैं हमारे।"
बुआ जी ने बहुत ही बुरा सा मुहँ बना के मुहँ फेर लिया __" परमिला चाय वाय पिलाओगी कि खुदै आके बना लें।।"
वापस मुहँ घुमा के बन्टी से पूछा__" पढ़ते लिखते भी हो कुछ??"
" जी दिल्ली में नौकरी करते हैं ।"
नौकरी की बात सुनते ही बुआ जी की आंखों में चमक आ गयी,उन्हें प्रिया के लिये घर बैठे चमचमाता रिश्ता दिखने लगा।।
" अरे वाह बचुआ!! कितना नोट कमा लेते हो ।।"
" बस बुआ जी आपके आशीर्वाद से अस्सी हज़ार महीना
बना लेते हैं ।"
बन्टी भी बुआ जी की गिद्ध दृष्टी को ताड़ चुका था इसिलिए वो भी मज़े लेने लगा
" और कौन कौन है घर में,मतलब भाई बहन ,दादी चाचा??"
" बस हम ,मम्मी और पापा!! इकलौते हैं ।।"
बुआ जी के चेहरे पे बिल्कुल ऐसे भाव थे जैसे कई दिनो से खिचड़ी का पथ्य सेवन करते पीलिया के रोगी के सामने छप्पन व्यंजनों से सजी थाल परोस दी गयी हो।।हर एंगल से देखने पर भी इस सजीले नौजवान मे उन्हें कोई कमी नज़र नही आयी।।
वो अभी अपनी बात आगे बढ़ाती कि राज ने अपनी बात कहनी शुरु की__
" बुआ जी ,हमें जादा घुमा फिरा के कहने की आदत तो है नही,हम साफ साफ ही कहेंगे।"
अभी तो बस मन में आया था कि इस दिल्ली वाले से बात चलाऊँ और ये राज समझ भी गया,जो दहेज की बात शुरु कर रहा,बुआ जी ऐसा सोच ही रही थी कि राज ने विस्फोट कर दिया__
" हम प्रिया से शादी करना चाहते हैं ।"
शर्मिला और प्रिया चुप बैठे रहे पर बुआ जी पर जैसे बिजली सी गिरी
" हैं!! क्या करना चाहते हो??"
" शादी करना चाहतें हैं प्रिया से।"
बुआ जी कभी राज को कभी प्रिया को देखने लगी, उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास ही नही आ रहा था,जिस छोरी को उसके सांवले रंग के लिये आज तक वो माफ नही कर पाई थी आज उसके लिये साक्षात रामरतन पंचाग के श्री राम की छवि सा सुन्दर लड़का बाहें पसारे खड़ा था।
बोलो इसे कहतें है किस्मत!! है क्या इस छोकरी मे,भले ही अपने सगे भाई की बेटी है पर ना रूप ना रंग,पर इसे ही किस्मत कहते हैं ।।
बुआ जी को अपने रूप रंग पे इस बुढऊती आने तक भी नाज़ था,उनके अनुसार उनकी शादी किसी कलेक्टर से होनी थी ,वो तो कंजूस भाई ने दहेज बचाने को ऐसी सुन्दर गुलाब की कलि को एक अदना से क्लर्क से ब्याह दिया।।
अपने सारे भावों को समेट कर उन्होनें राज से पूछा __" काहे राज बाबू तुम्हरे घर सब तैयार है का?
" नही अभी तो नही,पर हो जायेंगे।।"
" पर बेटा तुम ठहरे कान्यकुब्ज,हम सरजूपारी !! बडी
मुस्किल आयेगी।।
बुआ जी की बात पर बन्टी उचक पड़ा __" बुआ जी मुश्किल सलटाने के लिये आप हैं ना,,देखिए बुआ जी,अब आपको ही तारणहार बन कर इन दोनो की नैया को पार लगाना पड़ेगा,,चाहे जो हो जाये।"
" हम !! हम ठहरे अनपढ़ ,तुम पढ़ो लिखो के बीच हम का बोलेंगे बेटा ।।"
" अरे बुआ जी खुद को कम ना समझिये . आप जितनी सुन्दर है उससे कहीं ज्यादा आप सुलझी हुई और समझदार लगती हैं हमे।।
" कह तो ठीके रहे हो बेटा पर प्रिया का बाप भी कम ज़ीद्दी नही है,बचपन से अपने छोटे होने का फायदा उठाता रहा है,और आज तक उठा रहा है,एक बार उसने कह दी फिर कोई उसकी बात नही काट सकता।।"
" वो बाद में निबटाएंगे बुआजी,पहले ऐसा किजीये ना एक बार आप और आंटी जी चल कर राज की अम्मा यानी हमारी मौसी से मिल लेते,देखिए शादी ब्याह तो असल में घर की औरतों को ही तय करना होता है,,है ना . जब घर में दामाद आता है सेवा जतन कौन करता है सास . बहू जब ससुराल जाती है,किसके साथ सबसे अधिक समय बिताती है,सास के साथ ना!! दोनों तरफ ही औरतों को ही सब बखेड़ा देखना समझना है तो सही यही रहेगा की एक बार आप लोग आपस
में मिल लो,, फिर यदि आप लोगों को सही ना लगे तो ना करना दोनो का ब्याह।।
" ठीक है बेटा तो यहाँ लेते आओ अपनी मौसी को भी।"
" नही बुआ जी घर पर नही,,कल घाट वाले शिव मन्दिर पर आप दोनों आ जाईये प्रिया को लेकर, हम दोनों आ जायेंगे मौसी जी को लेकर।।पूरी बात वहीं तय कर लेंगे,,एक बार आप लोगों का मन मिल जाये,फिर तो जय शिव शंभू!!भोलेनाथ चाहेंगे तो भाई की बारात मे नागिन डांस करने के बाद ही अब दिल्ली जाऊँगा।।"
बन्टी की बात पर सभी खिलखिला उठे . शर्मिला हँसते हुए मिठाई लेने अन्दर चली गयी और राज और बन्टी वापस जाने उठ खड़े हुए।।
प्रिया दोनों को दरवाजे तक छोड़ने आयी।।मुस्कुराती हुई दरवाजे को पकड़ी खड़ी प्रिया को देख राज ने पूछा __
" क्या हो गया!! बहुत मुस्कुरा रही हो।"
" हम्म बना दिया ना अपने जैसा,कहाँ हम सोचते थे तुम्हें पढना लिखना सीखा देंगे उल्टा तुमने ही हमे हमारी पढ़ाई से दूर कर दिया।।"
" ऐसे काहे बोल रही हो,हमने कब मना किया पढ़ने से।।"
" जब दिमाग से बाहर जाओगे तब तो पढ़ पायेंगे, अगले हफ्ते पेपर है हमारा,सेलेक्शन हो गया तो एक महीना ट्रेनिंग करने बाहर चले जायेंगे यहाँ से।"
" ओह हो एक मिनट ,ये नया पेंच क्या है भाई!! प्रिया नौकरी भी करने की सोच रही हो क्या!! लगता है राज ने तुम्हें बताया नही,मैं बता देता हूँ,हमारी मौसी जी औरतों की नौकरी के तो सख्त खिलाफ हैं,तो कल जब मन्दिर आना अपनी पढ़ाई नौकरी पेपर इत्यादी से सम्बंधित कोई चर्चा वहाँ ना करना,वर्ना बनती बात बिगड़ जायेगी।।
यार देखो !! तुम लोग ना धीरे धीरे घर में विस्फोट करो,ऐसा ना कर देना कि सब घनघोर विरोधी हो जायें तुम्हारे।"
" अच्छी बात है रविवर्मा जी,हम कल कुछ नही कहेंगे।।" प्रिया और राज फिर मुस्कुराने लगे।
" बना लो बेटा!! मेरे नाम का तुम भी मजाक बना लो, पर यही नाम तुम दोनो के शादी के कार्ड मे शुभाकांक्षी में छपने वाला है,समझे।।"
" समझ गये गुरदेव,चलें अब।।
मैं ना मांगूंगा धूप धीमी धीमी .
मैं ना मांगू चाँदनी
मेरे जीने में तुझसे हो इश्क दी चाशनी।।
दोनों भाई गाड़ी में गाने को ट्यून करते हँसते मुस्कुराते घर की ओर चल पड़े ।