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Thriller हत्यारे को अंजाम तक पहुंचाया
मम्मी मै कॉलेज जा रही हूँ,आज एनुअल फंक्शन की वजह से शाम को लेट आऊँगी" रिंकी ने रसोई में जाकर अपनी मम्मी के गले में अपनी बाहों का हार डाल कर बोला।
"बेटी जल्दी आने की कोशिश करना !तुम जानती हो न अपने पापा को ? शाम तक तो वो घर को सर पर उठा लगे" रिंकी की मम्मी ने बोला।
"ओह्ह ममा आप पापा की चिंता मत करो,पापा से मैंने परमिशन ले ली है"
"परमिशन ले ली है तो जाओ फिर ! लेकिन फिर भी जल्दी आने की कोशिश करना! और अपना ध्यान रखना" रिंकी की मम्मी ने उसे हिदायत दी।
"ठीक है मेरी प्यारी ममा,मै अपना ध्यान रखूंगी,आई लव यू ममा" ये बोलकर रिंकी ने अपनी मम्मी के गाल पर एक हल्का सा किस किया और दरवाजे की और बढ़ गई।
रिंकी थपलियाल ! अपने माता पिता की लाडली! पता नही कितनी ही मन्नतो के बाद शादी के दस सालो के बाद रिंकी की मम्मी की गोद भरी थी और ऊपर वाले ने रिंकी के रूप में एक प्यारी सी बेटी उनकी गोद में डाल दी थी। बहुत ही लाड प्यार से पाला था उन्होंने अपनी लाडली बेटी को! और आज रिंकी महरोली यूनिवर्सटी से मॉस कम्युनिकेशन का कोर्स कर रही थी । उसका सपना था कि वो देश की बहुत बड़ी पत्रकार बने। आज उसके कॉलेज में कॉलेज का एनुअल डे का फंक्शन था,जिसमे शामिल होने के लिए ही रिंकी आज कॉलेज गयी थी।
*********************************
मोबाइल की साइलेंट मोड़ की किर्र किर्र की आवाज से मेरी नींद में हल्का सा खलल पड़ा था। मै फिर से बिना मोबाइल की और देखे करवट बदल कर सो गया। थोड़ी देर में मोबाइल शांत हो गया। लेकिन ये कुछ ही पल की शांति थी। मोबाइल फिर से अपनी पुरानी औकात पर आ चुका था। इस बार मैंने झुंझला कर मोबाइल को उठाया और मोबाइल पर ऑफिस का नंबर बार बार चमक रहा था।मैंने मन मार कर फ़ोन को उठाया।
"जहाँपनाह फ़ोन को अपने महल के किस कोने में डाल देते हो,जो आपको उसकी आवाज सुनाई नही देती" उधर से मेरी रिसेप्शनिस्ट पायल की मधुर आवाज सुनाई दी।
"तुझे कोई और काम नही है क्या जो हमेसा तभी मेरी नींद खराब करती है जब मै सपने में किसी हसीना के साथ डेट पर होता हूँ" मैंने खिसिया कर पायल को डांटते हुए बोला।
"आप चाहे डेट पर जाओ ? चाहे महीने पर जाओ? मुझे इससे कोई फर्क नही पड़ता,लेकिन आपकी कर्मचारी होने के नाते मेरा फ़र्ज़ बनता है की शहर में होने वाली हर खून खराबे वाली घटना के बारे में आपको समय पर बताऊ ताकि आप अपनी सपनो की हसीनाओं को छोड़कर अपने काम धंधे पर ध्यान दे सके" पायल मेरा पानी उतारने का कोई भी मौका नही छोड़ती थी।
"अब कहाँ आग लग गयी मोहतरमा" मैंने अलसाये हुए स्वर में कहा।
" महरोली के एक कॉलेज में एक लड़की का कत्ल हो गया है,आप जल्दी नींद से बाहर निकलिये और पहुँचिये वहाँ! में पूरी डिटेल अभी आपको व्हाट्सअप कर रही हूँ" ये बोलकर पायल ने फ़ोन रख दिया।
मै आपका खादिम राज! प्राइवेट डिटेक्टिव के धंधे से तालुक रखता हूँ। शहर में होने वाले मर्डर खून जैसे अपराधों से ही आपके इस खादिम की दाल रोटी चलती है। मेरा एक छोटा सा ऑफिस नेताजी सुभाष पैलेस में स्थित था। जिसमे दो लोग काम करते है एक मेरी रिस्पेसनिस्ट और एक मेरा चपरासी!
मै बेड से कूदकर बाथरूम में घुस गया और फ्रेश होने लगा।
थोड़ी देर में मै तैयार होकर अपने घर से बाहर निकल कर अपनी गाडी में बैठा और गाडी को माल रोड की और दौड़ा दिया था। पायल ने जिस कॉलेज का पता व्हाट्सअप पर सेंड किया था वो उधर ही कही स्थित था।
लहभग 45 मिनट के बाद मै घटनास्थल पर मौजूद था। एक 18 साल की लड़की कॉलेज ऑडिटोरियम के पिछले हिस्से में मरी पड़ी थी। उसका गला रेत कर बेरहमी के साथ मारा गया था।कमला नगर थाने से थानाध्यक्ष रंगीला श्रीवास्तव अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच चुके थे। फोरेंसिक टीम और डॉग स्क्वाड भी मौके पर आ चुकी थी और अपने काम में मुस्तेदी से जुटी थी। मै इंस्प्वेक्टर रंगीला के पास पहुंचा।
"नमस्ते सर,मै प्राइवेट डिटेक्टिव राज हूँ" मैंने उनका अभिवादन करते हुए अपना परिचय दिया।
"नमस्कार राज जी, कहिए क्या कर सकता हूँ आपके लिए" इंस्पेक्टर रंगीला एक शालीन व्यक्ति थे।
"जी इस केस के बारे में थोड़ी जानकारी चाहिए थी, ताकि मै भी आपकी मदद कर सकू इस केस को सुलझाने में" मैंने भी उसी शालीनता से उनको बोला।
"जासूस साहब पुलिस की काबिलियत पर शक है क्या आपको ? इस केस को हम 24 घण्टे में सुलझा लेगें" इंस्पेक्टर रंगीला श्रीवास्तव ने मेरी ओर उपहास भरी नजरों से देखते हुए कहा।
" बड़ी ख़ुशी की बात होगी सर,अगर ये केस आप 24 घण्टे में सुलझा लेंगे तो,अगर आप इसी स्पीड से केस हल करोगे तो यकीन मानिए आप बहुत जल्दी एसीपी बन जाओगे" मैंने भी उन्हें उन्ही की टोन में जवाब दिया।
" चलिए जासूस साहब इस केस में हमारी और आपकी रेस हो जाए, देखते है कौन इस केस को पहले सॉल्व करता है" इंस्पेक्टर रंगीला ने मेरी ओर मुस्करा कर देखते हुए बोला।
"ठीक है सर, आपका चेलैंज मंजूर है,लेकिन एक शर्त मेरी भी होगी"
"क्या" इंस्पेक्टर रंगीला ने मेरी ओर देखा।
"आपको कत्ल से सम्बंधित फोरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट मेरे साथ शेयर करनी पड़ेगी,क्योकि इन दोनों चीजो पर आपका अधिकार होता है" मैंने इंस्पेक्टर रंगीला को कहा।
"ठीक है वो रिपोर्ट मै आपके साथ शेयर करुगा" इंस्पेक्टर रंगीला ने मुझे आश्वाशन दिया।
" ठीक है सर ! फिर मिलता हूँ मै आपसे,अभी तो आप भी इन्वेस्टीगेशन में बिजी है" मैंने इंस्पेक्टर रंगीला से हाथ मिलाया और उनके पास से हटकर उस लड़की की डेडबॉडी के पास जाकर उसका सरसरी तौर पर निरिक्षण करने लगा। थोड़ी देर बाद मै छात्रों की भीड़ में शामिल हो गया। कॉलेज के एनुअल फंक्शन के जश्न भरे माहौल में मातम पसर गया था।
मरने वाली लड़की का नाम रिंकी पाठक था। जो मास कम्युनिकेशन की छात्रा थी। मै भीड़ में किसी ऐसे चेहरे को तलाश रहा था जो इस लड़की को जानता हो,और इसके बारे में मुझे कुछ बता सके।तभी एक लड़की पर मेरी नजर पड़ी जो उस वक़्त वहाँ फूट फूट कर रो रही थी। मै उस लड़की की तरफ लपका।
"रिंकी आपकी फ्रेंड थी" मैंने उस लड़की से पुछा।
" जी हां मेरी सबसे बेस्ट फ्रेंड थी,पता नही किस जालिम ने इतनी मासूम लड़की की जान ले ली" उस लड़की का रोना अभी भी जारी था।
"आपका नाम क्या है"
"जी शाजिया नाम है मेरा और मै भी रिंकी के बैच में ही हूँ।
"शाजिया जी ओर क्या बता सकती है रिंकी के बारे में,देखिये जितनी ज्यादा आप मेरी मदद करेगी उतनी जल्दी आपकी सहेली के कातिल को हम लोग फ़ासी के फंदे तक पहुंचा पाएंगे"
"रिंकी अपने माँ बाप की इकलौती लड़की थी,अंकल आंटी पर क्या बीत रही होगी जब ये खबर उन्हें पता चली होगी तो" ये बोलकर शाजिया का रोना और तेज हो गया।
"ओह्ह मै समझ सकता हूँ उनके माता पिता के दुःख को, और आपकी भावनाओं को भी शाजिया जी" मैंने शाजिया को दिलासा देते हुए कहा।
"रिंकी के और कौन कौन दोस्त थे,उसका कोई ख़ास दोस्त ? मैंने शाजिया से रिंकी के किसी बॉयफ्रेंड के बारे में जानने की कोशिश की।
"सर उसकी सबसे बेस्ट फ्रेंड तो मै ही थी और हमारे ग्रुप में सबकी चहेती थी वो सब उसे बहुत प्यार करते थे" शाजिया ने गीली आँखों से मुझे देखते हुए कहा।
"आपके ग्रुप में कौन कौन है" मैंने शाजिया से पुछा।
" राजेश , कौशल, डॉली, मेघा और मै और रिंकी थे।
"ठीक है! ये हादसा किस समय हुआ था? मैंने शाजिया से पुछा।
" जी 2 बजे तक तो रिंकी मेरे साथ ही थी ! फिर उसने मुझे टॉयलेट जाने के लिए बोला,उस समय यहाँ एक डांस परफॉरमेंस चल रही थी,जिसे मै छोड़ना नहीं चाहती थी,इसलिए मैंने उसे अकेले ही जाने को बोला! उसके बाद वो अकेले ही टॉयलेट चली गयी,थोड़ी देर बाद ही रिंकी के साथ वो हादसा हो गया और यहाँ कोहराम मच गया" शाजिया ने सक्षेप में बताया।
"2 बजे तक तो वो आपके साथ थी! उसके कत्ल की खबर आप लोगो को किस समय लगी?" मैंने शाजिया से पुछा।
" जी यही कोई 2:45 के आसपास" शाजिया ने कुछ सोचते हुए जवाब दिया।
" 45 मिनट तक आपकी फ्रेंड टॉयलेट से वापस नही आई! आपको अजीब नहीं लगा ? या आपको उसकी कोई चिंता नहीं हुई?"मैंने शाजिया से पुछा।
"सच बताऊ तो सर ! मै यहाँ प्रोग्राम में इतना एन्जॉय कर रही थी की मुझे न तो रिंकी का ध्यान रहा और न ही समय की तरफ मेरा ध्यान गया "
मम्मी मै कॉलेज जा रही हूँ,आज एनुअल फंक्शन की वजह से शाम को लेट आऊँगी" रिंकी ने रसोई में जाकर अपनी मम्मी के गले में अपनी बाहों का हार डाल कर बोला।
"बेटी जल्दी आने की कोशिश करना !तुम जानती हो न अपने पापा को ? शाम तक तो वो घर को सर पर उठा लगे" रिंकी की मम्मी ने बोला।
"ओह्ह ममा आप पापा की चिंता मत करो,पापा से मैंने परमिशन ले ली है"
"परमिशन ले ली है तो जाओ फिर ! लेकिन फिर भी जल्दी आने की कोशिश करना! और अपना ध्यान रखना" रिंकी की मम्मी ने उसे हिदायत दी।
"ठीक है मेरी प्यारी ममा,मै अपना ध्यान रखूंगी,आई लव यू ममा" ये बोलकर रिंकी ने अपनी मम्मी के गाल पर एक हल्का सा किस किया और दरवाजे की और बढ़ गई।
रिंकी थपलियाल ! अपने माता पिता की लाडली! पता नही कितनी ही मन्नतो के बाद शादी के दस सालो के बाद रिंकी की मम्मी की गोद भरी थी और ऊपर वाले ने रिंकी के रूप में एक प्यारी सी बेटी उनकी गोद में डाल दी थी। बहुत ही लाड प्यार से पाला था उन्होंने अपनी लाडली बेटी को! और आज रिंकी महरोली यूनिवर्सटी से मॉस कम्युनिकेशन का कोर्स कर रही थी । उसका सपना था कि वो देश की बहुत बड़ी पत्रकार बने। आज उसके कॉलेज में कॉलेज का एनुअल डे का फंक्शन था,जिसमे शामिल होने के लिए ही रिंकी आज कॉलेज गयी थी।
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मोबाइल की साइलेंट मोड़ की किर्र किर्र की आवाज से मेरी नींद में हल्का सा खलल पड़ा था। मै फिर से बिना मोबाइल की और देखे करवट बदल कर सो गया। थोड़ी देर में मोबाइल शांत हो गया। लेकिन ये कुछ ही पल की शांति थी। मोबाइल फिर से अपनी पुरानी औकात पर आ चुका था। इस बार मैंने झुंझला कर मोबाइल को उठाया और मोबाइल पर ऑफिस का नंबर बार बार चमक रहा था।मैंने मन मार कर फ़ोन को उठाया।
"जहाँपनाह फ़ोन को अपने महल के किस कोने में डाल देते हो,जो आपको उसकी आवाज सुनाई नही देती" उधर से मेरी रिसेप्शनिस्ट पायल की मधुर आवाज सुनाई दी।
"तुझे कोई और काम नही है क्या जो हमेसा तभी मेरी नींद खराब करती है जब मै सपने में किसी हसीना के साथ डेट पर होता हूँ" मैंने खिसिया कर पायल को डांटते हुए बोला।
"आप चाहे डेट पर जाओ ? चाहे महीने पर जाओ? मुझे इससे कोई फर्क नही पड़ता,लेकिन आपकी कर्मचारी होने के नाते मेरा फ़र्ज़ बनता है की शहर में होने वाली हर खून खराबे वाली घटना के बारे में आपको समय पर बताऊ ताकि आप अपनी सपनो की हसीनाओं को छोड़कर अपने काम धंधे पर ध्यान दे सके" पायल मेरा पानी उतारने का कोई भी मौका नही छोड़ती थी।
"अब कहाँ आग लग गयी मोहतरमा" मैंने अलसाये हुए स्वर में कहा।
" महरोली के एक कॉलेज में एक लड़की का कत्ल हो गया है,आप जल्दी नींद से बाहर निकलिये और पहुँचिये वहाँ! में पूरी डिटेल अभी आपको व्हाट्सअप कर रही हूँ" ये बोलकर पायल ने फ़ोन रख दिया।
मै आपका खादिम राज! प्राइवेट डिटेक्टिव के धंधे से तालुक रखता हूँ। शहर में होने वाले मर्डर खून जैसे अपराधों से ही आपके इस खादिम की दाल रोटी चलती है। मेरा एक छोटा सा ऑफिस नेताजी सुभाष पैलेस में स्थित था। जिसमे दो लोग काम करते है एक मेरी रिस्पेसनिस्ट और एक मेरा चपरासी!
मै बेड से कूदकर बाथरूम में घुस गया और फ्रेश होने लगा।
थोड़ी देर में मै तैयार होकर अपने घर से बाहर निकल कर अपनी गाडी में बैठा और गाडी को माल रोड की और दौड़ा दिया था। पायल ने जिस कॉलेज का पता व्हाट्सअप पर सेंड किया था वो उधर ही कही स्थित था।
लहभग 45 मिनट के बाद मै घटनास्थल पर मौजूद था। एक 18 साल की लड़की कॉलेज ऑडिटोरियम के पिछले हिस्से में मरी पड़ी थी। उसका गला रेत कर बेरहमी के साथ मारा गया था।कमला नगर थाने से थानाध्यक्ष रंगीला श्रीवास्तव अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच चुके थे। फोरेंसिक टीम और डॉग स्क्वाड भी मौके पर आ चुकी थी और अपने काम में मुस्तेदी से जुटी थी। मै इंस्प्वेक्टर रंगीला के पास पहुंचा।
"नमस्ते सर,मै प्राइवेट डिटेक्टिव राज हूँ" मैंने उनका अभिवादन करते हुए अपना परिचय दिया।
"नमस्कार राज जी, कहिए क्या कर सकता हूँ आपके लिए" इंस्पेक्टर रंगीला एक शालीन व्यक्ति थे।
"जी इस केस के बारे में थोड़ी जानकारी चाहिए थी, ताकि मै भी आपकी मदद कर सकू इस केस को सुलझाने में" मैंने भी उसी शालीनता से उनको बोला।
"जासूस साहब पुलिस की काबिलियत पर शक है क्या आपको ? इस केस को हम 24 घण्टे में सुलझा लेगें" इंस्पेक्टर रंगीला श्रीवास्तव ने मेरी ओर उपहास भरी नजरों से देखते हुए कहा।
" बड़ी ख़ुशी की बात होगी सर,अगर ये केस आप 24 घण्टे में सुलझा लेंगे तो,अगर आप इसी स्पीड से केस हल करोगे तो यकीन मानिए आप बहुत जल्दी एसीपी बन जाओगे" मैंने भी उन्हें उन्ही की टोन में जवाब दिया।
" चलिए जासूस साहब इस केस में हमारी और आपकी रेस हो जाए, देखते है कौन इस केस को पहले सॉल्व करता है" इंस्पेक्टर रंगीला ने मेरी ओर मुस्करा कर देखते हुए बोला।
"ठीक है सर, आपका चेलैंज मंजूर है,लेकिन एक शर्त मेरी भी होगी"
"क्या" इंस्पेक्टर रंगीला ने मेरी ओर देखा।
"आपको कत्ल से सम्बंधित फोरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट मेरे साथ शेयर करनी पड़ेगी,क्योकि इन दोनों चीजो पर आपका अधिकार होता है" मैंने इंस्पेक्टर रंगीला को कहा।
"ठीक है वो रिपोर्ट मै आपके साथ शेयर करुगा" इंस्पेक्टर रंगीला ने मुझे आश्वाशन दिया।
" ठीक है सर ! फिर मिलता हूँ मै आपसे,अभी तो आप भी इन्वेस्टीगेशन में बिजी है" मैंने इंस्पेक्टर रंगीला से हाथ मिलाया और उनके पास से हटकर उस लड़की की डेडबॉडी के पास जाकर उसका सरसरी तौर पर निरिक्षण करने लगा। थोड़ी देर बाद मै छात्रों की भीड़ में शामिल हो गया। कॉलेज के एनुअल फंक्शन के जश्न भरे माहौल में मातम पसर गया था।
मरने वाली लड़की का नाम रिंकी पाठक था। जो मास कम्युनिकेशन की छात्रा थी। मै भीड़ में किसी ऐसे चेहरे को तलाश रहा था जो इस लड़की को जानता हो,और इसके बारे में मुझे कुछ बता सके।तभी एक लड़की पर मेरी नजर पड़ी जो उस वक़्त वहाँ फूट फूट कर रो रही थी। मै उस लड़की की तरफ लपका।
"रिंकी आपकी फ्रेंड थी" मैंने उस लड़की से पुछा।
" जी हां मेरी सबसे बेस्ट फ्रेंड थी,पता नही किस जालिम ने इतनी मासूम लड़की की जान ले ली" उस लड़की का रोना अभी भी जारी था।
"आपका नाम क्या है"
"जी शाजिया नाम है मेरा और मै भी रिंकी के बैच में ही हूँ।
"शाजिया जी ओर क्या बता सकती है रिंकी के बारे में,देखिये जितनी ज्यादा आप मेरी मदद करेगी उतनी जल्दी आपकी सहेली के कातिल को हम लोग फ़ासी के फंदे तक पहुंचा पाएंगे"
"रिंकी अपने माँ बाप की इकलौती लड़की थी,अंकल आंटी पर क्या बीत रही होगी जब ये खबर उन्हें पता चली होगी तो" ये बोलकर शाजिया का रोना और तेज हो गया।
"ओह्ह मै समझ सकता हूँ उनके माता पिता के दुःख को, और आपकी भावनाओं को भी शाजिया जी" मैंने शाजिया को दिलासा देते हुए कहा।
"रिंकी के और कौन कौन दोस्त थे,उसका कोई ख़ास दोस्त ? मैंने शाजिया से रिंकी के किसी बॉयफ्रेंड के बारे में जानने की कोशिश की।
"सर उसकी सबसे बेस्ट फ्रेंड तो मै ही थी और हमारे ग्रुप में सबकी चहेती थी वो सब उसे बहुत प्यार करते थे" शाजिया ने गीली आँखों से मुझे देखते हुए कहा।
"आपके ग्रुप में कौन कौन है" मैंने शाजिया से पुछा।
" राजेश , कौशल, डॉली, मेघा और मै और रिंकी थे।
"ठीक है! ये हादसा किस समय हुआ था? मैंने शाजिया से पुछा।
" जी 2 बजे तक तो रिंकी मेरे साथ ही थी ! फिर उसने मुझे टॉयलेट जाने के लिए बोला,उस समय यहाँ एक डांस परफॉरमेंस चल रही थी,जिसे मै छोड़ना नहीं चाहती थी,इसलिए मैंने उसे अकेले ही जाने को बोला! उसके बाद वो अकेले ही टॉयलेट चली गयी,थोड़ी देर बाद ही रिंकी के साथ वो हादसा हो गया और यहाँ कोहराम मच गया" शाजिया ने सक्षेप में बताया।
"2 बजे तक तो वो आपके साथ थी! उसके कत्ल की खबर आप लोगो को किस समय लगी?" मैंने शाजिया से पुछा।
" जी यही कोई 2:45 के आसपास" शाजिया ने कुछ सोचते हुए जवाब दिया।
" 45 मिनट तक आपकी फ्रेंड टॉयलेट से वापस नही आई! आपको अजीब नहीं लगा ? या आपको उसकी कोई चिंता नहीं हुई?"मैंने शाजिया से पुछा।
"सच बताऊ तो सर ! मै यहाँ प्रोग्राम में इतना एन्जॉय कर रही थी की मुझे न तो रिंकी का ध्यान रहा और न ही समय की तरफ मेरा ध्यान गया "