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StoryPublisher
Guest
अपडेट....36...
जेसे जेसे राज का लंड पानी छोड़ रहा था. .
वैसे ही राज के सिर से वासना का नशा उतर जाता है और राज को अपनी ग़लती का अहसास होने लगता है ....
राज .... उफफफ्फ़ गॉड ये मेंने क्या कर दिया ...
राज जेसे अभी नींद से जगा हो..
और उससे बहुत बड़ा गुनाह हो गया था..
ये सोचते हुए राज से अब एक पल भी ज्योति के रूम में रुका नही जा रहा था...
और राज बिना ज्योति की तरफ देखते तेज़ कदमो
से रूम से निकल जाता है ...
ज्योति का बदन पहली चुदाई के कारण पूरी तरह टूट चुका था..राज के रूम से चले जाने का ज्योति को अहसास भी नही होता ...
वो तो अपनी पहली चुदाई से पूरी तरह तृप्त हुई अपनी आँखे बंद किए इस नये अहसास को एंजाय कर रही थी ....
राज अपने रूम में पहूचकर कपड़े पहनता है और फिर ज्योति से बिना कुछ बताए घर से निकलने के लिए अपनी बाइक निकालता है ....
जेसे ही ज्योति को बाइक स्टार्ट होने की आवाज़ आती है ...
ज्योति .... ये भैया सुबह सुबह बिना कुछ कहे कहा जा रहे है ....
ज्योति जेसे ही देखने को बॅड से उतरती है उसकी योनि दर्द करने लगती है ...
ज्योति ... आअहह आअहह आआ
ज्योति को चलते हुए और भी दर्द महसूस हो रहा था फिर भी ज्योति लड़खड़ाहाती हुई गेट तक पहुचती है ...
मगर तब तक राज घर से निकल चुका था ...
राज का ऐसे बिना कुछ कहे चले जाना ज्योति को बड़ा अज़ीब सा लग रहा था ...
फिर ज्योति सोचती है कही भैया को मेरे साथ सेक्स करके पछतावा तो नही हो रहा ...
ज्योति ... ओह्ह्ह माइ गॉड बिल्कुल यही बात है ... पछतावे में कही भैया कुछ उल्टा सीधी ना कर बैठे मुझे भैया से बात करनी चाहिए ....
और ज्योति जल्दी से अपने रूम में पहूचकर
राज को कॉल करती है ....
राज ज्योति का कॉल रिसीव करता है ...
राज की आवाज़ सुन ज्योति को बड़ी राहत मिलती है ....
ज्योति ... भैया आप बिना कुछ कहे कहा चले गये ...
राज ... ज्योति मुझे ऑफीस में काम है
इसलिए ऑफीस जा रहा हू ...
ज्योति ... मगर आज तो सनडे है भैया...
राज ...हा मुझे आज आरजेंट फाइल्स कंप्लीट करनी है ...
ज्योति ... ओह्ह्ह्ह आपने नाश्ता भी नही किया ...
राज ... कोई बात नही में रास्ते में कर लूँगा ....
ज्योति ...ठीक है भैया..
राज से बात करके ज्योति के दिल को थोड़ा सकूँ मिलता है .....
फोन रखकर ज्योति रेलक्षे सा महसूस करती है ...
और बाथरूम में पहूचकर फ्रेश होती है.. फिर किचिन में अपने लिए नाश्ता बनातीहै ....
थोड़ी देर बाद फ्री होकर नेहा को फोन मिलाती है ....
ज्योति ... हेलो नेहा केसी है
नेहा ... में ठीक हू तू बता सुबह सुबह कैसे याद किया मुझे ....
ज्योति ... बस यार घर में अकेली बैठी बोर हो रही थी सोचा तुझेसे बात कर लू ...
नेहा ... कहा चले गये सब ..
ज्योति ..मम्मी पापा और दीदी नानी को देखने जयपुर गये है.. और भैया ऑफीस...
नेहा ... सनडे को भी ऑफीस जाते है तुम्हारे भैया..
ज्योति .. हा कुछ ज़रूरी फाइल कंप्लीट करनी होंगी ...
नेहा ... ओह्ह्ह और सुना तेरा कुछ प्रोग्राम सेट नही हुआ अभी तक ...
ज्योति ..मतलब
नेहा ... बॉय फ्रेंड से अभी तक चुदवाया की नही
ज्योति ... ओह गॉड केसी लॅंग्वेज इस्तेमाल करती है तू ...
जेसे जेसे राज का लंड पानी छोड़ रहा था. .
वैसे ही राज के सिर से वासना का नशा उतर जाता है और राज को अपनी ग़लती का अहसास होने लगता है ....
राज .... उफफफ्फ़ गॉड ये मेंने क्या कर दिया ...
राज जेसे अभी नींद से जगा हो..
और उससे बहुत बड़ा गुनाह हो गया था..
ये सोचते हुए राज से अब एक पल भी ज्योति के रूम में रुका नही जा रहा था...
और राज बिना ज्योति की तरफ देखते तेज़ कदमो
से रूम से निकल जाता है ...
ज्योति का बदन पहली चुदाई के कारण पूरी तरह टूट चुका था..राज के रूम से चले जाने का ज्योति को अहसास भी नही होता ...
वो तो अपनी पहली चुदाई से पूरी तरह तृप्त हुई अपनी आँखे बंद किए इस नये अहसास को एंजाय कर रही थी ....
राज अपने रूम में पहूचकर कपड़े पहनता है और फिर ज्योति से बिना कुछ बताए घर से निकलने के लिए अपनी बाइक निकालता है ....
जेसे ही ज्योति को बाइक स्टार्ट होने की आवाज़ आती है ...
ज्योति .... ये भैया सुबह सुबह बिना कुछ कहे कहा जा रहे है ....
ज्योति जेसे ही देखने को बॅड से उतरती है उसकी योनि दर्द करने लगती है ...
ज्योति ... आअहह आअहह आआ
ज्योति को चलते हुए और भी दर्द महसूस हो रहा था फिर भी ज्योति लड़खड़ाहाती हुई गेट तक पहुचती है ...
मगर तब तक राज घर से निकल चुका था ...
राज का ऐसे बिना कुछ कहे चले जाना ज्योति को बड़ा अज़ीब सा लग रहा था ...
फिर ज्योति सोचती है कही भैया को मेरे साथ सेक्स करके पछतावा तो नही हो रहा ...
ज्योति ... ओह्ह्ह माइ गॉड बिल्कुल यही बात है ... पछतावे में कही भैया कुछ उल्टा सीधी ना कर बैठे मुझे भैया से बात करनी चाहिए ....
और ज्योति जल्दी से अपने रूम में पहूचकर
राज को कॉल करती है ....
राज ज्योति का कॉल रिसीव करता है ...
राज की आवाज़ सुन ज्योति को बड़ी राहत मिलती है ....
ज्योति ... भैया आप बिना कुछ कहे कहा चले गये ...
राज ... ज्योति मुझे ऑफीस में काम है
इसलिए ऑफीस जा रहा हू ...
ज्योति ... मगर आज तो सनडे है भैया...
राज ...हा मुझे आज आरजेंट फाइल्स कंप्लीट करनी है ...
ज्योति ... ओह्ह्ह्ह आपने नाश्ता भी नही किया ...
राज ... कोई बात नही में रास्ते में कर लूँगा ....
ज्योति ...ठीक है भैया..
राज से बात करके ज्योति के दिल को थोड़ा सकूँ मिलता है .....
फोन रखकर ज्योति रेलक्षे सा महसूस करती है ...
और बाथरूम में पहूचकर फ्रेश होती है.. फिर किचिन में अपने लिए नाश्ता बनातीहै ....
थोड़ी देर बाद फ्री होकर नेहा को फोन मिलाती है ....
ज्योति ... हेलो नेहा केसी है
नेहा ... में ठीक हू तू बता सुबह सुबह कैसे याद किया मुझे ....
ज्योति ... बस यार घर में अकेली बैठी बोर हो रही थी सोचा तुझेसे बात कर लू ...
नेहा ... कहा चले गये सब ..
ज्योति ..मम्मी पापा और दीदी नानी को देखने जयपुर गये है.. और भैया ऑफीस...
नेहा ... सनडे को भी ऑफीस जाते है तुम्हारे भैया..
ज्योति .. हा कुछ ज़रूरी फाइल कंप्लीट करनी होंगी ...
नेहा ... ओह्ह्ह और सुना तेरा कुछ प्रोग्राम सेट नही हुआ अभी तक ...
ज्योति ..मतलब
नेहा ... बॉय फ्रेंड से अभी तक चुदवाया की नही
ज्योति ... ओह गॉड केसी लॅंग्वेज इस्तेमाल करती है तू ...