वो दसवी बार फ्लाइयिंग किक मारने के लिए फर्श पर खड़ा दीवार को घूर रहा था तो दरवाज़े से आवाज़ आई --" क्या हो रहा है गुरु ?
"दीवार को हटाने को हो चुके है शुरू !" इस वाक्य के साथ ही विजय फिरकनी की तरह दरवाज़े की ओर घूम गया !
वहाँ विकास खड़ा था !
6.6 फीट हाइट ! गोरा चिट्टा , सेब जैसे रंग के गोल मुखड़े ओर घुंघराले वालों का मालिक !
खूब गोरा था, तन्द्रुस्त ! लंभा !
कामदेव का रूप !
विजय के नज़दीक पहुँच कर श्रद्धा से झुका चरण सपर्श कर बोला --" प्रणाम गुरुदेव !"
" वो तो ठीक है प्यारे दिलजले , मगर आज अकेले कैसे ?"
"क्या मतलब गुरु ?"
"वो बंदर कहाँ गया ?"
जवाब विकास ने नही बल्कि दरवाज़े पर से उभरने वाली बंदर की ची ची ची की आवाज़ ने दिया !
वहाँ धनुष्टानकार मोजूद था , जो विजय को खा जाने वाली नज़रों से घूर रहा था !
विजय तुरंत बोला -" अर्रे तौबा ! मेरे बाप की तौबा ! प्यारे ! कसम छिड़ी मार की ! मैने तुम्हे बंदर नही कहा !"
अज़ीब नमूना था वो जिसे धनुश्टन्कार कहा जाता है !
जिस्म से बंदर , मन-मस्तिष्क से इंसान !
इस किरदार की कहानी भी बढ़ी अज़ीब है !
एक था मोंटो नामक जेबकतरा, शराब ऑर सिगार का रसिया ! एक पागल साइंटिस्ट की जेब पर हाथ की सफाई दिखाने की कोशिश की, यह कोशिश सबसे बढ़ी भूल साबित हुई !
साइंटिस्ट ने दिमाग़ बदलने में कामयाबी हासिल की थी ! ऑर उसी साइंटिस्ट ने मोंटो नामक जेबकतरे का दिमाग़ निकाल कर बंदर के जिस्म में फिट कर दिया !
उस केस पर विजय काम कर रहा था , विजय ने डॉक्टरको उस के किए की सज़ा दी ! मोंटो नामक उस बंदर को विजय ने रख लिया ! विजय से मोंटो को विकास ने ले लिया ! उसको ट्रैनिंग दी !
कोई धनुश्टन्कार को बंदर कहे तो वो चाँटा रसीद करता था ! मगर विजय को भी उठक बैठक लगानी पड़ी !
विकास ने विजय से पूछा -- " तो यह प्रॅक्टीस हो रही थी गुरु कि आप कितनी उँचाई तक फ्लाइयिंग किक मार सकते है !"
" 16 आने ग़लत !" विजय ने तपाक से कहा --" हम तो उस साली दीवार को उसकी जगह से हटाने की कोशिश कर रहे थे प्यारे , मगर वो ठाकुर की पूतनी है , टस से मस नही हुई !"
मुस्कुरा कर बोला विकास -" आप मुझे बेवकूफ़ नही बना सकते !"
"फिर कैसे बना सकते है ?" विजय ने शुतुरमुर्ग की तरह गर्दन लंबी करके महा-मूरख की तरह पलकें झपकई !
"हमने भी ठकुराइन की कोख से जनम लिया है , उस दीवार को वहाँ से हटा कर रहेंगे.... !" विजय अपनी टोन में बोला !
"आप भी क्या बात कर रहे हैं अंकल ?" विकास ने शरारती. अंदाज़ में कहा --" ज़रा सोचिए , अगर दीवार वहाँ से हट गयी तो क्या होगा ?"
" क्या होगा प्यारे ?"
" छत आपके सिर के उपेर आ गिरेगी !"
"आऐन्न्न्न् !" विजय कुछ ऑर बोलता तभी बाहर गाड़ी रुकने की आवाज़ आई !
" विजय .... विजय .... कहाँ हो तुम ?" रघुनाथ की आवाज़ गूँजी !
" लो तुला राशि भी आ टपके !" विजय ने कहा --" लैला - लैला पुकारते चले आ रहे हैं ! अपने साथ किसी मुसीबत का टोकरा उठाए चले आ रहे हैं !"
रागुनाथ थोड़ा उत्तेजित ऑर जल्दी में नज़र आ रहा था इसीलिए विकास ऑर धनुश्टन्कार की तरफ ध्यान ना देकर विजय की तरफ बढ़ता हुआ बोला --" विजय ! मैं मुसीबत में फँस गया हूँ यार ! तुम्हारी मदद की ज़रूरत है !"
"तो क्या तुम हमें तांत्रिक अंगूठी समझकर चले आए हमारे पास ?"
" तांत्रिक अंगूठी ?"
" सुना है ऐसी अंगूठी हर समस्या को हल कर देती है !"
" उफफफफफफफफफ्फ़ ! विजय प्लज़्ज़्ज़्ज़ ! मज़ाक मत करो ! टाइम बहुत कम है ! रागुनाथ कहता चला गया ----" ठाकुर साहब ने मुझे मोहम्मद इकराम की सुरक्षा की ज़िमेदारी सौंपी थी ! मगर........ मैं उसे किडनॅप होने से नही रोक सका !"
" कहाँ से शुरू हो गये प्यारे ! कॉन मोहम्मद इकराम......! "
" क्या आप उन्ही मोहम्मद इकराम की बात कर रहे हैं पापा जिनकी वजह से कई शहरों में दंगे होरहे हैं? विजय की बात पूरी होने से पहले ही चौंकाते हुए विकास ने पूछा था !
"हां !" रागुनाथ ने जवाब दिया !
" किन लोगों ने ऑर क्यूँ किडनॅप कर लिया उन्हें ?" विकास हैरानी होते हुए बोला !
"मैं नही जानता !"
"जब कुछ जानते ही नही प्यारे तो भागते भागते यहाँ क्यूँ चले आए ऑर...... अगर उन उन महाशय को किसी ने किडनॅप कर लिया है तो हम इस में क्या कर सकते हैं ?" विजय ने कोरा सा जवाब दिया !
" समझने की कोशिश करो विजय ! उसकी सुरक्षा की ज़िमेदारी मेरी थी ! मेरे लिए ठाकुर साहब को जवाब देना मुश्किल होज़ायगा ! प्लज़्ज़्ज़, कुछ ऐसा करो कि किसी भी तरह उसे कहीं से बरामद कर लो ! मेरी जान बच जाएगी !"
विजय को भी लगा -- मामला वाकई में सीरीयस है !
रघुनाथ उस शक्श के किडनॅप की बात कर रहा था जो पिछले दो दिन से सबसे ज़्यादा चर्चा में था ! सो , जल्दी ही लाइन पर आता हुया बोला -- " पर प्यारे , पूरा किस्सा तो बताओ ! कैसे किडनॅप हुआ उसका, तुम को कब उसकी हिफ़ाज़त की ज़िमेदारी दे दी , ए टू z शुरू हो जाओ !"
" जम्मू में दंगे फ़साद का कारण था उसका भाषण , उस भाषण ने , बल्कि यह कहा जाए तो ज़्यादा ठीक होगा कि भाषण के एक छोटे से अंश ने जम्मू ही नही पूरे देश के कट्टर हिंदू समूह को उत्तेजित कर दिया है ! सबसे पहले जम्मू के लोग ही सड़को पर उतरे ! वहाँ की पोलीस ने सख्ती से काम ना लिया होता तो भीड़ मोहम्मद इकराम को मार डालती ! आज हिंदू लोग उसको अपना सबसे बड़ा दुश्मन मान रहे है ऑर मुस्लिम अपना मसीहा समझ रहे है !" कहता कहता रुका रघुनाथ !
फिर बोला -" असल में मोहम्मद इकराम एक सच्चा देश-भक्त है , वो हिंदू ऑर मुस्लिम को पहले भारतीय मानता है ! ऑर अगले मंथ अपने प्रधान-मंत्री पाकिस्तान के राष्ट्र-पति से मिलने जाने वाले हैं उस मीटिंग को अरेंज करने में मोहम्मद इकराम का हाथ है, कुछ लोग मोहम्मद इकराम के पोलिटिकल कॅरियर को तबाह करना चाहते सारी साज़िश रची गयी उसके खिलाफ , कुछ उग्रवादी संगठन भी नही चाहते भारत पाकिस्तान की कोई पोलिटिकल मीटिंग हो !" तुम्हारे पिता जी ने मुझे बताया था, मोहम्मद इकराम की सेक्यूरिटी का इंचार्ज नियुक्त करते समय !