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Guest
-उसका मन चाहा था कि विकास यू ही बोलता रहे और वह सुनती रहे-हमेशा । उसे वे बातें याद आईं जो उसने जोश में विकास क्रो कही थीं ।
जाने क्यों मुमताज क्रो ग्लानि-स्री हुर्द-जब उसे ये याद आया कि ~ उसने बिकास के मुह पर थूक दिया-था तो मन अपने ही प्रति असीम घृणा से भर गया ।
इस वक्त वह उसी हॉल मेँ थी जहा वेन खडी थी…उसे बिकास का वेन कै अन्दर खैद रहना अच्छा नहीं लग रहा था-वह विकास की सूरत देखना चाहती थी…तरस-सी रही थी वह-इसी हॉल में मेजर हाशमी…रहीम-करीम चाचा और सुलतान भी मौजूद थे…इस वक्त
वंहा सरदार नहीं था…हाल मे सन्नाटा छाया हुआ था ।
चालक, कक्ष में अपनी सीट पर विकास आखे बन्द किए पड़ा था ।
अचानक ही हॉल का एक ढका हुआ दरवाजा खुला और उसके माध्यम से सरदार हाल में दाखिल हुआ-मुमताज सहित सभी सावधान की मुद्रा मे ख़डे हो गए सरदार सीधा वैन की विण्ड स्कीन के स्थान पर लगी जाली कै सामने जाका रुका और बोला… राष्ट्रपति भवन से हमारे एक सदस्य ने जरूरी सुचना भेजी है विकास !"
" क्या ?" विकास ने पूछा ।
"तीन घटे बाद तुम जो कुछ करने जा रहे हो उससे तुम्हें रोकने के लिए तुम्हारे मुल्क ने तुम्हारे गुरु विजय को मजलिस्तान रवाना किया है ।"
" ओह ।" विकास के चेहरे पर गम्भीरता उभऱ आई-“हा ये तो होना ही था ।"
" क्या मतलब?"
विकास ने हल्की-सी मुस्कान कै साथ कहा…"जब मैँ अपने मुत्क के मित्र देश के खिलाफ़ जग का ऐलान करूगा तो मेरा मुल्क और मेरे गुरु तो मेरे दुश्मन बनेगे ही ।"
"तो क्या आप उन हालात में भी अपनी जग जारी रखेंगे?"
"क्यों नहीं?"
" माफ करना-मैंने सुना है कि आप सबसे पहले देशभक्त हैं उसके बाद कुछ और ।"
आपने गलत सुना है…बिकास सबसे पहले नेकी का साथी है I"
“तो क्या तुम अपने गुरु से टकराने के लिए तैयार हो?”
"हालाकि इसकी ज़रूरत नहीं .पडेगी…मेरा अनुमान हे कि मेरी आवाज पर सुनने के बाद उन्होंने यहा आने का निश्चय किया होगा-वे रात से पहले, यहां नहीं पहुचेगे-तीन में से एक घटा बीत चुका है ।दो घटे बाद मै शुरू हो जाऊगा और उम्मीद है कि गुरु के यहां पहुचने से पहले ही इतना कूछ कर गुजरूगा कि यहा आने के बाद उन्हें कुछ करने के लिए होगा ही नहीँ I”
" तुम गलत सोच रहे हो।"
" क्या मतलब?”
“वे एन…सिक्स नामक द्रुतगामी विमाना से रवाना हो चुके हैं और एक-डढ घटे' बाद यहा पहुंच जाएगे।”
“ओह ।" लडके के मस्तक पर चिन्ता की ढेर सारी लकीरे उभर ५ आई । उसने बडबडकर मानो स्वय ही से कहा…" इसका मतलब गुरु टकराने का पूरा निश्चय कर चुके हैं और तीन घण्टे बाद शुरू होने वाली जग उतनी आसान नहीं होगी जितनी. मैंने सोची थी ।"
" क्या सोचने लगे मिस्टर विकास?"
“क कछ नहीं…आंप फिक्र न करो…मै जानता हू कि जो रास्ता मैंने चुना है वही ठीक है…भले ही गुरु सामने आ जाए लेकिन. मैँ अपने पथ ये. विचलित होने वाला नहीं हू ।"
" क्या आप अपने गुरु अपने देश के खिलाफ जग करेगे?”
"बेशक ।"
" हमारे लिए ??"
"आपकै लिए नहीं वल्कि मुल्क के पिसते हुए अवाम के लिए---गुलामी की उन जजारों की तोड डालने. के लिए जिन्होंने इस देश को जकड रखा है ।"
"क्या आप जानते हैं कि आपके कृत्यों' से अन्तर्राष्ट्रिय मच पर भारत की क्या स्थिति हो गई है?"
"मैं पहले से ही जानता था यह सब कुछ. होगा-इसीलिए रेडियो पर बोलकर. मैंने अपने मुल्क की स्थिति स्पष्ट करनी चाही थी…कुछ भी सही, मेरे बिचार से मजलिस्तान में मोजूद सेमिनार की सेनाओं का बिरोध न करके मेरा मुल्क इडलीस सरकार को मौन समर्थन दे रहा है------
जाने क्यों मुमताज क्रो ग्लानि-स्री हुर्द-जब उसे ये याद आया कि ~ उसने बिकास के मुह पर थूक दिया-था तो मन अपने ही प्रति असीम घृणा से भर गया ।
इस वक्त वह उसी हॉल मेँ थी जहा वेन खडी थी…उसे बिकास का वेन कै अन्दर खैद रहना अच्छा नहीं लग रहा था-वह विकास की सूरत देखना चाहती थी…तरस-सी रही थी वह-इसी हॉल में मेजर हाशमी…रहीम-करीम चाचा और सुलतान भी मौजूद थे…इस वक्त
वंहा सरदार नहीं था…हाल मे सन्नाटा छाया हुआ था ।
चालक, कक्ष में अपनी सीट पर विकास आखे बन्द किए पड़ा था ।
अचानक ही हॉल का एक ढका हुआ दरवाजा खुला और उसके माध्यम से सरदार हाल में दाखिल हुआ-मुमताज सहित सभी सावधान की मुद्रा मे ख़डे हो गए सरदार सीधा वैन की विण्ड स्कीन के स्थान पर लगी जाली कै सामने जाका रुका और बोला… राष्ट्रपति भवन से हमारे एक सदस्य ने जरूरी सुचना भेजी है विकास !"
" क्या ?" विकास ने पूछा ।
"तीन घटे बाद तुम जो कुछ करने जा रहे हो उससे तुम्हें रोकने के लिए तुम्हारे मुल्क ने तुम्हारे गुरु विजय को मजलिस्तान रवाना किया है ।"
" ओह ।" विकास के चेहरे पर गम्भीरता उभऱ आई-“हा ये तो होना ही था ।"
" क्या मतलब?"
विकास ने हल्की-सी मुस्कान कै साथ कहा…"जब मैँ अपने मुत्क के मित्र देश के खिलाफ़ जग का ऐलान करूगा तो मेरा मुल्क और मेरे गुरु तो मेरे दुश्मन बनेगे ही ।"
"तो क्या आप उन हालात में भी अपनी जग जारी रखेंगे?"
"क्यों नहीं?"
" माफ करना-मैंने सुना है कि आप सबसे पहले देशभक्त हैं उसके बाद कुछ और ।"
आपने गलत सुना है…बिकास सबसे पहले नेकी का साथी है I"
“तो क्या तुम अपने गुरु से टकराने के लिए तैयार हो?”
"हालाकि इसकी ज़रूरत नहीं .पडेगी…मेरा अनुमान हे कि मेरी आवाज पर सुनने के बाद उन्होंने यहा आने का निश्चय किया होगा-वे रात से पहले, यहां नहीं पहुचेगे-तीन में से एक घटा बीत चुका है ।दो घटे बाद मै शुरू हो जाऊगा और उम्मीद है कि गुरु के यहां पहुचने से पहले ही इतना कूछ कर गुजरूगा कि यहा आने के बाद उन्हें कुछ करने के लिए होगा ही नहीँ I”
" तुम गलत सोच रहे हो।"
" क्या मतलब?”
“वे एन…सिक्स नामक द्रुतगामी विमाना से रवाना हो चुके हैं और एक-डढ घटे' बाद यहा पहुंच जाएगे।”
“ओह ।" लडके के मस्तक पर चिन्ता की ढेर सारी लकीरे उभर ५ आई । उसने बडबडकर मानो स्वय ही से कहा…" इसका मतलब गुरु टकराने का पूरा निश्चय कर चुके हैं और तीन घण्टे बाद शुरू होने वाली जग उतनी आसान नहीं होगी जितनी. मैंने सोची थी ।"
" क्या सोचने लगे मिस्टर विकास?"
“क कछ नहीं…आंप फिक्र न करो…मै जानता हू कि जो रास्ता मैंने चुना है वही ठीक है…भले ही गुरु सामने आ जाए लेकिन. मैँ अपने पथ ये. विचलित होने वाला नहीं हू ।"
" क्या आप अपने गुरु अपने देश के खिलाफ जग करेगे?”
"बेशक ।"
" हमारे लिए ??"
"आपकै लिए नहीं वल्कि मुल्क के पिसते हुए अवाम के लिए---गुलामी की उन जजारों की तोड डालने. के लिए जिन्होंने इस देश को जकड रखा है ।"
"क्या आप जानते हैं कि आपके कृत्यों' से अन्तर्राष्ट्रिय मच पर भारत की क्या स्थिति हो गई है?"
"मैं पहले से ही जानता था यह सब कुछ. होगा-इसीलिए रेडियो पर बोलकर. मैंने अपने मुल्क की स्थिति स्पष्ट करनी चाही थी…कुछ भी सही, मेरे बिचार से मजलिस्तान में मोजूद सेमिनार की सेनाओं का बिरोध न करके मेरा मुल्क इडलीस सरकार को मौन समर्थन दे रहा है------