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गहरे नीले रंग की एस्टीम जय के माध्यम से राज ने हासिल कर ली थी। उसी में एक मोबाइल भी मौजूद था। राज सामान्य गति से एस्टीम को चला रहा था। सिगरेट उसके होंठों में दबी हुई थी।
डॉली उसकें बराबर में बैठी थी।
वह बार-बार राज से बात करने की कोशिश करती और बार-बार राज अपना ध्यान सामने ड्राइविंग में लगा देता क्योंकि ट्रैफिक की भीड़-भाड़ ज्यादा थी। अन्तत: एस्टीम उस भीड़ से बाहर निकली।
"हम कहां जा रहे हैं?" डॉली ने अवसर मिलते ही राज से सवाल किया।
"पुलिस स्टेशन...।" राज ने उसे संक्षिप्त सा जवाब दिया।
"पुलिस स्टेशन किसलिए...?"
"कुछ सवाल करने हैं।'
"किससे।"
"वहां पहुंचकर बताऊंगा।"
"सस्पैंस पैदा कर रहे हो।"
"यही समझ लो।"
"तपन, तुम्हें हो क्या गया है।"
"सिर्फ थोड़ी सी परेशानी।"
"कैसी परेशानी?"
"माशरे की...समाज की बिगड़ती हुई तस्वीर की परेशानी। हम डेमोक्रेसी में...जनतंत्र में जीने वाले भारतीय कहलाते हैं। भारत को सबसे बड़ा डेमोक्रेटिक कंट्री माना जाता है जबकि डेमकैसी के नाम पर यहां महज गुण्डातंत्र है...लाठी तंत्र है। जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली कहावत हर पग पर चरितार्थ हो चुकी है। तुम अबला थी...कमजोर थीं, इस वजह से पुलिस स्टेशन में तुम्हारी न तो कोई फरियाद सुनी गई और ना ही रिपोर्ट लिखी गई...जबकि कहा ये जाता है कि हमारे यहां जलता को हर तरह की आजादी है। प्रत्येक व्यक्ति के अपने मौलिक अधिकार होते हैं जिनका किसी भी प्रकार से हनन नहीं होता...और दूसरी तरफ तुम हो जिसे हर कदम पर मौलिक अधिकारों से दूर रख जा रहा है। तुम अपने अधिकारों के लिए किसी भी प्रकार का विरोध प्रदर्शित नहीं कर सकती...या कर सकती हो...? बोलो..बोलो डॉली।"
___"नहीं कर सकती...तुम ठीक कह रहे हो।" डॉली उदासी भरे स्वर में बोली।
"पुलिस स्टेशन में तुम्हारी जगह कोई खद दरदारी टोपी संभालता हुआ गया होता तो वही पुलिसिए जिन्होंने तुम्हें तुम्हारी रिपोर्ट लिखने से इंकार कर दिया, इच्छा सामने बिछ-बिछ जाते। तुम रिपोर्ट न लिखवाती तब भी तुम्हारी रिपोर्ट न सिर्फ लिख दी जाती बल्कि तुम्हारे भाई की तलाश में कितने ही पुलिसियों को दौड़ा भी दिया जाता और बहुत मुमकिन था कि आनन-फानन में तुम्हारे भाई को ढूंढकर तुम्हारे सामने पेश भी कर दिया जात...मगर...अफसोस! तुम न तो खद्दरधारी हो और ना-ही तुम्हारे पास लाठी है तुम शक्तिहीन हो और हमारी पुलिस हमेशा कमजोरों को ही सताने क का काम करती रही है।"
"तो अपनः इन विचारों के साथ पुलिस स्टेश न में दाखिल होकर तुम करना क्या चाहते हो?"
"वहीं चलकर बताऊंगा।" कहने के साथ ही राज ने अपने बैग को डॉली की ओर बढ़ा दिया "इसे खोलो।"
डॉली उसकें बराबर में बैठी थी।
वह बार-बार राज से बात करने की कोशिश करती और बार-बार राज अपना ध्यान सामने ड्राइविंग में लगा देता क्योंकि ट्रैफिक की भीड़-भाड़ ज्यादा थी। अन्तत: एस्टीम उस भीड़ से बाहर निकली।
"हम कहां जा रहे हैं?" डॉली ने अवसर मिलते ही राज से सवाल किया।
"पुलिस स्टेशन...।" राज ने उसे संक्षिप्त सा जवाब दिया।
"पुलिस स्टेशन किसलिए...?"
"कुछ सवाल करने हैं।'
"किससे।"
"वहां पहुंचकर बताऊंगा।"
"सस्पैंस पैदा कर रहे हो।"
"यही समझ लो।"
"तपन, तुम्हें हो क्या गया है।"
"सिर्फ थोड़ी सी परेशानी।"
"कैसी परेशानी?"
"माशरे की...समाज की बिगड़ती हुई तस्वीर की परेशानी। हम डेमोक्रेसी में...जनतंत्र में जीने वाले भारतीय कहलाते हैं। भारत को सबसे बड़ा डेमोक्रेटिक कंट्री माना जाता है जबकि डेमकैसी के नाम पर यहां महज गुण्डातंत्र है...लाठी तंत्र है। जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली कहावत हर पग पर चरितार्थ हो चुकी है। तुम अबला थी...कमजोर थीं, इस वजह से पुलिस स्टेशन में तुम्हारी न तो कोई फरियाद सुनी गई और ना ही रिपोर्ट लिखी गई...जबकि कहा ये जाता है कि हमारे यहां जलता को हर तरह की आजादी है। प्रत्येक व्यक्ति के अपने मौलिक अधिकार होते हैं जिनका किसी भी प्रकार से हनन नहीं होता...और दूसरी तरफ तुम हो जिसे हर कदम पर मौलिक अधिकारों से दूर रख जा रहा है। तुम अपने अधिकारों के लिए किसी भी प्रकार का विरोध प्रदर्शित नहीं कर सकती...या कर सकती हो...? बोलो..बोलो डॉली।"
___"नहीं कर सकती...तुम ठीक कह रहे हो।" डॉली उदासी भरे स्वर में बोली।
"पुलिस स्टेशन में तुम्हारी जगह कोई खद दरदारी टोपी संभालता हुआ गया होता तो वही पुलिसिए जिन्होंने तुम्हें तुम्हारी रिपोर्ट लिखने से इंकार कर दिया, इच्छा सामने बिछ-बिछ जाते। तुम रिपोर्ट न लिखवाती तब भी तुम्हारी रिपोर्ट न सिर्फ लिख दी जाती बल्कि तुम्हारे भाई की तलाश में कितने ही पुलिसियों को दौड़ा भी दिया जाता और बहुत मुमकिन था कि आनन-फानन में तुम्हारे भाई को ढूंढकर तुम्हारे सामने पेश भी कर दिया जात...मगर...अफसोस! तुम न तो खद्दरधारी हो और ना-ही तुम्हारे पास लाठी है तुम शक्तिहीन हो और हमारी पुलिस हमेशा कमजोरों को ही सताने क का काम करती रही है।"
"तो अपनः इन विचारों के साथ पुलिस स्टेश न में दाखिल होकर तुम करना क्या चाहते हो?"
"वहीं चलकर बताऊंगा।" कहने के साथ ही राज ने अपने बैग को डॉली की ओर बढ़ा दिया "इसे खोलो।"