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वर्षा का बताया हुआ नम्बर उसने अखबार के हाशिये पर लिख लिया और फिर इधर उधर दो चार बातें करने के बाद उसने रिसीवर रख दिया । अब उसे अकल बलदेव की फोन कॉल का बेचैनी सै इतजार था।
फिर. ..कोई डेढ घन्टे बाद फोन की घटी' बजी । रेखा ने झपटकर रिसीवर उठा लिया, बौली--“हैलो।”
"हां, रेखा ! में बलदेव राज़ बोल रहा हूँ। ' '
"आप कहां से फोन कर रहे हैं अंकल?"
"मै एक सेफ जगह से फोन कर रहा हूँ. ।' ' अकल बलदेव उसका आशय समझकय बौलै--"कोठी से तो बात नहीं कर सकता था ना । ' '
”अकल । मुझे आपको एक इम्पोर्टेन्ट जानकारी देनी है। "
"हां !! कहो ।“
' 'क्या पुलिस ने घर के नौकर घनश्याम और उसकी बीबी को अपनी इन्वेस्टीगेशन में रखा हुआ है?"
‘ 'हा इन्सपेक्टर ने उसका ब्यान लिखा था । मेरे सामने की बात है। पुलिस इस किस्म की बारद्रात में सबसे पहले धर के नौकर चाकरो पर ही शक करती है।"
' 'और ऐसा पुलिस बिल्कुल ठीक ही करती है, अकर I " रेखा उत्तेजित-सी बोली I
' 'धनश्याम को मैं बरसों सै जानता हूँ। यह कृष्णकांत की पूजा करता था, बेटी! वह तुम्हारे पापा का वफादार था । " ‘
" मगर ! मेरा दिल कहता है कि यह घनश्याम कातिल से अच्छी तरह वाकिफ है। ' '
' 'यह....यह तुम कैसे कह सकती हौ?"
' ' आप सिर्फ इतना करो कि अपने तोर पर यह मालूम करा ले कि उसकी वेटी का एक्सीडेन्ट हुआ था या नहीं I ' '
"यह तो कोई ऐसा मुश्किल काम नहीं । मै अभी किसी को उसकी बेटी के यहा यह मालूम करने भेज देता हूँ। "
"और जब यह मालूम हो जाए कि उनकी बेटी का कोई एक्सीडेन्ट नहीं हुआ तो फिर घनश्याम को छोडिऐगा नहीं। पुलिस के ज़रिये थाने मे ड्रिलिगरूम की सैर करवा दीजिएगा। फिर वह खुद ही हत्यारे रमाकांत का नाम उगल देगा...।"
' 'पर तुम्हें घनश्याम जैसै वफादार पर यह शक क्यों कर हुआ?“
“इस शक की वजह है मैं आपको बताऊगी आप शायद यकीन नहीं करेंगे I आप बस वह करके देख लीजिए जो मैँने आपसे कहा है। हकीकत सामने आ जाएगी l अकल'... ।"
' 'अच्छी बात है I मैं अपने तोर पर एक्सीडेन्ट क्री तस्वीक करबाये लेता हूँ। तुम बेफिक्र हो जाओ । मैं रात को घर से तुम्हें फोन करूंगा । बॉय.. . I "
'‘ बॉय l" रेखा ने रिसीवर रखकर एक गहरा और ठण्डा सास लिया और सोचा-अव जरूर कुछ न कुछ हो जाएगा।
और वाकई कुछ न कुछ हो गया।
लेकिन इस होनी के लिए रेखा को दस बजे तक इतजार करना पड़ा I
रात दस बजे अंकल बलदेव राज का फोन आया। रेखा गगा मोसी के कमरे में बैठी थी। फोन भी उसी ने उठाया I
' 'हैलो . . .!"वह बोली ।
' 'हां, रेखा । यह मैं हूँ बलदेव राज... . । "
"क्या हुआ अंकल ?" रेखा ने बेताबी सै पूछा--" आपने मालूम करवाया?"
"तुम्हारा शक ठीक निकला रेखा । घनश्याम की बेटी का कोई एक्सीडेंन्ट नहीँ हुआ । उस दिन वह घर से निकली ही नहीं तो एक्सीडेन्ट कहां से होता । " बलदेव राज ने बताया ।
' 'ये लोग अपनी बेटी के पास रहे भी थे ये या वहां सिरे से गए ही नहीं?" रेखा ने पूछा।
' 'नहीं । गए थे और रात को वहीँ रहे थे। "
' 'अब बताएं अंकल! मेरा शक ठीक था ना? " रेखा ने दाद चाही I
' 'तुम्हें बहुत दूर की सूझी रेखा I ' ' बलराज को दाद देनी पडी थी-- ''मै हैरान हूँ। काश ॥यह बात मेरे दिमाग में भी आ जाती ।। "
"मुझे पूरी डिटेल बताए अंकल । ' '
' 'घर में पाठ रखना था I बहुत से लोग आए हुए थै । तुम्हारे चाचा तो कल ही अपनी फैमिली के साथ जा चुके थे। लेकिन आज उनका एक बेटा दीपक पहुचा हुआ था I वह भी अजनबियों क्री तरह बैठा रहा फिर पाठ शुरू हौते ही मुझसे मिले बिना निकल गया। दिन ढलने तक कोठी मेहमानों से खाली हो गई। वर्षा और उसकी मां क्रो भी मैने घर भेज दिया । बस, कोठी में मैं अकेला रह गया था फिर घनश्याम और उसकी बीबी मौजूद थे जो कोठी के काम समेटते फिर रहे थे। मैं बैठक में बैठा उस लड़के का आन्तजार कर रहा था जिसे मेंने खोजबीन के लिए घनश्याम की बेटी के घर भेजा था।''
"आपने लडके को देर से भेजा। " आप तो कह रहे थे कि मैं अभी किसी को भेजे देता हूँ। ' '
”हा, मैने देर से भेजा।" बलदेव राज ने कबूला-"क्रोठी में पाठ रखने की व्यस्तता थी दूसरे जिस लडके. को मैं इस मिशन पर भेजना चाहता था, उसे मैने और भी कई काम--धंधे सौंपे हुए थे । वह खाली होते ही शाहदरा चला गया और अब उसे गये हुए काफी देर हो गई थी और मैं उसी के इन्तजार में बैठा था।"
"खैर, फिर ?"
"वह लडका. करीब आठ बजे वापस आया । उसने बताया कि घनश्याम की बेटी भली-चगी है I उसके हाथ की कोई हड्डी बड्डी नहीं टुटी । ना ही उसके हाथ पर किसी किस्म का बेन्डेज था । घनश्याम की वेटी पुष्पा दस्तक देने पर खुद ही दरवाजे पर आई थी । लडके¸ ने उसका जायजा लेते हुए पूछा-' 'क्या तुम ही पुष्पा हो धनश्याम की बेटी?" ' उसने हां कहा तो लडके ने जैसा कि मेंने उसे समझाकर भेजा था जेब से सौ का नोट निकालकर उसकी तरफ बढाया और. कहा--"यह सौ का नोट तुम्हारे बाप ने भेजा है-कहा है कि इंजेक्शन खरीद कर फोरन लगवा ले , वर्ना हाथ की हड्डी जुडने में देर लगेगी । वैसे यह तो बताएं कि आपके कौन से हाथ की हड्डी टुटी है। इस पर वह घबराकर बोली--' 'भगवान न करे मेरे हाथ की कोई हड्डी टुटे, तुम यह कैसी बातें कर रहे हो । ' ' लडके… ने पूछा ' 'कल तुम्हारा एक्सीडेन्ट नहीं हुआ?" वह सुनकर परेशान हो गई-"हे राम । तुम क्या कह रहे हो। भगवान न करे कि मेरा एक्सीडेन्ट हो मै तो कल घर से ही नहीं निक्ली तुम्हें जरूर कोई गल्तफहमी हुई है । "
' 'ओह फिर? " रेखा की उत्तेजना वढती जा रही थी।
'फिर क्या? लडके_ ने भी हैरत दिखाते हुए पूछा, क्या तुम्हारे बाबा का नाम घनश्याम नहीं है?" तो बोली--"हा, मेरे बाबा का नाम घनश्याम ही हैँ । वह कल ही तो एक रात रहकर यहां से गए है। ' ' तो लडके. ने पूछा--' 'तो क्या तुमने फोन करके उन्हें नहीँ बुलाया था? ' ' उसने जबाब दिया-' 'नहीं मा और बाबा खुद ही आए थे। उन्हें मैरी याद आ रही थी । मुझसे मिलने आए थे। " लडके. की सन्तुष्टी हौ गई थी । वह खुद को हैरान-परेशान दिखाता वहा' से लोट आया था।!
"यानी कि तस्वीक हो गई कि पापा के इस वफादार नौकर ने एक नाटक ही किया था। ' '
"हां। " बलदेव राज ने एक दुख भरी सास' ली--' 'कलियुग है बेटी! !!"
' 'अकल तो क्या आपने पुलिस को इस बाबत बताया ।" रेखा अजाम जानने को बेचैन हो उठी थी ।
"उस लडके ने आकर मुझे यह सब बताया तो मेने सोचा कि घनश्याम से पूछताछ करू सौ मेंने उस लडके. क्रो ही सर्वेन्ट कवार्टर से घनश्याम को बुलाने भेज दिया। लडके, के जाने के बाद मैने सोचा कि घनश्याम को आने में कुछ देर लगेगी, क्यो न पुलिस को फोन करके इंस्पैक्टर सै बात कर लू। फोन लाउन्ज में था.....
....मैने लाउन्ज में आकर थाने फोन किया । आई ओ इस्पेक्टर यादव थाने में मोजूद था I मैंने अपना परिचय देतें हुए कहा कि मेरे हाथ में एक महत्वपूर्ण क्लू है और अगर वह फोरन कोठी पर आ जाए तो कातिल तक पहुचना आसान हो जाएगा । मेरी बात सुनकर उसने कहा- ''ठीक है मैँ पहुच' रहा हूँ। उधर से सन्तुष्ट होकर मैने रिसीवर रखा तो वह लडका, कमरे में दाखिल हुआ। वह वेहद घबराया हुआ था। उसके चेहरे पर ह्रबाईयां उड रही थीं । वह हडबडाया… बोला-सर, वह कवार्टर-- जल्दी चलिए... I " मैं फौरन उस लडके, के साथ हो लिया I लडके की हालत अजीब हो रही थी । उससे चला नहीं जा रहा था । मेंने उसे सीढियों, पर बैठने क्रो कहा और धडकते, दिल के साथ सर्वेन्ट क्वार्टर कीं तरफ बढ गया।"
' 'फिर .. ? ' '
अंकल बलदेव राज का लहजा ऐसा हो रहा था कि रेखा का दिल भी वैअख्तयार हौ धडकने लगा I
' 'क्वार्टर का दरवाजा खुला हुआ था मैं क्वार्टर के अन्दर घुसता चला गया और अन्दर जाकर मेने जो मजर देखा उसे देखकर सोचना मुश्किल न था कि उस लडके_ की हालत सही खस्ता हो रही थी I अन्दर का यह मंजर' ही ऐसा था कि मजबूत से मजबूत दिल का इन्सान भी काप' कर रह जाए । ' ' बलदेव राज यह कहकर खामोश हो गया I शायद वह मजर उनकी निगाहों में धूम गया था ।
”क्या हुआ अंकल? क्या बो दोनों अपना सामान समेटकर फरार हो चुके थे? " रेखा ने पूछा I
' 'नहीं रेखा । कमरे में दोनों की लाशें पडी, थी। किसी तेज धार हथियार से उन दोनों की गर्दनें काट दी गई थी। फ़र्श पर खून का तलाब-सा नजर आ रहा था। ' '
" ओह! ! माई गॉड! " रेखा दिल थामकर रह गई।
"क्या हुआ, रेखा I. खैर तो है?" गंगा' मोसी ने धबराकर पूछा।
"अभी बताती हूँ मौसी!“ रेखा ने रिसीवर पर हाथ रखकर कहा----"फिर बह हाथ हटाते हुए अकल बलदेव से सम्बन्धित हुई। "अंकल यह तो बहुत बुरा हुआ। लेकिन हैरत की बात है कि कातिल आनन-फानन में कत्ल करके निकल गए और आपको पता भी नहीं चल सका । जबकि आप वहीँ कोठी में मौजूद ये। वया वे लोग चीखै-चिल्लाये भी नहीं? उनके क्वार्टर से कोई आवाज नहीं आई।"
"मैं तो बैठक में बैठा लडके का इन्तजार कर रहा था। मुझे तो यह भी नही मालूम कि वे अपने क्वार्टर में कब चले गए। ऐसा लगता है कि कातिल पहले से ही वचार्टर में घुसे बैठे है। यह वारदात एक बन्दे के बस की बात नहीं। वे कम से कम दो थे I घनश्याम और उनकी बीबी जेसे ही ‘क्वार्टर में पहुचे' उन्हें रिवॉल्वर दिखाकर कावू कर लिया गया। दोनों के ही हाथ पीठ पर बंधे थे और मुह' में कपड़ा ठुसा हुआ था । मेरा ख्याल हे कि उन्है यूं वेवस करने के बाद किसी तेज धार हथियार से उनके गले काट दिये गए। यूं उन्हें चीखने का भी मौका नहीं मिला होगा।"
रेखा कुछ देर खामोश रही, फिर उसने पूछा--' 'पुलिस क्या कहती है?"
”पुलिस के पास फिलहाल कुछ भी कहने को नहीं है । आई ओ खान तो इस निष्कर्ष पर पहुचा' लगता है कि तुम्हारे पापा कृष्णकात की हत्या नौकर घनश्याम ने की थी और जिसके इशारे पर उसने हत्या की उसी ने भेद खुल ~ जाने के पहले ही अपने बन्दौ से घनश्याम और उसकी बीबी का कत्ल करबा दिया।"
फिर. ..कोई डेढ घन्टे बाद फोन की घटी' बजी । रेखा ने झपटकर रिसीवर उठा लिया, बौली--“हैलो।”
"हां, रेखा ! में बलदेव राज़ बोल रहा हूँ। ' '
"आप कहां से फोन कर रहे हैं अंकल?"
"मै एक सेफ जगह से फोन कर रहा हूँ. ।' ' अकल बलदेव उसका आशय समझकय बौलै--"कोठी से तो बात नहीं कर सकता था ना । ' '
”अकल । मुझे आपको एक इम्पोर्टेन्ट जानकारी देनी है। "
"हां !! कहो ।“
' 'क्या पुलिस ने घर के नौकर घनश्याम और उसकी बीबी को अपनी इन्वेस्टीगेशन में रखा हुआ है?"
‘ 'हा इन्सपेक्टर ने उसका ब्यान लिखा था । मेरे सामने की बात है। पुलिस इस किस्म की बारद्रात में सबसे पहले धर के नौकर चाकरो पर ही शक करती है।"
' 'और ऐसा पुलिस बिल्कुल ठीक ही करती है, अकर I " रेखा उत्तेजित-सी बोली I
' 'धनश्याम को मैं बरसों सै जानता हूँ। यह कृष्णकांत की पूजा करता था, बेटी! वह तुम्हारे पापा का वफादार था । " ‘
" मगर ! मेरा दिल कहता है कि यह घनश्याम कातिल से अच्छी तरह वाकिफ है। ' '
' 'यह....यह तुम कैसे कह सकती हौ?"
' ' आप सिर्फ इतना करो कि अपने तोर पर यह मालूम करा ले कि उसकी वेटी का एक्सीडेन्ट हुआ था या नहीं I ' '
"यह तो कोई ऐसा मुश्किल काम नहीं । मै अभी किसी को उसकी बेटी के यहा यह मालूम करने भेज देता हूँ। "
"और जब यह मालूम हो जाए कि उनकी बेटी का कोई एक्सीडेन्ट नहीं हुआ तो फिर घनश्याम को छोडिऐगा नहीं। पुलिस के ज़रिये थाने मे ड्रिलिगरूम की सैर करवा दीजिएगा। फिर वह खुद ही हत्यारे रमाकांत का नाम उगल देगा...।"
' 'पर तुम्हें घनश्याम जैसै वफादार पर यह शक क्यों कर हुआ?“
“इस शक की वजह है मैं आपको बताऊगी आप शायद यकीन नहीं करेंगे I आप बस वह करके देख लीजिए जो मैँने आपसे कहा है। हकीकत सामने आ जाएगी l अकल'... ।"
' 'अच्छी बात है I मैं अपने तोर पर एक्सीडेन्ट क्री तस्वीक करबाये लेता हूँ। तुम बेफिक्र हो जाओ । मैं रात को घर से तुम्हें फोन करूंगा । बॉय.. . I "
'‘ बॉय l" रेखा ने रिसीवर रखकर एक गहरा और ठण्डा सास लिया और सोचा-अव जरूर कुछ न कुछ हो जाएगा।
और वाकई कुछ न कुछ हो गया।
लेकिन इस होनी के लिए रेखा को दस बजे तक इतजार करना पड़ा I
रात दस बजे अंकल बलदेव राज का फोन आया। रेखा गगा मोसी के कमरे में बैठी थी। फोन भी उसी ने उठाया I
' 'हैलो . . .!"वह बोली ।
' 'हां, रेखा । यह मैं हूँ बलदेव राज... . । "
"क्या हुआ अंकल ?" रेखा ने बेताबी सै पूछा--" आपने मालूम करवाया?"
"तुम्हारा शक ठीक निकला रेखा । घनश्याम की बेटी का कोई एक्सीडेंन्ट नहीँ हुआ । उस दिन वह घर से निकली ही नहीं तो एक्सीडेन्ट कहां से होता । " बलदेव राज ने बताया ।
' 'ये लोग अपनी बेटी के पास रहे भी थे ये या वहां सिरे से गए ही नहीं?" रेखा ने पूछा।
' 'नहीं । गए थे और रात को वहीँ रहे थे। "
' 'अब बताएं अंकल! मेरा शक ठीक था ना? " रेखा ने दाद चाही I
' 'तुम्हें बहुत दूर की सूझी रेखा I ' ' बलराज को दाद देनी पडी थी-- ''मै हैरान हूँ। काश ॥यह बात मेरे दिमाग में भी आ जाती ।। "
"मुझे पूरी डिटेल बताए अंकल । ' '
' 'घर में पाठ रखना था I बहुत से लोग आए हुए थै । तुम्हारे चाचा तो कल ही अपनी फैमिली के साथ जा चुके थे। लेकिन आज उनका एक बेटा दीपक पहुचा हुआ था I वह भी अजनबियों क्री तरह बैठा रहा फिर पाठ शुरू हौते ही मुझसे मिले बिना निकल गया। दिन ढलने तक कोठी मेहमानों से खाली हो गई। वर्षा और उसकी मां क्रो भी मैने घर भेज दिया । बस, कोठी में मैं अकेला रह गया था फिर घनश्याम और उसकी बीबी मौजूद थे जो कोठी के काम समेटते फिर रहे थे। मैं बैठक में बैठा उस लड़के का आन्तजार कर रहा था जिसे मेंने खोजबीन के लिए घनश्याम की बेटी के घर भेजा था।''
"आपने लडके को देर से भेजा। " आप तो कह रहे थे कि मैं अभी किसी को भेजे देता हूँ। ' '
”हा, मैने देर से भेजा।" बलदेव राज ने कबूला-"क्रोठी में पाठ रखने की व्यस्तता थी दूसरे जिस लडके. को मैं इस मिशन पर भेजना चाहता था, उसे मैने और भी कई काम--धंधे सौंपे हुए थे । वह खाली होते ही शाहदरा चला गया और अब उसे गये हुए काफी देर हो गई थी और मैं उसी के इन्तजार में बैठा था।"
"खैर, फिर ?"
"वह लडका. करीब आठ बजे वापस आया । उसने बताया कि घनश्याम की बेटी भली-चगी है I उसके हाथ की कोई हड्डी बड्डी नहीं टुटी । ना ही उसके हाथ पर किसी किस्म का बेन्डेज था । घनश्याम की वेटी पुष्पा दस्तक देने पर खुद ही दरवाजे पर आई थी । लडके¸ ने उसका जायजा लेते हुए पूछा-' 'क्या तुम ही पुष्पा हो धनश्याम की बेटी?" ' उसने हां कहा तो लडके ने जैसा कि मेंने उसे समझाकर भेजा था जेब से सौ का नोट निकालकर उसकी तरफ बढाया और. कहा--"यह सौ का नोट तुम्हारे बाप ने भेजा है-कहा है कि इंजेक्शन खरीद कर फोरन लगवा ले , वर्ना हाथ की हड्डी जुडने में देर लगेगी । वैसे यह तो बताएं कि आपके कौन से हाथ की हड्डी टुटी है। इस पर वह घबराकर बोली--' 'भगवान न करे मेरे हाथ की कोई हड्डी टुटे, तुम यह कैसी बातें कर रहे हो । ' ' लडके… ने पूछा ' 'कल तुम्हारा एक्सीडेन्ट नहीं हुआ?" वह सुनकर परेशान हो गई-"हे राम । तुम क्या कह रहे हो। भगवान न करे कि मेरा एक्सीडेन्ट हो मै तो कल घर से ही नहीं निक्ली तुम्हें जरूर कोई गल्तफहमी हुई है । "
' 'ओह फिर? " रेखा की उत्तेजना वढती जा रही थी।
'फिर क्या? लडके_ ने भी हैरत दिखाते हुए पूछा, क्या तुम्हारे बाबा का नाम घनश्याम नहीं है?" तो बोली--"हा, मेरे बाबा का नाम घनश्याम ही हैँ । वह कल ही तो एक रात रहकर यहां से गए है। ' ' तो लडके. ने पूछा--' 'तो क्या तुमने फोन करके उन्हें नहीँ बुलाया था? ' ' उसने जबाब दिया-' 'नहीं मा और बाबा खुद ही आए थे। उन्हें मैरी याद आ रही थी । मुझसे मिलने आए थे। " लडके. की सन्तुष्टी हौ गई थी । वह खुद को हैरान-परेशान दिखाता वहा' से लोट आया था।!
"यानी कि तस्वीक हो गई कि पापा के इस वफादार नौकर ने एक नाटक ही किया था। ' '
"हां। " बलदेव राज ने एक दुख भरी सास' ली--' 'कलियुग है बेटी! !!"
' 'अकल तो क्या आपने पुलिस को इस बाबत बताया ।" रेखा अजाम जानने को बेचैन हो उठी थी ।
"उस लडके ने आकर मुझे यह सब बताया तो मेने सोचा कि घनश्याम से पूछताछ करू सौ मेंने उस लडके. क्रो ही सर्वेन्ट कवार्टर से घनश्याम को बुलाने भेज दिया। लडके, के जाने के बाद मैने सोचा कि घनश्याम को आने में कुछ देर लगेगी, क्यो न पुलिस को फोन करके इंस्पैक्टर सै बात कर लू। फोन लाउन्ज में था.....
....मैने लाउन्ज में आकर थाने फोन किया । आई ओ इस्पेक्टर यादव थाने में मोजूद था I मैंने अपना परिचय देतें हुए कहा कि मेरे हाथ में एक महत्वपूर्ण क्लू है और अगर वह फोरन कोठी पर आ जाए तो कातिल तक पहुचना आसान हो जाएगा । मेरी बात सुनकर उसने कहा- ''ठीक है मैँ पहुच' रहा हूँ। उधर से सन्तुष्ट होकर मैने रिसीवर रखा तो वह लडका, कमरे में दाखिल हुआ। वह वेहद घबराया हुआ था। उसके चेहरे पर ह्रबाईयां उड रही थीं । वह हडबडाया… बोला-सर, वह कवार्टर-- जल्दी चलिए... I " मैं फौरन उस लडके, के साथ हो लिया I लडके की हालत अजीब हो रही थी । उससे चला नहीं जा रहा था । मेंने उसे सीढियों, पर बैठने क्रो कहा और धडकते, दिल के साथ सर्वेन्ट क्वार्टर कीं तरफ बढ गया।"
' 'फिर .. ? ' '
अंकल बलदेव राज का लहजा ऐसा हो रहा था कि रेखा का दिल भी वैअख्तयार हौ धडकने लगा I
' 'क्वार्टर का दरवाजा खुला हुआ था मैं क्वार्टर के अन्दर घुसता चला गया और अन्दर जाकर मेने जो मजर देखा उसे देखकर सोचना मुश्किल न था कि उस लडके_ की हालत सही खस्ता हो रही थी I अन्दर का यह मंजर' ही ऐसा था कि मजबूत से मजबूत दिल का इन्सान भी काप' कर रह जाए । ' ' बलदेव राज यह कहकर खामोश हो गया I शायद वह मजर उनकी निगाहों में धूम गया था ।
”क्या हुआ अंकल? क्या बो दोनों अपना सामान समेटकर फरार हो चुके थे? " रेखा ने पूछा I
' 'नहीं रेखा । कमरे में दोनों की लाशें पडी, थी। किसी तेज धार हथियार से उन दोनों की गर्दनें काट दी गई थी। फ़र्श पर खून का तलाब-सा नजर आ रहा था। ' '
" ओह! ! माई गॉड! " रेखा दिल थामकर रह गई।
"क्या हुआ, रेखा I. खैर तो है?" गंगा' मोसी ने धबराकर पूछा।
"अभी बताती हूँ मौसी!“ रेखा ने रिसीवर पर हाथ रखकर कहा----"फिर बह हाथ हटाते हुए अकल बलदेव से सम्बन्धित हुई। "अंकल यह तो बहुत बुरा हुआ। लेकिन हैरत की बात है कि कातिल आनन-फानन में कत्ल करके निकल गए और आपको पता भी नहीं चल सका । जबकि आप वहीँ कोठी में मौजूद ये। वया वे लोग चीखै-चिल्लाये भी नहीं? उनके क्वार्टर से कोई आवाज नहीं आई।"
"मैं तो बैठक में बैठा लडके का इन्तजार कर रहा था। मुझे तो यह भी नही मालूम कि वे अपने क्वार्टर में कब चले गए। ऐसा लगता है कि कातिल पहले से ही वचार्टर में घुसे बैठे है। यह वारदात एक बन्दे के बस की बात नहीं। वे कम से कम दो थे I घनश्याम और उनकी बीबी जेसे ही ‘क्वार्टर में पहुचे' उन्हें रिवॉल्वर दिखाकर कावू कर लिया गया। दोनों के ही हाथ पीठ पर बंधे थे और मुह' में कपड़ा ठुसा हुआ था । मेरा ख्याल हे कि उन्है यूं वेवस करने के बाद किसी तेज धार हथियार से उनके गले काट दिये गए। यूं उन्हें चीखने का भी मौका नहीं मिला होगा।"
रेखा कुछ देर खामोश रही, फिर उसने पूछा--' 'पुलिस क्या कहती है?"
”पुलिस के पास फिलहाल कुछ भी कहने को नहीं है । आई ओ खान तो इस निष्कर्ष पर पहुचा' लगता है कि तुम्हारे पापा कृष्णकात की हत्या नौकर घनश्याम ने की थी और जिसके इशारे पर उसने हत्या की उसी ने भेद खुल ~ जाने के पहले ही अपने बन्दौ से घनश्याम और उसकी बीबी का कत्ल करबा दिया।"