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दूसरी तरफ रीत मलिक की बाहों में बाहें डालकर भरे से दिल से कहती है- “जाने का जरा सा भी दिल नहीं करता आपको छोड़कर, पर जान मुझे अब जाना ही होगा..”
मलिक- जान मेरा भी दिल नहीं लगेगा तेरे बिना।
रीत- लगना तो मेरा भी नहीं है, पर ये मेरी मजबूरी है।
मलिक रीत के होंठों में होंठ डालकर चूसता है, और दोनों आशिक एक दूसरे को अलविदा कहकर चले जाते हैं। पिंकी और रीत घर आकर देखती हैं, की हरपाल और सुखजीत कार में बैठकर रीत का ही इंतेजार कर रहे थे।
सुखजीत- तू कहां चली गई थी?
रीत- “ओहह... मम्मी मैं दर्शल.......” रीत से कोई बहाना नहीं लगता, इसलिए पिंकी झट से बीच में बोली।
पिंकी- “चाची मेरी एक सहेली अब रीत की भी अच्छी दोस्त बन चुकी है। बस जाते-जाते एक बार उससे मिलने के लिए गई थी।
सुखजीत- ठीक है, अब चलें?
सुखजीत कार से बाहर निकलकर नई-नई बह को प्यार देती है, और फिर वो चरणजीत को कसकर अपनी बाहों में लेकर उसके कान में धीरे से बोली- “बहनजी मेरे पीछे अब आपने पूरे मजे लेने है, बिटू और मीते के.."
सुखजीत की ये बात सुनकर चरणजीत शर्मा जाती है, और फिर सुखजीत बलविंदर को सत श्री अकाल कहती है। फिर वो पिंकी के गले से लगाकर उसके कान में बोली- “बेटी जीती रह..."
पिंकी धीरे से सुखजीत के कान में बोली- “चाची तू बहुत जाती है रात को पार्टी के पास कल तो मैंने उसे रात में तुझे देख लिया था..”
पिंकी की ये बात सुनते ही सुखजीत के पैरों के नीचे की जमीन निकल जाती है। वो अपने मन में सोचती है, की ये थी वो आखीरकार, जिसने मुझे उस रात देखा था। पर सुखजीत अपने दिल का डर जरा सा भी अपने चेहरे पर नहीं आने देती, और फिर हल्का सा हँसकर वो कार में बैठ जाती है।
फिर हरपाल कार स्टार्ट करता है, और घर से बाहर निकल लेता है। रास्ते में बिटू और मीता खड़े होते हैं, वो हरपाल को सत श्री अकाल कहते हैं, और साथ ही दोनों सुखजीत को सेक्सी सी स्माइल करते हैं। जिसे देखकर सुखजीत को मोटर वाली रात याद आ जाती है। फिर कुछ ही देर में वो अपने घर पटियाला आ जाते हैं।
सुखजीत को इतने दिन बाद घर आकर काफी अच्छा लग रहा था। पर उसके दिल में कहीं ना कहीं बिटू से दूर होने का दर्द भी था। रीत भी अब अपनी पुरानी दुनियां में वापिस आ चुकी थी। सुखजीत और रीत ने तो गाँव में पूरी ऐश करी ही थी।
पर यहाँ घर पर सोनू ने अपनी कामवाली शीला को खुद जमकर चोदा और अपने दोस्त रिंकू और दीप को भी शीला के खूब मजे दिलाए। क्योंकी उन दोनों ने शीला को रीत बना-बनाकर चोदा था। सोनू बाहर आता है, और सबसे मिलता है।
सुखजीत शीला को आवाज देती है, और कुछ नाने को बनाने को कहती है। रीत भी अपने रूम में जाती है और फ्रेश होकर कपड़े चेंज करके पाजामा और टाप डाल लेती है। फिर वो अपने यार मलिक से व्हाटसप पर चैटिंग करने लगती है।
सुखजीत बाथरूम में जाकर नहाने लगती है। शरीर के एक-एक अंग को साबुन लगाकर रगड़ रही होती है। सुखजीत अपनी पैंटी उतार देती है, और अपनी चूत को उंगलियां डाल डालकर साफ करती है। सुखजीत ने काफी दिनों से अपनी चूत के बाल साफ नहीं किए थे। इसलिए अब वो ब्लेड लेकर अपने बाल भी साफ करने लगती है।
जैसे ही उसकी चूत के बाल साफ होते हैं, तो वो देखती है की उसकी चूत अब आगे से पहले से काफी ज्यादा खुल चुकी है। ये देखते ही उसे बिटू की याद आती है, और वो शर्मा जाती है। थोड़ी देर बाद ही सुखजीत अपनी चूत को एकदम साफ करके एकदम चिकनी कर देती है। नहाने के बाद सुखजीत करती और सलवार डाल लेती है, और किचेन में जाती है। वहां शीला सबके लिए चाय बना रही थी।
शीला- मेमसाहब, कैसी रही फिर आपकी परोग्राम?
सुखजीत- बहुत अच्छा रहा।
शीला- मेमसाहब, अब मुझे अपने घर बिहार जाना है, एक महीने के लिए।
सुखजीत- क्यों अब क्या हुआ?
शीला- वो हमारे घर वाले की तबीयत ठीक नहीं है इसलिए।
सुखजीत- ठीक है, पर मैं यहाँ काम कैसे करूँगी?
शीला- मेमसाहब, काम के लिए मैं अपने भाई रघु को यहाँ आपके पास छोड़कर जाऊँगी।
सुखजीत- वो कर लेता है घर के काम?
शीला- हाँ मेमसाहब। वो सारे काम कर लेता है। वो आज शाम को आ जाएगा, और मैं कल सुबह की गाड़ी से घर चली जाऊँगी।
सुखजीत- ठीक है।
सुखजीत फिर बाहर जाकर सोफे पर बैठ जाती है, और हरपाल भी वहीं पर बैठा होता है।
इतने में सोनू आकर कहता है- “मैं आता हूँ अभी थोड़ी देर में.."
सुखजीत- इस लड़के ने घर में तो टिकना ही नहीं।
सोनू घर से चला जाता और इतने में प्यारेलाल घर में आ जाता है। हरपाल उसको देखकर खुश हो जाता और कहता है- "और कैसे हो प्यारेलाल?"
प्यारेलाल- मैं ठीक हूँ, बहुत दिनों बाद दर्शन हुए आपके।
प्यारेलाल सुखजीत को नीचे से ऊपर तक देखकर मुश्कुराता हुआ बोला- “सत श्री अकाल भाभीजी, आपके बिना तो पूरी कालोनी ही सूनी हो गई थी.."
सुखजीत शर्माकर बोली- “अच्छा भाईजी, मैं ऐसा क्या करती हूँ। जो मेरे जाने के बाद कालोनी सूनी हो गई?"
प्यारेलाल- भाभीजी आप ही तो हमारी कालोनी की रौनक हो।
सुखजीत ये सुनकर अपनी आँखें नीचे कर लेती है। हरपाल को ये बातें सुनकर ऐसा लग रहा था, की वो मजाक कर रहा है। पर अंदर की बात कुछ और ही थी।
प्यारेलाल सोफे पर आकर बैठ जाता है और बोला- "और फिर शादी कैसी रही?
हरपाल- हाँ सब ठीक हो गया, और आप बताओ यहाँ सब ठीक था?
प्यारेलाल- हाँ जी भाईजी यहाँ सब एकदम ठीक था, आप सुनाओ।
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मलिक- जान मेरा भी दिल नहीं लगेगा तेरे बिना।
रीत- लगना तो मेरा भी नहीं है, पर ये मेरी मजबूरी है।
मलिक रीत के होंठों में होंठ डालकर चूसता है, और दोनों आशिक एक दूसरे को अलविदा कहकर चले जाते हैं। पिंकी और रीत घर आकर देखती हैं, की हरपाल और सुखजीत कार में बैठकर रीत का ही इंतेजार कर रहे थे।
सुखजीत- तू कहां चली गई थी?
रीत- “ओहह... मम्मी मैं दर्शल.......” रीत से कोई बहाना नहीं लगता, इसलिए पिंकी झट से बीच में बोली।
पिंकी- “चाची मेरी एक सहेली अब रीत की भी अच्छी दोस्त बन चुकी है। बस जाते-जाते एक बार उससे मिलने के लिए गई थी।
सुखजीत- ठीक है, अब चलें?
सुखजीत कार से बाहर निकलकर नई-नई बह को प्यार देती है, और फिर वो चरणजीत को कसकर अपनी बाहों में लेकर उसके कान में धीरे से बोली- “बहनजी मेरे पीछे अब आपने पूरे मजे लेने है, बिटू और मीते के.."
सुखजीत की ये बात सुनकर चरणजीत शर्मा जाती है, और फिर सुखजीत बलविंदर को सत श्री अकाल कहती है। फिर वो पिंकी के गले से लगाकर उसके कान में बोली- “बेटी जीती रह..."
पिंकी धीरे से सुखजीत के कान में बोली- “चाची तू बहुत जाती है रात को पार्टी के पास कल तो मैंने उसे रात में तुझे देख लिया था..”
पिंकी की ये बात सुनते ही सुखजीत के पैरों के नीचे की जमीन निकल जाती है। वो अपने मन में सोचती है, की ये थी वो आखीरकार, जिसने मुझे उस रात देखा था। पर सुखजीत अपने दिल का डर जरा सा भी अपने चेहरे पर नहीं आने देती, और फिर हल्का सा हँसकर वो कार में बैठ जाती है।
फिर हरपाल कार स्टार्ट करता है, और घर से बाहर निकल लेता है। रास्ते में बिटू और मीता खड़े होते हैं, वो हरपाल को सत श्री अकाल कहते हैं, और साथ ही दोनों सुखजीत को सेक्सी सी स्माइल करते हैं। जिसे देखकर सुखजीत को मोटर वाली रात याद आ जाती है। फिर कुछ ही देर में वो अपने घर पटियाला आ जाते हैं।
सुखजीत को इतने दिन बाद घर आकर काफी अच्छा लग रहा था। पर उसके दिल में कहीं ना कहीं बिटू से दूर होने का दर्द भी था। रीत भी अब अपनी पुरानी दुनियां में वापिस आ चुकी थी। सुखजीत और रीत ने तो गाँव में पूरी ऐश करी ही थी।
पर यहाँ घर पर सोनू ने अपनी कामवाली शीला को खुद जमकर चोदा और अपने दोस्त रिंकू और दीप को भी शीला के खूब मजे दिलाए। क्योंकी उन दोनों ने शीला को रीत बना-बनाकर चोदा था। सोनू बाहर आता है, और सबसे मिलता है।
सुखजीत शीला को आवाज देती है, और कुछ नाने को बनाने को कहती है। रीत भी अपने रूम में जाती है और फ्रेश होकर कपड़े चेंज करके पाजामा और टाप डाल लेती है। फिर वो अपने यार मलिक से व्हाटसप पर चैटिंग करने लगती है।
सुखजीत बाथरूम में जाकर नहाने लगती है। शरीर के एक-एक अंग को साबुन लगाकर रगड़ रही होती है। सुखजीत अपनी पैंटी उतार देती है, और अपनी चूत को उंगलियां डाल डालकर साफ करती है। सुखजीत ने काफी दिनों से अपनी चूत के बाल साफ नहीं किए थे। इसलिए अब वो ब्लेड लेकर अपने बाल भी साफ करने लगती है।
जैसे ही उसकी चूत के बाल साफ होते हैं, तो वो देखती है की उसकी चूत अब आगे से पहले से काफी ज्यादा खुल चुकी है। ये देखते ही उसे बिटू की याद आती है, और वो शर्मा जाती है। थोड़ी देर बाद ही सुखजीत अपनी चूत को एकदम साफ करके एकदम चिकनी कर देती है। नहाने के बाद सुखजीत करती और सलवार डाल लेती है, और किचेन में जाती है। वहां शीला सबके लिए चाय बना रही थी।
शीला- मेमसाहब, कैसी रही फिर आपकी परोग्राम?
सुखजीत- बहुत अच्छा रहा।
शीला- मेमसाहब, अब मुझे अपने घर बिहार जाना है, एक महीने के लिए।
सुखजीत- क्यों अब क्या हुआ?
शीला- वो हमारे घर वाले की तबीयत ठीक नहीं है इसलिए।
सुखजीत- ठीक है, पर मैं यहाँ काम कैसे करूँगी?
शीला- मेमसाहब, काम के लिए मैं अपने भाई रघु को यहाँ आपके पास छोड़कर जाऊँगी।
सुखजीत- वो कर लेता है घर के काम?
शीला- हाँ मेमसाहब। वो सारे काम कर लेता है। वो आज शाम को आ जाएगा, और मैं कल सुबह की गाड़ी से घर चली जाऊँगी।
सुखजीत- ठीक है।
सुखजीत फिर बाहर जाकर सोफे पर बैठ जाती है, और हरपाल भी वहीं पर बैठा होता है।
इतने में सोनू आकर कहता है- “मैं आता हूँ अभी थोड़ी देर में.."
सुखजीत- इस लड़के ने घर में तो टिकना ही नहीं।
सोनू घर से चला जाता और इतने में प्यारेलाल घर में आ जाता है। हरपाल उसको देखकर खुश हो जाता और कहता है- "और कैसे हो प्यारेलाल?"
प्यारेलाल- मैं ठीक हूँ, बहुत दिनों बाद दर्शन हुए आपके।
प्यारेलाल सुखजीत को नीचे से ऊपर तक देखकर मुश्कुराता हुआ बोला- “सत श्री अकाल भाभीजी, आपके बिना तो पूरी कालोनी ही सूनी हो गई थी.."
सुखजीत शर्माकर बोली- “अच्छा भाईजी, मैं ऐसा क्या करती हूँ। जो मेरे जाने के बाद कालोनी सूनी हो गई?"
प्यारेलाल- भाभीजी आप ही तो हमारी कालोनी की रौनक हो।
सुखजीत ये सुनकर अपनी आँखें नीचे कर लेती है। हरपाल को ये बातें सुनकर ऐसा लग रहा था, की वो मजाक कर रहा है। पर अंदर की बात कुछ और ही थी।
प्यारेलाल सोफे पर आकर बैठ जाता है और बोला- "और फिर शादी कैसी रही?
हरपाल- हाँ सब ठीक हो गया, और आप बताओ यहाँ सब ठीक था?
प्यारेलाल- हाँ जी भाईजी यहाँ सब एकदम ठीक था, आप सुनाओ।
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