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रिंकी को ढूंढने के दौरान उन्हें उस मकान में बहुत सारा सामान इधर-उधर बिखरा मिला था। उसी में एक कमरे से राज ने एक बड़ा सा रैन्च लिया, फिर सभी लोग मकान के पिछले हिस्से में पहुंचे।
वे स्टोर रूम के लकड़ी के पुराने लेकिन मजबूत लगने वाले दरवाजे के सामने खड़े थे।
दरवाजे की जंग लगी कुण्डी पर बड़ा सा ताला लटका हुआ था।
''ठीक है!"-राज नेे एक बार अपने साथियों की ओर देख कर सिर हिलाया, फिर रैंच को जोर से ताले पर मारा।
जंगल के सन्नाटे में रैंच के ताले से टकराने की जोरदार आवाज दूर-दूर तक गूंज उठी।
ताले को कुछ नहीं हुआ।
राज ने फिर वार किया।
उस बार रैंच के ताले से टकराने की जोरदार आवाज के बीच ही किसी बच्चे के खिलखिलाने की आवाज भी गूंज उठी।
सब सन्न रह गये।
उन्होंने चारों ओर देखा लेकिन कहीं कोई और नजर नहीं आया।
''य...ये...आवाज कैसी थी ?"-प्रीति भयभीत स्वर में बोली।
''वैसी ही"-मोहिनी बोली-''जैसी कल उस कब्रिस्तान में हमने सुनी थी।"
सब एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे, फिर सबकी नजरें राजके चेहरे पर टिक गईं।
''क्या हुआ?"-उन्हें इस तरह अपनी ओर घूरते पाकर राज के मुंह से बरबस ही निकल गया।
''तुम बताओ?"-डोंगरा बोला।
''मैं क्या बताऊं?"-राज उखड़े स्वर में बोला।
''तुम्हीं तो पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर हो। तुम नहीं तो और कौन बताएगा ?"
राज ने गहरी सांस ली।
वहां तो पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर होना भी गुनाह था।
''मैं तुम लोगों को डराना तो नहीं चाहता था"-फिर वो बोला- ''लेकिन अब तुम लोग पूछ ही रहे हो तो मुझे लगता है, ये उसी बच्चे की आत्मा है, जिसकी कब्र कल हमने उस कब्रिस्तान में देखी थी।"
डोंगरा का चेहरा फक्क पड़ गया। बाकी के चेहरों पर भी गम्भीरता की परत चढ़ गई।
''लेकिन
"-फिर राज ने जल्दी से जोड़ा-''जरूरी नहीं कि ऐसा ही हो। फिलहाल हमें अपना ध्यान रिंकी को ढूंढने पर केन्द्रित रखना चाहिए।"
''हां।
"-डोंगरा ने सिर हिलाया- ''हमें जल्दबाजी नहीं करनी है। हमें सही वक्त का इंतजार करना चाहिए...।"
''इंतजार?"-मोहिनी लगभग चीखती-सी बोली- ''किस चीज का इंतजार ? जब तक उस बच्चे का भूत निकलकर हमारे सामने नहीं आ जाता? जब तक रिंकी की तरह हममें से तीन-चार लोग और गायब नहीं हो जाते? जब तक हममें से एकाध मर नहीं जाता...?"
''मोहिनी...।"-अनुराग ने उसे रोकने की कोशिश की।
''नहीं।"-मोहिनी तेज स्वर में बोली-''मुझे बोलने दो। कोई बता सकता है रिंकी इस वक्त कहां है? किस हालत में है? तुम लोगों की बातों में आकर यहां आकर मैंने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती की है। उस कब्रिस्तान में वो आठ कब्रें किसके लिये खोदी गईं हैं? अब...अब मुझे नहीं लगता कि हममें से कोई भी यहां से जिंदा वापस जा पायेगा। "-कहकर मोहिनी ने अपना चेहरा अपने दोनों हाथों में छिपा लिया।
किसी के मुंह से बोल न फूटा।
जो अनकहा था, वो मोहिनी ने कह दिया था।
सब कुछ देर अपनी जगह पर पत्थर की मूरत से बने खड़े रहे।
फिर राज ने रैंच उठाया और ताले पर दोबारा वार किया।
ताला टूट कर जमीन पर जा गिरा।
ताले के उस तरह अचानक टूट जाने से भी राज हैरान हुए बिना नहीं रह सका। उसने पिछले दो वार काफी जोर से किए थे, जिनसे ताले को टस से मस नहीं होते देख कर उसे लग रहा था कि उसे आठ-दस वार करने होंगें, जिसके चलते इस बार उसने ताले पर जोर से वार भी नहीं किया था।
लेकिन पिछले दो शक्तिशाली वारों को आराम से झेल गया बेहद मजबूत सा दिखने वाला वो ताला तीसरे वार में अचानक ही टूट गया।
राज ने धक्का देकर स्टोर रूम का दरवाजा खोला। दरवाजे के निचले हिस्से वहां जमी धूल में धंस गए थे
, जिससे दरवाजे को धक्का देकर खोलना पड़ा।
अंदर बड़े से हॉल जैसा विशालकाय स्टोर रूम उनके सामने था।
वे स्टोर रूम के लकड़ी के पुराने लेकिन मजबूत लगने वाले दरवाजे के सामने खड़े थे।
दरवाजे की जंग लगी कुण्डी पर बड़ा सा ताला लटका हुआ था।
''ठीक है!"-राज नेे एक बार अपने साथियों की ओर देख कर सिर हिलाया, फिर रैंच को जोर से ताले पर मारा।
जंगल के सन्नाटे में रैंच के ताले से टकराने की जोरदार आवाज दूर-दूर तक गूंज उठी।
ताले को कुछ नहीं हुआ।
राज ने फिर वार किया।
उस बार रैंच के ताले से टकराने की जोरदार आवाज के बीच ही किसी बच्चे के खिलखिलाने की आवाज भी गूंज उठी।
सब सन्न रह गये।
उन्होंने चारों ओर देखा लेकिन कहीं कोई और नजर नहीं आया।
''य...ये...आवाज कैसी थी ?"-प्रीति भयभीत स्वर में बोली।
''वैसी ही"-मोहिनी बोली-''जैसी कल उस कब्रिस्तान में हमने सुनी थी।"
सब एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे, फिर सबकी नजरें राजके चेहरे पर टिक गईं।
''क्या हुआ?"-उन्हें इस तरह अपनी ओर घूरते पाकर राज के मुंह से बरबस ही निकल गया।
''तुम बताओ?"-डोंगरा बोला।
''मैं क्या बताऊं?"-राज उखड़े स्वर में बोला।
''तुम्हीं तो पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर हो। तुम नहीं तो और कौन बताएगा ?"
राज ने गहरी सांस ली।
वहां तो पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर होना भी गुनाह था।
''मैं तुम लोगों को डराना तो नहीं चाहता था"-फिर वो बोला- ''लेकिन अब तुम लोग पूछ ही रहे हो तो मुझे लगता है, ये उसी बच्चे की आत्मा है, जिसकी कब्र कल हमने उस कब्रिस्तान में देखी थी।"
डोंगरा का चेहरा फक्क पड़ गया। बाकी के चेहरों पर भी गम्भीरता की परत चढ़ गई।
''लेकिन
"-फिर राज ने जल्दी से जोड़ा-''जरूरी नहीं कि ऐसा ही हो। फिलहाल हमें अपना ध्यान रिंकी को ढूंढने पर केन्द्रित रखना चाहिए।"
''हां।
"-डोंगरा ने सिर हिलाया- ''हमें जल्दबाजी नहीं करनी है। हमें सही वक्त का इंतजार करना चाहिए...।"
''इंतजार?"-मोहिनी लगभग चीखती-सी बोली- ''किस चीज का इंतजार ? जब तक उस बच्चे का भूत निकलकर हमारे सामने नहीं आ जाता? जब तक रिंकी की तरह हममें से तीन-चार लोग और गायब नहीं हो जाते? जब तक हममें से एकाध मर नहीं जाता...?"
''मोहिनी...।"-अनुराग ने उसे रोकने की कोशिश की।
''नहीं।"-मोहिनी तेज स्वर में बोली-''मुझे बोलने दो। कोई बता सकता है रिंकी इस वक्त कहां है? किस हालत में है? तुम लोगों की बातों में आकर यहां आकर मैंने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती की है। उस कब्रिस्तान में वो आठ कब्रें किसके लिये खोदी गईं हैं? अब...अब मुझे नहीं लगता कि हममें से कोई भी यहां से जिंदा वापस जा पायेगा। "-कहकर मोहिनी ने अपना चेहरा अपने दोनों हाथों में छिपा लिया।
किसी के मुंह से बोल न फूटा।
जो अनकहा था, वो मोहिनी ने कह दिया था।
सब कुछ देर अपनी जगह पर पत्थर की मूरत से बने खड़े रहे।
फिर राज ने रैंच उठाया और ताले पर दोबारा वार किया।
ताला टूट कर जमीन पर जा गिरा।
ताले के उस तरह अचानक टूट जाने से भी राज हैरान हुए बिना नहीं रह सका। उसने पिछले दो वार काफी जोर से किए थे, जिनसे ताले को टस से मस नहीं होते देख कर उसे लग रहा था कि उसे आठ-दस वार करने होंगें, जिसके चलते इस बार उसने ताले पर जोर से वार भी नहीं किया था।
लेकिन पिछले दो शक्तिशाली वारों को आराम से झेल गया बेहद मजबूत सा दिखने वाला वो ताला तीसरे वार में अचानक ही टूट गया।
राज ने धक्का देकर स्टोर रूम का दरवाजा खोला। दरवाजे के निचले हिस्से वहां जमी धूल में धंस गए थे
, जिससे दरवाजे को धक्का देकर खोलना पड़ा।
अंदर बड़े से हॉल जैसा विशालकाय स्टोर रूम उनके सामने था।