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Guest
हम दोनों के माथे से टपकता हुआ पसीना और कंपकंपाती हुई टाँगे, इस बात की गवाही दे रही थी कि कुछ ऐसा उन्होंने देखा था जो शायद उनके अंदर इस खौफ और डर की भावना को पैदा कर चुका था।
इधर जय के कार का पार्किंग इंडिकेटर अब भी चालू था और अब भी उसकी धीमी आवाज़ उनके कानों में गूँज रही थी। हालाँकि पाँच मीटर की दूरी होने के बावजूद भी हम उनकी बातचीत को ठीक से सुन नहीं पा रहे थे। लेकिन हमें उन तीनों को बचाने के लिए प्लान बनाना ही था। भले ही उसमें कितना ही रिस्क क्यों न हो।
मैं धीरे-धीरे सामने खड़ी जय की कार की तरफ बढ़ रहा था। डॉली कार में जा चुकी थी। उस चीज़ का ध्यान अब भी हमारी तरफ नहीं था। लेकिन अभी मैं जय की कार की तरफ बढ़ ही रहा था कि अचानक मुझे उस चीज यानि उस परछाई की घूरती हुई आँखें मेरी तरफ दिखाई दी। वह आँखें ठीक वैसी ही थी जैसा मैंने उन जंगलों में देखा था। आग के शोलों की तरह धधकती हुई बिल्कुल लाल खूनी आँखें। मेरी जान सूखने लगी थी। मैं तेजी से दौड़कर जय की कार तक पहुँचना चाहता था।
मैंने देखा जब मैं उनकी कार की तरफ आगे बढ़ता जा रहा था, उस परछाई की गर्दन मेरी तरफ घूम चुकी थी। ऐसा लग रहा था जैसे उसकी लाल आँखें मेरे आगे बढ़ने की दिशा के साथ-साथ आगे बढ़ रही थी। यह डर कुछ देर पहले हुए उस डर से कई गुना ज्यादा महसूस हो रहा था। शायद मेरी जगह कोई और होता तो वह बर्फ बनकर चुपचाप वहीं खड़ा हो चुका होता। लेकिन मुझे अपने भाई-बहन और दोस्तों की चिंता सता रही थी।
मैं कार के पास पहुँचकर पिछले गेट पर नॉक करके अन्दर बैठे रोनित को बताना चाहता था कि उसके पहले ही उस परछाई की गर्दन मेरी तरफ घूमी। जैसे उसने मुझे देख लिया था। तभी लगा जैसे उसने मुझे कुछ इशारा किया। ऐसा लगा जैसे वह अपनी उंगलियों को अपने होंठों पर रख रही हो और मुझे चुप होने का इशारा कर रही हो। उस परछाई का चेहरा अब हल्का-हल्का सा नज़र आने लगा था। उसका इशारा देखकर मेरे होंठ सूखने लगे थे। लेकिन मुझे हिम्मत दिखानी थी। मैं अब रुक नहीं सकता था। अब मुझे अपना ध्यान उसके भयानक चेहरे से हटाना था।
मैंने पीछे मुड़ कर देखा और इस बात को कंफर्म किया कि डॉली कार के अंदर बैठ चुकी थी।
अगले ही पल मैंने कार के बैक विंडो को खटखटाया मुझे देखकर रोनित ने तुरंत दरवाज़ा खोल दिया।
“अरे राज तू?”
इतना बोलने की देरी ही थी कि हड़बड़ी के साथ मैं तेजी से कार के अंदर प्रवेश कर गया। मैंने जल्दी से अपने आपको कार के अंदर एडजस्ट किया और गेट तेज़ी से बंद कर दिया।
“क्या हुआ?” ज्योति ने मुझसे पीछे मुड़कर पूछा ही था कि मैंने उसे चुप रहने का इशारा किया।
कार में मौजूद तीनों शख्स अचानक मेरे वहाँ आने के कारण को महसूस कर चुके थे। जय की विंडो का काँच अभी भी नीचे था और वह उस शख्स से कुछ बातें कर रहा था।
न जाने क्यों अभी भी मुझे उनकी बातें ठीक से सुनाई नहीं दे रही थी। जबकि मैं उनके इतने पास था। जैसे वह कोई छलावा थी। इतने पास होने के बाद भी मुझे उनकी आवाज़ समझ में नहीं आ रही थी। लेकिन अब सोचने-समझने का वक्त बीत चुका था।
“जय...! गाड़ी भगा जय! गाड़ी भगा। जय गाड़ी भगा।”
मैंने जोर-जोर से अपनी बातों को तीन बार दोहराया, क्योंकि अब वहाँ रुकने का समय हमारे पास बिल्कुल भी नहीं था। अपनी कार से यहाँ तक पहुँचने में ऐसा लगा काफी लंबा समय बीत चुका था जैसे कि समय थम सा गया हो। क्या वाकई में ऐसा था या सिर्फ मुझे ऐसा महसूस हो रहा था?
मेरे यूँ अचानक कार में आने की वजह से और इस तरह से चिल्लाने की वजह से सभी इस बात से हैरान हुए ही थे कि तभी जय ने पीछे की तरफ मुड़कर मेरी तरफ देखा और पूछा – “अरे, क्या हुआ? अचानक चिल्ला क्यों रहा है?”
तभी मुझे महसूस हुआ कि एक चेहरा मेरी तरफ घूर रहा है। जय के चेहरे के पीछे से उस परछाई की आँखें चमक रही थी। जैसे वह एकटक मेरी आँखों में ही घूरने लगी हो। । मैंने अपने आप को संभालते हुए जोर से कहा – “जय, गाड़ी भगा सोचने समझने का वक्त नहीं है!”
“अरे, हुआ क्या है? तुम देख रहे हो कि गाड़ी रोक कर किसी से बात कर रहा हूँ। उसे कुछ हेल्प की जरूरत है। तुम अचानक ही वहाँ आकर हंगामा कर रहे हो कि गाड़ी भगा। आखिर बात क्या है? भाई, बताओगे भी या यूँ ही चिल्लाते रहोगे।”
शायद जय उस खतरे से अब तक बिल्कुल अनजान था जिसे डॉली और मैं करीब से देख चुके थे। फिलहाल मेरी बात सुनकर ज्योति, जय और रोनित पूरी तरह से शॉक में थे। उन्हें मेरी बात किसी भी तरह से समझ में नहीं आ रही थी। यह बात मैं अच्छी तरह से जानता था। लेकिन अब एक पल भी गँवाना बेकार था।
"तुझे मेरी कसम है। जल्दी से विंडो ग्लास ऊपर कर। मैं जितना कह रहा हूँ, उतना कर। प्लीज मेरी बात मान, कार भगा!” इतना कहकर जय ने कार विंडो की तरफ देखा तो वह परछाई अब वहाँ से गायब हो चुकी थी।
"अरे, वह लड़की कहाँ गयी जय भैया?" ज्योति ने इतना कहा ही था कि हमने देखा वह परछाईं जो कि एक लड़की के रूप में थी, अब ठीक हमारे कार के बिल्कुल सामने खड़ी थी। हेड लाइट की रौशनी में उसकी चमकती हुई आँखें और उसका गोरा चेहरा अब हमें साफ दिखाई दे रहा था।
सभी हैरान थे। कार के सामने वह लड़की जो पीछे उनसे हेल्प माँग रही थी, वह अब ठीक उनकी कार के सामने खड़ी थी।
इधर जय के कार का पार्किंग इंडिकेटर अब भी चालू था और अब भी उसकी धीमी आवाज़ उनके कानों में गूँज रही थी। हालाँकि पाँच मीटर की दूरी होने के बावजूद भी हम उनकी बातचीत को ठीक से सुन नहीं पा रहे थे। लेकिन हमें उन तीनों को बचाने के लिए प्लान बनाना ही था। भले ही उसमें कितना ही रिस्क क्यों न हो।
मैं धीरे-धीरे सामने खड़ी जय की कार की तरफ बढ़ रहा था। डॉली कार में जा चुकी थी। उस चीज़ का ध्यान अब भी हमारी तरफ नहीं था। लेकिन अभी मैं जय की कार की तरफ बढ़ ही रहा था कि अचानक मुझे उस चीज यानि उस परछाई की घूरती हुई आँखें मेरी तरफ दिखाई दी। वह आँखें ठीक वैसी ही थी जैसा मैंने उन जंगलों में देखा था। आग के शोलों की तरह धधकती हुई बिल्कुल लाल खूनी आँखें। मेरी जान सूखने लगी थी। मैं तेजी से दौड़कर जय की कार तक पहुँचना चाहता था।
मैंने देखा जब मैं उनकी कार की तरफ आगे बढ़ता जा रहा था, उस परछाई की गर्दन मेरी तरफ घूम चुकी थी। ऐसा लग रहा था जैसे उसकी लाल आँखें मेरे आगे बढ़ने की दिशा के साथ-साथ आगे बढ़ रही थी। यह डर कुछ देर पहले हुए उस डर से कई गुना ज्यादा महसूस हो रहा था। शायद मेरी जगह कोई और होता तो वह बर्फ बनकर चुपचाप वहीं खड़ा हो चुका होता। लेकिन मुझे अपने भाई-बहन और दोस्तों की चिंता सता रही थी।
मैं कार के पास पहुँचकर पिछले गेट पर नॉक करके अन्दर बैठे रोनित को बताना चाहता था कि उसके पहले ही उस परछाई की गर्दन मेरी तरफ घूमी। जैसे उसने मुझे देख लिया था। तभी लगा जैसे उसने मुझे कुछ इशारा किया। ऐसा लगा जैसे वह अपनी उंगलियों को अपने होंठों पर रख रही हो और मुझे चुप होने का इशारा कर रही हो। उस परछाई का चेहरा अब हल्का-हल्का सा नज़र आने लगा था। उसका इशारा देखकर मेरे होंठ सूखने लगे थे। लेकिन मुझे हिम्मत दिखानी थी। मैं अब रुक नहीं सकता था। अब मुझे अपना ध्यान उसके भयानक चेहरे से हटाना था।
मैंने पीछे मुड़ कर देखा और इस बात को कंफर्म किया कि डॉली कार के अंदर बैठ चुकी थी।
अगले ही पल मैंने कार के बैक विंडो को खटखटाया मुझे देखकर रोनित ने तुरंत दरवाज़ा खोल दिया।
“अरे राज तू?”
इतना बोलने की देरी ही थी कि हड़बड़ी के साथ मैं तेजी से कार के अंदर प्रवेश कर गया। मैंने जल्दी से अपने आपको कार के अंदर एडजस्ट किया और गेट तेज़ी से बंद कर दिया।
“क्या हुआ?” ज्योति ने मुझसे पीछे मुड़कर पूछा ही था कि मैंने उसे चुप रहने का इशारा किया।
कार में मौजूद तीनों शख्स अचानक मेरे वहाँ आने के कारण को महसूस कर चुके थे। जय की विंडो का काँच अभी भी नीचे था और वह उस शख्स से कुछ बातें कर रहा था।
न जाने क्यों अभी भी मुझे उनकी बातें ठीक से सुनाई नहीं दे रही थी। जबकि मैं उनके इतने पास था। जैसे वह कोई छलावा थी। इतने पास होने के बाद भी मुझे उनकी आवाज़ समझ में नहीं आ रही थी। लेकिन अब सोचने-समझने का वक्त बीत चुका था।
“जय...! गाड़ी भगा जय! गाड़ी भगा। जय गाड़ी भगा।”
मैंने जोर-जोर से अपनी बातों को तीन बार दोहराया, क्योंकि अब वहाँ रुकने का समय हमारे पास बिल्कुल भी नहीं था। अपनी कार से यहाँ तक पहुँचने में ऐसा लगा काफी लंबा समय बीत चुका था जैसे कि समय थम सा गया हो। क्या वाकई में ऐसा था या सिर्फ मुझे ऐसा महसूस हो रहा था?
मेरे यूँ अचानक कार में आने की वजह से और इस तरह से चिल्लाने की वजह से सभी इस बात से हैरान हुए ही थे कि तभी जय ने पीछे की तरफ मुड़कर मेरी तरफ देखा और पूछा – “अरे, क्या हुआ? अचानक चिल्ला क्यों रहा है?”
तभी मुझे महसूस हुआ कि एक चेहरा मेरी तरफ घूर रहा है। जय के चेहरे के पीछे से उस परछाई की आँखें चमक रही थी। जैसे वह एकटक मेरी आँखों में ही घूरने लगी हो। । मैंने अपने आप को संभालते हुए जोर से कहा – “जय, गाड़ी भगा सोचने समझने का वक्त नहीं है!”
“अरे, हुआ क्या है? तुम देख रहे हो कि गाड़ी रोक कर किसी से बात कर रहा हूँ। उसे कुछ हेल्प की जरूरत है। तुम अचानक ही वहाँ आकर हंगामा कर रहे हो कि गाड़ी भगा। आखिर बात क्या है? भाई, बताओगे भी या यूँ ही चिल्लाते रहोगे।”
शायद जय उस खतरे से अब तक बिल्कुल अनजान था जिसे डॉली और मैं करीब से देख चुके थे। फिलहाल मेरी बात सुनकर ज्योति, जय और रोनित पूरी तरह से शॉक में थे। उन्हें मेरी बात किसी भी तरह से समझ में नहीं आ रही थी। यह बात मैं अच्छी तरह से जानता था। लेकिन अब एक पल भी गँवाना बेकार था।
"तुझे मेरी कसम है। जल्दी से विंडो ग्लास ऊपर कर। मैं जितना कह रहा हूँ, उतना कर। प्लीज मेरी बात मान, कार भगा!” इतना कहकर जय ने कार विंडो की तरफ देखा तो वह परछाई अब वहाँ से गायब हो चुकी थी।
"अरे, वह लड़की कहाँ गयी जय भैया?" ज्योति ने इतना कहा ही था कि हमने देखा वह परछाईं जो कि एक लड़की के रूप में थी, अब ठीक हमारे कार के बिल्कुल सामने खड़ी थी। हेड लाइट की रौशनी में उसकी चमकती हुई आँखें और उसका गोरा चेहरा अब हमें साफ दिखाई दे रहा था।
सभी हैरान थे। कार के सामने वह लड़की जो पीछे उनसे हेल्प माँग रही थी, वह अब ठीक उनकी कार के सामने खड़ी थी।