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Guest
''आयुर्वेद। बीमारियों के इलाज के विज्ञान का आध्यात्मिक पहलू आयुर्वेद है। कोरोना के इलाज में आयुर्वेदिक तौर-तरीकों का उपयोग किए जाने के बारे में तो आपने सुना ही होगा। और सुना है इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। वैसे भी अध्यात्म से कोरोना के इलाज के बारे में पूछना तो वैसा ही है
, जैसे किसी आदमी को दो रास्तों में से एक चुनना हो और एक रास्ते पर बहुत दूर चलने के बाद वो ये चाहने लगे कि काश
, वो उस दूसरे रास्ते में उसी जगह पर होता
, जहां इस रास्ते पर इतना चलने के बाद पहुंचा था। क्या ऐसा सम्भव है
? जिस चीज में आपने कभी इंट्रेस्ट नहीं लिया
, उसका हमेशा मजाक उड़ाया
, उसे समझने की कोशिश भी नहीं की
, अब आप चाहते हैं वो एकदम से आपके लिए जीवन रक्षक बन जाए
? वैसे मेरा मानना तो ये है कि अगर अध्यात्म का सहारा लिया गया होता तो दुनिया के पास न सिर्फ ऐसी बीमारियों के इलाज होते बल्कि शायद ऐसी बीमारियां फैलने की नौबत ही नहीं आती।
"
''बात में दम है।
"-अनुराग बोला।
''कोरोना से बचाव के लिए जिस सैनिटाइजेशन की बात की जाती है
, क्या वो पुराने समय से हमारे जीवन पद्धति में शामिल नहीं था
? क्या हम हाथ-मुंह अच्छी तरह धोकर खाना नहीं खाते थे
? क्या सूर्य नमस्कार कर समय पर भोजन कर
, रात में समय पर सो कर और सुबह समय पर जागकर अपनी इम्यूनिटी को मजबूत नहीं करते थे
? आज जिस सोशल डिस्टेंसिंग की बात की जा रही है
, क्या वो पहले हमारी जीवन पद्धति में नहीं थी
? क्या हम दूर से ही लोगों को नमस्कार नहीं करते थे
? या पहले से ही अंग्रेजों की तरह शेक हैण्ड करते आ रहे थे
? आज इतनी सावधानी से जीने
, तमाम तरह के प्रोटीन-विटामिन की गोलियां
, पाउडर वगैरह खिलाने के बाद भी थोड़ी-सी बारिश में भीगने पर बच्चे को जुकाम हो जाता है और मां-बाप उसे लेकर हॉस्पिटल दौड़ पड़ते हैं। लेकिन बनारस
, लखनऊ जैसी जगहों में मैं आज भी ऐसे लोगों को जानता हूं
, जो कड़ाके की ठण्ड में भी सुबह मुंह अंधेरे उठकर नदी में स्नान कर लिया करते हैं और मजाल है
, जो जरा-सा ठिठुर कर दिखा दें
, सर्दी-जुकाम उन्हें छू भी जाए।
"
कमरे में शांति छा गई।
''रात काफी हो गई है।
"-डोंगरा हाथ में बंधी घड़ी पर नजर मारते हुए बोला-
''किसी और को कुछ कहना है इस टॉपिक पर। या खत्म करें
?"
कोई कुछ नहीं बोला।
''खत्म करते हैं फिर!
"-डोंगरा बोला।
''मेरे कुछ सवाल हैं।
"-अचानक डॉली बोली।
सबकी नजरें डॉली की ओर उठ गईं।
''मैं चाहती हूं आप लोग इसका जवाब हाथ उठाकर दें। जिससे किसी तरह की बहसबाजी की नौबत न आए। और इसमें ज्यादा टाइम भी न लगे। मंजूर
?"
''ठीक है।
"-प्रीति बोली-
''सवाल पूछो।
"
''जिस-जिस को यकीन है कि भूत-प्रेतों का भी अस्तित्त्व होता है
, वो हाथ उठाए।
"
राज ने हाथ ऊपर किया।
''सिर्फ एक
?"-डॉली बोली-
''चलो
, ठीक है। अगला सवाल
, आज सुबह कब्रिस्तान में जब हमने उस बच्चे की हंसी की आवाज सुनी थी तो कौन-कौन डरा था?
"
सभी ने हाथ खड़े कर दिए।
''ओके।
"-डॉली ने सिर हिलाया-
''अब तीसरा और आखिरी सवाल-आप में से कितने लोग मानते हैं कि कब्रिस्तान में हमने जिस बच्चे की खिलखिलाहट की आवाज सुनी थी
, वो डेविड था।
"
''डेविड
?"-अनुराग हैरानी से बोला।
''डेविड कीन। जिसकी कब्र हमने वहीं ढूंढ निकाली थी।
"
कमरे में सन्नाटा छा गया। सब एक-दूसरे का मुंह देखने लगे।
तभी अचानक कमरे में गर्म हवा के झोंके ने सबको चौंका दिया।
हवा का वो झोंका इतना गर्म था कि एक सेकेंड के लिए उन सबको ऐसा अहसास हुआ
, जैसे वो किसी भट्ठी में बैठे हों।
सब स्तब्ध रह गए।
कुछ देर कमरे में सन्नाटा छाया रहा।
, जैसे किसी आदमी को दो रास्तों में से एक चुनना हो और एक रास्ते पर बहुत दूर चलने के बाद वो ये चाहने लगे कि काश
, वो उस दूसरे रास्ते में उसी जगह पर होता
, जहां इस रास्ते पर इतना चलने के बाद पहुंचा था। क्या ऐसा सम्भव है
? जिस चीज में आपने कभी इंट्रेस्ट नहीं लिया
, उसका हमेशा मजाक उड़ाया
, उसे समझने की कोशिश भी नहीं की
, अब आप चाहते हैं वो एकदम से आपके लिए जीवन रक्षक बन जाए
? वैसे मेरा मानना तो ये है कि अगर अध्यात्म का सहारा लिया गया होता तो दुनिया के पास न सिर्फ ऐसी बीमारियों के इलाज होते बल्कि शायद ऐसी बीमारियां फैलने की नौबत ही नहीं आती।
"
''बात में दम है।
"-अनुराग बोला।
''कोरोना से बचाव के लिए जिस सैनिटाइजेशन की बात की जाती है
, क्या वो पुराने समय से हमारे जीवन पद्धति में शामिल नहीं था
? क्या हम हाथ-मुंह अच्छी तरह धोकर खाना नहीं खाते थे
? क्या सूर्य नमस्कार कर समय पर भोजन कर
, रात में समय पर सो कर और सुबह समय पर जागकर अपनी इम्यूनिटी को मजबूत नहीं करते थे
? आज जिस सोशल डिस्टेंसिंग की बात की जा रही है
, क्या वो पहले हमारी जीवन पद्धति में नहीं थी
? क्या हम दूर से ही लोगों को नमस्कार नहीं करते थे
? या पहले से ही अंग्रेजों की तरह शेक हैण्ड करते आ रहे थे
? आज इतनी सावधानी से जीने
, तमाम तरह के प्रोटीन-विटामिन की गोलियां
, पाउडर वगैरह खिलाने के बाद भी थोड़ी-सी बारिश में भीगने पर बच्चे को जुकाम हो जाता है और मां-बाप उसे लेकर हॉस्पिटल दौड़ पड़ते हैं। लेकिन बनारस
, लखनऊ जैसी जगहों में मैं आज भी ऐसे लोगों को जानता हूं
, जो कड़ाके की ठण्ड में भी सुबह मुंह अंधेरे उठकर नदी में स्नान कर लिया करते हैं और मजाल है
, जो जरा-सा ठिठुर कर दिखा दें
, सर्दी-जुकाम उन्हें छू भी जाए।
"
कमरे में शांति छा गई।
''रात काफी हो गई है।
"-डोंगरा हाथ में बंधी घड़ी पर नजर मारते हुए बोला-
''किसी और को कुछ कहना है इस टॉपिक पर। या खत्म करें
?"
कोई कुछ नहीं बोला।
''खत्म करते हैं फिर!
"-डोंगरा बोला।
''मेरे कुछ सवाल हैं।
"-अचानक डॉली बोली।
सबकी नजरें डॉली की ओर उठ गईं।
''मैं चाहती हूं आप लोग इसका जवाब हाथ उठाकर दें। जिससे किसी तरह की बहसबाजी की नौबत न आए। और इसमें ज्यादा टाइम भी न लगे। मंजूर
?"
''ठीक है।
"-प्रीति बोली-
''सवाल पूछो।
"
''जिस-जिस को यकीन है कि भूत-प्रेतों का भी अस्तित्त्व होता है
, वो हाथ उठाए।
"
राज ने हाथ ऊपर किया।
''सिर्फ एक
?"-डॉली बोली-
''चलो
, ठीक है। अगला सवाल
, आज सुबह कब्रिस्तान में जब हमने उस बच्चे की हंसी की आवाज सुनी थी तो कौन-कौन डरा था?
"
सभी ने हाथ खड़े कर दिए।
''ओके।
"-डॉली ने सिर हिलाया-
''अब तीसरा और आखिरी सवाल-आप में से कितने लोग मानते हैं कि कब्रिस्तान में हमने जिस बच्चे की खिलखिलाहट की आवाज सुनी थी
, वो डेविड था।
"
''डेविड
?"-अनुराग हैरानी से बोला।
''डेविड कीन। जिसकी कब्र हमने वहीं ढूंढ निकाली थी।
"
कमरे में सन्नाटा छा गया। सब एक-दूसरे का मुंह देखने लगे।
तभी अचानक कमरे में गर्म हवा के झोंके ने सबको चौंका दिया।
हवा का वो झोंका इतना गर्म था कि एक सेकेंड के लिए उन सबको ऐसा अहसास हुआ
, जैसे वो किसी भट्ठी में बैठे हों।
सब स्तब्ध रह गए।
कुछ देर कमरे में सन्नाटा छाया रहा।