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Thriller हत्यारे को अंजाम तक पहुंचाया

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Thriller हत्यारे को अंजाम तक पहुंचाया

मम्मी मै कॉलेज जा रही हूँ,आज एनुअल फंक्शन की वजह से शाम को लेट आऊँगी" रिंकी ने रसोई में जाकर अपनी मम्मी के गले में अपनी बाहों का हार डाल कर बोला।

"बेटी जल्दी आने की कोशिश करना !तुम जानती हो न अपने पापा को ? शाम तक तो वो घर को सर पर उठा लगे" रिंकी की मम्मी ने बोला।

"ओह्ह ममा आप पापा की चिंता मत करो,पापा से मैंने परमिशन ले ली है"

"परमिशन ले ली है तो जाओ फिर ! लेकिन फिर भी जल्दी आने की कोशिश करना! और अपना ध्यान रखना" रिंकी की मम्मी ने उसे हिदायत दी।

"ठीक है मेरी प्यारी ममा,मै अपना ध्यान रखूंगी,आई लव यू ममा" ये बोलकर रिंकी ने अपनी मम्मी के गाल पर एक हल्का सा किस किया और दरवाजे की और बढ़ गई।

रिंकी थपलियाल ! अपने माता पिता की लाडली! पता नही कितनी ही मन्नतो के बाद शादी के दस सालो के बाद रिंकी की मम्मी की गोद भरी थी और ऊपर वाले ने रिंकी के रूप में एक प्यारी सी बेटी उनकी गोद में डाल दी थी। बहुत ही लाड प्यार से पाला था उन्होंने अपनी लाडली बेटी को! और आज रिंकी महरोली यूनिवर्सटी से मॉस कम्युनिकेशन का कोर्स कर रही थी । उसका सपना था कि वो देश की बहुत बड़ी पत्रकार बने। आज उसके कॉलेज में कॉलेज का एनुअल डे का फंक्शन था,जिसमे शामिल होने के लिए ही रिंकी आज कॉलेज गयी थी।

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मोबाइल की साइलेंट मोड़ की किर्र किर्र की आवाज से मेरी नींद में हल्का सा खलल पड़ा था। मै फिर से बिना मोबाइल की और देखे करवट बदल कर सो गया। थोड़ी देर में मोबाइल शांत हो गया। लेकिन ये कुछ ही पल की शांति थी। मोबाइल फिर से अपनी पुरानी औकात पर आ चुका था। इस बार मैंने झुंझला कर मोबाइल को उठाया और मोबाइल पर ऑफिस का नंबर बार बार चमक रहा था।मैंने मन मार कर फ़ोन को उठाया।

"जहाँपनाह फ़ोन को अपने महल के किस कोने में डाल देते हो,जो आपको उसकी आवाज सुनाई नही देती" उधर से मेरी रिसेप्शनिस्ट पायल की मधुर आवाज सुनाई दी।

"तुझे कोई और काम नही है क्या जो हमेसा तभी मेरी नींद खराब करती है जब मै सपने में किसी हसीना के साथ डेट पर होता हूँ" मैंने खिसिया कर पायल को डांटते हुए बोला।

"आप चाहे डेट पर जाओ ? चाहे महीने पर जाओ? मुझे इससे कोई फर्क नही पड़ता,लेकिन आपकी कर्मचारी होने के नाते मेरा फ़र्ज़ बनता है की शहर में होने वाली हर खून खराबे वाली घटना के बारे में आपको समय पर बताऊ ताकि आप अपनी सपनो की हसीनाओं को छोड़कर अपने काम धंधे पर ध्यान दे सके" पायल मेरा पानी उतारने का कोई भी मौका नही छोड़ती थी।

"अब कहाँ आग लग गयी मोहतरमा" मैंने अलसाये हुए स्वर में कहा।

" महरोली के एक कॉलेज में एक लड़की का कत्ल हो गया है,आप जल्दी नींद से बाहर निकलिये और पहुँचिये वहाँ! में पूरी डिटेल अभी आपको व्हाट्सअप कर रही हूँ" ये बोलकर पायल ने फ़ोन रख दिया।

मै आपका खादिम राज! प्राइवेट डिटेक्टिव के धंधे से तालुक रखता हूँ। शहर में होने वाले मर्डर खून जैसे अपराधों से ही आपके इस खादिम की दाल रोटी चलती है। मेरा एक छोटा सा ऑफिस नेताजी सुभाष पैलेस में स्थित था। जिसमे दो लोग काम करते है एक मेरी रिस्पेसनिस्ट और एक मेरा चपरासी!

मै बेड से कूदकर बाथरूम में घुस गया और फ्रेश होने लगा।

थोड़ी देर में मै तैयार होकर अपने घर से बाहर निकल कर अपनी गाडी में बैठा और गाडी को माल रोड की और दौड़ा दिया था। पायल ने जिस कॉलेज का पता व्हाट्सअप पर सेंड किया था वो उधर ही कही स्थित था।

लहभग 45 मिनट के बाद मै घटनास्थल पर मौजूद था। एक 18 साल की लड़की कॉलेज ऑडिटोरियम के पिछले हिस्से में मरी पड़ी थी। उसका गला रेत कर बेरहमी के साथ मारा गया था।कमला नगर थाने से थानाध्यक्ष रंगीला श्रीवास्तव अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच चुके थे। फोरेंसिक टीम और डॉग स्क्वाड भी मौके पर आ चुकी थी और अपने काम में मुस्तेदी से जुटी थी। मै इंस्प्वेक्टर रंगीला के पास पहुंचा।

"नमस्ते सर,मै प्राइवेट डिटेक्टिव राज हूँ" मैंने उनका अभिवादन करते हुए अपना परिचय दिया।

"नमस्कार राज जी, कहिए क्या कर सकता हूँ आपके लिए" इंस्पेक्टर रंगीला एक शालीन व्यक्ति थे।

"जी इस केस के बारे में थोड़ी जानकारी चाहिए थी, ताकि मै भी आपकी मदद कर सकू इस केस को सुलझाने में" मैंने भी उसी शालीनता से उनको बोला।

"जासूस साहब पुलिस की काबिलियत पर शक है क्या आपको ? इस केस को हम 24 घण्टे में सुलझा लेगें" इंस्पेक्टर रंगीला श्रीवास्तव ने मेरी ओर उपहास भरी नजरों से देखते हुए कहा।

" बड़ी ख़ुशी की बात होगी सर,अगर ये केस आप 24 घण्टे में सुलझा लेंगे तो,अगर आप इसी स्पीड से केस हल करोगे तो यकीन मानिए आप बहुत जल्दी एसीपी बन जाओगे" मैंने भी उन्हें उन्ही की टोन में जवाब दिया।

" चलिए जासूस साहब इस केस में हमारी और आपकी रेस हो जाए, देखते है कौन इस केस को पहले सॉल्व करता है" इंस्पेक्टर रंगीला ने मेरी ओर मुस्करा कर देखते हुए बोला।

"ठीक है सर, आपका चेलैंज मंजूर है,लेकिन एक शर्त मेरी भी होगी"

"क्या" इंस्पेक्टर रंगीला ने मेरी ओर देखा।

"आपको कत्ल से सम्बंधित फोरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट मेरे साथ शेयर करनी पड़ेगी,क्योकि इन दोनों चीजो पर आपका अधिकार होता है" मैंने इंस्पेक्टर रंगीला को कहा।

"ठीक है वो रिपोर्ट मै आपके साथ शेयर करुगा" इंस्पेक्टर रंगीला ने मुझे आश्वाशन दिया।

" ठीक है सर ! फिर मिलता हूँ मै आपसे,अभी तो आप भी इन्वेस्टीगेशन में बिजी है" मैंने इंस्पेक्टर रंगीला से हाथ मिलाया और उनके पास से हटकर उस लड़की की डेडबॉडी के पास जाकर उसका सरसरी तौर पर निरिक्षण करने लगा। थोड़ी देर बाद मै छात्रों की भीड़ में शामिल हो गया। कॉलेज के एनुअल फंक्शन के जश्न भरे माहौल में मातम पसर गया था।

मरने वाली लड़की का नाम रिंकी पाठक था। जो मास कम्युनिकेशन की छात्रा थी। मै भीड़ में किसी ऐसे चेहरे को तलाश रहा था जो इस लड़की को जानता हो,और इसके बारे में मुझे कुछ बता सके।तभी एक लड़की पर मेरी नजर पड़ी जो उस वक़्त वहाँ फूट फूट कर रो रही थी। मै उस लड़की की तरफ लपका।

"रिंकी आपकी फ्रेंड थी" मैंने उस लड़की से पुछा।

" जी हां मेरी सबसे बेस्ट फ्रेंड थी,पता नही किस जालिम ने इतनी मासूम लड़की की जान ले ली" उस लड़की का रोना अभी भी जारी था।

"आपका नाम क्या है"

"जी शाजिया नाम है मेरा और मै भी रिंकी के बैच में ही हूँ।

"शाजिया जी ओर क्या बता सकती है रिंकी के बारे में,देखिये जितनी ज्यादा आप मेरी मदद करेगी उतनी जल्दी आपकी सहेली के कातिल को हम लोग फ़ासी के फंदे तक पहुंचा पाएंगे"

"रिंकी अपने माँ बाप की इकलौती लड़की थी,अंकल आंटी पर क्या बीत रही होगी जब ये खबर उन्हें पता चली होगी तो" ये बोलकर शाजिया का रोना और तेज हो गया।

"ओह्ह मै समझ सकता हूँ उनके माता पिता के दुःख को, और आपकी भावनाओं को भी शाजिया जी" मैंने शाजिया को दिलासा देते हुए कहा।

"रिंकी के और कौन कौन दोस्त थे,उसका कोई ख़ास दोस्त ? मैंने शाजिया से रिंकी के किसी बॉयफ्रेंड के बारे में जानने की कोशिश की।

"सर उसकी सबसे बेस्ट फ्रेंड तो मै ही थी और हमारे ग्रुप में सबकी चहेती थी वो सब उसे बहुत प्यार करते थे" शाजिया ने गीली आँखों से मुझे देखते हुए कहा।

"आपके ग्रुप में कौन कौन है" मैंने शाजिया से पुछा।

" राजेश , कौशल, डॉली, मेघा और मै और रिंकी थे।

"ठीक है! ये हादसा किस समय हुआ था? मैंने शाजिया से पुछा।

" जी 2 बजे तक तो रिंकी मेरे साथ ही थी ! फिर उसने मुझे टॉयलेट जाने के लिए बोला,उस समय यहाँ एक डांस परफॉरमेंस चल रही थी,जिसे मै छोड़ना नहीं चाहती थी,इसलिए मैंने उसे अकेले ही जाने को बोला! उसके बाद वो अकेले ही टॉयलेट चली गयी,थोड़ी देर बाद ही रिंकी के साथ वो हादसा हो गया और यहाँ कोहराम मच गया" शाजिया ने सक्षेप में बताया।

"2 बजे तक तो वो आपके साथ थी! उसके कत्ल की खबर आप लोगो को किस समय लगी?" मैंने शाजिया से पुछा।

" जी यही कोई 2:45 के आसपास" शाजिया ने कुछ सोचते हुए जवाब दिया।

" 45 मिनट तक आपकी फ्रेंड टॉयलेट से वापस नही आई! आपको अजीब नहीं लगा ? या आपको उसकी कोई चिंता नहीं हुई?"मैंने शाजिया से पुछा।

"सच बताऊ तो सर ! मै यहाँ प्रोग्राम में इतना एन्जॉय कर रही थी की मुझे न तो रिंकी का ध्यान रहा और न ही समय की तरफ मेरा ध्यान गया "
 
"फिर आपको कैसे पता की रिंकी 2 बजे ही टॉयलेट गई थी और 2:45 बजे पर उसकी मौत की खबर आप लोगो को मिली,क्योकि समय पर तो आपका ध्यान था ही नहीं" मैंने शाजिया की नजरो में अपनी नजर डालकर पूछा।

"क्योकि रिंकी ने टॉयलेट जाने से कुछ देर पहले ही कहा था कि यार 2 बजने वाले है हमे जल्दी घर के लिए निकलना है नही तो पापा नाराज हो जॉएगे" शाजिया ने सफाई दी।

"ठीक है और 2:45 के बारे में कैसे पता चला" मैंने शाजिया से अगला सवाल किया। शाजिया शायद मुझे कोई पुलिसिया समझ रही थी इसलिए वो मेरे सवालो के जवाब दिए जा रहे थी।

"क्योकि उस खबर के ठीक पहले कौशल ने मुझ से कहा था कि 'यार पौने तीन बज गए लेकिन अभी तक डॉली की परफॉरमेंस नही हुई" शाजिया के पास मेरे हर सवाल का जवाब था।

" डॉली भीं स्टेज पर परफॉरमेंस करने वाली थी" मैंने शाजिया से एक और सवाल कर डाला।

"हां वो बहुत अच्छी डांसर है,उसकी एक डांस परफॉरमेंस थी आज के प्रोग्राम में,लेकिन रिंकी की मौत की वजह से वो परफॉर्मंस हो नहीं पाई" ये बोलकर शाजिया की सिसकियों की आवाज फिर से तेज हो गयी।

"अच्छा आपके ग्रुप के ये बाकि लोग कहा मिलेंगे"

"यही कही होंगे सभी भीड़ में ! मै भी काफी देर से उन्हें ढूंढ रही हूँ" शाजिया ने चारों ओर अपनी नजरे दौड़ाते हुए कहा।

तभी जहाँ रिंकी की लाश पड़ी थी, वहाँ एकाएक कोलाहल बढ़ गया । एक महिला की बहुत जोर जोर से रोने की आवाज आ रही थी।

"शायद अंकल आंटी आ गए है" ये बोलकर शाजिया उधर दौड़ पड़ी जिधर रिंकी की लाश थी। मेरे कदम भी उसी दिशा में उठ गए।

रिंकी के माता पिता अपनी लाडली को देखकर बुरी तरह से बिलख रहे थे।उन्हें यकीन ही नही हो रहा था,की जो बच्ची आज सुबह हँसते हँसते कॉलेज आई थी और जो शाम को अपनी मम्मी को जल्दी आने का वादा करके आई थी वो अब अपने घर कभी वापस नही जायेगी? उनका विलाप देखकर एक बारगी आपका ये खादिम भी भावुक हो उठा और मन ही मन कसम खाई की इस मासूम के हत्यारों को पाताल से भी ढूंढ निकालूँगा।

फोरेंसिक टीम अपना काम कर चुकी थी, अब रिंकी की लाश को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया जा रहा था। इंस्पेक्टर रंगीला अपनी कागजी खानापूर्ति में अपनी टीम के साथ लगे हुए थे। डॉग स्क्वाड भी अपना काम कर चुकी थी।मैंने फिर से शाजिया का रुख किया। शाजिया अपने ग्रुप के साथियो के साथ गमगीन मुद्रा में घिरी बैठी थी।

"रिंकी रहती कहाँ थी? मैंने शाजिया से पुछा।

"जी शास्त्री नगर" शाजिया ने उत्तर दिया।

"कॉलेज कैसे आती जाती थी? मैंने फिर से पुछा।

"सर वो बस या ऑटो से ही आना जाना करती थी" इस बार उसकी दूसरी फ्रेंड डॉली ने जवाब दिया।

"कभी कुछ बताया था कि उसे कोई रास्ते में परेशान करता हो या उसका पीछा करता हो" मैंने एक नई संभावना टटोली।

"नहीं सर ऐसा तो उसने कभी हमारे सामने जिक्र नहीं किया! काफी खुशमिजाज लड़की थी, हमारे तो ग्रुप की जान ही चली गई" इस बार बोलने वाला युवक कौशल था,जिसकीं आँखे अभी तक गीली थी।

"कॉलेज में कोई लड़का या कोई और उसे परेशान करता हो" मैंने ये सवाल इसलिए पुछा क्योकि आजकल स्कूल कॉलेज में यौन शोषण के केस लगातार सामने आ रहे थे।

"हमारी नॉलेज में तो ऐसा नहीं है,लेकिन सर एक बात मै आपको बताना चाहती हूँ ?

"क्या ? मै उत्सुकता से उस लड़की की तरफ घूमा।

" सर हमारे एक प्रोफेसर उसे अकेले में बुलाने पर बहुत जोर देते थे,लेकिन रिंकी कभी गई नहीं उनके पास,जिस वजह से वो प्रोफेसर उनसे बहुत नाराज रहते थे" इस बार मेघा ने ये काम की बताई थी।

"क्या नाम है उस प्रोफेसर का? मैंने मेघा से पुछा।

" प्रोफेसर उमाकांत चौधरी,वो हमें जर्नलिज्म पढ़ाते है" मेघा ने बताया।

"थैंक्यू मेघा ! आपने बहुत काम की बात बताई है" मैंने मेघा को धन्यवाद कहा।

"आप हमारी फ्रेंड के कातिल को जल्द जल्द से पकड़िये सर मै उस दिन आपका ये थैंक्स कबूल करुँगी जिस दिन आप उसके हत्यारे को हमारे सामने लाकर खड़ा कर दोगे" मेघा ने मेरे सामने एक नया चेलैंज रख दिया था।

"मै आप सभी से ये वादा करता हूँ की बहुत जल्द रिंकी का कातिल आपके सामने नहीं आपके कदमो में पड़ा होगा" मैंने उन सभी को वादा किया।

उसके बाद मै अपने ऑफिस के लिए रवाना हो गया।

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मै अपने ऑफिस में पहुंचा। रागिनी और मेरा चपरासी रमेश दोनों ऑफिस में ही थे। पायल ने मुझे देखकर अभिवादन में अपने सिर को हलकी सी जुम्बिश दी,मै भी उसी अंदाज में उसके अभिवादन का जवाब देकर अपने केबिन में घुस गया। रमेश ने मेरी टेबल पर पानी का गिलास लाकर रखा।

"सर चाय बना लाऊ" रमेश को पता है कि मैं ऑफिस आकर चाय जरूर पिता हूँ।

"हां बना लाओ और पायल को भेजो मेरे पास" मैंने रमेश को बोला।

कुछ ही देर में पायल मेरे केबिन में मेरे सामने बैठी थी।

"क्या रहा रिंकी के केस में" पायल ने बैठते ही पुछा।

"अभी तो कुछ खास पता नहीं चला,बस उसकी एक सहेली ने बताया है कि उसे एक प्रोफेसर परेशांन कर रहा था" मैंने पायल को बताया।

"ओह्ह लेकिन कोई प्रोफेसर भरे कॉलेज में इस तरह दिन दहाड़े किसी लड़की का गला नहीं रेत सकता" पायल ने तथ्यात्मक बात की।

"ह्म्म्म ये ही मेरी समझ में आ रहा है, मुझे ये काम किसी ठुकराए हुए आशिक़ का लग रहा है" मैंने अपना ओपिनियन पायल को बताया।

"एक 18 साल की लड़की से किसी और की क्या दुश्मनी हो सकती है" पायल भी लगभग मेरी बात से सहमत दिखाई दी।

"कोई परिवारिक एंगल मिला क्या" पायल पुनः बोली।

"नहीं अभी परिवार वालो से बात नहीं की है मैंने,सिर्फ उसकी क्लास के उसके फ्रेंड से ही थोड़ी बहुत पूछताछ की है"

"आज कॉलेज में एनुअल डे का फंक्शन था,आज तो बाहरी लोगो का भी अच्छा खासा जमावड़ा होगा कॉलेज में"

"लेकिन कोई बाहर से आकर कॉलेज में इतनी भीड़ भाड़ में इतनी बेहरमी से कत्ल कैसे कर सकता है,जहाँ उसके पकड़े जाने के चांस ज्यादा हो"

"जिस तरीके से कत्ल हुआ है वो सिर्फ एक ही बात की और इशारा कर रहा हैं कि किसी चोट खाये हुए आशिक़ ने रिंकी की जान ली है"

"लेकिन ऐसे अंजान आशिक़ को ढूंढोगे कैसे"

"स्वीटहार्ट मत भूलो की ऐसे लोगो को ढूढ़ना ही मेरा पेशा है"

"ओह्ह आज तुम्हे मै कैसे स्वीटहार्ट नजर आने लगी" पायल ने अचंभित अंदाज में पूछा।

"भगवान् ने मुझे दिन में किसी न किसी को स्वीटहार्ट जानेबहार गुले गुलजार और भी न जाने क्या क्या इस शहर की हसीनाओं को इन उपमाओं से नवाजने का वरदान दिया हुआ है,इसलिए जिस दिन कोई नही मिलता उस दिन ये सारी उपमाएं मै तुम्हे दे देता हूँ"

"मतलब मै फालतू की चीज़ हूँ की जब कोई न मिले तो मुझे दे दो" पायल को मेरी बात सुनकर गुस्सा आ गया था।

"मेरा ये मतलब नहीं था"

फिर क्या मतलब था,रमेश कोई चाय वाये मत बनाना साहब के लिए, और बनाओ तो बिना दूध और चीनी की बना कर देना, भगवान ने मुझे भी एक वरदान दिया हुआ है कि अपने बॉस को बिना दूध और चीनी की की चाय बना कर पिलानी है" पायल बुरी तरह भड़क चुकी थी। और मेरी भलाई इसी में थी की मै चुपचाप ऑफिस से खिसक चलूं। सौभाग्य से उसी वक़्त मेरे मोबाइल पर किसी का काल आ गया और मै अपनी झेंप मिटाता हुआ फ़ोन पर हेलो हेलो करता हुआ ऑफिस से बाहर निकल गया।

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अगले दिन

रिंकी का दाह संस्कार कर दिया गया था। मै शास्त्री नगर उनके निवास पर जब पहुंचा तो शाम के 6 बज चुके थे।

मैंने रिंकी के पिता को अपना परिचय दिया तो वो मुझ से बातचीत के लिए तैयार हो गए। वो मुझे लेकर घर की छत पर आ गए क्योकि नीचे पूरा घर रिस्तेदारो से भरा हुआ था। घर का मौहोल पूरा गमगीन था।

"पूछिये क्या पूछना चाहते है आप" रिंकी के पिता जिनका नाम उमेश थपलियाल था और शायद किसी पहाड़ी इलाके से ताल्लुक रखते थे।

"रिंकी ने कभी कोई ऐसी शिकायत आप लोगो से की थी क्या? की रास्ते में कोई लड़का उसे आते जाते परेशान करता है"

"नहीं ऐसी कोई बात उसने मुझे तो कभी नहीं बताई" उमेश जी ने कुछ सोचते हुए कहा।

"आपकी किसी से कोई ऐसी दुश्मनी है क्या ? जो आपको इस हद तक नुक्सान पहुंचा सकता हो की आपकी इकलौती बेटी की जान तक लेले"मैंने अगला प्रश्न किया।

"नहीं हम तो सीधे साधे लोग है साहब,हमारा तो आज तक किसी पडोसी तक से झगड़ा नही हुआ,फिर ऐसी दुश्मनी किसी से क्या होगी? उमेश जी ने उलझन भरे स्वर में कहा।

"आखिर कोई तो उद्देश्य होगा हत्यारे का रिंकी को मारने के पीछे,आखिर कोई यू ही तो किसी को नही मार डालता है" मैंने दार्शनिक वाले अंदाज में रिंकी के पिता को बोला।

"यही तो हम भी जानना चाहते है राज जी, की किसने हमारी फूल जैसी को बिना वजह ही मार डाला" रिंकी के पिता की अब आँखे भर आई थी।

"किसी रिस्तेदार से कोई सम्पति इत्यादि का कोई विवाद" मैंने फिर से प्रश्न किया।

"इतनी बड़ी सम्पति तो कोई है नहीं जिसके लिए कोई किसी का मर्डर कर दे? उमेश जी ने मुझे देखकर बोला।

"आजकल तो दस दस रुपये के लिए मर्डर हो जाते है उमेश जी,इसलिए कुछ भी हो सकता है" मैंने उमेश जी को बोला।

"मै रिंकी की मम्मी से भी मिलना चाहता हूँ" मैंने रिंकी के पिता को बोला।

"उनसे मिलकर आप क्या करेंगे,जो मै जानता हूँ वो ही वो जानती है, मैंने सब कुछ आपको बता ही दिया है" रिंकी के पिता ने बोला।

"कुछ बातें लड़कीया अपने पिता से नहीं अपनी मम्मी से शेयर करती है और इस केस को हल करने के लिये और हत्यारे को फाँसी के फंदे तक पहुचाने के लिए मेरा हर छोटी से छोटी बात का जानना जरूरी है सर"मैंने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा।

"ठीक है आप कल आ जाइये,अभी उनकी मानसिक स्थिति भी ज्यादा अच्छी नहीं है और रिश्तेदार भी बहुत ज्यादा है आज,कल आ जाओ आप सही से बात हो जायेगी"रिंकी के पिता ने बोला।

मै भी उनकी बात से सहमत था,इसलिए उनसे इजाजत लेकर घर से बाहर आ गया। अब मेरा इरादा आसपास के लोगो से बातचीत करने का था।

अगले दिन मैंने प्रोफेसर उमाकांत चौधरी से मिलने का फैसला किया। लेकिन जब मै कॉलेज पहुंचा तो पता चला की चौधरी जी छुट्टी पर चले गए है। शायद उन्हें इल्म हो गया था कि रिंकी हत्याकाण्ड की आंच उन तक भी पहुंच सकती है? मैं कॉलेज के प्रांगण में घूम रहा था कि शायद कोई नया सुराग मिल जाए।मै कैंटीन में जाकर बैठ गया। हालांकि मुझे गेट पर सिक्योरिटी गार्ड ने रोकना चाहा था,लेकिन इन मामलो में आपका ये खाकसार बहुत बड़ा तिकड़मबाज है तो ऐसी छोटी मोटी रुकावट आपके इस खादिम के बढ़ते हुए कदमो को रोक नहीं सकती।

कैंटीन में मुझे डॉली दिखाई दी उसके साथ एक लड़का भी था जिसे मै नही पहचानता था। अचानक से डॉली की नजर भी मुझ पर पड़ गयी थी। डॉली मुझे देखकर खुद ही मेरे पास आ गई।

"सर क्या हुआ?हमारी फ्रेंड का कातिल कब तक पकड़ा जायेगा ? डॉली ने मुझ से सवाल पूछा।

"अभी इन्वेस्टीगेशन चल रही है,जल्द ही हम कातिल तक पहुंच जॉएगे" डॉली अभी तक मुझे कोई पुलिसिया ही समझ रही थी।

"सर जल्दी पकड़ो न उस कमीने को जिसने हमारी इतनी प्यारी दोस्त को हमसे छीन लिया" डॉली भावुक स्वर में बोला।

"चिंता मत करो,हमारे लिए भी ये केस एक चैलेंज है,कातिल कोई भी हो क़ानून की पकड़ से ज्यादा दिन नही बच सकता" मैंने पुलिसिया अंदाज में ही डॉली को जवाब दिया।

"अच्छा मुझे तुम्हारे उस प्रोफेसर चौधरी जी का फोन नंबर चाहिए! कहाँ से मिल सकता है" मैंने डॉली की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देखते हुए बोला।

"अरे सर चौधरी सर का नंबर तो उनकी क्लास के हर स्टूडेंट और वो भी खासकर लड़कियो के पास तो जरूर मिल जायेगा,क्योकि चौधरी जी ने अपना एक व्हाट्सअप ग्रुप बना रखा है और उसमें सभी स्टूडेंट को मेंबर बना रखा है" डॉली ने ये बात फुसफुसाते हुए कही।

"अच्छा फिर तो उनका नंबर तुम्हारे पास भी होगा"मैंने डॉली के चेहरे पर नजर गड़ा कर पूछा।

"हां सर है तो सही!आपको चाहिये क्या ? डॉली ने फंसी हुई आवाज में कहा।

"हां दे सकती हो तो दे दो? नहीं तो इतने छोटे से काम के लिए मुझे प्रिंसिपल के पास जाना पड़ेगा"मैंने जानबूझकर उसे ज्यादा भाव न देने के अंदाज में कहा।

डॉली ने कुछ देर सोचा और फिर वो मुझे चौधरी का नंबर लिखवाने लगी। नंबर लिखवाने के बाद डॉली ने मुझ से बोला।

"सर आप पुलिस वाले हो! लेकिन पुलिस वाले लगते नही हो!

"मैंने तो सुना था कि पुलिस वाले बड़े अक्खड़ होते है,सही से बात नही करते किसी से भी ! लेकिन आप तो अलग ही लगते हो" डॉली ने जिज्ञासावश पुछा।

"क्योकि मै पुलिस से अलग ही हूँ" मैंने डॉली को मुस्कराते हुए कहा।

"क्या मतलब? डॉली ने असमंजस से मेरी और देखा।

"देखो मेरा काम और पुलिस का बिलकुल एक जैसा है,फर्क सिर्फ इतना है कि मै एक प्राइवेट जासूस हूँ और सभी काम प्राइवेट स्तर पर करता हूँ,मुझे सरकार का कोई भी स्पोर्ट नही होता!जबकि पुलिस के पास सारे कानूनी अधिकार होते है।

मेरी बात सुनकर डॉली एकटक मेरी और देखे जा रही थी,जब उसने देखना बंद नहीं किया तो मैंने एक चुटकी उसकी आँखों के आगे बजाई। चुटकी की आवाज सुनकर वो अचानक से चौंक पड़ी।

"आप जासूस हो? मैंने अपनी जिंदगी में जासूस आज पहली बार देखा है" डॉली अभी तक मेरी और अपलक निहार रही थी।

"जासूस भी आप जैसा ही होता है,वो कोई अजायबघर से नहीं आता" मैंने मुस्करा कर उसे बोला।

"सर आपका नाम क्या है" डॉली मुझ से कुछ ज्यादा ही प्रभावित लग रही थी।

"मेरा नाम राज है, प्राइवेट डिटेक्टिव राज"मैंने अदा से उसके आगे हल्का सा अपने सिर को निवाया।

" राज सर मुझे आपका एक ऑटोग्राफ चाहिए"डॉली पता नही कौन सी दुनिया में थी।

"मेरा ऑटोग्राफ! मै कोई रणवीर कपूर या सलमान खान हूँ जो मेरा ऑटोग्राफ चाहिए" मै खिलखिलाकर हँसते हुए डॉली से बोला।

"सर बस मुझे आपका ऑटोग्राफ चाहिए आप चाहे जो हो" डॉली ने अपने बैग से एक कॉपी और पेन निकाल कर मेरी और बढ़ा दिया। मैंने भी उसके दिल मे अपने लिए इतनी श्रद्धा देखकर उस बालिका को निराश करना उचित नहीं समझा और उसकी कॉपी में अपने ऑटोग्राफ दे दिए लेकिन इस वादे के साथ की इस केस के बारे में जो भीं जानकारी कही से भी मिलती हो वो मुझे जरूर बतायेगी। हम दोनों ने फिर अपने फ़ोन नंबर भी एक्सचेंज किये और फिर मै डॉली से विदा लेकर कॉलेज से बाहर आ गया। अब मेरी अगली मंजिल रिंकी का घर थी,जहाँ मुझे आज रिंकी की मम्मी से बात करनी थी।
 
मै शास्त्री नगर रिंकी के घर पहुंचा। रिंकी का घर कोई 100 गज में 3 मंजिल बना हुआ मकान था।लेकिन घर में रहने वाले कुल 3 ही प्राणी थे,जो अब 2 ही रह गए थे। मकान आलिशान तरीके से बनाया हुआ था। हर फ़्लोर पर 4 कमरे थे और रसोई बाथरूम का पूरा सेट बनाया हुआ था। अगर दो फ्लोर को रेंट पर भी दिया जाता तो कम से कम 40 हजार रुपये की इनकम सिर्फ रेंट से ही हो सकती थी। लेकिन रिंकी के पिता थपलियाल जी ने कभी भी अपने मकान को रेंट पर नहीं दिया था।उसके पीछे क्या कारण था ये तो मै नही जान सका था लेकिन कल शाम को थपलियाल जी के घर के आसपास घूमने से और लोगो से बात करने से ये सब जानकारी मिल पाई थी।

मेरे घर में प्रवेश करते ही रिंकी के पिता थपलियाल जी से मेरा सामना हो गया। मुझे देखते ही वो मेरे आने का कारण समझ गए। उन्होंने मुझे आखो ही आँखों में छत पर जाने का इशारा किया। कुछ रिश्तेदारों की मौजूदगी आज भी घर में थी।मै छत पर पहुंचा। कुछ ही देर मेंके जैसा होता है, लेकिन पूछना इसलिए पड़ता है की कोई छोटी से छोटी बात रह ना जाए क्योकि कई बार हम मुजरिम तक इसलिए नही पहुंच पाते क्योकि हमारे पास पूरी जानकारी नही होती" मैंने भूमिका बनाते हुए कहा।

" नही आपने जो पूछना है वो पूछो और जितनी बार भी पूछना हो पूछो अब हमारी जिंदगी में तो कुछ बचा नहीं, जिसके लिए जी रहे थे जब वही नही रही तो अब किसी से कुछ क्यों छुपायेंगे? अब तो जिंदगी का एक ही मकसद रह गया है कि हमारी बेटी के हत्यारे को जल्द से जल्द फाँसी पर चढ़ता हुआ देखे" रिंकी की मम्मी की आवाज में उनके इरादों की मजबूती झलक रही थी।

"आप चिंता मत करो!रिंकी के हत्यारा ज्यादा देर तक खुली हवा में सांस नही ले पायेगा! बहुत जल्द वो जेल के सीखन्चो के पीछे आप उसे पाएंगे"मैंने रिंकी की मम्मी को आश्वासन देते हुए कहा।

"जी पूछिये आप क्या पूछना चाहते है" रिंकी कि मम्मी ने कहा।

"आपको रिंकी ने कभी कोई ऐसी बात बताई हो की कोई कॉलेज आते जाते उसे परेशान करता हो या कॉलेज में कोई उसे परेशान करता हो" मैंने रिंकी की मम्मी से पुछा।

"इस बारे में तो रिंकी ने कभी कोई हमारे सामने जिक्र नहीं किया कि कोई उसे रास्ते में या उसके कॉलेज में कोई उसे परेशान करता है"रिंकी कि मम्मी कुछ सोचते हुए बोली।

"क्या उसे घर में आप लोगो ने ऐसा माहौल दिया हुआ था! कि वो अपनी कोई भी परेशानी आप लोगो से शेयर कर सके? बिना किसी जिझक के आपको बता सके?"मैंने अक्सर लड़कियो के साथ होने वाली परेशानी के बारे में उसकी मम्मी से पुछा।

"हमारी इकलौती लड़की थी रिंकी ! जो हमारी शादी के दस सालों बाद बड़ी मन्नतो के बाद पैदा हुई थी! हमने उसे बहुत ही लाड प्यार से पाला था!उसके मन में अपने माँ बाप के लिए आदर और सम्मान था, लेकिन उसके मन में हमारे से कोई डर नही था! वो अपनी हर बात हमे बताती थी!बिना किसी डर भय के" रिंकी की मम्मी ने बिलकुल साफ़ शब्दो में जवाब दिया।

"मैंने ये बात आपसे इसलिए पूछी की हमारे देश में लड़के और लड़कियो की परवरिश के अलग अलग पैमाने लोगो ने बनाये हुए है, जिस कारण बहुत सारी लडकिया अपने साथ हुई किसी भी किस्म की ज्यादती के बारे में अपने घर पर इसलिये नही बता पाती की कही इन बातों की वजह से कही उसकी पढ़ाई ही न बंद करवा दे"

"आप अपनी जगह बिलकुल सही है,लेकिन मै कह सकती हूँ की हमने बेटी को अलग ढंग से पाला था" रिंकी की मम्मी बोलते हुए भावुक हो गयी थी।

"कोई और बात जो इस केस मे मेरी सहायता कर सके"मैंने रिंकी की मम्मी से पुछा। हमारी पूरी बातचीत के दौरान रिंकी के पापा पूरी तरह से शांत खड़े रहे थे,उन्होंने हमारी बातचीत में एक बार भीं दखल अंदाजी नही की थी।

अब रिंकी की मम्मी सोच में डूब गयी।

"आपके दस सालों तक कोई संतान नही हुई तो कभी कोई बच्चा गोद लेने का ख्याल नहीं आया आपके मन में " इस बार ये सवाल मैंने दोनों की और देखकर पुछा।

" ख्याल क्या आया था? बल्कि! हमने तो

बच्चा गोद लेने के लिए बात भी कर ली थी! लेकिन अभी ये बातचीत चल ही रही थी की, तभी इनके गर्भवती होने का पता चला, तो फिर हमने वो बातचीत वही खत्म कर दी" इस बार जवाब रिंकी के पिता ने दिया।

"किसका बच्चा गोद ले रहे थे आप? किसी अनाथ आश्रम से या अपने किसी रिश्तेदार का बच्चा गोद ले रहे थे आप"

"मै अपने छोटे भाई का लड़का गोद ले रहे था" थपलियाल जी ने पुनः मेरी बात का जवाब दिया।

"ये कब की बात है?"

"हो गए इन बातों को कोई 21 साल के लगभग? थपलियाल जी बोले।

"21 साल पहले की आपकी माली हालत में और आज की आपकी माली हालत में तो जमीन आसमान का अंतर होगा"

" हां बहुत फर्क है,आज में लगभग दस करोड़ का मालिक हूँ!उस वक़्त मेरी हैसियत इतनी नहीं थी"

"अब आपके बाद इस सम्पति का आप क्या करोगे, किसके काम आएगी ?"

"अभी कुछ सोचा नही है" थपलियाल जी ही अब मेरे सभी सवालों का जवाब दे रहे थे।

"जब भी आप सोचे तो कृपया मुझे जरूर बताये" मैंने थपलियाल जी को बोला।

"जी बिल्कुल बताऊंगा" थपलियाल जी बोले।

"जी अब अपने इस खादिम को आज्ञा दीजिये, मै फिर आऊँगा आपके पास! आप अपना नंबर मुझे दे दीजिए,कभी भी जरूरत पड़ सकती है" मैंने थपलियाल जी को बोला।

उसके बाद थपलियाल जी के साथ भी नंबर का आदान प्रदान किया और वहाँ से विदा लेकर में घर से बाहर आ गया।

अब मेरी अगली मंजिल उमाकांत चौधरी था।मैंने उसका नंबर अपने फ़ोन से डायल किया। दूसरी तरफ बेल बज रही थी।

उधर से एक खुरदरी सी आवाज सुनाई दी।

"हेलो"

"चौधरी जी बात कर रहे है"

"हां जी बोल रहा हूँ,आप कौन बोल रहे है"

"जी बन्दे को राज कहते है,आपसे आपकी स्टूडेंट रिंकी के कत्ल के सम्बन्ध में बात करने के लिए आपसे मिलना है"

"रिंकी के कत्ल से मेरा क्या लेना देना,आप मुझ से क्यों मिलना चाहते है"

"देखिये वो आपकी स्टूडेंट थी तो इस सिलसिले में हमे पूरे कॉलेज स्टाफ से ही मिलना पड़ रहा है,हमें कॉलेज से पता चला की आप छुट्टी पर है तो इसलिए आपसे फ़ोन पर कांटेक्ट करना पड़ा"

"जी देखिये अभी तो मै अपने गांवों के लिए रवाना हो गया हूँ,मै एक हफ्ते बाद वापस आऊँगा,तब मिल लेना"

"चौधरी जी आपने तो इस कत्ल में कोई घालमेल नही किया हुआ जो,आपके कॉलेज में आपकी ही एक स्टूडेंट का कत्ल होने के बाद भी गांवों भाग रहे हो"

"जी आप ये क्या बोल रहे हो, रिंकी तो मेरी सबसे फ़ेवरिट स्टूडेंट थी,वो क्लास में सबसे ज्यादा इंटेलिजेंट लड़की थी"

"अगले 24 घण्टे में हमें आप वापस महरोली में नही मिले तो आपको आपके गांव से ही घसीट कर लाएंगे चौधरी जी,आपके ठरकीपने के चर्चे पूरे कॉलेज में है समझे,ज्यादा होशियार मत बनो समझे" मैंने इस बार पुलिसिया हथकंडे का इस्तेमाल किया।मुझे लग रहा था कि सिर्फ इसी घुड़की से चौधरी की पेंट गीली हो गयी थी। क्योकि कुछ देर दूसरी और ख़ामोशी छा गई थी।

"देखिये मैंने कुछ नहीं किया? मै सच बोल रहा हूँ!आप बेवजह मुझ पर शक कर रहे हो" चौधरी की आवाज ऐसे लग रही थी जैसे किसी कुएं से आ रही हो।

"हमारा शक ! यकीन में न बदल जाए इसलिए फ़ौरन वापस आकर हमारे सवालो का जवाब दो,ऐसे छुपने से और भागने से हमारा शक और गहरा हो जायेगा चौधरी जी और फिर आप मुसीबत में आ जाओगे" मैंने चौधरी को अच्छी तरह से पुलिसिया भाषा में समझाया।

"ठीक है सर, मै अगले स्टेशन से वापसी की ट्रेन पकड़ रहा हूँ! आप कल मुझ से मिल लेना"

"ठीक है महरोली पहुंचते ही मुझे इसी नंबर पर फ़ोन करो जिस पर अभी बात कर रहे हो"

"जी ठीक है सर!मै महरोली पहुंचते ही आपको फ़ोन करता हूँ" ये बोलकर चौधरी ने फ़ोन रख दिया।

फ़ोन रखते ही मै मन ही मन मुस्काया। मुझे चौधरी पर इतना गहरा शकः नही था।लेकिन मै इस इन्वेस्टीगेशन के चक्कर में उसे इतना डराना चाहता था कि आगे से वो किसी भी लड़की के साथ ऐसी हरकतें न कर सके।

मेरा अगला कदम कमला नगर थाने की और उठ चुका था जहाँ मुझे केस के आई ओ से मिलना था।

मै थाने में पहुँचा। मैंने ड्यूटी अफसर से पता किया तो पता चला की इंस्पेक्टर रंगीला श्रीवास्ताव अपने रूम में ही बैठे थे। ड्यूटी ऑफिसर को मैंने अपना परिचय दिया और इंस्पेक्टर साहब को मेरी आमद के बारे में सुचना देने के लिए रिकवेस्ट की। ड्यूटी ऑफिसर ने इंसेक्टर साहब को मेरे आने के बारे में बताया। इंस्पेक्टर रंगीला ने मुझे रूम में भेजने के लिए बोला। ड्यूटी ऑफिसर ने एक रूम की ओर इशारा करते हुए अंदर जाने को बोला।
 
मै रूम में अंदर गया तो रूम में पहले से ही दो लोग और बैठे थे, जो मेरे अंदर पहुंचते ही उठकर बाहर की और चल दिए।

"आओ आओ जासूस महोदय,कहा हो दो दिन से आप" इंस्पेक्टर रंगीला ने बिना किसी औपचारिकता के मुझ से पुछा।

"इसी केस के सिलसिले में बिजी हूँ सर"

"क्या प्रोग्रेस की आपने"

"अभी तो पूछताछ का ही दौर चल रहा है और इस कत्ल के पीछे का उद्देश्य ही समझने का प्रयास कर रहा हूँ"

"राज जी साफ़ साफ़ लग रहा है कि ये किसी सिरफिरे आशिक़ का काम है,शायद रिंकी उसको इग्नोर कर रही होगी और उस आशिक़ ने गुस्से में ऐसा जघन्य काम कर दिया होगा"

" लेकिन कई बार जैसा हमे दीखता है वैसा होता नही है सर!हमने कई केस में देखा है हर पल हमारा सस्पेक्ट बदलता रहता है"

"हम्म बात तो तुम्हारी सही है राज,लेकिन इस केस में कोई और कारण नजर नही आ रहा है"

"लेकिन मेरी अभी तक की पूछताछ में ऐसा कोई सस्पेक्ट नही मिला जो रिंकी के साथ छेड़खानी करता हो या उसका पीछा करता हो!उसकी सहेलियो और उसकी माता पिता ने भी ऐसी किसी बात से इंकार किया है"

उमेश थपलियाल जी भी अपनी धर्मपत्नी के साथ छत पर आ गए।

"पूछ लीजिये जो आपको पूछना है" उमेश जी ने गमगीन स्वर में कहा।

"जी मै समझता हूँ की बार बार पूछना! जख्मों को बार बार कुरेदने "कई बार लडकिया ऐसी बातें सभी से छुपाती है? क्या पता की रिंकी का सच में ही कोई बॉयफ्रेंड हो और वो ये बात सभी से छुपा के रखी हो और वो बॉयफ्रेंड ने ही ऐसा कुछ कर दिया हो"इंस्पेक्टर रंगीला सीधी साधी थ्योरी पर काम कर रहे थे।

"सर आप तो सीधी साधी थ्योरी पर काम कर रहे है,लेकिन मुझे ये केस इतना सीधा लग नहीं रहा है सर"

"तो अपनी थ्योरी मुझे समझा दो,मै आपकी थ्योरी पर भी काम करके देख लेता हूँ"

"अपनी थ्योरी तो मै उस दिन आपको बताऊंगा जिस दिन उस कातिल को आपके चरणों में समर्पित कर दूँगा सर" मैंने मुस्कराते हुए कहा।

"पुलिस से चालाकी" इंस्पेक्टर रंगीला ने मेरी और मुसकरा कर देखते हुए कहा।

"सर केस का सेहरा तो आपके ही सर बंधेगा,क्योकि मै तो परदे के पीछे रहकर काम करता हूँ" मैंने रंगीला जो को बोला।

"नही अगर केस को तुमने सॉल्व किया तो ये सेहरा बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके तुम्हारे सिर पर ही बंधेगा,क्योकि इंस्पेक्टर रंगीला को दूसरे की मेहनत पर खुद की दिवाली मनाना पसंद नही है" इंस्प्वेक्टर रंगीला सच में एक सुलझे हुए इंसान थे।मैंने प्रशंशात्मक नजरो से उनकी और देखा।

"पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या आया सर?

"रिपोर्ट में वही आया है जो नजर आ रहा था,किसी धारधार हथियार से रिंकी का गला रेता गया था"

"उस दिन वार्षिक उत्सव के उपलक्ष्य में बाहर के स्टूडेंट और अन्य लोग भी कॉलेज में घुस ही जाते है,ऐसे लोगो को पहचानने के लिए कॉलेज की सीसीटीवी फुटेज की जरूरत पड़ेगी सर"

"हां सीसीटीवी फुटेज की जांच चल रही है हमारे एक्सपर्ट इसी काम में लगे हुए है"

"ठीक है सर! अब अपने खादिम को इजाजत दीजिये,मै फिर आता हूँ आपके पास" ये बोलकर मै चेयर पर से उठ खड़ा हुआ।

इंस्पेक्टर रंगीला ने भी मुझ से हाथ मिलाकर मुझे विदा किया।

मै थाने के बाहर गया। अब मै अपने को बहुत थका हुआ महसूस कर रहा था इसलिए अब जैसे शाम होते ही सभी पंक्षी अपने अपने घोसलों की और लौटने लगते है उसी मानिंद मैंने भी अपने घर की और लौटने का फैसला किया।

मै अगले दिन सुबह 9 बजे तक सोता रहा और आज भी मेरी नींद मेरे नींद के दुश्मन मेरे मोबाइल की उस पुलिस सायरन वाली बेल से खुली। फ़ोन उठाकर देखा तो प्रोफेसर उमाकांत चौधरी लाइन पर थे।

"हेलो,बोलिये चौधरी जी" मैंने अलसाये स्वर में कहा।

"मै आ गया हूँ महरोली वापस,कब मिलोगे आप?"चौधरी जी अपनी आवाज में शहद जैसी मिठास भरते हुए बोले।

मै 11 बजे आपको कॉलेज में मिलता हूँ,मुझे कॉलेज में कुछ काम भी है" मैंने चौधरी जी को बोला।

"ठीक है मै आपका इंतजार करूंगा" ये बोलकर चौधरी जी ने फ़ोन काट दिया।

मै कुछ देर अलसाया सा युही पड़ा रहा और फिर मन मारकर उठा और वॉशरूम में घुस गया।

मै नहाधोकर तैयार हुआ और बाहर आकर पार्किंग से गाडी बाहर निकाली और कॉलेज के लिए गाडी दौड़ा दी आज नाश्ता कॉलेज की कैंटीन में ही करने का विचार था।,सुबह के टाइम में महरोली की सड़कों पर ट्रैफिक की भरमार होती है और आप उस वक़्त और ज्यादा ट्रैफिक की मार झेलते हो जब आप बायपास से होकर आजादपुर के रास्ते होते हुए माल रोड की तरफ जाओगे तो आप ट्रैफिक जाम में फसोगे ही फसोगे।

मै लगभग एक घण्टे के बाद कॉलेज के प्रांगण में मौजूद था। मैंने प्रोफेसर चौधरी को फ़ोन लगाया। चौधरी जी ने एक रूम का नंबर मुझे बताया और मुझे उस रूम में बुलाया। मै उस रूम को ढूंढता हुआ उस रूम में पहुंचा।

प्रोफैसर चौधरी कोई 55 साल के आस पास का व्यक्ति था लेकिन शरीर उसका इस उम्र में भी गठीला था, और ठरकी पन उसके चेहरे से टपकता था ,शायद ये कॉलेज की रंगीनियत का असर था जो इस उम्र में भी बन्दा बहुत सज संवर कर कॉलेज आता था।

मुझे देखकर चौधरी जी ने मुझे एक कुर्सी की तरफ इशारा करते हुए बैठने को बोला। आपका खादिम उस कुर्सी पर विराजमान हुआ। मैंने बैठते ही अपनी नजरे चौधरी जी के ऊपर गड़ा दी। मुझे इस तरह अपनी और देखते हुए पाकर चौधरी जी विचलित से हो गए और बैचैनी से मेरी और ही देखते रह गए ।

"जी बोलिये!क्यों मिलना चाहते थे आप मुझसे?" चौधरी ने मरे हुए स्वर में बोला।

"हमे पता लगा है कि रिंकी को तुम बहुत परेशान करते थे और बार बार उसे अकेले में मिलने के लिए बुलाते थे"मैंने कड़क आवाज में पुलिसिया रौब दिखाते हुए उसे बोला।

" जी नहीं मै कोई गलत काम से उसे अकेले में नही आने को बोलता था बल्कि वो एक ब्रिलियंट स्टूडेंट थी तो उसकी स्टडी में और अच्छी हेल्प हो जाये इसलिए बुलाता था" प्रोफेसर चौधरी ने सफाई दी।

"तुम्हारी पूरी हिस्ट्री है हमारे पास,तुमने आज तक किसी लड़के को तो अकेले में बुलाया नहीं,फिर सिर्फ लड़कियो को ही क्यों बुलाते थे"मैंने चौधरी पर और गहरी नजरे जमाते हुए बोला।

मेरे इस सवाल पर चौधरी बंगले झांकने लगा।

"अभी तुम्हारा मोबाइल भी जब्त किया जायेगा और फिर सब पता लग जायेगा की तुम यहाँ क्या क्या गुल खिलाते हो" मैंने चौधरी को डराने के लिए ब्लफ मारा।

मेरी बात सुनकर चौधरी के चेहरे पर एक डर नजर आया।

"सर मैंने कुछ नही किया मेरा यकीन मानिए,अगर कोई छोटी मोटी गलती हो गयी हो तो मुझे माफ़ कर दो"चौधरी अब हाथ जोड़कर गिड़गिड़ा रहा था।

"तुम जैसे लोगो की वजह से आज ये शिक्षा के मंदिर भी बदनाम हो रहे रहे है,तुम माफ़ी के काबिल तो हो नहीं,इसलिए माफ़ी की बात तो भूल जाओ,बल्कि डिपार्टमेंट को तुम्हारी बर्खास्तगी के लिए भी लिखेंगे" मैंने चौधरी को और डराना चाहा।

"सर मुझे माफ़ कर दीजिए,पूरे कॉलेज में मेरी बहुत बदनामी हो जायेगी,मै कही मुंह दिखाने के काबिल नही रहूंगा" चौधरी अब बुरी तरह से सहम गया था।

"फिर सच सच बता तूने रिंकी के साथ क्या किया" मैंने चौधरी को घुड़कते हुए कहा।

"सर अपने बच्चो की कसम मैंने रिंकी के साथ कुछ नहीं किया,मै उसे बुलाता जरूर था लेकिन वो कभी आई नहीं मेरे पास" चौधरी ने बताया।

"इसी बात का तूने उससे बदला लिया और उसका मर्डर करवा दिया,क्योकि वो तुझे अवॉयड करती थी" मैंने उसको और डराया।

"नही सर, बिलकुल नही सर, ऐसा तो मैं कभी सोच भी नहीं सकता" सीधा सीधा मर्डर का नाम सुनकर चौधरी के पिछवाड़े में भी पसीना आ गया था।

"फिर किसने किया उस मासूम लड़की का कत्ल,क्या जानता है उसके मर्डर के बारे में ? जो भी जानता है सच सच बता दे।

"सर मै कुछ नही जानता? मेरा यकीन मानिए" अब चौधरी बुरी तरह परेशान नजर आ रहा था।

" कोई और उसे कॉलेज में परेशान करता था,तुम्हारी नजर में कोई और ऐसा शख्स है कॉलेज में " मैंने अँधेरे में तीर छोड़ा।

"सर इस बारे में उसके फ्रेंड सर्किल के लोग ही बता सकते है क्योंकि मुझ से तो वो कभी स्टडी के अलावा कोई बात ही नहीं करती थी" चौधरी मरे हुए से स्वर में बोला।

"ठीक है अभी तो मै छोड़ रहा हूँ तुम्हे,लेकिन अगर फिर किसी और से तुम्हारी ये गिरी हुई हरकत पता चली तो तुम सोच लेना तुम्हारा क्या हश्र करूंगा?" मैंने चौधरी को पुलिसिया अंदाज में धमकाते हुए बोला।
 
चौधरी बस हाथ जोड़े मेरी और देखता रहा,उसके मुंह से एक बोल ना फूटा। मै उसे उसी हालत में छोड़कर रूम से बाहर आ गया।

अब मै रिंकी के फ्रेंड सर्किल को एक बार और टटोलना चाहता था। मै कैंटीन की और चल पड़ा क्योकि मुझे अब थोड़ी थोड़ी भूख भी लगनी शुरू हो गयी थी।

मै कैंटीन में पहुंचा। और काउंटर से एक ब्लैक कॉफी और एक सैंडविच लिया और कैंटीन में एक कोने में जा बैठा।

" यार रात को तो कटरीना ने मस्त कर दिया" तभी मेरे पीछे से आवाज आई। मैंने बिना अपनी गर्दन को तवज्जो दिए हुए उन दोनों की बातों पर अपना ध्यान लगाने की कोशिश की।

"भाई अपने पास तो आजकल सूखा पड़ा हुआ है"पीछे से फिर एक दूसरी आवाज आई।

"क्यों भाई ?वसीम भाई ने माल देने से मना कर दिया क्या तुम्हे? मुझे पहले वाली आवाज सुनाई दी।

"अरे यार हफ्ते भर से मोम डैड आउट ऑफ स्टेशन है तो रोकड़े की कमी हो गयी!और वो साला वसीम भाई ने भी अपनी औकात दिखा दी,साले ने कल माल देने से मना कर दिया"दूसरा शख्स फुसफुसाया।

"तू चिंता मत कर मै वसीम भाई को बोल दूँगा!वो आगे से तुझे माल देने से मना नही करेगा। इतना बोल कर वो पहले वाला शख्स खड़ा हो गया।

"चल अब खड़ा हो,आज अपनी छमिया भी कॉलेज नही आई है"वो पहले वाला शख्स फिर से बोला और ठठाकर हँस दिया।

"क्यों आज डॉली नही आई है क्या कॉलेज" वो दूसरा शख्स बोला।

"नही यार वो आज अपनी फ्रेंड रिंकी के घर शोक प्रकट करने गई हुई है अपने दोस्तों के साथ,तभी तो साले मै तेरे जैसे नशेड़ी के साथ घूम रहा हूँ" वो शख्स फिर हँसा।

इस बार मैंने अपनी गर्दन को हल्की सी जुम्बिश दी और उन दोनों नशेडियो की तरफ देखा तो उनमे से एक लड़का वही था, जिसे मैंने कल डॉली के साथ यही कैंटीन में देखा था।

शिक्षा के इन मंदिरों में न जाने क्या क्या होने लगा था ? नशे के अड्डे,यौन दुराचार के अड्डे और भी न जाने क्या क्या? मैंने आने सिर को हल्का सा झटका दिया और वहां से उठकर कॉलेज से बाहर की और चल दिया।

********************************

आज चार दिन बीत जाने के बाद भी मेरे हाथ बिलकुल खाली थे! अभी तक कोई सुराग मेरे हाथ नही लगा था,जिसकीं बिना पर मै आगे बढ़ सकूँ? मै एक बार फिर से सभी कडियो को जोड़ने लगा। शादी के दस साल बाद रिंकी का जन्म हुआ था और उससे पहले उनके छोटे भाई के लड़के को गोद लेने की बात चल रही थी। लेकिन रिंकी के जन्म के साथ ही वो मामला ठंडे बस्ते में चला गया। 21 साल पहले उमेश थपलियाल की सम्पति की इतनी कीमत नही होगी जो आज हो गयी है,खुद उमेश जी के शब्दों में वो आज दस करोड़ की सम्पति के मालिक थे। क्या सम्पति के लिए रिंकी की हत्या हो सकती थी? क्या कोई रिस्तेदार जिसे रिंकी के मरने से सीधा फायदा पहुँचता हो वो इस हत्या को अंजाम दे सकता था?आजकल कुछ भी हो सकता था। पैसो की चकाचौंध के आगे रिश्तों को दरकने में कोई समय नही लगता ?

मैंने अपने खबरी को फ़ोन लगाया। उसने तुरंत फ़ोन को उठाया। मैंने उससे इस केस के बारे में बात की और उमेश थपलियाल के पूरे परिवार की जन्मकुंडली निकालने के लिए बोला।मैंने उसे आज से ही काम पर लग जाने की हिदायत दी।

खबरी को काम पर लगाने के बाद मैंने अपनी गाड़ी कमला नगर थाने की और दौड़ा दी। इंस्पेक्टर रंगीला मुझे थाने में ही मिल गए। इंस्पेक्टर रंगीला ने मेरा गर्मजोशी से स्वागत किया।

"आओ जासूस साहब,कहाँ तक पहुंची आपकी गाड़ी?" इंस्पेक्टर रंगीला ने दिल्लगी भरे अंदाज में पूछा।

"अभी तक तो जहाँ से चले थे वही है सर" मैंने निराशा से बोला।

" क्यों कोई क्लू हाथ नही लगा आपके"इंस्पेक्टर रंगीला ने इस बार संजीदगी से पुछा।

"मै एक अलग थ्योरी पर काम कर रहा हूँ जो आपकी थ्योरी से बिलकुल अलग है सर" मैंने इंस्पेक्टर रंगीला को कहा।

"ऐसी कौन सी थ्योरी है आपकी राज साहब?जो पुलिस को नजर नही आई इस केस में? इंस्पेक्टर रंगीला ने जिज्ञासा से पुछा।

"सर रिंकी के रिश्तेदार भी इस केस में अहम कड़ी हो सकते है" मैंने इंस्पेक्टर रंगीला को बोला।

"उस एंगल को हम खंगाल चुके राज साहब! ऐसा कोई एंगल नहीं है ?मैनें खुद थपलियाल जी के रिस्तेदारो से बात की है" रंगीला जी ने मेरे एंगल को एक झटके में हवा में उड़ा दिया।

"ठीक है सर,फिर तो मुझे भी किसी दूसरे एंगल पर सोचना पड़ेगा" मैंने मुस्करा कर इंस्पेक्टर रंगीला को बोला।

"नही अब तुमने बोला है तो इस एंगल को मै भी अब और गहराई से जाचूंगा राज साहब" इंस्पेक्टर साहब ने संजीदा स्वर में बोला।

"सर वो सीसीटीवी की फुटेज इस खाकसार को मिल सकती है क्या?" मैंने इंस्पेक्टर रंगीला को अनुनय विनय वाले अंदाज में कहा।

मेरी बात सुनकर इंस्पेक्टर रंगीला ने कुछ पल सोचा और फिर अपने एक मातहत को बुलाकर एक पेन ड्राइव में सीसीटीवी की फुटेज को मंगवाया और मुझे दे दिया। मुझे आज रात का काम मिल गया था उस फुटेज को खंगालने का ।

मैंने अब इंस्पेक्टर रंगीला से विदा ली और थाने से बाहर आ गया।

मै अब सीधा रोहिणी अपने घर के लिए रवाना हुआ।मुझे सीसीटीवी को अच्छी तरह से चेक करना था, शायद उसी में से कुछ काम की चीज़ हाथ लग जाए। मै अभी आजादपुर तक ही पहुंचा था कि मेरे मोबाइल पर डॉली का नंबर फ़्लैश हुआ। मैंने तत्काल उसकी काल को रिसीव किया।

"सर आप कहा हो ? आपसे बहुत जरूरी बात करनी है" डॉली की आवाज में उतेजना भरी हुई थी।

"मै तो अभी तुम्हारे कॉलेज से ही निकला हूँ यार,तुम कहाँ हो" मैंने डॉली से पुछा।

"सर हम यहाँ रिंकी के घर आये हुए थे क्या आप यहाँ आप आ सकते हो" डॉली ने मुझ से पुछा।

"ठीक है मै अभी पहुँचता हूँ वहाँ! तुम वही मेरा इन्तजार करो" ये बोलकर मैंने फ़ोन रख दिया।

अब मैंने अपनी गाड़ी को आजादपुर से वजीरपुर डिपो की और मोड़ दिया। मेरा इरादा अब प्रेमवाडी पूल से होते हुए वाया केशव पुरम त्रिनगर होते हुए शास्त्री नगर जाने का था।
 
आपका खादिम शास्त्री नगर रिंकी के घर पहुंचा। अभी तक रिंकी के सभी दोस्त उसके घर पर ही थे। मुझे देखते ही डॉली मेरी और लपक कर आई। शाजिया,मेघा और कौशल रिंकी की मम्मी के पास बैठे थे। मैंने अभी तक इनके ग्रुप के दूसरे साथी राजेश को नहीं देखा था। डॉली ने इशारे से मुझे बाहर की तरफ आने का इशारा किया। मै डॉली के पीछे पीछे बाहर आ गया।

"बोलो क्या बात है" मैंने डॉली से पुछा।

"मैंने यहाँ एक आदमी को देखा है उसे मैंने उस दिन कॉलेज में भी देखा था" डॉली ने एक बेहद ही चौकाने वाली बात बताई।

"व्हाट ? मै चौंक कर पड़ा था डॉली की बात सुनकर।

"हां वो शायद रिंकी का ही कोई रिलेटिव हो सकता है" डॉली ने बताया।

"किस टाइम देखा था तुमने उसे उस दिन कॉलेज में" मैंने डॉली से पुछा।

"समय तो मुझे याद नही क्योकि मै उस दिन अपनी स्टेज परफॉरमेंस के कारण बिजी थी!लेकिन मैंने उस लड़के को रिंकी के साथ ही देखा था"

"बताओ मुझे कौन है वो? मैंने डॉली को कहा।

"अभी वो अंकल जी के साथ कहीं गया है? अभी आते ही आपको बताती हूँ" डॉली ने मेरी और देखते हुए कहा।

"अच्छा तुम्हारा कोई बॉय फ्रेंड भी है क्या कॉलेज में ?" मैंने अचानक से डॉली से पुछा।

"ओह्हो जासूस साहब मेरी ही जासूसी! अचानक से डॉली के चेहरे पर शरारती मुस्कान उभर आई।

" नहीं कोई जासूसी नहीं की तुम्हारी ? बस वो तो अचानक ही तुम्हारे बॉयफ्रेंड को देख लिया!" मैंने डॉली को सफाई दी।

"सिर्फ देखने से पता लग गया कि वो मेरा बॉयफ्रेंड है? वाह जासूस जी कमाल की नजर है आपकी!" डॉली मेरे मजे लूट रही थी।

"लेकिन तुम्हारी चॉइस गलत है" मैंने डॉली को बोला,हालाँकि मुझे खुद नही पता था कि मै उसे ये सब क्यों बोल रहा था।

"वो क्या है न आप मुझे मिले नहीं थे तो जो भी फर्स्ट ऑप्शन मुझे मिला मैंने उसे हां बोल दिया" डॉली ने मजाकिया लहजे में कहा।

"नही मुझे वैसे भी गर्लफ्रेंड बनाने का कोई शोक नहीं है" मैंने डॉली को उसी की टोन में जवाब दिया।

"अच्छा ये बताओ की मेरी चॉइस गलत कैसे है? डॉली ने मुझ से पुछा।

"वो फिर कभी बताऊंगा!" मैंने डॉली को टालते हुए कहा।

"मतलब अभी किस्मत में एक बार और मिलना लिखा है जासूस जी आपसे! डॉली के पास हर सवाल का जवाब था,पता नही भगवान भी इन लड़कियो को इतना बातूनी क्यों बनाता है।

तभी हमारे करीब एक बाइक आकर रुकी,और उस पर से थपलियाल साहब और एक लड़का उतरे। थपलियाल जी की उतरते ही मुझ पर नजर पड़ गयी थी।थपलियाल साहब मुझे देखते ही मेरे पास आकर खड़े हो गए और डॉली चुपचाप अंदर चलीं गयी।

"कुछ पता चला राज जी" उमेश जी ने मुझ से पुछा।

"नही अभी तक तो कुछ पता नहीं चला लेकिन जल्दी ही पता चल जायेगा" मैंने उमेश जी को बोला।

"आप मेरी सारी दौलत ले लो लेकिन एक बार मेरी लाडली के हत्यारों को मेरे सामने लाकर खड़ा कर दो! मै आपका ये एहसान जिंदगी भर नही भूलूंगा राज जी!" उमेश जी भावुक स्वर में बोले।

"आप चिंता मत कीजिये बहुत जल्द कातिल को आपके सामने लाकर खड़ा दूँगा!" मैंने उमेश जी को सांत्वना देते हुए कहा।

"अभी जो लड़का आपके साथ आया था वो कौन है? मैंने उमेश जी से पुछा।

"जी वो मेरे छोटे भाई का लड़का अनुज है" उमेश जी ने मुझे बताया।

"ये कब से यहाँ आया हुआ है ?" मैंने फिर से पुछा।

"जी ये तो गांव में रहता है! रिंकी कि घटना सुनने के बाद ही अपने परिवार के साथ आया है" उमेश जी बोले।

"आपकी पूरी फॅमिली में कौन कौन है?मैंने उमेश जी से उनके पूरे परिवार के बारे में जानना चाहा।

"जी हम तीन भाई है और दो बहने है" उमेश जी ने बताया।

"आपको छोड़कर सभी गांव में रहते है क्या? मैंने पूछा।

"नहीं मेरा सबसे बड़ा भाई यही महरोली में ही लक्ष्मी नगर में रहता है,और मेरा छोटा भाई गांव में ही माँ बाप के साथ रहता है" ,उमेश जी ने बताया।

"आपके छोटे भाई के कितने बच्चे है ? मैंने फिर पूछा।

"जी छोटे भाई के दो लड़के और दो लडकिया है और बड़े भाई के दो लड़के और एक लड़की है" उमेश जी ने अपने दोनों भाइयो के परिवार की जानकारी देते हुए कहा।

"आपकी दोनों बहने कहाँ रहती है ?" मैंने फिर पूछा।

"जी वो दोनों देहरादून में रहती है! अभी तो सभी यही आये हुए है" उमेश जी ने बोला।

"जी ठीक है! अगर जरूरत पड़ी तो एक बार सबसे मिलना चाहुगा मै?" मैंने उमेश जी को बोला।

"जी जब कहोगे ? मै सभी से मिलवा दूँगा!" उमेश जी ने बोला।

"जी अब बन्दे को इजाजत दीजिये" मैंने उमेश जी से विदा ली।

मै वहां से रवाना होने ही वाला था कि मुझे रिंकी की फ्रेंड की पूरी गैंग घर से बाहर आती हुई नजर आई।मै उन्हें देख कर वही ठिठक गया। तभी शाजिया मेरे पास आई और बोली।

"सर आप किधर जा रहे है"

"जहां आप कहोगी हम तो वही चल पड़ेंगे शाजिया जी ! ये खाकसार तो आपका खादिम है"मैंने बड़ी अदा से अपना सर निवा कर कहा।मेरी बात सुनकर शाजिया खिलखिला कर हँस पड़ी।

"जी नहीं आपको हमारे लिए स्पेशल कही जाने की जरुरत नहीं है अगर हमारा और आपका रास्ता एक ही हुआ तो तभी आपसे लिफ्ट लेंगे" शाजिया ने बोला।

"आप रास्तो की बात कर रही है!हो सकता है कि हमारी मंजिल भी एक हो?" मैंने शाजिया से अपने अंदाज में कहा।

"इतनी देर आपने यहाँ फ़्लर्ट करने में लगा दी इतनी देर में तो हम घर भी पहुंच जाते अब तक मिस्टर जासूस"इस बार डॉली दमक कर पड़ी।

"मुझे तो बस यही केशवपुरम तक ही जाना है" मेघा ने कहा

"और मुझे पीतम पूरा तक जाना है "डॉली ने बोला।

"आप दोनों को कहा जाना है" मैंने शाजिया और कौशल की और देखकर बोला ।

"मुझे तो शालीमार बाग जाना है" कौशल ने कहा।

" मुझे तो रोहिणी के सेक्टर 11 तक जाना है" सबसे आखिर में शाजिया ने बोली।

सिर्फ कौशल आउट ऑफ वे था बाकि सभी मेरे रूट के बन्दे थे।

"ठीक है कौशल मै तुम्हे वजीरपुर डिपो छोड़ दूँगा तुम वहां से शालीमार बाग निकल जाना। बाकी तो सभी मेरे रास्ते में ही पड़ेंगे" मैंने सभी को कार में बैठने का इशारा करते हुए कहा।

शाजिया आगे मेरे साथ वाली सीट पर बैठ गयी और बाकि सभी पीछे बैठ गए। मैंने कार को इन सभी की मिलीजुली मंजिल की और बढ़ा दिया।

"तुम्हारे कॉलेज में ड्रग माफिया भी काम करता है" मैंने अचानक से गाडी की खामोशी को भंग करते हुए कहा।

मेरी बात सुनकर गाडी में सन्नाटा और गहराई से पसर गया।

"हां सर!सुना तो हमने भी है? लेकिन हम इन चीज़ों से दूर ही रहते है !ये सब कर्म ज्यादातर होस्टल में रहने वाले लोग करते है,क्योकि यहां उन पर कोई रोक टोक करने वाला तो होता नही है? शाजिया ने मेरी बात का जवाब दिया।

"तुम सही कह रही हों शाजिया!ऐसे लोगो से दूर ही रहना चाहिए! और ऐसी संगत से भी दूर ही रहना चाहिए ! मैंने शीशे में से डॉली के चेहरे पर नजर को गड़ा कर देखा। मैंने देखा की डॉली को हमारा ड्रग पर बात करना पसंद नही आ रहा था।वो कुछ बेचैन सी लग रही थी।

"अच्छा एक बात समझ नहीं आई तुमने बताया था कि तुम्हारे ग्रुप में एक राजेश नाम का लड़का भी था वो मुझे आज तक नजर नहीं आया ? " मैंने फिर से शाजिया से पुछा।

"सर राजेश कुछ दिनों से आउट ऑफ स्टेशन है!वो शायद कल तक आ जायेगा !रिंकी के साथ हुए हादसे की जानकारी हमने उसे फ़ोन करके दे दी है" रूबीना ने बोला।

"ठीक है जब भी आये मुझ से जरूर मिलवाना" मैंने रुंबिना को फिर से बोला।

तभी मेघा ने गाड़ी रोकने के लिए बोला,मैंने देखा तो हम केशवपुरम पहुंच चुके थे।मैंने गाडी को मेट्रो स्टेशन के नीचे लगाया और मेघा को गाडी से उतार कर फिर से गाडी को आगे बढ़ा दिया।

"तुम्हारे चौधरी साहब का क्या हाल है" मैंने कुछ मजे लेने और कुछ टाइम पास करने के इरादे से पुछा।

" राज सर! आज चौधरी जी ने अपना व्हाट्सअप ग्रुप डिलीट कर दिया है!ये देखकर मै अभी तक हैरान हूँ?इस बार डॉली चहक कर पड़ी।

"हाहाहाहा ये आपके इस खाकसार का साइड इफ़ेक्ट है जो उसने व्हाट्सप्प ग्रुप डिलीट कर दिया! आज सुबह उसका रिमांड ले लिया था मैंने" मैंने हँसते हुए कहा।

"ये तो बहुत अच्छा किया सर आपने !हर किसी को परेशान करता था वो !कॉलेज की लड़कियो को अपने बाप की जागीर समझता है, वो सड़ियल बूढ़ा"इस बार शाजिया ने हिकारत भरे स्वर में कहा।

"अब वो किसी को परेशान नहीं करेगा? अगर फिर भी करे तो मुझे बता देना ? इस बार सीधा कॉलेज से बाहर ही करवा देंगे" मैंने सभी को आश्वासन देते हुए कहा।

तभी कौशल ने भी गाडी को रोकने के लिए कहा। हम वजीरपुर डिपो स्थित पंजाब केसरी के सामने पहुंच चुके थे। मैंने गाडी को रोका और कौशल को उतार कर हम आगे बढ़ गए।मुझे डॉली से कुछ अकेले में बात करनी थी, लेकिन उसका घर शाजिया के घर से पहले पड़ रहा था,इसलिए वो अभी सम्भव नजर नहीं आ रहा था, मैंने डॉली को बाद में फ़ोन से कांटेक्ट करने की सोची और उसे पीतमपुरा उतार कर मै शाजिया को सेक्टर 11 छोड़ने के लिए गाडी आगे बढ़ा दी

"डॉली के बारे में कुछ बताओगी मुझे" मैंने शाजिया से पुछा।

"डॉली के बारे मे ? शाजिया ने सवालिया निगाहों से मेरी और देखा।

"हां डॉली का एक बोयफ़्रेंड है जो ड्रग एडिक्ट है,उसके बारे में जानना है"मैंने रूबीना की और देखते हुए बोला।

"आप उसके बारे में कैसे जानते हो ? डॉली ने तो बताया नहीं होगा आपको? शाजिया ने मेरी और देखकर बोला।

"बस पता चल गया ? डॉली को पता है कि वो ड्रग एडिक्ट है" मैंने फिर से शाजिया से पुछा।

"हां मालूम है और अब वो उसके चक्कर में इतना फंस चुकी है कि अब उससे बाहर भी नहीं निकल सकती" रूबीना ने कही खोये हुए अंदाज में कहा।

"ऐसा क्या हुआ है" मै डॉली के बारे में जानने को उत्सुक था।

"मै एक बार इस बारे में डॉली से बात कर लूं सर,उसके बाद आपको सब कुछ बता दूँगी,बेचारी रिंकी भी उसे बहुत समझाती थी ! लेकिन वो भी कुछ नहीं कर सकी? रूबीना ने बोला।

मैंने शाजिया की बात सुनकर इस पर और ज्यादा बात करना मुनासिब नही समझा और उसे सेक्टर 11 छोड़कर, मै अपने घर की और निकल गया। ये ड्रग का एक नया एंगल सामने आ रहा था और एक ड्रग एडिक्ट के चुंगल में रिंकी के ग्रुप की एक लड़की के फंसे होने का एंगल मुझे विचलित कर रहा था। मैंने कल डॉली से इस बारे में आमने सामने बात करने का फैसला किया। दूसरी और रिंकी के कज़न भाई का उस दिन कॉलेज में मौजूद होने के पीछे क्या रहस्य था ये भी अभी पता करना था? इस केस में मुझे अब कई एंगल नजर आने लगे थे। बहरहाल आज रात का मेरा पहला काम था उस सीसीटीवी कैमरे की फुटेज का सही तरीके से पोस्टमार्टम करना।
 
मैंने घर पहुंच कर अपने लिए चाय बनाई और रिलैक्स होकर चाय पीने लगा ही था कि ऑफिस से रागिनी का फ़ोन आ गया।

"सर आपको याद है कि नही? की आपने एक अपना छोटा सा ऑफिस भी बनाया हुआ है और उसमें दो मासूम प्राणी भी काम करते है" रागिनी ने फ़ोन उठाते ही तंज मारा।

"हां याद क्यों नही होंगा?" मैंने उकताए स्वर में जवाब दिया।

"अगर याद है तो यहाँ की गरीब जनता भी आपके दर्शनों की अभिलासी है हुजूर" आज तीन दिन से आपके शुभ चरण इस ऑफिस में नहीं पड़े"

"तुम्हे तो पता है ना की मै रिंकी वाले केस में बिजी हूँ,इसलिए ऑफिस नहीं आ पा रहा हूँ" मैंने रागिनीको समझाने की कोशिश की।

" मैंने आपको फ़ोन इसलिए किया है मेरे मालिक की आज एक सज्जन आये थे ऑफिस में और बोल रहे थे की उनका बेटा 4 दिन से लापता है,उसे ढूढ़ने में आपकी मदद चाहिए उसे" रागिनीने बात को बदलते हुए कहा।

"तो पुलिस के पास जाए मै क्या खोया पाया डिपार्टमेंट से हूँ जो मै उनके लड़के को ढूंढ कर लाऊ" मैंने रागिनीको बोला।

"अरे बॉस पूरी बात तो सुन लो!उसके बाद कोई निर्णय करना, जो लड़का लापता है वो भी उसी कॉलेज का स्टूडेंट है जिसमे रिंकी पढ़ती थी और वो भी उसी दिन से लापता है जिस दिन रिंकी का कत्ल हुआ था कॉलेज में!" रागिनी ने ये एक नई और चौकाने वाली बात बताई थी।

"उस बन्दे का नाम और फ़ोन नंबर जल्दी से मुझे सेंड करो!इतनी काम की बात तुमने मुझे उसी वक़्त क्यों नही बताई जब वो शख्स ऑफिस में आया हुआ था"मैंने रागिनीको डांटते हुए कहा।

"आपको और कामो से फुर्सत मिले तो बताऊ ना! अपना फ़ोन चेक करो कितने कॉल और मैसेज आपको भेजे हुए है? रागिनी ने अब उल्टा मेरी ही क्लास लगा दी थी।

"ठीक है,ठीक है !जल्दी से नंबर भेज उनका,अब ज्यादा भेजा फ्राई मत कर मेरा" मैंने रागिनी पर झूठा गुस्सा दिखाते हुए कहा।

"भेज रही हूँ अभी !और आप आ जाओ कल आप ऑफिस में कल भी आपको बिना दूध की चाय नही पिलाई न तो मेरा नाम भी रागिनी नही" ये बोलकर रागिनीने शायद अपना फ़ोन पटक कर रखा था। तभी मेरे फ़ोन की मैसेज टोन बजी,मैंने मैसेज ओपन किया तो मुझे रागिनी का भेजा हुआ उस बन्दे का नाम और फ़ोन नंबर दिखाई दिया। मैंने तत्काल उस नंबर को डायल किया।उधर बेल बजने की आवाज मुझे सुनाई देने लगी।

"हेल्लो"मुझे उधर से एक शख्स की कर्कश आवाज सुनाई दी।

"आप घनश्याम दास जी बोल रहे है" मैंने पूछा।

"जी बोल रहा हूँ"

"नमस्कार जी,मै राज बोल रहा हूँ,प्राइवेट डिटेक्टिव राज, आज आप मेरे ऑफिस आये थे" मैंने उन्हें अपना परिचय दिया।

"हां राज साहब मै गया था आपके ऑफिस,मुझे कहीं से आपके बारे में पता चला था,देखिये मेरा लड़का पिछले चार दिन से गायब है,मै पुलिस में भी कंप्लेंट लिखवा चुका ,लेकिन कही से भी कोई ख़ास मदद नही मिल रही है" घनश्याम दास जी ने बताया।

"क्या नाम है आपके लड़के का, और वो क्या करता है"मैंने उनसे पूछा।

"जी उसका नाम राजेश है और वो कॉलेज में पड़ता है" घमश्याम जी ने मुझे उसी कॉलेज का नाम बताया जिसमे रिंकी पढ़ती थी।लेकिन राजेश का नाम सुनकर मेरे कान खड़े हो गए थे।

"ठीक है घनश्याम जी मै कल सुबह आपसे मिलता हूँ आप अपना एड्रेस मुझे सेंड कर दीजिए,बाकी डिटेल मै आपसे मिल कर ले लूंगा" मैंने घनश्याम दास जी को बोला।

"ठीक है राज जी मै अभी आपको अपना एड्रेस सेंड करता हूँ" ये बोलकर घनश्याम दास जी ने फ़ोन रख दिया।

मै राजेश के बारे में सोचने लगा। आज ही तो शाजिया ने मुझे बताया था कि राजेश अपने गाँव गया हुआ था और वो कल लौट कर आने वाला है। जबकि उसके पिता को इस बारे में कोई जानकारी ही नही है,क्या उसके यार दोस्तों से उसके पिता ने कोई पूछताछ नही की अभी तक?और क्या पुलिस भी इतनी लापरवाही कर सकती हैं ? की एक 20 साल का लड़का चार दिनों से लापता हो और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी हो?सच में मेरे दिमाग के सारे पुर्जे हिल चुके थे। ये रिंकी का कत्ल क्या क्या गुल खिलायेगा?और कौन कौन इसके लपेटे में आएंगे?कुछ समझ नहीं आ रहा था? केस के संदिग्धों की लिस्ट बढ़ती ही जा रही थी?लेकिन अभी तक सबूत एक भी हाथ नही लगा था? जब इस सोच से उभरा तो बारे में पता चला था,देखिये मेरा लड़का पिछले चार दिन से गायब है,मै पुलिस में भी कंप्लेंट लिखवा चुका ,लेकिन कही से भी कोई ख़ास मदद नही मिल रही है" घनश्याम दास जी ने बताया।

"क्या नाम है आपके लड़के का, और वो क्या करता है"मैंने उनसे पूछा।

"जी उसका नाम राजेश है और वो कॉलेज में पड़ता है" घमश्याम जी ने मुझे उसी कॉलेज का नाम बताया जिसमे रिंकी पढ़ती थी।लेकिन राजेश का नाम सुनकर मेरे कान खड़े हो गए थे।

"ठीक है घनश्याम जी मै कल सुबह आपसे मिलता हूँ आप अपना एड्रेस मुझे सेंड कर दीजिए,बाकी डिटेल मै आपसे मिल कर ले लूंगा" मैंने घनश्याम दास जी को बोला।

"ठीक है राज जी मै अभी आपको अपना एड्रेस सेंड करता हूँ" ये बोलकर घनश्याम दास जी ने फ़ोन रख दिया।

मै राजेश के बारे में सोचने लगा। आज ही तो शाजिया ने मुझे बताया था कि राजेश अपने गाँव गया हुआ था और वो कल लौट कर आने वाला है। जबकि उसके पिता को इस बारे में कोई जानकारी ही नही है,क्या उसके यार दोस्तों से उसके पिता ने कोई पूछताछ नही की अभी तक?और क्या पुलिस भी इतनी लापरवाही कर सकती हैं ? की एक 20 साल का लड़का चार दिनों से लापता हो और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी हो?सच में मेरे दिमाग के सारे पुर्जे हिल चुके थे। ये रिंकी का कत्ल क्या क्या गुल खिलायेगा?और कौन कौन इसके लपेटे में आएंगे?कुछ समझ नहीं आ रहा था? केस के संदिग्धों की लिस्ट बढ़ती ही जा रही थी?लेकिन अभी तक सबूत एक भी हाथ नही लगा था? जब इस सोच से उभरा तो देखा की चाय बिलकुल ठंडी हो चुकी थी। मै चाय को फिर से गर्म करने के लिए किचन में गया।लेकिन मेरे दिमाग में एक ही बात चल रही थी की जब राजेश लापता है तो शाजिया ने फ़ोन पर उससे बात कैसे की। शाजिया ने बातो बातो में आज शाम को ही बताया था कि उसने फ़ोन पर राजेश को रिंकी के कत्ल की जानकारी दे दी है और वो कल तक वापस आ जायेगा। मेरी सोच का दायरा बढ़ता जा रहा था। मै चाय की चुस्कियां लेते हुए अपने अगले कदम के बारे में सोचने लगा।
 
अगले दिन मुझे फिर मेरे फ़ोन की बजने वाली घण्टी ने ही मुझे उठाया। दूसरी और घनश्याम दास जी थे।

"हां सर बोलिये !"मैंने फ़ोन उठाकर कहा।

"राज जी आप किस टाइम तक आयेंगे" उधर से घनश्याम जी ने पुछा।

"बस सर अभी तैयार होकर निकल रहा हूँ,दो घण्टे में पहुंच जाऊँगा आपके पास" मैंने ये बोलकर फोन रख दिया।

मैंने मैसेज बॉक्स में देखा तो घनश्याम दास जी ने अपना एड्रेस मुझे भेज दिया था। शुक्र था कि उनका घर मेरे आज के कार्यक्रम के रास्ते में ही पड़ता था,वो आदर्श नगर में कही रहते थे। मैंने तत्काल बिस्तर से छलांग लगाई और वाशरूम में घुस गया।लगभग एक घण्टे के बाद मेरी गाडी आदर्श नगर की और दौड़ रही थी।

मै घनश्याम जी के घर के बाहर पहुंच कर उनके दरवाजे की घण्टी बजाई।कुछ देर में एक लगभग 45 साल की आकर्षक व्यक्तित्व की स्वामी महिला ने दरवाजा खोला।लेकिन उनके चेहरे की उदासी ने साफ साफ़ बता दिया था कि ये राजेश की मम्मी होगी।मुझे अंदर एक ड्राइंग रूम में बिठाया गया,कुछ पलों में घनश्याम दास जी भी आ गए।

"नमस्कार सर! मैंने उनका अभिवादन किया।

"नमस्कार राज जी,घर ढूढ़ने में कोई परेशानी तो नहीं हुई आपको" घनश्याम जी ने शालीनता के साथ फॉर्मेलिटीज निभाते हुए पूछा।

"नही सर! अपना तो काम ही कुछ न कुछ ढूढ़ना है तो किसी का घर ढूढ़ना तो सबसे आसान काम है" मैंने हल्का सा मुस्करा कर कहा।

"राज जी मेरा लड़का राजेश चार दिन से घर नहीं आया है,और अभी तक उसकी कोई खोज खबर नहीं है,हम बहुत परेशान हैं की हमारा बच्चा गया कहाँ? आज से पहले तो कभी हमे बिना बताये कहीं नहीं गया वो" घनश्याम जी ने दुखी स्वर में एक ही झटके में सारी बाते बोल दी।

"घर पर कोई टेंशन या कोई ऐसा मनमुटाव था क्या जिस वजह से वो घर छोड़ने तक का कदम उठा सकता हो? मैंने उनसे जानना चाहा।

"हमारा इकलौता लड़का हैं वो!उससे हमारा क्या मनमुटाव होगा,हमारी तो आँखों का तारा है वो बेटा"इस बार घनश्याम जी की धर्मपत्नी बोली,जिन्होंने मेरे लिए दरवाजा खोला था।

"कोई कॉलेज की परेशानी या कोई किसी लड़की का चक्कर वक्कर तो नही था उसकी लाइफ में? मैंने इस बार उनकी धर्मपत्नी से ही सवाल किया।

मेरा सवाल सुनकर उन्होंने एक नजर अपने पति पर डाली,घनश्याम जी ने सहमति में अपनी नजरो से कुछ इशारा किया।

"कॉलेज में जिस लड़की का क़त्ल हुआ है,वो उसी से प्यार करता था" इस बार घनश्याम जी ने एक धमाका किया।मेरे लिए ये जानकारी एकदम चौंका देने वाली थी।मुझे अचानक अन्धकार में एक किरण दिखाई देने लगी।

"लेकिन उसके किसी दोस्त ने तो मुझे इस बारे में कभी कुछ नही बताया कि राजेश और रिंकी के बीच में कोई रिलेशनशिप थी" मैंने आश्चर्य से उनकी और देखते हुए बोला।

"ये कच्ची उम्र की नादनिया होती है राज जी!ये आप भी समझते होंगे,इस उम्र में कौन क्या कर दे कुछ समझ नहीं आता" घनश्याम जी ने ऐसे बोला जैसे कोई पहेली बुझा रहे हो।

"रिंकी का कत्ल हो गया है और राजेश उसी दिन से गायब है? इसका मतलब समझते हो आप सर,पुलिस और मै क्या कोई भी इसका एक ही मतलब निकालेगा की राजेश ने रिंकी का कत्ल किया और फरार हो गया" मैंने घनश्याम जी को सभी सम्भावनाये बता दी।

"लेकिन मेरा बेटा रिंकी का कत्ल नही कर सकता है,वो तो उसके लिए अपनी जान भी दे सकता था,जरूर इन दोनों को किसी ने अपनी साज़िश का शिकार बनाया है,हमने तुम्हे इसी लिए बुलाया है ताकि तुम सच्चाई तक पहुंच कर इस साज़िश का पर्दाफाश कर सको" घनश्याम जी ने एक अजीब सा तर्क मेरा सामने रखा।

"राजेश का फोन नंबर मुझे दो और उसका एक फोटोग्राफ भी मुझे चाहिए,अगर राजेश बेगुनाह हुआ तो यकीन मानिए उसका बाल भी बांका नहीं होगा,लेकिन अगर वो रिंकी का गुनाहगार निकला तो आप समझ सकते है मै क्या कर सकता हूँ" मैंने घनश्याम जी को चेतावनी देते हुए कहा।

"अगर राजेश गुनाहगार हुआ तो मै खुद अपने हाथों से उसका गला घोंट दूँगा,मेरा यकीन मानिए मुझे हमारे खून पर विश्वास है,वो ऐसा कभी नही कर सकता? घनश्याम जी ने कातर स्वर में कहा। जबकि उनकी धर्मपत्नी की आँखों से अब आँसू बह निकले थे।

मै उन दोनों की स्तिथि को समझ सकता था। तभी घनश्याम जी अंदर गए और कुछ ही देर में वापस लौट कर आये और मेरे हाथों में एक लाख रुपये रख दिए।मैंने भी बिना कोई न नुकुर किये उन्हें अपनी जेब के हवाले किया।ये इस केस में आपके इस सेवक की ये पहली कमाई थी। तभी एक दूसरी महिला अपने हाथों में नाश्ते की ट्रे और चाय लेकर आ गई,आपका खादिम सुबह बिना नाश्ता किये ही घर से निकला था तो बिना किसी न नुकर के मै नाश्ते पर टूट पड़ा। नाश्ता करके बन्दे ने वहां से विदा ली और गाड़ी को अब कॉलेज की और दौड़ा दिया। मेरी अगली मंजिल शाजिया और डॉली थी।

मै कॉलेज पहुंचा। मेरी निगाहें शाजिया और डॉली को ढूंढ रही थी लेकिन मुझे नजर कौशल आ गया। मैंने कौशल को आवाज लगाई।मुझे देखकर कौशल जल्दी से मेरे पास आया।

"नमस्ते सर" कौशल ने मेरा अभिवादन किया।

"कैसे हो कौशल? और तुम्हारे बाकी साथी कहाँ है? मैंने कौशल के अभिवादन का जवाब देते हुए पूछा।

"सर बाकि लोग तो अभी क्लास में है,मै जरा आज घर जा रहा था,घर से मॉम का कॉल आया था कुछ जरूरी काम है" कौशल ने बोला।

"ठीक है!क्लास कब तक खत्म होगी? मैंने कौशल से पुछा।

"जी बस बीस मिनट वेट कर लीजिए, पीरियड खत्म ही होने वाला है" कौशल ने बोला।

"ठीक है कौशल,तुम जाओ मै उनका वेट करता हूँ" मैंने कौशल को बोला।

मेरी बात सुनकर कौशल वहां से निकल गया।

मै अब कैंटीन की और चल पड़ा। उसके अलावा टाइम पास करने की कोई और जगह नही थी। मैंने एक काफी ली और एक टेबल को घेर कर बैठ गया। थोड़ी देर बाद डॉली मेघा और शाजिया को मैंने कैंटीन की और ही आते हुए देखा। उन्हें देखकर मै उठकर कैंटीन से बाहर की और आने लगा,क्योकि मै जो बात उनसे करना चाहता था वो मै कैंटीन जैसी सार्वजनिक जगह पर नही कर सकता था।

मुझ पर उन तीनों लड़कियो की नजर पड़ चुकी थी,वो तीनो मेरी तरफ ही आ रही थी।

"अरे सर आप कहाँ चल दिए,बैठो हमे कुछ अपनी खातिरदारी तो करने दो" डॉली अपनी आदत के अनुसार बोली।

"तुम सब मेरे साथ आओ! मुझे तुमसे कुछ बात करनी है"मैंने थोड़ा गंभीर स्वर में बोला।

शायद वो मेरी आवाज की गम्भीरता को समझ गयी थी इसलिए वो तीनो मेरे पीछे पीछे चल पड़ी।

मै उन्हें लेकर कॉलेज में ही पार्किंग के नजदीक एक शांत जगह पर आया।हम चारो लोग वही खड़े हो गए।

"क्या बात है सर,बहुत टेन्स लग रहे हो" शाजिया ने मुझ से पुछा।

"राजेश 4 दिन से लापता है,उसके घर वालो ने उसके लापता होने की रिपोर्ट लिखवाई है अपने लोकल थाने में" मैंने तीनों की तरफ देखते हुए बोला।

"क्या?" तीनो लड़कियो के मुंह से एक साथ निकला और सभी के चेहरों पर हैरानी के भाव उभर आये।

"जी हां! अब शाजिया तुम मुझे बताओ की तुम्हारी उससे कैसे बात हुई फ़ोन पर जब तुमने उस रिंकी के क़त्ल के बारें में बताया" मैंने गौर से रूबीना का चेहरा देखते हुए पुछा।

"सर मेरी उससे रिंकी के क़त्ल के कुछ देर बाद ही उससे बात हुई थी और उसने मुझे बोला था कि वो गाँव आया हुआ है, और वो दो- तीन दिन बाद आएगा,इसलिए मैंने बोला था कि वो आज आ जायेगा" शाजिया ने सफाई देते हुए बोला।

"तुम लोगों ने मुझ से ये बात क्यों छुपाई की रिंकी और राजेश रिलेशनशिप मे थे? मैंने सभी को घूर कर देखा।

"सर उन दोनों में ऐसी कोई गहरी रिलेशनशिप नहीं है,वो बस राजेश उसे एकतरफा लाइक करता था, और कुछ नही? इसलिए हमने इस बात को इग्नोर कर दिया था" शाजिया ही मेरे सब सवालो का जवाब दे रही थी।

"अच्छा ! कोई अपने एकतरफा प्यार के बारे में अपने घरवालों को भी बतायेगा क्या? मैंने शाजिया से ही पुछा

"सर राजेश रिंकी के लिए पागल था,उसने घर पर बोल भी दिया हो तो कोई बड़ी बात नहीं है" इस बार डॉली ने जवाब दिया।

"क्या इतना पागल था कि अगर रिंकी उसे मना कर दे तो वो उसका क़त्ल भी कर दें" मैंने एक बार फिर उन सबके चेहरे पढ़ने की कोशिश की।

"नहीं सर ! राजेश उसके लिए खुद तो मर सकता था लेकिन उसे कभी कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता" इस बार शाजिया ने बोला।

"मेरा तजुर्बा है कि ऐसे लोग ही नाकाम इश्क़ में एक दूसरे की जान ले लेते है, वैसे जो बात तुम बोल रहे हो वही बात उसकी मम्मी भी बोल रही थी" मैंने बोला।

"रिंकी का थोड़ा सा भी झुकाव नहीं था क्या राजेश की तरफ? मैंने फिर से पुछा।

"सर हम सब फ्रेंड आपस में ये सब मजाक में एक दूसरे को कुछ भी बोल देते है बस कोई उसे मजाक में उड़ा देता है और कोई उसे सीरियस ले लेता है,मेरे ख्याल से राजेश के साथ भी यही हुआ है,लेकिन कुछ भी हो राजेश रिंकी को कभी कोई नुकसान नही पहुंचा सकता" इस बार डॉली राजेश की पैरवी कर रही थी।

"कोई और एंगल भी है क्या इस लव स्टोरी में ? राजेश रिंकी को प्यार करता हो,और कोई और राजेश को प्यार करता हो और उसने अपने रास्ते से रिंकी को हटा दिया हो या हटवा दिया हो?"मै सभी पहलुओं पर विचार कर रहा था।

"सर इस ग्रुप की तो किसी भी लड़की को राजेश से प्यार नही हुआ था क्योकि उसका क्रश रिंकी थी ये हर कोई जानता था" डॉली ने मेरी थ्योरी की वही खड़े खड़े हवा निकाल दी थी।

मै एक बात नोट कर रहा था कि इस पूरी बातचीत में सिर्फ डॉली और शाजिया ही मेरे सवालो का जवाब दे रही थी, लेकिन मेघा ने एक बार भी अपना मुंह नहीं खोला था। इस बार मै मेघा की तरफ मुखातिब हुआ।

"आप कुछ नही बोल रही हो,आपका क्या ख्याल है इस पूरे मामले पर"

"सर मै इन सब चीजों से बहुत दूर रहती हूँ!मै सिर्फ अपनी स्टडी से मतलब रखती हूँ! और किसी से बात भी अपनी स्टडी के रिगार्डिंग ही करती हूँ" मेघा ने मुझे टका सा जवाब दिया। लेकिन मुझे अच्छा लगा ये जानकर की वो अपनी स्टडी के प्रति इतनी संजीदा है।

"राजेश से तुम्हारी किस नंबर पर बात हुई थी" मै घूम फिरकर फिर से राजेश के मुद्दे पर आते हुए बोला।

शाजिया ने अपनी मोबाइल की कॉल हिस्ट्री खोल कर मुझे दिखाई ,उसमे उस दिन राजेश से लगभग 2 मिनट 13 सेकंड शाजिया ने 3:35 बजे बात की थी।लेकिन सवाल अब ये था कि राजेश क्यों और कहाँ गायब था?क्या उसी ने रिंकी का क़त्ल किया था या करवाया था? या ये दोनों ही किसी और की साजिश का शिकार हो गए थे।मुझे अब इस मामले में इंस्पेक्टर रंगीला की मदद की जरूरत पड़ने वाली थी,वही मुझे इस केस मे टेक्निकल मदद कर सकते थे।लेकिन अभी डॉली से भी उसके ड्रग एडिक्ट आशिक के बारे में बात करनी थी,क्योकि ड्रग एडिक्ट आशिक़ को लेकर रिंकी भी डॉली को समझाती थी,कही इस बात को लेकर डॉली के बॉयफ्रेंड ने ही कोई गुल न खिला दिया हो।

"डॉली आज शाम को क्या कर रही हो तुम" मैंने अचानक से डॉली से पुछा।

"क्यों सर? मेरे साथ डेट पर चलना है क्या? ये बोलकर डॉली खिलखिला कर हँस पड़ी।

"हां सोच तो रहा हूँ डेट पर ही जाने के लिये!आखिर तुम्हारी जैसीं दिलकश हसीना के साथ कौन नही डेट पर जाना चाहेगा? मैंने डॉली को सातवे आसमान की सैर कराने की सोची।

"राज सर! मै कितनी दिलकश और हसींन हूँ! ये मै जानती हूँ !मुझे न चने के झाड़ पर मत चढ़ावो!आप मतलब की बात बोलो काम क्या है आपको" ये डॉली तो मुझे रागिनी की ही कोई बहन लग रही थी।पट्ठी एक मिनट में मेरी झंड कर दे रही थी बिलकुल रागिनी की तरह।

"नहीं सच में मेरा दिल आ गया है तुम पर! बोलो चलोगी मेरे साथ डेट पर?" मै भी हार मानने वालों में से नहीं था।

"पर मेरा तो पहले से बॉयफ़्रेंड है,मुझ पर लाइन मारने का कोई फायदा नहीं सर!"डॉली ने मुस्करा कर बोला।

"अच्छा मेरी माँ !तुझ से कोई बहुत जरूरी बात करनी है और इसलिए तुझ से कही अकेले में मिलना था" इस बार मैंने हथियार डालते हुए बोला।

"सर अभी तो हम क्लास में जा रहे हैं,आप थोड़ी देर कैंटीन में बैठकर अपने लिए कोई दूसरी हसीना ढूंढो! फिर 4 बजे के बाद आप घर तक लिफ्ट दे देना, और बात भी कर लेना" डॉली ने बोला।

मैंने घड़ी में टाइम देखा तो अभी 2:30 बज चुके थे। इसलिए मैंने कैंटीन में ही टाइम पास करने की सोची और उन तीनों के अपनी क्लास में जाने के बाद मेरे कदम कैंटीन की और उठ गए।

शाम को 4 बजे मैंने डॉली को कॉलेज से पिक किया और उसके घर की और गाड़ी को दौड़ा दिया।

"तुम्हारे बोयफ़्रेंड का नाम क्या है" मैंने डॉली से पुछा।

"जय नाम है उसका"

"तुम जानती हो वो ड्रग एडिक्ट है"

"हां जानती हूँ,लेकिन अब मै उसके साथ इतनी दूर निकल आई हूँ की मै चाह कर भी उसे छोड़ नहीं सकती"

"क्यों ऐसा क्या हो गया?"

"वो शुरू से ऐसा नहीं था सर! बाद में उसको कुछ फॅमिली प्रॉब्लम हुआ और उसके मम्मी पापा अलग हो गए, और जय इस सबसे बिलकुल टूट गया, और नशे की दुनिया की और बढ़ गया"

"ह्म्म्म होता है ऐसा,लेकिन तुमने उसे सुधारने के लिए कुछ नही किया?"

"मैंने बहुत कोशिश की,लेकिन अब अगर उसे ड्रग न मिले तो उसकी हालत देखी नहीं जाती"ये बोलकर डॉली की आँखों में पानी भर आया और उसका गला भर्रा गया।
 

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