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धर्मयुद्ध (विजय विकास अंलफासे सीरीज)

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"लेकिन.?"

"स्पर्श सुरगो के लिए तो बहुत-सा सामान चाहिए-जैसे गोतखोरी पोशाकें-इलेक्ट्रिक तार-आई वोल्ट-बारूद्ध लोहा… पीपा-जंजीर-र्सीकर-गन कोटेन-डिनेचर औंर जाने क्या क्या-इन सबके अभाव मेँ स्पर्श सुरगें नहीं बन सकती और यह सारा सामान . . . ।"

"हमारे पास है ।" सरदार ने कहा I

"'है?" विकास का चकित स्वर, किंतु फिर शीघ्र ही सामान्य अदाज' में बोला…" 'यदि है तो फिर देर किस बात की हे-मैं कल रात को ही समुद्र में सुरगे बिछा सकता हू ।”

"जैसा तुम ठीक समझो-आओ, इम तुम्हें सुरगे' बिछाने के लिए आवश्यक सामान दिखा दें-जिन चीजो के तुमने नाम लिए हैं, उन्हीं से जाहिर हे कि तुम जानते हो कि स्पर्श सुरगे क्या होती हैं! "

विकास सरदार के पीछे चल दिया I

सरदार ने जेब से चाबी निकालकर एक बद कमरे का ताला खोला-उस कमरे में मौजूद स्पर्श सुरगों कै लिए जरूरत की हर वस्तु देखकर बिकास की खोपडी, घूम गई ।

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"बड़े अफसोस की बात है मिस्टर विजय I" कर्नल तोम्बो कह रहा था-"इतने सब इतजाम' और आपकी जबरदस्त मेहनत के बाद बिकास पकडा भी गया किंतु' फिर हाथ से निकल गया ।।”

"अजी हाथ से ही तो निकल गया…पैर से तो नहीं निकला ।"

"ज . . .जी-क्या मतलब?"

"मतलब ये बोम्बे मियां कि अब कम-से-कम उनके कब्जे में वेन तो नहीं है---वेन थी तो वे बेधडक, कहीं भी घुस जाते थे, इसीलिए हमे अपने दिलजले से पहले उस साली वेन का इत्तजाम सोचना पडा था…अव सिर्फ दिलजले के बारे में सोचना है-सो सोच लेंगे I”

"जी हा ।" इक्लीस कह उठा------"आपके लिए भला उसका इलाज सोचना क्या मुश्किल है ।"

बिजय ने उसे घूरकर देखा-कुछ ऐसे अदाज में जैसे उसे इबलीस के शब्द नागवार गुजरे हौं-इबलीस्र एकदम सकपका गया…घबराकर उसने ऐसी दृष्टि से गार्जियन और तोम्बो की तरफ देखा जैसे पूछना चाहता हो कि क्या उसने कोई ऐसी बात कह दी है, जो विजय को नाराज कर सके l

अभी उनमें से कोई कुछ बोल भी नहीँ पाया था कि विजय एकदम ठहाका-सा लगाकर कह उठा-"ओह हां, क्या बात कही है आपने-तबीयत ग्लेड कर दी-वह साला हमारे सामने है ही क्या-इसी बात पर हाथ मिलाओ ।"

बिजय ज़बरदस्ती उसका हाथ अपने हाथ में लेकर झटकने लगा-इबलीस को लगा कि बिजय सचमुच क्रैक हे` ।

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अगले दिन…ज़ब विकास कमरे मेँ दाखिल हुआ तो बिस्तर पर लेटी मुमताज ने उठकर बैठने की कोशिश की…बिकास ने लपक्कर उसे कंधों से पकडा. और आहिस्ता से लिटाता हुआ बोला-"लेटी रहो मुमताज-अभी तुम्हें आराम की सख्त जरूरत है ।"

मुफ्ताज सिर्फ मुस्कराकर रह गई ।

विकास ने इस बीच उसके घने बालों के बीच भरी माग को देखा था-माग में भरे सिंदुर को देख जाने क्यों उसे अजीब-सा लगा…फिर सभलकर बोला----"कैसी हो मुमताज॥"

" बिल्कुल ठीक…एक बार फिर दुश्मन के क्लेजे पर दनदनाने के लिए तैयार! !”

बिकास को. लगा कि वह लडकी नहीं…आफत की पुतली है कितु फिर अपने सभी विचारों को दबाकर बोला---" कल तो तुमने मुझे डरा ही दिया था-लगने लगा था कि तुम बचोगी नहीं ।"

मुमताज ने एकदम पूछ लिया--" मेरे मरने से तुम क्यों डरने लगे ??"

इस तीखे प्रश्न पर विकम्स एकदम बौखला गया-तुरत ही उसे कोई जवाब नहीं सूझा ।

मुमताज खिलखिलाकर हस पडी फिर थोडे गभीर स्वर में बोली-----"सच उस वक्त तो मुझे भी लगने लगा था कि मैं नहीं बचूंगी लेकिन बच गई-बडी सख्त जान हू I”

घबराकर बिकास ने विषय बदला-"मैं तुमसे कुछ पूछना चाहता हूं मुमताज I”

" जरूर पूछो ।"

" क्या तुम बता सकती हो कि रक्त तिलक को चलाने… के लिए सरदार के पास इतना धन कहा से आता है-इतने हथियार कहा से आते है ?"

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"कह नहीं सकती, लेकिन. यह सब कूछ हमें; सोचना-भी नहीं है-हमे सिर्फ अपने मुल्क को आजाद कराने से मतलब है-मुमकिन हे कि सरदार कोई बहुत अमीर आदमी हो I"

"चाहे जितने अमीर हों, परंतु स्पर्श सुरगे तक बिछाने का सामान.. . ।"

"क्या तुम सरदार पर किसी. तरह का शक कर रहे हो?"

विकास ने झूठ बोला-"नही-बह तो बस यूं ही…जाने. मैँ क्यों सोचने लगा था?"

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"जीं हां-आपको. बिल्कुल सही इनफारमेशन मिली है I सचमुच

वेन हमारे हाथ से निकल गई हैं ।" पहाड़ के गर्भ में छुपे हाल के कोने में रखे शक्तिशाली ट्रासमीटर सेट पर सरदार ऊची आवाज में कह रहा था-"लेकिन-आपको यह इनफॉरमेशन भी तो मिली होगी कि उससे पहले ही विकास सेमिनार के जगी अड्डे को तबाह. कर चुका था।

"हां-खबर मिल चुकी है…सचमुच, अभी 'तक बिल्कुल ठीक चल रहा था, किंतु हमें वही होता लग रहा है, जिसका डर था, यानी विजय के मजलिस्तान पहुचते ही गडबड… शुरू हो गई है-वैन तुम्हारी एक बहुत बडी ताकत थी-विजय ने पहले ही वार में तुम्हें उससे महरूम कर दिया है कि आगे वह विकास को रास्ते पर लाने. या उसे गिरफ्तार करने में कामयाब हो जाए ।"

"ऐसा नहीं होगा I"

"इतने विश्वासपूर्वक कैसे कह सकते हो?"

"काफी कोशिश के बावजूद भी विजय विकास को रास्ते पर नहीं ला सका-इसी से जाहिर है कि विकास क्रो रास्ते पर लाया जाना नामुमकिन है-रही विकास को गिरफ्तार करके भारत ले जाने वाली बात्त-तो उसके बारे में फिलहाल मै इतना ही कह सकता हूं कि ऐसा नहीं होगा-यदि उसका नाम बिजय है तो मेरा नाम भी अलफासे है-सारी दुनिया जानती है कि किसी भी फन मे विजय मुझसे आगे नहीं हे-मैं ओंर विकास मिलकर हर हालत मे उससे बहुत भारी हैं ।"

"खैर-तुम जानो-अगला प्रोग्राम' क्या है?"

"आज की रात समुद्र में सेमिनार का सेनिक अड्डा टूटकर बिखर जाएगा।"

"यह काम कौन करेगा ?"

" विकास !"

"ओह-क्या तुमने उससे बात कर ली है?"

"हां-वह पूरी तरह तैयार है…सुरंगे बिछाने के लिए आपने जो सामान भेजा था, वह सब मैंने उसे दिखा दिया है-उसे सुरंगे बिछानी आती हैं!! खैर, मैं दावा कर सकता हू कि बहुत जल्दी मजलिस्तान के राष्ट्रपति भवन पर सेमिनार के स्थान पर आपका कब्जा होगा ।"

"उम्मीद तो यही है।"

"उम्मीद नही-विश्वास रखिए ।" कहने कै साथ ही उसने सबंध विच्छेद कर दिया-ट्रासमीटर आफ़ करके पत्थर उसके सामने रखा…उस चबूतरे की तरफ बढा जिस पर उसकी टॉर्च, नकाब और पैट्रोमेक्स रखा था…सारा हाँल पेट्रोमेक्स के दुधिया प्रकाश से नहाया हुआ था ।

उसने पैट्रोमेक्स उठाया और सकरी सुंरग की तरफ़ बढ़ गया । उसे देखते ही कर्नल गद्दाफी जोर-जोर से चीखने-चिल्लाने और गालियां बकने लगा था…वह हसता' रहा-हसते हुए ही उसने जेब से बिस्कुटो का एक डिब्बा निकालकर उसकी तरफ़. बडाते हुए कहा-"लो कर्नल-बिस्कुट खा लो-तुम कमजोर हो गए हो…मुझे गालिया' देने कै लिए जिदा रहना. ज़रूरी है और जिदा रहने के लिए ये बिस्कुट ।"

" तेरी लाश में कीडे पडेंगे. कुत्ते…तू मेरे देश के हजारों देशभक्त युवकों को धोखा दे रहा है ।"

"तुम्हारा वहम है कर्नल…मैं किसी को धोखा नहीं दे रहा हूं-तुम्हारा यह चेहरा पहनकर मैं हर कदम पर रक्त तिलक से सिर्फ वहीँ काम ले रहा हू जो तुम लेते-इबलीस सरकार और उसके आकाओं को उखाड फेंकना ही तुम्हारा लक्ष्य था…मैं वही कर रहा हूं ।"

"तेरी लाश को गिद्ध और कौए नोचेगे पश्चिप्ती मुल्क के चमचे-मेरे साथ मजलिस्तान के अवाम की बददुआएं तुझे जिदा नहीं छोडेगी-चादी के चद सिक्को के बदले तू हजारों को धोखा दे रहा है-खुदा तुझे गिन-गिनकर. तेरे हर गुनाह की सजा देगा ।"

कर्नल गद्दाफी जाने क्या-क्या कहता रहा-जबकि बिस्कुट का डिब्बा उसके सामने फेंकने के बाद वह हाथ ने पैट्रोमेक्स लिए ठहाके लगाता हुआ कोठरी से बाहर निकला-दरवाजा बद काके उसे लॉक किया और सकरी सुरग को पार करके हाँल में आ गया । पैट्रोमेक्स चबूतरे पर रखकर अभी वह घूमा ही था कि ।

" l I ठहरो । I "
 
इस आवाज को सुनकर उछल पड़ा वह…फिरकनी की तरह घूमकर आवाज की दिशा में देखा तो मुह' से आश्चर्य के सागर मे डूबा एकमात्र शब्द निकल पड़ा-"'व. . विकास' I"

" हाथ ऊपर उठा लो गुरू---वर्ना मां कसम, भूनकर रख दूगा ।"

" 'त. . .तुम?" अंलफासे के हाथ खुद ही उठते चले गए… ।

भभकती-धधकती-किस्री भेडिए की-सी गुर्राहट-"हां मैं-आपका शिष्य-आपका बेटा-मैं भी तो कहुं कि गिने-चुने लोगों के अलावा दुनिया में ऐसी कौन…सी नई हस्ती पैदा हो गई जो मल्लयुद्ध में अलफासे गुरु के शिष्य को शिकस्त दे सर्के-ऐसा कौन हो गया जो बीस कदम दूर खड़े प्रतिद्वद्धी के रिवाल्वर की नाल… में गोली ठूंस दे!"

"'म...मगर तुम यहां?" ’

" आपका पीछा करता हुआ पहुचा हू अंकल…मेरे लिए यह सोचने की बात थी कि रक्त तिलक जैसे छोटे और गरीब सगठन के सरदार के पास स्पर्श सुरगें बिछाने का सामान कहां से आ गया-स्पर्श सुरगे. बिछाने का सामान तो भारत जैसे राष्ट्र के पास नहीं हे-केवल दो ही देशों के पास यह समान _हो सकता हे-सेमिनाऱ और खुद को दुनिया का चौधरी कहने वाले पश्चिमी मुल्क पर-उसी समय. यह पता लगाने का कीडा मेरे दिमाग में कुलबुला उठा था कि सरदार के पास, यह सामान कहां से आया?"

हालाकि अब तक बिकास को यहां देखकर अलफासे' जेसे व्यक्ति… के भी छक्के छुट गए थे, किन्तु' शीघ्र ही उसने स्वयं को संभाल' लिया-गुफा के दरबाजे पर खड़े मशीगन ताने विकास को देखकर उसके होंठों पर चिर-परिचित मुस्कान उभरी और बोला …'"तो इसका मतलब यह है कि तुम सब. कुछ जान गए हो?"

" "सब कुछ'! " दांत भीचकर कह उठने के साथ ही बिकास ने कदम आगे बढाये ,, अलंफासे; की तरफ, बढता. हुआ वह कहता ही चला . गया…"मेंने वे बातें सुनी हे गुरु जो आपने ट्रासमीटर' पर पश्चिमी देश

से की-कर्नल गद्दाफी को बिस्कुटो का डिब्बा देते देखा हे-उफ्-मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि आप इतने नीचे भी गिर सकते हैं ।"

"तुम अभी कुछ भी नही जाने हो बेटे! "

"जानने के लिए अब रह ही क्या गया??"

" अभी तो बहुत कुछ रह गया है !" अंलफासे बोला--"अभी तुमने जाना ही क्या है ?"

"मुझे इससे ज्यादा कुछ भी नहीँ जानना हे कि मजलिस्तान मे जो कुछ सेमिनार कर रहा हे-वही पश्चिमी देश भी कर रहा हे-उसकै

नुमाइन्दे यहां आप हैँ-बल्कि उनकी तरफ़ से इस आँपरेशन के सरगना हैँ-सिर्फ पैसे के लिए आप इतने नीचे गिर गए हैं गुरु-धिक्कार हे आप पर…गुरु कहते शर्म आती हे मुझे…सिर्फ पैसे के लिए आप. . . ।"

""न...नहीं हाशमी-गोली मत मारो ।"

अचानक ही जब अलफ़ासे ने ,विकास के पीछे देखकर ऐसा कहा तो विकास गजब की फुर्ती के साथ पीछे धूमा, मगर पीछे कोई भी नहीं था…जिस क्षण विकास के दिमाग में यह विचार कौंधा फि वह चकमा खा गया है, ठीक उसी क्षण अलफासे के बूट की जोरदार ठोकर उसकी कमर पर पड्री-सभलने की लाख चेष्टाओं के बाबजूद भी वह लडखडाकर… पथरीले फ़र्श पर जा गिरा…गन उसके हाथों से निकलकर फ़र्श पर दूर तक घिसटती चली गई ।

हालाकि' विकास ने सभलकर' खड़े होने में अपनी तरफ़ से पूरी फुर्ती का परिचय दिया था, किंतु अलफ़ासे झपटकराव उससे कुछ पहले ही गन उठा_चुका था-विकास के घूमते ही गन तानकर अलफासे कह उठा…" "ना ना-प्यारे-हरकत मत करना-गन हमारे हाथ मे है ।"

" ग. . गुरु आप ।" विकास दात भीचका कसमसाया I

“हा बेटे…अच्छे बच्चों की तरह हाथ ऊपर उठा लो ।"

बिकास अदर-ही…अदर अपनी भूल पर तिलमिला उठा था…हाथ उठाने पड़े उसे, बोला…"गन अपने हाथ में पहुचा जाने का अर्थ यह न. समझना अंकल कि विकास का कभी दाव' ही नहीं लगेगा-मोका लगते ही मैं आपके चेहरे से र्कनल गद्दाफी बाला यह चेहरा नोंच लूगा I"

"मैंने तुमसे कहा था कि अभी. तुम्हें बहुत-सी बातें जाननी हैं ।"

विक्रास उसे घूरता रहा ।

" जब इतना सब कुछ जान ही गए हो तो सुनो-मैं तुम्हें सब कुछ बताता हूं-मुझे यकीन हैं कि सारे हालात विस्तारपूर्वक्त सुनने के बाद तुम्हें यह पता लगेगा कि मजलिस्तान की घरती पर सचमुच तुमसे बड़ा बेवकूफ कोई नहीं हे-सुनो, मजलिस्तान की बदकिस्मती की दास्तान उसी दिन से शुरू हो गयी, जिस दिन इस मुल्क की जनता ने सादात को राष्ट्रपति चुना-सादात से पहले हमेशा इस मुल्क की सर्वोच्च कुर्सी पर ऐसा व्यक्ति बैठा करता था जिसका झुकाव पश्चिमी देश की तरफ होता-कितु सादात एक राष्ट्रपति था जो पश्चिमी देश को अपना---

दुश्मन और सेमिनार को दोस्त समझता था…अतः उसके शासन में यहां पश्चिमी देश के जासूस छापामार युद्ध लडने लगे-वे ही वे कथित विद्रोही थे, जिन्हें कुचलने के लिए सादात ने मजलिस्तान में सेमिनेरियन सेनाओं का स्वागत किया-सेमिनार की सेनाएं क्योंकि बहुत ज्यादा सख्या मेँ आई थीं इसलिए उन्होने आसानी से पश्चिमी देश के जासूसों को कुचल डाला ओंर फ्रिर यहीं कब्जा करके बैठ गईं…उसके बाद की वह कहानी तुम जानते ही ही कि इबलीस को साथ लेकर सेमिनार की सेनाओं ने यहां किस तरीके सें क्या किया I"

" वे सब बातें दोहराकर आप कहना क्या चाहते हैं?"

"सुनते रहो-शायद तुम्हारी समझ मेँ यह बात आ सके कि तुम बड़े मूर्ख हो ।" एक गहरी सास लेने के बाद अलफासे कहता ही चला गया-"'इबलीस सरकार की स्थापना क्योंकि जुल्मो-सितम के बाद हुई थी, इसलिए यहां स्वयं ही कर्नल गद्दाफी-हाशमी और मुमताज के नेतृत्व में देशभक्त युवको का एक दल बन गया…रक्त तिलक-इस दल कै अधिकांश सादात की बेटी को ही अपना सरदार समझते थे…वे नहीं जानते' थे कि उससे ऊपर हाशमी और कर्नल गद्दाफी भी हैं, बल्कि यह राज तो मुमताज भी नहीं जानती. थी कि सरदार की नकाब के पीछे गद्दाफी का चेहरा है-यह राज सिर्फ हाशमी, जानता था और हाशमी ने गद्दाफी क्रो अपने सरदार के रूप में स्वीकार भी महज इसलिए कर लिया था, क्योंकि सेना में गद्दाफी उसका अफसर रह चुका था।"

""फिर?""

" रक्त तिलक. के पास देश पर मर-मिटने के लिए सैकडों दीवाने युवक थे, किन्तु पैसों का अभाव, था…हथियारों की कमी थी…और इन दोनों चीजों के बिना किसी मुल्क मे क्राति' की आग भी जली नहीं रह सकती बेटे-उघर, पश्चिमी मुल्क मजलिस्तान से अपना वर्चस्व खत्म होने के कारण तिलमिला रहा था-उन्हें मजलिस्तान में पुन: अपने पजे जमाने थे और रक्त तिलक से बढिया मीडिया उन्हें कहीँ नजर नहीं आया और उन्होंने कर्नल गद्दाफी से बात की-अपना संगठन चलाने और मुल्क से इबलीस का शासन खत्म करने के लिए गद्दाफी को जिन चीजों की कमी थी, वे सब पश्चिमी राष्ट्र पूरी कर सकता था…कर्नल और हाशमी ने सलाह-मशवरा किया और फैसला पश्चिमी मदद स्वीकार का लेने का हुआ ।"

"क्या आप कहना चाहते हैं कि रक्त तिलक पश्चिमी देश का पिट्ठु था?"

. . " ठीक उसी तरह जिस तरह इबलीस सरकार सेमिनार की पिट्ठू है ।"

"मैं नहीं मान सकता-आप मेरे दिल में रक्त तिलक के खिलाफ जहर नही भर सकते गुरु।"

"नि-'सदेह' मैं लोगों कै मन मे जहर भी भर दिया करता हूं लेकिन इस वक्त कम-से-कम तुम्हारे मन में जहर नहीँ भर रहा हू क्योंकि ऐसा करने से मुझे कोई लाभ नहीं होने वाला है-वह बता रहा हूं जो हकीकत है और यदि तुम उसे जहर भरना समझो तब भी मेरी सेहत पर काईं फर्क पडने_ वाला नहीं हे-हां, तो में यह बता रहा था कि कर्नल गद्दाफी औंर मेजर हाशमी ने सगठन चलाने के लिए पश्चिमी देश की मदद स्वीकार कर ली-पश्चिमी देश के जासूस रक्त तिलक के सदस्यों की पैसे और हथियारों से मदद करने के अलावा ट्रेड भी करने लगे~आज से ठीक एक महीने पहले पश्चिमी देश ने न्यूयार्क में मुझसे सबध स्थापित किया-तुम जानते ही हो कि पैसा… लेकर किसी के लिए भी काम करना मेरा पेशा है…सौदा हो गया-क्योंकि दौलत काफी मिल रही थी-सौंपे गए काम के मुताबिक गुप्त रूप से मै मज़लिस्तान में प्रविष्ट हुआ-पश्चिमी देश के जासूस के बहाने कर्नल गद्दाफी से मिला और बस-गद्दाफी को मैंने उसी तरह दबोच लिया जैसे बिल्ली चूहे को दबोच लेती है-तबसे वह बेचारा उस कोठरी में कैद है और मैँ सरदार हूं-क्योकि हाशमी ,जानता है कि सरदार गद्दाफी है, इसीलिए मुझे अकेले में हाशमी से नकाब उतारकर ही बात करनी होती थी, इसलिए नकाब कै पीछे मैं हमेशा कर्नल गद्दाफी का यह फेसमास्क पहने रहता हूं ।"

" रक्त तिलक पश्चिमी मदद के बूते पर चल रहा है, यह रहस्य सिर्फ दो ही आदमी जानते हे…गद्दाफी और हाशमी?"

" तीसरे तुम हो ।"

"इसका मतलब रक्त तिलक के बाकी सदस्य निर्दोष हैं?"

" यदि तुम इन्हें दोषी समझते हो तो॥"

"खैर-फिर क्या हुआ?"

"सब कुछ ठीक चल रहा था; तभी…पता लगा कि रक्त तिलक के पंजे से डॉक्टर भसीन को निकालने हेतु भारत सरकार तुम्हें भेज रही है-तुम्हारा नाम बीच में आते ही मुझे लगा कि गडबड… होने वाली है......

निश्चय किया कि या तो मैं किसी चतुराई' से तुम्हें भी उसी लाइन पर लगा दूगा , जिस पर रक्त तिलक चल रहा है या बिना 'किसी हुज्जत के डॉक्टर भसीन क्रो तुम्हें सौंपकर निजात पा लूगा ।"

"किंर?"विकास ने उसे घूरा ।

"मझे चाल चलने की ज़रूरत नहीँ पडी-भावुकता में डूबी सादात . . की लडकी ने ही मजलिस्तान में हुए जुल्म. की तस्वीर तुम्हारे सामने कुछ ऐसे अदाज में पेश को कि तुम मजलिस्तान के पिसते` हुए आवाम कै प्रतिनिधि बनकर उठ-खड़े हुए…मैंने निजात पाने के लिए डॉक्टर भसीन को तुम्हें सौंप ही दिया था~उसके बाद, तुम खुद ही मेरी मदद करने लगे-मेरे लिए तो सोने में सुहागा वाली बात.थी…इसलिए रोका नहीं…उधर ट्रांसमीटर पर पश्चिमी देश को यह झांसा' देकर अपनी महत्ता जताता रहा कि मैं तुम्हें मुट्ठी में करके रक्त तिलक के हक में इस्तेमाल कर रहा हूं I” . .

"ओह !"

"तब तुम्हें लौटाने के लिए भारत से विजय चला-मुझे उसकी इनफॉरमेशन भी ट्राभमीटर पर ¸पहले ही मिल गई थी-मै जानता था कि विजय की बात तुम्हारे दिमाग मे नहीं धुस सकेंगी-इसलिए उसे यहां आने दिया…तुम दोनों के टकराव का मजा भी तो लेना था मुझें ।"

कुछ देर तक चुप. रहा विकास-फिर बोला…"खैर-अब यह सब कुछ आप मुझे क्यों बता रहे हैं?"

" अब भी नहीं समझे?"

"नहीं I”

"तुम्हें यह समझाने के लिए कि तुम कितने बड़े मूर्ख हो ।"

विकास की आखें' दायरे में सिकुड. गईं-'"मैंने क्या मूर्खता की है?" .

"तुम मजलिस्तान से इबलीस सरकार को उखाड़ फेकने के लिए

जूझ रहे हो…इसलिए क्योंकि वह शासन मजलिस्तान की जनता पर जुल्म ढाकर स्थापित हुआ हे-इसलिए, क्योंकि मजलिस्तान पर इबलीस की नहीं असल में सेमिनार की हुकूमत है-मजलिस्तान अप्रत्यक्ष रूप से गुलाम है और इसलिए मी क्योंकि मजलिस्तान में सेमिनार अपने जगी अड्डों का निर्माणकर रह्म हे ।"
 
"किसी मुल्क की जनता को गुलाम बना लेने या उसकी सार्वभौमिकता को नष्ट करने का हक किसी दूसरे राष्ट्र को नहीं है....... है-फिर भले ही वह भारत का मित्र राष्ट्र या भारत खुद ही क्यों न हो-यदि खुद भारत ने भी ऐसा ही किया होता तो मैं वही करता जो अब कर रहा हू…यानी धर्मयुद्ध ।"

"इस धर्मयुद्ध का परिणाम` क्या निक्लने वाला है?" अलफासे ने बडी ही गहरी मुस्कान के साथ पूछा यानी माना कि तुम जीत जाते हो-उसके बाद क्या होगा?"

"मजलिस्तान आजाद हो जाऐगा I"

"नहीं-तुम्हारा ख्याल गलत है ।"

" क्या मतलब?"

"मजलिस्तान गुलाम ही रहेगा-यदि तुम हार गए तो सेमिनार का और यदि जीत गए तो पश्चिमी देश का ।"

" नहीं-मेरी जीत की अवस्था में.....॥"

"खुद को बहकाने की कोशिश मत करो बेटे I" अलफासे ने उसकी बात बीच में ही काट दी तुम्हारी. नजर मेँ जो लोग आजादी के लिए जूझ रहे थे असल मे उनके पीछे पचिंश्वी देश था-जरा सोचो कि जब ये लोग कुर्सी पर होगे. तो क्या पश्चिमी देश इनसे मदद की कीमत नहीं मानेगा?" …

" इन्हें राष्ट्रपति भवन तक पहुचने कौन देगा?"

अलफासे हसा बोला---" क्या बच्चों जैसी वात कर रहे हौं-तुम इन्हें रोक लोगे लेकिन जरा सोचो…किस किस को रोक्रोगे तुम-इनका रहस्य तुम्हें आज पता लग गया-जो कल यहा का राष्ट्रपति बनेगा उसके बारे में तुम्हें क्या पता--मुमकिन है कि वह भी दुनिया की किसी महाशक्ति का मानसिक गुलाम हो ?"

विकास चुप रह गया-सचमुच अलफासे की बात का उसे एकाएक ही कोई सही जवाब नहीं सूझा था जबकि अंलफासे कहता चला गया…"जो लडाई तुमने डॉक्टर भसीन क्रो भेजने के बाद मजलिस्तान मे शुरू की उसे तुम धर्मयुद्ध कहत्ते हा-तुम निस्वार्थ भाव हे इस मुल्क की जनता के लिए अपने ही देश के विरुद्ध जद्दोजहद कर रहे हो-इस परिवेश मे निःसदेह यह धर्मयुद्ध है-कितु कई बार ऐसा होता है बेटे कि सही बात कहना और सही रास्ते पर निकल पडना दुनिया की सबसे वडी बेवकूफी होती हे…वही तुम कर रहे ही-ऊपर

की बातों के परिवेश में तुम सबसे बडे मूर्ख हो-जरा सोचो, अनजाने में ही तुम पश्चिमी मुल्क के लिए अपने देश के विरुद्ध काम कर रहे थे-तुम्हारे जिस कृत्य से भारत बदनाम हो रहा था उसके परिणाम स्वरूप मजलिस्तान में पश्चिमी सरकार स्थापित होने बाली है ।"

" मैं समझा नहीं गुरु? "

"सिर्फ इतना ही समझ जाओ बेटे तो काफी होगा कि बिजय ठीक कहता हे…मजलिस्तान जबरदस्त अतर्राष्ट्रिय पालिटिक्स का केंद्र बना हुआ है-तुहें बीच में टाग नही अडानी चाहिए ।"

"इसका मतलब मजलिस्तान हमेशा गुलाम रहेगा?"

"उनके मुक्कद्दर में ही गुलामी हे-इसकी नहीं तो उसकी ।"

"किसी छोटे-से देश को दो महाशक्तियों ने अपनी पालिटिक्स

का केंद्र बना रखा है गुरु…यह तो नाजायज है न-इसके खिलाफ़ तो आबाज उठानी चाहिए !"

"कौन उठाए-किसको पडी' है जो दूसरे के फटे में टाग दे-ऐसा सच्चाई कहने वाले क्रो मूर्ख कहा जाता है औंर अब दुनिया में ऐसे मूर्ख नहीं रहे हैं ।"

"ऐसे मूर्ख आज़ भी हैं गुरु ।" दृढ स्वर ।।

' "विकास!" '

"यदि यह मुर्खंता है तो मैं मुर्खं ही सही गुरु…मैं रक्त तिलक के लिए नही लड रहा हू गुरु मेरी लडाई इस मुल्क की जनता के लिए हे…इस देश में दो महाशक्तियों के बीच चल रही पालिटिक्स के विरुद्ध है…मैं इस पॉलिटिक्स को बद कराकर रहूगा जिसमें मजलिस्तानं की निर्रहि जनता पिस रही है ।"

विकास का ज़वाब सुनने के बाद अलफासे थोडा सोच मेँ पड गया-कुछ देर तक चुप रहा फिर धीमे से मुस्कराकर बोला…" "यकीनन कुछ देर के लिए मैं भी मूर्ख बन गया-मुझें वह कहावत पहले से ही मालूम है किं भैंस के आगे बीन बजाने से कछ नहीं होता हे-फिर भी वही काम करने में अपना समय गबाया-खेर प्यारे-अपन को तो अपना काम करके निकल जाना है और अपना काम फिलहाल तुम्हें भी गद्दाफी के साथ उस कोठरी में डाल देने से होगा-इसलिए चलो I"

बिकास ने घूरकर अलफासे को देखा किंतु अलफासे कै होंठों पर अब भी वहीँ चिर…परिचित्त मुस्कान नाच रही थी…बिकास कसमसाकर रह गया ।

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राष्ट्रपति भवन कै उस बिशेष कमरे मैं बैठा विजय पिछले एक घटे से इबलीस-तोम्बो और गार्जियन के दिमागों का दिवाला निकाले हूए था-बिजय को वैन पर कब्जा करते देख जिस विजय ने उन्हें बुरी तरह प्रभावित कर लिया. था वही अब उन्हें पुन मूर्ख नज आ रहा -अब तो गार्जियन को भी लगने लगा था कि सचमुच सामने बैठे व्यक्ति की मानसिक स्थिति सामान्य नहीँ है-झुझलाक वह अभी कुछ कहने ही बाला था कि-कमरे में सेमिनेरियन सेना का एक मेजर प्रविष्ट हुआ l

" क्या बात है मेजर रूबे ?" कर्नल तोम्बो ने पूछा ।

' "मिस्टर विजय से कोइ मिस्टर अलफासे मिलना चाहते हैँ l”

"अल. . .फासे?" विजय जेसा व्यक्ति एकदम इस तरह उछल पडा, जेसे करंट लग गया हो-उछल पडने_ की बात भी थी- अंलफासे के यहां होने की कल्पना उसने ख्वाब में भी नहीं की थी-वे तीनों उसे आश्चर्य… के साथ देखने लगे-जबकि. बहूत` ही जल्दी विजय खुद को सामान्य करता चला गया बोला---"ओह-अपना लूमड !"

" "ये मिस्टर अत्तफासे कौन हैं मिस्टर विजय?" गार्जियन ने पूछा I

"अपना लूमड भाई है ।"

"हा-यह एक ऐसी चिडिया का नाम है जो जिस खेत में चाहे. दाना चुग लेती' है I" तीनों में से किसी की समझ मे कुछ नहीं आया ।

जबकि बिजय ने रूबे से कहा---"जाओ प्यारे…उसे शाही सम्मान के साथ यहा ले आओ-बडी ऊची चीज है-यदि हम उससे मिलने से इनकार कर दें तब भी वह बिना मिले जाने वाला नहीं है-सारे बघन तोडकर वह अपने' चाहने वालो के पास पहुच ही जाता है ।"

मेजर चला गया l

वे तीनों अलफासे कै बारे में उससे तरह-तरह के सवाल करने लगे…उन्हें ऊटपटांग जबाबो मे उलझाए विजय सोच रहा था कि मजलिस्तान में अलफासे क्या कर रहा हे-उसकी मौजूदगी ही इस बात का प्रमाण है कि मजलिस्तान में कोई लबा चक्कर चल रहा है ।

अभी वह ठीक से कुछ सोच भी नहीं पाया था कि ---

"हेलो-जासूस प्यारे ।" दरवाजे से अलफासे की आवाज उभरी… ।

बिजय ने नारा सा लगाया ।।

"आओ लूमड म्यारे ।"

-परिचित मुस्कान के साथ अलफासे ने कमरे मैं कदम रखा ।

अलफासे का स्वागत करने के लिए विजय खडा हो गया था-इसलिए वे तीनो' भी खडे हो गए ।

औपचारिकता के बाद अलफासे गार्जियन की बगल में सोफे पर

बैठ गया-विजय ने तुरंत ही बात शुरू कर दी…"कहो लूमड प्यारे-तुम यहा मज़लिस्तान में क्या मटरगश्ती कर रहे हो ?"

" मुझे तुमसे अकेले मे कुछ बातें करनी थी विजय ।" अलफासे ने जब बिना किसी भूमिका कै ऐसा कहा अर्थपूर्ण दृष्टि से इबलीस गार्जियन और तोम्बो की तरफ़ देखा तो वे सकपका गए-बिजय ने उनसे बडे ही शिष्ट स्वर में कहा--"शायद आप लोगों की समझदानी में यह बात घुस गई होगी… कि लुमड हमारा पैदायशी यार है--जाने कब के बिछडे सदियों में मिले है-इश्क की बातें करनी हें-और इश्क की बातें तनहाई में होती हैं ।"

पता नहीं उनमें से काई कुछ समझा या नहीं किन्तु इतना जरूर हो गया कि वे उठे और एक-दूसरे से नजरें मिलाने के बाद तीनों कमरे से निकल गए-उनफे जाने के बाद विजय ने कमरा अंदर से वोल्ट किया और अलफासे के समीप पहुचकर बोला---" अब कहो लूमड प्यारे…क्या हाल है तुम्हारे?"

"इस कमरे मे क्रोई माइक्रोफोन आदि तो नहीं है I”

" बिल्कुल नहीँ है मेरी जान-हममें एक आदत कुत्ते की भी हे-तुम जानत्ते होगे कि कुत्ते को जहा बैठना होता हे पहले उस जगह को पूंछ से साफ कर… लेता है -ठीक उसी तरह हमे जहा रहना होता हैं पहले उस जगह को चैक' कर लेते हे ।"

बिजय के बात कहने के ढग पर अलफासे धीमे से मुस्कराया बोला ~"मैं तुम्हारे पास कुछ मदद करने के लिए आया हूं I"

"यह बात यकीन करने लायक हो ही नही सकती कि तुम निस्वार्थ किसी की मदद करो ।"

" तुम मुझे समझते हो इसलिए तुमसे कुछ भी नहीं छपाता ।"

उसे घूरता हुआ विजय बोला---------" अच्छा करोगे ।" .

"तुम एक बार मजलिस्तान में ही मुझसे पहले भी मिल चुके हो I"

"कब ओंर कहां ?"

"वह जीप मैं ही ड्राइव कर रहा था जिसपे तुम विकास और मुमताज़ आदि को लेकर यहा आना चाहते थे और जो अचानक ही चकरोड पर मुड गई थी ।

" ओह ॥"

एक पल शात रहने के बाद अंलफासे ने कहा---" अब मैँ तुमसे एक सवाल करूंगा I"

"जुरूर करो प्यारे ।"

"तुम मजलिस्तान से विकास को लेने ही आए हो न?"

" हम जानते हैं कि तुम मूंग की दाल मे भीमसेनी काजल मिलाकर खाया करते हो ।"

बिजय की तरफ थोडा झुका अलफासे, फिर बोता…"सोच लो

विजय…सोच-समझकर ज़वाब दो कि क्या तुम सिर्फ विकास को निकालने के लिए ही यहां आए हो?"

"इसमें सोचने जैसी कोई बात नहीं है I"

"तुम्हें सिर्फ इसी बात से मतलब हैं न कि तुम्हें विकास मिल जाए-मजलिस्तान मे होने वाली अन्य घटनाओं से तो तुम्हें कोई मतलब नहीं है न?"

"नहीं-लेकिन हमारे मुँह से बार-ब्रार यह बात कहलवाने का क्या मतलब!"

एक गहरी सास लेने के बाद अलफासे बोला--" ठीक है-तुम्हें विकास मिल जाएगा ।"

"क्या मतलब प्यारे?" विजय वाकइं चौंक पडा ।

"वह मेरी कैद में है लेकिन उसे तुम्हें सौंपने की एक शर्त होगी वह यह कि तुम उसे लेकर मजलिस्तान में एक मिनट भी नही रुकोगे-तुरंत भारत चले जाओगे और मजलिस्तान में घटने वाली अन्य घटनाओं की तरफ भी कोई ध्यान नहीं दोगे I" .

"इसका क्या सबूत है कि दिलजला तुम्हारी कैद में है?"

"में जानता था कि बिना सबूत के तुम यकीन नहीं करोगे ।” कहने के साथ ही उसने जेब से जेबी टेपरिकॉर्डर निकालकर मेज पर रखत्ते हुए कहा इसमें मेरी और विकास की कुछ आवाज भरी हैं उनसे जाहिर हो जाएगा कि विकास मेरी कैद मे है ।"
 
अलफासे ने स्विच आॅन कर दिया । टेप चलने लगा-विजय ध्यान से उसे सुनता रहा जब उसे यकीन हो गया कि अलफासे ठीक कह रहा है तो बिजय ने कहा-- "इसे बद करो प्यारे ओंर यह बताओं कि दिलजला तुम्हारे चगुल में कैसे फँसा?"

"तुम सिर्फ आम खाओं-पेड मत गिनो l”

" पेड़ हमारा है प्यारे-इसलिए पेड़ गिनने आम खाने से ज्यादा जरूरी हैं ।"

अलफासे ने कहा-"अब तुम… बात को यूं समझो कि मैं रक्त तिलक का सरदार हूं ।"

"हमें सुनाने के लिए शायद तुम्हें इससे बडी गप्प नहीं मिली ।"

"यही सच है विजय । "

"हम नहीं मान सकते प्यारे-तुम्हारा मजलिस्तान से कोई मतलब नहीं है ओर यह हम कभी नहीं मान सकते कि अपना लूमढ़ दिलजले की तरह धर्मात्मा बन गया है यानी निस्वार्थ भाव से, इस भावना के साथ रक्त 'तिलक का नेतृत्व कर रहा है कि तिलक देशभक्तों का _सगठन हे ।" . . .

"मैंने यह कब कहा कि मै निस्वार्थ भाव से`"सरदार'" बना हूं?"

"तो जो कहना हे अब कह दो ।"

" इतना तो तुम समझ ही सकते हो कि कम-से-कम तबसे मजलिस्तान में पश्चिमी महाशक्ति भी सक्रिय होगी, जबसे, यहा' सेमिनार का कब्जा हुआ है I"

" निस्देह !"

"मैं यहां उस पश्चिमी देश के लिए ही कर रहा हू ।"

" 'क्या मतलब ?" विजय चौका ।

ज़वाब में अलफासे स्पष्ट शब्दों मे उसे वह सब कुछ बता गया था, जो उसने विकास को बताया था-विजय सारा किस्सा ध्यान पूर्वक

सुनता रहा, जबकि सब कुछ बताने के बाद अलफासे ने कहा-"अब तुम समझ सकते हो कि मैं बिकास को तुम्हें सौंपने के लिए तैयार क्यों हूं!"

"क्यों हो प्यारे?"

"क्या तुम सचमुच अभी तक नहीं समझे?"

"नहीं ।" विजय का सपाट उत्तर । _

अलफांसे कई , क्षण तक निरतर उसे घूरता रहा, फिर बोला-"हालाकि मैं यकीन नहीं कर सकता किं तुम नहीं समझे हो, परतु फिर भी बताता हूं…सुनो, मैं जानता हूं क्रि मजलिस्तान में तुम्हारी और विकास की मौजूदगी मुझे नाकाम कर सकती हे…ऐसी स्थिति में मुझें काफी आर्थिक नुकसान होगा....तुम जानते हो कि मैं सब कुछ सह सकता हूं , लेकिन आर्थिक नुकसान नहीं सह सकता-विकास से जब~ तक अपने हक में काम ले सकता था मैंने लिया-आगे भी लेता- इसीलिए इतना रिस्क उठाकर उसे तुम्हारी गिरफ्त से निकाला भी परंतु इससे पहले कि मैं उससे कोई काम ले पाता वह मेरा रहस्य जान गया-तुम समझ ही सकते हो कि अब वह मेरे किसी काम आने की तो बात दूर बल्कि विरोध. में खडा हो सकता हे-इसीलिए मैं चाहता हू कि वह मजलिस्तान मे न रहे तुम उसे ले जाओ I"

"क्या वह अपनी खुशी से भारत जाने के लिए तैयार है?"

' "नहीं ।"

"तुम्हारा रहस्य खुलने के बाद भी नहीं यानी कि यह जानने के बाद भी वह अपनी जिद पर अडा हुआ है कि रक्त तिलक के पीछे क्या ताकत काम कर रही हे और उसकी जीत का अर्थ मजलिस्तान पर पश्चिमी देश का कब्जा होगा?"

"यह जानने के बाद तो उसकी जिद और ज्यादा बढ गई है ।"

" "वह क्यों?"

' 'सच्चाई यह है कि मैंने उसे वही बातें… समझाने की कोशिश की, जो तुमने की थी-सारी बातें मैंने उसे इसलिए बताई थीं कि शायद सुनने के बाद. वह इस सच्चाई. को समझ सकै कि मजलिस्तान दो महाशक्तियों की जबरदस्त पॉलिटिक्स का केंद्र बना हुआ है और उसमे उसका पार्ट एकदम मूर्खतापूर्ण है, वे सब बातें मैंने' उसे मजलिस्तान से बाहर निकालने के लिए ही कही थीं, लेकिन. . . ।"

"'लेकिन?"

" पता नहीं कम्बख्त का क्या दिमाग. है-उस पर बिल्कुल उल्टा असर हुआ ।"

" क्या ?"

‘ "कहने लगा क्रि किसी देश और उसकी बेगुनाह जनता पर इससे . बडा और क्या जुल्म हो सकता है कि वह दो शक्तियों कै बीच चलने बाती पॉनिटिक्सा के बीच पिसे-यह इसाफ नहीं है-कहता है यहां 'के अवाम को चक्की कै इन पाटों से मुक्त करा कर रहेगा-मजलिस्तान की जनता के लिए वह अकेले भारत से नहीं बल्कि सारी दुनिया से _ टक्कर लेने कै लिए तैयार हे ।"

" 'पागल हा गया है साला ।"

अंलफासे ने बडी ही गहरी मुस्कान कै साथ कहा-- "यदि इसाफ़ का तराजू हाथ में लेकर न्याय किया जाए तो पागल वह नहीं हुआ है

जासूस प्यारे-सही सिर्फ वह है-सारी दुनिया पागल हो गई हे…भारत कायर हो गई है-यदि ऐसा न होता तो जो कुछ यहा हो रहा हैँ-उसके खिलाफ आवाज उठी होती-सब चुप है-- वह आवाज उठा रहा है-इसलिए वह पागल है-बेवकूफ है…बहुत सारे पागल इसानों में फसकर सही इंसान पागल कहलाता -बहुत सारे बेवकूफ समझदार है को भी बेवकूफ़ कहते हैँ…वह अकेला है जो जुल्म के खिलाफ जूझ रहा I I"

"अब तुम उसकी वकालत करने लगे हो लुमड़ मिया ।"

"सारी-वकालत नहीं-अपने' मकसद से थोडा बहककर हकीकत कहने लगा था मैं-खेंर उसके सामने नहीं कहूंगा क्योंकि ऐसा कहने से मेरे काम में बाधा पडेगी !"

"और उसकी वजह से भारत की जो बदनामी हो रहो है-दोस्तों से मुल्क कट रहा है-उन सब बातों का तुम्हारे पास क्या ज़वाब है?"

"सच्चाई की राह पर चलने वाले यह सब कुछ नहीं सोचा करते ।"

"ऐसी की-तैसी में गई सच्चाई-हम जासूस हैं धर्मात्मा नहीं ।"

"ये तुम्हारे सिद्धांत हैं-मेरे सिद्घात हैं-इस हकीकत को हमें स्वीकार करना चाहिए कि हम दोनां ने ही अपनी आखों पर स्वार्थ की पट्टी बाध रखी हे-मैं दौलत के लिए उसे गलत साबित कर रहा हू तुम अपने देश के लिए-नि स्वार्थ तो केवल वह हे-केवल वह ।"

"हमें स्वार्थी भी होना चाहिए "

"जब हम उसे बहुत कुछ सिखा रहे थे तब शायद यहीँ न सिखा सके-खेर शायद हम विषय से भटक रहे हैं-फिलहाल एक ही काम से हम दोनों की समस्याओं का निदान हो सकता है…तुम उसे यहा से ले जाओं-तुम भी खुश मै भी खुश ।"

"यदि हम यह सौदा स्वीकार करने से इनकार कर दें प्यारे ?"

"क्या मतलब?"

"यदि हम कहें कि हम दिलजले को यहा से नहीं ले जाएगे?"

बडी ही मोहक मुस्कान के साथ अलफासे ने कहा…"तुम सिर्फ मुझसे चबड-चबड करने के लिए ऐसा कह तो सकते हो लेकिन कर नहीं सकत्ते ।"

"क्यों नहीं कर सकते प्यारे?"

"उसके यहा' रहने से ज्यादा-से-ज्यादा ये होगा क्रि मैं नाकाम हो जाऊगा यानी मुझें आर्थिक नुकसान होगा…जिसे मैं दुनिया का कोई दूसरा काम करके भी पूरा का सकता हू लेकिन अपनी सोचो प्यारे…अगर मैं उसे अपनी कैद से निकाल दूतो जो कुछ वह करेगा उसका तुम पर और तुम्हारे देश पर क्या असर होगा…शायद भारत की खोई प्रतिष्ठा कभी न लौट सकै ।"
 
अलफासे की बात में बहुत ज्यादा वजन था इसलिए विजय चुप रह गया…काफी देर तक जानें वह क्या सोचता रहा फिर बोला-- "आजकल तुम काफी ऊचे उड रहे हो लूमड भाई ।"

" वह कैसे?"

' " हमसे सफा…सफा यह कह रहे हो कि तुम पश्चिमी देश के लिए काम कर रहे हो…क्या तुमने यह नहीं सोचा कि इतना सब कुछ सुनकर हम भला तुम्हें तुम्हारे मक्सद मे कामयाब नहीं होने देगे l"

"अच्छी तरह जानता हू कि फिलहाल तुम मेरा कुछ भी बिगाड सकने की स्थिति में नहीं हो।"

"वह कैसे?"

‘ "क्योंकि तुम्हारा सबसे पहला और महत्वपूर्ण काम विकास को भारत ले जाना है और वह मेरे कब्जे में है…अगर इस बात पर ध्यान दोगे कि मैं यहा क्या कर रहा हू यानी मेरे चक्कर से तुम्हारे हाथ से विकास फिसल सकता हे और उसके फिसलने के परिणाम तुम जानते हो…बैसे भी बिकास को निकालने आए हो ----यह देखने. ~ नहीं कि यहा क्या हो रहा है-जो हो रहा है उसे रोकने भी नहीं आए हो…विकास के मिलते ही तुम्हारा काम खत्म I"

"हम उसे भारत पहुचाकर यहा लौटा भी तो सकते हैं ।"

"तब तक अलफासे अपना काम करके यहा से निकल चुका होगा ।"

"यदि हम तुम्हें यहीं-इसी वक्त गिरफ्त्तार कर ले तो?"

"मैं बेकार की बहस में नहीं पडना चाहता विजय ।" अलफासे ऊबकर बोला---"मैं जानता हमें कि तुम सब कुछ समझते हो-यह भी कि यहा मैँ यदि तुमसे मिलने आया हू तो ऐसै प्रबघ करके ही आया होऊगा कि तुम मुझ पर हाथ न हाल सको---तुम मुझ पर हाथ डालोगे-वहा पश्चिमी के जासूस विकास को मेरी कैद से आजाद, कर देगे-मेरे ख्याल से इतना काफी रहेगा ।"

अलफासे से बातें करने के बीच ही विजय अच्छी तरह से सभी सभावनाओं पर गोर कर चुका था…वह समझ चुका था कि उसने एक एक शब्द सही कहा है और फिलहाल अंलफासे पर हाथ डालना मूर्खता ही हे-अक्लमदी उसकी बात माने लेने मे है…वेसे भी इस वक्त वह बही करने के लिए बाध्य है, जो अलफासे. चाहता है-अतः बोला "अच्छा तो प्यारे---तुम भी क्या याद रखोगे कि किसी रईस से पाला पड़ा था-हमे तुम्हारा मजूर है ।"

"मै जानता हू क्रि तुम कितने रईस हो' " अलफासे हसा ।

"तो बोलो-दिलजले को कब हमारे हवाले कर रहे हो?"

"अभी-तुम मेरे साथ चल सकते हो ।" विजय एकदम खडा हो गया…"चलो ।"

खडा होता हुआ अलफासे बोला ---"तुम्हें अकेले ही चलना होगा और याद रहे…यदि किसी भी तरह की चालाकी करने की कोशिश की तो तुम जानते ही हो कि मुझसे छुप नहीं सकेगी I"

"हम क्या चालाकी कर सकत्ते हैं? "

" 'किसी को अपना पीछा करने का सकैत कर सकते हो!"

"हम नहीं करेगे प्यारे-लेक्रिन यदि कोई साला अपनी बुद्धि से. . ।

"तुम स्पष्ट शब्दों में इबलीस-गार्जियन और कर्नल तोम्बो को

यह हुक्म देकर मेरे साथ चलोगे कि वे किसी भी माध्यम से तुम पर नजर रखने की कोशिश न करे…यदि ऐसा हुआ तो मुझें पता लग जाएगा क्योकि इस राष्ट्रपति. भवन में भी रक्त तिलक के जासूस हैं और मुझे पता लगते ही तुम्हारे और मेरे बीच हुआ यह सौदा रद्द हो 'जाएगा-बोलो मजूर है तो चलो ।"

"अजी लूमड मिया तुम चलो भी-इस वक्त तो यदि सिर के बल चलने को कहोगे तो हम चलेगे I"

ॐॐॐॐॐ

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अलफासे के साथ चोडी और अधेरी सुरंग में चलता हुआ विजय बोला---- "अवे ये तुम हमे कहा लिए जा रहे लूमड मियां? क्या अपने दिलजले को पूरे सात' तालों मे ही रखा है?"

"वह चीज ही सात लालों में रखने की हे जासूस प्यारे ।" अलफासे बोला-" वेसे भी इस वक्त यदि वह भाग निकले तो हम दोनों का ही बटाघार हो सकता हे ।"

" सो तो है प्यारे मगर अमां अमां-ये क्या हरकत है लूमड .....?"

कहते हुए विजय की आवाज़ डूबती चली गई । हुआ यह कि पहले अलफासे ने उसे बातों मेँ उलझाकर असावधान किया, फिर मौका लगते ही कनपटी के समीप की विशिष्ट नस दबाकर वेहोश कर दिया-विजय कै बेहोश जिस्म को फ़र्श पर गिरने से पहले ही उसने बाहों में सभाल लिया और फिर कुछ ही देर बाद उसे कंधे पर लादे वह हाल मे दाखिल हुआ।।

हाल मे पेट्रोमेक्स का भरपूर… प्रकाश था । हाल में-एक थम्ब के साथ जंजीरों में जकडा विकास खडा था…अलफासे और उसके कंधे पर पडे विजय को देखते ही वह कह उठा--- " ओह-तो आप गुरु को भी ले ही आए I "

"अलफासे कभी नाकाम नहीं होता बेटे ।" कहने के साथ ही उसने विजय के बेहाश जिस्म को एक अन्य थम्ब के सहारे खडा किया-ज़जीरों मेँ ज़कड़ा और जेब से रिवाल्वर निकालकर. सकरी सुरंग में गुम हो गया-विकास अपने स्थान पर चुपचाप खडा… रहा । बहुत कुछ करना चाहकर भी वह इस वक्त कुछ नहीं कर सकता था .. .

करीब बीस मिनट. बाद वहा आवाज गूंजी-'"चलो ।"

विकास ने गर्दन घुमाकर आबाज की दिशा में देखा…सकरी गली मेँ पहले कर्नल गद्दाफी हाल में आया-उसकै पीछे कमर पर रिवाॅल्बर रखे अलफासे-

----बडा अजीब पोज़ था-णद्दाफी के सिर पर पानी से भरा एक घडा रखा था उसने-न चाहते हुए भी र्क्नल गद्दाफी को इस अवस्था में देखकर बिकास के होंठों पर मुस्कान दौड गई-उसे कवर किए अलफासे चबूतरे तक ले गया-घडा आहिस्ता से वहा रखवाया और फिर वहीं-उसने एक अन्य थम्ब के साथ कर्नल गद्दाफी को भी जजीरों से कसकर बाध दिया ।

जब विकास से न रहा गया तो उसने पूछ ही लिया--- "यह सब आप क्या कर रहे हैं गुरु?"

"देखते रहो बेटे-अपनी तरफ से मैँ इस कहानी का ड्रॉप सीन देने जा रहा हू I” कहते हुए अलफासे ने घडे के मुह पर ढके बर्तन मेँ घडे से पानी लिया-विजय के समीप पहुचा और फिर एक झटके से ठडा पानी विजय कै चेहरे पर फेका ।

ॐॐॐॐॐ

अलफासे द्वारा तीसरी बार यही क्रिया दोहराने पर विंजय को होश आ गया--- भीगी पलकों से उसने पहले गर्दन घुमा घुमाकर इधर-उधर

देखा, फिर बोला-"इसका क्या मतलब लूमड़?"

"किसका मतलब पूछ रहे हो?" -अलफासे मुस्कराया l

'हमे यू अनारकली की तरह जजीरों. में जकड, लेने का ।" बिजय ने कहा-"'हमसे तुमने वादा किया था कि तुम हमें. . . "

"मुझे दुख है कि लोग मुझसे बार-बार धोखा खाने कै बाद भी मुझ पर यफीन कर लेते है l”

"क्या मतलब?"

"जरा देखते रहो कि मैं क्या करता और कहता हू…मतलब खुद समझ जाओगे ।" कहने के साथ ही अलफासे पत्थर की तरफ़ बढा…-रिवॉल्बर जेब में रखने के बाद उसने पत्थर हटाया और फिर ट्रांसमीटर पऱ किसी से सबध स्थापित करने की चेष्टा करने लगा' l

तीनों चुपचाप ध्यान से उसे देख रहे थे ।

सबध स्थापित होने पर वह बोला…"हैलो-चीफ आफ़ आपोशन मजलिस्तान हीयर ।"

"रिपोर्ट ।" दुसरी तरफ से उभरने वाली आवाज सारे हॉल मेँ गूज़ गई l

" आप मेरे मिशन की शेष रक्म और वह रकम भी तुरत भिजवाने का कष्ट करें, जो विजय और विकास को मारने के लिए मेरे और आपके बीच तय हुई थी ।"

"क्या मतलब?" दूसरी तरफ से चौंकने का स्वरा ।।।

"जी हां…इस वक्त बिजय और विकास मेरे कब्जे मेँ हैँ ।"

"विकास तुम्हारे कब्जे में है…लेक्रिन क्यों-वह तो . . . I"

" हालात ही ऐसे बन गए थे…बह मेरा रहस्य जान गया है, अत: उसे कैद करना पड़ा-अब वह हमारे लिए काम नहीं करेगा-उल्टा हमारे लिए खतरा बन सकता है, इसलिए सोचा कि क्यों न उसकी लाश के ही पैसे वसूल कर लू ,सोचा कि अकेले विकास को मारकर , मेरे हाथ लगेगा ही क्या…इसलिए राष्ट्रपति भवन से विजय क्रो भी यहा लाकर कैद कर लिया-अब स्थिति यह है कि मैँ जिस क्षण चाहू इन्हें मार सकता हू-अभी तक ये सिर्फ इसलिए जिंदा हैं, क्योंकि आपकै किसी विश्वसनीय एजेंट के सामने ही इन्हें मारना चाह रहा हू I"

"ओह-लेकिन तुम तो आँपरेशन मजलिस्तान की भी शेष रकम माग'रहे हो ॥"

"जी हा-क्योकि यह काम भी पूरा होने वाला है ।"

ॐॐॐॐॐ

ॐॐॐॐॐ
 
अविश्वसनीय स्वर--"इत्तनी जल्दी॥॥"

"जब अलफासे काम करता है तो उसे सिर्फ उतना ही समय चाहिए जितनी देर में चुटकी बजती हो ।"

"हम समझे नहीं ।"

"विजय तो मेरे कब्जे मे है ही-राष्ट्रपति भवन मे भी ऐसा इतजाम कर आया हू कि मेरे द्वारा दो शब्द पढ़कर ही इबलिस गार्जियन को माऱ देगा…कर्नल तोम्बो इबलीस को…नही तो फिर इबलीस को सेमिनेरियन, सैनिक कच्चा चबा जाएगे ।"

"ये तुम क्या कह रहे हो?"

"सुनते रहिए I " अलफासे ने कहा…"सेमिनेरियन वेन और जगी हवाइ अड्डा ध्वस्त हो ही चुका है-राष्ट्रपति भवन में भी मेरे इशारे पर खून-खराबा शुरू हो जाएगा-उधर समुद्र में स्पर्श सुरगे बिछाकर मैं आज ही की रात सेमिनेरियन नौसेनिक अड्डा भी तबाह कर दूंगा …मजलिस्तान में सभी सेमिनेरियन ताकत खत्म-आपके लोग आसानी से राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर सकते हैं ।"

"वह सब तो ठीक है लेकिन....॥"

"लेकिन क्या ?"

" हमें कैसे यकीन हो कि तुम राष्ट्रपति भवन और नौसैनिक अड्डे वाली बात ठीक कह रहे हो? "

अंलफासे ने मुस्कराहट के साथ कहा---" अच्छा सवाल है…मेरा जवाब ये है कि तय हुई रकम अपने किसी एजेंट के हाथों मेरे पास तब भेजें जव मेरे कहे मुताबिक इबलीस गार्जियन का कत्ल कर दे .. ॥॥"

" आगे का काम?"

" उसके लिए आपको मुझ पर यकीन करना होगा ।"

" क्या मतलब? "

"ध्यान से सुनिए-हमारे बीच हुए सौदे इस तरह पूरे होंगे ।" कहने कै बाद अलफासे ने एक लबी सास ली और फिर बोला आपसे संबध-विच्छेद होते ही मैं वह शफूगा छोडता हूं जिसके परिणामस्वरूप इबलीस गार्जियन का, कत्ल कर दे-- अपने विश्वसनीय जासूस को सौदे की सारी रकम देकर उसे हुक्म दे कि वह इबलीस द्वारा गार्जियन का कत्ल होने के बाद ही मेरे पास पहुचने के लिए रवाना हो~उसकै साथ एक मेकअप स्पेशलिस्ट को भी भेज दीजिए, जो यह चैक कर ले कि मेरे पास कैद बिजय ओरे बिकास असली हैं…पहले मैं आपके आदमियों के सामने विजय और विकास क्रो मारूगा, तब आपके आदमी मुझे तय हुई रकम सौप देंगे-जिस वक्त तक यहां विजय और विकास मरेंगे उतने ही समय में कर्नल तोम्बो और इबलीस भी मर चूकेंगे-मैं यहां से दौलत लेकर निकलूगा और उसके बाद अपना अंतिम काम यानी स्पर्श सूरंगों के जरिए नौसेनिक अड्डे को ध्वस्त करने का काम भी पूरा कर दूगा ।"

"यदि रकम लेने के बाद तुमने वह काम न किया तो?"

"इतना यकीन तो आपको करना चाहिए और करना होगा I"

"करना होगा से क्या मतलब?"

" विजय-बिक्रास, इबलीस-गार्जीयन और कर्नल तोम्बो की मृत्यु के _वाद स्पर्श सुरर्गों' का जाल बिछाकर नौसेनिक अड्डे को तबाह करना मेरे लिए चुटकी बजाने जैसा आसान काम होगा और रकम लेने के बाद मैं ऐसा आसान काम न करके व्यर्थ ही आपके मन में अपने प्रति अविश्वास की भावना क्यों भरूगा-मैँ तो ऐसा काम करूंगा ताकि भविष्य में भी आप मुझे काम दे सकें I"

कदाचित दूसरी तरफ़ से बोलने वाले पर अलफासे की बात का समुचित प्रभाव पड़ा, क्योंकि कई पल की खामोशी के बाद आवाज उभरी-"ठीक है-तुम शगूफा छोडो…हमारे आदमी रकम लेकर तुम्हारे पास सही समय पर पहुच जाएगे ।"

" ओकै-थैक्यू I” कहकर अलफासे ने सबंध विच्छेद कर दिया--खड़ा हुआ और घूमकर मुस्कराता हुआ बिजय की तरफ़ बढा-विज़य ने अपने ही लहजे में बात शुरू की… "तो हमारे प्राणों का सौदा हो रहा था लूमड़ मियां?"

"तुमने सुन ही लिया है !"

"एक बार फिर कहना पडेगा. प्यारे कि आजकल बहुत ऊचे उढ़ रहे हो ।"

अलफ़ासे ने उसी मुस्कान के साथ कहा…" जव उडना', आता ही

है तो क्यों न ऊचा उडा जाए?"

"सो तो ठीक है प्यारे, लेकिन ऐसा वह कौन-सा शगूफा है जिसके छूटते ही. . . ? ”

विजय की बात पूरी होने तै पहले ही अलफासे ने जेब से एक कागज निकाला-उसकी तह खोलता हुआ बोला--- "ये है वो शगूफा--तुम्हें याद होगा राष्ट्रपति भवन में पहुचकर मैं कछ देर के लिए गार्जियन की बगल मे बैठा था-बस उस कुछ ही देर में मेंने सिर्फ यह किया कि एक कागज गार्जियन की जेब में सरका दिया-यह कागज उस कागज का डुप्लीकेट है-पढो-मेरा शगूफा सुनो और फिर सोचो कि वहां क्या होगा ।" कहने के साथ अलफासे ने कागज विजय के बंधे हुए हाथ की उगलियों में फसा दिया-कुछ ही देर बाद वह ट्रांसमीटर पर किसी से सवध स्थापित करने की चेष्टा कर रहा था।

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"कमाल की बात है ।।" हमेशा की तरह राष्ट्रपति भवन के एक कमरे मे सिर जोडकर, बैठे उन तीनो में एक यानी कर्नल तोम्बो कह रहा था…"पता नहीं वह कौन था…अलफासे-हा यही नाम था उसका ओर भिस्टर बिजय उसे लूमड कह रहे थे ।"

"मामला कुछ गहरा और रहस्यमय लगता है ।" गार्जियन ने अपनी होशियारी झाडी पहले उसने अकेले मे मिस्टर बिजय से कुछ बातें की-फिर मिस्टर बिजय क्रो साथ ही ले गया ।"

_ इबलीस कह उठा उस पर तुर्रा ये कि मिस्टर बिजय सख्ती के साथ हमसे यह कह गए कि यदि हमने किसा भी माध्यम से उन पर नजर रखने की कोशिश की तो-सारा खेल बिगड जाएगा ।"

"अब हालत यह है कि न तो हमे यह मालूम कि मिस्टर विजय कहा गए हैं और न, ही यह कि कितनी देर में लौटेंगे-समझ में नहीं आता कि आखिर उसके साथ कहां और क्यों गए है?"

इबलीस ने अभी कुछ कहने के लिए मुह खोला ही था कि उसके बाए हाथ की तर्जनी में पडी एक चोडे नग वाला अनूठी में से निकलकर एक नन्ही-सी सुई रह…रहका ऊंगली में चुभने लगी…बह समझ गया कि उसके इस पर्सनल ट्रांसमीटर पर उसका अपना कोई विश्वसनीय साथी आवश्यक रिपोर्ट देना चाहता है-उसने चोर दृष्टि से तोम्बो ओर गार्जियन की तरफ देखा ।

वे विचार-विमर्श में मशगूल थे ।

अंगूठी की तरफ उनमे किसी का ध्यान नहीं था अत वह 'एक्सक्यूज मी' कहकर उठा-कमरे से बाहर निकला-तेज़ कदमों कै साथ गैलरी पार करके अपने कमरे में पहुचा दरवाजा अंदर से बोल्ट किया और अगले ही पल वह अपने कमरे के बाथरूम मे अगूठी या नन्हमें किंतु शक्तिशाली ट्रास्मीटर पर कह रहा था---"हैलो-इबलीस हीयर, ओवर ।"

"हम सेमिनार से बोल रहे हैं-सेमिनेरियन सीक्रेट सर्विस के चीफ ।"

"ज. . जी?" इबलीस हकला गया…एक ही क्षण में सारा जिस्म पसीने-पसीने हो गया था ।

" 'आं. .आ…ट्राम्समीटर आफ न करना इबलीस-"हम' जानते हैं कि यह तुम्हारा पर्सनल ट्रासमीटर है और इसकी जानकारी गार्जियन तथा कर्नल तोम्बो को भी नहीँ है-तुम ऐसी कल्पना भी नहीं कर सकते. कि इस ट्रांसमीटर की जानकारी हमे होगी, क्रिन्तु हमे है और आज से नहीं उसी दिन से है; जिस दिन तुमने इससे सम्बन्धित ट्रासमीटर अपने लोगों में बाटे-उसी दिन से तुम्हारे ट्रासमीटल की 'बेब्ज' भी हमने कैच कर रखी हैं, अत: इस पर होने बाली हर बात हमने सुनी है I"

"जी . . .जी ।" इबलीस ने थूक… निगला ।

"इस ट्रांसमीटर पर तुम्हें अक्सर तुम्हारे विश्वसनिय साथी मुल्क क्री वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट देते हैं-यह भी बताते हैं कि कहीँ सेमिनेरियन सेनाओं में तुम्हारे खिलाफ़ तो कोई भावना नहीं है ।"

"व...वह सर-बात ये है कि... ।"

" घबरा-ओं मत इबलीस-इस ट्रांसमीटर की वज़ह से हम. तुमसे नाराज नहीं हैं, बल्कि खुश हैं-एक कुशल प्रशासक को ऐसा गुप्त मीडिया रखना ही चाहिए, जिसकी किसी क्रो भी जानकारी' न हो जिसके जरिए मुल्क ,की वस्तुस्थिति. की जानकारी प्रशासक क्रो रहे ।” . .

" जी . . जी ।" इबलीस का स्वर कुछ व्यवस्थित हुआ था ।"

" 'जेसा कि हमने कहा कि हम 'वेब्ज' कैच करके हम तुम्हारे विश्वसनीय आदमियो की वार्ता सुनते रहे हैं…उन वार्ताओं से जाना है क्रि तुम सेमिनार के प्रति अत्यत ही वफादार हो-इस ट्रांसमीटरहूँ पर तुमने कभी अपने किसी आदमी से ऐसो बात नहीँ कही, जिससे तुम्हारी सेमिनार कैं प्रति निष्ठा पर सदेह किया जा सकै, बल्कि हमने यही महसूस किया है कि तुम हमारे लिए तोंम्बो और गार्जियन से भी बढकर वफादार हो !"

"ज. . .जी-मैं भला उनसे बढकर. कैसे हो सकत्ता हू-वे तो है ही सेमिनेरियन ।"

"कभी-कभी देशवासी देश के साथ गद्दारी कर जाते हैँ, जबकि गेर देशवासी ज्यादा वफादार होते हैं…ऐसा ही तोम्बो और गार्जियन. के सबंध मे हुआ है !"

"ज . . जी समझा नहीं ।"

"तुमने अपने विश्वसनीय आदमियों से इस ट्रासमीटर के जरिए हमेशा यह जानने की _क्रोशिश की कि कहीं सेमिनेरियनों में तुम्हारे प्रति अविश्वास तो नहीं बढ़ रहा है-कभी तुमने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया, जिससे यह जाहिर होता हो कि तुम सेमिनार से गद्दारी कर सकते हो..॥"

"ऐसा कैसे हो सकता है सर-आप हीं ने तो मुझे राष्ट्रपति बनाया है-बदले में यदि आप मेरी खाल के जूते बनाकर भी पहनेंगे तो हिचकूगां नहीं-आपसे गद्दारी की बात तो मैं सोच भी नहीँ सकता ।"

"जबकि दौलत के लालच में देशवासी गद्दारी पर आमादा हो जाते है!"

“ज. . .जी-क्या आप इस नाचीज़ को समस्या बताएगे'?" इबलीस का विश्वास लौट आया था ।

“ उसी कै लिए तो इस ट्रांसमीटर पर तुमसे सबध स्थापित किया हे-यदि हम उस ट्रासमीटर पर सबंध स्थापित करते तो वह बात नहीं कह सकते थे, क्योकि तुमसे पहले वह गार्जियन के कानों मे पहुच जाती और वह सतर्क हो जाता,-त्तभी _हमे इस ट्रांसमीटर का ख्याल आया ।"

"जी-कहिए !"

"गार्जियन 'रक्त तिलक' से मिल गया है ।"

"क . . .क्या?" इबलीस के कठ से चीख निकल गई-बुरी तरह उछल पडा वह ।

दुसरी तरफ से तुरत कहा गया-"सयम रखो इबलीस-दिमाग से काम लो-यदि समय से पहले उसे यह पता लग गया कि तुम उसका राज जान गए हो तो वह गडबड… का सकता है ।"

“ल..... लेकिन-यह कैसे हो सकता है? वह तो आपका जासूस....॥"

"दौलत बडी, चीज है इबलीस-उसी के लालच में वह हमें यानी अपने ही देश क्रो डबल क्रॉस कर रहा है-तुम जानते ही हो कि रक्त तिलक के पीछे पश्चिमी ताकत है-उसी ने गार्जियन को इतनी दौलत देने का बादा किया है र्कि गार्जियन बिक गया-अपने ही देश से गद्दारी करने के लिए तैयार हो गया-वैसे यह कोई नई बात नहीं है-पैसे के लिए पहले भी किसी देश के जासूस अपने ही देश के खिलाफ जासूसी कर चुके हैँ…गार्जियन भी उन्हीं में से एक निकला ।"

" यदि यह सच है तो सचमुच नीचता की हद है ।"

थोडा कठोर स्वर---" क्या तुम्हें हमारी इनफॉरमेशन पर शक है!"

"ज जी नहीं ।" इबलीस बौखला गया--- बोला---"म मेरा मतलब यह था कि बात एकदम अविश्वसनीय है…दरअसल मैं इसान से इतने कमीनेपन की उम्मीद नहीं कर सकता ।"

"भले ही तुम्हें बात अविश्वसनीय लग रही होगी लेकिन जब हमे पता लगा तो हमें आश्चर्य भी नहीं हुआ क्योंकि' ऐसे केस हमारी जानकारी में होते रहते हैं…इसीलिए हम गुप्त रूप से अपने प्रत्येक जासूस पर निगाह रखते हैँ-उसी मीडिया से हमें गार्जियन के बहक जाने की सूचना मिली ।"

इबलीस सिर्फ. इतना ही कह सका…"ज़. . .जी I"

" ऐसे गद्दार एजेंट हमारे लिए दुश्मन से कई गुना खतरनाक होते हैं इसलिए हम नहीं चाहते कि वे एक पल के लिए भी जिदा रहे ।"
 
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