इस आवाज को सुनकर उछल पड़ा वह…फिरकनी की तरह घूमकर आवाज की दिशा में देखा तो मुह' से आश्चर्य के सागर मे डूबा एकमात्र शब्द निकल पड़ा-"'व. . विकास' I"
" हाथ ऊपर उठा लो गुरू---वर्ना मां कसम, भूनकर रख दूगा ।"
" 'त. . .तुम?" अंलफासे के हाथ खुद ही उठते चले गए… ।
भभकती-धधकती-किस्री भेडिए की-सी गुर्राहट-"हां मैं-आपका शिष्य-आपका बेटा-मैं भी तो कहुं कि गिने-चुने लोगों के अलावा दुनिया में ऐसी कौन…सी नई हस्ती पैदा हो गई जो मल्लयुद्ध में अलफासे गुरु के शिष्य को शिकस्त दे सर्के-ऐसा कौन हो गया जो बीस कदम दूर खड़े प्रतिद्वद्धी के रिवाल्वर की नाल… में गोली ठूंस दे!"
"'म...मगर तुम यहां?" ’
" आपका पीछा करता हुआ पहुचा हू अंकल…मेरे लिए यह सोचने की बात थी कि रक्त तिलक जैसे छोटे और गरीब सगठन के सरदार के पास स्पर्श सुरगें बिछाने का सामान कहां से आ गया-स्पर्श सुरगे. बिछाने का सामान तो भारत जैसे राष्ट्र के पास नहीं हे-केवल दो ही देशों के पास यह समान _हो सकता हे-सेमिनाऱ और खुद को दुनिया का चौधरी कहने वाले पश्चिमी मुल्क पर-उसी समय. यह पता लगाने का कीडा मेरे दिमाग में कुलबुला उठा था कि सरदार के पास, यह सामान कहां से आया?"
हालाकि अब तक बिकास को यहां देखकर अलफासे' जेसे व्यक्ति… के भी छक्के छुट गए थे, किन्तु' शीघ्र ही उसने स्वयं को संभाल' लिया-गुफा के दरबाजे पर खड़े मशीगन ताने विकास को देखकर उसके होंठों पर चिर-परिचित मुस्कान उभरी और बोला …'"तो इसका मतलब यह है कि तुम सब. कुछ जान गए हो?"
" "सब कुछ'! " दांत भीचकर कह उठने के साथ ही बिकास ने कदम आगे बढाये ,, अलंफासे; की तरफ, बढता. हुआ वह कहता ही चला . गया…"मेंने वे बातें सुनी हे गुरु जो आपने ट्रासमीटर' पर पश्चिमी देश
से की-कर्नल गद्दाफी को बिस्कुटो का डिब्बा देते देखा हे-उफ्-मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि आप इतने नीचे भी गिर सकते हैं ।"
"तुम अभी कुछ भी नही जाने हो बेटे! "
"जानने के लिए अब रह ही क्या गया??"
" अभी तो बहुत कुछ रह गया है !" अंलफासे बोला--"अभी तुमने जाना ही क्या है ?"
"मुझे इससे ज्यादा कुछ भी नहीँ जानना हे कि मजलिस्तान मे जो कुछ सेमिनार कर रहा हे-वही पश्चिमी देश भी कर रहा हे-उसकै
नुमाइन्दे यहां आप हैँ-बल्कि उनकी तरफ़ से इस आँपरेशन के सरगना हैँ-सिर्फ पैसे के लिए आप इतने नीचे गिर गए हैं गुरु-धिक्कार हे आप पर…गुरु कहते शर्म आती हे मुझे…सिर्फ पैसे के लिए आप. . . ।"
""न...नहीं हाशमी-गोली मत मारो ।"
अचानक ही जब अलफ़ासे ने ,विकास के पीछे देखकर ऐसा कहा तो विकास गजब की फुर्ती के साथ पीछे धूमा, मगर पीछे कोई भी नहीं था…जिस क्षण विकास के दिमाग में यह विचार कौंधा फि वह चकमा खा गया है, ठीक उसी क्षण अलफासे के बूट की जोरदार ठोकर उसकी कमर पर पड्री-सभलने की लाख चेष्टाओं के बाबजूद भी वह लडखडाकर… पथरीले फ़र्श पर जा गिरा…गन उसके हाथों से निकलकर फ़र्श पर दूर तक घिसटती चली गई ।
हालाकि' विकास ने सभलकर' खड़े होने में अपनी तरफ़ से पूरी फुर्ती का परिचय दिया था, किंतु अलफ़ासे झपटकराव उससे कुछ पहले ही गन उठा_चुका था-विकास के घूमते ही गन तानकर अलफासे कह उठा…" "ना ना-प्यारे-हरकत मत करना-गन हमारे हाथ मे है ।"
" ग. . गुरु आप ।" विकास दात भीचका कसमसाया I
“हा बेटे…अच्छे बच्चों की तरह हाथ ऊपर उठा लो ।"
बिकास अदर-ही…अदर अपनी भूल पर तिलमिला उठा था…हाथ उठाने पड़े उसे, बोला…"गन अपने हाथ में पहुचा जाने का अर्थ यह न. समझना अंकल कि विकास का कभी दाव' ही नहीं लगेगा-मोका लगते ही मैं आपके चेहरे से र्कनल गद्दाफी बाला यह चेहरा नोंच लूगा I"
"मैंने तुमसे कहा था कि अभी. तुम्हें बहुत-सी बातें जाननी हैं ।"
विक्रास उसे घूरता रहा ।
" जब इतना सब कुछ जान ही गए हो तो सुनो-मैं तुम्हें सब कुछ बताता हूं-मुझे यकीन हैं कि सारे हालात विस्तारपूर्वक्त सुनने के बाद तुम्हें यह पता लगेगा कि मजलिस्तान की घरती पर सचमुच तुमसे बड़ा बेवकूफ कोई नहीं हे-सुनो, मजलिस्तान की बदकिस्मती की दास्तान उसी दिन से शुरू हो गयी, जिस दिन इस मुल्क की जनता ने सादात को राष्ट्रपति चुना-सादात से पहले हमेशा इस मुल्क की सर्वोच्च कुर्सी पर ऐसा व्यक्ति बैठा करता था जिसका झुकाव पश्चिमी देश की तरफ होता-कितु सादात एक राष्ट्रपति था जो पश्चिमी देश को अपना---
दुश्मन और सेमिनार को दोस्त समझता था…अतः उसके शासन में यहां पश्चिमी देश के जासूस छापामार युद्ध लडने लगे-वे ही वे कथित विद्रोही थे, जिन्हें कुचलने के लिए सादात ने मजलिस्तान में सेमिनेरियन सेनाओं का स्वागत किया-सेमिनार की सेनाएं क्योंकि बहुत ज्यादा सख्या मेँ आई थीं इसलिए उन्होने आसानी से पश्चिमी देश के जासूसों को कुचल डाला ओंर फ्रिर यहीं कब्जा करके बैठ गईं…उसके बाद की वह कहानी तुम जानते ही ही कि इबलीस को साथ लेकर सेमिनार की सेनाओं ने यहां किस तरीके सें क्या किया I"
" वे सब बातें दोहराकर आप कहना क्या चाहते हैं?"
"सुनते रहो-शायद तुम्हारी समझ मेँ यह बात आ सके कि तुम बड़े मूर्ख हो ।" एक गहरी सास लेने के बाद अलफासे कहता ही चला गया-"'इबलीस सरकार की स्थापना क्योंकि जुल्मो-सितम के बाद हुई थी, इसलिए यहां स्वयं ही कर्नल गद्दाफी-हाशमी और मुमताज के नेतृत्व में देशभक्त युवको का एक दल बन गया…रक्त तिलक-इस दल कै अधिकांश सादात की बेटी को ही अपना सरदार समझते थे…वे नहीं जानते' थे कि उससे ऊपर हाशमी और कर्नल गद्दाफी भी हैं, बल्कि यह राज तो मुमताज भी नहीं जानती. थी कि सरदार की नकाब के पीछे गद्दाफी का चेहरा है-यह राज सिर्फ हाशमी, जानता था और हाशमी ने गद्दाफी क्रो अपने सरदार के रूप में स्वीकार भी महज इसलिए कर लिया था, क्योंकि सेना में गद्दाफी उसका अफसर रह चुका था।"
""फिर?""
" रक्त तिलक. के पास देश पर मर-मिटने के लिए सैकडों दीवाने युवक थे, किन्तु पैसों का अभाव, था…हथियारों की कमी थी…और इन दोनों चीजों के बिना किसी मुल्क मे क्राति' की आग भी जली नहीं रह सकती बेटे-उघर, पश्चिमी मुल्क मजलिस्तान से अपना वर्चस्व खत्म होने के कारण तिलमिला रहा था-उन्हें मजलिस्तान में पुन: अपने पजे जमाने थे और रक्त तिलक से बढिया मीडिया उन्हें कहीँ नजर नहीं आया और उन्होंने कर्नल गद्दाफी से बात की-अपना संगठन चलाने और मुल्क से इबलीस का शासन खत्म करने के लिए गद्दाफी को जिन चीजों की कमी थी, वे सब पश्चिमी राष्ट्र पूरी कर सकता था…कर्नल और हाशमी ने सलाह-मशवरा किया और फैसला पश्चिमी मदद स्वीकार का लेने का हुआ ।"
"क्या आप कहना चाहते हैं कि रक्त तिलक पश्चिमी देश का पिट्ठु था?"
. . " ठीक उसी तरह जिस तरह इबलीस सरकार सेमिनार की पिट्ठू है ।"
"मैं नहीं मान सकता-आप मेरे दिल में रक्त तिलक के खिलाफ जहर नही भर सकते गुरु।"
"नि-'सदेह' मैं लोगों कै मन मे जहर भी भर दिया करता हूं लेकिन इस वक्त कम-से-कम तुम्हारे मन में जहर नहीँ भर रहा हू क्योंकि ऐसा करने से मुझे कोई लाभ नहीं होने वाला है-वह बता रहा हूं जो हकीकत है और यदि तुम उसे जहर भरना समझो तब भी मेरी सेहत पर काईं फर्क पडने_ वाला नहीं हे-हां, तो में यह बता रहा था कि कर्नल गद्दाफी औंर मेजर हाशमी ने सगठन चलाने के लिए पश्चिमी देश की मदद स्वीकार कर ली-पश्चिमी देश के जासूस रक्त तिलक के सदस्यों की पैसे और हथियारों से मदद करने के अलावा ट्रेड भी करने लगे~आज से ठीक एक महीने पहले पश्चिमी देश ने न्यूयार्क में मुझसे सबध स्थापित किया-तुम जानते ही हो कि पैसा… लेकर किसी के लिए भी काम करना मेरा पेशा है…सौदा हो गया-क्योंकि दौलत काफी मिल रही थी-सौंपे गए काम के मुताबिक गुप्त रूप से मै मज़लिस्तान में प्रविष्ट हुआ-पश्चिमी देश के जासूस के बहाने कर्नल गद्दाफी से मिला और बस-गद्दाफी को मैंने उसी तरह दबोच लिया जैसे बिल्ली चूहे को दबोच लेती है-तबसे वह बेचारा उस कोठरी में कैद है और मैँ सरदार हूं-क्योकि हाशमी ,जानता है कि सरदार गद्दाफी है, इसीलिए मुझे अकेले में हाशमी से नकाब उतारकर ही बात करनी होती थी, इसलिए नकाब कै पीछे मैं हमेशा कर्नल गद्दाफी का यह फेसमास्क पहने रहता हूं ।"
" रक्त तिलक पश्चिमी मदद के बूते पर चल रहा है, यह रहस्य सिर्फ दो ही आदमी जानते हे…गद्दाफी और हाशमी?"
" तीसरे तुम हो ।"
"इसका मतलब रक्त तिलक के बाकी सदस्य निर्दोष हैं?"
" यदि तुम इन्हें दोषी समझते हो तो॥"
"खैर-फिर क्या हुआ?"
"सब कुछ ठीक चल रहा था; तभी…पता लगा कि रक्त तिलक के पंजे से डॉक्टर भसीन को निकालने हेतु भारत सरकार तुम्हें भेज रही है-तुम्हारा नाम बीच में आते ही मुझे लगा कि गडबड… होने वाली है......
निश्चय किया कि या तो मैं किसी चतुराई' से तुम्हें भी उसी लाइन पर लगा दूगा , जिस पर रक्त तिलक चल रहा है या बिना 'किसी हुज्जत के डॉक्टर भसीन क्रो तुम्हें सौंपकर निजात पा लूगा ।"
"किंर?"विकास ने उसे घूरा ।
"मझे चाल चलने की ज़रूरत नहीँ पडी-भावुकता में डूबी सादात . . की लडकी ने ही मजलिस्तान में हुए जुल्म. की तस्वीर तुम्हारे सामने कुछ ऐसे अदाज में पेश को कि तुम मजलिस्तान के पिसते` हुए आवाम कै प्रतिनिधि बनकर उठ-खड़े हुए…मैंने निजात पाने के लिए डॉक्टर भसीन को तुम्हें सौंप ही दिया था~उसके बाद, तुम खुद ही मेरी मदद करने लगे-मेरे लिए तो सोने में सुहागा वाली बात.थी…इसलिए रोका नहीं…उधर ट्रांसमीटर पर पश्चिमी देश को यह झांसा' देकर अपनी महत्ता जताता रहा कि मैं तुम्हें मुट्ठी में करके रक्त तिलक के हक में इस्तेमाल कर रहा हूं I” . .
"ओह !"
"तब तुम्हें लौटाने के लिए भारत से विजय चला-मुझे उसकी इनफॉरमेशन भी ट्राभमीटर पर ¸पहले ही मिल गई थी-मै जानता था कि विजय की बात तुम्हारे दिमाग मे नहीं धुस सकेंगी-इसलिए उसे यहां आने दिया…तुम दोनों के टकराव का मजा भी तो लेना था मुझें ।"
कुछ देर तक चुप. रहा विकास-फिर बोला…"खैर-अब यह सब कुछ आप मुझे क्यों बता रहे हैं?"
" अब भी नहीं समझे?"
"नहीं I”
"तुम्हें यह समझाने के लिए कि तुम कितने बड़े मूर्ख हो ।"
विकास की आखें' दायरे में सिकुड. गईं-'"मैंने क्या मूर्खता की है?" .
"तुम मजलिस्तान से इबलीस सरकार को उखाड़ फेकने के लिए
जूझ रहे हो…इसलिए क्योंकि वह शासन मजलिस्तान की जनता पर जुल्म ढाकर स्थापित हुआ हे-इसलिए, क्योंकि मजलिस्तान पर इबलीस की नहीं असल में सेमिनार की हुकूमत है-मजलिस्तान अप्रत्यक्ष रूप से गुलाम है और इसलिए मी क्योंकि मजलिस्तान में सेमिनार अपने जगी अड्डों का निर्माणकर रह्म हे ।"