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दूसरी तंरफ से आवाज आ रही थी… "हेलो० हैलो क्या हुया .....ये गोली की आवाज केसी थी. ......हैलो?”
"बहुत देर से यह सेनिक अपनी जान बनाने की कोशिश कर रहा था ।"' वह किसी शेर की भांति वायरलेस पर चीखा- "तुमने इसकी सारी मेहनत पर पानी फिरवा दिया । तुमसे बात करते वक्त्त तुम्हें खतरे की सूचना देने के लालच को नहीं दबा सका और मिस्टर डेंजर कहकर इसने तुम्हें खतरे की सूचना दे दी । अपनी इस गलती की वजह से मारा गया । अब जब हुम इतना सब जान ही गए हो तो कान खोलकर सुनो ---- इस वक्त जीप तुम्हारे दुश्मन के कब्जे में है । इस जीप में तुम्हारे सारे आदमी मारे जा चुके हैं ।"
"कौन हो तुम."'
" ओह !! अभी भी नाम बताना पडेगा ।"
' हैरी ' ऐसे लहजे कहा जैसे बोलने बाला ' कन्फर्म ' करना चाहता हो !
"यस" उसने पुरी मस्ती में कहा --- " पुरा नाम हैरी आर्मस्टर्ांग !"
" मैं पाकिस्तानी सीकर्ेट सर्विस का चीफ बोल रहा हूं !!!
"ओह !" वह कुछ और मस्ती में आ गया ---- " मेरी फरारी का समाचार तुम तक पहुंच चुका है !
'हैरी' तुम पाकिस्तान से निकल नहीं पाओगे ! खुद को जिंदा रखना चाहते हो तो .......!
"मैं इस वक्त पाकिस्तान में नहीं ---- 'आजाद कश्मीर ' में हूं मिस्टर चीफ ! उस आजाद कश्मीर में जिसे तुम नाम के लिये आजाद कहते हो । कश्मीरियों को बेवकूफ़ बनाने के लिए आजाद कहते हो है असल में तुमने धरती के इस स्वर्ग को गुलाम बना रखा है । अपनी आंखो से देख रहा हूं मैं । चप्पे--चप्पे पर तुम्हारे सेनिक फेले हुए हैं, मगर ये सैनिक अब मुझे तुम्हारे पाकिस्तान की सी मा में रोक नहीं पाएंगे । बहुत जल्दी से बॉंर्डर क्रॉस करके हिन्दुस्तान पहुच जाऊंगा।
उस देश में जिस देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ़ तुमने भयानक साजिश रची है ।" '
"हमारी कुछ समझ में नहीं आ रहा । तुम कहना क्या चाहते हो ?”
"बही कहना चाहता हू मिस्टर चीफ जो छावनी नम्बर बासठ की कैद में रहकर जाना है और यह भी " जानता हू कि अब. तुम मुझे झूठा साबित करने की कोशिश करोगे । दुनिया को यह बताने की कोशिश करोगे कि 'हैरी' विकास का दोस्त है, इसलिए पाकिस्तान पर झूठा आरोप लगा रहा मगर शायद तुम भूल रहे हो-हैरी या विकास को किसी का समर्थन जुटाने की जरूरत नहीं पड़ती । हमे अपनी लडाई अकेले लड़नी जाती है । भले ही सारी दुनिया 'हेरी' को झूठा समझती और कहती रहे मगर ये वादा है मेरा तुमसे-तुम्हारी साजिश के परखच्चे उड़ाकर ही दम लूंगा ।" अंतिम शब्द कहते-कहते 'हेरी' का चेहरा भभकने लगा था । थोडा संभलकर बोला ------" जानता हु, तुम ये वार्ता इसलिए लंबी करना चाहते हो ताकि मुझे बातों में उलझाकर मेरी दिशा और दूरी जान सको । मगर नहीं चीफ महोदय, अपनी इस कोशिश में मैं भी कामयाब नहीं हो सकोगे तुम ।" कहने के साथ एक झटके से.उसने वायरलैस आँफ कर दिया ।
सूर्य देव ने अभी दर्शन नहीं दिये थे मगर पूर्वी गगन की मांग में मानो सिंदूर भरना शुरू हो गया था !
रात को दो वजे सोने के बावजूद वह सुवह पौने पांच बजे उठ जाता ! कारण केवल यह नाजारा ही था ! उठने में अगर कुछ लेट हो जाता तो दो ऊंचे - ऊंचे पहाड़ों के बीच से सूर्य झांकने लगता !!!
..... यह नजारा उसे बिल्कुल पंसद नहीं था !
अमरीक सिंह !
मेजर अमरीक सिंह ।
पिछले एक महीने से वह चोकी नंबर सेवन का इंचार्ज था ।
पंद्रह जवानों की टुकडी के साथ वहीं तैनात था वह ।
पहाड़ की चोटी पर !
वहां, जहां पहुंचने का कोई जमीनी रास्ता नहीं था । कम से कम हिन्दुस्तान की तरफ से वहां केवल हवाई मार्ग से ही पहुंचा जा सकता था । उसकी दुक्ड़ी के लिए ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर भी हवाई मार्ग से ही आता था । इसके लिए हैलीकॉप्टर को हर रोज वहाँ के तीन चक्कर लगाने पडते थे ।
ठीक सामने ।
इसी पहाड़ जितना उच्चा एक दूसरा पहाड़ था । उसकी चोटी पर स्थित थी….......पाकिस्तानी चोंकी ।"
दोनों के बीच एक किलोमीटर से ज्यादा का फासला नहीं था। " कंटीली तार आदि की कोई बाढ भी नहीं थी वहाँ । दरअसल वैसी कोई बाढ लग भी नहीं सकती थी । दोनों चोटियों के बीच एक दर्रा था । अर्थात यदि इधर से आधा किलोमीटर नीचे उतरा जाए और उधर से आधा किलोमीटर नीचे उतरा जाए तो पाकिस्तानी और हिन्दुस्तानी सेनिक गले मिल सकते थे ।
मगर ।
राजनीतिज्ञ गले कहाँ मिलने देते थे उन्हें । जहाँ वे गले मिल सकते थे अर्थात वह दर्रा तो मानो बॉर्डर बन चुका था । हिंदुस्तानी उसे पार करके सामने वाले पहाड़ की चढाई शुरु नहीं कर सकते थे !
उसी तरह पाकिसतानी इस पहाड़ की चढ़ाई शुरू नहीं कर सकते थे !
दोंनो के हुक्मरानों का हुक्म था ---- ऐसा करने वाले को फौरन गोली मार दी जाए !!!!!
गोलियां तो दोंनों चोकियों के बीच वैसे भी चलती रहा करती थी !
दोंनो तरफ के सैनिकों का मकसद एक ही था -- दुश्मन को यह बताना -- दर्रा पार करने की कोशिश मत करना , हम सजग हैं !
दोंनों ने कई बार एक दुसरे से चौंकी कब्जाने की कोशिश भी की थी !!
अनेक सैनिक मारे भी गये थे ! परंन्तु स्थाई रूप से कभी कोई दुसरे की चौकीं पर काबिज नहीं हो सका !!!!!!!!!!!