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नुसरत ने अपना मुंह उठाया, उसमें पान का पीक भरा था । उसे अपने लिबास पर गिरने से बचाने का प्रयत्न करता हुआ बोला ----- "यह मिस्टेक तुमने और हरशरण शासत्री ने मिलकर की ।"
" शा ...... शास्त्री ने?”
"उसने, जिसने तुम्हें इंडिया में मोहम्मद इकराम को सप्लाई किया था ।"
" वह सब तो आप ही के हुक्म पर हुआ था ।" असलम कहता चला गया---'क्वालिस वालों ने जख्मी और बेहोश मोहम्मद इकराम को शास्त्री के हबाले कीया , शास्त्री ने मेरे हबाले !!!
मैंने उसी हालत में उसे वहां पहुचा दिया जहां आपने कहा था । जब तक मेरे पास रहा, मोहम्मद इकराम को होश तक नहीं आया था । फिर भला मुझसे कहां क्या मिस्टेक हो गई?"
“उसे कहाँ पहुचाया तुमने ।”
"इमाम स्ट्रीट । बंगला नः ए…पांच सौ पैंसठ ।"'
"ये लो ।" कहने के साथ नुसरत ने मुह से भरा पान का सारा पीक ड्राइंग रूम के फ़र्श पर करने के वाद मुह साफ करते हुये कहा ----" अब तुम पुरी मिस्टेक कर बैठे ।"'
" ज…जी ।”
तुगलक ने कहा----"मोहम्मद इकराम को जहाँ पहुचाया था उसका पूरा पता बता बेठे !"
“स.. .सर ।" असलम बौखला गया…"केवल आप ही लोग तो हैं यहां ? भ.. .भला आप लोगों के सामने पता बताने से क्या फ़र्क पड़ता है । "
" हमने सुना है दीवारों के कान कनकब्बों जैसे होते हैं ।"
"क. . .कम से कम मेरे फ्लैट की दीवार के कान सहीं नहीं हैं !"
"मिस्टेक पर मिस्टेक किए जा रहे हो मियां, अब तीसरी कर बेठे !"
" जि...जी मैं समझा नहीं ।"
"हमारे अलावा इस वक्त और कोई नहीं है इस पैलेट में?" असलम से पहले नुसरत ने कहा--- “देखो मियां, झूठ मत बोलना । झूठ से हमें उतनी नफ़रत है जितनी नेवले को सांप से ।" "और सांप को नेवले से ।" बात तुगलक ने पूरी की ।
असलम के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं थी । हलक सुखता चला गया । उनकी बातों से लगता था---वे फ्तैट में लड़की की मोजूदगी से वाकिफ हैं ।
कैसे---यह बात कैसे मातूम हो सकती है उन्हे? कोशिश के बावजूद असलम समझ न सका ।
नुसरत तुगलक की क्रूरता उसने आज तक अपनी आखों से भले ही न देखी हों मगर सुन खूब रखा था।
कई किस्से भी सुने थे उनके जालिमपने के । सो, झूठ न बोल सका । बोला-----"बेडरुम में एक लड़की है । क.. .कालगर्ल है । थ.....थोड़ी मौज मस्ती के लिये बुलायी थी ! "
"अब बताओ ।” तुगलक बोला…"उसकी मौजूदगी के बावजूद तुम कह रहे थे , तुम्हारे फ्लेट के कान नहीं है !
बाजारू लड़कियों के कान जितने तेज होते हैं, पाचन-शक्ति उतनी ही कमजोर । अपनी जानकारियों के उल्टी-दस्त वे चाहे जब जहाँ कर सकती है ।"
"स सौरी सौरी सर ।" असलम का चेहरा पीला पड़ गया!
नुसरत ने पूछा-“किस बात की सौरी?"
"लडकी के रहते मैंने ठीकाने का पता मुह से निकाला ।"
"तुम्हारी ये सौरी केवल एक शर्त पर एक्सेप्ट हो सकती है ।"
"क कैसी शर्त?"
"छोरी के दर्शन कराओ ।"
नुसरत बोला---'' तुम पहरा दोगे ।"
" हम-छोरी से निपटेंगे ।"
"'.ब. बहुत दिन हो गए किसी छोरी से नहीं निपटे ।" तुगलक ने कहा ।
असलम ने नुसरत- तुगलक के बारे में जो बहुत सारी बातें सुन रखी थी उनमें एक यह थी---" शराब और शबाब से उतनी ही दूर रहते हैं जितनी पृथ्वी सूरज से है ।"
इसके बावजूद इस वक्त नुसरत-तुगलक खुद छोरी से निपटने के लिए कह रहे थे । उसे लगा-इस सम्बंध में नुसरत-तुगलक के बोरे में उसने जो सुना था…गलत था । वे रसिया किस्म के है । इस क्षण असलम के दिमाग ने उससे कहा… 'तू भी किस बात पर यकीन कर बेठा था असलम । दुनिया में ऐसा मर्द भला हो ही कहाँ सकता है जो शबाब से दूर रह सके ।'
उसे पवक्रा विश्वास हो गया कि-लड़की को 'परोसकर' इनके कहर का शिकार होने से बच सकता है अतः जल्दी से बोता--" क क्यों नहीं । लड़की बहुत ही सुदर है ।"