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Guest
"बाहर चलने की कोई जरूरत नहीं है। बंदा-परवर...मैं यहीं इंतजाम किए देती हूं।"
"फिर ठीक है।"
"आइए मेरे साथ।" सुन्दरी उसे मार्ग दिखाती हुई आगे-आगे चल पड़ी।
विनोद्र सावधानी के साथ उसके साथ चलता रहा। वह उसे एक ऐसे कमरे में ले आई जहां पूरी तरह एकांत था। यहां वहां कितनी ही अलमारियां थीं जिनमें तमाम सामान रखा हुआ था।
"ये किसका कमरा है।" राज ने उससे पूछा।"
"नसों की ड्यूटी चेंज के समय इसका प्रयोग किया जाता है।"
"फिर तो यहां कभी-भी कोई भी आ सकता
"नहीं...यहां कोई नहीं आएंगा।"
"क्यों?"
"इसलिए कि फिलहाल किसी को न तो ड्यूटी लगनी है और ना ही बदली जानी है।"
"आर यू श्योर...।"
"यस।"
"फिर ठीक है।"
"आप चाहें तो कमरे का दरवाजा भी बंद किया जा सकता है।"
सुन्दरी ने अर्थपूर्ण ढंग से मुस्कराते हुए कहा।
"नहीं...सामने से नजर आ रहा है। अगर को ई इधर आता दिखाई देगा तो हम उसके आने से पूर्व ही अपनी बात बंद कर देंगे।"
"ओ. के.!"
"तुम बाहर एक बार देख लो।'
सुन्दरी ने तुरन्त आज्ञा का पालन किया। वह बाहर निकलकर शीघ्र ही वापस लौट आयी।
"सब ठीक है।"
"ठीक है...तो फिर सुनो, मुझे यहां के एक पेशेंट की कहानी मालूम करनी है।"
"कैसी कहानी ?"
"मतलब, उसके बारे में, उसके एडमीशन से लेकर उसके रिलीव होने तक के बारे में सब-कुछ जानना।"
“पेशेंट का नाम।"
"सतीश मेहरा...."
"किस वार्ड में था?"
"राज ने बताया।
"पुलिस वाला था...।" सुन्दरी ने शकित स्वर में उससे पूछा।
"हां...।"
"घायल था।"
"बिल्कुल ठीक।"
"कल सत आया था।"
"हां।" सुन्दरी रहस्यपूर्ण ढंग से मुस्करायी।
"जानती हो उसके बारे में।"
"जानती हूं...।"
उसकी स्वीकृति और उसकी मुस्कराहट देखते ही राज समझ गया कि उसने गलत जगह से अपनी तहकीकात का सिलसिला शुरू नहीं किया
"फिर ठीक है।"
"आइए मेरे साथ।" सुन्दरी उसे मार्ग दिखाती हुई आगे-आगे चल पड़ी।
विनोद्र सावधानी के साथ उसके साथ चलता रहा। वह उसे एक ऐसे कमरे में ले आई जहां पूरी तरह एकांत था। यहां वहां कितनी ही अलमारियां थीं जिनमें तमाम सामान रखा हुआ था।
"ये किसका कमरा है।" राज ने उससे पूछा।"
"नसों की ड्यूटी चेंज के समय इसका प्रयोग किया जाता है।"
"फिर तो यहां कभी-भी कोई भी आ सकता
"नहीं...यहां कोई नहीं आएंगा।"
"क्यों?"
"इसलिए कि फिलहाल किसी को न तो ड्यूटी लगनी है और ना ही बदली जानी है।"
"आर यू श्योर...।"
"यस।"
"फिर ठीक है।"
"आप चाहें तो कमरे का दरवाजा भी बंद किया जा सकता है।"
सुन्दरी ने अर्थपूर्ण ढंग से मुस्कराते हुए कहा।
"नहीं...सामने से नजर आ रहा है। अगर को ई इधर आता दिखाई देगा तो हम उसके आने से पूर्व ही अपनी बात बंद कर देंगे।"
"ओ. के.!"
"तुम बाहर एक बार देख लो।'
सुन्दरी ने तुरन्त आज्ञा का पालन किया। वह बाहर निकलकर शीघ्र ही वापस लौट आयी।
"सब ठीक है।"
"ठीक है...तो फिर सुनो, मुझे यहां के एक पेशेंट की कहानी मालूम करनी है।"
"कैसी कहानी ?"
"मतलब, उसके बारे में, उसके एडमीशन से लेकर उसके रिलीव होने तक के बारे में सब-कुछ जानना।"
“पेशेंट का नाम।"
"सतीश मेहरा...."
"किस वार्ड में था?"
"राज ने बताया।
"पुलिस वाला था...।" सुन्दरी ने शकित स्वर में उससे पूछा।
"हां...।"
"घायल था।"
"बिल्कुल ठीक।"
"कल सत आया था।"
"हां।" सुन्दरी रहस्यपूर्ण ढंग से मुस्करायी।
"जानती हो उसके बारे में।"
"जानती हूं...।"
उसकी स्वीकृति और उसकी मुस्कराहट देखते ही राज समझ गया कि उसने गलत जगह से अपनी तहकीकात का सिलसिला शुरू नहीं किया