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Horror दहशत

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हम उन दोनों को इस कदर घबराए हुए देखकर न सिर्फ डर गए थे, बल्कि मैंने हड़बड़ी में तुरंत कार की तरफ भागकर कार का दरवाजा खोल दिया। सब लोग जल्दी से कार के अंदर बैठ गए। मैं कार स्टार्ट कर ही रहा था कि बैक सीट पर बैठा जय चिल्ला उठा –

"गाड़ी निकालो। गाड़ी यहाँ से निकालो! फ़ास्ट… फ़ास्ट! जल्दी करो प्लीज़!"

मैं कार स्टार्ट करने लगा। मेरे बगल वाली सीट पर बैठा रोनित पहले तो ज्योति और जय को पीछे मुड़कर देखता रहा और फिर अगले ही पल चिल्लाया –

“यार राज, जल्दी गाड़ी निकालो यहाँ से!”

मेरे पास सोचने-समझने का समय नहीं था तो सिचुएशन को समझते हुए मैंने बिना वक़्त गवायें कार को तेजी से भगाया। मैं जानता था पहले से ही हम सभी बहुत बुरी तरह से डरे हुए थे। फिलहाल जय और ज्योति को ढूँढ़ने की हमारी कोशिश पूरी हो चुकी थी।

पिछली सीट पर बैठा हुआ जय बिल्कुल घबराया हुआ था। उसके बगल में बैठी हुई ज्योति बिल्कुल उदास थी और लगभग रो रही थी। ज्योति ने कसकर जय को पकड़ रखा था।

"तुम दोनों ठीक तो हो न? हुआ क्या है, कुछ बताओगे?" मैंने कार का स्टेयरिंग संभालते हुए कहा। कार अब 60 की स्पीड पर उस वीरान सड़क पर लहरा रही थी।

वह दोनों खामोश थे। मैं बार-बार मुड़कर उनको पीछे देखने की नाकाम सी कोशिश कर रहा था; क्योंकि मेरा पूरा ध्यान इस समय कार को संभालने में था।

"शुक्र है, तुम दोनों सही सलामत हो। मेरा तो मन बहुत बुरी तरह से घबरा चुका था। ओह गॉड! अब हम जल्दी से बस इस जंगल से बाहर निकल जायें।" रोनित ने कहा।

ज्योति और जय ने रोनित की किसी बात का जवाब नहीं दिया। वह लगातार खिड़की से बाहर झाँक रहे थे।

"तुम लोग बोल क्यों नहीं रहे हो? अभी हमें डॉली को भी ढूँढ़ना है।" मुझे याद आया कि हमने डॉली को पीछे ही छोड़ दिया था। इसके साथ ही मैंने कार का ब्रेक लगाया ही था कि इतने में जय ने पीछे से मेरे कंधे को जोर से हिलाते हुए कहा – "कार मत रोको, प्लीज़ कार मत रोको!"

"बताओगे, हुआ क्या है? तुम दोनों इतने घबराए हुए क्यों हो? मुझे सब कुछ ठीक नहीं लग रहा।"

"मैं तुम्हारे सारे सवालों के जवाब दूँगा। प्लीज गाड़ी मत रोको राज!" पीछे से फिर जय की चीखती हुई आवाज़ मुझे सुनाई पड़ी।

कार में बैठे हुए हम चारों बिल्कुल दहशत में थे। पीछे हम डॉली को छोड़ चुके थे और इधर ज्योति और जय के मिलने के बाद भी जय की हरकतें हमें और खौफ के दलदल में धकेल रही थी।

"पता नहीं, किस मनहूस घड़ी में हम निकले थे। अब तो मुझे और भी बहुत डर लग रहा है। तू ठीक तो है न जय?" रोनित ने अपनी घबराई आवाज़ में पूछा।

जय ने सिर हिलाकर हाँ में इशारा किया। फिर एक बार उसने मुझ से रिक्वेस्ट की– "प्लीज राज, गाड़ी भगाओ!"

आगे का रास्ता थोड़ा घुमावदार था। मैं इससे ज्यादा तेज उस साँप जैसी घुमावदार सड़क पर नहीं चला सकता था। मैं मजबूर था। मैंने सामने का रास्ता देखा जो अब भी वैसा ही भयानक और सुनसान नजर आ रहा था। या सीधे शब्दों में कहूँ तो वह जंगल, वह माहौल और हमारे आस-पास की हर चीज़ जैसे हमें काटने को दौड़ रहा था। मैं कार का गियर बदलता रहा और कार की स्पीड उस घुमावदार सड़क पर कंट्रोल करता रहा। इधर जय मुझे कार की स्पीड बढ़ाने को कहता रहा। लेकिन मैं जानता था, मैं अपनी पूरी कोशिश कर रहा था।

"देखो जय, अभी हमें डॉली को भी ढूँढ़ना है! वह भी पीछे जंगल में खो चुकी है। हमें उसे ढूँढ़ना ही होगा। तुम लोग मुझे बताओगे आखिर यह सब चल क्या रहा है?" मैंने इतना कहा ही था कि मुझे ज्योति की रोने की आवाज़ सुनाई देने लगी।

मैं बिल्कुल घबरा गया।

"ज्योति, तुम रो क्यों रही हो? तुम दोनों बोलते क्यों नहीं कि क्या हुआ है? तुम लोग वहाँ पर इस तरह से भागते हुए क्यों आए जंगल से? ज्योति, कुछ बोल क्यों नहीं रही है? प्लीज, हमें बताइए! हम लोग बहुत परेशान हैं। डॉली भी गायब है। हम उसे ढूँढ़ने गए थे लेकिन वह हमें वहाँ पर नहीं मिली। लेकिन उसकी कार हमें मिली।”

"हाँ, मैं जानता हूँ!" जय की मासूम आवाज़ जैसे ही रोनित और मैंने सुनी हम शॉक रह गए।

“क्या? तुम कैसे जानते हो? तुम्हें तो हम अभी बता रहे हैं डॉली के बारे में।" रोनित ने घबराई आवाज़ में पीछे मुड़कर कहा।

“क्योंकि डॉली का एक्सीडेंट हो चुका है जिसके बारे में तुम जानकर भी अंजान हो।” ज्योति ने अपनी खामोशी तोड़ी दी। इतना सुनते ही हम ज्योति को घूरने लगे। कार के अंदर फैले हुए अंधेरे में भी जैसे हम एक-दूसरे का चेहरा आसानी से पढ़ पा रहे थे। कार अब भी 60 की स्पीड से दौड़ रही थी। मैं कभी कार की स्टेयरिंग संभालता तो कभी रोड की तरफ देखता। रह-रह कर मैं पीछे मुड़कर उन तीनों को देखने की कोशिश भी करता रहा।

“पागल हो गई हो क्या? यह क्या कह रही हो? डॉली का एक्सीडेंट हो गया है और यह बात हमें मालूम है, लेकिन हम अंजान हैं इन सब चीज़ों से?” मैंने घबराई हुई आवाज़ में कहा।

“ज्योति, तुम रो क्यों रही हो? देखो, डॉली ठीक है! उसे कुछ नहीं हुआ है। हम बस जल्दी ही उसे ढूँढ़ लेंगे।”

मैं ऐसा कह तो रहा था लेकिन चाहकर भी जैसे मैं कार को वापस उल्टी दिशा में मोड़ नहीं पा रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे उस कार पर अब मेरा कंट्रोल था ही नहीं।

“जय, तुम बोलते क्यों नहीं? क्या बात है? मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है। तुमने ऐसा क्यों कहा। तुम जानते हो न, हमें कार मिल चुकी है। वहाँ पर मेरी कार तो बिल्कुल सही थी। डॉली जाने कहाँ गायब थी। आई नो, वह ठीक होगी।”

"राज सही कह रहा है। हमने देखा, उसकी कार को कुछ नहीं हुआ था। सो प्लीज, कह दो कि यह सब झूठ है। मुझे बहुत डर लग रहा है।" रोनित ने लगभग रोते हुए कहा।

"डॉली कहाँ गई? उसके बारे में कोई खबर नहीं मिली। तुम इतने दावे से कैसे कह सकते हो कि उसका एक्सीडेंट हो गया था और तुम यह क्या कह रहे हो कि हम उसके बारे में जानते हैं, पर अनजान है।” मैं उन पर चिल्ला रहा था। उनकी बातें सुनकर मेरे सिर पर जैसे गुस्से का पहाड़ फूटने लगा था मैं उन पर पागलों की तरह एक के बाद एक सवाल दागे जा रहा था।

“किसी के मानने न मानने से सच्चाई नहीं बदलेगी। हाँ, मैं सच कह रहा हूँ! डॉली का एक्सीडेंट हो गया है और तुम लोग इस बात को जानकर भी अनजान हो। यह सब कुछ मैं जान चुका हूँ। मैं सच कह रहा हूँ। मेरी बात ध्यान से सुनो, तुम्हें मेरी बात पर विश्वास करना होगा।” जय अपनी बात पर डटा हुआ था।

मैं उन दोनों को बचपन से जानता था। ज्योति और जय ऐसे सिचुएशन में मज़ाक बिल्कुल नहीं कर सकते थे। लेकिन उनकी बात सच थी या नहीं, इस पर मुझे इतनी आसानी से कैसे यकीन होता।

*** *** *** *** *** ***
 
दृश्य:09

“राज, मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है यार! यह लोग कैसी बहकी-बहकी बातें कर रहे हैं। ये सब क्या कह रहे हैं? ज्योति भी जब से उन जंगलों से आई है बस पागलों जैसी बातें कर रही है। मुझे बहुत डर लग रहा है। ज्योति तू कुछ बोलती क्यों नहीं। जय मज़ाक कर रहा है न? चुपचाप क्यों बैठी हुई हो, प्लीज कुछ बोल।" रोनित भी शायद उनकी बातों पर विश्वास नहीं कर पा रहा था।

“जय, मैं नहीं जानता कि किस पर विश्वास करूँ, किस पर नहीं। यह सब मेरी गलती है जो मैं तुम सबको यहाँ लेकर आया। मेरी वजह से सब कुछ हो रहा है। मैं देख रहा हूँ जब से तुम लोग जंगल से आए हो इस बारे में तुम कुछ भी नहीं बता रहे हो। डॉली का एक्सीडेंट हो चुका है। बस इन फालतू की बातों को ही बार-बार रिपीट कर रहे हो। देखो, तुम सब भी जानते हो कि हम पहले से ही घबराए हुए हैं। अब हमें और मत डराओ और बताओ कि तुम लोग ऐसी बातें क्यों कर रहे हो?”

मैं अब और भी ज्यादा परेशान होने लगा था। मुझे उनकी बातों का मतलब अभी समझ नहीं आया था।

“तुम जानते हो, ज्योति आखिर क्यों रो रही है? और मैं इस तरह से क्यों चिल्ला रहा हूँ? जिस लड़की ने बचपन से डॉली को अपनी बड़ी बहन की तरह माना हो और उसे अपनी गोद में मरते हुए देखा हो भला वह और क्या रिएक्शन दे सकती है।” जय ने इतना कहा ही था कि हम लोग एकदम से खामोश हो गए।

जंगल के बीचो-बीच बनी वह सड़क और सड़क के बीच तेजी से दौड़ती अंधेरे में हमारी कार। कार में बैठे हम चार लोग, अब भी खामोश थे। डॉली जो अभी गुमशुदा थी, ज्योति जो अब चुपचाप थी और जय कुछ ऐसे सच का जिक्र कर रहा था जिसे रोनित और मैं चाहकर भी समझ नहीं पा रहे थे।

“वह डॉली नहीं हो सकती! मैं जानता हूँ, वह जिंदा है। देखो, वह तुम्हारा सिर्फ भ्रम होगा। एक ऐसा ही भ्रम मुझे भी इन जंगलों में होने लगा है लेकिन वह हकीकत नहीं है। जय, वह हकीकत नहीं है! वह सिर्फ एक छलावा है।” मैं उन लोगों को समझाते हुए अपनी आँखों में बहते हुए आँसुओं को थामकर कार तेजी से आगे बढ़ाता रहा।

"और तेजी से गाड़ी भगाओ। हमें जल्दी से जंगल से बाहर निकलना है। मुझे बहुत डर लग रहा है। हमें जंगल से बाहर निकलते ही पुलिस को खबर करनी होगी ताकि हम डॉली को भी यहाँ पर अच्छे से ढूँढ़ पाए। राज, तुम घबराओ मत डॉली को कुछ नहीं होगा।" रोनित ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा। वह शायद मुझे तसल्ली देने की नाकाम सी कोशिश कर रहा था।

"मेरा दिल कहता है कि वह सही सलामत होगी।" मैंने धीरे से कहा और मेरा हाथ स्टेयरिंग पर कसता गया।

"यही सच है, मुझे यकीन है। लेकिन अगर हम यहाँ से निकल नहीं पाए तो हम उसे ढूँढ़ भी नहीं पायेंगे। तेजी से गाड़ी भगाओ। हमें किसी भी हालत में इस जंगल से बाहर निकलना होगा।" रोनित ने कहा। वह एक हाथ से अभी भी मेरे कंधों को सहला रहा था।

“तुम कितनी भी तेज गाड़ी चला लो राज, अब हम इस जंगल से बचकर नहीं निकल सकते। तुम लोग जानते नहीं कि वह अभी भी हमारे पीछे हैं।” जय की अजीब सी आवाज़ मेरे कानों से टकराई। लेकिन मैंने उसे पीछे मुड़कर नहीं देखा।

मैं रोनित की बातों को फॉलो करके बस उस जंगल से बाहर निकलना चाहता था। मैं अपनी डॉली को बचाना चाहता था। हमें पुलिस की मदद की जरूरत थी।

"जय, प्लीज बकवास करना बंद करो यार! मुझे तो लगता है कि तुम लोगों पर भूत-प्रेत का साया चढ़ चुका है। मैंने तो पहले ही कहा था उधर जंगलों में मत जाओ। जाने इस भयानक जंगल में कौन सी रूहानी ताकत इन दोनों भाई-बहन के सिर पर चढ़ चुकी है। ज्योति अब खामोश है और जय जो कुछ बोल रहा है उस पर विश्वास करना मुश्किल होता जा रहा है।”

“रोनित, मैंने जो कुछ कहा वही सच्चाई है।”

रोनित ने पीछे मुड़कर जय की तरफ गुस्से से देखा और चिल्लाते हुए आगे कहा–

"अगर ऐसी बात है तो तुम लोग हमें बताते क्यों नहीं कि वहाँ तुम लोगों के साथ क्या हुआ था? मुझे प्लीज बताओ! जब तुम उन जंगलों में गए तो क्या हुआ और वहाँ से आने के बाद ऐसी बहकी-बहकी बातें क्यों कर रहे हो? और तुम जय, तुम तो राज की बातों को मानते थे और कहते थे कि तुम भी भूत-प्रेतों को नहीं मानते।“

*** *** *** *** *** ***
 
दृश्य 10

“मैंने उस जंगल में कुछ ऐसा भयानक देखा जिसे देखने के बाद मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पा रहा हूँ। तुम्हें बताना तो चाहता हूँ, पर जाने क्यों बताना नहीं चाहता। लेकिन हम चाहें लाख कोशिश कर लें, वह हमें इस जंगल से बाहर नहीं निकलने देंगे।” जय ने धीरे से कहा।

“ऐसा क्या देख लिया जो तुम हमें बताना नहीं चाहते। अभी तक जो कुछ भी बुरा हुआ है, क्या इससे भी ज्यादा बुरा होगा? हमें जानना है। हमें बताओ वहाँ पर क्या हुआ?”

जय ने गहरी लंबी साँस ली। वह कुछ देर ज्योति को देखकर चुप रहा और फिर आखिरकार उसने कहा –

“जब मैं टॉर्च लेकर ज्योति को ढूँढ़ने घने काले जंगल में गया तो मैंने देखा जैसे-जैसे मैं झाड़ियों से उन जंगलों की तरफ बढ़ता जा रहा था, जंगल बहुत ही घने होते जा रहे थे। चारों तरफ इतना घना काला अंधेरा था कि सिवाए टॉर्च की फैलती रोशनी के अलावा मुझे सामने देखने में कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। आस-पास पड़ी हुई पत्तियाँ मेरे जूतों की आवाज़ से चरमरा रही थी। मैं ज्योति को आवाज़ देते हुए जंगल की ओर बढ़ता जा रहा था। मुझे अपनी बहन को ढूँढ़ना था। मेरे मन में कई सवाल थे कि आखिर वह भागकर जंगल में क्यों गई? मैं उन सवालों का जवाब ढूँढ़ना चाहता था। मैं अपनी छोटी बहन को वापस लाना चाहता था। टॉर्च की रोशनी को फैलाते हुए, मैं जंगल में आगे बढ़ता जा रहा था।

जंगल इतना खामोश था कि मुझे अपने पैरों के चलने की आवाज़ों के अलावा और किसी भी तरह की कोई आवाज़ नहीं आ रही थी। यह पहली दफा था जब मैं इतना घबराया हुआ था। मैं ज्योति को लेकर बहुत ज्यादा टेंशन में था। टॉर्च की रोशनी के सहारे मैं आगे बढ़ते हुए उस जंगल में बढ़ता रहा। तभी मैंने कुछ ऐसी आवाज़ सुनी जिसे सुनकर मैं अपनी जगह पर रुक गया।”

“क्या हुआ था वहाँ पर? क्या सुना तुमने?” मैंने कार ड्राइव करते हुए पूछा।

“वह बहुत ही डरावना नजारा था। मैं बिल्कुल डरा हुआ था। मेरे दिमाग में अजीब-अजीब सी डरावनी चीजें घूमने लगीं। मैं चाह कर भी अपने डर पर काबू नहीं कर पा रहा था। एक पल के लिए तो मुझे ऐसा लगा जैसे वह जंगल मुझे अपनी ओर खींच रहा हो और मुझे अपने काबू में करने की कोशिश कर रहा हो। लेकिन तभी मुझे किसी के रोने की आवाज़ सुनाई दी। मैं पहले ही बहुत घबराया हुआ था, रोने की आवाज़ सुनकर मैं समझ नहीं पाया कि आखिर इतने घने जंगल में इतने अंदर तक इस घनघोर काली रात में कौन आया होगा? ज्योति इन जंगलों में कहाँ गायब हो चुकी थी? दिल में अजीब से दर्द और डर ने अपना घर करना शुरू कर दिया। जैसा कि सब कहते हैं कि जब खून का रिश्ता होता है तो वह एक-दूसरे की आवाज़ और परछाईं दूर से भी पहचान जाते हैं। उस आवाज़ को ध्यान से सुनने के बाद अब मैं भी पहचान चुका था कि यह आवाज़ ज्योति की थी। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। धीरे-धीरे उसकी आवाज़ तेज होने लगी थी।

“मैं आवाज़ की तरफ बढ़ने लगा। मुझे महसूस हुआ कि आवाज़ मेरी दाहिनी तरफ से आ रही थी। मैं टॉर्च लेकर दायीं तरफ बढ़ने लगा और आगे बढ़ते रहा। ऐसा लगने लगा जैसे वह आवाज़ मुझसे दूर जा रही थी और मैं सम्मोहित होकर उस आवाज़ की दिशा में अपने कदम बढ़ाए जा रहा था। तभी मैंने देखा कि मुझे वह आवाज़ बहुत पास से सुनाई देने लगी। मैंने देखा वहाँ पर पेड़ काफी दूर-दूर लगे हुए थे। यहाँ पर जंगल इतना घना नहीं था जितने घने जंगलों को पार करके मैं अंदर आया था। और फिर मैंने देखा कि…।”

“जय, क्या देखा तुमने? और ज्योति वहाँ पर क्यों रो रही थी?” रोनित ने पूछा। मैं अब भी अपनी कार को तेजी से भगा रहा था। लेकिन मेरा ध्यान ड्राइविंग से ज्यादा जय की उन बातों पर था।

“मैंने देखा कि सामने मुझे एक परछाई नजर आ रही थी। दरअसल वह ज्योति थी। वह जाने क्यों वहाँ एक पेड़ के नीचे बैठी रो रही थी। उसकी आवाज़ अब मैं बहुत करीब से सुन सकता था। मैं धीरे-धीरे उसके पास पहुँचा तो यह देखकर चौंक गया कि उसकी गोद में कोई लेटा हुआ है। मैंने अपने माथे से टपकते हुए पसीने को पोंछा और उस अंधेरे में ज्योति की तरफ देखते हुए पूछा – ज्योति, यह तुम हो न? तुम यहाँ बैठी क्यों रो रही हो; और तुम जंगल में इतनी अंदर कैसे आ गई? यह तुम्हारी गोद में कौन लेटा है?’

“ज्योति मुझ से 10 फीट की दूरी पर थी। वह एक पेड़ से टिक कर बैठी हुई थी। पेड़ की जटायें आस-पास लटक रही थीं। मैं धीरे-धीरे टॉर्च लेकर ज्योति की तरफ बढ़ रहा था। मैंने पूछा – ज्योति तुम्हारी गोद में कौन है?

“जय भैया, अच्छा हुआ आप आ गये! देखिए न, इनको क्या हो गया है! आप इन्हें क्यों नहीं पहचान पा रहे हो? यह डॉली दीदी हैं। प्लीज, इन्हें बचा लीजिए न!” ज्योति ने रोते हुए कहा।

‘ज्योति, क्या बात कर रही हो? यह कौन सोया है तुम्हारी गोद में? यह डॉली नहीं हो सकती।’ मैंने उससे कहा। मैं जानता था, डॉली को ढूँढ़ने तुम लोग गए हो क्योंकि वह कहीं पीछे छूट गई है। तो भला वह यहाँ जंगल में ज्योति के साथ कैसे हो सकती थी। लेकिन अगर वह डॉली नहीं थी तो आखिर वह थी कौन?

‘भैया प्लीज, डॉली दीदी को बचा लीजिए!’ ज्योति अभी अपनी बात पर अड़ी हुई थी और वह उस शख्स को डॉली बता रही थी। मैं अब ज्योति के बिल्कुल करीब पहुँच चुका था। लेकिन उस अंधेरे में मैं उस शख्स का चेहरा नहीं देख पा रहा था।

‘ज्योति, देखो मेरी बात सुनो! हमें यहाँ से निकलना है और तुम जंगल में इतना अंदर कैसे आई? देखो ज्योति, हम सब बहुत घबराए हुए हैं। हमारे दोस्त और हम सबको इस जंगल से बाहर निकलना है।’ मैंने फिर उससे कहा।

“हालाँकि ज्योति का चेहरा भी मैं अब तक नहीं देख पाया था। उसके पास पहुँच कर भी, मैं उस से 2 मीटर की दूरी पर है रुका हुआ था। मेरे सामने ज्योति अब भी उस शख्स को अपनी गोद में लिए हुए बैठे थी। मैं अब भी अंधेरे में उस शख्स को पहचानने की कोशिश कर रहा था।

‘जय भैया, आप इनको नहीं पहचानते? यह हमारी डॉली दीदी हैं।’ उसने इतना कहकर जैसे ही मेरी तरफ देखा, एक पल के लिए जैसे उसका चेहरा दूध की तरह सफेद होकर चमकने लगा। एक पल के लिए तो ऐसा लगा जैसे वह हमारी ज्योति हो ही न।”

जय की बातें सुनकर मैं और रोनित शॉक में थे। कार में ज्योति के सिसकने की आवाज़ अब भी आ रही थी। कार के अंदर हम अभी खामोश थे।

“हाँ, वह डॉली थी! लेकिन जब मैं ज्योति के बिल्कुल करीब पहुँचा तो वहाँ का दृश्य देखकर और भी भयभीत हो गया। डॉली उसकी गोद में लेटी हुई थी और उसके सिर से लगातार खून बह रहा था। उसकी आँखें बंद हो चुकी थीं और उसके बाद जो कुछ भी मैंने देखा, मैं वह तुम दोनों को नहीं बता सकता।”

जय ने इतना कहा तो उस कार में बैठी ज्योति और भी जोरों से रोने लगी। रोनित मेरा चेहरा देखता रहा और मैं उसका। हम दोनों की समझ में अब भी कुछ नहीं आ रहा था। यह कोई इतनी आसानी से यकीन करने वाली चीज वाकई नहीं थी। लेकिन आज जो कुछ भी हमारे साथ हुआ था, वह सब समझना इतना आसान भी कहाँ था।

आस-पास का जंगल अब और भी भयानक नजर आने लगा था।

“जय, आई कांट बिलीव दिस! वह लड़की डॉली नहीं हो सकती। कुछ नहीं हो सकता उसे! वह जिंदा है! मैं तुमसे कह रहा हूँ न, वह जिंदा है।” मैंने स्टीयरिंग को घुमाते हुए कहा। मेरा सिर चकराने लगा था।

“जय! क्या तुम बताओगे, आखिर क्या हुआ था डॉली को और उसके सिर से खून क्यों निकल रहा था। और अगर वह डॉली थी तो तुम लोग उसको छोड़कर ऐसे ही क्यों चले आए। हमें छोड़कर आखिर गये क्यों थे।” रोनित ने चिल्लाते हुए कहा।

“मैं जब ज्योति के पास पहुँचा और मैंने टॉर्च से जब उसके गोद में सोए हुए शख्स पर रोशनी डाली तो देखा, वह वाकई में डॉली थी। खून से लथपथ और फिर...।”

जय की बातें सुनकर रोनित के साथ-साथ मैं भी बुरी तरह से घबराया हुआ था। शायद वह जो कुछ कह रहा था, वह झूठ हो लेकिन ऐसी सिचुएशन में वह हमसे झूठ क्यों कहेगा? लेकिन फिर मेरा मन यह कहता था कि जब हम डॉली को ढूँढ़ने पीछे गए तो हमें कार मिल गई लेकिन डॉली कार से गायब थी। इसका मतलब यह नहीं है कि मैं इतनी आसानी से यकीन कर लूँ कि अब वह इस दुनिया में नहीं रही। ओह गॉड, डॉली ठीक तो होगी न?

मैं इस खबर को सिरे से नकारना चाहता था लेकिन यह भयानक जंगल और आस-पास का माहौल इतना मनहूस था कि मैं इस खबर को पुख्ता तौर पर झूठ भी नहीं कह सकता था। आज रात जो भी घटना हमारे साथ घट रही थी, वह उस नंगी तलवार की तरह थी जिस पर यकीन करना अब हमारी मजबूरी थी।

“डॉली को कुछ नहीं हुआ। मैं जानता हूँ और मुझे पता है उसे कुछ नहीं हो सकता। हमें पीछे जाकर उसे ढूँढ़ना होगा।” रोनित बार-बार मुझे सांत्वना देने की कोशिश कर रहा था। सांत्वना झूठी थी, मैं बिल्कुल नहीं जानता था।

“मैं झूठ नहीं कह रहा हूँ। वह डॉली ही थी।”

“जय, तुम्हारी बात सच भी है तो तुम उसे वैसे ही घायल छोड़कर क्यों आ गए? राज, तुम गाड़ी रोको! हमें वापस जाकर डॉली को वापस लाना होगा। हम उसे बचा लेंगे।” रोनित ने स्टीयरिंग को पकड़ते हुए कहा।

मैं अब बिल्कुल चुप था। मैं जानता था, हम सभी बहुत बड़ी और भयानक मुसीबत में फँस चुके हैं। शायद एक ऐसी मुसीबत जिससे निकलने की हम लोग पूरी कोशिश कर रहे थे।

“राज, प्लीज गाड़ी मत रोकना! प्लीज डोंट स्टॉप, वरना अंजाम और भी बद से बदतर होगा। तुम लोग पता नहीं क्यों मेरी बात पर यकीन क्यों नहीं कर रहे हो। तुम दोनों जानना चाहते हो कि आगे मैंने क्या देखा?

“मैंने वहाँ पर जो कुछ भी देखा, पहले तो मुझे यकीन नहीं हुआ। ज्योति की गोद में लेटी हुई वह डॉली ही थी। उसके सिर से लगातार खून बह रहा था। और तो और डॉली के कमर के नीचे का भाग पूरी तरह से गायब था। ऐसा लग रहा था जैसे किसी चीज ने उसे कुचलकर उसकी बॉडी को दो भागों में बाँट दिया था। ठीक वैसा ही जैसा कि तुमने उस लड़की के बारे में जिक्र किया था जो हम लोगों से लिफ्ट माँग रही थी। हुबहू ठीक उसी तरह उसका आधा शरीर कमर के नीचे से गायब था।”

कहते हुए जय की आवाज़ इतनी बुरी तरह से काँप रही थी जिससे उसकी बातों की सच्चाई पर यकीन करना कोई मुश्किल काम नहीं था।
 
“ओ गॉड!”

मैं अब अपने जज्बात और आँसुओं पर काबू नहीं कर पा रहा था। कार की बैक सीट पर बैठी ज्योति अब भी जय के कंधे पर सिर रखकर सिसक रही थी। जय यह सारी बातें बताने के बाद बार-बार अपना सिर पीट रहा था। रोनित जाने क्यों इन सब बातों से इतना डर चुका था कि वह हम सब पर बस चिल्लाए जा रहा था।

हमारी कार अब भी उस सुनसान सड़क पर तेजी से भाग रही थी। अब भी हमें कोई भी गाड़ी सड़क से आती-जाती नजर नहीं आई थी। मैं अपना आपा खोने लगा था। मैं किसी भी हालत में कार को जंगल से निकालना चाहता था। उन सब को बचाना चाहता था, चाहे इसके लिए मुझे खुद कुर्बान होना पड़े।

“जय, यह सच नहीं है!” रोनित में चिल्लाते हुए कहा। वह जय की किसी भी बात पर यकीन करने को तैयार नहीं था।

“हाँ, तुम लोगों ने बिल्कुल सच सुना! डॉली का आधा शरीर नहीं था। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन ज्योति उसे गोद में लिए हुए थी। मैंने ज्योति से जानना चाहा कि आखिर डॉली के साथ ऐसा कैसे हुआ और वह उसके साथ यहाँ पर क्या कर रही थी? तो उसने कहा –

‘देखिए न, डॉली दीदी को क्या हो गया! हमें इन्हें बचाना होगा। इन्हें कुछ नहीं होगा। देखिए, भैया प्लीज! हमें डॉली दीदी को बचाना होगा।’

“ज्योति बार-बार यह बात दोहराती रही। मैं टॉर्च के लाइट से डॉली को और उसकी हालत को देखने की कोशिश कर रहा था जो कि बहुत ही भयावह था। अपने किसी दोस्त को खोना इतना आसान काम नहीं था। लेकिन डॉली की हालत देखकर मैं समझ चुका था कि अब वह जिंदा नहीं थी। मेरे पाँव तले जमीन खिसक चुकी थी। डॉली की इस हालत के बाद मैं अब भी इस हालत को समझ नहीं पा रहा था कि यह सब आखिर कैसे हुआ था? अगर ऐसी कोई घटना सड़क पर हुई थी तो वह लोग जंगल के इतने अंदर कैसे आ चुके थे? ज्योति आखिर इधर कैसे आ गई? उसने डॉली को कैसे देखा होगा? यह सब मैं सोच ही रहा था कि तभी मैंने देखा कि डॉली ने अपनी आँखें खोली।

‘जय देखो न, यह मुझे क्या हो गया है! प्लीज, मुझे बचा लो। मुझे जंगल से बाहर निकालो। मुझे हॉस्पिटल ले चलो जय! तुम मुझे बचाओगे न? हेल्प मी जय!’ शायद वह मेरी जिंदगी का सबसे भयानक पल था।

“अंधेरे में डॉली की सफेद आँखें मेरी आँखों से टकरा रही थी। मेरे होशो-हवास उड़ गए। आखिर डॉली ऐसी हालत में भी कैसे बात कर रही थी।

“तभी ज्योति रो-रो कर कहने लगी – ‘जय भैया, देखिए न डॉली दीदी जिंदा है! हमें इनको बचाना होगा जय भैया! प्लीज उठाइए न!’

डॉली का वह वीभत्स रूप देखकर मैं अभी इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहा था कि आखिर यह सब क्यों और कैसे हो रहा था? मुझे उस जंगल में काली शक्तियों का आभास होने लगा था। मैंने आगे बढ़कर ज्योति का हाथ पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींचने लगा – ‘ज्योति, चलो मेरे साथ! यह डॉली नहीं हो सकती।’ मैंने इतना कहा ही था कि अगले ही पल डॉली का शरीर हवा में झूलने लगा। उसका शरीर हवा में झूल रहा था। उसकी आँखें चमक रही थी, उसके सिर से अब भी खून आ रहा था। उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान थी।

“वह कहने लगी – ‘जय, मुझे बचा लो जय! देखो, राज मेरा इंतजार कर रहा होगा जय!’

“मुझे पता था अब वहाँ एक पल के लिए भी रुकना बहुत खतरनाक होने वाला था। मैं ज्योति का हाथ पकड़कर जैसे ही पीछे मुड़ा था कि तभी उसकी भयानक आवाज़ हमारे कानों में गूँजी – ‘रुक जाओ, वरना मैं तुम सब को मार डालूँगी। जय, मुझे बचा लो, वरना मैं तुम सबको मार डालूँगी।’

“मैंने पलट कर देखा। उसका शरीर जमीन से 20 फीट ऊपर हवा में झूल रहा था। डॉली की बड़ी-बड़ी आँखें अब हमें घूर रही थीं। मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा था कि वाकई में वह सत्य था या सिर्फ एक झूठ। लेकिन मुझे पता है, मैंने जो कुछ भी देखा था, वह बिल्कुल हकीकत था। अगले ही पल मैंने ज्योति का हाथ पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींचा। मैं ज्योति को वहाँ से लेकर भागने लगा और अब मैं किसी भी हालत में जंगल से बाहर सड़क की तरफ पहुँचना चाहता था। मैंने महसूस किया कि वह हमारा पीछा कर रही थी। उसका आधा शरीर हवा में उड़ते हुए हमारे पीछे भाग रहा था। अंधेरे में सिर्फ उसकी परछाई और दो चमकती हुई आँखें नजर आ रही थीं। वह किसी भूखे भेड़िए की तरह बुला रही थी। मैं बिल्कुल अपने होश-हवास खो चुका था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि अब मैं क्या करूँ। लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी और ज्योति का हाथ नहीं छोड़ा। मैं उसे लेकर लगातार गिरते-पड़ते जंगल से बाहर भागता रहा।

‘रुक जाओ जय, प्लीज हेल्प मी! मुझे बचा लो, वरना मैं तुम लोगों को जिंदा नहीं छोड़ूँगी। मुझे मजबूर मत करो। तुम लोगों ने मेरे साथ ठीक नहीं किया। तुम सब मरोगे। तुम में से कोई भी इस जंगल से बचकर बाहर नहीं जा पाएगा। तुम लोगों ने मुझे मार डाला। मैं तुम लोगों को मार डालूँगी। खून का बदला खून। तुम लोग भी जंगल से बचकर नहीं भाग सकते।’

“पीछे से उसकी आवाज़ मेरे कानों में बार-बार गूँज रही थी। मैं अपने थरथराते कदमों और पसीने से तरबतर शरीर के साथ ज्योति का हाथ पकड़े भागता रहा, भागता रहा, भागता रहा।

*** *** *** *** *** ***
 
दृश्य 11

अगले कुछ पल के लिए कार में फिर से एक बार खामोशी छा गयी। मैं कार ड्राइव कर रहा था। सब कुछ समझ कर भी समझ नहीं पा रहा था। जाने क्यों लगने लगा था जैसे इस डर ने सोचने समझने की शक्ति को खत्म कर दिया है। लेकिन मैं अपने आपको अभी दिलासा देने की कोशिश करता रहा कि शायद डॉली जिंदा होगी। शायद जय और ज्योति हमें सिर्फ एक डरावनी कहानी सुना रहे होंगे। लेकिन मैं अपने आप से झूठ बोल रहा था।

आज की रात जंगल में जो कुछ भी हुआ था, उसने पानी की तरह सब साफ कर दिया था कि वह घटनाएँ मामूली नहीं थीं। यह कुछ-कुछ वैसी थी जैसा कि जंगल के बारे में अफवाहें उड़ती थी।

"राज, तुम सबसे ज्यादा समझदार हो यार! प्लीज, अपने भाई जय को समझाओ कि ऐसे पागलों की तरह बातें न करे। देखो, डॉली को कुछ नहीं हुआ है। मैं तुमसे बार-बार कह रहा हूँ। मुझे नहीं पता कि ज्योति चुपचाप क्यों है? लेकिन मैं इस बात पर विश्वास नहीं कर सकता। क्योंकि मैं जानता हूँ, वह डॉली नहीं थी। वह कोई और होगी। यह भी तो हो सकता है यह वही लड़की हो जो हमसे लिफ्ट माँग रही थी। क्योंकि वैसे भी हमने उस लड़की को शादी के जोड़े में देखा था। तुमने बताया था कि उसका शरीर भी कमर के नीचे से गायब था। नहीं, यह डॉली नहीं हो सकती। उस लिफ्ट वाली लड़की के देखने के बाद से यह सारी घटनायें शुरू हुईं।" रोनित हम सब को समझाने की कोशिश कर रहा था।

“मुझे नहीं पता कि तुम लोगों ने जंगल में क्या देखा? लेकिन मैं अपनी डॉली को जंगल में छोड़कर वापस नहीं जा सकता। मुझे डॉली को बचाना ही होगा।” मेरे सब्र का बाँध टूट चुका था।

“राज भैया, प्लीज हमारी बात पर विश्वास करिए! जय भैया, ने जो कुछ भी कहा वह सच है! वह डॉली दीदी ही थी। उनकी हालत ठीक वैसी ही थी जैसा कि आपने हमें लिफ्ट माँगने वाली लड़की के बारे में बताया था। भैया, हम बच तो जायेंगे न? वह हमें नहीं छोड़ेगी। वह अभी भी हमारा पीछा कर रही होगी। उसने कहा था – हम जंगल से बचकर नहीं निकल पायेंगे।" ज्योति की डरी सहमी आवाज़ उसकी सच्चाई की गवाही दे रही थी।

मैं अब भी कार को तेजी से चला रहा था। कार की स्पीड इतनी थी जैसे बस इस जंगल से बाहर जाने के बाद ही रुकेगी। मैं उन सब से बड़ा था। उन सब की जिम्मेदारी भी मेरे ऊपर थी। उन सबको इस जंगल में लाने वाला भी मैं ही था। मुझे उन सब को बचाना था, चाहे इसके लिए मुझे अपनी ही जान क्यों न देनी पड़े। मुझे अपनी जिम्मेदारी को निभाना था। दादी कहा करती थी – डर को जितना महसूस करो वह हमें उतना ज्यादा डराता है। अब मुझे हिम्मत से काम लेना था। मुझे उन सबको उस डर से बाहर निकालना था।

दादा जी कहा करते थे उन्होंने कभी किसी भूत को नहीं देखा, लेकिन उनका अस्तित्व कहीं न कहीं होगा जरूर। शायद वह इसलिए उन पर विश्वास नहीं करना चाहते थे क्योंकि उन्होंने भूत-पिशाचों को कभी साक्षात देखा नहीं था। इसीलिए दादाजी पूरी जिंदगी इन सबके अस्तित्व का भी खंडन करते रहे।

मैंने गहरी साँस ली और स्टेयरिंग को अपने दोनों हाथों से कसकर जकड़ लिया। कार की स्पीड नॉर्मल से कहीं ज्यादा थी।

“सब लोग अपनी जगह पर अच्छे से बैठ जाओ। किसी को कुछ भी नहीं होगा। जंगल हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। अब हमें हिम्मत से काम लेना होगा। मैं तुम लोगों को कुछ नहीं होने दूँगा। हम सब सही सलामत जंगल से बाहर निकलेंगे। उसके बाद वापस आकर मैं डॉली को ढूँढ़ सूंगा।” कहते हुए मैंने कार की स्पीड और बढ़ा दी।

कार की हेडलाइट से मुझे अब भी वह पतली सी सुनसान सड़क और दोनों तरफ फैले हुए जंगल के अलावा कुछ भी नजर नहीं आ रहा था।

“राज, मेरे भाई! अब हमारा यहाँ से बचकर निकलना बहुत मुश्किल है। वह हमें यहाँ से निकलने नहीं देगी।” जय ने चिल्लाकर कहा।

“जय भैया, ठीक कह रहे हैं राज भैया! वह हम लोगों को यहाँ से निकलने नहीं देगी।” ज्योति ने जय की बात का फिर से समर्थन किया।

“तुम दोनों हिम्मत से काम लो। मेरे रहते तुम में से किसी को भी कुछ नहीं होगा।”

“राज, तुम काफी देर से गाड़ी चला रहे हो! तुम जानते हो न। जबकि इस जंगल से कम से कम आधे घंटे में हमें बाहर निकल जाना चाहिए था। तुम्हें याद होगा, हम वहाँ से कितने बजे निकले थे। लगभग 10:30 बजे के आस-पास हम वहाँ से निकले थे। मुझे उम्मीद है, तुम सभी को याद होगा।” जय की आवाज़ में एक अजीब सा ठहराव था।

उसकी बात सुनने के बाद रोनित ने पीछे मुड़कर जय के चेहरे को घूरकर देखा– “जय, तुम आखिर कहना क्या चाहते हो?”

“मेरी बात का यकीन नहीं है तो तुम सब एक बार कार की डैशबोर्ड में देखो कि वक्त क्या हुआ है? शायद तुम्हें हमारी बातों पर यकीन हो जाए।” जय ने इतना कहा ही था कि हम सबकी नजर कार की डैशबोर्ड पर पड़ी। उसमें छोटे-छोटे लाल अक्षरों में टाइम दिखाई दे रहा था।

“11:59 मिनट!”

इतना कहते ही अचानक से जैसे रोनित की साँस थम सी गई हो।

“आई कांट बिलीव दिस! यह हो क्या रहा है? ये ‘समय’ तो मैंने कुछ समय पहले भी देखा था लेकिन अब उस बात को भी काफी देर हो चुका है। ये हो क्या रहा है यार? ऐसा लग रहा है कि हमें जंगल में आए हुए दो-तीन घंटा हो गया हो। लेकिन यह समय देखकर लगता है, जरूर कुछ गड़बड़ है।" रोनित सच ही कह रहा था।

"लेकिन यह घड़ी खराब भी तो हो सकती है न राज? तुम अपनी घड़ी में टाइम देखकर बताओ, आखिर तुम्हारी घड़ी में कितना टाइम हो रहा है?"

अगले पल मैंने अपनी नजर कलाई घड़ी पर मारी तो जैसे मेरे दिमाग की नसें फटने लगीं।

"ओह माय गॉड! यह नहीं हो सकता।"

रोनित ने मेरा हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींचा और मेरी कलाई घड़ी पर नजर मारी। अगले ही पल जैसे उसका शरीर किसी मूर्ति की तरह अपनी जगह पर जम गया।

“यह सब हो क्या रहा है। मेरी घड़ी में भी 11:59 हो रहे हैं। लेकिन इस बात की गारंटी है कि हमें इस जंगल में आए हुए लगभग 2 से 3 घंटे हो चुके हैं। इस जंगल से हमें ज्यादा से ज्यादा एक घंटे में बाहर निकल जाना चाहिए था। लेकिन यह सड़क और यह जंगल तो जैसे खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही।”

शायद यह जंगल और यह अमावस की रात अपना रौद्र रूप हम पर बरसा रहे थे। सड़क के दोनों तरफ के जंगल अब मुझे किसी शैतान की तरह नजर आ रहे थे। न जाने क्यों अब की बार मैं उन जंगलों के बीच किसी के होने का आभास करने लगा था।

रोनित ने अचानक कार में लगी डैशबोर्ड की घड़ी को हिलाना शुरू कर दिया। मेरा ध्यान रोनित की तरफ आकर्षित हुआ, जो पागलों की तरह घड़ी के डैशबोर्ड को डैमेज करने में लगा हुआ था।

लेकिन कहते हैं न नजर हटी और दुर्घटना घटी। ठीक अगले ही कुछ और भी बुरा हुआ। अब तक सुनसान सड़क पर तेजी से भागती हमारी कार को जैसे तेज झटका लगा और कुछ सोच-समझ पाने से पहले ही मैंने जोर से ब्रेक लगाया। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। इससे पहले कि मैं कार को संभाल पाता, हमारी कार तेजी से जाकर एक पेड़ से टकराई। ऐसा लगा जैसे अचानक से कोई हमारी कार के सामने आकर टकरा गया हो।

फिलहाल हमारी कार सड़क किनारे बने एक बड़े से पेड़ से बुरी तरह टकरा चुकी थी। कार अब बंद हो चुकी थी। कार में बैठे हम चारों को बहुत जोर का झटका लगा था। हम सब अब और भी ज्यादा घबरा चुके थे। मैंने कार का दरवाजा खोलने की कोशिश की।

“आह! गाइस तुम लोग ठीक तो होना न? पता नहीं एकदम से ऐसा लगा कि कार के सामने कोई आया और कोई टकरा गया हो। ज्योति, रोनित, जय, जल्दी से सब लोग कार से बाहर आओ।” मैंने कार का दरवाजा ओपन करने की नाकाम कोशिश की और चिल्लाया।

जय ने कार का दरवाजा खोलना चाहा, जो शायद एक्सीडेंट की वजह से मुड़ चुका था और खुल नहीं पा रहा था। रोनित ने भी कराहते हुए अपने आप को कार से बाहर निकालने की कोशिश की।

“राज, कोई भी कार का दरवाजा नहीं खोलेगा!” जय ने कहा, “कार का दरवाजा खोलना इसका मतलब मौत! क्योंकि वह अब भी हमारा पीछा कर रहे हैं।”

"अपनी बकवास बंद करो जय! हमें कुछ नहीं होगा।” मैंने पीछे मुड़ कर जय का हाथ पकड़ते हुए कहा, “देखो जय, हमें गाड़ी से बाहर निकलना होगा। हमें गाड़ी फिर से स्टार्ट करनी होगी। तुम ज्योति और रोनित को लेकर कार से बाहर आओ। तब तक मैं चेक करता हूँ। सड़क पर कोई तो था जो कार से टकराया था।”

थोड़ा स्ट्रगल करने के बाद मेरा दरवाजा खुल चुका था। रोनित भी अपने साइड का डोर ओपन कर चुका था।

जय, ज्योति और रोनित कार से बाहर निकल चुके थे। हमारी कार सड़क से दो फीट सड़क से नीचे उतरकर एक बड़े से पेड़ से टकराई थी।

"तुम लोग ठीक तो हो न? कार बहुत जोर से इस पेड़ से टकराई है। लेकिन कोई था जो अचानक से कार के बीच में आ गया। मैं उसे देख नहीं पाया।"

"टकराया था? लेकिन कौन राज?" जय ने सिर पकड़ते हुए पूछा।

"आई डोंट नो! कोई तो था वहाँ।"

इतना कहकर मैं भागता हुआ सड़क पर पहुँचा। उसके बाद मैंने जो कुछ भी देखा उसे मैं उसे शब्दों में बयान नहीं कर सकता।

"जय, रोनित!" मैं जोर से चिल्लाया।

मेरे पीछे जय और रोनित भी दौड़ते हुए आए। शायद इस वीरान जगह पर मेरी इतनी तेज आवाज़ सुनकर वे और घबरा चुके थे।

"राज, क्या हुआ? तुम चिल्ला क्यों रहे हो?" रोनित ने वहाँ आते ही पूछा।

"जय, यह देखो!" मैंने जय के कंधे पर हाथ रखकर उसे सड़क पर कुछ दिखाना चाहा।

"ओह्ह गॉड!"
 
वहाँ पर किसी की लाश पड़ी हुई थी जो लगभग आधी थी। यानि उसके कमर से नीचे का कोई भी भाग वहाँ पर नहीं था।

"डॉली...! डॉली यहाँ कैसे आई। वह तो पीछे छूट गई थी। यह यहाँ पर कैसे?" रोनित भागकर लाश के पास पहुँचा।

वह डॉली की लाश थी। आधी लाश। कमर के नीचे का हिस्सा गायब था।

"ये नहीं हो सकता। डॉली...!" रोनित की रोने के आवाज़ जंगल मे गूँजने लगी।

"नहीं, ये कोई और है! जय बता रहा था कि उसने और ज्योति ने डॉली को जंगल में देखा था। फिर यह सब!"

वह वाकई में डॉली ही थी। उसे देखकर हम पागल होने लगे थे। डॉली की लाश को इस तरह देखकर मैं किसी पागल भेड़िए की तरह चिल्लाने लगा। रोनित ने मेरे इमोशन को बढ़ा दिया था। अगले ही पल मैं सड़क के बीचों-बीच डॉली की लाश के पास बैठकर, उसे छूकर जोर-जोर से रोने लगा। उस वीरान सड़क और उस घने जंगल में मेरी आवाज़ जोर-जोर से गूँजने लगी।

जय अब भी सड़क पर ही खड़ा था जबकि ज्योति कार के पास थी।

तभी रोनित ने एक और चौंकाने वाली बात कही – "राज, वह देखो! वह तुम्हारी कार, जो डॉली चला रही थी।" ऐसा कहकर रोनित ने उंगली से सड़क की तरफ इशारा किया। वह वाकई में मेरी कार थी।

"यह तो राज की कार है। पर यह यहाँ कैसे आई? इसका मतलब डॉली हमसे आगे निकल चुकी थी। लेकिन हमने जिसे जंगल में देखा था, वह कौन थी? और अभी तो वह कार वहाँ पर नहीं थी। यह सब क्या हो क्या रहा है, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है।" जय ने कहा और वह दौड़ता हुआ कार तक पहुँचा, “यहाँ तो कोई भी नहीं है।”

अगले ही पल वह वापस हमारे पास लौट आया। ज्योति जो अब तक कार के पास ही खड़ी थी, दौड़ते हुए हमारे पास आ गयी।

"डॉली दीदी? यह तो डॉली दीदी हैं। नहीं, यह क्या हो गया?" ज्योति ने रोते हुए कहा।

वह भी मेरे साथ सड़क पर बैठकर उस बेजान आधे शरीर को अपने हाथों से छूकर देखने लगी।

हमारे साथ जो कुछ भी हो रहा था वह किसी चक्रव्यूह की तरह लग रहा था। जिससे हम निकलने की जितनी भी कोशिश कर रहे थे, उसके अंदर उतना ही धँसते जा रहे थे। आसमान अब और भी काला नजर आ रहा था। आस-पास के जंगल अब हमें शैतान नजर आ रहे थे।

"यानि डॉली हमारी कार से टकराई थी।" रोनित ने रोते हुए कहा।

मेरे पास रोनित के सवाल का जवाब नहीं था। क्योंकि मुझे डॉली सड़क पर नहीं दिखाई दी थी। भला मैं किसी पर गाड़ी कैसे चला सकता था और वह भी अपनी डॉली पर? मैं नहीं जानता इस जंगल ने हम पर क्या जादू कर दिया था। यह जंगल हम पर हावी हो रहा था। यह सच नहीं था, यह भ्रम था।

"यह सब क्या हो रहा है, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है! जब मैंने उसे जंगल में देखा था तो वह हमारे कार के नीचे कैसे आ सकती है? यह अमावस की रात और उन भूत-पिशाचों का साया है, जो हमें इन सब चीजों में फँसा रहा है। यह सच नहीं है।" जय ने घबराई हुई आवाज़ में कहा।

"राज, जय सही कह रहा है! यहाँ पर बहुत कुछ गलत हो रहा है। हमें जल्द से जल्द यहाँ से बाहर निकलना होगा।" रोनित ने मेरी तरफ देखते हुए कहा।

"जय भैया, मैंने आपसे कहा था! डॉली दीदी को हम बचा सकते हैं। डॉली दीदी को हम ऐसे छोड़कर नहीं जा सकते। हमें उन्हें बचाना होगा।"

"ज्योति, पागल मत बनो! तुम देख नहीं रही, डॉली का आधा शरीर गायब है। वह मर चुकी है। यह सब या तो हमारा भ्रम है या किसी तरह का शैतानी चक्र।"

जय जो कुछ भी कह रहा था, मैं उसे इत्तेफाक रखता था क्योंकि डॉली का आधा शरीर अभी मुझे सड़क पर या आस-पास कहीं नजर नहीं आ रहा था। यहाँ तक कि जब कार किसी चीज से टकराई थी तो मुझे पूरा यकीन है, मैंने उसे देखा नहीं था। वहाँ कोई नहीं था, मुझे पूरा यकीन है सड़क बिल्कुल खाली थी।

"हमें यहाँ से निकलने की तरकीब लगानी होगी। लेकिन हमारी कार का बुरी तरह से एक्सीडेंट हो चुका है। मुझे लगता नहीं है कि अब हम कार के साथ यहाँ से निकल पायेंगे।" रोनित ने अपने आप को संभालते हुए कहा।

मेरी आँखों के सामने मेरी डॉली की आधी लाश पड़ी हुई थी। मेरी बहन ज्योति, मेरा भाई जय और दोस्त रोनित सब परेशान थे। मुझे हिम्मत से काम लेना था।

"रोनित, तुम सच कह रहे हो! मुझे अपने आप को संभालना बहुत मुश्किल है। लेकिन हालात यही कहते हैं कि हमें यहाँ से निकलना होगा।" मैंने अपने आँसू पोंछते हुए कहा।

"राज, हमारी कार जिस तरह से उस पेड़ से टकराई है, उसका चालू होना बहुत मुश्किल है; और तुम्हारी कार में चाबी नहीं है। शायद हमें तुम्हारी कार की चाबी ढूँढ़ने होगी। तभी हम यहाँ से निकल पायेंगे।” कहते हुए रोनित और जय अपने आप को संभालते हुए अपनी कार की तरफ भागे।

ज्योति सड़क पर मेरे बगल में बैठी थी। डॉली की लाश से लिपटी ज्योति ने मेरी तरफ देखकर कहा –

"राज भैया, हमें डॉली दीदी को बचाना होगा! देखो न, उनका आधा शरीर कट चुका है! वह जंगल में भी मुझसे मदद की गुहार लगा रही थी। हम उन्हें ऐसे छोड़कर नहीं जा सकते।"

मुझे समझ में नहीं आ रहा था। मेरे सामने जो लाश पड़ी थी, वाकई में वह डॉली थी या वाकई कोई और? इधर जय और ज्योति ने जिस डॉली का जिक्र उस जंगल में किया था, वह डॉली थी या फिर वाकई में डॉली पीछे सड़क पर छूट गई थी। जिसे ढूँढ़ने मैं गया था। लेकिन अगर हम उसे पीछे सड़क पर छोड़ आए थे तो आखिर वह यहाँ कैसे पहुँच सकती थी। वह हमारी कार से कैसे टकरा सकती थी।

"अब तो मेरा दिल बैठा जा रहा है।"

"राज भैया, अब हम क्या करेंगे?"

रोनित, ज्योति की आवाज़ एक साथ मेरे कानों से टकराई। मेरे दिमाग मे कई चीजें एक साथ घूम रही थीं।

"हमें यहाँ से बाहर निकलने का उपाय सोचना होगा। मैं डॉली को तो खो चुका हूँ लेकिन अपने दोस्तों और अपने परिवार को नहीं खोना चाहता। हमें कार की चाबी ढूँढ़नी होगी।"

सड़क पर अब भी अंधेरा पसरा हुआ था। आस-पास का जंगल तो मानो बिल्कुल काला नजर आ रहा था। हमारे कार की हैडलाइट की चमकती हुई हल्की रोशनी सड़क पर रिफ्लेक्ट हो रही थी।

रोनित और जय अभी दूर खड़ी मेरी कार के आस-पास चाबी ढूँढ़ रहे थे। तभी ज्योति ने मुझे इशारा करते हुए कहा – "भैया, वह देखिए! कार की चाबी।"

डॉली की लाश से चार फीट की दूरी पर कार की चाबी जैसा कुछ नजर आ रहा था। जिसे अंधेरे में साफ तरह से देख पाना मुश्किल था। मैं अगले ही पल दौड़कर वहाँ पहुँचा। वाकई में वह मेरी कार की चाबी थी।

कार की चाबी मिल चुकी थी।

"डॉली, हम तुम्हें बहुत याद करेंगे! जंगल में कुछ तो ऐसा है जिसने तुम्हारी जान ली है। अब वह हम सब को भी खत्म कर देना चाहती है। लेकिन हम इससे पहले उसे खत्म कर देंगे। हम यहाँ से बाहर निकल जायेंगे।" कहते हुए मैंने ज्योति का हाथ पकड़कर उसे उठाया और रोने लगा।

मेरी आँखों में डॉली को खोने का गम था।

जाने क्यों मुझे आस-पास शैतानी जंगल के होने का आभास हुआ। मैंने जोर से चिल्लाते हुए जय को बताया कि मुझे चाबी मिल चुकी है।

मैं ज्योति का हाथ पकड़कर अपनी कार की तरफ भागा और सब को कार में बैठने का इशारा किया। मेरे माथे से टपकता पसीना और आँखों में वह खौफनाक मंजर अब भी समाया हुआ था। अमावस की रात और यह भयानक जंगल हम पर हावी होते जा रहे थे।

हम सब ने हिम्मत से काम लिया। डॉली की लाश को वहाँ छोड़ने के अलावा हमारे पास कोई दूसरा ऑप्शन नहीं था।

बिना किसी सवाल-जवाब के सब लोग कार के अंदर बैठ गए। अब मैं तेजी से कार चला रहा था। मेरे बगल में बैठा हुआ जय बार-बार अपने विंडो में से बाहर जंगलों की तरफ झाँक रहा था। मैंने सेंटर मिरर से बैक सीट पर बैठे रोनित और ज्योति को रोते हुए देखा था। वह वक्त हमारे लिए बहुत बुरा था।
 
"राज, ध्यान से चलाओ! मैं जानता हूँ, वहाँ पर हमने जो कुछ देखा वह हमें नहीं देखना चाहिए था। डॉली को खोना बहुत ही दुखद घटना है और हमें यह सूचना पुलिस को देनी होगी। हमें यहाँ से निकलना होगा। हमें अपने आप को और अपने परिवार को बचाना होगा।" रोनित ने कहा।

कार में खामोशी नहीं थी, बल्कि हमारा डर अब हम चारों पर हावी होने लगा था। हमारी कार उस सुनसान सड़क से और दोनों तरफ फैले हुए वह जंगल के बीचो-बीच अब भी तेजी से भाग रही थी।

जंगल में सब कुछ वैसा ही चल रहा था जैसे हमारी कार का सड़क पर तेजी से भागना आस-पास के जंगलों का शैतान की तरह प्रतीत होना, हम चारों का डर हम पर हावी होना और कार के डैश बोर्ड में समय 11: 59 होना। कुछ नहीं बदल रहा था। लगता था जैसे समय रुक सा गया था।

"राज! तुम्हें क्या लगता है, हम इस जंगल से बाहर निकल जायेंगे? तुम अब भी नहीं समझ पा रहे हो। यह जंगल नहीं एक भयानक समय चक्र है। तुम्हें यह लगता है कि डॉली को तुम पीछे छोड़कर आ गए थे। तो वह सामने कैसे आ गई। मुझे पूरा यकीन है डॉली हमारे सामने नहीं आई थी। बल्कि हम इस जंगल में गोल-गोल घूम रहे हैं। हम सब एक समय चक्र में फँस चुके हैं।"

"जय, हम सब बाहर निकल जायेंगे! अपनी बकवास बंद करो प्लीज।" मैं अब इस विषय में कुछ नहीं सुनना चाहता था। सड़क पर फिर से धुंध बढ़ने लगी थी। सड़क अब सीधी नहीं बल्कि साँप की तरह लगने लगी थी। मैं स्टेयरिंग पर कंट्रोल करते हुए दायें से बायें और बायें से दायें गाड़ी को भगाए जा रहा था।

"तुम्हें याद है न, जिस संग्राम शर्मा के बारे में हम बात किया करते थे यह वैसी ही तो कोई घटना है। वह अब हमें भी नहीं छोड़ेंगे। क्योंकि वह हमारे पीछे पड़ चुके हैं। पहले उस लड़की का हमसे लिफ्ट माँगना, फिर डॉली का पीछे छोड़ जाना। बाद में ज्योति का अचानक उड़ जंगल में भाग जाना। और तो और डॉली का आधा कटा हुआ शरीर हमें मिलना। फिर यह एक्सीडेंट और डॉली का कार से टकराना। तुम समझ रहे हो न? मैं तुम लोगों से क्या कहना चाहता हूँ।" कहते हुए जय बार-बार विंडो से अपनी बाईं तरफ जाने क्या जंगलों में देखता और फिर मुड़कर हमारी तरफ देखने लगता।

"यह घटनायें कुछ इस तरह से हो रही है कि हम इसे समझ नहीं पा रहे हैं। लेकिन हम अब यहाँ से निकल नहीं सकते। अब हम सब की मौत होगी जैसा कि संग्राम शर्मा और उसके परिवार के साथ हुआ था। वह लड़का जो कार सहित लगभग एक साल पहले यहाँ इसी जंगल से गायब हो गया था? सब कहानियाँ सच थीं। सब कुछ सच है। हम में से कोई भी नहीं बच पाएगा और हम सब मारे जायेंगे।"

"जय, यह तुम क्या अनाप-शनाप बातें कर रहे हो? हमें कुछ नहीं होगा। हम सब बच जायेंगे। हमें कुछ नहीं होगा?" मैं चिल्लाया।

" चुप हो जाओ जय, प्लीज! हमें कुछ नहीं होगा। राज, तुम बस गाड़ी तेज चलाओ।" रोनित लगातार हमारा हौसला बढ़ा रहा था।

हम चारों में से ऐसा कोई भी नहीं था जो इन सारी घटनाओं से डरा हुआ न हो। लेकिन अब हमारे पास था तो सिर्फ एक-दूसरे का साथ और कुछ नहीं।

"वह अब भी हमारा पीछा कर रहें हैं। अब भी हमें उसी चक्कर में फँसा कर वह हमें मारना चाहते हैं।" जय ने फिर एक बार कहा और वह शीशे से बाहर की तरफ देखने लगा।

"वह अभी हमारा पीछा कर रही है। वह हम में से किसी को भी यहाँ से निकलने नहीं देगी। मैंने तुम लोगों से कहा था। तुम लोग मेरी बात सुन रहे हो ना? वह अभी भी हमारा पीछा कर रही है।" अचानक जैसे जय बोलता-बोलता चुप हो गया।

"जय, तुम अपनी बकवास बंद करो।" रोनित, जय पर चिल्लाया।

"मैं झूठ नहीं कह रहा हूँ, ठीक है। तुम्हें मुझ पर विश्वास नहीं है न? थोड़ी देर के बाद तुम्हें सब कुछ साफ-साफ पता चल जाएगा कि हमें कौन और क्यों मारना चाहते हैं।"

तभी ज्योति की जोर से चिल्लाने की आवाज़ आई।

"अ...आ...! वह... वह है।"

ज्योति को इस तरह चलाते हुए सुनकर मैं बुरी तरह से डर गया। मैं अब भी स्टेयरिंग संभाले हुए था। मैंने सेंटर मिरर से ज्योति की तरफ देखते हुए कहा –

"क्या हुआ ज्योति? तुम चिल्ला क्यों रही हो?" मुझे जय पर भी बहुत गुस्सा आ रहा था, "जय, तुम अपनी बकवास बंद करो। तुम्हें समझ में नहीं आ रहा, तुम्हारी छोटी बहन कितनी डरी हुई है! हमें अभी हिम्मत से काम लेना होगा।" इससे पहले कि मैं आगे कुछ कहता, ज्योति की घबराई हुई आवाज सुनाई पड़ी।

"राज भैया, जय भैया सही कह रहे थे! वह लड़की... वह लड़की…।" कहकर अचानक से ज्योति की जैसे साँस उखड़ने लगी।

मैंने गुस्से में अपने विंडो मिरर से बाहर देखने की कोशिश की। पर मुझे आस-पास काले जंगल के सिवा कुछ भी नजर नहीं आया।

"ज्योति, क्या हुआ? उधर कोई नहीं है। तुम बाहर जंगलों को देखना बंद करो।" मैंने इतना कहा ही था कि तभी ज्योति की फिर से डरी-सहमी हुई सी आवाज़ आई –

"भैया, कार की दाहिनी तरह। वह देखिए, वह... वह आ गई। वह सच में हमारा पीछा कर रही है।"

हम सब ने ज्योति की बात सुनते ही कार की दाहिने तरफ के शीशे से देखने लगे। अचानक हम सबके होश उड़ गए। हमने देखा यह वही लड़की थी, जो जय से कार में लिफ्ट माँग रही थी। शायद इस रात की यह सबसे भयानक घटना थी जो हमारे आँखों के सामने घट रही थी।

इस समय वह लड़की हमारी कार की स्पीड के बराबरी में चल रही थी । हमने ध्यान दिया तो पाया कि वाकई में उस लड़की के धड़ के नीचे का भाग नहीं था। वह जैसे हवा में तेजी से हमारे कार के साथ चल रही थी। मैंने चौंकते हुए कार की स्पीड देखी तो पाया हमारी कार की स्पीड इस समय लगभग 90 से 100 के आस-पास थी। लड़की इतनी स्पीड से हमारी कार के साथ चल रही थी कि वह जैसे हवा में तैर रही हो। आखिर यह कैसे मुमकिन था?

लेकिन उस सच को अब ठुकराना हमारे लिए मुश्किल था।

तभी हमें लड़की की हँसने की आवाज़ जोर-जोर से सुनाई देने लगी। हमने उस लड़की की तरफ देखा तो वह हमारी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी। कार के अंदर बैठे हुए हम चारों अब अपने होश खोने लगे थे। सड़क पर बिना धड़ वाली लड़की को हमारे कार के बराबरी में उड़ते हुए देखकर हम सब शॉक में थे। इस समय हम अपने सिर पर लटकती हुई साक्षात मौत को देख रहे थे।

मेरा ध्यान स्टेयरिंग से हटकर अब बार-बार उस लड़की की तरफ जाने लगा था। सामने सड़क पर धुंध तेजी से बढ़ने लगी थी यह कुछ वैसे ही धुंध थी जो जंगल के शुरुआत में दिखाई पड़ रही थी।

तभी अगले ही पल जय एकदम के चिल्लाया और उसने मेरे हाथ को पकड़कर स्टीयरिंग को घुमाना चाहा।

"सम्भल कर! देखो आगे कोई है।"

इससे पहले कि कोई कुछ कर पाता एक ज़ोरदार टक्कर हुई और हमारी कार बुरी तरह से पेड़ से जा टकराई। ऐसा लगा कोई हमारी कार से टकराया। हम लोग कार से जैसे-तैसे करके जल्दी से बाहर निकले, तो देखा कार का बोनट बुरी तरह डैमेज हो चुका था। लेकिन कार की हेडलाइट जल रही थी। हमारी कार अभी भी चालू थी।
 
हमने महसूस किया कि इस बार फिर से कोई हमारी कार से टकराया था। लेकिन इस बार एक दिल दहला देने वाला किस्सा शायद हमारा इंतजार कर रहा था।

हमारी कार सड़क से नीचे उतर चुकी थी। हम लोग भाग कर सड़क की तरफ गए। जहाँ पर कोई अभी सड़क पर छटपटा रहा था। उसके बाद हमने सड़क पर जो कुछ भी देखा उस पर यकीन कर पाना लगभग नामुमकिन था। वह डॉली थी। उसका आधा शरीर शायद हमारी गाड़ी से कुचला जा चुका था। वह बुरी तरह से तड़प रही थी।

तभी हमारे पीछे रोनित और ज्योति भी उस मंजर को साक्षात देखने के लिए पहुँच चुके थे।

"डॉली दीदी! अरे, यह तो डॉली दीदी हैं। डॉली दीदी को क्या हुआ?"

मेरी रीढ़ की हड्डियों में इस तरह से सिरहन होने लगी थी जैसे कोई मेरी रीढ़ की हड्डियों पर किले चुभों हो रहा हो।

कुछ सेकंड बाद ही डॉली के बेजान शरीर ने हिलना-डुलना बन्द कर दिया। उसके कमर का हिस्सा सड़क से थोड़ी दूर पर पड़ा हुआ था। हमारे पाँव बर्फ की तरह जम चुके थे। एक पल के लिए हमें ऐसा महसूस होने लगा जैसे कोई हमारे सिर पर कील ठोक रहा हो।

ज्योति, डॉली की लाश को देखकर चीख-चीख कर रोने लगी।

इससे पहले कि हम में से कोई कुछ समझ पाता, एक काला साया झाड़ियों से निकलते हुए सामने आया और डॉली के आधे शरीर को घसीटकर उन झाड़ियों से जंगल की तरफ ले गया।

उसके अगले ही पल कोई कुछ समझ पाता कि ज्योति उन झाड़ियों के पीछे दौड़ पड़ी।

"नहीं, डॉली दीदी को छोड़ दो! उन्हें कुछ नहीं होगा। हम उन्हें बचा लेंगे।" चिल्लाती हुई ज्योति झाड़ियों में गायब हो गई। देखते ही देखते हमारी आँखों के सामने एक घटना और घट चुकी थी। जो लगभग जानी पहचानी सी लग रही थी।

ज्योति भागकर उस परछाई के पीछे उन झाड़ियों में गायब हो चुकी थी।

"ज्योति, रुक जाओ! उधर मत जाओ।" कहते हुए जय भागकर कार के पास पहुँचा।

जय ने कार की डिग्गी से एक टॉर्च निकाला और फिर ज्योति के पीछे-पीछे उन झाड़ियों में गायब हो गया। हम इस घटना को सिर्फ घटते हुए देख पा रहे थे। जाने ऐसा क्यों लग रहा था जैसे इस घटना को हम पहले भी इसी तरह देख चुके हैं। बस कुछ चीजें थोड़ी अलग घट रही थीं।

यह समय का वह चक्र था जो उस धुंध और बदलते जंगल के कारण घटता जा रहा था। शायद हम उस समय चक्र में बुरी तरह से फँस चुके थे। एक चीज जो मेरे दिमाग में घूम रही थी, वह यह थी कि यह सड़क हमेशा से सीधे ही थी।

लेकिन जिस सड़क से हम आए थे, वह साँप की तरह गोल-मोल घूम रही थी। इस मौसम में इस तरह की धुंध सड़कों पर जाना कोई कम हिम्मत की बात नहीं थी। शायद यह जंगल का वह हिस्सा नहीं था जिसे हम उस रात पार करना चाहते थे।

रोनित अब भी मेरे बगल में मूर्ति की तरह खड़ा था। सड़क के किनारे पर उगी वह झाड़ियाँ अब खेल रही थी जिसमें ज्योति और जय भाग कर गए थे।

"अब कोई नहीं बचेगा। जो भी सड़क से गुजरेगा वह सब मरेंगे।"

अचानक से एक भयानक सी आवाज़ मेरे कानों में गूँजी। एक ऐसी भयानक आवाज़ जो मेरे कान के पर्दे फाड़ने के लिए काफी थी। मैंने मुड़कर उस भयानक आवाज़ की तरफ देखा। वह आवाज़ और किसी की नहीं बल्कि रोनित की थी। लेकिन जहाँ तक मैं जानता था, रोनित की आवाज़ ऐसी नहीं हो सकती थी। मैंने उसकी तरफ मुड़कर देखा तो पाया उसका चेहरा पूरी तरह से सफेद हो चुका था। उनके मुँह से लार टपक रही थी और उनकी आँखें अंगारों की तरह दहकने लगी थी।

"सब मरोगे। यहाँ से कोई बच कर नहीं जा पाएगा।"

मैं अपनी जगह से जैसे अब हिल-डुल नहीं पा रहा था। जंगल में रोशनी के नाम पर 10 फ़ीट सड़क से दूर खड़ी हमारी कार के हेडलाइट का रिफ्लेक्शन था। जो शायद उस मंज़र को देखने के लिए काफी था।

‘ आखिर उस नई नवेली दुल्हन की क्या गलती थी? बस यही न कि वह अपनी ही शादी में पहुँच न सकी। उसकी बस यही गलती थी न कि वह अपने भाई के साथ बाइक पर जब शादी के मंडप के लिए पहुँच ही रही थी तो किसी ट्रक वाले ने उसे कुचल दिया और उसे तड़पने के लिए यहीं इसी सड़क पर छोड़ दिया।

‘ वह देखो उसका भाई! अब भी अपनी बहन को बचाने के लिए हेल्प माँग रहा है। उसका भाई पागल हो गया है। जानते हो आज फिर आधे धड़ वाली दुल्हन, जंगल में घूम रही है। वह हम सब को मार देगी। वह किसी को नहीं छोड़ेगी। किसी को भी नहीं!’
 
एक पल के लिए मेरे दिल की धड़कन जैसे रुक सी गई और तभी मैंने एक और सरसराहट भरी आवाज़ सुनी। मैंने आवाज़ की दिशा में देखा जो कि उसी तरफ से आ रही थी जिस तरफ ज्योति और जय गए थे। मैंने देखा कि आधे धड़ वाली वह लड़की जो दुल्हन के लिबास में थी, हमें झाड़ियों से देखती हुई नजर आई।

यह तो वही लड़की थी जो जय से लिफ्ट माँग रही थी और जिसे अभी-अभी हमने हवा में तैर कर हमारा पीछा करते हुए देखा था। उसका आधा शरीर उन झाड़ियों से काली परछाईं की तरह निकलता हुआ मेरी तरफ बढ़ रहा था। उसका भयानक चेहरा साफ होता जा रहा था। उसकी आँखें बड़ी-बड़ी थी। उसके माथे से खून की बूंदे टपक रही थी और इधर रोनित का शरीर धीरे-धीरे एक नया आकार लेने लगा था। ऐसा लगने लगा जैसे कोई और रोनित के शरीर पर हावी हो रहा हो। कुछ पल में बहुत कुछ घट चुका था।

मेरे सीने में जाने क्यों अब तकलीफ़ सी महसूस होने लगी थी। हवाओं की सरसराहट से पेड़ों पर पत्तियों के फड़फड़ाने की अजीब सी आवाज़े मेरे कानों को तकलीफ़ पहुँचाने लगी थी। आसमान में बादल और काले होने लगे थे। जंगल अब भयानक आवाज़ों से गूँज रहा था। मेरी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा था। मेरे हाथ-पाँव बर्फ की तरह सड़क पर जम चुके थे।

वह जंगल, वह दोस्त, वह परिवार सब एक पल के लिए आँखों के सामने घूमने लगा था।

कार के डेश बोर्ड में टाइम हो रहा था 11:59 मिनट।

*** *** *** *** *** ***

ठीक 72 घंटे पहले

“दीदी, मुझे बहुत डर लग रहा है! आपने फैसला कर लिया है न कि जो कुछ भी आप कर रहे हैं, वह सही कर रहे हो?”

“देख बंटी, तुझे इसमें डरने की कोई जरूरत नहीं है। फैसला मेरा है और तू सिर्फ मेरी मदद कर रहा है। इसमें तुझे कोई भी प्रॉब्लम नहीं आएगी।”

“नहीं दीदी, वह बात नहीं है मैं आपकी हेल्प करना चाहता हूँ।”

“मैं जानती हूँ मेरे भाई।”

“दीदी, सच तो ये है कि बस मुझे मम्मी-पापा का डर लग रहा है। पता नहीं आपके जाने के बाद वह लोग मुझे कितना डांटेंगे। शायद वह आपको वापस घर भी न आने दें।”

“मैं जानती हूँ। लेकिन यह मेरी जिंदगी का सवाल है। तू मेरा भाई है। तू तो मुझे अच्छी तरह से समझता है। देख, मेरे जाने के बाद तू अपना ख्याल रखना। मैं उम्मीद करती हूँ कि मम्मी-पापा मुझे जल्दी अपना लेंगे। तू उन्हें समझा देना। अगर उन्हें ना समझा सका तो चिंता मत करना। मैं उन्हें बाद में आकर मना लूँगी। फिर सब कुछ ठीक हो जाएगा।”

“दीदी, बस मैं यही दुआ करता हूँ भगवान से कि आप जहाँ भी रहो खुश रहो। वैसे शादी से भागने में एडवेंचर तो है ही दीदी। लेकिन जब पापा-मम्मी को पता लगेगा कि आपको शादी के मंडप से भगाने वाला मैं था तो पता नहीं मेरा क्या होगा।”

“तुझे कुछ नहीं होगा। तू किसी को कुछ नहीं बतायेगा। मुझे मंदिर छोड़ने के बाद तू चुपचाप घर लौट जाना। मैं आगे संभाल लूँगी। तू मेरी फिक्र मत कर बंटी। तू अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना, मैं जल्दी वापस आ जाऊँगी।”

"ठीक है दीदी।”

“अरे संभल के, सामने से गाड़ी आ रही है।”

लेकिन कहते हैं घटनायें बताकर नहीं घटती। कई बार वह भयानक घटनायें कई लोगों की जिंदगियाँ बदल देती हैं। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, अगले ही पल एक ज़ोरदार आवाज़ हुई।

सड़क पर एक भयानक दुर्घटना घट चुकी थी। आठ पहियों वाली एक भारी भरकम ट्रक बाइक को कुचलकर निकल चुकी थी। ट्रक चालक ने काफी ज़ोर से ब्रेक लगाया, जिसकी आवाज़ किसी हाथी के चिंघाड़ने जैसी थी। अचानक ब्रेक लगाने से ट्रक का बैलेंस बिगड़ा और ट्रक उस संकरी सड़क से नीचे उतरने लगी। लेकिन चालक ने फुर्ती दिखाते हुए ट्रक को संभाला और आखिरकार रोक लिया।

चालक ट्रक रोककर नीचे उतरा और अभी-अभी हुए उस भयावह दुर्घटना को पीछे मुड़कर देखने लगा। उसके माथे पर उमड़ता हुआ पसीना साफ गवाही दे रहा था कि वहाँ कुछ बुरा घट चुका है। एक बहुत बुरी घटना।

उस घने जंगल के बीच से गुज़रती उस वीरान सड़क पर फ़िलहाल उस ट्रक के अलावा उस भयानक घटना को देखने वाला कोई नहीं था। उसने कुछ पल सोचा और फिर दूर से ही जायजा लेने के बाद अगले ही पल ट्रक स्टार्ट करते हुए रोड पर पड़े उन दो लोगों को छोड़कर आगे बढ़ गया।

सड़क के बीचो-बीच दो लाशें पड़ी थी। जिसमें से एक शादी-शुदा जोड़े में लिपटी हुई एक 22-23 वर्षीय लड़की थी, जिसका शरीर भारी ट्रक के पहिये के नीचे आकर कमर के पास से दो भागों में बँट चुका था। बगल में सड़क की दाहिनीं तरफ एक 17-18 वर्षीय लड़के की लाश पड़ी थी जिसका सिर फट चुका था। उसकी हालत सड़क पर तेज़ी से टकराने के कारण हुई थी। उस अँधेरी रात में उन्हें फिलहाल देखने वाला कोई भी नहीं था। उन दो लाशों से 10 फ़ीट की दुरी पर बाइक पूरी तरह सी पिचकी हुई पड़ी थी। ऐसा लग रहा था जैसे उस ट्रक ने बाइक के साथ-साथ उन दोनों बाइक सवारों को भी अपने भारी पहियों के नीचे कुचल दिया था।

दो जिंदगियाँ मौत के आगोश में समा चुकी थीं। सब कुछ खत्म हो चुका था।

रात के समय उस भयानक जंगल में काफी कम गाड़ियाँ गुज़रा करती थीं। शराब के नशे में धुत्त ट्रक चालक जो चाहकर भी उनकी मदद नहीं कर सकता था, अब वहाँ से नदारद हो चुका था।

*** *** *** *** *** ***
 
3: अंतहीन सफ़र

कुछ साल बाद

अमावस की रात

"अ रे, तुझे बताये इस जंगल के बारे में! कुछ सालों पहले यहाँ पर एक घटना घटी थी जिसमें कहते हैं कि संग्राम शर्मा और उसका पूरा परिवार गायब हो गया था और उसके ठीक एक साल बाद, एक घटना और घटी जिसमें पाँच लोग... क्या नाम था उनका? हाँ, राज शर्मा और उसका पूरा परिवार भी गायब हो गया। तुम्हें पता हैं उस पर किसी पागल राइटर ने एक किताब लिखी थी। सुना है इन दिनों किताब काफी चर्चा में है।”

“यार, इस तरह की घटनायें सिर्फ अफ़वाह होती हैं और मुझे लगता है कि लिखने वाला घटनाओं को खुदी हवा देता है।”

“वैसे तो मैंने सुना है कि ऐसे हाइवे और सड़कों पर दुनिया में कई घटनाएँ होती हैं जिसमें कोई आत्मा किसी से लिफ्ट माँगती है या फिर किसी की गाड़ी खराब हो जाती है। फिर वह पूरी रात को जंगल से निकल नहीं पाते।”

“गाइस, गाइस! प्लीज, डराना बंद करो यार! तुम लोग यह कहना चाहते हो कि हमारे साथ भी ऐसा कुछ हो सकता है?”

“सकता नहीं बेबी! मुझे तो लगता है ऐसा ही कुछ जल्दी हमारे साथ भी होगा। सड़क किनारे बने हुए हैं उन जंगलों को देखो। क्या तुम्हें वह शैतान नजर नहीं आते? ऐसा लगता है जैसे वह तुम्हें घूर रहे हो। देखो, जब तक ऐसी घटनाएँ हमारे साथ नहीं होंगी तब तक आखिर इस पर किताब, फिल्में और इस तरह की अफ़वाह कैसे सुनाई जाएगी।”

“अरे, क्यों इस बेचारी को डरा रहे हो यार! उनके साथ में क्या हुआ, आज तक किसी को पता ही नहीं और किताब तो मैंने भी पढ़ा है। उसने अपनी किताब में लिखा है कि यह कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित है। यार, यह तो हमको भी पता है कि वह अपनी किताब को फेमस करने के लिए इस तरह की झूठी अफ़वाह फैलाता है। इतने सालों से यहाँ से आता-जाता हूँ। मुझे तो आज तक ऐसा कुछ नहीं लगा यार। सो डोंट वरी।”

“यह घटना झूठ है या सच। इसमें कितनी सच्चाई है, आई डोंट नो! मैं सिर्फ इतना जानना चाहती हूँ कि जिस राज शर्मा और संग्राम शर्मा वाली घटनाओं का जिक्र तुमने किया, क्या वह इसी जंगल में हुई थी?”

“बेबी, तुम इनकी बातों को अवॉइड करो। यह लोग बस तुम्हें फालतू में डरा रहे हैं। ऐसा कुछ भी नहीं है। आई एम सॉरी, मैंने भी बस ऐसे ही मजाक किया। तुम भी कहाँ उन किताबों और हमारी बातों पर विश्वास करने लगी।”

“हम मज़ाक कर रहे थे यार! अब डरो मत। चलो, साउंड थोड़ा तेज करो वरना आज की रात तूने जो उनको डराया है, यह हमें डराते रहेंगे।”

“चलो यार, अब तुम दोनों डरना बंद करो। यह लो मैंने तेज साउंड में लगाया यह गाना। एंजॉय नाउ और अब तुम दोनों विंडस्क्रीन से बाहर जंगलों में देखना बंद करो।”

“देखो यार, यह जितने भी डीजे और रैपर्स होते हैं न। इनके गाने को सही मायने में सुनने में तभी मजा आता है जब हम कार से किसी लॉन्ग ट्रिप पर जाते हैं। जैसे अभी देखों, आस-पास जंगल है, अंधेरा है और समझ लो भाई लोग जंगल भयानक भी है। अब भैया इससे डर लगे भी तो उसे हटाने के लिए रैपर्स के इन कानफोड़ू गानों को सुनते रहो। यार, थोड़ा साउंड बढ़ा न।” एक शख्स ने कहा जो कार में अपने तीन दोस्तों के साथ उसी जंगल से लौट रहा था।

“ओए, आगे कोई खड़ा नज़र आ रहा है...।”

आगे एक भयानक दृश्य उनका इंतजार कर रहा था। अगले ही पल कार में बैठे दोनों लड़कों की आवाजें खामोशी में बदल गईं और कार की बैक सीट में बैठी दोनों लड़कियों के चेहरे पर डर उभरने लगा।

कार के डेश बोर्ड में टाइम हो रहा था 11:59 मिनट।

समाप्त

कहते हैं उस जंगल में आज भी यह सिलसिला जारी है।
 

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