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धर्मयुद्ध (विजय विकास अंलफासे सीरीज)

"फिलहाल तुम वहा जमे रहो-यदि वह आए तो सिर्फ उस पर नज़र रखना-होशियारी से उसे शक न होने पाए-रिसेप्शनिस्ट से भी कहना कि वह उससे तुम्हारा काई जिक्र न करे-कुछ ही देर बाद हम स्वय वहा पहुच रहे हैं-तभी तय करेंगे कि इस सिलसिले में आगे क्या करना हे I”

"ओ के सर ओवर ।"

“ओवर एण्ड आल ।” कहकर उसने कनेक्शन काट दिया…अभी वह ट्रांसमीटर के नग को नीचे करके. छुपा ही रहा था कि इबलीस ने पूछा-"क्या रहा? ”

"तुम जाओ । उसके सवाल पर कोई ध्यान न देकर गार्जियन ने लासनायक से कहा…"बाकी काल्स भी इसी तरह मुस्तेदी के साथ रीड करना ।"

“ओ के सर I" कहकर वह बाहर चला गया ।

दरवाजा पुन बोल्ट करके गार्जियन वापस आया और कुर्सी पर बैठता हुआ बोला… यदि नसीब ने साथ दिया तो आज की रात रक्त तिलक के बहुत-से एजेण्ट सरदार. और साथ ही विकास भी मारे या पकडे जाएगे…उनकी सारी योजना खुल चुकी है ।"

" सारी योजना कहा खुली है ?"

"अब रह ही क्या गया हे-स्पष्ट है कि आज रात को वे वेन किडनैप करने की योजना बना रहे. हें…रात को दस बजे महताब को लिया जाएगा कम-से-कम महताब को हम अपनी निगाहो से ओझल नही होने देंगे और बस उसके शेष लोगों से मिलते ही हम सबको दबोच लेंगे !"

"म......मगर ।" कर्नल तोम्बो ने कहा…"यह उनकी सारी योजना कहां है--हम यह तो नहीं जान सकै है न कि वेन को किडनैप. करने के लिए उन्होंने क्या योजना तैयार कर रखी है?"

" हूं , योजना-वेन किडनैप करेंगे ।" गार्जियन व्यग्यपूर्वक बोला… "वे ख्वाब देख रहे हैं कर्नल-कोईं वेन किडनैप नहीं होगी…बल्कि उल्टे वे फस जाएगे-वो कहावत है न कि जब चींटी की मौत आती है ~ तो उसके पख निकल आते हैं और वह उडने लगती हे ।”

कर्नल तोम्बो का गम्भीर और चिन्तित स्वर…“फिर भी ।"

"ओफ्फो-फिर भी क्या कर्नल…वेन किले के दीवान-ए…खास में रखी है--उसके चारों तरफ खुद तुमने… ही इतने कड़े इन्तजामात किए हैँ…मैंने भी वे सब इन्तजाम देखै' हैं…कमाल है तुम अपने द्वारा की गई सुरक्षा व्यवस्थाओं से सन्तुष्ट नहीं हो, जबकि मैं पूरी तरह सन्तुष्ट हूं-मैं तो दावे के साथ कह सकता हूं कि ब्रिटिश सरकार ने कोहेनूर की सुरक्षा कै लिए भी उतने कडे ईन्तजाम नहीं किए होंगे, जितने तुमने वेन के लिए किए हैं ।"

"फिर _भी हमें दुश्मन को कमजोर नहीं समझना चाहिए. I”

"क्या मतलब?"

" मुमकिन है कि इतने वडे प्रबंधों के बावजूद भी उन्होंनै कोई योजना कर ही ली हो?"

"फिर?"

"हमें सतर्क रहना चाहिए ।”

"सतर्क रहने से किसने इनकार किया…हर कदम पर सतर्कता , तो हमारे पेशे की पहली जरूरत है…मगर मैं ये जरूर कहूगा कि वेन को कोई खतरा नहीं हे…उन्हें यह ज्ञात ही नहीं होगा कि वेन की सुरक्षा कै लिए कितने कडे इन्तजाम किए गए हैँ…यदि मालूम होता तो वे वेन को किडनैप करने जैसा मूर्खतापूर्ण विचार ही अपने दिमाग मे न लाते ।”

"हमे यह नही भूलना चाहिए कि उनके साथ विकास भी है ।"

"इस मामले में वह भी धोखा खाएगा I"

"शायद तुम बहुत जल्दी भूल गए हो कि वह कितना ख़तरनाक है I"

“ मानता हूं कि वह खतरनाक है, लेकिन खुदा नहीं है…ओंर मेरे ख्याल से तो किले से वेन क्रो खुद खुदा भी नहीं निकाल सकता-फिर भी, यदि तुम चाहो तो अपनी तसल्ली के लिए कुछ भी कर सकते हो । वेन को किडनैप न होने देने की जिम्मेदारी तुम्हारी हे । वेसे में वादा करता हू कि उन्है किले के अंदर घुसने से पहले ही या तो गिरफ्तार कर लुगा या भूनकर रख दूगा I "

" तुम्हारा क्या इरादा है?"

" होटल जन्नत जा रहा हूं…वहा ट्रपल क्रास से मिलूंगा-यदि महताब लौट आया होगा तो गुप्त रूप से उस पर नजर रखी जाएगी…अन्यथा उसके कमरे का तलाशा ली जाऐगी…मुमकिन हे कि उसके कमरे मे रक्त तिलक के किसी अन्य सदस्यों के भी पते हो…रात के दस

बजने से पहले ही मेरा बिचार खुद महताब बन जाने का है…कोड, हमें

मालूम ही है ।"

“गुड । इबलीस कह उठा l

उसके मुह से और ज्यादा प्रशसा कराने के लिए गार्जियन ने कहा---" कैसी रहेगी योजना?”

"बहुत बढिया-उनके बीच घुसकर काम बहुत आसान हो जाएगा ।"

"तुम्हें कैसी लगी कर्नल ?"

"ठीक है--फिर भी मेजर मुकाम्बी क्रो आगाह कर देना मैं ज्यादा मुनासिब समझता हूं ।"

" इतना तो करना ही चाहिए। लेकिन...॥"

"लेकिन ?"

“इसके लिए तुम्हें किले मे जाकर बाते करनी होंगी क्योकि मुमकिन है वे वायरलेस की रेंज को कैच किये हुए हों-यदि उन्होंने तुम्हारी बाते सून लीं तो हाथ आया एकमात्र मौका निकल जाएगा ।"

"मैं खुद भी यही सोच रहा था ।"

"ठीक है तुम ही मुकाम्बी से मिल आओ-किले की भीतरी स्थिति का अध्ययन भी कर आना ताकि ज्यादा निश्चिंत हो सको , मगर हा जाना जरा गुप्त तरीके से-मेरा मतलब यह भेद जरा कम और विश्वसनीय आदमियो तक ही पहुचे कि आज तुम किले की चेकिंग करने जा रहे हो ।"

"किले की चैकिंग करने तो मैं साधारण स्थिति में भी जाता ही रहता हू !"

" माना कि जात्ते रहते हो लेकिन चोर की दाढी में तिनका होता है…यदि उन्हें भनक लग गई कि तुम वहा गऐ हो तो उन्हे यह शक हो सकता हे कि कहीँ किसी जगह से उनकी योजना लीक तो नहीं हो गई है यदि इस… शक के आधार पर उन्होंने अपने कदम वापस खींच लिए यानी अपनी योजना स्थगित कर दी तो फिर वही हाथ आया मौका निकल जाऐगा!"

" माना कि जात्ते रहते हो लेकिन चोर की दाढी में तिनका होता है…यदि उन्हें भनक लग गई कि तुम वहा गऐ हो तो उन्हे यह शक हो सकता हे कि कहीँ किसी जगह से उनकी योजना लीक तो नहीं हो गई है यदि इस… शक के आधार पर उन्होंने अपने कदम वापस खींच लिए यानी अपनी योजना स्थगित कर दी तो फिर वही हाथ आया मौका निकल जाऐगा!"

“ठीक है-मैं ध्यान रखूगा ।"

बहुत देर बाद इबलीस वोला-"और मुझे क्या करना है? "

"तुम्हें कुछ करने की क्या जरूरत है? " गार्जियन अर्थपूर्ण मुस्कान के साथ बोला…“तुम्हारी गद्दी बचाए रखने के लिए हम तुम्हारे खादिम जो है I”

"ऐसा न कहिए ।”

“ तुम यहीं रहो ।" र्क्नल तोम्बो ने कहा-"राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा के लिए भी तो किसी महत्वपूर्ण आदमी का यहा रहना जरूरी है…मुमकिन हे कि वे हमेँ वेन की तरफ उलझाकर राष्ट्रपति भवन को ही अपने कब्जे में करने की स्कीम बना रहे हों?"

इवलीस जानता था कि कर्नल त्तोम्बो एक काल्पनिक बात बनाकर से यह जता रहा हे कि वह उसे भी महत्वपूर्ण आदमी समझता है, फिर . भी बोला-“मैं सावधान रहूंगा-आप यहा से बेफिक्र रहे ।"

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गार्जियन को -काफी मेहनत करनी पडी…उसी के प्रमाणस्वरूप उसके मस्तक पर ढेर साना पसीना उभर आया…सारे कमरे की तलाशी उसने बहुत बारीकी से ली थी ।

किन्तु व्यर्थ…मिला कछ नहीं ।

नम्बर ट्रफ्त क्रॉस नीचे हाल मे मौजूद था-उसे वह निर्देश देकर आया था कि जैसे ही महताब आए, फोन द्धारा उसे कमरे मे सूचित कर दिया जाए…वह स्वयं यहा आ गया था ।

… ताला उसने 'मास्टर-की' से खोला था ।

कमरे में आत्ते ही उसने सबसे पहले दरवाजा अन्दर से बोल्ट किया-फिर तलाशी में जुट गया…हालाकि उसे अचानक ही महताब के आ जाने का कोई डर नहीं था, परन्तु जाने क्यों तलाशी उसने बडी ही फुर्ती से ली थी…सावधानी से भी-यानी जो सामान उसने जहां से उठाया-बही, उसी स्थिति मे वापस रख दिया ।

सामान ज्यादा नहीं था, उसने सब छान मारा, किन्तु स्वयं महताब भी आकर यह नहीँ कह सकता था कि उसके सामान को किसी ने छैड़ा है।।

इस वक्त वह थोडा. परेशान और निराश-सा फर्श के बीचो बीच खड़ा रहा सिर खुजा रहा था, जैसे सोच रहा हो कि अब ऐसी कौन-सी जगह रह गई है, जहां उसे तलाशी लेनी बाकी है-अचानक वह कमरे के साथ अटैच बाथरूम में धुस गया ।

पाच मिनट बाद बाहर निक्ला-चेहरे पर मौजूद निराशा के ढेर सारे बादल जेसे बरस पडना चाहते थे-पानी की टैक्री तक में उसे कुछ नहीं मिला था ।

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दो जजीरों पर झूलती हुई… लोहे की भारी, विशाल एवं मजबूत चादर प्रतिपल नीचे की तरफ़ झुकती जा रही थी-जिस अनुपात दरवाजा खुल रहा था, उसी अनुपात में खाइ ढपती जा रही थी । कुछ ही देर बाद दरवाजा खुल गया…पुल बन गया । अब खाई के इस पार खडे होकर ही किले के विशाल दरवाजे के पार यानी.. किले के अन्दर का दृश्य देखा जा सकता था…सेना के दो ट्रक और उनके बीच 'सैंडबिच के समान फसी जीप के इज़न स्टार्ट हो गए।

कार में ड्राइवर और कर्नल तोम्बो के अलावा चार कर्नल तोम्बो के अत्यन्त विश्वसनीय सेनिक अफसर थे-सशस्त्र सेना से भरा एक ट्रक उनकी जीप के आगे था, दूसरा पीछे ।

इन सबको कर्नल तोम्बो का बाडीगार्ड समझा जा सकता था ।

तानाशाहों-या ऐसे व्यक्तियों को, जो किसी मुत्क में वहां की जनता के खिलाफ पड़े हों-ऐसे ही या इससे भी ज्यादा इन्तजाम करने ~ पडते_हैं-आगे वाला ट्रक धीरे-धीरे गडगडाता.. हुआ खाई के ऊपर से गुजरा -फिर जीप और उसके बाद पीछे वाला ट्रक भी लोहे की चादर रौंदता हुआ दरवाजा पार करके किले की चारदीवारी में प्रविष्ट हो गया ।

घड़घडाते हुए सभी सैनिक ट्रकों से कूद पडे-टिड्डी. दल के समाचार चारों तरफ़ फैल गए-कुछ ऐसे अन्दाज मानो प्रत्येक क्षण उन्हें हर तरफ़ से कर्नल तोम्बो को गोली से उडाए, जाने की पूरी सम्भावना हो ।

कर्नल तोम्बो जीप से निकला ।

साथ ही बॉडीगार्ड थे --- बॉंडीगार्ड उससे दूर थे, परंतु पूरी तरह घेरे हुए…इस तरह कि इस खुले स्थान में भी उनकी इजाज़त बिना एक चिडिया तक त्तोम्बो के निक्ट नहीं पहुच 'सकत्ती थी l

मेजर रेक के एक व्यक्ति ने उसे जोरदार सैल्यूट दिया ।

"हेलो मेजर मुकाम्बो ।" कर्नल ने हाथ आगे बढाया…"यहां सब कुछ ठीक है न? ।"

"फाइन सर ॥ " हिटलरी मूछो वाले मुकाम्बो ने गर्मजोशी के साथ हाथ मिलाते हुए जबाब दिया ।

“कोई दिक्कत?"

“नो सर I"

~ इसी किस्म की बात करते हुए वे साथ चल दिए-दूर तक नजर आ रहे मेदान में वे चहलकदमी स्री करते बढे चले जा रहे थे…क्रर्नल के साथ आए सैनिकों का एक घेरा-सा उनके साथ बढ रहा था । उधर-दाईं तरफ़ कुट्टी काटने जैसी मशीन के हत्थे को पकडे वो सेनिक उसे पूरी ताकत से बाईं तरफ को घुमाने में व्यस्त हो गए । जजीरे दो बडे-बडे वेलनो में लिपटने लगीं और उसी अनुपात में लोहे की चादर का शीर्ष वाला सिरा खाई के उस पार से उठकर हवा में झूलता . हुआ दरवाजे के शीर्ष की तरफ बढने लगा I बेलन से जजीरें दरवाजे के शीर्ष वाले दो किनारों की तरफ़ चली गई थीं…वह्य दो मोखले थे…मोखलॉ में बडी-बडी चर्खिया लगो थी…जजीरें उसी चर्खियों पर से लिपटकर किले की दीवार के उस पार लोहे की चादर के शीर्ष वाले सिरों पर बघी हुई र्थी । इस वक्त चर्खिया वापस घूम उठी थी ।

उन पर से होती हुई जजीरे' बेलनों पर लिपट रही थीं…दरवाजा पूरी तरह बन्द हो गया…बेलन और चर्खियों के बीच जजीरों' में तनाव उत्पन्न हो गया ।

कर्नल तोम्बो मुकाम्बो से बात करते हुए काफी दूर निकल गए ।

सैनिक घेरा बराबर उनके चारों तरफ था ।

एक घण्टे तक यह दल विशाल किले में घूमता रहा…किले की पाचो मजिलों पर गया था वह…सभी मजिलों पर जाने के लिए सीढियों के अतिरिक्त किले के भीतर महल की परिक्रमा-सी करता हुआ एक चढाई वाला मार्ग भी था-वेसी ही सडक जैसी पहाडों के ऊपर चढने के लिए बनाई जाती है । कदाचित सङक इमाम्मुद्दीन ने किसी तोप आदि को आसानी से किले की प्रत्येक मंजिल पर पहुचाने के लिए बनाई थी-पूरा दल इसी सडक के जरिए किले की. पाचवीं मजिल पर पहुच गया l एकाएक कर्नल तोम्बो ने कहा-हम तुमसे बिल्कुल अकेले मे ~ कुछ बातें करना चाहते हैं मेजर ।"

"जी कहिए…यहा कोई नहीं है-आपके सभी बॉडीगार्ड भी हमसे

काफी दुर हे I"

"तुमने इण्डियन एजेण्ट डबल एक्स फाईव के वारे में तो सुन ही लिया होगा?" .

"यस सर…लेकिन, जो सुना हे उसने हमे हेरत में डाल दिया ।वह एक प्रकार. से सराकर की मदद के लिए आया था, किन्तु. . इस विषय में मैं खुद आपसे कुछ जानने केलिए बेचैन था, मगर साहस न कर सका ।"

"यह तों फिलहाल हम भी नहीं जानते कि उसने ऐसा क्यों किया, किन्तु . . ।"

“ किन्तु?”

" सूचना मिली हे कि उसने रक्त तिलक के साथ मिलकर किले से वेन उडाने की योज्जना बनाई है I"

“क. . .क्या?" एक बार को तो मेजर उछल पड़ा.…"“वेन उडाने, की योजना?" . . .

फिर वह स्वय ही सामान्य हो गया-वल्कि हसने लगा…हंसता हुआ ही बोला…“किले से वेन उडाने की योजना सर-कमाल है--- हंसी आती हे-लोग ऐसी मूर्खतापूर्ण बात भी सोच लेते हैं ।” .

"इसमे हसी की क्या बात हे?"

"हसी की तो बात ही है सर-चाद पर पहुंचना सम्भव था, इसीलिए लोग चाद पर पहुच गए, किन्तु किले से वेन उडाना. चाद' पर पहुचने जैसा आसान नहीं हे-यदि वे ऐसा सोच रहे है तो निचिंत रूप से उन्हें अपने प्राणों से बोरियत महसूस होने लगी है…वेन अपने स्थान से एक' इच' भी नहीं हिल सकेगी और उनमे से एक भी जिन्दा नहीं बचेगा I"

"ऐसा दावा -तुम कैसे कर सकते हो?”

“कमाल है सर…आप ही की देख.-रेख मेँ. तो वेन की हिफाजत के इन्तजाम हुए हैँ-आप सब जानते. . . I"

“फिर भी-हमेँ यह नही सोचना चाहिए कि वैन को यहां से कोई उडा ही नहीँ सकता I"

अपने अफसर को थोडा गम्भीर एवं चितित' देखकर मुकाम्बो ने भी वेसी ही सूरत बनाई औंर बोला-" क्या मतलब है सर ?"

कर्नल ने उसे विकास के बारे में बह सब कुछ बताया जो वह स्वयं महसूस करता था…साथ ही टेप के बारे में बताया जिसकी वजह से स्कीम लीक हुई थी । सब कुछ बताने के बाद बोला-"इन्तजार्मों से मैं खुद भी उतना ही सन्तुष्ट हूं जितने तुम या गार्जियन-इसका सबसे बड़ा सबूत तो ये है कि हिफाजत के जो इन्तजाम हैं, उनसे बढकर मैं काफी कोशिश कै बाद भी कुछ नहीं सोच पाया हूं…सिर्फ इतना ही कहना चाहता हू कि यह वैन उनके बहुत काम की है, अत: इसे हासिल करने के लिए वे जान की बाजी लगा सकते हैँ और बैसी स्थिति में हमेँ लापरवाह नहीं रहना चाहिए-यदि एक बार वेन उनके हाथ लग गई तो फिर उन पर काबू करना नामुमकिन हो जाएगा । अत: हमें हर. क्षण मुरतैद और सतर्क रहना चाहिए I"

" जो हुक्म सर ।"

"अपनी योजना के मुताबिक वे लोग रात के दस बजे के बाद वेन क्रो किडनैप करने वाले हैं-दिमाग से सोचो-"हिफाजत के जो इलजाम' हे,उनके अलावा तुम ओंर क्या कर सकते हो ?"

कईं पल तक वह शात खडा… रहा…मुद्रा दिमाग पर जोर डालने वाली ही थी-फिर वह एकदम चुटकी बाजाता हुआ बोला…"एक . . काम और हो सकता है !"

"क्या?-"

“ड्राइवर तो चौबीस. घटे तक अपने कक्ष मेँ बन्द रहता ही है… क्यों न मैं तुरन्त ही -उन आठ सैनिकों, क्रो भी वैन के बड़े हिस्से में बन्द हो जाने का हुक्म दे दूं -वे अभी से पूरे चौबीस घटे के लिए वेन के अन्दर जाकर दरवाजा अन्दर से बन्द कर लेगे…चोबीस घटे तक यहीँ स्थिति रहेगी…उन्हें सख्ती के साथ हुक्म दिया जाऐगा कि किसी भी कीमत पर दरवाजा न खोले-वेसी स्थिति में वैन पर कब्जा होने का , कोई सवाल ही नहीं रह जाता…यदि कोई गडबड… हुई तो फिर बख्तरबंद गाडी उनके होश उडा देगी I"

“गुड ।” कर्नल तोम्बो की आखें चमक उठी-“लेकिन चौबीस. घटे में कम…से-कम एक बार उनके लिए खाना आदि l"

"कह दिया जाएगा सर कि इमरजेंसी है-चौबीस घण्टे बिना खाए ही रहना पडेगा. l”

"वेरी गुड i" कर्नल तोम्बो खुश होते हुए बोले…"'तुम ऐसा ही करो मेजर…हम पूरी तरह आश्वस्त हैँ-लेकिन सारा काम तुम्हें इस तरीके से करना हे कि कम-से-कम व्यक्तियों को पता लगे…अगर दुश्मन को यह सदेह भी हो गया कि हम कोई विशेष तैयारी कर रहे हैं सारा मामला बिगड जाऐगा । उन्हें वेन में बद हो जाने का हुक्म तुम हमारे किले से बाहर चले जाने के बाद दोगे और कोशिश यह करना कि उन आठ के अलावा नवे सैनिक को यह इल्म तक न हो क्रि वे किसलिए, वेन मे बन्द होने जा रहे हैं?"

“आप फिक्र न करे सर !"

♣♣♣♣♣

किले का द्धार पुन खोला गया । ~

कर्नल तोम्बो औंर उसके साथ आया काफिला उसी स्थिति में बाहर निक्ला-यानी आगे सैनिकों से भरा एक ट्रक-बीच में जीप पीछे पुन ट्रक ।

तोम्बो. के साथ आए लगभग सभी सैनिक ट्रकों में लदकर बाहर चले गए किंतु जिसका भी यह विचार था बिल्कुल गलत था ।

दरअसल किले में आए चार सेनिक` कफिले के साथ किले से बाहर नहीं गए थे…उनमें से दो एक ट्रक में आए थे और दो दुसरे ट्रक में।

वे चारों दूसरी मजिल के एक सुनसान कोने मेँ खडे थे ।

उनमें से एक के मुह से विकास की आवाज़ निकल रही थी----“मेज़र साहब और करीम चाचा यहा से सीधे किले के दरवाजे पर जाएगे…आप दोनों को वहीँ रहना है-मैँ समझता हूं कि आपको अपना काम अच्छी तरह याद होगा I"

"फिक्र मत करो बेटे ।"

"फिर भी…एक बार आप मुझे बताए कि आपको क्या करना है? ”

मेजर हाशमी ने कहा…“दीवान-ए-खास खास की तरफ से फायरिंग

की आवाज़ उभरते ही हमेँ उन जजीरो पर फायर करने हैं, जो चर्खी

और बेलन के बीच हवा में तनी रहती हैं l"

" आपको कौन-सो जजीर पर फायर करना है?" विकास ने पूछा ।

" बाई I”

"और आपको करीम चाचा?”

“दाई ।"

"गुड-यह याद रखने बाती बात है…दोनो जजीरों' पर लगभग एक ही समय फायर होना चाहिए ताकि लोहे की चादर एक ही झटके में गिरे और किसी के कछ समझ में आने से पहले ही किले के दरवाजे पर फिक्स किवाड खाई का पुल वन जाए…लोहे की चादर बहुत विशाल एव भारी है अत उसके इस ताफ गिरने पर बहुत जोरदार धडाम की आवाज होगी…क्रोई और समझ पाए या नहीं मगर हम इस आवाज का कारण, समझ जाएगे-यह आवाज़ सुनने के बाद ही मैं वेन को उस साफ लाऊंगा-याद रहे-मैं उस वक्त तक वैन को दरवाजे की तरफ नहीं लाऊगा जब तक कि घडाम की आवाज न सुन लूगा ।"

" ठीक है I"

"पुल बनाने के बाद से वैन के वहां पहुंचने तक आप ,दोनों को पुल की हिफाजत करनी है-वे सेनिक, जिनका काम किसी भी ताह की गडबड… होते ही लोहे की चादर को नष्ट कर देना है, किसी दस्तीबम से पुल को न उड़ा पाएं…आपका सघर्ष उन्ही क्षणों में जबरदस्त है I बाहर की तरफ से पुल की हिफाजत सरदार, रहीम और सुल्तान आदि ही कर रहे होंगे-याद रहे, पुल सबसे महत्वपूर्ण है…यदि वही न रहा तो वेन के साथ हम चारों भी किले में कैद होकर रह जाएगे ।"

"खुदा ने चाहा तो हम पुल को कोई नुक्सान नहीं पहुचने देंगे I"

"वैन के वहां पहुचते ही तुम्हें झपटकर वेन के बड़े हिस्से में दाखिल हो जाना है ।" …

"अब तुम सुनो मुमताज ।" विकास ने मर्दाने-से नजर आने वाले एक सैनिक की तरफ़ घूमकर कहा---"तुम्हें वेन के समीप सही समय पर नीबू लेकर पहुचना है…उघर मैं वैन स्टार्ट करूगा, इधर एक ही जम्प र्में तुम…।"

"दोहराने से कोई लाभ नहीँ--मुझे सब कुछ याद है ।"

“फिर भी अपने-अपने काम को रट लेना बहुत जरूरी है, क्योंकि किसी की हल्की-सीं भूल या टाइमिंग की गडबड… सारी योजना को चौपट कर सकती है…वेन के बडे हिस्से में दाखिल होकर तुम्हें हरगिज उसका दरवाजा बन्द नही करना है. क्योंकि अगर एक बार दरवाजा बंन्द हो गया तो फिर वह तुमसे नहीं खुलेगा-हमेशा कै लिए कैद होकर रह जाओगी उसमें-बड़े हिस्से में मोजूद रहकर तुम्हारा सिर्फ एक ही काम होगा--किसी सैनिक को उसमें न आने दो-ओ के !"

"ओ.कै. ।” . .

"अब हमें पता लगाना है कि ड्राइवर का खाना कौन ले जाता है?" विकास ने मुमताज से पूछा-“तुम्हारा मेकअप बॉक्स तो सुरक्षित है न?”

“फिक्र मत्त करो ! " मुमताज बडे ही मोहक अन्दाज़ में मुस्कराई I

ॐॐॐॐॐ
 
"ठीक है सर ॥" वेन के ड्राईविंग कक्ष में बैठे ड्राइवर ने मेजर मुकाम्बो से कहा…"चौबीस घटे का मतलब ये है कि कल सुबह का, यानी सिर्फ एक समय का खाना नहीं मिलेगा प्राब्लम नहीँ मैँ रह लुंगा, लेकिन...।"

" लेकिन....?"

"शाम हो रही हे…पाच बजे हैं I” उसने अपनी कलाई में बंधी रिस्टवाॅच पर नज़र डालते हुए कहा…“हालाकि मेरे शाम के खाने का समय छह बजे है; लेकिन आप कह रहे हैं कि इसी समय से चौबीस घटै के लिए बन्द रहना हे…आप शाम का खाना तो भिजवा रहे हैं न?”

" ओ.के. ओ.के. I” मेजर मुकाम्बो हस पडा......" भिजवा रहे है !"

"थैक्यू l" ड्राइवर मुस्कराया ।

फिर एकाएक ही मुकाम्बो ने चेतावनी-सी दी…“लेकिन याद रखना-शाम को. खाने के बाद कल शाम छह बजे से पहले तुम्हें किसी भी रिथति में दस्वाजा नहीं खोलना है ।”

"आप बेफिक्र रहे सर ।"

“ओ.कै.!" कहने के साथ ही वह गद्दी पर वेठे-वैठे घूमा और वेन के बन्द दरवाजे के दाईं तरफ मोजूद नम्बर लॉक के नम्बर फिक्स करने लगा…यह लॉक नौ अर्को का था और सारे. मजलिस्तान मे तीन ही व्यक्ति नम्बर जानते थे।

कर्नल तोम्बो-मेजर मुकाम्बो और ड्राइवर ...

अन्तिम नम्बर फिक्स करते ही 'खटाक' से स्टील की एक, चादर शटर की तरह वैन की छत में समा गई…रिक्त स्थान बन गया और … मेजर उसी में से बाहर कूद गया I

उसके कूदते ही ड्राइवर ने शटर… में लगे हैंडिल को पकडकर नीचे की तरफ खींचा…एक ही झटके में शटर "खट्ट" से अपने स्थान पर फिक्स हो गया ।

नम्बर लॉक की चकरियों ने स्वयं ही घूमकर सारे नम्बर गुडमुड कर दिए ।

ॐॐॐॐॐ

वे आठों, चार-चार के दो ग्रुप बनाए ताश खेलने में व्यस्त थें ।

एकाएक ही उनमें से एक ने मेजर को कमरे के अन्दर कदम रखत्ते देखा-हाथ के ताश तुरन्त फेकता हुआ फुसफसाया. . ."म..... मेजर साहब यहां?"

बाकी भी चौंके-ताश फेंके…अगले ही पल वे न सिर्फ उछलकर खडे, हो गए, बल्कि एडिया बज उठी…सैल्यूट देने के बाद वे सावधान की मुद्रा में अकडकर खडे. हो गए ।

मुकाम्बो धीमे से मुस्कराया, बोला-“तुम सब इसी समय 'मेस' मे जाकर खाना खा लो I”

"जो हुक्म सर-लेकिन इस वक्त?”एक ने पूछा।

"इस खाने कै बाद चौबीस घटे तक तुम्हे कोई खाना नही मिलेगा ।"

"क्या हमे सवाल करने की इजाजत है सर?”

"जरूर ।"

"हमें क्या करना है यानी अगले चौबीस घण्टों में हमें एक बार भी खाना क्यों नहीँ मिलेगा?"

मेजर मुकाम्बो ने उन्हें सक्षेप में सब कुछ समझा दिया…साथ ही यह भी कहा कि उन्हें किसी भी अन्य सेनिक को इस बारे में कछ नहीं बताना है-यह सुनकर उन सबको आश्चर्य ही हुआ था कि वैन के किडनैप हो जाने का खतरा है…अंत में मेजर ने कहा…"मैस इंचार्ज से

कहना कि ड्राइवर का खाना इसी समय पहुचा दे ।"

" क्या ड्राइवर को भी आज चौबीस घण्टे तक भूखा रहना पडेगा सर?"

" हां I"

" उनमे से एक सैनिक ने हिचकते हुए कहा-"यदि इजाजत हो तो एक बात पूछूगा?"

"जरूर पूछो I"

"यह ठीक हे कि हमें बैन मैं बन्द रहना है लेकिन क्या जरूरी है कि भूखे रहे-हम कल सुबह का खाना लेकर भी तो वेग के अन्दर जा सकते हैं I"

उसकी इस बात पर शेष सातो हस पडे-मुक्राम्बो भी बगैर मुस्कराए नहीं रह सका बोला…"हमें तुम लोगों को भूखा रखने का शौक नहीं हे-ऐसा हो सकता था किन्तु यदि ऐसा किया जाए तो सभी आसानी से समझ जाएंगे कि तुम लोग कम-से-कम चौबीस घटे के लिए वेन मे वंद हो गए हो जबकि यह रहस्य खुलने नहीं देना है ।"

" ओह । थैक्यू !"

ॐॐॐॐॐ

" आज क्या वात हे भईं?" मेस इचार्ज ने उन्हें देखते ही कहा-" आज समय से पहले आठो मेस मेँ क्यों घुसे आ रहे हो-तुम.. लोग तो सात. बजे खाना खाते हो न?” "

"मर आज अभी खाना हे I" उनमे से एक ने कहा।

हसते हुए इचार्ज ने पूछा…"क्यों-…आज क्या खास बात हो गई?”

" भूख जल्दी लग आई है!"

" आठों को हीं?” कहकर वह जौर से हस पडा।

एक बोला…“बात ये है इचार्ज साहव कि मेजर साहब ने हुक्म दिया है क्रि आज सात बजे के बजाय हम अभी खाना खा ले और हां, ड्राइवर का खाना भी भिजवा दो. ।"

"उसका खाना तो छह बजे जाएगा I"

"यह भी मेजर साहब का हुक्म हे I" .

"कमाल है…आज अजीब हुक्म दिए हैं मेजर ने…उन्होंने शायद पहले कभी किसी क्रो समय से पहले खाना खाने का हुकम नहीं दिया । वह भी सिर्फ उन्हें जिनके इचार्ज मे वेन रहती हे-कोई लम्बा ही लफड़ा मालूम पडता, हे-किले से बाहर कहीँ उत्पात मचाने जाना है क्या?”

“मेजर साहब ने वज़ह नहीं बताई I”

"खैर-मुझे क्या-अपुन का काम खाना खिलाना है-अरे ओ मेक--खाना लगा और फिर जल्दी से आन्द्रे को बुलाकर ला-आज ड्राइवर का खाना जल्दी जाना हे-मेज़र साहब का हुक्म है ।”

ॐॐॐॐॐ

"हेलो आन्द्रे ।" दीवान-ए-खास के बाहर नियुक्त बहुत-से सैनिको में से एक ने उसे देखते ही कहा-"आज़ जल्दी कैसे…अभी तो छह नहीं बजे हैँ न?"

“मेजर साहब का हुक्म है कि आज ड्राइवर जल्दी खाना खाएगा l" कहता हुआ आन्दे थाली संभाले उनके बीच से गुजरता चला गया I सिर्फ यही नहीं, बल्कि रास्ते में अनेक जगह उससे यही सवाल किया गया था और उसने हर जगह बिना रुके यही जवाब दिया ।।

वह दरवाजा पार करके दीवान-ए-खास के अन्दर चला गया ।

तभी गेलरी में तैनात सैनिकों ने आवाज सुनी । …

"अरे आन्द्रे-तुम नींबू भूल गए हो l" हाथ में नीबू लिए वह सेनिक आन्द्रे के पीछे…पीछे लपका चला जा रहा था, किन्तु आन्द्रे ने यह आबाज़ नहीं सुनी-गैंलरी में पहुचते ही नींबू वाले सेनिक को रोक लिया गया, पूछा…“क्या बात है? "

"य. . .यह नींबू-वहां मेस में आन्द्रे नींवू भूल आया है I" सेनिक ने जल्दी से कहा-"ड्राइवर बिना नीबू कै खाना नहीं खाता ।"

एक सैनिक ने कहा-"यह सच कह रहा है-बिना नींबू के वह ड्राइवर का बच्चा मर जाएगा-उसे नीबू पहुचा दो-आन्द्रे को भूलने की आदत तो नहीं है, जाने आज कैसे भूल गया?,"

“जाओ ।" उसका रास्ता छोड दिया गया l

नींबू हाथ में लिए सेनिक तीर की तरह लपका ।

ॐॐॐॐॐ
 
सफेद स्टील की चमचमाती हुई वेन दीवान-ए-खास के बीचोबीच खडी थी । सचमुच वह किसी जोंगे के आकार की ही धी ।उसे ध्यान से देखता हुआ आन्द्रे के रूप मे विकास थाली संभाले निरन्तर इसी की तरफ बढता रहा…वेन के चारों तरफ़ नियुक्त सैनिक ने उससे वही सवाल किया--रटा-रटाया जवाब देता हुआ वह वेन के कक्ष की तरफ़ बढा ।

अपने पीछे से उभरने वाली अपने नाम की पुकार उससे सुन ली थी किन्तु यह हकीकत किसी पर भी जाहिर किए बिना वह बढता ही चला गया ।

कक्ष के दरवाजे पर पहुचकर दस्तक दी ।

तभी पीछे से आवाज उभरी-"अरे आन्द्रे-तुम वहा नींबू भूल आए ।

"अरे ।" उसने घूमकर चौंकने का अभिन किया-"ले आओ ।"

वह सैनिक जो वास्तव में मुमताज थी नीबू लिए तेजी से आगे बढी…दीवान-ए-खास में मोजूद किसी भी सैनिक ने उसे नहीं रोका । कदाचित वे चक्कर समझ चुके थे ।

इधर मुमताज बिकास के नजदीक पहुची-उधर ड्राइवर ने अन्दर से दरवाजा खोल दिया…मुमताज` ने नींबू थाली मे रख दिया-उस क्षण बिकास ने मुमताज के हाथ को बुरी तरह कापते देखा ।

पीछे से ड्राइवर की आवाज गूंजी ।

थाली हाथ में लिए विकास तेजी से धूम गया-खुले दरवाजे के पार गद्दी पर बेठे ड्राइवर ने थाली पकडने के लिए दोनों हाथ 'बाहर निकाल रखे थे…विकास क्रो लगा कि मुमताज घबरा रही है…उसकी घबराहट न सिर्फ सारा खेल ही बिगाडती बल्कि उनकी जान भी ले सकती थी ।

समय बहुत कम था।

ड्राइवर ने थाली पकड ली…विकास धीमे से बोला--"क्विक मुमताज ।" .

मुमताज एकदम जमीन पर लेट गई ।

धाय वातावरण मैं एक फायर की आवाज़ गूजी --ड्राइवर की चीख दुर . तक फैलती चली गई--यह गोली थाली के नीचे छुपे विकास के दाए हाथ मैं दबे रिवॉल्वर से निकलकर ड्राइवर की जाध मैं घुस गई थी ।

थाली फेंककर विकास ने रिक्त स्थान मे जम्प लगा दो । यहीँ वह पल था जबकि मुमताज वेन के नीचे लुढक गई । रेट. . .रेट. . .रेट. . .

एक साथ अनेक गर्ने गरज उटीं । किन्तु-ऐसा होने से पहले ही ड्राइविंग कक्ष का शटरनुमा दरवाजा खटट' से बन्द हो चुका था-अन्दर पहुचकर ऐसा विकास ने किया था । सव कुछ बडी तेजी से हुआ ।

एक पल के सोवे हिसेसे ड्राइवर की जाघ पर फायर करने के साथ ही विकास ने रिक्त स्थान मेँ से उस पर जम्प लगा दी थी और अन्दर पहुचते ही उसने सबसे पहले शटर गिराया ।

"क कौन हो तुम?" चीखता हुआ ड्राइवर उससे लिपट गया ।

ज़गह बहुत कम थ्री --- विकास को अब बाहर से किसी खतरे की फिक्र

नहीं थी इसलिए ड्राइवर की पसली पर रिवॉल्वर रखकर गुर्राया मुझे छोडो वर्ना गोली मार दूगा ।

" मुझें मारकर तू इस कैबिन से निकल नहीं सकेगा हरामजादे ।" कहने के साथ ही वह बिकास के हाथ से रिवॉल्वर छीनने की कोशिश करने लगा ।

यह सच था-विकास उसे मार नहीं सकता था ।

बैन के बाहर से निरंतर गोलियों की आवाज आ रही थी । जगह बहुत कम थी इसलिए विकास ड्राइवर पर अपना कोई दाव नहीं दिखा सका था-जवकि ड्राइवर चीचडी के समान उससे लिपट गया । अचानक ही विकास के कंधे में दात गडा दिए उसने-विकास के होंठों से सिसकारी सी निकली ।

फिर उसने सिर की भरपूर टक्कर ड्राइवर की नाक पर मारी I

ड्राइवर चीखकर पीछे हटा…उसके सिर का पिछला हिस्सा कक्ष की दीवार से टकराया r तभी विकास ने अपने हाथ मे दबे रिवॉल्वर कै दस्ते का वार उसकी कनपटी पर किया ।

एक चीख के साथ वह लुढक गया-निर्जीव-सा पड गया वह ।

तभी… धडाम ।।

एक जबरदस्त धमाका-ऐसा कि जिसने किले कै जरे जरे को हिलाकर रख दिया । बिकास को समझते देर नहीं लगी कि मेजर और करीम चाचा अपना काम कर चुके हैं-सेमिनेरियन सेनिक लोहे के पुल को उड्राने की कोशिश करेंगे और मेजर तथा करीम चाचा उसे बचाए रखने की ।

तब तक जब तक कि वेन वहां नहीँ पहुच' जाएगी ।

समय बहुत कम था-जित्तना ज्यादा समय लगना था उतनी ही पुल के नष्ट हो जाने की सभ्रावना ज्यादा थी-आसपास निरन्तर पग्यर्रिग, की आवाज गूज रही थी । ~

अचानक ही बिकास के दिमाग में सवाल रेगा--क्या मुमताज बडे हिस्से मे पहुच गई हैं?

शायद हा-शायद नहीँ ।

कुछ कहा नहीं जा सकता था-यांदे वह वेन के अन्दर नहीँ पहुची होगी तो निश्चित रूप से मर चुकी होगी परन्तु उसे इस वक्त मुमताज 'के बारे में नहीं सोचना था-बह चाहे मरे या जिए-फिलहाल उसे यहा से वेन लेका भागना था ।

वही उसने किया-इजन स्टार्ट ।

विण्ड स्कीन के स्थान पर जाली लगी हुई थी-बिकास को जाली के पार देखने में कोई दिक्कत नही आइं-सामने खडे कई सैनिक वेन

के नीचे की तरफ़ गोलिया बरसा रहे थे । उसने लाल बटन दबाया ।

सामने होती गोलियों की बोछार अपनी आखों से देखी और साथ

ही देखे चीख-चीखकर मरते हुए सैनिक-विकास ने गाडी गेयर में . डालकर रेस दी ।

वेन तीर की तरह दीचान-ए-खास के दरवाजे की तरफ़ लपफी ।

ॐॐॐॐॐ

वेन के नीचे लुढकत्ते, समय ही मुमताज ने कंधे से गन उतार ली

थी…उसके नीचे पहुचते ही उस तरफ़ से कई गने गरज उठी जिधर से वह आई थी किन्तु वह जानती धी कि वेन के नीचे वह सुरक्षित है । पहियों के कवर गोली को उस तक नहीं पहुचने दे सकत्ते थे ।

बैन के नीचे ही वह फुर्ती से पिछले हिस्से की तरफ़ रेगी…तभी उसने किसी को जभीन पर लेटते देखा-वह पिछली तरफ़ से लेटकर उस पर गोली चलाना चाहता था । …

यह खतरनाक बात थी ।

इस तरफ़ से गोली सचमुच से लग सकती थी अत उसने ठिठककर गन सीधी की और उसके फायर करने से पहले ही गोली दाग दी…शिकार का चेहरा चींथर्डों मे बदल गया ।

वेन स्टार्ट हो चुकी थी । अब-मुमताज को खतरा हुआ कि अचानक ही वेन चल न पड़े ।

बैन द्वारा अपना स्थान छोड़ देने का अर्थ था-उसके जिस्म मे सैकडों गालियों… का धंस जाना…यह सोचकर कि अब वेन किसी भी क्षण आगे बढ़ सकती है, वह तेजी से रेंगी ।

तभी.-उसने एक सेनिक क्रो खुले दरवाजे से वेन के बडे हिस्से में जम्प लगाते देखा-साथ ही धम्म धम्म की आवाज उसके ऊपर गूंजी । मतलब यह कि एक सैनिक वेन के अन्दर पहुच चुका था ।

या खुदा…वह कम्बख्त दरवाजा बन्द न कर ले-यदि उस बेवकूफ़ ने दरवाजा बन्द कर लिया तो गजब हो जाऐगा-दरवाजा बन्द न भी किया तो अब वह वेन के अन्दर कैसे जाऐगी-बैन के अन्दर मौजूद सैनिक उसके वहा कदम रखते ही उसे भून देगा ।

वह क्या करे ?

तभी घम्म-धम्म की आवाज ।

एक और सेनिक वेन के अन्दर पहुच गया था…उफ-अब क्या होगा-ये लोग तो वेन के अन्दर घुसते जा रहे हैं-एकाएक ही उसके दिमग्ग मेँ विचार कौंधा कि क्यों न वह भी इन्हीं की तरह वेन के अन्दर जम्प लगा दे…पहते क्षण तो वे उसे अपना साथी ही समझेंगे ।

बस उसी क्षण का लाभ मुझे उठाना है ।

तभी…किले का दरवाजा. गिरने की जोरदार आवाज । वेन गियर मे डली l

मुमताज. छिपकली की तरह एकदम घूम गई ।

वेन एक झटके से आगे बढी…वैन का पिछला सिरा अपने ऊपर से हटते ही वह उडने वाले साप की तरह फ़र्श से उछलकर हवा में लहराई फिर भी-एक गोली उसके बाजू में लगी । उस वक्त वह हवा में थी।।

मुंह से चीख निक्ली और उसका

जख्मी जिस्म चलती हुई वेन के खुले हुए दरवाजे को पार करके वेन के फर्श पर जा गिरा ।

वेन ने रफ्तार पकड ली थी । वही हुआ-यानी पहले क्षण वेन के अन्दर मौजूद सैनिकों ने उसे अपना ही साथी समझा…अगले क्षण वस्तुस्थिति समझते ही उन्होने गन सीधी की ।

मुमताज अपनी गन सीधी भी नहीं कर सकी थीं कि' रेट रेट गोलियों की यह बाढ दीवान-ए-खास के बाहर वाली गैलरी से देन के अदर आई क्योंकि वेन इस वक्त गेलरी से ही गुजर रही थी ।

दोनों सैनिक बदकिस्मती से दरवाजे के सामने थे और मुमताज पर कोई फायर करने से पहले ही चीखते हुए गिर पडे ।

मुमताज वेन के फर्श पर चिपकी रही । बाहर से आने वाली गोलियों की वाढ उसके दुश्मनों को मारती हुई उस हिस्से की दीवारों से टकराई-

फिलहाल किस्मत ने उसे बचा लिया था-वैन भागी जा रही थी । चारो तरफ से गनों का शोर उभर रहा था । जख्मी होने के बावजूद वह रेगी…खुले हुए दरवाजे के समीप 'वाली दीवार के पास पहुची और फिर…वह उसी दीवार के सहारे खडी हो गई…उसके हाथ में दबी गन किसी भी क्षण उस दुश्मन पर गरजने के लिए तैयार थी जो खुले दरवाजे का लाभ उठाकर चलती वेन में घुसने की कोशिश करे-इस ववत्त उसे अपने जख्म मेँ होने वाली पीडा का कोई अहसास नहीं था ।

ॐॐॐॐॐ
 
योजना के मुताबिक मेजर हाशमी और करीम चाचा महल के उस हाँल में चले गए थे जहा बहुत-स्री जीपें खडी थी-उन पर किसी ने भी सन्देह नहीं किया क्योंकि उन्हीं की तरह इधर-उधर अन्य बहुत-से सैनिक भी निरउद्देश्य घूम रहे थे।

ये शायद वे सैनिक थे जिनकी इस वक्त ड्रयूटी नही थी l मौका देखकर हाल मेँ खडी जीपों में से एक में छुप गए थे…फिर दीवान-ए-खास की तरफ से पहले फायर की आबाज सुनते ही यह जीप तीर की तरह हाॅल से निकल कर किले के दरवाजे की तरफ लपकी-ड्राईबिग हाशमी कर रहा था और पीछे गन सभाले बैठे थे करीम चाचा!

. फायर की आवाज ने सारे मेदान में खलबली-सी मचा दी ।

फिर…उघर से गने गरजने की आवाज़ गूजी ।

चारों तरफ-बिल्कुल ही अफरा-तफरी का-सा दृश्य उपस्थित हो गया…शायद इसी वजह से किसी ने उनकी जीप पर ध्यान नहीं दिया…जीप को दौडते बहुत-से सैनिकों ने देखा था किन्तु कदाचित उन्होंने इसे फायरिंग पर सैनिक कार्यवाही ही समझा होगा ऐसी तो वे कल्पना भी नही कर सकते थे कि इस जीप में दुश्मन होगा ।

जीप सिर्फ दो मिनट में किले के दरवाजे के पास दीवार से सटकर

रुक्र गई…फिर हाशमी और करीम चाचा जीप ओर दीवार के बीच उतर गये ।

उसी समय हाशमी ने एक सेनिक को अपने दातों' से हैंडग्रेनेड का सेफ्टीपिन खींचते देखा…हाशमी समझ गया कि निदेंशानुसार दीवान-ए-खास की तरफ से फायरिंग' की आवाज. सुनते ही वह किले के दरवाजे को नष्ट करना चाहता है ।

अभी सेफ्टीपिंन हटाकर उसने अपना हाथ हवा में उठाया ही था कि-मेजर हाशमी की गन बुरी तरह खास उठी ।

न सिर्फ हैंडग्रेनेडधारी बल्कि उसके आसपास मौजूद अन्य सेनिक भी धराशायी हो गए-इधर करीम चाचा ने भी अपनी गन का ,जबड़ा खोल दिया-मेदान में मौजूद बहुत-से सेनिक बिछ गए ।

पहली बात तो यह कि जीप के पीछे से अचानक ही होने वाली अन्धा धून्ध फायरिग ने उन्हें बौखला दिया…यह तो वे सोच भी नहीं सकते कि जीप में दुश्मन है-दूसरे मैदान में कहीँ भी पोजीशन लेने के लिए कोई जगह नहीं थी I

गोलियों की पहली ही खेप पर ज्यादातर सेनिक मारे गए । . . जो बचे, वे जल्दी से लेटकर जमीन पर चिपक गए । फिर-एक साथ ही करीम चाचा और हाशमी की गनों से निक्ली गोलियों ने उन जजीरों' को तोड दिया, जिन्होने लोहे की चादर को किवाड़ के रूप में रोक रखा था ।

जजीरे खनखनाकर टूट गईं ।

धडाम की जोरदार आवाज के साथ किवाड पुल में बदल गया'।

दरवाजे के आसपास और मैदान में मोजूद सैनिक बौखला गए । उनकी समझ मे नहीं आया कि तीन मिनट के अल्प समय मे ही यह क्या हो गया हे?

मेदान की तरफ से बहुत-सी गोलियां हाशमी' और करीम चाचा पर झपटीं, किन्तु, उनके जिस्म तक एक भी न पहुच' सकी-सभी उस जीप की बाडी' में धस गई जिसे पहले ही वे अपनी आड बनाने के लिए यहां लाए थे-वे किले की दीवार और जीप के ठीक बीच मेँ थे… हाशमी पिछले पहिए की'वेक में बैठा था और करीम चाचा अगले की।

एक. गेंद जैसी वस्तु मेदान से उछलकर हवा में नाचती हुई जीप पर झपटी ।

मेजर हाशमी की गन से निक्ली गोलियां हवा में ही उससे जा टकराई.-वह दस्ती वम था, जो एक विस्फोट के साथ हवा में ही फट पडा, l

अब-किले के बाहर भी जग छिड चुकी थी । उन्हें जजीरों' में फायर किए अभी केवल दो मिनट ही गुजरे थे कि दीवान-ए-खास की तरफ़ से तेजी से दौडकर मेदान में आती वेन चमकी ।

वेन को देखते ही मैदान की जमीन से चिपके सैनिक एकदम उठ खडे हुए-मेदान में ऐसी भगदड मच गई जैसे चींटियों के झुड पर तेल डाल दिया गया हो ।

हाशमी और करीम चाचा ने भी वेन की तरफ देखा-अगले भाग से बाहर निकली चार गने सारे मेदान मे गोलिया बरसा रही थी…वेन निक्ट आई । हाशमी और करीम चाचा का ध्यान चूका I

एक हैंड ग्रेड किले का दरवाजा पार करके लोहे कै पुल पर जा गिरा । कर्ण भेदी विस्फोट ।

एकमात्र पुल के परखच्चे उड गए । .

ॐॐॐॐॐ

वे सभी जानते थे कि किसी गोली या दस्तीबम से वेन को लेशमात्र भी नुकसान पहुचने वाला नहीं हे-फिर भी पागलों की तरह यहा-वहा छपे वैन पर गोलिया बरसा रहे थे ।

कई बेवकूफो ने तो जोश में अपने दस्तीबम तक नष्ट कर लिए ।

वेन पर किले की दूसरो तीसरी मजिलों से भी गोलिया बरसाई जा रही थीं मगर वेन के सामने कोई नहीं पड रहा था क्योकि चार गने लगातार आग बरसा रही थी ।

चमचमाती वेन ने सारे मेदान में एक चक्कर लगा दिया ।

पीछे का दरवाजा अभी तक खुला हुआ था…दरवाजे की आड में खडी थी…मुमताज I . हालाकि बैन की गति ही इतनी तेज थी कि' खुले दरवाजे को पार करके वेन कै अन्दर आना बहुत कठिन था फिर भी-ऐसे किसी दुस्साहसी को हलाक करने के लिए मुमताज खडी थी I

वह स्वय नहीँ गिन सकी कि उसने कितने सैनिक मारे ।

उधर ड्राविंग सीट पर बेठे विकास क्रो अपने सामने का दृश्य साफ चमक रहा था…अघिकांशत रास्ता साफ ही मिला । उसे सिर्फ सामने की स्थिति मालूम थी…पीछे या साइडों की नहीं ।

अब-किले के बाहर भी जग छिड चुकी थी । उन्हें जजीरों' में फायर किए अभी केवल दो मिनट ही गुजरे थे कि दीवान-ए-खास की तरफ़ से तेजी से दौडकर मेदान में आती वेन चमकी ।

वेन को देखते ही मैदान की जमीन से चिपके सैनिक एकदम उठ खडे हुए-मेदान में ऐसी भगदड मच गई जैसे चींटियों के झुड पर तेल डाल दिया गया हो ।

हाशमी और करीम चाचा ने भी वेन की तरफ देखा-अगले भाग से बाहर निकली चार गने सारे मेदान मे गोलिया बरसा रही थी…वेन निक्ट आई । हाशमी और करीम चाचा का ध्यान चूका I

एक हैंड ग्रेड किले का दरवाजा पार करके लोहे कै पुल पर जा गिरा । कर्ण भेदी विस्फोट ।

एकमात्र पुल के परखच्चे उड गए । .

ॐॐॐॐॐ

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ॐॐॐॐॐ
 
वे सभी जानते थे कि किसी गोली या दस्तीबम से वेन को लेशमात्र भी नुकसान पहुचने वाला नहीं हे-फिर भी पागलों की तरह यहा-वहा छुपे वैन पर गोलिया बरसा रहे थे ।

कई बेवकूफो ने तो जोश में अपने दस्तीबम तक नष्ट कर लिए ।

वेन पर किले की दूसरी तीसरी मजिलों से भी गोलिया बरसाई जा रही थीं मगर वेन के सामने कोई नहीं पड रहा था क्योकि चार गने लगातार आग बरसा रही थी ।

चमचमाती वेन ने सारे मेदान में एक चक्कर लगा दिया ।

पीछे का दरवाजा अभी तक खुला हुआ था…दरवाजे की आड में खडी थी…मुमताज I . हालाकि बैन की गति ही इतनी तेज थी कि' खुले दरवाजे को पार करके वेन कै अन्दर आना बहुत कठिन था फिर भी-ऐसे किसी दुस्साहसी को हलाक करने के लिए मुमताज खडी थी I

वह स्वय नहीँ गिन सकी कि उसने कितने सैनिक मारे ।

उधर ड्राविंग सीट पर बेठे विकास क्रो अपने सामने का दृश्य साफ चमक रहा था…अघिकांशत रास्ता साफ ही मिला । उसे सिर्फ सामने की स्थिति मालूम थी…पीछे या साइडों की नहीं ।

1

~~~~~

4

~~~~~

0

~~~~~

उसने एक कर्णभेदी विस्फोट के साथ पुल कै परखच्चे उडते देखे ।

बिकास एकदम दातों पर दात जमाकर ब्रेको पर खडा हो गया ।

चीखती…चिघाडती वेन दरवाजे के बीचो बीच जाम हो गई-यद्रि यह… ब्रेक लगाने में एक क्षण की भी देर कर देता या पूरी ताकत से ब्रेक न लगाता तो बेन खाई में होती ।

उसने जल्दी से गेयर बदला।

गाडी बैक क्री…यही क्षण था जबकि पीछे से वेन पर गोलिया बरसी ।।

मुमताज बहुत जोर से ब्रेक लगाने के कारण खुद का वैलेस न रख सकी फर्श पर गिर गई थी , क्रिन्तु थी दवाचाजे की वेक में ही ।

अत बाहर से झपटने वाली गोलिया बेकार गई ।

तभी…वेन झटके से पीछे हटी ।

पीछे भगदड मच गई l

मुमताज ने द्रात भीचे-गन सीधी की और ट्रेगर दबा दिया ।

रेट...रेट.. .रेट .

जाने कितने सैनिक लाशों में बदल गए…कितने जख्मी हुए अगले ही पल वापष लौटती वेन लाशों या जख्मीयों में कोई भेदभाव किए बिना सबको रौंद गई ।

~ इसमेँ शक नहीं कि सामने मौजूद स्थिति ने विकास जैसे लडके की पेशानी पर चिन्ता की लकीरें, खींच र्दी-उसकी समझ में नहीं आया कि अब क्या होगा…सारी स्कीम घरी रह गई थी ।

वही हो गया जिसका डर था ।

अब…इस वैन के बूते पर किले के अदर वे भले ही चाहे जितना आतक मचा ले…सारे किले को लाशों से पाट दें…परन्तु वेन के साथ ही अब वे खुद भी किले में कैद होकर रह गए हैँ-बडी तेजी से स्टेयरिंग घुमाते उसने वैन को टर्न दिया ।

वेन वापस की तरफ दोड्री ।

सारा मैदान खाली-पड़ा था…किसको मरना था, जों वेन के सामने आए-हां दाएं-ब्राएं, पीछे और ऊपर से अभी भी वेन पर गोलियां बरसाईं जा रही थी ।

1

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4

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1

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तनी…किसी माईक पर आवाज गूंजी-"हमारा एक बहादुर सिपाही लोहे की चादर के परखच्चे उडा चुका इस वेन के लिए किले से बाहर जाने का कोई रास्ता नहीँ है…झुझलाहट में दुश्मन किले के अन्दर ही उत्पात मचा सकता है वेन पर गोलियों का असर नहीं होगा अत फायरिंग बन्द कर दें और किले के ऐसे स्थानों पर जा छुपे जहा यह वेन में लगी गोलिया न पहुच, सकें-इन्हें बाहर निक्लना पडेगा-भूखे-प्यासे ज्यादा दिनों तक अदर नहीँ रह सकेंगे ।"

यह आवाज मजर मुकाम्बो की थी ।

वेन पर होने वाली फायरिंग एकदम बन्द हो गई । ~

ड्राइविंग' कक्ष में बैठे बिकास ने भी यह आवाज स्पष्ट सुनी ।जबडे स्वय ही कसते चले गए…बेबसी के अन्दाज़ में बिकास दात पीस उठा…फिर. वेन को मैदान में घूमाता हुआ उस जीप की तरफ़ ले गया जिसके पीछे हाशमी. और चाचा छपे हुए थे-उसने बेन का पिछला हिस्सा जीप की तरफ़ कर दिया-हाशमी और करीम चाचा वेन के अन्दर पहुच गए ।

“अरे ।" हाश्मी कह उठा-"तुम्हें तो गोली लगी हे मुमताज?"

“हा ।" मुमताज को पहली बार जख्स में पीडा का अहसास हुआ…मगर....!"

वावय बीच मे ही रह गया ।

वेन का इजन बन्द हो गया था…वे तीनों ही स्टील की उस I मजबूत दीवार को देखने लगे जिसके दूसरी तरफ ड्राइविंग कक्ष था ॥

एकाएक दीवार पर दस्तक हुई फिर विकास की आवाज सुनाई दी…“क्या आप लोग मेरी आबाज सुन सकते हैं?”

" हा ।" करीम चाचा बोले--"हम सुन रहे है विकास बेटे?"

" अभी बैन का दरवाजा अन्दर से बन्द मत करना करीम चाचा ।"

“क्यों बेटे?"

जवाब देने के स्थान पर बिकास ने उल्टा सवाल क्खि… "क्या आप में से किसी के पास हेडग्रेनेड हैं?”

"हां-हैं…क्यों?" '

"गुड ।” विकास की ऐसी आवाज जैसे उसने कोई बहुत बडी समस्या हल कर ली हो ।।

हाशमी बोला--" हमारे पास चार दस्ती बम हैं, मगर दस्ती बमों से

होगा क्या विकास-हम अपने मोर्चे पर असफल हो गए-सारे किए-धरे, पर पानी फिर गया…अब हम इस किले से बाहर नहीं निकल सकते विकास और माइक पर ठीक कहा गया हे-भूखे-प्यासै हम इस वैन ... ।"

"मेरे दिमाग में एक तरकीब है अकल' I”

“त. . .तरकीब?" हेरतबश तीनों उछल पडे-करीम चाचा ने पूछा---

kiran

kiran

1

~~

4

~~

2

~~

" क्या किले से बाहर निकलने की?”

" हां !"

उत्सुकता के कारण तीनों ने एक साथ पूछा… "क्या?”

“तरकीब जरा खतरनाक है…ऐसी कि जबरदस्त एक्सीडेंट कै शिकार होकर. हम इस चूहेदानी में फसे हुए मर भी सकते हैं लेकिन उसके अलावा कोई रास्ता नही हे ।"

"किले के अन्दर मरने से तो कोशिश करते हुए मर जाना अच्छा

है I"

"ठीक है-मैं कोशिश करता हू-फिलहाल दरबाजा बन्द न करें । विकास के इस वाक्य के तुरन्त बाद वेन का इजन स्टार्ट हो गया-एक झटके से वेन आगे बढी…मेजर हाशमी ने फर्श पर पडे एक सैनिक की लाश उठाई और खुले दरवाजे के बाहर उछाल दी-बूडे करीम चाचा ने भी उसका अनुकरण किया ।

मैदान में गिरकर लाशे पीछे छूटने लगीं ।

हाशमी ने मुमताज से कहा…" तुम जख्मी हो बेटीं-लेट जाओ ।"

" आप फिक्र न करे मेजर अंकल-अभी मरी नहीँ हू।"

इस वक्त उसकी पेशानी पर चिन्ता की एक भी लकीर नहीं थी जिसे डबल एक्स फाइव कहा जाता था…बल्कि एक अजीब किस्म की दृढता थी…जबडे भिचे हुए-चेहरा कनपटियो तक सुर्ख-आखे अजीब-से ढग से पथराई हुई …बहुत तेज ड्राइविंग कर रहा था वह ।

बैन पाचवी मजिल तक पहुचने बाली सडक पर चढती चली जा रही थी ।

अब बैन पर किसी भी तरफ़ से फायरिंग नहीं हो रही थी इसलिए विकास ने वेन के अगले हिस्से से बाहर निकली चारों गने भी एक बटन दबाकर वापस खींच ली थी ।

वैन तीसऱी मजिल पर पहुची ।

सडक काफी चौडी थी जिस पर विकास ने वेन को टर्न किया । पिछला भाग किले की दीवार की तरफ था…बैन के रुकते ही हाशमी ने पूछा… "तुम क्या करना चाहते हो विकास-हमे भी तो कुछ बताओं?"

" आपके सामने इस वक्त किले की दीवार है ।" विकास की आवाज ।

हाशमी कुछ समझ नहीं सका फिर भी किले की दीवार को देखता हुआ वह कह उठा…"हा-किंले की दीवार की हम स्पष्ट देख सकते है-सिर्फ बीस फीट दूर है ।"

इस वक्त उसकी पेशानी पर चिन्ता की एक भी लकीर नहीं थी जिसे डबल एक्स फाइव कहा जाता था…बल्कि एक अजीब किस्म की दृढता थी…जबडे भिचे हुए-चेहरा कनपटियो तक सुर्ख-आखे अजीब-से ढग से पथराई हुई …बहुत तेज ड्राइविंग कर रहा था वह ।

बैन पाचवी मजिल तक पहुचने बाली सडक पर चढती चली जा रही थी ।

अब बैन पर किसी भी तरफ़ से फायरिंग नहीं हो रही थी इसलिए विकास ने वेन के अगले हिस्से से बाहर निकली चारों गने भी एक बटन दबाकर वापस खींच ली थी ।

वैन तीसऱी मजिल पर पहुची ।

सडक काफी चौडी थी जिस पर विकास ने वेन को टर्न किया । पिछला भाग किले की दीवार की तरफ था…बैन के रुकते ही हाशमी ने पूछा… "तुम क्या करना चाहते हो विकास-हमे भी तो कुछ बताओं?"

" आपके सामने इस वक्त किले की दीवार है ।" विकास की आवाज ।

हाशमी कुछ समझ नहीं सका फिर भी किले की दीवार को देखता हुआ वह कह उठा…"हा-किंले की दीवार की हम स्पष्ट देख सकते है-सिर्फ बीस फीट दूर है ।"

"दस्ती बमों से दीवार को उडा दो । चकरा गया मेजर हाशमी बोला…"इससे क्या होगा?"

“सबाल मत कीजिए मेजर अक्ल-वक्त कम है…यदि उन्हे मेरे इरादो का इल्म हो गया तो अभी वे आसानी से फिर कोई नई मुसीबत खडी कर सकते हैं । मेजर ने सोचने में एक क्षण भी गवाए बिना जेब से हैंडग्रेनेड , निकाला-दार्तों' से पिन खीची और किसी गेंद कै समान दीवार की तरफ़ उछाला ।

कर्णभेदी विस्फोट ।
 
पत्थरों के बडे-छोटे और नंहे टुकडे हवा मे झन्नाए-जला हुआ बोरब्द उछला-सामने का सारा हिस्सा जबरदस्त गर्द और घुए से अट गया…धुआ साफ होने पर इन तीनों ने देखा…दीवार मे एक काफी बडा मोखला-सा बन चुका था-दूर किले कें बाहर के खेत चमक रहे ।

विकास ने पूछा-"क्या रहा ?"

"एक मोखला-सा बन गया हे ।

"दूसरे दस्ती बम से उसे बड़ा कीजिए ।"

ह्यशमी ने तुरन्त ही दूसरा हैंडग्रेनेड निकाला-विकास के आदेश पर, उसके द्वारा बिना सोचे-समझे पालन करने से स्पष्ट था कि उस लडके मेँ मेजर की कितनी जबरदस्त आस्था बन गई है-मेजर यह समझ चुका था कि विकास जो कुछ करवा रहा है उसके पीछे निश्चय ही कोई पहुँची हुई वजह होगीं ।

दूसरे हैंडग्रेनेड ने दीवार मे बने मोखले को बडा कर दिया।

तीसरे ने और बडा ।

बिकास ने पूछा…"मोखला किले कै दरवाजे जितना बडा हुआ है कि नहीं?”

"दरवाजे से थोडा ही कम है ।"

आखिरी हैंडग्रेनेड भी दीवार पर दे मारो I"

हाशमी ने ऐसा ही किया केबिन की तरफ़ से विकास की आवाज फिर उभरी…" अब बैन का दरवाजा बन्द कर लो…कोशिश करने पर तुम उस नम्बर लांक को खोल तो सकते हो ना..??"

"जिन्दगी में तालो को समझने के अलावा किया ही क्या है बेटे ।" कहने के साथ ही करीम चाचा ने आगे बढकर पिछले शटर जैसे दरवाजे का हैंडल पकडा और नीचे की तरफ खींचा ।

दरवाजा 'खटट से बन्द हो गया ।

बाईं तरफ लगे लाक के नम्बर रिंग गडबडा… गए ।।

ॐॐॐॐॐ

दरवाजा बन्द होने की आवाज सुनते ही विकास ने इज़न स्टार्ट कर दिया…गेयर में डालने के बाद उसे टर्न किया…शीघ्र ही उसने वेन की स्थिति बिल्कुल उल्टी कर दी, यानी_ ड्राइबिग सीट पर बैठा वह किले की दीवार मे बने मोखले को देख सकता था-दीवार के पार उसे खेत और बहुत दूर एक बस्ती भी चमक रही थी-उस मोखले को घूरते हुए विकास ने वेन पीछे हटाईं ।

इतनी जोर, से कि उसका पिछला हिस्सा पिछली दीवार से सट गया ।

बोला…“आप सब लोग वेन के फर्श कै साथ फिक्स कुर्सियां कसकर ,पकड ले I"

"तुम क्या करने जा रहे हो विकास?.”

मगर-विकास ने ज़वाब नहीं दिया . . .जबड़े कसकर भींच लिए थे…उसने बाएं हाथ से गेयर, बदला और अगले ही पल रिवॉल्वर से निकली गोली की तरह वेन मोखले पर झपटी.-पलभर में ही मोखला पार करके किसी तीर की दूसरी तरफ़. किसी तीर की तरह हवा मे सनसनाई । कुर्सियों को जकड़े हाशमी-मुमताज और करीम चाचा ने जब अपना जिस्म उसी तरह हल्का महसूस किया, जैसा झूले पर नीचे की तरफ आते लगता है तो हाशमी… बडबडा उठा…"ओह गॉड…ये लडका है या भूत ...॥"

मुमताज और करीम चाचा भी समझ गए कि वेन इस वक्त हवा में है ।।

उनके दिल दहल उठे ।।

वेन तीसरी मजिल से कूदी थी, इसलिए दीवार की जड़ में बनी खाई की चौडाई. कोई महत्व न रखती थी…सनसनाती हुई वेन खाई से काफी दुर सडक, पर टकराई ।

एक ज़बरदस्त झटका लगा ।

सारी वेन कांप उठी-एक तरफ को झुक गई…मुमताज के कठ' से तो चीख ही निकल पड्री-वेन उलटते-उलटत्ते बची…होश फाख्ता हो गए थे-जब उन्हें कुछ होश-सा आया तो यह महसूस करके वे चकित रह गए कि वेन सडक… पर दौड रही थी । विकास का प्रसन्न स्वर…"हम किले से बाहर आ गए हैं मेजर अंकल और सुरक्षित है !"

ॐॐॐॐॐ

" उफ् -हद हो गई…तीसरी मजिल की दीवार में मोखला करके वेन को वही से कूदा दिया हरामजादे ने ।" कर्नल तोम्बो पागलों की तरह चीख पडा--"अब क्या होगा?"

“सत्यानाश ।" गार्जियन वडबडा उठा ।

" क क्या मतलब?"

" मतलब साफ़ है…हम अच्छी तरह जानते हैं कि वह वेन क्या कर सकती है…अब इस मुल्क में विनाश मचाने से उम्हें कोई सेना भी नहीं रोक सकती वे इस शहर को लाशों से पाट देंगे I” ~

इक्लीस मिमिया उठा…“अब मेरी गद्दी का क्या होगा?"

" खामोश गद्दार कीडे ।" जोश में आपे से बाहर होकर गार्जियन चीख पडा---"यहा हम और हमारे देश की इतनी सेना बारूद के ढेर पर पडी है और तुझे अपनी गद्दी की पडी है ।'"

इबलीस सकपका कर चुप हो गया।

जिस कमरे में वे थे वहा का वातावरण इस वक्त वडा ही अजीब-सा था…तीनों के चेहरे सफेद…हवाइया उड रही थी…आखों मेँ ऐसे भाव ., . थे मानी साक्षात यमराज को अपने सामने खडा देख रहे हौं ।

"हेलो-हेलो । एक ट्रासमीटर

पर बारीक-सा किंतु काफी व्यग्र स्वर उभर रहा था…“हमारे लिए क्या आदेश है सर…प्लीज, हम लोग उलझन में हैं…क्या करें?"

अपने स्वर क्रो सयत स्खने की भरपूर चेष्टा करते हुए कर्नल ने पूछा…"वेनं की क्या स्थिति है?"

" वह टुडला रोड की तरफ दोडी जा रही थी वैन पूरी तरह बन्द है…सभी गने बाहर निकली हुई हे-वेन फायरिंग करती जा रही है । हमारी फायरिंग का उस पर कोई असर नहीँ है ।"

" फायरिंग बन्द कर दो ।"

"यस सर ।"

"फिलहाल सिर्फ उसका पीछा करो-देखना ये है कि बैन की आखिरी मजिल क्या है?”

“ओ कै सर I "

ॐॐॐॐॐ

पहले ही तय कर लिया गया था कि किले से निकलने के बाद वेन को किन सडकौं पर जाना हे l विकास उन्ही सडकों पर वेन को दोडाए चला जा रहा था .... चला जा रहा था…वेन की बारह गने बाहर झाक रही र्थी किन्तु इस वक्त फायरिंग नहीं हो रही थी क्योंकि बाहर से भी वेन पर कोई … आक्रमण नहीं हो रहा था-विकास को सारा रास्ता लगभग साफ़ ही मिला था ।

वेन के पिछले हिस्से में वे तीनो तीन भिन्न कुर्सियों पर बेठे थे । हाशमी और मुमताज दाए…बाए तथा करीम चाचा पीछे l

क्रोने में रखी हुई बहुत बडी स्कीन पर बाहर के दृश्य बिल्कुल साफ चमक रहे थे…स्क्रीन पर वेन के चारों तरफ का दृश्य बिल्कुल स्पष्ट और साफ देखा जा सकता था ।

फुटपाथों पर लोग वेन को हेरत के साथ देख रहे थे-उन्ही मे सशस्त्र सैनिक भी थे । बैन पर कोई भी किसी तरह का आक्रमण नहीँ कर रहा था ।

हा-स्क्रीन पर एक जीप जरूर लगातार नजर आ रही थी । एकाएक करीम चाचा बोले…" वह जीप हमारा पीछा कर रही है I"

" हा I” हाशमी मुस्कराया-“वे इस वेन की आखिरी मंजिल देखना चाहते हैं ।"

मुमताज कह उठी-" कमाल है…हर कदम पर वही हो रहा है जिसकी सम्भावना विकास ने पहले ही प्रकट कर दी थी ।"

मेजर हाशमी के होंठों पर जाने क्यों अर्थपूर्ण मुस्कान उभरी ।

"चौराहा कितनी दूर है?” करीम चाचा ने पूछा ।

"बस…मुश्किल से एक किलोमीटर दूर r"

"क्यों न उसे अपनी गन से वहीँ रोक दू?”

ज़वाब मुमताज ने दिया…"वे गन की रेंज से दूर रहकर पीछा कर रहे हैं करीम चाचा ।"

"ये तो चौराहा भी आ गया l”

जिस वक्त मेजर हाशमी के मुह से उपरोक्त वाक्य निकल रहा था उस वक्त वेन सांय से एक चौराहा पार कर गई-चौराहा पीछे छूटता चला गया तभी दाईं तरफ से तेजी के साथ एक ट्रक उसी सडक पर मुडा जिस पर वे जा रहे थे।

ट्रक सेनिक जीप और वेन कै बीच था I

" ये लो ।" मुमताज क़ह उठी…"'योज़ना के मुताबिक ट्रक ने हमें कवर कर लिया ।"

हाशमी का सन्तुष्ट स्वर-" अब उस जीप को रोकना सरदार का काम है !"

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"ओपफो l जीप का ड्राइवर झुझला. उठा…“ये कम्बख्त टूक बीच में कहा से आ गया?” जीप में एक अफसर-चार सैनिक मोजूद थे ।

वायरलेस पर हेडक्वार्टर को पूरी सूचना दे रहे थे…चौराहे से ~ उनके और बैन के बीच अचानक ही आ जाने वाले ट्रक की रफ्तार वेन -के मुकाबले काफी कम थी…जीप शीघ्र ही उसके निकट पहुच गई किंन्तु ट्रक स्राइड नहीँ दे रहा था।

ट्रक में बहुत सारे ड्रम भरे हुए थे।

जीप के ड्राइवर ने साइड के लिए जोर-जोर से हार्न बजाया ।

साइड तो नहीं मिली-लेकिन हा जाने कैसे ट्रक में भरे ड्रम धडाधड , सड़क पर गिरने लगे-इतनी ज्यादा… तादाद में कि सडक ब्लॉक होने लगी ।

जीप को रूकना पडा ।

"ओह गाॅड ।" अफसर ने माथा पीट लिया…"ये द्रक तो उन्हीं का निक्ला ।

उसके आदेश पर सैनिकों ने ट्रक पर फायर मी किए किन्तु तब तक ट्रक गोलियो की रेज से बहुत दूर निक्ल चुका था।

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"मैं कहता हू दूढो उसे-तलाश करो वेन क्रो धरती नहीं खा सकती-आसमान नहीं निगल सकता । कर्नल तोम्बो ट्रांसमीटर पर हलक फाडकर चिल्ला रहा था-"वे राजधानी मेँ ही कहीं होंगे…अब तक क्रिसी तरफ की चुगी से उसके पार होने की खबर नही आई हे।" कहने कै तुरन्त बाद उसने सम्बन्ध विच्छेद कर दिया-यह सुनने की कोशिश नहीँ की कि दूसरी तरफ़ से भी कुछ कहा गया या नही ?

वह घूमा ।

"क्या रहा?"गार्जियन ने पूछा।

"वेन गायब होगई है !"

" वह तो होनी हीँ थी।"

"क्या मतलब??"

" अब मे समझ गया हूं-सारा काम प्लान किया है उन्होने ।"

“अब तुम समझोगे ही।" कर्नल का कटु स्वर-"उस वक्त तो कह रहे थे कि वेन किडनेप हो ही नहीँ सकती...!

तुम भी तो किले में गए थे…कौन-से तीर मार आए?" गार्जियन गुर्रा उठा…उल्टा अगर यह कहा जाए कि यह सब कुछ तुम्हारी ही वजह से हुआ है तो गलत नहीं होगा ।"

" क्या मतलब?” कर्नल तोम्बो ने आखें निकाली ।

~ “वे तुम्हारे साथ ही किले के अन्दर चले गए थे अपनी सुरक्षा के लिए पूरी फौज लिए फिरते हो…इतना तक थ्यान रखते नहीं कि कितने आदमी ले जा रहे हो और क्रित्तने लौटाकर ला रहे हो-यदि तुम क्लिं के अन्दर जाने की बेवकूफी' न करते तो वेन किडनैप होने की तो बात ही दूर वे किले के अन्दर मी नहीं पहुच सकते थे I"

" त तुम......!"

कर्नल तोम्बो भी गुर्राकर उसे कुछ कहने वाला था कि इबलीस बोल उठा… !आ आपस में झगडने क्या फायदा हैं-जों होना था वह तो हो ही चुका… हे-क्यों न यह सोचें कि अब क्या करें ।"

"अब हम कर ही क्या सकते हैं? " गार्जियन कह उठा l

"मेरे दिमाग में एक तरकीब है ।"

एकसाथ दोनों कह उठे…"तुम्हारे दिमाग में?"

"हां ।"

"क्या?”

"'यह सब कुछ सिर्फ उस हरामजादे विकास की वजह से हुआ है…ठीक है कि रक्त तिलक हमारे लिए एक समस्या बना हुआ था....मगर इतने खतरनाक काम करने की हिम्मत उनकी भी कभी नहीं पडी-यह सब उसी का किया-घरा हे और सबसे अजीब बात ये कि वह यहा हमारे हक में और रक्त तिलक के खिलाफ आया था-अब उन्ही की मदद कर रहा हे-क्या यह शर्म की बात नहीं है किं वह हमारे मित्र देश का जासूस है-क्या सेमिनार भारत से इस सवाल का ज़वाब नहीं मांग सकता ?"

" मगर…उससे समस्या हल कहा होगी ?"

"हमे सेमिनार को खबर करनी चाहिए-सेमिनार भारत से जवाब तलब करेगा…या तो भारतीय सरकार तत्काल अपने डबल एक्स फाइव को वापस भारत बुलाए अन्यथा सेमिनार और भारत के बीच हुआ पच्चीस साल का समझौता रद्द-काहे की दोस्ती रह गई?”

बात दोनों को जची ।

नजरें मिली ।

ॐॐॐॐॐ

भारतीय सीकेट सर्विस के आँफिस यानी गुप्त भवन के बिशेष साउण्ड प्रूफ कमरे मे..........

साउण्ड प्रूफ कमरे में, अपनी रिवॉल्विग चेयर पर बैठे ब्लेक व्योंय के न सिर्फ मस्तक पर ही चिन्ता की ढेर सारी लकीरें खिची हुई थीं, बल्कि सारा चेहरा ही चिन्ता का प्रतिबिम्ब-सा नजर आ रहा था ।

उगलियों में एक सिगार सुलग रहा था जाने कब से उसने उसमे कश नहीं लगाया था-एकाएक ही दरवाजा खुला और आधी-तूफ़ान की तरह अन्दर दाखिल होता हुआ बिजय कह उठा…"क्या बात है प्यारे काले लडके-ऐसी क्या आफत आ गई जिसकी वजह से तुमने रात के इस समय यानी दो बजे हमारा फोन खटखटा दिया…साथ ही यह भी कहा कि इसी समय मिलना जरूरी है?”

“वैठिए सर ॥" ब्लेक व्बाय ने अपने स्वर को सयत एव शात करने की भरपूर चेष्टा की ।
 
बैठते हुए विजय ने पूछा-“किसी दुश्मन मुल्क ने आक्रमण कर दिया हे क्या?”

"नोसर !"

“तो फिर चुहिया के पेट से क्या हाथी का बच्चा पैदा हुआ है?"

" प्लीज सर-मजाक नहीँ ।"

“तो फिर बोलो. न प्यारे-हुआ क्या है?"

ब्लैक ब्वाॅय ने कहा---" कुछ ऐसा हुआ है सर जैसा कि आज से पहले कभी नहीं हुआ था ।!

"जो पहले कभी नहीँ हुआ उसे कभी-न-कभी तो होना ही था । अच्छा हुआ कि आज ही हो गया-वेसे अब तुम्हें यह सिगार ऐशट्रे में मसलकर शुरू हो जाना चाहिए!"

" विकास ने आपकी और मेरी नाक कटवा दी सर ।"

" कम-से-कम हमें तुम्हारी नाक तो सही-सलामत नजर आ रही प्यारे I”

"विकास ने हमारे बिभाग की बल्कि यू कहिए कि सारे मुल्क की नाक कटवा दी ।"

" मगर प्यारे यह तों बताओं कि उसने किया क्या है?” बिजय ने कहा---" अपना दिलजला तो साला जिस दिन से पैदा हुआ है किसी-न-किसी की नाक काटता ही रहता है, लेकिन वे सभी नाकें उनकी काटी हैं, जो इस मुल्क की नाक काटने कै सपने देखा करते थे…उसका हर कदम हिन्दुस्तान की नाक ऊची करने कै लिए ही बना है…फिर भला वह इस मुल्क की नाक कैसे काट सकता है?"

"उसने सारो कसर एक ही झटके मे निकाल ली हे सर...!"

"कैसे ?"

"मजलिस्तान में वह इबलिस सरकार के खिलाफ विद्रोहियों की मदद कर रहा है ।"

" क क्या?" विजय सचमुच कुर्सी से उछल पडा ।

" जी हा !"

" …यह कैसे हो सकता है-नही-दिलजला इतना बेवकूफ नहीं हो सकता…तुम्हें कहीं से गलत रिपोर्ट मिली होगी…रिपोर्ट वाले को चेक करो I"

" स्वय गृहमन्त्री ने हमसे बात की है सर ।" ब्लेक व्बाय बोला---"सारी रिपोर्ट सेमिनार सरकार ने भेजी हे-उनका कहना है कि स्वय प्रघानमन्त्री 'बहुत नाराज हैं ।"

"पूरी रिपोर्ट क्या है?"

“विकास सिर्फ तभी तक राष्ट्रपति भवन मैं रहा जब तक कि डॉक्टर भसीन यहा पहुच गए-उसके तुरन्त बाद से ही वह खुलकर इबलीस सरकार के खिलाफ रक्त तिलक से मिलकर काम करने लगा है…इबलिस सरकार का आरोप है कि वह पहले ही रक्त तिलक से मिल चुका था ।"

"क्या मतलब?"

ब्लेक व्बाॅय जैस तैयार बैठा था…एक ही सास में सब कुछ बताता चला गया…सुनकर बिजय जैसे व्यक्ति के चेहरे पर हैरत एव . .

चिता की लकीरे उभर आई । परन्तु वह शीघ्र ही स्वय को सामान्य दर्शाता हुआ बोला…" अजीब खब्ती लडका है-क्या उसे यह सब करने के लिए वहा भेजा गया था?”

"मेरी इच्छा तो वहा आपको भेजने की थी सर…आप ही ने....!"

" क्या मतलब-क्या तुम्हें पहले से ही किसी ऐसी वारदात की शका थी?"

"नो सर…आपक्रो तौ मैंने सिर्फ इसलिए चुना था क्योंकि आप उससे ज्यादा योग्य हें-जो हुआ है वह तो सोचने की सभी सीमाओं से . वहुत दूर की बात हे-ऐसा भला कौन सोच सकता था कि जिसे इक्लीस सरकार के पक्ष और रक्त तिलक के विपक्ष में भेजा जा रहा हे-वहा वहा पहुचने के बाद ठीक उल्टा करेगा ।"

"लेकिन उसने ऐसा किया क्यों?"

"यही सवाल तो तव र्से मेरे दिमाग ,में भी चकरा रहा है सर . जबाब नहीं सोच सका…इस सवाल का जवाब सिर्फ विकास ही दे सकता हे । ।"

"एक ही क्रारण हो सकता है ।"

"वह क्या?"

"मजलिस्तान में पहुचने के बाद उसने ऐसा महसूस किया हो कि जुल्म इबलीस सरकार कर रही हे…रक्त तिलक वालो को उसने ठीक समझा हो यानी रक्त तिलक में उसने आजादी से पहले के हिंदुस्तानी क्रातिकारी संगठनों की छाप देखी हो ।"

"वजह कुछ भी हो सर-लेकिन हमारे मुल्क की स्थिति बडी अजीब हो गई हैं ।"

कुछ सोचते हुए विजय ने कहा… "बात हमारे भेजे मेँ कुछ-कुछ घुस रहौ है प्यारे…अपने चेले को नेकी के रास्ते पर चलने वालों की मदद करने की बीमारी है…जालिम के खिलाफ़ जेहाद छेड देने का दौरा पडा जाता है उसे…यह सब उसी दौरे का परिणाम लगता है ।"

"म ..मगर सर ॥ "

' "हम समझ रहे हैं प्यारे-लेकिन वह नहीं समझ सकता कि उसकी हरकतों की वजह से अन्तराष्ट्रीय स्तर पर भारत की क्या स्थिति हो सकती हे-सेमिना र से हमारी पच्चीस साल की सन्धि खतरे मे पड सकती है । ”

"सिर्फ इतना ही नहीं सर…विकास की इस हहरकत के कारण हमारे सभी मित्र राष्ट्र नाराज़ हो रहे हैं…दुश्मन राष्ट्र तो दुश्मन हैं ही वे तो हमारी दुविधा पर कहकहे लगाएंगे ही-भारत बहुत जल्दी दुनिया से बिल्कुल अलग-थलग और अकेला पड जाएगा-सारे विश्व में _ हमारा एक भी दोस्त.. नहीं होगा , बल्कि वे ही जो आज हमारे दोस्त हैं, दुश्मनो से मिल जायेगे-बल्कि हमारा एक ऐसा दुश्मन भी हैं जो दुनिया नक्शे से 'हिन्दुस्तान' शब्द. को मिटा देना चाहता है-उसे मौका मिल जाएगा-बिना किसी मदद कै हम इतने दुश्मनों से कैसे....!"

"ऐसा नहीं होगा प्यारे ।

“जो बेवकूफी विकास कर रहा है यदि समय रहते उसे नहीं रोका~ गया तो.....!"

बिजय ने दृतापूर्वक कहा---"उसे हर हालत में रोका जाएगा प्यारे ।"

"इसीलिए तो आपको बुलाया है सर ।"ब्लेक व्बाॅय ने कहा--"क्योंकि आपके अलावा विकास को कोई ताकत नहीं रोक सकती…

कहिए सर, वर्ना अन्तरार्ष्ट्रीय राजनीति मे हम बहुत, पीछे रह ज़ाऐगे ।"

"यहां बैठे रहने से कुछ नहीं होगा प्यारे काले लडकै. ।"

"मैंने आपको मज़लिस्तान भेजने का प्रबन्ध कर लिया है ।”

"गुड, कब जाना है?"

"सुबह दस बजे की फ्लाइट से ।" .

" हाँ ठीक है…तुम गृहमत्री और प्रधानमत्री को आश्वासन दो कि बिकास. बहुत जल्दी लौट आएगा…यही आश्वासन… वे मज़लिस्तान को भी दें…सेमिन्नार से बात करो…उन्हें यह समझाने की कोशिश करो कि सिक्रेट सर्विस ने जिस, अभियान पर डबल एक्स फाझ्व क्रो भेजा… था, वह पूरा हो चुका हे…इस वक्त मजलिस्तान मे जो कुछ हो रहा है वह सब कुछ भारत या भारत का जासूस नहीं बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर सिर्फ विकास कर रहा है…यदि ज़रूरत पड़े तो यह घोषणा भी कर देना कि तुमने विकास को सीक्रेट सर्विस से निलम्बित कर दिया हे-उसका बिभाग या मुल्क से कोई सम्बन्ध नहीं है ।"

"मुल्क से भी?"

"पागल करार देकर उसकी नागरिकता भी भग की जा सकती है I"

"स. .सर?" ब्लैक व्वाय' चकित रह गया ।

_ विजय दृढतापूर्वक कहता ही चला गया…“हम उस गधे की बजह से अपने दोस्तों को दुश्मन. नहीं बना सकते प्यारे काले लडके-यदि वक्त रहते वह नहीं लौटा तो देशद्रोही करार देकर उसे गोली से उडा देना पडेगा,-राष्ट्र की इज्जत, सुरक्षा एव साख को खतरे में डालने का उसे कोई हक नहीं है । यदि वह आवश्यकता से आगे बढा तो हमें राष्टीय स्तर पर यह घोषणा, करनी ही होगी कि बिकास से भारत का कोई सम्बन्ध नहीँ उसके द्वारा किए गए किसी 'भी काम का' उत्तरदायी भारत नहीं हे-उस कम्बख्त को गोली से .उडाना मेरा काम रहा I"

ब्लैक बॉय विजय क्रो देखता ही रह गया…उस विज़य को जिसे विकास से सबसे ज्यादा प्यार था ।

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विकास ने झपटकर ड्राइवर के बाल पकड़े झझोकर भीचचकर गुर्राया-“बोलो जवाब दो, वरना तुम्हारी बोटी-बोटी कर दूंगा , खाल मे भुस भर दुगा' ।"

“मार डालो मुझे I" ड्राइवर भी गुर्रा उठा-"हरगिज नहीं बताऊगा…मेरे बाद सही, लेकिन तुम भी इसी वेन में भूखै-प्यासे मर जाओगे-बिना मेरे बताए तुम इस नम्बर लाक को नहीं खोल सकोगे i हा. . .हा. . हा . . .मैं नम्बर नहीं बताऊगा…मिर डालो मुझे ।"

"तुम्हें मरने क्रोन देगा बेटे !"

ड्राइवर¸ का व्यग्यात्मक स्वर…"तो क्या करोगे मेरा ?”

"ऐसे प्वाइट पर पहुचा दूगा बेटे जहा न कोई तुम्हें मरा हुआ कह सकता है न जिन्दा-तुम सास लोगे…लेकिन सामान्य गति से नहीं ।मरना चाहोगे लेकिन हमारी तरह तुम्हारी रूह भी इस चालक कक्ष के बाहर नहीं निकल सकेगी ।"

-. इस बार वह कुछ बोला नहीं…चुप रहा…सिर्फ विकास को घूरता रहा…वह बेंचनुमा सीट पर बधा पडा था-स्वेच्छा से हिल भी नहीं सकता था-रेशम की मजबूत डोरी मानो उसके हाथ-पैरों में घुस जाना चाहती थी ।

उसके सामने बहुत समीप बैठे बिकास ने जेब से लाइटऱ निकाला

और क्लिक की आवाज के साथ लाइटर के शीर्ष पर नीले रग की लौ उभर आई…लाइटर को उसके चहरे कै चारों तरफ घुमाता हुआ वह बोला…“नम्बर बताओ I"

"हरगिज नहीँ ।"

जबडे भीचकर विकास ने 'लौ' उसकी नाक के अग्रिम सिरे पर स्पर्श कराई-ड्राइवर चीख पडा-मचला किंतु व्यर्थ-"लो से अलग नहीँ हो सका वह…वेल के चालक कक्ष मे गोश्त के जलने की दुर्गन्ध फैलने लगी-नाक के अन्दर के बाल भरभरा जल चुके थे I

विकास उसे इस अनोखे ढग' से टार्वर कर रहा था और ड्राइवर के मुह से निक्लने, वाली मार्मिक चीखें सिर्फ कक्ष में ही नहीं बल्कि कक्ष से बाहर उस समूचे हाल में भी गूंज रही थीं जिनके ठीक बीच में इस वक्त वैन खडी थी ।

चारों तरफ़ से बन्द एक हाँल में I

बैन के बाहर हॉल मे अकेला, सरदार ही था ।

वैन के चारों तरफ चहलकदमी सी कर रहा था वह चालक कक्ष में से उभरने वाली चीखों से ही वह अनुमान लगा सकता था कि अन्दर क्या हो रहा हे ।"

चहलकदमी करता हुआ वह वैन के पीछे पहुच गया था, उसके नजदीक ठिठककर उससे अन्दर से उभरने वाली आवाजें सुनी…हल्की-सी खटर-पटर क्री आवाज बराबर उभर रही थी । फिर उसने धीरे से पुकारा-“मेजर हाशमी ।"

“जी सर ।" बन्द कक्ष के अन्दर से आवाज आई ।।

" क्या कर रहे हो? "

मुमताज जख्मी हो गई थी सरदार…यह बेहोश ही चुकी है । . जिस्म से गोली निकालने के बाद अब इसे फर्स्ट-एड दे रहा हू।"

"करीम चाचा क्या कर रहे है !"

करीम चाचा की आबाज…“लॉंक खोलने की कोशिश कर रहा हू सरदार ।"

"कहां तक पहुचे?”

“लाॅक आठ नम्बरों का है-पहला अक पकडने में सफल हो चुका हूं !"

"गुड क्या लगता है ?"

"थोडा समय लगेगा सरदार लेकिन विश्वास है कि कामयाबी मिल जाएगी ।"

"वेरी गुड करीम चाचा…क्रोशिश करो कि लॉक कम-से-कम समय में खुल. सके ।" कहने के बाद सरदार वहा से हट गया…चालक कक्ष. की तरफ से चीखों की आवाज आनी बन्द हो गई थी । बिंड स्कीन के स्थान पर लगी जाली के नजदीक पहुचकर उसने पुकारा- "विकास I”

" यस....॥ "

"क्या रहा ? "

"बेहोश हो गया है काफी सख्तजान मालूम पडता है लेकिन आप चिंता न करे जुबान मैँ खुलवाकर रहूगा-नम्बर बताने से पहले इसे मरने नहीं दुगा मैं । अगर वह मर गया तो तुम हमेशा के लिए इस कक्ष मे....॥"

" ऐसा नही होगा सरदार…टांर्चंर का मेरे पास एक-से-एक बेहतरीन . तरीका I"

सरदार ने पूछा…"क्या मैं तुम्हारी कोई मदद कर सकता हू?"

" शायद कुछ नहीं…क्योंकि वेन के बाहर और अन्दर मे हजारों मील की दूरी है l"

सच्चाई थी भी यहीँ ।

सरदार उनकी कोई मदद नहीं कर सकता था-विक्रास बिना ड्राइवर की जुबान खुलवाए बाहर नहीं निकल सकता था, जबकि करीम चाचा लॉक से जूझ रहे थे…योजना पर अमल करने से पहले ही वे जानते थे कि ऐसे हालात आएगे-करीम चाचा ने परिश्रम के बाद नम्बर लॉक को खोल लेने और विकास ने ड्राइवर को जुबान खुलवाने का दावा किया था ।

इस वक्त वही क्रोशिश जारी थी।

बेचैन-सा सरदार बैन के चारों तरफ चहलकदमी कर रहा था । वह आशा-निराशा के बीच झूल रहा था-सोच रहा था कि विकास और करीम चाचा कामयाब होंगे या नहीं?

यदि न हुए तो7

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