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सब लो क्लब हाउस में जमा हो चुके थे.....सामने वाली तीन कुर्सी पर सोसाइटी के सेक्रेटरी आतमाराम तुकाराम भिड़े....उसके साथ पत्रकार पोपटलाल और कृष्णन अईयर...
उनके सामने सोसाइटी के सभी लोग बैठे थे...और आपस में ऐसे बातें कर रहे थे...जिसकी वजह से शोर हो रहा था.....
भिड़े काफ़ी कोशिश कर रहा था कि सब चुप हो जाए...लेकिन उसकी बात तो कोई सुन ही नही रहा था....
फिर सोसाइटी के बुजुर्ग खड़े हुए...
चंपकलाल :- अरे ऊओ.....चुप हो जाओ सब....ये जेठिया चुप हो जा....
जेठालाल :- शांति शांति...बापूजी कुछ बोल रहे हैं....हाँ बोलिए बापूजी...
बापूजी :- बोलिए वादी...चुप नही हो सकते...इतनी देर से भिड़े चिल्ला रहा है और तुम लोग अपनी धुन में लगे हुए हो...
तारक :- सॉरी चाचाजी....
और बोलता है....सब शांत हो जाओ...
और फिर सब शांति से बैठ जाते हैं...
और फिर जेठालाल बोलता है...
जेठालाल :- हाँ भाई भिड़े तो शुरू करें मीटिंग...
भिड़े :- जेठालाल अभी 2 जने आने बाकी हैं..
जेठालाल :- कौन??
भिड़े :- नाट्टू काका और बाघा..
जेठालाल :- क्या बोल रहा है भिड़े....तू उन शक़ कर रहा है...
भिड़े :- ऐसी बात नही है जेठालाल...
जेठालाल :- तो फिर कैसी बात है...
तभी तारक बीच में बोल पड़ता है...
तारक :- देखो जेठालाल..इसमे कुछ ग़लत नही है...तुम देखो सभी को बुलाया हुआ है जो उस दिन हंडी के वक़्त थे....तो इसका मतलब ये नही है कि हम उनपर शक़ कर रहे हैं...बात को समझो...
और फिर जेठालाल समझ जाता है...
उधर टप्पू सेना एंट्री कर चुकी होती है....फिर भिड़े उनसे पूछता है...
भिड़े :- टप्पू तैयारी पूरी हो गई...
टप्पू :- जी हाँ भिड़े अंकल...
उधर नाट्टू काका और बाघा आ जाते हैं...
नटू काका :- हेलो सेठ जी....कैसे हैं आप..
जेठालाल :- हाँ भाई बढ़िया तुम दोनो ने आने में देर क्यूँ कर दी....
नटू काका :- आपको पता है ना बारिश का मौसम है...रिक्शा बड़ी मुश्किल से मिलती है...और हाँ आप ये बताइए आपने हम लोगों को यहाँ क्यूँ बुलाया है....
जेठालाल :- अरे भाई अब आए हो ना..तो पता चल जाएगा...परेशान मत करो भाई शांति से बैठ जाओ....
फिर भिड़े मेहता साहब को अपने पास बुलाता है...और उन्हे सारी बात बताने के लिए बोलता है...
तारक :- देखिए दोस्तों में आपको आब जो बताने जा रहा हूँ...उससे शायद आप सब अचंभित हो जाए..तो प्लीज़ मेरा सहयोग करिएगा...और हाँ कृपया कर के ये बात किसी और को नही पता चलनी चाहिए.........
और सारी घटना बता देता है....एक एक बात जो उस दिन हुई थी....सबके मुँह खुले के खुले रह जाते हैं...सब ख़ुसर पुसर करने लगते हैं...
फिर तारक उन्हे शांत रहने के लिए बोलता है और टप्पू को अपने पास बुलाता है....
टप्पू तारक के पास आकर बोलना शुरू कर देता है...
टप्पू :- देखिए में आप सबको अब ये बताउन्गा कि हम उस आदमी को कैसे पकड़ेंगे....हमे एक एविडेन्स मिला है..जिससे हम उस आदमी को ज़रूर पकड़ लेंगे...
एविडेन्स वर्ड सुन के जेठालाल दया से पूछता है...
जेठालाल :- दया तुझे समझ आया कि ये एविडेन्स क्या है...
दया :- नाआआआअ....
और फिर जेठालाल तारक से पूछता है...
तारक :- एविडेन्स का मतलब सुराग..
जेठालाल दया को बोलते हुए...समझी दया...और दया हाँ में सर हिला देती है...
टप्पू :- जो सुराग हमे मिला है....उससे उस आदमी को आराम से पहचान लिया जाएगा.....शायद वो आदमी जल्द बाजी में वहाँ गार्डन में छोड़ के चला गया है......मगर एक प्राब्लम है...
सभी बोलते हैं क्य्ाआआअ....
टप्पू :- वो सुराग की चीज़ मेने गोली को दी थी...मगर उसने वो कहीं गार्डन में ही गिरा दी.....और हम सुबह से ढूँढ रहे हैं लेकिन वो मिली ही नही...
भिड़े :- ये गोया किसी काम का नही है...टप्पू क्यूँ दी तूने इसे...इसे खाने के अलावा कुछ और आता ही नही है.....
सोढी :- गोली तुझे ध्यान से रखना चाहिए था ना...
गोली :- सॉरी सोढी अंकल....वो पता नही मेने वहाँ गार्डन के बेंच पर रखा था...और फिर मुझे भूक लगी तो में अब्दुल की दुकान चला गया कुछ लेने के लिए....और जब वापिस आया तो वो वहाँ थी ही नही....शायद कहीं गिर गयी...
भिड़े :- देखो इसे...सारा दिन बस ठूंसवा लो...
तारक :- अब छोड़ो भिड़े..बच्चा है ग़लती हो गई...तो टप्पू अब तुमने क्या सोचा है...
टप्पू :- मेहता अंकल अब रात में तो मिलेगा नही....इसलिए अब कल सुबह ही ढूंढ़ेंगे....
सभी टप्पू की बात पर सहमत हो जाते हैं...और सब अपने अपने घर की तरफ़ निकल जाते हैं...............
उनके सामने सोसाइटी के सभी लोग बैठे थे...और आपस में ऐसे बातें कर रहे थे...जिसकी वजह से शोर हो रहा था.....
भिड़े काफ़ी कोशिश कर रहा था कि सब चुप हो जाए...लेकिन उसकी बात तो कोई सुन ही नही रहा था....
फिर सोसाइटी के बुजुर्ग खड़े हुए...
चंपकलाल :- अरे ऊओ.....चुप हो जाओ सब....ये जेठिया चुप हो जा....
जेठालाल :- शांति शांति...बापूजी कुछ बोल रहे हैं....हाँ बोलिए बापूजी...
बापूजी :- बोलिए वादी...चुप नही हो सकते...इतनी देर से भिड़े चिल्ला रहा है और तुम लोग अपनी धुन में लगे हुए हो...
तारक :- सॉरी चाचाजी....
और बोलता है....सब शांत हो जाओ...
और फिर सब शांति से बैठ जाते हैं...
और फिर जेठालाल बोलता है...
जेठालाल :- हाँ भाई भिड़े तो शुरू करें मीटिंग...
भिड़े :- जेठालाल अभी 2 जने आने बाकी हैं..
जेठालाल :- कौन??
भिड़े :- नाट्टू काका और बाघा..
जेठालाल :- क्या बोल रहा है भिड़े....तू उन शक़ कर रहा है...
भिड़े :- ऐसी बात नही है जेठालाल...
जेठालाल :- तो फिर कैसी बात है...
तभी तारक बीच में बोल पड़ता है...
तारक :- देखो जेठालाल..इसमे कुछ ग़लत नही है...तुम देखो सभी को बुलाया हुआ है जो उस दिन हंडी के वक़्त थे....तो इसका मतलब ये नही है कि हम उनपर शक़ कर रहे हैं...बात को समझो...
और फिर जेठालाल समझ जाता है...
उधर टप्पू सेना एंट्री कर चुकी होती है....फिर भिड़े उनसे पूछता है...
भिड़े :- टप्पू तैयारी पूरी हो गई...
टप्पू :- जी हाँ भिड़े अंकल...
उधर नाट्टू काका और बाघा आ जाते हैं...
नटू काका :- हेलो सेठ जी....कैसे हैं आप..
जेठालाल :- हाँ भाई बढ़िया तुम दोनो ने आने में देर क्यूँ कर दी....
नटू काका :- आपको पता है ना बारिश का मौसम है...रिक्शा बड़ी मुश्किल से मिलती है...और हाँ आप ये बताइए आपने हम लोगों को यहाँ क्यूँ बुलाया है....
जेठालाल :- अरे भाई अब आए हो ना..तो पता चल जाएगा...परेशान मत करो भाई शांति से बैठ जाओ....
फिर भिड़े मेहता साहब को अपने पास बुलाता है...और उन्हे सारी बात बताने के लिए बोलता है...
तारक :- देखिए दोस्तों में आपको आब जो बताने जा रहा हूँ...उससे शायद आप सब अचंभित हो जाए..तो प्लीज़ मेरा सहयोग करिएगा...और हाँ कृपया कर के ये बात किसी और को नही पता चलनी चाहिए.........
और सारी घटना बता देता है....एक एक बात जो उस दिन हुई थी....सबके मुँह खुले के खुले रह जाते हैं...सब ख़ुसर पुसर करने लगते हैं...
फिर तारक उन्हे शांत रहने के लिए बोलता है और टप्पू को अपने पास बुलाता है....
टप्पू तारक के पास आकर बोलना शुरू कर देता है...
टप्पू :- देखिए में आप सबको अब ये बताउन्गा कि हम उस आदमी को कैसे पकड़ेंगे....हमे एक एविडेन्स मिला है..जिससे हम उस आदमी को ज़रूर पकड़ लेंगे...
एविडेन्स वर्ड सुन के जेठालाल दया से पूछता है...
जेठालाल :- दया तुझे समझ आया कि ये एविडेन्स क्या है...
दया :- नाआआआअ....
और फिर जेठालाल तारक से पूछता है...
तारक :- एविडेन्स का मतलब सुराग..
जेठालाल दया को बोलते हुए...समझी दया...और दया हाँ में सर हिला देती है...
टप्पू :- जो सुराग हमे मिला है....उससे उस आदमी को आराम से पहचान लिया जाएगा.....शायद वो आदमी जल्द बाजी में वहाँ गार्डन में छोड़ के चला गया है......मगर एक प्राब्लम है...
सभी बोलते हैं क्य्ाआआअ....
टप्पू :- वो सुराग की चीज़ मेने गोली को दी थी...मगर उसने वो कहीं गार्डन में ही गिरा दी.....और हम सुबह से ढूँढ रहे हैं लेकिन वो मिली ही नही...
भिड़े :- ये गोया किसी काम का नही है...टप्पू क्यूँ दी तूने इसे...इसे खाने के अलावा कुछ और आता ही नही है.....
सोढी :- गोली तुझे ध्यान से रखना चाहिए था ना...
गोली :- सॉरी सोढी अंकल....वो पता नही मेने वहाँ गार्डन के बेंच पर रखा था...और फिर मुझे भूक लगी तो में अब्दुल की दुकान चला गया कुछ लेने के लिए....और जब वापिस आया तो वो वहाँ थी ही नही....शायद कहीं गिर गयी...
भिड़े :- देखो इसे...सारा दिन बस ठूंसवा लो...
तारक :- अब छोड़ो भिड़े..बच्चा है ग़लती हो गई...तो टप्पू अब तुमने क्या सोचा है...
टप्पू :- मेहता अंकल अब रात में तो मिलेगा नही....इसलिए अब कल सुबह ही ढूंढ़ेंगे....
सभी टप्पू की बात पर सहमत हो जाते हैं...और सब अपने अपने घर की तरफ़ निकल जाते हैं...............