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Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा

उधर अब तारक और अंजलि...दुनिया को भूल के एक बार फिर...दोनो आपस में अपने होंठ लगा देते हैं...और बेपनाह चूमने लगते हैं....कभी तारक अंजलि के होंठो को चूस्ता है..और कभी अंजलि तारक के होंठों को...फिर दोनो एक दूसरे अपनी अपनी जीभ से लड़ाई करनी शुरू कर देते हैं....दोनो की जीभ एक दुरसे के मुँह में जाने लगती हैं.....तारक का हाथ अंजलि की कमर पे होता है वो उसे कस के पकड़ा हुआ होता है...इधर अंजलि तारक की कमर में हाथ डाल के जकड़ी हुई होती है...

उधर जेठालाल तारक के गेट पे आ जाता है...

जेठा लाल :- अरे क्या बात है आज मेहता साहब का गेट खुला है..चलो फिर अंदर..और जैसे ही अंदर घुसता है..उसे फिर से एक गरम नज़ारा देखने को मिलता है....

क्यूँ कि अभी भी अंदर तारक और अंजलि लगे पड़े थे..अपने चुंबन अभियान में..दोनो को ऐसा देख फिर से जेठालाल का लंड खड़ा हो जाता है....तभी जेठालाल

जेठालाल :- ह्म...उःम्म्म...कृपया गेट बंद कर दें....

आवाज़ सुन के तारक चुंबन तोड़ के देखता है..कि जेठालाल खड़ा है...तो उसकी तरफ देख के एक स्माइल पास करता हाई.....अंजलि तो शर्म के मारे बुरी तरह झेंप जाती है....

तारक :- आओ भाई जेठालाल..आज सुबह सुबह...

जेठालाल :- तो आज आप भी तो सुबह सुबह...

बॅस इतना ही बोलता है..और दोनो हंस देते हैं....अंजलि अभी भी वहीं बैठे बैठे शर्मा रही थी..

तभी तारक बोलता है...

तारक :- अरे अंजलि इसमे शरमाने की क्या ज़रूरत है...जेठालाल तो घर का ही है...चलो..

अंजलि :- आप भी ना..

जेठालाल :- अरे कोई बात नही अंजलि भाभी..मेने कुछ नही देखा...

और फिर इस बार सब हंस पड़ते हैं...

अंजलि :- जेठा भाई..आप बैठिए में आपके लिए चाइ लेके आती हूँ...

फिर जेठालाल तारक के पास आकर बैठ जाता है...

जेठालाल :- क्या बात है मेहता साहब आज सुबह सुबह...कार्यकरम शुरू कर दिया...कम से कम गेट तो बंद कर लिया करो..मेरी जगह और कोई होता तो....

तारक :- अरे भाई ऐसी कोई बात नही है...वो तो बॅस ऐसी ही..अच्छा तुम बताओ यहाँ कैसे आना हुआ..

जेठालाल :- अरे हाँ...ये ली जिए कोरियर आया है..

तारक :- क्या बात है ...तुमने कोरियर का धंधा भी शुरू कर दिया क्या...अहहहहहः...

जेठालाल :- क्या आप भी मज़ाक कर रहे हैं....वो कोरियर इंग्लीश में है...इसलिए..

तारक :- अच्छा भाई ..पढ़ता हूँ...

और तारक पढ़ने लगता है....पूरा पढ़ने के बाद बोलता है...

तारक :- अरे कमाल हो गया जेठालाल तुमने....****** कंपनी की डीलरशिप ली थी....

जेठालाल :- हाँ ली थी ..तो..

तारक :- तो उन्होने एक शानदार पार्टी का आयोजन किया है..जिसमे तुम अपने साथ 5 या 6 मेंबर को साथ ले जा सकते हो...

जेठालाल :- अरे वाहह मेहता साहब..मज़ा आ जाएगा...चलो ठीक है.फिर में सब को फोन कर दूँगा..साथ में चलेंगे...

तारक :- धीरे बोलो जेठालाल..अगर अंजलि ने सुन लिया..तो यहीं पार्टी बना देगी मेरी...ठीक है..फिर..एक काम करते हैं..आज अब्दुल की दुकान पे ये डिसाइड कर लेते हैं..

और फिर जेठालाल तारक से हाथ मिलाता है..और बाहर निकल जाता है...और सोचता है..

आज क्या हो रहा है मेरे साथ...हर जगह मुझे कुछ ऐसा मिल जाता है कि में गरम हो जाता हूँ...और फिर ..में कुछ भी नही कर पाता...आज का दिन सच में पनौती है...बॅस कम से कम एक चीज़ तो अच्छी खबर मिली...और फिर सोसाइटी के बाहर जाने की तरफ चल देता है...!!!!

जेठालाल कॉंपाउंड से सोसाइटी गेट के पास पहुचते हैं..तभी उनके कानो में एक आवाज़ पड़ती है...

हाई जेठा जी...

जेठालाल चौंकाते हुए पलटता है..और देखता है....सामने बबीता जी खड़ी होती हैं....

जेठालाल :- बबीता जी आप...यहाँ ...कब आई...

बबीता :- अरे में तो यहाँ कब से खड़ी हूँ...आपने ही मुझे नही देखा....

जेठालाल :- ऑश सॉरी बबीता जी..वो क्या है मैने ध्यान ही नही दिया...वरना ऐसा हो सकता है आप यहाँ हो..और हम आपको बिना मिले चले जाएँ...

बबीता :- जेठा जी इसमे सॉरी की क्या बात है....

जेठालाल :- और तो सवारी कहाँ जा रही है सुबह सुबह....

बबीता :- जेठा जी वो में बस... ****** वहाँ तक जा रही हूँ कुछ समान खरीदना है....

जेठालाल :- अरे वाहह...वो तो मेरी दुकान के रास्ते में ही हैं....साथ चलते हैं में आपको वहाँ उतार दूँगा...

बबीता :- ओह्ह थॅंक यू जेठा जी...

जेठालाल :- उसमे क्या थॅंक यू बबीता जी...आपके लिए तो ये कुछ नही है....

तभी उधर से...अईयर आ रहा होता है...

अईयर :- चलो बबीता...चलते हैं..वरना लेट हो जाएँगे...

जेठालाल अपने मन में...ये अईयर भाई भी ..बीच में हमेशा टंगड़ी कर देते हैं....क्या इन्हे हर समय बबीता जी के साथ चिपकने की लगी रहती है...

बबीता :- अईयर जेठा जी हमे लिफ्ट दे देंगे..

जेठालाल :- हाँ अईयर भाई चलो...

अईयर :- नहिी..जेठालाल..हम दोनो चले जाएँगे..

बबीता :- अईयर ऐसा क्या करते हो..जेठा जी इतने प्यार से लिफ्ट दे रहे हैं...और वैसे भी जाना तो हमे एक ही तरफ है...

अईयर सोचते हुए..ये जेठालाल...

फिर बोलता है..

अईयर :- ठीक है बबीता जैसा तुम को ठीक लगे..

जेठालाल मन में अईयर भाई बड़ी होशियारी मार रहे हो ...अभी ऑटो में चलो बताता हूँ..

तीनो ऑटो के पास पहुँच जाते हैं...और ऑटो में बैठने लगते हैं..

जेठालाल :- बबीता जी आप पहले बैठिए...

अईयर :- अब में बैठूँगा...

जेठालाल :- हाँ बिल्कुल अईयर भाई आप ही बैठिए...

जब अईयर बैठ जाता है...तो जेठालाल ऑटो के दूसरी तरफ पहुच जाता है..

जेठालाल :- बबीता जी ..आप थोड़ा उधर खिसकेंगी...तो में यहाँ बैठ जाउ...

बबीता :- यॅ श्योर...अईयर थोडा उधर होना...

अईयर तो जल फुक जाता है......लेकिन उसे उधर होना पड़ता है..

जेठालाल मन में अईयर की तरफ देखते हुए...अईयर भाई बड़ी होशियारी दिखा रहे थे ना...

अईयर जेठालाल की तरफ देखते हुए...ये जेठालाल बहुत चालाक है..इसका कुछ करना पड़ेगा...

दोस्तो आगे देखते हैं...कि जेठालाल ऑटो में क्या गुल खिलाते हैं....!!!

जानने के लिए पढ़ते रहें और कमेंट ज़रूर करते रहें

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ऑटो अपनी रफ़्तार पकड़ चुका था...और इधर जेठालाल का भी बुरा हाल होना शुरू हो गया था...

एक ऑटो तीन जने.....आपस में टच होना तो जायज़ है...

जेठालाल की कोहनी हल्की हल्की बबीता के चुचों पर पड़ रही थी.....और जेठालाल को बस इतना ही चाहिए था अपना लंड खड़ा करने के लिए....उधर बबीता को भी पता चल रहा था कि जेठा जी की कोहनी मेरे बूब्स पर लग रही हैं..उसका भी बुरा हाल होना शुरू हो गया था...

जेठालाल कॉसिश कर रहा था कि किसी भी तरह यहाँ से ध्यान हटाए...लेकिन जब बगल में इतनी हॉट...बड़े बड़े चुचों बड़ी औरत बैठी हो तो कैसे कोई ध्यान हटा सकता है..

फिर जेठालाल को लगा अगर बबीता जी को बुरा लग गया तो क्या होगा...उसने बात करनी शुरू करी..

जेठालाल :- तो बबीता जी..दुकान पे भी आई कभी...अच्छे अच्छे नये पीस आए हैं मोबाइल के...

अईयर :- हमे मोबाइल नही चाहिए ...

जेठालाल :- और हाँ एक नया पीस आया है एलसीडी का...बहुत बढ़िया है..

अईयर :- हमे वो भी नही चाहिए...

जेठालाल :- आप बबीता जी हो...क्या अईयर भाई आप हर बार...बीच में क्यूँ फुदकी मार देते हो...

बबीता :- अईयर..तुम भी ना...

और अईयर सड़ा सा मुँह बना के दूसरी तरफ देखने लगता है...

जेठालाल सोचता है चलो..कम से कम अईयर भाई को पता तो नही चलेगा...लेकिन फिर भी अगर बबीता जी कुछ थोड़ा सा भी हिंट दें..तो में बेफिकर होकर आराम से छू सकूँगा..लेकिन वो कैसे होगा...

तभी ऑटो एक दम तेज़ी से मुड़ता है....और बबीता जेठालाल के उपर की तरफ गिरती है....

जैसे ही बबीता जेठालाल के उपर गिरती है...जेठालाल के हाथ मे बबीता के बड़े पहाड़ जैसे चुचे उसके हाथ में आ जाते हैं..और दब जाते हैं...

जिसकी वजह से हल्की सी आहह बबीता के मुँह से निकल जाती है...

अईयर :- क्या हुआ बबीता??

जेठालाल सोचता है ...कहीं बबीता जी अईयर को बता ना दे...

बबीता :- जेठालाल की तरफ देखते हुए और स्माइल करते हुए...कुछ नही अईयर..वो ऑटो मुड़ा ना..तो इसलिए...

और अईयर फिर से दूसरी तरफ़ देखने लगता है...

इधर जेठालाल को बबीता की तरफ से ग्रीन सिग्नल मिल जाता है...और अंदर ही अंदर मुस्कुरा रहा होता है...

अब जेठालाल अपनी कोहनी को फिर से बबीता के राइट वाले चुचे पे रख देता है...बबीता को फ़ौरन पता चल जाता है...लेकिन इस बार वो सिर्फ़ रखता नही है....हल्के हल्के कोहनी से दबाने लगता है....

बबीता को जैसे शॉक लगता है...वो जेठालाल की तरफ देखती भी है..लेकिन जेठालाल तो ऐसा बैठा था जैसे कुछ हुआ ही नही....और फिर बबीता एक स्माइल दे देती है...

बबीता भी कम थोड़ी थी...अब वो बार बार कभी आगे कभी पीछे होने लगती है...जिससे उसके चुचे और तेज़ी से जेठालाल की कोहनी से टकराते हैं...वो अंदर ही अंदर सिसकियाँ ले रही थी...आह श...आवाज़ तो कर नही सकती थी....

 
जेठालाल का लंड पैंट फाड़ने जैसा हो गया था...उसका बस चलता तो वो ऑटो में ही आज बबीता जी की मार लेता...

अब जेठालाल ने अपना वही हाथ बबीता जी की जाँघ से टच करने लगा....

बबीता की तो जान ही निकल गई....उसके पति के सामने...जेठालाल एक तरफ़ कोहनी से चुचों को दबा रहा था...और दूसरी तरफ जाँघ को भी सहला रहा था....बबीता का मन तो था कि वो अपना हाथ जेठालाल की जाँघ पर रख दे..लेकिन उसको अईयर का डर था...इसलिए वो आज सिर्फ़ मज़े लेना चाहती थी....उसकी चूत एक दम गीली हो चुकी थी..और पैंटी से चिपक चुकी थी...

जेठालाल मन में सोचने लगा....ये बबीता जी मेरे साथ भी तो करें...मेरा यहाँ बुरा हाल हो रहा है...और अपना रोने जैसे चेहरा बबीता जी के सामने करता है....

बबीता समझ जाती है...लेकिन वो सोचती है कि वो कैसे करे....फिर भी वो हिम्मत करके अपना एक हाथ जेठालाल की तरफ बढ़ाती है....तभी...

अईयर :- अरे भैया रोक दो हमे यहीं उतरना है......

दोनो अईयर की बात सुन के चौंक जाते हैं...और जेठालाल अपना हाथ हटा लेता है...

और दोनो एक साथ ही बोल देते हैं...इतनी जल्दी पहुँच गये....

अईयर बबीता के मुँह से सुन के थोड़ा शॉक हो जाता है....लेकिन कुछ रिक्ट नही करता...

जेठालाल को गुस्सा आता है..लेकिन वो जाहिर नही करता...

फिर अईयर और बबीता दोनो ऑटो से उतार जाते हैं....और बबीता जेठालाल को बाइ कर देती है....और फिर ऑटो चलने लगता है...

जेठालाल अपने मन में....आज का दिन पनौती पनौती और सिर्फ़ पनौती से भरा है...इतना अच्छा मौका मिला था ..बबीता जी भी पता नही कैसी गरम थी और मेरा साथ दे रही थी..लेकिन मेरी किस्मत साथ नही देती....और अपने लंड की तरफ देखते हुए..मन में बोलता है...तो सो जा...गिर जा वापिस...आज तेरा कुछ नही होगा...बार बार खड़ा हो जाता है...और परेशानी मुझे होती है....पता नही कौन से जन्म का बदला ले रहा है भगवान मुझसे.....

ऐसे रोते रोते वो भी अपनी दुकान पे पहुँच जाता है.....

सुबह से जेठालाल की किस्मत खराब है...देखते हैं..पूरा दिन कैसा निकलेगा....!!!!!!!!

 
जेठालाल ऑटो से उतर के अपनी दुकान के अंदर चला जाता है....

नटू काका :- गुड मॉर्निंग सेठ जी...

जेठालाल अपना मुँह बना के अपनी जगह पर बैठ जाता है.....उसका मूड सुबह से और ज़्यादा खराब हो चुका था....

नटू काका :- क्या हुआ सेठ जी...एनी प्राब्लम..

जेठालाल :- कुछ नही नटू काका....

नटू काका :- बताइए ना सेठ जी..ये नटवर लाल प्रभुशन्कर उडीए वाला के पास हर प्राब्लम का इलाज है...

जेठालाल :- अरे भाई कुछ नही है...आप अपना काम करो ना...क्यूँ इतनी पंचायत है आपको...

नटू काका :- ओहककक रिलॅक्स....

तभी वहाँ से बाघा दुकान के अंदर आ जाता है...

बाघा :- कैसे हैं नटू काका...

नटू काका :- बसस्स बढ़िया बाघा...अच्छा है तू आ गया...

बाघा :- और सेठ जी कैसे हैं आप...

जेठालाल :- अभी तक तो ठीक था...अब तू आ गया भाई...आगे का पता नही...

बाघा :- क्या...में आपका मतलब समझा नही...

जेठालाल :- जा भाई अपना काम कर...

बाघा :- क्या कम करूँ...

जेठालाल :- नटू काका...इसे बोलो मेरा दिमाग़ खराब ना करे...

नटू काका :- बेटा बाघा...सेठ जी को तंग मत कर...

बाघा :- नटू काका में थोड़ी तंग कर रहा हूँ....वैसे तो जैसे जिसकी सोच....में तो बस यहाँ सेठ जी के बोलने पर ही आया था...

जेठालाल :- मेने ....भाई मेने कब बुलाया...

बाघा :- अपने कल फोन नही किया था...मोबाइल रेपेरिंग के लिए...

जेठालाल :- हाँ वो है...जा नटू काका से ले ले...

और सोचता है.....ये बाघा और नटू काका नाग है नाग...उफफफफ्फ़......

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उधर सोसाइटी में.....दया अपनी माँ से बातें कर रही थी....

दया :- हाँ माँ....हान्ं....वो पकड़ा गया...हाँ....हमारी सोसाइटी का ही था...लेकिन उसकी कोई ग़लती नही थी ना..उसने जान बुझ के नही किया था...इसलिए उसे छोड़ दिया...हाँ..माँ सही किया.....

तभी पीछे से माधवी अंदर आती है...

माधवी :- दया भाभी..

दया :- अच्छा माँ चलो में तुमसे बाद में बात करती हूँ...हाँ...ठीक है...

और फोन कट कर देती है..

दया :- अरे भिड़े बहेन ... आइए...बैठिए...

माधवी :- अरे नही दया भाभी...वो तो में आपसे आचार और पापड का ऑर्डर लेने आई हूँ...

दया :- अच्छा....तो आप 5किलो आचार...और 5 किलो पापड ....अच्छा आप कम से कम चाइ तो पी के जाइए...

माधवी :- नही दया भाभी..अपभी बहुत काम है...बाद में आती हूँ...

और माधवी चली जाती है...

दोपहर के 2 बज रहे थे....बच्चे स्कूल से वापिस आ चुके थे....और सोसाइटी में हल्ला मचा रहे थे...तभी भिड़े अपनी गॅलरी में से बाहर आके बोलता है..

भिड़े :- ऊऊओ...टप्पू....टप्पू...

टप्पू :- हाँ भिड़े अंकल....और सब बच्चे उसकी तरफ देखने लगते हैं...

भिड़े :- देखो बच्चो...अगले आधे घंटे में ...तुम सब की क्लास है तो टाइम पे आ जाना..

टप्पू :- भिड़े अंकल अभी तो आए हैं हम....अभी इतनी जल्दी क्लास...

गोली :- हाँ भिड़े अंकल....भूक लगी है...और बिना खाए..मुझसे तो पढ़ाई होती ही नही है...

गोगी:- भिड़े अंकल....मुझे टीवी देखना है....

भिड़े :- आईईए गोया...आधा घंटा बहुत होता है खाने को.....और छोटे सोढी...बेटा टीवी बाद में देखना....अगले आधे घंटे में तुम सब उपर होने चाहिए...नही तो मुझसे बुरा कोई नही होगा...

टप्पू सेना :- ओहककक भिड़े अंकल....

और अपनी सड़ी सी शकल बना के...अपने अपने घर चले जाते हैं...

आधे घंटे बाद................

भिड़े ने ट्यूशन स्टार्ट कर दी थी...सभी बच्चे अपना अपना काम कर रहे थे...क्यूँ कि भिड़े ने सबको टेस्ट दे रखा था....तभी भिड़े को प्यास लगी और वो...माधवी को आवाज़ लगाता है...

भिड़े :- माधवी...ज़रा एक ग्लास पानी तो लाना....

माधवी :- खुद आ के ले लीजिए...में आचार बना रही हूँ...

भिड़े कुर्सी से उठ कर...किचेन में पहुँच जाता है...

भिड़े :- माधवी आज सुबह से आचार बना रही हो...ज़्यादा ऑर्डर है क्या...

बोलते बोलते फ्रिज खोलता है...

 
माधवी :- हाँ बहुत ज़्यादा ऑर्डर है....

भिड़े पानी निकाल कर...पानी पीने लगता है....पानी पीते पीते उसका लंड खड़ा होने लगता है.....

क्यूँ कि वो माधवी के पीछे था....और माधवी खड़ी स्लिप पर आचार बनाने का काम कर रही थी...

भिड़े माधवी की हिलती गान्ड हो देखकर पागल हो रहा था....माधवी आचार बनाते टाइम कुछ हिल रही थी...शायद कुछ फॅट रही थी...यानी कुछ मिक्स कर रही थी...

भिड़े से अपने आप पर कंट्रोल नही हो रहा था...वो माधवी की तरफ बढ़ता जा रहा था....

अब भिड़े माधवी के बिल्कुल करीब आ चुका था...माधवी अपने कम में मस्त थी....तभी उसके मुँह से हल्की से अहह निकली....

माधवी :- ये क्या कर रहे हैं आप...

पीछे से भिड़े ने माधवी के गोल गोल और बड़े चुतड़ों को अपने हाथ से मसल दिया था.....

माधवी :- छोड़िए ना....कोई अंदर आ जाएगा तो गड़बड़ हो जाएगी....ओइइ माआ....

अब भिड़े ने ज़ोर से गान्ड को दबा दिया था....

भिड़े :- माधवी...क्या गान्ड है तुम्हारी....अभी इतनी मस्त हिल रही थी कि मुझसे रहा नही गया....

माधवी :- अहह....ओह्ह्ह रुकिये ना...अभी नही.....

माधवी :- ऐसा मत कीजिए....कोई बाहर से अंदर आ जाएगा तो गड़बड़ हो जाएगी...

भिड़े :- माधवी कोई अंदर नही आएगा...सब टेस्ट कर रहे हैं...

बॅस इतना बोलते बोलते वो..पीछे से माधवी की नंगी पीठ पर अपने होंठ रख देता है....

नंगी पीठ पर भिड़े के गीले होंठ पाते ही...मचल उठी ....वो सिसकियाँ ले रही थी...ह.....जीि....श....

माधवी :- देखिए फटाफट कीजिए....अंदर कोई आ जाएगा...

भिड़े :- हाँ ठीक है....

भिड़े से भी नही रहा जा रहा था...क्यूँ कि वो भी बहुत ज़्यादा गरम था..उसका लंड उसकी जीन्स में से बाहर आने को तड़प रहा था....

उसने फटाफट माधवी की साड़ी को उपर किया...फिर पेटिकोट को...और फिर पैंटी को नीचे खिसका दिया ... और अपनी जीन्स भी नीचे कर दी.....

उसका लंड हवा में झूल रहा था.....और एक दम अकडा हुआ था....माधवी की चूत भी गीली थी...और पानी छोड़ रही थी....

तभी भिड़े ने बिना वक़्त गँवाए...लंड को चूत पे सेट किया ...और एक जोरदार धक्का मारा..जिससे पूरा का पूरा लंड चूत के अंदर समा गया......माधवी की ज़ोर से आहह निकली....लेकिन फिर उसने अपने आप को रोका...क्यूँ की बाहर कोई भी सुन सकता था....

माधवी :- क्या करते हैं आप...एक ही बार में...जान निकाल दी..

भिड़े :- सॉरी माधवी..वो मुझसे कंट्रोल नही कर पा रहा था..

माधवी :- मदहोशी भरी आवाज़ में...तो रुक क्यूँ गये...करिए ना जल्दी...आगू बाइइ....

और इतना सुनते ही...भिड़े ने लंड को बाहर निकाला और फिर से एक जोरदार धक्का मारा...और लंड चूत की गहराई में समाता हुआ अंदर चला गया......अब वो तेज़ तेज़ धक्के लगा रहा था...

माधवी....आहह ओह....माआआअ...उईईई....

और्र्रर तेज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़....सोनू के पापपपा...बहुतत्त्तत्त मज़ाअ आ रहा है.....

भिड़े ने अब अपने हाथ माधवी के आगे लाकर ...उसके चुचों पे रख के मसल्ने लगा...

माधवी...अब और सिसकियाँ भर रही थी...ओह्ह....हन्णन्न् ऐसे हीई....बसस्स....में जानंन्णनईए वालीइी हुन्न्ञन्......

उधर भिड़े की रफ़्तार तेज़ हो चुकी थी...वो जबरदस्त झटके लगा रहा था.....

आज इनके घर का किचेन...एक सेक्स किचेन बन गया था.....

भिड़े जबरदस्त धक्का लगा रहा था..लंड माधवी की गीली चूत की वजह से पच पच की आवाज़ें कर रहा था....

भिड़े ने माधवी के चूचों को मसल्ते हुए....निपल्स को खिचने लगा...

माधवी से अब सहा नही जा रहा था...वो धीरे से चिल्लाति हुई...मेंन्न...तोह...गैिईईईईई.... और झड जाती है.....

भिड़े भी माधवी के गरम पानी को सहन नही कर पाता ...और अपना सारा रस चूत के अंदर ही डाल देता है....

भिड़े माधवी के पीछे से उसके उपर गिर जाता है और हाँफने लगता है...और माधवी भी स्लिप को पकड़े हाँफने लगती है...

.......

उधर बाहर टप्पू को एक क्वेस्चन समझ नही आ रहा था...वो सोचने लगा..कि भिड़े अंकल को पानी पीने में इतना टाइम कैसे लग रहा है...और वो सोचता है चलो किचेन में ही जाके पूछ लेता हूँ...और वो किचेन की तरफ जाने लगता है..

इधर माधवी भिड़े..इस बात से अंजान ... ऐसे ही एक दूसरे के उपर पड़े थे...

क्या टप्पू इन दोनो को ऐसी हालत में देखेगा....ह्म्म्म....वी विल सी इन नेक्स्ट अपडेट....!!!!!!

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टप्पू किचेन की तरफ बढ़ता है.....और कुछ ही मिनट में वो किचेन के अंदर पहुँच जाता है....और देखते ही बोलता है.....

टप्पू :- भिड़े अंकल .... ये क्या कर रहे हो??

भिड़े :- क्या कर रहा हूँ का क्या मतलब है टप्पू...

टप्पू :- भिड़े अंकल..हमे वहाँ बाहर टेस्ट देकर...आप खुद यहाँ मज़े कर रहे हो...

भिड़े :- तो तुम्हे में क्या मज़े करते हुए दिखाई दे रहा हूँ...

टप्पू :- और क्या...आपका तो ये रोज़ का काम है...माधवी आंटी के साथ ..आचार और पापड बनाने का.....और हँसने लगता है...

भिड़े :- टप्पू...तुझे तो में अभी बताता हूँ...

माधवी :- ऐसा क्या है...जाने दो ना..बच्चा है...

भिड़े :- अच्छा ये बता तू यहाँ क्यूँ आया है?

टप्पू :- अरे हाँ...भिड़े अंकल वो मुझे एक क्वेस्चन समझ नही आ रहा..तो इसलिए में यहाँ आ गया...

भिड़े :- अच्छा तुम चलो..में आता हूँ...

फिर टप्पू वहाँ से बाहर चला जाता है...

माधवी :- हस्शह.....बच गये.... और भिड़े की तरफ देखते हुए बोली...

देखा मेने कहा था ना..कोई अंदर आ गया तो...

भिड़े :- हाँ तो क्या हुआ....उसने कुछ देखा तो नही ना...

माधवी :- अच्छा ... अगर आते वक़्त उससे वो बाहर पड़ा हमारा प्लास्टिक वाला बाँस ना गिरा होता...तो हमे पता ही नही चलता कि वो अंदर आ रहा है.....

भिड़े :- अच्छा छोड़ो....लेकिन मज़ा तो आया ना.....

माधवी शरमाते हुए....आप बाहर जाइए..में चाइ लेकर आती हूँ....और फिर भिड़े बाहर चला जाता है...

हुआ ये था...जब टप्पू किचेन की तरफ जा रहा था तो..बाहर एक बाँस रखा था...जिसपे टप्पू का हाथ लग गया और वो गिर गया....अंदर किचेन में जैसे ही दोनो के कानो में वो आवाज़ पड़ी....दोनो घबरा गये....और फिर भिड़े ने जल्दी से अपनी जीन्स उपर कर ली...और माधवी ने भी अपनी पैंटी उपर कर के...अपना पेटिकोट और साड़ी नीचे कर ली....और दोनो ऐसे बैठ के काम करने लगे जैसे कुछ हुआ ही ना हो.....

किस्मत अच्छी थी आज....जो टप्पू ने देखा नही...माधवी ऐसा बोलते बोलते ... भिड़े को चाइ देने चली जाती है...

…………………………

 
उधर जेठालाल आज अपनी दुकान पे अकेला था....नटू काका किसी से चेक लेने गये थे....और बाघा पीछे गॉडाउन में स्टॉक रखवा रहा था...

तभी जेठालाल की दुकान पे एक कस्टमर अंदर आई....जिसे देखते ही जेठालाल का मुँह खुला का खुला रह गया...

वो हुआ यूँ की...जो लड़की दुकान के अंदर एंटर कर रही थी....वो कुछ ज़्यादा ही मॉडर्न किस्म की थी.....उसकी ड्रेस....एक छोटा सा मिनी स्कर्ट जो घुटनो से उपर था....और उपर से उसका टॉप..जिसमे आधी चुचियाँ दिख रही थी..उपर से उसने अपना एक बटन खुला छोड़ा हुआ था...

जैसे ही वो एंटर हुई...पता नही उसके सॅंडल में क्या हुआ...वो सामने की तरफ से झुकी..जिसकी वजह से उसकी चुचियाँ और ज़्यादा दिखने लगी...

अब जेठालाल के पसीने छूट गये....उसका लंड अपनी जगह से उठ कर..आज सुबह से 4 थी बार खड़ा हो चुका था....लेकिन सिर्फ़ खड़ा ही हो पाता था...इससे ज़्यादा और कुछ नही...इसलिए वो इतना परेशान था सुबह से....

अब वो लड़की सीधे खड़ी हो गई थी...और जेठालाल की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी...

अब जेठालाल उसके पूरे शरीर का मुआयना ले रहा था...देखने में वो एक हॉट...सेक्सी...एक मॉडेल जैसे लग रही थी....उसका फेस बहुत ही ज़्यादा क्यूट..रंग एक दम गोरा...फेस से नज़र हटा के जब जेठालाल थोडा नीचे पहुँचा तो..उसने देखी...दो बड़े बड़े गोल गोल...चुचियाँ..जिसके निपल्स टॉप के बाहर से देखे जा सकते थे.....उसने और नीचे..पतली सी कमर...और नीचे मस्त मस्त गोरी जाँघ...दूर से दिखने से पता चल रहा था कि कितनी सॉफ्ट होंगी....और उसके शरीर से उसकी गान्ड की गोलाईयों का अंदाज़ा लगा रहा था....

जब उस लड़की ने जेठालाल को ऐसे घूरते हुए देखा....तो उसने एक अजीब से स्माइल पास कर दी.....और दुकान के अंदर आ कर जेठालाल के सामने खड़ी हो गई......!!!!!!!!!!!

लड़की जेठालाल के सामने आकर खड़ी होकर उसे हेलो बोलती है...

जेठालाल :- हेलो...

और उसकी नज़र अभी भी..उसके चुचों पे ही पड़ी रहती है...बेचारे उसकी कोई ग़लती नही थी...अगर नटू काका भी होते तो उनका भी इस उमर में खड़ा हो जाता...उस लड़की को देख कर..उसके चुचे आधे बाहर और आधे अंदर थे....फिर वो लड़की जेठालाल का ध्यान तोड़ते हुए..

लड़की :- जी...क्या आप मुझे एक अच्छा सा मोबाइल दिखाएँगे...

जेठालाल :- नींद से जागते हुए...जी हाँ बिल्कुल....आपकी रेंज क्या है..

लड़की :- जी अच्छा सा दिखा दीजिए...चाहे वो कितने का भी हो...

जेठालाल :- तभी अपनी अलमारी से एक **** का **** दिखा देता है....और बोलता है...जी ये बिल्कुल लेटेस्ट पीस है..बहुत अच्छा है...बहुत चलता है मार्केट में....

तभी वो लड़की उस डमी को हाथ में पकड़ के पूछती है..

लड़की :- कितने का है ये??

जेठालाल :- बॅस 30000 का...

लड़की :- ओहकक....फीचर तो अच्छे हैं ना इसके...

जेठालाल :- जी बिल्कुल...बे फिकर हो जाइए.....सबसे बढ़िया है...

लड़की फोन के डमी को देख रही होती है...और तभी उसके हाथ से वो नीचे गिर जाता है...

लड़की :- आइ आम सॉरी...

जेठालाल :- कोई बात नही...वो तो डमी है...रुकिये में उठा देता हूँ..

लड़की :- नही आप रहने दीजिए...में उठा देती हूँ...

और वो नीचे झुक जाती है उठाने के लिए...जैसा कि पहले बताया था मेने...उसने बहुत छोटी से मिनी स्कर्ट टाइप पहनी हुई थी...जैसे वो नीचे बैठी...घुटनो के बल....उसकी टाँगे खुल जाती है...और जेठालाल को अंदर का नज़ारा दिख जाता है...

वो उस लड़की की रेड कलर की पैंटी देख के पगल हो जाता है....उसका लंड अब उसके अंडरवेर के अंदर समा नही रहा था....वो बाहर आने को बेताब था..लेकिन सुबह से वो सिर्फ़ अंदर ही रह जाता था......जब लड़की की नज़र उपर गई तो उसने देखा कि जेठालाल क्या देख रहा है....

जब उसे पता चला कि वो उसकी पैंटी की तरफ देख रहा है ....तो वो उपर उठती हुई उसको स्माइल दी..बदले में जेठालाल ने भी स्माइल दे दी....

जेठालाल जानता था...अगर इस लड़की ने कुछ बोल दिया तो...सारी जगह उसकी बदनामी हो जाएगी....

फिर वो लड़की बोली....

लड़की :- मुझे ये फोन पसंद है और में इसे खरीदना चाहती हूँ....

जेठालाल :- जी बिल्कुल .... अभी देता हूँ इसका एक पीस....और फिर जेठालाल एक ओरिजिनल पीस निकाल के उसे दे देता है...

लड़की :- क्या आप मुझे इसके फीचर्स भी बता देंगे...

जेठालाल :- खुश होते हुए....चलो कम से कम थोड़ी देर और इसके साथ रहने का मौका मिलेगा....

वैसे जेठालाल कभी किसी कस्टमर के साथ ऐसा नही कर सकता था...लेकिन बेचारा क्या करता...उसकी सुबह से जो हालत थी...उसे वो कंट्रोल नही कर पा रहा था....

तभी वो लड़की वो एक चेयर पे बिठा देता है....और खुद उसके बगल में बैठ जाता है...उसको फीचर्स समझाने के लिए....

अब देखते हैं....कि वो उसको फीचर्स बताता है..या फिर कुछ औरर्र......!!!!!

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