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Horror दहशत

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हम दोनों के माथे से टपकता हुआ पसीना और कंपकंपाती हुई टाँगे, इस बात की गवाही दे रही थी कि कुछ ऐसा उन्होंने देखा था जो शायद उनके अंदर इस खौफ और डर की भावना को पैदा कर चुका था।

इधर जय के कार का पार्किंग इंडिकेटर अब भी चालू था और अब भी उसकी धीमी आवाज़ उनके कानों में गूँज रही थी। हालाँकि पाँच मीटर की दूरी होने के बावजूद भी हम उनकी बातचीत को ठीक से सुन नहीं पा रहे थे। लेकिन हमें उन तीनों को बचाने के लिए प्लान बनाना ही था। भले ही उसमें कितना ही रिस्क क्यों न हो।

मैं धीरे-धीरे सामने खड़ी जय की कार की तरफ बढ़ रहा था। डॉली कार में जा चुकी थी। उस चीज़ का ध्यान अब भी हमारी तरफ नहीं था। लेकिन अभी मैं जय की कार की तरफ बढ़ ही रहा था कि अचानक मुझे उस चीज यानि उस परछाई की घूरती हुई आँखें मेरी तरफ दिखाई दी। वह आँखें ठीक वैसी ही थी जैसा मैंने उन जंगलों में देखा था। आग के शोलों की तरह धधकती हुई बिल्कुल लाल खूनी आँखें। मेरी जान सूखने लगी थी। मैं तेजी से दौड़कर जय की कार तक पहुँचना चाहता था।

मैंने देखा जब मैं उनकी कार की तरफ आगे बढ़ता जा रहा था, उस परछाई की गर्दन मेरी तरफ घूम चुकी थी। ऐसा लग रहा था जैसे उसकी लाल आँखें मेरे आगे बढ़ने की दिशा के साथ-साथ आगे बढ़ रही थी। यह डर कुछ देर पहले हुए उस डर से कई गुना ज्यादा महसूस हो रहा था। शायद मेरी जगह कोई और होता तो वह बर्फ बनकर चुपचाप वहीं खड़ा हो चुका होता। लेकिन मुझे अपने भाई-बहन और दोस्तों की चिंता सता रही थी।

मैं कार के पास पहुँचकर पिछले गेट पर नॉक करके अन्दर बैठे रोनित को बताना चाहता था कि उसके पहले ही उस परछाई की गर्दन मेरी तरफ घूमी। जैसे उसने मुझे देख लिया था। तभी लगा जैसे उसने मुझे कुछ इशारा किया। ऐसा लगा जैसे वह अपनी उंगलियों को अपने होंठों पर रख रही हो और मुझे चुप होने का इशारा कर रही हो। उस परछाई का चेहरा अब हल्का-हल्का सा नज़र आने लगा था। उसका इशारा देखकर मेरे होंठ सूखने लगे थे। लेकिन मुझे हिम्मत दिखानी थी। मैं अब रुक नहीं सकता था। अब मुझे अपना ध्यान उसके भयानक चेहरे से हटाना था।

मैंने पीछे मुड़ कर देखा और इस बात को कंफर्म किया कि डॉली कार के अंदर बैठ चुकी थी।

अगले ही पल मैंने कार के बैक विंडो को खटखटाया मुझे देखकर रोनित ने तुरंत दरवाज़ा खोल दिया।

“अरे राज तू?”

इतना बोलने की देरी ही थी कि हड़बड़ी के साथ मैं तेजी से कार के अंदर प्रवेश कर गया। मैंने जल्दी से अपने आपको कार के अंदर एडजस्ट किया और गेट तेज़ी से बंद कर दिया।

“क्या हुआ?” ज्योति ने मुझसे पीछे मुड़कर पूछा ही था कि मैंने उसे चुप रहने का इशारा किया।

कार में मौजूद तीनों शख्स अचानक मेरे वहाँ आने के कारण को महसूस कर चुके थे। जय की विंडो का काँच अभी भी नीचे था और वह उस शख्स से कुछ बातें कर रहा था।

न जाने क्यों अभी भी मुझे उनकी बातें ठीक से सुनाई नहीं दे रही थी। जबकि मैं उनके इतने पास था। जैसे वह कोई छलावा थी। इतने पास होने के बाद भी मुझे उनकी आवाज़ समझ में नहीं आ रही थी। लेकिन अब सोचने-समझने का वक्त बीत चुका था।

“जय...! गाड़ी भगा जय! गाड़ी भगा। जय गाड़ी भगा।”

मैंने जोर-जोर से अपनी बातों को तीन बार दोहराया, क्योंकि अब वहाँ रुकने का समय हमारे पास बिल्कुल भी नहीं था। अपनी कार से यहाँ तक पहुँचने में ऐसा लगा काफी लंबा समय बीत चुका था जैसे कि समय थम सा गया हो। क्या वाकई में ऐसा था या सिर्फ मुझे ऐसा महसूस हो रहा था?

मेरे यूँ अचानक कार में आने की वजह से और इस तरह से चिल्लाने की वजह से सभी इस बात से हैरान हुए ही थे कि तभी जय ने पीछे की तरफ मुड़कर मेरी तरफ देखा और पूछा – “अरे, क्या हुआ? अचानक चिल्ला क्यों रहा है?”

तभी मुझे महसूस हुआ कि एक चेहरा मेरी तरफ घूर रहा है। जय के चेहरे के पीछे से उस परछाई की आँखें चमक रही थी। जैसे वह एकटक मेरी आँखों में ही घूरने लगी हो। । मैंने अपने आप को संभालते हुए जोर से कहा – “जय, गाड़ी भगा सोचने समझने का वक्त नहीं है!”

“अरे, हुआ क्या है? तुम देख रहे हो कि गाड़ी रोक कर किसी से बात कर रहा हूँ। उसे कुछ हेल्प की जरूरत है। तुम अचानक ही वहाँ आकर हंगामा कर रहे हो कि गाड़ी भगा। आखिर बात क्या है? भाई, बताओगे भी या यूँ ही चिल्लाते रहोगे।”

शायद जय उस खतरे से अब तक बिल्कुल अनजान था जिसे डॉली और मैं करीब से देख चुके थे। फिलहाल मेरी बात सुनकर ज्योति, जय और रोनित पूरी तरह से शॉक में थे। उन्हें मेरी बात किसी भी तरह से समझ में नहीं आ रही थी। यह बात मैं अच्छी तरह से जानता था। लेकिन अब एक पल भी गँवाना बेकार था।

"तुझे मेरी कसम है। जल्दी से विंडो ग्लास ऊपर कर। मैं जितना कह रहा हूँ, उतना कर। प्लीज मेरी बात मान, कार भगा!” इतना कहकर जय ने कार विंडो की तरफ देखा तो वह परछाई अब वहाँ से गायब हो चुकी थी।

"अरे, वह लड़की कहाँ गयी जय भैया?" ज्योति ने इतना कहा ही था कि हमने देखा वह परछाईं जो कि एक लड़की के रूप में थी, अब ठीक हमारे कार के बिल्कुल सामने खड़ी थी। हेड लाइट की रौशनी में उसकी चमकती हुई आँखें और उसका गोरा चेहरा अब हमें साफ दिखाई दे रहा था।

सभी हैरान थे। कार के सामने वह लड़की जो पीछे उनसे हेल्प माँग रही थी, वह अब ठीक उनकी कार के सामने खड़ी थी।
 
उसकी धधकती हुई लाल आँखें हम चारों को घूरने लगी थी। अगले ही पल एक ज़ोरदार आवाज़ ने जंगल में मौजूद शांति को भंग कर दिया। वह लड़की किसी भूखे भेड़िए की तरह गुर्रा रही थी। उसकी भयानक गुर्राहट जैसे हमारे कान के पर्दे फाड़ने वाली थी।

“जय, गाड़ी भगा! भाई, प्लीज जल्दी कर...!” मैं इस बात को कन्फर्म कर चुका था कि उस घटना को हम सभी ने देखा था।

जय भी अब खतरे को महसूस कर चुका था। बिना एक पल गँवाए उसने फुर्ती से गियर डालकर कार को तेजी से आगे बढ़ाया। कार के निशाने में वह लड़की थी जिसे जय अब बस कुचलने ही वाला था।

लेकिन सामने खड़ी वह लड़की किसी जादू की तरह एकदम से जैसे हवा में तैरते हुए बहुत ही तेज़ी से हमारे कार के बगल से होकर गुजर गई। कार में बैठे जय, ज्योति और रोनित डरे सहमे से चुपचाप बैठे रहे। अभी-अभी जो घटना हमारे सामने घटी थी, उसको ठीक से सभी के लिए समझ पाना तो काफी मुश्किल था। लेकिन उसके डर को महसूस कर पाना हम सभी के लिए आसान होने लगा था। हर किसी के मन में अजीब तरह के सवाल घूमने लगे थे। लेकिन जवाब सिर्फ कुछ देर पहले देखा गया। वह डर था।

जय तेज़ी से कार की स्टेयरिंग को घुमाते हुए कार को फुल स्पीड में भगा रहा था।

*** *** *** *** *** ***
 
दृश्य:03

कार के आगे बढ़ते ही मैंने एक नजर पीछे मुड़कर डॉली की कार की तरफ देखा। मैं सिर्फ इस बात को कंफर्म करना चाहता था कि डॉली कार लेकर पीछे आ रही थी या नहीं। उसकी कार ठीक हमारे पीछे ही थी। यह देखकर मैंने राहत की साँस ली। मैं जानता था, वह हिम्मत से काम ले रही थी।

“राज, यह सब क्या हो रहा था यार? व्हाट द हेल वास दैट?" मेरे बगल में बैठे हुए रोनित ने चिल्लाते हुए कहा।

"पहले तुम लोग मुझे बताओ, वह लड़की कौन थी? और तुमसे क्या कह रही थी? तुमने कार रोकी ही क्यों?" मैंने डरी-सहमी आवाज़ में चिल्लाते हुए पूछा।

"वह था क्या?" जय ने पूछा।

"तुम लोगों ने देखा नहीं?" मैंने फिर कहा।

“मैं नहीं जानतात, वह लड़की कौन थी। जो कुछ वहाँ हुआ, मैं नहीं जानता वह क्या था। मैंने तो गाड़ी सिर्फ तुम्हारे बोलने से भगाया और मुझे यह समझ में नहीं आ रहा है कि तुम्हारे ऐसा कहते ही वह लड़की जो अब तक हमसे हेल्प माँग रही थी, अचानक से कार के सामने क्यों आ गई? हम लोगों को इस तरह से क्यों घूरने लगी और वह इस तरह से चीखने क्यों लगी? कुछ तो गड़बड़ थी राज। सच बता, क्या बात है?” जय ने कार के स्टेयरिंग तेजी से घुमाते हुए कहा।

"राज भैया, वह क्या था?"

मैं जानता था इस वक्त ज्योति भी काफी डरी हुई थी।

"मुझे पहले यह बताओ, वह कौन थी? और तुम लोगो ने अचानक से कार क्यों रोकी? तुम लोग को पता है न, ऐसे जंगल में किसी अनजान के लिए कार नहीं रोकना था। तुम लोग इतने बड़े स्टुपिड कैसे हो सकते हो गाइस!" मैंने एक साथ कई सवाल दाग दिए थे।

जय ने बगल में बैठी हुई ज्योति की तरफ देखा और फिर पीछे मुड़कर एक नजर रोनित को और फिर मेरी तरफ देख कर कहा – “यार, पता नहीं वह अचानक से हमारे कार के सामने आ गई तो मैंने उसको बचाने के लिए एक झटके से कार को रोक दिया! पता नहीं वह अचानक से कार के सामने कैसे आ गई और वह इस घने जंगल में अचानक कर क्या रही थी। मुझे खुद को समझ में नहीं आया और उसके बाद में जब मैंने कार रोका तो वह लड़की कार के विंडो की तरफ आई और कहने लगी कि उसका भाई और वह इस जंगल में किसी मदद का इंतजार कर रहे हैं।”

“व्हाट?” मैं उनकी बातें सुनकर हैरान था।

“हाँ यार! और क्योंकि लड़की को देखकर पता चल रहा था कि वह शादी के जोड़े में थी, इसलिए मैंने उससे पूछा भी कि तुम इस तरह शादी के जोड़े में यहाँ क्या कर रही हो? मतलब इस जंगल में? यहाँ तो रात में कोई खास आता-जाता नहीं। तो उसने कहा कि मैं तैयार होकर शादी के लिए ही निकल रही थी कि रास्ते में उसके भाई के साथ उनकी बाइक का एक्सीडेंट हो गया?” जय ने बताया।

“मैं तुम सभी को बता नहीं सकता कि मैंने और डॉली ने वहाँ पर क्या देखा और क्यों मैंने तुम लोगों को वहाँ से गाड़ी भगाने के लिए कहा?” मेरी आवाज़ जैसे गले से बाहर नहीं निकल रही थी।

ऐसा कहते ही मैंने सबसे पहले पीछे मुड़कर डॉली की कार की तरफ देखा। उसकी कार अब भी हमारी कार के ठीक पीछे आ रही थी।

"डॉली दीदी, वह ठीक है न?" ज्योति ने घबराते हुए पूछा।

"हाँ, वह बिल्कुल ठीक है! हमारे पीछे ही आ रही है। कुछ भी हो जाए, अभी हमें गाड़ी नहीं रोकनी है। जल्दी से हमें बस यहाँ से बाहर निकलना है। डॉली को भी मैंने समझा दिया है। अभी गाड़ी रोकना किसी भी खतरे से खाली नहीं है। सही समय देखकर कार रोकना होगा। मुझे डॉली की कार में जाना है।"

“हाँ, लेकिन बात क्या है? यह सब आखिर क्या था? अभी-अभी हमने जो देखा, वह बहुत ही अजीब था। यार, मुझे तो वह सब बातें याद आ रही है जो इस जंगल के बारे में कही जाती है। तुम बताओगे तो पता चलेगा न कि आखिर यह माजरा क्या है?” रोनित ने मेरे चेहरे को घूरते हुए कहा।

"तो क्या तुम दोनों को आस-पास उसका भाई या कोई बाइक नजर आई?" मैं जानता था, वहाँ पर ऐसा कुछ भी नहीं था।

“अब अंधेरा था, तो हमें कैसे पता लगता? हम तो सिर्फ उससे पूछ ही रहे थे कि उसके दो-तीन मिनट के बाद तुम आ गए। लेकिन तुम अब प्लीज बता दो कि क्या बात थी जो तुमने भागने के लिए कहा और वह लड़की अचानक से ऐसे क्यों भागी और वह भी हवा की तेज़ी से? जब हम उसे पीछे छोड़ आये तो वह फिर अचानक सामने कैसे आ गयी? यार, सब कुछ दिमाग के ऊपर से जा रहा है। यहाँ बैठे हुए सभी बुरी तरह से डर चुके हैं। मुझे समझ में नहीं आ रहा है यह कि सब हो क्या रहा है?” जय की आवाज़ भी काफी घबराई हुई सी लग रही थी।

“तुम लोगों के अचानक से कार रोकने के बाद, हमने कार से निकल कर यह जानने की कोशिश कि तुमने अपनी कार को अचानक से जंगल के बीचो-बीच क्यों रोका है? अभी हम इस बात का मुवायना करना ही चाहते थे कि तभी तुम्हें याद होगा, हमारे बगल से एक ट्रक निकला था।”

"हाँ, तो इतनी रात में वैसे तो इस सड़क से तो कोई आता-जाता नहीं। बस कभी कभार ही लोग रात में इस सड़क का रास्ता लेते हैं। लेकिन उस कार वाली बात का इससे क्या लेना देना?" रोनित ने पूछा। उसकी बात पूरी तरह से जायज़ थी।

कार में मौजूद हर शख्स बुरी तरह से डरा हुआ था। ख़राब सड़क के बावजूद भी हमारी कार की गति नार्मल से ज्यादा थी।

“तुम लोग मेरी बात ध्यान से सुनो। ट्रक की रौशनी के पहले हमें यह तो दिखाई दे रहा था कि जय की तरफ कोई शख्स खड़ा होकर कुछ बात कर रहा था। हमने इस बात का अंदाजा भी लगा लिया था कि शायद कोई बीच सड़क पर तुम लोगों से किसी तरह की हेल्प माँग रहा है। लेकिन अचानक से आई उस कार की रौशनी में हमने उस शख्स को देखा और…।”

कहते हुए मैं एक पल को रुका और जेब से रुमाल निकालकर माथे पर आये पसीने को पोंछने लगा। वह घटना फिर से मेरे ज़हन में घूमने लगी थी।

“और, और क्या हुआ राज भैया?” जय के बगल में बैठी ज्योति ने मुझसे पूछा।
 
कार में मौजूद सभी लोग मेरे जवाब का इंतजार कर रहे थे। जय तेजी से कार चला रहा था और बार-बार मुड़कर मेरी तरफ देख रहा था। मैं अपनी बात कहते कहते हैं बार-बार देख रहा था कि पीछे डॉली की कार आ रही है या नहीं?

“हमने यह देखा कि वह लड़की जो शादी के जोड़े में तुम लोगों से मदद माँग रही थी। कार की रौशनी पड़ते ही हमने देखा... हमने देखा कि उस लड़की के कमर के नीचे कुछ भी नहीं था।” कहते हुए मैंने दोबारा से अपना पसीना पोंछना शुरू किया और मेरी आवाज़ अब और ज्यादा काँपने लगी थी।

“कमर के नीचे कुछ नहीं था? मैं कुछ समझा नहीं?" जय ने कार की स्टेयरिंग को घुमाते हुए पूछा। वैसे भी यह कोई इतनी आसान बात नहीं थी जिसे इतनी आसानी से समझाया जा सके।

भयानक जंगल के बीचो-बीच बने उस सड़क पर अब भी दो कारें तेजी से भाग रही थी और कार के अंदर घबराहट और डर का माहौल उतना ही था जितना कि कार के बाहर जंगल में शांति। जंगल अब इस कदर शांत नजर आ रहा था जैसे हवा का कोई झोंका भी ना आ रहा हो। आसमान भी अब अजीब-ओ-गरीब बादलों से ढँका लगने लगा था।

“मेरा मतलब... मैं कैसे बताऊँ तुम लोगों को? मेरे कहने का मतलब है कि उस लड़की यानी वह शादीशुदा ड्रेस में खड़ी लड़की जो तुम लोगों से बात कर रही थी उसके बॉडी का आधा हिस्सा गायब था। यानी उसके कमर के नीचे कुछ भी नहीं था। मुझे नहीं पता तुम लोग मेरी बात का यकीन करोगे या नहीं करोगे? पर मैं जानता हूँ कि जो कुछ भी मैंने देखा, वह सच था।” कहकर जैसे मैं रोने ही वाला था।

“व्हाट? यह कैसे हो सकता है? ऐसा कुछ नहीं था। लेकिन हमने उस लड़की को जय से बातें करते हुए सुना है।” रोनित ने जय की तरफ देखकर कहा तो जय ने भी उनकी हाँ में हाँ मिलाते हुए कहना जारी रखा –

“हाँ यार, वह लड़की तो मुझसे बात कर रही थी और मुझे तो कुछ ऐसा महसूस नहीं हुआ।”

“मतलब मैं तुम लोगों को कैसे समझाऊँ। जो कुछ भी डॉली और मैंने देखा वह बहुत ही भयानक और खौफनाक था।” कहते हुए मैंने अपने बगल में बैठे रोनित का बाजू पकड़ा, “देखो, मैं तुम लोगों को डराना नहीं चाहता। लेकिन रोनित, मेरा मतलब यह था कि उस लड़की का सिर्फ सिर और कमर से ऊपर का हिस्सा ही दिख रहा था बाकी कमर के नीचे का कुछ भी नहीं था।" मैंने एक बार फिर से सब को समझाने की कोशिश की जिसे मैं खुद समझना नहीं चाहता था।

यह कहते-कहते अचानक से मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे उसका भयानक चेहरा मेरी आँखों के सामने फिर से आ गया हो। मेरी धड़कने तेज होने लगी, मेरी साँस उखड़ने लगी। मैं अपने आप को संभालने की भरसक कोशिश कर रहा था। ऐसा तो मेरे साथ कभी नहीं हुआ था।

"कुछ भी नहीं था, इसका क्या मतलब हुआ? आपको जरूर कोई ग़लतफहमी हुई होगी भइया। जाने क्यों आप इसी बात को बार-बार दोहरा रहे हो। लेकिन मुझे लगता है रात में अक्सर ऐसी ग़लतफ़हमियाँ होने लगती है। मैं भगवान से दुआ करती हूँ कि वह आप लोगों को कोई ग़लतफहमी ही हो।" कहते हुए ज्योति ने मेरा हाथ पकड़ा।

"मैं जानता हूँ, इस पर बिलीव करना बहुत मुश्किल है। लेकिन वह लड़की जैसे बिना पैरों के हवा में खड़ी थी। जैसे कोई काला जादू हो।"

“राज, पागलों जैसी बात मत कर यार! क्यों ज्योति और हम सभी को डरा रहा है तू। हाँ, मैं जानता हूँ वह लड़की अचानक से मेरे कार के सामने आ गई और तेरे इस चिल्लाने वाली बात के कारण मैंने कार वहाँ से भगा दी। वह इतनी तेजी से हमारे कार के बगल से भागी कि हम ऐसा कुछ देख ही नहीं पाए कि उस लड़की का आधा हिस्सा वाकई में गायब था या नहीं। और तू जो बोल रहा है, वह मैं कैसे मान लूँ। पता नहीं क्यों मुझे भी ज्योति की बात सही लग रही है। हो सकता है कि अंधेरे की वजह से हमें भ्रम हुआ हो।” जय ने कहा।

"मैं जानता हूँ, मैं हमेशा से तुम लोगों को इन सब चीजों पर विश्वास न करने के लिए कहता आया हूँ, लेकिन आज मैंने जो कुछ देखा बस तुम लोगों को वही बता रहा हूँ। आखिर मैं तुम लोगों को क्यों डराने लगा। डॉली भी इस बात की गवाह है।”
 
मैं कार में बैठे हर एक शख्स को उस घटना के बारे में यकीन दिलवाने की कोशिश कर रहा था कि तभी एक और घटना हमारे साथ हुई। अचानक से हमारी कार को एक जोर का झटका लगा। हमारी कार लड़खड़ाई और इससे पहले कि जय कार को कंट्रोल करने की कोई कोशिश करता, कार सड़क से नीचे उतर चुकी थी। कार एक ज़ोरदार ब्रेक के साथ रुक गयी थी। कार सड़क से नीचे उतरकर पेड़ से टकराते हुए बची थी। ये सब बहुत जल्दी में हुआ था। हम सब घबरा गए।

“क्या हुआ अब?” मैं चिल्लाया।

“पता नहीं। ऐसा लगा जैसे कोई कार से टकराया हो।” जय ने जवाब दिया। हमारी कार बंद हो चुकी थी।

“आह, तुम सब ठीक तो हो न?” सभी ठीक थे। किसी को कोई खास चोट नहीं आयी थी।

“जय, जल्दी कार स्टार्ट करो! यहाँ एक पल भी रुकना खतरे से खाली नहीं है।” कहते हुए मैंने कार के बैक मिरर से फिर पीछे की तरफ देखा। जो कि मैं हर 20 से 30 सेकंड के बाद कर रहा था। यह जानने के लिए कि डॉली कार लेकर हमारे पीछे आ रहा है या नहीं।

लेकिन शायद एक और घटना घट चुकी थी।

"बुलशिट...!" तभी मैंने चीखती हुई आवाज़ में कहा।

“डॉली की कार अब हमारी कार के पीछे नहीं आ रही है।" मैं चीखा और कार का दरवाज़ा खोलकर कार से बाहर आ आया और पीछे सड़क की तरफ भागा।

“राज रुको!” जय ने मुझे रोकने की कोशिश करते हुए कहा। लेकिन तब तक मैं दरवाज़ा खोलकर सड़क पर आ चुका था।

“रोनित, तुम ज्योति के साथ कार में ही रुको!” कहकर जय मेरे पीछे भागकर आया।

“अरे, अब डॉली कार लेकर कहाँ चली गई? अभी तो उसकी गाड़ी पीछे ही आ रही थी।" जय बड़बड़या।

"यार जय, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा! अभी कुछ देर पहले वह मुझे पीछे दिखाई दे रही थी और तुम कह रहे थे कि कार से कोई टकराया था। लेकिन यार, यहाँ सड़क पर तो कोई नहीं है।"

"पता नहीं राज, लेकिन जाने क्यों ऐसा लग रहा था जैसे कोई एकदम से सड़क के बीच में आ गया हो और कार से टकराया हो। मतलब मैं बिल्कुल श्योर नहीं हूँ, लेकिन कोई था जरूर।" जय आस-पास देखता हुआ बोला।

क्या सच था पता नहीं, लेकिन उस सीधी-सपाट सड़क पर किसी इंसान या किसी भी गाड़ी का नामो-निशान नज़र नहीं आया। न ही कोई शख्स नज़र आया। तो फिर जय ने ऐसा क्यों कहा कि कोई सड़क पर कार से टकराया था। फिलहाल मुझे डॉली की चिंता ज्यादा थी।

उस भयानक जंगल के बीच उस वीरान सड़क पर खड़ा मैं पागलों की तरह चीखने लगा – “डॉली...! डॉली...!”

*** *** *** *** *** ***
 
दृश्य:04

“डॉली…!”

मैं जोर-जोर से सड़क के बीचो-बीच खड़ा होकर डॉली का नाम पुकार रहा था।

“ओह्ह गॉड! मुझे इसी बात का डर था। यार, मुझे तो अब बहुत डर लग रहा है। जो कुछ भी मैंने देखा, तुम लोग उस पर यकीन करो या मत करो, लेकिन मैं जानता हूँ मैंने क्या देखा था। वाकई में वह एक ऐसी लड़की थी जिसका आधा शरीर नहीं था और इस बात की गवाह भी डॉली है। अब उसकी कार कहीं भी नज़र नहीं आ रही है। मुझे उसे ऐसे अकेले नहीं छोड़ना चाहिए था।” मेरी हालत वाकई में बिल्कुल ख़राब थी।

“देखो, तुम जो कुछ भी कह रहे हो, हम यह नहीं कह रहे हैं कि तुम झूठ कह रहे हो। पर यह भी तो हो सकता है कि उसकी कार में कोई प्रॉब्लम हुई हो।” जय ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए मुझे समझाने की कोशिश की।

“जय, हम दोनों ने जो कुछ भी देखा, मैं उसके बलबूते पर दावे के साथ कह सकता हूँ कि डॉली अब जरूर किसी बड़ी मुसीबत में है।” मैंने घबराते हुए कहा।

"राज, मैंने ऐसा बिल्कुल नहीं कहा कि तुम गलत बोल रहे हो। हमें वापस कार में जाना होगा और वापस जाकर डॉली को ढूँढ़ना होगा।"

अभी जय और मैं पलटकर कार की तरफ जाने ही वाले थे कि तभी हमें कार से चीखने की आवाज़ आई।

"ये तो रोनित के चिल्लाने की आवाज़ है, अब इसे क्या हुआ।" कहते हुए जय कार की तरफ वापस दौड़ा और मैं भी उसके पीछे घबराकर कार की तरफ भागने लगा। वहाँ पहुँचकर हमने देखा कि कार का फ्रंट डोर खुला हुआ है और बैक सीट पर बैठा रोनित जोर-जोर से चिल्ला रहा था। कार में ज्योति नहीं थी।

मेरा दिमाग घूमने लगा था। मैंने कार का बैक डोर खोला और और रोनित को पकड़कर पूछा – "रोनित, क्या हुआ तुझे और... और ज्योति कहाँ गयी? वह कार में क्यों नहीं है तेरे साथ?"

“मैं कुछ नहीं कर पाया।" वह बड़बड़ाने लगा।

"क्या हुआ? ज्योति कहाँ है?" जय चिल्लाया।

"पता नहीं, ऐसा लगा जैसे कुछ था। जिसकी वजह से मेरा दिमाग घूमने लगा था। मैं चाह कर भी कुछ नहीं कर पाया और अगले ही पल ज्योति ने कार का डोर ओपन किया और अचानक से वह दौड़ती हुई उन झाड़ियों की तरफ चली गई।”

“झाड़ियों की तरफ चली गई?” कहते हुए जय ने सड़क के किनारे बने जंगलों की तरफ देखा तो वहाँ घनी झाड़ियाँ नजर आ रही थी।

सड़क पर बीचो-बीच खड़ी कार की हेडलाइट से आती रौशनी के अलावा कहीं भी किसी प्रकार की रौशनी नहीं थी। दोनों तरफ घना काला खौफनाक जंगल ही नजर आ रहा था।

"तू पागल हो गया है क्या? ज्योति झाड़ियों में क्यों गई और तूने उसे जाने क्यों दिया?"

"मैं नहीं जानता राज! मैंने तुझसे कहा न, ऐसा लगा कि मुझ पर कुछ अजीब सा किसी ने कोई जादू कर दिया है। मैं उसे चाहकर भी रोक नहीं पाया। मैं इतना डर गया था कि मेरी चीख निकल गई लेकिन तब तक ज्योति उन झाड़ियों में जा चुकी थी। लेकिन कुछ तो था जो उन झाड़ियों की तरफ बढ़ रहा था। जिसे देखकर ज्योति उसके पीछे गई।"

मैं रोनित का चेहरा और उसका डर साफ-साफ पढ़ पा रहा था। मैं जानता था कि रोनित झूठ नहीं बोल रहा है।

"झाड़ियों की तरफ कोई था? ओह्ह मुझे पहले ही शक था। इसका मतलब पीछे डॉली और इधर ज्योति, वह दोनों को ले गयी।" कहते हुए मैंने कार की बोनट पर एक ज़ोरदार मुक्का मारा।

"राज, तू यह सब क्या बोल रहा है। देख, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है। पहले डॉली और अब ज्योति! मुझे ज्योति को जाकर ढूँढ़ना होगा। हमें उन दोनों को किसी भी हालत में ढूँढ़ना होगा। यह सब क्या हो रहा है यार?" जय ने लगभग रोते हुए कहा।

मैं सब का डर समझ सकता था। इस समय जो भी घटनायें हमारे साथ घट रही थीं और अब उन अफवाहों को जिनको मैं अक्सर झूठ बोल कर ठुकरा दिया करता था, हकीकत में मानने के लिए गवाही दे रहे थे।

वह जंगल अपनी भयानकता पर उतर आया था। कुछ ही पल में डॉली और ज्योति दोनों ही गायब हो चुकी थीं।

"जल्दी से कार की डिग्गी खोलो। उसमें टॉर्च है। उसे जल्दी से लेकर आओ और झाड़ियों की तरफ जाओ जैसा कि रोनित बता रहा है। हमें जल्दी ही उसे ढूँढ़ना होगा। राज, तुम एक काम करो। कार से तुम रोनित के साथ पीछे की तरफ जाओ और जल्दी से देखो की डॉली कहाँ है। हमें अभी के अभी दोनों को किसी भी हाल में ढूँढ़ना होगा।" जय ने घबराई हुई आवाज़ में कहा।

"पागल मत बनो! हम तुम्हें यहाँ अकेला छोड़कर नहीं जा सकते। मैं जाऊँगा ज्योति को ढूँढ़ने, तुम और रोनित मिलकर डॉली को ढूँढ़ने जाओ।"

"यार, यह बहस का समय नहीं है! मैं कह रहा हूँ न, मैं ज्योति को देखने जा रहा हूँ। तुम दोनों जल्दी से उसको ढूँढ़ने जाओ। टाइम वेस्ट मत करो।"

जय सही कह रहा था टाइम वेस्ट करना अब हम पर भारी पड़ने लगा था। मैंने फटाफट कार की पीछे की डिग्गी खोली और उसमें से एक टॉर्च निकाला।

"तुम दोनों कार लेकर पीछे की तरफ जाकर देखो। डॉली आखिर किसी मुसीबत में तो नहीं फँसी। मैं तब तक ज्योति को ढूँढ़ता हूँ। बाद में तुम्हें यही मिलूँगा। जल्दी करो।"

"हे भगवान! मैं तो कब से कह रहा हूँ कि जंगल में पहले भी बहुत सारी घटनायें घट चुकी हैं और आज तो अमावस की रात भी है। मैं नहीं जानता था कि वह सब घटनायें कभी हमारे साथ भी हो जायेंगी।" रोनित ने घबराते हुए और रुआँसी आवाज़ में कहा, “लगता है हम सब अब यहाँ से निकल नहीं पायेंगे।

"रोनित, शट अप! अब तुम शुरू मत हो जाओ। मैंने तुम्हें कितनी बार कहा है कि वह सब सिर्फ सुनाने वाली कहानियाँ हैं। मैं फिर बता रहा हूँ, ऐसा कुछ नहीं होता। अमावस और यह सब... ऐसी कोई रात नहीं होती और न ही भूत-प्रेत जैसी कोई चीज होती है। देखो, अभी हम किसी मुसीबत में फँस गए हैं जिसके पीछे का कारण जब तक मुझे समझ में नहीं आता, मैं इन सब बातों को नहीं मानूँगा। मैं रिक्वेस्ट करता हूँ कि इस तरह की बातें करके तुम और मत डराओ।" जय ने रोनित को डाँटते हुए कहा।

"जय, तुम इस बात को मानो या मत मानो, पर मैं राज की बात को अब तक भले मजाक और हँसी में लेता आया था। लेकिन आज जो कुछ भी मैंने अपनी आँखों से देखा है, उस पर मैं भूतिया बातों को किसी भी तरह से जोड़ना नहीं चाहता। लेकिन ये भी तो सच है न कि ऐसी घटनायें पहले भी इस जंगल में हो चुकी हैं। अब मैं इस पर विश्वास करने लगा हूँ। अब यही हमारे साथ हो रहा है। मैंने थोड़ी देर पहले ज्योति को उन झाड़ियों में जाते हुए देखा है और मैं जानता हूँ कि उस समय मैंने और क्या देखा था। वह कुछ अजीब सा था जिसे मैं एक्सप्लेन नहीं कर सकता।" रोनित ने कहा।

"अब तुम यहाँ पर भाषण-बाजी बंद करोगे? हमें डॉली और ज्योति को ढूँढ़ना है यार।" जय चिल्लाया।

"मैं जय की बात का सपोर्ट करता हूँ। इस समय हमें ज्योति और डॉली को ढूँढ़ने की कोशिश करनी चाहिये।" मैंने कहा।

"देखो, यह भूत-प्रेत अमावस जैसी कोरी-कल्पना जैसी उन सुनी-सुनाई बातों पर बकवास करने का टाइम नहीं है। क्योंकि मैं इन सब बातों को नहीं मानता और न ही तुम दोनों को मानना चाहिए। जो कुछ भी हो रहा है, उसके पीछे कारण कुछ और भी हो सकता। मुझे ऐसा लगता है कि तुम लोगो ने जो कुछ भी देखा है, वह एक किस्म का भ्रम था, न कि कोई हकीकत। देखो, राज ने ही हमेशा हम लोगों को यह समझाया है कि यह सब बातें सिर्फ कोरी-कल्पना होती हैं। मैं यह नहीं कह रहा कि तुम दोनों झूठ बोल रहे हो, लेकिन अभी हमें हिम्मत से काम लेना होगा। मुझे नहीं पता ये सब क्या हो रहा है।" जय ने कहा। वह अपनी जगह सही था।

"और कितनी हिम्मत दिखायें। अब सब कुछ सच सा लगने लगा है।" रोनित लगभग रो रहा था।

"तो तुम्हें क्या लगता है रोनित, ज्योति आखिर तेजी से भागकर इन झाड़ियों में क्यों चली गई होगी?" मैंने रोनित की तरफ देखकर पूछा।

"देखो, तुम्हारे इस सवाल का जवाब तो मेरे पास नहीं है। लेकिन मैंने उसे भागते हुए देखा है और मैं यह जानना चाहता हूँ कि उसने ऐसा क्यों किया।"

"गाइस, प्लीज स्टॉप इट! मैं अभी बस यह जानना चाहता हूँ कि तुम दोनों अभी तक कार से पीछे जाकर डॉली को क्यों नहीं ढूँढ़ रहे हो? इन सारी बातों पर घर पहुँचकर भी डिसकस किया जा सकता है। फिलहाल जल्दी से हमें यहाँ से निकलना होगा। बस तुम दोनों जल्दी से कार लेकर पीछे की तरफ जाओ।" जय ने चिल्लाकर कहा।

अगले ही पल टॉर्च उठाकर तेजी से वह झाड़ियों की तरफ बढ़ गया। मैं जानता था, वह ज्योति को ढूँढ़ने जरूर जाएगा। वह ज्योति के लिए मुझसे भी ज्यादा परेशान था और उसकी परेशानी मैं समझ भी सकता था। पर मैं उसे इस तरह अकेला नहीं छोड़ना चाहता था, लेकिन उसकी जिद के आगे मेरी एक न चली। वह हमें छोड़कर झाड़ियों में चला गया।

झाड़ियों में घुसने से पहले उसने हमारी तरफ इशारा किया और हमें जाने के लिए कहा। अब वह उन जंगलों में हमारी नज़रों से गायब हो चुका था।

अगले ही पल मैं तेज़ी से भागकर कार में बैठा और कार को पीछे की तरफ बढ़ाने लगा। कार में रोनित मेरी बगल की सीट पर बैठा था। वह बार-बार खिड़की से उन झाड़ियों की तरफ देख रहा था, जिधर जय और ज्योति अब आँखों से ओझल हो गये थे।

“जय कह रहा था हमारी कार से कोई टकराया था। क्या तुम्हें सड़क पर कोई मिला?”

"नहीं! वहाँ पर कोई भी नहीं था।"

"कुछ तो गड़बड़ है यहाँ।"

"रोनित, अपने दिमाग को शांत करो! मैंने तुमसे जो कहा था, तुमने वह किया या नहीं?"

"हाँ! जैसा तुमने कहा था, वैसा मैंने कर दिया। सड़क पर मैंने अपनी जैकेट को एक पत्थर के ऊपर रख दिया है। ताकि वापसी में हमें यह याद रहे कि जय और ज्योति को हमें यहाँ पर आकर ढूँढ़ना है।"

"रोनित, मुझे लगता है कि डॉली किसी कारणवश पीछे रुक गई होगी। हो सकता है उसकी गाड़ी का टायर पंचर हो गया हो या कोई दूसरा कारण भी हो सकता है। इस सुनसान सड़क और अंधेरे जंगल में उसकी मदद फिलहाल तो कोई करने से रहा।" मैं रोनित से झूठ बोलने की कोशिश करता रहा। मैं जानता था, वह इस समय मुझसे भी ज्यादा डरा हुआ था।”

"तुम जो चाहे कहो। पर मैं जानता हूँ, न तो टायर पंचर हुआ होगा, न ही वह किसी कारण से रुकी होगी। कुछ ऐसी अजीब घटना है जिसकी तह तक जाने के लिए हमें उसे ढूँढ़ना होगा। सबसे बड़ी गलती जानते हो हमने क्या की है? ज्योति को उन जंगलों में जाने के बाद हमने जय को भी अकेला छोड़ दिया है।"

"मैं जानता हूँ तुम्हारी परेशानी की वजह। पर तुम तो जय को जानते ही हो वह एन.एन.सी. कैडेट रह चुका है और वह हमेशा हर काम अकेले ही करना पसंद करता है। उसने तो ऐसे जंगलों में बड़ी-बड़ी कैंपिंग की हुई है। हम फटाफट पीछे की तरफ जायेंगे। यहाँ गाड़ी रोकने के दो-तीन मिनट पहले तक डॉली हमें नजर आ रही थी। इसका मतलब वह ज्यादा पीछे तो नहीं होगी। उसकी कार कुछ ही पीछे होगी। इस पूरे जंगल में यह इकलौती सड़क है। इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता भी नहीं। तुम जानते हो शहर अभी यहाँ से काफी दूर है। अगर वह किसी कारण से पीछे रुकी होगी तो वह हमें पता चल ही जायेगा।”

अगले एक मिनट कोई कुछ नहीं बोला। मैं तेजी से कार को पीछे की दिशा में भगाता रहा।

कार का डैशबोर्ड 11:59 का समय बता रहा था।

*** *** *** *** *** ***
 
दृश्य:05

मैं तेजी से कार को भगा रहा था। रोनित की नजरें सामने और बगल के शीशे की तरफ़ थी। जिससे वह अंधेरे जंगलों में झाँकने की कोशिश कर रहा था।

"कुछ सालों पहले संग्राम शर्मा और उसकी फैमिली ऐसे ही इन्हीं जंगलों में गायब हो गई थी। उनके साथ क्या हुआ, किसी को कुछ पता नहीं चला।" रोनित ने हकलाते हुए कहा।

"तुम जानते न, यह सिर्फ लोगों के द्वारा बनाई गई झूठी कहानियाँ हैं और कुछ नहीं। हमें इस पर विश्वास नहीं करना चाहिए। अगर हम इस ओर सोचते रहें तो हमारा डर और बढ़ता जाएगा। कुछ नहीं होगा हमें।" मैंने स्टेयरिंग पर मुक्का मारते हुए कहा।

अब मैं काफी तेजी से कार भगाने लगा था।

“तुम तो विश्वास करते हो न? तुमने जो कुछ भी देखा और हमें बताया, उसके बाद तो मुझे इस बात का यकीन हो चुका है कि वाकई में हम लोग अब मुसीबत में फँस चुके हैं। जितना मैं जानता हूँ, उसके मुताबिक आज अमावस की काली रात है। आज के दिन भूत-प्रेत, तंत्र-मंत्र की शक्तियाँ अपने चरम सीमा पर होती हैं। फिर संग्राम शर्मा वाली घटना किसी भी तरह से झूठी नहीं है। वह लड़का जो इन्हीं जंगलों से गुज़र रहा था, आज एक साल बाद भी नहीं मिला और न ही उसकी कार मिली। कहाँ चले गए ये लोग? मैं जानता हूँ तुम इसे आज भी एक कहानी समझते हो; लेकिन कुछ सालों पहले जो कुछ भी उनके साथ हुआ वह…!” रोनित ने अभी इतना ही कहा था कि मैं जोर से चिल्लाया –

“वह रही कार…।”

इतना कहते ही रोनित ने विण्डों के मिरर से बाहर की तरफ देखा। हमें सामने सड़क के किनारे एक कार खड़ी दिखाई दी। उस कार को पहचानना हम लोगों के लिए इतना भी मुश्किल नहीं था। उसे हमने दूर से ही पहचान लिया था। मैंने देखा कार की हेडलाइट बंद थी। मैंने कार तेजी से दाहिने तरफ ले जाकर रोक दिया। यह मेरी वही कार थी जिसे डॉली ड्राइव कर रही थी। कार रोकते ही रोनित और मैं तेजी से दरवाजा खोल कर सड़क किनारे खड़ी उस कार की तरफ भागा।

“कार में कोई नहीं है। कार में कोई नहीं है राज!” उसने अपनी बात दोहराई, “मैंने तुमसे कहा था, अब देखो डॉली भी गायब हो चुकी है। पहले ज्योति और अब डॉली। अब हम क्या करेंगे?” रोनित ने लगभग रोते हुए कहा तो मैं उसके कंधे पर हाथ रखकर बोला –

"हमें आस-पास सबसे पहले डॉली को ढूँढ़ना होगा। उसे यहीं कहीं होना चाहिए।"

मैं हिम्मत से काम लेना चाहता था। मैं रोनित को भी हिम्मत देना चाहता था। लेकिन ये दृश्य देखकर मैं खुद शॉक था। आखिर डॉली कार ऐसे बीच सुनसान सड़क पर छोड़कर क्यों जाएगी?

अगले ही पल, हम दोनों डॉली को आस-पास ढूँढ़ने लगे। हम लगातार डॉली का नाम जोर-जोर से पुकारने लगे। लेकिन उस घने और काले जंगल में हमारी आवाज़ गूँज कर जंगल में जैसे गुम हो जाती। आस-पास बहुत आवाज़ देने के बाद भी हमें डॉली कहीं भी नजर नहीं आई। न ही हमारे इतने चीखने और चिल्लाने का किसी ने जवाब दिया। यहाँ तक कि जंगल भी पूरी तरह से शांत था। सड़क पर अब भी किसी गाड़ी का नामो-निशान नहीं था। बढ़ती हुई रात के साथ-साथ जंगल और भी डरावना नजर आने लगा था। एक पल के लिए तो मुझे ऐसा एहसास हुआ जैसे ही वह जंगल है ही नहीं, जहाँ से हम गुजर रहे थे। जैसे वह जंगल अपना रूप बदल रहा था। शायद फिर एक बार मेरा भ्रम मुझ पर हावी होने लगा था।

"राज, डॉली कहाँ चली गयी होगी? यहाँ तो कहीं मिल नहीं रही और आस-पास इतना घना जंगल है। मुझे लगता नहीं कि वह जंगल में गई होगी। आखिर कोई अपनी कार छोड़कर बिना किसी कारण जंगल में क्यों जाएगा। कार तो पंचर भी नहीं है और दूसरी बात कार की चाबी भी कार में लगी है।" रोनित की कही एक-एक बात सच थी।

अब मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मेरी हालत खराब होने लगी थी। डॉली को लेकर मैं बस रोने ही वाला था। मैं उसे ऐसे नहीं खो सकता था। कभी नहीं। कभी-कभी कुछ घटनायें आपकी ज़िंदगी बदल देती हैं। आज ऐसा ही कुछ हमारे साथ होने लगा था।

अगले कुछ मिनटों तक हम उसे इधर-उधर ढूँढ़ते रहे, लेकिन डॉली का कोई अता-पता नहीं था। या शायद सच्चाई यही थी कि डॉली वहाँ नहीं थी। पिछले कुछ घंटों में जो भी घटनायें हमारे साथ घटी थीं, उनके पीछे के तर्क को समझना अब भी हमारे लिए काफी मुश्किल था। डॉली को आस-पास ढूँढ़ते हुए अब काफी वक्त बीत चुका था।

मुझे अब भी डर था। शायद जो घटना हमारे साथ घट रही थी, वह हमें इस जंगल से बाहर निकलने भी देगी या नहीं। डॉली का कोई सुराग आस-पास नजर नहीं आया। पीछे जय और ज्योति जंगल में जाने किस अंधेरे से लड़ाई लड़ रहे थे। हमारे पास सोचने का ज्यादा समय नहीं था। मुझे अभी जाकर पहले ज्योति और जय को वापस लाना था। मेरे दिमाग में फिलहाल इससे बढ़कर कुछ नहीं आ रहा था। मैं किसी को खोना नहीं चाहता था।

“रोनित, अब यहाँ भटकने से कोई फायदा नहीं। मुझे लगता है सबसे पहले हमें पीछे जाकर ज्योति और जय को ढूँढ़ना चाहिए। कहीं उनके साथ भी कुछ गलत तो नहीं हुआ; क्योंकि वह भी उन झाड़ियों की तरफ गए हैं। मुझे लगता है पहले हमें जय और ज्योति को साथ में लेकर आना चाहिए। फिर हमें डॉली को भी ढूँढ़ना होगा।"

फिलहाल हमारे पास दूसरा कोई चारा नहीं था। पहले तो मैं रोनित से जिद करता रहा कि मैं आस-पास के जंगल में जाकर डॉली को देखना चाहता हूँ। लेकिन रोनित के साथ-साथ मैं खुद भी इस बात को जानता था कि उसे ढूँढ़ना इतना आसान नहीं होगा।

अगले ही पल हम दोनों दौड़ते हुए कार की तरफ गए। मैंने कार स्टार्ट की और हमारी कार सरपट वापस उसी तरफ दौड़ने लगी जिस तरफ जय और ज्योति थे।

"ओह्ह गॉड! मुझे लगता है अब हमारा बचना बहुत मुश्किल है राज। हम लोग यहाँ से बाहर कैसे निकलेंगे? तुमने देखा न वहाँ डॉली की गाड़ी थी। लेकिन डॉली हमें कहीं पर भी नहीं मिली। कहीं हम ज्योति और जय को भी तो नहीं खो देंगे न?" रोनित सहमे हुए बोला।

"अब तो हम भगवान से बस यही दुआ कर सकते हैं कि हम सब इस जंगल से जल्दी से बाहर निकल जाए; क्योंकि यहाँ पर जो भी घटनायें हो रही है, वह मामूली नहीं है। हम लोग पीछे बहुत ढूँढ़ने के बाद भी डॉली को ढूँढ़ नहीं पाए और उधर जय, ज्योति को ढूँढ़ने उस घने जंगल में जा चुका है। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा कि अभी हमें क्या करना चाहिए? लेकिन फिलहाल हमें वापस जाना ही होगा।" कहकर मैं तेजी से गाड़ी भगाता रहा।

अगले कुछ पल कार में शांति रही। हम दोनों तेजी से सड़क पर और आस-पास के जंगलों की तरफ घूरते रहे। मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी। डर हम दोनों पर हावी होता जा रहा था। आस-पास का डरावना माहौल हमें कुछ और सोचने का मौका नहीं दे रहे थे।

कार चलाते हुए हम काफी आगे तक निकल चुके थे।

"रोनित, इतनी देर हो गई। अभी तक वह निशान नहीं आया? जहाँ पर तुमने उस जगह पर अपना जैकेट रखा था। कहीं हम रास्ता तो नहीं भटक गए।" मैं हैरान था। काफी देर ड्राइव करने के बावजूद भी अब तक वह निशान नहीं आया था। जहाँ पर हमने जय और ज्योति को छोड़ा था।

"यार, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा। आस-पास का माहौल देखकर तो ऐसा लगता है जैसे हम किसी और ही सड़क पर चल रहे हैं।" रोनित ने कहा। मैं भी आस-पास उन जंगलों और उस एकलौती सड़क को घूरने लगा।

"लेकिन ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि तुम जानते ही हो कि यहाँ पर सिर्फ एक ही रास्ता है। हम शायद सही सड़क पर ही हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा कि जब तुमने जैकेट सड़क पर रखा था तो वह गया कहाँ? हवा भी इतनी तेज नहीं चल रही है कि जैकेट वहाँ से उठकर हट जाएगा।" मैं हैरान था।

"आई डोंट नो! मैंने उसके ऊपर दो बड़े-बड़े पत्थर भी रखे थे।"

"भूत-पिशाच निकट नहीं आवे। महावीर जब नाम सुनावे। हे महावीर, हे बजरंगबली! हम सबकी रक्षा करो। हम सब को इस मुसीबत से बाहर निकालो। जिस तरह से दुनिया में शैतान है, उसी तरह से इस दुनिया में भगवान भी हैं। अगर वाकई यह काम शैतानी ताकतों का है तो हे भगवान, तुम्हें धरती पर आकर हमारी रक्षा करनी होगी। मैं तुम पर विश्वास करता हूँ और मैं तुमसे अपने और अपने दोस्तों के लिए भीख माँगता हूँ। प्लीज, हमारी रक्षा करो!" कहते हुए रोनित जोर-जोर से हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ता रहा। इस समय मन ही मन मैं भी भगवान का नाम ले रहा था। लेकिन क्या भगवान वाकई हमारी मदद करने वाले थे?

"यार, मुझे समझ नहीं आ रहा! वह निशान कहाँ चला गया? लगता है हम काफी दूर निकल आए हैं।" कुछ देर बाद मैंने उससे पूछा।

"पता नहीं राज, मुझे अच्छे से याद है। मैंने जैकेट को सड़क के ऊपर ही रखा था। शायद हम बातों-बातों में बहुत पीछे चले गए हो। हमें आगे बढ़ते रहना चाहिए।"

मैं और रोनित अपने आस-पास बने उन जंगलों और पेड़ों को पहचानने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन फिलहाल इस अंधेरी रात में और खासकर उन जंगलों को पहचान पाना हमारे लिए मुश्किल था कि हमने ज्योति और जय को कहाँ पर छोड़ा था।

कार में बैठे हम दोनों लगातार जंगलों की तरफ झाँक रहे थे। जाने अब कौन सी अनहोनी उनके साथ घटने वाली थी। तेज गति से मैं अब भी कार को दौड़ा रहा था। बगल की सीट पर बैठा हुआ रोनित, अब भी भगवान के मंत्र जाप में लगा हुआ था। तेजी से ड्राइव करते हुए मैं भी जय, ज्योति और डॉली के लिए परेशान था।

मैं बार-बार रह-रह कर कभी सामने के मिरर से तो, कभी बगल के मिरर से उस जगह को ढूँढ़ने की नाकाम सी कोशिश करता रहा।

"राज, गाड़ी रोको!" अचानक रोनित ने कहा तो मैंने बिना किसी सवाल के गाड़ी रोक दिया।

"क्या हुआ रोनित, अचानक गाड़ी रोकने को क्यों कहा?"

आगे थोड़ी दूर सड़क पर अजीब सी धुंध छाई हुई थी। ऐसा लग रहा था जैसे धुंध का एक गुब्बारा सा था। आगे की सड़क उस धुंध की वजह से कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। हमारी कार उस धुंध से कुछ फीट की दूरी पर रुकी हुई थी।

"वह देखो, उस तरफ।" कहते हुए रोनित ने दाहिनी तरफ के मिरर से मुझे कुछ दिखाना चाहा।

उस तरफ का दृश्य देखकर मेरे होश-हवास गुम होने लगे। सड़क के दाहिनी तरफ जंगलों में वह जो कुछ भी था, धीरे-धीरे वह धुंध को अपनी तरफ जैसे खींच रहा था।

"रोनित, चाहे जो कुछ भी हो जाए! तुम कार का दरवाजा मत खोलना और हमें बिल्कुल शांत रहना होगा।" कहकर मैंने कार बंद कर दिया। रोनित इस बात से घबराया हुआ था।

इस तरह उस घने जंगल में बने उस वीरान सड़क पर कार रोकना, वाकई किसी को भी पसंद नहीं आने वाला था।

रोनित कभी शीशे से बाहर सड़क की तरफ तो कभी मेरे चेहरे को घूरता रहा। मैं उसे इशारे से चुप रहने को कहता रहा। हम दोनों शांत थे। जो कुछ भी हो रहा था वह बहुत ही अजीब और डरावना मंज़र था। कार के अंदर एक अजीब सा सन्नाटा पसरा रहा।

“राज, यार आखिर वह है क्या?" रोनित ने जब मुझसे पूछा तो मैंने फिर एक बार उसे अपने होंठों पर उंगली रखकर चुप रहने का इशारा किया।

हमारी नजर फ्रंट मिरर से बाहर सड़क की तरफ थी। अब बाहर का दृश्य और भी डरावना होने लगा था।

"राज, प्लीज बता यार! वह क्या है?" रोनित ने अपने डर को थामे हुए फुसफुसाकर पूछा।

"मैं जैसा कहता हूँ, वैसा करो। हमें कोई हरकत नहीं करनी है। कोई भी कार का दरवाजा नहीं खोलेगा और अब मुझे कार की हेडलाइट बंद करनी होगी।" कह कर मैंने जल्दी से कार का हेड लाइट बंद कर दिया।

जंगल के बीचो-बीच अंधेरे में उस सुनसान सड़क पर खड़ी हमारी कार, कार में बैठे हम दो लोग और जंगल के बीच एक भयानक खामोशी।

*** *** *** *** *** ***
 
दृ श्य:06

उस समय हो रही उस अजीब और खौफनाक घटना को देखकर हम सभी पूरी तरह से स्तब्ध थे।

दो जोड़ी आँखें कार के शीशे से दाहिनी तरफ होती हुई घटनाओं को देख रही थीं। अब तक रोनित और मैंने जो कुछ देखा था, उसके बाद हम मान चुके थे कि भूत-प्रेत होते हैं। क्योंकि मैं न तो भूत-प्रेतों को मानता था और न ही उन पर विश्वास करता था। वहीं मेरे बगल की सीट पर बैठा हुआ रोनित, अब सामने चल रहे मंजर को देखकर बड़ी आसानी से मेरे साथ-साथ भूतों पर विश्वास करने के लिए मजबूर हो चुका था। क्योंकि अब जो कुछ भी घट रहा था, वह कोई आम इंसान इतनी आसानी से नहीं देख पाता।

कार से लगभग दो सौ मीटर की दूरी पर यानि की जंगल की तरफ लगभग दस फीट की एक परछाई नजर आ रही थी। जो लगभग एक मिनट पहले दो फीट की ऊँचाई पर थी। देखने में वह किसी पेड़ की तरह लग रही थी। लेकिन यूँ अचानक दो फीट से दस फीट की ऊँचाई में ऊपर की तरफ उठना, इस बात की साफ गवाही दे रहे थे कि वह कोई पेड़ तो नहीं था। वह जैसे सड़क पर छाए उस धुंध को अपनी तरफ खींच रहा था। साथ ही उसका आकार बढ़ता जा रहा था। मैं और रोनित अभी उस आकृति को देख रहे थे।

अगले कुछ पल बाद भी एक भयानक गुर्राहट की आवाज़ आस-पास जंगल के उस शांत माहौल को तोड़ रही थी। हमारी कार की हेडलाइट बंद होने के बावजूद भी वह आकृति हमें जाने क्यों लगभग साफ दिखाई दे रही थी।

"वह अब हमारी तरफ आ रहा है।" रोनित ने घबराते हुए कहा। मैं खामोश रहा।

"कुछ कर यार! वह हमारी तरफ आ रहा है। अब हमें क्या करना चाहिए? राज, तुम गाड़ी चालू करो।" रोनित ने घबराते हुए कहा।

"चुपचाप कार के अंदर बैठे रहो। किसी भी तरह की हलचल मत करना।" मैंने बिना रोनित की तरफ देखे कहा तो वह चुपचाप शांत हो गया।

उसने अपना हाथ कसकर मेरे हाथ के ऊपर रखा हुआ था। यह डरावना माहौल अपनी भयानकता पर उतर आया था। जिसने हमारा शरीर बर्फ की तरह जमा रखा था।

वह भयानक आकृति अब हमारी कार की तरह धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी।

"मुझे बहुत डर लग रहा है। हमें यहाँ नहीं रुकना चाहिए। हमें लगता है हमें यहाँ से जल्दी से निकलना चाहिए। तुम कार स्टार्ट करो।" कहकर रोनित ने अपना हाथ चाबी घुमाने के लिए बढ़ाया। तभी मैंने बढ़कर उसका हाथ पकड़ लिया।

"मैंने तुमसे कहा, चुपचाप कार के अंदर बैठे रहो। कोई भी हलचल मत करो। वरना बहुत बड़ी दुर्घटना हो सकती है।" मैंने उसे वार्निंग देते हुए कहा।

वह भयानक आकृति बड़ी खामोशी से हमारी तरफ बढ़ रही थी। फिर धीरे-धीरे कार के दाहिने तरफ पहुँच गयी। उसकी हाइट लगभग 10 फीट के आस-पास थी। ऐसी चीज हमने जिंदगी में पहले कभी नहीं देखी थी।

जब वह कार के बिल्कुल करीब पहुँचा। तब मुझे यह समझते देर न लगी कि यह वही है जिसका जिक्र मैं कई बार अपनी दादी से सुन चुका था। आज हकीकत में वह हमारे इतने करीब था। मेरा शक सही था। ये वही था जो मैं सोच रहा था। आज जाने क्यों मुझे बुजुर्गों द्वारा सुनाई गई भूत-पिशाचों की कहानियाँ सच लगने लगी थीं। लेकिन ये उन कहानियों से भी डरावना था। हमारा शरीर डर से जमने लगा था। ऐसा लग रहा था जैसे अब हमारे शरीर में जान ही नहीं है। ठीक वैसा ही जैसा कि कहा जाता था कि भूत को साक्षात सामने देखकर कैसा लगता है।

वह मंजर मजबूत से मजबूत इंसान को भी पिघला देने जैसा है।

कार में बैठे हुए हमारी नजर अब भी उस आकृति की तरफ थी। तभी हमें अचानक ऐसा लगने लगा जैसे उस आकृति की दो आँखें निकल आई हो। बिल्कुल लाल किसी अंगारे की तरह और वह जैसे हमें ही घूर रही हो। अंधेरे में चमकती हुई उसकी आँखें हमारे डर को बढ़ाने के लिए काफी थी।

"मेरी बात ध्यान से सुनो। कोई भी कुछ नहीं कहेगा। कोई भी कोई हरकत नहीं करेगा। चाहे जो हो जाए, कोई कुछ नहीं बोलेगा।" मैंने बहुत ही धीरे से कहा। क्योंकि उसके होने वाले अंजाम के विषय में भी शायद मैंने सोचना शुरू कर दिया था। उस आकृति की एक झलक इतने करीब से देखकर जैसे हमारे रीड की हड्डी में सिरहन होने लगी थी।

उस आकृति का ऊपरी हिस्सा किसी सुराही की तरह लंबा था। उसकी दो चमकती हुई आँखें जैसे हमें घूर रही थी। हम दोनों अपने डर से संघर्ष कर रहे थे। मेरी आँखें जैसे चाह कर भी उस आकृति से जुदा नहीं हो पा रही थीं। एक पल को तो ऐसे लगने लगा जैसे मैं उसके वश में हो चुका हूँ।

कार के बाहर से गुर्राने की आवाज़ तेज होती जा रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे वह आकृति कार के अंदर मौजूद हम दोनों के शरीर को ही घूर रही थी। रोनित और मैं पसीने से तरबतर हो चुके थे। धीरे-धीरे वह आकृति कार के दाहिनी तरफ से बाई तरफ बढ़ने लगी। उसी तरह हमारी गर्दन भी उस आकृति को देखते हुए दाहिनी तरफ से कार के बाई तरफ घूमने लगी। भय से काँपते हुए हम दोनों अपनी साँसें रोके चुपचाप बैठे हुए थे। डर और हमारा संघर्ष अब और भी कई गुना बढ़ने लगा था।

उस रहस्यमय आकृति को देखकर जैसे मैं सब कुछ भूलने लगा था। ऐसा लगने लगा था जैसे उस पल के अलावा हमारे पास और कोई भी पल मानो था ही नहीं।

वह आकृति धीरे-धीरे बढ़ते हुए अब दाहिनी तरफ आ चुकी थी। जैसे वह हमारे कार का चक्कर लगाना चाह रही हो।

उसकी आँखें ऐसी नजर आने लगी थीं जैसे कोई जलते हुए आग के शोले हों, जो हमारी कार की तरफ घूर रही थीं।

कार का मिरर अच्छे से बंद तो है ना?

कार का दरवाजा अच्छे से लॉक तो है न?

याद रखना, उसे यह पता है कि कार के अंदर हम दोनों हैं और हम दोनों अभी भी डरे हुए हैं। जितनी जल्दी वह हमारे डर को भाँप लेगा, उतनी जल्दी वह हम पर हावी हो जाएगा।

मेरे मन में कई तरह की बातें एक साथ घूमने लगी थीं। रोनित डर के मारे मुझ से चिपका हुआ था।

हम दोनों जैसे अपनी-अपनी साँसें रोके बैठे हुए थे। सामने दिख रही वह काली आकृति हमें अब भी अच्छे से दिखाई दे रही थी। उसकी एक जोड़ी आँखें चमक रही थीं। वह आकृति डगमगाते हुए चल रही थी। धुंध हमारी कार के आस-पास अब काफी बढ़ चुका था। बाहर की चीज़ें अचानक से कम नज़र आने लगी थीं।

"राज!" रोनित मेरे कान में फुसफुसाया ही था कि मैंने उसके मुँह पर अपना दाहिना हाथ रखकर उसकी आवाज़ को रोक दिया।

"श्श... श।"

वह शायद हमारे डर की गंध को भाँपने की कोशिश कर रहा था और हमारी आवाज़ सुनने की कोशिश कर रहा था। लगता था जैसे एक पल में वह कार के अंदर आकर हम दोनों को कुछ ऐसे हश्र में बदल देता जिसके बारे में सोचना भी मुश्किल था। अमावस की रात और उसकी बातें, हमसे अब झुठलाई नहीं जा सकती थी।

अगले ही पल जंगल में धुंध गहराने के साथ-साथ वह आकृति अब हमारी कार से आगे निकलकर, सामने सड़क की ओर बढ़ने लगी थी। जिसे हम उस हल्की धुंध में भी देख पा रहे थे।

"तुम्हें नहीं लगता कि हमें यहाँ से भागना चाहिए।" रोनित ने बिल्कुल धीरे से मेरे कान के पास आकर कहा।

"हम यहाँ से भाग नहीं सकते। उसे पता है कि हम कार के अंदर हैं और हम डरे हुए हैं। गाड़ी चालू होने की आवाज़ करना, खिड़की या दरवाजा खोलना या किसी भी तरह की थोड़ी सी भी आवाज़ करना। इसका मतलब है मौत का हम पर जल्दी हावी होना।" मैंने दबी-सहमी आवाज़ में रोनित को समझाया।

हम उस 10 फीट ऊँची और भयानक आकृति को देखकर इस कदर डरे हुए थे कि हम इस बात को भी भूल चुके थे कि हमें डॉली, ज्योति और जय को ढूँढ़ना है। जैसे हमारे दिलो-दिमाग पर उसने अपना कब्जा बना रखा था और हम दोनों के सोचने-समझने की शक्ति को अपने बस में कर लिया था।

अचानक से वह भयानक आकृति धीरे-धीरे सड़क से उतर कर दाहिनी ओर उस जंगल की तरफ बढ़ने लगी थी। सड़क पर छाया हुआ धुंध जैसे उस आकृति के आस-पास मंडरा रहा था। जैसे वह सारे धुंध को अपने साथ खींच कर उन जंगलों में ले जा रहा था।

हम दोनों अभी कार की मिरर से उस आकृति को तब तक देखते रहें, जब तक वह आकृति उस जंगल में गायब नहीं हो गई।

मैं अभी भी मिरर से उस आकृति को देखने की भरसक कोशिश कर रहा था।

"राज! यार, मुझे बहुत डर लग रहा है! देखो वह जंगल में गायब हो चुका है। हमें यहाँ से जल्दी निकलना होगा।"

"नहीं, वह अब उन पेड़ों के पीछे जा छिपा है! उसकी नजर अब भी हमारे कार की तरफ है। वह हमें अभी घूर रहा है।" मैंने रोनित से कहा।

रोनित ने मिरर से उन ओर देखने की पूरी कोशिश की, लेकिन उसे कुछ दिखाई नहीं दिया।

“वह जा चुका है। राज, क्या तुम्हें अब भी वह दिखाई दे रहा है?”

मैंने रोनित की बात का कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन जाने क्यों मुझे अब भी एहसास हो रहा था, जैसे जंगल के अंदर किसी पेड़ के पीछे से उसकी वह चमकती हुई आँखें अभी मेरी आँखों से टकरा रही थी। डर के मारे शायद मेरी आवाज़ बंद हो चुकी थी। मैं चुप था और लगातार उन आँखों के ओझल होने का इंतज़ार कर रहा था। मैंने अपने दोनों हाथों से कार की सीट को ज़ोर के पकड़ रखा था।

कुछ ही पल बाद जैसे ही उस आकृति की आँखें जंगल में गायब हुई, बिना एक पल देरी किए मैंने कार चालू कर आगे बढ़ाया। कार में बैठे हम दोनों अचानक से एक झटके से हिले और कार के आगे बढ़ते ही एक लंबी साँस लेने लगे।

*** *** *** *** *** ***
 
दृश्य:07

भूत प्रेत और आत्माओं के विषय में मैंने बचपन से ही काफी कहानियाँ सुन रखी थी। मेरी दादी कहा करती थी कि हमारे आस-पास आत्माओं का जमावड़ा सा होता है, लेकिन उन्हें हम आसानी से नहीं देख सकते।

वह कहती थीं- अमावस की रात अपने साथ एक ऐसा संसार लेकर आती है जिसे कुछ लोग आसानी से देख और महसूस भी कर लेते हैं। लेकिन उनमें से बहुत कम लोग ही जिंदा रह पाते हैं। वह शक्तियाँ, वह दुष्ट आत्मायें, अमावस की रातों में कई कुर्बानियाँ माँगती हैं। कहते हैं कई तांत्रिक इस रात को आत्माओं और उन पैरानॉर्मल विषयों पर गहन अध्ययन करने निकलते हैं।

कार को मैं 70 से 80 की स्पीड में भगा रहा था और मेरे दिमाग में कई तरह के विचार घूम रहे थे।

"यार, आखिर वह था क्या?" रोनित ने एक गहरी साँस लेकर पूछा।

"एक ऐसी आत्मा या कहूँ तो एक ऐसा प्रेत जो सिर्फ जंगलों में पाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि ऐसी मनहूस काली रातों में वह सड़क पार करते हुए अक्सर देखे जाते हैं। लेकिन वह किसी को तब तक नुकसान नहीं पहुँचाते जब तक कोई उन्हें छेड़ता नहीं या फिर अक्सर वह नुकसान तब पहुँचाते हैं जब वह किसी तरह के क्रोध में हो।" मैंने इसकी कहानियाँ सुन रखी थी।

"मैं बहुत छोटा था। शायद 10 या 11 साल का। तब मैं अपने नानी के घर गया हुआ था। उस समय नाना जी के साथ हम लोग देर रात एक मेले से लौट रहे थे। नाना जी स्कूटर से मुझे और नानी को अपने साथ लेकर, खेतों के बीच बने एक छोटे से रास्ते से गाँव की तरफ लौट रहे थे। तब पहली बार मैंने इसका जिक्र सुना था। हाँ, लेकिन मैं उसे देख नहीं पाया क्योंकि नानी ने मेरी आँखों को अपने हाथों से ढक दिया था और मैंने नाना जी को यही कहते सुना कि वह हमें नुकसान नहीं करेगा। जब तक कि हम उसे किसी तरह से छेड़ेंगे नहीं। जब हम वहाँ से निकले तो मैंने अपने आस-पास कुछ धुंध सा महसूस किया था।

“घर आने के बाद हमने स्नान किया और स्नान करने के बाद हम मंदिर गए और वहाँ पर जाकर मंदिर में रखे हुए गंगाजल को अपने शरीर पर छिड़ककर ही वापस आए। तब जाकर हम सो पाए। तब नानी ने मुझे उनके बारे में बताया था। हालाँकि जिस चीज़ को मैं तब देख नहीं पाया था, आज देख लिया। सच तो ये है कि तब मुझे इस अनदेखी चीज़ पर विश्वास नहीं था। लेकिन आज…।"

हमारी कार अब भी दोनों तरफ से घिरे हुए अंधेरे काले घने जंगलों के बीच सड़कों पर दौड़ रही थी। आज रात घटी हुई तमाम घटनाओं के बीच इस घटना को भी समझ पाना फिलहाल हमारे लिए काफी मुश्किल होता जा रहा था। जब हम दोनों ने अपने होश को संभाला तो हमें याद आया कि हम किस तरह जंगल में बुरी घटनाओं से जूझ रहे हैं। पीछे डॉली की कार तो मिल चुकी थी लेकिन वह खुद गायब थी। सामने ज्योति अचानक से जंगल में गायब हो चुकी थी जिसे ढूँढ़ने के लिए जय टॉर्च लेकर जंगल में जा चुका था।

हम एक साथ तीन लोगों को खो चुके थे। एक-एक करके तीनों को ढूँढ़ना था।

काफी देर शांत बैठने के बाद अचानक से रोनित ने चिल्लाते हुए कहा –

“राज, वह देखो सामने! वहाँ सड़क पर मेरा जैकेट पड़ा हुआ नजर आ रहा है।”

मेरी नजर भी अचानक सड़क पर पड़े हुए जैकेट पर गई और मैंने अगले ही पल तेजी से कार का ब्रेक लगाया।

"भगवान का शुक्र है कि हम सही सलामत यहाँ आ पहुँचे। मुझे तो एक पल के लिए लगा कि हम रास्ता भटक चुके हैं। हे भगवान, अब जल्द से जल्द हम जंगल से बाहर निकल जाए।" रोनित भगवान से हमारे बचने की दुआ माँग रहा था।

उस डरावने मंजर को पार करने के बाद हम यहाँ पहुँचकर थोड़ी देर के लिये ही सही लेकिन खुश थे।

*** *** *** *** *** ***
 
दृश्य :08

हम दोनों कार से बाहर आए। सड़क पर और उसके आस-पास जय और ज्योति नजर नहीं आ रहे थे।

क्या जय को ज्योति अब तक नहीं मिली थी? क्या वह अब भी जंगल के अंदर ज्योति को ढूँढ़ रहा था?

"मुझे बहुत डर लग रहा है। अभी जो कुछ भी उस सड़क पर हमने देखा। वैसे ही बहुत सारी चीजें अमावस की रात में घूमती रहती है और इस घने जंगल में जय और ज्योति भी न जाने कहाँ भटक रहे होंगे। मुझे तो बहुत डर लग रहा है। तुम प्लीज जल्दी कुछ करो।" रोनित ने कहा।

मुझे भी डॉली की चिंता अंदर ही अंदर खाए जा रही थी। समझ में नहीं आ रहा कि आज हम सब पर यह कैसा ग्रहण लग गया था।

"राज, मुझे तो लगता है कि हमारे साथ भी वही सब होने वाला है जो संग्राम शर्मा और उसकी फैमिली के साथ हुआ था।" रोनित उन जंगलों की तरफ घूरते देखता रहा।

मैं इस समय खुद काफी डरा हुआ था और रोनित के डर को भी काफी हद तक महसूस कर सकता था। संग्राम शर्मा वाली बात अफवाहों की तरह फैली हुई थी। कोई कहता था उन्हें इस जंगल की आत्माओं ने गायब कर दिया तो कोई कुछ और कहता था। लेकिन सच्चाई भला किसे पता थी कि आखिर उनके साथ हुआ क्या था। बस इतना पता था कि एक साल पहले वह इसी जंगल से गायब हुए थे।

“मैं जानता हूँ, तुम जो कुछ संग्राम शर्मा के बारे में कह रहे हो या जो कुछ भी इस जंगल की घटनाओं के बारे में जिक्र किया जाता है, वह सच हो सकता है। जो कुछ भी हमने अभी सड़क पर देखा उसे तो झूठलाया भी नहीं जा सकता। लेकिन मैं तुमसे यह वादा करता हूँ कि ज्योति, जय और डॉली को कुछ नहीं होगा। हम उन तीनों को ढूँढ़ लायेंगे और हम इस जंगल से बाहर निकल जायेंगे।"

हमारी कार का दरवाज़ा खुला हुआ था। कार की हेडलाइट जल रही थी जिससे कि आस-पास थोड़ा बहुत फैला हुआ उजाला दिख रहा था।

"क्या कार में हमारे पास कोई और टॉर्च है? हमें जंगल में जाकर जय को और ज्योति को ढूँढ़ना होगा।" मैंने रोनित की तरफ देखकर पूछा।

"पता नहीं! मैं फिर भी चेक करता हूँ शायद कुछ मिल जाए।" कहकर रोनित तेजी से कार की डिग्गी की तरह बढ़ा और उसने डिग्गी खोल कर टॉर्च को ढूँढ़ना शुरू किया। अंधेरे में उसके हाथ इधर-उधर चीजों से टकरा रहे थे लेकिन उसे टॉर्च नहीं मिली।

"एक बार सामने की तरफ देखता हूँ। कहीं कुछ सामने दराज वगैरह में मिल जाए।" मैं भी अब टॉर्च ढूँढ़ रहा था।

मैं कार के सामने वाली दराज में टॉर्च ढूँढ़ने की नाकाम कोशिश कर रहा था कि अचानक रोनित की चीखने की आवाज़ सुनाई दी। रोनित की आवाज़ कार के सामने की तरफ से आ रही थी। मैं कार से फटाफट बाहर निकला तो रोनित को कार के हेडलाइट के सामने खड़ा पाया। हेडलाइट से निकलती हुई पीली रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी। उसका चेहरा एकदम पीला महसूस हो रहा था ।

अचानक रोनित कार की पिछली तरफ से सामने की तरफ कब पहुँचा, मुझे कुछ समझ में ही नहीं आया था।

"रोनित, तुम यहाँ क्या कर रहे हो? और तुम चीख़ क्यों रहे हो?"

उसकी आवाज़ किसी भय की वजह से लड़खड़ा रही थी। उसकी गहरी काली आँखें जैसे मुझे कुछ बताना चाहती थी। उसने अपने दाहिने हाथ के इशारे से मुझे कुछ दिखाने की कोशिश की। उसकी आवाज़ लगभग बंद हो चुकी थी।

मैंने रोनित के बताये इशारे की तरफ देखा तो अचानक से मेरी साँस थम सी गई।

"रोनित, यह क्या है?"

वह जो कुछ भी था, हमें चौंकाने वाला एक और किस्सा था।

कार की हेडलाइट पर खून के धब्बे थे। जब हमने कार की रोशनी में नीचे की तरफ देखा तो सड़क पर खून के कुछ और धब्बे नजर आ रहे थे।

"यह खून के धब्बे अचानक से कैसे आ गए। हमारी कार से तो कोई टकराया भी नहीं राज।" कुछ देर शांत रहने के बाद रोनित ने तेज़ आवाज़ में कहा।

"मुझे नहीं पता!"

"लेकिन यह खून के धब्बे अचानक आए कहाँ से? यह खून के धब्बे कार से सड़क पर और उसके साथ ही अगर तुम ध्यान दो तो यह खून के धब्बे सड़क से नीचे की तरफ जा रहे हैं।" रोनित सच बोल रहा था।

"ये तो वाकई ऐसा ही लग रहा है।" मैं रोनित की बात से सहमत था।

"यह तो ऐसा लग रहा है जैसे कार से टकराने के बाद कोई घसीटता हुआ सड़क से नीचे की तरफ गया हो। लेकिन यहाँ तो कोई भी नहीं है; और सबसे बड़ी बात यह है कि किसी चीज से कार टकराई भी नहीं।" रोनित ने सच कहा था। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था।

"बहुत बुरा हो रहा है। यह बहुत बुरा हो रहा है।" रोनित बड़बड़ाये जा रहा था।

हमने उन खून के धब्बों का मुआयना किया तो पाया कि यह खून के धब्बे ऐसे थे जैसे किसी को घसीटते हुए कोई उन झड़ियों की तरफ ले गया हो। यह उन्हीं झड़ियों की तरफ की बात थी जिस तरह रोनित ने बताया था कि ज्योति भागते हुए गई थी और जिस तरफ जय अपनी बहन ज्योति को ढूँढ़ने गया था। इन सब का कनेक्शन कुछ भी समझ नहीं आ रहा था।

अभी हम दोनों की नजर उन झाड़ियों की तरफ थी कि तभी हमें महसूस हुआ जैसे झाड़ियों के उस तरफ से कोई तेज़ी से हमारी तरफ आ रहा हो। हम एक-एक कदम पीछे हटने लगे।

हमारी नज़र उधर से आती हुई उन आवाज़ों की ओर थी जो पल-पल तेज़ होती जा रही थीं। तभी हमने देखा कि कोई आकृति हमारे सामने उन झाड़ियों से उभरकर सामने आई।

हम दोनों का दिल डर के मारे बैठ चुका था। वह दो आकृतियाँ थीं जो उन झाड़ियों के पीछे से हमारे सामने प्रकट हुई थी। अगले 3 सेकंड में उनका चेहरा हम पहचान चुके थे।

"राज, जल्दी गाड़ी निकालो! जल्दी! हमारे पास समय कम है।" हमें नजर आते ही उस शख्स ने जोर से कहा। यह वही दो लोग थे जिनकी तलाश हम कर रहे थे – जय और ज्योति।

उस अंधेरे में भी मैंने जय की आँखों में जाने ऐसा कौन सा डर देख लिया था कि मैं कुछ समझ और सोच नहीं पा रहा था। जय के साथ ज्योति भी थी। वह भी काफी डरी हुई दिख रही थी।
 

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