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Incest परिवार मे प्यार बेशुमार

अपडेट....36...

जेसे जेसे राज का लंड पानी छोड़ रहा था. .

वैसे ही राज के सिर से वासना का नशा उतर जाता है और राज को अपनी ग़लती का अहसास होने लगता है ....

राज .... उफफफ्फ़ गॉड ये मेंने क्या कर दिया ...

राज जेसे अभी नींद से जगा हो..

और उससे बहुत बड़ा गुनाह हो गया था..

ये सोचते हुए राज से अब एक पल भी ज्योति के रूम में रुका नही जा रहा था...

और राज बिना ज्योति की तरफ देखते तेज़ कदमो

से रूम से निकल जाता है ...

ज्योति का बदन पहली चुदाई के कारण पूरी तरह टूट चुका था..राज के रूम से चले जाने का ज्योति को अहसास भी नही होता ...

वो तो अपनी पहली चुदाई से पूरी तरह तृप्त हुई अपनी आँखे बंद किए इस नये अहसास को एंजाय कर रही थी ....

राज अपने रूम में पहूचकर कपड़े पहनता है और फिर ज्योति से बिना कुछ बताए घर से निकलने के लिए अपनी बाइक निकालता है ....

जेसे ही ज्योति को बाइक स्टार्ट होने की आवाज़ आती है ...

ज्योति .... ये भैया सुबह सुबह बिना कुछ कहे कहा जा रहे है ....

ज्योति जेसे ही देखने को बॅड से उतरती है उसकी योनि दर्द करने लगती है ...

ज्योति ... आअहह आअहह आआ

ज्योति को चलते हुए और भी दर्द महसूस हो रहा था फिर भी ज्योति लड़खड़ाहाती हुई गेट तक पहुचती है ...

मगर तब तक राज घर से निकल चुका था ...

राज का ऐसे बिना कुछ कहे चले जाना ज्योति को बड़ा अज़ीब सा लग रहा था ...

फिर ज्योति सोचती है कही भैया को मेरे साथ सेक्स करके पछतावा तो नही हो रहा ...

ज्योति ... ओह्ह्ह माइ गॉड बिल्कुल यही बात है ... पछतावे में कही भैया कुछ उल्टा सीधी ना कर बैठे मुझे भैया से बात करनी चाहिए ....

और ज्योति जल्दी से अपने रूम में पहूचकर

राज को कॉल करती है ....

राज ज्योति का कॉल रिसीव करता है ...

राज की आवाज़ सुन ज्योति को बड़ी राहत मिलती है ....

ज्योति ... भैया आप बिना कुछ कहे कहा चले गये ...

राज ... ज्योति मुझे ऑफीस में काम है

इसलिए ऑफीस जा रहा हू ...

ज्योति ... मगर आज तो सनडे है भैया...

राज ...हा मुझे आज आरजेंट फाइल्स कंप्लीट करनी है ...

ज्योति ... ओह्ह्ह्ह आपने नाश्ता भी नही किया ...

राज ... कोई बात नही में रास्ते में कर लूँगा ....

ज्योति ...ठीक है भैया..

राज से बात करके ज्योति के दिल को थोड़ा सकूँ मिलता है .....

फोन रखकर ज्योति रेलक्षे सा महसूस करती है ...

और बाथरूम में पहूचकर फ्रेश होती है.. फिर किचिन में अपने लिए नाश्ता बनातीहै ....

थोड़ी देर बाद फ्री होकर नेहा को फोन मिलाती है ....

ज्योति ... हेलो नेहा केसी है

नेहा ... में ठीक हू तू बता सुबह सुबह कैसे याद किया मुझे ....

ज्योति ... बस यार घर में अकेली बैठी बोर हो रही थी सोचा तुझेसे बात कर लू ...

नेहा ... कहा चले गये सब ..

ज्योति ..मम्मी पापा और दीदी नानी को देखने जयपुर गये है.. और भैया ऑफीस...

नेहा ... सनडे को भी ऑफीस जाते है तुम्हारे भैया..

ज्योति .. हा कुछ ज़रूरी फाइल कंप्लीट करनी होंगी ...

नेहा ... ओह्ह्ह और सुना तेरा कुछ प्रोग्राम सेट नही हुआ अभी तक ...

ज्योति ..मतलब

नेहा ... बॉय फ्रेंड से अभी तक चुदवाया की नही

ज्योति ... ओह गॉड केसी लॅंग्वेज इस्तेमाल करती है तू ...
 
नेहा .. और क्या बोलू तू ही बता दे ..

ज्योति .. अच्छा बाबा मेरे साथ जब भी कुछ होगा सबसे पहले तुझे खबर करूँगी अब खुश ....वैसे नेहा क्या कर रही है तू आ सकती है मेरे घर ...

नेहा ...यार आज सनडे है मम्मी पापा गाँव जा रहे है आज नही आ सकती....

(वैसे भी आज का दिन नेहा ने राज के लिए

बुक किया हुआ था..बस नेहा को इंतज़ार

अपने मम्मी पापा के जाने का था )

ज्योति ... ओह्ह्ह चल ठीक है रखती हू कल कॉलेज में मिलते है ....

नेहा ... ओके बाइ ज्योति

ज्योति ... बाइ ...

ज्योति का अकेले घर में बिल्कुल दिल नही लग रहा था ....

राज भी इस तरह ज्योति को अकेला छोड़ कर चला गया था ...

उधर राज ऑफीस जाते हुए एक रेस्टोरेंट में रुककर नाश्ता करता है फिर ऑफीस चला जाता है ..

राज को ऑफीस आये अभी थोड़ी ही देर हुई थी

की तभी उसके फोन पर नेहा की कॉल आती है ....

नेहा ... हेलो मेरी जान कहा हो तुम

राज ... ऑफीस में हू ..

नेहा ... सनडे को भी ऑफीस ..

अपनी जान को इतना भी मत तड़पाओ

राज ... सॉरी नेहा मुझे फाइल्स कंप्लीट करनी ज़रूरी है सुबह माल डेलिवरी करना है ..

नेहा ... ओह्ह्ह चलो कोई बात नही राज तुम अपनी फाइल्स कंप्लीट कर लो.. हम फिर किसी दिन अपना प्रोग्राम सेट कर लेंगे .....

नेहा राज की प्राब्लम समझ कर अपने दिल को तसल्ली देती है ...

राज को ऑफीस में शाम हो जाती है मगर राज तो जेसे घर जाने का नाम ही नही ले रहा था तभी राज के फोन पर ज्योति की कॉल आती है ...

ज्योति... भैया किस टाइम तक आओगे मुझे अकेले घर में डर सा लग रहा है ..

राज ... हा बस अभी निकल रहा हू ...

और राज को भी लगता है अब घर चलना चाहिए ...

थोड़ी देर बाद राज घर पहुचता है..

दरवाज़ा लॉक नही था

ज्योति किचिन में खाना बना रही थी ...

राज की नज़र ज्योति पर पड़ती है मगर राज कुछ कहे बिना सीधी अपने रूम में चला जाता है ....

और फ्रेश होकर अपने बॅड पर लेटकर मोबाइल में गेम खेलने लगता है ....

थोड़ी देर बाद ज्योति राज के रूम में खाना

लेकर आ जाती है ....

ज्योति ... लीजिए भैया मेंने आपके लिए मटर पनीर और खीर बनाई है ...

राज ... रख दे ज्योति में खा लूँगा ...

ज्योति राज के सामने बैठते हुए ...

ज्योति ... ओह्ह्ह कमोन भैया सुबह से नोट कर रही हू आपको क्या बात है मुझसे कोई ग़लती हो गई ...

राज ... नही ज्योति इसमें तेरी कोई ग़लती नही है सारा कसूर मेरा है ....

ज्योति ... ओह्ह्ह तो आप इस बात पर अंदर ही अंदर घुट रहे है आपको ऐसा क्यूँ लग रहा है भैया इसमें सारा कसूर आपका है .में कोई बच्ची नही हू जो अपना अच्छा बुरा नही समझ सकती जो भी तुमने मेरे साथ किया है उसमें मेरी भी पूरी मर्ज़ी थी मुझे तो कोई पछतावा नही है ...

राज ... मगर ज्योति ये ग़लत है हम दोनो भाई बहन है हमारे बीच ये सब ग़लत है...

ज्योति ... भैया एक बात बताऊ आपको मेरे कॉलेज की ज़्यादातर लड़कियाँ सेक्स करती है

और अपने के सेक्स के बारे में खोलकर बताती है कैसे कैसे अपने बाय्फ्रेंड के साथ सेक्स किया... उनकी बाते सुनकर मेरा भी दिल करता किसी से सेक्स करने को मगर फिर डर भी लगता कही किसी को पता चल गया तो कितनी बदनामी होगी.

और आज जब मेंने आपके साथ सेक्स किया तो मुझे इस बात का बिल्कुल भी डर नही

बल्कि मुझे बहुत खुशी है..

मुझे पहला प्यार देने वाला और कोई नही

मेरे भैया है ....

ज्योति की बाते सुनकर राज को भी लगता है

ज्योति वास्तव में बड़ी हो गई ..अपना अच्छा बुरा भली भाँति समझती है ....

राज को सोचता देख ..

ज्योति ...भैया अब ज़्यादा सोचना बंद करो

खाना ठंडा हो रहा है मेंने इतने प्यार से बनाया है ....

ज्योति एक नीवाला बनाती है और अपने हाथो से राज को खिलाने लगती है ...

राज भी अपना मूह खोलकर ज्योति के हाथ से

पहला नीवाला खा लेता है ......
 
अपडेट..... 37......

अब राज भी ज्योति के साथ रिलॅक्स लग रहा था

दोनो भाई बहन में पहले जैसी शरारत

होनी शुरू हो गई थी ...

अबकी बार राज ज्योति को अपने हाथ से नीवाला खिलता है ...

मगर ज्योति को तो शरारत करने का कोई मोका मिलना चाहिए ..जेसे ही राज का नीवाला ज्योति के मूह में जाता है ज्योति फॉरन राज की उंगली अपने दाँतों में दबा लेती है ...

राज ...उउईईईईईई काट लिया आाअ...

ज्योति खूलखिलाकर हँस पड़ती है ......

राज ... ज्योति की बच्ची छोड़ मेरा हाथ दर्द हो रहा है ....

ज्योति पूरे शरारत के मूड में थी तभी राज का फोन बज उठता है ...

राज मोबाइल उठाकर देखता है मम्मी का फोन था ...

सुषमा...हेलो बेटा

राज ... हेलो मम्मी केसी तबीयत है नानी की

सुषमा...हा बेटा ठीक है. ज्योति कहा है ज़रा बात करा उससे उसकी चोट ठीक हुई की नही...

राज अपना मोबाइल ज्योति को पकड़ाते हुए

बड़ी हैरानी से ज्योति की तरफ देखता है

ज्योति को चोट कब लगी ...

ज्योति.. हेलो मम्मी

सुषमा...बेटा अब केसा है तेरे पर का दर्द

ज्योति ... मेंने मूव लगा ली थी अब ठीक है ..

सुषमा... ओह्ह्ह मुझे तेरी बड़ी फिकर हो रही थी ...

ज्योति ... ऊहह मम्मी आप टेंशन ना लो में ठीक हू और वहाँ पर सब कैसे है ...

सुषमा.. सब तुझे ही याद कर रहे है

साथ क्यूँ नही लाए ज्योति को ....

मम्मी से बात करने के बाद राज ज्योति की तरफ घूर कर देखता है ...\

राज .. ये सब क्या चक्कर है तुझे चोट कब लगी थी ...

ज्योति ... वो भैया सुबह जाते टाइम फर्श पर फिसल गई थी ...

राज .. ओह अब बात समझ में आई ये सब तेरा ड्रामा था अपनी जगह दीदी को जयपुर भेजने का ....

ज्योति खाने के बर्तन उठाती हुई ..

राज को एक आँख मारती है

ज्योति ... ऐसा ही समझ लो भैया...

राज ... रुक अभी बताता हू तुझे

ज्योति दौड़ती हुई किचिन में पहुचती है ..

पीछेपीछे राज भी दौड़ता हुआ ज्योति को पीछे से दबोच लेता है ...

राज ... बता ऐसा क्यूँ किया तूने

ज्योति .. आपसे प्यार करने के लिए

राज ..ओह इसका मतलब ये सब तूने पहले से प्लान किए हुए था...

ज्योति ... जी भैया

राज ज्योति की सारी असलियत जानकर ...

राज .. तूने मेरे साथ इतना बड़ा गेम खेला है आज तुझे नही छोड़ूँगा...

और राज ज्योति की चोटी पकड़कर खिचने लगता है ..

राज ... बता फिर करेगी ऐसा

ज्योति ... उईईईई मर गई भैया छोड़ो मेरे बाल आआईयईईईईईईईईईईई ईईईईईईईईईईई ईईईईरीर

अच्छा भैया सॉरी सॉरी अब आगे से नही करूँगी ...... .

राज कुछ सोचकर ज्योति के बाल छोड़ देता है और अपने रूम में आ जाता है .....

रात के 10 बज चुके थे राज कपड़े बदल कर लोवर पहन लेता है...

और रूम की लाइट ऑफ करके बॅड पर लेटकर सोने की कोशिश कर रहा था ...

ज्योति किचिन का काम निपटा कर अपने रूम में पहुचती है और एक बिन ब्रा का टॉप पहन

राज के रूम में पहुचती है ..

ज्योति .. भैया सो गये क्या रूम में अंधेरा होने के कारण राज ठीक से ज्योति को देख नही पाया था ....

राज ... हा अब क्या है ...

ज्योति ... भैया मुझे अकेले डर लगता है

क्या में आपके पास सो सकती हू ...
 
राज .. क्या मुसीबत है ठीक है ठीक है

चल सो जा ..

ज्योति एक दम खुश होते हुए

ज्योति ... ऊओ थॅंक यू भैया ...

और ज्योति झट से राज से चिपकती हुई बराबर में लेट जाती है राज को एक दम अपने नंगे सीने पर ज्योति की चुचि महसूस होती है ...

राज ... देख ज्योति चुप चाप सो जा अब कोई शरारत मत करना ..

ज्योति .. ठीक है भैया नही करूँगी प्रॉमिस...

दोनो भाई बहन का चेहरा आमने सामने था ..

ज्योति ... भैया एक बात पुछु

राज ... नही जो भी पूछना है सुबह पूछ लेना ...

राज ज्योति को चुप कर देता है ...

मगर ज्योति को नींद कहा आ रही थी ज्योति के दिमाग़ में शरारत करने की सूझ रही थी ....सुबह की चुदाई ने ज्योति की चूत में खारिश मचा रखी थी.. जो सिर्फ़ फिर से चुदने से मिट सकती थी.. मगर राज था की ज्योति की बात सुनने को भी तैयार नही था...

ज्योति राज से चुदने को बेकरार थी मगर जल्दबाज़ी के मूड में बिल्कुल नही थी ...

धीरे धीरे राज को उत्तेजित करके तैयार करने की सोचती है .जिससे राज पूरी तरह तैयार होकर सारी रात चुदाई करे ......

आज की रात ज्योति स्पेशल बनाना चाहती थी ..

ये सब सोचते हुए ज्योति को काफ़ी देर हो जाती है ...और फिर ज्योति राज की तरफ खिसकती हुई अपना हाथ राज के लंड के पास ले जाती है

ज्योति को राज का लंड खड़ा सा महसूस होता है ....

ज्योति .. ओह्ह्ह हो लगता है दिल तो भैया का भी मगर पहल करने में झिझक रहे है.. लगता है आज मुझे ही सब कुछ करना पड़ेगा ...... ..

लंड की अकड़ाहट से ज्योति की हिम्मत बढ़ जाती है और ज्योति लंड को लोवर के ऊपर से ही अपने हाथ में पकड़ लेती है ...

इस बार ज्योति को राज की हल्की सी अहह सुनाई देती है ....

फिर भी राज कुछ नही बोलता ...

भैया जाग भी रहे है और कुछ कह भी नही रहे ...

ज्योति को लगता है अब शरारत करने का टाइम आ चुका है...

और ज्योति अपना हाथ लोवर के अंदर डालकर

राज का लंड पकड़कर मसलने लगती है ...

बस फिर क्या था राज के सब्र का बाँध टूट जाता है और राज पलट कर ज्योति को अपनी बाँहो में भर लेता है ....

और ज्योति खुद भी राज को अपनी आगोश में भर लेती है ....

राज ... ओह ज्योति क्या कर रही है तू

ज्योति ... भैया मुझे इस वक़्त आपके प्यार

की बहुत ज़रूरत है मुझे आपका प्यार चाहिए....

और अचानक दोनो के होंठ एक दूसरे से जुड़ जाते है.. दोनो भाई बहन एक दूसरे के होंटो का अमृत पीने लगते है ....

राज ज्योति के होंटो को चूस्ते हुए ज्योति के बालों को सहला रहा था ..

जेसे राज को भी कोई जल्दी नही थी ...

ज्योति भी यही तो चाहती थी ...

ज्योति बिना किसी झिझक के राज के ऊपर वाला होंठ चूस रही थी और राज ज्योति का निचला होंठ ...काफ़ी देर बाद दोनो की किस टूटती है

ज्योति को किस करके इतना मज़ा आया था..

जेसे आज अमृत पी लिया हो ...

ज्योति बैठते हुए खुद ही अपना टॉप उतार देती है और बैठे बैठे ही राज के मूह के पास अपनी छोटी सी गोलाइयाँ को ले आती है ...

जेसे कह रही हो ..

भैया थोड़ा सा स्वाद इसका भी चख लो..

जेसे राज भी यही चाह रहा था फॉरन अपना मूह खोलकर ज्योति के निप्पल से लगा देता है ...

ज्योति ... आअहह भैय्ाआआ पी जाओ

एक दम ताज़ा दूध है ...

ज्योति की बाते राज को और भी उत्तेजित कर रही थी ...

और राज आहिस्ता आहिस्ता निप्पलो को चूस रहा था ...

ज्योति ... आअहह सस्सीएरए भैयाअ बहुत अच्छा लग रहा है आअहह आईईीीइसस्शह ऊहह सस्स्स्सीईई सस्स्स्सीईई उूुुउउम्म्म्ममममममममममममम

राज काफ़ी देर तक ज्योति की दोनो चुचियों को चूस्ता रहा ज्योति बिन पानी मछली की तरह

मचलने लगी थी ...

चूत से जेसे लिक्विड का झरना बहने लगा था ज्योति से बर्दास्त करना मुश्किल हो गया था ...

और ज्योति के हाथ अपनी गीली चूत पर पहुच कर चूत को रगड़ने लगते है...मगर इससे भी ज्योति को आराम नही मिलता और ज्योति फॉरन अपनी एक लौति

पेंटी भी उतार फेंकती है ...

और ज्योति राज का हाथ पकड़कर सुलग रही चूत पर रख देती है ...

राज भी अपना हाथ चूत की फांको पर चला कर देखता है राज का पूरा हाथ चूत के लिक्विड से गीला हो जाता है ...

राज अपने गीले हुए हाथ को जेसे ही अपने मूह के पास लाकर देखता है उसकी सुगंध राज को टेस्ट करने पर मजबूर कर देती है ...और राज अपनी गीली उंगली को मूह में लेकर टेस्ट करता है ..राज को स्वाद इतना अच्छा लगता है की राज एक दम ज्योति की चूत पर अपना मूह लगा देता है ....

ज्योति .. आआहहस्स्स्स्स्स्स्स्स्शह

सस्स्स्स्स्स्सस्स ऊऊहह

सस्स्सीईईई सस्सीईए उूुुउउम्म्म्ममममममममममममम
 
ज्योति तो सागर में गोते लगाने लगी थी

चुदाई से भी ज़्यादा मज़ा उसको चुसाई में आ रहा था

राज ने ज्योति की चूत को चूस चूस कर बिल्कुल क्लीन कर दिया था ज्योति पूरी तड़प चुकी थी उत्तेजना में ज्योति ने राज के सिर के बाल जेसे नोच ही डाले थे मगर राज को जेसे इसकी कोई परवाह नही थी बस ज्योति की चूत को चाटे जा रहा था..

ज्योति पूरी तड़पति हुई बिस्तर पर मछली की तरह मचल रही थी

आख़िर ज्योति झड़ जाती है और सारा पानी राज के गले से नीचे उतरता चला जाता है ...

जेसे एक साथ दोनो की प्यास बुझ गई थी ...

दोनो हान्फते हुए बिस्तर पर लूड़क जाते है

मगर अभी खेल ख़तम नही हुआ

अभी तो ज्योति की नज़र में ये खेल स्टार्ट ही हुआ था ज़रा सा सांस लेते ही ज्योति फिर से उठकर बैठ जाती है और अपने हाथो में अपने सरताज को लेकर दुलार्ने लगती है

ज्योति को राज के लंड का रूप भा गया था

और इतना भाया था की सहलाते दुलारते कब अपने होंटो में लेती है पता ही नही चलता ...

राज की भी सिसकी निकल जाती है ...

ज्योति भी बड़ी अदा से राज के लंड को अपने होंटो से प्यार कर रही थी.

और जेसे ही ज्योति ने मूह खोलकर पूरा लंडअंदर लेना चाहा राज से कंट्रोल करना भारी हो गया था लंड इस कदर उत्तेजना में आ गया था किसी भी पल अपना लावा निकल सकता था .

राज.....ऊहह यययययययययएसस्सस्स

आअहहीीइसस्स्स्स्स्स्शह सस्स्सीएअहह आअहह

मगर ज्योति को इसकी कोई परवाह नही थी अपनी मस्ती में राज का पूरा लंड अंदर लेने की कोशिश करते हुए अंदर बाहर चप्पे लगा रही थी ... बस तभी राज के लंड से सूनामी बह निकलती है और ज्योति के गले को भरती हुई पेट में समा जाती है ....

राज के सकूँ की कोई सीमा नही थी इतना तृप्त आज पहली बार हुआ था सच में आज तो राज को भी मज़ा आ गया था क्या ब्लोवजोब दिया था ज्योति उसको ....

राज पूरी तरह तृप्त होकर निढाल बिस्तर पर लूड़क चुका था और राज की आँखे धीरे धीरे बंद होने लगी थी ....

मगर ज्योति को अभी भी नही सोना था अभी तो ज्योति का खेल शुरू हुआ था ...

ब्लो जॉब करते करते ज्योति का मूह भी बुरी तरह दुखने लगा था मगर ये राज के लिए प्यार था या ज्योति के जिस्म की वासना जिसे अपने दर्द की कोई परवाह नही थी ....

थोड़ी देर बाद ज्योति रिलॅक्स होकर फिर से राज के लंड को टटोलती है मगर इस बार राज का लंड सिकुड़ कर बिल्कुल चूहा बन चुका था ...

मगर अब ज्योति अनाड़ी नही थी उससे मालूम पड़ गया था चूहे को शेर कैसे बनाया जाता है ...

और ज्योति चूहे को शेर बनाने के लिए फिर से राज का लंड मूह में ले लेती है ...

राज की आँखे खुल जाती है ...

राज ... बस कर ज्योति बहुत रात हो चुकी है

मगर ज्योति पर राज की बातो का कोई असर नही होता ..ज्योति की ज़रा ही मेहनत से चूहा शेर बन चुका था ...

ये देखकर ज्योति का चेहरा भी खिल जाता है और ज्योति राज के दोनो तरफ पर करके खड़ी हो जाती है और अपने हाथो से राज का लंड पकड़ कर ठीक अपनी चूत पर सेट करती है और आहिस्ता से लंड पर बैठती चली जाती है ...

लंड भी चूत की गहराई में सरकता चला जाता है ....

ज्योति एक हल्की सी चीख निकल जाती है ...

ज्योति .....आआईयईईईईईईईई आअहह .

मगर ज्योति को पता था इस दर्द के बाद ही असली मज़ा मिलने वाला है ....

और ज्योति हल्के हल्के अपना वजन ऊपर उठाती है जिससे राज का लंड ज्योति की चूत से बाहर

आ जाता है और फिर ज्योति धम से नीचे बैठ जाती है ....बस फिर तो ज्योति को चुदाई का असली सुख मिलने लगता है..और ज्योति की उठक बैठक तेज़ हो जाती ...

लंड सटासट चूत में अपनी जगह बना चुका था ...

पूरे रूम में छप छप की आवाज़े गूँज रही थी थोड़ी देर में राज झड़ने के करीब पहुच जाता है और अपने ऊपर से ज्योति को हटाने की कोशिश करता है ...मगर ज्योति बिल्कुल हटने की स्टेज पर नही थी ..और अगले पल राज का लिक्विड ज्योति की चूत की गहराई में उतरता चला जाता है ...और इसी के साथ ज्योति भी झड़ती हुई राज के लंड को अपने पानी से शुद्ध कर देती है .....

आज ज्योति की मनचाही चुदाई हुई थी

अबकी बार तो ज्योति की आँखे बिस्तर पर लूड़कते ही बंद हो गई थी ....

शायद यही असली सुख का नशा था जिसमें तृप्त होकर ज्योति निढाल सो चुकी थी .....

रात के करीब 12.30 बज रहे थे .....

दूसरी तरफ डॉली के ननिहाल में इस वक़्त रात के 12.30 बजे ये सब देखकर डॉली के पैरों तले ज़मीन खिसक गई थी ...
 
अपडेट.....38..

डॉली के एक ही मामा थे ..

अजय मामा ... एज 45 ..

डॉली की मामी का नाम

सविता... एज 43

उनके दो बच्चे थे ..

अदिति .. एज 21

समीर .. एज 22

नाना का पाँच साल पहले देहांत हो गया था और नानी भी बीमार ही रहती थी ...

अजय मामा एक फॅक्टरी में मानेगर की पोस्ट पर थे ...

अदिति ने बी ए की पढ़ाई कंप्लीट कर लिया था

बस अदिति का एक ही सपना था किसी तरह टीचर बन जाय ...

मगर अजय मामा जल्द से जल्द उसकी शादी

करना चाहते थे..अदिति के लिए कितने ही रास्ते आ चुके थे ..

मगर अदिति लड़के में कोई ना कोई खामी बता देती ..

किसी की हाइट छोटी किसी की नाक मोटी

किसी का रंग सांवला वागेहरा वागेहरा...

अजय मामा अदिति की तरफ से बड़े परेशान थे ....

और समीर तो बचपन से अब तक मम्मी पापा और बहन के प्यार से महरूम ही रहा था खेलने कूदने की उमर में ही

समीर को पहली क्लास से ही अजय मामा ने बोरडिंग स्कूल में डाल दिया था पूरे साल में सिर्फ़ एक महीना ही अपनी फॅमिली के साथ रह पाता था ....

और इसी लिए आज समीर इंजिनियर बन चुका है.और इंजिनियर बनते ही उसको अमेरिका से नोकरी का ऑफर मिला और आज समीर अमेरिका में अपनी जॉब कर रहा है ...

समीर का शादी का अभी कोई इरादा नही था समीर कहता पहले अदिति की शादी हो जाए उसके बाद देखेंगे ...

......मामा का घर ....

अजय मामा का दो मंज़िला मकान है

नीचे बड़ा सा हॉल और हॉल से ऊपर जाने के लिए सीडीयाँ हॉल से ही टच बड़ा सा किचिन... और एक ड्राइंग रूम साथ में दो बाथरूम ये आलीशान मकान था अजय मामा का ....

ड्राइंग रूम में एसी लगा था इसलिए

अजय मामा ने अपना और पापा का बिस्तर वही लगा दिया था ...

सविता मामी नानी के पास सो रही थी ...

मम्मी और में अदिति के रूम में लेटे हुए थे .. रात के करीब 12.15 जेसे ही मेरी बगल से मम्मी उठती है मेरी भी आँख खुल जाती है और मम्मी बड़ी आहिस्ता से बिना आवाज़ किए रूम से निकल जाती है ...

मुझे मम्मी का इस तरह रात को उठकर जाना बड़ा अज़ीब सा लगा ..

और में सोचने लगी ये मम्मी इस वक़्त कहा जा रही है ..अगर मम्मी को सुसू करना होता तो यही अटॅच बाथरूम में कर सकती थी...और अगर प्यास भी लगी होती तो यही पानी की बोतल भी रक्खी है ...

डॉली के मन में कई सवाल हलचल मचाने लगते है काफ़ी देर बाद डॉली अपनी

उलझन सुलझाने के लिए बॅड से उठ जाती है

और रूम से निकल अपनी मम्मी को देखने चली जाती है...मगर मम्मी दूसरे बाथरूम में भी डॉली को नज़र नही आती

फिर एक नज़र ड्राइंग रूम में देखती है वहाँ सिर्फ़ डॉली को पापा सोए नज़र आते है ... डॉली का दिल धड़कने लगता है इस वक़्त मामा भी अपने बिस्तर पर नही है ...

बस अब एक ही जगह देखनी बाकी रह गई थी सेकेंड फ्लोर पर बना रूम..

डॉली धड़कते दिल के साथ सीडीयाँ चढ़ती हुई ऊपर पहुचती है तभी उसके कानो में अजय मामा की आवाज़ आती है ....

डॉली दरवाज़े के पास खड़ी होकर उनकी बाते सुनने लगती है ...

अजय मामा मम्मी से ही बात कर रहे थे ...

अजय मामा ... सुषमा अबकी बार तो पूरे 3 महीने बाद आई हो ..

सुषमा.. भैया लगता है एक एक दिन गिनते रहते हो ....

अजय मामा .. पता है सुषमा कितनी याद आती है तुम्हारी पिछली बार कह कर गई थी एक महीने बाद ही आ जाउन्गी और आई हो पूरे 3 महीने बाद ...

सुषमा.. क्या करूँ भैया आपकी बड़ी बेटी डॉली ने जॉब करना शुरू कर दिया है

इस लिए बिल्कुल टाइम नही मिलता ...

डॉली ने जेसे ही अपनी मम्मी के मूह से

ये सुना उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई .....

डॉली... नही ये नही हो सकता ये सब झूठ है क्या में एक नज़ायज़ औलाद हूँ ...

ये सब सुनकर डॉली के दिमाग़ की नस फटने को तैयार हो रही थी उस के पैर जेसे ज़मीन पर नही थे डॉली एक दम फर्श पर गिरती चली जाती है ...
 
डॉली की आँखो से आँसू की बारिश होने लगती है डॉली बिल्कुल अपना होश खो चुकी थी.. अभी तक तो डॉली ने सिर्फ़ दोनो की बाते ही सुनी थी...

थोड़ी देर बाद डॉली जेसे ही अपने आपको संभालती हुई होश में आती है ...

डॉली को एक और झटका लगता है रूम से उत्तेजित करने वाली मम्मी की सिसकारियाँ

आने लगती है ...

डॉली को अपने आप से और मम्मी से घृणा सी होने लगी थी ...

फिर भी जाने क्यूँ डॉली रूम के अंदर देखने के लिए दरवाज़े पर हाथ रखती है मगर दरवाज़ा अंदर से लॉक था ...

तभी डॉली की नज़र बराबर वाली खिड़की पर पहुचती है ...

विंडो पर परदा डला हुआ था डॉली एक हाथ से जेसे ही परदा खिस काती है ...

उसकी नज़र अपने अजय मामा पर पड़ती है

अजय मामा इस वक़्त सिर्फ़ एक अंडरवेर पहने हुए थे और मम्मी को अपनी गोद में बिठाए हुए उनकी दोनो चुचियों को मूह में लेकर चूस रहे थे ...

मम्मी ऊपर से बिल्कुल नंगी थी उनका ब्लाउस नीचे पड़ा था..

डॉली के कानो में मम्मी की सिसकारियाँ सॉफ सुनाई दे रही थी ...

मम्मी...ऊओह सस्स्सीईईई आअहह भाय्य्ाआअस पी जाओ कब से तड़प रही हूँ में भी आआअहहस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स ऊऊहह उूुुुुउउ सस्स्सीईईई

डॉली से ये सब देखा नही जा रहा था

और डॉली वहाँ से हारकर लड़खड़ाती हुई वापस अपने रूम में आकर लेट जाती है

उसकी आँखो से अभी भी झर झर आसू बह रहे थे ...

डॉली जाने क्यूँ खुद से सवाल किए जा रही थी क्या में अपने पापा का खून नही हूँ क्या राज मेरा सगा भाई नही है ....

डॉली को सोचते हुए करीब 2.30 बज जाता तब जाकर उसे अपनी मम्मी की आहट सुनाई देती है ...

डॉली मन में सोचती है ... आ गई मूह क़ाला करके ...

सुषमा आहिस्ता से आकर बिल्कुल डॉली के बगल में लेट जाती है...ज़रा देर बाद सुषमा को नींद आ जाती है मगर डॉली की नींद तो उड़ चुकी थी ..डॉली की आँखो आँखो में

ही रात गुजर जाती है ...

डॉली का अब यहाँ रुकने का बिल्कुल मन नही कर रहा था ...

सुबह नाश्ते के टाइम अजय अदिति से बोलता है ..

अजय मामा ... बेटा अदिति अपनी दीदी को जयपुर की शेर करा लाओ

अदिति ... जी पापा

डॉली... नही अदिति मेरा मन नही है

पंकज .. अर्रे डॉली बेटा जब घूमने जाओगी तो मन अपने आप लग जायगा ...
 
डॉली अपने पापा पंकज की बात नही टालती

डॉली.. ठीक है आप कहते है तो में चली जाती हूँ ...

डॉली को अब इस घर में कोई अपना सा लगता है तो उसको सिर्फ़ उसके पापा ही नज़र आते है ...

डॉली का दिल तो ऐसा कर रहा था अपने पापा से लिपट कर जी भर रो दे मगर डॉली ऐसा भी नही कर सकती थी ....

थोड़ी देर बाद डॉली अदिति के साथ जयपुर के किले पहुचती है ....

यहाँ आकर डॉली खुद को थोड़ा रिलॅक्स महसूस करती है ...

अदिति... दीदी केसी चल रही है आपकी जॉब सुना है राज के ऑफीस में ही जॉब करती है आप ...

डॉली... हा राज ने दिलाई है जॉब तू बता तेरा

क्या चल रहा है ..

अदिति..मेरी ऐसी किस्मत कहा है दीदी ..

पापा मेरी शादी के पीछे पड़े है

डॉली.. तो क्या प्राब्लम है कर ले शादी

अदिति.. तो क्या इसी लिए पढ़ाई की थी मेंने

शादी करके पूरी लाइफ दूसरे की कट्पुतली बन जाओ ...

डॉली.. ये तो सभी के साथ होता है

अदिति..मगर दीदी मेरे भी कुछ सपने है

में भी कुछ बनना चाहती हूँ शादी करके

मेरे सारे सपने एक पल में टूट जाएँगे ...

डॉली..तू ऐसा क्यूँ सोचती है हो सकता है

जिससे तेरी शादी हो वही तेरे सारे सपने पूरे करा दे ...

अदिति.. ऐसा लड़का मिलना तो बहुत मुश्किल है ...

डॉली.. मुश्किल है नामुमकिन तो नही.

डॉली की बाते सुन अदिति के चेहरे पर

स्माइल आ जाती है ...

और अदिति डॉली को सारा दिन जयपुर की सैर करती है ....

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दूसरी तरफ ...

आज ज्योति राज के साथ बाइक पर कॉलेज जाती है ज्योति दोनो तरफ पर करके राज से ऐसे चिपकी जा रही थी जेसे राज उसका भाई ना होकर बॉय फ्रेड हो ...

राज ज्योति को कॉलेज के गेट पर छोड़कर ऑफीस चला जाता है ...

तभी ज्योति को नेहा नज़र आ जाती है ...

नेहा ज्योति से मिलते ही उससे सवालो की बोछार कर देती है ...

नेहा ... आज तो बड़ी खिली खिली नज़र आ रही है ...चेहरा बता रहा है किसी ने इस कली को फूल बना दिया है ...ज़रा हमे भी तो पता चले कली को फूल बनने में कितना कष्ट हुआ....

ज्योति ... मेरी जान सब कुछ बता दूँगी मगर थोड़ा सबर तो कर.......
 
अपडेट... 39.....

नेहा ... बता ना यार मुझसे तो बिल्कुल सबर नही होगा ...

नेहा को बड़ी उत्सुकता हो रही थी ज्योति की शील कैसे टूटी...

ज्योति.. नेहा ऐसा कर छुट्टी के बाद मेरे घर चल वहाँ कोई नही है . तुझे पूरे प्रॅक्टिकल के साथ बताउन्गी ....

नेहा ... ऊओ वूओव ज्योति तेरे घर कोई नही है ...

यू ही बाते करते हुए नेहा और ज्योति अपनी क्लास में चली जाती है ......

उधर राज को ऑफीस में स्टाफ से पता चलता है

उनके बॉस (विशाल ) की फिर से तबीयत खराब हो गई ..और उन्हे फिर से हॉस्पिटल में भारती करना पड़ा है ...

डॉक्टर को लग रहा है बॉस अभी तक अपनी बीवी के सदमे से उभर नही पाए ...

जिस वजह से उनकी हालत बिगड़ी

राज ... ओह्ह्ह ये तो बहुत बुरा हुआ हमे भी हॉस्पिटल चलना चाहिए ...और राज ऑफीस से निकल हॉस्पिटल पहुचता है ....

बॉस के पापा डॉक्टर से बात कर रहे थे ...

संजीव रॉय... डॉक्टर साहब हमारी तो कुछ समझ नही आ रहा हम क्या करे

मेरे बेटे को बचा लीजिए ......

ये कहते कहते संजीव रॉय की आँखो से आँसू निकल आते है ....

डॉक्टर .. सर अपने आपको संभालिए

अगर इस सदमें से अपने बेटे को बचना तो उसका एक ही इलाज है ...

संजीव रॉय... बताए डॉक्टर साहब में अपने बेटे के लिए कुछ भी करने को तैयार हूँ ...

डॉक्टर.. विशाल की फिर से शादी कर दो हो सकता है जिस लड़की से शादी हो विशाल को उस लड़की में अपनी बीवी नज़र आ जाये बस रॉय साहब विशाल का यही एक इलाज है ...

डॉक्टर की बातो से संजीव रॉय को भी लगता है शायद विशाल को बचाने का यही आखरी रास्ता है ...

संजीव रॉय की नज़र में डॉली की तस्वीर घूमने लगती है.. रॉय शहाब को लगता है डॉली से बहतेर. विशाल के लिए कोई लड़की नही मिल सकती ...

तभी रॉय साहब की नज़र राज पर पड़ती है ..

संजीव रॉय ... राज विशाल की तबीयत फिर से बिगड़ गई लगता है कई दिन हॉस्पिटल में रुकना पड़ेगा. डॉली को हॉस्पिटल भेज देना ...

ये सुनकर राज का दिमाग़ खराब हो जाता है

राज ... मगर सर डॉली दीदी तो यहाँ नही है मामा के यहाँ जयपुर गई है में किसी और को भेजता हूँ ...

संजीव रॉय... नही राज तुम बस डॉली को ही बुला लेना ...

राज दीदी को भेजने के लिए बिल्कुल तैयार नही था ...राज मन ही मन फेसला करता है चाहे कुछ भी हो जाए दीदी हॉस्पिटल नही आयगी ...

राज ... जी सर

और राज हॉस्पिटल से निकलकर वापस अपने ऑफीस पहुचता है ..

राज जाने क्या मन ही मन बड़बड़ा रहा था में हॉस्पिटल गया ही क्यूँ था..

और डॉली को फर्स्ट टाइम हॉस्पिटल भेजने के अपने फेसले पर राज को बहुत पछतावा होने लगता है ....

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उधर नेहा और ज्योति की कॉलेज से छुट्टीहो चुकी थी नेहा ज्योति को लेकर उसके घर की तरफ चल पड़ती है ...

नेहा ..यार कुछ कोल्डड्रिंक वगेहरा ले चलते है बातो का मज़ा डबल हो जायगा ..

और नेहा रास्ते में गाड़ी रोककर पिज़्ज़ा कोल्डड्रिंक ले लेती है ...

थोड़ी देर बाद दोनो घर पहुचते है

ज्योति नेहा को लेकर अपने रूम में पहुचती है ...

नेहा ... हा यार अब सब्र नही होता जल्दी से बता कहाँ से शुरू किया था ...

ज्योति भी मूड में आ जाती है
 
ज्योति .. मेरी जान होंटो से शुरू किया था

नेहा ... कैसे

ज्योति भी पूरी शरारत के मूड में थी और आगे बढ़कर नेहा के होंटो को अपने होंटो में लेकर चूमने लगती है ...

नेहा भी कई दिन से राज के लिए तड़प रही थी जेसे ही ज्योति के होंटो ने नेहा के होंटो को छुआ नेहा पर सेक्स का नशा चढ़ गया और नेहा ज्योति को अपने ऊपर खीच लेती है ..

और फिर दोनो में शुरू हो जाता है सेक्स का खेल ज्योति नेहा को बिल्कुल प्रॅक्टिकल करके बता रही थी ...

होंटो की चूसा करते करते दोनो को 10 मिनिट हो गये थे मगर दोनो में से कोई होंठ छोड़ने को तैयार नही थी

दोनो कब होंटो से चुचियों तक पहुच गई पता ही नही चला बस पूरे कमरे में दोनो की सिसकारियाँ ही सुनाई दे रही थी ..

आअहह सस्स्स्सीईई उूुुउउम्म्म्ममममममममममममम

आआआआहहिईीीइसस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स सस्सीए

उूुुउउम्म्म्ममममम आहह इय्य्ाआआआस ऊओह

कककककककककूऊऊऊऊन्न्‍न्णनीईईई

फिर अगले पल ज्योति अपनी ड्रेस उतार फेंकती है और नेहा की ड्रेस भी अपने हाथो से खोल देती है ...

दोनो पूरी तरह नंगी हो जाती है

ज्योति अपने हाथो को बड़े कामुक अंदाज़ में नेहा के पैरों पर फेरते हुए ऊपर आने लगती है ..

और जेसे ही ज्योति नेहा की चूत के पास पहुचती है ..ज्योति के हाथ वही ठहर जाते है ...

नेहा की चूत अब तक गीली हो चुकी थी

जेसे ही ज्योति चूत की दरार में हाथ फेरती है ज्योति की उंगली चूत रस में भीग जाती है ...

ज्योति ... ओह्ह्ह नेहा तूने तो अभी से पानी छोड़ना शुरू कर दिया ...

नेहा ... तो क्या तेरी अभी तक सूखी हुई है ज़रा दिखा अपनी चूत को भी ..

और आगे बढ़कर जेसे ही नेहा ज्योति की चूत को देखती है ...

नेहा ...अपनी देख ज्योति तेरी चूत ने बारिश करनी शुरू कर दी ...

ज्योति ... मेरी जान इस बारिश का स्वाद ले ले बिल्कुल अमृत जेसा मीठा है ...

नेहा ... अच्छा डार्लिंग तेरा स्वाद में लेती हूँ मेरा स्वाद तू ले ले ...

और दोनो फ्रेड 69 पोज़िशन में आकर एक दूजे की चूत को चाटने लगती है ...

दोनो फ्रेड में ये खेल जब तक चलता है

जब तक दोनो झड़ नही जाती .....

दोनो तृप्त होकर काफ़ी देर एक दूजे में लिपटी रहती है ...

तभी नेहा के घर से उसकी मम्मी का फोन आ जाता है और नेहा अपने घर के लिए निकल जाती है ...

दूसरी तरफ मामा के घर ...

डॉली का बिल्कुल मान नही लग रहा था जयपुर में उसका एक पल मुश्किल से गुजर रहा था दिल चाह रहा था यहाँ से कही दूर भाग जाय....

डॉली को चुप चुप रहते देख पंकज भी पूछता है ...

पंकज...क्या बात है डॉली बेटा यहाँ पर दिल नही लग रहा ...

डॉली... नही ऐसी बात नही है पापा

तभी मामा बोल पड़ते है ...लगता है हमारी बेटी की तबीयत ठीक नही है ...

मामा के बोलने से डॉली और भी चिड जाती है डॉली का तो अपने मामा को देखने का भी दिल नही कर रहा था ...

जाने कैसे कैसे डॉली की एक रात और गुजरती है ....

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सुबह सुबह डॉली के जहाँ में एक और सवाल जनम लेता है ....

मम्मी पापा की आनिवर्सरी के 8 महीने बाद मेरा बर्तडे आता है इसका मतलब जब मम्मी से पापा की शादी हुई थी..में उनके पेट में पल रही थी ....

ऊओह माइ गूऊद इसका मतलब मामा से मम्मी के नज़ायज़ संबंध शादी से भी पहले है ...

डॉली अपने सवालो से और भी परेशान हो रही थी पंकज भी डॉली को चुप चुप देखकर सुषमा से कहता है ..चलो अब चलते है ...

और फिर पंकज सुषमा और डॉली के साथ सुबह सुबह ही जयपुर से निकल जाते है .....
 
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